Home Blog Page 3207

‘मैं बच्ची थी तब शेख अब्दुल्ला ने कहा था- हिंदुओं से बर्तन साफ करवाऊँगा’: द कश्मीर फाइल्स को देख छलका अनुपम खेर की माँ का दर्द

कश्मीरी पंडितों की आपबीती जस की तस बयान करने के लिए विवेक अग्निहोत्री के निर्देशन में बनी ‘द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)’ साल 2022 के गणतंत्र दिवस पर रिलीज होने को तैयार है। इस फिल्म के मुख्य किरदारों में एक नाम अनुपम खेर का भी है। उन्होंने हाल में ये फिल्म अपनी माँ दुलारी के साथ बैठकर देखी और बाद में उनकी जो प्रतिक्रिया रिकॉर्ड की, वो वाकई झकझोरने वाली है।

वैसे तो अनुपम खेर ने भी लिखा है, “माँ कश्मीरी फाइल्स देखने के बाद बहुत लंबे समय के लिए चुप हो गई थीं मैंने उन्हें गले लगाया और जब अलविदा कहा तो वह प्यार से बोलीं, ‘अच्छा काम किया तूने इस फिल्म में। ये तेरा फर्ज था। दुनिया भर में रह रहे कश्मीरियों के लिए’।” अभिनेता के मुताबिक उनकी माँ की कही बात वाकई सच है। ये प्रोजेक्ट उनके लिए एक फिल्म से बढ़कर था।

ट्वीट के साथ शेयर वीडियो में जब अनुपम खेर ने अपनी माँ दुलारी से पूछा कि उन्हें फिल्म कैसी लगी तो उन्होंने बेहद गंभीर होकर कहा, “मुझे सब पता ही है वहाँ का तो मुझे वही दिखा जो किया गया है। हम 30 साल से यही देख रहे हैं कि उस समय जो बच्चा हुआ वो आज 30-32 साल का है। मेरे भाइयों को चिट्ठियाँ दी गईं कि निकल जाओ। बेचारे नना जी ने मकान बनाया था वो बेचारा इसी में मर भी गया। मेरा भाई शाम को ऑफिस से आया और दरवाजे पर चिट्ठी थी कि आज आपकी बारी है। वो लोग रामबाग में रहते थे तो रात में निकलें। जो ट्रक रात में चलते थे वे उसी में बैठकर निकल गए। उनके बच्चे दिल्ली में पढ़ रहे थे। उन्हें एक ग्लास पानी भी नहीं मिला।”

अनुपम खेर की माँ दुलारी कहती हैं, “मुझे सब कुछ पता है क्या किया उन्होंने। जिसने भी ये फिल्म बनाई उसने बहुत अच्छा किया। हम हिंदुओं के लिए बहुत अच्छा किया। मोदी तो बेचारा कर ही रहा है। लेकिन इस फिल्म से पता चलेगा कश्मीरियों के साथ क्या हुआ। अब तक बाहर वालों को क्या पता कि हमारे साथ क्या हुआ था। वो लोग तो हमारी दौलत, हमारा सामान सब कुछ ले गए। सबको ऐसे निकाला जैसे फकीर हों।”

वो स्तब्ध होकर कहती हैं कि इस फिल्म में जो चीजें दिखाई गईं उनके बारे में वह जानती थीं। वह अब्दुल्ला परिवार का जिक्र करते हुए कहती हैं, “शेख अब्दुल्ला ने कहा कि ये लोग मुसलमानियों से बर्तन धुलवाते हैं मैं हिंदुओं से करवाऊँगा। उस समय मैं छोटी सी थी। जैसे ये मुसलमानियों के साथ करते हैं मैं इनके साथ ऐसे ही करूँगा। उस समय मेरा मामा भी नेता था। अब्दुल्लाह ने जो कहा वही किया। ऐसे निकाल दिया जैसे यतीम हैं। भगवान इन लोगों से जरूर बदला लेगा।”

यहाँ बता दें कि विवेक अग्रिहोत्री द्वारा बनाई गई द कश्मीरी फाइल्स को लेकर अब तक दावा है कि इसमें 90 के दशक में कश्मीरी पंडितों पर हुआ अत्याचार बिना किसी प्रोपगेंडे के दिखाया गया है। उनकी पीड़ा और दर्द वैसा का वैसा प्रस्तुत है। ये फिल्म 26 जनवरी 2022 को रिलीज होगी।

कुछ समय पहले कश्मीर की हकीकत जानने के लिए लोग शिकारा फिल्म पर आश्रित हुए थे। लेकिन बाद में पता चला कि ये फिल्म कश्मीर के हालत बयान करने से ज्यादा किसी जोड़ की लव स्टोरी पर केंद्रित है। कई जगह इस फिल्म का विरोध हुआ था। कश्मीरी पंडितों ने शिकारा को उनकी फीलिंग से खिलवाड़ बताया था।

58% ने माना PM हैं किसान हितैषी, 52% ने कहा- कानून वापस लेने का फैसला ठीक: देश में मोदी का जलवा बरकरार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को खत्म करने के बाद हर किसी के मन में इस बात को लेकर प्रश्न था कि सरकार के इस फैसले से लोगों मोदी की लोकप्रियता पर कितना फर्क पड़ने वाला है। अब इस मुद्दे पर IANS C voter snap opinion poll जारी किया गया है। देश भर में किए गए इस सर्वेक्षण में 52 प्रतिशत से भी अधिक लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले को सही ठहराया, यानि कि पीएम मोदी अभी भी बरकरार है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में 50 फीसदी से अधिक लोगों ने माना कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानून अच्छे और ये किसानों के हित में थे। वहीं, 30.6 प्रतिशत लोगों का मानना है कि ये कानून बेकार थे और इन्हें निरस्त किया जाना ही सही था। 40.7 फीसदी लोगों ने कृषि कानून को रद्द करने का श्रेय मोदी सरकार को दिया, जबकि 22.4 प्रतिशत लोगों का मानना है कि विपक्ष के लगातार विरोध के कारण सरकार दबाव में आई और उसने इन कानूनों को वापस ले लिया। वहीं, 37 प्रतिशत लोगों ने कृषि कानूनों को वापस लेने का श्रेय किसानों को दिया।

58 प्रतिशत लोगों ने पीएम मोदी को किसान समर्थक बताया

इस सर्वे में 58.6 फीसदी लोगों ने पीएम मोदी पर अपना भरोसा जताया और उन्हें किसान समर्थक बताया। वहीं, 29 फीसदी लोगों का मानना था कि पीएम मोदी किसान विरोधी हैं। सर्वे के मुताबिक, विपक्ष के भी 50 फीसद से अधिक मतदाताओं ने पीएम मोदी को किसानों का हित चाहने वाला यानि किसान समर्थक करार दिया है। वहीं 56.7 फीसदी लोगों का मानना था कि कृषि कानूनों का विरोध केवल एनडीए सरकार को कमजोर करने की राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। जबकि, 35 फीसदी लोग ऐसा नहीं मानते हैं।

विधानसभा चुनाव में बीजेपी को होगा इसका फायदा

इस सर्वे के मुताबिक, कृषि कानून को लेकर हो रही राजनीति अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में की रोल निभा सकती है। सर्वे में शामिल 55.1 फीसदी लोगों ने कहा है कि मोदी सरकार को इसका सियासी फायदा मिलने वाला है, जबकि 30.08 फीसदी लोगों का ये मानना था आने वाले चुनावों में इसका किसी तरह का कोई प्रभाव नहीं होगा।

लोगों ने माना राजनीतिक विरोध है किसान आंदोलन

वह बात जो लंबे वक्त से समाज का एक वर्ग कहता रहा है कि किसान आंदोलन राजनीतिक है, उसे इस सर्वे ने सही साबित किया है। करीब 56.7 फीसदी लोगों ने इस बात को स्वीकार किया है कि कृषि कानून के खिलाफ हो रहा विरोध राजनीति से प्रेरित था।

‘POK को वापस हासिल करना मोदी सरकार का अगला कदम’: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने मीरपुर में पाक सेना के नरसंहार को किया याद

केंद्र के तीन महत्वाकांक्षी कृषि कानूनों को रद्द करने के बाद जारी राजनीति के बीच केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के अगले कदम के बारे में स्पष्ट कर दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र का अगला कदम पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर को हासिल करना है। उन्होंने कहा कि भारत इसके लिए तैयार है।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि हमेशा कहा जाता था कि जम्मू-कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 को खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा किया। इसी तरह पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर को भी हासिल किया जाएगा और यह संकल्प पूरा होकर रहेगा। उन्होंने कहा कि जिस नेतृत्व ने अनुच्छेद 370 को खत्म किया, उसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के हिस्से को भी वापस हासिल लेने की इच्छाशक्ति और क्षमता है।

राज्यमंत्री ने कहा कि पीओके को हासिल करना भाजपा के लिए सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, यह राष्ट्रीय एजेंडा के साथ-साथ मानवाधिकारों के सम्मान की भी लड़ाई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में हमारे भाई-बहन अमानवीय परिस्थितियों में जी रहे हैं। उन्हें ना शिक्षा की सुविधा दी जा रही है और ना स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की अदूरदर्शिता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने आजादी के समय 560 से अधिक रियासतों का भारत में विलय कराया था। लेकिन, जम्मू-कश्मीर के मामले से उन्हें बाहर रखा गया था, क्योंकि प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जम्मू-कश्मीर को अपने स्तर पर संभालना चाहते थे।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि अगर सरदार पटेल को जम्मू-कश्मीर में भी कार्रवाई करने दी जाती तो आज भारत का इतिहास और भूगोल कुछ और होता। जब 1947 में पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर पर हमला किया, उस समय नेहरू ने जम्मू-कश्मीर में सेना भेजने में आनाकानी की थी और जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके को वापस लेने की कार्रवाई शुरू की तो उसे रोक दिया गया।

इसके पहले सेना प्रमुख भी कह चुके हैं कि पीओके लेने सेना तैयार है। सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे ने साल 2020 में ही कहा था कि अगर संसद निर्देश जारी कर दे तो भारतीय सेना पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) को वापस लेने के लिए उचित कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

जितेंद्र सिंह ने यह बात दिल्ली में आयोजित ‘मीरपुर बलिदान दिवस’ को समर्पित एक कार्यक्रम में रविवार को कही। मीरपुर बलिदान दिवस हर साल 25 नवंबर को मनाया जाता है। पाकिस्तान ने 75 साल पहले 25 नवंबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के मीरपुर-कोटली पर कब्जा कर लिया था। पाकिस्तानी सेना ने वहाँ लोगों को यातनाएँ देकर हजारों लोगों का नरसंहार किया था। इस बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर से हजारों लाेग पलायन कर जम्मू-कश्मीर में आ गए थे। 

मीरपुर बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान पीओके से पलायन कर दिल्ली में बसे परिवारों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट देने के लिए विशेष कैंप भी लगाया गया। इस दौरान जितेन्द्र सिंह ने सभी लोगों से अपने डोमिसाइल सर्टिफिकेट बनाने की भी अपील की।

भगवाधारी महंत के कंधे पर देश के सबसे बड़े नेता का हाथ: लखनऊ राजभवन के गलियारों से निकला सन्देश, जिसने ध्वस्त किए कई नैरेटिव

राजनीति में प्रतीकों का बड़ा महत्व है। जब-जब हम ये भूलना चाहते हैं, कोई मंझा हुआ राजनेता इसकी याद दिला देता है। अब कुछ दिन पहले का ही एक वीडियो ले लीजिए। पूर्वांचल एक्सप्रेस के उद्घाटन के दौरान सुल्तानपुर में प्रोटोकॉल्स के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गाड़ी थोड़ा आगे क्या रुकी, पीछे पैदल चलते उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वीडियो के सहारे समजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने ये जताने की कोशिश की कि भाजपा में सब ठीक नहीं है।

अखिलेश यादव के उस दावे का जवाब रविवार (21 नवंबर, 2021) को मिल गया। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित राजभवन के गलियारे में नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ साथ में दिखे। सीएम योगी के कंधे पर पीएम मोदी का हाथ था और दोनों गहन चर्चा में मशगूल दिख रहे थे। इस तस्वीर को देख कर ऐसा लगता है कि एक अभिभावक की तरह 71 वर्षीय मोदी कुछ समझा रहे हैं और उनसे 22 साल छोटे योगी उनकी बातों को ध्यान से सुन रहे हैं।

लखनऊ में चल रहे ‘अखिल भारतीय पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक सम्मेलन’ के दौरान जब मंच पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और इसी विभाग के राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ मंच पर दिखे तो विरोधी कहने लगे कि मेजबान राज्य के मुख्यमंत्री को ही जगह नहीं मिली। उससे पहले कॉन्ग्रेस और सपा के विभिन्न नेताओं और ट्विटर हैंडलों से तंज कसा गया कि ‘मोदी ने योगी को पैदल कर दिया।’ खास बात ये है कि जो सोनिया गाँधी तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कुर्सी से उठा देती थीं, उनकी पार्टी के लोग भी ऐसे आरोपों में मशगूल रहे।

‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जन्मदिन की बधाई नहीं दी’ – एक नैरेटिव ये भी

इसी तरह 5 जून, 2021 को जब योगी आदित्यनाथ का जन्मदिन आया तो पूरा का पूरा लिबरल गिरोह ये कहने में लग गया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई नहीं दी है, इसीलिए दोनों नेताओं में सब ठीक नहीं है। उस समय कोरोना वायरस संक्रमण अपने पूरे प्रभाव में था और दूसरी लहर के दौरान सीएम योगी और पीएम मोदी, दोनों ही ऑक्सीजन की सप्लाई से लेकर अस्पतालों में बेड्स की व्यवस्था जैसे कार्यों में व्यस्त थे। लगातार बैठकें हो रही थीं। टीकाकरण अभियान तेज़ करने पर मंथन हो रहा था।

उत्तर प्रदेश में पहले से ही पैदल हो चुके विपक्ष ने भी मुद्दे को लपक लिया। कयास लगाए जाने लगे कि भाजपा के दो बड़े नेताओं में सब ठीक नहीं है। अंदेशा जताया जाने लगा कि योगी आदित्यनाथ 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा का चेहरा होंगे भी या नहीं। उन्हें भाजपा के शीर्ष आलाकमान का वरदहस्त नहीं हासिल है, ऐसा मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जाने लगा। जब देश के लिए स्वास्थ्य सुविधाएँ प्राथमिकता थीं, विपक्ष और पत्रकारिता का एक गिरोह राजनीति में मशगूल रहा।

वो ये भूल गए कि अप्रैल 2021 में कोरोना की दूसरी लहर आने के बाद से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से जन्मदिन की बधाइयाँ देनी बंद कर दी थी, क्योंकि देश का माहौल ग़मगीन था और हम महामारी से जूझ रहे थे। ऐसे में उन्हें सोशल मीडिया पर ऐसा करना अच्छा नहीं लगा। 24 अप्रैल को गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, 3 मई को केंद्रीय आदिवासी कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, 5 मई को हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर को भी उन्होंने जन्मदिन की बधाई नहीं दी थी।

इसी तरह 18 मई को थावर चंद गहलोत (तब केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता, अब कर्नाटक के राज्यपाल), 24 मई को केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, और 27 मई को केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को भी उन्होंने जन्मदिन की बधाई नहीं दी थी। इसीलिए, सेलेक्टिव तरीके से योगी वाली बात उठाई गई। हालाँकि, जैसे ही कोरोना का प्रकोप ख़त्म होना शुरू हुआ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछेक नेताओं को जन्मदिन की बधाई दी और कई कार्यक्रमों का भी हिस्सा बने।

उत्तर प्रदेश में यही होगा भाजपा का प्रतीक चिह्न: योगी के कंधे पर मोदी का हाथ

जून महीने में ही जब योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली दौरा किया और पार्टी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की, भाजपा विरोधी फिर सक्रिय हो गए और कहने लगे कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री बदला जाएगा। बता दें कि इस साल भाजपा ने गुजरात (विजय रुपानी को हटा कर भूपेंद्र पटेल), उत्तराखंड (त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटा कर तीरथ सिंह रावत, फिर उन्हें हटा कर पुष्कर सिंह धामी) और कर्नाटक (बीए येदियुरप्पा को हटा कर बसवराज बोम्मई) में मुख्यमंत्री बदले हैं।

इसी तरह उस समय कहा जा रहा था कि योगी को भी बदला जाएगा। हालाँकि, देखा जाए तो एक लोकतांत्रिक पार्टी में इस तरह के बदलाव होते रहने चाहिए और एक ही परिवार से पार्टी अध्यक्ष और सीएम-पीएम वाला चलन नहीं होना चाहिए। लेकिन, इसे गलत तरीके से पेश किया गया। उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार भी सितंबर 2021 में हुआ। उस सम्बन्ध में बैठकों को भी ‘योगी को हटाने की चर्चा’ से जोड़ कर देखा गया। मीडिया और विपक्ष ने जम कर चटखारे लिए।

लेकिन, अब स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ ही भाजपा का चेहरा होंगे। नरेंद्र मोदी इस समय न सिर्फ भाजपा, बल्कि देश के सबसे बड़े नेता हैं। ऐसे में उनका हाथ गोरक्षधाम पीठ के भगवाधारी महंत के कंधे पर है, पार्टी ने ये जता दिया है। जब भी उत्तर प्रदेश का नाम आता है, मीडिया जाति का गणित बिठाने लग जाता है। अब वही मीडिया अपने विश्लेषण में कह सकता है कि 35% नॉन-यादव OBC और 7% राजपूत जनसंख्या को लुभाने के किए ये तस्वीर ली गई है।

लेकिन, सच्चाई ये है कि जिस तरह योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में कहा कि अगली कारसेवा में कृष्णभक्तों पर गोली चलने की जगह फूल बरसेंगे, उससे साफ़ है कि वो हिन्दुओं को एकजुट कर और साथ रख कर चलना चाहते हैं। कई इंटरव्यूज में मुस्लिम विरोधी छवि के आरोपों पर गिना चुके हैं कि किस तरह सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों में सभी जाति-समुदायों के लोग हैं। लखनऊ राजभवन के गलियारे से जो संदेश निकला है, उसकी गूँज 4-5 महीने बाद आने वाले नतीजों में भी सुनाई देगी।

अखिलेश यादव के समर्थन में हुसैन-करीमुल्लाह ने मोदी-योगी को बकी गालियाँ, PM की वृद्ध माँ को भी नहीं बख्शा: अब हो रहा ‘माकूल इलाज’

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश के समर्थक अपनी मर्यादाओं की सीमाएँ लाँघ रहे हैं। इसी क्रम में देवरिया जिले में एक अखिलेश समर्थक को सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल भारी पड़ गया। पुलिस ने आरोपित हुसैन खान को गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना देवरिया जिले के देवरिया कोतवाली के अंतर्गत आने वाले पोखरभिंडा गाँव की है। यहीं का रहने वाला हुसैन खान अखलेश यादव का समर्थक है। लेकिन अपने समर्थक होने का दायित्व निभाने के चक्कर में वह मर्यादाओं की सीमाओं को भी लाँघ दिया। उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अखिलेश को सपोर्ट करते हुए पीएम मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को भद्दी गालियाँ। इस तरह के अपशब्द वाली उसकी पोस्ट वायरल हो गई।

पोस्ट वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने आरोपित के खिलाफ पुलिस में शिकायत कर उस पर कार्रवाई करने की माँग की। मामले में संज्ञान लेते हुए रविवार (21 नवंबर 2021) को पुलिस ने आरोपित हुसैन को पकड़ लिया। इस घटना की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने ट्वीट किया, “ये है देवरिया का हुसैन खान, हुसैन खान को प्रधानमंत्री जी एवं मुख्यमंत्री जी के लिए अपशब्दों का प्रयोग करने की बीमारी थी। फिलहाल पुलिस ने इसे गिरफ़्तार कर लिया है और अब इसकी इस बीमारी का ‘माकूल इलाज’ निरंतर जारी है, आपके इर्द गिर्द भी ऐसे बीमार मिलें तो तत्काल उनका ‘माकूल इलाज’ कराएँ।”

देवरिया पुलिस ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि अभियुक्त को हिरासत में लेकर आगे की कार्यवाही की जा रही है।

इसी तरह का एक और मामला देवरिया से ही सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में देखा जा सकता है कि आरोपित मुस्लिम युवक नशे में पीएम नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ माँ-बहन का गालियों का इस्तेमाल कर रहा है। आरोपित ने पीएम मोदी की वृद्ध माँ के लिए बहुत ही अश्लील शब्दों का इस्तेमाल किया। आरोपित देवरिया के बलौचघाट थाना क्षेत्र के मेदी पट्टी गाँव के बेलवनीया टोला का रहने वाला है। उसका नाम करीमुल्लाह है और उसके अब्बू का नाम सिराज है।

इस मामले में शलभ मणि त्रिपाठी ने भी ट्वीट किया, “निकृष्ट प्राणी करीमुल्लाह को धर लिया गया है। निरंतर माकूल इलाज जारी है।”

‘किसान आंदोलन ख़त्म नहीं होगा’: बैठक के बाद संयुक्त मोर्चे का ऐलान, अब लखनऊ में होगी महापंचायत, नई माँगों की फेहरिस्त

किसान जिन तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे, उसे मोदी सरकार ने वापस ले लिया है। बावजूद इसके किसान अभी आंदोलन खत्म करने के पक्ष में नहीं हैं। वो लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में आगे की रणनीति क्या हो इसके लिए रविवार (21 नवंबर 2021) को संयुक्त किसान मोर्चा ने बैठक की और आंदोलन को जारी रखने का निर्णय लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष बलवीर सिंह राजेवाल और जतिंदर सिंह विर्क ने 22 नवंबर को लखनऊ में होने वाली किसान महापंचायत का ऐलान किया और कहा कि वे लोग 27 नवंबर को आंदोलन के अगले चरण को लेकर विचार करेंगे। राजेवाल के मुताबिक, जब तक केंद्र सरकार एमएसपी की गारंटी और दूसरी माँगों को मान नहीं लेती तब तक प्रधानमंत्री के ऐलान का स्वागत नहीं किया जाएगा।

राजेवाल ने ये भी कहा कि किसान संगठनों की ओर से एमएसपी गारंटी बिल के कमेटी, बिजली बिल माफ करने और पराली को गैरकानूनी बताने वाले कानून को रद्द करने जैसी माँगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ओपन लेटर लिखा जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि लखीमपुर खीरी हिंसा के मामले में केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की माँग करेंगे।

राजेवाल ने ये भी कहा, “सरकार चर्चा के लिए बुलाएगी तो हम जरूर चर्चा के लिए जाएँगे। 27 नवंबर को जो भी हालात बनेंगे, उसके अनुसार फैसला लिया जाएगा। सरकार का फैसला स्वागत योग्य हैं, लेकिन काफी कुछ अभी बाकी है।”

गौरतलब है कि शुक्रवार (19 नवंबर 2021) को देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की थी। इसके साथ ही उन्होंने आंदोलनरत किसानों से अपने-अपने घर लौटने का आग्रह किया था। साथ ही प्रधानमंत्री ने किसानों के एक वर्ग को इन कानूनों के बारे में नहीं समझा पाने के लिए देश से माफी भी माँगी थी।

TMC नेता सायोनी घोष को त्रिपुरा पुलिस ने हत्या के प्रयास के जुर्म में किया गिरफ्तार, BJP कार्यकर्ताओं पर गाड़ी चढ़ाने का आरोप

युवा तृणमूल कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष और अभिनेत्री सायोनी घोष को त्रिपुरा पुलिस ने हत्या के प्रयास में अगरतला से गिरफ्तार किया है। घोष को सोमवार को कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी सोमवार (22 नवंबर 2021) को त्रिपुरा के दौरे पर जा रहे हैं। उनके इस दौरे से पहले सायोनी घोष की गिरफ्तारी से सियासी पारा चढ़ गया है।

टीएमसी के मुताबिक, सायोनी घोष जिस होटल में ठहरी थीं, वहाँ त्रिपुरा पुलिस गई और सायोनी घोष को पूछताछ के लिए थाने बुलाई। टीएमसी का कहना है कि पुलिस ने सायोनी को यह नहीं बताया कि आखिर किस मामले में पूछताछ के लिए उन्हें बुलाया जा रहा है। जब टीएमसी नेता कुणाल घोष सहित कई कार्यकर्ता थाने पहुँचे तब पता चला कि भाजपा कार्यकर्ताओं पर गाढ़ी चढ़ाने का आरोप लगाते हुए सायोनी को हत्या का प्रयास में गिरफ्तार किया गया है।

वहीं, तृणमूल कॉन्ग्रेस के सदस्यों ने अगरतला स्थित एक पुलिस स्टेशन के भीतर बीजेपी कार्यकर्ताओं पर पीटने का आरोप लगाया। टीएमसी का आरोप है कि थाने में राज्य पुलिस के सामने बीजेपी के लोगों ने उन्हें लाठियों से पीटा और पथराव भी किया। हालाँकि, बीजेपी ने इस तरह के आरोपों को आधारहीन बताया है।

टीएमसी का आरोप है कि थाने पहुँचने के कुछ मिनट बाद जब सायोनी घोष पूछताछ के लिए गई तो करीब 25 भाजपा कार्यकर्ता हेलमेट पहने और हाथ में लाठियाँ लेकर वहाँ पहुँचे और थाने के अंदर ही टीएमसी के कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया। टीएमसी का दावा है कि इस हमले में टीएमसी के कई कार्यकर्ता घायल हुए हैं।

टीएमसी कार्यकर्ता कुणाल घोष ने त्रिपुरा में जंगलराज का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “सायोनी घोष को अन्यायपूर्ण तरीके से गिरफ्तार किया गया। धिक्कार है त्रिपुरा सरकार को। थाने में हमलावरों को गिरफ्तार नहीं किया गया। सायोनी को गिरफ्तार कर लिया गया।”

इस मामले में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें एक व्यक्ति का खून बह रहा है और पुलिसकर्मी उपद्रवियों को खदेड़ते देखे जा रहे हैं। उन्होंने लिखा, “बिप्लब देब इतने बेशर्म हो गए हैं कि अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी उन्हें परेशान नहीं करते हैं। उन्होंने बार-बार हमारे समर्थकों और हमारी महिला उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय उन पर हमला करने के लिए गुंडे भेजे हैं। भाजपा की सरकार में लोकतंत्र का मजाक उड़ाया जा रहा है।”

हालाँकि, त्रिपुरा भाजपा के प्रवक्ता नरेंद्र भट्टाचार्य ने टीएमसी के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा की जनता टीएमसी नेताओं से बहुत नाराज है।

‘फिल्म फ्लॉप होती है तो खुद को कमरे में बंद कर के फूट-फूट कर रोता हूँ’: आमिर खान ने कहा – ‘रिलीज से पहले उड़ जाती है नींद-भूख’

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा है कि जब उनकी फ़िल्में फ्लॉप हो जाती हैं तब वो खुद को कमरे में बंद कर के बहुत रोते हैं। आगे उन्होंने कहा कि हिट फिल्मों से भी उनकी आँखों में आँसू आ जाते हैं लेकिन वो आँसू ख़ुशी के होते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि मैं बड़ी जल्दी रोने लगता हूँ। उन्होंने बताया कि वो रामगोपाल वर्मा द्वारा अपने खिलाफ दिए गए पहले के कुछ बयानों से खुश नहीं हैं।

आमिर खान ने ये भी बताया कि फिल्म दिल की शूटिंग के दौरान वो सेट पर ही रोने लगे थे। ऐसा इसलिए हुआ था क्योकि वो ठीक से डांस नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने कहा कि वो खुद से ही निराश और नाराज हो रहे थे जब सरोज खान उनके पास आ कर उन्हें डांस स्टेप दुबारा समझा रही थीं। उस समय मैं भी सबके आगे अपने आँसुओं को नहीं रोक पाया था। खान ने कहा कि जब उनकी फिल्म रिलीज होने वाली होती है तब वो बेहद तनाव में होते हैं। 3 से 4 हफ्ते तो उन्हें ठीक से भूख भी नहीं लगती।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार फिल्म निर्माता रामगोपाल वर्मा द्वारा रंगीला फिल्म में आमिर खान को अच्छा कलाकार न बताने के सवाल पर भी आमिर खान ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि, ‘मैं उसके बाद उनसे (रामगोपाल) नहीं मिला। यहाँ तक कि अगर मैं उनसे अब कभी मिला तो मैं उन्हें अनदेखा कर दूँगा। ऐसा इसलिए क्योंकि मैं पाखंडी नहीं हूँ। अपने बयानों से उन्होंने मुझे यह जानने का मौक़ा दे दिया कि वो किस तरह के इंसान हैं। निश्चित रूप से वो अपने बयानों के लिए स्वतंत्र हैं। पर मैं भी उसी तरह से स्वतंत्र हूँ।

रामगोपाल के बयान में आमिर खान को क्या बुरा लगा इसे उन्होंने आगे बताया। उन्होंने कहा कि, “मैं हैरान हूँ कि जब फिल्म रंगीला की शूटिंग चल रही थी तब उन्हें मुझ से ठीक उसी तरह कोई शिकायत नहीं थी जैसे कि मुझे उनसे नहीं।” रंगीला फिल्म रिलीज होने के 3 दिन बाद रामू ने सन एन सैंड में एक पार्टी रखी थी। उस समय उनकी आँखों में आँसू थे। उन्होंने मुझसे कहा कि’ ‘मैंने आपसे बहुत कुछ सीखा।”

आमिर खान ने आगे कहा, “तब मीडिया ने मेरे बारे में इस बात का प्रचार किया था कि मैं उस डायरेक्टर के काम में हस्तक्षेप करता हूँ जिसके साथ मैं काम करता हूँ। जबकि मैं सिर्फ सलाह भर देता हूँ। अंतिम निर्णय डायरेक्टर स्वयं लेते हैं।”

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने स्वीकार की सिद्धू की चुनौती: जहाँ से 10 बार जीत चुके हैं पति-पत्नी, वहीं से लड़ेंगे विधानसभा चुनाव

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि वो पटियाला से ही विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। बता दें कि पटियाला उनका गढ़ है और 2002, 2007 और 2012 में जीत कर उन्होंने यहाँ से हैट्रिक लगाई थी। 2017 में उन्होंने फिर यहीं से विधानसभा चुनाव लड़ा और मुख्यमंत्री बने। बीच में 2014 में हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी प्रणीत कौर ने जीता था। उनकी पत्नी पटियाला लोकसभा क्षेत्र से 1999, 2004 और 2009 में जीत की हैट्रिक लगा चुकी हैं।

2019 में भी प्रणीत कौर ने ही पटियाला लोकसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की, ऐसे में फ़िलहाल वहाँ की लोकसभा और विधानसभा, दोनों सीटों पर पति-पत्नी का ही कब्ज़ा है। 1980 में भी कैप्टन अमरिंदर सिंह को पटियाला ने ही पहली बार सांसद बनाया था। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ऐलान किया, “पिछले 400 वर्षों से पटियाला हमारे साथ रहा है नवजोत सिंह सिद्धू की वजह से मैं इसे नहीं छोड़ूँगा।” इस साल नवजोत सिंह सिद्धू ने चुनौती दी थी कि वो पटियाला से उनके सामने चुनावी मैदान में उतर कर दिखाएँ।

नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं। पंजाब में अकाली दल और कॉन्ग्रेस के बीच ही अब तक मुख्य लड़ाई होती रही है, लेकिन पिछले चुनावों में AAP की एंट्री के बाद यहाँ की राजनीति में तीन मोर्चे हो गए हैं। अब भाजपा द्वारा कृषि कानूनों को वापस लेने और कैप्टन अमरिंदर सिंह की नई पार्टी के साथ गठबंधन के संकेतों के बाद चौथा मोर्चा उभरते भी दिख रहा है। ऐसे में कॉन्ग्रेस की बेचैनी बढ़नी तय है। कैप्टन अमरिंदर सिंह पटियाला राजपरिवार का हिस्सा हैं और उनके पूर्वज यहाँ राज़ करते थे।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, “ये ख़ुशी की बात है कि तीनों कृषि कानूनों को ख़त्म किया गया। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद। झगड़ा इन्हीं कानूनों को लेकर हुआ था। बाकी माँगों के लिए बैठ कर बात करनी पड़ेगी, वरना ये कभी ख़त्म नहीं होगा। पीएम और उनकी टीम के साथ बैठ कर या कमिटी बनवा कर किसान आगे बढ़ें। अब किसान वहाँ क्यों बैठे हुए हैं? अपने घर में जाकर ख़ुशी मनाएँ। मैं अमित शाह को कह कर आया हूँ कि किसानों वाला मसला ख़त्म होने के बाद उनकी नई पार्टी भाजपा के साथ सीट शेयरिंग पर बात करेगी।”

बता दें कि सिद्धू लगातार अब भी विवादों में बने हुए हैं। करतारपुर साहिब पहुँचे पंजाब कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को अपना बड़ा भाई बता डाला। उन्होंने कहा कि इमरान खान ने उनके ‘बड़े भाई’ की तरह हैं और उन्होंने उन्हें काफी प्यार दिया है। हाल ही में इमरान खान की सरकार ने भी करतारपुर कॉरिडोर खुलने में नवजोत सिंह सिद्धू की भूमिका बताते हुए उनकी तारीफ़ की थी। 2018 में नवजोत सिंह सिद्धू इस्लामाबाद में इमरान खान के शपथग्रहण समारोह में हिस्सा लेने भी पहुँचे थे।

‘मैं मुस्लिम हूँ और तुम्हारे मकान की दोगुनी कीमत दूँगा’: भरूच में हिंदुओं को विदेशी नंबरों से आ रहे कॉल-मैसेज, बेचने का बनाया जा रहा दबाव

गुजरात के भरूच जिले के सोनी फलिया के निवासियों को आजकल विदेशों से कॉल और मैसेज आ रहे हैं, जिनमें उन्हें अपना मकान बेचने का दबाव बनाया जा रहा है। मैसेज करने वाला उन्हें मकान के लिए मुँह-माँगी कीमत देने का भी लालच दे रहा है। मैसेज करने वाला अपना परिचय सिर्फ ‘मुस्लिम’ के रूप में देता है। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि विदेशी नंबर से मैसेज करने वाले शख्स ने उससे अपना मकान बेचने के लिए बोला और कहा कि वह मकान की वास्तविक से अधिक कीमत देने को तैयार है।

भरूच के हाथीखानी इलाके के एक स्थानीय निवासी को TV9 गुजराती के पत्रकार से यह कहते सुना जा सकता है कि एक अज्ञात व्यक्ति फोन पर उसके मकान का दाम पूछ रहा है। उसने अपनी पहचान बताने से भी मना कर दिया और उसके 75 लाख के मकान के लिए 1 करोड़ रुपये का ऑफर दिया। स्थानीय व्यक्ति के अनुसार, “हमें लगता है कि यह हिन्दुओं को यहाँ से भगाने की एक साजिश है। अपने घर पर ‘मकान बिकाऊ है’ का पोस्टर लगाने वाले लगभग चार लोगों को ऐसे मैसेज आए हैं।”

अक्टूबर 2021 में ऑपइंडिया ने बताया था कि सोनी फलिया के निवासियों ने इलाके में जनसांख्यिकीय बदलाव और डिस्टर्ब एरिया ऐक्ट ठीक से लागू नहीं करने के विरोध में अपने घरों पर ‘मकान बिकाऊ है’ का पोस्टर लगाया था। स्थानीय निवासी का कहना है कि अगर बिना मकान देखे ही कोई उसकी इतनी कीमत लगा रहा है तो यह कोई साजिश ही है। संदेश भेजने वाले ने तो यहाँ तक कहा कि अगर लोग बेचना चाहें तो वह पूरी चॉल को ही खरीदने को तैयार है।

वहीं के एक अन्य निवासी का कहना है कि “मकान बिकाऊ हैं” के पोस्टर उस क्षेत्र में डिस्टर्ब एरिया एक्ट (Disturbed Areas Act) को लागू करने की तरफ ध्यान दिलाने के लिए है। उनका कहना है कि वो इस तरफ सरकार का कई बार ध्यान खींच चुके हैं। अब तो हमें विदेशों से फोन भी आने शुरू हो गए हैं। यह कॉल व्हाट्सएप पर आ रही हैं, जिसे वे रिकॉर्ड भी नहीं कर पा रहे हैं।

स्थानीय निवासियों ने शक जताया कि यह सब हिन्दुओं को वहाँ से हटाने की साजिश हो सकती है। उन्होंने भरूच के कांकरिया गाँव का जिक्र किया, जहाँ बड़े स्तर पर धर्मान्तरण कराने वाला रैकेट सक्रिय है। पिछले हफ्ते 9 आरोपितों पर वसावा आदिवासी समुदाय के 100 लोगों का धर्मान्तरण कर इस्लाम कबूल करवाने का केस दर्ज हुआ था। इन सभी को पैसा, रोजगार और शादियाँ कराने का लालच दिया गया था।

एक अन्य निवासी ने बताया कि यहाँ पूरा क्षेत्र ही धर्मान्तरित हो रहा है। उनका कहना है कि संभवतः यह परखने के लिए हो रहा है कि हम कब तक नहीं टूटने वाले। इसकी शिकायत उन्होंने पुलिस में करने की कही गई है। इलाके के एक अन्य निवासी का कहना है कि इससे पहले जो भी मकान मुस्लिमों को बेचे गए हैं, उनमें डिस्टर्ब एरिया एक्ट लागू होने के बावजूद कानून का ठीक से पालन नहीं किया गया है। इसकी शिकायत प्रशासन से करने का भी कोई फर्क नहीं पड़ा। इसी अनदेखी के चलते आज उन्हें विदेशों से फोन आने लगे हैं। यहाँ असंतुलन फैलाने के लिए विदेशी फंडिंग भी की रही है। उन्होंने बताया कि व्हाट्सएप पर मकान मुँह-माँगे दाम पर खरीदने वाला खुद को केवल ‘मुस्लिम’ बताता है।

एक अन्य स्थानीय निवासी गुरंग राणा ने व्हाट्सएप पर आए मैसेज को दिखाया। उन्हें भी 1 करोड़ रुपये का ऑफर किया गया था। उनका कहना है कि मैसेज भेजने वाले ने पहचान पूछे जाने पर कहा, “इससे तुमको क्या मतलब? तुम्हें सिर्फ पैसे से मतलब होना चाहिए। अगर तुम्हें मैं जरूरत से ज्यादा देने को तैयार हूँ तो तुम्हें दिक्कत क्या है?”

व्हाट्सएप चैट

2 सितंबर 2020 को गुजरात के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में फलिया के स्थानीय निवासियों ने लिखा, उन्होंने प्रशासन को कई बार इन जनसंख्या में हो रहे बदलाव और मुस्लिमों को अवैध तरीके संपत्तियों के हस्तांतरण के बारे में बताया। यह क्षेत्र मुस्लिम बहुल बन चुका है। अगर ऐसे ही चलता रहा तो कुछ समय बाद सड़कों पर खुलेआम जानवर काटे जाएँगे। इससे हिन्दुओं को दिक्क़ते आएँगी, खासकर शाकाहारी महिलाओं और बच्चों को। इसी के साथ भविष्य में हिन्दुओं के त्योहारों में भी व्यवधान डाला जाएगा। पहले से ही मुस्लिम जालाराम बप्पा और शिव मंदिर में भजन-कीर्तन बंद करवा चुके हैं।

स्थानीय निवासियों ने पहले की घटनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शुरुआत में 1 या 2 मुस्लिमों ने ही ऊँचे दामों पर मकान खरीदे। इसके बाद इस क्षेत्र में अन्य हिन्दुओं ने भी अपने मकानों को बेचना शुरू कर दिया। इसके चलते धीरे-धीरे यहाँ जनसंख्या असंतुलित हो गई। बाद में बचे-खुचे हिन्दुओं को अपने घर कम दामों पर बेचने पड़े। शिकायत पत्र में बताया गया है कि कई हिन्दू बहुल रहे क्षेत्र, अब मुस्लिम बहुल बन चुके हैं। इसी के साथ जमीन की खरीद और प्रॉपर्टी के ट्रांसफर की उच्चस्तरीय जाँच करवाने की माँग भी की गई है।

क्या है डिस्टर्बड एरिया एक्ट?

जिला प्रशासन को यह अधिकार दिए गए हैं कि वह उन स्थानों को चिन्हित करे जहाँ जनसंख्या का असंतुलन तेजी से बढ़ रहा है। इसी के साथ वहाँ साम्प्रदायिक सौहार्द्र बना रहे, इसके लिए जमीनों की खरीद आदि की प्रकिया को जटिल बनाया गया है। इसी के साथ जमीन बेचने वाले को यह लिखित रूप से देना पड़ता है कि उसके ऊपर जमीन बेचने के लिए कोई दबाव नहीं है।

डिस्टर्बड एरिया एक्ट के बारे में गलत अफवाह है कि इसमें जमीन बेचने या खरीदने वालों में से एक पक्ष का हिन्दू या मुस्लिम होना जरूरी है। असल में इस एक्ट के अंतर्गत आने वाली सभी जमीनों को किसी को भी खरीदने या बेचने से पहले लागू किए गए नियमों का पालन करना होता है। ऐसा उस क्षेत्र में धार्मिक और जातीय संतुलन बनाए रखने के लिए किया जाता है।

किसी भी प्रार्थना पत्र पर जिलाधिकारी जाँच बैठा सकता है। विशेष मामलों में अधिकारी स्वयं क्षेत्र का दौरा करते हैं और स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाते हैं। यहाँ तक कि उस क्षेत्र के प्रभावित लोगों से लिखित एप्रूवल भी लिया जाता है। यह लिखित एप्रूवल उनसे भी लिया जाता है जो उस प्रॉपर्टी के आसपास भी रहते हैं। जब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती है और जिलाधिकारी स्वयं संतुष्ट नहीं हो जाता तब तक जमीन को खरीदने और बेचने की प्रक्रिया रुकी रहती है। जिलाधिकारी ही जिले में शांति कायम रखने के लिए जिम्मेदार होता है। इस एक्ट से सरकार किसी क्षेत्र विशेष में होने वाले साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण पर भी नजर रख रही है।

भरूच में सक्रिय है धर्मांतरण का बड़ा गिरोह

जिस स्थान पर जमीन खरीदने के ये संदेश आ रहे हैं वहीं से थोड़ी ही दूर कुछ समय पहले 37 जनजातीय परिवारों को इस्लाम कबूल करवाया गया था। इसके लिए उन्हें नौकरी, पैसा और शादियों का लालच दिया गया था। इसी के साथ उन्हें “हिन्दू कोई धर्म नहीं है” और “इस्लाम ही सच्चा धर्म है” जैसे झूठ के सहारे उनका ब्रेनवॉश किया गया था।

धर्मांतरण का शिकार होने वाले आदिवासियों ने बताया कि उन्हें पता ही नहीं चला कि उनका आधार कार्ड और उनकी अन्य पहचान बदल दी जाएगी। ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान प्रवीण वसावा ने बताया था कि उन्हें सूरत ले जाया गया था, जहाँ उनसे कागज़ों पर दस्तखत करवाए गए थे।

प्रवीण वसावा धर्मांतरण का शिकार होने वाले आदिवासियों में से एक थे। उन्होंने बताया, “मुझे पैसे का लालच दिया गया और मेरा नया नाम सलमान पटेल रख दिया गया था। मेरी जानकारी के बिना मेरा आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्र बदल दिए गए।” FIR में मुख्य आरोपित के रूप में हाजी अब्दुल्ला दर्ज है, जो कुछ साल पहले लंदन भाग गया। उस पर हवाला के जरिए फंडिंग का भी आरोप है। हाजी अब्दुल्ला की तलाश उत्तर प्रदेश ATS को भी है। उस पर उत्तर प्रदेश में भी बड़े पैमाने पर धर्मान्तरण करवाने का आरोप है।