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योगी सरकार में बाहुबली सरेंडर करते हैं तो अखिलेश के पेट में दर्द होता है: मथुरा में गृहमंत्री शाह ने कहा- आजम पर इतने मामले चले कि धाराएँ कम पड़ गईं

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों (Uttar Pradesh Assembly Election 2022) के प्रचार के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार (27 जनवरी 2022) को मथुरा में एक रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की जमकर तारीफ करते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव (Samajwadi Party Chief akhilesh Yadav) पर जमकर निशाना साधा।

गृहमंत्री शाह ने कहा कि योगी सरकार में बाहुबली गले में पट्टा डालकर सरेंडर करते हैं। इन पर जब गाज गिरती है तो अखिलेश यादव के पेट में दर्द होने लगता है। इन्होंने कहीं आजम खान तो कहीं मुख्तार अंसारी, ना जाने कितने फैला रखे हैं। अमित शाह ने कहा कि जब आजम खान पर कार्रवाई की गई तो उन पर इतने मामले लगे कि सीआरपीसी (CrPC) की धाराएँ कम पड़ गईं।

उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार बनने से पहले उत्तर प्रदेश की जनता ने समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) की सरकारें देखीं हैं। सपा आती थी तो एक जाति का काम करती थी। बसपा आती थी दूसरी जाति का काम करती थी। कभी किसी ने इस राज्य के विकास का नक्शा नहीं खींचा। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार किसी एक जाति की नहीं बल्कि, सारे समाज की पार्टी है।

सपा-बसपा की परिवारवाद और जातिवादी राजनीति पर प्रहार करते हुए अमित शाह ने कहा कि प्रदेश में लंबे समय तक जातिवाद, परिवारवाद और तुष्टीकरण का राज रहा। हालात ऐसे हैं कि सत्ता से हटने के 5 साल के बाद भी अखिलेश यादव के यहाँ नोटों का भंडार मिलता है। अखिलेश यादव को कानून-व्यवस्था पर बात करने से पहले चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।

मथुरा की जनता को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि इसी भूमि ने कान्हा को भगवान कृष्ण बना दिया और भगवान कृष्ण ने असुरों का यहीं पर नाश किया था। उन्होंने कहा कि अखिलेश बाबू के शासन के मुकाबले भजपा के राज में डकैती में 70, लूट में 72 और हत्या में 29 फीसदी की कमी आई है।

गृहमंत्री ने कहा कि योगी सरकार आने के बाद हत्या, अपहरण और गुंडागर्दी में कई फीसदी की कमी हुई है। प्रदेश की विकास की ओर इशारा करते हुए अमित शाह ने कहा, “ये जो दावे करते हैं… मैं पूछना चाहता हूँ कि आपके शासन के अंदर (सपा और बसपा में) सुशासन क्यों नहीं थी। यूपी की आर्थिक व्यवस्था खस्ताहाल थी। आज यूपी भारत की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।”

उन्होंने लोगों से भाजपा को फिर जीताने की अपील करते हुए कहा कि राधे-राधे कहकर भाजपा को वोट दीजिए। आने वाले समय में भाजपा प्रदेश को देश में पहले नंबर की अर्थव्यवस्था बना देगी। उन्होंने कहा कि 2014, 2017 और 2019 में जब भी डिब्बे खुले तो मथुरा से कमल ही निकला, इस पर यही होगा। 

पाकिस्तान में 22 महीने में हिन्दू मंदिरों पर 11वाँ हमला: अब सिंध के हिंगलाज माता मंदिर में कट्टरपंथी मुस्लिमों ने की तोड़फोड़

पाकिस्तान (Pakistan) में हिंदू मंदिरों पर हमले (Attack on Hindu Temple) थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) के तमाम दावों और आश्वासनों के बावजूद कट्टरपंथी मंदिरों को निशाना बना रहे हैं। खबर है कि सिंध प्रांत के थार पार्कर ज‍िले के खत्री मोहल्ले में रविवार (23 जनवरी 2022) को मुस्लिम कट्टरपंथियों ने हिंगलाज माता मंदिर (Hinglaj Mata Mandir) में तोड़फोड़ की। हमलावरों ने मंदिर में रखी मूर्तियों सहित हर सामान को बर्बाद कर दिया। बता दें कि पाकिस्‍तान में पिछले 22 महीने में हिंदू मंदिरों पर यह 11वाँ हमला है।

किसी से नहीं डरते कट्टरपंथी

हिंगलाज माता मंदिर पर हमले के बाद पाकिस्‍तान हिंदू मंदिर प्रबंधन के अध्‍यक्ष कृशेन शर्मा ने कहा कि इस्‍लामिक कट्टरपंथी पाकिस्‍तान के सुप्रीम कोर्ट और पाकिस्‍तान की सरकार से भी नहीं डर रहे हैं। इस बीच हिंदुओं ने मंदिर पर हमले के विरोध में मोर्चा निकाला और दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की माँग की। गौरतलब है कि पाकिस्‍तान के मुस्लिम कट्टरपंथी अक्सर अल्‍पसंख्‍यकों के धार्मिक स्‍थलों को निशाना बनाते रहते हैं। ऐसा तब है जब इमरान सरकार ने दावा किया था कि अल्‍पसंख्‍यकों को सुरक्षा दी जाएगी।

कराची में भी हुआ था हमला

पिछले साल दिसंबर में पाकिस्‍तान के कराची शहर में एक हिंदू मंदिर में कट्टरपंथियों ने हमला करके माँ दुर्गा की मूर्ति तोड़ दी थी। कट्टरपंथियों ने कराची के नरियान पूरा हिंदू मंदिर पर हमला किया था। हमलावरों ने पूरे मंदिर को तहस-नहस कर दिया था। मालूम हो कि कराची में बड़ी संख्‍या में हिंदू रहते हैं। इस हमले को लेकर इमरान सरकार की आलोचना भी हुई थी। 

2020 दिसंबर में स्थानीय मुस्लिम मौलवियों के नेतृत्व में सौ से अधिक लोगों की भीड़ ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के करक जिले में मंदिर को नष्ट कर दिया था और आग लगा दी थी। सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक वीडियो क्लिप में हिंसक भीड़ को मंदिर की दीवारों और छत को तोड़ते हुए देखा जा सकता था। बता दें कि पाकिस्तान वो देश है जहाँ अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों का खूब उल्लंघन होता है।

अहमदाबाद में हिंदू युवक किशन की सरेराह गोली मारकर हत्या: सोशल मीडिया पर शेयर किया था एक पोस्ट, जिससे कट्टरपंथी मुस्लिम थे नाराज

गुजरात की राजधानी अहमदाबाद की धंधुका तहसील से दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ मंगलवार (25 जनवरी 2022) को किशन भरवाड नाम के हिंदू युवक की हत्या कर दी गई। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, किशन अपने घर जा रहा था। उसी दौरान दो बाइक सवार आरोपितों ने उसे गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है, लेकिन ग्रामीण इससे संतुष्ट नहीं हैं।

कहा जा रहा है कि किशन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट अपलोड की थी, जिसके बाद से कट्टरपंथी इस्लामिस्ट उसके खिलाफ थे। रिपोर्ट के अनुसार, किशन ने जो वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया था वो पैगंबर मुहम्मद से संबंधित था। इन मामलों ने जब भी कट्टरपंथी किसी की हत्या करते हैं, या उसका सिर कलम करते हैं तो उसे ईशनिंदा कहकर जस्टिफाई किया जाता है। इस्लामिस्ट इसे सही ठहराते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, कथित पोस्ट के खिलाफ हाल ही में कुछ लोगों ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद पुलिस ने किशन के खिलाफ एक्शन लिया था। वर्तमान में किशन ने अपना सोशल मीडिया अकाउंट की सेटिंग को प्राइवेट कर रखा है। खास बात यह है कि पुलिस ने अभी तक उस कथित विवादित पोस्ट की जाँच नहीं की है।

इस घटना के बाद किशन अपने घर से बाहर नहीं निकलता था, अचानक मंगलवार को ही वो अपनी बाइक से निकला था, लेकिन उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस को आशंका है कि इसी विवादित पोस्ट के कारण हो सकता है कि उसकी हत्या की गई हो।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि किशन पर गोली चलाने वाले आरोपित उसके पीछे चल रहे थे, जैसे ही वो मोढवाड़ा मोड़ के पास पहुँचे तो किशन पर पहली गोली चलाई गई, हालाँकि, वो बच गया, जिसके बाद उस पर दोबारा हमला किया गया। इसके घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई।

इस वारदात के बाद बवाल होना तय था। परिजनों ने किशन के शव को लेने से इनकार कर दिया। हालाँकि, कई हिंदू संगठनों के मामले में हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने मामले की उचित जाँच का आश्वासन दिया और उसके बाद ही परिवार ने किशन के शव को स्वीकार किया।

बुधवार को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच किशन का अंतिम संस्कार किया गया। गुजरात पुलिस का एसओजी (स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप) मामले की जाँच करेगा। इस घटना के मामले में कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है।

BBC ने ब्रिटेन में यहूदियों पर हमले को बता दिया मुस्लिम विरोधी हेट क्राइम: फेक न्यूज पर पकड़े जाने के बाद चुपके से माँगी माफी

फेक न्यूज (Fake News) फैलाने के लिए कुख्यात अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी बीबीसी (BBC) की चोरी एक बार फिर पकड़ी गई है और हर बार की तरह वह इस बार भी उसने माफी माँगकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की है। हालिया मामला ब्रिटेन का है। लंदन के ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट पर यहूदी किशोरों के बस पर हुए हमले को लेकर बीबीसी ने फेक न्यूज फैलाई थी। इस मामले में ब्रिटेन की दूसंचार रेग्यूलेटर ऑफकॉम (Ofcom) ने जाँच शुरू की है।

पिछले साल नवंबर में लंदन के ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक बस में बैठे लगभग 40 यहूदी किशोरों पर कुछ लोगों का एक समूह थूक रहा रहा था और उनके साथ गाली-गलौज कर रहा था। ये बस की खिड़कियों पर धक्का दे रहे थे। इस घटना को बीबीसी ने अलग ही रंग दे दिया था। बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बस यहूदी किशोर मुस्लिम विरोधी बातें कही जा रही थीं और उनके साथ गाली-गलौज की जा रही थी।

ब्रिटिश ऑनलाइन मीडिया न्यूज वेबसाइट ‘डेली मेल’ के अनुसार, स्थानीय पुलिस ने इस घटना को ‘हेट क्राइम’ (Hate Crime) कहा था। वहीं, ब्रिटिश यहूदियों के बोर्ड ऑफ डेप्यूटी (Deputies of British Jews) एवं मुख्य रब्बी ने बीबीसी की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे। तब बीबीसी के महानिदेशक टिम डेवी ने कॉरपोर्शन की कार्यकारी शिकायत इकाई (ICU) को शिकायतों की ‘तत्काल के रूप में’ जाँच करने का निर्देश दिया था।

बुधवार को प्रकाशित अपने निष्कर्षों में ईसीयू ने कहा कि ऑनलाइन और टेलीविजन के मूल संस्करण ‘बीबीसी के उचित सटीकता के मानकों को पूरा नहीं करते’। इसने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बीबीसी के टीवी प्रसारण और ऑनलाइन स्टोरी में अंतर है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बीबीसी ने अपनी ऑनलाइन रिपोर्ट में उचित सटीकता के मानकों को पूरा नहीं किया और इसमें निष्पक्षता का अभाव है।

बीबीसी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी माँगी और कहा कि ऑनलाइन रिपोर्ट को संशोधित कर दिया गया है, लेकिन टीवी प्रसारण के रिपोर्ट को संशोधित नहीं किया जा सकता है। इस मसले पर एंटीसेमिटिज्म के खिलाफ अभियान (Campaign Against Antisemitism) के एक प्रवक्ता ने ऑफकॉम की जाँच का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि यहूदी समुदाय को न्याय मिलेगा।

इस घटना के बाद ब्रिटेने के यहूदियों ने बीबीसी ऑफिस के सामने प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि घटना के लिए बीबीसी यहूदियों को दोष देना बंद करे। इस घटना को लेकर बीबीसी से 30 वर्षों से जुड़े यहूदी पत्रकार एवं न्यूज एंकर रब्बी वाईवाई रुबीन्स्टीन ने इस्तीफा दे दिया था।

‘न्यूज चैनल के मालिक ने डाला इस्लाम कबूलने का दबाव, गाली-धमकी दी’: महिला पत्रकार का आरोप- पुलिस नहीं कर रही कार्रवाई

26 जनवरी 2022 (बुधवार) को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक महिला पत्रकार अपने पूर्व संस्थान के मालिक पर इस्लामी धर्मान्तरण का दबाव डालने का आरोप लगाती दिख रही है। वीडियो में पीड़िता 2 महीने पहले दर्ज FIR पर दिल्ली पुलिस द्वारा एक्शन नहीं लिए जाने का भी आरोप लगा रही है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस्लाम कबूल करने के बदले उसे सैलरी बढ़ाने का भी लालच दिया गया। यह आरोप दिल्ली के प्रीत विहार स्थित एक यूट्यूब चैनल न्यूज़ एक्शन नेटवर्क (News Action Network) के MD (मैनेजिंग डायरेक्टर) शान चौधरी पर लगा है।

वायरल वीडियो में पीड़िता कह रही है, “मैं पेशे से पत्रकार हूँ। मैं यूट्यूब चैनल न्यूज़ एक्शन नेटवर्क के लिए काम करती थी। इस चैनल का MD शान चौधरी है। उसने मुझ पर लगातार इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया। यह चीज मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं थी। वह मुझे इस्लाम कबूलने पर सैलरी 25000 रुपए से बढ़ा कर 100000 रुपए करने का लालच दिया करता था। साथ ही वह मुझे मुस्लिम लड़की जैसी दिखने की बात करता था। मैंने नौकरी छोड़ दी। मेरी 45 दिनों की सैलरी कम्पनी ने रोक दी।”

वीडियो में महिला पत्रकार आगे कह रही, “47 दिनों बाद मुझे ऑफिस बुलाया गया। जब मैं शान चौधरी के ऑफिस पहुँची तब पहले से वहाँ रिया गुप्ता, रोशनी और मिश्रा मौजूद थे। वहाँ शान ने मुझे गालियाँ दी और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। इसी के साथ मुझे जान से मारने की भी धमकी दी गई। मैं जैसे-तैसे वहाँ से अप्पने साथी के साथ निकल पाई। मैं प्रीत विहार थाने गई और केस दर्ज करवाने की कोशिश की। लेकिन असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (ASI) सोहनगीर ने मेरा केस दर्ज करने से मना कर दिया।”

महिला पत्रकार के अनुसार, “2 दिन तक कोशिशों के बाद आख़िरकार मेरी FIR दर्ज हुई। लेकिन इस केस में पुलिस ने कोई जाँच या कार्रवाई नहीं की और न ही सबूत जुटाने के प्रयास किए। तब मैंने सामाजिक कार्यकर्ता राजेश भसीन और आस्था से सम्पर्क किया। इन्होंने हमारे मुद्दे को सोशल मीडिया पर उछाला और मेरी 164 के बयान में मदद की। यह होने में 2 महीने बीत गए। अब तक पुलिस IO (विवेचक) तीन बार बदल चुके हैं। लेकिन कोई भी एक्शन नहीं लिया गया है।” राजेश भसीन ने इस पूरे मामले का 33 मिनट का वीडियो अपलोड किया है।

इस वीडियो शान चौधरी के राजनैतिक संबंधों की भी हवाला दिया गया है। कहा गया है कि वह समाजवादी पार्टी के टिकट से हसनपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहा है। हालाँकि हम इन आरोपों की पुष्टि हम नहीं करते। समाजवादी पार्टी ने अपने प्रत्याशियों की जो लिस्ट जारी की है, उसमें किसी और का नाम है। यहाँ ये ध्यान रखने योग्य है कि न्यूज़ एक्शन नेटवर्क द्वारा अपलोड किए गए कुछ वीडियो में शान चौधरी को ‘भविष्य का सपा प्रत्याशी’ बताया गया है।

न्यूज़ एक्शन नेटवर्क द्वारा अपलोड पोस्ट

वीडियो में लड़की ने आरोप लगाया है, “मैंने पुलिस अधिकारी को घटना के दिन का वीडियो फुटेज चेक करने को कहा, लेकिन कुछ भी नहीं हुआ। या तो कोई कार्रवाई की जाए या मुझे बताया जाए कि केस फर्जी है। अगर एक्शन नहीं ले सकते तो केस बंद कर दो। यह मुद्दा सैलरी का नहीं, बल्कि न्याय का है। मेरे ऊपर शान चौधरी ने मानहानि का केस भी दर्ज किया है।”

‘BJP विधायक के घर डकैती डालूँगा, 16 बार जेल गया, प्रशासन की तो ऐसी की तैसी’: अमरोहा से सपा प्रत्याशी ‘मुलायम के शिष्य’ की खुलेआम धमकी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है। इस बीच एक और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के प्रत्याशी का विवादित बयान वाला वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो अमरोहा से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी मुखिया कुमार का है।

वायरल वीडियो में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक के घर में डकैती डालने वाला बयान दिया है। इसमें वे खुलेआम विधायक को धमकी देते नजर आ रहे हैं। साथ ही, अपने आपराधिक इतिहास का भी बखान करते भी दिख रहे हैं।

मुखिया कुमार कहते हैं, “भाई का जलवा इस कदर है कि यहाँ पर जो तुम्हारा विधायक (BJP) है, मैंने वर्कशॉप खोल रखी है और ऐसे लोगों की डेंट-पेंट ठीक करने का मुझे हुनर है। मैं मुलायम सिंह यादव का कट्टर शिष्य हूँ। मैंने भाजपा में रहते हुए भी एक भी दिन के लिए अपने गुरू मुलायम सिंह यादव की तस्वीर नहीं उतारी। इनकी ऐसी की तैसी।”

उन्होंने आगे कहा, “इस विधायक ने जितना भ्रष्टाचार किया है, उससे हिसाब चुकता करके और इससे सारा माल लूट करके तुम्हारे घरों में भर दूँगा। मैं इसी बात के लिए जाना जाता हूँ। ये जो शासन-प्रशासन, मुकदमे की बात कर रहे हैं, इसकी ऐसी की तैसी। 16 बार जेल काट रखी है मैंने। ये मेरे पर मुदकमा लगाएँगे।”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “ये अमरोहा के सपा प्रत्याशी मुखिया कुमार हैं, कह रहे हैं कि भाजपा विधायक के घर डकैती डालूँगा, 16 बार जेल काट चुका हूँ जेल से नहीं डरता, प्रशासन की तो ऐसी की तैसी।” इसके साथ ही उन्होंने ‘लालटोपीमतलबगुंडे’ का हैशटैग भी लगाया है।

बता दें कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के मेरठ दक्षिण से समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के उम्मीदवार आदिल चौधरी (Adil Chaudhary) ने भी हिंदुओं से बदला (Hindus) लेने की धमकी दी थी। आदिल चौधरी ने कहा था कि उनकी सरकार आई तो उनको (हिंदुओं को) छोड़ेंगे नहीं… चुनचुन कर बदला लिया जाएगा। 

गौरतलब है कि इससे पहले शामली में नाहिद हसन के समर्थक का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह कह रहा था, “अगर कैराना विधानसभा सीट पर हमारे नाहिद हसन को जाटों ने वोट नहीं दिया तो फिर अच्छा नहीं होगा हम लोग विधानसभा सीट पर रालोद (चौधरी) उम्मीदवार को वोट नहीं देंगे, हमें गड़बड़ी करने में मिनट नहीं लगेगा।”

ट्विटर ने राहुल गाँधी को समझाया ‘हेरफेर’ और ‘स्पैम’, कहा था- मोदी सरकार का दबाव, सीमित किए जा रहे मेरे फॉलोअर्स

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर मोदी सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया था। कहा था कि उनके फॉलोअर्स सीमित किए जा रहे हैं। ट्विटर ने बताया है कि फॉलोअर्स की संख्या सार्वजनिक होती है और वह इससे कोई छेड़छाड़ नहीं करता। उसने वायनाड के सांसद को हेरफेर और स्पैम के बारे में बताते हुए कंपनी की नीतियों पर गौर करने की सलाह दी है।

राहुल गॉंधी के आरोपों के बाद ट्विटर प्रवक्ता ने कहा है कि फॉलोअर्स की संख्या में कमी या वृद्धि सामान्य बात है। किसी ट्विटर हैंडल के फॉलोअर्स की संख्या सबको दिखती है। यह नंबर सटीक होता है। ट्विटर ने कहा है, “हम चाहते हैं कि सभी विश्वास रखें कि फॉलोअर्स की संख्या सार्थक और सटीक है। ट्विटर अपने प्लेटफॉर्म पर हेरफेर और स्पैम के प्रति जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाता है।”

27 दिसंबर 2021 को ट्विटर सीईओ पराग अग्रवाल को लिखे पत्र में राहुल गाँधी ने अपने अकाउंट के डेटा का विश्लेषण करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर के अकाउंट की तुलना की थी। इसमें ने कहा था कि 2021 के पहले सात महीनों में उनके अकाउंट पर औसतन लगभग 4 लाख फॉलोअर्स बढ़े थे। लेकिन पिछले साल अगस्त में आठ दिनों के निलंबन के बाद कई महीनों के लिए ये ग्रोथ अचानक रुक गई। इसी अवधि में, अन्य राजनेताओं की फॉलोअर्स की संख्या बरकरार रही।

राहुल गाँधी ने लिखा, “दुनिया भर में उदार लोकतंत्र और सत्तावाद के बीच वैचारिक लड़ाई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चल रही है। ऐसे में ट्विटर जैसी कंपनियों के शीर्ष पर बैठे व्यक्तियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। यह चौंकाने वाला है कि मेरे ट्विटर फॉलोअर्स की वृद्धि को अचानक रोक दिया गया। मेरे 2 करोड़ फॉलोवर्स हैं। मेरा ट्विटर अकाउंट एक्टिव है और जुलाई 2021 तक हर दिन मेरे 8-10 हजार फॉलोअर्स बढ़ते रहे।”

उन्होंने लिखा, “अगस्त से, औसत मासिक फॉलोअर्स की संख्या जीरो पर आ गई है। अगस्त के बाद फॉलोवर्स बढ़ना कम हो गए। यह संयोग तो नहीं हो सकता कि इन महीनों के दौरान मैंने दिल्ली में एक बलात्कार पीड़िता के परिवार की दुर्दशा के मुद्दे को उठाया, किसानों के साथ एकजुटता से खड़ा हुआ और कई अन्य मानवाधिकार मुद्दों पर सरकार से लड़ाई लड़ी। वास्तव में मेरा एक वीडियो, जिसमें वादा किया था कि किसानों के 3 काले कृषि कानूनों को निरस्त कर दिया जाएगा, हाल के दिनों में भारत में किसी भी राजनीतिक नेता द्वारा ट्विटर पर डाले गए सबसे ज्यादा देखे जाने वाले वीडियो में से एक है।” 

उन्होंने कहा, “लोगों द्वारा मुझे विश्वसनीय रूप से, हालाँकि विवेकपूर्ण तरीके से सूचित किया गया है कि ट्विटर इंडिया पर सरकार द्वारा मेरी आवाज को चुप कराने के लिए अत्यधिक दबाव बनाया गया है। मेरा अकाउंट कुछ दिनों के लिए बिना किसी वैध कारण के ब्लॉक कर दिया गया था। सरकार समेत कई अन्य ट्विटर हैंडल भी थे जिन्होंने उन्हीं लोगों की इसी तरह की तस्वीरें ट्वीट की थीं। उनमें से किसी भी अकाउंट को ब्लॉक नहीं किया गया था। सिर्फ मेरे ही अकाउंट को टारगेट किया गया।” राहुल गाँधी ने कहा, “मैं आपको एक अरब से अधिक भारतीयों की ओर से लिख रहा हूँ कि ट्विटर को भारत के विनाश के विचार में मोहरा न बनने दें।”

ट्विटर प्रवक्ता ने कहा है, “हम चाहते हैं कि फॉलोअर्स वास्तविक हों। ट्विटर के पास हेरफेर और स्पैम के लिए कोई जगह नहीं है।” इसमें आगे कहा गया, “हम मशीन लर्निंग टूल्स के जरिए हर सप्ताह बड़े पैमाने पर बॉट फॉलोअर्स और स्पैम की छँटनी करते हैं। गतिविधियों के खिलाफ ट्विटर की नीतियों का उल्लंघन करने के लिए हर हफ्ते लाखों अकाउंट हटा दिए जाते हैं। ऐसे में फॉलोअर्स की संख्या में कमी हो सकती है। आप अधिक संदर्भ के लिए नवीनतम ट्विटर पारदर्शिता सेंटर अपडेट पर एक नज़र डाल सकते हैं। हालाँकि कुछ अकाउंट्स में मामूली अंतर दिखाई देता है, कुछ मामलों में संख्या अधिक हो सकती है।”

गौरतलब है कि अगस्त में राहुल गाँधी ने ट्विटर पर पर 9 साल की रेप पीड़िता के माता-पिता की फोटो शेयर की थी। इसे लेकर बीजेपी ने राहुल गाँधी पर असंवेदनशील होने और ऐसे मामले में राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाते हुए निशाना साधा था। इसके बाद राहुल गाँधी का ट्विटर अकाउंट अस्थायी तौर पर सस्पेंड कर दिया गया था। हालाँकि, बाद में राहुल गांधी के अकाउंट से बैन हटा लिया गया।

‘फासीवादियों के भाड़े के तानाशाह बिपिन रावत के लिए आँसू बहाना शर्म की बात’: CDS की मौत पर लिखा, हाई कोर्ट ने FIR रद्द की

जनरल बिपिन रावत (Bipin Rawat) की मौत को लेकर फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले के खिलाफ FIR मद्रास हाई कोर्ट ने निरस्त कर दी है। CDS जनरल रावत की मृत्यु दिसंबर 2021 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हो गई थी। हाई कोर्ट ने उनकी मृत्यु के बाद किए गए पोस्ट को निंदनीय मानते हुए कहा कि यह भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत अपराध नहीं।

8 दिसंबर 2021 एक फेसबुक पोस्ट में तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले के जी. शिवराजाबूपति ने ने लिखा था कि फासीवादियों के भाड़े के तानाशाह बिपिन रावत के लिए आँसू बहाना शर्म की बात है। नागरकोइल साइबर क्राइम पुलिस ने 15 दिसंबर 2021 को इस मामले में केस दर्ज किया था। FIR में पोस्ट लिखने वालों के साथ उसे शेयर करने वाले कुल 15 लोगों को आरोपित किया गया था। यह केस 153, 505 (2) और 504 IPC के तहत दर्ज हुआ था।

लाइव लॉ के मुताबिक तमिलनाडु पुलिस की इस FIR को आरोपी जी. शिवराजाबूपति ने 482 CRPC के तहत निरस्त करने की अपील हाई कोर्ट से की थी। जस्टिस जीआर स्वामीनाथन की एकल पीठ ने FIR को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि यह पोस्ट निंदनीय तो है, लेकिन IPC के तहत एक आपराधिक अपराध नहीं।

जस्टिस स्वामीनाथन ने कहा, “निश्चित रूप से याचिकाकर्ता का आचरण तमाम लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला है। उसका फेसबुक पोस्ट शर्मनाक है। लेकिन इसका निर्णय तय मानदंड के आधार पर होना चाहिए। मुख्य सवाल ये है कि क्या किया गया कृत्य संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है? यदि नहीं तो FIR रद्द की जानी चाहिए। शिकायत का अधिकार केवल पीड़ित के पास होगा। इस मामले में सोशल मीडिया के माध्यम से किसी के खिलाफ एक असभ्य टिप्पणी करने से IPC की धारा 153 (दंगे भड़काने का प्रयास) की स्थिति नहीं होगी।”

कोर्ट ने आगे कहा, “आरोपित के फेसबुक पोस्ट द्वारा पीड़ित को सीधे अपमानित नहीं किया गया है। यह पोस्ट उसके फेसबुक फ्रेंड्स के लिए थी। हालाँकि इसे कोई भी एक्सेस कर सकता है। पोस्ट 8 दिसम्बर को किया गया और शिकायत 15 दिसम्बर को दर्ज हुई है। हो सकता है कि शिकायत करने वाले ने इसे खुद संयोग से देखा हो या किसी ने उसे दिखाया हो। इसलिए आरोपित पर आईपीसी की धारा 504 भी लागू नहीं होती।”

2 वर्गो के बीच शत्रुता फैलानी IPC की धारा 506 (2) पर न्यायाधीश का कहना था, “याचिकाकर्ता की पोस्ट में 2 ग्रुप नहीं शामिल हैं। न ही उसमें धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा, जाति या समुदाय का कोई संदर्भ है। इसमें एक ग्रुप को दूसरे ग्रुप के खिलाफ खड़ा करने के प्रयास जैसा भी कुछ नहीं है। इसलिए इस मामले में याचिकाकर्ता को दंडित करने का आधार नहीं बन रहा।”

जस्टिस स्वामीनाथन ने कहा, “याचिकाकर्ता CDS जनरल रावत की विरासत की आलोचना के हकदार तो है, लेकिन उनकी आलोचना का तरीका तमिल संस्कृति के अनुरूप नहीं है। मेरी इच्छा है कि याचिकाकर्ता महाभारत के उस अंतिम अध्याय को पढ़े जब सभी पात्र मर चुके हैं और युधिष्ठिर जाने वाले अंतिम बचे हैं। स्वर्ग में प्रवेश के दौरान वे वहाँ दुर्योधन को देख कर चौंक गए। वे गुस्से में आकर दुर्योधन को अपशब्द बोलने लगे। तब उन्हें नारद ने ऐसा करने से रोका और समझाया- स्वर्ग में रहते हुए सभी शत्रुता समाप्त हो जाती है। दुर्योधन के बारे में ऐसा न कहो। हालाँकि मैं याचिकाकर्ता के वैचारिक बैकग्राउंड से परिचित नहीं हूँ। शायद उसे राष्ट्रीय महाकाव्यों से एलर्जी है।”

उद्धव ठाकरे के कॉन्ग्रेसी मंत्री असलम शेख ने ‘टीपू सुल्तान स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स’ का कर दिया उद्घाटन, मंत्री बेटे आदित्य कह रहे- अभी नाम फाइनल नहीं

मैसूर के क्रूर शासक टीपू सुल्तान के नाम पर मुंबई के मलाड में एक स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स के नामकरण पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस पर आपत्ति जताई। इस विवाद पर बुधवार (26 जनवरी 2022) को महाराष्ट्र के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे की प्रतिक्रिया सामने आई। उनका कहना है कि इस जगह का नाम अभी फाइनल नहीं हुआ है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र की ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ सरकार में कॉन्ग्रेस कोटे से मंत्री असलम शेख द्वारा इस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किए जाने के बाद उनकी यह प्रतिक्रिया सामने आई है।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ने कहा है, “परियोजनाओं के आधिकारिक नामों को अंतिम रूप देना बीएमसी के दायरे में आता है। महापौर ने कहा है कि उस पार्क के आधिकारिक नाम को लेकर अभी तक अंतिम फैसला नहीं हुआ है।” आदित्य ठाकरे का यह दावा असलम शेख के दावों के बिल्कुल विपरीत है। मंत्री असलम शेख ने कहा था कि पिछले 70 वर्षों से टीपू सुल्तान के नाम को लेकर कोई विवाद नहीं था, लेकिन अब भाजपा ने अपने ‘गुंडों’ को भेज कर देश को ‘बदनाम करने’ का काम किया है।

एक कार्यक्रम में, शेख ने कहा था, “इस पार्क का नाम पिछले 15 वर्षों से (टीपू सुल्तान के नाम पर) है। लेकिन अब तक किसी ने भी इस पर आपत्ति नहीं की है। विपक्ष के नेता ने परिसर का नाम टीपू सुल्तान के नाम पर रखने पर आपत्ति जताई है। मेरा सवाल है, क्या वह अपनी पार्टी के विधायक और पार्षद, जिन्होंने सबसे पहले यह प्रस्ताव रखा था, इस्तीफा देने के लिए कहेंगे?” उन्होंने कहा, “मौजूदा बगीचे के नवीनीकरण के हिस्से के रूप में, टेनिस और बैडमिंटन कोर्ट बनाए गए हैं और वे सभी धर्म या जाति के लिए खुले हैं।”

विरोध में भाजपा, विहिप, बजरंग दल का प्रदर्शन

बीजेपी, बजरंग दल और अन्य संगठन टीपू के नाम पर एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के नामकरण का विरोध कर रहे हैं। टीपू सुल्तान भारत के सबसे क्रूर इस्लामी शासकों में से एक माना जाता है। उसके आदेश पर हिंदुओं का जबरन धर्म परिवर्तन, बलात्कार और अपहरण की कई घटनाएँ रिकॉर्ड में हैं। उसके शासनकाल में कई मंदिरों को ध्वस्त किए जाने का उल्लेख है। यहाँ तक ​​कि शिवसेना के सदस्यों ने भी खेल परिसर के नामकरण का विरोध किया है। मंगलवार को शिवसेना कार्यकर्ताओं ने खेल परिसर के बाहर धरना दिया और पार्क के नामकरण पर नाराजगी जताई।

तिरंगा जलाने की बात, महिला प्रिंसिपल को गाली: गणतंत्र दिवस पर किशनगंज के सरकारी स्कूल में राष्ट्रीय ध्वज का अपमान, मोहम्मद आबिद की तलाश

बिहार (Bihar) के किशनगंज में 26 जनवरी 2022 (बुधवार) को एक सरकारी स्कूल में तिरंगा (राष्ट्रध्वज) जलाने के प्रयास की शिकायत की गई। आरोपित का नाम आबिद हुसैन है। शिकायत स्कूल की महिला प्रिंसिपल ने दर्ज कराई है। उन्होंने आरोपित पर गाली-गलौज का भी आरोप लगाया है। शिकायत का पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वायरल हो रहे शिकायती पत्र में लिखा है, “26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर कोविड गाइडलाइन्स का पालन करते हुए कुछ बच्चों और अतिथियों की मौजूदगी में झंडोत्तोलन किया जा रहा था। तभी गाँव घनपुरा का रहने वाला मोहम्मद आबिद हुसैन स्कूल में पहुँच गया। आबिद ने वहाँ गाली-गलौज की। उसने राष्ट्रीय ध्वज जलाने की धमकी दी। वो राष्ट्र ध्वज को उतार कर फेंकने की कोशिश करने लगा। उसने मुझे जातिसूचक गालियाँ दीं। मुझे धक्का दिया गया। मुझे से कहा गया कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे बजाए अपने आप से झंडा फहराने की। अगर वहाँ मौजूद लोग बीच-बचाव न करते तो अनर्थ हो जाता। आबिद को भी स्कूल के नाइट गार्ड द्वारा झंडोत्तोलन की सूचना दी गई थी।”

स्कूल का नाम उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय है। यह किशनगंज के कोचाधामन प्रखंड के धनपुरा में पड़ता है। शिकायत किशनगंज के जिला शिक्षा पदाधिकारी और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कोचाधामन को भेजी गई है। पत्र में आबिद हुसैन पर FIR दर्ज करने की माँग की गई है।

ऑपइंडिया ने शिकायतकर्ता प्रिंसिपल मंजू कुमारी से बात की। उन्होंने बताया, “मैं साल 2003 से इसी स्कूल में पढ़ा रही हूँ। इस से पहले ऐसी घटना नहीं हुई थी। आरोपित आबिद हुसैन किस नेता के करीब है इस पर मुझे कुछ नहीं कहना है। बहुत पहले उनसे जमीन खरीद कर स्कूल बना था। लेकिन अभी भी आबिद इसे अपनी जमीन बताते हैं। मैंने उन्हें 5 बार फोन कर के गणतंत्र दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बुलाया था। लेकिन उन्होंने फोन बंद कर दिया था। उनका ही भाई इज़हार आलम इसी स्कूल में नाइट गार्ड है। उससे संदेश भी भिजवाया लेकिन जवाब आया कि आबिद आप से बहुत नाराज हैं। गणतंत्र दिवस के दिन आबिद ने अचानक ही आकर तिरंगे को जलाने की धमकी दी और मुझे जातिसूचक और भद्दी-भद्दी गालियाँ देने लगे थे। सबने बीच-बचाव कर जैसे-तैसे मामले को शांत करवाया। कल पुलिस आई थी उन्हें खोजने के लिए। हम पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट हैं।”

ऑपइंडिया को किशनगंज के पुलिस अधीक्षक इनामुल हक ने बताया, “खुद को न बुलाए जाने से नाराज एक व्यक्ति ने ऐसी हरकत की है। हमने केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। मैं खुद भी घटनास्थल पर गया था। रात में पुलिस ने दबिश भी दी है। जल्द ही आरोपित को पकड़ लिया जाएगा। किसी भी हाल में ऐसी घटनाओं को सहन नहीं किया जाएगा। लॉ एन्ड आर्डर की स्थिति मौके पर सामान्य है। मामले में कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”