मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने ‘किसान आंदोलन’ के फिर से शुरू होने की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि किसानों पर आँच आई तो उन्हें कोई भी बड़ा पद छोड़ते समय नहीं लगेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘किसान आंदोलन’ अभी ख़त्म नहीं, बल्कि स्थगित हुआ है और कभी भी फिर से शुरू हो सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार को किसानों के साथ ईमानदारी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि किसानों पर दर्ज सभी मामले वापस लिए जाने चाहिए और MSP पर तुरंत कानून बनाया जाना चाहिए।
सत्यपाल मलिक रविवार (2 जनवरी, 2021) को हरियाणा के चरखी दादरी में थे, जहाँ स्वामी दयाल धाम का उन्होंने दर्शन किया और फौगाट खाप द्वारा सम्मानित भी किए गए। उन्होंने खुद को किसानों और समाज के लिए हमेशा तत्पर रहने वाला बताते हुए कहा कि वो इनसे जुड़े मुद्दों के लिए हमेशा अग्रणी खड़े रहेंगे। उन्होंने तीनों कृषि कानूनों को रद्द किए जाने को किसानों की बड़ी जीत बताते हुए उन्हें सलाह दी कि वो MSP के लिए एकजुट रहें, तभी बात बनेगी।
बकौल सत्यपाल मलिक, वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को काफी पहले ही आगाह कर चुके थे और जब उनकी समझ में आया तो ‘किसान आंदोलन’ समाप्त हुआ। MSP को कानूनी रूप देने की माँग करते हुए उन्होंने कहा कि खाप पंचायतों द्वारा लिए जाने वाले फैसले हमेशा सही होते हैं और समाज में एकता भी बनी रहती है। कितलाना टोल महापंचायत पर उनका कहना है कि राजनीतिक षड्यंत्र के कारण वो इसमें शामिल नहीं हुए और राजनीति वाले पंचायतों से वो दूर ही रहते हैं।
वहीं भिवानी के डाडम खनन हादसे पर दुःख जताते हुए उन्होंने कहा कि ये खनन वाले कोई कायदा-कानून नहीं मानते हैं और ये पूरा का पूरा कारोबार ही भ्रष्टाचार से भरा हुआ है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वो खनन माफिया के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे। नवंबर 2021 के एक वायरल वीडियो में वो कहते दिखे थे कि अगर पीएम मोदी कृषि कानून वापस नहीं लेते तो उनका हाल इंदिरा गाँधी जैसा होता। उन्होंने कहा था, “आप सिखों को नहीं हरा सकते। उनके गुरु के चार बच्चे उनकी मौजूदगी में मारे गए थे, लेकिन उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया। आप इन जाटों को भी नहीं हरा सकते हैं।”
तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता (TMC) साकेत गोखले अपनी जीविका चलाने के लिए जिन क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करते थे उनमें से एक ourdemocracy.in है और यह अब इस प्लेफॉर्म का कोई अता-पता नहीं है। चूँकि, गोखले पूर्णकालिक नौकरी छोड़कर 10 रुपए खर्च करके आरटीआई डालने का काम करते थे, इसलिए उन्हें धन जुटाने के लिए क्राउडफंडिंग का सहारा लेना पड़ता था। नवंबर 2019 में गोखले ने क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म का एक लिंक ट्वीट कहा था कि उन्होंने ‘बीजेपी/आरएसएस से लड़ने’ के लिए अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने मोदी से नफरत करने लोगों से इकट्ठा होने और उन्हें पैसे देने का आग्रह किया था, इस लड़ाई के खर्चों का वे वहन कर सकें और इसके लिए उन्हें नौकरी ना करनी पड़े।
दरअसल, व्यक्तिगत जरूरतों के लिए भी क्राउडफंडिंग का सहारा लिया जाता है। क्राउडफंडिंग एक ऐसा तरीका है, जिसमें किसी काम के लिए पैसा इकट्ठा करने के लिए लोगों के समूह से मदद माँगी जाती है। क्राउडफंडिंग में जो भी लोग अपने पैसे देते हैं उन्हें मालूम होता है कि वह कहाँ और किस उद्देश्य के लिए फंड दे रहे हैं। हालाँकि, अब ना केवल क्राउडफंडिंग कैंपन, बल्कि ये पूरी वेबसाइट ही गायब है।
यह वेबसाइट अब अस्तित्व में नहीं है
कैंपन शुरू करने के बमुश्किल 3 महीने बाद यानी फरवरी 2020 तक गोखले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नफरत करने वालों से 20 लाख रुपए से अधिक की राशि इकट्ठा कर ली थी।
क्राउडफंडिंग पर गोखले
गोखले ने स्वीकार किया था कि उन्होंने इस तरह 22 लाख रुपए से अधिक की राशि एकत्रित की थी। उन्होंने उस समय कहा था कि वह अपने व्यक्तिगत खर्चों को पूरा करने के लिए और लोगों को भी शामिल करेंगे। उस समय पता चला कि OurDemocracy crowdfunding platform जुटाई गई राशि का कुल आँकड़ा नहीं दिखा रहा था। ऐसे में जिन लोगों ने योगदान दिया था, उन्हें यह नहीं पता चल पा रहा था कि गोखले कितना धन जुटा चुके हैं।
दिलचस्प बात यह है कि यह प्लेटफॉर्म अब रहस्यमय तरीके से गायब हो गया है। इसका इस्तेमाल पूर्व सीपीआई नेता और अब कॉन्ग्रेस नेता कन्हैया कुमार, आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी मार्लेना और यहाँ तक कि डॉ. कफील खान द्वारा भी किया गया था, जो 2017 में गोरखपुर ऑक्सीजन मामले का मुख्य आरोपित हैं।
आवर डेमोक्रेसी, क्राउडन्यूज़िंग और कॉन्ग्रेस कनेक्शन
ऑपइंडिया ने क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म की थोड़ी गहराई से पड़ताल की। इस दौरान पता चला कि टाइम्स नाउ और WION जैसे चैनलों के साथ काम कर चुके एनडीटीवी के पूर्व पत्रकार बिलाल जैदी ने आनंद मंगनाले (Anand Mangnale) के साथ मिलकर 2017 में स्वतंत्र पत्रकारों के लिए ऑनलाइन क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म ‘क्राउडन्यूजिंग’ की शुरुआत की थी।
हालाँकि, 2019 के आम चुनावों से ठीक पहले उन्होंने इस प्लेटफॉर्म का विस्तार करने का फैसला किया और इसे ‘ourdemocracy’ में बदल दिया। इस पर कन्हैया कुमार, आतिशी मार्लेना जैसे नेताओं और साकेत गोखले जैसे बेरोजगार लोगों का स्वागत किया, जिन्होंने आरटीआई भरने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी थी। जब साकेत टीएमसी में शामिल हुए थे तब OurDemocracy प्लेटफॉर्म के को-फाउंडर ने उनकी सराहना की थी।
OurDemocracy प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वालों में गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी, दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और जेएनयू की पूर्व छात्रा और प्रदर्शनकारी शेहला रशीद भी शामिल हैं। इन्होंने OurDemocracy के पायलट (pilot) वर्जन क्राउडन्यूजिंग का इस्तेमाल किया था।
अब, क्राउडन्यूज़िंग के साथ-साथ OurDemocracy प्लेटफॉर्म बंद हो चुका है। लगभग एक महीने हो चुके हैं, लेकिन OurDemocracy के सोशल मीडिया हैंडल ने अभी तक इसकी कोई सार्वजनिक सूचना नहीं दी है। OurDemocracy के वैरिफाइड ट्विटर अकाउंट पर आखिरी ट्वीट 24 जून 2021 को डॉ. कफील खान के एक कैंपन में दान करने के लिए किया गया था। वहीं, क्राउडन्यूज़िंग का आखिरी ट्वीट 10 जून 2019 को किया गया था, जिसमें धन के दुरुपयोग के पुराने विवाद को लेकर एक खुद को और शेहला राशिद को क्लीन-चिट दी थी।
दिलचस्प बात यह है कि जिस प्लेटफॉर्म को बाद में गोखले ने इस्तेमाल किया, उसको लेकर शेहला राशिद पर कठुआ सामूहिक बलात्कार और हत्या के नाम पर एकत्रित किए गए धन का दुरुपयोग करने का आरोप लगा था। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पीड़ित परिवार की मदद के नाम पर लाखों रुपए जमा किए गए, लेकिन फंड उन तक नहीं पहुँचा ही नहीं था। वहीं, राशिद ने इन आरोपों से इनकार किया था और बाद में कहा था कि पैसे देने में इसलिए देरी हुई, क्योंकि परिवार के पास ज्वॉइंट बैंक अकाउंट और पैन नहीं था। ध्यान दें कि क्राउडन्यूज़िंग के साथ-साथ OurDemocracy के सह-संस्थापक Anand Mangnale ने जनवरी 2020 में जेएनयू में हुई हिंसा के दौरान व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल थे, जहाँ कैंपस हिंसा को लेकर अपना कुतर्क रख रहे थे।
This message is from a WhatsApp group called ‘Unity Against Left’ – I’ve edited out the group because of privacy laws on showing numbers, but the operative message retained : “main gate par kuch karna hai” against those who “support JNU” #JNUViolencepic.twitter.com/asXyRlfrsK
ग्रुप के सदस्यों से आनंद पूछ रहे थे कि जेएनयू के समर्थन में कुछ लोग मेन गेट पर आ रहे हैं, क्या उन्हें भी वहाँ कुछ करना चाहिए? यह मैसेज ‘यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट’ नामक समूह का था। बरखा दत्त ने अनजाने में ट्विटर पर जो नंबर शेयर किया वह आनंद (Anand Mangnale) का था। उस नंबर को Google पर खोजने से पता चला कि यह वही नंबर था, जिसे कॉन्ग्रेस ने क्राउडफंडिंग अभियान के लिए इस्तेमाल किया था।
कॉन्ग्रेस के कैंपन पर आनंद का नंबर
इस पेज को अब हटा लिया गया है। आनंद ने टीएमसी के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ पहले काम किया था। प्रशांत किशोर पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के लिए भी रणनीतिकार के रूप में काम चुके हैं। हालाँकि, ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं कर सका कि आनंद मंगनाले राहुल गाँधी की छवि बदलने के लिए उस टीम का हिस्सा थे या नहीं।
आनंद मंगनाले
आनंद ने तब छात्रों को सुरक्षित रखने के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल होने की बात स्वीकार की थी। अंत में, एक पत्रकार बिलाल जैदी आनंद मंगनाले से मिलते हैं और दोनों ने 2017 में ‘क्राउडफंडिंग’ वेबसाइट क्राउडन्यूज़िंग शुरुआत की और 2019 में इसका विस्तार कर इसे ‘ourdemocracy.in’ बनाया।
क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल साकेत गोखले, जिग्नेश मेवानी, कन्हैया कुमार, शेहला राशिद, मनीष सिसोदिया, आतिशी मार्लेना, डॉ. कफील खान द्वारा किया गया। इनमें से कम-से-कम दो लोगों पर यहाँ से जुटाए गए पैसों को लेकर जानकारी साझा नहीं करने का आरोप लगा था। अब ये दोनों प्लेटफॉर्म गूगल पर नहीं हैं। ऑपइंडिया ने क्राउडन्यूजिंग के सह-संस्थापक और OurDemocracy के बिलाल जैदी से भी संपर्क किया है। उनसे जवाब मिलने के बाद हम इस रिपोर्ट को अपडेट करेंगे।
बिहार (Bihar) का गया जिला हिंदू धर्म का पवित्र तीर्थ है। यहाँ मृत्यु के पश्चात लोगों का पिंडदान किया जाता है। लेकिन, यहाँ के दो प्रमुख पिंड वेदियों सीता कुंड और अक्षय वट में आगंतुकों के प्रवेश पर टिकट के जरिए वसूली की जा रही है, जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया है। गया नगर निगम के इस कदम पर बौखलाए पंडा समाज ने अंजाम भुगतने की चेतावनी दे डाली है।
रिपोर्ट के मुताबिक, गया नगर निगम द्वारा की जा रही वसूली पर पंडा समाज और विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति ने अपना विरोध जताते हुए कहा है कि पूरे गया में 50 पिंडदान वेदियाँ हैं और अगर नगर निगम इसी तरह से वसूली करेगा तो तीर्थ यात्रियों की नजर में पवित्र स्थल गयाजी वसूली का अड्डा बन जाएगा। पंडा समाज ने नगर निगम को वो पिंड वेदियों को पैसा कमाने का स्त्रोत नहीं बनाने की चेतावनी देते हुए तत्काल प्रभाव से अपने फैसले को वापस लेने की माँग की है।
शुल्क वसूली का विरोध करते हुए विष्णुपद प्रबंध कारिणी समिति के अध्यक्ष शंभूलाल विठ्ठल के ने कहा कि निगम की अनुचित वसूली से पिंडदान करने आने वाले लोगों में निराशा का माहौल है। उन्होंने इस मामले में जिला प्रशासन और निगम से फिर से विचार करने का अनुरोध किया है। साथ ही कहा कि इस फैसले से गया धाम की छवि को धक्का लगा है। विठ्ठल ने ये भी कहा कि पूरा पाल समाज इसका कड़ा विरोध कर रहा है।
गया नगर निगम का बयान
पिंड वेदियों में प्रवेश के लिए शुल्क की वसूली के अपने फैसले का बचाव करते हुए निगम का कहना है कि सीताकुंड और अक्षयवट मंदिर के परिसर की देखरेख और साफ-सफाई के लिए निगम ने ठेकेदार रखा है। इसके लिए 5,50,000 रुपए साल के हिसाब से टेंडर की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया है। टेंडर के बाद अब पिंडदान के लिए आने वाले लोगों से 10 रुपए का वसूल करने के आदेश हैं।
वहीं गया के मेयर वीरेंद्र कुमार का कहना है कि मेंटेनेंस के लिए पिंडदानियों से 5 रुपए का शुल्क लिए जाने का फैसला सरकार का है। उन्होंने 10 रुपए लिए जाने की बात खंडन भी किया। साथ ही दावा किया कि इस मामले में विष्णुपद मंदिर प्रबंध कार्यकारिणी समिति के साथ भी उनकी बैठक हुई थी।
बिहार में कम उम्र की लड़कियों की तस्करी का एक मामला सामने आया है। एक यात्री की सूझबूझ से तस्कर पकड़ा गया। ये घटना शनिवार (1 जनवरी, 2021) की है, जब ट्रेन में एक लड़की को तस्करी करते हुए बांग्लादेश ले जाया जा रहा था। खुलासा हुआ है कि इस तरह की घटनाएँ लगातार चल रही हैं इसके लिए पश्चिम बंगाल के रास्ते का उपयोग किया जा रहा है। दिल्ली से लड़कियों को झाँसे में लिया जाता था और पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश में उनकी तस्करी की जाती थी।
पटना के एक युवक की सूझबूझ के कारण न सिर्फ उक्त तस्कर को पकड़ा जा सका, बल्कि लड़की को भी बचा लिया गया। पटना का वो युवक भागलपुर की यात्रा कर रहा था। इस दौरान वो जनरल बोगी में सवार था। तभी उसकी नजर एक किशोरी पर पड़ी, जो काफी इस डरी-सहमी हुई सी लग रही थी। देखने में वो किसी समृद्ध घर की लग रही थी, लेकिन उसके शरीर पर ढंग के कपड़े नहीं थे। उसके साथ में एक युवक भी बैठा हुआ था, जो उसी ट्रेन से यात्रा कर रहा था।
ट्रेन के किऊल जंक्शन पर पहुँचते ही पटना के युवक ने देखा कि उक्त व्यक्ति लड़की के साथ अश्लील हरकतें कर रहा था। लड़की किसी तरह खुद का बीच-बचाव कर रही थी। युवक को शक हुआ और उसने ट्रेन में ही इन दोनों से पूछताछ शुरू की। हालाँकि, उक्त व्यक्ति झूठ बोलने लगा। वो कहने लगा कि ये लड़की उसकी रिश्तेदार है और वो दोनों मालदा जा रहे हैं। जबकि लड़की ने पूछे जाने पर उस व्यक्ति को अपना दोस्त बताया। लेकिन, पटना के युवक को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ।
इसी बीच बात बढ़ी और गश्ती के लिए आए जवानों को पूरी बात बताई गई। पूछताछ में खुलासा हुआ कि लड़की को झाँसा देकर दिल्ली से ले जाया जा रहा था। उक्त व्यक्ति पर दिल्ली में भी केस दर्ज था। मालदा के रास्ते कई लड़कियों को इससे पहले भी बांग्लादेश भेजने की बात सामने आई। किशोरी की पहचान कर के उसके पिता को पूरी घटना की सूचना दी गई। इसके बाद वो फ्लाइट से कोलकाता पहुँचे और बेटी को साथ ले गए। वहीं आरोपित को दिल्ली पुलिस ले गई है।
बॉलीवुड के मशहूर सिंगर एआर रहमान (AR Rahman) की बेटी खतीजा रहमान (Khatija Rahman) ने रविवार (2 जनवरी 2022) को अपनी सगाई की जानकारी दी। इंस्टाग्राम (Instagram) पर अपनी फोटो साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी सगाई ऑडियो इंजीनियर और भावी उद्यमी रियासदीन शेख मोहम्मद से हुई है। म्यूजिक कंपोजर एआर रहमान ने भी खातीजा के पोस्ट को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के रूप में शेयर किया और बताया कि कोरोना के कारण एक निजी समारोह में बेटी की सगाई हुई।
खतीजा द्वारा शेयर किए गए इंस्टाग्राम पोस्ट के मुताबिक, खतीजा और ऑडियो इंजीनियर रियासदीन ने 29 दिसंबर 2021 को ही सगाई की थी। खतीजा ने लिखा, “सर्वशक्तिमान के आशीर्वाद से आप सबको मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि मेरी सगाई भावी उद्यमी और विजकिड ऑडियो इंजीनियर रियासदीन शेख मोहम्मद के साथ हुई है। सगाई 29 दिसंबर को मेरे जन्मदिन पर करीबी परिवारों और प्रियजनों की उपस्थिति में हुई।”
बता दें कि एआर रहमान और उनकी बीवी साएरा बानो के तीन बच्चे हैं। खतीजा, रहीमा और एआर अमीन। खतीजा तमिल फिल्मों की प्लेबैक सिंगर हैं। उन्होंने कई फिल्मों में गाना गाया है।
बुर्के को लेकर विवादों में रही हैं खतीजा
खतीजा बुर्के को लेकर विवादों में रही हैं। बुर्के में उनकी एक तस्वीर पोस्ट कर प्रख्यात लेखिका तस्लीमा नसरीन ने खतीजा पर तंज कसा था। तस्लीमा ने 11 फरवरी 2020 को ट्वीट कर किया था, “मुझे एआर रहमान का संगीत बहुत पसंद है, लेकिन जब भी उनकी प्यारी बेटी को मैं देखती हूँ तो मेरा दम घुटने लगता है। यह जानकर निराशा हुई कि एक शिक्षित महिला का भी ‘सांस्कृतिक परिवार’ में बड़ी आसानी से ब्रेनवॉश किया जा सकता है।”
I absolutely love A R Rahman’s music. But whenever i see his dear daughter, i feel suffocated. It is really depressing to learn that even educated women in a cultural family can get brainwashed very easily! pic.twitter.com/73WoX0Q0n9
तस्लीमा नसरीन के ट्वीट पर भारी बवाल हो गया था। खतीजा ने बुर्के का बचाव करते हुए कहा था कि वह स्वेच्छा से बुर्का पहनती हैं। उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि इससे लड़कियाँ सशक्त होती हैं। अपनी बेटी के बुर्के का बचाव करते हुए एआर रहमान ने भी कहा था कि अगर संभव होता तो वे भी बुर्का पहन लेते। इसे महिलाओं के लिए उन्होंने अच्छी चीज बताई थी।
एआर रहमान ने एक बार अपने पिता की मौत के लिए हिंदू देवताओं को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा था कि जिसे उनके पिता पूजते थे, उन्होंने ही उनकी जान ले ली। बता दें कि एआर रहमान का परिवार पहले हिंदू था। उन्होंने उस वक्त इस्लाम स्वीकार किया था, जब उनके पिता और बहन बीमार थे। एक सूफी ने उनसे लड़की की जान बचाने के नाम पर उनका धर्मान्तरण (Religious Conversion) करवा दिया था। उसके बाद वे दिलीप कुमार से अल्लाहरक्खा रहमान बन गए।
रहमान के परिवार की धार्मिक कट्टरता को लेकर तमिल गीतकार पिरईसूदन ने खुलासा किया था। पिरईसूदन ने जुलाई 2020 में में कहा था कि जब वो गीत लिखने के लिए एआर रहमान के घर में गए थे तो एआर रहमान की अम्मी ने हिंदू धर्म के प्रतीकों- विभूति (सिर पर तिलक) और कुमकुम लगाने के कारण उन्हें घर में नहीं घुसने दिया था।
उत्तराखंड के नैनीताल स्थित नवोदय विद्यालय में ‘कोरोना बम’ फूटा है। यहाँ के 85 छात्र कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने इस सम्बन्ध में चिंता भी जाहिर की है। संक्रमित छात्रों को विभिन्न होटलों में आइसोलेट किया गया है और उक्त स्कूल को कोरोना के मामले में माइक्रो कन्टेनमेंट जोन में रखा गया है। पहले 11 छात्र कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे, जिसके बाद 488 छात्रों के सैम्पल टेस्ट के लिए लिए गए। स्कूल के प्रधानाध्यापक को भी कोरोना संक्रमित पाया गया है।
RT-PCR टेस्ट में जो छात्र कोरोना नेगेटिव पाए गए हैं, उनका फिर से रैपिड एंटीजन टेस्ट कराया जाएगा। इसके बाद ही उन्हें डिस्चार्ज किया जाएगा। उत्तराखंड में 8 लोग अब तक कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन से भी संक्रमित पाया गया है। 4 लोग इस संक्रमण से ठीक भी हो चुके हैं। पिछले 24 घंटे में राज्य से कोरोना के 118 नए मामले सामने आए हैं। वहीं सोमवार (3 जनवरी, 2022) से पश्चिम बंगाल में भी कोरोना सम्बंधित कई प्रतिबन्ध लगाए गए हैं।
नए नियम के तहत सभी स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, स्पा, सलून, ब्यूटी पार्लर, स्विमिंग पूल, चिड़ियाघर और एंटरटेनमेंट पार्क बंद ही रखे जाएँगे। सभी सरकारी और प्राइवेट दफ्तर 50% क्षमता के साथ ही खुलेंगे और प्रशासनिक बैठकें वर्चुअल रूप से ही होंगी। लोकल ट्रेन भी आधी क्षमता के साथ चलेंगे और शाम 7 बजे उनका परिचालन बंद कर दिया जाएगा। सभी धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में अधिकतम 50 लोग ही भाग ले सकेंगे। शादी समारोहों के लिए 50 और अंतिम संस्कार कार्यक्रमों के लिए अधिकतम 20 लोगों के जुटान की शर्त रखी गई है।
वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी पिछले 3 दिनों में प्रदेश में सक्रिय कोरोना मरीजों की संख्या तीन गुना होने की जानकारी देते हुए कहा कि इसके बावजूद अस्पतालों में मरीजों की संख्या घटी है, इसीलिए हमें बचाव रखना है और घबराने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि 37,000 में से 97% कोविड बेड्स खाली पड़े हैं और मरीजों में हलके लक्षण ही दिख रहे हैं। डिजिटल प्रेस कॉन्फ्रेंस में AAP सुप्रीमो ने कहा कि दिल्ली में कोरोना के रोज 2500-3000 मामले सामने आ रहे हैं और सक्रिय मामले 6300 के पार हैं, लेकिन लोगों को अस्पताल जाने की ज़रूरत नहीं पड़ रही।
वहीं बिहार से खबर आ रही है कि वहाँ IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के जिस कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था, उसमें शामिल 17 डॉक्टर कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इस कार्यक्रम में नीतीश कुमार काफी देर तक रुके थे और तीसरी लहर को लेकर आगाह भी किया था। इस आयोजन में शामिल 17 डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, जो नालंदा मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर हैं। पटना में IMA का 96वाँ कॉन्फ्रेंस हुआ था। भारत में पिछले एक दिन में 27,553 नए कोरोना केस सामने आए।
गोवा की सरकार ने 15-18 उम्र वर्ग के 72,000 छात्रों को पहले 4 दिन में ही टीकाकरण कराने का लक्ष्य रखा है। इसी मुद्दे पर जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी अधिकारियों के साथ बैठक की। वैक्सीन के मिक्स-अप को रोकने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से कदम उठाने को कहा है। मंत्रालय ने कहा कि भारत ने विश्व का सबसे सफल टीकाकरण अभियान चलाया है, जबकि एक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान की रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत ने वैक्सीनेशन टारगेट को मिस कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि ये आँकड़े सही तस्वीर नहीं दिखाते।
मध्य प्रदेश स्थित इंदौर के एक इसे दंपति पर आरोप लगा है कि उसने 400 से भी अधिक लोगों के धर्मांतरण का प्रयास किया। ये घटना तेजाजी नगर की बताई जा रही है। आरोप है कि नया साल 2022 की रात न्यू ईयर पार्टी के नाम पर उक्त दंपति ने 400 आदिवासियों को जुटाया था। लेकिन, ‘हिन्दू जागरण मंच’ के कार्यकर्ताओं को इसकी भनक लग गई और उन्होंने मौके पर पहुँच कर विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस के पहुँचने पर ईसाई दंपति वहाँ से भाग निकले।
‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, पुलिस ने उक्त ईसाई दंपति के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। हालाँकि, अपनी सफाई में आरोपितों का कहना है कि वो दावत देकर गरीबों को भोजन करा रहे थे। TI आरडी कान्वा ने जानकारी दी है कि जहाँ पुरुष का नाम मनीष है, वहीं उसकी पत्नी का नाम मनीषा है। ये दोनों अम्बामुलिया के रहने वाले हैं। उक्त घटना सनावदिया गाँव में स्थित पैरामेडिकल कॉलेज की है, जहाँ आदिवासियों को भोजन और प्रेयर के नाम पर जमा किया गया था।
इंदौर में 400 से ज्यादा के धर्मांतरण की साजिश, न्यू इयर की शाम जुटाई थी भीड़. अम्बामुलिया निवासी मनीष और उसकी पत्नी मनीषा पर प्रतिबंधात्मक धाराओं में किया गया है. मनीष NGO चलाता है और ईसाई धर्म का प्रचारक भी है. #AAYUDH#Conversionpic.twitter.com/pKAR9eSkgN
‘हिन्दू जागरण मंच’ ने ही पुलिस को इसकी सूचना देकर बुलाया था। जब तक पुलिस वहाँ पर पहुँची, तब तक वो लोग वहाँ से भाग चुके थे। वहाँ जुटी भीड़ भी तब तक वहाँ से निकल चुकी थी। आरोपित मनीष के बारे में पता चला है कि वो एक NGO का संचालन करता है। उसने हिन्दू कार्यकर्ताओं को बताया कि आदिवासियों को खाना खिलाने के लिए बुलाया गया है। लेकिन, हिन्दू कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इसके साथ-साथ उसे प्रेयर के लिए भी बुलाया गया था।
हालाँकि, पुलिस का कहना है कि नए साल की पार्टी के नाम पर आदिवासियों को एक बड़े ग्राउंड में इकट्ठा करने के पीछे ईसाई दंपति की क्या मंशा थी, ये अभी अस्पष्ट है। एक जगह 400 लोगों को जुटाना कोरोना दिशानिर्देशों का उल्लंघन भी करार दिया जा रहा है। मनीष और उसकी पत्नी की तलाश जारी है। पूछताछ के बाद ही उनका उद्देश्य साफ़ हो पाएगा, ऐसा पुलिस का कहना है। दंपति पर आरोप है कि पिछले कुछ समय से वो लगातार धर्मांतरण का दबाव बनाने में सक्रिय थे। फ़िलहाल जाँच जारी है।
केरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओशन साइंसेज (KUFOS) में अवैध नियुक्ति का मामला सामने आया है। यह मामला उस वक्त प्रकाश में आया जब यूनिवर्सिटी की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने एक कर्मचारी द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने के बाद मामले की जाँच की। जाँच में पता चला कि अवैध रूप से नौकरी देने वाला व्यक्ति ही उस महिला का यौन शोषण कर रहा था।
एक असिस्टेंट लाइब्रेरियन ने लाइब्रेरी में अस्थायी तौर पर एक कर्मचारी को अवैध रूप से नियुक्त किया था। KUFOS के विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि प्रशासन को अवैध नियुक्ति के बारे में उस दौरान पता चला, जब एक महिला ने उसे नौकरी देने वाले व्यक्ति के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, असिस्टेंट लाइब्रेरियन वीएस कुंजुमुहम्मद द्वारा अस्थायी तौर पर नियुक्त की गई महिला कर्मचारी ने 14 दिसंबर को उसके खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। शिकायत के आधार पर प्रोफेसर डॉ. एस श्यामा के तहत आईसीसी ने इस पूरी घटना की जाँच की और रजिस्ट्रार को एक रिपोर्ट सौंपी। रजिस्ट्रार ने 19 दिसंबर 2021 को कुंजुमुहम्मद को सस्पेंड करने का आदेश जारी किया। केयूएफओएस (KUFOS) के प्रभारी रजिस्ट्रार बी मनोज कुमार ने कहा कि विस्तृत जाँच पूरी होने के बाद आरोपित व्यक्ति के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath kovind) को डॉक्टरेट ऑफ लिटरेचर (D Lit) की मानद उपाधि देने के केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Arif Mohammad khan) के अनुरोध को केरल विश्वविद्यालय (Kerala University) ने ठुकरा दिया है। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद विश्वविद्यालय के कुलपति हैं। उन्होंने कहा है कि उन्हें कुलपति बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। वह उच्च शिक्षा मंत्री को कुलपति के अधिकार को ट्रांसफर करने के लिए तैयार हैं।
बता दें कि पिछले महीने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कन्नूर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान पर जमकर निशाना साधा था। राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण आरिफ मोहम्मद खान ने कुलपति के पद से इस्तीफा देने की पेशकश करते हुए पत्र लिखा था, लेकिन सीएम विजयन ने समझौते की बजाए राज्यपाल की मंशा पर ही सवाल उठा दिया।
यह मामला कन्नूर विश्वविद्यालय की कुलपति की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री का कहना है कि राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने किसी के दबाव में आकर कन्नूर विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्त के लिए एक व्यक्ति को चुना है। अपना मन बदलने के सवाल पर राज्यपाल ने कहा कि राज्य की CPI(M) सरकार से वो और टक्कर नहीं चाहते, इसीलिए उन्होंने ये फैसला लिया है।
स्कूल या कॉलेज वो जगह है, जहाँ पर विद्यार्थियों को ज्ञान और शिक्षा के अलावा अनुशासन सिखाया जाता है। हर संस्थान अपने लोगों के लिए एक ड्रेस कोड निर्धारित करता है और उम्मीद भी करता है को उसका पालन किया जाएगा। कर्नाटक (Karnataka) के उडुपी के एक कॉलेज ने भी कुछ ऐसा ही किया, लेकिन कॉलेज के नियमों को धता बताकर मुस्लिम छात्राएँ हिजाब (Hijab) पहनने पर अड़ी हुई हैं। इस बात को लेकर मुस्लिम संगठन विरोध में उतर आए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, मामला उडुपी जिले के सरकारी महिला पीयू कॉलेज का है। इस कॉलेज की 6 छात्राएँ कॉलेज के अंदर भी इस्लामीकरण के प्रतीक हिजाब पहनने पर अड़ी हुई हैं। इन छात्राओं ने ये सोचकर कि कॉलेज प्रशासन इनके आगे झुकेगा, इन्होंने क्लास का बॉयकाट कर कॉलेज के बाहर तीन दिन तक प्रदर्शन भी किया। इनका आरोप है कि कॉलेज प्रशासन इन्हें क्लासरूम के अंदर उन्हें हिजाब नहीं पहनने दे रहा है और ना ही इन्हें उर्दू, अरबी और बेरी भाषा में बात करने दे रहा है।
प्रदर्शनकारी छात्राओं का कहना है कि उनके अम्मी-अब्बू ने इस मामले में कॉलेज के प्रिंसिपल रूद्र गौड़ा से बातचीत की थी, लेकिन उन्होंने इस मामले में चर्चा से ही इनकार कर दिया। कॉलेज के नियमों को ताक पर रखने वाली इन 6 मुस्लिम छात्राओं का दावा है कि कि उन्हें तीन दिन से क्लासरूम में घुसने नहीं दिया गया है। ऐसे में उन्हें अटेंडेंस कम होने का भी डर सता रहा है। वहीं, कॉलेज के प्रिंसिपल का कहना है कि क्लासरूम के अंदर हिजाब पहनने की इजाजत नहीं है।
क्या कहते हैं कॉलेज के प्रिंसिपल
इन लड़कियों के विरोध पर कॉलेज के प्रिंसिपल रूद्र गौड़ा ने कहा कि छात्राएँ कॉलेज परिसर में हिजाब पहन सकती हैं, लेकिन क्लासरूम में इसकी इजाजत नहीं है। प्रिंसिपल के मुताबिक, कक्षा में एकरूपता बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया है। उन्होंने इस मामले में अभिभावकों से मीटिंग करने की भी बात कही है।
वहीं, कॉलेज के अनुशासन से जुड़े इस मामले को राजनीतिक रंग देने का प्रयास शुरू हो गया है। आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप झेलने वाले PFI से जुड़े राजनीतिक संगठन SDPI ने इसको लेकर चेतावनी दी है। SDPI उडुपी इकाई के अध्यक्ष नजीर अहमद ने कहा कि छात्राओं को हिजाब नहीं पहनने दिया गया तो प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं, इस मामले में पुलिस ने छात्राओं को कॉलेज के नियमों का पालन करने को कहा है।
बता दें कि अभी सप्ताह भर पहले ही असम के विश्वनाथ जिले में एक मुस्लिम व्यक्ति ने जिंस पहनकर ईयरफोन खरीदने आई एक मुस्लिम लड़की को चरित्रहीन बताते हुए उसे अपने घर से बाहर धकेल दिया था। लड़की के पिता जब शिकायत करने आए तो उस शख्स के बेटे ने लड़की के पिता के साथ मारपीट भी की थी।
अक्षय कुमार की आगामी फिल्म ‘पृथ्वीराज’ रिलीज से पहले ही विवादों में फँस गई है। फिल्म को लेकर राजपूत और गुर्जर समाज में ठन गई है। राजस्थान के अजमेर में फिल्म के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहा है। असल में राजपूत और गुर्जर समाज, दोनों के संगठन उन्हें अपना बता रहे हैं। गुर्जर संगठनों का आरोप है कि फिल्म में सम्राट पृथ्वीराज चौहान को राजपूत समाज से बताया गया है, जो सही नहीं है। यही कारण है कि अजमेर के वैशाली में स्थित भगवान देवनारायण मंदिर में प्रदर्शन हुआ।
‘यश राज फिल्म्स’ की इस मूवी का निर्देशन चंद्रप्रकाश द्विवेदी कर रहे हैं, जो नब्बे के दशक में ‘चाणक्य’ का किरदार निभा कर घर-घर में लोकप्रिय हो गए थे। राजपूत संगठनों का कहना है कि ये साबित करने की कोई ज़रूरत नहीं है कि पृथ्वीराज चौहान राजपूत थे, क्योंकि यही वास्तविकता है। राजपूत नेता भँवर सिंह ने कहा कि असलियत को बदला नहीं जा सकता है। वहीं गुर्जर समाज ने अजमेर जिला प्रशासन के समक्ष याचिका दायर कर फिल्म की रिलीज को रोकने की माँग की है।
ज्ञापन में गुर्जर संगठनों की तरफ से माँग रखी गई है कि फिल्म को रिलीज होने से पहले उनके समाज के प्रतिनिधियों को दिखाया जाए। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास भी इस सम्बन्ध में पत्र भेजा गया है। 2017 में ‘मिस वर्ल्ड’ प्रतियोगिता की विजेता रहीं मानुषी छिल्लर भी इस फिल्म से बॉलीवुड में कदम रख रही हैं। फिल्म में उन्होंने संयोगिता का किरदार निभाया है। वहीं संजय दत्त और सोनू सूद के अलावा 2007 में ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ से चर्चा बटोरने वाले मानव विज भी इस फिल्म में महत्वपूर्ण किरदारों में दिखेंगे।
फिल्म की रिलीज डेट 21 जनवरी, 2022 ही रखी गई थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के फिर सिर उठाने के कारण ये तय तारीख़ पर रिलीज नहीं हो पाएगी। शाहिद कपूर की ‘जर्सी’ से लेकर बड़े बजट की एसएस राजामौली की ‘RRR’ तक, कई फिल्मों ने अपनी रिलीज टाल दी है। ‘श्री राजपूत करणी सेना’ के राष्ट्रीय प्रवक्ता विजेंद्र सिंह शक्तावत का कहना है कि प्राचीन काल में गोचर हुआ करते थे, जो बार में गुज्जर और फिर गुर्जर बन गए। उन्होंने गुर्जर शब्द को जाति नहीं, स्थान सूचक बताया। राजपूत संगठनों का कहना है कि फिल्म का नाम ‘पृथ्वीराज’ सम्मानसूचक नहीं है, इसे ‘पृथ्वीराज चौहान’ होना चाहिए।
‘पृथ्वीराज’ मूवी में गुर्जर सम्राट पृथ्वीराज चौहान की जीवन गाथा को दिखाना होगा..मूवी ‘पृथ्वीराज’ विजय महाकाव्य के आधार पर बने..न कि मनगढ़ंत काल्पनिक महाकाव्य पृथ्वीराज रासो पर.. ..@yrf नहीं तो विरोध पुरे देश में होगा..@akshaykumar@duttsanjay@SonuSood@yrfpic.twitter.com/ytltYd8XUC
— HIMMAT SINGH GURJAR -हिम्मत सिंह गुर्जर (@himmatsinghgur1) December 27, 2021
वहीं गुर्जर नेता हिम्मत सिंह ने ‘पृथ्वीराज रासो’ महाकाव्य को पूरी तरह काल्पनिक बताते हुए कहा कि चंदबरदाई ने इसे 16वीं शताब्दी में मिश्रित स्थानीय भाषाओं में लिखा था, पृथ्वीराज चौहान के निधन के कई वर्षों बाद। उन्होंने कहा कि कवि ने प्रिंगल भाषा का उपयोग किया है, जबकि पृथ्वीराज चौहान के समय संस्कृत का इस्तेमाल होता था। हिम्मत सिंह ने 13वीं शताब्दी से पहले राजपूतों के अस्तित्व को नकारते हुए कहा कि पृथ्वीराज चौहार के पिता सोमेश्वर गुर्जर जाति से ताल्लुक रखते थे, इसीलिए वो भी गुर्जर हुए। इससे पहले सम्राट मिहिर भोज को लेकर भी ऐसा ही विवाद सामने आया था।