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दक्षिण अफ्रीका में मिला मल्टीपल म्यूटेशन वाला कोविड वैरिएंट, यूरोप में बिगड़े हालात: भारत सख्त निगरानी के साथ तैयारियों में जुटा

कोरोना वायरस के नए वैरिएंट से एक बार फिर पूरी दुनिया चिंता में आ गई है। जब कई देशों में कोविड के मामले अब कम होने शुरू हो गए थे, तब फिर एक नए वैरिएंट ने हर किसी को डरा दिया है। ये नया वैरिएंट साउथ अफ्रीका में पाया गया है। कहा जा रहा है कि ये काफी तेजी से फैलता है और इसका म्यूटेशन 30 से अधिक बार हो चुका है। इस वैरिएंट को B.1.1.529 नाम दिया गया है।

क्या होता है वेरिएंट?

किसी भी वायरस का एक जेनेटिक कोड होता है। कोरोना वायरस अपना रूप बदलने वाला वायरस है। यह जब एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में जाता है तो कई बार अपने रूप में परिवर्तन करता है। इस परिवर्तन के दौरान वायरस या तो पहले से अधिक खतरनाक हो जाता है या फिर पहले से कमजोर पड़ जाता है। इसे आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं कि वायरस जब शरीर के अंदर अपनी फोटो कॉपी बनाता है तो कई बार एक फोटोकॉपी पहली वाली से थोड़ी अलग हो जाती है। इसे इसका नया वेरिएंट कहा जाता है। वेरिएंट्स को दो कैटेगरी में बाँटा गया है, पहला है वेरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट और दूसरा है वेरिएंट ऑफ कंसर्न। साउथ अफ्रीका वाले कोरोना वेरिएंट को ज्‍यादा संक्रामक और घातक माना जा रहा है।

इस वैरिएंट को लेकर पूरी दुनिया सतर्क है। भारत सरकार ने भी सभी राज्यों को मुस्तैद रहने के लिए कहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड के नए वैरिएंट से प्रभावित मुल्कों से आ रहे लोगों की स्क्रीनिंग के निर्देश जारी किए। भारत आने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की कोरोना जाँच कराई जाएगी। हाल ही में वीजा पाबंदी में ढील और इंटरनैशल ट्रैवल में छूट दी गई थी, ऐसे में इसको लेकर खास सतर्कता बरती जा रही है। रैपिड टेस्टिंग पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है।

लगातार म्यूटेट हो रहे इस वैरिएंट ने WHO के साथ वैज्ञानिकों की भी टेंशन बढ़ा दी है। 30 से अधिक बार म्यूटेशन यानी रूप बदलना सबसे खतरे की बात है। दूसरी लहर में डेल्टा और डेल्टा प्लस वैरिएंट इसी तरह म्यूटेट होकर जानलेवा साबित हुआ था। सबसे चिंता की बात यह है कि मौजूदा वैक्सीन इस वैरिएंट के खिलाफ कारगर है या नहीं, इसकी स्टडी की जा रही है। इसमें वक्त लग सकता है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि तब तक यह वैरिएंट कहर ना बरपाना शुरू कर दे।

क्या है केंद्र सरकार की तैयारी?

सरकार के निर्देश के अनुसार जो भी लोग इन देशों से भारत आएँगे, उन्हें एक सख्त स्क्रीनिंग से गुजरना पड़ेगा। ये सब इसलिए होगा क्योंकि अफ्रीका के उन देशों को ‘एट रिस्क’ वाली कैटेगरी में रखे जाने की तैयारी है। सरकार की इस पूरी सतर्कता के पीछे वजह भी वाजिब है। दूसरी लहर में कोरोना वायरस ने भारत में जमकर कहर मचाया था और कोरोना डेल्टा वैरिएंट को इसका सबसे बड़ा जिम्मेदार माना गया। यूरोप और बाकी देशों में कहर बरपा रहे डेल्टा वैरिएंट के डर से कई भारतीय अपने मुल्क लौट आए थे। एयरपोर्ट पर कहीं ना कहीं टेस्टिंग में चूक हुई थी और फिर धीरे-धीरे इस वैरिएंट ने गदर काटा था। ऐसे में इस बार केंद्र सरकार विशेष सतर्कता बरत रही है।

WHO ने बुलाई बड़ी बैठक

इस बीच WHO की Technical Advisory Group ने अहम बैठक बुलाई है। WHO का कहना है कि इस वैरिएंट पर अभी और रिसर्च करने की जरूरत है। सबसे जरूरी है कि अधिक से अधिक लोगों को कोरोना वैक्सीन लगवाएँ, ताकि इससे मुकाबला किया जा सके।

इसके अलावा ये भी बताया गया है कि कोरोना के इस वैरिएंट को भी एक ग्रीक नाम दिया जाएगा। जैसे डेल्टा, एल्फा नाम रखे गए हैं, साउथ अफ्रीका वैरिएंट को भी एक नाम दिया जाएगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वैरिएंट में मल्टी म्यूटेशंस की ताकत है, इसलिए यह चिंता की बात है। अब इसकी भी जाँच हो रही है कि कोविड वैक्सीन इस वैरिएंट के खिलाफ कितना कारगर है।

यह है चिंता की सबसे बड़ी बात

इस नए वैरिएंट को लेकर ज्यादा चिंता इसलिए भी है क्योंकि अभी तक ये नहीं पता है कि ये कितनी तेजी से फैल सकता है। जो जानकारी सामने आई है वो सिर्फ इस वैरिएंट के म्यूटेशन को लेकर है। KRISP की डायरेक्टर De Oliveira बताती हैं कि इस नए वैरिएंट के कई असाधारण म्यूटेशन देखने को मिले हैं। उनके मुताबिक अब तक 30 से ज्यादा म्यूटेशन दिख चुके हैं। दूसरे वैरिएंट की तुलना मे ये ज्यादा चिंता बढ़ाने वाला दिख रहा है।

डायरेक्टर ने इस बात पर भी जोर दिया है कि अभी भी वैक्सीन ही कोरोना के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। ये नहीं पता है कि वैक्सीन नए वैरिएंट पर कितनी असरदार है, लेकिन अभी दुनिया के सामने ज्यादा विकल्प नहीं हैं। इस वैरिएंट के खिलाफ दूसरे मुल्कों ने भी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

कोरोना के नए वेरिएंट से शेयर बाजार धड़ाम

इससे शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली है। इससे निवेशकों को नुकसान हुआ। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बिकवाली से सेंसेक्स 1687.94 अंकों (2.87 फीसदी) की भारी गिरावट के साथ 57,107.15 पर बंद हुआ। निफ्टी की बात करें, तो यह 509.80 अंक यानी 2.91 फीसदी लुढ़का और 17,026.45 के स्तर पर बंद हुआ। इससे निवेशकों को 7.5 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 722.43 अंक (1.23 फीसदी) नीचे 58,072.66 पर खुला था। वहीं एनएसई का निफ्टी 223.90 अंकों या 1.28 फीसदी की गिरावट के साथ 17,312.40 पर खुला था।

ब्रिटेन और इजरायल ने उठाए ये कदम

ब्रिटेन और इजरायल ने साउथ अफ्रीका, बोत्सवाना और चार अन्य अफ्रीकी देशों से फ्लाइट पर पाबंदी लगा दी है। ऑस्ट्रेलिया ने भी इन देशों से आ रहे यात्रियों को लेकर नियम कड़े कर दिए हैं।

बेंगलुरू समेत कर्नाटक के कई जिलों में सुनाई दी रहस्यमयी आवाज, घर की खिड़कियाँ हिलीं: सुपर सोनिक बूम की आशंका

कर्नाटक के बेंगलुरू समेत कई जिलों में शुक्रवार (26 नवंबर 2021) की दोपहर रहस्मयी तरीके से बहुत ही तेज आवाज सुनाई दी। इसके बाद चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल उत्पन्न हो गया। इस घटना को लेकर राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र (केएसएनडीएमसी) ने बताया कि फिलहाल कहीं पर भूकंप के कोई संकेत नहीं नजर आ रहे हैं। वहीं पुलिस ने इसे सुपरसोनिक बूम करार दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरू में यह घटना सुबह 11.50 से 12.15 बजे के बीच हेमीगेपुरा, केंगेरी, ज्ञानभारती, राजराजेश्वरी नगर और कग्गलीपुरा में हुई। वहाँ के लोगों ने तेज आवाज के झटके को महसूस किया।

इस घटना को लेकर KSNDMC के निदेशक ने एक बयान जारी किया। इसमें कहा गया था, “हेमीगेपुरा, केंगेरी, ज्ञानभारती, राजराजेश्वरी नगर और कागलीपुरा व बेंगलुरु के स्थानीय निवासियों को आज 26 नवंबर 2021 को सुबह 11.50 बजे से दोपहर 12.15 बजे के बीच हल्के कंपन और तेज साउंड सुनाई दिया। उस अवधि के दौरान किसी भी तरह के भूकंपीय संकेतों को जानने के लिए हमारी भूकंपीय वेधशालाओं से डेटा का विश्लेषण किया गया था। सीस्मोग्राफ स्थानीय झटके / भूकंप के कोई संकेत नहीं दिखाते हैं।”

घटना के बाद कुछ लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए हालात के बारे में बात की। कुछ उपयोगकर्ताओं ने कहा कि दरवाजे और खिड़कियाँ काँपने लगे थे। लोगों ने यह भी सवाल किया कि क्या यह एक और सोनिक बूम था।

गौरतलब है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब बेंगलुरू में इस तरह की रहस्यमयी आवाज सुनने को मिली है। इससे पहले इसी साल जुलाई में भी दक्षिण बेंगलुरू में रहस्यमयी तरीके से तेज आवाज को सुना गया था। वह आवाज इतनी तेज थी के लोगों के घरों के खिड़की के शीशे तक टूट गए थे। उससे पहले पिछले साल मई 2020 में भी बेंगलुरू में इसी तरह की आवाज सुनाई दी थी। काफी समय के बाद पता चला कि यह रहस्यमयी आवाज भारतीय वायुसेना के परीक्षण की उड़ान थी। इस दौरान फाइटर प्लेन ने आवाज की गति से भी तेज रफ्तार से उड़ान भरी थी, जिससे ऐसी आवाज उत्पन्न हुई थी।

2 दिसंबर को नातिन की शादी है, कॉन्ग्रेस नहीं दे रही किराया: थक-हार कर बुजुर्ग ने पुलिस से लगाई फरियाद

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक बुजुर्ग ने किराए के लिए पुलिस से फरियाद लगाई है। राजमन राय का कहना है कि 2019 में कॉन्ग्रेस ने उनका मकान कार्यालय बनाने के लिए किराए पर लिया था। लेकिन कई महीनों से किराया नहीं मिलने के कारण बकाया राशि करीब तीन लाख 90 हजार रुपए हो गया है।

शिकायतकर्ता के अनुसार 2 दिसंबर को उनकी नातिन की शादी होनी है। इसके बावजूद कॉन्ग्रेस नेता उनकी गुहार नहीं सुन रहे हैं। उनकी बातों से ऐसा लगता है कि किराया देने की उनकी नीयत नहीं है। राजमन राय के अनुसार उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष अजय सिंह लल्लू के कहने पर अपना मकान पार्टी को किराए पर दिया था। राजघाट थाने में दी गई अपनी शिकायत में उन्होंने लल्लू और गोरखपुर की जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान को आरोपित किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जुबानी विवाद से शुरू हो कर अब यह मामला पुलिस तक जा पहुँचा है। इंस्पेक्टर राजघाट रणधीर मिश्रा ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। पीड़ित के अनुसार उन्होंने अपना मकान गोरखपुर की कॉन्ग्रेस जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान को 15 हजार रुपए प्रतिमाह के भाड़े पर दिया था। लेकिन, निर्मला पासवान ने राजमन राय के आरोपों को नकार दिया है। उनका कहना है कि किराए का कोई मामला नहीं है।

वहीं, राय का कहना है कि कॉन्ग्रेस की जिलाध्यक्ष अब एग्रीमेंट नहीं होने की बात कह रही हैं। मैंने उन्हें विश्वास पर अपना मकान दिया था। UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी ने पीड़ित का वीडियो राहुल गाँधी को ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है, “गोरखपुर के बुजुर्ग राजमन राय जी का किराया मत मारिए, दे दीजिए, नैतिकता नाम की कोई चीज़ बची है?”

पीड़ित मकान मालिक का नाम राजमन राय है। यह मकान गोरखपुर के टीपी नगर में स्थित है। राजमन राय के मुताबिक 25 अक्टूबर 2019 को निर्मला पासवान ने उनसे लोकसभा चुनाव तक के लिए कार्यालय खोलने के लिए मकान माँगा था। सचिन जायसवाल और अरुण शुक्ल के आगे 15 हजार रुपए प्रति माह भाड़ा देना तय हुआ था। जब उन्होंने गारंटी माँगी तब निर्मला पासवान ने प्रदेश अध्यक्ष अजय लल्लू से फोन पर बात करा दी थी। लगभग माह भर पहले प्रियंका गाँधी की रैली के बाद राय ने किराया नहीं मिलने के कारण इस दफ्तर पर ताला लगा दिया था। कार्यालय का सामान अपने कब्ज़े में लेते हुए कहा था कि किराया मिलने पर ही लौटाएँगे।

इन आरोपों पर कॉन्ग्रेस की जिलाध्यक्ष का कहना है कि उन्हें अपने खिलाफ तहरीर दिए जाने की जानकारी नहीं है। वे पुलिस जाँच में पूरा सहयोग करने की बात कह रहीं। उनका कहना है कि मकान मालिक के साथ कोई एग्रीमेंट नहीं हुआ था। ऐसे में उन पर आरोप क्यों लग रहा है ये उनकी समझ से परे है।

‘मुस्लिमों में योग गुनाह, मौलवी फतवा निकाल देगा’: सूर्य नमस्कार का Video शेयर कर ट्रोल हुईं करीना कपूर

बॉलीवुड एक्‍ट्रेस करीना कपूर अपने दूसरे बच्‍चे के जन्‍म के बाद अपनी फिटनेस के लिए जमकर वर्कआउट कर रही हैं। वजन घटाने और फिट रहने के लिए करीना ने 108 बार सूर्य नमस्‍कार कर रही हैं। करीना ने सूर्य नमस्‍कार करते हुए अपना वीडियो शेयर किया।

वीडियो में करीना अपने घर पर सूर्य नमस्कार करती नजर आ रही हैं। उन्होंने ब्लैक पैंट के साथ पिंक क्रॉप टॉप पहना हुआ है और उनके बाल करीने से बँधे हुए हैं। उन्होंने 108 बार सूर्य नमस्कार किया। वीडियो को शेयर करते हुए, करीना ने लिखा, “108 बार सूर्य नमस्कार किया। मैं आज रात पंपकिन पाई खाने के लिए तैयार हूँ।”

वीडियो पर कमेंट कर कई यूजर्स ने उनकी तारीफ की है, तो कुछ ने उन्हें धर्म की वजह से ट्रोल किया है। एक यूजर लिखा, “मुस्लिम में योग करना गुनाह है। मत करो खुले में, वरना कोई मौलवी फतवा निकाल देगा।” किसी को उनके सूर्य नमस्कार में खामी नजर आई तो किसी ने 108 बार सूर्य नमस्कार करने पर सवाल उठाए। वहीं कुछ यूसर्ज उनको ट्रोल करते हुए सूर्य नमस्‍कार ना करने की सलाह दे रहे हैं।

साभार: Kareena kapoor instagram

एक अन्य ने लिखा कि भाई अब फतवा जारी होगा इसके लिए।

साभार: Kareena kapoor instagram
साभार: Kareena kapoor instagram

एक यूजर ने लिखा कि मुस्लिम दिन में पाँच बार नमाज पढ़ते हैं। हमें ये सब करने की जरूरत नहीं है।

साभार: Kareena kapoor instagram
साभार: Kareena kapoor instagram
साभार: Kareena kapoor instagram
साभार: Kareena kapoor instagram

करीना ने इंस्टाग्राम पर योग के पोज में अपनी एक तस्वीर भी शेयर की है। फोटो के कैप्शन में लिखा है, “कभी इतना बेहतर महसूस नहीं किया।” वहीं काम की बात करें, तो करीना अगली बार अद्वैत चंदन की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ में आमिर खान के साथ दिखाई देंगी।

यह फिल्म टॉम हैंक्स और रॉबिन राइट के अभिनय से सजी 1994 की हॉलीवुड फिल्म ‘फॉरेस्ट गंप’ की हिंदी रीमेक है। आमिर और करीना की फिल्म कोरोना महामारी के कारण देरी से रिलीज हो रही है। यह फिल्म बैसाखी के मौके पर 14 अप्रैल 2022 को रिलीज होगी। पहले, फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ को क्रिसमस 2020 के मौके पर रिलीज करने की योजना थी।

करीना कपूर खान ने प्रेग्नेंसी पर एक किताब भी रिलीज की थी, जिसमें उन्होंने अपनी पहली और दूसरी प्रेग्नेंसी के बारे में लोगों को बताया है। बेबो ने 16 अक्टूबर 2012 को सैफ अली खान से शादी की थी। इस कपल के दो बेटे हैं – तैमूर अली खान और जहाँगीर अली खान।

‘चाचा (लखवी) ने कहा था जब तक जिंदा रहना मारते रहना’: पढ़िए नार्को टेस्ट में कसाब से क्या हुए थे सवाल, क्या दिया था जवाब

आज मुंबई के दुर्भाग्यपूर्ण आतंकी हमले की 13वीं बरसी है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में साल 2008 में आज ही के दिन यानी 26 नवंबर को पाकिस्तान से समंदर के जरिए देश में घुसे लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने हमला कर 60 घंटे से अधिक समय तक मुंबई में आतंक का खेल खेला। इस हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 18 सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे।

इस हमले को अंजाम देने वाले 9 आतंकियों को ढेर कर दिया गया, लेकिन एक आतंकी आमिर अजमल कसाब को जिंदा पड़ लिया गया। इस वारदात का सच उगलवाने के लिए जब उसका नार्को टेस्ट किया गया तो पता चला कि पाकिस्तान में बैठे उसके आका उसके जैसे गरीब परिवार के लोगों का ब्रेनवॉश कर इस्लामिक जिहाद की आग में झोंक देते हैं।

आइए पढ़ते हैं आमिर अजमल कसाब ने नार्को टेस्ट के दौरान क्या कहा था:-

प्रश्न: चाचा (जकी-उर-रहमान) किस गाँव के रहने वाला है?

उत्तर: मुझे नहीं पता कि वह कहाँ रहता है, लेकिन उसका अपना स्पेशल ऑफिस है। वह वहीं से आता था। इसके बारे में वह किसी को नहीं बताता था।

प्रश्न: तुम्हें मुंबई जाने के लिए किसने तैयार किया?

उत्तर: मुझे मेरे अब्बू ने बोला था। उन्होंने मुझसे कहा, “हम बहुत गरीब हैं, तुम भी दूसरों की तरह ही पैसा कमाओगे। यह मुश्किल नहीं है। हमें पैसे मिलेंगे और हमारी गरीबी दूर हो जाएगी। तुम्हारे भाई-बहनों की भी शादी होगी। तुम भी दूसरों की तरह खुश रहोगे।”

प्रश्न: तुम्हारे परिवार में कौन-कौन हैं?

उत्तर: अम्मी, खाला (बहन)।

प्रश्न: तुम्हारी अम्मी का क्या नाम है?

उत्तर: नूर इलाही, वो करीब 40 साल की हैं।

प्रश्न: वो क्या करती हैं?

उत्तर: वो घरेलू औरत हैं।

प्रश्न: तुम्हारे अब्बू क्या करते हैं?

उत्तर: वह लाहौर में काम करते हैं। उनका नाम आमिर शाबान कसाब है। उनकी उम्र करीब 45 साल है। वह लाहौर में फेरी लगाने का काम करते हैं।

प्रश्न: तुम कितने भाई हो?

उत्तर: हम तीन भाई हैं। पहला है अफजल कसाब और उसकी पत्नी का नाम साफिया है। वह 25 साल का है। उसके दो बच्चे हैं। एक लड़का और एक लड़की। लड़के का नाम आदिल है और वह 7 साल का है। लड़की हाल ही में पैदा हुई थी। मैं उसका नाम नहीं जानता।

प्रश्न: तुम्हें अपने भाई की बेटी का नाम क्यों नहीं पता?

उत्तर: मेरे भाई और उसकी पत्नी के बीच कुछ विवाद है। वे साथ नहीं रहते। वह अपनी अम्मी के साथ रहती है।

प्रश्न: तुमने कितनी पढ़ाई की है?

उत्तर: मैंने चौथी कक्षा तक पढ़ाई की है।

प्रश्न: तुमने स्कूल जाना कब बंद किया?

उत्तर: मैंने साल 2000 में स्कूल छोड़ दिया। तब से मैं मजदूर के रूप में काम कर रहा था। फिर मैं लाहौर गया और वहाँ भी मजदूरी करने लगा। मैं मोहल्ला तोहिदाबाद, गली नं. 54, मकान नं. 12 में रहता था।

प्रश्न: वहाँ कितने समय तक रहे?

उत्तर: 5 साल। 2000 से 2005 तक। मुझे मेरे काम के लिए अच्छी कीमत नहीं दी जा रही थी। मेरे अब्बू ने मुझे बताया कि हम बहुत गरीब हैं। उन्होंने ही मुझे लश्कर के आदमियों से मिलवाया था।

प्रश्न: तुम्हारे अब्बू (आमिर कसाब) और चाचा (लखवी) एक-दूसरे को कैसे जानते थे?

उत्तर: वे एक दूसरे को मेरे गाँव से जानते थे।

प्रश्न: क्या वो (लखवी) तुम्हारे गाँव गया था?

उत्तर: हाँ, मेरे गाँव के साथ ही दीपलपुर में भी उनका ऑफिस है। वे वहाँ पर लोगों को बुलाते थे, जैसे मेरे अब्बू को बुलाया था। उन्होंने मुझे बताया कि यह बहुत कठिन काम है। यह बहुत सम्मानजनक है। उन्होंने कहा था, बेटा तू जा, तेरी दरिद्रता दूर हो जाएगी। सम्मान मिलेगा।

प्रश्न: वह लोगों को कैसे बुलाता था?

उत्तर: वह लोगों को बताते थे कि यह एक जिहाद है। यह पाक और साहस वाला काम है। यह अल्लाह का काम है और इससे सम्मान मिलेगा। तुम खूब पैसे कमाओगे और तुम्हारी गरीबी दूर होगी।

प्रश्न: तुमने कितने दिनों तक ट्रेनिंग ली थी?

उत्तर: करीब तीन महीने।

प्रस्न: ट्रेनिंग कहाँ हुई?

उत्तर : मनसेहरा शहर के पास ही एक गाँव है बटाल, वहीं ट्रेनिंग हुई।

प्रश्न: कितने लोगों ने ट्रेनिंग ली थी?

उत्तर: ट्रेनिंग के दौरान हमारे बैच में करीब 24-25 लोग थे।

प्रश्न: आज का काम (26/11) खत्म करने के बाद कहाँ जाने वाले थे?

उत्तर: हमारा मरना तय था।

प्रश्न: कैसे?

उत्तर: वह (लखवी) कहते थे तुम स्वर्ग जाओगे। मैंने खुद से कहा यहाँ से भागो, ये सही नहीं लगता।

प्रश्न: तुमने कितने लोगों पर गोलियाँ चलाईं?

उत्तर: मुझे नहीं पता।

प्रस्न: तुमने कितनी गोलियाँ चलाईं?

उत्तर: पता नहीं। शायद दो-ढाई मैगजीन।

प्रश्न: तुमने कितने लोगों को मारा?

उत्तर: मुझे नहीं पता। बस गोली चलाता रहा।

प्रस्न: तुम्हें किसे मारने के लिए कहा गया था?

उत्तर: आम लोगों को।

प्रश्न: ऐसा करते रहने की तुम्हारी कब तक योजना थी?

उत्तर: वह (लखवी) कहा करते थे, जब तक तुम जीवित हो, मारते रहो, मारते रहो।

प्रश्न: कितने लोग साथ आए थे?

उत्तर: और भी थे, लेकिन हम दो लोगों के आँखों पर पट्टी बँधी थी। फिर हमें नाव से उतरने को कहा गया।

प्रश्न: भारत में तुम्हारा साथ कौन दे रहा था?

उत्तर: मुझे नहीं पता। उन्होंने हमें नहीं बताया।

प्रश्न: तो तुम सभी यहाँ जिहाद के लिए आए थे?

उत्तर: (रोते हुए) क्या जिहाद साहब!

प्रश्न: जिन लोगों की मौत हुई वो भी तुम्हारी तरह ही गरीब थे? तुम्हारे जैसे ही लोग मरे?

उत्तर: (रोते हुए) हाँ। अल्लाह मुझे कभी माफ नहीं करेंगे।

प्रश्न: इससे पहले तुमने कहाँ पर हमला किया था?

उत्तर: कहीं नहीं, यह मेरा पहला ऑपरेशन है।

प्रस्न: उन लोगों ने तुम्हारे लिए क्या किया है?

उत्तर: उन्होंने मेरे परिवार को एक बड़ी रकम देने का वादा किया था। वे शायद मेरे परिवार को लाखों रुपए देंगे।

प्रश्न: पैसा कौन देगा?

उत्तर: चाचा पैसे देंगे। उनकी लंबी दाढ़ी है। उनकी उम्र करीब 40-45 साल है। वह जिहादी हैं। वो सोवियत सेना के खिलाफ लड़ने के लिए अफगानिस्तान गए थे।

प्रश्न: उसने तुम्हें क्या बताया?

उत्तर: वो बहुत व्यस्त रहते हैं, लेकिन जब भी आते थे तकरीर देते थे। वो हमसे कहते थे, तुम मुसलमान हो, ये इंसानियत नहीं है। वो लोग तुम्हारे लोगों को मार रहे हैं। उन्होंने ही तुम्हें गरीब बना दिया है।

प्रश्न: जिहाद क्या है? उन्होंने तुम्हें जिहाद के बारे में क्या बताया था?

उत्तर: मुझे नहीं पता। उन्होंने हमें नहीं बताया। उन्होंने हमें केवल बताया था कि यह जन्नत का रास्ता है।

प्रश्न: निर्दोषों को मारने के लिए पैसों के अलावा और क्या कारण था?

उत्तर: कुछ नहीं सर, गरीबी सबसे बड़ा कारण है। अगर किसी व्यक्ति के पास खाने के लिए कुछ नहीं है, पहनने के लिए कुछ नहीं है तो वह कुछ भी कर सकता है।

प्रश्न: तुम्हारी ट्रेनिंग कितने दिनों तक चली?

उत्तर: सबसे पहले नए रंगरूटों को एक महीने की ट्रेनिंग दी जाती थी। फिर परिपक्व लड़कों के लिए अधिक प्रशिक्षण होता है। फिर उन्हें और तीन महीने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।

प्रश्न: और?

उत्तर: वो तैयार हैं। इसके बाद कहा जाता था, अब जाओ, मारो। इतना ही।

प्रश्न: तुम्हारी ट्रेनिंग एक साल पहले हुई थी। तुमने एक साल तक क्या किया?

उत्तर: अंत में उसने मुझे कराची भेज दिया। मछली पकड़ने में इस्तेमाल होने वाले लॉन्च में मैं कराची आया था। मुझे लगा कि अब मुझे नौकरी मिल गई है। मुझे ऐसा कुछ नहीं पता था। पैसा घर भेजा जा रहा था। कोई तनाव नहीं था। अब्बू कहते थे बेटा बहुत अच्छा काम करेगा? उन्हें इसकी जरूरत है।

प्रश्न: निर्दोष लोगों की हत्या के अपराध के बारे में क्या?

उत्तर: उन्होंने कहा कि अगर तुम्हें पैसा और प्रसिद्धि चाहिए तो कुछ करना होगा।

प्रश्न: मुंबई कैसे पहुँचे?

उत्तर: हम अजीजाबाद के पास ट्रॉलर में चढ़े थे। हमें बोहरो से एक कार में बोर्डिंग पॉइंट पर लाया गया।

प्रश्न: हमले की योजना कब बनाई गई थी?

उत्तर: हमले की प्लानिंग 26 नवंबर 2008 से एक महीने पहले बनी थी।

प्रश्न: मीटिंग के बारे में बताओ?

उत्तर: इस्माइल और मुझे बुलाया गया था। हमें बताया गया कि सम्मानजनक काम का वक्त आ गया है। मुंबई में हमें हमारे टारगेट की सीडी दिखाई गई थी।

प्रश्न: सीडी में क्या था?

उत्तर: उन्होंने हमें वह रास्ता दिखाया, जिससे हमें जाना था। हमें आजाद मैदान के रास्ते वीटी स्टेशन (सीएसटी स्टेशन) की तस्वीरें दिखाई गईं। हमें बताया गया कि ताज होटल रास्ते में होगा।

प्रश्न: इस्माइल का क्या काम था?

उत्तर: अगर रास्ते में कोई समस्या थी तो उसे इसका ध्यान रखना चाहिए था, क्योंकि वह हम दोनों में बड़ा था।

प्रश्न: मुंबई पर हमला करने वाले सभी आतंकवादियों के नाम बताओ?

उत्तर: फरदुल्लाह, काशा, उमर, इस्माइल, अब्दुर रहमान सीनियर, सोहैब, अब्दुर रहमान जूनियर, ओमैर, अली और मैं (आमिर अजमल कसाब)।

प्रश्न: तुम कब हमला करने वाले थे? यही तारीख चुनने के पीछे क्या कारण था?

उत्तर: हमें हमले की तारीख और समय दिया गया था। अगर हम सुबह पहुँचते हैं तो उन्होंने हमें 10 से 11 के बीच हमला करने के लिए कहा था। अगर हम रात में पहुँचते तो रात 11 बजे तक हमला कर देना था।

प्रश्न: 11 के बाद क्या?

उत्तर: कुछ नहीं, हम मरने वाले थे।

प्रश्न: तुमने मुंबई में मिशन कब शुरू किया?

उत्तर: मुझे याद नहीं है, लेकिन 23 या 24 नवंबर होना चाहिए। हम सभी को एक महीने से अधिक समय तक अजीजाबाद में एक सीक्रेट जगह पर रखा गया था। ऐसा मिशन को गुप्त रखने के लिए किया गया था।

प्रश्न: पाकिस्तान से जिस ट्रॉलर पर सवार होकर आए उसका नाम क्या था?

उत्तर: यह अल-हुसैनी था और इसके मालिक चाचा (जकी-उर-रहमान लखवी) थे।

प्रश्न: वो (चाचा) कहाँ रहते हैं?

उत्तर: मनसेहरा। हम केवल उनके ऑफिस के बारे में जानते थे। वो ट्रेनिंग सेंटर के हेड थे।

प्रश्न: चाचा तुम्हारे साथ कितनी दूर गए थे?

उत्तर: वो तब तक हमारे ही साथ थे, जब तक हम दूसरी नाव पर नहीं चढ़े। यह पाकिस्तान में समुद्र के बीच में कहीं था।

प्रश्न: क्या भारतीय ट्रॉलर का ड्राइवर पाकिस्तानी था?

उत्तर: नहीं, वह एक भारतीय था। उसने किसी से बात नहीं की। उसका स्वभाव काफी गंभीर था।

प्रश्न: तुम्हें किसे मारने का आदेश दिया गया था?

उत्तर: कोई खास नहीं। सिर्फ आम लोग। जब हम वहाँ पहुँचे तो हमें लगा कि यह काम बहुत ही मुश्किल है, इसलिए हमने भागने का फैसला किया।

प्रश्न: पुलिस की गाड़ी तुम्हें कैसे मिली?

उत्तर: पास में ही गाड़ी खड़ी थी। गाड़ी के अंदर मौजूद पुलिस अधिकारी हम पर गोली चला रहे थे। मैं नीचे गिर गया, लेकिन इस्माइल ने उनकी हत्या कर दी और मुझे गाड़ी के अंदर खींच लिया।

प्रश्न: तुमसे किस चीज की माँग करने को कहा गया था?

उत्तर: चाचा द्वारा माँग की जानी थी।

प्रश्न: तुम कितने हैंडग्रेनेड्स ले जा रहे थे?

उत्तर: हम सभी 8 हैंड ग्रेनेड ले जा रहे थे। इस्माइल के पास भी 8 ग्रेनेड थे। सभी को 8 ग्रेनेड दिए गए। केवल एक टीम को अधिक गोला-बारूद दिया गया। अब्दुर रहमान और अली की टीम के पास ज्यादा गोलियाँ लगी थीं।

टिकैत का ऐलान- दिल्ली की सीमा से नहीं हटेंगे, जारी रहेगा आंदोलन: टिकरी-सिंघु बॉर्डर पर बढ़ा ‘किसानों’ का जमावड़ा, पिज्जा पार्टी भी

किसान आंदोलन को आज एक साल पूरे हो गए। नए कृषि कानूनों की वापसी की प्रक्रिया भी शुरू हो गई, लेकिन MSP समेत दूसरी कई माँगों के नाम पर किसान नेता बॉर्डर और महापंचायत बुलाकर शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं। टीकरी बॉर्डर के पास सेक्टर-13 में भी किसान महापंचायत हो रही है। इसके अलावा सिंघु बॉर्डर पर भी किसानों की काफी भीड़ है। यहाँ पिज्जा पार्टी करके आंदोलन की पहली सालगिरह मनाई जा रही है।

आंदोलन के एक साल पूरे होने के पर भी किसानों की वापसी के आसार नजर नहीं आ रहे हैं लगातार किसान नेताओं की डिमांड बढ़ रही है। राकेश टिकैत ने कहा, “दिल्ली की सीमाओं पर उन्हें बैठे हुए 1 साल हो गया है। सरकार ने तीनों ‘काले कानूनों’ को वापस लेने की घोषणा भले ही कर दी है, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) समेत कई अन्य मुद्दे पर सरकार ने मौन धारण किया हुआ है। सरकार इस मुद्दों पर किसानों से कोई बात नहीं कर रही है। जब तक किसानों की सभी माँगे पूरी नहीं होतीं तब तक किसान दिल्ली की सीमाओं से हटने वाले नहीं हैं।”

टिकैत ने अपने आगे के प्लान के बारे में बताते हुए कहा, “27 नवंबर को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक है और उस बैठक में सभी मुद्दों को रखा जाएगा जिसके बाद किसानों के आंदोलन की आगे की रणनीति तय होगी। 29 नवंबर को किसान संसद के सामने ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे और अब किसान शांत बैठने वाले नहीं हैं क्योंकि सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान भले कर दिया हो, लेकिन किसान शुरू से एमएससी पर गारंटी कानून माँग रहे थे, जिसको लेकर सरकार ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है, इसलिए किसानों का आंदोलन अभी खत्म नहीं होगा।”

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार को जो खुला पत्र लिखा गया था उसका भी जवाब अभी तक नहीं आया है। यह सभी मुद्दे संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में उठाए जाएँगे और संयुक्त किसान मोर्चा तय करेगा कि किसानों का आंदोलन आगे क्या रूप लेगा। उन्होंने बताया कि किसान कृषि कानूनों के खिलाफ एक साल से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। ठंडी, गर्मी और बरसात में एक साल से खुले आसमान के नीचे धरना -प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान करीब 750 आंदोलनकारी किसान शहीद हो चुके हैं। इन मुद्दों को लेकर दिल्ली कि चारों सीमाओं पर हजारों की संख्या में जमा हो रहे हैं। किसानों से विचार-विमर्श के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।

बता दें कि इधर महापंचायत को लेकर पंजाब से बड़ी संख्या में किसान दिल्ली की सीमाओं पर फिर से इकठ्ठा हो रहे हैं। जिसके मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई है। पैरामिलिट्री के जवानों की तादाद भी अधिक हुई है।

धर्मांतरण जिहाद पर TV शो इस्लामोफोबिया? न्यूज नेशन को NBDSA ने सारे वीडियो हटाने के दिए आदेश

न्यूज ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBDSA) को न्यूज नेशन टीवी के शो ‘कन्वर्ज़न जिहाद’ (‘Conversion Jihad’) के खिलाफ 6 नवंबर को एक शिकायत मिली। इसके बाद 15 नवंबर को NBDSA ने एक आदेश पारित किया, जिसमें उसने ब्रॉडकास्टर से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि अगर उसका एंकर ‘निष्पक्ष’ नहीं रहता है तो उस पर कर्रवाई करे। NBDSA ने चैनल को कार्रवाई करने और कार्यक्रम के संचालन के लिए अपने एंकरों को उचित तरीके से प्रशिक्षित करने का निर्देश दिया।

इसके अलावा, एनबीडीएसए ने निर्देश दिया कि न्यूज नेशन इस कार्यक्रम के सभी वीडियो 7 दिनों के भीतर सभी प्लेटफॉर्म से हटा ले। यदि वीडियो उपलब्ध रहते हैं तो चैनल को लिखित रूप में इसके बारे में NBDSA को सूचित करना होंगे। याद दिला दें कि न्यूज नेशनने ‘कन्वर्ज़न जिहाद’ शो के लिए बिना शर्त माफी जारी किया था। 

एनबीडीएसए के चेयरपर्सन जस्टिस (रिटायर्ड) एके सीकरी ने कहा कि किसी भी न्यूज को प्रसारित करते समय आचार संहिता, प्रसारण मानक, सेल्फ-रेगुलेशन, मौलिक सिद्धांत और विशिष्ट दिशा-निर्देशों और निष्पक्षता का पालन किया जाना चाहिए।

एनबीडीएसए ने एंकर दीपक चौरसिया द्वारा शो के दौरान दिए गए कुछ बयानों पर भी नाराजगी जताई। एनबीडीएसए ने जिन कुछ बयानों का विरोध किया, उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

1. “मेमचंद जिंदा है जमात शर्मिंदा है”

2. “500- हिंदू कैसे बनाए मुस्लिम?”

3. “क्या मेवात पाकिस्तान बन गया?”

सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एके सीकरी ने कहा कि इस तरह के बयान सिद्धांतों और दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हैं। बता दें कि YouTube पर NewsNation का वीडियो अब “प्राइवेट” है और इसे आम जनता के लिए ऑफ एयर कर दिया गया है।

न्यूज नेशन टीवी और ‘कन्वर्शन जिहाद’ शो के खिलाफ क्या थी शिकायत

CJP (सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस) नामक एक एनजीओ ने न्यूज नेशन टीवी के “कन्वर्ज़न जिहाद” शो को लेकर एनबीएसडीए में शिकायत दर्ज कराई थी। इस शो की एंकरिंग दीपक चौरसिया ने की थी। शिकायत में कहा गया कि एंकर ने मौलाना सैयद उल कादरी को ‘झूठ का कारखाना’ बताया था और पूरे मुस्लिम समुदाय की ओर से उन्हें माफी माँगने के लिए कहा था।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि जमात द्वारा गैर-धार्मिक और देश विरोधी गतिविधि को अंजाम देने की बात कहकर इस दौरान “इस्लामोफोबिक” विचारों को बढ़ावा देने का “प्रयास” किया गया। एनजीओ ने दावा किया कि इस तरह के कार्यक्रमों को प्रसारित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि वे भारत की “समग्र और विविधता” की संस्कृति को नुकसान पहुँचा सकते हैं और इससे हिंसा हो सकती है।

इस पर न्यूज नेशन टीवी ने कहा था कि कार्यक्रम में मेहमानों द्वारा दिए गए बयानों के लिए चैनल या एंकर को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। हालाँकि, चैनल ने कहा कि इससे अगर किसी को ठेस पहुँची है तो उन्होंने बिना शर्त माफी माँग रहा है। माफी माँगने के बावजूद NBDSA ने इसे ‘इस्लामोफोबिया’ बताते हुए शो के वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने का आदेश दिया।

घोड़ी थी ही नहीं, दावा- दलित दूल्हों को दबंगों ने घोड़ी पर बैठने नहीं दिया: मीडिया ‘एजेंडा’ की राजस्थान पुलिस ने खोली पोल

पिछले दिनों मेनस्ट्रीम मीडिया में राजस्थान के बूँदी जिले की एक खबर आई थी। इन रिपोर्टों में दावा किया गया था कि दलित समुदाय के दूल्हों को घोड़ी पर नहीं बैठने दिया गया। राजस्थान पुलिस ने एक बयान जारी कर इन खबरों को गलत बताया है। पुलिस के अनुसार दूल्हों के लिए वधू पक्ष घोड़ी की व्यवस्था ही नहीं कर पाए थे।

मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि नीम का खेड़ा गाँव निवासी गणेश लाल मेघवाल की तीन बेटियों की शादी थी। बारात भीलवाड़ा जिले के 3 परिवारों से आई थी। जब दूल्हों को घोड़ियों पर बिठाकर तोरण द्वार पर ले जाने की तैयारी हो रही थी, तभी कुछ दबंग (गुर्जर बिरादरी) इकट्ठा हो गए और इसका विरोध किया। इसके बाद दूल्हे कार से ले जाए गए। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि दूल्हे मोटरसाइकिल पर ले जाए गए। इन रिपोर्टों के अनुसार दलितों के विरोध करने में माली समाज के लोग भी गुर्जर का साथ दे रहे थे।

पूरे मामले की हकीकत जानने से पहले जरा कुछ मीडिया रिपोर्टों पर गौर करिए। TV 9 भारतवर्ष ने लिखा, “पुलिस के सामने ही दबंगों की गुंडागर्दी। दलित दूल्हे को नहीं चढ़ने दिया घोड़ी, जबरदस्ती उतार कर बाइक से भेजा।”

TV 9

यूनीवार्ता ने भी’ ‘दबंगों ने नहीं होने दी 3 दलित दूल्हों की घुड़चढ़ी’ जैसा शीर्षक दिया।

इस खबर पर दैनिक भास्कर की हेडलाइन थी – विरोध के चलते घोड़ी पर नहीं बैठ पाए 3 दलित दूल्हे।

दैनिक भास्कर

हिंदुस्तान ने हेडलाइन दी- दबंगों ने दलित दूल्हों को घोड़ी पर चढ़कर बारात नहीं ले जाने दी।

हिंदुस्तान

पत्रिका की खबर के अनुसार राजस्थान में दलित दूल्हों को नहीं चढ़ने दिया गया घोड़ी। कार में बैठ कर आए 3 दूल्हे।

पत्रिका

नवभारत टाइम्स ने लिखा, ‘राजस्थान में दलित दूल्हों के शादी में घोड़ी पर बैठना आज भी मना।’

NBT

न्यूज़ ट्रैक ने लिखा- दबंगों की गुंडागर्दी के आगे पुलिस बनी मूकदर्शक! दलित दूल्हों को नहीं चढ़ने दिया घोड़ी, जबरदस्ती उतारकर बाइक से भेजा।’

न्यूज़ ट्रैक

इसी प्रकार की खबरें कुछ स्थानीय पोर्टलों ने भी प्रकाशित की थी। थोड़े ही समय में इस मामले को राजनैतिक तूल मिलने लगा। इस पर बयानबाजी शुरू हो गई।

दिलीप मंडल

इस मामले का सच राजस्थान पुलिस ने बतया है। राजस्थान की बूँदी पुलिस द्वारा जारी प्रेसनोट ने तमाम मीडिया संस्थानों के दावों को झुठला दिया है। पुलिस द्वारा 23 नवम्बर 2021 को जारी प्रेसनोट में कहा गया है कि कुछ समाचार पत्रों व सोशल मीडिया में 21 नवम्बर 2021 को गाँव नीम का खेड़ा में आई बारात के बारे में खबर छपी है कि उसमे किसी जाति विशेष के विरोध के चलते दलित दूल्हों को घोड़ी पर नहीं चढ़ने दिया गया। दूल्हे घोड़ी पर इसलिए नहीं बैठ पाए थे क्योंकि लड़की पक्ष वालों ने जहाँ से घोड़ी का इंतज़ाम किया था वहाँ घोड़ी उपलब्ध ही नहीं थी।

इसी के साथ पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नीम का खेड़ा गाँव में दलित दूल्हों को घोड़ी पर बैठने को ले कर कोई विवाद ही नहीं था। किसी भी पक्ष द्वारा पुलिस से शादी से पहले या शादी के बाद किसी भी प्रकार की कोई शिकायत भी नहीं की गई है। उसी गाँव के लोगों ने दूल्हों को गाड़ी में बिठाकर तोरण का कार्यक्रम पूरा करवाया। पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस मौजूद रही। शादी के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह से सामान्य रही।

इस मामले में ऑप इंडिया ने बूँदी जिले के सदर थाना प्रभारी से बात की। उन्होंने बताया की कि पुलिस कंट्रोल रूम पर ये सूचना थी कि नीम का खेड़ा गाँव की बारात में व्यवधान न हो इसके लिए फ़ोर्स भेजी जाए। मैं मौके पर गया। मैंने लड़की के पिता गणेश लाल मेघवाल से पूछा कि उन्हें किसी से कोई दिक्कत तो नहीं ? उन्होंने बताया कि मुझे कोई दिक्कत नहीं, सब सामान्य है। घोड़ी वहाँ थी ही नहीं। बारात के दौरान मैं वहाँ रुका रहा। किसी भी प्रकार का कोई भी विवाद नहीं हुआ, सब कुछ सामान्य रूप में बीता।

‘क्या आप कह रहे हैं कि हिंदू समूहों ने (गोधरा) ट्रेन जलाने की साजिश रची… हद है’: जकिया जाफरी की याचिका पर कोर्ट में एसआईटी

2002 के गुजरात दंगों की जाँच कर रही सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एसआईटी ने हिंदू समूहों द्वारा मुस्लिमों को फँसाने के लिए ट्रेन जलाने की योजना बनाने वाले आरोपों को ‘बेतुका’ करार दिया है। एसआईटी ने कहा है कि हिंदू समूहों द्वारा साबरमती एक्सप्रेस में एस-6 कोच को जलाने की योजना बनाने वाले दावे निराधार हैं

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, अदालत में एसआईटी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा, “आरोप है (कि) घटना से पहले, यानि 27 फरवरी से पहले हथियार इकठ्ठा होने शुरू हो गए थे। यह मेरे दिमाग को चकरा देता है। मान लीजिए कि मैं विहिप का कट्टर हिंदू सदस्य हूँ और मैं ट्रेन जलने की घटना की तारीख जाने बिना 25 फरवरी को हथियार रख रहा हूँ, इसका कोई मतलब नहीं है…।

अधिवक्ता रोहतगी ने आगे कहा, “या आप कह रहे हैं कि यह ट्रेन जलाने की भी साजिश रची गई थी? यह सही नहीं हो सकता। क्योंकि ट्रेन पाँच घंटे की देरी से चल रही थी और केवल दो मिनट के लिए रुकने वाली थी। वे नहीं जान सकते थे। यह बेतुका है। यहाँ जो कहा जा रहा है उसकी एक सीमा है।”

रोहतगी ने कहा, “या तो उन्हें पता था कि ट्रेन पाँच घंटे लेट होगी और दूसरा पक्ष हमला करेगा और उनके पास वापस हमला करने के लिए सामग्री होगी। यह वाइल्ड है।”

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि वामपंथी-इस्लामी समूहों द्वारा गोधरा ट्रेन जलाने की घटना को भी हिंदू समूहों द्वारा ही किया गया काम बताने और महिलाओं और बच्चों सहित 59 निर्दोष हिंदुओं को मारने वाले मुस्लिम दंगाइयों के अपराधों पर लीपापोती के अनगिनत प्रयास किए गए हैं।

जस्टिस एएम खानवलीकर, दिनेश माहेश्वरी और सीटी रविकुमार की बेंच गुजरात दंगों में मारे गए कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद अहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी की अपील पर सुनवाई कर रही थी।

5 अक्टूबर, 2017 को, गुजरात उच्च न्यायालय ने अहमदाबाद मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा था जिसमें एसआईटी द्वारा प्रस्तुत क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया था। एसआईटी ने गुजरात के पूर्व सीएम नरेंद्र मोदी और 63 अन्य को दंगों से जुड़े मामलों में क्लीन चिट दे दी थी।

अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि जकिया जाफरी ने 2006 में अपनी शिकायत दर्ज की थी, एक साल बाद, जब वह हाईकोर्ट गई, तब तक तीस्ता सीतलवाड़ शामिल हो गई थीं। उन्होंने याद दिलाया कि हाईकोर्ट ने पहले माना था कि सीतलवाड़ की कोई भूमिका नहीं थी। और वह इस मामले में प्रोसिडिंग जारी रखने की हकदार नहीं थीं। उन्होंने कहा कि श्रीमती जाफरी की शिकायतों की जाँच के लिए एसआईटी को सुप्रीम कोर्ट का निर्देश स्पष्ट और संरक्षित था।

रोहतगी ने आगे कहा, “जब तक मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश के खिलाफ विरोध याचिका दायर की गई थी, तब तक चीजें सीमा से बाहर हो गई थीं।” शिकायत 30-40 पन्नों की थी, विरोध 1200 पन्नों का था और अब कोर्ट के सामने 20,000 पन्नों से ज्यादा का रिकॉर्ड है।

रोहतगी ने कहा कि तीस्ता सीतलवाड़ का एनजीओ अब इसे आगे बढ़ा रहा है, जिसे श्रीमती जाफरी की शिकायत पर महज गौर करने का आदेश दिया गया था, इस धारणा के साथ कि गुलबर्ग सोसाइटी मामले में उनके पास कुछ बताने के लिए हो सकता है, जो अब तीस्ता सीतलवाड़ की भागीदारी से कुछ का कुछ और हो गया है।

जम्मू-कश्मीर: अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के सभी गुटों को UAPA के तहत बैन करेगी सरकार, टेरर फंडिंग पर कसेगी नकेल

जम्मू-कश्मीर में शांति व्यवस्था में खलल डालने और कट्टरता फैलाने में अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का अहम रोल रहा है। इसके कई नेताओं पर आतंकियों को धन मुहैया कराने का आरोप है। इसको देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार जल्द ही कश्मीरी अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के सभी गुटों को गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रतिबंधित कर सकती है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने कहा कि मोदी सरकार हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के सभी गुटों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला ले सकती है। इनमें मृत सैयद अली शाह गिलानी का गुट भी शामिल है। हुर्रियत के इन गुटों को सरकार UAPA की धारा 3(1) के तहत बैन करने की योजना पर काम कर रही है।

हाल ही में NIA के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर सरकार ने गृह मंत्रालय को हुर्रियत कॉन्फ्रेंस द्वारा राज्य में टेरर फंडिंग की जानकारी दी गई थी। इसके बाद केंद्रीय गृहमंत्री ने एनआईए और राज्य सरकार से इस मामले में और अधिक जानकारी साझा करने को कहा था। सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्रालय द्वारा माँगी गई जानकारी उसे सौंप दी गई है।

एक अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कई नेता बीते कुछ सालों में जेल में बंद हैं और जाँच एजेंसियाँ टेरर फंडिंग नेटवर्क को भेदने में कामयाब रही हैं। संगठन के सभी गुटों पर बैन से आतंकवाद से और अधिक प्रभावी तरीके से निपटा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि बैन से एजेंसियों को हुर्रियत सम्मेलन द्वारा किए जाने वाले सामुदायिक स्तर के फंड संग्रह पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। अलगाववादी संगठन बाद में उसी पैसे को पाकिस्तान की आईएसआई के निर्देश पर कश्मीर में आतंकियों को देती है।

अधिकारी ने आगे बताया कि यूएपीए के तहत बैन लगाने से टेरर फंडिंग के साथ ही हुर्रियत द्वारा जिन रास्तों से फंडिंग की जाती है, उसे भी रोका जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि हुर्रियत पाकिस्तान के कॉलेजों में अपने कोटे से मेडिकल सीटों की बिक्री करता है और उससे मिलने वाले पैसे को कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल करता है।

बैन लगाने के बाद हुर्रियत को अपने सभी कार्यालयों और बुनियादी ढाँचे को तोड़ना होगा। इसके अलावा उसके द्वारा बुलाए जाने वाले बंद और विरोध को अवैध हो जाएँगे। सरकार हुर्रियत के खिलाफ बैन करने का फैसला करने के बाद आधिकारिक राजपत्र में इसकी घोषणा करेगी। इसके बाद, इस फैसलों को यूएपीए के तहत गठित समिति द्वारा मंजूरी देनी होगी।