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महाराष्ट्र: मातोश्री वृद्धाश्रम में ‘कोविड ब्लास्ट’, 5 स्टाफ सहित 67 मिले कोरोना पॉजिटिव

कोरोना के नए वेरिएंट ‘ओमीक्रोन’ के कारण खतरे उपजे के बीच महाराष्ट्र के ठाणे में कोरोना का भयंकर विस्फोट हुआ है। ठाणे के भिवंडी के पढ़घा गाँव में बनाए गए ‘मातोश्री वृद्धाश्रम’ में 67 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें पाँच वृद्धाश्रम के स्टाफ हैं। इन सभी को ठाणे के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ठाणे सिविल अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. कैलाश पवार ने बताया कि इनमें से 59 लोग ऐसे हैं जो कोविड वैक्‍सीन की दोनों खुराक ले चुके हैं।

इधर कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी) के एक अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र के ठाणे जिले के डोंबिवली में साउथ अफ्रीका से लौटा एक शख्स रविवार (28 नवंबर 2021) को कोरोना पॉजिटिव पाया गया। हालाँकि अभी ये साफ नहीं है कि इस शख्स में नया वेरिएंट पाया गया है या नहीं। ये शख्स 24 नवंबर को केपटाउन से लौटा था। फिलहाल उसे कल्याण-डोंबिवली म्युनिसिपल हॉस्पिटल में रखा गया है और वो किसी के संपर्क में नहीं आया है।

एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि ठाणे ने कोरोना वायरस के 108 नए मामले दर्ज किए, जिससे जिले में संक्रमण की संख्या बढ़कर 5,69,161 हो गई है। उन्होंने कहा कि ये नए मामले रविवार को दर्ज किए गए। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पड़ोसी पालघर जिले में, सीओवीआईडी​-19 मामले की संख्या 1,38,589 हो गई है, जबकि मरने वालों की संख्या 3,298 है।

इससे पहले विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की थी कि महाराष्ट्र में दिसंबर तक कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है। राज्य के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री राजेश टोपे ने कहा था कि कोविड-19 की तीसरी लहर दिसंबर में महाराष्ट्र में आने की आशंका है, लेकिन यह हल्की होगी। उन्‍होंने कहा कि राज्य में टीकाकरण की दर अधिक है और इसलिए यह लहर हल्की होने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों ने भी यह भी कहा है कि लहर समय-समय पर अपनी निश्चित फ्रीक्‍वेंसी में आती हैं। पहली वेव सितंबर 2020 में आई थी। दूसरी लहर अप्रैल 2021 में आई थी। अब तीसरी लहर दिसंबर में आने की आशंका है।

शादी के लिए हिंदू बना फहीम, फिर इस्लाम कबूल करने का पत्नी पर बनाने लगा दबाव: गर्भपात करवाया… एक दिन छोड़कर भाग गया

उत्तर प्रदेश से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें आरोपित ने हिंदू बनकर शादी की और फिर पत्नी पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाने लगा। सुल्तानपुर जिले के फहीम कुरैशी पर पत्नी ने गर्भपात करवाने, बेसहारा छोड़कर भाग जाने और दूसरी शादी करने का भी आरोप लगाया है। उसे 28 नवम्बर 2021 (रविवार) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

पीड़िता का आरोप है कि विवाह के बाद फहीम उस पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाने लगा। इनकार करने पर उसको धमकी देता। धोखे से कई बार उसका गर्भपात करवाया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फहीम कुरैशी सुल्तानपुर जिले के नार्मल चौराहा का रहने वाला है। पीड़िता सुल्तानपुर के दरियापुर की रहने वाली है। उस पर पीड़िता का 10 साल तक यौन शोषण का आरोप है। कथित तौर पर पहले वह अपनी बहनों की निकाह का हवाला देकर शादी की बात टालता रहा। बाद में दबाव डालने पर वह उसने 2018 में हिन्दू धर्म स्वीकार कर शादी कर ली। साल 2019 में जब पीड़िता गर्भवती हुई तब फहीम ने उसे धोखे से गर्भपात की दवा खिला दी।

कुछ समय बाद फहीम पीड़िता पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाने लगा। इस बात को लेकर वो पीड़िता को मारने-पीटने के साथ धमकियाँ भी देता था। जब पीड़िता ने इसकी शिकायत पुलिस में की तब दोनों के बीच समझौता करवा दिया गया। इसके बाद फहीम पीड़िता के साथ जौनपुर चला गया। वहाँ एक बार फिर पीड़िता गर्भवती हुई तो फहीम ने बच्चे को अपना मानने से इनकार कर दिया। उसने पीड़िता को चरित्रहीन कहना शुरू कर दिया। आखिर में उसे जौनपुर में ही छोड़ कर भाग गया।

सुल्तानपुर लौटने के बाद पीड़िता ने फहीम कुरैशी के खिलाफ पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने आरोपित पर अपराध संख्या 1082/2021 में धारा 498 A / 313 / 494 / 506 के तहत कार्रवाई की है। फहीम कुरैशी पुत्र सुल्तान कुरैशी पर यह मुकदमा सुल्तानपुर की कोतवाली नगर में दर्ज है।

लोकसभा में पास हुआ कृषि कानूनों की वापसी वाला बिल, कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित

संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने के पहले ही दिन सोमवार (29 नवंबर, 2021) को लोकसभा में कृषि कानूनों की वापसी वाला बिल पास कर दिया गया। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने लोकसभा में कृषि कानूनों की वापसी वाले बिल को विपक्षी सांसदों के हंगामे के बीच टेबल पर रखा। हालाँकि, नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने इस बिल पर पहले चर्चा कराए जाने की माँग की। बिल पास होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के के लिए स्थगित कर दी गई।

वहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि विपक्षी सांसदों को अगर चर्चा करनी है तो उसके लिए उन्हें हंगामा रोकना होगा। इसी दौरान पश्चिम बंगाल के आसनसोल से सांसद और हाल ही में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) से भाजपा में शामिल होने वाले बाबुल सुप्रियो का इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया गया। TMC के सदस्यों ने महात्मा गाँधी की प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहस से भाग रहे हैं। वहीं सत्तापक्ष के सांसदों का कहना है कि जब प्रधानमंत्री ने ही माफ़ी माँग ली है तो विपक्ष और क्या चाहता है?

PM मोदी ने कहा- सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार, फिर भी नहीं सुधरा विपक्ष: संसद का शीत सत्र शुरू होते ही हंगामा

संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत सोमवार (29 नवंबर 2021) से हुई। शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार हर मसले पर खुली चर्चा के लिए तैयार है। साथ ही विपक्ष को हंगामा नहीं करने की नसीहत दी। लेकिन विपक्ष पर इसका असर नहीं हुआ। सत्र शुरू होते ही विपक्ष दोनों सदनों में हंगामे पर उतारू हो गया। इसके चलते लोकसभा की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। बाद में राजयसभा की कार्यवाही भी स्थगित करनी पड़ी।

इस सत्र में 26 बिल पेश किए जाएँगे। आज ही सरकार कृषि कानूनों की वापसी का बिल पेश करेगी। सत्र शुरू होने से पहले मीडिया को संबोधित करते हुुए पीएम ने संसद के शीतकालीन सत्र को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, “देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। हिंदुस्तान में चारों दिशाओं में से इस आजादी के अमृत महोत्सव के निमित्त रचनात्मक, सकारात्मक, जनहित के लिए, राष्ट्रहित के लिए, सामान्य नागरिक अनेक कार्यक्रम कर रहे हैं, कदम उठा रहे हैं और आजादी के के दीवानों ने जो सपने देखे थे, उन सपनों को पूरा करने के लिए सामान्य नागरिक भी अपना कोई ना कोई दायित्व निभाने का प्रयास कर रहा है। ये खबरें अपने आप में भारत के उज्जवल भविष्य के लिए शुभ संकेत हैं।”

उन्होंने कहा, “भविष्य में संसद को कैसा चलाया, कितना अच्छा योगदान दिया, कितना सकारात्मक काम हुआ, उसे तराजू पर तोला जाए। न कि मापदंड ये होना चाहिए कि किसने कितना जोर लगाकर सत्र को रोका। ये मानदंड नहीं हो सकता है। मानदंड ये होगा कि संसद में कितना सकारात्मक काम हुआ।”

पीएम ने आगे कहा, “सरकार हर विषय पर खुली चर्चा करने को तैयार है, सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है और आजादी के अमृत महोत्सव में हम ये भी चहेंगे कि संसद में सवाल हो और साथ में शांति भी हो। हम चाहते हैं कि संसद में सरकार के खिलाफ, सरकार की नीतियों के खिलाफ जितनी आवाज प्रखर होनी चाहिए हो, लेकिन संसद की गरिमा, स्पीकर की गरिमा, चेयर की गरिमा, इन सबके विषय में हम वो आचरण करें जो आने वाले दिनों में देश की युवा पीढ़ी को काम आए।”

पीएम मोदी ने कहा, “पिछले सत्र के बाद कोरोना की विकट परिस्थिति में भी देश ने 100 करोड़ से अधिक कोरोना वैक्सीन डोज लगा दी है और हम 150 करोड़ की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। नए वेरिएंट की खबरें भी हमें और सतर्क करती हैं और सजग करती हैं। हम संसद के साथियों को भी सतर्क रहने की प्रार्थन करता हूँ। ऐसे संकट की घड़ी में देश का उत्तम स्वास्थ्य हमारी प्राथमिकता है।”

माँग में सिंदूर, साइकिल की सवारी: कौन हैं मतिल्दा कुल्लू, Forbes ने ताकतवर महिलाओं की सूची में क्यों दी जगह

फोर्ब्स (Forbes) की सबसे ताकतवर भारतीय महिलाओं की सूची में ओडिशा की एक आशा कार्यकर्ता ने भी जगह बनाई है। फोर्ब्स इंडिया डब्ल्यू-पॉवर 2021 सूची में अमेजन प्राइम की हेड अपर्णा पुरोहित और सेल्सफोर्स इंडिया की सीईओ अरुंधति भट्टाचार्य जैसी शख्सियतों के साथ ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले की 45 वर्षीय आदिवासी आशा कार्यकर्ता मतिल्दा कुल्लू का नाम भी शामिल है। कुल्लू ने फोर्ब्स इंडिया महिला सशक्तिकरण की सूची में देश में तीसरा स्थान बनाया है।

मतिल्‍दा बड़ागाव तहसील के गर्गडबहल गाँव में काम कर रही हैं। इनका अब तक का सफर काफी संघर्ष और दिक्‍कतों भरा रहा है। कभी लोग इनकी सलाह और इनकी बातों का मजाक उड़ाते थे। वहीं, अब इन्‍हें सम्‍मान देते हैं।

जानिए कौन हैं मतिल्दा कुल्लू

मतिल्दा कुल्लू ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले की बारागाँव तहसील की निवासी हैं। सुंदरगढ़ जिले के गर्गडबहल गाँव में 15 साल पहले मतिल्दा बतौर आशा कार्यकर्ता नियुक्त हुईं थी। उसके बाद से आज तक वह लगातार लोगों को जागरुक कर रही हैं। मतिल्दा के प्रयासों का ही असर है कि बारागाँव तहसील के लोग अब बीमारियों के इलाज के लिए अस्पताल जाने लगे हैं। दरअसल पिछड़ेपन के कारण पहले लोग बीमारी को काले जादू का असर मानते थे और तांत्रिक-ओझा के पास जाते थे। इस पर मतिल्दा ने लोगों को जागरुक करना शुरू किया और धीरे-धीरे उनके प्रयासों का फल मिला। अब लोगों में जागरुकता आ चुकी है और लोग काले जादू के चंगुल से मुक्त हो गए हैं। 

ग्रामीणों को सेहतमंद रखना इनका लक्ष्‍य

मतिल्‍दा के दिन की शुरुआत सुबह 5 बजे से होती है। मवेश‍ियों की देखभाल और घर का चूल्‍हा-चौका सँभालने के बाद गाँव के लोगों को सेहतमंद रखने के लिए घर से निकल पड़ती हैं। मतिल्‍दा साइकिल से गाँव के कोने-कोने में पहुँचती हैं। गाँव में घर-घर पर जाकर नवजात और किशोर-किशोरियों को वैक्‍सीन लगाना, महिलाओं की प्रसव से पहले और बाद की जाँच कराना इनके काम का हिस्‍सा है। इसके अलावा बच्‍चे के जन्‍म की तैयारी, हर जरूरी सावधानी की जानकारी देना, एचआईवी और दूसरे संक्रमण से गाँव वालों को दूर रखने की सलाह देना भी इनका काम है। यह जिम्‍मेदारी म‍त‍िल्‍दा पूरी शिद्दत से निभा रही हैं। 

कोरोना महामारी के दौरान भी मतिल्दा ने बेहतरीन काम किया और इलाके में टीकाकरण के काम में जमकर मेहनत की। कोरोना महामारी के दौरान भी मतिल्दा रोजाना 50-60 घरों में जाकर लोगों के टेस्ट करती थीं। 4500 रुपए कमाने वाली मतिल्दा कुल्लू ने अपना जीवन बारागाँव तहसील के 964 लोगों की देखभाल के लिए समर्पित कर दिया है। मतिल्दा इन लोगों के लिए कोरोना वॉरियर हैं। मतिल्दा का कहना है कि उन्हें अपने काम पर गर्व है क्योंकि इससे वह लोगों की जान बचा पाती हैं। 

ग्रामीणों को वैक्‍सीन के लिए राजी करना बड़ी चुनौती थी

मतिल्दा कहती हैं कि कोरोना काल में हालात बिगड़ने के कारण जिम्‍मेदारी बढ़ गई थी। रोजाना कोरोना के लक्षण वाले 50 से 60 मरीजों की जाँच के लिए उनके घर जाती थीं, लेकिन इससे बड़ी चुनौती थी लोगों को वैक्‍सीन लगाने के लिए तैयार करना। गाँव में जब वैक्‍सीन लगाने की शुरुआत हुई तो गाँव वालों को इसे लगवाने के लिए बमुश्‍क‍िल राजी किया। धीरे-धीरे लोगों को इसके लिए जागरुक किया। मतिल्‍दा कहती हैं कि उनके लिए गाँव वालों की सेवा से बढ़कर कुछ भी नहीं।

कभी लोग उड़ाते थे मजाक

मतिल्‍दा कहती हैं, “शुरुआती सफर संघर्ष भरा रहा है क्‍योंक‍ि बीमार होने पर यहाँ के लोग अस्‍पताल नहीं जाते थे। जब मैं उनसे अस्‍पताल से इलाज कराने के लिए कहती थी तो वो मेरा मजाक उड़ाते थे। जैसे-जैसे समय बीता, लोगों को मेरी बात समझ आई। अब गाँव वाले अपनी सेहत के लिए जागरुक हो गए हैं। हर छोटी-छोटी बीमारी का इलाज कराने अस्‍पताल पहुँचते हैं।”

मतिल्‍दा को गाँव में इसलिए भी अध‍िक संघर्ष करना पड़ा क्‍योंकि उस दौर में लोग इलाज के लिए अस्‍पताल जाने की बजाय काले जादू का सहारा लेते थे। लोगों की यह सोच बदलना मतिल्‍दा के लिए काफी चुनौती भरा रहा है। मतिल्‍दा के प्रयास से ही गाँव में काले जादू जैसे सामाजिक अभिशाप को जड़ से खत्‍म किया जा सका। गाँव में यह बड़ा बदलाव लाने और लोगों को सेहतमंद रहने के इनके योगदान के कारण ही फोर्ब्‍स ने इन्‍हें दुन‍ि‍या की शक्‍त‍िशाली महिलाओं की लिस्‍ट में शामिल किया। बता दें कि हाल ही में फोर्ब्स इंडिया ने भारत की महिला शक्ति 2021 की सूची जारी की है। इस सूची में उन महिलाओं को शामिल किया गया है, जो अपने दम पर सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ी हैं।

दलित पवन ने दलित परिवार के 4 लोगों को कुल्हाड़ी से काटा, कॉन्ग्रेस और उसकी ‘पालतू मीडिया’ ने जाति का एंगल जोड़ा

प्रयागराज में एक परिवार के चार लोगों की हत्या के मामले में पुलिस ने पवन कुमार सरोज को गिरफ्तार किया है। बताया है कि एकतरफा प्यार में उसने इस घटना को अंजाम दिया। खास बात यह है कि आरोपित पवन भी पीड़ित परिवार की तरह दलित ही है। लेकिन, कॉन्ग्रेस, सपा, बसपा जैसे विपक्षी दलों और मीडिया ने इस घटना में जाति का एंगल ठूँस दिया। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को बदनाम करने के लिए इस घटना की आड़ में दलितों पर अगड़ी जाति के अत्याचार के प्रोपेगेंडा को बढ़ाया।

पुलिस के मुताबिक पवन ने इस घटना को एकतरफा प्यार में असफल रहने के चलते अंजाम दिया। उसके मोबाइल से मृतका को भेजे गए मैसेज इस खुलासे में अहम सुराग बने हैं। पुलिस ने पूरे घटनाक्रम का खुलासा 28 नवम्बर 2021 (रविवार) को किया।

पुलिस द्वारा जारी बयान के मुताबिक मृतका के मोबाइल की जाँच के दौरान आरोपित पवन के मैसेज मिले। पवन ने मृतका का नंबर गौरी मैडम के नाम से सेव किया था। उसने कई बार पीड़िता को प्रपोज किया, लेकिन उसका ऑफर ठुकरा दिया गया। इससे नाराज हो उसने अपने साथियों संग घटना को अंजाम दिया। यह भी सामने आया कि पीड़िता बालिग थी, जिसकी आयु 20 वर्ष से अधिक है। एक अन्य मृतका पीड़िता की माँ के साथ दुष्कर्म नहीं किया गया था। BBC व अन्य कई मीडिया रिपोर्टो में पीड़िता को नाबालिग और उसकी माँ के साथ दुष्कर्म की बात कही गई थी।

आरोपित पवन गाँव कोरसंड, थाना थरवई प्रयागराज का ही रहने वाला है जो मृतका के घर से लगभग 8 किलोमीटर दूर है। पवन द्वारा उस रात पहने गए कपड़ों पर लाल रंग के दाग मिले हैं। इन्हे वो पान की पीक बता रहा पर पुलिस को ख़ून के धब्बे होने का शक है। मृत लड़की के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई है। पवन के कपड़े और अन्य साक्ष्यों को लैब में परीक्षण के लिए भेजा गया है। पुलिस ने बताया कि आरोपित जाँच में सहयोग नहीं कर रहा और बार-बार बयान बदल रहा। जल्द ही उसके साथियों के नाम आदि की जानकारी हासिल कर ली जाएगी और इस घटना से जुड़े बाकी अन्य आरोपित भी गिरफ्तार किए जाएँगे।

पुलिस प्रेसनोट

गौरतलब है कि यह घटना 25 नवम्बर 2021 की है। गाँव मोहनगंज गोहरी, थाना फाफामऊ प्रयागराज में एक दलित परिवार के 4 सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। मृतकों में परिवार का मुखिया व लड़की के पिता 50 साल के फूलचंद, उनकी 45 वर्षीया पत्नी मीनू देवी, बेटी सपना और एक नाबालिग बेटा शामिल था। हमला घर में घुस कर कुल्हाड़ी जैसे हथियार से किया गया था। इन सभी के लहूलुहान शव बिस्तर पर ही पाए गए थे। तब इस मामले में क्षत्रिय समाज के 11 लोगों को नामजद किया गया था। इनमे से एक आरोपित ऐसा भी था जो लम्बे समय तक अस्पताल में था और चलने-फिरने में असमर्थ है। इनके साथ पीड़ित परिवार से पुरानी रंजिश बताई गई थी। आनन फानन में 8 लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया गया था। पुलिस ने सभी पर धारा 147, 148, 149, 302, 376 D IPC के साथ 3/4 पॉक्सो एक्ट और SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की थी।

एफ़आईआर में गाँव के आकाश सिंह, उनके पिता अमित सिंह, अमित सिंह की पत्नी बबली सिंह और आठ अन्य लोगों को आरोपित किया गया था। पहले इस घटना में पुलिस पर दलितों का साथ न देने का आरोप लगाया गया था। इसके चलते इंस्पेक्टर और सिपाही को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया था। कुछ ही समय में इस मामले ने राजनैतिक तूल पकड़ लिया था। घटना में कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ बसपा, सपा, भीम आर्मी ने बयानबाजी शुरू की। इसमें कई पत्रकार भी शामिल हो गए। तमाम लोगों ने इस घटना को जातीय रंग देना शुरू कर दिया था।

कथित पत्रकार प्रशांत कनौजिया ने ट्वीट कर कहा कि मृतक पासी (दलित) हैं और पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही क्योंकि आरोपित ठाकुर हैं।

प्रियंका गाँधी ने इस घटना को सरकारी संरक्षण में दलितों का नरसंहार बताया।

प्रियंका गाँधी

दिग्विजय सिंह ने भी इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी।

दिग्विजय सिंह

यूथ कॉन्ग्रेस के आधिकारिक हैंडल ने “सामंती गुंडे” जैसे शब्द का प्रयोग किया।

यूथ कॉन्ग्रेस

भीम आर्मी के मुखिया ने “बौराए गुंडे” कहा।

भीम आर्मी

अखिलेश यादव ने इस हत्या को “दबंगों” द्वारा की गई बताया था।

अखिलेश यादव

मायावती ने उस क्षेत्र में “दबंगो का आतंक” लिखा था।

मायावती

पत्रकार रोहिणी सिंह ने तो इस घटना में 2019 और 2021 का इतिहास भी जोड़ दिया था और लिखा कि UP में दलित होना आसान नहीं है।

रोहिणी सिंह

आज़ाद समाज पार्टी के गुलज़ार सिद्दीकी ने जातिवादियों से सुरक्षा के लिए ‘बंदूकों’ की माँग कर डाली।

गुलज़ार सिद्दीकी

आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने राष्ट्रपति से समय माँग कर मामले में हस्तक्षेप की बात कही।

संजय सिंह

बॉलीवुड के ‘चमत्कारी डॉक्टर’ जॉनी लीवर, सुनिए ऋतिक रोशन को ‘चंगा’ करने का दावा: कैंसर, लकवा, पथरी… प्रार्थना से सब कर देते हैं ‘ठीक’

जॉनी लीवर भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध कॉमेडियन में से एक हैं। 64 वर्षीय अभिनेता ने 200 से अधिक फिल्मों में काम किया है। आप भले उन्हें एक अच्छे एंटरटेनर के रूप में जानते हैं, लेकिन एक ऐसा भी वर्ग है जिसके लिए वे ‘चमत्कारी’ हैं। सालों पहले ईसाई उपदेशक बन चुके इस कॉमेडियन को ये लोग ‘ब्रदर जॉनी लीवर’ के नाम से जानते हैं। ‘ब्रदर जॉनी लीवर’ न केवल ऐसी सभाओं में शिरकत करते हैं जहाँ प्रार्थना से बीमारी दूर भगाने का दावा किया जाता है, बल्कि कई इंटरव्यू में वे खुद भी स्तन कैंसर, लीवर सूजन और लकवा सहित कई बीमारियों को ठीक करने का दावा कर चुके हैं।

जॉनी लीवर का ईसाई प्रचारक बनने का सफर

कॉमेडियन की जिंदगी में एक ऐसा समय आया जब वह चमत्कार से इलाज पर विश्वास करने लगे और फिर उसका प्रचार करने लगे। जॉनी लीवर के बेटे जेसी लीवर को गर्दन पर ट्यूमर हो गया था। लीवर के मुताबिक, जब जेसी छोटा था, उसके गले में एक ट्यूमर हो गया था। लीवर ने नानावती अस्पताल में उसका टेस्ट करवाया, जहाँ डॉक्टरों ने उसका इलाज करने से इनकार कर दिया क्योंकि इसकी प्रक्रिया काफी मुश्किल थी, इससे शरीर का एक तरफ का हिस्सा लकवाग्रस्त हो सकता था, आँखों की रोशनी जा सकती थी और इसके अलावा भी कई अन्य परेशानियाँ हो सकती थी।

जैसे ही लीवर ने अपने बेटे की हालत बिगड़ती देखी, वह अपने बेटे को खुश करने के लिए परिवार के साथ अमेरिका की यात्रा पर गया। लीवर ने कहा, “यही वह समय था जब मैं धार्मिक हो गया था। हम अपने बेटे को उपचार सभाओं में ले जाते थे। वे सभाएँ जहाँ लोग यीशु से प्रार्थना करके बीमारियों को ठीक करने का दावा करते हैं। मेरी पत्नी मेरे बेटे को कई जगहों पर ले गई। दो वर्ष तक हम सुनते रहे- यीशु तुम्हारे पुत्र को चंगा कर देगा।”

अपनी यात्रा के दौरान, वे एक चर्च में गए, जहाँ पादरी ने उनके बेटे की गर्दन का ट्यूमर देखा और न्यूयॉर्क के एक विशिष्ट अस्पताल में जाने के लिए कहा और उससे कहा, ‘यीशु आपके बेटे को चंगा करेगा’। जब वे अस्पताल पहुँचे, तो उन्हें पता चला कि जिस डॉक्टर को उनका इलाज करना था, उन्होंने अभिनेत्री नरगिस का भी इलाज किया। उन्होंने दावा किया कि दिवंगत अभिनेता सुनील दत्त की सिफारिश के बाद डॉक्टर ने उनके बेटे का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया। घटना के बाद, वह और अधिक धार्मिक हो गए और उन्होंने फिल्में करना बंद कर दिया। उनका सारा ध्यान “परमेश्वर के वचन” को फैलाने पर था।

अन्य अवसरों पर, उन्होंने दावा किया है कि उनका बेटा कैंसर से पीड़ित था। उन्होंने एक बार कहा था, “यह भगवान की इच्छा थी। मैं हमेशा से एक धार्मिक व्यक्ति रहा हूँ, लेकिन एक घटना ने मेरी जिंदगी बदल दी। मेरे बेटे को कैंसर हो गया था। मैं असहाय था और मदद के लिए गॉड की ओर रुख किया। मैंने फिल्मों में काम करना बंद कर दिया और अपना सारा समय प्रार्थना करने में लगा दिया। दस दिन बाद, जब उसे टेस्ट करने के लिए ले जाया गया, तो डॉक्टर हैरान रह गए क्योंकि कैंसर गायब हो गया था। यह मेरे लिए एक नए जीवन की शुरुआत थी।”

ऋतिक रोशन को ठीक करने का दावा

लीवर ने बजिंदर सिंह, अंकुर नरूला, कांचल मित्तल, बख्त सिंह, पीसी जॉन, निर्मला जोशी और कई अन्य लोगों की तरह ही कई दावे किए हैं। लीवर के अनुसार, दुनिया भर में यीशु के वचन का प्रचार शुरू करने के बाद, उन्हें लोगों के इलाज करने की शक्ति प्राप्त हुई। हालाँकि उन्होंने सीधे तौर पर यह नहीं कहा कि उनके पास शक्तियाँ हैं, लेकिन उन्होंने ‘हीलिंग टच (healing touch)’ का संकेत दिया। सबसे विचित्र दावा जो उन्होंने कई साक्षात्कारों और बैठकों में किया है, वह यह है कि उन्होंने अभिनेता ऋतिक रोशन की लीवर की बीमारी को ठीक किया।

सोशल मीडिया पर एक क्लिप वायरल हो रही है जिसमें लीवर को यूथ एसोसिएट इंटरनेशनल द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए देखा जा सकता है। यह एक मिशनरी संगठन है जो ‘लोगों को यीशु में जवाब खोजने में मदद करने’ का दावा करता है। दिलचस्प बात यह है कि वेबसाइट पर संगठन की फोटो गैलरी में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की दो तस्वीरें हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि पूर्व पीएम उनके कार्यक्रम में शामिल हुए थे या उन्होंने उनकी तस्वीरों को संदर्भ से बाहर जाकर इसमें डाला है।

खैर, जॉनी लीवर पर लौटते हैं। भीड़ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “एक दिन शूटिंग के दौरान, मैंने राकेश रोशन को लँगड़ाते हुए देखा। जब मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा है कि जैसे किसी ने उनके कंधों पर 100 किलो वजन डाल दिया हो। मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं उनके लिए प्रार्थना कर सकता हूँ। वह मान गए। मैंने प्रार्थना की और कुछ ही मिनटों में वह ठीक हो गए।” भीड़ ने तालियाँ बजाईं। आगे वे कहते हैं, “कुछ दिनों बाद, ऋतिक रोशन की पहली फिल्म की रिलीज़ के बाद, मैं राकेश रोशन से मिला और उन्हें फिल्म की सफलता के लिए बधाई दी। उस दिन, रोशन ने मुझे ऋतिक के लीवर की बीमारी के बारे में बताया। उन्होंने मुझे बताया कि वह वर्षों से पीड़ित हैं, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं ऋतिक के लिए प्रार्थना कर सकता हूँ जैसा कि मैंने उनके लिए किया था।”

जॉनी लीवर ने कहा कि रोशन को ऋतिक के लिए मदद माँगते देख वह हैरान रह गए। उन्होंने ऋतिक को बुलाया और पूछा कि कहाँ पर है लीवर में सूजन? इसके बाद उन्होंने यीशु का नाम लेकर उस जगह पर हाथ रखा और सूजन गायब हो गया। लीवर ने कहा, “मैंने प्रार्थना की, और आज तक, उसे लीवर के सूजन के लिए कोई दवा नहीं लेनी पड़ी।” दिलचस्प बात यह है कि लीवर इस तरह के दावे सालों से करता आ रहे हैं, लेकिन रोशन परिवार के किसी ने भी इससे कभी इनकार नहीं किया है। इस तरह के दावे न केवल लोगों को तथाकथित ‘चेंज मीटिंग्स’ या ‘हीलिंग मीटिंग्स’ में विश्वास दिलाते हैं, बल्कि बजिंदर सिंह और अंकुर नरूला जैसे धोखेबाजों को भी बढ़ावा देते हैं, जो ‘चमत्कारिक इलाज’ के बहाने भोले-भाले लोगों को ईसाई धर्म अपनाने का लालच देते हैं। .

इसी संबोधन के दौरान लीवर ने एक फिल्म के सेट पर कई वर्कर्स के स्टोन प्रॉब्लम को ठीक करने का दावा किया। उन्होंने कहा, “मैं अपनी वैन में बाइबल पढ़ रहा था तभी एक आदमी मुझसे मिलने आया। मैंने उसे बैठने के लिए कहा तो वह बड़ी मुश्किल से बैठा। जब मैंने उससे पूछताछ की तो उसने बताया कि उसे पथरी की बीमारी है। मैंने ‘यीशु के नाम पर’ प्रार्थना की और दो मिनट बाद उनसे पूछा। वह ठीक हो गया था।” लीवर ने आगे दावा किया कि जब वह बाहर आए तो इसी तरह की स्वास्थ्य समस्या वाले लोगों की लंबी लाइन थी। लीवर ने कहा, “मैंने सेट पर दस दिनों तक काम किया और शूटिंग के अंत तक उन सभी को ठीक कर दिया।”

एक अन्य दावे में जॉनी लीवर ने कहा कि उन्होंने मिताली सिंह (गज़ल गायक) के स्तन कैंसर को ठीक किया। वह उनकी ही बिल्डिंग में रहती थी। उन्होंने कहा, “मेरी मुलाकात मिताली से हुई, जो मेरी बिल्डिंग में रहती थी। उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें स्तन कैंसर का पता चला है। मैं चौंक गया। हमने एक साथ संघर्ष किया था। जब मैं उनसे बात कर रहा था, मैंने अपने एक आवाज सुनी ‘उसका कैंसर ठीक हो गया है’। मैंने उन्हें वही बताया। उसने मुझे एक रिपोर्ट दिखाई और कहा कि दो और रिपोर्ट आना बाकी है जिसमें एक सप्ताह लगेगा। बाद में उन्होंने मुझे रिपोर्ट दिखाई कि कैंसर अभी भी था। मैंने उन्हें दोबारा जाँच कराने को कहा। वह ठीक हो गई थी। अब उनकी दो रिपोर्टें हैं, एक कैंसर वाला और एक बिना कैंसर वाला।” लीवर ने यह दावा अभिनेता अनुपम खेर के साथ एक इंटरव्यू के दौरान किया था।

उसी इंटरव्यू में उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने अभिनेता असरानी के ड्राइवर का लकवा ठीक कर दिया। उन्होंने कहा, “एक दिन मैं बाइबल पढ़ रहा था कि असरानी का ड्राइवर मुझसे मिलने आया। उसने मुझे बताया कि वह लकवाग्रस्त है और महीनों बेड पर पड़ा था। मैंने उस हाथ को छुआ जो लकवाग्रस्त था और अचानक से वह हिलने लगा।”

फिल्म ‘बॉब बिस्वास’ के रिलीज से पहले अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह ने ट्विटर पर कई फॉलोवर्स को किया ब्लॉक, BJP नेता ने बताया कारण

बॉलीवुड एक्ट्रेस चित्रांगदा सिंह की आने वाली फिल्म बॉब बिस्वास बहुत जल्द ही रिलीज होने जा रही है, लेकिन उससे पहले ही अभिनेत्री सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई हैं। दरअसल, ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि कई सोशल मीडिया यूजर्स दावा कर रहे हैं कि एक्ट्रेस ने उन्हें ट्विटर पर ब्लॉक कर दिया है। कई लोगों के दिलों की धड़कन बन चुकीं अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह के सोशल मीडिया पर बहुत सारे फॉलोवर्स हैं, लेकिन कुछ इस बात से निराश हैं कि एक्ट्रेस को वे फॉलो नहीं कर पाएँगे।

इनमें से कई लोगों ने स्क्रीनशॉट साझा करते हुए बताया कि अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह ने उन्हें ब्लॉक कर दिया है।

कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि उन्होंने एक्ट्रेस से कभी बात भी नहीं की, फिर भी उन्हें ब्लॉक कर दिया गया।

कई लोगों ने यह भी ऑब्जर्व किया कि जिन लोगों को ब्लॉक किया गया है, उनमें से अधिकांश एक विशेष राजनीतिक दल के प्रति झुकाव रखने वाले लोग हैं।

ट्विटर पर ऐसे कई लोग हैं, जिन्हें चित्रांगदा सिंह ने ब्लॉक कर दिया है।

लोग हैरान हैं कि जिस सेलिब्रिटी से उन्होंने आज तक बात नहीं की, आखिर उसने ऐसा क्यों किया। इससे पहले चित्रांगदा सिंह ने दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को भी ब्लॉक कर दिया था। बाद में उन्होंने इन घटनाओं को लेकर स्पष्टीकरण भी दिया।

बग्गा ने बताया कि अभिनेत्री के सोशल मीडिया मैनेजर ने उन्हें इस बारे में कॉल किया था। सोशल मीडिया मैनेजर ने बताया कि अभिनेत्री की पिछली सोशल मीडिया एजेंसी ने उनके सारे फॉलोवर को ब्लॉक कर दिया था और इस मसले को सुलझाने के लिए वे लोग काम कर रहे हैं।

फिलहाल ये देखने वाली बात है कि इस मसले का हल कैसे निकलता है। इस बीच बॉब बिस्वास 3 दिसंबर को रिलीज़ होने के लिए तैयार है। इस फिल्म में अभिषेक बच्चन और चित्रांगदा सिंह मुख्य भूमिका में हैं।

‘वोटिंग राइट छीन मुस्लिमों को दोयम दर्जे का नागरिक बना देना चाहिए’: महामंडलेश्वर यतींद्रानंद ने कहा- भारत में रहना है तो शरणार्थी बन रहें

उत्तर प्रदेश के संभल में जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरी ने भारत के मुस्लिमों को लेकर बड़ा बयान दिया है। महामंडलेश्वर ने रविवार (28 नवंबर) को कहा कि मुस्लिमों को भारत में रहने का कोई हक नहीं है। उनके मतदान के अधिकार को छीन लेना चाहिए और देश में उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक बना देना चाहिए। उन्होंने कहा अगर मुस्लिमों को भारत में रहना ही है तो शरणार्थी के रूप में रहें।

महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरी भाजपा नेता कपिल सिंघल के आवास पर संभल पहुँचे। इसी दौरान उन्होंने मुस्लिमों को लेकर यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि जब भारत तका बँटवारा हो गया और उनके लिए पाकिस्तान दे दिया तो मुस्लिमों को भारत में रहने का औचित्य क्या है। उन्हें यहाँ से चले जाना चाहिए।

भारत के विभाजन को याद कर यतींद्रानंद गिरी ने कहा कि 1947 में देश के विभाजन के समय तथाकथित धर्मनिरपेक्ष नेताओं ने देश का विभाजन भौगोलिक या इतिहास के आधार पर नहीं, बल्कि धर्म के आधार पर किया था। महामंडलेश्वर ने कहा कि वे कहते थे कि हिंदू और मुस्लिम दो भाई हैं, लेकिन हम कहते हैं कि जिनकी संस्कृति नहीं मिलती, वे कभी भाई हो ही नहीं सकते।

उन्होंने कहा कि भारत का एक बड़ा हिस्सा मुस्लिमों को दे दिया गया। अब अधिकार नहीं होने के बावजूद उन्हें भूमि दे दी गई तो भारत में उनका हक कैसा। अब वे भारत में क्या कर रहे हैं? जब भारत की संस्कृति और यहाँ की सरकार से उन्हें नफरत है तो उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए। अगर भारत में उन्हें रहना ही है तो वे शरणार्थी के रूप में रहें।

यतींद्रानंद गिरी ने कहा यहाँ रहने के बावजूद मुस्लिम यहाँ की संस्कृति और लोगों को अपना नहीं समझते। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय देश के संसाधनों का भरपूर लाभ उठा रहा है, लेकिन भारत की संस्कृति और सरकार को रोजाना गाली दे रहा है। जो भारत की संस्कृति को अपनाने के लिए तैयार नहीं है, वह भारत का नागरिक होने का अधिकारी नहीं है। इसलिए इनका वोट देने का अधिकार खत्म कर दोयम दर्जे का नागरिक बना देना चाहिए।

AIMIM के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असद्उद्दीन ओवैसी के लखनऊ को शाहीन बाग बनाने वाले बयान पर यतींद्रानंद ने कहा कि इसके लिए तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कब से इंतजार कर हैं। ओवैसी को इसका कब से निमंत्रण भी दे रहें है। अगर ओवैसी में लखनऊ में आने की हिम्मत तो करें। मुख्यमंत्री उनका अच्छी तरह स्वागत करेंगे।

मंदिरों को कराना होगा रजिस्ट्रेशन, देना होगा 4% टैक्स: बिहार के ‘धार्मिक न्यास बोर्ड’ का फैसला, माँगी गई मंदिरों की डिटेल

बिहार में सार्वजनिक मंदिरों को लेकर राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड ने बड़ा फैसला लिया है। जिसके तहत अब से राज्य में सभी सार्वजनिक मंदिरों को 4 प्रतिशत का टैक्स देना होगा। धार्मिक न्यास बोर्ड के इस फैसले के दायरे में उन मंदिरों को भी शामिल किया गया है, जिसे कोई व्यक्ति अपने घर में बनवाने के बाद उसे सभी के लिए खोल देता है। इन सभी को अब से अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा और टैक्स देना पड़ेगा।

धार्मिक न्यास बोर्ड ने एक दिसंबर से मंदिरों के रजिस्ट्रेशन के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस कदम को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने राज्य के सभी कलेक्टर्स से बगैर रजिस्ट्रेशन के चल रहे मंदिरों की जानकारी माँगी है। जिलों से लिस्ट मिलते ही मंदिरों का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया जाएगा। बहरहाल अभी तक केवल भोजपुर जिले के कलेक्टर ने मंदिरों को लेकर जानकारी साझा की है।

इस फैसले को लेकर धार्मिक न्यास बोर्ड के सदस्य और महंत विजय शंकर गिरि का कहना है कि हालात बहुत ही स्पष्ट हैं कि जिन मंदिरों में बाहरी लोग आकर पूजा-अर्चना करते हैं, वो सभी सार्वजनिक पूजा स्थलों के तौर पर गिने जाएँगे। फिर चाहे वह मंदिर किसी घर के अंदर ही क्यों न हो। इन सभी को अपना पंजीयन कराने के बाद टैक्स देना पड़ेगा।

केवल 4600 मंदिर हैं रजिस्टर्ड

बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड ने दावा किया है कि मौजूदा वक्त में राज्य में केवल 4600 मंदिर ही रजिस्टर्ड हैं। जबकि कई ऐसे प्रमुख मंदिर है, जिन्होंने अभी तक अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया है।

सार्वजनिक और निजी मंदिरों की परख कैसे करें

ऐसे मंदिर जिसे किसी व्यक्ति या परिवार ने बनवाया और उसमें केवल व्यक्ति या उसके परिवार के ही लोग पूजा-पाठ करते हैं। वो मंदिर निजी मंदिर होता है। जबकि इसके उलट अगर किसी मंदिर में कई सारे लोग आते हैं, पूजा करते हैं तो वह सार्वजनिक मंदिरों की श्रेणी में आता है। फिर चाहे वह किसी की निजी संपत्ति पर ही क्यों न हो।