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मॉडरेट मुस्लिम कुछ नहीं होता, मुस्लिम केवल मुस्लिम होता है: सलमान खुर्शीद बता रहे- हिंदुओं पर राज करना मुसलमानों का अधिकार

कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की एक किताब आई है। नाम है: सनराइज ओवर अयोध्या (Sunrise Over Ayodhya: Nationhood in Our Times)। इस किताब में उन्होंने हिंदुत्व को बोको हरम और ISIS जैसा बताया है। इससे उनकी अपनी पार्टी के भी कुछ लोग सहमत नहीं हैं। पर अपने साथी नेताओं की इस असहमति को उन्होंने बड़ी ढिठाई के साथ अनदेखा कर दिया। वहीं उनकी पार्टी ने हमेशा की तरह खुद को उनके इस बयान से दूर कर लिया है।

इसमें कुछ भी नया नहीं। ऐसा करना वर्षों से कॉन्ग्रेस पार्टी का सामान्य व्यवहार, या कहें तो एक तरह का राजनीतिक दर्शन सा रहा है। पार्टी भाजपा के एक कार्यकर्ता के दूर के रिश्तेदार के भी आचरण और बयान को दल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जोड़ने में समय नहीं लगाती। लेकिन अपने पदाधिकारियों, मंत्रियों और नेताओं के बयानों और राजनीतिक आचरण से खुद को बड़ी आसानी से अलग कर लेती है।

खुर्शीद ने बड़ी सरलता और ढिठाई से सार्वजनिक मंचों और मीडिया में हिंदुत्व के अपने मूल्यांकन का बचाव किया और लगातार करते जा रहे हैं। वैसे हिंदुओं के प्रति उनकी यह सोच नई नहीं है। अपनी एक अन्य किताब ‘एट होम इन इंडिया (At Home in India)’ में उन्होंने 1984 के सिख नरसंहार पर जो उद्धगार व्यक्त किए हैं, वह किसी से छिपा नहीं है।

बाटला हाउस मुठभेड़ में आतंकवादियों के प्रति सहानुभूति भी उनकी इसी राजनीतिक सोच का नतीजा है। वे केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधित इस्लामी संगठन सिमी के लिए सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा लड़ चुके हैं और कश्मीर के हिंदुओं के विरुद्ध घाटी में हुई हिंसा और नरसंहार पर भी वे अपने विचार सार्वजनिक मंचों पर समय-समय पर व्यक्त करते रहे हैं।

प्रश्न यह है कि विदेशों से शिक्षा प्राप्त और मॉडर्न मुस्लिम की छवि वाले खुर्शीद के मन में हिंदुओं के प्रति ऐसी घृणा क्यों है? विदेशी विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त और आधुनिक दुनिया और सभ्यता को समझने का दावा करने वाला भारत सरकार का एक पूर्व मंत्री ऐसा क्यों और कैसे हो सकता है? हिंदुत्व के प्रति उसकी ऐसी सोच के पीछे कौन सी मानसिकता काम करती है?

ऐसा क्यों है कि खुर्शीद को कभी इस्लाम में व्याप्त बुराइयों के विरोध में बोलते हुए नहीं सुना जाता? उनके मुँह से यह क्यों नहीं सुनाई देता कि आधुनिक विश्व के परिप्रेक्ष्य में मुस्लिम समाज को अपने अंदर सुधार लाने की आवश्यकता है? इसके पीछे क्या यह कारण है कि खुर्शीद खुद को एक शासक के तौर पर देखते हैं या फिर वे इस धारणा के पोषकों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो यह मानते हैं कि मुसलमानों ने हिंदुओं पर राज किया है और उन्हें फिर से वही करना चाहिए?

इस समय जब खुर्शीद की किताब भारतवर्ष के बहुसंख्यक हिंदू समाज को इस्लामी आतंकी संगठनों के साथ खड़ा करने के लिए चर्चा में है, ठीक उसी समय एक और मुस्लिम लेखक वसीम रिज़वी द्वारा लिखी गई किताब भी चर्चा में है। किताब में वर्णित विषय इस्लाम और मुस्लिम समाज में सुधार की गुंजाइश की बात और एक संभावना की तलाश करता है।

विडंबना यह है कि इसके कारण रिज़वी को तरह-तरह की धमकियाँ मिल रही हैं। हालत यहाँ तक पहुँच गई है कि रिज़वी को अपनी जान खतरे में लगती है। इससे क्या यह समझा जाय कि पढ़े-लिखे और खुद के लिए मॉडर्न और मॉडरेट मुस्लिम जैसा विशेषण सुनने के आदी खुर्शीद ने अपने लिए आसान रास्ता चुना है कि उन्होंने अपने समाज में किसी सुधार की संभावना को न देखने का मन इसलिए बनाया है कि इसमें खतरा है?

कुछ लोगों ने 15 नवंबर 2021 को खुर्शीद के हिंदुत्व पर दिए गए बयान के विरोध में उनका पुतला जलाया। उनके नैनीताल निवास पर हमला किया। मकान के एक हिस्से में तोड़-फोड़ की और आग लगाने की कोशिश भी की। अब इस घटना को आगे रख कर खुर्शीद हिंदुत्व के प्रति अपने विचार को सही ठहराने का प्रयास कर रहे हैं।

पर अपनी सोच के बचाव की इस प्रक्रिया में वे जिस बात को हजम कर गए वो यह है कि इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने न केवल FIR दर्ज किया, बल्कि हमलावरों की पहचान कर इस अपराध के लिए समुचित कार्रवाई की शुरुआत भी कर ली। यह लोकतांत्रिक प्रशासन द्वारा उठाया गया ऐसा कदम या ऐसी सुविधा है जो किसी बोको हरम वाले या इस्लामिक स्टेट में किसी हिंदू के लिए उपलब्ध नहीं होगा। फिर भी आने वाले समय में खुर्शीद अपने घर पर हुए इस हमले को आगे रखकर बार-बार बड़ी बेशर्मी से हिंदुत्व को असहिष्णु बताते जाएँगे।

सलमान खुर्शीद द्वारा हिंदुत्व को इस्लामी आतंकी संगठनों के समकक्ष खड़ा करने का कारण चाहे जो हो, हिंदू समाज द्वारा इसके विरोध के पीछे के तर्क अकाट्य हैं। समस्या यह है कि यदि खुर्शीद के मन में इतिहास, तथ्य और तर्क के लिए जरा भी सम्मान होता तो वे ऐसी बात न करते।

ऐसे में उनसे यह अपेक्षा करना लगभग असंभव है कि वे अपनी बात पर पुनर्विचार करेंगे। हाँ, इस प्रक्रिया में वे आधुनिक सामाजिक और राजनीतिक विमर्श में प्रचलित इस थ्योरी को सही साबित करते नज़र आएँगे कि मॉडरेट मुस्लिम का होना एक परिकल्पना है जिसके पक्ष में तथ्य प्रस्तुत करना बहुत कठिन काम है।

बच्ची को राघव जुयाल ने कहा ‘चाऊमीन-मोमोज’, चुपचाप सुनती रहीं माधुरी दीक्षित: असम के CM ने बताया- शर्मनाक

टेलीविजन शो डांस दिवाने-3 की एक छोटी सी क्लिप वायरल होने के बाद असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। इस शो में राघव जुयाल ने गुवाहटी की एक बच्ची को बुलाने से पहले चाऊमीन-मोमोज शब्द का इस्तेमाल किया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोग भड़क गए और देखते ही देखते उनकी क्लिप वायरल हो गई। 

वीडियो में देख सकते हैं कि असम की गुंजन सिन्हा को बुलाने से पहले राघव ने कुछ बातें कहीं और फिर कहा कि ये सब सिर्फ पढ़े-लिखे लोगों को समझ आता है। राघव ने कहा, “ये भाषा जिन्हें समझ आती है उन्हें बुलाते हैं। इनकी भले ही चाइनीज नहीं समझ आती हो, लेकिन इनका डांस सबको समझ आता है।” इसके बाद माधुरी दीक्षित, रेमो डिसूजा समेत सभी जज ताली बजाने लगे और कमेंट पर किसी ने कुछ नहीं कहा।

अब इसी क्लिप को देखने के बाद कई जगह राघव को रेसिस्ट कहा गया। कुछ लोगों ने ऐसी टिप्पणी को सुन उन्हें गिरफ्तार करने को कहा और कुछ ने कहा कि केंद्रीय और दक्षिणी भारत में पले बढ़े बच्चों को बताया ही नहीं जाता कि ये नस्लवाद में आता है और ऐसे मजाक करना असंवेदनशील है। अब ऐसी घटनाओं के लिए कड़ा एक्शन लेना होगा ताकि आगे लोग ऐसा करने से डरें।

इनके अलावा असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “मेरे संज्ञान में आया है कि एक मशहूर रिएलिटी शो में होस्ट ने गुवाहटी की एक बच्ची के लिए नस्लवादी टिप्पणी की। ये बहुत ज्यादा शर्मनाक और अस्वीकार्य है। नस्लवाद की हमारे देश में कोई जगह नहीं है। हम सबको इसकी निंदा करनी चाहिए।”

अब मालूम हो कि एक छोटी सी क्लिप पर हुए विवाद के बाद सोशल मीडिया पर राघव जुयाल ने अपना बयान जारी किया है। उन्होंने इसमें कहा कि पहले डांस दिवाने की सारी वीडियोज देखें उसके बाद तय करें कि उनकी टिप्पणी नस्लवादी थी या नहीं। वह कहते हैं कि गुंजन ने शुरूआत के एपिसोड में कहा था कि उन्हें चाइनीज आती है और वह गिबरिश बोलती हैं। इसके बाद ये चीज मजाक में कही जाती रही और उस शो में इसी कारण उन्होंने ऐसी बात बोली। हालाँकि उनकी सफाई का सोशल मीडिया यूजर का ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। यूजर कह रहे हैं कि गुंजन गिबरिश बोलती है। लेकिन राघव उनकी टोन में बात तो कर रहे हैं पर मोमो और चाऊमीन जैसे शब्द बोल रहे हैं।

दिल्ली-UP-हरियाणा… रोटियों पर थूक कर सेंकना जारी, 9 महीने में 9 लोग पुलिस के चंगुल में: सतर्क रहें, स्वस्थ रहें

थूक को इधर-उधर मत थूकिए। बर्बाद हो जाता है। बरकत चाहिए, मतलब सुख-समृद्धि चाहिए तो थूक का इस्तेमाल इस्लामी तरीके से कीजिए। सोशल मीडिया और मोबाइल वीडियो के जमाने में चीजें वायरल हो जाएँगी, कोई बात नहीं! वायरल होने के बाद पुलिस पकड़ कर रोटी की तरह सेंक देगी, कोई बात नहीं! बस थूक का इस्तेमाल इस्लामी तरीके से होना चाहिए।

इतनी भूमिका इसलिए क्योंकि आए दिन थूक कर रोटी सेंकते किसी खान, शाहरुख, इरशाद, मोहम्मद आदि की खबरों को पढ़ते-पढ़ते आप थक गए होंगे लेकिन ये लोग थूकते-थूकते नहीं थके हैं। किसने कब थूका, किस चीज पर थूका, कहाँ वीडियो बना, पुलिस ने कब धरा… इस खबर में आपको पूरी लिस्ट मिलेगी।

नाम- नौशाद उर्फ सोहैल, काम- तंदूरी रोटी पर थूक, जगह- मेरठ, तारीख- 16 फरवरी 2021

मेरठ में एक शादी समारोह में थूक लगा कर रोटियाँ बना रहा था नौशाद उर्फ़ सोहैल। वीडियो वायरल होने के बाद उसे मेरठ पुलिस ने दबोचा था। नौशाद ने पुलिस को बताया था कि वो पिछले 10-15 वर्षों से विभिन्न शादी समारोहों में इस तरह (रोटी पर थूक कर सेंकने) की हरकत कर रहा था।

नाम- मोहसिन, काम- नान पर थूक, जगह- गाजियाबाद, तारीख- 13 मार्च 2021

गाजियाबाद के एक गाँव में मांगलिक कार्यक्रम था। इसमें जो नान (रोटी ही) बना रहा था, उसका नाम मोहसिन था। तब जो वीडियो वायरल हुआ था, उसमें मोहसिन को नान बनाकर उसमें थूकते और फिर उसे भट्ठी में सेंकने के लिए डालते देखा गया था। शिकायत के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।

नाम- अनवर और इब्राहिम, काम- तंदूरी रोटी पर थूक, जगह- दिल्ली, तारीख- 18 मार्च 2021

पश्चिमी दिल्ली (ख्याला इलाका) में सड़क के किनारे एक होटल, नाम होटल चाँद। होटल का मालिक आमिर। इसी होटल में सरेआम दिन में तंदूरी रोटी बनाते हुए उस पर थूक रहे अनवर और इब्राहिम वीडियो में कैद। वीडियो वायरल होने पर दिल्ली पुलिस ने किया मुकदमा दर्ज। होटल चलाने वाले के विरुद्ध भी एक्शन लिया गया।

नाम- मोहम्मद खालिक, काम- तंदूरी रोटी पर थूक, जगह- दिल्ली, तारीख- 24 मार्च 2021

दिल्ली में एक इलाका है, भजनपुरा। यहाँ एक मदीना ढाबा है। इस ढाबे में तंदूरी रोटी बनाता था मोहम्मद खालिक। एक दिन इस ढाबे में रोटी बनाते मोहम्मद खालिक का वीडियो किसी ने शूट किया, सोशल मीडिया पर डाला और वायरल। वायरल इसलिए क्योंकि मोहम्मद खालिक रोटी बनाते समय उस पर थूकता है, फिर उसे तंदूर में सेंकने के लिए लगाता है। जाँच के बाद दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की।

नाम- अनाम लेकिन सिर पर जालीदार टोपी, काम- तंदूरी रोटी पर थूक, जगह- शामली, तारीख- 2 अप्रैल 2021

उत्तर प्रदेश का शामली जिला। यहाँ से एक वीडियो वायरल होता है। वीडियो शामली के फव्वारा चौक स्थित एक होटल का बताया गया। वीडियो में सिर पर सफेद टोपी लगाया एक शख्स रोटी पर थूक रहा है। वीडियो के वायरल होते ही शामली पुलिस ने उस शख्स को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया।

नाम- अनाम, काम- तंदूरी रोटी पर थूक, जगह- गुरुग्राम, तारीख- 14 अप्रैल 2021

हरियाणा का गुरुग्राम। यहाँ के सेक्टर 12 का एक ढाबा। ढाबे के मालिक और रसोइया के विरुद्ध एफआईआर। कारण – वीडियो का वायरल होना। वीडियो में तंदूरी रोटी बनाते समय उस पर थूकता शख्स। गुरुग्राम पुलिस ने ढाबे के मालिक और तंदूरी रोटी सेंकने वाले का नाम सार्वजनिक नहीं किया था।

नाम- तमीजउद्दीन, काम- तंदूरी रोटी पर थूक, जगह- गाजियाबाद, तारीख- 16 अक्टूबर 2021

गाजियाबाद में चिकन पॉइंट नाम का एक ढाबा है। ढाबे के मालिक हैं शादाब और साहिल। यहाँ तंदूरी रोटी सेंकने का काम करता है तमीजउद्दीन। रोटियों पर थूक लगा कर सेंकते हुए तमीजउद्दीन एक वीडियो में कैद हो गया। वीडियो वायरल हुआ तो हिंदू रक्षा दल के लोग इस ढाबे पर पहुँचे। रोटियों पर थूक कर सेंकने की जब वजह पूछी, तो उसने अभद्रता की। शिकायत के बाद गाजियाबाद पुलिस ने इसे गिरफ्तार कर लिया।

नाम- अनाम लेकिन सिर पर जालीदार टोपी, काम- तंदूरी रोटी पर थूक, जगह- गाजियाबाद, तारीख- 15 नवंबर 2021

गाजियाबाद में एक इलाका है लोनी। यहाँ एक होटल है – मुस्लिम होटल। इसी होटल से रोटी बनाते समय उस पर थूकने के बाद तंदूर में डालने का वीडियो वायरल हुआ। वायरल वीडियो की शिकायत हिंदू रक्षा दल के लोगों ने पुलिस से की। आरोपित शख्स को पुलिस ने हिरासत में लिया है।

PS: कोरोना काल (जब लॉकडाउन लगा था) में जमातियों के थूकने, फल पर थूक लगा कर बेचने, चाकू पर थूक लगा कर फल काटने जैसी घटनाओं का जिक्र यहाँ नहीं किया गया है। लिस्ट लंबी हो जाती। लगातार ज्यादा देर तक पढ़ने के कारण घिन आने से उल्टी होने की संभावना भी होती।

गुजरात के अहमदाबाद में सड़क किनारे नहीं बिकेंगे नॉन-वेज, स्टॉल पर रोक: राजकोट, वडोदरा और भावनगर में भी बैन

अहमदाबाद महानगर पालिका (AMC) ने मंगलवार (16 नवंबर 2021) से सड़कों के किनारे माँसाहारी भोजन बेचने वाले स्टॉल पर प्रतिबंध लगा दिया है। एएमसी की टाउन प्लानिंग कमेटी ने इसे लेकर कहा कि स्कूल-कॉलेजों और धार्मिक स्थानों से 100 मीटर के दायरे में आने वाली सार्वजनिक सड़कों के किनारे माँसाहारी भोजन बेचने वाले स्टॉलों को अनुमति नहीं दी जाएगी।

समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार टाउन प्लानिंग कमेटी के चेयरमैन देवांग दानी ने बताया कि यह प्रतिबंध मंगलवार से लागू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि शहर के लोगों की ओर से इन स्टॉल को लेकर कई शिकायतें आ रही थीं। इन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए प्लानिंग समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। 

सभी अपनी इच्छा से खाने के लिए स्वतंत्र: मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल

इस प्रतिबंध को लेकर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा है कि लोग अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी खाने के लिए स्वतंत्र हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “यह शाकाहारी या माँसाहारी होने का सवाल नहीं है। लोग जो चाहें वह खाने के लिए आजाद हैं। लेकिन स्टॉल पर बिक रहा खाना नुकसानदायक नहीं होना चाहिए और यातायात बाधित नहीं होना चाहिए।”

मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि उन स्टॉल के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है जो खराब गुणवत्ता का भोजन बेच रहे होंगे या फिर यातायात व्यवस्था में बाधा पहुँचा रहे होंगे। उन्होंने कहा, कुछ लोग शाकाहारी भोजन करते हैं और कुछ माँसाहारी, भाजपा सरकार को इससे कोई समस्या नहीं है। हमारी चिंता केवल इन स्थानों पर मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर है।

वडोदरा में भी ऐसा ही कदम

गुजरात में अहमदाबाद पहला ऐसा शहर नहीं है, जहाँ इस तरह का प्रतिबंध लगाया गया है। इससे पहले वडोदरा से भी ऐसी ही खबर सामने आई थी। वडोदरा में खुले में माँसाहारी खाना बेचने वालों पर नकेल कसने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों को ये निर्देश दिए गए हैं कि माँसाहारी भोजन खुले में स्टॉल पर न बिके और जो लोग इसे बेच रहे हैं, वह माँसाहारी खाने को पूरी तरह से कवर करके रखें। अंडे और उससे बनी चीजों को भी खुले में बेचने वालों पर ये नियम लागू होगा।

वहीं गुजरात के एक अन्य शहर राजकोट के मेयर ने ये निर्देश दिए थे कि माँसाहारी भोजन बेचने वाले स्टॉल को हॉकिंग जोन तक सीमित रखा जाए और इन्हें मुख्य सड़कों से दूर किया जाए। बता दें कि राजकोट, वडोदरा और भावनगर के बाद अहमदाबाद गुजरात का चौथा ऐसा शहर है जहाँ नगर निगम की ओर से सड़क किनारों से माँसाहारी खाने के स्टॉल हटाने संबंधी मौखिक निर्देश दिए गए हैं।

थाने में ‘सुसाइड’ करने वाले अल्ताफ ने जिस लड़की को भगाया था वह बरामद, पीड़ित पिता ने कहा- रोज मिल रही धमकी

कासगंज में पुलिस की हिरासत में अल्ताफ की मौत के मामले में नया मोड़ आया है। उस पर जिस लड़की को भगाने के आरोप लगे थे, उसे पुलिस ने बरामद कर लिया है। कासगंज रेलवे स्टेशन से उक्त युवती को बरामद किया गया। लड़की के परिजनों को भी इसकी सूचना दी गई। साथ ही मजिस्ट्रेट के समक्ष लड़की का कलमबद्ध बयान भी दर्ज कर लिया गया है। लड़की के पिता ने कहा कि अभी तक बेटी से उनकी मुलाकात नहीं हुई है। साथ ही पिता ने एसपी से मिल कर सुरक्षा की गुहार लगाई है।

युवती के पिता का कहना है कि उनके घर पर 5-10 लोग आते हैं और फिर धमकी देकर चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों से सुरक्षा के लिए उन्होंने पुलिस से गुहार लगाई है। युवती के पिता ने बताया कि धमकी देने वाले कौन लोग हैं, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने युवती के परिजनों को सुरक्षा का आश्वासन दिया है। पुलिस ने सोमवार (16 नवंबर, 2021) को युवती को बरामद किया, जिसके बाद उसे न्यायालय में पेश कर कर बयान दर्ज किया गया।

लड़की को एक दिन बाद, अर्थात मंगलवार को परिजनों को सौंप दिया जाएगा। पीड़ित परिवार के अधिवक्ता विजय शर्मा ने जानकारी दी है कि लड़की का परिवार घटना वाले दिन से ही घर में शांति से नहीं रह पा रहा है और डर की वजह से ही परिवार ने एसपी से सुरक्षा के लिए मुलाकात की थी। लड़की के घर पर फ़िलहाल पुलिस को तैनात कर दिया गया है। ‘Zee News’ ने पुलिस सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि युवती ने पूछताछ में बताया है कि अल्ताफ ने नौकरी लगवाने की बात कह कर उसे बस स्टैंड बुलाया था।

इसके बाद उसने अपने दोस्त के साथ लड़की को मथुरा और फिर आगरा भेज दिया। लड़की को मजिस्ट्रेट द्वारा रिलीफ किए जाने के बाद परिवार को सौंप दिया जाएगा। बता दें कि अल्ताफ को 8 नवंबर, 2021 की शाम को पुलिस ने गायब लड़की के बारे में पूछताछ करने के लिए हिरासत में लिया था। अहरौली गाँव निवासी अल्ताफ की पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट में फाँसी लगा कर मरने की बात कही गई। 5 पुलिसकर्मी निलंबित भी हुए। पिता ने पहले यूपी पुलिस पर आरोप लगाए थे, लेकिन बाद में बयान बदल लिया। मामले की जाँच अभी भी चल रही है।

देह का धंधा कैसे करें, सिखाएगी यूनिवर्सिटी: ‘सेक्स वर्कर’ ट्रेनिंग प्रोगाम पर बवाल, डरहम यूनिवर्सिटी की सफाई- हम प्रोत्साहित नहीं कर रहे

ब्रिटेन की डरहम यूनिवर्सिटी सेक्स इंडस्ट्री के लिए छात्रों को ट्रेनिंग प्रोग्राम ऑफर कर रही है। खबर है कि वहाँ की स्टूडेंट यूनियन ने हाल ही में ईमेल के जरिए इस ट्रेनिंग विज्ञापन को जारी किया। हर छात्र और स्टाफ को भेजे गए ईमेल में लिखा था कि सेक्स वर्क करने वाले छात्रों को किसी भी पूर्वाग्रह से मुक्त अच्छी जानकारी और समर्थन हासिल करने में किसी तरह की समस्या का सामना नहीं करना चाहिए।

इस प्रोग्राम के जारी होने के बाद कुछ जगह इसका विरोध हो रहा है। सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘वेश्या’ बनाने की ट्रेनिंग बता रहे हैं। वहीं ब्रिटेन की उच्च शिक्षा मंत्री मिशेल डोनेलन भी छात्र संघ की इस ट्रेनिंग के ख़िलाफ़ हैं। उन्होंने कहा, “यह ट्रेनिंग यौन कार्य को सामान्य कार्य के रूप में मान्यता देने का एक प्रयास है… मुझे इस बात को लेकर बेहद गंभीर चिंता है कि यूनिवर्सिटी एक ऐसे खतरनाक धंधे को वैध बना रहा है, जहाँ महिलाओं का शोषण होता है।” वह बोले, “यह ठीक है कि शोषण की शिकार पीड़िताओं को महत्वपूर्ण सपोर्ट दिया जाता है। लेकिन यह कोर्स सेक्स सेलिंग को सामान्य कार्य बनाने का प्रयास है, जिसकी हमारे विश्वविद्यालयों में कोई जगह नहीं है।”

ट्रेनिंग प्रोग्राम पर भारी विरोध झेलने के बाद यूनिवर्सिटी ने बताया कि शुरू किए गए इस प्रोग्राम का उद्देश्य छात्रों को सेक्स कार्यों के लिए प्रोत्साहित करना नहीं है। मगर कुछ लोग इसे बदनाम कर रहे हैं। विश्वविद्यालय की प्रवक्ता ने कहा, “हम सेक्स वर्क को प्रोत्साहित नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम अपने स्टूडेंट्स की मदद कर रहे हैं। हम किसी भी छात्र को जज नहीं करते। हम उनकी सुनते हैं, उनकी सहायता करते हैं और उन्हें व्यवहारिक मदद पहुँचाते हैं। हम छात्रों और कर्मचारियों के लिए कई पाठ्यक्रम चलाते हैं, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य से लेकर वेल बीइंग , ड्रग्स और अल्कोहल अवेयरनेस भी शामिल हैं।” यूनिवर्सिटी के मुताबिक, सेक्स वर्क पर धब्बा लगा हुआ है। ऐसे में इस ट्रेनिंग के जरिए उन छात्रों की मदद कर रहे हैं जो ज्यादा खतरे में हैं। यूनिवर्सिटी उन्हें मदद दे रही है जिसकी उन्हें जरूरत है और जिसके वो हकदार हैं।

कार-बम से उड़ाना चाहा पूरा अस्पताल, ड्राइवर ने गेट लॉक कर दिया: आतंकी इमाद अकेले जल कर मर गया

ब्रिटेन के लीवरपुल शहर में एक अस्पताल के बाहर कार में हुए बम ब्लास्ट मामले में पुलिस ने 4 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इस आतंकी हमले में सिर्फ एक की मौत हुई है और वो भी आत्मघाती हमलावर इमाद अल-स्वैलमिन की। एक अन्य शख्स (टैक्सी ड्राइवर) घायल हुआ है। पुलिस ने विस्फोट को आतंकवादी हमला घोषित कर दिया है। आतंकवाद संबंधी कानून के तहत ही संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।

बता दें कि अस्पताल के बाहर हुए बम ब्लास्ट के बाद मालूम चला कि जिस कार में विस्फोट हुआ, वह गाड़ी एक टैक्सी थी जिसे कुछ देर पहले अस्पताल के बाहर लाया गया था। हालाँकि बाद की जाँच में यह सामने आया कि आत्मघाती हमलावर को टैक्सी ड्राइवर (डेविड पेरी) ने असलियत जानने के बाद गाड़ी में बंद कर दिया था वरना उसका प्लान तो एक चर्च के पास विस्फोट करने का था।

डेविड पेरी नामक टैक्सी ड्राइवर ने आत्मघाती हमलावर के पास विस्फोटक देखने के बाद हिम्मत दिखाते हुए उसे कार में लॉक किया था। डेलीमेल की रिपोर्ट के अनुसार, डेविड से आतंकी ने लीवरपूल की पॉपी डे परेड में ले जाने को कहा था। लेकिन उन्होंने जब आतंकी के पास विस्फोटक देखा तो उसे कार में ही वहीं बंद कर दिया। इस हमले में डेविड पेरी घायल हो गए, लेकिन चंद टाँकों के बाद अब वो सुरक्षित अपने घर पर हैं।

जानकारी के मुताबिक पेरी से पहले लीवरपूल के बड़े चर्च में चलने को कहा गया लेकिन बाद में मूड बदला तो लीवरपूल के महिला अस्पताल के पास गाड़ी रोकने को कहा। इसके बाद जब आत्मघाती हमलावर गाड़ी से उतरने लगा तो डेविड ने उसके कपड़ों पर विस्फोटक बंधा हुआ देखा और यह देख वह तुरंत समझ गया कि आखिर ये शख्स कौन है। उसने आतंकी को कार में बंद किया। जिसके बाद कार के भीतर विस्फोट हुआ।

बताया जा रहा है कि आत्मघाती हमलावर एक ऐसे समारोह में हमला करने की फिराक में था जहाँ 2000 से अधिक सैन्य कर्मी, दिग्गज, नागरिक गणमान्य इकट्ठा होने थे। ये समारोह चर्च में था। लेकिन टैक्सी ड्राइवर की सूझबूझ के कारण एक बड़ी घटना होने से रुक गई। अब पुलिस ने जिन संदिग्धों को पकड़ा है वो 21 से 29 साल के लड़के हैं। पुलिस जरूरी पूछताछ कर रही है।

इमाद अल-स्वैलमिन (Emad Al Swealmeen) कौन?

इमाद अल-स्वैलमिन को इंग्लैंड में उसके दोस्त और जान-पहचान वाले ‘एंज़ो अल्मेनी’ के रूप में जानते थे। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वो 2017 में इस्लाम को त्याग कर ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गया था। लेकिन यह उसकी एक चालाकी भर थी। ऐसा इसलिए क्योंकि 2014 में शरणार्थी बनने का उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया था। नाम और धर्म बदल कर उसने 2017 में आखिरकार इंग्लैंड में शरण ले ही ली। इरादा क्या था, वो आत्मघाती हमलावर बन कर मरने से शायद स्पष्ट है।

उसने शादी भी कर ली थी। पत्नी का नाम है मैरियन हिचकॉट, जो एक ईसाई हैं। इस आतंकी घटना के बाद मैरियन ने मीडिया को बताया, “विस्फोट से स्तब्ध हूँ, हम सब बहुत दुखी हैं… हम सब बस उससे प्यार करते थे, वह एक प्यारा लड़का था।”

‘5 नहीं, ₹1.5 करोड़ की ही है घड़ी’: हार्दिक पांड्या की सफाई- खुद देने गया था कस्टम, सारे दस्तावेज दूँगा

क्रिकेटर हार्दिक पांड्या को लेकर कल (15 नवंबर 2021) मीडिया में खबरें आई कि उनकी 2 घड़ियों को इनवॉइस न होने के कारण एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने उनको (घड़ियों) जब्त कर लिया है। अब इसी मामले पर हार्दिक पांड्या ने अपनी पूरी सफाई दी है। उन्होंने साफ किया है कि उन्होंने खुद दुबई में खरीदी गई चीजों की घोषणा की थी। साथ ही जो कस्टम ड्यूटी चुकाने की जरूरी थी उसके भुगतान के लिए वो तैयार थे। उन्होंने ये भी बताया कि घड़ी ₹5 करोड़ की नहीं बल्कि ₹1.5 करोड़ की ही है।

हार्दिक पांड्या ने बयान में कहा,

“दुबई से मैं सोमवार की सुबह (15 नवंबर 2021) आया। एयरपोर्ट पर अपना सामान लेने के बाद मैं खुद से कस्टम विभाग के काउंटर पर गया। ऐसा इसलिए किया ताकि मैं खुद के द्वारा लाए गए सामानों से संबंधित सीमा शुल्क का भुगतान कर सकूँ। इस संबंध में मुंबई के एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग के पास मेरे द्वारा घोषित चीजों को लेकर सोशल मीडिया पर गलत धारणाएँ फैलाई जा रही हैं। इस बारे में कुछ चीजों को लेकर मैं स्थिति स्पष्ट करूँगा।

मैंने जो भी चीजें दुबई से खरीदी हैं, उन सभी वस्तुओं की घोषणा खुद से की थी। साथ ही जो भी कस्टम ड्यूटी चुकाने की जरूरत थी, उसका भुगतान करने के लिए भी मैं खुद से ही तैयार था। कस्टम विभाग ने सभी खरीदी गई वस्तुओं का संबंधित दस्तावेज माँगा था, जो मैंने उन्हें दे भी दिया था। इन सब चीजों का कस्टम विभाग उचित मूल्यांकन कर रहा है, और मैंने पहले ही इन सबको लेकर भुगतान करने की बात कह दी थी।

घड़ी की कीमत लगभग 1.5 करोड़ रुपए है। सोशल मीडिया पर 5 करोड़ रुपए वाली चल रही बात एक अफवाह है।

मैं देश के कानून का पालन करने वाला नागरिक हूँ। मैं सभी सरकारी एजेंसियों का सम्मान करता हूँ। मुझे मुंबई कस्टम विभाग से पूरा सहयोग मिला है, मैंने भी उन्हें अपना पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए उन्हें जो भी दस्तावेज चाहिए होंगे, मैं उन्हें खुद दूँगा। कानून को लाँघ कर कुछ गलत करने जैसा जो भी मेरे खिलाफ आरोप हैं, वो सब पूरी तरह से निराधार हैं।”

बता दें कि लग्जरी लाइफ जीने वाले ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या ने इअगस्त में इंस्टाग्राम पर अपनी कई तस्वीरें एक साथ पोस्ट की थीं। क्रिकेटर ने अपनी कैप और धूप के चश्मे के साथ ली गई तस्वीरों के साथ Patek Philippe Nautilus Platinum 5711 की लग्जरी घड़ी की तस्वीर भी साझा की थी। इस घड़ी में पन्ना मढ़ा हुआ था। घड़ी की कीमत 5 करोड़ रुपए से अधिक बताई जाती है।

GQ India के अनुसार, महँगी घड़ियों के शौकीन पांड्या अपनी बेहद महँगी घड़ियों की कलेक्शन के कारण अभिनेता-कॉमेडियन केविन हार्ट और रैपर ड्रेक जैसी मशहूर हस्तियों के क्लब में शामिल हो गए हैं। यह पहली बार नहीं था, जब ऑलराउंडर का लग्जरी घड़ियों का शौक सबके सामने आया। साल 2019 में जब पांड्या चोटिल हो गए थे और उनकी सर्जरी हुई थी, तब उन्होंने एक चमकदार घड़ी पहने हुए अस्पताल के बिस्तर वाली अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी। सोशल मीडिया यूजर्स ने उस दौरान दावा किया था कि यह घड़ी Patek Philippe Nautilus की है।

7 तस्वीरें, दावा: कुरान जलाई-मस्जिदों में आग लगा दी: त्रिपुरा का नाम लेकर ऐसे जलाया गया महाराष्ट्र

त्रिपुरा के नाम पर महाराष्ट्र में पिछले दिनों मुस्लिम भीड़ ने जमकर उत्पात मचाया। सैंकड़ों की भीड़ ने सड़कों पर उतरकर तोड़फोड़ की, पुलिस पर पथराव किया। अब इसी घटना को लेकर टाइम्स नाऊ ने अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट प्रकाशित की है। मीडिया चैनल के अनुसार, हिंदुओं और हिंदू संगठनों के ख़िलाफ़ ये हिंसा त्रिपुरा के बारे में फर्जी पोस्ट कर करके फैलाई गई। कहीं इसमें कहा गया कि मुस्लिमों पर हमला हुआ तो कहीं बोला गया कि मस्जिद को जलाया गया।

रिपोर्ट में 7 तस्वीरों का जिक्र है और इन्हीं के बल पर दावा किया गया है कि हिंदुओं के विरुद्ध पूरा अभियान फर्जी तस्वीरों (वीडियो में मौजूद) से चलाया गया। एक फोटो में दो लोग हाथ में जली हुई किताब लेकर दिख रहे हैं। इस तस्वीर को कैप्शन दिया गया कि हिंदू गुंडों ने कुरान की प्रतियाँ जलाई हैं जबकि वास्तविकता में ये तस्वीर जून में दिल्ली के एक रिफ्यूजी कैंप से ली गई थी।

दूसरी तस्वीर में एक इस्लामी उलेमा, इमारतों में लगी आग को ये कहकर फैलाता पाया गया कि त्रिपुरा में 16 मस्जिदों में आग लगा दी गई है जबकि तस्वीर त्रिपुरा के अगरतला की है जिसमें सीपीएम ऑफिस को निशाना बनाया गया था न कि मस्जिदों को।

इसी तरह एक अन्य तस्वीर जिसमें बीजेपी का झंडा देख लोगों की भीड़ वाली तस्वीर पर लिखा गया, ‘भगवा आतंकी आपे से बाहर हो रहे हैं।’ अब ये तस्वीर दरअसल कोलकाता में विहिप द्वारा रामनवमी पर निकाले गए जुलूस की है जिसका त्रिपुरा से लेना-देना नहीं है।

अगले पोस्ट में एक फिरोज खान ने कहा कि दंगाइयों को त्रिपुरा पुलिस संरक्षण प्रदान कर रही है। वहीं राज्य पुलिस की साइबर क्राइम ने इसे फेक तस्वीर कहा। ऐसी ही अगली तस्वीर का जिक्र भी रिपोर्ट में है जो असलियत में पाकिस्तान के निजामाबाद की है। वो भी तब की जब एक धमाके में 4 लोग मारे गए थे।

इसके बाद अगली तस्वीर में कहा गया कि त्रिपुरा में मुस्लिमों की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। लेकिन यदि सच का पता लगाएँ तो दावे वाली तस्वीर जौनपुर की है जहाँ 22 अक्टूबर 3 मंजिला बिल्डिंग गिर गई थी। 

बता दें कि महाराष्ट्र में भड़की हिंसा को देखते हुए गृह मंत्रालय पहले ही बयान जारी कर चुका है कि त्रिपुरा में मस्जिद को नुकसान पहुँचाने की खबरें झूठी हैं और तथ्यों को जोड़-तोड़ कर बनाई गई हैं। त्रिपुरा के गोमती जिले के ककराबन इलाके में ऐसी कोई घटना घटित नहीं हुई, जैसी फैलाई जा रही है कि वहाँ मस्जिदों पर हमला हुआ और तोड़फोड़ हुई।

गौरतलब है कि 12 नवंबर को महाराष्ट्र के नांदेड़, अमरावती और मालेगाँव समेत कई शहरों में मुस्लिम संगठनों ने त्रिपुरा हिंसा के नाम पर इकट्ठा होकर उपद्रव मचाया था। भीड़ के डर से बाजार में दुकानें बंद हो गईं थी और पुलिस पर भी पथराव किया गया था। इलाके शांत होने के बाद पता चला था कि इस तरह सड़कों पर उतरने से पहले सोशल मीडिया पर जमकर तस्वीरें शेयर हुई थी। कहीं बांग्लादेश के रोहिंग्याओं को त्रिपुरा के मुस्लिम कहा गया था तो कहीं दूसरे राज्यों की तस्वीरें शेयर हुई थी।

भोपाल में बुर्के में औरतों का हुजूम, हाथों में ‘धन्यवाद मोदी जी’ का पोस्टर: इधर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हरक्यूलिस से लैंड करेंगे PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (16 नवंबर 2021) पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार वे हरक्यूलिस विमान से एक्सप्रेसवे पर लैंड करेंगे। इस दौरान 45 मिनट का एयर शो भी होगा, जिसमें वायुसेना के विमान अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगे। यह एक्सप्रेसवे 341 किलोमीटर लंबा है। यह लखनऊ से होते हुए बाराबंकी, फैजाबाद, अंबेडकरनगर, अमेठी, सुल्तानपुर, आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर से होकर गुजरेगा। प्रधानमंत्री ने जुलाई 2018 में आजमगढ़ में इसकी आधारशिला रखी थी और आज सुल्तानपुर में लोकार्पण करेंगे

इससे एक दिन पहले प्रधानमंत्री मध्य प्रदेश में थे। उन्होंने पहले जनजातीय दिवस (15 नवंबर) पर भोपाल के जंबूरी मैदान में कार्यक्रम को संबोधित किया। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का लोकार्पण किया जो पहले हबीबगंज रेलवे स्टेशन के नाम से जाना जाता था।

भोपाल पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करने के लिए सड़क किनारे बड़ी संख्या में मुस्लिम औरतें भी इकट्ठा हुईं थी। बुर्के में दिख रही इन औरतों के हाथ में पोस्टर था। इसके जरिए तीन तलाक खत्म करने के लिए वे प्रधानमंत्री का धन्यवाद कर रहीं थीं। इनकी अगुवाई कर रही महिला ने दैनिक भास्कर को बताया, “प्रधानमंत्री ने हम लोगों को ट्रिपल तलाक से निजात दिलाया है। उन्होंने ट्रिपल तलाक रोकने के लिए कानून बनाकर अच्छा कार्य किया है। इसलिए वे प्रधानमंत्री मोदी का अभिनंदन करने पहुँची हैं।”

मुस्लिम महिलाओं की यह तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल है। इसमें महिलाओं को सड़क किनारे खड़ा होकर ‘मोदी, मोदी’ का नारा लगाते देखा जा सकता है। गौरतलब है कि कट्टरपंथियों के विरोध के बावजूद मोदी सरकार ने 2019 में कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के दंश से मुक्ति दिलाई थी।

भोपाल में जनजातीय गौरव दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी कहा था, “आज का दिन पूरे देश के लिए बहुत बड़ा दिन है। आज भारत अपना पहला जनजातीय गौरव दिवस मना रहा है। आजादी के बाद देश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर पूरे देश के जनजातीय समाज की कला, संस्कृति, स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को गौरव के साथ याद किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि आजादी के बाद की सरकारों ने आदिवासियों की समृद्ध विरासत के बारे में देश को नहीं बताया।