Home Blog Page 3205

‘Pak के विमानों को खदेड़ा, F-16 को मार गिराया’: ‘वीर चक्र’ से सम्मानित हुए अभिनंदन, बलिदानी मेजर ढौंढियाल को ‘शौर्य चक्र’

पाकिस्तान के साथ हवाई युद्ध में दुश्मन मुल्क के F-16 लड़ाकू विमान को मार गिराने वाले भारतीय वायुसेना के तत्कालीन विंग कमांडर (अब ग्रुप कैप्टन) अभिनंदन वर्तमान को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ‘वीर चक्र’ से सम्मानित किया है। सोमवार (22 नवंबर, 2021) को राष्ट्रपति भवन में हुए कार्यक्रम में उन्हें ये सम्मान दिया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उपस्थित थे। 27 फरवरी, 2019 और उसके बाद दिखाए गए पराक्रम के कारण उन्हें ये पुरस्कार मिला।

इस दौरान उद्घोषिका ने कहा, “शत्रु का मुकाबला करते हुए वीरता के लिए वीर चक्र। विंग कमांडर (अब ग्रुप कैप्टन) अभिनंदन वर्तमान। उड़ान – पायलट। उन्होंने 27 फरवरी, 2019 को वायुसेना स्टेशन श्रीनगर में ‘ऑपरेशनल रेडीनेस प्लेटफॉर्म’ पर तैनात थे। सुबह 9:55 बजे उन्नत हथियारों से लैस पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों को, जिनमें चौथी पीढ़ी के उन्नत F-16 तथा JF-17 को नियंत्रण रेखा की तरफ बढ़ते हुए देखा गया। 10 बजे आपको तुरंत शत्रु के वायुयानों को रोकने के लिए सन्देश दिया गया।”

अभिनंदन वर्तमान के बारे में कार्यक्रम में आगे बताया गया, “आपने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की परवाह न करते हुए पूरी निर्भीकता के साथ आगे बढ़े। असाधारण हवाई सूझबूझ और शत्रु की रणनीति की जानकारी होने का प्रदर्शन करते हुए आपने एयरबोर्न इंटरसेप्ट रडार से निम्न ऊँचाई के वायु क्षेत्र का निरीक्षण किया। आपने पाया कि दुश्मन का वायुयान भारतीय लड़ाकू इंटरसेप्टर वायुयान पर हमला करने के लिए घात लगा कर हमला करने के लिए निम्न ऊँचाई पर उड़ान भर रहा है।”

बताया गया कि इसके बाद अभिनंदन वर्तमान ने न सिर्फ अन्य पायलटों को इस खतरे के बारे में आगाह किया, बल्कि भारतीय सरजमीं पर अस्त्र गिरा रहे पाकिस्तानी वायुसेना के खिलाफ जवाबी रणनीति भी बनाई। इससे पाकिस्तानी वायुसेना के विमान तितर-बितर हो गए और उन्हें मुड़ कर वापस जाने को मजबूर होना पड़ा। इसके बाद अभिनंदन वर्तमान ने पाकिस्तानी वायुयानों का पीछा किया और उनके F-16 विमान को मार गिराया। लेकिन, इसके बाद दुश्मन मुल्क की BVR (बियॉन्ड विज़ुअल रेन्ज) मिसाइल इनके विमान से टकरा गई।

जानकारी दी गई कि इसके बाद अभिनंदन वर्तमान को पाकिस्तान की सीमा में उतरने के लिए बाध्य होना पड़ा। उद्घोषण में बताया गया, “एक युद्धबंदी के रूप में कैद होने के बावजूद आपने पूरे संयम, बहादुरी और गरिमापूर्ण तरीके से शत्रु के साथ पेश आते रहे। जब तक आपको 1 मार्च, 2019 को वापस सौंपा गया, तब तक आपने असाधारण दृढ़ता बनाई रखी। इससे सभी सशस्त्र बलों, खासकर भारतीय वायुसेना का मनोबल बढ़ा। इस प्रकार आपके अपने व्यक्तिगत सुरक्षा की परवाह न करते हुए शत्रु के सामने असाधारण साहस व शौर्य का प्रदर्शन किया।”

इसके अलावा मेजर विभूति शंकर ढौंढियाल को भी ‘शौर्य चक्र’ मरणोपरांत से सम्मानित किया गया, जिन्होंने 5 आतंकियों को मौत के घाट उतारा था। इस दौरान 200 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री भी जब्त हुई थी, जिससे एक बड़ा हमला टल गया था। उनकी पत्नी लेफ्टिनेंट निकिता कौल और माँ ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से ये सम्मान प्राप्त किया। पुलवामा हमले के बाद जम्मू कश्मीर में चले ऑपरेशन के दौरान वो बलिदान हो गए थे। पति के नक्शेकदम पर चलते हुए पत्नी निकिता ने भी दिसंबर 2019 में इलाहाबाद में वूमेन एंट्री स्कीम की परीक्षा दी और प्रशिक्षण के बाद सेना में शामिल हुईं।

मोतीलाल कॉलेज में मजार: साध्वी प्रज्ञा ने बताया- डरे हुए हैं छात्र और स्टाफ, भोपाल के केंद्रीय विद्यालय में मस्जिद का भी उठाया था मसला

भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा ने अब मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय (MVM) परिसर में मजार को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसके कारण छात्रों और स्टाफ के बीच भय व्याप्त होने की बात भी कही है। इससे पहले उन्होंने भोपाल के एक केंद्रीय स्कूल में अवैध मस्जिद होने और वहाँ नमाज के लिए जुटने वाली भीड़ की वजह से बच्चों के लिए उत्पन्न खतरे का मसला उठाया था।

सांसद ने कहा है कि MVM परिसर में मजार होने के कारण अनाधिकृत लोग कॉलेज परिसर में प्रवेश करते हैं। इससे वहाँ पढ़ने वाले स्टूडेंट्स और स्टाफ को खतरा है। इस मामले में सांसद ने भोपाल कलेक्टर और कमिश्नर को पत्र लिखकर कार्रवाई करने को कहा है।

सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कमिश्नर लिखे पत्र में कहा है कि एमवीएम के उत्तर-पूर्व दिशा में मजार बनी हुई है। मजार पर लोगों के अवैध और असमय प्रवेश होने से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय में लड़के एवं लड़कियाँ दोनों शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। कॉलेज परिसर में लोगों के अनाधिकृत प्रवेश के चलते स्टूडेंट्स और कॉलेज स्टाफ सुरक्षित नहीं है। स्टाफ में भय का माहौल है। सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने भोपाल कमिश्नर को कॉलेज परिसर में अवांछित भीड़ के प्रवेश को रोकने के लिए जल्द से जल्द कार्रवाई करने का आग्रह किया है। मामले को अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील बताते हुए तुरंत कार्रवाई करने की बात कही है।

सांसद ने कहा कि साल 1985 तक कॉलेज कैंपस में मजार नहीं था। उन्होंने मजार बनने को लेकर कॉलेज प्रिंसिपल से भी सवाल किए।सांसद ने बताया कि उनको कॉलेज की टूटी हुई बाउंड्री वॉल को लेकर शिकायत मिली थी। लड़कियों की सुरक्षा के लिहाज से बाउंड्री वॉल तुरंत तैयार करवाने के निर्देश दिए थे। लेकिन मजार के कारण छात्र-छात्राओं की सुरक्षा में सेंध लगी हुई है। ऐसे में छात्र और कॉलेज स्टाफ कैसे सुरक्षित रहेंगे। पूरे मामले को लेकर उन्होंने कॉलेज प्रबंधन को जिला प्रशासन से भी बात करने को कहा है।

केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-2 में नमाज पढ़ने पर जताई थी आपत्ति

इससे पहले सांसद साध्वी प्रज्ञा ने भोपाल के केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 2 कैंपस में नमाज पढ़ने पर सवाल उठाया था। उनका कहना था कि सेंट्रल स्कूल कैंपस के अंदर छात्र-छात्राओं की पढ़ाई के बीच बाहरी लोगों का स्कूल में प्रवेश होता रहता है। इस मामले को लेकर सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कलेक्टर को पत्र लिखकर कार्रवाई करने को कहा था। इसके अलावा हाल ही मैं उन्होंने मस्जिदों में लाउडस्पीकर से बजने वाले अजान के शोर पर भी आपत्ति जताई थी।

छोटे पर्दे पर नहीं दिखेंगी औरतें, कॉमेडी और विदेशी फिल्में भी बैन: TV के लिए तालिबान का ‘शरिया कानून’

अफगानिस्तान में, तालिबान सरकार ने टीवी सीरियल में औरतों पर प्रतिबंध लगाने के लिए नए नियम जारी किए हैं। वहीं महिला पत्रकारों और एंकरों को भी स्क्रीन पर हेडस्कार्फ पहनने का आदेश दिया गया है। हालाँकि रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि किस तरह के स्कार्फ पहनने हैं।

तालिबान द्वारा अफगान टेलीविजन चैनलों को जारी किए गए नए दिशानिर्देशों में खासतौर से 8 महत्वपूर्ण बिंदू हैं।

इनमें शरिया के सिद्धांतों या इस्लामी कानून और अफगान मूल्यों के खिलाफ मानी जाने वाली फिल्मों पर प्रतिबंध लगाना भी शामिल है।

कॉमेडी और मनोरंजन जिनसे इस्लाम का अपमान हो, या जो अफगानियों के लिए ऑफेन्सिव या भावनाएँ आहत करने वाला हो, उस पर भी प्रतिबन्ध लगाया गया है।

साथ ही तालिबान ने विदेशी सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने वाली विदेशी फिल्मों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

बता दें कि अफगानिस्तान में पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन के एक सदस्य हुज्जतुल्लाह मुजद्देदी ने कहा कि नए प्रतिबंधों की घोषणा अप्रत्याशित थी। बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कई नियम व्यावहारिक नहीं हैं और अगर इसे लागू किया जाता है, तो प्रसारकों को सीधे प्रोग्राम बंद करने के लिए मजबूर करना होगा।

गौरतलब है कि अगस्त के मध्य में तालिबान ने अफगानिस्तान में अपनी सत्ता स्थापित कर ली थी और अब कई लोगों को डर है कि वे धीरे-धीरे कठोर प्रतिबंध लगा रहे हैं। लोगों में यह डर इसलिए भी है कि तालिबान ने अमेरिका और संबद्ध बलों के जाने के तुरंत बाद ही लड़कियों और युवतियों को घर में रहने का निर्देश दिया था। बता दें कि 1990 के दशक में तालिबान के पिछले शासन के दौरान, महिलाओं को स्कूल-कॉलेजों और कार्यस्थलों पर जाने से रोक दिया गया था।

एक ही लड़की को गंदे मैसेज भेज रहे थे टिम पेन और उनके जीजा, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान की पत्नी ने कहा- ये शादी के लिए ‘अच्छा’

ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीम के पूर्व कप्तान टिम पेन के अश्लील संदेश सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब उनके 41 वर्षीय बहनोई शैनन टब पर भी ‘क्रिकेट तस्मानिया’ की उसी महिला कर्मचारी को गंदे मैसेज भेजने का आरोप लगा है

जानकारी के मुताबिक, 1990 में तस्मानिया की ओर खेलने वाले लेफ्ट आर्म स्पिनर शैनन की शादी टिम पेन की बहन से हो रखी है। उनके खिलाफ इसी मामले में साल 2018 में भी जाँच हुई थी, उसी साल क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने टेस्ट टीम के पूर्व कप्तान टिम पेन पर भी लगे आरोपों की जाँच की थी। लेकिन, तब ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें क्लीन चिट दे दी। 

हालाँकि 4 साल बाद अचानक से अश्लील मैसेज और तस्वीरें वायरल होने के बाद उन्हें कप्तानी से इस्तीफा देना पड़ा। वायरल संदेश 4 साल पहले साल 2017 में भेजे गए थे। इसमें टिम ने लिखा था, “क्या तुम मेरे %#%# का स्वाद लेना चाहोगी? #uck Me, I am really hard.”

tim paine

इस सेक्सटिंग के वायरल होने के बाद टिम पेन की पत्नी बोनी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने टिम को अपना समर्थन देते हुए कहा, “टिम के लिए मेरी सहानुभूति है। मैं और वह इस पूरे मामले से 2018 में ही गुजर चुके हैं। मुझे बुरा भी लग रहा है कि इस पूरे मामले को दोबारा पब्लिक के सामने उछाला जा रहा है। हम इस बुरे दौर को पीछे छोड़ चुके हैं। मेरा मानना है कि दोबारा इस मुद्दे को उछालकर टिम पेन के साथ अन्याय किया जा रहा है।”

बोनी ने कहा, “यह बहुत ही अजीब है, इस पूरे मामले ने हमारे रिश्ते में काफी मदद की है। मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि मैं यह बातें कह रही हूँ। इस दुनिया में कोई परफेक्ट नहीं होता है। आपको लोगों को दूसरा मौका देना होगा। जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि टिम पेन ने मुझे यह सारी सच्चाई मेरे सामने आकर ही बताई…उसे ऐसा करने की जरूरत नहीं थी। उसने जो किया, उससे मेरे मन में उसके लिए और सम्मान बढ़ गया। यह कभी भी प्यार का सवाल ही नहीं था। हमने एकदूसरे से गहरा प्यार किया है। हमने पुरानी बातों को भुला दिया है। मैंने उसे हर तरह से माफ भी कर दिया।” 

बोनी कहती हैं कि जब उनके पति ने कप्तानी से इस्तीफा दिया तो यह सुनकर उनका दिल टूट गया। यह दुख की बात है कि उन्हें लगा कि कप्तानी छोड़ देनी चाहिए। बोनी के हिसाब से उसके साथ अन्याय हुआ है। बता दें कि इससे पहले पेन ने कहा था कि उनके परिवार ने उन्हें इसके लिए माफ कर दिया है। वहीं बोर्ड का कहना है कि वो बतौर खिलाड़ी चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे और बोर्ड उनके निर्णय का सम्मान करता है। उन्हें एक ‘असाधारण नेतृत्वकर्ता’ बताते हुए बोर्ड ने कहा कि वो उन्हें उनकी सेवाओं के लिए धन्यवाद देते हैं। इसे ‘सेक्सटिंग स्कैंडल’ कहा जा रहा है। टिम पेन ने कहा कि इससे इस खेल पर जो असर पड़ा है, उसके लिए वो माफ़ी माँगते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें एक अच्छा परिवार मिला है, जो हमेशा उनके साथ खड़ा रहता है।

पंजाब: पठानकोट में आर्मी कैंप पर ग्रेनेड हमला, तरनतारन में हिंदू नेताओं-RSS शाखा की सुरक्षा बढ़ाई गई

पंजाब के पठानकोट में भारतीय सेना के कैंप के पास ब्लास्ट हुआ। ये ब्लास्ट ग्रेनेड से हुआ। इससे हड़कंप मच गया। हमले के पीछे किसका हाथ है, इसकी जाँच की जा रही है। ब्लास्ट के बाद शहर में अलर्ट जारी कर दिया गया है। दूसरी ओर मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि तरनतारन में आतंकी हमले की आशंका को लेकर खुफिया रिपोर्ट मिलने के बाद पंजाब पुलिस ने तरनतारन में हिंदू नेताओं और संघ शाखा की सुरक्षा बढ़ा दी है

जानकारी के मुताबिक रविवार (21 नवंबर 2021) देर रात एक बजे पठानकोट में आर्मी कैंप के त्रिवेणी द्वार पर मोटर साइकिल सवारों ने ग्रेनेड फेंका। जिससे वहाँ तेज धमाका हुआ। हालाँकि, गेट पर ड्यूटी दे रहे जवान दूरी पर थे, इसलिए किसी को नुकसान नहीं पहुँचा। ग्रेनेड फेंकने वाले बाइक सवार किधर से आए और किधर गए, इसके बारे में पता लगाया जा रहा है।

धमाके की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुँचे। एसएसपी ने खुद हालात का जायजा लिया। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खँगाल रही है। जिला भर में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। नाकों पर पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया है।

पठानकोट के एसएसपी सुरेंद्र लाम्बा ने बताया कि घटना की जाँच की जा रही है। CCTV फुटेज निकाले जा रहे हैं। पुलिस ने बताया कि विस्फोट रविवार देर रात को छावनी के त्रिवेणी द्वार के बाहर हुआ। इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है। पुलिस ने बताया कि मोटरसाइकिल सवार अज्ञात लोगों ने छावनी के सामने ग्रेनेड फेंका।

पंजाब पुलिस ने हमले के ‘विशेष इनपुट’ से किया इनकार

इससे पहले 20 नवंबर को खुफिया एजेंसियों ने आतंकी हमलों की आशंका जताई थी। इसके बाद पुलिस ने गाँधी नगर पार्क की चेकिंग की और चेकिंग पोस्ट पर नाकेबंदी की। RSS इस पार्क में शाखा का आयोजन करती है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, एएसआई रैंक के छह अधिकारी और छह कांस्टेबल को आरएसएस जिला प्रमुख चौधरी हंस राज, भाजपा जिलाध्यक्ष राम लाल हंस और शिवसेना (बाल ठाकरे) के उपाध्यक्ष अश्विनी कुक्कू के आवास के बाहर तैनात किए गए हैं।

हालाँकि पुलिस ने किसी खास हिंदू नेता पर हमले की सूचना से इनकार किया। इस मामले में अधिक जानकारी के लिए ऑपइंडिया ने तरनतारन डीएसपी बरजिंदर सिंह से संपर्क किया। सिंह ने शहर में हिंदू नेताओं पर हमले की आशंका से जुडी किसी विशेष खुफिया सूचना से इनकार किया। उन्होंने कहा, “हिंदू नेताओं पर खतरे की खबरें गलत हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा के मद्देनजर सुरक्षा बढ़ाई गई है।” उन्होंने कहा कि पठानकोट में सेना के शिविर के बाहर ग्रेनेड हमले के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जब हमने मीडिया रिपोर्टों के बारे में पूछा जिसमें हिंदू नेताओं की सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया था, तो उन्होंने कहा, “मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता कि उन्होंने रिपोर्ट क्यों प्रकाशित की है।”

बता दें कि पठानकोट भारत के सर्वाधिक महत्वपूर्ण ठिकानों में से एक है। यहॉं पिछले कुछ महीने से सुरक्षाबलों के कैम्प के नजदीक कई गतिविधियाँ देखी गईं हैं। जनवरी 2016 में पठानकोट वायुसेना स्टेशन पर आतंकवादी हमला हुआ था।

बच्चे के मुँह में लिंग डालना ‘गंभीर’ नहीं: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने घटा दी सजा, ₹20 देकर नाबालिग से ओरल सेक्स करने का केस

बच्चे के साथ ओरल सेक्स के एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुँह में लिंग डालने को ‘गंभीर यौन हमला’ मानने से इनकार कर दिया। अदालत ने इसे POCSO एक्ट की धारा 4 के तहत दंडनीय माना। कहा कि यह हरकत एग्रेटेड पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट या गंभीर यौन हमला नहीं है। लिहाजा ऐसे मामले में पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और 10 के तहत सजा नहीं सुनाई जा सकती।

हाई कोर्ट ने इस मामले में दोषी की सजा घटाकर 10 से 7 साल कर दी। साथ ही उस पर 5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। सोनू कुशवाहा ने सेशन कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

न्यायमूर्ति अनिल कुमार ओझा ने कुशवाहा की अपील पर यह फैसला सुनाया। सेशन कोर्ट ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 377 (अप्राकृतिक अपराध) और धारा 506 (आपराधिक धमकी के लिए सजा) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी ठहराया था।

अदालत के सामने सवाल यह था कि क्या नाबालिग के मुँह में लिंग डालना और वीर्य छोड़ना, POCSO एक्ट की धारा 5/6 या धारा 9/10 के दायरे में आएगी। फैसले में कहा गया यह दोनों धाराओं में से किसी के दायरे में नहीं आएगा, लेकिन यह POCSO एक्ट की धारा 4 के तहत दंडनीय है।

अपने फैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 20 नवंबर, 2021 को दिए निर्णय में स्पष्ट किया कि एक बच्चे के मुँह में लिंग डालना ‘पेनेट्रेटिव यौन हमले’ की श्रेणी में आता है, जो यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) अधिनियम की धारा 4 के तहत दंडनीय है और अधिनियम की धारा 6 के तहत नहीं। इसलिए, न्यायमूर्ति अनिल कुमार ओझा की पीठ ने निचली अदालत द्वारा अपीलकर्ता सोनू कुशवाहा को दी गई सजा को 10 साल से घटाकर 7 साल कर दिया।

बता दें कि सोनू कुशवाहा ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश / विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो अधिनियम, झाँसी द्वारा पारित निर्णय के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में आपराधिक अपील दायर की थी, जिसके तहत कुशवाहा को दोषी ठहराया गया था।

दरअसल, अपीलकर्ता के खिलाफ मामला यह था कि वह शिकायतकर्ता के घर आया और उसके 10 साल के बेटे को साथ ले गया। उसे ₹20 देते हुए दिए अपना लिंग मुँह में लेने को कहा था। बच्चे से यह पूछने पर कि उसे यह पैसे कहाँ से मिले, उसने पूरी कहानी बताई और कहा कि सोनू कुशवाहा ने उसे धमकी दी थी कि वह इसे किसी को न बताए। रिपोर्ट के अनुसार विशेष सत्र न्यायालय ने सोनू कुशवाहा को आईपीसी की धारा 377 और 506 और पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी ठहराया था।

‘मेरे बेटे से निकाह, धर्मांतरण, मौलाना बनाने की दे रहे ट्रेनिंग’: युवक के पिता ने की शिकायत, जोड़े को गुरुग्राम से लेकर आई UP पुलिस

उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले में एक हिंदू युवक के धर्म परिवर्तन, निकाह और अब मौलाना बनाने के लिए ट्रेनिंग देने के मामले में नया तथ्य सामने आया है। पीड़ित व्यक्ति के पिता ने यह दावा करते हुए इस संबंध में पहले भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भी भेजा था। वहीं शिकायत के बाद इस मामले में पुलिस अधीक्षक ने जाँच शुरू कर दी थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बाँदा जिले में कथित धर्मान्तरण की शिकायत पर पुलिस एक युवक और युवती को गुरुग्राम से हिरासत में ले कर बाँदा तक लाई। दोनों के अदालत में बयान करवाए गए। पुलिस ने अपने स्तर से भी पूछताछ की जिसमे धर्मान्तरण के आरोप झूठे साबित हुए। दोनों ने बताया कि वो कोर्ट मैरिज कर चुके हैं। पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया। युवक का नाम विवेक कुमार सैनी है। उसके पिता पप्पू सैनी ने पुलिस में शिकायत की थी कि उनका बेटा 25 सितम्बर से गायब है। शिकायत में उन्होंने एक मुस्लिम लड़की पर शादी के बहाने अपने बेटे का धर्मान्तरण करने का आरोप लगाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के बाँदा के कोतवाली थाना क्षेत्र के गूलरनाका निवासी पप्पू सैनी ने 1 महीने पहले अपने बेटे विवेक के धर्मान्तरण के आरोप में एक वकील, मौलवी व लड़की के पिता को आरोपित किया था। पप्पू सैनी के अनुसार इन सभी ने उनके बेटे का धर्मान्तरण करवाया था। तब पप्पू सैनी ने आरोप लगाया था कि उसके बेटे विवेक का निकाह 5 मार्च 2021 को कराया गया। निकाह के बाद उसे मौलाना बनाने के लिए उसे किसी मदरसा में भेजा गया है। पुलिस ने विवेक की तलाश शुरू की तो लोकेशन गुरुग्राम में मिली। लोकेशन के आधार पर बाँदा पुलिस गुरुग्राम पहुँची तो वहाँ विवेक उन्हें मिल गया। पुलिस विवेक और उसकी पत्नी को ले कर बाँदा आ गई। विवेक का मेडिकल करवाया गया।

पुलिस ने लड़की के अदालत में 161 और 164 के बयान भी कराए। इंस्पेक्टर कोतवाली राजेंद्र सिंह ने बताया कि दोनों ने मतांतरण से इनकार किया है। इसके चलते दोनों को पुलिस ने छोड़ दिया। वो शहर के अपने घर में एक साथ रहे। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार लड़की ने अपने परिवार वालों से मिलने से मना कर दिया था। लड़के की तरफ से उसकी माँ, दादी, बुआ और पिता मिलने गए। बेटे के धर्मान्तरण न होने की बात पर वो बहुत खुश हुए। इसी बात पर वो अपने बेटे और बहू को साथ रखने पर तैयार हो गए।

‘मोहम्मद साहब पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ… ईशनिंदा पर बने कानून’: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को यूनिफॉर्म सिविल कोड कबूल नहीं

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) की चर्चाओं के बीच इस पर आपत्ति जताते हुए ईशनिंदा पर कानून बनाने की माँग की है। बोर्ड के पदाधिकारियों और सदस्यों का कहना है कि मुस्लिम समाज इसे कतई स्वीकार नहीं करेगा। कानपुर के मदरसा दारुल तालीम और सनअत (DTS) जाजमऊ में दो दिवसीय अधिवेशन के अंतिम दिन रविवार (21 नवंबर 2021) को 11 प्रस्ताव पारित किए गए। इसमें वक्फ संपत्तियों और धर्मांतरण के मुद्दे अहम थे, वहीं बोर्ड ने जबरन धर्मांतरण और गैर मजहबी शादियों का विरोध किया। बोर्ड ने कहा कि सरकार को ईशनिंदा पर कानून (Blasphemy Law) बनाना चाहिए।

बोर्ड के मीडिया समन्वयक डॉ. कासिम रसूल इलियास ने अधिवेशन के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि संविधान में हर नागरिक को यह अधिकार दिया गया है कि वह अपने धर्म में आस्था रखे और दूसरों को इसके बारे में बताए। बहु-धार्मिक समाज में समान नागरिक संहिता उचित नहीं है और यह संविधान के मौलिक अधिकारों के विपरीत है। बोर्ड ने सरकार से माँग की है कि मुस्लिमों पर समान नागरिक संहिता न लगाई जाए। उन्होंने कहा कि बोर्ड जबरन धर्मांतरण कराने वालों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह मुसलमानों के मजहबी अधिकारों और शरीयत कानून में हस्तक्षेप होगा।

ईशनिंदा कानून बनाए सरकार

बोर्ड ने कहा कि इस्लाम के पैगंबर पर टिप्पणी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रस्ताव में कहा गया कि हाल ही में पैगंबर मोहम्मद साहब के खिलाफ कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गईं। लेकिन उससे भी ज्यादा अफसोस की बात यह है कि सरकार ने ऐसा करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

इसके साथ ही बोर्ड ने अधिवेशन में अल्पसंख्यकों, दलितों और अन्य कमजोर वर्गों पर बढ़ते अत्याचार को रोकने के लिए सरकार से विशेष पहल की माँग की। सम्मेलन में मुस्लिमों से शरीयत का पालन करने, सादगी से शादी करने और दहेज न माँगने की अपील की गई और कहा कि मध्यस्थता के माध्यम से आपसी विवादों को सुलझाएँ और अगर किसी का समाधान नहीं होता है तो दारुल क़ज़ा जाएँ।

अंतर-धार्मिक विवाह से बचें

बोर्ड ने मुस्लिमों को सलाह दी है वह अंतर-धार्मिक विवाह से बचें, क्योंकि इससे समाज में विभाजन पैदा होता है और सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित होता है। मजहबी नियम और किताबें आस्था से जुड़ी हैं, इसलिए सिर्फ मजहब को समझने वालों को ही इसकी व्याख्या करने का अधिकार है। सरकारों या अन्य संस्थाओं को मजहबी पुस्तकों या मजहबी शब्दावली की व्याख्या करने से बचना चाहिए

‘मैं बच्ची थी तब शेख अब्दुल्ला ने कहा था- हिंदुओं से बर्तन साफ करवाऊँगा’: द कश्मीर फाइल्स को देख छलका अनुपम खेर की माँ का दर्द

कश्मीरी पंडितों की आपबीती जस की तस बयान करने के लिए विवेक अग्निहोत्री के निर्देशन में बनी ‘द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)’ साल 2022 के गणतंत्र दिवस पर रिलीज होने को तैयार है। इस फिल्म के मुख्य किरदारों में एक नाम अनुपम खेर का भी है। उन्होंने हाल में ये फिल्म अपनी माँ दुलारी के साथ बैठकर देखी और बाद में उनकी जो प्रतिक्रिया रिकॉर्ड की, वो वाकई झकझोरने वाली है।

वैसे तो अनुपम खेर ने भी लिखा है, “माँ कश्मीरी फाइल्स देखने के बाद बहुत लंबे समय के लिए चुप हो गई थीं मैंने उन्हें गले लगाया और जब अलविदा कहा तो वह प्यार से बोलीं, ‘अच्छा काम किया तूने इस फिल्म में। ये तेरा फर्ज था। दुनिया भर में रह रहे कश्मीरियों के लिए’।” अभिनेता के मुताबिक उनकी माँ की कही बात वाकई सच है। ये प्रोजेक्ट उनके लिए एक फिल्म से बढ़कर था।

ट्वीट के साथ शेयर वीडियो में जब अनुपम खेर ने अपनी माँ दुलारी से पूछा कि उन्हें फिल्म कैसी लगी तो उन्होंने बेहद गंभीर होकर कहा, “मुझे सब पता ही है वहाँ का तो मुझे वही दिखा जो किया गया है। हम 30 साल से यही देख रहे हैं कि उस समय जो बच्चा हुआ वो आज 30-32 साल का है। मेरे भाइयों को चिट्ठियाँ दी गईं कि निकल जाओ। बेचारे नना जी ने मकान बनाया था वो बेचारा इसी में मर भी गया। मेरा भाई शाम को ऑफिस से आया और दरवाजे पर चिट्ठी थी कि आज आपकी बारी है। वो लोग रामबाग में रहते थे तो रात में निकलें। जो ट्रक रात में चलते थे वे उसी में बैठकर निकल गए। उनके बच्चे दिल्ली में पढ़ रहे थे। उन्हें एक ग्लास पानी भी नहीं मिला।”

अनुपम खेर की माँ दुलारी कहती हैं, “मुझे सब कुछ पता है क्या किया उन्होंने। जिसने भी ये फिल्म बनाई उसने बहुत अच्छा किया। हम हिंदुओं के लिए बहुत अच्छा किया। मोदी तो बेचारा कर ही रहा है। लेकिन इस फिल्म से पता चलेगा कश्मीरियों के साथ क्या हुआ। अब तक बाहर वालों को क्या पता कि हमारे साथ क्या हुआ था। वो लोग तो हमारी दौलत, हमारा सामान सब कुछ ले गए। सबको ऐसे निकाला जैसे फकीर हों।”

वो स्तब्ध होकर कहती हैं कि इस फिल्म में जो चीजें दिखाई गईं उनके बारे में वह जानती थीं। वह अब्दुल्ला परिवार का जिक्र करते हुए कहती हैं, “शेख अब्दुल्ला ने कहा कि ये लोग मुसलमानियों से बर्तन धुलवाते हैं मैं हिंदुओं से करवाऊँगा। उस समय मैं छोटी सी थी। जैसे ये मुसलमानियों के साथ करते हैं मैं इनके साथ ऐसे ही करूँगा। उस समय मेरा मामा भी नेता था। अब्दुल्लाह ने जो कहा वही किया। ऐसे निकाल दिया जैसे यतीम हैं। भगवान इन लोगों से जरूर बदला लेगा।”

यहाँ बता दें कि विवेक अग्रिहोत्री द्वारा बनाई गई द कश्मीरी फाइल्स को लेकर अब तक दावा है कि इसमें 90 के दशक में कश्मीरी पंडितों पर हुआ अत्याचार बिना किसी प्रोपगेंडे के दिखाया गया है। उनकी पीड़ा और दर्द वैसा का वैसा प्रस्तुत है। ये फिल्म 26 जनवरी 2022 को रिलीज होगी।

कुछ समय पहले कश्मीर की हकीकत जानने के लिए लोग शिकारा फिल्म पर आश्रित हुए थे। लेकिन बाद में पता चला कि ये फिल्म कश्मीर के हालत बयान करने से ज्यादा किसी जोड़ की लव स्टोरी पर केंद्रित है। कई जगह इस फिल्म का विरोध हुआ था। कश्मीरी पंडितों ने शिकारा को उनकी फीलिंग से खिलवाड़ बताया था।

58% ने माना PM हैं किसान हितैषी, 52% ने कहा- कानून वापस लेने का फैसला ठीक: देश में मोदी का जलवा बरकरार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को खत्म करने के बाद हर किसी के मन में इस बात को लेकर प्रश्न था कि सरकार के इस फैसले से लोगों मोदी की लोकप्रियता पर कितना फर्क पड़ने वाला है। अब इस मुद्दे पर IANS C voter snap opinion poll जारी किया गया है। देश भर में किए गए इस सर्वेक्षण में 52 प्रतिशत से भी अधिक लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले को सही ठहराया, यानि कि पीएम मोदी अभी भी बरकरार है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में 50 फीसदी से अधिक लोगों ने माना कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानून अच्छे और ये किसानों के हित में थे। वहीं, 30.6 प्रतिशत लोगों का मानना है कि ये कानून बेकार थे और इन्हें निरस्त किया जाना ही सही था। 40.7 फीसदी लोगों ने कृषि कानून को रद्द करने का श्रेय मोदी सरकार को दिया, जबकि 22.4 प्रतिशत लोगों का मानना है कि विपक्ष के लगातार विरोध के कारण सरकार दबाव में आई और उसने इन कानूनों को वापस ले लिया। वहीं, 37 प्रतिशत लोगों ने कृषि कानूनों को वापस लेने का श्रेय किसानों को दिया।

58 प्रतिशत लोगों ने पीएम मोदी को किसान समर्थक बताया

इस सर्वे में 58.6 फीसदी लोगों ने पीएम मोदी पर अपना भरोसा जताया और उन्हें किसान समर्थक बताया। वहीं, 29 फीसदी लोगों का मानना था कि पीएम मोदी किसान विरोधी हैं। सर्वे के मुताबिक, विपक्ष के भी 50 फीसद से अधिक मतदाताओं ने पीएम मोदी को किसानों का हित चाहने वाला यानि किसान समर्थक करार दिया है। वहीं 56.7 फीसदी लोगों का मानना था कि कृषि कानूनों का विरोध केवल एनडीए सरकार को कमजोर करने की राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। जबकि, 35 फीसदी लोग ऐसा नहीं मानते हैं।

विधानसभा चुनाव में बीजेपी को होगा इसका फायदा

इस सर्वे के मुताबिक, कृषि कानून को लेकर हो रही राजनीति अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में की रोल निभा सकती है। सर्वे में शामिल 55.1 फीसदी लोगों ने कहा है कि मोदी सरकार को इसका सियासी फायदा मिलने वाला है, जबकि 30.08 फीसदी लोगों का ये मानना था आने वाले चुनावों में इसका किसी तरह का कोई प्रभाव नहीं होगा।

लोगों ने माना राजनीतिक विरोध है किसान आंदोलन

वह बात जो लंबे वक्त से समाज का एक वर्ग कहता रहा है कि किसान आंदोलन राजनीतिक है, उसे इस सर्वे ने सही साबित किया है। करीब 56.7 फीसदी लोगों ने इस बात को स्वीकार किया है कि कृषि कानून के खिलाफ हो रहा विरोध राजनीति से प्रेरित था।