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कैराना को आज भी डराते हैं फुरकान, मुकीम, साबिर… सपा सरकार की ‘गुंडई’ पर योगी राज का ‘डंडा’ भारी

उत्तर प्रदेश (UP Election 2022) में पहले चरण में 10 फरवरी 2022 को 11 जिलों की 58 सीटों पर वोट डाले जाएँगे। इसमें कैराना (Kairana) जैसी चर्चित सीट भी है। कैराना में बीजेपी की मृगांका सिंह (Mriganka Singh) और सपा के नाहिद हसन (Nahid Hasan) के बीच सीधा मुकाबला है।

हिंदुओं के पलायन के कारण कुछ साल पहले राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आने वाले कैराना में कभी फुरकान, मुकीम काला, साबिर जंधेड़ी का खौफ था। आज भी दबी जुबान लोग बताते हैं कि कैसे अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार के जमाने में नाहिद हसन के परिवार के दबदबे के आगे पुलिस प्रशासन बेबस था। गुंडे हवालात से छुड़ा लिए जाते थे। रंगदारी नहीं देने पर कारोबारी अपनी ही दुकानों में दिनदहाड़े मार डाले जाते थे। आज इस कैराना में कानून-व्यवस्था दुरुस्त बताई जा रही। चुनावी चर्चाओं में अजयपाल शर्मा, अजय कुमार, सुकीर्ति माधव, प्रेम वीर सिंह राणा जैसों के किस्से हैं।

अजयपाल, सुकीर्ति, प्रेम वीर… किसी उम्मीदवार के नाम नहीं हैं। ये किसी पार्टी से ताल्लुक नहीं रखते। ये चुनाव लड़वा भी नहीं रहे। न चुनावी राजनीति बना रहे और न चुनावी नारे गढ़ रहे। असल में ये उत्तर प्रदेश के पुलिस अफसर हैं, जिन्होंने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ताबड़तोड़ एक्शन लिए। न केवल अपराधियों को जेल के भीतर डाला, एनकाउंटर किए, बल्कि हिंदुओं के मन से उनका खौफ मिटाने के लिए थाने में हवन तक करवाए गए। पुलिसिंग के साथ व्यवसाइयों, नागरिकों को जोड़ा ताकि उनका विश्वास फिर से कानून पर बहाल हो।

यह हाल केवल कैराना का ही नहीं है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी आपको ​दिनेश कुमार पी, विद्यासागर मिश्रा, आकाश तोमर, कृष्ण कुमार गुर्जर जैसे अधिकारियों के किस्से लोग चाव से सुनाते हैं।

हर तरफ कानून-व्यवस्था में सुधार के चर्चे

यह कानून-व्यवस्था में सुधार ही है, जिससे कैराना सहित पश्चिम उत्तर प्रदेश की तमाम सीटों पर बीजेपी को अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त दिखती है। इस मोर्चें पर योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने जो काम किया है, उसके आगे अन्य मुद्दे गौण हैं। कागजों के समीकरण जमीन पर टूटते दिख रहे हैं। कैराना के अमित स्वीट्स के मालिक कहते हैं, “जिंदा रहेंगे, चैन से रहेंगे तो आदमी महँगाई से लड़ लेगा। बीमारी से लड़ लेगा। जान है तो जहान है।” गंगोह विधानसभा क्षेत्र के महंगी गाँव के त्रिलोचन सिंह कहते हैं, “हमारे तरफ तो भाजपा ही है। इस सरकार में गुंडागर्दी खत्म है। पहले गुंडागर्दी थी। पशु भी खोल के ले जाते थे। रात में मार कुटाई भी करते थे। घर में घुसकर। खेत में से मोटर निकाल लेते थे। अब गुंडागर्दी खत्म है।” मुस्लिम बहुत देवबंद के मुर्तजा कुरैशी कहते हैं, “कानून-व्यवस्था इस सरकार में सबसे अच्छी है। भाजपा विधायक हिंदू-मुस्लिम में भेदभाव नहीं करते।”

सपा सरकार की गुंडागर्दी

पूर्ववर्ती सपा सरकार के कार्यकाल में किस तरह की गुंडागर्दी थी, इसे कैराना की कुछ घटनाओं से समझा जा सकता है। इनकी वजह से ही हिंदू पलायन को मजबूर हुए थे। 16 अगस्त 2014 को फुरकान ने कारोबारी विनोद सिंघल को दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया था। 24 अगस्त 2014 को कारोबारी भाइयों राजेंद्र उर्फ राजू और शंकर की भरे बाजार उन्हीं की दुकान पर हत्या कर दी गई थी। इस दुकान का शटर आज भी गिरा है। इनकी दुकान कैराना में जिस जगह पर थी, उससे कुछ ही मीटर की दूरी पर सर्कल पुलिस ऑफिसर का कार्यालय और थाना है। विनोद की दुकान कैराना मेन मार्केट में है। अब उनके भाई वरुण सिंघल इस दुकान पर बैठते हैं।

कैराना में अब नहीं अखिलेश राज वाला खौफ

कैराना व्यापार मंडल के अध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता ने ऑपइंडिया को बताया, “यहाँ के दो बदमाश बड़े कुख्यात थे। एक फुरकान और दूसरा मुकीम काला। रंगदारी नहीं देने पर एक हफ्ते के भीतर तीन दुकानदारों की हत्या कर दी गई थी। एक हत्या तो मेरी दुकान से 5-7 दुकान आगे ही की गई थी। अब माहौल अच्छा हुआ है और पलायन करने वाले वापस आए हैं।” यह पूछे जाने पर कि उस समय प्रशासन व्यापारियों की सुनवाई करता था, गुप्ता कहते हैं, “हमलोग जब शिकायत लेकर जाते थे तो अधिकारी कहते थे देखते हैं। लेकिन होता कुछ नहीं था। हमें लगता था कि ऊपर जो सरकार बैठी है, उसके कारण ही कुछ नहीं हो रहा। अब भी तो वही पुलिस है। वही प्रशासन है। अब क्यों टाइट काम कर रहा है? अब रंगदारी वाली घटना नहीं होती। कोई किसी को परेशान नहीं करता। सब आराम से व्यापार कर रहे हैं। पहले व्यापारी दुकान बंद करके जाते थे तो उनका थैला छीन लेने की भी घटनाएँ होती थी, जिसमें उनका पैसा, हिसाब-किताब होता था। ऐसी घटनाएँ अब नहीं होती है। कई गाँव ऐसे हैं जहाँ पहले रात को जाने में डर लगता था। अब लोग बेरोकटोक आ जा रहे। उस समय व्यापारियों में ऐसा खौफ था कि सब जल्दी से जल्दी दुकान बंद कर सुरक्षित घर चले जाना चाहते थे। अब ये डर नहीं रहा तो आराम से दुकान बंद करते हैं।”

चुनाव के अन्य मुद्दों को लेकर पूछने पर गुप्ता कहते हैं, “कैराना में आतंक ज्यादा बढ़ गया था। यहाँ के लोगों का कहना था कि चाहे खाना एक टाइम खाना पड़े, लेकिन कानून-व्यवस्था सुधरनी चाहिए। इसमें सुधार आया है। लोग चाहते हैं जो थोड़ी-बहुत बदमाशी बची हुई है अब वो भी खत्म हो जाए। आज भी यहाँ के लोगों के लिए कानून-व्यवस्था ही सबसे प्रमुख मुद्दा है।”

कैराना मेन मार्केट में विनोद सिंघल की दुकान, दाएँ मार डाले गए कारोबारी भाइयों की सालों से बंद पड़ी दुकान

सपा की सरकार में सुनवाई थी ही नहीं

केवल कारोबारी ही नहीं, कैराना के आम नागरिक भी कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार को लेकर योगी सरकार की प्रशंसा करते हैं। फतेहपुर गाँव के कासिम अली का कहना है, “हमारे यहाँ जो मेन काम हुआ है वो है कि पहले जो चोरी-डकैती, घोटाले होते थे, वह अब बहुत कम हो गया है। कोई भी अब रात में आ-जा सकता है। कोई परेशानी नहीं हुई इस सरकार में। पहले की सरकारों में यहाँ घर से निकलना भी मुश्किल हो गया था। सुनवाई कहीं थी नहीं। आदमी किसी अधिकारी से मिलने जाता था तो वहाँ तक पहुँच ही नहीं पाता था।” यह पूछे जाने पर कि कानून-व्यवस्था के अलावा यहाँ कौन से मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, धर्मपाल कहते हैं, “कानून-व्यवस्था ही यहाँ मेन मुद्दा है।”

क्यों मजबूत बताई जा रहीं बीजेपी की मृगांका सिंह

मृगांका सिंह दो बार चुनावी राजनीति में किस्मत आजमा चुकी हैं। दोनों ही बार हार का सामना करना पड़ा। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें ही हराकर सपा के नाहिद हसन विधायक बने थे। लेकिन, यह कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर योगी सरकार का कामकाज ही है, जिसकी वजह से इस बार मृगांका की स्थिति पिछले दोनों बार के मुकाबले मजबूत बताई जा रही। मृगांका सिंह ने ऑपइंडिया को बताया, “2017 के बाद से जो कैराना में स्थिति है, लोग उससे बहुत संतुष्ट हैं। योगी जी ने जो जीरो टॉलरेंस अपराध के प्रति रखा है, उससे यहाँ की जनता बहुत खुश है। वे स्वयं कह रहे हैं कि योगी राज में राम राज है।” मृगांका दिवंगत हुकुम सिंह की बेटी हैं जिनकी इस इलाके में काफी प्रतिष्ठा रही है। उन्होंने ही सांसद रहते हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाया था।

नाहिद हसन मुस्लिम वोट के आसरे

नाहिद हसन के परिवार का भी इस इलाके में राजनीतिक दबदबा रहा है। इन पर कई गंभीर आरोप भी हैं। गैंगस्टर एक्ट में आरोपित नाहिद हसन को चुनावी पर्चा दाखिल करने के बाद जेल जाना पड़ा था। वे इसे अपने प्रचार का मुद्दा बना रहे हैं। उनकी अनुपस्थिति में चुनाव प्रचार की कमान सँभालने वाली उनकी बहन इकरा लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि मुस्लिम होने के कारण उनके परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है। वे इसके जरिए मुस्लिम वोटों में बिखराव रोकने का प्रयास कर रहीं हैं।

कैराना में खिलेगा कमल?

कैराना विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाता 318294 हैं। इनमें से करीब 1.37 लाख मुस्लिम हैं। सपा की पूरी सियासत इसके इर्द गिर्द ही सिमटी हुई है। लेकिन कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार के कारण यह वोट बैंक बिखरता दिख रहा है। यही वजह है कि इस बार समीकरण मृगांका सिंह के पक्ष में बताए जा रहे हैं। लेकिन, एक सच यह भी है कि नाहिद का जेल जाना भी मुस्लिमों के बीच चर्चा का एक मुद्दा है। लिहाजा नतीजे इस बात से तय होंगे कि अपने परंपरागत वोट बैंक ​से छिटके लोगों को नाहिद हसन मतदान से ऐन पहले अपने पाले में लाने में कामयाब रहते हैं या नहीं।

-साथ में राहुल पांडेय

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के विकास की योजना पर भड़की कॉन्ग्रेस, कहा – ‘गैर-ज़रूरी मुद्दे उठा रही BJP, मंदिर तो पहले से है ही’

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर बहस छिड़ गई है। भारतीय जनता पार्टी जहाँ सत्ता में आने पर श्री कृष्ण जन्मभूमि को ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ के तौर पर डेवलप करने की बात कर रही है, वहीं कॉन्ग्रेस ने राम मंदिर की तरह कृष्ण जन्मभूमि के डेवलपमेंट पर भी आपत्ति जाहिर की है।

कॉन्ग्रेस का मानना है कि मंदिर तो पहले से ही अच्छा बना हुआ है फिर आखिर इन सबकी क्या जरूरत। कॉन्ग्रेस कहती है कि भाजपा गैर जरूरी मु्द्दों को उठा रही है क्योंकि उनके लिए अब सब कुछ फेल हो चुका है।

बता दें कि भाजपा ने काशी मॉडल का उदाहरण देते हुए कृष्ण जन्मभूमि को अंतरराष्ट्रीय स्पॉट बनाने की बात कही थी। राज्य के विद्युत मंत्री श्रीकांत शर्मा ने एएनआई को बताया कि भाजपा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर काम कर रही है।

वह बोले, “हमने 500 साल राम मंदिर के लिए इंतजार किया। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा हुआ। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तरह हमारी सरकार ब्रज चौरासी कोस के आसपास भी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। ब्रज का धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के तौर पर विकास हमारी प्राथमिकता है। अभी भी अगर ये नहीं हुआ तो कब होगा।”

भाजपा की इसी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़ा करते हुए मथुरा से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी प्रदीप माथुर ने इस पूरे मुद्दे को गैर-जरूरी बताया। उन्होंने कहा, “मथुरा और वृंदावन के मुद्दे गैर जरूरी हैं। हमारे पास तो पहले कृष्ण जन्मभूमि है वो भी व्यापक क्षेत्र में। वे इस मुद्दे को उठाना चाहते हैं क्योंकि बाकी सब चीजें फेल हो गई हैं। उन्हें लगता है कि इसे मसला बनाकर वो जीत जाएँगे लेकिन लोग इस मुद्दे को नकार देंगे।” साल 2017 में चुनावी मैदान में हार का सामना करने वाला कॉन्ग्रेस प्रत्याशी प्रदीप माथुर ने कहा कि लोगों के लिए यमुना प्रदूषण, रोजगार और विकास जरूरी मुद्दे हैं। मंदिर का विकास नहीं।

याद दिला दें कि कृष्ण जन्मभूमि की भाँति ही कॉन्ग्रेस ने सालों साल राम मंदिर को लेकर अपना रुख अपनाया हुआ था। पार्टी के कुछ नेताओं ने तो श्रीराम को मानने से इंकार किया था और ये तक कहा था कि राम का अस्तित्व ही रामायण के कारण है। कोई ये नहीं बता सकता है श्रीराम इतिहास का हिस्सा हैं या साहित्य का। इन चुनावों में कृष्ण जन्मभूमि के विकास का विरोध करके एक बार फिर ये बहस छेड़ दी है कि आखिर कॉन्ग्रेस हिंदुओं की भावना की कद्र कब करेगी।

BJP सांसद साध्वी प्रज्ञा को वीडियो कॉल कर नंगी होने लगी लड़की, जान से मारने और वायरल करने की धमकी भी: भोपाल में FIR दर्ज

मध्य प्रदेश के भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर (Pragya Singh Thakur) ने रविवार (6 फरवरी, 2022) को मोबाइल पर अश्लील फोटो भेजने और वीडियो कॉल करने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। सांसद प्रज्ञा ने देर रात टीटीनगर पुलिस थाने में यह शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बताया कि वीडियो कॉल पर एक लड़की ने प्रज्ञा ठाकुर के सामने कपड़े उतारना शुरू कर दिया, जिसके बाद उन्होंने तुरंत कॉल डिस्कनेक्ट कर दी। इसके बाद आरोपितों ने वीडियो रिकॉर्डिंग भेजकर उनसे रुपए माँगे।

यही नहीं, उन आरोपितों ने भाजपा सांसद को जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि अगर रुपए नहीं दिए तो वह इस वीडियो को वायरल कर देंगे। पुलिस ने छेड़छाड़, गाली-गलौज और जान से मारने की धाराओं के तहत FIR दर्ज कर आरोपित की तलाश शुरू कर दी है।

साध्वी प्रज्ञा ने बताया कि रविवार शाम 7 बजे एक लड़की का वाट्सऐप पर वीडियो कॉल आया। वह कॉल पर अपने कपड़े उतारने लगी। लड़की को ऐसा करते देख उन्होंने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया। उन्होंने बताया कि मुझे पहले 6371608664 से वीडियो कॉल आई, फिर कुछ देर बाद एक अन्य नंबर 8280774239 से उन्हें उस लड़की ने रिकॉर्डिंग वीडियो भेजा। इसके साथ ही आरोपित ने उन्हें फोन करके धमकी दी कि अगर उन्होंने उसे पैसे नहीं दिए, तो इस अश्लील वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा। आरोपित ने सांसद से आपत्तिजनक शब्द भी कहे और जान से मारने की धमकी भी दी।

बता दें कि टीटी नगर टीआई चेन सिंह रघुवंशी ने बताया कि इस मामले से जुड़े सभी आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। दोनों नंबरों को ट्रेस करने के लिए साइबर सेल की मदद ली जा रही है। जल्द ही आरोपितों को पकड़ लिया जाएगा।

‘यूरिया के लिए किसानों पर लाठी चलवाने वाले उनका भला नहीं कर सकते’: बिजनौर, अमरोहा और मोरादाबाद की जनता से बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उत्तर प्रदेश के बिजनौर, मोरादाबाद और अमरोहा के मतदाताओं को सम्बोधित किया। ‘जन चौपाल’ कार्यक्रम में उन्होंने वहाँ की जनता से क्षमा माँगते हुए कहा कि चुनाव आयोग की तरफ से कुछ मुक्ति मिलने के कारण वो सोच रहे थे कि बिजनौर से वो चुनाव अभियान का प्रारंभ करेंगे। उन्होंने जानकारी दी कि मौसम के कारण उनका हेलिकॉप्टर नहीं निकल पाया, और उसके कारण उन्हें फिर एक बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ही जनता के दर्शन करने का सौभाग्य मिला।

उन्होंने कहा, “अपनी बात की शुरुआत मैं इस क्षेत्र के ही मशहूर कवि दुष्यंत कुमार जी की दो लाइनों से करूँगा। उन्होंने कहा था- ‘यहाँ तक आते आते सूख जाती हैं कई नदियाँ, मुझे मालूम हैं पानी कहाँ ठहरा हुआ होगा।’ 2017 से पहले, उत्तर प्रदेश में भी विकास की नदी का पानी ठहरा हुआ था। ये पानी नकली समाजवादियों के परिवार में, उनके करीबियों में ठहरा हुआ था। इन लोगों को सामान्य मानवी की प्यास से कभी कोई मतलब नहीं रहा। वो सिर्फ अपनी प्यास बुझाते रहे, अपनी तिजोरियों की प्यास बुझाते रहे।”

पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी, प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति को अपना परिवार मानती है और इसका मंत्र है- सबका-साथ, सबका-विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास। उन्होंने कहा कि इसी कारण भाजपा की सरकार में भाई-भतीजावाद और तुष्टीकरण की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि जब पीएम आवास योजना में घर मिलता है तो हर गरीब को घर मिलता है, उसकी जाति, उनका पंथ उसका क्षेत्र नहीं देखा जाता है। साथ ही कहा कि जब उज्ज्वला योजना से गैस का कनेक्शन मिलता है तो माताओं-बहनों से जाति नहीं पूछी जाती है।

बकौल पीएम मोदी, उनकी सरकार में जब मुफ्त राशन मिलता है तो किसी भी बिरादरी, किसी का समाज, कौन क्या है ये कुछ नहीं पूछा जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले पाँच साल में योगी जी की सरकार का प्रयास रहा है कि विकास कुछ इलाकों तक ही सीमित ना रहे और इसी सोच के साथ हमारी सरकार मुरादाबाद, बिजनौर, अमरोहा जैसे शहरों में भी कनेक्टिविटी बढ़ा रही है। पीएम ने कहा कि आजादी के इस अमृत काल में हमने उत्तर प्रदेश को लेकर कई सपने देखे हैं।

उन्होंने बताया कि हम चाहते हैं कि आने वाले 25 वर्षों में जब देश आजादी के 100 साल पूरे करे तो यूपी विकास की सुनहरी गाथा के साथ अपना परचम लहराए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि हमारी सरकार लगातार कोशिश में जुटी है और यहाँ के व्यापारियों, उद्यमियों, किसानों को हर संभव सहायता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि हमारी सरकार ने बिजनौर की नगीना काष्ठ कला को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में शामिल किया है। इस वजह से आज बिजनौर की कला की पहचान विदेशों में और बढ़ रही है।

उन्होंने उदाहरण गिनाए कि दुनिया भर में मशहूर मुरादाबाद के पीतल को भी ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना से जोड़ा गया है। साथ ही कहा कि करीब 500 किमी का दिल्ली-लखनऊ इकोनॉमिक कॉरिडोर भी मुरादाबाद से ही होकर गुजरेगा। अलीगढ़-मुरादाबाद कॉरिडोर का काम भी तेजी से पूरा किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि डबल इंजन की भाजपा सरकार में मुरादाबाद-बरेली कॉरिडोर भी पूरा होने जा रहा है। गंगा एक्सप्रेस वे के रूप में इस इलाके को बहुत बड़ी सौगात मिलने वाली है। बिजनौर से मुरादाबाद तक के 4 लेन हाइवे पर भी तेजी से काम हो रहा है। इससे पूरा जिला आसपास के सभी प्रमुख स्थानों से जुड़ जाएगा।

पीएम मोदी ने कहा, “उत्तर प्रदेश के कर्मठ योगी सरकार दिन रात मेहनत में लगी है। जिससे छोटे उद्यमियों को मदद मिल सके। बिजनौर, मुरादाबाद और अमरोहा के युवा के सामने अवसरों की कमी न हो। ये ही हमारी प्राथमिकता है। केंद्र सरकार और यूपी की भाजपा सरकार अपने किसान भाइयों के सम्मान और उनका अधिकार वापस दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। पिछले पाँच साल में गन्ना किसानों को डेढ़ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया है। इतना तो पहले की दो सरकारों में मिलाकर नहीं किया गया है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि चौधरी चरण सिंह जी के आदर्शों को अपनाते हुए हर किसान का सम्मान, ये हमारा ध्येय है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले की सरकारों में यूरिया खाद के लिए यूपी के किसानों ने लाठियाँ तक खाई हैं। उन्होंने कहा कि जिन्होंने किसानों को ये दिन दिखाए थे वे कभी किसानों का भला नहीं कर सकते हैं, वो सिर्फ किसानों को धोखा दे सकते हैं। उन्होंने याद कराया कि पहले की सरकारों में गन्ने की पर्ची से लेकर गन्ना बकाए के भुगतान तक हर जगह नकली समाजवादियों का ही बोलबाला था।

उन्होंने कहा, “पीएम किसान सम्मान निधि हो, छोटे किसानों की आर्थिक मदद हो या किसान भाइयों की फसल का बीमा हो, हमारी सरकार ने ये सब बैंक खातों में सीधा उपलब्ध कराया है, कोई बिचौलिया नहीं है। आज ये लोग चौधरी चरण सिंह जी की विरासत की दुहाई देकर आपको बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा पहले की सरकार में गेहूँ की जितनी सरकारी खरीद हुई थी, योगी जी की सरकार ने उससे दोगुने से भी ज्यादा गेहूँ MSP पर खरीदा है।”

उन्होंने आगे कहा, “अपने किसानों को, और पूरे पश्चिमी यूपी को मैं एक बात और याद दिलाना चाहता हूँ। आज जो लोग आपको बहकाने की कोशिश कर रहे हैं, उनसे ये जरूर पूछिएगा। जब उनकी सरकार थी, तब वो इस इलाके में, आपके गाँवों में कितनी बिजली देते थे। यूपी और पश्चिमी यूपी में ये बात होती थी या नहीं कि हमारा किसान और युवा बिना बिजली के मात खा जाता है, घर घर में ये चर्चा होती थी कि बिजली के अभाव में नौजवानों के भविष्य कैसे रौंदा जा रहा है। पहले की सरकारों का मॉडल समस्या पैदा करो फिर सहानुभूति के नाम पर सब समेट लो का था। उनके इस मॉडल से किसान, नौजवान, गरीब, शोषित, दलित सब परेशान थे।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आप याद करिए, महिलाओं से, हमारी बहनों-बेटियों से छेड़छाड़ कितनी आम बात थी। हालात इतने खराब थे कि चेन लूटे जाने पर इस बात का शुक्र मनाया जाता था कि चलो जान तो बच गई। उन्होंने कहा कि योगी जी की सरकार ने बेटियों को उस भय से मुक्त करके दिखाया है और बेटियों को उनका असल सम्मान दिलाया है। उन्होंने कहा कि योगी जी के शासन में अपराधी किस तरह जेल गए और माँग करते रहे कि हमें बंद कर दो। वो अपराधी सालों से इस चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें एक ही उम्मीद है कि जल्दी से जल्दी चुनाव आए, कैसे भी सरकार बदल जाए ताकि वो जेल से बाहर आ सके।

उन्होंने कहा, “ये अपराधी मना रहे हैं कि किसी भी तरह पुरानी वाली माफियाराज वाली सरकार आ जाए। जो अपराधी यूपी छोड़कर भाग गए थे वो उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार बदले और वो लौटकर आएँ। ये अपराधी चाहते हैं कि लूट डकैती छिनैती का जो धंधा पाँच साल से ठप्प पड़ा है, यूपी की जनता से उसकी भरपाई करें। इनके गुर्गे भी पूरी ताकत लगाए हुए हैं। ये लोग जात-पात के नाम पर बँटवारा करके भाजपा को रोकना चाहते हैं। मैं आपसे कहना चाहता हूँ, इस खेल से सावधान रहिएगा। इस चुनाव में और कुछ नहीं देखना है, केवल कमल छाप देखना है, केवल भाजपा को देखना है। भाजपा आएगी तो आपकी सुरक्षा होगी।”

नरसिंहानंद, पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ, जितेन्द्र त्यागी सहित 26 लोग थे मुस्लिमों के निशाने पर: किशन भरवाड केस में गिरफ्तार मौलाना अय्यूब के मोबाइल से खुले राज

किशन भरवाड हत्याकांड में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। News18 गुजराती की एक रिपोर्ट के अनुसार, जाँच एजेंसियों ने गाजियाबाद के डासना मंदिर के यती नरसिंहानंद और जितेंद्र नारायण त्यागी (पूर्व नाम वसीम रिजवी) सहित 26 लोगों के प्रोफाइल का खुलासा किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 26 नामों में से एक नाम एक न्यूज चैनल के संपादक का भी है। उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधी दस्ते, तेलंगाना पुलिस और अन्य सहित कई जाँच एजेंसियाँ ​​अहमदाबाद में जाँच में शामिल हुई हैं। इससे पहले गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने दिल्ली के मौलाना कमर गनी को गिरफ्तार किया था और उनके कार्यालय से इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त किए थे। इसके लिए बैंक खातों की जाँच की जा रही है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन 26 लोगों के प्रोफाइल फोन पर मिले, उनमें से दस में बीएस पटेल, पंकज आर्य, पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ, महेंद्रपाल आर्य, राहुल आर्य, राधेश्याम आचार्य, उपदेश राणा, उपासना आर्य, साजन ओदेदरा और आरएसएन सिंह शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक मौलाना अय्यूब के मोबाइल फोन में करीब 26 प्रोफाइल मिले हैं। ये लोग भी निशाने पर थे या नहीं, इसकी जाँच की जा रही है। बता दें कि मौलाना अय्यूब को अहमदाबाद के जमालपुर से गिरफ्तार किया गया था और उस पर भारवाड के हत्यारों को बंदूक मुहैया कराने का आरोप है। पुलिस इस बात की जाँच कर रही है कि कहीं ये लोग भी किशन भरवाड की तरह हत्या के राडार पर तो नहीं थे।

इससे पहले शनिवार को धंधुका की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने तीन मुख्य आरोपितों को 10 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।

किशन भरवाड हत्याकांड

25 जनवरी 2022 को, धंधुका के युवा किशन भरवाड की दो बाइक सवार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी, जब उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट साझा किया था जिसमें पैगंबर मुहम्मद का चित्रण था। मुस्लिमों को पैगंबर मुहम्मद की छवि आपत्तिजनक लगती है और इस तरह की बातें करने वालों को ईशनिंदा की संज्ञा देकर मारने को कट्टर मुस्लिमों द्वारा प्रोत्साहित किया जाता है।

किशन भरवाड की हत्या के बाद, पूरे भारत से कम से कम 6 मौलवियों को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। कई एजेंसियाँ ​​मामले की जाँच कर रही हैं और उन्हें हत्या के मामले में किसी बड़ी साजिश का संदेह है।

खगड़िया में सरस्वती पूजा विसर्जन में शामिल नाबालिग की हत्या, DJ बंद न करने पर बदमाशों ने चलाई गोली: बेगूसराय में एक घायल

बिहार (Bihar) के खगड़िया और बेगूसराय जिले से सरस्वती पूजा विसर्जन (Saraswati Puja Immersion) के दौरान हिंसक झड़प की खबरें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि रविवार (6 फरवरी, 2022) को खगड़िया में मानसी थाना क्षेत्र के रोहियार गाँव में मूर्ति विसर्जन के दौरान दो गुटों में हिंसक झड़प हो गई, जिसमें गोली लगने से एक 14 वर्षीय युवक की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, बेगूसराय में नाच के दौरान हर्ष फायरिंग में एक युवक गोली लगने से जख्मी हो गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोहियार गाँव में एक गुट मूर्ति को विसर्जित करने के लिए उसे कोसी नदी घाट की तरफ लेकर जा रहे थे। इसी दौरान रोहियार गाँव का ही निवासी रजंन यादव और उसके समर्थक बीच में आ गए और विसर्जन के दौरान बज रहे डीजे को बंद करने को कहा। देखते ही देखते दोनों गुटों का यह विवाद हाथापाई में बदल गया। हिंसक झड़प में लाठी-डंडे चलने के साथ दो राउंड फायरिंग भी हुई थी।

आरोप है कि इस दौरान रजंन यादव नाम के शख्स ने गोली चला दी, जो विसर्जन में आए संस्कार कुमार नाम के युवक को लग गई। संस्कार रोहियार निवासी शंकर यादव का बेटा है। बताया जा रहा है कि हत्यारोपी रंजन यादव पेशेवर अपराधी है। हाल ही में वह जेल से बाहर आया था। इससे पहले उस पर मानसी पुलिस एवं एसटीएफ पुलिस पर गोली चलाने का आरोप लग चुका है। पुलिस ने बताया कि आरोपित ने जब गोली चलाई, उस वक्त वह नशे में धुत था। अब गाँव में हालात सामान्य है।

बता दें कि झारखंड के हजारीबाग में भी सरस्वती मूर्ति विसर्जन के दौरान इस तरह की घटना सामने आई थी। हजारीबाग के बरही थाना में नईटांड गाँव में लखना दूलमाहा इमामबाड़ा के पास मुस्लिम युवकों की विसर्जन करने जा रहे लोगों से कहासुनी हो गई थी। कहासुनी के दौरान उन्होंने 17 साल के रूपेश कुमार (पिता सिकन्दर पांडेय) के साथ मारपीट की, जिससे वह बेहोश हो गया। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

रूस में जन्म, स्वीडन से पोस्ट डॉक्टरेट डिप्लोमा, माँ भी थीं प्रोफेसर: JNU की पहली महिला कुलपति, नक्सलियों के खिलाफ उठाती रही हैं आवाज़

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में कुलपति का पाँच साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद आज नए कुलपति के नाम की घोषणा हुई। अब जेएनयू की नई कुलपति-प्रोफेसर शांतिश्री धूनिपुड़ी पंडित (Professor Santishree Dhulipudi Pandit) हैं। वह यूनिवर्सिटी के इतिहास में पहली महिला कुलपति (First woman Vice-Chancellor) हैं। वह इससे पहले महाराष्ट्र के सावित्रिबाई फुले विश्वविद्यालय में वीसी के पद पर थीं।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, जेएनयू की नई कुलपति पॉलिटिकल साइंस की प्रोफेसर रही हैं। उनका जन्म रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हुआ था। शांतिश्री की माँ मुलामूडी आदिलक्ष्मी वहाँ तमिल और तेलुगू की प्रोफेसर थीं। पंडित ने भी अपनी पढ़ाई चेन्नई कॉलेज से की। बाद में उन्होंने सन् 1990 में जेएनयू से इंटरनेशनल रिलेशन में पीएचडी की और 1995 में स्वीडन के उप्साला विश्वविद्यालय से पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट में पोस्ट-डॉक्टरेट डिप्लोमा भी प्राप्त किया।

प्रोफेसर के तौर पर पंडित ने अपना करियर 1988 में शुरू किया था। बाद में वे पुणे यूनिवर्सिटी से जुड़ गईं। उन्होंने कई शैक्षणिक निकायों में प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवा दी। वे कुछ समय यूजीसी की, इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च की भी सदस्य रहीं। बता दें कि प्रोफेसर शांतिश्री धूलिपुडी पंडित जेएनयू में प्रोफेसर एम जगदीश कुमार का स्थान लेंगी। एम जगदीश कुमार का कार्यकाल पिछले साल पूरा हो गया था। इसके बाद से वह कार्यवाहक कुलपति के तौर पर जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे। जगदीश कुमार को अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए पुराने ट्वीट

प्रोफेसर पंडित के कुलपति बनने के बाद उनके नाम पर साझा कुछ पुराने ट्वीट शेयर हो रहे हैं। एक ट्वीट 2020 का है जिसमें उन्होंने जेएनयू पर टिप्पणी करते हुए कहा, “जेएनयू के लूजर्स जिन्होंने अपना आपा खोया। ऐसे कट्टरपंथी नक्सली समूह को कैंपस से बैन किया जाना चाहिए। जामिया और सेंट स्टीफन जैसे कम्युनल कैंपसों की फंडिंग रुकनी चाहिए।

इस ट्वीट के अलावा अगर उनके ट्विटर हैंडल पर मौजूद तमाम ट्विट्स से होकर गुजरें तो पता चलता है कि कैसे डॉ शांतिश्री कैसे हिंदू धर्म के लिए मुखर होकर बोलती रही हैं। उन्होंने अपने हैंडल पर हिंदू सभ्यता, संस्कृति और मंदिरों से जुड़े ट्वीट किए हुए हैं। उन्होंने इतिहास के साथ खिलवाड़ करने वालों से अपने ट्वीट में सवाल किए हैं। साथ ही पुरानी कलाकृतियाँ साझा करते हुए उन्हें भारत की असल धरोहर कहा है।

ट्रक वालों के आंदोलन के कारण कनाडा में लगाया गया आपातकाल, सरकार ने कहा – ‘प्रदर्शन से खतरा, सख्त कदम ज़रूरी’

कनाडा (Canada) की राजधानी ओटावा में ट्रक वालों के आंदोलन के चलते रविवार (6 फरवरी 2022) को शहर के मेयर जिम वॉटसन (Ottawa Mayor Jim Watson) ने आपातकाल घोषित कर दिया। ट्रक वाले 10 दिन से ओटावा में आंदोलन कर रहे हैं। जिम वॉटसन ने कहा कि शहर को घेरकर किए जा रहे आंदोलन के चलते यह फैसला लिया गया है। उन्होंने अपने बयान में कहा, “आपातकाल घोषित किए जाने से साफ है कि इस तरह चल रहे प्रदर्शन लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। ऐसे मौके पर कुछ सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि लोगों की मदद की जा सके।”

ओटावा के मेयर ने केंद्र सरकार से भी इस मामले में दखल की माँग की है। एक टीवी चैनल से बात करते हुए वॉटसन ने कहा कि अब इस मामले में दखल देने की जरूरत है। केंद्र सरकार को इसे खत्म करने के लिए आगे आना चाहिए, क्योंकि अब यह प्रदर्शन धीरे-धीरे पूरे देश में फैल रहा है।

मालूम हो कि शहर को आंदोलनकारी ट्रक वालों ने 28 जनवरी से ही घेर रखा है। आंदोलनकारियों ने ‘फ्रीडम कॉनवॉय 2022’ के नाम से प्रदर्शन शुरू किया है। इन आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक सरकार वैक्सीन की अनिवार्यता को खत्म नहीं करती है, वे तब तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे। इसके अलावा ये प्रदर्शनकारी कोरोना संकट से निपटने के लिए लॉकडाउन जैसी पाबंदियों का भी ये विरोध कर रहे हैं। बीते सप्ताह प्रदर्शनकारियों के हमले के बाद से प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो किसी गुप्त जगह पर जाकर छिपे हुए हैं और वहीं से काम कर रहे हैं। ट्रूडो ने खुद के कोरोना होने की भी पुष्टि की थी।

बता दें कि ओटावा में रविवार को ‘फ्रीडम कॉन्वॉय’ प्रदर्शनों के दौरान सात लोगों को गिरफ्तार किया गया और कई वाहनों को जब्त किया गया था। कनाडा में ट्रक काफिलों के लिए फंड एकत्रित करने के लिए शुरू किए गए अभियान को ऑनलाइन फंड रेजिंग साइट ‘GoFundMe’ प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। इस कार्रवाई के पीछे का कारण साइट ने ‘शर्तों का उल्लंघन’ बताया है। इससे पहले ऑनलाइन फंड रेजिंग साइट ने कहा था कि वे उन ट्रक ड्राइवरों द्वारा एकत्रित किए गए 10 मिलियन डॉलर (₹ 74,64,24,500) फंड की समीक्षा करेंगे, जो कनाडा सरकार के विरुद्ध इस समय प्रदर्शन कर रहे हैं।

कर्नाटक में हिजाब के विरोध में भगवा स्टोल पहनकर कैंपस पहुँचे छात्र: कक्षाएँ स्थगित, वहीं उडुपी में हिजाब पहने पहुँची छात्राओं को मिला अलग कमरा

कर्नाटक में हिजाब को लेकर जारी विवाद के बीच आज जहाँ हिजाब पहनकर आई छात्राओं को अलग कमरे में बैठाया गया वहीं विरोध में भगवा स्टोल पहनकर भी छात्रों के पहुँचने से मामला एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आया। कर्नाटक के विजयपुरा के शांतेश्वर एजुकेशन ट्रस्ट में हिजाब के विरोध में कुछ छात्रों के भगवा स्टोल पहनकर स्कूल आने के बाद आज कक्षाएँ स्थगित कर दी गईं। बता दें कि कुछ दिन पहले भी एक कालेज में मुस्लिम लड़कियों के हिजाब पहनने के विरोध में लगभग 100 हिंदू लड़के कक्षा में भगवा शाल ओढ़कर पहुँचे थे।

क्या है पूरा मामला

यह पूरा विवाद कर्नाटक में उडुपी जिले के कुंडापुर में स्कूल और कालेजों में हिजाब पहनने पर रोक से पैदा हुआ था। इसके बाद मुस्लिम छात्राओं ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया था और हिजाब को मूल अधिकार बताते हुए हिजाब के साथ प्रवेश के लिए प्रशासन का विरोध करने लगीं। 3 फरवरी की सुबह कर्नाटक के उडुपी जिले के कुंडापुर के भंडारकर कॉलेज में हिजाब पहनी 20 से अधिक छात्राओं को कॉलेज में प्रवेश करने से रोक दिया गया था।

पीयू कॉलेज का यह मामला सबसे पहले 2 जनवरी 2022 को सामने आया था, जब 6 मुस्लिम छात्राएँ क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनने पर अड़ गई थीं। छात्राओं की तरफ से हाईकोर्ट में इसके खिलाफ एक याचिका भी दायर की गई है जिसपर कल सुनवाई होनी है। तब से ही हिजाब के विरोध में छात्र भगवा स्टाल में आने लगे जिससे लगातार विवाद गहराता गया। वहीं पिछले दिनों में हिन्दू लड़कियाँ ने भी हिजाब के विरोध में भगवा स्टाल लेकर स्कूल आई थीं।

वहीं आज कर्नाटक के उडुपी में स्थित पीयू कॉलेज में हिजाब पहनकर क्लास में बैठने की जिद्द करने वाली मुस्लिम लड़कियों के लिए कॉलेज ने एक निर्णय लिया है। इस निर्णय के अनुसार, हिजाब पहनने वाली ल़ड़कियों को कॉलेज प्रशासन की ओर से एक अलग कमरा दिया गया है जहाँ वह बैठ सकेंगी। लेकिन क्लास में एंट्री उन्हें तभी मिलेगी जब वह अपने हिजाब को उतारकर, तय यूनिफॉर्म में क्लास अटेंड करेंगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीयू कॉलेज डेवलपमेंट कमेटी के प्रवक्ता मोहनदास शिनॉय ने मीडियाकर्मियों को बताया कि 135 साल पुराना ये कॉलेज अब एक बेवजह के विवाद के कारण और बदनाम नहीं हो सकता। जो मुस्लिम लड़कियाँ हिजाब पहनकर क्लास में बैठने के लिए बाहर प्रदर्शन कर रही हैं उन्हें एक अलग कमरा दिया जाएगा। मगर क्लासरूम में एंट्री उन्हें तभी मिलेगी जब वो अपने हेडस्कॉर्फ उतारकर घुसेंगी।

हथियार लेकर पकड़े गए दो संदिग्ध

बता दें कि कर्नाटक के उडुपी में स्थित कॉलेज में शुरू हुए हिजाब विवाद के बाद से पीयू कॉलेज के पास से ही पुलिस ने दो संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान रज्जाब और हाजी अब्दुल मजीद बताई गई थी। पुलिस ने इन दोनों के पास से घातक हथियार बरामद किए थे। वहीं तीन अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

गौरतलब है कि उडुपी जिले के सरकारी कालेज में छात्राओं को हिजाब पहनने पर कक्षाओं में प्रवेश न करने देने से इस विवाद की शुरुआत हुई थी। इसके बाद छात्राओं ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया था और हाईकोर्ट में इसके खिलाफ एक याचिका भी दायर कर दी है जिसपर कल सुनवाई होनी है। देखते ही देखते कर्नाटक के उडुपी के स्कूल से शुरू हुआ हिजाब विवाद पूरे कर्नाटक में फैल गया है।

भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

पैरोल पर बाहर आएगा गुरमीत राम रहीम सिंह, पंजाब चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल: ‘डेरा सच्चा सौदा’ में जश्न का माहौल

बलात्कार और हत्या के मामले में जेल की सज़ा काट रहा ‘डेरा सच्चा सौदा’ का मुखिया गुरमीत राम रहीम सिंह पैरोल पर बाहर निकल सकता है। वो फ़िलहाल हरियाणा के रोहतक जेल में बंद है। पंजाब में अगले दो सप्ताह में विधानसभा चुनाव भी होने हैं, ऐसे में उसके बाहर आने से राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ गई है। बताया जाता है कि पंजाब के 23 जिलों में 300 बड़े डेरे हैं, जो चुनावों को प्रभावित करते रहे हैं। माझा, मालवा और दोआब में इन डेरों का खास वर्चस्व है।

बता दें कि ‘डेरा सच्चा सौदा’ हरियाणा के सिरसा में स्थित है। पंजाब के मालवा क्षेत्र की 69 सीटों पर इसका प्रभाव बताया जाता है। सुनारिया जेल के बाहर गुरमीत राम रहीम सिंह की रिहाई को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है। उसने 21 दिन के ‘फर्लो’ (पैरोल) का आवेदन दिया था, जिसे हरियाणा के जेल विभाग ने मंजूर कर लिया है। रोहतक के कमिश्नर के हस्ताक्षर के बाद उसे बाहर लाए जाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सिरसा डेरे को भी इसकी जानकारी मिल गई है।

इसके बाद वहाँ मौजूद उसके भक्त भी जश्न मना रहे हैं। वहाँ से एक काफिला रोहतक के सुनारिया जेल के लिए भी निकला है, जो गुरमीत राम रहीम सिंह को वापस लेकर आएगा। उस पर दो साध्वियों के बलात्कार के अलावा दो हत्याओं के मामले में भी सज़ा हो चुकी है। हरियाणा के जेल मंत्री रणजीत सिंह चौटाला ने हाल ही में पैरोल को हर कैदी का हक़ बताया था। उसे इस शर्त पर पैरोल मिली है कि वो लगातार पुलिस की निगरानी में रहेगा और डेरा में ही अधिकतर समय व्यतीत करेगा।

बता दें कि 1948 में शाह मस्ताना ने ‘डेरा’ की स्थापना की थी। इसके बाद 1960 में शाह सतनाम को इसका प्रमुख बताया गया। गुरमीत राम रहीम सिंह जब 1990 में इसकी गद्दी पर बैठा था, तब उसकी उम्र महज 23 वर्ष ही थी। 2006-07 में उसने डेरा के राजनीतिक मोर्चे का भी गठन किया। इसमें उसने अपने विश्वासपात्र लोगों को डाला। हर राज्य की 45 सदस्यों वाली कोर कमिटी भी गठित की गई। पंजाब का प्रभावशाली बादल परिवार और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी उसके दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं।