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‘छोटे लड़के बेडरूम में चीजों को बनाते हैं मजेदार’ : 46 साल की ‘OnlyFans’ मॉडल, जिसे मिलते हैं 400 वैलेंटाइन ऑफर

वैलेंटाइन डे को तवज्जो हर कोई अपने हिसाब से देता है। कोई इसे सामान्य दिन मानता है तो कोई खास। लेकिन ओनली फैंस की मॉडल नीता मैरी के लिए ये दिन खास से भी बहुत खास है, क्योंकि इस दिन के नाम पर उन्हें एक दो नहीं बल्कि 400 के करीब तोहफे मिलते हैं। दिलचस्प बात ये है कि मॉडल की उम्र 46 साल है और वे शादीशुदा हैं। बावजूद इसके उनके वैलेंटाइन्स की सूची बस बढ़ ही रही है। कोई उन्हें फूल देता है, कोई कार्ड तो कोई चॉकलेट और कुछ लोग तो उन्हें तोहफे में तमाम डॉलर दे जाते हैं।

वह कहती हैं कि उन्हें अटेंशन पाना और अटेंशन देना दोनों बहुत अच्छा लगता है। उन्हें वैलेंटाइन डे भी इसलिए पसंद है क्योंकि इस दिन उन्हें लगभग 400 लोगों से ज्यादा के संदेश आते हैं जिनमें उन्हें कई चीजों के अलावा 20 डॉलर से लेकर 500 डॉलर तक गिफ्ट किए जाते हैं। वह बताती हैं कि उनके लिए अपनी उम्र से कम उम्र वाले लड़कों से संदेश पाना कोई अलग बात नहीं है। उन्होंने शादी भी एक ऐसे लड़के से की है जो उम्र में उनके 13 साल छोटा है। हालाँकि निजी कारणों से कभी उस शख्स के नाम का खुलासा नहीं किया।

न्यूड तस्वीरें डालकर पैसे कमाने वाले प्लेटफॉर्म ओनली फैंस की मॉडल नीता बताती हैं, “मेरे फैन्स की उम्र 25 साल है। मुझे एक ऐसी बड़ी उम्र की औरत होने में खुशी मिलती है जिसे छोटी उम्र के लड़के पसंद करते हैं। इससे मुझे अपने सेक्सुएलिटी और उस शक्ति का एहसास होता है जो मेरी त्वचा में है। कोई फर्क नहीं पड़ता कि उम्र क्या है।” वह कहती हैं, “नए लड़कों को डेट करना अच्छा लगता है क्योंकि वो कुछ नया करते हुए नहीं घबराते हैं। वह ज्यादा देर तक सेक्स कर पाते हैं और बेडरूम में चीजों को मजेदार बनाए रखते हैं।”

‘पहले हिजाब फिर किताब’: आतंकियों के पनाहगाह महाराष्ट्र के बीड में लगे पोस्टर, 26/11 के मास्टरमाइंड अबू जुंदाल का है गृहनगर

कर्नाटक में उठे हिजाब और बुर्का मामला (Karnataka Hijab Controversy) के बाद महाराष्ट्र (Maharashtra) में ‘पहले हिजाब, फिर किताब’ के बैनर दिखने लगे हैं। कुछ समय पहले भी बीड जिले के बशीरगंज में ये बैनर देखे गए थे। तब वो बैनर AIMIM पार्टी के एक छात्र नेता ने लगवाए थे, जिसे पुलिस ने हटवा दिया था। अब वही बैनर बीड जिले के ही गेवराई कस्बे के मोमिनपुरा में 13 फरवरी (रविवार) को लगे देखे गए। 26/11 के आतंकी हमलों के 6 मुख्य सूत्रधारों में से एक आतंकी अबू जुंदाल उर्फ अबू हमजा यहीं का रहने वाला है। इस आतंकी हमले में 166 लोगों की जान चली गई थी।

मोमिनपुरा में 13 फरवरी को लगे बैनर

गेवराई कस्बा बीड शहर से लगभग 30 किलोमीटर दूर है। इन बैनरों में ‘पहले हिजाब, फिर किताब’ के साथ ‘हिजाब हमारा अधिकार है’ और ‘हर कीमती चीज पर्दे में होती है’ लिखा गया है। बैनर में इसे लगाने वाले संगठनों के नाम लिखे गए हैं। इसमें मोमिनपुरा यूथ क्लब, इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन काउंसिल, हज़रत टीपू सुल्तान यूथ फोरम और मौलाना आज़ाद यूथ फोरम ऑफ़ गेवराई के नाम लिखे गए हैं। फिलहाल इन बैनरों पर पुलिस शिकायत या उन्हें हटाने की कोई खबर अभी तक नहीं है।

कौन है अबू हमज़ा

धुले-सोलापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पड़ने वाला गेवराई तब चर्चा में आया था, जब यहाँ से जबीउद्दीन अंसारी उर्फ़ अबू जुंदाल उर्फ़ अबू हमज़ा गिरफ्तार किया गया था। अबू हमजा का परिवार गेवराई के हाथीखाना इलाके में रहता है। यह जगह मोमिनपुरा के उस स्थान से दूर नहीं है, जहाँ पहले ‘हिज़ाब फिर किताब’ के बैनर लगाए गए हैं। अबू हमज़ा ने गेवराई के उर्दू स्कूल से 10वीं तक पढ़ाई की थी। इसके बड़ा वह बीड जिले में इलेक्ट्रिकल कोर्स करने गया था। अबू हमज़ा ने यह ट्रेनिंग इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (ITI) में की। जबीउद्दीन अंसारी उर्फ़ अबू हमज़ा को आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से परिचित उसके कॉलेज के सीनियर फ़याज़ काग़ज़ी ने करवाया था।

साल 2000 में अबू हमज़ा उर्फ़ अबू जुंदाल कॉलेज की पढ़ाई पूरी करके पाकिस्तान चला गया। वर्ष 2002 में भारत लौटने से पहले वहाँ उसे ट्रेनिंग दी गई। भारत आकर अबू हमजा ने आतंकी समूह SIMI ज्वॉइन कर लिया। कुछ समय बाद अबू जुंदाल ने सऊदी अरब और बांग्लादेश की भी यात्रा की। इन यात्राओं के लिए हमजा ने 10 अलग-अलग नामों का प्रयोग किया था।

अबू जुंदाल उर्फ़ अबू हमज़ा फाइल फोटो

साल 2006 में जुंदाल औरंगाबाद पुलिस और महाराष्ट्र ATS को चकमा देकर भागने में सफल रहा था। यह दबिश 8 मई 2006 को पड़ी थी। तब पुलिस ने मालेगाँव जा रही एक टाटा सूमो और एक इंडिका कार से 30 किलो RDX, 10 AK-47 रायफल और 3200 कारतूस बरामद किया था। उस समय मौके से उसके 3 आतंकी साथी पकड़े गए थे, लेकिन इंडिया कार चला रहा अबू जुंदाल भागने में सफल रहा था। इनकी योजना गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन VHP नेता प्रवीण तोगड़िया की हत्या की थी।

इसके बाद जबीउद्दीन अंसारी उर्फ़ अबू हमज़ा पाकिस्तान भाग गया था। वहाँ पर उसने 26/11 मुंबई हमलों की साजिश रची। उसने ISI और लश्कर ए तैयबा के सदस्यों को हिंदी भाषा की ट्रेनिंग में दी, खासकर अजमल कसाब सहित 10 हमलावरों को मुंबई की बोली सिखाई। अबू जुंदाल ने हमलावरों को सिखाया कि कैसे उन्हें ताज होटल में घुसकर लोगों को बंधक बनाना है। सुरक्षा एजेंसियों की जाँच के दौरान यह भी पता चला कि हमले के दौरान अबू जुंदाल कराची के उस कंट्रोल रूम में मौजूद था, जहाँ से आतंकियों को हमले के निर्देश मिल रहे थे।

संयोग से बीड से कॉन्ग्रेस पार्टी के लोकसभा सांसद जयसिंहराव गायकवाड़ भी हमले के दिन होटल में फँस गए थे, लेकिन NSG कमांडों ने उन्हें और अन्य लोगों को बचा लिया। बाद में अबू जुंदाल 2012 में गिरफ्तार कर लिया गया। उसे आजीवन करवास की सज़ा मिली है। बीड महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के केंद्र में है। स्वतंत्रता से पहले 17 सितम्बर 1948 तक इसे ‘निज़ाम का इलाका’ कहा जाता था। यह कई स्लीपर सेल और अबू जंदल जैसे आतंकवादियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह रहा है।

बुर्के पर विवाद के बीच कर्नाटक में खुलेंगे स्कूल, उडुपी में 19 फरवरी तक धारा 144

कर्नाटक (Karnataka) में बुर्के पर जारी विवाद (Hijab Controversy) के बीच मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई (Basavaraj Bommai) ने कल (सोमवार, 14 फरवरी 2022) से 10वीं तक के स्कूलों को खोलने का आदेश दिया है। अन्य शिक्षण संस्थानों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को खोलने पर फैसला हालातों की समीक्षा के बाद लिया जाएगा। बुर्के पर विवाद को देखते हुए प्रदेश में सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को 16 फरवरी 2022 तक के लिए बंद किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री बोम्मई ने रविवार (13 फरवरी 2022) को कहा, “कक्षा 10 तक के हाई स्कूल कल से खुलेंगे। शांति और सौहर्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए पहले से ही सभी जिलों के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षकों को महत्वपूर्ण स्कूलों में माता-पिता और शिक्षकों को शामिल करते हुए बैठकें करने के लिए निर्देश दिया गया है। मुझे विश्वास है कि स्कूल शांतिपूर्वक तरीके से चलेंगे।” उन्होंने कहा, “मेरा पहला कर्तव्य है कि स्कूल और कॉलेज सामान्य कामकाज पर लौट आएँ। छात्रों को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में अध्ययन करते हुए मार्च-अप्रैल तक होने वाली परीक्षाओं की तैयारी करनी चाहिए।”

वहीं विवाद में विदेशी ताकतों के शामिल होने की खबरों के बारे में सीएम ने कहा कि उनके जाँच अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर इस तरह की खबरों पर संज्ञान लिया है औऱ इसकी जाँच कर रहे हैं। उच्च शिक्षण संस्थानों को फिर से खोलने को लेकर सीएम बोम्मई ने कहा है कि इस मामले को लेकर उन्होंने शिक्षा मंत्री जाँच करने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

विवाद को देखते हुए 14 फरवरी 2022 सुबह 6 बजे से 19 फरवरी 2022 तक के उडुपी जिले में धारा 144 लगी रहेगी। गौरतलब है कि कर्नाटक हाई कोर्ट की फुल बेंच ने भी अगले आदेश तक राज्य के स्कूल-कॉलेजों के क्लास में भगवा स्कार्फ, हिजाब या धार्मिक झंडे जैसी अन्य चीजों पर रोक को बरकरार रखा था।

NIA जाँच की माँग

उडुपी से शुरू हुए हिजाब विवाद में विदेशी साजिश की बात करते हुए भाजपा के विधायक रघुपति भट ने राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) से इसकी जाँच की माँग की है। भट ने कहा है कि पाकिस्तान के अलावा बाकी के मुस्लिम देशों को कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि उडुपी में हिजाब पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है। यह उनका मजहबी अधिकार है, लेकिन स्कूलों में यूनिफॉर्म का पालन होना चाहिए।

भाजपा विधायक भट उडुपी कॉलेज विकास समिति के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने दावा किया है कि पिछले साल अक्टूबर-नवंबर के महीने में ट्विटर पर एक अकाउंट बनाकर कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) ने उकसाने वाले पोस्ट किए थे। वहीं, स्कूल डेवलपमेंट मैनेजमेंट कमेटी उडुपी के वाइस प्रेसिडेंट यशपाल सुवर्णा ने भी दावा किया है कि CFI के उकसाने के बाद यह पूरा बखेड़ा शुरू हुआ है। उनका दावा है कि विवाद शुरू करने वाली छात्राओं को CFI ने किसी प्राइवेट जगह पर ट्रेनिंग दी। इसी ट्रेनिंग के बाद कथित तौर पर छात्राओं ने नियमों के उल्लंघन और अध्यापकों के साथ बदतमीजी शुरू कर दी।

नोट: भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव तक। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, लेकिन ये बुर्का के लिए हो रहा है।

₹15 लाख वाले को 1.68 करोड़… कौन है ‘हिमालय का योगी’ जिसके आदेश पर NSE में हो रहे थे फैसले, चित्रा रामकृष्ण से क्या है रिश्ता

शेयर बाजार (Stock Market) नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शुक्रवार (11 फरवरी) को खुलासा किया कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की पूर्व प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) चित्रा रामकृष्ण ‘हिमालय में रहने वाले एक योगी’ के कहने पर काम करती थीं। उनसे कंपनी की डिविडेंड, पॉलिसी सहित तमाम सूचनाएँ साझा करती थीं। इतना ही नहीं, इस योगी के कहने पर उन्होंने एक व्यक्ति को अपना सलाहकार और ग्रुप ऑपरेटिंग ऑफिसर (GOO) भी नियुक्त किया और उसे मनमाने ढंग से वेतन वृद्धि दी।

चित्रा रामकृष्ण अप्रैल 2013 से दिसंबर 2016 तक NSE की MD एवं CEO थीं। इसी दौरान उन्होंने इससे जुड़ी कई अनियमितताएँ कीं। चित्रा ने न सिर्फ आनंद सुब्रह्मण्यम को लीक से हटकर नियुक्ति दी, बल्कि NSE के फाइनेंशियल एवं बिजनेस प्लान, डिविडेंड से जुड़ी बातें, फाइनेंशियल रिजल्ट एवं अन्य गोपनीय सूचनाएँ योगी के साथ साझा कीं। एक्सचेंज के कर्मचारियों की वेतन और उनकी अप्रेजल से संबंधित बातें भी योगी से विचार-विमर्श के बाद ही लेती थीं।

बाजार नियामक ने 190 पेज के अपने फैसले में कहा कि वह 20 सालों से अपना हर व्यक्तिगत और पेशेवर काम योगी के सलाह के बाद ही लेती थीं। योगी के कहने पर ही चित्रा ने आनंद सुब्रह्मण्यम को नौकरी दी। उन्हें उच्च प्रबंधन में जगह दी और मनमाना वेतन दिया। इसके साथ ही उन्हें असीमित अधिकार भी दिए गए। वह अपने हर काम के लिए सुब्रह्मण्यम पर निर्भर थीं। इसको देखते हुए सेबी ने चित्रा और उनके सहयोगियों पर जुर्माना लगाया है।

एल्गोरिदम (एल्गो) घोटाले और सुब्रह्मण्यम की नियुक्ति का मामला सामने आने के बाद चित्रा ने साल 2016 में इस्तीफा दे दिया था। सुब्रह्मण्यम की नियुक्ति से संबंधित SEBI को तीन शिकायत मिली थी। उसके बाद SEBI के आदेश पर एर्स्ट एंड यंग (Ernst & Young) द्वारा की गई फोरेंसिक ऑडिट में इन सारी कहानियों का खुलासा हुआ है।

चित्रा और सहयोगियों पर भारी जुर्माना

इस तरह की गतिविधियों के कारण NSE ने चित्रा पर 3 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। SEBI ने NSE को चित्रा के अतिरिक्त अवकाश के बदले भुगतान किये गये 1.54 करोड़ रुपए और 2.83 करोड़ रुपए के बोनस (डेफर्ड बोनस) को जब्त करने का भी निर्देश दिया।

इसके साथ ही एनएसई के पूर्व एमडी और सीईओ रवि नारायण और आनंद सुब्रह्मण्यम पर 2-2 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा एक्सचेंज के पूर्व चीफ रेगुलेटरी एवं कंप्लांस ऑफिसर वीआर नरसिम्हन पर 6 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

इसके साथ ही सेबी ने इन पर नियुक्ति संबंधी प्रतिबंध भी लगाए हैं। चित्रा और सुब्रह्मण्यम मार्केट इंफ्रास्ट्रक्टर संस्थानों और सेबी के साथ पंजीकृत किसी भी इंटरमीडिटियरी संस्थान के साथ अगले तीन सालों तक जुड़ नहीं सकती हैं। यही प्रतिबंध नारायण पर दो साल का लगाया गया है। इसके साथ ही SEBI ने NSE को कोई भी नया प्रोडक्ट पेश करने से छह महीने के लिये रोक दिया है।

कौन हैं आनंद सुब्रह्मण्यम

साल 2013 में NSE ज्वॉइन करने से पहले सुब्रह्मण्यम Balmer and Lawrie कंपनी में मिडिल मैनेजमेंट के तौर पर काम करते थे। उनका सालाना वेतन 15 लाख रुपए से भी कम था। इसके साथ ही शेयर मार्केट से संबंधित कैपिटल मार्केट का उन्हें कोई भी अनुभव नहीं था। मार्च 2013 में उन्हें NSE में उन्हें एक्सचेंज में चीफ स्ट्रेटेजी ऑफिसर के तौर ज्वॉइनिंग दी गई। एक्सचेंज के हर काम में उनका हस्तक्षेप होता था।

ज्वॉइनिंग के समय उन्हें 1.68 करोड़ रुपए का सालाना पैकेज दिया गया। अप्रैल 2014 में उनका सालाना पैकेज बढ़ाकर 2.01 करोड़ रुपए कर दिया गया। अप्रैल 2015 में उनका सालाना पैकेज बढ़ाकर 3.33 करोड़ रुपए कर दिया गया। इसी साल उन्हें एक्सचेंज के MD और CEO का सलाहकार और ग्रुप ऑपरेटिंग ऑफिसर (GOO) भी नियुक्त कर दिया गया। फिर अप्रैल 2016 में उनका सालाना पैकेज बढ़ाकर 4.21 करोड़ रुपए सालना कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद अक्टूबर 2016 में उन्हें इस्तीफा देने के लिए कहा गया था।

कौन है हिमालय में रहने वाला योगी

योगी को चित्रा सिरोमणि कहकर पुकारती थीं। वह बताती थीं कि योगी एक अज्ञात व्यक्ति और आध्यात्मिक शक्ति हैं, जो हिमालय पर रहते हैं और अपनी इच्छा के अनुसार कहीं भी प्रकट हो सकते हैं। वह पिछले 20 वर्षों से उनके संपर्क में थीं। वह अपना हर फैसला उनसे विचार-विमर्श करने के बाद ही लेती थीं।

इस व्यक्ति को आनंद सुब्रह्मण्यम कंचन के नाम से जानता था। यह व्यक्ति सुब्रह्मण्यम का बहुत खास था। इसी व्यक्ति (योगी) के कहने पर चित्रा ने उन्हें पहले एक्सचेंज की सहायक कंपनी में नौकरी दी और उसके बाद एक्सचेंज के बोर्ड में शामिल कर लिया। E&Y के फोरेंसिक रिपोर्ट में कहा गया है कि सुब्रह्मण्यम को NSE में लाने के लिए यह साजिश रची गई थी।

क्या है NSE

भारत में शेयरों की खरीद-ब्रिकी अब इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से होती है। इसके लिए NSE और BSE दो स्टॉक एक्सचेंज भारत में काम करते हैं। BSE यानी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज भारत का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है। वहीं, NSE भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। डेरिवेटिव (F&O और Option Trading) के मामले में यह विश्व का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इन दोनों स्टॉक एक्सचेंजों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 4 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 3,014 खरब रुपए) है।

कोई भी कंपनी जब बाजार से IPO के रूप में पूंजी जुटाती है तो इन्हीं स्टॉक एक्सचेंजों पर पंजीकृत होती है। पंजीकृत होने के बाद इन कंपनियों की शेयरों की खरीद और बिक्री यहीं होती है। साथ ही हर कंपनी वित्तीय स्थिति का पूरा विवरण इन एक्सचेंजों को देती हैं। इनमें उनका बैलेेंस शीट, लाभ-हानि विवरण, बाजार पूँजीकरण, लाभांश की स्थिति आदि शामिल हैं।

BBC ने दिया मंच, राणा अयूब ने बुर्के पर फैलाया झूठ; भगवाधारियों को बताया- ‘आतंकी’

वित्तीय धोखाधड़ी कर पकड़ी गईं वाशिंगटन पोस्ट की स्तंभकार राणा अयूब ने हाल में बीबीसी वर्ल्ड न्यूज से बुर्का विवाद को लेकर बात की। अपने इंटरव्यू में अयूब ने शैक्षणिक संस्थानों में न सिर्फ लड़कियों के हिजाब पहनने के मसले पर झूठ बोला बल्कि जय श्री राम कहने वालों को ‘हिंदू आतंकी’ कहा।

अयूब ने आर्टिकल 25 का हवाला देकर इस दौरान ये तो बता दिया कि कैसे देश में हर नागरिक को अपने मजहब का अभ्यास करने का अधिकार है, लेकिन ये बताना भूल गईं कि हर शैक्षणिक संस्थान के पास भी अपने नियम बनाने का अधिकार है जिसमें ड्रेस कोड का निर्धारण आता है और जिसे हर छात्र को फॉलो करना होता है।

राणा अयूब के इस इंटरव्यू के दौरान जब एंकर ने अयूब को टोंका कि उन्हें बीजेपी प्रवक्ता से ड्रेस कोड के बारे में पता चला है कि कोई छात्र धार्मिक चिह्नों को शैक्षणिक संस्थानों में नहीं पहन सकते। अयूब ने ये सुन इस विषय पर झूठ बोला और एंकर को बताया कि लड़कियाँ तो लंबे समय से हिजाब पहनती थीं।

राणा अयूब का झूठ

उन्होंने कहा, “ये लड़कियाँ बहुत लंबे समय से हिजाब पहन रही हैं। यह पहली बार नहीं है। तो फिर अचानक क्यों कर्नाटक के एक शैक्षिक परिसर में भगवा झंडा फहराने वाले हिंदू आतंकवादी का समूह आ गया?”

टीवी इंटरव्यू पर दावा किया गया कि पीएफआई नेता की बेटी मुस्कान खान को लेकर दावा हुआ कि युवाओं ने बुर्काधारी लड़की को रोका था, जबकि हकीकत ये है कि ये पूरा प्रदर्शन दिसंबर 2021 से शुरू हो गया था और छात्राओं ने इस प्रदर्शन को पीएफआई के छात्र संगठन से परामर्श के बाद शुरू किया था। सबसे जरूरी बात इन छात्राओं को किसी अन्य पुरुषों ने नहीं कॉलेज परिसर में घुसने से मना किया बल्कि कॉलेज प्रशासन ने ही इन्हें मना किया था।

एक अन्य बात जो गौर देने वाली बात वो ये कि राज्य में मुस्लिम लड़कियाँ जिस परिधान के लिए सड़कों पर उतरी हैं उसे हिजाब नहीं बुर्का कहते हैं जो कि हिजाब से बिलकुल अलग है। हिजाब में केवल सिर ढका जाता है लेकिन यहाँ तो सिर से लेकर एड़ी ढकने के लिए प्रोटेस्ट हो रहा है, जिसे देख कर ही पता चल रहा है कि वो बुर्का कैसे अन्य छात्रों से मुस्लिम छात्राओं को अलग दिखाएगा।

अयूब से जब एंकर ने उनके प्रोपगेंडे पर सवाल किया तो वो भड़क गईं और जेएनयू की कुलपति की नियुक्ति पर सवाल उठा दिए। दावा किया कि नई कुलपति शांतिश्री ट्विटर पर मुस्लिमों और इसाइयों को टारगेट करती रही हैं। वहीं पंडित का दावा है कि उनका कोई ट्विटर हैंडल ही नहीं है।

हिंदुओं के साथ होती हिंसा से किया किनारा

अपने इस इंटरव्यू में अयूब ने मुस्लिमों के साथ होती हिंसा, उनकी लिंचिंग, उन्हें नमाज न पढ़ने देने के मुद्दे को बढ़-चढ़ कर उठाया लेकिन ये नहीं बता पाईं कि कैसे मुस्लिम सार्वजनिक स्थल घेरकर नमाज पढ़ने का काम करते थे और कैसे देश में हिंदुओं के ख़िलाफ़ तमाम अपराध होते हैं। बात चाहे गुजरात के किशन भरवाड की हो या झारखंड के रुपेश पांडे की, अयूब ने अपने इंटरव्यू में हर हिंदू के साथ हुई बर्बरता को एक सिरे से नजरअंदाज कर दिया।

झूठ पर 4 मिनट कायम नहीं रह पाईं राणा अयूब

इतना ही नहीं, अयूब ने अपने इंटरव्यू में इतने झूठ बोले कि वो खुद आँकड़ों में कन्फ्यूज हो गईं कि उन्होंने शुरू में कहा था कि 100 हिंदुओं ने एक मुस्लिम लड़की को घेरा और इंटरव्यू के आखिर में वो बोलती नजर आईं कि ये संख्या 200 थी। अयूब बोलीं, “ये वो भारत नहीं है जिस पर हमें कभी गर्व होता था। ये दक्षिणपंथी आतंकियों का भारत है।”

धोखाधड़ी करने पर जब्त हुई 1.77 करोड़ रुपए की संपत्ति

यहाँ बता दें कि विदेशी प्लेटफॉर्म पर झूठ फैलाने वाली राणा अयूब अपने ही देश में वित्तीय धोखाधड़ी करने के कारण चर्चा में हैं। हाल में 1.77 करोड़ रुपए की संपत्ति ईडी द्वारा जब्त की गई। कथिततौर पर ये सारा पैसा उन्होंने कीटो पर फंड इकट्ठा करने का नाम पर एकत्रित किया था। मगर, सारे पैसे का इस्तेमाल किए बिना उन पैसों को अयूब ने अपने अकॉउंट में रखे रखा। जब विवाद बढ़ा तो अयूब ने खुद को बेगुनाह बताया।

दावा- पहले यूनिफॉर्म में आती थीं, CFI की ट्रेनिंग के बाद बुर्के पर शुरू किया बखेड़ा: सुप्रीम कोर्ट में ड्रेस कोड के लिए PIL

बुर्के पर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता निखिल उपाध्याय ने शीर्ष अदालत से शिक्षण संस्थानों में कॉमन ड्रेस कोड लागू करने की अपील की है। वहीं, स्कूल डेवलपमेंट मैनेजमेंट कमेटी उडुपी के वाइस प्रेसिडेंट यशपाल सुवर्णा ने दावा किया है कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) के उकसाने के बाद यह पूरा बखेड़ा शुरू हुआ है। CFI पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) की स्टूडेंट विंग है।

उनका दावा है कि विवाद शुरू करने वाली छात्राओं को CFI ने किसी प्राइवेट जगह पर ट्रेनिंग दी। इसी ट्रेनिंग के बाद कथित तौर पर छात्राओं ने नियमों के उल्लंघन और अध्यापकों के साथ बदतमीजी शुरू कर दी। वहीं स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष और उडुपी से भाजपा विधायक रघुपति भट के अनुसार उन्हें हैदराबाद के इंटरनेट कॉल से धमकियाँ आ रही हैं। विधायक के अनुसार ऐसा पाकिस्तान के न्यूज़ चैनलों और अल जजीरा पर खबर चलने के बाद से हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुवर्णा का दावा है कि उडुपी के कॉलेज में बुर्के में आने वाली छात्राओं को CFI ने उकसाया था। इसके बाद उन्होंने शिक्षकों के साथ अभद्रता शुरू की। पहले ये छात्राएँ भी दूसरी छात्राओं की तरह यूनिफॉर्म में आती थीं। लेकिन CFI और उसके जैसे अन्य मुस्लिम संगठनों के उकसाने के बाद उन्होंने इस मसले पर हंगामा शुरू किया।

इंडिया टुडे से बात करते हुए यशपाल ने बताया, “मेरे हिसाब से स्कूल मैनेजमेंट छात्रों के हित को ध्यान में रख कर नियम बनाता है। 30 दिसम्बर तक ये छात्राएँ, सामान्य छात्राओं की तरह ही स्कूल ड्रेस पहनती थीं। लेकिन 31 दिसंबर से अचानक ही इन्होने नियमों का उल्लंघन करना शुरू कर दिया। ये नियम 2004 से लागू हैं। एडमिशन लेते समय भी इन छात्रों ने सभी नियम मानने की स्वीकृति दी थी। ये तमाम लोग असमाजिक तत्वों के बहकावे में आ रही हैं। हमने हंगामा करने वाली छात्रों को बता दिया है कि अगर आप यहाँ के नियमों से संतुष्ट नहीं है तो अपनी TC ले कर जहाँ कहीं और अच्छा लगे वहाँ पढ़ने जा सकती हैं। हम नियमों के साथ कोई भी समझौता नहीं करने वाले हैं।”

वहीं निखिल उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में एक PIL दाखिल करते हुए देश के सभी शैक्षणिक संस्थाओं में समान ड्रेस कोड लागू करने के लिए सरकार को निर्देश देने की माँग की है। याचिका में समान ड्रेस कोड को राष्ट्रीय एकता और समानता के लिए जरूरी बताया गया है। याचिका में कहा गया है कि समान ड्रेस कोड लागू होने पर हिंसा में कमी आएगी और पढ़ने का माहौल और बेहतर बनेगा। PIL में अमेरिका, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों का हवाला दिया गया है जहाँ स्कूलों में कॉमन ड्रेस कोड लागू है। याचिकाकर्ता भाजपा नेता एडवोकेट अश्वनी उपाध्याय के बेटे हैं।

नोट: भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव तक। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, लेकिन ये बुर्का के लिए हो रहा है।

वाह री झारखंड पुलिस! रूपेश पांडेय मॉब लिंचिंग में न्याय की माँग करने वालों पर ही FIR: भाई की भी हो चुकी है मौत, परिवार पर कर्ज का बोझ

झारखंड के हजारीबाग में मुस्लिम भीड़ द्वारा रूपेश पांडेय नाम के नाबालिग की हत्या का मामला अब तूल पकड़ रहा है। पूरे राज्य में हिन्दुओं ने जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किए। भाजपा और भाजयुमो (युवा मोर्चा) इस मामले में खासी मुखर है। ‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP)’ भी सड़क पर है। इसी क्रम में झारखंड के चतरा में 400 के करीब युवाओं ने शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाल कर न्याय के लिए विरोध प्रदर्शन किया। लेकिन, इसमें उलटा उन लोगों पर ही केस दर्ज कर दिया गया।

रूपेश पांडेय हत्याकांड मामले में न्याय की माँग: उलटा मार्च निकालने वालों पर ही FIR

झारखंड के चतरा में रूपेश पांडेय हत्याकांड में न्याय की माँग के लिए कैंडल मार्च निकालने वाले 15 लोगों के खिलाफ सदर थाने में FIR दर्ज की गई है। आलोक कुमार, अंकित पांडेय, बैजनाथ यदुवंशी, भवानी रॉय, पिंटू कुमार, राजकुमार, संतोष जी, संतोष कुमार, सतीश पांडेय, उमेश भारती, राजेश राम, हिमांशु गुप्ता, कन्हाई पांडेय, राजदीप पांडेय और उत्तम पांडेय के खिलाफ ये मामला दर्ज किया गया है। शुक्रवार (11 फरवरी, 2022) को ये मामला दर्ज किया गया।

इन सभी के खिलाफ ‘भारतीय दंड संहिता (IPC)’ की धारा- 147 (उपद्रव या बलवा करना) और धारा-188 (महामारी के दौरान सरकारी निर्देशों का उल्लंघन) के अलावा ‘आपदा प्रबंधन अधिनियम (NDMA)’ की धारा-51 (आपदा के दौरान सरकारी आदेशों की अवहेलना) और ‘महामारी अधिनियम’ की धारा-3 भी लगाई है। लोगों ने इस तरह से शांतिपूर्ण प्रदर्शन को कुचलने के लिए FIR दर्ज किए जाने का विरोध किया है। झारखंड में भाजयुमो संगठन ने भी इसकी निंदा की है।

इस सम्बन्ध में ऑपइंडिया से बात करते हुए भाजयुमो नेता सुमन सौरव ने बताया कि चतरा में कई हिंदूवादी संगठनों और हिन्दू कार्यकर्ताओं ने 11 फरवरी को एक मार्च का आयोजन किया था। उन्होंने बताया कि 1 किलोमीटर तक के नगर भ्रमण के दौरान ‘जस्टिस फॉर रूपेश पांडेय’ के बैनर के साथ न्याय की माँग की गई। उन्होंने बताया कि इस हत्याकांड के मामले में ये झारखंड का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन था। उन्होंने चतरा सदर थानाध्यक्ष लव कुमार सिंह का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि वो अक्सर हिन्दू कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज कर देते हैं।

उन्होंने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान तो पुलिस-प्रशासन ने कुछ नहीं कहा और सब कुछ शांतिपूर्ण था, लेकिन अगले दिन ही पता चला कि केस कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि विरोध के लिए कई शहरों में ऐसे ही शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुए। उन्होंने बताया कि रूपेश पांडेय हत्याकांड के मामले में अब तक 27 नामजद में से मात्र 5 की गिरफ़्तारी की खबर है। जबकि भाजयुमो की माँग है कि इन सभी की जल्द से जल्द धर-पकड़ की जाए और फ़ास्ट ट्रैक अदालत में मामला चला कर एक साल के भीतर सभी दोषियों को सज़ा दी जाए। इस मामले में NCPCR (राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग) के पास भी शिकायत गई है।

साथ ही संगठन ने रूपेश पांडेय के परिवार को 50 लाख रुपए का मुआवजा दिए जाने और एक सरकारी नौकरी देने की माँग भी की है। रूपेश पांडेय अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। भाजयुमो का आरोप है कि पुलिस-प्रशासन इस हत्याकांड को ‘बच्चों की लड़ाई’ बता कर मामले को कमजोर करना चाह रहा है, इसे दबाना चाह रहा है। सुमन सौरव ने इस मामले में मॉब लिंचिंग की धारा लगाए जाने की माँग की। साथ ही आरोप लगाया कि सरकार ने अब तक पीड़ित परिवार की किसी प्रकार की मदद नहीं की है।

ये भी सामने आया है कि रूपेश पांडेय के माता-पिता एक घर भी बनवा रहे थे। रूपेश पांडेय इंटरमीडिएट के छात्र थे और साथ ही परिवार का गुजर-बसर चलाने के लिए एक मोबाइल की दुकान में भी काम करते थे। अपने घर में कमाने वाले वो इकलौते व्यक्ति थे। उनकी माँ महिला समिति में काम करती हैं और पिता छोटे स्तर पर खेती-बारी करते हैं। परिवार का कहना है कि ये मामला जिला अदालत से लेकर उच्च-न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है, इसीलिए उन्हें चिंता है कि वो इतना बड़ा केस कैसे लड़ेंगे?

रूपेश पांडेय के एक भाई भी थे, लेकिन कुछ सालों पहले साँप काटने की वजह से उनकी भी मौत हो गई थी। चूँकि इस मामले में सारे के सारे आरोपित मुस्लिम हैं, ऐसे में परिवार को आशंका है कि केस लंबा खिंचेगा और उनके पास इसके लिए रुपए नहीं हैं। सुमन सौरव ने बताया कि इसके लिए वो लोग क्राउडफंडिंग का अभियान चला रहे हैं, ताकि परिवार की वित्तीय मदद हो जाए। रूपेश पांडेय की माँ के बैंक खाते पर लोगों को डोनेशन के लिए अपील की जा रही है।

गाँव के महिलाओं का कहना है कि इस मॉब लिंचिंग के दौरान वहाँ मुस्लिम महिलाएँ भी मौजूद थीं और चिढ़ाते हुए गलत टिप्पणियाँ कर रही थीं। ग्रामीणों के अनुसार, जब रूपेश पांडेय को अधमरी अवस्था में अस्पताल ले जाया जा रहा था, तब वो मुस्लिम महिलाएँ टिप्पणी करते हुए कह रही थीं, “ये लड़का अब भी ज़िंदा लग रहा है। लगता है कि इसे ठीक से ‘बजाया’ नहीं गया है।” ‘भारतीय जनता युवा मोर्चा’ ने पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में राज्य भर में विरोध प्रदर्शन किया।

साथ ही राज्यपाल रमेश बैस से मुलाकात कर के इस मामले में न्याय के लिए आवेदन दिया। रामगढ़ और खूँटी में रविवार को हिन्दुओं ने बंद का ऐलान किया है। आगे भी विरोध प्रदर्शन की योजना है। भाजयुमो नेता सुमन सौरव का कहना है कि ये विरोध प्रदर्शन कोई एक संगठन या राजनीतिक दल नहीं कर रहा है, बल्कि जनता स्वतः इसके लिए जागरूक है और लोग स्वेच्छा से आगे आ रहे हैं। आरोप है कि झारखंड सरकार इस मॉब लिंचिंग के दोषियों को पकड़ने की बजाए न्याय की माँग को ही कुचल रही है।

रूपेश पांडेय मॉब लिंचिंग: क्या कहना है माँ और परिजनों का

मृतक रूपेश पांडेय की माँ ने बताया, “मेरा बेटा दुकान में रहता था। सुबह के 9 बजे वो घर से निकलता था। दोपहर के 2 बजे वो घर से भोजन कर के गया और शाम के 5 बजे खबर आई कि आपका बेटा बेहोश पड़ा हुआ है। मियाँ सब के बच्चे उसे पकड़ कर के गए और उसका जान मार दिया। पप्पू मियाँ उसकी छाती पर चढ़ गया था। उलटा वो लोग हमारे ऊपर ही आरोप लगा रहे हैं। अपनी बस्ती में खुद आग लगा कर हम पर आरोप लगा रहे हैं। सिलिंडर से आग लगा कर हमें फँसा रहे हैं।”

परिजनों ने आरोप लगाया कि एक सप्ताह होने के बावजूद अब तक पुलिस-प्रशासन ने इस मामले में कोई छानबीन नहीं की है। उन्होंने दोषियों के लिए फाँसी की माँग करते हुए कहा कि कार्रवाई नहीं की जाती है तो सड़क जाम किया जाएगा। रूपेश पांडेय की माँ ये बात बोलते हुए लगातार रोते रहती हैं कि उनके दोनों बेटे आँखों के सामने से चले गए। जिनकी दुकान में रूपेश काम करते हैं, उन्होंने बताया कि वो उसे दुकान में बैठा कर चाय पीने गए थे और तभी तक ये घटना हो गई।

परिवार का कहना है कि उनकी आय का अब कोई साधन नहीं है। साथ ही परिवार कर्ज के बोझ तले भी दबा हुआ है। महिलाएँ मिल कर ‘सखी’ वाली एक समूह चलाती हैं, उसमें भी परिवार पर कर्ज है। रूपेश पढ़ाई के साथ-साथ काम भी करते थे, ऐसे में परिवार की आर्थिक स्थिति समझी जा सकती है। गाँव की महिलाओं ने ‘रूपेश के हत्यारों को फाँसी चाहिए’ और ‘न्याय चाहिए’ के नारे भी लगाए। महिलाओं का कहना है कि अगर न्याय नहीं मिला तो वो मजबूरी में सड़क जाम करने का रास्ता अख्तियार करेंगी।

हजारीबाग में रूपेश पांडेय की मुस्लिम भीड़ द्वारा हत्या: क्या है FIR में?

ये घटना झारखंड के हजारीबाग के बरही थाना क्षेत्र की है। मृतक के चाचा अनिल कुमार पांडेय ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन्होंने बताया है कि रूपेश शाम के 5 बजे दुकान पर बैठा था, तभी उसके कुछ दोस्तों ने उसे सरस्वती पूजा विसर्जन में शामिल होने के लिए बुलाया। ये घटना 5 फरवरी, 2022 (रविवार) की है। चाचा ने बताया है कि कैसे असलम अंसारी उर्फ़ पप्पू मियाँ के नेतृत्व में मौजूद मुस्लिम भीड़ ने उनके भतीजे को पकड़ कर पीटा।

रूपेश पांडेय की मॉब लिंचिंग के मामले में चाचा ने दर्ज कराई FIR

इस मामले में आरोपित हैं – असलम अंसारी, मोहम्मद नौशाद, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद गुफरान, मोहम्मद चाँद, मोहम्मद ओसामा, मोहम्मद एहताम, मोहम्मद जाहिद, मोहम्मद सोनू, मोहम्मद फैसल, मोहम्मद शाहबाज, रब्बानी मियाँ, मोहम्मद आशिक, मोहम्मद जाशिद, मोहम्मद आशिक, मोहम्मद रिजवान, मोहम्मद सलमान, मोहम्मद इरफ़ान, मोहम्मद सलमान उर्फ़ भाले, मोहम्मद छोटे, मोहम्मद इस्तेखार, मोहम्मद इकबाल, मोहम्मद हसन, मोहम्मद अनीस और मोहम्मद नौशाद।

रूपेश पांडेय हत्याकांड: FIR कॉपी

प्राथमिकी में बताया गया है कि मॉब लिंचिंग में कई महिलाएँ भी शामिल थीं। इसमें लिखा है, “भीड़ ने मेरे भतीजे के सीने पर चढ़ कर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी। वहाँ मौजूद कुछ लोगों ने देखा कि भीड़ मेरे भतीजे की छाती पर चढ़ कर उसे लगातार पीट रहे थे। वहाँ से उसे अनुमंडल अस्पताल ले जाया गया। ये एक मॉब लिंचिंग है, जिसमें समुदाय विशेष ने हत्या की है। इस घटना में शामिल सभी अज्ञात और नामजद लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।”

भाजपा के समर्थन में व्हाट्सएप स्टेटस डालने पर सलीम पाशा का वीरेंदर जाट पर हमला… रवि ठाकुर पर मारी तलवार… पवन तोमर को कैद किया घर के अंदर

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले (नोएडा) के छिजारसी चौकी क्षेत्र के बुद्ध विहार कॉलोनी में भाजपा के पक्ष में व्हाट्सएप स्टेटस लगाने के बाद शुरू हुआ विवाद गाली गलौज से लेकर मारपीट में बदल गया। इस बीच एक भीड़ ने 5 युवकों पर हमला किया। इनमें से 2 युवकों की बुरी तरह से पिटाई और धारदार हथियार से हमला किया गया है। इस हमले का मुख्य आरोपित सलीम पाशा है। 11 फरवरी (शुक्रवार) की इस घटना में अब तक एक नाबालिग सहित 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

घटना की शिकायत पुलिस में करते हुए वीरेंदर सिंह जाट ने लिखा, “मेरे पिता का नाम भगवान सिंह है। मैं बुद्ध विहार कॉलोनी के 25 फुटा रोड के गली नंबर 7 में रहता हूँ। 10 फरवरी को मैंने अपने फोन में BJP के समर्थन में अपना वोटर ID स्टेटस पर लगाया था। इस स्टेटस पर रात लगभग 10:35 बजे पर मेरे मोहल्ले के सलीम पाशा ने मुझे रिप्लाई में गंदी-गंदी गालियाँ दीं। सलीम ने मुझे लिख दिया कि ‘तेरी *** कुत्तों ने मारी’। इसके बाद मैं 11 फ़रवरी को लगभग 5 बजे शाम को अपने साथियों अतुल और अजय के साथ गौ माता का उपचार करके घर आ रहा था। उसी समय सलीम पाशा नाम का लड़का अपने साथियों शादाब, सलमान, राजा अल्ताफ, अफ़रोज़, अमन चुची के साथ हम लोगों पर हमला किया। हमलावरों के साथ लगभग 30 अन्य अज्ञात लोग भी थे।”

FIR

शिकायत में आगे कहा गया, “हमले के बाद जब हम FIR करवाने पुलिस चौकी जा रहते थे, उसी समय हमें घेर कर दुबारा हमला किया गया। इस हमले में रवि ठाकुर और पवन ठाकुर घायल हो गए। इसी हालत में उन्हें अपहरण करके घर के अंदर ले जाया गया। घर में दुबारा उन दोनों पर धारदार हथियार से हमला किया गया। हमने इसकी सूचना 112 पर पुलिस को दी। पुलिस ने आ कर रवि और पवन को आरोपितों के घर से मुक्त करवाया। रवि को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।”

Case Details

पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। इस मामले में सलमान, राजा, सलीम, अमन चुची, अफ़रोज़, अल्ताफ, शादाब को नामज़द किया गया है। आरोपितों पर धारा 147, 149, 323, 324, 365, 342, 506 और IT एक्ट की धारा 67 के तहत कार्रवाई की गई है। हमले के शिकार युवकों की उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच में है। वो गौ सेवा का काम करते हैं।

हमले में रवि ठाकुर को सबसे ज्यादा चोटें आईं हैं। उनका इलाज SJM अस्पताल छिजारसी में चल रहा है।

SJM अस्पताल और घायलों के मित्र / परिजन

ऑपइंडिया की टीम पहुंची SJM अस्पताल

ऑपइंडिया ने इस मामले की जमीनी पड़ताल की। हमने अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग की शुरुआत 12 फरवरी को लगभग 3 बजे शाम से SJM अस्पताल से शुरू की। अस्पताल में घायलों के पास ज्यादा लोगों को जाने की अनुमति वहाँ के सुरक्षा गार्ड नहीं दे रहे थे। मौके पर पुलिस का कोई सुरक्षाकर्मी नहीं मिला। उस समय घायलों के परिजनों के अलावा हिन्दू संगठन के कुछ कार्यकर्ता और कुछ मीडियाकर्मी मौजूद थे।

SJM अस्पताल के सुरक्षा गार्ड की अनुमति के बाद हम नियमानुसार घायल रवि ठाकुर तक पहुँच पाए। उस समय रवि ठाकुर को अल्ट्रासाउंड के लिए भेजा गया था। वहाँ पर रवि कुमार के परिवार वाले मौजूद थे। अस्पताल के नियमों और बाकी मरीजों को असुविधा न हो इसके लिए हमने उनके परिजनों से अस्पताल के गेट के बाहर बात करने का निवेदन किया। इस निवेदन को उन्होंने मान लिया।

पीड़ित रवि ठाकुर के परिजन और मित्र

घायल रवि ठाकुर की माँ ने ऑपइंडिया से बात की

ऑपइंडिया से बात करते हुए घायल रवि ठाकुर की माँ पिंकी ने बताया, “मेरा बेटा गाय की सेवा करने गया था। मेरा एक ही लड़का है। उसको इन लोगों (आरोपितों) ने बहुत मारा। हमें 8 बजे पता चला। जब हमारे पास फोन आया तब तक हमारे बेटे को अस्पताल में डाल दिया था। मेरे पति सिक्युरिटी की नौकरी करते हैं। हम मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के निवासी हैं। पूरा इलाज हम खुद से करवा रहे हैं। पुलिस अस्पताल में आई है। मेरे लड़के से पूछताछ की है। मेरा बेटा इस हालत में नहीं है कि वो सही से बता सके। उसको बहुत ज्यादा चोट लगी है। उसकी खोपड़ी फाड़ रखी है। चार जगहों से सिर पर हमला किया गया है। उसकी आवाज निकलना मुश्किल हो रहा है।” इस पूरी बातचीत के दौरान रवि ठाकुर की माँ लगातार रोती रहीं।

रवि ठाकुर के पिता ने की ऑपइंडिया से बात

हमले में घायल रवि ठाकुर के पिता ने भी ऑपइंडिया को बताया, “मेरा नाम ठाकुर सुखवीर सिंह है। मेरा बेटा पढ़ाई के साथ जॉब भी कर रहा था। लॉकडाउन के दौरान उसकी जॉब छूट गई थी। इस बीच में हम लोग गाँव चले गए थे। लौटने के बाद वो जॉब खोज रहा था। घटना के बारे में मुझे कुछ मालूम नहीं है। मैं ड्यूटी पर था तब मुझे जानकारी मिली। खबर सुनकर मैं आया तो ये पोजीशन देखा। मेरी कोई रंजिश नहीं थी। यही जो सरकार बन रही है बीजेपी की इसी चक्कर में वाद विवाद हुआ है।”

हमले में घायल रवि ठाकुर के माता – पिता

हमले के शिकार दूसरे पीड़ित पवन कुमार तोमर से ऑपइंडिया ने की बात

पवन कुमार तोमर वो दूसरे पीड़ित हैं, जिन्हें हमलावरों ने घर में बंद कर जान से मारने का प्रयास किया था। ऑपइंडिया को पवन तोमर ने बताया, “घटना की मुख्य वजह मेरे दोस्त वीरेंदर चौधरी (वीरेंदर जाट) द्वारा BJP का व्हाट्सएप स्टेटस लगाना है। इस स्टेट्स पर सलीम पाशा नाम के लड़के ने गाली गलौज की। सलीम 25 फुटा क्षेत्र में आवारागर्दी करने के लिए बदनाम है। वो लड़कियों को छेड़ता रहता है। घटना के समय 25 से 30 लोगों ने वीरेंदर चौधरी पर हमला किया। हमले के बाद में वीरेंदर ने मुझे फोन किया। तब मैं गाय का इलाज कर रहा था। मैंने वीरेंदर को थाने पहुँचने को कहा और खुद वहाँ के लिए निकल गया। जब मैं वहाँ पहुँचा तो देखा कि मेरे साथ वाले लड़के आगे-आगे भाग रहे थे। उनके पीछे कई मुस्लिम लोग पीछा कर रहे थे।”

अस्पताल में इलाज करवाते एक अन्य पीड़ित पवन कुमार

पवन कुमार तोमर ने आगे बताया, “मैंने सुना कि वहाँ मस्जिदों से एलान हुआ कि बजरंग दल वालों से लड़ाई हुई है। आज इन्हें देख लेना है। सबको सलीम के घर पर इकट्ठा किया गया था। मेरे साथ रवि भाई भी थे। मेरे और रवि भाई के साथ मारपीट की गई। मैं बाइक लेकर वहाँ रुका तो मेरे माथे पर टीका देख कर उन्होंने (हमलावरों) बोला कि ये भी बजरंग दल का है। मुझे और रवि भाई को काट देने की धमकी देते हुए उठाकर ले गए। अपने घर में ले जाकर बंद कर दिया। बंद करने के बाद एक मोटे से आदमी ने तलवार से पहला वार रवि भाई पर किया। उस वार से रवि भाई के सिर से खून बहने लगा। मैं थोड़ा सा डर गया था। मैं डर के सामने वाले कमरे में घुस गया। इसके बाद मैंने अंदर से कुंडी लगा ली थी। फिर मैंने 112 पर फोन किया। तब वहाँ पर पुलिस पहुँची। पुलिस के पहुँचने के बाद हम वहाँ से निकल पाए। पुलिस कम से कम 7 से 8 गाड़ियों में पहुँची थी। इस हमले में पुरुषों के साथ महिलाएँ भी शामिल थीं। वो छतों से ईंटें बरसा रही थीं। मेरे पीछे ईंट लगी। अभी भी वहाँ सूजन है। मैंने उनसे कहा कि मैं वहाँ नहीं था और मुझे मत मारो, पर उन्होंने कहा कि तू भी बजरंग दल से है। हमले के दौरान वो बजरंग दल – बजरंग दल चिल्ला रहे थे।”

शिकायतकर्ता और पीड़ित वीरेंदर सिंह जाट ने ऑपइंडिया से की बात

वीरेंदर सिंह जाट वही युवक हैं, जिनका आरोप है कि उनके द्वारा भाजपा समर्थन में लगाए गए व्हाट्सएप स्टेट्स पर आरोपित सलीम पाशा ने गाली दी। वीरेंदर इस मामले में शिकायतकर्ता भी हैं। ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने बताया, “10 तारीख़ को मैंने अपनी वोटर ID का स्टेटस लगा कर लिखा था ‘ओनली बीजेपी भगवाधारी’। मेरे ही साथ पढ़ने वाले सलीम पाशा ने मुझे उस स्टेटस पर गाली दी। मैंने भी उन्हें जवाब दिया। फिर उसने मुझे कल मिलने को कहा। हम गौ सेवक हैं। हम शाम को गाय की सूचना पर गए थे। हम उसी सूचना से आ रहे थे। हमें घेर कर मारा गया। हम वहाँ से भाग गए। फिर हम रिपोर्ट लिखाने जा रहे थे तो उनके पूरे मोहल्ले वालों ने मिलकर हमें फिर मारा।”

शिकायतकर्ता व पीड़ित वीरेंदर सिंह जाट का मकान

वीरेंदर सिंह जाट ने आगे बताया, “हमारे दो साथियों को उठा कर घर में बंद कर दिया गया। उनके नाम पवन कुमार तोमर और रवि ठाकुर हैं। पवन भाई ने 112 पर कॉल कर के पुलिस को बुलाया। इस बीच रवि को तलवार और चाकुओं से मार कर घायल कर दिया गया। उनके साथ 1-2 और लड़कों को भी मारा गया। इन्हें मारने के बाद 112 पर सूचना के बाद पुलिस पहुँची और उन्हें ले कर थाने गई। रवि भाई को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। हमारे साथ विश्व हिन्दू परिषद, गौ रक्षा दल और अग्निवीर टीम थाने में पहुँची। वहाँ पर मुस्लिमों की टीम भी आना शुरू हो गई थी। उधर से बहुत लोग आए थे। पुलिस वालों ने उन्हें वहाँ से भगाया। वो पुलिस वालों से भी तू-तू, मैं-मैं कर रहे थे।”

शिकायतकर्ता व स्टेट्स लगाने वाले वीरेंदर जाट

पीड़ित वीरेंदर के मुताबिक, “हमारा घर 7 नंबर गली में है और सलीम का घर 4 नंबर गली में है। हमारे घर के बीच थोड़ी ही दूरी है। वहाँ पर मुस्लिम लोग ज्यादा है और हिन्दू कम हैं। अभी सलीम पाशा पकड़ा नहीं गया। मैं जाट हूँ। मैं योगी-मोदी को सपोर्ट करता हूँ। ये जो राजनीति कर रहे हैं उनमें से किसी ने भी मेरी मदद नहीं की। समाजवादी पार्टी से सुनील चौधरी या कोई भी हमसे कुछ भी पूछने नहीं आया। मैं अपने जाट भाइयों से कहना चाहूँगा कि इनके चक्कर में न पड़ें।”

पीड़ितों के मित्र और उनके गौ सेवा समूह प्रमुख विशाल गौतम ने ऑपइंडिया से की बात

विशाल गौतम ने ऑपइंडिया को बताया, “घटना के दिन भी हमेशा की तरह ये लड़के गौ सेवा करके आ रहे थे। उसके कुछ घंटों पहले इनका व्हाट्सएप स्टेट्स को लेकर विवाद हुआ था। स्टेट्स बीजेपी समर्थन में था। इसी के चलते वहीं के मुस्लिम युवक ने उस से विवाद किया। हमारे अग्निवीर संगठन का नियम है कि हर घटना के बाद अधिकारियों को सूचित किया जाए। इसलिए इन्होंने (शिकायतकर्ता वीरेंदर सिंह जाट) ने मुझे पूरी घटना से अवगत करवाया। मैंने उन्हें पुलिस के पास जाकर शिकायत दर्ज करवाने के लिए कहा। तभी उन्होंने (हमलावरों) कहा कि जब हमें जेल जाना ही है तो इन्हें मार कर ही जाते हैं। उन्होंने फोन करके तमाम लड़कों को जमा कर लिया। हमारे दर्जनों लड़के वहाँ घायल हुए, जिनमें मुख्य रूप से पवन तोमर और रवि ठाकुर हैं। उन पर चाकू फरसे जो भी थे उस से वार किया गया। डेढ़ से 2 इंच के उसके सिर पर घाव हैं। 13-14 टाँके भी लगे हैं।”

विशाल गौतम ने आगे बताया, “रवि को हमलावरों ने मरा समझ कर छोड़ा। इसके बाद वो पवन की पिटाई करने लगे। पवन ने खुद को कमरे में बंद कर लिया था। मैं डासना में रहता हूँ इसलिए मुझे आने में देर लगी। तब तक पुलिस और मीडिया के कुछ मित्रों को सूचित किया जा चुका था। मैं उस गली में चला गया। मेरी गली में जाते ही आरोपित सलीम पाशा के पिता ने गली में अवरोध लगा दिया। साथ ही वो अंदर और लोगों को बुलाने चला गया। स्थिति को भाँपकर मैं स्कूटी लेकर बाहर आ गया। तभी मौके पर नोएडा और गाजियाबाद पुलिस की टीमें पहुँच गईं। पुलिस ने दोनों (रवि और पवन) को घर से बाहर निकाला। पुलिस ने ही रवि को अस्पताल में भर्ती करवाया। बाकियों को थाने में ले गए।”

अस्पताल में मौजूद विशाल गौतम

विशाल गौतम के मुताबिक, “हमने 8 लोगों के खिलाफ नामजद तहरीर दी है। कुछ अज्ञात हैं। थाने में तहरीर देते समय आरोपित वहाँ मौजूद थे। तभी उनका एक आदमी अंदर आता है और आरोपितों को वहाँ से भगा देता है। इनका एक लीडर अमीरुल हसन नाम से है। वो बुद्ध विहार में एक अवैध स्कूल चलाता है। उस स्कूल की कोई मान्यता नहीं है। अमीरुल हसन थाने के बाहर कहता है कि जब FIR करवाने से ये मान नहीं रहे हैं तो इन्हें मारो। इस बात को खुद पुलिस वालों ने सुना। उन्होंने अमीरुल को वहाँ से डाँटकर भगा दिया। इतनी देर में बुद्ध विहार में रहने वाले लड़कों ने हमें बताया कि यहाँ मस्जिद में एलान हो गया है। एलान में कहा गया कि हमारे लड़कों को सेक्टर 63 थाने में पुलिस मार रही है। जबकि किसी लड़के को हाथ ही नहीं लगाया गया था। इसके बाद लगभग 300 लोग गाड़ियों में भर के नोएडा सेक्टर 63 के हर चौराहे पर 10-12 की संख्या में खड़े हो गए।”

विशाल गौतम ने आगे कहा, “हमारी तरफ से भी लगभग 50 लोग आए तो पुलिस ने हमसे भीड़ को हटाने के लिए कहा। ऐसा उन्होंने सामाजिक सौहार्द्र बनाए रखने के लिए बोला। साथ ही चुनाव का समय होने की याद दिलाई। हमने अपने साथियों को वापस भेज दिया। इसके बाद रात को डेढ़ बजे अमीरुल हसन अपनी गाडी लेकर अस्पताल आया। ऊपर अस्पताल प्रशासन द्वारा अनुमित न मिलने के चलते मैं बाहर अपने 4-5 साथियों के साथ स्कूटी पर बैठा था। अमीरुल हसन हमने कहने लगा कि तुम्हारी वजह से पुलिस किसी और सलमान को पकड़ लाई है। अमीरुल हसन मुझ से सलमान को छुड़वाने के लिए कहा। साथ ही ऐसा न करने पर परिणाम की धमकी दी। मेरे एक साथी अतुल तिवारी को वो अपनी गाड़ी में बैठाने की कोशिश करने लगा।”

विशाल गौतम ने आगे बताया, “अभी तक पुलिस की कार्रवाई चल रही है। पुलिस दबिश दे रही है। सुनने में आया है कि आरोपित फरार हो गए हैं। हमले में लगभग 300 से 400 लोग शामिल थे। उन्होंने अपनी छतों से ईंटें बरसाई थीं। उन्होंने इस केस को हमारे ही ऊपर डालने के लिए अपने ही घर के शीशे तोड़े हैं। अपने ही घर में ईंटें फेंकी हैं। साथ ही AC आदि की वायरिंग भी खींच ली। सूचना पर हमारे अधिकतम 70 लड़के बचाने के लिए पहुँचे थे। लेकिन इन लोगों (हमलावरों) की संख्या लगातार बढ़ रही थी। वो तमाम हिस्सों से आ रहे थे जैसे नोएडा, कैला भट्टा, इस्लाम नगर, डासना आदि जगहों से। कुछ महिलाएँ भी थीं, जो छेड़खानी का आरोप लगा रही थीं। वो अपने साथ बलात्कार करने की झूठी शिकायत दर्ज करवाने की धमकी दे रही थीं। उस समय पुलिस ने उनको वहाँ से हटाया। इस दौरान समाजवादी पार्टी का नोएडा जिलाध्यक्ष को भी विपक्षियों ने बुलवाया। सपा जिलाध्यक्ष की गाड़ी वहाँ पर दिखी थी।”

विशाल के मुताबिक, “ये (आरोपित पक्ष) रात को अंडर पास के नीचे खड़े होते हैं। लोगों से मोबाईल और पैसे की छीना-झपटी करते हैं। मुझे किसी ने बताया कि इन्हीं में एक लड़का सलमान या सलीम नाम का है। उसने किसी हिन्दू लड़की को प्रपोज किया था। लड़की ने मना कर दिया तो उसके घर में घुसकर लड़की की नस काट दी थी। डर के मारे लड़की के परिवार ने कहीं भी शिकायत नहीं दर्ज करवाई थी। हम इस जानकारी को निकलवा रहे हैं। साथ ही इनके किए गए अपराधों को भी जमा कर रहे। सबको हम पुलिस के आगे रखेंगे। हमने पुलिस से सुरक्षा बढ़ाने के लिए कहा है। अगर कोई रात में धमकाने आ सकता है तो क्या वो कमरे में ऊपर मारने नहीं जा सकता। कम से कम जब तक घायल अस्पताल में है तब तक तो सुरक्षा मजबूत रखी जाए। रात में तो 2 पुलिस वाले तैनात रहे, लेकिन अभी कोई सुरक्षा नहीं है।”

ओवैसी के 15 मिनट वाले बयान पर हथियार लेकर वीडियो बनाई है आरोपित अमन उर्फ़ चुची ने

जतिन राज नाम के हैंडल द्वारा ट्वीट किए गए एक वीडियो में दावा किया गया है कि हमले के आरोपित अमन उर्फ़ चुची का यह वीडियो है। इस वीडियो में एक युवक हाथ में पिस्टल ले कर दिखा रहा है। बैकग्राउंड में अकबरुद्दीन ओवैसी के 15 मिनट वाले बयान की आवाज आ रही है। जतिन राज ने इस वीडियो में नोएडा पुलिस को भी टैग किया है।

अस्पताल से घटनास्थल पर पहुँची ऑपइंडिया की टीम

पीड़ितों, घायलों के परिजनों और मित्रों से अस्पताल में मिलकर ऑपइंडिया की टीम उस स्थान पर गई जहाँ ये पूरा विवाद हुआ था। यह जगह NH 24 पर नोएडा से हापुड़ रोड पर जाते समय हिंडन नदी पार करने के बाद पड़ती है। अंडरपास के नीचे उतरने पर दाएँ हाथ पर अंडरपास की दीवाल से चलते हुए हम घटनास्थल पर पहुँचे। रास्ते में मिट्टी की ऊबड़-खाबड़ सड़क है। घटना स्थल से लगभग 300 मीटर पहले मुख्य बाजार है जहाँ लगभग आधे दर्जन पुलिसकर्मी तैनात दिखे। मौके पर थाने के कुछ अन्य स्टाफ भी वाहनों से आते जाते दिखाई दिए।

घटनास्थल के कुछ ही दूर पर तैनात पुलिस बल

पुलिस बल की तैनाती स्थल से लगभग 300 मीटर अंदर घनी बाजार में चलते हुए हम उस गली तक पहुँचे जहाँ ये पूरी घटना घटी थी। बाज़ार में मिश्रित आबादी और उसी के अनुसार दुकानें भी दिखीं। इसी सड़क को 25 फुटा रोड कहा जाता है। जिस गली में यह घटना घटी थी वहाँ कोई पुलिसकर्मी नहीं दिखाई दिया। आसपास के लोगों ने जानकारी दी कि बीच-बीच में पुलिस वाले आते रहते हैं। घटना के बारे में किसी स्थानीय व्यक्ति ने कैमरे के आगे बोलने से मना कर दिया।

NH 24 अंडरपास के बगल से घटनास्थल पर जाती कच्ची सड़क

25 फुटा रोड पर जनजीवन सामान्य था। दुकानें खुली थीं और लोग रोजमर्रा के कामों में वयस्त थे। हालाँकि जिस गली में घटना घटी वहाँ सन्नाटा दिखा। इक्का-दुक्का लोग ही आते जाते दिखे।

वो गली जहाँ हुआ था सारा विवाद

ऑपइंडिया ने इस मामले में स्थानीय SHO से बात की

ऑपइंडिया ने सेक्टर 63 थाना प्रभारी इंस्पेक्टर धर्मेंद्र कुमार शुक्ला से बात की। इंस्पेक्टर ने बताया, “इस केस में अब तक 6 गिरफ्तारियाँ की जा चुकी हैं। आरोपितों में एक नाबालिग भी है। मैं इस समय आरोपितों को अदालत में प्रस्तुत करने के कागज़ात तैयार कर रहा हूँ। कार्रवाई की बाकी विस्तृत जानकारी शाम को दे पाऊँगा।”

नाम- मुस्कान जैनब, काम- कैम्पस में ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे, अब्बा- PFI का नेता: बुर्का बवाल की क्रोनोलॉजी समझिए

कर्नाटक के उडुपी जिले के पीयू कॉलेज से शुरू हुए बुर्के विवाद के पीछे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का हाथ होने का अंदेशा शुरू से जताया जा रहा है। अब यह बात सामने आई कि जिस मुस्कान जैनब (Muskan jainab) ने कैम्पस में बुर्के में ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाए थे, असल में उसके अब्बा पीएफआई के नेता हैं।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार मुस्कान जैनब के अब्बा अब्दुल सुकूर पीएफआई के नेता हैं। एक अन्य रिपोर्ट में स्कूल डेवलपमेंट मैनेजमेंट कमिटी के उपाध्यक्ष यशपाल सुवर्णा के हवाले से बताया गया है कि उडुपी के कॉलेज में बुर्के में आने वाली छात्राओं को कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) ने उकसाया था। इसके बाद उन्होंने शिक्षकों के साथ अभद्रता शुरू की। उन्होंने यह भी बताया कि पहले ये छात्राएँ भी दूसरी छात्राओं की तरह यूनिफॉर्म में आती थीं। लेकिन CFI और उसके जैसे अन्य मुस्लिम संगठनों के उकसाने के बाद उन्होंने इस मसले पर हंगामा शुरू किया।

उल्लेखनीय है कि मुस्कान कर्नाटक के मांड्या स्थित PES कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स की छात्रा है। उसने 11 फरवरी 2022 को कैंपस में मजहबी नारे लगाए थे। इसके बाद कट्टरपंथी मानसिकता वाले लोगों से उसे खूब वाहवाही मिल रही है। उस पर मुस्लिम संगठनों ने इनामों और उपहारों की भी बौछार कर रखी है।

हिजाब और बुर्के का विरोध करते हुए हिंदू छात्रों ने भी PES कॉलेज में ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए थे। बाद में मुस्कान ने आरोप लगाया कि उसे बाहरी लोगों ने परेशान किया था। इस्लामवादी मुस्कान जैनब को शेरनी बताते हुए महाराष्ट्र में मंबई के बांद्रा से कॉन्ग्रेस विधायक ज़ीशान सिद्दीकी ने मांड्या में उसके घर जाकर उसे आईफोन और एक स्मार्टवॉच गिफ्ट किया था। उससे पहले बुधवार (9 फरवरी 2022) को इस्लामिक संगठन जमीयत उलमा-ए-हिंद ने भी मुस्कान खान को पाँच लाख रुपए का ईनाम दिया था।

मुस्कान के अलावा एक अन्य बुर्काधारी प्रदर्शनकारी आलिया असादी के भी पीएफआई से कनेक्शन हैं। वह पीएफआई नेता नज़ाद असादी की चचेरी बहन है। इसके अलावा भी कई ऐसी लड़कियाँ विरोध-प्रदर्शनों में शामिल हैं, जिनके इस्लामिक कट्टरपंथियों से संबंध हैं।

कुंदापुर में दंगा भड़काने में SDPI है शामिल

हाल ही में हमने रिपोर्टिंग की थी कि उडुपी जिले के कुंडापुरा में एक सरकारी कॉलेज में हिजाब को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की साजिश रचने के आरोप पुलिस ने 32 वर्षीय हाजी अब्दुल मजीद गंगोली और 41 वर्षीय रजब गंगोली को गिरफ्तार किया था। ये दोनों विरोध-प्रदर्शन के दौरान चाकू लहराते पकड़े गए थे।

रिपोर्ट्स से खुलासा हुआ था कि छह हमलावरों में से एक सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) से जुड़ा हुआ था। पुलिस का कहना था कि पाँच-छह लोगों ने अपने हाथ में चाकू लेकर छात्रों को धमकी दी थी। पुलिस के पहुँचते ही चार फरार हो गए और दो को पकड़ लिया गया। खलील, रिजवान, इफ्तिकार और एक अन्य मौके से फरार हो गया था। इफ्तिकार का एसडीपीआई से कनेक्शन सामने आया था।

विरोध के पीछे जमात और PFI

कर्नाटक में शुरू हुए हिजाब विवाद के पीछे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की छात्र विंग CFI के भी शामिल होने की खबरें सामने आ चुकी हैं। इससे पहले ऑपइंडिया ने इस्लामिक संगठन कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) के बारे में बताया था। छात्रों ने भी ये माना था कि उन्होंने दिसंबर 2021 से ही हिजाब पहनना शुरू किया था। साथ ही ये बात भी माना था कि CFI के लोग उन्हें लगातार गाइड कर रहे हैं। यहीं नहीं एक एक्टिविस्ट विजय पटेल ने भी इस मामले की इन्वेस्टिगेशन की थी, जिससे ये पता चला था कि कैसे कट्टरपंथी और लेफ्ट-लिबरल मीडिया ने इस हिजाब विवाद का फायदा उठाकर भारत विरोधी एजेंडा चलाया।

नोट: भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव तक। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, लेकिन ये बुर्का के लिए हो रहा है।

समान नागरिक संहिता आखिर कब? बुर्के पर बवाल ने फिर समझाई जरूरत, सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है- गोवा से सीखें: UCC के बारे में जानिए सबकुछ

कर्नाटक में हुए बुर्का विवाद के बाद अब जगह-जगह एक बार फिर से समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड- Uniform Civil Code) को लागू कराने की बातें होना शुरू हो गई हैं। उत्तराखंड चुनावों के मद्देनजर तो भारतीय जनता पार्टी ने इसे लेकर वादा भी किया है कि अगर उनकी सरकार राज्य में लौटी तो शपथ ग्रहण के तुरंत बाद समान नागरिक संहिता लागू होगी। ये वादा प्रदेश की भाजपा ने देवभूमि उत्तराखंड के स्वरूप में हो रहे बदलाव और उसे लेकर उठने वाली चिंताओं के मद्देनजर किया है।

वैसे बुर्का विवाद पहली वजह नहीं है जिसके कारण देश में समान नागरिक संहिता को लागू कराने का मुद्दा गरमाया हो। इससे पूर्व, इसके समर्थन में कई बार तरह-तरह की माँगें उठती रही हैं। विभिन्न अदालतों ने भी यूनिफॉर्म सिविल कोड के समर्थन में अपनी टिप्पणी की है…।

समान नागरिक संहिता का कोर्ट में समर्थन

पिछले साल की बात है, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी केंद्र सरकार से इसे लागू करने के लिए गंभीरता से विचार करने को कहा था। वहीं सुप्रीम कोर्ट भी इसे 1985 के शाहबानो प्रकरण से लागू कराने के लिए सुझाव देते हुए आया है। अभी कुछ दिन पहले इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने सवाल भी उठाए थे कि आखिर अब तक नागरिक समान संहिता लागू करने के लिए सरकार द्वारा कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया। कोर्ट ने देश को गोवा से सीखने की नसीहत दी थी जहाँ 1962 के बाद से ये संहिता लागू है। इनके अलावा दिल्ली हाईकोर्ट भी यूनिफॉर्म सिविल कोड के समर्थन में अपनी टिप्पणी दे चुका है।

क्या है समान नागरिक संहिता?

बता दें कि समान नागिक संहिता लागू कराने की माँगें इसलिए भी इतने तूल पर हैं क्योंकि इसके बाद देश में हर नागरिक के लिए एक समान कानून हो जाएगा। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो, जाति का हो या समुदाय का हो, मगर हर किसी के लिए एक ही कानून होगा। कोई भी पर्सनल लॉ इस यूनिफॉर्म सिविल कोड से ऊपर नहीं होगा। मसलन कानून किसी हिंदू महिला की सुरक्षा के मद्देनजर बनाया जाएगा, तो वहीं कानून मुस्लिम, ईसाई और पारसी महिला को भी सुरक्षा प्रदान करेगा। इसी तरह शादी, तलाक, संपत्ति सबसे जुड़े मामलों में पूरे देश में एक ही कानून लागू होगा।

गोवा में पहले से यूनिफॉर्म सिविल कोड

उल्लेखनीय है एक ओर जहाँ भारत के अन्य राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए जद्दोजहद हो रही है। वहीं गोवा भारत का एक अकेला ऐसा राज्य है, जहाँ वर्ष 1962 से ही यह कानून प्रभावी है। जानकारी के अनुसार, 1961 में गोवा के भारत में विलय के बाद भारतीय संसद ने गोवा में ‘पुर्तगाल सिविल कोड 1867’ को लागू करने का प्रावधान किया था जिसके तहत गोवा में समान नागरिक संहिता लागू हो गई और तब से राज्य में ये संहिता लागू है। पिछले दिनों गोवा में यूनिफॉर्म सिविल कोड की तारीफ जस्टिस एस ए बोबड़े ने भी की थी। सीजेआई ने कहा था कि गोवा के पास पहले से ही वह है जिसकी कल्पना संविधान निर्माताओं ने पूरे देश के लिए की थी

मुस्लिम करते रहे हैं समान नागरिक संहिता का विरोध

देश में जगह-जगह समय-समय पर समान नागरिक संहिता की जरूरत को महसूस करते हुए इसके लिए आवाज उठाई जाती रही हैं, मगर मुस्लिमों ने हमेशा इसका विरोध किया है। समुदाय के कट्टरपंथी वर्ग का मानना रहा है कि उनके इस्लामी पर्सनल लॉ से ऊपर कोई कानून नहीं है। पिछले दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जब अपनी टिप्पणी की थी तो उसके बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ ने भी अपना बयान जारी किया था। अपने बयान में लॉ बोर्ड ने ईशनिंदा के विरुद्ध कानून बनाने की माँग की थी जबकि यूनिफॉर्म सिविल कोड का खुलकर विरोध किया था।

यूनिफॉर्म सिविल कोड की माँग

याद दिला दें कि भारत में यूनिफॉर्म सिविल कोड समेत कुछ कानून लागू कराने के लिए पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने एक रैली का आह्वान किया था। मगर, पहले तो रैली निकालने के लिए आयोजको को इसकी अनुमति नहीं मिली और जब ये रैली आयोजित हुई तो भड़काऊ नारेबाजी के आरोप में इस रैली में शामिल कई हिंदू नेता पकड़ लिए गए थे। बाद में पता चला था कि रैली में कुछ असामाजिक तत्वों की घुसपैठ हो गई थी जिन्होंने कुछ भड़काऊ बयानबाजी करते हुए माहौल खराब करने का प्रयास किया था।

अब चर्चा क्यों?

कर्नाटक के बुर्का विवाद के बाद से समान नागरिक संहिता की बातें जगह-जगह हो रही हैं, इसकी वजह यही है कि एक किसी मजहब के नाम पर समुदाय विशेष की मनमानियों को रोका जा सके। अभी तक मजहब के नाम पर कई नियम बदलने के प्रयास होते रहे हैं। किसी भी पब्लिक प्लेस पर नमाज पढ़ने की बात हो या हिजाब पहनकर कॉलेज तक आ जाने की। हर नियम को मजहब के हवाले से चुनौती मिलती देख लोगों की माँग यही है कि जब भारत में रहने वाला हर नागरिक भारतीय है और सबको समानता का अधिकार है तो फिर सबके लिए एक समान कानून भी होना चाहिए।