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‘हिन्दू धर्म का अपमान करने वाले कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के किताब पर नहीं लगा प्रतिबंध तो करूँगा आत्मदाह’: संत परमहंस

कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद द्वारा लिखे गए पुस्तक ‘सनराइज ओवर अयोध्या’ को लेकर विवाद जारी है। इस पुस्तक में हिंदुत्व को मानने वाले रामभक्तों और हिंदू धर्म की तुलना आईएसआईएस और बोको हराम जैसे आतंकी संगठन से सलमान खुर्शीद ने की है। जिसके बाद वे अयोध्या के संतों के निशाने पर आ गए हैं। पुस्तक में हिंदू धर्म को लेकर किए गए टिप्पणी से नाराज तपस्वी छावनी के संत परमहंस दास ने आमरण अनशन और आत्मदाह करने की चेतावनी दी है।

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुुताबिक संत परमहंस दास ने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और मुख्यमंत्री से माँग की है कि सलमान खुर्शीद की किताब पर प्रतिबंध लगाया जाए और उनके खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाए। ऐसा नहीं होने पर वह आत्मदाह कर सकते हैं। परमहंस दास ने कहा कि 100 करोड़ भारतीय की तुलना आतंकी संगठन से करना यह राष्ट्र की अवमानना है। उन्होंने कहा कि बहसंख्यक समाज के देवी-देवताओं के ऊपर अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। आस्था पर चोट की जा रही है। यह बहुत ही चिंताजनक है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि प्रधानमंत्री इसे गंभीरता से लेंगे और कड़ी कार्रवाई करेंगे।

बता दें कि परमहंस ने पिछले दिनों अयोध्या कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी थी। परामहंस दास ने बताया कि कॉन्ग्रेस के नेता सलमान खुर्शीद ने एक पुस्तक सनराइज ओवर अयोध्या में 113 नंबर पृष्ठ पर लिखा है कि हिंदुत्व आईएसआईएस संगठन जैसे हैं। हिंदुत्व कहने से जितने भी सनातन को मानने वाले हिंदू हैं। सभी की तुलना उन्होंने आतंकवादी संगठन आईएसआईएस किया है। और जितने भी हिंदू चाहे वह शंकराचार्य हो, महामहिम राष्ट्रपति हो या प्रधानमंत्री इसके अलावा कोई अन्य व्यक्ति हो जितने भी हिंदू हैं सभी को उन्होंने आतंकवादी बताया है।

इससे वो बहुत आहत हैं। इसलिए उन्होंने अयोध्या कोतवाली में सलमान खुर्शीद के खिलाफ तहरीर दिया। उन्होंने कहा कि जो कॉन्ग्रेस के नेता चाहे वह राशिद अल्वी हो जो हिंदुओं को राक्षस बता रहे हैं या पी चिदंबरम सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना कर रहे हैं। अराजकता पूर्ण माहौल में समाज में विद्वेष की भावना को फैलाना चाहते हैं। इन पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

‘FOE की आड़ में किसी की प्रतिष्ठा को हानि नहीं पहुँचा सकते’: न्यूजलॉन्ड्री को कोर्ट की फटकार, हटाएगा सुनवाई पर कमेंट्री के वीडियो

‘इंडिया टुडे ग्रुप’ ने प्रोपेगंडा पोर्टल न्यूजलॉन्ड्री के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। मंगलवार (16 नवंबर, 2021) को दिल्ली उच्च-न्यायालय में इसकी सुनवाई हुई। 2 करोड़ रुपए के इस नोटिस में मीडिया समूह ने न्यूजलॉन्ड्री पर अपने पत्रकारों और एंकरों के अलावा प्रबंधन की मानहानि और कॉपीराइट का मामला भी ठोका है। सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यूजलॉन्ड्री से कहा कि पैरोडी क्रिएटिव होनी चाहिए, लेकिन ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ के जरिए किसी की प्रतिष्ठा को ठेस नहीं पहुँचाया जाना चाहिए।

न्यूजलॉन्ड्री ने अपने बचाव में तर्क दिया कि ये मानहानि नहीं है, बल्कि पैरोडी है। वहीं ‘टीवी टुडे’ ने अपने वकील के माध्यम से दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि मीडिया एक विकसित हो रही इंडस्ट्री है और इसका हिस्सा होने के कारण दोनों एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हुए, ऐसे में न्यूजलॉन्ड्री अपने बारे में कुछ भी कह सकता है और खुद को सर्वश्रेष्ठ बता सकता है, लेकिन दूसरों के विरुद्ध दावे करने का अधिकार उसे नहीं है। साथ ही कहा कि वीडियो में न्यूजलॉन्ड्री ने ये दिखाने की कोशिश की कि ‘टीवी टुडे’ विज्ञापनदाताओं की दया पर टिका हुआ है, जो FOE के अंतर्गत नहीं आता।

साथ ही ये भी कहा गया कि न्यूजलॉन्ड्री वालों ने जिस क्षण ‘इंडिया टुडे’ के कंटेंट्स चलाए, उसी क्षण ये कॉपीराइट उल्लंघन का मामला बन गया। ‘टीवी टुडे’ ने कहा कि इस कंटेंट का प्रयोग करना सिर्फ हमारी कंपनी का अधिकार है। न्यूजलॉन्ड्री ने दावा किया कि उन्होंने इस कंटेंट का ‘स्वच्छ तरीके से प्रयोग’ किया है, जबकि ‘टीवी टुडे’ ने कहा कि ये आलोचना के भी अंतर्गत नहीं आता, ये उससे भी बढ़ कर है। ‘टीवी टुडे’ ने आरोप लगाया कि उसके कार्यक्रमों के आधार पर न्यूजलॉन्ड्री वाले अपना शो बना रहे हैं।

‘टीवी टुडे’ के काउंसल ने कहा कि चैनल ने इतनी मेहनत कर के और संसाधन लगा कर कंटेंट तैयार किया, जबकि वो एक पुरुष और एक महिला को बिठा कर इसका इस्तेमाल कर के वीडियो बना रहे हैं। न्यूजलॉन्ड्री ने कहा कि ये ‘कमेंट्री’ है, इसीलिए उनका कंटेंट दिखाना ज़रूरी है। उसने कहा कि वो ये दिखाने की कोशिश कर रहा था कि ‘टीवी टुडे’ के पत्रकार अपना काम ठीक से नहीं कर रहे। न्यूजलॉन्ड्री पर कोर्ट की सुनवाई के वीडियो बनाने के भी आरोप लगे।

फटकार लगने के बाद प्रोपेगंडा पोर्टल ने ‘बार एंड बेंच’ और ‘लाइव लॉ’ की तरह कोर्ट की सुनवाई की बिना कमेंट्री के रिपोर्टिंग की अनुमति माँगी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ के चोले में आप किसी की प्रतिष्ठा को हानि नहीं पहुँचा सकते। उच्च-न्यायालय ने कहा कि टिप्पणी देना, सूचना नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि पैरोडी क्रिएटिव होनी चाहिए। न्यूजलॉन्ड्री ने कहा कि ‘इंडिया टुडे’ के पास इसे बर्दाश्त करने की क्षमता है, क्योंकि हम एक-दूसरे की आलोचना कर सकते हैं।

साथ ही ये भी दावा किया कि ‘इंडिया टुडे’ रोज नेताओं की आलोचना करता है। न्यूजलॉन्ड्री ने कहा कि वो कोर्ट की रिपोर्टिंग पर टिप्पणी किए गए वीडियोज को हटाएगा और आगे से बिना किसी प्रतिक्रिया के रिपोर्टिंग करेगा। इसके बाद सुनवाई ख़त्म हो गई। असल में न्यूजलॉन्ड्री के बारे में ‘टीवी टुडे’ के काउंसल ने ही बताया था कि वो न सिर्फ कोर्ट की सुनवाई पर वीडियो बना-बना कर डाल रहे हैं, बल्कि उस पर टिप्पणियाँ और प्रतिक्रियाएँ भी दे रहे हैं।

बता दें कि न्यूजलॉन्ड्री के सीईओ अभिनंदन सेखरी, डायरेक्टर प्रशांत सरीन और रूपक कपूर, कार्यकारी संपादक मनीषा पांडे और अतुल चौरसिया, प्रबंध संपादक रमन कृपाल, संवाददाता आयुष तिवारी और स्तंभकार हृदयेश जोशी को इस मामले में पक्षकार बनाया गया है। साथ ही सोशल मीडिया दिग्गज ट्विटर, फेसबुक और गूगल को भी इस मुकदमे में पक्षकार बनाया गया है। आरोप है कि चैनल के समाचार, रिपोर्टिंग, प्रबंधन और न्यूज एंकरों के बारे में अनुचित, अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण रूप से अपमानजनक टिप्पणी की गई है।

समलैंगिक सीनियर वकील सौरभ कृपाल को दिल्ली HC का जज बनाने के लिए कॉलेजियम ने की सिफारिश, विदेशी पार्टनर होने से केंद्र चिंतित

सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने सीनियर वकील सौरभ कृपाल को दिल्ली हाई कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की है। चीफ जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम की 11 नवंबर की बैठक में यह फैसला लिया गया। इसमें सीजेआई एनवी रमना, जस्टिस यूयू ललित और एएम खानविलकर के तीन सदस्यीय सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सौरभ कृपाल को दिल्ली हाई कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की है। अगर 49 वर्षीय सौरभ कृपाल को जज के पद पर नियुक्त किया जाता है, तो वह भारत में हाई कोर्ट के पहले गे (समलैंगिक) जज होंगे।

खास बात यह है कि अक्टूबर 2017 में दिल्ली हाई कोर्ट कॉलेजियम ने सर्वसम्मति से जज के लिए उनके नाम की सिफारिश की थी। इसके बाद से सुप्रीम कोर्ट चार बार उनकी सिफारिश का फैसला टाल चुका था। आखिरी बार अगस्त 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सिफारिश का फैसला टाल दिया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सौरभ कृपाल खुले तौर पर गे होने की बात स्वीकार कर चुके हैं। कृपाल के पार्टनर ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट निकोलस जर्मेन बाकमैन हैं और स्विट्जरलैंड के रहने वाले हैं। इसलिए केंद्र को राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता सता रही है। पिछले साल एक इंटरव्यू में कृपाल ने कहा था कि शायद उनके सेक्शुअल ओरिएंटेशन की वजह से ही उन्हें जज बनाने की सिफारिश का फैसला टाला गया है।

बता दें कि सौरभ कृपाल वरिष्ठ वकील और पूर्व चीफ जस्टिस बीएन कृपाल के बेटे हैं। कृपाल ने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन की है और लॉ की डिग्री ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पूरी की है। सौरभ पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी के साथ बतौर जूनियर काम कर चुके हैं। इसके साथ ही वह यूनाइटेड नेशंस के साथ जेनेवा में भी काम कर चुके हैं। कृपाल समलैंगिक हैं और LGBTQ के अधिकारों के लिए मुखर रहे हैं। वह ‘सेक्स एंड द सुप्रीम कोर्ट’ किताब के लेखक भी हैं।

मध्य प्रदेश के 560 आदिवासी बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाएँगे सचिन तेंदुलकर, सीहोर पहुँच कर बच्चों से की मुलाकात

क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर अब मध्य प्रदेश के आदिवासी बच्चों के लिए मसीहा बन गए हैं। सचिन ने एमपी के 560 आदिवासी बच्चों की पढ़ाई में होने वाले खर्च की जिम्मेदारी उठाई है। बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सचिन ने एक NGO से हाथ मिलाया है।

मंगलवार (16 नवंबर 2021) को सचिन तेंदुलकर ने ये फैसला किया है। खास बात ये है कि आज ही के दिन सचिन ने 2013 में क्रिकेट की दुनिया से संन्यास लिया था। एमपी के सीहोर जिले के दूरदराज के गाँवों में सेवा कुटीर बनाए एक एनजीओ के साथ मिलकर सचिन ने बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा उठाया है। 

सचिन इंदौर से सड़क मार्ग से होते हुए देवास के जिले खातेगाँव के संदलपुर गए, जहाँ उन्होंने 560 आदिवासी बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा उठाने की बात करते हुए कहा कि यह उनके माता-पिता की इच्छा थी के वो बच्चों के लिए कुछ करें, वो आज हमारे बीच होते तो ख़ुशी होती। संस्था ‘परिवार’ नामक एनजीओ बच्चों की पढ़ाई के लिए काम करती है।

बता दें कि सीहोर जिले के गाँव सेवनिया, बीलपाटी, खापा, नयापुरा और जामुन झील के बच्चों को अब तेंदुलकर फाउंडेशन की मदद से पोषक भोजन और शिक्षा मिल रही है। बच्चे मुख्य रूप से बरेला भील और गोंड जनजाति के हैं। जिनमें अधिकतर माध्यमिक शाला के छात्र हैं। सेवा कुटीर में छात्रों के भोजन का और शैक्षणिक सामग्री का विशेष ध्यान रखा जाता है।

ग्रामीण बताते हैं कि यहाँ छात्रों को प्रतिदिन दोनों समय भोजन, नाश्ता व पोषण आहार दिया जाता है। साथ ही सप्ताह में एक दिन विशेष भोज दिया जाता है। सेवनिया में करीब 30 बच्चे हैं। जिन्हें सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती है। जानकारी के अनुसार सचिन ने प्रदेश के करीब 42 गाँवों में सेवा कुटीर बनाए हैं। जिनमें से सेवनिया और देवास जिले के बच्चों से मिलने वे खुद पहुँचे।

रविवार को हमला करने वाले दो आतंकियों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया, हैदरपोरा के एक मकान में छिपे थे आतंकी

जम्मू कश्मीर के श्रीनगर के हैदरपोरा इलाके में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षाबलों ने हैदरपोरा में दो आतंकियों को मार गिराया है। कश्मीर के आईजी विजय कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेस में इसकी जानकारी दी। उन्होंने मीडियाकर्मियों से बताया कि बीते रविवार को जिस आतंकी ने श्रीनगर के डाउन टाउन इलाके में पुलिसकर्मी पर हमला किया था, उसे भी मुठभेड़ में मार गिराया गया है।

दरअसल, पुलिस को हैदरपोरा स्थित एक मकान में दो से तीन आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। इसके तुरंत बाद पुलिस ने सुरक्षाबलों के साथ संयुक्त अभियान चलाकर आतंकियों को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने भी जवाबी कार्रवाई में फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें दो आतंकी ढेर हो गए।

बताया जा रहा है कि मुठभेड़ के दौरान आतंकी की फायरिंग से घायल मकान मालिक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया है। ये मकान मालिक आतंकी के सहयोगी के तौर पर काम कर रहा था।

PM मोदी ने किया पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण, कहा- CM योगी के नेतृत्व में यूपी ने पकड़ी विकास की रफ्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (16 नवंबर 2021) उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में 341 किमी लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया। एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के बाद PM मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद ही विकास ने रफ्तार पकड़ी है। 2017 से पहले यानी सपा की अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार को लेकर उन्होंने कहा कि उस वक्त प्रदेश में विकास का पहिया रुक गया था। यहाँ तक कि उस समय के सीएम (अखिलेश यादव) अपने वोटबैंक को खो देने के डर से साथ खड़े भी नहीं होना चाहते थे।

पीएम ने कहा, “मुझे दुख है कि तत्कालीन यूपी सरकार ने सहयोग नहीं किया। वे सार्वजनिक रूप से मेरे साथ खड़े होकर अपने वोट बैंक को खराब करने से भी डरते थे। मैं सांसद बनकर आता था, एयरपोर्ट पर मेरा स्वागत करने के बाद वे गायब हो जाते थे। उन्हें शर्म आ रही थी क्योंकि उनके पास काम के रूप में दिखाने के लिए कुछ नहीं था।”

पीएम मोदी ने कहा कि पूरी दुनिया में यूपी और यूपी के लोगों के सामर्थ्‍य पर जरा भी संदेह हो तो यहाँ सुल्‍तानपुर में आकर देख सकता है। तीन साल पहले जहाँ पर सिर्फ जमीन थी वहाँ से आज इतना शानदार एक्‍सप्रेस वे गुजर रहा है। उन्होंने कहा, “तीन साल पहले जब मैंने इसका शिलान्‍यास किया था तो यह नहीं सोचा था कि एक दिन यहाँ विमान से खुद उतरुँगा। ये एक्‍सप्रेस वे नए युग के निर्माण का एक्‍सप्रेस वे है। ये यूपी की मजबूत होती अर्थव्‍यवस्‍था का एक्‍सप्रेस वे है। ये यूपी की शान है। ये यूपी का कमाल है। हमारे जिन किसान भाई-बहनों की भूमि इसमें लगी है, जिन श्रमिकों का पसीना इसमें लगा है, जिन इंजीनियरों का कौशल इसमें लगा है, उनका भी मैं बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूँ।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “गरीबों को पक्के घर मिलें, गरीबों के घर में शौचालय हों, महिलाओं को खुले में शौच के लिए बाहर ना जाना पड़े, सबके घर में बिजली हो, ऐसे कितने ही काम थे, जो यहाँ किए जाने जरूरी थे। लेकिन मुझे बहुत पीड़ा है, कि तब यूपी में जो सरकार थी (सपा सरकार), उसने मेरा साथ नहीं दिया। मुझे मालूम था कि जिस तरह तब की सरकार में यूपी के लोगों के साथ नाइंसाफी की जा रही थी, विकास में भेदभाव किया जा रहा था, जिस तरह सिर्फ अपने परिवार का हित साधा जा रहा था, यूपी के लोग ऐसा करने वाली सरकार को हमेशा-हमेशा के लिए यूपी के विकास के रास्ते से हटा देंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “UP में हमने लंबा दौर, ऐसी सरकारों का देखा जिन्होंने कनेक्टिविटी की चिंता किए बिना ही औद्योगीकरण के सपने दिखाए। परिणाम ये हुआ कि ज़रूरी सुविधाओं के अभाव में यहाँ लगे अनेक कारखानों में ताले लग गए। ये भी दुर्भाग्य रहा कि दिल्ली और लखनऊ, दोनों ही जगह परिवारवादियों का ही दबदबा रहा।”

पीएम ने कहा, “पिछले मुख्यमंत्रियों के लिए विकास वहीं तक सीमित था जहाँ उनका घर था। लेकिन आज जितनी पश्चिम की पूछ है, उतनी ही पूर्वांचल के लिए भी प्राथमिकता है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे आज यूपी की इस खाई को पाट रहा है, यूपी को आपस में जोड़ रहा है।”

इसके पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज से 3 साल पहले पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के शिलान्यास का कार्यक्रम संपन्न हुआ था। पिछले 19 महीने से पूरी दुनिया कोविड महामारी का सामना कर रही है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व का ही परिणाम है कि आज पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन संपन्न होने जा रहा है।

सीएम योगी ने कहा कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे सिर्फ आवागमन का माध्यम नहीं बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश, जो आज़ादी के बाद से भौतिक विकास के मापदंडों को पूरा करने में विफल रहा था। उस पूर्वी उत्तर प्रदेश को विकास की नई जीवन रेखा के रूप में स्थापित किए जाने वाले प्रयास का हिस्सा होगा।

ममता सरकार ने BSF जवानों पर लगाया अंकुश, टीएमसी MLA ने कहा- वे देशभक्त नहीं, महिलाओं को गलत ढंग से छूते हैं

पश्चिम बंगाल विधानसभा में ममता सरकार ने मंगलवार (नवंबर 16, 2021) को एक प्रस्ताव पारित किया। ये प्रस्ताव मोदी सरकार के उस फैसले के विरुद्ध है जिसमें केंद्र सरकार ने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने का फैसला किया था।

उल्लेखनीय है कि हाल में केंद्र सरकार ने बीएसएफ अधिनियम में संशोधन किया है। इस बदलाव का उद्देश्य यही है कि सुरक्षाबल को पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी का अधिकार प्राप्त हो। मोदी सरकार के फैसले से पहले बीएसएफ के लिए यह दायरा 50 किमी से बहुत कम 15 किमी के आसपास था।

फैसले के विरुद्ध पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रस्ताव पारित करते हुए काफी हंगामा हुआ। TMC के विधायक उद्यन गुहा ने कहा, “जब कोई महिला बॉर्डर क्रॉस करती है तो बीएसएफ के जवान उनकी जाँच के बहाने उन्हें गलत तरीके से छूते हैं। भारत माता की जय कितना भी बोल लें, देशभक्त नहीं हो सकते।” इसके अलावा टीएमसी नेताओं ने बीएसएफ जवानों के ख़िलाफ़ दर्ज केसों का मुद्दा भी उठाया और दावा किया कि उन पर कई मर्डर केस भी हैं।

वहीं विधायक के बयान पर बीएसएफ ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल एक पेशेवर बल है जिसने हमेशा नियमों का पालन करके अनिवार्य कर्तव्यों का पालन किया है। बीएसएफ में महिला प्रहरी भी हैं जो महिलाओं की तलाशी लेती हैं। बीएसएफ कर्मियों द्वारा महिलाओं को गलत तरीके से छूने के आरोप पूरी तरह निराधार है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल से पहले पंजाब विधानसभा ने भी केंद्र के इस फैसले के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित किया था। उन्होंने केंद्र के आदेश के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित कर उसे खारिज किया था। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण कहा था। उन्होंने केंद्र के इस फैसले को राज्य के अधिकार में हस्तक्षेप बताया था। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री के कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने का समर्थन किया था।

इनके अलावा मालूम हो कि बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र के फैसले की आलोचना की थी और उस पर देश के संघीय ढांचे में हस्तक्षेप करने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। उनके अलावा राज्य के संसदीय कार्य मंत्री पार्थ चटर्जी ने भी कहा था कि बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र का विस्तार करने का कदम देश के संघीय ढाँचे पर सीधा हमला है।

ढाका में प्रैक्टिस के दौरान Pak टीम ने लगाया अपना झंडा, गुस्साए बांग्लादेश के लोगों ने कहा – रद्द करो सीरीज, इन्हें वापस भेजो

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में प्रैक्टिस के दौरान पाकिस्तानी टीम ने ग्राउंड पर अपने मुल्क का झंडा लगा दिया, जिसके बाद बांग्लादेश के लोगों ने आक्रोश जताया है। बता दें कि पाकिस्तान की टीम ऑस्ट्रेलिया से हार कर T20 विश्व कप से बाहर हो गई थी। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड को फाइनल में हरा कर ये ख़िताब अपने नाम कर लिया। अब पाकिस्तान की टीम बांग्लादेश दौरे पर पहुँची है। तीन T20 और दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला शुक्रवार (19 नवंबर, 2021) से शुरू हो रही है।

हालिया T20 विश्व कप के ग्रुप गेम्स में 5 में से 4 मैच जीतने वाली पाकिस्तान की टीम के अधिकतर खिलाड़ी शनिवार (13 नवंबर, 2021) तक ही ढाका पहुँच गए थे। वहीं वरिष्ठ ऑलराउंडर शोएब मलिक और कप्तान बाबर आजम मंगलवार को पहुँचे। T20 विश्व कप के दौरान ही ट्रेनिंस सेशंस में पाकिस्तान की टीम को प्रोत्साहित करने के लिए कोच सकलैन मुश्ताक ने एक नया ट्रेंड शुरू किया। उन्होंने अपने मुल्क पर गर्व करने और प्रतिनिधित्व के दौरान उसके सम्मान की बार-बार याद दिलाने के लिए प्रैक्टिस के समय पाकिस्तान का झंडा लगाना शुरू कर दिया।

हालाँकि, बांग्लादेश में इस तरह की हरकत का वहाँ के लोग विरोध कर रहे हैं और कह रहे हैं कि बांग्लादेश में पाकिस्तान झंडे को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। लोगों ने पाकिस्तानी टीम को वापस भेजने और इस सीरीज को रद्द करने की भी माँग की। फैंस का कहना है कि अब तक कई देशों की टीम ने बांग्लादेश में आकर क्रिकेट खेला है, लेकिन यहाँ के ग्राउंड में किसी ने अपना झंडा नहीं लगाया। उनका पूछना है कि पाकिस्तानी टीम ऐसा क्यों कर रही है और वो क्या प्रदर्शित करना चाहती है?

एक बांग्लादेशी क्रिकेट फैन ने इसे संवेदनशील मुद्दा बताते हुए कहा कि टीमों को ICC के नियम-कानूनों का पालन करना चाहिए और ऐसी चीजों के लिए पहले अनुमति लेनी चाहिए। एक अन्य फैन ने लिखा कि ये नया तरह का व्यवहार है और उसे याद नहीं है कि किसी अन्य टीम ने इससे पहले ऐसा किया हो। बता दे कि ये मामला ढाका स्थित ‘शेर-ए-बांग्ला नेशनल क्रिकेट स्टेडियम’ का है। एक अन्य यूजर ने लिखा कि अपना झंडा लगा देना नायकत्व का प्रतीक नहीं है।

बता दें कि बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच 19 नवंबर, 20 नवंबर और 22 नवंबर को इसी क्रिकेट स्टेडियम में 3 T20 मैचों की श्रृंखला खेली जाएगी। इसके बाद 26 नवंबर से लेकर 30 नवंबर तक चट्टोग्राम स्थित ज़हूर अहमद चौधरी स्टेडियम में पहला टेस्ट मैच होगा। श्रृंखला का दूसरा एवं अंतिम टेस्ट मैच वापस मीरपुर स्टेडियम में 4 दिसंबर से 8 दिसंबर तक खेला जाएगा। पाकिस्तान ने इसके लिए अपनी टीमों की घोषणा भी कर दी है। बाबर आजम पाकिस्तान की कप्तानी जारी रखेंगे।

सड़क हादसे में सुशांत सिंह राजपूत के 5 रिश्तेदारों की मौत: ट्रक और टाटा सूमो में हुई भीषण टक्कर, 4 की हालत अब भी गंभीर

बिहार के लखीसराय में एक भीषण हादसा हुआ है। इस हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई है। इनमें से 5 दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के रिश्तेदार हैं। इस दुर्घटना में 4 लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। ये सभी एक दाह संस्कार कार्यक्रम में सम्मिलित होने के बाद सूमो गाड़ी से जमुई लौट रहे थे। इसी बीच रास्ते में एक ट्रक के साथ इनकी कार की टक्कर हो गई। लखीसराय में सिकंदरा-शेखपुरा राजमार्ग-333 पर ये हादसा हुआ।

हलसी थाना क्षेत्र के पिपरा गाँव के नजदीक मंगलवार (16 नवंबर, 2021) को तड़के हुई इस दुर्घटना में जिन 6 लोगों की मौत हुई है, उनमें से 5 ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। ट्रक पर LPG गैस के कई खाली सिलिंडर लदे हुए थे। ये सभी लोग जमुई जिले के खैरा थाना क्षेत्र के सगदाहा भंदरा गाँव के लालजीत सिंह की पत्नी गीता देवी के दाह संस्कार में सम्मिलित होने गए थे। एक ही परिवार के 10 लोग इस सूमो गाड़ी में सवार थे। साथ ही एक चालक भी था।

मृतकों में गीता देवी के पति लालजीत सिंह, बड़ा बेटा अमित शेखर उर्फ नेमानी सिंह, छोटा बेटा रामचंद्र सिंह, बेटी बेवी देवी, भांजी अनिता देवी एवं चालक प्रीतम कुमार शामिल हैं। लालजीत सिंह के बारे में बता दें कि वो दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के बहनोई के बहनोई थे। सुशांत सिंह राजपूत के बहनोई ओमप्रकाश सिंह हरियाणा में IPS अधिकारी हैं। हादसे के बाद न सिर्फ परिवार में कोहराम मच गया है, बल्कि गाँव में भी सन्नाटा पसरा हुआ है।

गंभीर रूप से घायल वाल्मिकि सिंह की इलाज के लिए पटना ले जाते समय रास्‍ते में मौत हो गई। लखीसराय सदर अस्पताल में सभी शवों का पोस्टमॉर्टम कराया गया है। घायलों की स्थिति गंभीर है, इसीलिए उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया है। लालजीत सिंह अपनी पत्नी के देहांत के बाद उनकी तेरहवीं में शामिल होने गए थे। ट्रक जहाँ पटना की तरफ जा रहा था, टाटा सूमो जमुई की तरफ। सिकंदरा में प्राथमिक इलाज के बाद घायलों को पटना रेफर किया गया है।

विराट कोहली के रेस्टोरेंट पर लगा भेदभाव का आरोप, LGBTQ ग्रुप के नो एंट्री से भड़के लोग

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली के रेस्टोरेंट One8 commune पर LGBTQ+ समुदाय के लोगों को एंट्री नहीं देने का आरोप लगा है। एलजीबीटी समुदाय के अधिकारों की रक्षा करने वाले एक समूह ‘यस, वी एक्ज़िस्ट’ ने इंस्टाग्राम पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा, ”क्रिकेटर के रेस्टोरेंट One8 commune में स्टैग के लिए रेस्टोरेंट में एंट्री नहीं है।” विराट के इस रेस्टोरेंट की ब्रांच पुणे, दिल्ली और कोलकाता में हैं। उनकी जोमैटो लिस्टिंग कहती है कि स्टैग के लिए रेस्टोरेंट में एंट्री नहीं है।

पोस्ट में आगे लिखा गया, “हमने 2 सप्ताह पहले उन्हें मैसेज किया। उनका कोई जवाब नहीं आया। हमने रेस्टोरेंट की पुणे ब्रांच से संपर्क किया, उन्होंने फोन पर बताया कि रेस्टोरेंट में केवल सिसजेंडर, विषमलैंगिक जोड़ों या सिसजेंडर महिलाओं के समूहों की ही एंट्री हो सकती है। समलैंगिक जोड़े या समलैंगिक पुरुषों के ग्रुप को एंट्री नहीं है।”

Yes, we exist‘ ने विराट कोहली से कहा, “आप शायद इसके बारे में नहीं जानते हैं, लेकिन पुणे में आपका रेस्टोरेंट One8 Commune LGBTQIA + गेस्ट के साथ भेदभाव करता है। अन्य ब्रांच का भी यही हाल है। यह अस्वीकार्य है। उम्मीद करते हैं कि आप इसमें जरूरी बदलाव करेंगे।”

इसमें आगे लिखा गया, “भारत में ऐसे फैंसी रेस्टोरेंट, बार और क्लबों में LGBTQ के साथ भेदभाव आम बात है और विराट कोहली भी यही कर रहे हैं।” इस पोस्ट के बाद से विरोट कोहली इंस्टाग्राम यूजर्स के निशाने पर आ गए हैं। उन्हें यूजर्स की कड़ी प्रतिक्रिया झेलनी पड़ रही है।

बता दें कि मीडिया रिपोर्ट्स में ट्विटर यूजर्स के हवाले से लिखा गया है कि उन्होंने इस मामले पर जोमैटो से भी ध्यान देने का अनुरोध किया है। वहीं, ‘Yes, We Exist’ द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में वन8 कम्यून ने एक बयान जारी कर कहा, “रेस्टोरेंट की सभी ब्रांच सभी लोगों का स्वागत करने में विश्वास करता है। जैसा कि हमारे नाम से पता चलता है, हम अपनी स्थापना के बाद से हमेशा सभी समुदायों की सेवा में समावेशी रहे हैं।”