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‘उत्तराखंड बेहद खूबसूरत है, बनाऊँगा यहाँ घर’ – CM धामी ने अक्षय कुमार को बनाया ब्रांड एंबेसडर, पहनाई पहाड़ी टोपी

बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार अब उत्तराखंड के नए ब्रांड एंबेसडर होंगे। ये जानकारी सोमवार (फरवरी 7, 2022) को प्रदेश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दी। उन्होंने अक्षय कुमार को पहाड़ी टोपी और पुष्प गुच्छ देते हुए अपने आवास पर उनका स्वागत किया और बाद में उन्हें प्रदेश का ब्रांड एंबेसडर बनाते हुए उन्हें केदारनाथ मंदिर की प्रतिमूर्ति भेंट की।

समाचारों के अनुसार, प्रदेश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि उन्होंने अक्षय कुमार को प्रस्ताव दिया था, जिसे उन्होंने स्वीकार लिया। अब वे प्रदेश के लिए एंबेसडर के तौर पर काम करेंगे। उन्होंने अभिनेता के बारे में कहा, “एक कलाकार के साथ-साथ अक्षय कुमार एक अच्छे इंसान भी हैं। हमने उनसे कहा और वे तैयार हो गए हैं। वे उत्तराखंड के लिए ब्रांड एंबेसडर के रूप में काम करेंगे।”

इससे पहले सीएम धामी ने ट्वीट में कहा था, “आज प्रख्यात अभिनेता, युवाओं के प्रेरणास्रोत और मेरे मित्र अक्षय कुमार का मुख्यमंत्री आवास में स्वागत एवं अभिनन्दन किया। अक्षय कुमार ने राज्य के युवाओं को प्रेरित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की और हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।”

उल्लेखनीय है कि अक्षय कुमार कई समय से मसूरी में अपनी फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं। उन्हें उत्तराखंड से इतना लगाव है कि उन्होंने यहाँ अपना एक घर बनाने की इच्छा भी जताई। उन्होंने 31 साल के फिल्मी करियर में उत्तराखंड को बेहद खूबसूरत कहा और बताया कि वह प्रदेश की खूबसूरती देख ज्यादा प्रभावित हैं।

बता दें कि साल 2017 में भी अक्षय कुमार को स्वच्छता अभियान के लिए उत्तराखंड के ब्रांड एंबेसडर के लिए नामित किया गया था। उस समय उन्होंने इस काम के लिए कोई फीस नहीं ली थी। साथ ही इसे अपने लिए सम्मान की बात कही थी। अक्षय के अलावा क्रिकेटर ऋषभ पंत को भी दिसंबर 2021 में उत्तराखंड का ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया गया था।

उइगर मुस्लिमों के दमन में पाकिस्तान बना चीन का भागीदार: इमरान खान ने बर्बर नीतियों का किया खुलकर समर्थन

पाकिस्तान के चीन के साथ गहराते संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए प्रधानमंत्री इमरान खान ने उइगर मुस्लिमों को खुल कर पीठ दिखा दी है। उन्होंने अपने बीजिंग दौरे के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करने के बाद एक साझा बयान दिया जिसमें कहा गया कि वो ताइवान समेत दक्षिण चीन सागर, हॉन्ग-कॉन्ग और शिनजियांग प्रांत के मुद्दे पर भी शी जिनपिंग की वन चाइना-वन पॉलिसी की नीतियों का पूरा समर्थन करते हैं।

मालूम हो कि ताइवान, हॉन्ग-कॉन्ग, शिनजियांग चीन से जुड़े वो मु्द्दे हैं जिनके कारण उसे वैश्विक स्तर पर बदनामी झेलनी पड़ती है। कुछ जगह इन मुद्दों पर चीन की नीतियों को मानवाधिकारों का उल्लंघन भी बताते हैं। उइगरों पर अत्याचार तो ऐसा विषय है जिसे लेकर विश्व के करीब 243 संगठन आरोप लगा चुके हैं और चीन में उइगरों पर होते अत्याचारों की पोल भी खोल चुके हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स, विजुअल्स, पीड़ितों के बयान के बाद भी पाकिस्तानी पीएम ने चीन को अपना समर्थन दिया और उन सैंकड़ों लोगों की अनदेखी कर दी जो उसी मजहब के होने के नाते प्रताड़ित किए जा रहे हैं जिसकी बुनियाद पर पूरा पाकिस्तान बनाया गया।

उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार करने में PAK ने दिया चीन का साथ

उल्लेखनीय है कि मुस्लिमों का मसीहा बनने का दिखावा करने वाले पाकिस्तान (Pakistan) का चेहरा पहली बार उजागर नहीं हुआ। जो इमरान खान अक्सर भारत में मुस्लिमों पर अत्याचार की झूठी बयानबाजी करते हैं। कश्मीर में मुस्लिमों के हालातों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाते हैं। वही पाकिस्तान और इमरान खान चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों (Uighur Muslims Repression) के दमन में चीन (China) का न केवल समर्थन करते आए हैं बल्कि उइगरों पर अत्याचार करवाने में भागीदार भी बने हैं। 

पिछले दिनों कनाडा स्थित थिंक टैंक अधिकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय फोरम (IFFRAS) ने अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा किया था कि चीन की आर्थिक वृद्धि और विशेष रूप से ‘चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC)’ में अपने निवेश के कारण पाकिस्तान में बढ़ती उपस्थिति ने बीजिंग को मानव अधिकारों के उल्लंघन और शिनजियांग में उइगर अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न सहित देश में ‘अंतरराष्ट्रीय दमन’ करने का एक बड़ा अवसर दे दिया है।

उइगर छात्रों से लेकर मौलवियों को पाकिस्तान सौंप देता है चीन को

इसके अलावा पाकिस्तान कितना मुस्लिमों की परवाह करता है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक मामले में पाकिस्तानी सुरक्षबलों ने 14 उइगर इस्लामी छात्रों को केवल इसलिए चीन को सौंप दिया था, क्योंकि उन्हें शक था कि हो सकता है कि ये चीन में आतंकी घोषित किए गए हों। इन उइगरों को चीन को सौंपने के बाद चीनी सेना ने उनकी हत्या कर दी थी।

इसी तरह की एक घटना पाकिस्तान में पिछले साल 7 मई 2021 को घटी जब उइगर मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने के कारण पाकिस्तान में अधिकारियों ने एक इस्लामिक मौलवी का ही अपहरण कर लिया। गिरफ्तार किए गए मौलवी के भाई अब्दुल वली ने द डिप्लोमैट को बताया कि उनके भाई पर पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट से जुड़े होने का आरोप लगाया गया था। ये एक आतंकवादी संगठन है। वली कहते हैं कि वो शिनजियांग प्रांत के रहने वाले थे। लेकिन जब 1960 के दशक में चीन ने उइगर मुस्लिमों के इस्लाम का पालन करने पर रोक लगाना शुरू किया था तभी उनके पिता वहाँ से पाकिस्तान आ गए थे।

बता दें कि चीन में उइगर मुस्लिमों को सुधारने के नाम पर उनपर तमाम बर्बरता की जाती हैं। इस बात के खुलासे कई बार अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में हुए हैं। उइगर औरतों के साथ न केवल रेप होता है बल्कि उनके प्राइवेट पार्ट्स में मिर्ची तक लगा दी जाती हैं, उनका गर्भपात करवा दिया जाता है। वहीं मुस्लिम पुरुषों को मारने में चीन गुरेज नहीं करता और उनके मस्जिदों को तोड़ने की खबरें भी आती रहती हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार वहाँ 10 लाख से ज्यादा उइगरोंकों कन्सेंट्रेशन कैंप में रखा गया था।

हिजाब वाली छात्राओं को देंगे अलग कमरा, नहीं होगी क्लास में एंट्री: कर्नाटक कॉलेज का फैसला

कर्नाटक के उडुपी में स्थित पीयू कॉलेज में हिजाब पहनकर क्लास में बैठने की जिद्द करने वाली मुस्लिम लड़कियों के लिए कॉलेज ने एक निर्णय लिया है। इस निर्णय के अनुसार, हिजाब पहनने वाली ल़ड़कियों को कॉलेज प्रशासन की ओर से एक अलग कमरा दिया जाएगा जहाँ वह बैठ सकेंगी। लेकिन क्लास में एंट्री उन्हें तभी मिलेगी जब वह अपने हिजाब को उतारेंगी और तय यूनिफॉर्म में क्लास अटेंड करेंगी।

पीयू कॉलेज डेवलपमेंट कमेटी के प्रवक्ता मोहनदास शिनॉय ने मीडियाकर्मियों को बताया कि 135 साल पुराना ये कॉलेज अब एक बेवजह के विवाद के कारण और बदनाम नहीं हो सकता। जो मुस्लिम लड़कियाँ हिजाब पहनकर क्लास में बैठने के लिए बाहर प्रदर्शन कर रही हैं उन्हें एक अलग कमरा दिया जाएगा। मगर क्लासरूम में एंट्री उन्हें तभी मिलेगी जब वो अपने हेडस्कॉर्फ उतारकर घुसेंगी।

कमेटी प्रवक्ता शिनॉय ने अभिभावकों से इस दौरान अपील की कि वो लोग अपने दायित्वों का पालन करते हुए कॉलेज प्रशासन का समर्थन करें और छात्र भी कॉलेज द्वारा निर्धारित किए गए यूनिफॉर्म कोड का पालन करें।

गौरतलब है कि कर्नाटक के उडुपी में स्थित कॉलेज में शुरू हुए हिजाब विवाद के बाद से पीयू कॉलेज लगातार चर्चा में बना हुआ है। कल तो वहाँ से पुलिस ने दो संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान रज्जाब और हाजी अब्दुल मजीद बताई गई थी। पुलिस ने इन दोनों के पास के हथियार बरामद किए थे। वहीं तीन अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

कर्नाटक में हिजाब विवाद

बता दें कि कर्नाटक के उडुपी के स्कूल से शुरू हुआ हिजाब विवाद पूरे कर्नाटक में फैल गया है। 3 फरवरी की सुबह कर्नाटक के उडुपी जिले के कुंडापुर के भंडारकर कॉलेज में हिजाब पहनी 20 से अधिक छात्राओं को कॉलेज में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। पीयू कॉलेज का यह मामला सबसे पहले 2 जनवरी 2022 को सामने आया था, जब 6 मुस्लिम छात्राएँ क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनने पर अड़ गई थीं।

कर्नाटक के हिजाब विवाद से पहले उसी जगह मुस्लिमों ने हिंदुओं का किया था बहिष्कार

अजीब बात ये है कि इस घटना से दो माह पहले ही उडुपी में मुस्लिमों ने हिंदुओं का बहिष्कार किया था। इसके पीछे गोहत्या का विरोध करना मुख्य कारण था। रिपोर्टों के अनुसार, 1 अक्टूबर 2021 को हिंदू जागरण मंच द्वारा तालुक के गंगोली में मवेशी चोरी और गोहत्या के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शन में मछुआरे, मछली विक्रेता और महिलाओं सहित हजारों लोगों ने हिस्सा लिया था। इसके बाद क्षेत्र में रहने वाले मुस्लिमों ने गंगोली बाजार में हिंदुओं से मछली खरीद का बहिष्कार किया था और कुछ माह बाद कॉलेज से जुड़ा ये विवाद हो गया। अब कॉलेज में हिजाब पहनने की माँग करने वाली लड़कियों के विरोध में हिंदू लड़कियाँ भी भगवा स्कॉर्फ पहनकर स्कूल में आती दिखाई दीं। उन्होंने सवाल किया कि जब हिजाब पहना जा सकता है तो फिर भगवा स्कॉर्फ क्यों नहीं।

भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

न माफ़ी, न कार्रवाई का वादा: कश्मीर पर भारत विरोधी ज़हर उगलने के बाद ‘Hyundai’ का बयान – भारत हमारा दूसरा घर

पाकिस्तानी हुंडई की ओर से ‘आजाद कश्मीर’ पर विवादित ट्वीट आने के बाद और सोशल मीडिया पर #BoycottHyundai ट्रेंड होने के बाद अब भारत की हुंडई ने अपना एक बयान जारी किया है। इस बयान में उन्होंने न तो भारतीय यूजर्स को ब्लॉक करने पर कोई माफी माँगी है और न ही पाकिस्तानी हुंडई पर एक्शन लेने की कोई बात कही है। इस बयान में सपाट तौर पर कंपनी ने ये दिखाया है कि वो भारत के लिए कितने प्रतिबद्ध हैं।

इस बयान में कंपनी ने भारतीयों से कहा है कि वो भारतीय बाजार के लिए पिछले 25 सालों से प्रतिबद्ध हैं और यहाँ के राष्ट्रवाद के सम्मान में वे मजबूती से खड़े हैं। अपने बयान में उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ अवांछित पोस्ट उनकी प्रतिबद्धता और सेवा को ठेस पहुँचाने वाले हैं। बयान में कहा गया कि हुंडई के लिए भारत उनका दूसरा घर है और किसी भी असंवेदनशील बातचीत के लिए उनकी जीरो टॉलरेंस पॉलिसी है और वे इनकी निंदा करते हैं। कंपनी ने कहा, “भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के तौर पर, हम देश के साथ-साथ नागरिकों की बेहतरी के लिए अपना प्रयास जारी रखेंगे।”

हुंडई से जुड़ा पूरा विवाद

गौरतलब है कि आज हुंडई पाकिस्तान (Hyundai Pakistan) ने एक ट्वीट किया था। ट्वीट कश्मीर को लेकर था। इस ट्वीट को लेकर भारत की ऑटोमोबाइल कंपनी हुंडई इंडिया (Hyundai Motor India) सवालों के घेरे में आ गई थी और सोशल मीडिया पर देखते ही देखते #BoycottHyundai ट्रेंड होने लगा। कई यूजर्स ने कंपनी की इस हरकत पर अपनी नाराजगी जाहिर की और कई यूजर्स ने शिकायत की कि भारत की हुंडई इस मामले में ट्वीट करने पर सवाल करने पर उन्हें ब्लॉक कर रही है। काफी लताड़ लगने के बाद शाम के समय कंपनी का यह बयान आया। लेकिन यूजर्स इससे भी संतुष्ट नहीं हैं। लोगों का कहना है कि कंपनी अपने सबसे बड़े बाजार की आँख में धूल झोंकने की कोशिश कर रही है।

गाय की मौत पर अंतिम यात्रा: दूसरों को देती थी माँ की ममता, छोटे बच्चे थन में मुँह लगाकर पी लेते थे दूध, डेढ़ साल पहले सड़क पर मिली थी

अक्सर देखा जाता है कि जब तक कोई गाय (Cow) दूध देती है तो लोग उसे घर में पालते हैं, लेकिन उसके बाद उसे खुला छोड़ दिया जाता है। लोगों की इसी उदासीनता के कारण ये गौधन सड़कों आवारा भटकती मिल जाती हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के दमोह जिले में रविवार को जब एक गाय (जिसका नाम हाथी है) की मृत्यु हुई तो सैकड़ों की संख्या में लोगों ने गाजे-बाजों के साथ उसकी अंतिम यात्रा निकाली।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना दमोह जिले के हटा की है। यहाँ हाथी के नाम से प्रसिद्ध गाय का निधन हो गया। इसकी जानकारी मिलते ही शहर के लोग इकट्ठे हो गए और उन सभी ने मिलकर पूरे रीति-रिवाज के साथ गाय की शव यात्रा निकाली। सुरभि गौशाला के गौ सेवक अंशुल तिवारी कहते हैं कि यह गया करीब डेढ़ साल पहले सड़की पर पड़ी मिली थी। बीमारी के कारण पूरी तरह से उसका शरीर जर्जर हो गया था। लेकिन बाद हटा भूतेश्वर महादेव मंदिर में चलाई जा रही गौशाला में उसे लाया गया।

गौशाला में लाने के बाद उसका इलाज शुरू कर दिया गया। करीब एक हफ्ते के इलाज के बाद आखिरकार गाय स्वस्थ हुई। लेकिन फिर भी कोई उसे लेने के लिए नहीं आया। गौशाला में गाय का बहुत ही अच्छे तरीके से ख्याल रखा जाता था, जिस कारण से जल्द ही वह हट्टी-कट्टी भी हो गई। इसी कारण से लोगों ने उसे ‘हाथी’ कहना शुरू कर दिया। गाय इतनी सीधी थी कि गौशाला में अगर किसी गाय की मौत हो जाती थी तो वो उसके बछड़ों को अपना दूध पिलाती थी। इसके अलावा छोटे बच्चे तक उसके थन में मुँह लगाकर दूध पी लेते थे। अपने इसी सीधेपन के कारण वो सभी के लिए चहेती बनी हुई थी।

हाल ही में ‘हाथी’ बीमार हो गई थी, जिसके बाद अब उसकी मौत हो गई। उसकी मौत के बाद गौसेवकों ने उसकी शव यात्रा निकालने का निर्णय लिया। इसके तहत उसके शव का श्रृंगार कर उसे लाल चुनरी और फूल-माला से सजाया गया और बैंड बाजे के साथ उसकी अंतिम यात्रा निकाली गई। इस मौके पर लोगों ने गौमाता के जयकारे लगाए।

दोगुनी से ज्यादा हो गई लोगों की औसत आय, 3 गुना हुआ बजट, ₹5 लाख करोड़ का निवेश: CM योगी ने 5 सालों में यूपी को ऐसे बदला

किसी भी राज्य में विकास की गति को, वहाँ किए जा रहे निवेश से और उसकी अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलाव से आँका जा सकता है। यही कारण है कि यूपी में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी/BJP) लगातार प्रदेश के डेवलपमेंट को लेकर पुरानी सरकारों पर निशाना साध पा रही है और अपनी योगी सरकार में हुए बदलावों को बताकर खुल कर वोट माँग रही है। जानकारी के मुताबिक पिछले कुछ सालों में उत्तर प्रदेश इतनी तेजी से आगे बढ़ा है कि जो प्रदेश अर्थव्यवस्था के मामले में पाँच साल पूर्व सातवें स्थान पर था, वो अब दूसरे स्थान पर पहुँच गया है। इस बात का जिक्र आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अमरोहा में भी किया है और उनसे पहले स्वयं योगी आदित्यनाथ भी इसे लेकर मीडिया में बयान दे चुके हैं।

70 सालों में जो नहीं हुआ वो काम पिछले 5 साल में हुआ

अपनी सरकार कि एक-एक उपलब्धि गिनाने के साथ उन्होंने बताया था कि कैसे बीते 5 साल में यूपी ने कुछ मील के पत्थर गढ़े। सीएम ने बताया था कि यूपी की अर्थव्यवस्था सातवें स्थान पर थी और 70 सालों (1947 से 2017) में जो काम नहीं हुआ, उसे योगी सरकार ने 5 साल में 2 नंबर पर लाने में सफलता प्राप्त की। उन्होंने इस दौरान ये भी जानकारी दी थी कि पहले यूपी की प्रति व्यक्ति आय ₹45 हजार वार्षिक थी। लेकिन ये बढ़कर अब ₹94 हजार (दोगुनी से ज्यादा) हो गई है। वहीं 2015-18 में वार्षिक बजट ₹2 लाख करोड़ था। ये अब ₹6 लाख करोड़ (3 गुना) हो गया है।

₹5 लाख करोड़ का निवेश

ये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों का ही परिणाम है कि प्रदेश का एमएसएमआई सेक्टर ऊँचाइयों पर पहुँचा। एक रिपोर्ट के अनुसार सीएम योगी की इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली नीतियों के कारण प्रदेश का एमएसएमई सेक्टर दिसंबर 2021 में देश में पहले पायदान पर पहुँच गया था और राज्य ने निवेश व रोजगार देने में एमएसएमई रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। रिपोर्ट बताती हैं कि प्रदेश में पिछले साढ़े चार में ₹5 लाख करोड़ से अधिक का निवेश हुआ जबकि 3 करोड़ लोगों को रोजगार देने का काम योगी सरकार में किया गया।

कोरोना से पहले और कोरोना के बाद- यूपी के हाल

कोरोना काल से पहले की बात करें तो योगी सरकार ने एक ऐलान किया था कि उनकी सरकार न केवल प्रदेश के प्रति व्यक्ति आय को 2024 तक दोगुना करने की तैयारी कर रही है, बल्कि उनका लक्ष्य प्रदेश को ₹10 खरब की अर्थव्यवस्था बनाने का है। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई थी कि आगामी वर्षों में  ₹40 लाख करोड़ का निवेश प्रदेश में कराना उनका लक्ष्य है। 

इसके बाद कोरोना काल आया और विकास की राह पर आगे बढ़ रहे प्रदेश कोरोना से लड़ने में जुट गए। लेकिन इस दौरान भी यूपी ने महामारी से लड़ते हुए प्रदेश को विकास की राह पर ले जाना नहीं छोड़ा। ये वो समय था जब सारी प्रदेश सरकारें अपने हाथ ढीले छोड़ चुकी थीं और योगी सरकार प्रदेश को इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली बनाने के लिए कोरोनाकाल तक में मेहनत किए जा रही थी।

यूपी में निवेश

इस मेहनत का नतीजा ये हुआ कि निवेशकों की हिचक प्रदेश में आने के लिए दूर होती गई और देखते ही देखते महज तीन साल में प्रदेश में 1 लाख 88 हजार करोड़ का निवेश की खबरों ने सबको अचंभित कर दिया। रिपोर्ट बताती हैं कि इस आँकड़े के मुताबिक यूपी में हर दिन औसतन 172 करोड़ का निवेश हुआ था। इसी बीच कोरियन उद्योगपतियों ने चीन से निकलकर उत्तर प्रदेश (UP, यूपी) में निवेश करने की अपनी इच्छा जाहिर की।

वहीं 2021 में खुशी की लहर तब आई जब आदित्य बिड़ला समूह (Aditya Birla Group) ने गोरखपुर में 700 करोड़ रुपए के निवेश का फैसला किया। इस खबर के बारे में भी योगी आदित्यनाथ ने अपने ट्वीट के जरिए भी बताया थाउन्होंने जानकारी दी थी कि आदित्य बिड़ला ग्रुप को गोरखपुर में पेंट बनाने की औद्योगिक इकाइयाँ लगाने के लिए प्रशासन से हरी झंडी मिल गई है जिसके बाद वह गोरपुर में 700 करोड़ रुपए का निवेश करेंगे।

इतना ही नहीं, सीएम योगी ने अपने कार्यकाल में तमाम उद्योगपतियों को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया। पिछले वर्ष की ही बात है जब पंजाब में बिजली संकट छाया था तो राज्य में बड़े उद्योग बंद हो गए थे। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंजाब के उद्योगपतियों को कम दरों पर 24 घंटे बिजली देने की पेशकश की थी और उन्हें यूपी में नई इकाइयों को शिफ्ट करने का ऑफर दिया था

इसके अलावा याद दिला दें कि भाजपा सरकार ने 2018-2019 के राष्ट्रीय बजट के दौरान दो डिफेंस इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन कॉरिडोर्स की स्थापना की घोषणा की थी। इनमें एक कॉरिडोर्स प्रोडक्शन तो तमिलनाडु और दूसरा उत्तर प्रदेश में स्थापित करने का ऐलान हुआ था। बाद में यूपी में बनने वाले कॉरिडोर को लेकर दावा किया गया कि दूसरे डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से राज्य में लगभग 20,000 करोड़ रुपए का निवेश और 2.5 लाख लोगों के लिए रोजगार आएगा।

यूपी के हाल सुधरे

उल्लेखनीय है कि योगी आदित्यनाथ सरकार लगातार प्रदेश के हालातों को बेहतर बनाकर इसकी छवि बदलने में और तमाम निवेशकों को अपने प्रदेश की ओर आकर्षित करने में जुटे हैं। उनका मकसद है कि यहाँ ज्यादा से ज्यादा निवेश हो और प्रदेशवासियों के लिए अधिक से अधिक रोजगार पैदा हों। प्रदेश की स्थिति सुधारने के लिए सिर्फ शहरों में या एक्सप्रेसवे पर ही काम नहीं हो रहा। बल्कि ग्रामीण इलाकों को सुधारने के लिए अब तक 15 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण हुआ है। ये रिकॉर्ड पिछली सरकारों के हर रिकॉर्ड को तोड़ने वाला है।

पंचतत्व में विलीन हुईं ‘सुर साम्राज्ञी’: PM मोदी ने पाँव छू दी श्रद्धांजलि, गूँजा ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ और ‘वन्दे मातरम्’

‘भारत रत्न’ स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) पंचतत्व में विलीन हो गई हैं। उन्हें उनके छोटे भाई हृदयनाथ और भतीजे आदित्य ने शिवाजी पार्क में मुखाग्नि दी। लेकिन उससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) समेत कई राजनीतिक और फिल्मी हस्तियों ने उनके अंतिम दर्शन किए। उनका दर्शन करने के लिए हजारों लोग सड़कों पर उतर आए।

मुंबई के शिवाजी पार्क में उन्हें 7:16 बजे मुखाग्नि दी गई। इस दौरान लता मंगेशकर की बहनें उषा, आशा और मीना भी मौजूद रहीं। उससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लता दीदी की पार्थिव देह को पुष्पचक्र अर्पित कर उनके पाँव छूकर अंतिम प्रणाम किया। इसके बाद तीनों सेनाओं ने भी उन्हें अंतिम प्रणाम किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, सीएम उद्धव ठाकरे, एनसीपी चीफ शरद पवार, पूर्व सीएण देवेंद्र फडणवीस समेत कई अन्य हस्तियाँ लता दीदी के अंत्येष्टि संस्कार के मौके पर मौजूद रहीं।

इस अवसर पर सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar), शाहरुख खान (Sharukh Khan), जावेद अख्तर (Javed Akhtar), अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachhan), श्रद्धा कपूर (shraddha Kapoor), रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor), आमिर खान (Aamir Khan) समेत तमाम सितारे भी मौजूद रहे। बता दें कि स्वर साम्राज्ञी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी गोवा की वर्चुअल रैली की थी। गौरतलब है कि लता मंगेशकर की अंतिम यात्रा के दौरान वहाँ का माहौल पूरी तरह से देशभक्ति भरा हो गया था। हर किसी जुबान पर ‘वंदे मातरम’ और ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाना था। लोगों की आँखें नम थीं।

गौरतलब है कि लता दीदी (92) का देहांत 6 फरवरी 2022 को हुआ। 8 जनवरी 2022 को कोरोना संक्रमित पाए जाने पर उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। बाद में उन्हें न्यूमोनिया हो गया था, जिससे उनकी हालत बिगड़ने लगी। इसके बाद उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। उनकी हालत में सुधार के बाद वेंटिलेटर सपोर्ट भी हट गया था, लेकिन 5 फरवरी को उनकी स्थिति बिगड़ने लगी और उन्हें फिर से वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।

लता दीदी के इस तरह से छोड़ के जाने के बाद उनके सम्मान में 2 दिन का राष्ट्रीय शोक भी घोषित किया गया है।

‘लता मंगेशकर की अंत्येष्टि के दौरान SRK ने थूका?’: लोग पूछ रहे सवाल, कुछ ने बताया दुआ का तरीका तो कुछ ने मास्क को माना कारण

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ खान पर आरोप लगा है कि उन्होंने लता मंगेशकर की अंत्येष्टि के दौरान थूक कर ‘सुर सम्राज्ञी’ को श्रद्धांजलि दी। इस घटना का वीडियो तेज़ी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके आधार पर लोग ये आरोप लगा रहे हैं। वीडियो में शाहरुख़ खान को अपना मास्क उठाए कर थूकते हुए देखा जा सकता है, ऐसा लोगों का दावा है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या ये इस्लाम के हिसाब से अंतिम दर्शन की प्रक्रिया है या फिर उन्होंने जानबूझ कर ऐसा किया?

हार्दिक नाम के एक व्यक्ति ने ट्विटर पर लिखा, “मुस्लिमों के थूक के साथ ये कौन सा लगाव है? क्या शाहरुख़ खान थूक रहे थे?” इसके साथ ही उन्होंने ये वीडियो शेयर किया। हालाँकि, इसकी रिप्लाइज में जहाँ कुछ लोगों ने बताया कि वो दुआ पढ़ रहे थे तो कुछ का कहना था कि ये दुआ को ‘उड़ाने’ का तरीका है। कुछ का ये भी कहना था कि मास्क उतारने पर प्राकृतिक रूप से ऐसा हो सकता है। ऑपइंडिया इस दावे की पुष्टि नहीं करता है, लेकिन लोग ऐसा सवाल पूछ रहे हैं।

एक व्यक्ति ने लिखा कि ये ‘अंतिम मुस्लिम तस्लीम’ का तरीका है, जिसके तहत एक वाक्य का उच्चारण किया जाता है और आत्मा की शांति की प्रार्थना की जाती है।

साहिल नाम के एक यूजर ने लिखा, “ये एक प्रकार की हवा है, जिसे मुँह के द्वारा किसी की तरफ पास किया जाता है। साथ ही दुआ भी पढ़ी जाती है। इसके अनुसार दुआ की जाती है कि वो व्यक्ति जहाँ भी हो, खुश रहे। ये थूक नहीं है, घृणा न फैलाएँ।”

‘स्वर साम्राज्ञी’, ‘सरस्वती पुत्री’, ‘स्वर कोकिला’ जैसे अनगिनत उपमाओं एवं अलंकारों से सम्मानित की जाने वाली गायिका लता मंगेशकर का रविवार (6 फरवरी, 2022) को निधन हो गया। उनका सबसे अंतिम रिकॉर्ड किया हुआ गीत ‘गायत्री मंत्र’ और ‘सौगंध मुझे इस मिट्टी का’ था। हर बार की तरह इस मंत्र और गाने को ही उन्होंने हृदय से गाया था।  लता मंगेशकर पाँच साल की छोटी उम्र से ही गाती रही हैं, लेकिन एक पेशेवर गायक के रूप में उन्होंने ‘Naachu Yaa Gade, Khelu Saari Mani Haus Bhaari’ गाना गाया था।

राहुल गाँधी ने चन्नी को घोषित किया पंजाब में कॉन्ग्रेस का CM चेहरा: सिद्धू को झटका, सुनील जाखड़ के राजनीति छोड़ने के चर्चे

पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Election-2022) के मद्देनजर मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर जारी सियासी घमासान आखिरकार थम गया है। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) ने रविवार (6 फरवरी, 2022) को लुधियाना में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पंजाब के सीएम पद से सस्पेंस को खत्म करते हुए चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) को राज्य के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर सामने रखा। इस फैसले ने मुख्यमंत्री बनने की लालसा पाले नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) की मंशाओं को करारा झटका दे दिया है।

राहुल गाँधी ने लोगों को संबोधित करते हुए दावा किया कि पंजाब का मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने से पहले उन्होंने कार्यकर्ताओं, वर्किंग कमेटी के लोगों और सदस्यों से बात की थी। सभी ने एक ‘गरीब व्यक्ति’ को सीएम पद पर बैठाने की माँग की। राहुल का कहना था कि चन्नी गरीब परिवार से आते हैं औऱ उन्होंने बहुत ही करीब से न केवल गरीबी देखी है, बल्कि उसे जिया भी है। उन्होंने कहा, सबसे बड़ी बात उनमें किसी भी तरह का अहंकार नहीं है और वो लोगों के बीच जाते हैं।” इससे पहले राहुल गाँधी को होटल में चन्नी और सिद्धू को मनाना पड़ा।

वहीं अपने नाम के ऐलान से पहले चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा था कि जिस किसी के भी नाम का ऐलान किया जाएगा, वो उसके साथ मिलकर पार्टी के लिए काम करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अपनी पीठ थपथपाते हुए कहा कि मेरा 40 साल का राजनीतिक कैरियर बेदाग रहा और मुझपर किसी न उँगली तक नहीं उठाई। जबकि हकीकत ये है कि चन्नी महिला IAS अधिकारी को 2018 में अश्लील मैसेज भेजने का आरोप लगा था।

सिद्धू ने खुद को बताया अरबी घोड़ा

सीएम के तौर पर चन्नी के नाम का ऐलान होने पर सिद्धू ने इशारों में ही कॉन्ग्रेस को चेतावनी दे डाली है। उन्होंने खुद को अरबी घोड़ा करार देते हुए कहा कि मुझे पद की कोई लालसा नहीं है, लेकिन मुझे दर्शनी घोड़ा न बनने देना। फैसला लेने की ताकत देना। उल्लेखनीय है कि इससे पहले चन्नी को ही सीएम पद दिए जाने की खबरों के बीच सिद्धू ने बागी तेवर अपनाते हुए कहा था कि ऊपर वाले तो चाहते हैं कि कोई कमजोर मुख्यमंत्री हो, जिसे वो ता थैया, ता थैया नचा सकें और कहें कि नाच मेरी बुलबुल तुझे पैसा मिलेगा।

सुनील जाखड़ ने छोड़ी राजनीति

पंजाब में कॉन्ग्रेस के मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में से एक माने जा रहे सुनील जाखड़ (Sunil Jakhar) के सक्रिय राजनीति इस्तीफा देने की खबर है। रिपोर्ट के मुताबिक, जाखड़ ने कहा है वो सक्रिय राजनीति से संन्यास ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ सहयोगियों के कारण काम करना मुश्किल हो गया है। हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि वो कॉन्ग्रेस का हिस्सा बने रहेंगे।

‘हम सब कश्मीर की आज़ादी के लिए एक होकर खड़े हैं’: ‘Hyundai’ के बाद अब ‘Kia’ ने फैलाया पाकिस्तानी प्रोपेगंडा, लोगों ने लगाई लताड़

‘Hyundai’ के बाद अब ‘Kia’ के पाकिस्तानी ट्विटर हैंडल ने भारत विरोधी ज़हर उगलते हुए ‘कश्मीर की आज़ादी’ की बात की है। ये बवाल ‘Kia Motors Crossroads Hyderabad’ के ट्वीट पर हो रहा है। बता दें कि ये हैदराबाद भारतीय राज्य तेलंगाना की राजधानी नहीं, बल्कि पाकिस्तान के सिंध का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। लोगों ने ‘Kia’ के अंतरराष्ट्रीय और भारतीय ट्विटर हैंडल्स को टैग कर के पूछा कि इस पर उनकी क्या राय है? मोटर्स कंपनी ने अब तक इस पर कोई सफाई नहीं दी है।

‘Kia’ के पाकिस्तानी ट्विटर हैंडल ने लिखा, “हम सब कश्मीर की आज़ादी के लिए एक होकर खड़े हैं।” कंपनी ने इसके साथ ही ‘5 फरवरी’ और ‘कश्मीर दिवस’ का हैशटैग भी लगाया। साथ ही अपना लोकेशन ‘किआ मोटर्स क्रॉसरोड्स, प्लॉट संख्या 11, ब्लॉक 1-A, सादिक लिवना हाउसिंग स्कीम, बाईपास रोड, हैदराबाद, सिंध’ बताया है। साथ ही इसमें अपने संपर्क सूत्र भी दिए। बता दें कि पाकिस्तान ने भारत विरोधी प्रोपेगंडा के लिए 5 फरवरी को ‘कश्मीर डे’ मनाया।

लोगों ने कहा कि पाकिस्तान से कई गुना अधिक कारें भारत में बिकती हैं, लेकिन इसके बावजूद ‘Kia’ कश्मीर पर पाकिस्तानी झूठ फैलाने में लगा हुआ है। ‘Kia’ से लोगों ने सवाल किया कि क्या उसने अब आतंकवादियों को फंडिंग करनी भी शुरू कर दी है? उस ट्वीट के साथ तस्वीर में पाकिस्तान का झंडा भी लगाया गया था। हालाँकि, विवाद होने के बाद ‘Kia’ के उस पाकिस्तानी हैंडल ने अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया। लेकिन, इसके लिए लोग माफ़ी की माँग कर रहे हैं।

पाकिस्तान में ‘आजाद कश्मीर’ के लिए अभियान चला रहा ‘Hyundai’, भारत में लोगों को कर रहा ब्लॉक

हुंडई पाकिस्तान (Hyundai Pakistan) ने एक ट्वीट किया। ट्वीट कश्मीर को लेकर था। इस ट्वीट को लेकर भारत की ऑटोमोबाइल कंपनी हुंडई इंडिया (Hyundai Motor India) अब सवालों के घेरे में है। रविवार (6 फरवरी 2022) दोपहर से ही ट्विटर पर हैशटैग #BoycottHyundai के साथ ट्रेंड कर रही है। दरअसल, हुंडई पाकिस्तान कंपनी ने शनिवार (5 फरवरी 2022) को ट्वीट किया था, “आइए हम अपने कश्मीरी भाइयों के बलिदान को याद करें और उनके समर्थन में खड़े हों, क्योंकि वे आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”

यही ट्वीट अब भारत में हुंडई के लिए सिरदर्द बन गई है। हुंडई पाकिस्तान ने अपने ट्विटर हैंडल पर #KashmirSolidarityDay का इस्तेमाल किया है, जो ‘कश्मीर एकजुटता दिवस’ को संबोधित कर रहा है। हालाँकि, इस ट्वीट को देखने के बाद भारतीय ट्विटर यूजर्स बेहद आक्रोशित हैं। इस ब्रांड को लेकर नेटिज़न्स रविवार दोपहर से #BoycottHyundai ट्रेंड करा रहे हैं, जिसकी वजह से यह चर्चा में आ गया है। गब्बर के नाम से मशहूर एक यूजर ने लिखा, “इन ब्रांड्स को राजनीति से दूर रहना चाहिए।”