Home Blog Page 3188

‘मीलॉर्ड्स, आलोचक ट्रोल्स नहीं होते’: भारत के मुख्य न्यायाधीश के नाम एक बिना नाम और बिना चेहरा वाले ट्रोल का पत्र

भारत के सम्मानित मुख्य न्यायाधीश महोदय,

मैं आपको ये पत्र उन ट्रोल्स की तरफ से लिख रहा हूँ, जिनका न तो कोई नाम है और न ही कोई चेहरा। इससे पहले कि मैं बड़बड़ाना शुरू करूँ, मुझे ये बताने की अनुमति दीजिए कि ट्रोल्स का मतलब क्या होता है और क्यों वो अपना नाम और चेहरा दुनिया के सामने लाना पसंद नहीं करते। ट्रोल्स वो होते हैं जो प्रभावशाली लोगों की आलोचना करते हैं। ये प्रभावशाली लोग राजनेता, अधिकारी, सेलेब्रिटी पत्रकार, बुद्धिजीवी, कारोबारी या फिर न्यायाधीश – इनमें से कोई भी हो सकते हैं।

फिर आप ज़रूर ये सोच रहे होंगे कि हमें ट्रोल्स ही क्यों कहा जाता है, आलोचक क्यों नहीं? ऐसा इसलिए, क्योंकि हम उन लोगों की आलोचना करते हैं जो अपनी आलोचना पसंद नहीं करते। उदाहरण के लिए इलीट वर्ग के पत्रकारों को ही ले लीजिए। वो खुद को सबसे सवाल पूछने की शक्ति चाहते हैं, लेकिन जब उनसे कोई सवाल पूछता है तो वो इसे पत्रकारिता पर हमला ठहरा देते हैं। वो खुद के बनाए हुए तथाकथित ‘लोकतंत्र के चौथे स्तंभ’ वाले वर्ग में रहते हैं।

इसीलिए, वो लोग हमें ट्रोल्स की संज्ञा देते हैं। जैसे ही वो सोशल मीडिया के आलोचकों को ट्रोल्स कहना शुरू करते हैं, उनके साथ कई और लोग जुड़ कर भी हमें ट्रोल्स ही कहने लगते हैं। हाँ, ये अलग बात है कि हमें ये पसंद आता है और हम ख़ुशी से इसे स्वीकार करते हैं। फिर हमारा कोई चेहरा और नाम क्यों नहीं है? आपसे कुछ नहीं छिपा है मीलॉर्ड, आप तो जाते हैं कि शक्तिशाली लोगों को जब वहाँ ले जाया जाता है जहाँ उन्हें असुविधा हो, फिर वो कैसी प्रतिक्रियाएँ देते हैं?

उन्हें एक्सपोज करने पर वो क्या करते हैं। वो हमारी नौकरी के पीछे पड़ सकते हैं। हमारे परिवार के पीछे पड़ सकते हैं। कभी-कभी तो हमें गुंडों से पिटवा भी सकते हैं। नाम और चेहरा न दिखाने का एक फायदा ये भी है कि ये शक्तिशाली लोग मुद्दे को भटका नहीं सकते और उन्हें जवाब देना पड़ता है, क्योंकि दूसरी स्थिति में वो धर्म, जाति या समुदाय को लेकर मुद्दे को भटका सकते हैं। फिर ये ‘गालीबाज ट्रोल्स’ कौन हैं? असल में ट्रोल्स तो मजाक-मस्ती, व्यंग्य या हास्य-विनोद का सहारा लेते हैं।

वो तथ्यों पर बात करते हैं, गालियों से नहीं। मैं हूँ या कोई और, उसे गाली देकर ट्रोल्स को बदनाम नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे शक्तिशाली लोगों को भी कार्रवाई का एक बहाना मिल जाता है। केवल ट्रोल्स ही नहीं, बल्कि गालियों का प्रयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति से कानूनी तौर पर निपटा जाना चाहिए, भले ही वो किसी महिला के लिए ‘हरामखोर’ शब्द का इस्तेमाल करने वाला राज्यसभा सांसद हो या फिर किसी पत्रकार को गाली बकने वाला कोई अभिनेता हो।

खैर, गाली देने वाले ट्रोल्स की संख्या कम ही है। मीलॉर्ड, अब मैं मुद्दे पर आता हूँ। आपने कुछ दिनों पहले केंद्र सरकार की एजेंसियों को निर्देश दिया कि वो सोशल मीडिया के माध्यम से जजों से सवाल पूछने वाले ट्रोल्स के विरुद्ध कार्रवाई करें। अगर ये बयान किसी पत्रकार या राजनेता की तरफ से आया होता, तो हमारे लिए ये सम्मान की बात होगी। लेकिन, आपकी तरफ से इस बयान का आना हमारे लिए दुःख भरा है। हम आपकी तरफ अभिव्यक्ति की आज़ादी के रक्षक के रूप में देखते हैं।

जैसा कि जस्टिस गौतम पटेल ने कहा, ‘बहुत ज्यादा मतभेद के अधिकार’ जैसा कुछ नहीं होता। इसी तरह जस्टिस चंद्रचूड़ हमें खड़े होने और मतभेद प्रकट करने वाला बनने के लिए कहते हैं। मतभेद प्रकट करने वालों के अधिकार की रक्षा करते हुए दिल्ली उच्च-न्यायालय कहता है कि अगर आपको पुस्तक पसंद नहीं है तो आप इसे मत पढ़िए। हजारों ऐसे उदाहरण हैं, जब न्यायपालिका अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए खड़ी हुई। जैसा कि हमने पहले बताया, जो लोग अपनी आलोचना पसंद नहीं करते वो हमें ट्रोल्स कहते हैं।

अब उन लोगों की सूची में न्यायपालिका का नाम भी जुड़ गया है – बड़े दुःख के साथ ये कहना पड़ रहा है। हमें तो बताया गया है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है, भले ही वो कानून बनाने वाला या कानून को लागू करने वाला ही क्यों न हो। किसी जज या उसके फैसले की अपनी व्यक्तिगत क्षमता में आलोचना करना अपराध नहीं होना चाहिए। लोगों को अदालत का आदेश के पालन करने के लिए बाध्य किया जा सकता है, लेकिन उन फैसलों की आलोचना से नहीं।

असल में न्यायपालिका को ट्रोल्स नहीं, बल्कि वो मीडिया संस्थान नुकसान पहुँचा रहे हैं जो अदालत के आदेश को अपने हिसाब से पेश करते हैं। वो अपनी ज़रूरत के हिसाब से अदालत के आदेश को कोई भी एंगल दे देते हैं। वो जजों द्वारा मौखिक रूप से दिए गए बयान को हैडलाइन के रूप में प्रयोग में लाते हैं, जो असली आदेश से काई अलग हो सकता है। फेक न्यूज़ से ज्यादा न्यायपालिका को कुछ भी नुकसान नहीं पहुँचाता और बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि न्यायपालिका अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर फेक न्यूज़ फैलाने वालों को हमेशा संरक्षण देती है।

ट्रोल्स के पीछे पड़ने की बजाए जजों को फेक न्यूज़ फैलाने वालों के खिलाफ कानून बनाने का निर्देश देना चाहिए। मैं प्रेस की आज़ादी के विरुद्ध नहीं हूँ, लेकिन आज़ादी की कीमत होती है और वो एक ही है – सच्चाई। प्रेस की आज़ादी झूठ बोलने की आज़ादी नहीं हो सकती। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि जजों को बिना तैयारी के बयान देने से बचना चाहिए। जब एक जज के मन में पहले से कोई खास विचार होता है, निष्पक्ष फैसले की आशा कम हो जाती है और फैसले पर उसकी छाप नजर आती है।

मैं इस पत्र का इस उम्मीद के साथ अंत कर रहा हूँ कि न्यायपालिका उन ट्रोल्स की अभिव्यक्ति की आज़ादी के अधिकार को संरक्षण देगी, जिनके पीछे पहले से ही कई शक्तिशाली लोग पड़े हुए हैं। मुझे आशा है कि अदालत स्वतः संज्ञान लेकर ‘आईडिया ऑफ इंडिया’ और ट्रोल्स के अधिकारों को बचाएगी। अगर आपको इन बातों से दुःख पहुँचा तो क्षमा करें, मैं पास के सांप्रदायिक मंदिर में प्रार्थना करने जा रहा हूँ कि मैं भी प्रशांत भूषण की तरह एक रुपए का जुर्माना देकर निकल जाऊँ। वही प्रशांत भूषण, जिन्होंने न्यायपालिका पर हमसे भी ज्यादा कड़ा हमला किया।

आपका विश्वासी
बिना नाम और चेहरा (बिना शर्म का नहीं) का ट्रोल

शाहिद का निकाह रेशमा से, फिर भी मुस्लिम समाज से बहिष्कार: अंतरजातीय विवाह के लिए ₹50000 का जुर्माना, मारपीट और गालियाँ

झारखण्ड के धनबाद में गैर बिरादरी की मुस्लिम लड़की से शादी करने वाले शेख परिवार को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। हालात यहाँ तक बिगड़े हैं कि पीड़ित परिवार को प्रताड़ना की शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों से करनी पड़ी है। बहिष्कार का आरोप इस्लाहिया बिरादरी पर है।

अपनी शिकायत में पीड़ित परिवार ने बताया है कि 3 साल से उनके परिवार का जीना हराम हो चुका है। उन पर जुर्माना भी लगाया गया। उनके घर से बात करने वाले को 5000 रुपए फाइन भरनी पड़ती है। यहाँ तक कि उनके घर के आगे से भी गुजरने से लोग परहेज कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पीड़िता का नाम जमीला खातून है। उन्होंने गुरुवार (25 नवम्बर) 2021 को उपायुक्त को पत्र लिख कर बताया है कि वह अपनी बहू परवीन के साथ झरिया के कुल्ही में रहती हैं। उनके दोनों बेटे बाहर रहते हैं। उनके बेटे शाहिद ने 3 साल पहले जमशेदपुर की रेशमा से निकाह किया था। हालाँकि रेशमा भी मुस्लिम हैं और निकाह भी पूरे इस्लामिक तौर तरीकों से हुआ। लेकिन कुछ लोगों ने रेशमा को शेख बिरादरी से बाहर का मुस्लिम बताते हुए विरोध शुरू कर दिया।

विरोध, प्रताड़ना और बहिष्कार का आरोप इस्लाहिया कमिटी शेख बिरादरी की मुस्लिम पंचायत कमिटी के आलम, इरफान, फहीम, वसीम, सफी आदि पर लगा है। पीड़िता ने बताया कि बेटे की शादी के बाद से मुस्लिम समाज के लोगों ने उनके घर पर आना-जाना बंद कर दिया है। अंतरजातीय विवाह के नाम पर स्थानीय मुस्लिमों ने 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। इस जुर्माने को उन्होंने कर्ज ले कर चुकाया। फिर भी उनके परिवार की प्रताड़ना जारी है।

पीड़ित जमीला ने रोते-रोते मीडिया को अपनी पूरी व्यथा बताई:

“प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले उनके मकान को बनाने से भी रोका जा रहा है। मेरे परिवार को लगातार मारा-पीटा जा रहा, गंदी-गंदी गालियाँ दी जा रहीं हैं। हम समाज को छोड़ दिए पर वो हमारा पीछा नहीं छोड़ रहे। मुझे धमकाते हुए कहा जा रहा कि तुम्हारा बेटा जब आएगा, तब उसे मारेंगे भी। उसको पैरों से रौंदेंगे। मुझे हार्ट और शुगर की बीमारी है। फिर भी मुझे और मेरी बहू को घर में घुस कर मारा गया और गंदी-गंदी गालियाँ दी गईं। जब हम थाने में इसकी शिकायत करते हैं तब पुलिस कम्प्रोमाइज करवा देती है। एक दिन शांत रहने के बाद वही सब फिर शुरू हो जाता है।”

ओलंपिक का कच्छा चैंपियन: पाकिस्तानी वायरल वीडियो पर अक्षय कुमार और टाइगर श्रॉफ को चैलेंज

सोशल मीडिया पर आए दिन ऐसे वीडियो शेयर किए जाते रहते हैं, जो देखते ही दिखते छा जाते हैं। ऐसा ही एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि साधारण-सा दिखने वाला पाकिस्तान का एक व्यक्ति असाधारण स्टंट कर रहा है। उसके इस स्टंट को सोशल मीडिया पर ‘जाँघिया चैलेंज’ नाम दिया गया है।

वायरल वीडियो में दिख रहा है कि दो व्यक्ति एक जाँघिया को पकड़ कर दोनों तरफ खींच कर खड़े हैं और पाकिस्तानी झंडे की पेंटिंग वाली टीशर्ट पहने एक शख्स कुछ दूरी से दौड़ते हुए आता है और पास पहुँचकर उछल जाता है। इस तरह वह सीधे अंडरवियर में गिरते हुए उसे पहन लेता है।

इस टिकटॉक वीडियो को एक व्यक्ति ने ट्विटर पर साझा किया है। इसके साथ ही उस व्यक्ति ने पाकिस्तान में प्रतिभा की बहुलता पर व्यंगात्मक तरीके से टिप्पणी की। हालाँकि, अन्य लोगों को यह वीडियो बहुत ही फनी लगा। यूजर्स ने सोशल मीडिया पर इसे शेयर करते हुए खूब मजे लिए।

कुछ लोगों ने इस पर मजे लेते हुए सुझाव दिया कि ‘कच्छा चैलेंज’ का ओलंपिक होना चाहिए।

इसी क्रम में एक व्यक्ति ने कहा कि अगर यूनानियों ने ऐसा किया होता तो यह एक ओलंपिक खेल होता।

कुछ यूजर्स ने तो स्टंट करने वाले शख्स को पाकिस्तान का सुपर हीरो बता दिया। कोई उसे ‘चड्डी मैन’ कह रहा है तो कोई ‘कैप्टन पाकिस्तान’।

यहीं नहीं, कुछ लोगों ने तो ये भी इच्छा व्यक्त की कि बॉलीवुड एक्टर्स को भी इस ‘जाँघिया चैलेंज’ को फिल्मों में भी एक बार आजमाना चाहिए। इसके लिए सोशल मीडिया पर लोगों ने एक्टर अक्षय कुमार और टाइगर श्रॉफ के नामों को आगे भी किया।

मुशर्रफ अली फारूकी नाम के सोशल मीडिया यूजर ने तो इसके जरिए सीधे पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठा दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की वर्तमान मानसिकता के आधार पर उस व्यक्ति को देश का प्रधानमंत्री घोषित किया जाना चाहिए।

हालाँकि, इस तरह के स्टंट वाले वीडियो को लेकर हम अपनी तरफ से विनम्रतापूर्वक कहना चाहेंगे कि इस तरह के स्टंट पेशेवरों द्वारा विशेषज्ञों की निगरानी में किए जाते हैं। इसलिए कृपया इसे घर में आजमाने की कोशिश न करें।

बिना टीका लगवाए पढ़ा रहे ‘सबसे साक्षर राज्य’ के 5000 शिक्षक, 1 महीने से खुले हुए हैं स्कूल: सरकार बता रही ‘धार्मिक’ कारण

केरल में कोरोना के मामले अभी तक पूरी तरह से थमे नहीं हैं। ऐसी स्थिति में भी देश का सबसे साक्षर राज्य लापरवाही बरतने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है। यहाँ स्कूल खुले एक महीना हो गया है। इसके बावजूद राज्य में 5,000 से अधिक शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों ने कोरोना वैक्सीन नहीं लगवाई है। राज्य में अब भी 50,000 के करीब सक्रिय कोरोना मामले हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, केरल के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने रविवार (28 नवंबर 2021) को कहा कि राज्य के 5,000 से अधिक शिक्षकों ने अभी तक टीका नहीं लगवाया है। बच्चों की सुरक्षा सरकार के लिए सबसे अहम है। हम इन अशिक्षित शिक्षकों को सही नहीं ठहरा सकते हैं। केरल के शिक्षा मंत्री ने मीडियाकर्मियों से कहा कि जिन शिक्षकों का टीकाकरण नहीं हुआ है, हम उन्हें कुछ और समय देंगे। अगर उन्होंने इसके बाद भी अपनी मनमानी जारी रखी तो, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

शिवनकुट्टी ने कहा, “सरकार किसी भी तरह से शिक्षकों के रवैये को बढ़ावा नहीं देगी।” उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि कुछ शिक्षक धार्मिक और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से टीका लगाने से हिचकिचाते हैं। सरकार ने सभी शिक्षकों को स्कूलों के दोबारा खुलने से पहले वैक्सीन लेने के निर्देश जारी किए थे। मंत्री ने कहा कि जिन शिक्षकों और कर्मचारियों ने टीका नहीं लिया है, उन्हें घर पर रहने और स्कूल नहीं आने के लिए कहा गया है।

पश्चिम बंगाल भी कोरोना वैक्सीन की मामले में पीछे

केरल के अलावा कोरोना टीकाकरण के मामले में पश्चिम बंगाल के दो महीने पहले के आँकड़ों पर नजर डाले तो वह देश के सभी राज्यों में सबसे पीछे चल रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है राज्य में कुल वयस्क आबादी के 41 फीसदी लोगों को ही कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लगी है। इस तरह से पश्चिम बंगाल राष्ट्रीय औसत से 13 फीसदी पीछे चल रहा है।

कश्मीर में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे

वहीं बात करें जम्मू-कश्मीर की तो वहाँ जम्मू से ज्यादा कश्मीर में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एक महीने में ही कोरोना मरीजों की संख्या दोगुना हो गई है। नेशनल हेल्थ मिशन से मिले आँकड़ों के अनुसार शुक्रवार (26 नवंबर) को यहाँ कुल 174 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई। इनमें से 131 कश्मीर और 43 जम्मू के हैं।

केरल के आँकड़ों पर उठे सवाल

बता दें​ कि केरल, पश्चिम बंगाल और कश्मीर में कोरोना के नए मामले सामने आने के पीछे यहाँ कई लोगों द्वारा धार्मिक और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से वैक्सीन नहीं लगवाना भी है। वैक्सीनेशन में अव्वल का दावा करने वाले केरल के स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों ने कोरोना म​हामारी में अभी तक टीके नहीं लगवाए है। यह न केवल राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए आँकड़ों पर सवाल उठाता है, बल्कि शिक्षित राज्य की लापरवाही को भी उजागर करता है।

फिल्म ‘अंतिम’ को लेकर सलमान खान के फैंस का दिखा पागलपन: थिएटर में फोड़े पटाखे, पोस्टर को दूध से नहलाया

बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के लिए उनके फैंस में गजब की दीवानगी रहती है और झलक समय-समय पर मिलती रहती है। इसी तरह का जुनून सलमान ही हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘अंतिम: द फाइनल ट्रुथ’ के लिए भी दिखा। खुद एक्टर ने दो सोशल मीडिया पर दो वीडियो शेयर किए हैं, जिनमें उनके फैंस थिएटर के अंदर पटाखे फोड़ रहे थे और फिल्म के पोस्टर को दूध से नहला रहे थे। वीडियो को साझा करते हुए सलमान ने दूध को बर्बाद करने की बजाय जरूरतमंद को देने की अपील की है।

सलमान खान की लीड रोल वाली यह फिल्म 26 नवंबर को रिलीज हुई थी। सलमान खान ने शनिवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें थिएटर के अंदर फिल्म देखने के दौरान ही फैंस पटाखे फोड़ते दिख रहे हैं। इस वीडियो को शेयर करते हुए सलमान ने फैंस से ऐसा करके अपनी और दूसरों की जान को जोखिम में नहीं डालने की अपील की।

एक्टर ने वीडियो के कैप्शन में लिखा, “मेरे सभी फैंस से मेरी अपील है कि वो थिएटर्स के अंदर पटाखे न ले जाएँ, क्योंकि इससे आग लगने के कारण बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है। इससे आपकी जान को भी खतरा पैदा हो सकता है।” इसके साथ ही एक्टर ने सिनेमा के मालिकों और सिक्योरिटी गार्ड से भी लोगों को प्रवेश द्वार पर ही रोककर ऐसी चीजें अंदर ले जाने से रोकने की अपील की है।

वहीं, आज रविवार (28 नवंबर 2021) को भी सलमान खान ने ऐसा ही एक और वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में फैंस ढोल-नगाड़ों के साथ थिएटर गए और वहाँ एक्टर के फिल्म के पोस्टर को दूध से नहला दिया। इस पर एक्टर ने लिखा, “कई लोगों को पानी तक नसीब नहीं होता है और आप इस तरह से दूध को बर्बाद कर रहे हैं।” सलमान खान ने अपने फैंस से दूध को बर्बाद करने के बजाय उसे जरूरतमंद लोगों को देने की अपील की।

गौरतलब है कि ‘अंतिम: द फाइनल ट्रुथ‘ में सलमान एक सिख पुलिस ऑफिसर के रूप में हैं, जबकि उनके जीजा एक्टर आयूष शर्मा एक गैंगस्टर का रोल प्ले कर रहे हैं। इस फिल्म के डायरेक्टर महेश मांजरेकर हैं।

इमरान ने पहले राजू बन कर नीतू से मंदिर में की शादी, मारा-पीटा, फिर आयशा से किया निकाह: अब तीसरी शादी की फ़िराक में

राजस्थान के जोधपुर में नाम और धर्म छिपा कर 2 शादियाँ कर चुके इमरान उर्फ़ राजू के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। एक पीड़िता के मुताबिक आरोपित तीसरी शादी करने की फिराक में है। इमरान के खिलाफ उसकी दोनों बीवियों ने FIR करवाई है। FIR दर्ज होते ही आरोपित फरार हो गया है जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इमरान ने पहली शादी जोधपुर की ही नीतू आचार्य से की थी। यह शादी साल 2014 में हुई थी। नीतू जोधपुर के ही हनुमान जी की भाकरी इलाके में रहती थी। नीतू के मुताबिक तब इमरान ने खुद को हिन्दू बताया था। यह शादी उसने मंदिर में हिन्दू के रूप में राजू नाम से की थी। उनकी शादी वैदिक विधि विधान से 10 रुपए के स्टांप पेपर पर हुई थी।

लव मैरिज से नाराज नीतू के परिवार ने भी किनारा कर लिया था। बाद में उन्हें राजू के मुस्लिम होने की जानकारी हुई। इस पर सवाल करने से नाराज हो कर इमरान ने उसे बहुत मारा। कुछ समय बाद वह नीतू को बेसहारा छोड़ कर चला गया। नीतू आचार्य ने अपने खिलाफ मारपीट की शिकायत एक स्थानीय संस्था के साथ महिला थाने में दर्ज करवाई। इसमें उन्होंने खुद को मारने पीटने और शादी के बाद भी पैसे माँगने का आरोप लगाया है।

मिली जानकारी के मुताबिक इमरान ने अगला निकाह जोधपुर में ही कबीर नगर की आयशा से किया। उसने आयशा से अपने शादीशुदा होने की बात छिपाई थी। शादी के कुछ दिन बाद इमरान आयशा को भी मारने पीटने लगा। आयशा की तरफ से उनकी माँ ने पुलिस में केस दर्ज करवाया है। इमरान से आयशा के साथ हुए निकाहनामे में भी फर्जीवाड़ा किया है। कागज़ातों में कोई मुहर या दस्तखत नहीं है। आयशा के परिवार वालों ने बताया कि उन्होंने अपनी एकलौती बेटी का इमरान से निकाह अपना घर बेच कर किया था। उन्होंने इमरान के घर वालों पर भी आयशा के गहने हड़पने का आरोप लगाया है।

जब आयशा के रहने के दौरान इमरान के घर पुलिस गई तब उसने झूठ बोल कर मामले को टाला। उसने बताया कि उसने एक महिला से पैसे उधार लिए हैं इसलिए उसने पुलिस भेजी है। इसी के साथ उसने पुलिस को बताया कि उसने कोई दूसरा निकाह नहीं किया है। दोनों बीवियों द्वारा एक ही आरोपित की शिकायत करने के चलते एक दूसरे के बारे में जान पाईं। नीतू आचार्य और आयशा दोनों ही अब इमरान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई चाह रही हैं।

‘बेटे को लॉन्च करने के लिए रणवीर सिंह के बाप ने YRF को दिए थे ₹20 करोड़’: KRK ने कहा- सिद्धांत की एक्टिंग झुग्गी-झोपड़ी वाली

कमाल राशिद खान उर्फ केआरके अपने बयानों और फिल्मों के रिव्यू को लेकर अक्सर विवादों में रहते हैं। इस बार उन्होंने 19 नवंबर को रिलीज हुई ‘बंटी और बबली 2’ का रिव्यू करते हुए बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह को लेकर एक बड़ा दावा कर दिया।

केआरके ने सैफ अली खान, रानी मुखर्जी, शरवरी और सिद्धांत चतुर्वेदी स्टारर फिल्म ‘बंटी और बबली 2’ के डायरेक्शन, कहानी, एडिटिंग और गानों को सबसे घटिया बताते हुए कहा कि यह फिल्म सिर्फ ढाई घंटे का टॉर्चर है। आदित्य चोपड़ा द्वारा प्रोड्यूस की गई इस फिल्म को सह पाना हर किसी के बस की बात नहीं है। फिल्म को पकाऊ बताते हुए उन्होंने सैफ अली खान सहित सभी कलाकारों की जमकर खिंचाई की।

केआरके ने ‘बंटी और बबली 2’ का रिव्यू वीडियो अपने यूट्यूब और इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। वीडियो में केआरके ने कहा कि आदित्य चोपड़ा के वाईआरएफ (YRF) ने जिस भी अभिनेता को लॉन्च किया है, वो सुपर फ्लॉप रहा है। इतना कह केआरके ने यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनने वाली ‘बेफिक्रे’ फिल्म के अभिनेता को घेर लिया।

उन्होंने कहा, ”अब आप सोच रहे होंगे कि रणवीर सिंह को भी यशराज फिल्म्स ने लॉन्च किया और वो तो आज बड़ा स्टार है।” इस पर केआरके ने कहा, ”जी नहीं, आदित्य ने रणवीर को लॉन्च नहीं किया था, बल्कि रणवीर, आदित्य के माध्यम से लॉन्च हुआ था।” रणवीर सिंह को यहाँ केआरके गलती से रणवीर कपूर बोलते हुए कहते हैं कि रणवीर सिंह के बाप ने 20 करोड़ रुपए दिए थे, तब जाकर YRF ने उसको लॉन्च किया था। रणवीर सिंह को YRF की खोज नहीं कहा जा सकता है।

‘गल्ली बॉय’ से बॉलीवुड में एंट्री करने वाले सिद्धांत चतुर्वेदी की एक्टिंग को लेकर केआरके ने कहा, “उस लड़के के अंदर आज भी एक झुग्गी-झोपड़ी वाला लड़का घुसा हुआ है। उस लड़के ने पूरी फिल्म में वही ऐक्टिंग की है, जो एक झुग्गी-झोपड़ी वाला कर सकता है। माशाअल्लाह, उसकी शक्ल भी वैसी ही है। आप यकीन करें कि यह लड़का इतना हैंडसम है, जितना ऋत्विक के बराबर में खड़ा उदय चोपड़ा लगता है। शायद आदित्य चोपड़ा ने कसम खाई थी कि मैं बॉलीवुड को एक और उदय चोपड़ा दूँगा और आदित्य की मेहनत रंग लाई।” सिद्धांत पहले भी कुछ वेब सीरीज का हिस्सा रहे थे।

बता दें​ कि इससे पहले भी केआरके अपने अंदाज में फिल्मों का रिव्यू करके विवादों में रह चुके हैं। कुछ महीने पहले केआरके पर सलमान खान की अपनी फिल्म ‘राधे’ के रिव्यू को लेकर केस किया था। वहीं, गायक मीका सिंह और केआरके के बीच भी काफी विवाद हुआ था।

‘स्वामी रामदेव ने अनगिनत लोगों का कल्याण किया, भारतीयता का विकास कर रहा पतंजलि’: हरिद्वार में बोले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रविवार (28 नवंबर, 2021) को उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित पतंजलि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पहुँचे। इस दौरान राष्ट्रपति ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव जी ने योग की लोकप्रियता को बढ़ाने में अभूतपूर्व योगदान दिया है। राष्ट्रपति ने कहा कि जन-सामान्य को भी योगाभ्यास से जोड़कर उन्होंने अनगिनत लोगों का कल्याण किया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह गलत धारणा रखते हैं कि योग किसी पंथ या संप्रदाय विशेष से सम्बद्ध है, जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि वो मानते हैं कि योग सबके लिए है, योग सबका है। उन्होंने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय द्वारा जो प्रयास किए जा रहे हैं उनसे भारतीय ज्ञान-विज्ञान, विशेषकर आयुर्वेद तथा योग को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में विश्व-पटल पर गौरवशाली स्थान प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि उन्हें यह देखकर प्रसन्नता होती है कि पतंजलि समूह के संस्थानों में भारतीयता पर आधारित उद्यमों और उद्यम पर आधारित भारतीयता का विकास हो रहा है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने छात्रों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह आवश्यक है कि हम सभी प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली को अपनाएँ तथा प्राकृतिक नियमों का उल्लंघन न करें। इस दौरान राष्ट्रपति ने आचार्य बालकृष्ण से भी मुलाकात की। उन्होंने भारत में चल रहे विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान का जिक्र करते हुए प्राकृतिक उत्पादों के इस्तेमाल की सलाह दी। सूरीनाम और क्यूबा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि साम्यवादी देशों में भी योग दिवस धूमधाम से मनाया जाता है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, “इस दीक्षांत समारोह के लिए मुझे अप्रैल में ही आना था, लेकिन कोविड महामारी के कारण ऐसे कई कार्यक्रम स्थगित हुए। आज ऐसा लग रहा है जैसे एक अच्छा कार्य जो अधूरा रह गया था, आज पूरा हो रहा है। बल्कि स्वस्थ और उत्साह भरे वातावरण में पूरा हो रहा है। हरिद्वार भगवान विष्णु और महादेव, दोनों की पावन स्थली में प्रवेश का द्वार है। यहाँ रहने व शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलना विद्यार्थोयों के लिए सौभाग्य की बात है।”

प्रेसिडेंट रामनाथ कोविंद ने कहा कि 10-15 वर्ष पूर्व भारत में योग को एक तपस्या माना जाता था और लोग सोचते थे कि केवल ऐसे लोग ही योग कर सकते हैं जो संन्यासी होंगे, साधु-संत होंगे या जिन्होंने घर-गृहस्थी त्याग दी हो। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव ने इस परिभाषा को बदल दिया और लोग अब कहीं भी योग करते दिख जाते हैं। उन्होंने 21 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में मनाए जाने के संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्णय लेने का जिक्र भी किया। राष्ट्रपति ने कहा कि इसे सांस्कृतिक धरोहर की सूची में भी शामिल किया गया है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि इस संस्थान में स्वदेशी उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज से 3000 वर्ष पहले महर्षि पतंजलि ने दो शब्दों से शुरू कर के छोटे-छोटे सारगर्भित जानकारियों की मदद से योग सूत्र को पिरोया, जो भारत के लिए उपहार है। उन्होंने स्वाध्याय में प्रमाद न करने की सलाह देते हुए कहा कि संस्कृत भाषा में मानसिक शिथिलता के लिए प्रमाद शब्द का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने विज्ञानमय और आनंदमय कोष में सभी यात्रा करते रहें, यही उनकी कामना है।

इन्हें कहते हैं ‘ऑस्ट्रेलिया की राधा’, जिन्होंने पर्थ में ही बना दिया ‘मिनी वृन्दावन’: श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त जगत तारिणी दासी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (28 अक्टूबर, 2021) को अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ के दौरान जगत तारिणी दासी नामक एक कृष्ण भक्त महिला का जिक्र किया, जिन्हें ‘ऑस्ट्रेलिया की राधा’ भी कहा जाता है। जगत तारिणी दासी मूल रूप से ऑस्ट्रेलिया की हैं, लेकिन भारत आने के बाद हिन्दू धर्म ग्रंथों में उनकी आस्था के कारण यहाँ की मिट्टी से उन्हें इतना लगाव हो गया कि वो भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त बन गईं। आइए, सबसे पहले जानते हैं कि पीएम मोदी ने उनके बारे में क्या कहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में एक शहर है, पर्थ। क्रिकेट प्रेमी लोग इस जगत से भली-भाँति परिचित होंगे, क्योंकि पर्थ में अक्सर क्रिकेट मैच होते रहते हैं। पर्थ में ‘Sacred India Gallery’ नाम से एक आर्ट गैलरी भी है। यह गैलरी स्वान वैली के एक खूबसूरत क्षेत्र में बनाई गई है। ये ऑस्ट्रेलिया की एक निवासी जगत तारिणी दासी जी के प्रयासों का नतीजा है। जगत तारिणी जी वैसे तो हैं ऑस्ट्रेलिया की, जन्म भी वहीं हुआ, लालन-पालन भी वहीं हुआ, लेकिन 13 साल से भी अधिक समय वृन्दावन में आकर के उन्होंने बिताया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे बताया, “उनका कहना है, कि वे ऑस्ट्रेलिया लौट तो गईं, अपने देश वापस तो गईं, लेकिन वो कभी भी वृन्दावन को भूल नहीं पाईं। इसलिए, उन्होंने वृंदावन और उसके आध्यात्मिक भाव से जुड़ने के लिए ऑस्ट्रेलिया में ही वृन्दावन खड़ा कर दिया। अपनी कला को ही एक माध्यम बना करके एक अद्भुत वृन्दावन उन्होंने बना लिया। यहाँ आने वाले लोगों को कई तरह की कलाकृतियों को देखने का अवसर मिलता है। उन्हें भारत के सर्वाधिक प्रसिद्ध तीर्थस्थलों – वृंदावन, नवाद्वीप और जगन्नाथपुरी की परंपरा और संस्कृति की झलक देखने को मिलती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में इसका भी जिक्र किया गया था कि कैसे यहाँ पर भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़ी कई कलाकृतियाँ भी प्रदर्शित की गई हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से एक कलाकृति ऐसी भी है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर उठा रखा है, जिसके नीचे वृंदावन के लोग आश्रय लिए हुए हैं। बकौल पीएम मोदी, जगत तारिणी दासी का यह अद्भुत प्रयास वाकई हमें कृष्ण भक्ति की शक्ति का दर्शन कराता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्रयास के लिए उन्हें शुभकामनाएँ भी दी। मेलबर्न में जन्मीं जगत तारिणी दासी ने 13 वर्षों का समय वृन्दावन में बिताया था, जहाँ से उनका जीवन बदल गया। 21 वर्ष की उम्र में उन्होंने थिएटर और आर्ट के अपने शौक के कारण सिडनी का रुख किया। 1970 में उन्होंने भारत के उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थित वृन्दावन को ही अपना ठिकाना बना लिया। यहाँ के भोजन, परंपराएँ, लोगों और कला से वो जुड़ गईं। वो इस्कॉन की भी सदस्य बन गईं।

इसके बाद वो वृन्दावन आने वाले लोगों को यहाँ की संस्कृति और महिमा के बारे में जानकारी देने लगीं। वो समाजसेवा में भी रुचि रखती थीं। देश के कई अन्य धार्मिक स्थलों की यात्राएँ करने के बाद 1996 में वो वापस ऑस्ट्रेलिया तो गईं, लेकिन वहाँ भी वृन्दावन को अपने मन में ज़िंदा रखा। भारत आने से पहले उन्होंने कई अन्य देशों में भी भ्रमण किया था। एक दोस्त ने अपने निधन से पहले भारत से उन्हें श्रीकृष्ण की एक छोटी सी प्रतिमा भेजी, जिसके बाद उन्हें आर्ट गैलरी बनाने का ख्याल आया।

‘हमारी हिट लिस्ट में हो, ज्यादा दिन दिल्ली में छिपे नहीं रह सकते’: पत्रकार आदित्य राज कौल को फिर से ‘ISIS’ की धमकी

वरिष्ठ पत्रकार आदित्य राज कौल को एक बार फिर से खुद को ISIS समूह से हत्या की धमकी मिली है। करीब एक हफ्ते पहले भी पत्रकार कौल और भाजपा सांसद गौतम गंभीर को जान से मारने की धमकी दी जा चुकी है।

इस मामले में रविवार (28 नवंबर, 2021) को आदित्य राज कौल ने ट्विटर पर कहा, “मध्यरात्रि में मुझे ‘ISIS कश्मीर’ ईमेल अकाउंट से एक ईमेल मिला है, जिसमें पठानकोट में इंडियन आर्मी कैंप के बाहर विस्फोट की जिम्मेदारी ली गई है और फिर से मुझे धमकी दी गई है।”

आदित्य राज कौल के द्वारा शेयर किया गया स्क्रीनशॉट

पठानकोट में धमाके की जिम्मेदारी लेने के साथ ही संगठन ने यह भी दावा किया है कि वो कश्मीर में राजनेताओं और पत्रकारों पर हमला करेगा। ईमेल में जिस पठानकोट विस्फोट का जिक्र किया गया है, वह संभवत: सेना के कैंप के पास हैंड-ग्रेनेड विस्फोट को संदर्भित करता है। हालाँकि, उस घटना में किसी को कोई नुकसान नहीं पहुँचा था। वहीं एक अन्य मेल में समूह ने कौल को यह भी धमकी दी कि वो लंबे समय तक दिल्ली में छिपे नहीं रह सकते हैं।

आदित्य राज कौल के द्वारा शेयर किया गया स्क्रीनशॉट

वरिष्ठ पत्रकार कौल ने इस बात पर अफसोस जताया कि उनकी शिकायत के बावजूद अब तक इस मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने कहा, “दुःख की बात है कि मैं सांसद या राजनेता नहीं हूँ, इसलिए इस खतरे पर गौतम गंभीर की तरह ध्यान नहीं दिया जाता है। 5 दिन की कायराना धमकी के बाद भी पुलिस ने मेरे मामले में अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की है। यकीन नहीं होता कि वे मुझ पर हमला होने का इंतजार कर रहे हैं।”

इससे पहले कौल को इसी समूह से जान से मारने की धमकी मिल चुकी थी। ISIS संगठन की ओर से उनका सिर कलम करने की धमकियाँ भी उन्हें दी गई थी। इसके बाद पत्रकार ने उत्तर प्रदेश पुलिस और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल से मामले में शिकायत की थी। कौल की ही तरह पूर्व क्रिकेटर और अब भाजपा सांसद गौतम गंभीर को भी परिवार समेत धमकियाँ मिली थीं। धमकी के बाद उनके आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।