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जेल से छूटे अब्दुल्ला आजम खान को सताया UP पुलिस का डर, बोले- ‘मेरे सुरक्षाकर्मी ही मुझे गोली मार सकते हैं’

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व बकरी चोरी जैसे केसों में आरोपित आजम खान के बेटे अब्दुल्लाह आजम खान को डर सता रहा है कि कहीं यूपी पुलिस के अधिकारी उन्हें गोली न मार दें। अब्दुल्ला ने मीडिया से बातचीत में शक जाहिर किया कि उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिस अधिकारी ही उनको गोली मार सकते हैं।

अब्दुल्ला ने एएनआई से बातचीत में बताया, “आपके (बीजेपी नेताओं) पास आपके साथ अधिकारी हैं, आपके साथ पुलिस है, आपके साथ दो सरकारें हैं। मैं अकेला हूँ, मेरे साथ कोई नहीं है। मुझे उन पुलिसकर्मियों पर भी भरोसा नहीं है जो मेरे साथ हैं, वे मुझे गोली मार सकते हैं।”

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा,  “मेरी सुरक्षा मेरा मालिक करता है या मेरे साथ जो लोग रहते हैं वह करते हैं। मेरे साथ जो सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं वो मेरी रेकी के लिए लगाए गए हैं कि मैं कहा हूँ और किससे मिल रहा हूँ… इन सुरक्षाकर्मियों पर मैं बिल्कुल भरोसा नहीं कर पा रहा हूँ, मुझे नहीं पता कि ये कब मुझे गोली मार दें। मुझे सुरक्षा नहीं चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर स्वार टांडा विधानसभा सीट से आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम को मैदान में उतारा है। फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर उसे पेश करने के आरोप में अब्दुल्ला आजम खान लगभग 23 महीने की कैद की सजा काटने के बाद 15 जनवरी को सीतापुर जेल से जमानत पर रिहा हुए। उनके ऊपर 43 मामले दर्ज हैं।

वह साल 2017 में भी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में लड़े थे और जीत हासिल की थी। हालाँकि, दिसंबर 2019 में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उनकी जीत को यह कहते हुए पलट दिया कि उनकी उम्र 25 वर्ष से कम थी। उन्होंने जाली दस्तावेजों के साथ अपनी उम्मीदवारी हासिल की थी।

बता दें कि एक ओर जहाँ 43 केसों में आरोपित बनाए गए अब्दुल्ला आजम खान को यूपी पुलिस से डर सता रहा है। वहीं उनके अब्बा आजम खान जेल से चुनाव लड़ेंगे। समाजवादी पार्टी ने उनको रामपुर से अपना प्रत्याशी बनाया है। आजम खान रामपुर से वर्तमान लोकसभा सांसद हैं। वह फरवरी 2020 से सीतापुर जेल में बंद है। उनके ऊपर 87 आपराधिक शिकायतें दर्ज हैं।

हाथ से चेहरे को छिपाती श्वेता तिवारी की बेटी पलक, साथ में सैफ के बेटे इब्राहिम अली खान: मीडिया में चर्चाओं का बाजार गर्म

बॉलीवुड एक्टर सैफ अली खान (Saif Ali Khan) के बेटे इब्राहिम अली खान (Ibrahim Ali Khan) और टीवी एक्ट्रेस श्वेता तिवारी की बेटी पलक तिवारी (Palak Tiwari) मुंबई में एक रेस्टॉरेंट में एक साथ देखे गए थे। लेकिन इस दौरान पलक का व्यवहार काफी अजीब रहा। वो अपना चेहरा छुपाती दिखीं, जबकि इब्राहिम बिल्कुल शांत बैठे रहे।

वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि इब्राहिम एक ही कार में बिल्कुल शांत बैठे थे, वहीं पलक अपने हाथों से अपने चेहरे को छुपा रही थी। रिपोर्ट के मुताबिक, सार्वजनिक स्थान पर दोनों की पहली मुलाकात थी। दोनों एक-दूसरे को पसंद करते हैं। लेकिन, जिस तरह से पलक अपने चेहरे को छुपा रही थीं वो काफी बचकाना था। इब्राहिम के साथ वायरल हुए वीडियो के दो दिन बाद एक महिला मित्र के साथ कॉफी शॉप से निकलते हुए देखी गईं। हालाँकि, उस दौरान उन्होंने फोटोग्राफरों को पोज देने से इनकार कर दिया था।

सिंगिंग सेंसेशन हार्डी संधू के साथ पलक का गाना ‘बिजली’ आजकल यूट्यूब पर वायरल हो रहा है। बहरहाल, इब्राहिम के साथ आखिरी बार देखे जाने के बाद से पलक और इब्राहिम दोनों ने एक-दूसरे से दूरी बना ली है।

गौरतलब है कि पलक तिवारी टीवी एक्ट्रेस श्वेता तिवारी की बेटी हैं। श्वेता तिवारी (Shweta Tiwari) हाल ही में अपने बयान को लेकर काफी विवादों में घिरी रही हैं। 27 जनवरी 2022 को बिग बॉस सीजन 4 की विनर एक्ट्रेस श्वेता तिवारी ने अपनी आने वाली वेब सीरीज शो स्टॉपर्स के लिए भोपाल में थीं, जहाँ उन्होंने भगवान पर कमेंट किया था। उन्होंने कहा था, “मेरी ब्रा का साइज भगवान ले रहे हैं।”

उनके इस बयान के बाद काफी बवाल भी मचा। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) ने इस मामले में भोपाल के कमिश्नर से रिपोर्ट भी माँग ली थी। दूसरी ओर श्वेता तिवारी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। बवाल के बाद श्वेता ने माफी माँग ली थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ है।

‘कुछ महिलाएँ आईं और लड़की को उठा कर ले गईं, गैंगरेप करवाया’: दिल्ली की घटना के पीछे एकतरफा प्यार और आत्महत्या का मामला भी

राजधानी दिल्ली में विवेक विहार के कस्तूरबा नगर में एक महिला के साथ नृशंसता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में कुछ महिलाएँ एक लड़की को बेरहमी से पीटती हुई दिखाई दे रहीं हैं। मौके पर भारी भीड़ मौजूद है। भीड़ में अधिकतर औरतें ही हैं। कुछ देर बाद पीड़िता के बाल उस्तरे से काटे जाते हैं। मुँह में कालिख लगा दी जाती है। वीडियो में काफी शोर-शराबा सुनाई देता है।

दिल्ली पुलिस ने लोगों से वीडियो न शेयर करने की अपील की है। इस पूरे घटनाक्रम में अब तक कुल 11 आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं। इनमें 9 महिलाएँ भी शामिल हैं। पकड़े गए आरोपितों में 2 नाबालिग भी हैं। पीड़िता की उम्र लगभग 20 साल बताई जा रही है। पुलिस का कहना है कि इसी केस में कुछ आरोपित फरार चल रहे हैं जिन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। मामले की जाँच जारी है।

घटना दिल्ली के विवेक विहार की है। मोहल्ले का नाम कस्तूरबा नगर है। आरोपितों पर गैंगरेप, शारीरिक हमला, यौन हमला और आपराधिक साजिश की धाराओं में केस दर्ज हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, नवम्बर 2021 में आरोपित पक्ष के परिवार से एक नाबालिग लड़के ने पीड़िता से एकतरफा प्यार में असफलता के बाद आत्महत्या कर लिया था। पीड़िता पर हमला और उसके साथ किया गया कृत्य उसी का बदला था।

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त डंडा और फोन बरामद कर लिए हैं। जिस फोन से वीडियो बनाया गया है उसको फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा गया है। पीड़िता को जिस ऑटो से अगवा किया गया था उसकी तलाश की जा रही है। पीड़िता का मजिस्ट्रेट के आगे गुरुवार (27 जनवरी, 2022) को बयान दर्ज हो गया है। पीड़िता की ही मर्जी से उन्हें शेल्टर होम भेज दिया गया था।

ऑपइंडिया की टीम पहुँची पीड़िता के घर

ऑपइंडिया की टीम ने पीड़िता और आरोपितों के घरों तक पहुँची। गली में घुसने से पहले सड़क पर सर्कुलर रोड पुलिस बीट है। वहाँ पर पुलिस की एक PCR खड़ी दिखाई दी। उसमें मौजूद पुलिसकर्मी गली में आने-जाने वाले लोगों से सुरक्षा की दृष्टि से पूछताछ कर रहे थे। यद्यपि बाहर सड़क पर जन जीवन की स्थिति सामान्य दिखी।

गली के इंट्री पॉइंट के दूसरी तरफ तैनात पुलिस बल

जिस गली में पीड़िता का मकान है उसमें घुसते ही कई बाहरी लोगों की चहलकदमी दिखाई पड़ी। गली के स्थानीय निवासी अपनी दिनचर्या में व्यस्त थे। पीड़िता के घर के सामने वाली सड़क पर दर्जनों पुलिस के जवान तैनात थे। मौके पर महिला पुलिस अधिकारी पूनम पुलिस बल का नेतृत्व कर रही थीं। ऑपइंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक, घटना के दिन सूचना मिलने पर पुलिस 4 मिनट में घटनास्थल पर पहुँच गई थी।

पीड़िता की गली में तैनात सुरक्षाकर्मी

ऑपइंडिया की टीम जब पीड़िता के मकान पर पहुँची तब बाहर के तमाम लोगों का जमावड़ा लगा हुआ था। मौके पर सांसद गौतम गंभीर के प्रतिनिधि और हिंदूवादी नेता जय भगवान गोयल मौजूद थे। दोनों पीड़िता के परिवार के साथ कई घंटों तक रहे। मौके पर कुछ मीडियाकर्मी भी मौजूद थे। पुलिस बल वहाँ मौजूद लोगों से पीड़ित परिवार की सुरक्षा और कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए बार-बार भीड़ न लगाने को कह रहा था।

मौके पर मौजूद जय भगवान गोयल, गौतम गंभीर के प्रतिनिधि और मीडियाकर्मी

ऑपइंडिया से बातचीत में जय भगवान गोयल ने लड़की के परिवार को पूरी कानूनी मदद देने की बात कही। गौतम गंभीर के प्रतिनिधि ने भी लड़की के परिवार को हर संभव मदद देने की बात कही। दोनों ने ही घटना को नृसंश बताया।

पीड़िता का घर एक पतले गलियारे से लगभग 10 मीटर अंदर जाना पड़ता है। घर के मुहाने पर दिल्ली पुलिस का जवान तैनात था। बिना पहचान के किसी भी अनजाने को अंदर जाने की इजाजत नहीं थी।

पीड़िता के मकान के गलियारे का प्रवेश द्वार और बाहर तैनात दिल्ली पुलिस का जवान

पीड़िता के चाचा ने की ऑपइंडिया से बात

ऑपइंडिया से बातचीत में पीड़िता के चाचा ने कहा, “हम मूल रूप से पाकिस्तान लाहौर के रहने वाले हैं। बँटवारे के समय हमारा परिवार भारत आया था। आँखें ख़राब होने के चलते मैं देख नहीं पाता। मेरा भाई (पीड़िता का पिता) ऑटो चलाता था। कुछ समय पहले एक एक्सीडेंट में उसे बहुत चोट लग गई थी। उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई है। तब से वह बिस्तर पर ही पड़ा रहता है। हमारा ऑटो ड्राइवर चलाता है। घर का खर्च उसी पैसे से चलता है। पीड़िता शादीशुदा है और एक बच्चे की माँ है। वह अपने पिता की सेवा करने के लिए यहाँ आती-जाती रहती है।”

पीड़िता के चाचा के मुताबिक, “हमला करने वालों के परिवार का एक 16 साल का लड़का काफी दिन से मेरी भतीजी के पीछे पड़ा था। मेरी भतीजी उस से 4 साल बड़ी है। बाद में मेरी भतीजी की शादी कहीं हो गई। उनका पति दूसरे प्रदेश के एक होटल में काम करता है। अब उसका एक बेटा भी है। लड़का अपने घर में लड़की के लिए मर जाने की धमकी पहले भी दिया करता था। बीते नवम्बर महीने में जिस हमला करने वालों के परिवार के उस लड़के ने ट्रेन के आगे कूद कर जान दे दी। हमलावर हमारी भतीजी को इसका जिम्मेदार मानते हैं। लड़के की मौत के बाद उनके घर वालों ने पुलिस में शिकायत नहीं की। उन्होंने अगले ही दिन मेरे घर पर हंगामा बोल दिया था। इसलिए उन सभी ने मिल कर ऐसा किया। लड़की पहले सीमापुरी में रहती थी। वहाँ उसे मारने की धमकी मिली तो वो डर से किराए पर कड़कड़डूमा में रहने लगी थी। लोहड़ी के दिन इन्हीं लोगों द्वारा पीड़िता की मौसी को भी मारा-पीटा गया था। तब वह मिलने आई थी। उस समय पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुला कर लिखा पढ़ी की थी। साथ ही आगे कोई दिक्कत होने पर कॉल करने के लिए कहा था।”

पीड़िता के चाचा ने आगे बताया, “घटना 26 जनवरी की है। गली में मकान हमारा खुद का है। जिन महिलाओं ने मेरी भतीजी पर हमला किया वो बहुत खतरनाक परिवार से हैं। उनके 2 नंबर के (आपराधिक) काम हैं। घटना के दिन पहले झगड़ा घर से शुरू हुआ। लड़की (पीड़िता) अपने पिता को नहला रही थी। मैं ऊपर किचन में चाय पी रहा था। मैं नीचे नहीं आया क्योकि मुझे मामला महिलाओं का लगा। मेरी भतीजी (पीड़िता) घर से बाहर चली गई। पीछा लड़की की छोटी बहन का किया गया। वो गेहूँ देने कड़कड़डूमा गई थी अपनी बड़ी बहन को। वही से उसको झपट्टा मार कर ऑटो में बिठा लिया गया। उन महिलाओं ने मुझ से मेरी भतीजी की लोकेशन पूछी। मैंने मना किया तो उन्होंने मुझे धमकी दी। मैं डर गया। फिर उन्होंने मेरी भतीजी का पता लगा कर उसको ऑटो में बिठा कर कहीं ले गईं। खूब मारपीट की गई घर में बंद कर के। बाद में अंदर कुछ लड़कों से गलत काम भी करवाया गया। सिर के बाल छील दिए गए और जूतों की माला पहनाई गई। मेरी भतीजी से मारपीट करने वालों में चाची – ताई सभी शामिल हैं। मुझे दुष्कर्म करने वाले का नाम नहीं पता है।”

ऑपइंडिया से बात करते पीड़िता के चाचा

जब ऑपइंडिया ने इस घटना के दौरान पुलिस को सूचना न देने की वजह पूछी तो उन्होंने बताया, “हमारे फोन छीन लिए गए थे। पड़ोस में किसी ने फोन नहीं किया। सब डरते थे उनसे।”

पीड़िता के नाना ने ऑपइंडिया से की बात

ऑपइंडिया से बातचीत में पीड़िता के नाना का कहना था, “किसी मूर्ख को अक्ल होती है क्या ? किसी को आपका अपमान करना है, कर दिया। किसी चोर-उच्चके का रिश्ता किसी पर्स वाले से सिर्फ यही होता है कि पर्सवाले की जेब में पैसे होते हैं। अगर कोई कुत्ता किसी को घर में घुस कर काट रहा हो तो घर वाले भी कुत्ते जैसे बन जाएँ तो दोनों में अंतर क्या रह जाएगा? अब क्या बताएँ हम। क्या हम कोई वीडियो बना रहे थे वहाँ बैठ कर? मैं क्या इनके पास 24 घंटे रहता हूँ? मैं नौकरी से रिटायर हूँ। मुझे तो नौकरी में ही समय नहीं था।”

ऑपइंडिया से बात करते पीड़िता के नाना

पीड़िता के पिता घर में बिस्तर पर लेते थे। वो बोल पाने में भी असमर्थ थे। निचले तक के मकान में 1 कमरे में पूरी गृहस्थी बसी हुई है। मौके पर पीड़िता के कुछ रिश्तेदार भी मौजूद थे।

बिस्तर के अंदर पीड़िता के पिता

आरोपित का घर भी पीड़िता के घर के पास

ऑपइंडिया की टीम उस घर पर गई जिन पर पीड़िता पर हमले का आरोप है। घर नीले रंग में रंगा हुआ है। घर के आगे वाशिंग मशीन रखी हुई थी जिस पर कुछ कपड़े पड़े हुए थे। घर के आगे शटर लगा हुआ था जो बंद पड़ा है। इसी के साथ बगल से एक प्रवेश द्वार भी था जिस पर ताला लगा हुआ है। घर की छत पर फास्ट फ़ूड का बैनर लगा हुआ मिला जो एक कोने से निकला हुआ था। मकान के बाहर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल तैनात था। घर में सम्पर्क के लिए कोई भी मौजूद नहीं था।

आरोपित का मकान, तैनात पुलिस बल और घर में लगा ताला

पीड़िता का चचेरा भाई विवेक विहार थाने का BC (बैड करेक्टर)

ऑपइंडिया की पड़ताल में सामने आया कि पीड़िता का चचेरा भाई भी थाना विवेक विहार का BC (बैड करेक्टर) है। बैड कैरेक्टर (BC) मुख्यतः किसी क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों को कहा जाता है। चाचा ने ऑपइंडिया से बात की उनका ही बेटा थाने का BC है। उस क्षेत्र में अवैध शराब आदि बनाने के आरोप में कई लोग पुलिस रिकार्ड में दर्ज हैं। जिन पर समय-समय पर कार्रवाई होती रही है।

पड़ोसियों ने कैमरे पर बोलने से किया इंकार

ऑपइंडिया ने इस घटना की जानकारी पड़ोसियों से लेनी चाही। घर के कुछ ही दूरी पर किराने की दुकानें और मुख्य सड़क है। लेकिन सभी ने इस मामले में कुछ भी बताने से मना कर दिया। अधिकतर लोगों का जवाब था, “मुझे कुछ नहीं मालूम।”

घटनास्थल कस्तूरबा कॉलोनी में ऑपइंडिया रिपोर्टर राहुल पांडेय

ऑपइंडिया ने मौके पर मौजूद पुलिस बल से भी बातचीत करने का प्रयास किया। लेकिन पुलिस बल ने भी ऑन-कैमरा कोई बात करने से मना कर दिया। ऑपइंडिया ने इस मामले में पुलिस वर्जन के लिए DCP शाहदरा और ACP विवेक विहार को संपर्क किया। DCP शाहदरा द्वारा फोन उठाया नहीं गया और ACP विवेक विहार ने फोन काट दिया। पुलिस का वर्जन आने के बाद खबर अपडेट की जाएगी।

राजस्थान में नाबालिग लड़की को बंधक बना कर रखा था, देह व्यापार कराने की थी साजिश: ‘बाल कल्याण समिति’ की पहल के बाद बचाई गई

राजस्थान में अपहरण, बलात्कार और हत्या जैसी अमानवीय घटनाएँ अपने चरम पर हैं। राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार में अपराधियों के मनोबल बढ़े हुए हैं और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत असहाय महसूस कर रहे हैं। राज्य के धौलपुर में बाल कल्याण समिति और मानव तस्करी विरोध यूनिट ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक नाबालिग लड़की को बरामद किया है। नाबालिग लड़की को एक मकान में बंधक बनाकर रखा गया था और आशंका जताई जा रही है कि उससे देह व्यापार कराने की योजना थी।

नाबालिग को बंधक बनाकर रखने की जानकारी बाल कल्याण समिति को गुप्त सूचना के आधार पर मिली। मुखबिर द्वारा दी गई सूचना के बाद समिति के साथ मानव तस्कर यूनिट, चाइल्ड लाइन और निहालगंज थाना की पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस को देख मकान मालिक मौके से फरार हो गया। इसके बाद मकान में बंधक बनाकर रखी गई नाबालिग को छुड़ा लिया गया।

बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष रवि पचौरी ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली की शहर के निहालगंज थाना क्षेत्र के आनंद नगर कॉलोनी में एक नाबालिग युवती को देह व्यापार कराने के लिए बंधक बनाकर रखा गया है। इसके बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए नाबालिग को बरामद कर लिया गया।

लड़की को बरामद करने के बाद पुलिस और मानव तस्करी यूनिट ने लड़की को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया, जहाँ से उसे सखी वन स्टॉप सेंटर भेज दिया गया है। समिति लड़की की काउंसलिंग करा रही है।

धौलपुर के पुलिस के पुलिस उप-निरीक्षक ने बताया कि बाल कल्याण समिति और मानव तस्कर विरोधी यूनिट थाने आई थी और लड़की को छुड़ाने के लिए मदद माँगी थी। उन्होंने बताया कि मामले जाँच जारी है।

अल्लाहु अकबर के नारे और जान बचाने के लिए जहर पीने को तैयार हिंदू: CM योगी ने यूॅं ही नहीं कहा- कभी मजहबी दंगों में झुलसता था मेरठ

10 फरवरी 2022 को पहले चरण में उत्तर प्रदेश की जिन विधानसभा सीटों (UP Election 2022) पर वोट डलेंगे, उनमें मेरठ जिले की 7 सीटें भी हैं। शुक्रवार (28 जनवरी 2022) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने मेरठ में घर-घर जनसंपर्क अभियान चलाया। इस दौरान उन्होंने अपनी सरकार के दौरान मेरठ में विकास कार्यों का हवाला देते हुए बताया कि कैसे सपा शासनकाल में अपराधी थाने चलाते थे। कैसे मेरठ मजहबी दंगों की वजह से बदनाम था।

उन्होंने एक ट्वीट में कहा, “मेरठ 5 वर्ष पूर्व मजहबी दंगों की आग में झुलसता था। कर्फ्यू के कारण लोग घरों में कैद रहने को विवश थे। आज यहाँ समृद्धि के नए मानक स्थापित हो रहे हैं। बेटियाँ सुरक्षित हैं और मातृशक्ति का सम्मान है। रंगदारी माँगने वाले अब जान की भीख माँग रहे हैं। फर्क साफ है…।”

CM योगी ने जो कुछ कहा असल में कुछ साल पहले तक मेरठ की जमीनी हकीकत यही थी। यहाँ कई बड़े दंगे हुए। इसमें से 1987 में हुए दंगे के जख्म आज भी लोगों को सिहरन देते हैं। 2019 में उसी समय की एक घटना का जिक्र करते हुए विनरीश (Vinirish) ने एक ब्लॉग में अपनी आपबीती लिखी थी। मेरठ में पली-बढ़ी विनरीश ने बताया था कि पश्चिम यूपी के इस शहर में 70-80 के दशक में लोगों की ज़िंदगी काफी नीरस हुआ करती थी। साम्प्रदायिक दंगों के साथ ही लोग पलते-बढ़ते थे। लेकिन 87 से पहले दंगे अमूमन मध्यम वर्गीय परिवार की मौजूदगी से दूर दूसरे तबके में होते थे।

मेरठ की उस समय की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा था, “शास्त्री नगर के हिंदू बहुल मध्यवर्गीय कॉलोनी में सुबह-सुबह का समय था। 1987 की गर्मी के मौसम में सुबह में अचानक से दूर-दूर तक अल्लाहु अकबर के नारे गूँजने लगे और धुएँ के काले बादल आकाश पर छा गए। इससे पहले कि हम कुछ जान पाते कि मामला क्या है, हापुड़ रोड (अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्र) के बगल में शास्त्री नगर (एक हिंदू बहुल कॉलोनी) के बाहरी इलाके में रहने वाले अधिकतर लोग अचानक से भागने लगे। कोई पैदल भाग रहा था, कोई साईकल पर, तो कोई स्कूटर पर भाग रहा था। वे बता रहे थे कि मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया है और उनके घरों में जलते टायर फेंक रहे हैं। भीड़ ने हापुड़ रोड पर एक पेट्रोल पंप भी जला दिया था।”

उन्होंने लिखा, “हम लोगों ने छत पर जाकर देखा, एक भीड़ जली हुई टायर फेंकते हुए और ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगाते हुए मेन रोड की तरफ जा रही थी। मुझे याद है कि मेरे पिता, जो कि एक समर्पित कम्युनिस्ट थे, उन्होंने हॉकी स्टिक उठाकर मेरे छोटे भाई को कॉलोनी की सुरक्षा करने के लिए कहा। सुबह-सुबह आस-पास के गाँवों से दूधवाले साइकिल से आ रहे थे। जब उन्होंने भीड़ को देखा, तो वो भाग गए और देशी कट्टा (बंदूकें) लेकर लौटे और हर-हर महादेव के नारों के साथ भीड़ का सामना करना शुरू कर दिया।”

यह घटना जब हुई थी तब मेरठ की सांसद कॉन्ग्रेस की मोहसिना किदवई थीं। विनरीश के अनुसार उनकी दादी भी एक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता थीं, लेकिन उनकी मदद करने वाला उस समय कोई नहीं था। उनके एक चाचा मदद के लिए पुलिस चौकी गए तो पता चला कि वहॉं कोई जवान मौजूद ही नहीं है। सभी पुलिसकर्मी किसानों की रैली से निपटने के लिए दिल्ली भेज दिए गए थे।

विनरीश ने लिखा था, “अचानक हमें एहसास हुआ कि हम असहाय और बेहद असुरक्षित थे। हमारे पास हॉकी स्टिक्स, लाठियों और किचेन में इस्तेमाल की जाने वाली चाकू के अलावा अन्य कोई हथियार नहीं था। इस बीच गाँव वालों ने भीड़ को किसी तरह हटा दिया था। चूँकि, कॉलोनी नई थी, चारों तरफ खुला मैदान था, तो हमले हर तरफ से हो रहे थे। मैं उस आतंक, विश्वासघात और उस बेबसी वाले अनुभव को कभी नहीं भूल सकती। राजीव गाँधी पीएम थे। वह एक युवा आइकन थे। ये सब कैसे हो रहा था? पुलिस कहाँ थी? सांसद कहाँ थे? आखिर, हमें असुरक्षित क्यों छोड़ दिया गया?”

लेख में उन्होंने बताया था कि ऐसा हफ्तों तक चलता रहा था। कर्फ्यू लगा दिया गया था। रमजान का महीना चल रहा था और लोग पूरी रात घर के बाहर पहरा देते रहे। देर रात तक पार्क में महिलाओं का जमघट लगा रहता और फिर लोग ऊपर के घरों में सोने चले जाते, जिसे सुरक्षित माना जाता था। उन्होंने लिखा था, “हमने सोच लिया था कि अगर हमारी कॉलोनी खत्म हो गई, तो हम चूहे मारने वाला जहर पी लेंगे। हमने ईंटें एकत्रित कीं और इसे छत पर रखा, ताकि अगर हम पर हमला किया जाता है, तो इससे अपनी रक्षा कर सकें। रात में किसी भी तरह की भीड़ के हमले की आवाज़ सुनने पर काफी डर लगता था।”

उस समय के माहौल का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा था, “सुबह में पास की मस्जिद से ड्रम बजने की आवाजें आती थीं। फिर लाउडस्पीकर पर नारे लगाए जाते थे। हिंसा की धमकियों के बाद पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए जाते। हमें डराया जाता था कि बकरों की जगह हिंदुओं की कुर्बानी दी जाएगी। इस बीच कई अफवाहें, झूठी खबर भी फैलाई गई। किसी ने कहा कि समुदाय विशेष वाले ने चंडी माता मंदिर को तोड़ दिया। फिर उन्होंने उन हिंदू इलाकों के बारे में भी बताया, जिन पर उन लोगों ने हमला किया था और उनमें कितने लोग मारे गए थे। इस तरह की घोषणा हमें डराने के लिए, हमारे अंदर खौफ पैदा करने के लिए किया जा रहा था।”

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने एक्सप्रेसवे का निर्माण कर 4 घंटे की दिल्ली-मेरठ की दूरी को ही 40 मिनट में ही नहीं समेटा, हिंदुओं को उस खौफ से भी आजादी दिलाई है जिससे विनरीश जैसी महिलाओं को गुजरना पड़ा है।

आदिवासी लड़की और मुस्लिम पुरुष: झारखंड में ST का दर्जा पाने के लिए खेल, आरक्षित सीट पर यूनुस ने पत्नी नीलम को बनाया मुखिया

झारखंड में दशकों से आदिवासी लड़कियों (ST) के साथ चल रहे घिनौने खेल का पर्दाफाश करती एक न्यूज 18 की रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि झारखंड में आदिवासी लड़कियों के एसटी (ST) स्टेटस का लाभ पाने के लिए लड़कियों के साथ प्रेमजाल का गंदा खेल खेला जा रहा है। कथिततौर पर, वहाँ मु्स्लिम उन्हें सीधे-सीधे धर्मांतरण के लिए अपने प्रेम जाल में नहीं फँसाते बल्कि आरक्षण का लाभ लेने के लिए वह उनका इस्तेमाल करते हैं और इस तरह उनका ब्रेनवॉश होता है कि वो न तो अपनी जाति छोड़ती हैं और न ही हिंदू धर्म में विश्वास कायम रख पाती हैं। 

रिपोर्ट में टुंडुल उत्तरी पंचायत की मुखिया नीलम टिग्ग की कहानी को उजागर किया गया है जिन्होंने साल 2003 में यूनुस अंसारी से अपनी मर्जी से निकाह किया था और अब वह 11 साल से गाँव की मुखिया हैं। गौर देने वाली बात ये है एक मुस्लिम से निकाह करने के बाद नीलम टिग्गा क्षेत्र की मुखिया इसलिए बनीं क्योंकि वो पहले अनुसूचित जनजाति से संबंध रखती थीं और निकाह के बाद भी उनका नाम जाति पहले वाला ही रहा। इस तरह वह एसटी आरक्षण का लाभ पाकर और यूनुस से शादी कर मुसलमानों का वोट पाकर सीट पर काबिज हो गईं।

रिपोर्ट बताती है कि नीलम जब क्लास लेने के लिए बाहर जाती थीं तो यूनुस वहीं गाड़ी चलाते थे, इसके बाद दोनों में बातचीत बढ़ी और एक दिन दोनों ने निकाह कर लिया। यूनुस ITI पास हैं। उन्होंने नीलम से शादी के बाद उन्हें मुखिया चुनाव में उतारा और खुसकिस्मती से वह इन चुनावों को जीत भी गईं। अब यूनुस अपनी बीवी को कहीं पर मसला होने पर वहाँ छोड़ने और वहाँ से घर वापस लाने का काम करते हैं।

बता दें कि टुंडुल उत्तरी गाँव में 6 हजार की आबादी है और घर लगभग 100 हैं। इनमें 3 हजार सरना आदिवासी रहते हैं जबकि 2500 मुस्लिम रहते हैं और करीब 500 लोग दूसरी जाति और धर्म के लोग हैं। गाँव में सरना आदिवासियों का पूजा स्थल भी है लेकिन साथ में पाँच मस्जिदें भी हैं। टिग्गा की जेठानी तरन्नुम परवीन का कहना है कि नीलम ने भले ही धर्मांतरण नहीं किया लेकिन वह कभी सरना के मंदिर नहीं जातीं। घर में रहकर ही नमाज पढ़ती है। उन्हें कलमा पढ़ना आता है।

उल्लेखनीय है कि नीलम टिग्गा की ये कहानी अकेली नहीं है जब आरक्षण का लाभ पाने के लिए आदिवासी लड़कियों को फँसाया गया हो। यहाँ पर आदिवासी बेटियों के साथ चल रहे इस घिनौने खेल से सरना समाज के लोगों में खासी नाराजगी है जो बताता है कि ये खेल काफी पुराना है। राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के प्रदेश महासचिव रवि तिग्गा की मानें तो क्षेत्र में मासूम लड़कियों को बहला-फुसलाकर उनसे निकाह किया जा रहा है और निकाह के बाद उनको मुखिया चुनावों में उतारकर आदिवासी हितों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है।

असलम मियाँ ने ‘सोनू साहू’ बन कर मेले में हिन्दू युवती को फँसाया, शादी का झाँसा देकर कई बार रेप: झारखंड पुलिस ने बताया ‘प्रेम प्रसंग’

झारखंड के गुमला से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ सोनू साहू बनकर असलम मियाँ नाम के मुस्लिम व्यक्ति ने हिंदू युवती को फँसाया और उसका कई बार रेप किया। लेकिन जब भी पीड़िता ने उससे शादी करने को कहा तो उसे धमकाकर चुप करा दिया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ केस कर जाँच शुरू कर दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये मामला सिसई थाना क्षेत्र के भरनों प्रखण्ड में स्थित भड़गाँव का है, जहाँ के रहने वाले असलम मियाँ पर युवती को धोखा देने का आरोप लगा है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया है कि दिसंबर 2020 में युवती के गाँव में जतरा (मेला) लगा हुआ था। उसी दौरान उन दोनों की मुलाकात हुई थी। इसी दौरान दोनों अपना मोबाइल नंबर एक्सचेंज किया था। इसके बाद वो लगातार युवती से बातचीत करता रहा। उसने पहले युवती से शादी का वादा किया था।

इसके बाद आरोपित युवती को जून 2021 में भड़गाँव स्थित अपने घर ले गया और वहाँ उसने युवती के साथ तीन दिन तक पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसी दौरान उसे पता चला कि वो जिस युवक सोनू साहू समझ रही थी, वो असल में असलम मियाँ है। हालाँकि, ये जानने के बाद भी पीड़िता ने उससे शादी करने की ठानी, लेकिन वो इससे भी मुकर गया। इस बीच 14 जनवरी 2021 को भी आरोपित ने एक बार फिर से पीड़िता के साथ संबंध बनाए।

इसके बाद फिर से युवती ने उसपर शादी करने का दबाव बनाया, लेकिन उस दौरान भी आरोपित ने पीड़िता को धमकाया और शादी से इनकार कर दिया। इससे निराश युवती ने सिसई थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में सिसई थाने के प्रभारी रवि होनहागा का कहना है कि ये प्रेम प्रसंग का मामला है। काफी दिनों तक युवती उसके साथ संबंध में थी। युवक द्वारा शादी करने से टालमटोल करने पर युवती ने आवेदन दिया है। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। इसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने ‘अनधिकृत’ मंदिरों एवं पवित्र स्थलों को ध्वस्त करने का दिया आदेश, 8 जिलों के DM को लिखा पत्र

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) की नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल (West Bengal) की टीएमसी सरकार ने राज्य के आठ जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर सार्वजनिक स्थानों पर बने अवैध मंदिरों एवं अन्य धार्मिक स्थलों को हटाने का निर्देश दिया है। सरकार ने अधिकारियों से कार्रवाई के बाद रिपोर्ट माँगी है।

27 जनवरी 2022 (गुरुवार) के जारी किए गए आदेश में राज्य सरकार ने दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार, कूचबिहार, कलिम्पोंग, पूर्वी मिदनापुर, उत्तर 24 परगना, दक्षिण दिनाजपुर और पूर्वी बर्दवान के कलेक्टरों को इ ‘अनधिकृत’ संरचनाओं के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है। आदेश में जिला प्रशासन को ऐसी संरचनाओं को हटाते समय सावधानी बरतने का भी निर्देश दिया गया है।

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी निर्देश पत्र

राज्य सरकार द्वारा अप्रैल 2010 में जारी किए गए सरकारी आदेश में कहा गया था, “सरकार सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी नए अनधिकृत निर्माण की अनुमति नहीं देगी। राज्य, सरकारी विभाग और पंचायत एवं नगरपालिका जैसे स्थानीय निकायों को इस तरह के निर्माणों का पता लगाने और इसे लोक स्वीकृति मिलने से पहले जल्द-से-जल्द रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाना होगा। यदि आवश्यक हुआ तो विध्वंस की जिम्मेदारी भूमि के स्वामित्व वाले विभाग की होगी।”

सरकार ने कहा था कि इन ढांचों को तब जरूर तोड़ा जाना चाहिए, जब तक कि ऐसा न करने के लिए कोई ठोस कारण न हों। आदेश में सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों को ‘अनधिकृत धार्मिक संरचनाओं’ की पहचान करने के लिए सार्वजनिक स्थानों का सर्वेक्षण करने और एक रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया था, जिसे 31 जुलाई 2010 तक जमा करना था।

उस आदेश में स्थान, संरचना की आयु, संरचना किस हद तक पैदल चलने वालों या वाहनों के आवागमन में बाधा डाल रही है, संरचना को हटाने के लिए स्थानीय लोगों से प्राप्त शिकायतें, पास के भूखंड पर स्थानांतरण की संभावना, कानून-व्यवस्था की स्थति और सांप्रदायिक सद्भाव जैसे बातों को भी सर्वेक्षण में शामिल करने के लिए कहा गया था।

‘मेरे पास गुजरात दंगों के स्टिंग टेप्स, कोई मीडिया वाला पब्लिश नहीं कर रहा’: इंटरनेशनल चैनल पर राना अय्यूब का दावा, अब खुली पोल

तथाकथित पत्रकार राना अय्यूब न सिर्फ भारत में, बल्कि भारत से बाहर भी देश विरोधी प्रोपेगंडा फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ती हैं। अब उनका क़तर के मीडिया संस्थान ‘अल जज़ीरा’ के साथ बातचीत का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो अपने साथ एक ‘टेप’ को दिखाते हुए तरह-तरह के दावे कर रही हैं। हालाँकि, 2012 में ‘न्यूज़लॉन्ड्री’ नामक मीडिया पोर्टल को लॉन्च करने वाली मधु त्रेहान ने उनके इस प्रोपेगंडा की पोल खोल दी है, आइए, आपको बताते हैं कि मामला क्या है।

‘अल जज़ीरा’ के एक शो का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा बनीं राना अय्यूब ने वहाँ दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे (2001-2014), तब भी वो इस पद पर ‘अक्षम’ थे। उन्होंने आगे अपनी ही किताब का हवाला देते हुए नरेंद्र मोदी पर गुजरात का सीएम रहते हुए वहाँ 2002 में हुई दंगों में मिलीभगत का आरोप लगा दिया, जो झूठ वो कई वर्षों से दोहराती आई हैं। बता दें कि किसी जाँच एजेंसी या अदालत ने ऐसा नहीं पाया है।

इतना ही नहीं, राना अय्यूब ने झूठों की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए गुजरात में फेक एनकाउंटर्स के आरोप लगाए। इसके बाद ‘अल जज़ीरा’ के पत्रकार ने स्टूडियो में मौजूद एक अन्य भारत विरोधी पत्रकार सदानंद धुमे से पूछा कि क्या उन्होंने उस पुस्तक को पढ़ा है और उसमें कोई सबूत है भी या नहीं? हालाँकि, धुमे ने उस पुस्तक और राना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि उन्होंने अब तक न तो पुलिस को कोई सबूत दिखाए हैं और न ही उन्हें रिलीज किया है।

इस पर धुमे ने कहा कि हमारे पास 6 साल पुराने इंटरव्यूज के ट्रांसक्रिप्ट्स हैं, लेकिन टेप्स को अब तक रिलीज नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर उनके पास ये होता तो वो उसे रिलीज करना पसंद करते। इस पर राना अय्यूब ने कहा कि उनके स्टिंग ऑपरेशन को विध्वसनीय नहीं बताया जा रहा है, जो गलत है। उन्होंने दावा किया कि गुजरात दंगों के एक मामले में उसी स्टिंग से सज़ा हुई, जिसे 2007 में उस संस्था ने जारी किया था, जिसमें वो काम करती थीं।

उन्होंने कहा कि उस मामले में जज ने उसी स्टिंग को सज़ा का आधार बनाया था। सदानंद धुमे ने इसके बाद सवाल दागा कि आपको उन टेप्स को वेबसाइट पर अपलोड कर के रिलीज करने में क्या चीज रोक रही है? उन्होंने कहा कि ये करना तो काफी आसान है। फिर राना अय्यूब ने दावा कर डाला कि उन्होंने इस देश के सभी के सभी मीडिया संस्थानों, प्रकाशकों और पोर्टलों से इन टेप्स को प्रकाशित करने के लिए संपर्क किया है, लेकिन 5 वर्षों तक ऐसा करने के बावजूद कोई तैयार नहीं हुआ।

इसके बाद ‘न्यूज़लॉन्ड्री’ की सह-संस्थापक मधु त्रेहान ने कहा, “राना अय्यूब हमेशा कहती रहती हैं कि उन्होंने देश के हर के मीडिया पोर्टल से इन टेप्स को प्रकाशित करने के लिए संपर्क किया, लेकिन सबने नकार दिया। ‘न्यूज़लॉन्ड्री’ के लिए उनके इंटरव्यू लेते समय मैंने उन टेप्स को प्रकाशित करने का प्रस्ताव रखा तो उन्होंने ही इससे इनकार कर दिया था। ये बात वीडियो रिकॉर्ड पर भी है।” लोगों के सवाल ये भी थे कि अगर उनके पास सच में सबूत हैं तो वो सोशल मीडिया पर ही उन टेप्स को डाल दें।

राना अय्यूब ने हाल ही में हूती आतंकवादियों का समर्थन करते हुए सऊदी अरब पर यमन में कत्लेआम मचाने के आरोप लगाए, जिसके बाद सऊदी अरब और UAE वालों ने उन्हें जम कर खरी-खोटी सुनाई। इसके बाद उनके एक समर्थन ने उनकी तुलना ‘महाराणा’ से कर दी, जिसके बाद राजपूत संगठनों ने आपत्ति जताते हुए उनका विरोध किया। 2022 में उन्होंने हज जाने का सपना देखा था, ऐसे में संशय है कि अब ये पूरा हो पाएगा या नहीं। सऊदी अरब और UAE वालों ने उन्हें आतंकियों से भी ज्यादा खतरनाक बताया।

होटल में थूक लगा कर रोटी बनाते मुस्लिम व्यक्ति का वीडियो वायरल, यूपी पुलिस ने हिरासत में लिया: लखनऊ-मेरठ के बाद बागपत का मामला

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बागपत (Baghpat) जिले के औरंगाबाद मोहल्ले के शेखपुरा इलाके में स्थित एक होटल का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक मुस्लिम व्यक्ति को ‘थूक’ लगाकर तंदूरी रोटी (Spitting On Bread) सेंकते हुए देखा जा सकता है। इस बीच मुस्लिम समुदाय के इस व्यक्ति की इस करतूत को किसी ने वायरल कर दिया। इसके बाद हिंदू जागरण मंच (Hindu Jagran Manch) की शिकायत पर पुलिस ने होटल मालिक समेत तीन कारीगरों को हिरासत में ले लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम व्यक्ति की इस करतूत का वीडियो (शुक्रवार 28 जनवरी 2022) को वायरल हुआ। इसमें मुस्लिम व्यक्ति को तंदूरी रोटी बनाते वक्त उसमें थूकते हुए देखा जा सकता है। उसकी इस करतूत का पता जैसे ही लोगों को लगा तो उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया, जिसके बाद होटल मालिक ने किसी भी तरह से मामले को रफा-दफा करने की कोशिश करते हुए हंगामा कर रहे लोगों को रुपए देने का भी लालच दिया।

इससे गुस्साए लोगों ने ‘हिंदू जागरण मंच’ के जिलाध्यक्ष अंकित बड़ौली के नेतृत्व में बागपत कोतवाली में हिन्दुओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके बाद कोतवाली के इंस्पेक्टर देवेश्वर शर्मा ने कार्रवाई का आश्वासन देते हुए आऱोपितों को हिरासत में ले लिया। इस मामले में खेकड़ा के सीओ युवराज सिंह ने कहा है कि वीडियो के आधार पर आरोपितों को कस्टडी में लेकर पूछताछ की जा रही है। इसके बाद केस दर्ज कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इससे पहले भी होती रही हैं ऐसी घटनाएँ

ये कोई पहली बार नहीं है कि जब शांतिप्रिय समुदाय का व्यक्ति खाने में थूकते पकड़ा गया हो या उसका वीडियो वायरल हुआ हो। इससे पहले 12 जनवरी 2022 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में थूक लगाकर रोटी बनाते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था। जिसके बाद होटल मालिक याकूब, कर्मचारी दानिश, हाफिज मुख्तार फिरोज और अनवर समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया थी।

इसी तरह पिछले महीने दिसंबर 2021 में मेरठ के कंकरखेड़ा क्षेत्र में आंबेडकर रोड स्थित लक्ष्मीनगर में सगाई समारोह के दौरान थूक लगाकर रोटी बनाने का वीडियो वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में नौशाद नाम का युवक रोटी बना रहा है। वह रोटी पर बार-बार थूक लगा रहा था, तभी एक बच्चे ने उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया था।

खास बात ये है कि इस्लाम में थूक का भी अपना विशेष महत्व है और इसको लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं। कई हदीसों में खास तरीके से थूकने को बरकत पाने और शैतान को दूर भगाने के तरीके के तौर पर वर्णित किया गया है। सहीह-अल-बुखारी (वॉल्यूम 4, पुस्तक 54, संख्या 513) के अनुसार बाईं ओर थूकने से बुरे सपनों से छुटकारा मिलता है