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‘मंदिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त नहीं हुए तो हथियार उठाएँगे’: संतों की चेतावनी- मुट्ठी भर किसान अपनी माँग मनवा सकते हैं तो हम भी करेंगे

देश की राजधानी दिल्ली में एक और आंदोलन की आहट सुनाई देने लगी है। इस बार संत समाज ने मठ-मंदिर मुक्ति के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। इसके लिए संतों ने दक्षिण दिल्ली के कालकाजी मंदिर में एक बड़ी सभा की। उन्होंने शान्ति और शस्त्र दोनों उठाने का एलान किया। इस दौरान कई मठों, मंदिरों, अखाड़ों और आश्रमों के संत मौजूद रहे। सभा में किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा गया कि जब मुट्ठी भर किसान सरकार से अपनी बात मनवा सकते हैं तो हम क्यों नहीं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह आयोजन अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत के नेतृत्व में किया गया। संभावित आंदोलन की रुप-रेखा बताते हुए एक संत ने कहा कि हमारा आंदोलन बहुत लम्बा नहीं होगा। यह आंदोलन अगले चुनाव से पहले ही खड़ा हो जाएगा। हमारा लक्ष्य अगली सरकार बनने तक मठ-मंदिरों को सरकार के कब्जे से मुक्त करवाना है।

इस बैठक में भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री राजेंद्र दास ने कहा कि वो तन-मन-धन से इस आंदोलन का समर्थन करेंगे। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और केरल के मंदिरों के हालात सबसे खराब हैं। शस्त्रों की उस उक्ति का भी उन्होंने उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि अगर देवधन राजकोष में जाएगा तो कोष कभी नहीं भरेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में देवस्थानम् बोर्ड के कब्जे में 51 मंदिर हैं, उन्हें मुक्त कराने के लिए संघर्ष चल रहा है।

राजेंद्र दास के अनुसार, उन्हें 30 नवम्बर को आ रहे निर्णय की प्रतीक्षा है, जिसमें देवस्थानम् बोर्ड को लेकर निर्णय किया जाना है। उन्होंने इस मामले में फैसला अपने पक्ष में होने की उम्मीद जताई। राजेंद्र दास के अनुसार, दूसरे देशों में धर्मस्थलों के लिए सरकार पैसे देती है लेकिन भारत में सरकारें मंदिरों के चढ़ावे पर नजर रखती है।

इसी सभा में महामंडलेश्वर बालयोगी अलखनाथ औघड़ ने कहा, ‘हिंदू धर्म में पुरुष साष्टांग दंडवत करते हैं, जबकि महिलाएँ पांचांग प्रणाम और ‘वे’ भी पंचांग प्रणाम करते हैं।’ उनका कहना था कि पुरुष शक्तिशाली होता है, इसलिए दंडवत करता है और स्त्री शारीरिक तौर पर कम शक्तिशाली होती है, इसलिए वह पंचांग प्रणाम करती हैं। पंचांग प्रणाम की भाव-भंगिमा नमाज से काफी मिलती-जुलती है, जबकि साष्टांग दंडवत पूरी तरह से जमीन पर लेटकर किया जाता है।

इसी सभा में एक अन्य संत ने हिन्दुओं को जगाने का आह्वान किया। जय श्रीराम के नारों के साथ उन्होंने लक्ष्य हासिल न कर लेने तक आंदोलन पर अडिग रहने का एलान किया। उन्होंने एक अजगर और इंसान की कहानी के माध्यम से बताने का प्रयास किया कि एक खास वोटबैंक अजगर बन चुका है, जो हिन्दुओं को निगलने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने हिन्दुओं से ऐसे अजगरों को पहचान कर उनसे दूर रहने की अपील की।

इस सांकेतिक सभा को आयोजित करने वाले सुरेंद्रनाथ अवधूत के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी माँगों का पत्र भेजा जा रहा है। यदि माँगें मान ली गईं तो संत समाज उनका धन्यवाद करेगा। माँगों के न माने जाने पर संत समाज सड़कों पर उतरेगा और देश भर के हर गाँव और शहर में मशाल लेकर जाएगा। इसी के साथ संत राजधानी दिल्ली जाने वाले मुख्य रास्तों पर बैठ जाएँ और जरूरी हुआ तो संत हथियार भी उठा लेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

दिल्ली भाजपा के नेता विक्रम विधूड़ी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। अपने ट्विटर हैंडल पर उन्होंने कार्यक्रम की तस्वीरें भी शेयर की हैं।

पब्लिक TV ने इस पूरे कार्यक्रम का वीडियो जारी किया है।

गौरतलब है कि वर्तमान समय में सद्गुरु जग्गी वासुदेव तमिलनाडु में मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने की मुहिम चला रहे हैं। उनकी इस मुहिम को बड़ा समर्थन भी मिल रहा है। तमिलनाडु समेत पूरे भारत भर में कई ऐसे छोटे-बड़े मंदिर हैं, जो सरकारी नियंत्रण में हैं। ऐसे मंदिरों की संख्या लगभग 4 लाख है, जिनमें तिरुपति बालाजी, श्रीपद्मनाभस्वामी, गुरुवयूर, जगन्नाथ पुरी और वैष्णो देवी शामिल हैं। महाराष्ट्र में लगभग 4,000 से अधिक ऐसे मंदिर हैं, जो सरकार के नियंत्रण में हैं। इनमें पंढ़रपुर के विट्ठल महाराज का मंदिर, सिद्धिविनायक, कोल्हापुर का महालक्ष्मी जैसे बड़े मंदिर शामिल हैं।

‘बेटी’ पर ही आया आमिर खान का दिल, लाल सिंह चड्ढा की रिलीज के बाद ऐलान: ‘तीसरे निकाह’ को लेकर मीडिया में चर्चा

क्या ‘लाल सिंह चड्ढा’ के अभिनेता आमिर खान फातिमा सना शेख के साथ अपनी तीसरी शादी की योजना बना रहे हैं? कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का तो यही कहना है। बॉलीवुड की ख़बरें देने वाली वेबसाइट ‘Koimoi’ ने दावा किया है कि आमिर खान अपनी नई फिल्म से लोगों का ध्यान भटकना नहीं चाहते हैं और हाइप बने रहने देना चाहते हैं, इसीलिए वो अपनी तीसरी शादी की घोषणा ‘लाल सिंह चड्ढा’ की रिलीज के बाद ही करेंगे। फिल्म 20 अप्रैल, 2021 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

हालाँकि, ‘इंडिया टुडे’ ने अपने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि ‘धूम 3 (2013)’, ‘पीके (2014)’ और ‘दंगल (2016)’ के रूप में ‘ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर’ फिल्मों की हैट्रिक लगाने वाले आमिर खान ने अपनी तीसरी शादी की चर्चाओं को नकारते हुए इसे अफवाह बताया है। बता दें कि अगस्त 2021 में ही आमिर खान और उनकी दूसरी पत्नी किरण राव ने तलाक लिया है। दोनों ने मिल कर अपने 9 साल के बेटे आज़ाद का पालन-पोषण करने की जिम्मेदारी उठाई है।

आमिर खान की पहली पत्नी रीना दत्ता के साथ भी उनका एक बेटा जुनैद और एक बेटी इरा हैं। ‘द ज्ञान टीवी’ ने बताया था कि आमिर खान अपनी तीसरी शादी की घोषणा जल्द ही करेंगे। इस खबर में दावा किया गया था कि जिसे आमिर खान ‘बेटी’ बोल चुके हैं, उसके साथ ही वो अब शादी करने जा रहे हैं। खबर में ये भी लिखा था कि मुस्लिम होने के कारण दोनों का निकाह होगा। ‘दंगल’ में फातिमा सना शेख ने आमिर खान की बेटी का किरदार अदा किया था। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि फिल्म के प्रमोशन के दौरान भी आमिर खान ने फातिमा को अपनी बेटी की तरह बताया था।

‘द ज्ञान टीवी’ पर आमिर खान की तीसरी शादी की खबर

बता दें कि फातिमा सना शेख भी इन ख़बरों को पहले अफवाह बता चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि कुछ अपरिचित लोग हैं जिनसे वो कभी नहीं मिली और वही लोग उनके बारे में अनाप-शनाप लिख रहे हैं। कुछ लोगों ने आमिर खान और फातिमा सना शेख के अफेयर को उनके तलाक की वजह बता दिया था। फातिमा सना शेख का कहना था कि उन्हें नहीं पता इसमें सच्चाई है या नहीं, लेकिन लोग मान रहे हैं कि वो अच्छी लड़की नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें परेशानी होती है, क्योंकि लोग गलत चीजें फैला रहे हैं।

आमिर खान लगातार चर्चा में बने हुए हैं। उन्होंने हाल ही में अपने एक इंटरव्यू के दौरान कहा है कि जब उनकी फ़िल्में फ्लॉप हो जाती हैं तब वो खुद को कमरे में बंद कर के बहुत रोते हैं। आगे उन्होंने कहा कि हिट फिल्मों से भी उनकी आँखों में आँसू आ जाते हैं लेकिन वो आँसू ख़ुशी के होते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि मैं बड़ी जल्दी रोने लगता हूँ। उन्होंने बताया कि वो रामगोपाल वर्मा द्वारा अपने खिलाफ दिए गए पहले के कुछ बयानों से खुश नहीं हैं। आमिर खान ने कहा कि जब उनकी फिल्म रिलीज होने वाली होती है तब वो बेहद तनाव में होते हैं। 3 से 4 हफ्ते तो उन्हें ठीक से भूख भी नहीं लगती।

अनुपमा-अजीत के बच्चे का हुआ DNA टेस्ट, रिजल्ट से खुलेंगे राज़: दलित से शादी करने पर वामपंथी नेता ने छीन लिया था बेटी का बच्चा

केरल के कपल अनुपमा एस चंद्रन और अजीत के 1 साल के बच्चे के पालक माता-पिता ने शनिवार (20 नवंबर 2021) को शिशु को केरल के 3 पुलिसकर्मियों और केरल बाल कल्याण परिषद (KCWC) के 3 अधिकारियों की एक टीम को सौंप दिया। बच्चे को रविवार (21 नवंबर, 2021) की शाम केरल की राजधानी लाया गया। केसीडब्ल्यूसी ने अधिकारियों को 5 दिनों के भीतर ‘गोद लिए गए बच्चे’ का पता लगाने और डीएनए टेस्ट के जरिए शिशु के बायलॉजिकल माता-पिता का निर्धारण करने का निर्देश दिया था।

जानकारी के मुताबिक सोमवार (22 नवंबर, 2021) को राजीव गाँधी जैव प्रौद्योगिकी संस्थान में अनुपमा और उनके पति अजीत के डीएनए सैंपल में लिए गए। सैंपल देने के बाद अनुपमा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। हालाँकि उन्होंने बच्चे के डीएनए सैंपल लेने में गड़बड़ी का संदेह जताया। उन्होंने कहा, “मुझे कैसे पता चलेगा कि लिया गया सैंपल मेरे बच्चे का है। सैंपल लेने के प्रोसेस को रिकॉर्ड नहीं किया गया है, केवल कुछ तस्वीरें ली गईं हैं।” बताया जा रहा है कि अगले एक तीन दिनों में डीएनए टेस्ट का रिजल्ट आ जाएगा। इससे पहले अनुपमा ने TNM से बात करते हुए कहा था कि वह और उनके पति चाहते हैं कि उनकी उपस्थिति में बच्चे का DNA टेस्ट हो।

बता दें कि बायलॉजिकल पैरेंट्स का पता लगाने के लिए डीएनए टेस्ट किया जाता है। केरल बाल कल्याण समिति KCWC) ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को अंतिम निर्णय होने तक शिशु की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। अनुपमा ने मामले के बारे में बात करते हुए कहा, “मैं वाकई में राहत महसूस कर रही हूँ। हमारे छह महीने के संघर्ष के कुछ नतीजे निकले। लेकिन मुझे इस बात पर आपत्ति है कि जिन विभाग के अधिकारियों ने सभी नियमों का उल्लंघन करते हुए मेरे बच्चे को गोद लेने के लिए दिया था, उन्हें उसे वापस लाने का प्रभार दिया गया।”

उल्लेखनीय है कि केरल में गोद लेने का एक मामला राजनीतिक घमासान में बदल गया है और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को सुर्खियों में ला दिया है। 23 वर्षीय अनुपमा ने आरोप लगाया था कि उसके माता-पिता ने उसकी सहमति के बिना उसके 1 साल के बच्चे को गोद लेने के लिए दे दिया।

रिपोर्टों के अनुसार, बच्चे के पिता का नाम अजीत है और वह ‘दलित-ईसाई’ हैं। अनुपमा ने दावा किया था कि दलितों के प्रति पूर्वाग्रह के कारण उनके माता-पिता अजीत से उनकी शादी के खिलाफ थे। अपने बचाव में, महिला के परिवार ने बताया कि अजीत पहले से ही शादीशुदा था और उसका अपनी अलग पत्नी से तलाक होना बाकी था। इसके बावजूद बच्चे का जन्म विवाह से हुआ, जो अनुपमा और उसके माता-पिता के बीच विवाद का कारण बन गया।

महिला ने आरोप लगाया कि उसके पिता एस जयचंद्रन ने अक्टूबर 2020 में पैदा हुए बच्चे को तिरुवनंतपुरम में केरल स्टेट काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर द्वारा संचालित एक अनाथालय को सौंप दिया। अनुपमा ने दावा किया कि अनाथालय ने गोद लेने के नियमों को दरकिनार कर दिया और इस साल अगस्त में आंध्र प्रदेश में उनकी सहमति के बिना उनके बच्चे को पालक माता-पिता को दे दिया। मामला 20 अक्टूबर, 2021 को सामने आया, जब अनुपमा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और मामले में FIR दर्ज की गई।

अनुपमा ने ‘दबाव’ में किया गोद लेने के कागजात पर दस्तखत

पुलिस ने लड़की के माता-पिता सहित कुल 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जयचंद्रन ने दावा किया था कि शिशु को उनकी बेटी की सहमति से अनाथालय में स्थानांतरित कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि अनुपमा ने इसकी पुष्टि करते हुए स्टांप पेपर पर साइन किया था। हालाँकि, महिला ने दावों का खंडन किया था और कहा था कि उसे दबाव में दस्तखत करने के लिए मजबूर किया गया था। परिस्थितियों से मजबूर, अनुपमा ने केरल बाल कल्याण समिति (KCWC) के समक्ष एक याचिका दायर की थी। जिसके बाद बच्चे को सौंपने का निर्देश दिया गया।

इस मामले ने सीपीआई (एम) के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल मचा दी

केरल में गोद लेने का मुद्दा राजनीतिक बन गया है क्योंकि जयचंद्रन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की ट्रेड यूनियन विंग सीटू के वरिष्ठ नेता हैं। अनुपमा भारतीय छात्र संघ, कम्युनिस्ट पार्टी की छात्र शाखा की पूर्व नेता भी रह चुकी हैं। अनुपमा के बच्चे के पिता अजीत भी CPIM से जुड़े हुए हैं। बताया जा रहा है कि जयचंद्रन ने अनाथालय के अधिकारियों के साथ मिलकर गोद लेने के मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए अपने राजनीतिक प्रभाव का फायदा उठाया है।

हालाँकि माकपा का कहना है कि यह एक पारिवारिक मुद्दा था, मगर मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की चुप्पी पर सवाल उठाया गया था। अनुपमा ने उनकी घोर चुप्पी पर निराशा व्यक्त की थी। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि सीएम को गलत सूचना दी गई है। उनकी निरंतर चुप्पी से मुझे बहुुत दु:ख हुआ। महिला ने पहले अपने बच्चे की कस्टडी हासिल करने की उम्मीद में माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्यों से संपर्क किया था। हालाँकि, उसके सभी प्रयास व्यर्थ ही साबित हुए।

उसी समय अनुपमा ने सड़कों पर उतरने का फैसला किया। वह केरल राज्य बाल कल्याण परिषद कार्यालय के बाहर अनशन पर बैठ गईं। इससे पहले 14 नवंबर को उन्होंने कहा था, “मेरे पास सड़क पर उतरने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। पार्टी और सरकार का कहना है कि वे मेरे साथ हैं लेकिन फिर भी कोई मदद नहीं मिल रही है। वहीं बाल कल्याण परिषद के अधिकारी मामले को और उलझाने की कोशिश कर रहे हैं। मुझे अपना बच्चा वापस चाहिए।”

दोस्त विवेक की रिश्तेदार से ही अवैध सम्बन्ध बनाने लगा था राशिद, समझाने पर नहीं माना तो की हत्या: दो साथियों समेत गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में राशिद अली की हत्या में पुलिस ने विवेक पाल, अखिलेश उर्फ़ अभिषेक और रामबाबू पाल को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार राशिद आरोपितों के रिश्ते में आने वाली एक लड़की के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा गया था। राशिद की लाश 15 नवंबर 2021 (सोमवार) को लालापुर थाना क्षेत्र बसहरा गाँव के पास बारिया झगड़ा नाले में मिली थी। यह गिरफ्तारी 21 नवम्बर 2021 (रविवार) को की गई है। प्रयागराज पुलिस ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मृतक राशिद अली की उम्र लगभग 20 वर्ष थी। वह प्रयागराज के थाना घूरपुर के जसरा गाँव का रहने वाला था। राशिद चेन्नई की एक प्राइवेट कम्पनी में नौकरी करता था। वही पर विवेक पाल भी उसका सहकर्मी था। विवेक पाल का घर बेलमुंडी प्रयागराज में है। साथ काम करते हुए दोनों में दोस्ती हो गई। दीपावली की छुट्टियों में दोनों वापस गाँव आए थे। इसी दोस्ती के बहाने राशिद विवेक के घर आने जाने लगा। इसी दौरान राशिद उसी गाँव की एक लड़की से संबंध बनाने लगा जो विवेक के रिश्ते में और तीसरे आरोपित अखिलेश की चचेरी बहन थी।

घटना के दिन रविवार को राशिद अपने घर पर विवेक के घर जाने की बात कह कर निकला। लेकिन वो दुबारा वापस नहीं आया। पुलिस को शव के पास से ही कुछ सबूत मिले थे। इसी के आधार पर जाँच करते हुए पुलिस तीनों आरोपितों तक पहुँच गई। पुलिस ने तीनों को हवेलिया तिराहे से पकड़ा है। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि घटना वाले दिन वह युवती के साथ खेत में आपत्तिजनक स्थिति में था, उसी समय सरिया से पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी गई।

राशिद की हत्या कर के तीनों उसकी लाश को घटनास्थल से लगभग आठ किलोमीटर दूर ले गए। इसके बाद उन्होंने शव को एक नाले में फेंक दिया था। पुलिस ने लोहे की वो रॉड भी बरामद कर ली है जिस से तीनों ने राशिद की हत्या की थी। आरोपितों पर अपराध संख्या – 117 / 2021 के तहत धारा 302, 201, 147, 120 बी / 34 के तहत कार्रवाई की गई है।

‘वीडियो दिखा दूँगा तो पैरों तले जमीन खिसक जाएगी:’ चेले आनंद ने महंत नरेंद्र गिरि को दी थी धमकी, CBI चार्जशीट से खुलासा

अखाड़ा परिषद के पूर्व प्रमुख महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में सीबीआई ने मुख्य आरोपी आनंद गिरी, आद्या तिवारी और उसके बेटे संदीप तिवारी के खिलाफ दाखिल चार्जशीट में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। चार्जशीट में कहा गया है कि आनंद गिरि ने मई 2021 में अपने गुरु नरेंद्र गिरि को फोन पर धमकी दी थी कि उसके पास ऐसा वीडियो है, जिसे देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। इस धमकी के बाद से ही नरेंद्र गिरि इतना परेशान हो गए थे और खुदकुशी करने की बात सोचने लगे थे। सीबीआई को धमकी भरा वह ऑडियो मिल गया है। केस के खुलासे में इस ऑडियो ने बेहद अहम भूमिका निभाई है। 

आनंद गिरि के अय्याशी वाली जिंदगी को लेकर जब मीडिया में सवाल उठ रहे थे, तब नरेंद्र गिरी ने उसे चेतावनी दी थी। इसमें सुधार नहीं होता देख उन्होंने आनंद गिरी को बाघंबरी मठ और हनुमान मंदिर से निष्कासित कर दिया था। उसके बाद आनंद को निरंजनी अखाड़े से बाहर कर दिया। इस दौरान सोशल मीडिया पर आरोपों-प्रत्यारोपों का जमकर दौर चल रहा था। मई में आनंद गिरि हरिद्वार में निरंजनी अखाड़े से सचिव रवींद्र पुरी के यहाँ पहुँचा। रवींद्र पुरी ने दोनों के बीच सुलह की कोशिश करते हुए नरेंद्र गिरि को फोन किया।

पहले रवींद्र पुरी और नरेंद्र गिरि की बात हुई फिर रवींद्र के फोन से आनंद गिरि ने भी नरेंद्र गिरि से बात की। दोनों बात कर रहे थे, इसी बीच दोनों में बहस होने लगी। आनंद ने रवींद्र पुरी के फोन को स्पीकर मोड में किया और बातचीत को अपने फोन में रिकॉर्ड करने लगा। उसने नरेंद्र गिरि को धमकी दी कि उसके पास नरेंद्र गिरि के कई आपत्तिजनक वीडियो हैं। उसने नरेंद्र गिरि से कहा, “वीडियो मैं आपको भेजूँगा तो आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। ऐसे कई वीडियो और ऑडियो मेरे पास हैं।”

सीबीआई को आनंद गिरी द्वारा रिकॉर्ड किए गए इस ऑडियो को बरामद कर लिया है। इसे सबूत के तौर पर सीबीआई पेश करेगी। हालाँकि, जिस आपत्तिजनक वीडियो का जिक्र आनंद गिरी कर रहा था और जिसके खौफ से नरेंद्र गिरी ने आत्महत्या की, वह वीडियो सीबीआई को मिला या नहीं, इसका जिक्र चार्जशीट में नहीं किया गया है। वहीं, सीबीआई ने इस मामले को हत्या न मानकर आत्महत्या का मामला माना है। इन तीनों आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल किया गया है।

इस धमकी के बाद से ही नरेंद्र गिरि काफी परेशान हो गए थे। उन्होंने यह बात अपने कई करीबियों को बताई थी कि आनंद उन्हें ब्लैकमेल कर रहा है। उसने कई फर्जी वीडियो तैयार किया है, जिससे उनकी समाज में प्रतिष्ठा धूमिल हो जाएगी। वीडियो का खौफ दिन-प्रतिदिन बढ़ता गया। बताया जा रहा है कि अंत में इसी कारण महंत नरेंद्र गिरि ने फाँसी लगाकर खुदकुशी कर ली। 

नरेंद्र गिरि ने मौत से एक दिन पहले सतुआ बाबा को फोन कर आनंद गिरि की ब्लैकमेलिंग और आपत्तिजनक वीडियो के बारे में बताया था। उन्होंने वाराणसी के महंत संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा को बताया था कि उन्हें विश्वसनीय जानकारी मिली है कि आनंद ने कंप्यूटर के माध्यम से किसी महिला के साथ एक वीडियो बना लिया है।

आनंद ने कहा कि वह इसे वायरल कर देगा। सतुआ बाबा ने जब उनसे पहले सत्यता का पता लगाने को कहा तो नरेंद्र गिरि ने बताया कि इस वीडियो को प्रयागराज के एक और हरिद्वार के दो लोगों ने देखा है। सतुआ बाबा के अलावा नरेंद्र गिरि ने अपने दो करीबियों, मनीष शुक्ला और अभिषेक मिश्रा से भी वीडियो के बारे में बताया था। दोनों के मुताबिक महंत बहुत परेशान लग रहे थे, इतना दुखी और परेशान वह कभी नहीं रहे। गौरतलब है कि आत्महत्या के बाद नरेंद्र गिरी के गनर अभिषेक मिश्रा का भी मोबाइल फोन जब्त किया गया था। गनर की नौकरी करने वाले अभिषेक ने कुछ सालों में करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर ली है।

ब्लैकमेलिंग से नरेंद्र गिरि इतना परेशान थे कि उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय में संपर्क कर 15 सितंबर को सीएम से मिलने का समय माँगा था। इस कारण उन्होंने शैलेंद्र सिंह नाम के शख्स से लखनऊ के गोमती नगर में एक होटल की व्यवस्था करने को कहा था। इसी बीच कोई बात हो गई। वह न तो लखनऊ जा सके और न ही उनकी मुख्यमंत्री से मुलाकात हो पाई। इससे पहले नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट और उनके बैंक रिकॉर्ड में मौजूद हस्ताक्षर का मिलान किया गया था। 

‘हम जानते हैं तुम्हें कब्रिस्तान कैसे भेजना है’: SDPI नेता अबूबकर ने कॉन्ग्रेस नेताओं को धमकाया – अब हमारे पास है दो-दो ‘M’

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के फ्रंटल संगठन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के नेता अबूबकर कुलई ने रविवार (21 नवंबर) को विवादित बयान दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में वह कॉन्ग्रेस नेताओं को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। वायरल वीडियो में एसडीपीआई के दक्षिण कन्नड़ जिलाध्यक्ष अबुबक्कर कुलई को कर्नाटक में उन कॉन्ग्रेस नेताओं को हत्या की धमकी देते सुना जा सकता है, जिन्होंने एसडीपीआई कार्यकर्ताओं को कथित रूप से परेशान किया था।

कुलई ने कहा कि हम जानते हैं कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को अस्पतालों या कब्रिस्तानों में कैसे भेजा जाता है। मंगलुरु में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वह देख रहे हैं कि कॉन्ग्रेस नेता पिछले दस वर्षों के दौरान मंगलुरु विधानसभा क्षेत्र में एसडीपीआई नेताओं की प्रगति से किस कदर हताश हुए हैं।

उन्होंने आगे जोर देकर कहा, “कॉन्ग्रेस एसडीपीआई के विकास को पचा नहीं पा रही है। इसलिए वे कुछ गुंडों के माध्यम से हमारे कार्यकर्ताओं पर हमले कर रहे हैं। अब तक हमने अपना सिर झुका रखा था, लेकिन अब हमारे पास दो ‘M’ हैं। पहला manpower और दूसरा muscle power

उन्होंने यह भी धमकी दी कि अब से अगर उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को परेशान किया जाता है, तो उनकी पार्टी दो में से एक ‘M’ एक का इस्तेमाल जरूर करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि एसडीपीआई में शामिल होने वालों को अस्पताल में भर्ती होने, जेल या कब्रिस्तान जाने के लिए तैयार रहना चाहिए। अबूबकर कुलई ने कहा कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता अब किसी भी प्रकार का अत्याचार और उत्पीड़न नहीं सहेंगे। वह जानते हैं कि लोगों को अस्पतालों या कब्रिस्तान में कैसे भेजना है।

ईशनिंदा कानून की माँग, यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध: भारत में हिंदू बना रहे सेकुलर, मुस्लिमों को चाहिए शरिया

शुक्रवार 22 नवंबर के दिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अंतर्धार्मिक विवाह सम्बंधित जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से कहा है कि वो समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) लागू करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुझाए गए दिशा निर्देशों पर विचार करते हुए पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करे। न्यायालय के इस सुझाव के बाद एक बार फिर समान नागरिक संहिता विमर्श का विषय बन गया है। इसी वर्ष जुलाई में दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी केंद्र सरकार से इस दिशा में कदम उठाने का सुझाव दिया था। इससे पहले वर्ष 2019 में सर्वोच्च न्यायालय की एक पीठ ने समान नागरिक संहिता न लाने के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया था।

पिछले कई वर्षों से समान नागरिक संहिता राजनीतिक और सामाजिक विमर्श के केंद्र में रहा है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इस अवलोकन के साथ ही इधर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एक सम्मेलन की समाप्ति पर आये प्रस्ताव ने न केवल समान नागरिक संहिता की आवश्यकता को नकार दिया बल्कि देश में ईशनिंदा के विरुद्ध कानून की भी माँग की है। मजे की बात यह है कि बोर्ड ईशनिंदा के विरुद्ध कानून की माँग करते हुए केवल उन लोगों के लिए दंड विधान की बात की जो मुसलमानों के नबी मोहम्मद के खिलाफ अनादर दिखाते हैं। बोर्ड की माँग है कि आए दिन सोशल मीडिया पर मोहम्मद साहब के खिलाफ लिखी जाने वाली बातें और पोस्ट को ईशनिंदा माना जाए और ऐसा करने वालों के खिलाफ ईशनिंदा के तहत कानूनी कार्रवाई हो।

क्या है ईशनिंदा के विरुद्ध कानून

दुनियाँ के विभिन्न देशों के ईशनिंदा के विरुद्ध कानून लागू हैं ताकि ईशनिंदा करने वालों के विरुद्ध इन कानूनों के तहत कार्रवाई हो। ईशनिंदा के विरुद्ध ये कानून मुस्लिम बहुल देशों के साथ-साथ ईसाई बहुल देशों में भी लागू हैं। यह अलग बात है कि दोनों तरह के देशों में इन कानून के लचीलेपन की सीमाओं में बहुत अंतर है। जहाँ ईसाई बहुत देशों में ईशनिंदा, ईश का अनादर और उसकी आलोचना को लेकर कानूनी दिशा निर्देश काफी हद तक विस्तृत और साफ़ हैं, मुस्लिम बहुल देशों में ऐसा नहीं है। जहाँ ईसाई बहुल देशों में ईशनिंदा के विरुद्ध लागू कानून में ईशनिंदा की सजा अर्थदंड से लेकर कारावास है, कई मुस्लिम देशों जैसे ईरान, नाइजीरिया, पकिस्तान, सोमालिया और सऊदी अरब में ईशनिंदा की सजा मृत्युदंड है।

यही कारण है कि मुस्लिम बहुल देशों में इन कानूनों का अधिकतर अल्पसंख्यकों के विरुद्ध इस्तेमाल किया जाता रहा है। पाकिस्तान के अलावा अरब देशों, मुस्लिम बाहुल्य उत्तरी अफ्रीकी देशो में भी ईशनिंदा के विरुद्ध बने कानूनों का दुरुपयोग वहाँ रहने वाले अल्पसंख्यकों के विरुद्ध होते हुए देखा गया है। हाल के वर्षों में पाकिस्तान जैसे देश में ईशनिंदा के विरुद्ध लागू कानून के सहारे न केवल अल्पसंख्यकों को बल्कि बहुसंख्यक समाज के लोगों के खिलाफ भी तरह-तरह की कार्रवाई की गई है। अधिकतर मुस्लिम देशों में ईशनिंदा के विरुद्ध कार्रवाई न केवल व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता के विरुद्ध है बल्कि ऐसी कानूनी प्रक्रियाएँ आधुनिक वैश्विक और लोकतान्त्रिक परिवेश के भी विरुद्ध दिखाई देती हैं।

समान नागरिक संहिता की आवश्यकता क्यों है?

हमारे संविधान निर्माताओं ने संविधान को अंतिम रूप देते हुए यह आशा व्यक्त की थी कि भविष्य में अलग-अलग धर्मों के लिए विवाह, तलाक़ और अन्य सम्बंधित कानूनी प्रक्रिया के लिए समान नागरिक संहिता को लागू किया जाएगा। इसी बात को आगे रखते हुए न केवल सर्वोच्च न्यायलय ने बल्कि अन्य उच्च न्यायालयों ने बार-बार सरकार से समान नागरिक संहिता बनाने का सुझाव दिया। 2019 के अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायलय ने कहा कि; हमारे संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद 44 के तहत नीति निर्देश दिया था कि उचित समय आने पर सरकार पूरे देश के नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता बनाने और उसे लागू करने की अपनी जिम्मेदारी का पालन करेगी पर यह आज तक नहीं हो सका।

अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने आगे कहा था कि; हिंदू एक्ट 1956 में लागू होने के बाद आज तक नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता की दिशा में सरकार द्वारा कदम नहीं उठाया जा सका और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शाह बानो मामले में परामर्श के बावजूद सरकार ने इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया। यह बात अलग है कि सर्वोच्च न्यायालय के इस अवलोकन से पहले वर्ष 2018 में लॉ कमीशन ने अपने कंसल्टेशन पेपर में कहा था कि; देश को फिलहाल समान नागरिक संहिता की न तो आवश्यकता है और न ही यह देश के लिए सही रहेगा।

समान नागरिक संहिता की आवश्यकता देश में न केवल लंबे समय से महसूस की जाती रही है बल्कि यह समय-समय पर सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा भी रही है। दूसरी ओर मुस्लिम समाज की ओर से इसका लगातार विरोध होता रहा है। जिस समय इलाहाबाद सर्वोच्च न्यायालय की ओर से केंद्र सरकार को सलाह आई ठीक उसी समय आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने न केवल इसका फिर से विरोध किया बल्कि ऐसी संहिता की माँग को दरकिनार करते हुए ईशनिंदा के विरुद्ध कानून बनाने के लिए भी आवाज़ उठा दी। मुस्लिम समाज का यह दृष्टिकोण आश्चर्यचकित नहीं करता। मुस्लिम समाज ने इसी तरह तीन तलाक कानून का भी खुलकर विरोध किया था और उसके विरुद्ध बाकायदा प्रोपेगेंडा भी चलाया था।

समान नागरिक संहिता की आवश्यकता के पक्ष में अभी तक जो भी तर्क आते रहे हैं वह मुख्यतः मुस्लिम समाज में पालन होने वाले विवाह और तलाक़ सम्बन्धी रहे हैं। समस्या यह है कि भारत जैसे लोकतान्त्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश में मुस्लिम समाज औरों से धर्म निरपेक्षता की उम्मीद करता है पर खुद धर्मनिरपेक्ष होने के लिए तैयार नहीं है। यही कारण है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से पारित किए गए जिस प्रस्ताव में ईशनिंदा के विरुद्ध कानून बनाने की माँग की गई है। उसमें केवल मुस्लिम समाज के ईशों की निंदा की बात की गई है। इस माँग में अन्य धर्मों के धार्मिक व्यक्तित्वों के लिए की जाने वाली निंदा की चर्चा नहीं की गई।

यह बात एक लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष देश में रहने वाले एक इतने बड़े समाज के दृष्टिकोण के बारे में बहुत कुछ बताती है।

समय-समय पर यह प्रश्न पूछा जाता रहा है कि समान नागरिक संहिता के विरुद्ध खड़ा समाज क्या खुद के लिए क्रिमिनल लॉ भी मुस्लिम लॉ के अनुसार स्वीकार करेगा? इस प्रश्न को यह समाज बड़े आराम दरकिनार का देता है। वर्तमान केंद्र सरकार से न केवल उसके समर्थक बल्कि एक वृहद भारतीय समाज लंबे समय से समान नागरिक संहिता लाने की आशा रखता है। पिछले कई वर्षों से संसद के लगभग हर सत्र से पहले इस बात की चर्चा होती रही है। संसद के शीतकालीन सत्र से पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा एक बार फिर से सरकार से जो बात कही गई है उसका कितना असर होता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

पिता की मौत के बाद 10000 की ‘घर वापसी’ कराने वाला बेटा, चरण पखार आदिवासियों को मूल धर्म में ला रहे: मिलिए प्रबल प्रताप जूदेव से

छत्तीसगढ़ के जशपुर में है- पत्थलगाँव। यहीं के खूँटापानी नाम के गाँव में हाल में ‘वैदिक ज्ञान गंंगा विश्व कल्याण महायज्ञ’ सम्पन्न हुआ है। इसी यज्ञ से कुछ तस्वीरें सामने आईं जिनमें एक युवक लोगों के चरण पखार उनकी हिन्दू धर्म में वापसी करवा रहा था। इस यज्ञ के जरिए 400 परिवारों के करीब 1200 ऐसे लोगों ने घर वापसी की जो ईसाई बन गए थे।

इन तस्वीरों ने देश को बीजेपी के दिग्गज नेता रहे जशपुर राजपरिवार से जुड़े दिलीप सिंह जूदेव की याद दिला दी। वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे जूदेव इसी तरह चरण पखारकर उन आदिवासियों की मूल धर्म में वापसी करवाते थे जो ईसाई मिशनरियों के झाँसे में आ धर्म परिवर्तन कर लेते थे। अगस्त 2013 में उनके निधन के बाद से इस सिलसिले को उनके बेटे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव आगे बढ़ा रहे हैं। प्रबल छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश मंत्री भी हैं।

राजपरिवार से जुड़े होने के बावजूद प्रबल जूदेव अपने पिता की तरह ही लगातार आदिवासी इलाकों में सक्रिय रहते हैं। ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने बताया, “पिता जी के दिवंगत होने के बाद से मैं इस कार्य को आगे बढ़ा रहा हूँ। छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में हमलोग 10 हजार से अधिक लोगों की इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए घर वापसी करवा चुके हैं। कोरोना महामारी के कारण बीच में करीब दो साल हमारा यह अभियान रुक गया था। अब फिर से हम इसे गति दे रहे हैं। यह पवित्र काम है। देश निर्माण का काम है। इसे मेरे पिता ने शुरू किया और इससे जुड़कर मैं बहुत गौरवान्वित हूँ।”

भाई दूज के मौके पर ग्रामीण महिलाओं के साथ प्रबल प्रताप जूदेव

छत्तीसगढ़ के सुदूर इलाकों से धर्मांतरण और ईसाई मिशनरियों के विरोध की खबरें हाल में लगातार आ रही हैं। इस संबंध में पूछे जाने पर प्रबल कहते हैं, “प्रदेश में खासकर जनजातीय क्षेत्रों में वर्षों से धर्मांतरण हो रहा है। विरोध के बावजूद ईसाई मिशनरियाँ सुधर नहीं रहीं। वे लोभ-लालच देकर, सेवा के नाम पर सौदा कर, हमारे हिंदू-देवी देवताओं का अपमान कर भोले-भाले गरीब लोगों का धर्मांतरण कर रहे हैं। उनका ब्रेनवॉश कर रहे हैं। आखिर यह सब कब तक चलेगा? कभी न कभी आक्रोश तो सामने आएगा ही। लोग अपनी सदियों पुरानी संस्कृति, धरोहर को बचाने के लिए कुछ तो करेंगे ही। यही कारण है कि अब मिशनरियों का लगातार विरोध हो रहा है।”

धर्मांतरण की दो वजह: कॉन्ग्रेस और कोरोना

छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण के मामले बढ़ने की वे दो बड़ी वजह मानते हैं। पहली, कोरोना महामारी। दूसरी, राज्य की सत्ता में कॉन्ग्रेस का होना। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “कोरोना महामारी का फायदा उठाकर मिशनरी ने बड़े पैमाने पर लोगों को धर्मांतरित किया है। कॉन्ग्रेस की सरकार होने से भी उन्हें मदद मिल रही। जहाँ भी कॉन्ग्रेस है, मसलन आप पंजाब में ही देखिए सिखों का कितने बड़े पैमाने पर धर्मांतरण हुआ है, इस तरह की गतिविधियाँ बढ़ जाती हैं। वे इसे उद्योग की तरह चला रहे जिसके लिए फंड इटली से आ रहा है।” प्रबल कहते हैं, “उनकी नीति स्पष्ट है। तुष्टिकरण को बढ़ावा दो। धर्मांतरण होने दो। धर्मांतरित लोगों को वोट बैंक में बदलो और राज करो। यही कारण है कि कॉन्ग्रेस के शासनकाल में पूरे देश में जो हिंदुओं की दुर्दशा हुई है, वैसा कभी नहीं हुआ।”

उल्लेखनीय है कि बाइबिल का हर भाषा में अनुवाद करने के मिशन पर काम कर रही संस्था ‘अनफोल्डिंग वर्ल्ड’ के CEO डेविड रीव्स ने दावा किया था कि कोरोना महामारी के दौरान भारत में चर्चों ने 50,000 गाँवों को गोद लिया। 1 लाख लोगों का ईसाई धर्मांतरण किया गया। हर चर्च को 10 गाँवों में प्रार्थना आयोजित करने को कहा गया था। ‘मिशन न्यूज़ नेटवर्क (MNN) ऑनलाइन’ से बात करते हुए रीव्स ने कहा था कि भारत में महामारी के दौरान उतने चर्चों का निर्माण हुआ, जितने पिछले 25 सालों में हुआ था। उन्होंने कहा था, “लाखों लोग अब जीसस क्राइस्ट पर विश्वास कर रहे हैं और चर्च में प्रार्थना करने के लिए आ रहे हैं।”

ईसाई मिशनरियों के कामकाज करने के तरीके का जिक्र करते हुए प्रबल प्रताप सिंह जूदेव बताते हैं कि सुनियोजित तरीके से मिशनरियों की टीम आदिवासी इलाकों में सक्रिय हैं। वे गरीब परिवारों पर नजर रखते हैं। यह जानने की कोशिश करते हैं किसको क्या समस्या है। फिर उसके समाधान के नाम पर भोले-भाले लोगों का धर्म परिवर्तन करवा देते हैं। कभी ऐसा शिक्षा के नाम पर होता है तो कभी इलाज के नाम पर और कभी किसी और नाम पर। उन्होंने बताया कि मिशनरी अब इन आदिवासियों की पैतृक संपत्ति भी हड़प रहे हैं। बकौल जूदेव उनके पास ऐसी कई शिकायतें आई हैं जिसमें कोरवा लोगों की जमीन तक हड़प ली गई है।

उन्होंने बताया कि हिंदू देवी-देवताओं के नाम पर मिशनरी के लोग केवल दुष्प्रचार ही नहीं करते। वे ऐसे हर तरीके आजमा रहे हैं जिससे लोगों में गलत धारणा पैदा हो। वे भ्रमित हों ताकि आसानी से उनका ब्रेनवॉश हो सके। वे कहते हैं, “एक बार कोई कन्वर्ट होता है तो उसका भारत माता के प्रति समर्पण पहले जैसा नहीं रह पाता। फिर इसका फायदा उठाया जाता है। असल में यह देश तोड़ने का षड्यंत्र है। लेकिन इसके खिलाफ घर वापसी का काम भी चलता रहेगा।”

गौरतलब है कि ऑपइंडिया के बिहार चुनाव कवरेज के दौरान वहाँ के ग्रामीण इलाकों में भी इस तरह का ट्रेंड देखा था, जिसमें हिंदू देवी-देवताओं और उनके धर्मग्रंथों को लेकर गुमराह करने वाले दावे कर लोगों का धर्म परिवर्तन किया गया था। हमारे कैमरे पर ही मिशनरी से जुड़ा एक व्यक्ति ऋग्वेद और रामायण को लेकर झूठे दावे करते पकड़ा गया था। आप वह रिपोर्ट नीचे देख सकते हैं;

भाजपा नेता जूदेव के अनुसार छत्तीसगढ़ के जशपुर, सरगुजा जैसे ट्राइबल्स इलाकों में ईसाई मिशनरी ज्यादा ​सक्रिय हैं। वही अंबिकापुर जैसे इलाकों में मुस्लिम कट्टरपंथी भी बढ़ रहे हैं। वे कहते हैं, “हिंदू युवाओं को चाहिए कि वे अपने देश, अपनी संस्कृति, अपने धरोहर को पहचाने। दुनिया की इस सबसे प्राचीन संस्कृति के महत्व को समझें। हिंदुत्व को बचाने के लिए हमें संगठित होना होगा। हिंदू किसी जाति-धर्म का प्रतीक नहीं है। यह राष्ट्रीयता का प्रतीक है। धर्मांतरण का विरोध किसी और मजहब का अपमान नहीं है। लेकिन जब हमारे धर्म पर कोई आक्रमण करेगा तो हमें आत्मरक्षा के लिए खड़ा होना ही होगा। हमें बताना होगा कि न हम कन्वर्ट होंगे, न उन्हें लालच-दवाब देकर किसी को कन्वर्ट करने देंगे।”

‘नाबालिग पत्नी से शारीरिक संबंध बनाना भी बलात्कार’: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज की पति की जमानत याचिका

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने एक सुनवाई के दौरान कहा कि अगर पत्नी नाबालिग है तो उससे भी शारीरिक संबंध बनाना अपराध है। यह निर्णय हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सुनाया है। फैसले के दौरान कोर्ट ने आरोपित अजय जाटव की जमानत याचिका को ख़ारिज कर दिया। यह फैसला न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया की खंडपीठ ने सुनाया है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला आरोपित अजय जाटव की पाँचवी जमानत याचिका पर सुनाया गया है। अजय की जमानत याचिका ख़ारिज कर दी गई है। आरोपित के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 363, 376, 366 और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5/6 के तहत केस दर्ज है।

चौथी याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायालय में दलील दी गई थी कि अपराध के समय उनकी बेटी 17 वर्ष 6 माह की थी। पीड़िता की जन्म तिथि 01 फरवरी 2002 है। यही जन्मतिथि लड़की के स्कूल रिकॉर्ड में भी पाई गई थी। पीड़िता ने 16 सितंबर 2020 को एक बच्चे को जन्म दिया था। इसी आधार पर यह साबित हुआ था कि पीड़िता दिसंबर 2019 के महीने में ही गर्भवती हो गई थी।

अपने बचाव में आरोपित ने पीड़िता से शादी कर लेने की दलील दी थी, लेकिन अदालत ने इन दलीलों को दरकिनार कर दिया। अदालत के अनुसार नाबालिग पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाना भी (यानी 18 वर्ष से कम उम्र) बलात्कार की श्रेणी में ही आएगा।

यह मामला मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के रन्नोड थाने में दर्ज हुआ था। लड़की के पिता ने FIR में बताया था कि आरोपित ने 20-21 दिसंबर 2019 की रात में उनकी बेटी का अपहरण कर लिया था। बरामदगी के बाद लड़की ने अदालत में सीआरपीसी की धारा 161 तहत दिए अपने बयान में बताया था कि अजय उसे घर के आगे रात लगभग 11 बजे मिला था और शादी का वादा कर उसे बस से भोपाल ले गया। वहाँ से वे दोनों तेलंगाना के ईसानपुर चले गए। तेलंगाना के ही एक मंदिर में दोनों ने शादी कर ली थी।

‘मैं जो करता हूँ वो करता रहूँगा’ : भारत का ‘अपमान’ करने के बाद वीर दास को चाहिए यहाँ कॉमेडी के लिए ‘ज्यादा’ जगह

कॉमेडी के नाम पर भारत की बुराई करने वाले कॉमेडियन वीर दास का जगह-जगह विरोध हो है रहा लेकिन उसे अब भी अपने किए पर शर्म नहीं आ रही। उसने इंडिया टुडे से बात करते हुए फिर कहा कि वो अमेरिका में अपना काम करने के लिए आया है और उसे वो जारी रखेगा।

इंडिया टुडे से बातचीत में वह बोला, “मैं यहाँ जॉब करने आया हूँ और उसे जारी रखूँगा। मैं रुकुंगा नहीं। मेरा काम लोगों को हँसाना है और मैं हँसाता रहूँगा। अगर आपको वो हँसने लायक नहीं लगता तो मत हँसो।”

बता दें कि पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वीरदास की एक वीडियो वायरल होनी शुरू हुई थी। इस वीडियो में कई जगह उसने भारत का अपमान किया था। जब इंडिया टुडे ने उस पर उसेसे सवाल किया तो वह बोला, “मैं सिर्फ शो कर रहा था। हम बिलकुल भरे थे। वो मेरी ऑडियंस थी और वो लिखा भी मैंने ही था।”

उसने यह भी कहा कि वह खुद को भाग्यशाली मानता हैं कि उसे कभी सेंसरशिप का सामना नहीं करना पड़ा। वह बोले, “मैं भाग्यशाली रहा हूँ कि मैंने कभी सेंसरशिप एक्सपीरिएंस नहीं किया। मैंने नेटफ्लिक्स के साथ तीन कॉमेडी स्पेशल किए हैं और हमारे बीच केवल एक ही बातचीत हुई है। वह बोले ‘जाओ लोगों को हँसाओ’ और मैंने ‘ओके’ कहा।”

वीर दास ने कहा, “हमें भारत में और कॉमेडी क्लब चाहिए ताकि लोगों को हँसाया जा सके उन्हें प्यार दिया जा सके।”

गौरतलब है कि वीर दास ने 16 नवंबर को अमेरिका के जॉन एफ केनेडी सेंटर में 7 मिनट तक भारत विरोधी प्रोपगेंडा को जमकर हवा दी थी। अपने वन लाइनर्स की मदद से उसने भारत को, भारत की राजनीति को, स्थानीय मुद्दों को, पीएम मोदी को खूब कोसा और हर प्रोपगेंडाबाज की तरह उसने भारत में नारी को पूजने की जो परंपरा है उसे रेप से जोड़ा।

मंच पर खड़ा होकर वीर दास ने कहा था, “मैं उस भारत से आता हूँ जहाँ महिला को सुबह पूजा जाता है और रात में गैंगरेप होता।” अजीब बात ये है कि उसने अमेरिका में खड़े होकर भारत में हो रहे रेपों के बारे में बात की, लेकिन ये भूल गया कि अमेरिका रेप मामलों में बहुत आगे है।

इसके अलावा हिंदुओं को असहिष्णु दिखाते हुए भगवा रंग का भी मखौल उड़ाया। साथ ही साथ भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर क्रिकेट पर भी तंज कसा। इसके बाद वैश्विक स्तर पर पीएम केयर फंड पर वीर दास ने सवाल उठाए। ऐसे ही स्थानीय मुद्दों को भी उठाने से वीर दास ने गुरेज नहीं किया।