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‘गजवा-ए-हिंद का सपना नहीं होगा पूरा’: बुर्का विवाद पर CM योगी की दो टूक, कहा- देश शरीयत से नहीं चलेगा

कर्नाटक बुर्का मामले में ओवैसी की बयानबाजी के बाद अब यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर जवाब दिया है। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में स्पष्ट कहा कि इस देश का तंत्र भारतीय संविधान से चलता है न कि शरीयत या इस्लामी कानून से। उन्होंने हिजाब विवाद को लेकर कहा कि किसी को भी अपनी मजहबी आस्था इस देश पर और इसके संस्थानों पर थोपनी नहीं चाहिए। कट्टरपंथी बयानों को लेकर सीएम योगी ने कहा गजवा-ए-हिंद का सपना तो किसी का कयामत तक भी पूरा नहीं होगा।

एएनआई से बात करते हुए सीएम योगी ने मुस्लिम लड़कियों की आजादी को लेकर कहा, “उसी बेटी को तो आजाद कराने के लिए, उसी बेटी को तो अधिकार दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक की प्रथा को खत्म किया। उसी बेटी को न्याय दिलाने के लिए, सम्मान दिलाने के लिए और स्वालंबन के मार्ग पर अग्रसर के लिए ये फैसले लिए जा रहे हैं और उसी बेटी के सम्मान को लेकर हम कहते हैं कि शरीयत के अनुसार व्यवस्था नहीं चलेगी, संविधान के हिसाब से चलेगी, ताकि हर बेटी के सम्मान और स्वावलंबन का कार्य हो सके।”

उन्होंने स्कूल में हिजाब पहनने वाले सवाल को लेकर कहा, “हम इस देश और इसके संस्थान पर अपनी धार्मिक मान्यताएँ या चुनाव नहीं थोप सकते। क्या मैं यूपी के हर नागरिक और कर्मचारी से भगवा पहनने को बोलता हूँ? वो जो पहनते हैं ये उनकी मर्जी है। लेकिन स्कूलों में ड्रेस कोड को लागू किया जाना चाहिए। ये स्कूल और वहाँ के अनुशासन की बातें हैं।”

इस दौरान सीएम योगी ने गजवा-ए-हिंद का सपना देखने वालों को भी संदेश दिया। उन्होंने कहा, “ये लोग जान लें ये नया भारत है। दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता नरेंद्र मोदी का भारत है। इस नए भारत में विकास सबका होगा, मगर तुष्टिकरण किसी का नहीं होगा। ये नया भारत संविधान के हिसाब से चलेगा। शरीयत के हिसाब से नहीं। गजवा-ए-हिंद का सपना कयामत के दिन तक भी साकार नहीं होगा।”

22 साल पहले बिहार से चोरी हुई 1200 वर्ष पुरानी प्रतिमा इटली में मिली, ‘अवलोकितेश्वर पद्मपाणि’ की मूर्ति भारत को सौंपी गई

मोदी सरकार के शासनकाल में लगातार भारत से चोरी कर दूसरे देशों में ले जाई गई महत्वपूर्ण वस्तुएण देश में वापस लाई जा रही हैं। इसी क्रम में शुक्रवार (11 फरवरी 2022) को 8वीं-12वीं सदी की ‘अवलोकितेश्वर पद्मपाणि’ भगवान की मूर्ति बरामद की गई। इसे इटली के मिलान में भारतीय वाणिज्यिक दूतावास के हवाले कर दिया गया है।

मूर्ति के मिलने पर बयान जारी कर भारतीय वाणिज्य दूतावास ने कहा कि देवीस्थान कुंडलपुर मंदिर (बिहार) में करीब 1200 सालों तक सुरक्षित रहने के बाद इस मूर्ति को वर्ष 2000 में चोरी कर लिया गया था। पत्थर की बनी अवलोकितेश्वर पद्मपाणि की यह मूर्ति 8वीं-12वीं सदी की है। मूर्ति में भगवान बुद्ध अपने बाएँ हाथ में कमल लिए खड़े हैं।

गौरतलब है कि भगवान बुद्ध को ही ‘अवलोकितेश्वर पद्मपाणि’ कहा जाता है। बौद्ध धर्म में इसे बोधिस्तव कहा जाता है, जो कि बुद्धों की करुणा और दयाशीलता का प्रतीक है। वाणिज्य दूतावास का कहना है कि मूर्ति को लेकर जानकारियाँ सामने आई हैं कि इटली के मिलान आने से पहले ये मूर्ति कुछ समय के लिए फ्रांस के कला बाजार में रखी गई थी। इस धरोहर को वापस देश को दिलाने के लिए सिंगापुर इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट और आर्ट रिकवरी इंटरनेशनल ने अमह भूमिका अदा की है।

गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में अमेरिका के दौरे से वापस आए तो वो अपने साथ 157 महत्वपूर्ण कलाकृतियों को वापस लाए थे। इसके बाद अन्नपूर्णा देवी की भी चोरी की गई मूर्ति को वापस लाया गया था। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, 1976 से 55 मूर्तियों को भारत लौटाया गया था, उनमें से लगभग 75 प्रतिशत 2014-2021 के दौरान प्राप्त की गई थीं। इसमें से 2014 के बाद 42 मूर्तियों को वापस देश में लाया गया था।

मंत्रालय ने कहा, “संस्कृति मंत्रालय उन प्राचीन वस्तुओं को वापस लाने के लिए विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहा है, जिनकी विरासत का महत्व है और जिनका स्थानीय महत्व है। जिन लोगों से उनकी पैतृक विरासत छीन ली गई है उन लोगों में विश्वास फिर से स्थापित किया जाएगा।”

बनने के बाद कैसा दिखेगा अयोध्या का राम मंदिर, इस 3D वीडियो में देखें सब कुछ: दीवारों की कलाकृतियों से लेकर देवी-देवताओं तक

दुनिया भर के हिन्दुओं के मन में ये जानने की बड़ी उत्सुकता है कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण पूरा हो जाने पर वो कैसा दिखेगा। अब ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट ने एक वीडियो जारी कर के बताया है कि अयोध्या में बना रहा राम मंदिर पूरा हो जाने के बाद अंदर और भीतर से कैसा दिखेगा। ये एक 3D वीडियो है, जिससे आप समझ सकते हैं कि भव्य और दिव्य राम मंदिर का स्वरूप और संरचना कैसा होगा। नीचे संलग्न किए गए ट्वीट में आप इस वीडियो को देख सकते हैं।

इस वीडियो को ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के जनरल सेक्रेटरी और ‘विश्व हिन्दू परिषद’ के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष चम्पत राय ने ट्विटर पर शेयर किया। ट्रस्ट ने इसे साझा करते हुए लिखा, “आप सबको निश्चित ही यह उत्कंठा रहती होगी कि प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर दिव्य और भव्य मंदिर बनने पर कैसा दिखेगा। आपको इस भव्य और दिव्य कृति का पूर्वाभास देने के लिए हमने एक 3D वीडियो के माध्यम से उसे प्रदर्शित करने का प्रयास किया है। जय श्री राम!”

जहाँ एक तरफ सभी राजनीतिक दल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अयोध्या में प्रचार अभियान में लगे हुए हैं, वहीं इसी चुनावी मौसम में ये वीडियो भी सामने आया है और चर्चा का विषय बन रहा है। इस वीडियो में मंदिर के हर हिस्से का डिजाइन दर्शाया गया है। फर्श से लेकर छत तक के स्वरूप और दीवालों पर कलाकृतियों के अलावा देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ भी आप देख सकते हैं। अयोध्या के मुख्य चौराहों पर LED के माध्यम से लोगों को इसका दर्शन कराया जा रहा है।

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद यहाँ भीड़ बढ़नी स्वाभाविक है, क्योंकि पूरे क्षेत्र को एक बड़े आध्यात्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्य मार्ग से राम मंदिर को जोड़ने वाले 100 फ़ीट चौड़ी सड़क का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। मंदिर की 20 फ़ीट ऊँची प्लिंथ का भी निर्माण हो रहा है। नीचे से मंदिर की सुरक्षा के लिए ‘रिटेनिंग वॉल’ बनाया जा रहा है। पानी की चोट और मिट्टी की कटान से ये मंदिर को बचाएगा।

हाल ही में चंपत राय के अलावा ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविन्द देव गिरी ने निर्माण कार्य का जायजा लिया। मंदिर के चारों तरफ नींव से भी गहरी और मोटी दीवार बनाई जा रही है। फर्श को 6.50 मीटर ऊँचा बनाया जा रहा है। ग्रेनाइट के पत्थरों से फर्श बन रहा है। मंदिर के पश्चिम में सरयू नदी बहती है। मई-जून में सरयू मैया का प्रवाह बढ़ जाता है। जमीन के नीचे भी 12 फ़ीट चौड़ी दीवार इसी कारण बन रही है। मंदिर निर्माण में आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है।

‘हिजाब न पहनने वाली महिलाओं का होता है रेप’: कॉन्ग्रेस नेता ने कहा – खूबसूरती छिपाए रखने के लिए लड़की को ये पहनना जरूरी

कर्नाटक के पी यू कॉलेज से शुरू हुआ हिजाब विवाद अब सियासी रूप लेता जा रहा है। हाल में इस मुद्दे पर हुबली में कॉन्ग्रेस नेता ने विवादित बयान दिया है। कॉन्ग्रेस नेता जमीर अहमद ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि हिजाब का अर्थ इस्लाम में पर्दा है जो महिला की सुंदरता को ढकता है। उनके अनुसार यदि महिलाएँ इसे न पहनें को उनका रेप हो सकता है।

जमीर अहमद से कहा, “हिजाब का अर्थ इस्लाम में पर्दा होता है। जब लड़की/बच्ची बड़ी होती है तो उसे हिजाब में रखते हैं यानी उसकी जो खूबसूरती होती उसे न दिखाने के लिए, छिपाए रखने के लिए, उसे पहनाया जाता है।”

आगे कॉन्ग्रेस नेता बोले, “आज आप देखिए हिंदुस्तान में रेप तेजी हो रहे हैं। ये सब इसलिए है क्योंकि औरतें पर्दे में नहीं रहतीं। ये आज से नहीं है और अनिवार्य भी नहीं है। लेकिन जो अपनी खूबसूरती छिपाना चाहते हैं, उसकी हिफाजत चाहते हैं वो लोग हिजाब पहनते हैं। ये आज से नहीं है बरसो से है।”

बता दें कि जमीर अहमद का ये बयान उस समय आया जब समाचार एजेंसी एएनआई के पत्रकार ने उनसे पूछा कि कुरान में कहीं नहीं कहा गया कि महिलाओं का ड्रेस कोड हिजाब होना चाहिए। इस पर कॉन्ग्रेस नेता ने अपनी प्रतिक्रिया दी और बताना चाहा कि ये अनिवार्य तो नहीं है पर इसे न पहनने से ही रेप हो रहे हैं।

मालूम हो कि इससे पहले जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस पूरे मामले को बीजेपी की साजिश करार दिया था। वहीं पूरे मुद्दे पर शनिवार को केरल गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था  इस्लाम में हिजाब उस तरह जरूरी नहीं है जैसे सिख धर्म में पगड़ी। उन्होंने कहा कि यह मुस्लिम लड़कियों को आगे बढ़ने से रोकने की एक साजिश है। राज्यपाल ने छात्रों से वापस क्लासरूम में लौटकर पढ़ाई करने को कहा था।

‘कोई नागा साधु कॉलेज में एडमिशन लेकर बिना कपड़ों के आए तो?’: स्कूल-कॉलेजों में कॉमन ड्रेस कोड के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

कर्नाटक से उठे हिजाब विवाद ने पूरे देश में सियासी घमासान मचा रखा है। इस बीच एक लॉ स्टूडेंट ने सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दायर कर देशभर के शैक्षणिक संस्थानों के लिए समान ड्रेस कोड लागू करने की माँग की है। यह याचिका दायर करने वाले लॉ स्टूडेंट कोई और नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय के 18 वर्षीय बेटे निखिल उपाध्याय हैं।

याचिकाकर्ता निखिल उपाध्याय ने पीआईएल में कहा है कि देश में समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाए रखने के लिए कॉमन ड्रेस कोड बहुत ही जरूरी है। कॉमन ड्रेस कोड ही एक मात्र तरीका है, जिससे जातिवाद, साम्प्रदायिकता और अलगाववाद से निपटा जा सकता है। इसके साथ ही निखिल उपाध्याय ने इस मामले की जल्द सुनवाई की माँग करते हुए शीर्ष अदालत से केंद्र सरकार को इस मुद्दे के समाधान के लिए न्यायिक आयोग या एक्सपर्ट कमेटी का गठन करने की भी माँग की है।

हिजाब के मुद्दे को उठाते हुए निखिल ने याचिका में नागा साधुओं का हवाला दिया और कहा कि अगर कभी कॉलेज में एडमिशन लेकर कोई नागा साधु अपने धार्मिक परंपराओं का हवाला देते हुए बिना कपड़ों के कॉलेज चला जाएगा तो क्या होगा। याचिका में कहा गया है स्कूल-कॉलेज राष्ट्र निर्माण, रोजगार और ज्ञान के लिए होते हैं न कि धार्मिक प्रथाओं का पालन करने के लिए। इसके साथ ही शीर्ष अदालत से यह भी माँग की गई है कि वो विधि आयोग को राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने को लेकर 3 माह के अंदर एक रिपोर्ट दे। निखिल ने केंद्र व राज्यों को सभी शिक्षण संस्थानों में ड्रेस कोड लागू करने के लिए निर्देश देने की भी गुहार लगाई है।

कॉमन ड्रेस कोड से मजबूत होगा लोकतंत्र

निखिल उपाध्याय ने अपनी याचिका में ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, चीन और सिंगापुर जैसे देशों का हवाला देते हुए दावा किया इन देशों में कॉमन ड्रेस कोड लागू है औऱ इसी तरह से भारत में इसे लागू करना होगा। एक ड्रेस कोड से समानता बढ़ेगी और इससे देश के लोकतंत्र का ताना-बाना और अधिक मजबूत होगा।

‘व्हीलचेयर नहीं जाएगी अंदर, कस्टमर डिस्टर्ब होंगे’ : दिव्यांग लड़की को रेस्टोरेंट ने एंट्री देने से किया मना, विवाद के बाद माँगी माफी

कुछ दिन पहले दिल्ली में एक महिला को साड़ी पहनकर होटल में घुसने से मना किए जाने के विवाद के बाद एक नई घटना गुरुग्राम के रास्ता रेस्टोरेंट से सामने आई है। यहाँ एक दिव्यांग लड़की को व्हीलचेयर के साथ रेस्टोरेंट में एंट्री देने से मना कर दिया गया। अब लड़की ने इस मामले पर शिकायत सोशल मीडिया पर की है। लड़की का नाम सृष्टि है।

सृष्टि के ट्वीट के अनुसार, वह अपने दोस्त और उसके परिवार वालों के साथ रास्ता होटल में शुक्रवार को खाना खाने गई थी लेकिन रेस्टोरेंट कर्मियों ने बताया कि व्हीलचेयर अंदर नहीं जा सकती। शुरू में उन्हें लगा कि रेस्टोरेंट के लोगों का कहना है कि व्हीलचेयर अंदर नहीं जा पाएगी, इसलिए उन्होंने कहा कि वो लोग मैनेज कर लेंगे, बस उनके लिए एक टेबल बुक कर दिया जाए।

सृष्टि कहती हैं कि जब उन लोगों ने इस बात को कहा तो उन्हें जवाब आया कि व्हीलचेयर अंदर नहीं जाएगी, इससे कस्टमर डिस्टर्ब हो जाएँगे। सृष्टि के अनुसार, इसके बाद उनकी एंट्री मना कर दी गई। जब बहुत बहस हुई तो उन्हें बाहर टेबल ऑफर हुआ। जहाँ की सिटिंग सुविधा बहुत वाहियात थी और बाहर ठंड भी ज्यादा थी। सृष्टि ने कहा कि शारीरिक दिक्कत की वजह से वो ज्यादा देर ठंड में नहीं बैठ सकती थीं वो जगह उनके बहुत असुरक्षित थी।

वह पूछती हैं कि आखिर उन्हें बाहर क्यों बिठाया गया? बाकी सबसे अलग? अगर बाहर बैठने की इच्छा होती तो वो लोग पहले ही माँग लेते? उनका सवाल है कि आखिर उन्हें बाहर जाने के लिए क्यों कहा गया? वह अपने ट्वीट में पूछती हैं कि क्या उनका होना इतना ज्यादा परेशान करने वाला है? आखिर उन्हें छोटी-छोटी चीजों के लिए मना कर दिया जाता है? अपने ट्वीट में वह लिखती हैं, “मुझे सार्वजनिक स्थान पर प्रवेश से वंचित क्यों किया गया? वे कौन होते हैं जो मेरी एंट्री को ऐसे ही नकार देते हैं?”

इन ट्वीट्स को करने के बाद सृष्टि ने कई सोशल मीडिया यूजर्स को अपने ट्वीट में टैग किया और मामला सोशल मीडिया पर उठने के बाद रेस्टोरेंट ने इस संबंध में माफी भी माँगी। रेस्टोरेंट ने कहा, “हम समावेशिता के लिए खड़े हैं और कभी नहीं चाहेंगे कि कोई भी किसी भी कारण से अकेला महसूस करें। अपने प्रयासों के तहत हम पहले ही व्यक्तिगत तौर पर माफी माँग चुके हैं।” रास्ता के सह-संस्थापक गौतमेश सिंह ने उनके ट्वीट का जवाब दिया। उन्होंने लिखा, “मैं व्यक्तिगत रूप से इस घटना को देख रहा हूँ। मैं पूरी टीम की ओर से आपके किसी भी बुरे अनुभव के लिए माफी माँगता हूँ। कृपया निश्चिंत रहें यदि हमारा कोई सदस्य गलत पाया जाता है, तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।”

स्टाफ ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसने उन्हें बाहर बैठने की पेशकश की थी क्योंकि अंदर एक डांस फ्लोर था और भीड़ थी। यह पूछे जाने पर कि क्या रेस्टोरेंट व्हीलचेयर के अनुकूल है, उन्होंने जवाब दिया कि ऐसा नहीं है क्योंकि इसमें सीढ़ियाँ हैं।

‘हिजाब ही नहीं, मुस्लिमों की सारी निशानियाँ मिटा देगी BJP’: बोलीं महबूबा मुफ़्ती – एक दिन पाकिस्तान से बात करनी ही पड़ेगी

कर्नाटक (Karnataka) के उडुपी से शुरू हुए हिजाब विवाद (Hijab) पर सियासत लगातार जारी है। इसी क्रम में रविवार (13 फरवरी, 2022) जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने इस मुद्दे को उत्तर प्रदेश चुनाव (Uttar Pradesh Assembly polls 2022) से जोड़ते हुए कहा कि ये मामला अब यहाँ नहीं रुकेगा। अब ये लोग (बीजेपी) मुस्लिमों के सभी प्रतीकों पर हमले करेंगे।

महबूबा ने हिजाब विवाद को भाजपा की साजिश करार दिया और कहा, “भारतीय मुसलमानों के लिए सिर्फ भारतीय होना ही काफी नहीं है, उन्हें बीजेपी भी होना चाहिए।”

पीडीपी चीफ ने आगे कहा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसको लेकर काफी बातें हो रही हैं और हमारे मुल्क की आलोचना हो रही है कि एक ड्रेस कोड है। अगर है भी तो दुपट्टा आप सिर पर जिस तरह से चाहो वैसे लपेट सकते हो। एक तो ये यूपी इलेक्शन के लिए है और फिर ये हमारी और निशानियों पर हमले करेंगे।”

इसी क्रम में महबूबा का जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने का दर्द भी उभर आया। उन्होंने दावा किया कि जिस तरह से अनुच्छेद-370 को हटाया गया है उससे यह मसला सुलझने की जगह और उलझ गया है। महबूबा ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को राजनीतिक मसला करार दिया और आरोप लगाया भाजपा इसे सांप्रदायिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है।

पाकिस्तान प्रेम फिर से झलका

हिजाब विवाद पर बीजेपी को घेरने की कोशिशों में लगीं महबूबा मुफ्ती का पाकिस्तान प्रेम भी उभर आया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को लेकर एक दिन केंद्र सरकार को पाकिस्तान से बात करनी ही पड़ेगी।

गौरतलब है कि कर्नाटक में हिजाब के लिए मुस्लिम लड़कियों के विरोध की शुरुआत 2 जनवरी 2022 को उडुपी जिले के प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज से हुई थी। इस विरोध प्रदर्शन को लेकर खुलासा हो चुका है कि इसके पीछे कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पीएफआई और उसकी छात्र शाखा कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया का हाथ है। उसी ने इन लड़कियों को ट्रेनिंग दी थी।

एक ही हिन्दू परिवार के 5 भाइयों को गाड़ी चढ़ा कर मार डाला, ‘गुनाह’ – मंदिर बनाना चाहते थे: इस्लामी भीड़ ने किया था हमला, पिता की भी मौत

बांग्लादेश (Bangladesh) के चटगाँव से एक हिंदू परिवार के पाँच लोगों की मंगलवार (8 फरवरी, 2022) को एक तेज रफ्तार गाड़ी से टक्कर के कारण मौत (Death) हो गई। जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। माना जा रहा है कि इस एक्सीडेंट को पूरी प्लानिंग के तहत किया गया है। यह घटना बांग्लादेश के चटगाँव डिवीजन के कॉक्स बाजार जिले के चकरिया उपजिला में घटी।

हादसा इतना भयानक था कि एक ही परिवार के पाँच लोगों की मौके पर मौत हो गई। जबकि इसमें घायल हुए तीन अन्य लोगों में से एक चटगाँव के अस्पताल में जिंदगी औऱ मौत के बीच झूल रहा है। पीड़ित परिवार की सदस्य मुन्नी सुशील ने इस घटना को हत्या करार दिया है। उसने बताया कि इस टार्गेटेड अटैक में उसने अपने पाँच भाई खोए हैं, जबकि दो भाई और एक बहन घायल हुए हैं।

इस हमले में जिनकी मौत हुई वो पाँच भाई डॉक्टर अनुपम सुशील (47), निरुपम सुशील (45), दीपक सुशील (40), चंपक सुशील (30) और स्वर्ण सुशील (24) हैं। 10 दिन पहले ही उनके पिता सुरेश सुशील की मौत हो गई थी। उन्हीं के अंतिम संस्कार के तौर पर घटना वाले दिन परिवार के सभी सात बेटे और दो बेटियाँ मंदिर में पूजा करने के लिए जा रहे थे। लौटते वक्त सुबह करीब पाँच तेज रफ्तार पिकअप गाड़ी ने उन्हें ठोंक दिया। उनके ऊपर गाड़ी चढ़ाने के बाद वो कॉक्स बाजार की तरफ चली गई। इस हमले में सातों घायल हुए थे, जिनमें से पाँच की छत्ताग्राम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मौत हो गई।

वहीं रक्तिम सुशील की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि दूसरे भाई प्लाबन सुशील की हालत स्थिर है। बहन हीरा सुशील के पैर का ऑपरेशन करना पड़ा है।

इस घटना को याद कर वो कहती हैं, “दुर्घटना वाले दिन मेरे 6 भाई और एक बहन सड़क से करीब दो फीट की दूरी पर थे। जबकि मैं और मेरा भाई सड़क पर थे। पिकअप वाले ने हम दोनों को ठोकर मारने की जगह मेरे भाइयों को कुचल दिया। इसके बाद वो फिर से लौटा औऱ मेरे भाइयों और मेरी बहन को कुचल दिया।”

मुन्नी ने बताया, “पिछले चार दिनों से हमने कुछ भी नहीं खाया। मैं अपने भाइयों के छोटे बच्चों को देखकर सह नहीं पा रही हूँ। पूरी परिवार अमानवीय स्थिति में जी रहा है।” मुन्नी ने इस घटना को सोची-समझी हत्या करार दिया और कहा कि अगर ये साजिश नहीं थी तो सड़क पर खड़े हम दोनों को मारने के की जगह सड़कें से दूर मेरे भाइयों को कुचल दिया?

मृतकों का अंतिम संस्कार (साभार: डेली स्टार)

इसके पीछे का कारण बताते हुए मुन्नी कहती हैं कि 29 जनवरी 2022 को 40-50 लोगों की भीड़ ने उसके परिवार पर हमला किया था। उस घटना के एक दिन बाद ही उसके पिता की हार्ट अटैक से मौत हो गई। मुन्नी कहती हैं कि उनके पिता इस इलाके में दुर्गा पूजा आयोजित करते थे, जिससे इस्लामी कट्टरपंथी पहले से ही चिढ़े हुए थे। पिछले महीने जनवरी में विदेश में रहने वाला उसका भाई दीपक सुशील हसीनापारा इलाके में छोटा सा मंदिर बनाने के लिए 4000 ईंट और बजरी लेकर आया था, जिससे मुस्लिम नाराज हो गए थे।

इस गाँव में करीब 30-35 हिंदू परिवार रहते हैं, लेकिन जब से मंदिर का निर्माण शुरू किया गया था तभी से मुन्नी के पिता को धमकाया जाने लगा था। अपने बच्चों को खोने वाली माँ मृणालिनी सुशील ने रोते हुए कहा, “मैं अपने पाँचों बेटों में पोते-पोतियों के साथ किसके पास जाऊँगी? अगले सोमवार को चंपक की बेटी एक महीने की हो जाएगी। मेरे बच्चों ने कभी किसी का कोई अहित नहीं किया। मेरे पाँच बच्चों को इस तरह क्यों मारा गया?”

29 जनवरी 2022 को हुए हमले के बारे में मृणालिनी बताती हैं कि उन्होंने हम पर हमला किया, क्योंकि हम एक मंदिर बनाना चाहते थे। लेकिन हम हमलावरों नहीं पहचान पाए। मृणालिनी ने ये भी बताया कि 29 जनवरी को जब हमला हुआ था तो उन्होंने अपने दो बच्चों को तो बिस्तर के नीचे छिपा दिया था। शुक्रवार को सभी मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें पाँचों की पत्नियाँ शामिल हुईं।

हमले में जीवित बचे भाई प्लाबन चंद्र सुशील ने चकरिया थाने में केस दर्ज कराया है। पुलिस ने घटना वाले दिन ही गाड़ी को बरामद कर लिया, जबकि उसका ड्रायवर सहिदुल इस्लाम उर्फ ​​सैफुल फरार हो गया था। लेकिन शुक्रवार को उसे भी ढाका के मोहम्मदपुर इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया। उसने ये कबूल कर लिया है कि हादसे वाले दिन वो ही गाड़ी चला रहा था। लेकिन हत्या की बात से वो इनकार कर रहा है। उसका कहना है कि कोहरे के कारण उसे कुछ दिखा नहीं था और गाड़ी तेज होने से वो उसे कंट्रोल नहीं कर पाया। उसने ये भी बताया कि वो उन्हें देखने के लिए वापस लौटा था, लेकिन गाड़ी के मालिक ने उसे रुकने के बजाय गाड़ी तेजी से भगाने के लिए कहा था। इस घटना के बाद से गाड़ी का मालिक महमूदुल करीम फरार है।

हालाँकि, गाड़ी के ड्रायवर की कहानी के मानने से इनकार करते हुए हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के कॉक्स बाजार के अध्यक्ष दीपांकर बरुआ और सचिव प्रियतोष शर्मा ने इस घटना को पूर्व नियोजित हत्या (Murder) करार दिया है।

इससे पहले भी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं का नरसंहार किया है

इससे पहले पिछले साल 13 अक्टूबर 2021 के दिन सुबह कट्टरपंथी इस्लामियों ने हिंसा फैलाने के मकसद से कमिला जिले के नानुआर दिघिर में एक दुर्गा पूजा पंडाल में जाकर वहाँ पर कुरान की एक कॉपी रख दी औऱ उसकी फोटो खींचकर वहाँ से चला गया। कुछ घंटों बाद कुरान के कथित अपमान किए जाने की बात को सोशल मीडिया पर फैला दिया गया।

हालाँकि, कमिला महानगर पूजा उद्जापोन कमेटी के महासचिव शिबू प्रसाद दत्ता ने कुरान का अपमान किए जाने की बात से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि जब गार्ड सो रहा था तो किसी ने नानुआ दिघीर पार में एक दुर्गा पूजा मंडप में सुबह-सुबह कुरान की कॉपी रख दी थी।

विश्व हिंदू महासंघ (बांग्लादेश चैप्टर) के महासचिव दीपन मित्रा ने कहा, “उन्होंने 13 से 16 अक्टूबर 2021 के दौरान 315 से अधिक मंदिरों की मूर्तियों में तोड़फोड़ की और बांग्लादेश के 30 से अधिक जिलों में सभी मूल्यवान चीजें लूट लीं। कुमिला, चाँदपुर, नोआखली, चटगाँव कॉक्स बाजार, फेनी, चपाई नवाबगंज और अन्य जिलों में करीब 1500 हिंदू घरों पर हमला किया और तोड़फोड़ की गई।

मित्रा ने उन 10 हिंदुओं के नाम भी गिनाए, जिन्हें ईशनिंदा की आड़ में कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने मार डाला था। इनमें माणिक साहा, जतन साहा, प्रशांत दास, पुजारी निमाई कृष्ण, 4 अज्ञात हिंदू पुजारी और 1 और अज्ञात पीड़ित शामिल थे। इसके अलावा 23 हिंदू महिलाओं और लड़कियों के साथ बलात्कार किया गया और 17 हिंदू लापता हुए।

राजस्थान में असम की महिला को बुला कर किया गैंगरेप, हाथ बाँध कर दूसरी मंजिल से फेंका: 4 आरोपितों में एक सरकारी शिक्षक भी

राजस्थान के चूरू जिले के एक होटल में एक 25 वर्षीया युवती के साथ गैंगरेप की खबर है। बाद में पीड़िता को दूसरी मंज़िल की खिड़की से नीचे फेंक दिया गया। पीड़िता दिल्ली से चूरू नौकरी की तलाश में गई थी। लड़की मूल रूप से असम की बताई जा रही है जो फिलहाल दिल्ली में रहती थी। घटना शुक्रवार (11 फ़रवरी, 2022) की रात की है। आरोपितों में एक सरकारी शिक्षक भी है। चूरू पुलिस इस मामले में केस दर्ज कर के जाँच कर रही है।

होटल रेलवे स्टेशन के पास मौजूद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित देवेंद्र सिंह और विक्रम सिंह ने लड़की को होटल के कमरे में खींच लिया। पीड़िता के साथ मारपीट कर के उसके हाथों को रस्सी से बाँध दिया गया। बाद में लड़की को दूसरी मंजिल की खिड़की से नीचे फेंक दिया गया। लड़की बिजली के खम्बे पर गिरी। उसके हाथों में बाँधी गई रस्सी खम्बे में उलझ गई और वो सीधे जमीन पर टकराने से बची। बाद में उसे पुलिस ने छुड़ाया।

पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए भेज दिया गया है। केस चूरू के महिला थाने में दर्ज किया गया है। अब तक इस केस में देवेंद्र सिंह, विक्रम सिंह, भवानी सिंह और सुनील राजपूत की गिरफ्तारी की जा चुकी है। सब इंस्पेक्टर ममता सारस्वत ने बताया कि पीड़िता ने आरोपितों की पहचान की है।

गौरतलब है कि राजस्थान में महिलाओं सुरक्षा पिछले कुछ महीनों से एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। बीते 10 जनवरी को बाँसवाड़ा में एक मानसिक विक्षिप्त महिला को 2 लोगों ने निर्दयता से मारा था। 9 जनवरी को जोधपुर में कक्षा 11 की एक छात्रा के साथ 3 आरोपितों ने गैंगरेप किया था। गैंगरेप से पहले किए गए अपहरण में छात्रा का टीचर भी शामिल था। बीते 8 जनवरी को एक ढाई साल की बच्ची से रेप किया गया था। साथ ही 25 जनवरी को भीलवाड़ा में एक 19 वर्षीया मूक बधिर लड़की का चित्तौड़गढ़ के 3 आरोपितों द्वारा रेप किया गया था। बाद में पीड़िता गर्भवती हो गई थी। 12 जनवरी को एक नाबालिग लड़की बुरी हालत में अलवर के फ्लाईओवर पर मिली थी। लड़की के प्राइवेट पार्ट से खून आ रहा था। उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।

नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आँकडो के अनुसार राजस्थान में साल 2020 में सर्वाधिक रेप और रेप के प्रयास के केस दर्ज हुए हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर में प्रति लाख आबादी पर 28.1 रेप केस पाए गए जो देश की राजधानी दिल्ली से लगभग 2 गुना हैं। दिल्ली में यह आँकड़ा 12.8 प्रति लाख है।

वो व्यक्ति जिन्होंने 15 पुस्तकों में समेटी केरल के मंदिरों की सारी जानकारियाँ: बनाया ‘मंदिरों का इनसाइक्लोपीडिया’, 30 साल लगे रहे

मंदिरों का इनसाइक्लोपीडिया तैयार करने वाले केरल के एस जयशंकर का शुक्रवार (11 फरवरी, 2022) को निधन हो गया। उन्होंने इस काम में अपने दो दशक खपा दिए। इसके बाद राज्य के मंदिरों पर एक इकसाइक्लोपेडिया तैयार किया। निधन के समय उनकी उम्र 86 साल थी। वो अपने पीछे 15 वॉल्यूम की पुस्तकों के रूप में एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं, जिसकी बराबरी शायद ही कोई अन्य काम कर सके। उन्होंने 1300 मंदिरों के बारे में बृहद जानकारियाँ इकट्ठी की।

उन्होंने अपने निधन से कुछ दिन पहले ही इस श्रृंखला का 15वाँ वॉल्यूम पूरा किया था। इसमें केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के मंदिरों के बारे में जानकारियाँ हैं। वो 1993 में केरल के सेन्सस ऑपरेशन्स में बतौर डिप्टी डायरेक्टर रिटायर हुए थे। उस समय उनकी उम्र 58 वर्ष थी। उससे एक साल पहले सेन्सस डायरेक्ट्रेट ने मंदिरों की संख्या गिनने का प्रस्ताव सामने रखा था और एक पुस्तक भी प्रकाशित किया था। ये जानकारी उनके दामाद एस गोपाकुमार ने दी।

एस जयशंकर ने मंदिरों का इनसाइक्लोपीडिया क्रिएट किया था

उन्होंने बताया कि 1991 में जन जनगणना पूरी हो गई थी, तब केरल के सांस्कृतिक पहलुओं को समेटने के काम पर भी चर्चा हुई थी। तभी से इस पर काम शुरू हुआ। एस जयशंकर ने ये काम अपने हाथ में लिया और इसके लिए दूर-दूर तक यात्राएँ की। इस दौरान वो ऐतिहासिक साक्ष्यों को समेटते हुए सूचनाएँ इकट्ठी करते चले। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद इस मैराथन कार्य का जिम्मा उठाया। वो एक आध्यात्मिक व्यक्ति थे, ऐसे में इस कार्य के प्रति उनकी गहरी आस्था थी।

‘भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड’ के जनरल मैनेजर के रूप में रिटायर हुए उनके दामाद बताते हैं कि एस जयशंकर प्रतिदिन 8 घंटे इस कार्य में देते थे और इस तरह 13 जिलों के मंदिरों का एक इनसाइक्लोपीडिया तैयार हुआ। वो ओट्टपलम के रहने वाले थे। 1997 में इसका पहला वॉल्यूम रिलीज हुआ था, जिसमें मंदिरों की कलाकृतियाँ, उनके बारे में सामान्य सूचनाएँ, वहाँ के रीति-रिवाजों, संरचना, पेंटिंग्स, पूजा पद्धति के इतिहास और मंदिरों के प्रकार को लेकर जानकारियाँ थीं।

एस जयशंकर की पत्नी एस आनंदन भी एक सरकारी महिला कॉलेज से जूलॉजी प्रोफेसर का कार्यकाल पूरा कर के रिटायर हुई थीं। दस्तावेजों की प्रूफरीडिंग में वो अपने पति की मदद करती थीं। उनके दामाद का कहना है कि उन्होंने अपनी पुस्तकों में अपनी आत्मा और दिल को लगा दिया। अंतिम वॉल्यूम का काम भी पूरा हो गया था और उसकी प्रूफरीडिंग चल रही थी। अगले तीन महीनों में इसे भी प्रकाशित कर दिया जाएगा। परिवार ने उनके निधन के बाद उनके इस भगीरथ प्रयास को पूरा करने का बीड़ा उठाया है।