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CM योगी के नेतृत्व में 249 सीटों के साथ BJP की फिर बनेगी सरकार, 1985 के बाद पहली बार होगा ऐसा: सर्वे में खुलासा- संकट में कॉन्ग्रेस का अस्तित्व

उत्तर प्रदेश (Uttar pradesh) में विधानसभा चुनाव (Uttar pradesh assembly polls) बेहद नजदीक है। इसको लेकर एजेंसियाँ और न्यूज चैनल सर्वे के जरिए जनता का मूड जानने की कोशिश कर रहे हैं। इसी क्रम में ‘टाइम्स नाऊ नवभारत’ के लिए VETO द्वारा किए गए सर्वे में सामने आया है कि आगामी विधानसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के नेतृत्व में बीजेपी आसानी से सत्ता में वापसी करने जा रही है। सर्वे में लोगों ने योगी सरकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति को सराहा है।

इसके अलावा, काशी और मथुरा मंदिर के मामले में जिस तरह से योगी सरकार ने स्टैंड लिया है, उसका भाजपा को सियासी पिच पर फायदा होता दिख रहा है। सर्वे के मुताबिक, आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 403 विधानसभा सीटों में से 230-249 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, सर्वे में दूसरे स्थान पर समाजवादी पार्टी (Samajwadi party) को बताया गया है।

सर्वे में शामिल लोगों ने सपा को इस चुनाव में अनुमानित 137 से 152 सीटें दी हैं। इसके अलावा, मायावती (Mayavati) की बहुजन समाज पार्टी (BSP) बीते 3 दशक के सबसे कम सीटों पर आकर अटकती दिख रही है। सर्वे के मुताबिक, इस चुनाव में BSP को 9-14 सीटें मिलती दिख रही हैं। पिछले विधानसभा चुनावों में बसपा को 19 सीटें मिली थीं।

अगर देश की सबसे पुरानी पार्टी कॉन्ग्रेस (Congress) की बात करें तो उसकी स्थिति और भी बदतर होती दिख रही है। सर्वे के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस 4-7 सीटों के साथ अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष करती दिख रही है। बता दें कि 2017 के विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस को सात सीटों पर संतोष करना पड़ा था।

मत प्रतिशत की बात करें तो पिछली बार की तुलना में प्रदेश में BJP गठबंधन का वोटिंग प्रतिशत 2017 के 38.6 फीसदी के मुकाबले 3 फीसदी घटता बताया जा रहा है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी गठबंधन का मत प्रतिशत 34.4 फीसदी होता दिखाया गया है, जो कि पिछली बार की तुलना में कहीं अधिक है। सर्वे के मुताबिक, BSP का वोटिंग 2017 के 22.2 फीसदी से घटकर 14.1 प्रतिशत पर आने का अनुमान है।

उल्लेखनीय है कि 16 से 30 दिसंबर 2021 के बीच किए गए इस सर्वे में कुल 21,480 लोगों ने हिस्सा लिया। यहाँ यह भी स्पष्ट कर दें कि अगर भाजपा दोबारा सत्ता में आती है तो वर्ष 1985 के बाद ऐसा पहली बार होगा कि कोई पार्टी लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी करेगी।

‘पहले अपराधी खेलते थे खेल, अब योगी सरकार उनसे खेलती है जेल-जेल’: ‘दद्दा’ के नाम पर मेरठ में यूनिवर्सिटी, PM मोदी ने किया शिलान्यास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया और औघड़नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। इससे मेरठ और इसके आसपास के जिलों में खेल के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति आएगी। ‘Major Dhyanchand Sports University’ की स्थापना में कुल 700 करोड़ रुपए लगेंगे। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों का सम्मान भी किया। सरधना क्षेत्र के गाँव में इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पीएम मोदी ने इस दौरान शहीद स्मारक पर जाकर राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय का निरीक्षण भी किया।

इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। सलावा में आयोजित पीएम मोदी के कार्यक्रम में लगभग एक लाख लोग पहुँचे। यही वो जगह है, जहाँ खेल विश्वविद्यालय बन रहा है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरठ और आसपास के इस क्षेत्र ने स्वतंत्र भारत को भी नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और राष्ट्ररक्षा के लिए सीमा पर बलिदान हों या फिर खेल के मैदान में राष्ट्र के लिए सम्मान, राष्ट्रभक्ति की अलख को इस क्षेत्र ने प्रज्जवलित रखा है।

उन्होंने कहा कि मेरठ, देश की एक और महान संतान, मेजर ध्यानचंद जी की भी कर्मस्थली रहा है। साथ ही बताया कि कुछ महीने पहले केंद्र सरकार ने देश के सबसे बड़े खेल पुरस्कार का नाम ‘दद्दा’ के नाम पर किया था, वहीं अब मेरठ की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित की जा रही। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में यूपी में अपराधी अपना खेल खेलते थे, माफिया अपना खेल खेलते थे। उन्होंने कहा कि पहले यहाँ अवैध कब्जे के टूर्नामेंट होते थे, बेटियों पर फब्तियाँ कसने वाले खुलेआम घूमते थे।

पीएम मोदी ने कहा, “हमारे मेरठ और आसपास के क्षेत्रों के लोग कभी भूल नहीं सकते कि लोगों के घर जला दिए जाते थे और पहले की सरकार अपने खेल में लगी रहती थी। पहले की सरकारों के खेल का ही नतीजा था कि लोग अपना पुश्तैनी घर छोड़कर पलायन के लिए मजबूर हो गए थे। अब योगी जी की सरकार ऐसे अपराधियों के साथ जेल-जेल खेल रही है। पाँच साल पहले इसी मेरठ की बेटियाँ शाम होने के बाद अपने घर से निकलने से डरती थीं। आज मेरठ की बेटियाँ पूरे देश का नाम रौशन कर रही हैं।”

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि युवा नए भारत का कर्णधार भी है, विस्तार भी है। उन्होंने कहा कि युवा नए भारत का नियंता भी है, नेतृत्वकर्ता भी है। साथ ही याद दिलाया कि हमारे आज के युवाओं के पास प्राचीनता की विरासत भी है, आधुनिकता का बोध भी है, और इसलिए, जिधर युवा चलेगा उधर भारत चलेगा। उन्होंने कहा कि जिधर भारत चलेगा उधर ही अब दुनिया चलने वाली है।

कोरोना वैक्सीन के नाम पर राजस्थान में 23 साल के युवक की नसबंदी: परिवार के इकलौते बेटे की पिछले साल हुई थी शादी, नहीं है संतान

राजस्थान (Rajasthan) के उदयपुर में कोरोना वैक्सीन का झाँसा देकर एक विवाहित युवक की नसबंदी (Sterilization) कर दी गई। पीड़ित युवक ने इस संंबंध में भूपालपुरा थाने में मामला दर्ज कराया है। युवक का कहना है कि अभी हाल ही में उसकी शादी हुई थी और उसकी कोई संतान भी नहीं है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

प्रतापनगर गुरुद्वारे के पास रहने वाले 23 वर्षीय कैलाश पुत्र बाबूलाल गमेती ने आरोप लगाया है कि 29 दिसंबर 2021 की सुबह वह शहर की बेकनी पुलिया के समीप मजदूरी के लिए खड़ा था। उसी समय वहाँ हिरणमगरी सेक्टर-5 निवासी नरेश चावत आया और दो हजार रुपए दिलाने का वादा करके उससे कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए कहा। पैसों के लालच में आकर कैलाश उसके साथ वैक्सीन लगवाने चला गया।

कैलाश का आरोप है कि नरेश उसे स्कूटी पर एक हॉस्पिटल में ले गया, जहाँ उसे इंजेक्शन लगाकर बेहोश कर दिया। बाद में उसका नसबंदी का ऑपरेशन कर दिया गया। होश में आने के बाद नरेश ने कैलाश को उसकी बहन के घर छोड़ दिया और उसे 1100 रुपए दे दिए गए।

नसबंदी होने के बाद से उसका परिवार काफी परेशान हैं। पीड़ित अपने परिवार में एक इकलौता बेटा है। पिछले साल ही उसकी शादी हुई थी और उसकी कोई संतान भी नहीं है। भूपालपुरा थाना पुलिस ने एससी-एसटी एक्ट में भी मामला दर्ज किया है। पुलिस संबंधित अस्पताल से नसबंदी का रिकॉर्ड जुटाने का प्रयास कर रही है।

गौरतलब है कि नसबंदी के आँकड़े को पूरे करने के लिये झाँसा देने के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। इसके साथ ही नसंबदी शिविरों में भी अनियमितता की शिकायतें भी मिलती रहती हैं।

कोरोना की मार झेल रहे केरल में नए साल पर शराब की रिकॉर्ड बिक्री, एक दिन में ₹100 करोड़ की शराब पी गए लोग

अंग्रेजी नववर्ष 2022 के अवसर पर केरल ने शराब की बिक्री के सरे रिकार्ड्स तोड़ दिए हैं। शुक्रवार (दिसंबर 31, 2021) को केरल में जश्न का माहौल रहा और उस दिन शराब की बिक्री के सरे रिकार्ड्स टूट गए। उस दिन 82.26 करोड़ रुपए के शराब की बिक्री केरल में हुई। केरल में ये किसी भी नए साल के मौके पर सबसे ज्यादा शराब बिक्री का रिकॉर्ड है। नया साल 2021 के मौके पर केरल में 70.55 करोड़ रुपए की शराब बिकी थी। वो भी एक रिकॉर्ड ही था।

राजधानी तिरुवनंतपुरम के ‘पॉवर हाउस रोड’ पर स्थित शराब की आउटलेट ने अकेले 96.06 लाख रुपए की शराब बेची है। क्रिसमस के दौरान भी सबसे ज्यादा शराब इसी दुकान ने बेची थी। इरिंजलक्कुडा के आउटलेट ने 72 लाख रुपए तो कन्नूर के आउटलेट ने 70 लाख रुपए की शराब की बिक्री की है। इसी तरह ओणम के मौके पर मलयालियों ने 85 करोड़ रुपए की शराब गटकी थी। केरल अक्सर शराब की बिक्री के कारण चर्चा में रहता है और इस बार भी ऐसा ही है।

इस दौरान एक घटना काफी चर्चा में रही। नए साल से पहले की शाम के दौरान बेवको स्थित शराब की दुकान से शराब खरीद कर जा रहे एक स्वीडन के नागरिक को पुलिस ने पकड़ लिया और उससे बिल की माँग करने लगे। जब पुलिस ने उससे कहा कि वो बिल के बिना शराब की बोतल लेकर यात्रा नहीं कर सकता, तो उसने सड़क पर ही साड़ी बोतलें खाली कर दी। उसने विरोध प्रदर्शन के रूप में ऐसा किया। इसके बाद उक्त अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई।

साथ ही केरल के शिक्षा एवं लेबर मंत्री वी शिवनकुट्टी को उस पर्यटक से व्यक्तिगत रूप से माफ़ी भी माँगनी पड़ी। वहीं नए आँकड़े की मानें तो केरल के लोगों ने नए साल और उससे पहले के दिन मिला कर ‘बेवरेजेज कॉर्पोरेशन (Bevco)’ और ‘Consumerfed’ के आउटलेट्स के जरिए ही सिर्फ 96.86 करोड़ रुपए की शराब की बिक्री हुई। चूँकि जनवरी का पहला दिन ‘ड्राई डे’ रहता है, इसीलिए साडी बिक्री इससे पहले के दो दिनों में ही हुई है।

ये स्थिति तब है, जब केरल में कोरोना के कारण हालात भयावह हैं। वहाँ अब तक कोरोना के 52,47,177 मामला सामने आए हैं, जिनमें से 19,416 अभी भी सक्रिय हैं। केरल में कोरोना के कारण 47,794 लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी है। वहीं रिकवर हुए लोगों की संख्या 51,79,277 है। केरल में पिछले 7 दिनों में औसतन टेस्ट पॉजिटिविटी रेट 4.39 है। इन सबके बावजूद वहाँ की वामपंथी सरकार की मीडिया में प्रशंसा की जाती रही है। वहाँ अभी भी महामारी के कारण स्थिति भयावह है।

‘आलू+तेलंगाना’ के कारण UP चुनाव में फँस गए ओवैसी: जिन किसानों के पेट पर मारी लात, उन्हीं से माँग रहे वोट

असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) को आलू से संभल कर रहना चाहिए। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ओवैसी के लिए आलू भारी पड़ सकता है। चौंकिए मत। यही जमीनी हकीकत है। मोहम्मद आलमगीर इन दिनों AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से नाराज हैं। कारण है आलू। आलू और मोहम्मद आलमगीर यूपी के लिए छोटी बात नहीं।

मोहम्मद आलमगीर उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित खंडौली में छह एकड़ जमीन पर आलू उपजाते हैं। जगह-जगह बेचते हैं। तेलंगाना में भी बेचते थे, अब नहीं। क्यों? क्योंकि तेलंगाना ने उत्तर प्रदेश से आलू की खरीद पर रोक लगा दी है। तेलंगाना की सरकार को ओवैसी की पार्टी का समर्थन है। अब उनकी यही पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ रही है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के आलू उपजाने वाले किसान ओवैसी को वोट क्यों देंगे?

यूपी में विधानसभा चुनाव के लिए ओवैसी ताबड़तोड़ रैलियाँ कर रहे हैं। इसके बावजूद वह किसानों के हितों को अनदेखा करके तेलंगाना सरकार का समर्थन कर रहे हैं। इस आधार पर आलू उत्पादक किसान समिति आगरा के महासचिव आलमगीर ने सवाल उठाया है कि तेलंगाना सरकार और उसके फैसले का समर्थन करने वाले ओवैसी यूपी में किस हक से प्रचार कर सकते हैं और वोट माँग सकते हैं।

इंडियन एक्सप्रेस प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, आलमगीर का अनुमान है कि उत्तर प्रदेश से रोज करीब 100 ट्रक आलू तेलंगाना जाता है। एक ट्रक में 50-50 किलो आलू के लगभग 500 बोरे होते हैं। आलमगीर ने यह भी बताया कि इनमें में भी करीब 50-60 ट्रक तो आगरा से ही जाते हैं। यूपी से विभिन्न राज्यों में रोजाना जाने वाले 700-800 ट्रकों में से लगभग तीन-चौथाई महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जाते हैं।

उन्होंने कहा कि आलू उपजाने वाले लोग ओवैसी से नाराज हैं, क्योंकि वह उस सरकार का समर्थन करते हैं, जिस सरकार ने आलू की सप्लाई पर रोक लगा दी है। आलमगीर ने कहा कि वो इस फैसले का समर्थन नहीं कर सकते हैं, क्योंकि इस कारण से उनके पेट पर लात पड़ी है।

इस मामले पर तेलंगाना के कृषि मंत्री एस निरंजन रेड्डी ने अपनी सरकार का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के किसान जो आलू भेज रहे थे, वह कोल्ड स्टोरेज में रखा हुआ पिछले साल का आलू है। उन्होंने तर्क दिया कि जब तेलंगाना के किसानों द्वारा उगाए गए ताजा आलू बाजार में उपलब्ध हैं, तो पुराना आलू क्यों लें?

बता दें कि यूपी के किसान अक्टूबर के मध्य से नवंबर की शुरुआत तक आलू बोते हैं और 20 फरवरी से 10 मार्च तक आलू तैयार हो जाती है। वे आम तौर पर आलू का लगभग पाँचवा हिस्सा ही बेचते हैं और शेष उपज को कोल्ड स्टोर में जमा करते हैं, ताकि नवंबर तक उसकी बिक्री हो सके।

वैद्यजी शीटग्रह प्राइवेट लिमिटेड के मालिक डूंगर सिंह चौधरी कहते हैं, “पिछले साल हमारी बंपर फसल हुई थी, जिसके कारण कुल उपज का 4-5% (50-60 लाख बैग) अभी भी हमारे कोल्ड स्टोर में पड़ा है। अगर तेलंगाना और अन्य लोग इसे खरीदना बंद कर देते हैं, तो हमें फरवरी के अंत से नए आलूओं की जगह बनाने के लिए पुराने आलू को सड़कों पर फेंकने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”

शम्सुद्दीन को 190 साल की सजा: 22 लोग जिंदा जल कर मरे थे, यात्रियों को अनसुना कर तेज चला रहा था बस

मध्य प्रदेश में एक विशेष अदालत ने एक बस हादसे के मामले में आरोपित बस ड्राइवर शम्सुद्दीन को 190 साल की जेल की सजा सुनवाई है। इसके साथ ही बस के मालिक को भी 10 साल का कठोर कारावास और जुर्माने की सजा दी है। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के अपर सत्र न्यायधीश आरपी सोनकर ने शुक्रवार (31 दिसंबर 2021) को यह फैसला सुनाया।

रिपोर्ट के मुताबिक, जिला अदालत ने अपने फैसले में बस के 47 वर्षीय ड्राइवर शम्सुद्दीन को धारा 304 (2) (काउंट 19) के तहत 10-10 साल की कुल 190 साल की सजा सुनाई है। स्पेशल जस्टिस आरपी सोनकर की अदालत में सरकार की तरफ से विशेष लोक अभियोजक कपिल व्यास ने इस क्राइम को गंभीर मानते हुए अदालत से अधिक-अधिक सजा देने का आग्रह किया था। कोर्ट ने शम्सुद्दीन को गैर-इरादतन हत्या और तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने का दोषी माना है।

क्या है मामला

दिल को दहला कर रख देने वाला यह हादसा 4 मई 2015 को हुआ था। अनूप बस सर्विस की गाड़ी संख्या एमपी 19, पी-0533 छतरपुर से पन्ना 40 यात्रियों को लेकर दोपहर करीब 12:40 पर रवाना हुई थी। करीब एक घंटे के बाद बस पन्ना जिले में पांडव फॉल के पास ड्राइवर शम्सुद्दीन की लापरवाही के कारण पलट गई थी। बस कई फीट नीचे खाई में जा गिरी, जिसके कारण उसमें भीषण आग लग गई। इस सड़क हादसे में 22 यात्री जिंदा जलकर मर गए थे। हालाँकि, कुछ लोग बस से कूदकर अपनी जान बचा पाने में सफल रहे थे।

मामले की जाँच के दौरान पाया गया कि बस की आपातकालीन विंडो को लोहे की रॉड से बंद कर उसकी जगह पर एक और सीट लगा दी गई थी। इसके कारण यात्री बस से बाहर नहीं निकल पाए। ये 22 यात्री बस के अंदर ही फँस कर रह गए और आग लगने के बाद जिंदा जल कर मर गए। तेज रफ्तार बस चलाने को लेकर यात्रियों ने शम्सुद्दीन से धीर चलाने के लिए कहा था, लेकिन उसने यात्रियों की बात को अनसुना कर दिया था।

इस मामले में बस मालिक ज्ञानेंद्र पांडेय और ड्राइवर शम्सुद्दीन के खिलाफ आईपीसी की धारा 279, 304 ए, 338, 304/2 और 287 और मोटर वेहिकल एक्ट की धारा 182, 183, 184 और 191 के तहत केस दर्ज किया गया है। अब घटना के मामले में साल बाद अपर सत्र न्यायधीश आरपी सोनकर ने यह सजा सुनाई है।

चीन का सबसे बड़ा शहर शंघाई बना ‘शंभूनगर’… ‘घण्टा घर’ की भी स्थापना: अरुणाचल वाली हरकत पर मुँह की खाए चायनीज

चीन अब वामपंथी देश नहीं रहा! कम से कम सोशल मीडिया पर तो नहीं। पूरे चीन (उसके शहरों से लेकर नेताओं तक का) का नाम बदल कर हिंदुस्तानी नामों से सजा दिया गया है। सोशल मीडिया वीरों ने यह काम किया है… चीन को ईंट का जवाब पत्थर से दिया है।

शुरुआत चीन ने की। अरुणाचल प्रदेश के 15 जगहों का नाम बदल दिया, भारत को उकसाने के लिए। विदेश मंत्रालय से इसको लेकर विरोध भी दर्ज किया गया। लेकिन सोशल मीडिया पर लोगों ने विरोध अपने अंदाज में किया।

ट्विटर पर हरप्रीत (@CestMoiz) नाम के एक यूजर ने चीन के शहरों के भारतीय नाम क्या-क्या होंगे, उसकी जानकारी दी। आप भी पढ़िए। बीजिंग को ‘भुजंग नगर’ बनाया गया। तिब्बत की राजधानी ल्हासा को ‘लक्ष्मणगढ़’ और गुआंगजौ को ‘घण्टा घर’ में बदल दिया गया।

इस ट्वीट के बाद तो जैसे बाढ़ आ गई। चीन के सबसे बड़े शहर शंघाई को ‘शंभूनगर’ बनाया जा चुका था। शिनजियांग को ‘शिवगंगा नगर’ का नाम दिया गया! चीन या चाइना को भी बदल कर चिन प्रदेश कर दिया गया।

तियानमेन चौक को ‘टैंक चौक’ बना डाला सोशल मीडिया वीरों ने। सिर्फ जगह ही नहीं, चीन के सबसे बड़े वाले नेता शी जिनपिंग को भी नहीं बख्शा गया। अब उनका नया नाम है श्री जटाशंकर।

वुहान के लिए कई नाम आए। फाइनल आप खुद डिसाइड कीजिए – चमगादड़नगर, कोविडपुर, कीटाणु प्रदेश, वायरसपुर।

चीनी शहरों और उनके नेताओं का नाम बदलने का सोशल मीडिया का यह प्रयास रूका नहीं है। रक्षा विशेषज्ञों से लेकर स्थापित लेखकों तक, सभी ने चीन की अरुणाचल वाली हरकत को जोड़ते हुए उनका मजाक उड़ाया।

राममंदिर को लेकर बैठक करने पर तत्कालीन CM अखिलेश यादव ने गृह सचिव को किया था सस्पेंड, आजम खान के दबाव में पंचकोसी परिक्रमा पर भी बैन

हाल ही में समाजवादी पार्टी प्रमुख और UP के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि अगर उनकी सरकार होती तो अयोध्या में राम मंदिर 1 साल में बन जाता। हालाँकि उनका यह बयान सपा सरकार की कार्यशैली के बिल्कुल विपरीत है। राम मंदिर का निर्माण योगी आदित्यनाथ सरकार की देखरेख में हो रहा है। ऐसे में समाजवादी पार्टी ने भाजपा सरकार पर मंदिर के नाम पर वोट लेने का आरोप लगाया है।

याद करते हैं उत्तर प्रदेश के समाजवादी पार्टी की सरकार के दिन। अक्टूबर 2013 का समय था। उस दौरान अखिलेश यादव की सरकार ने अपने गृह सचिव को इसलिए सस्पेंड कर दिया था, क्योंकि उन्होंने राम मंदिर पर एक मीटिंग आयोजित की थी। इस मीटिंग में राम मंदिर निर्माण के तमाम पहलुओं पर चर्चा हुई थी। इस मीटिंग में इस बात पर भी चर्चा हुई थी कि क्या राम मंदिर को सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर बनवाया जा सकता है।

गृह सचिव का नाम सर्वेश चंद्र मिश्रा था, जो 1997 बैच के सीनियर IAS अधिकारी थे। सस्पेंड करने से पहले उनका ट्रांसफर किया गया था। उनके विरुद्ध विभागीय जाँच भी करवाई गई थी। उस समय सरकारी बयानों में कहा गया था, “गृह सचिव मिश्रा ने एक विवादित मुद्दे पर सभा कर के गलत किया है।” तब सपा सरकार ने इसको एक गलती माना था और कठोर करवाई का भरोसा दिया था। गृह विभाग के प्रमुख सचिव आरएम श्रीवास्तव ने तो इसे अपने जूनियर की भूल बताते हुए बाकायदा क्षमा-याचना भी की थी।

इस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य विश्व हिन्दू परिषद् की 84 कोसी परिक्रमा को रोकना था। यह परिक्रमा हर हाल साल अगस्त के माह में होती है। साल 2013 में इसको आज़म खान के दबाव में बैन कर दिया गया था। यात्रा बैन करवाने से पहले पैरामिलिट्री फोर्स को भी तैनात किया गया था। उस समय विश्व हिन्दू परिषद संसद में कानून बना कर मंदिर निर्माण की माँग कर रहा था।

सुप्रीम कोर्ट ने नवम्बर 2019 में रामजन्मभूमि का फैसला हिन्दुओं के पक्ष में दिया था। इसी के बाद फरवरी 2020 में ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ का गठन किया गया था। इसी ट्रस्ट की जिम्मेदारी है कि वो राममंदिर को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक बनवाए।

गौरतलब है कि 30 अक्टूबर 1990 में मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों पर गोलियाँ चलवाईं थी। इसमें कई कारसेवक मारे गए थे। इस पर दुःख प्रकट करने के बजाए बाद में मुलायम सिंह यादव ने कई मंचों से कहा था कि देश की एकता और अखंडता बचाने के लिए अगर और कारसेवकों को भी मारना पड़ता तो मारते।

सारा अली खान को बैठा कर बाइक चला रहे थे विक्की कौशल, फँस गए: फर्जी नंबर प्लेट को लेकर केस दर्ज

मध्य प्रदेश के इंदौर में रहने वाले एक शख्स ने फिल्म की शूटिंग के दौरान फर्जी नंबर प्लेट वाली बाइक का इस्तेमाल करने पर बॉलीवुड अभिनेता विक्की कौशल (Vicky Kaushal) के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। विक्की कौशल और सारा अली खान अपनी अपकमिंग फिल्म ‘लुका छिपी 2’ की शूटिंग के सिलसिले में इन दिनों इंदौर में हैं। यहाँ उनकी फिल्म की शूटिंग चल रही है। एक सीन में विक्की कौशल बाइक से सारा अली खान (Sara Ali Khan) को कोचिंग छोड़ने के लिए जाते हैं, लेकिन उस पर गलत नंबर प्लेट होने के कारण बवाल हो गया है। सोशल मीडिया पर दोनों की फोटो वायरल हो गई हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए शिकायतकर्ता जय सिंह यादव ने कहा, “फिल्म सीक्वेंस में इस्तेमाल किया गया वाहन नंबर मेरा है। मुझे नहीं पता कि फिल्म यूनिट को इसके बारे में पता है या नहीं, लेकिन यह अवैध है। वे बिना अनुमति के मेरी नंबर प्लेट का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। मैंने थाने में ज्ञापन दिया है। इस मामले पर कार्रवाई की जाए।”

वहीं, इस मामले पर इंदौर के बाणगंगा एरिया के सब-इंसपेक्टर राजेंद्र सोनी ने बताया कि उन्हें फिल्म में फर्जी नंबर प्लेट को लेकर शिकायत मिली है। वह इसकी जाँच करेंगे कि क्या नंबर प्लेट का इस्तेमाल अवैध तरीके से किया गया? मोटर वीकल्स एक्ट (Motor Vehicles Act) के हिसाब से एक्शन लिया जाएगा। अगर फिल्म की यूनिट इंदौर में है तो उनसे पूछताछ की जाएगी। यादव ने एएनआई के साथ अपने लाइसेंस प्लेट नंबर की तस्वीरें और भेजे गए पत्र की एक कॉपी भी साझा की है।

बता दें कि विक्की और सारा की पिछले हफ्ते भी कुछ फोटोज वायरल हुई थीं। इस दौरान दोनों बिल्कुल सिंपल लुक में नजर आए थे। सारा इंडियन लुक में दिखी थीं और उन्होंने माँग में सिंदूर भी लगाया हुआ था।

‘मुस्लिम कुर्सी पर बैठेगा, इंशाअल्लाह राज भी करेगा’: ओवैसी ने कहा – 11% यादव वाले CM बन सकते हैं तो 19% मुस्लिम वाला क्यों नहीं?

उत्तर प्रदेश में चुनाव की सरगरमी शुरू होते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) पर जमकर निशाना साधा। ओवैसी ने कहा कि यूपी में 11 प्रतिशत यादव हैं और 19 प्रतिशत मुस्लिम। मुस्लिमों के चैरिटी पर वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

ओवैसी ने कहा, सुन लो अखिलेश यादव! मुझे तुमसे कोई सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। मैं जनता के बीच जाकर अपने दिल की बात करूँगा। तुम क्या दोगे? तुम 11 फीसद यादव हो, हम 19 फीसद मुसलमान हैं। अगर तुम मुख्यमंत्री बने और जनाब मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने तो मुसलमानों के वोट के खैरात से मुख्यमंत्री बने।”

ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम अब दूसरे को राज करने के लिए नहीं चुनेंगे, बल्कि खुद राज करेंगे। उन्होंने कहा, “वे चाहते हैं कि एक मुसलमान दरी बिछाता रहे… दरी बिछाता रहे… उसे बेशरम किया जाए, लेकिन उसके मुकद्दर में दरी बिछाना नहीं है। मैं तुमसे कहता हूँ… अब तुम दर्री नहीं बिछाओगे, अब तुम कुर्सी पर बैठोगे और राज भी करोगे… इंशाल्लाह।”

ओवैसी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जेल में या सबसे अधिक अंडर ट्रायल कोई है तो वो मुसलमान हैं 28 फीसद। इनके लिए कोई पार्टी बात नहीं करती है। कॉन्ग्रेस, सपा, बसपा चुनावों में मुस्लिमों को बीजेपी का डर दिखाकर वोट हासिल लेती हैं, उनके हित के लिए आवाज नहीं उठाती। यूपी में मुस्लिमों को सेक्युलरिज्म और समाजवाद के नाम पर यादववाद मिला।

भाजपा शासन को ‘अँधेरी रात’ बताते हुए ओवैसी ने माना कि देश में भाजपा की सत्ता जल्द खत्म होने वाली नहीं है। उन्होंने कहा, “ये रात अँधेरी है। मैं पिछले पाँच सालों से कह रहा हँ कि ये अँधेरी रात लंबी रहने वाली है। लेकिन इसके लिए तैयार रहना होगा।” उन्होंने कहा कि मुस्लिमों ने 60 सालों तक दूसरों को वोट दिया। अब उन्हें अपनी पार्टी (AIMIM) और अपने लोगों को वोट देना चाहिए।

सहारनपुर के बेहटा में शनिवार (1 जनवरी 2022) की रैली में ओवैसी ने कई आपत्तिजनक बातें भी कहीं। उन्होंने कहा कि गाँधी देश के मुस्लिमों से बड़े नहीं हैं। उन्होंने कहा, गाँधी भारत के मुसलमानों से बड़ा है क्या? अगर गाँधी को गाली दी गई और मुसलमान को गाली दी गई तो दोनों पर केस होना चाहिए।” हालाँकि अपनी गलती का अहसास होने के बाद ओवैसी ने कहा कि इस देश में गाँधी भी बराबर हैं और भारत का हर नागरिक भी बराबर है।

छत्तीसगढ़ में हुए धर्म संसद को लेकर ओवैसी ने कहा, “एक मैडम ने कहा कि धर्म संसद इसीलिए हम कर रहे हैं कि बच्चियाँ 18 साल की उम्र में दूसरी जाति के लोगों के साथ भाग जाती हैं। मैडम आपको कैसे पता कि भाग जाती हैं?” उन्होंने कहा कि धर्म संसद में मुस्लिमों के नरसंहार की बात कही जाती है, लेकिन लोग चुप रहते हैं।

ओवैसी ने आगे कहा, “रामदास ने कहा कि अगर इंसानियत को बचाना है तो मुसलमानों को खत्म कर दो। और एक मोहतरम कह रहे हैं कि हमको हिंदू राष्ट्र बनाना है। यह कॉन्ग्रेस की सरकार है। कॉन्ग्रेस बीजेपी दोनों बैठे हुए हैं लेकिन केस किस पर दर्ज हुआ, जितने गाँधी को गाली दी थी।”

पुलिस पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने कहा, “अगर उस बात का 5 फीसद बात भी असदुद्दीन ओवैसी कहता तो जितने मंच पर हम लोग बैठे हैं, पूरे लोगों को थानेदार लेकर चला जाता और हमें अपना दामाद बना लेते जेल में।”

पत्रकारों को गाली देते हुए ओवैसी ने कहा, “मीडिया के दोस्त, जिनके हम चहेते सुसुरे हैं, इनके पप्पा मोदी हैं, वो बोलेंगे ओवैसी ने गाली बोल दिया।” हालाँकि, ओवैसी भूल गए कि उनके भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ने कई मौके पर हिंदुओं धमकी दी है। अकबरुद्दीन ने कहा था कि 15 मिनट के लिए पुलिस हटा ली जाए, फिर मुस्लिम अपनी ताकत दिखा देंगे।