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गुजरात के अहमदाबाद में सड़क किनारे नहीं बिकेंगे नॉन-वेज, स्टॉल पर रोक: राजकोट, वडोदरा और भावनगर में भी बैन

अहमदाबाद महानगर पालिका (AMC) ने मंगलवार (16 नवंबर 2021) से सड़कों के किनारे माँसाहारी भोजन बेचने वाले स्टॉल पर प्रतिबंध लगा दिया है। एएमसी की टाउन प्लानिंग कमेटी ने इसे लेकर कहा कि स्कूल-कॉलेजों और धार्मिक स्थानों से 100 मीटर के दायरे में आने वाली सार्वजनिक सड़कों के किनारे माँसाहारी भोजन बेचने वाले स्टॉलों को अनुमति नहीं दी जाएगी।

समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार टाउन प्लानिंग कमेटी के चेयरमैन देवांग दानी ने बताया कि यह प्रतिबंध मंगलवार से लागू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि शहर के लोगों की ओर से इन स्टॉल को लेकर कई शिकायतें आ रही थीं। इन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए प्लानिंग समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। 

सभी अपनी इच्छा से खाने के लिए स्वतंत्र: मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल

इस प्रतिबंध को लेकर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा है कि लोग अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी खाने के लिए स्वतंत्र हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “यह शाकाहारी या माँसाहारी होने का सवाल नहीं है। लोग जो चाहें वह खाने के लिए आजाद हैं। लेकिन स्टॉल पर बिक रहा खाना नुकसानदायक नहीं होना चाहिए और यातायात बाधित नहीं होना चाहिए।”

मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि उन स्टॉल के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है जो खराब गुणवत्ता का भोजन बेच रहे होंगे या फिर यातायात व्यवस्था में बाधा पहुँचा रहे होंगे। उन्होंने कहा, कुछ लोग शाकाहारी भोजन करते हैं और कुछ माँसाहारी, भाजपा सरकार को इससे कोई समस्या नहीं है। हमारी चिंता केवल इन स्थानों पर मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर है।

वडोदरा में भी ऐसा ही कदम

गुजरात में अहमदाबाद पहला ऐसा शहर नहीं है, जहाँ इस तरह का प्रतिबंध लगाया गया है। इससे पहले वडोदरा से भी ऐसी ही खबर सामने आई थी। वडोदरा में खुले में माँसाहारी खाना बेचने वालों पर नकेल कसने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों को ये निर्देश दिए गए हैं कि माँसाहारी भोजन खुले में स्टॉल पर न बिके और जो लोग इसे बेच रहे हैं, वह माँसाहारी खाने को पूरी तरह से कवर करके रखें। अंडे और उससे बनी चीजों को भी खुले में बेचने वालों पर ये नियम लागू होगा।

वहीं गुजरात के एक अन्य शहर राजकोट के मेयर ने ये निर्देश दिए थे कि माँसाहारी भोजन बेचने वाले स्टॉल को हॉकिंग जोन तक सीमित रखा जाए और इन्हें मुख्य सड़कों से दूर किया जाए। बता दें कि राजकोट, वडोदरा और भावनगर के बाद अहमदाबाद गुजरात का चौथा ऐसा शहर है जहाँ नगर निगम की ओर से सड़क किनारों से माँसाहारी खाने के स्टॉल हटाने संबंधी मौखिक निर्देश दिए गए हैं।

थाने में ‘सुसाइड’ करने वाले अल्ताफ ने जिस लड़की को भगाया था वह बरामद, पीड़ित पिता ने कहा- रोज मिल रही धमकी

कासगंज में पुलिस की हिरासत में अल्ताफ की मौत के मामले में नया मोड़ आया है। उस पर जिस लड़की को भगाने के आरोप लगे थे, उसे पुलिस ने बरामद कर लिया है। कासगंज रेलवे स्टेशन से उक्त युवती को बरामद किया गया। लड़की के परिजनों को भी इसकी सूचना दी गई। साथ ही मजिस्ट्रेट के समक्ष लड़की का कलमबद्ध बयान भी दर्ज कर लिया गया है। लड़की के पिता ने कहा कि अभी तक बेटी से उनकी मुलाकात नहीं हुई है। साथ ही पिता ने एसपी से मिल कर सुरक्षा की गुहार लगाई है।

युवती के पिता का कहना है कि उनके घर पर 5-10 लोग आते हैं और फिर धमकी देकर चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों से सुरक्षा के लिए उन्होंने पुलिस से गुहार लगाई है। युवती के पिता ने बताया कि धमकी देने वाले कौन लोग हैं, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने युवती के परिजनों को सुरक्षा का आश्वासन दिया है। पुलिस ने सोमवार (16 नवंबर, 2021) को युवती को बरामद किया, जिसके बाद उसे न्यायालय में पेश कर कर बयान दर्ज किया गया।

लड़की को एक दिन बाद, अर्थात मंगलवार को परिजनों को सौंप दिया जाएगा। पीड़ित परिवार के अधिवक्ता विजय शर्मा ने जानकारी दी है कि लड़की का परिवार घटना वाले दिन से ही घर में शांति से नहीं रह पा रहा है और डर की वजह से ही परिवार ने एसपी से सुरक्षा के लिए मुलाकात की थी। लड़की के घर पर फ़िलहाल पुलिस को तैनात कर दिया गया है। ‘Zee News’ ने पुलिस सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि युवती ने पूछताछ में बताया है कि अल्ताफ ने नौकरी लगवाने की बात कह कर उसे बस स्टैंड बुलाया था।

इसके बाद उसने अपने दोस्त के साथ लड़की को मथुरा और फिर आगरा भेज दिया। लड़की को मजिस्ट्रेट द्वारा रिलीफ किए जाने के बाद परिवार को सौंप दिया जाएगा। बता दें कि अल्ताफ को 8 नवंबर, 2021 की शाम को पुलिस ने गायब लड़की के बारे में पूछताछ करने के लिए हिरासत में लिया था। अहरौली गाँव निवासी अल्ताफ की पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट में फाँसी लगा कर मरने की बात कही गई। 5 पुलिसकर्मी निलंबित भी हुए। पिता ने पहले यूपी पुलिस पर आरोप लगाए थे, लेकिन बाद में बयान बदल लिया। मामले की जाँच अभी भी चल रही है।

देह का धंधा कैसे करें, सिखाएगी यूनिवर्सिटी: ‘सेक्स वर्कर’ ट्रेनिंग प्रोगाम पर बवाल, डरहम यूनिवर्सिटी की सफाई- हम प्रोत्साहित नहीं कर रहे

ब्रिटेन की डरहम यूनिवर्सिटी सेक्स इंडस्ट्री के लिए छात्रों को ट्रेनिंग प्रोग्राम ऑफर कर रही है। खबर है कि वहाँ की स्टूडेंट यूनियन ने हाल ही में ईमेल के जरिए इस ट्रेनिंग विज्ञापन को जारी किया। हर छात्र और स्टाफ को भेजे गए ईमेल में लिखा था कि सेक्स वर्क करने वाले छात्रों को किसी भी पूर्वाग्रह से मुक्त अच्छी जानकारी और समर्थन हासिल करने में किसी तरह की समस्या का सामना नहीं करना चाहिए।

इस प्रोग्राम के जारी होने के बाद कुछ जगह इसका विरोध हो रहा है। सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘वेश्या’ बनाने की ट्रेनिंग बता रहे हैं। वहीं ब्रिटेन की उच्च शिक्षा मंत्री मिशेल डोनेलन भी छात्र संघ की इस ट्रेनिंग के ख़िलाफ़ हैं। उन्होंने कहा, “यह ट्रेनिंग यौन कार्य को सामान्य कार्य के रूप में मान्यता देने का एक प्रयास है… मुझे इस बात को लेकर बेहद गंभीर चिंता है कि यूनिवर्सिटी एक ऐसे खतरनाक धंधे को वैध बना रहा है, जहाँ महिलाओं का शोषण होता है।” वह बोले, “यह ठीक है कि शोषण की शिकार पीड़िताओं को महत्वपूर्ण सपोर्ट दिया जाता है। लेकिन यह कोर्स सेक्स सेलिंग को सामान्य कार्य बनाने का प्रयास है, जिसकी हमारे विश्वविद्यालयों में कोई जगह नहीं है।”

ट्रेनिंग प्रोग्राम पर भारी विरोध झेलने के बाद यूनिवर्सिटी ने बताया कि शुरू किए गए इस प्रोग्राम का उद्देश्य छात्रों को सेक्स कार्यों के लिए प्रोत्साहित करना नहीं है। मगर कुछ लोग इसे बदनाम कर रहे हैं। विश्वविद्यालय की प्रवक्ता ने कहा, “हम सेक्स वर्क को प्रोत्साहित नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम अपने स्टूडेंट्स की मदद कर रहे हैं। हम किसी भी छात्र को जज नहीं करते। हम उनकी सुनते हैं, उनकी सहायता करते हैं और उन्हें व्यवहारिक मदद पहुँचाते हैं। हम छात्रों और कर्मचारियों के लिए कई पाठ्यक्रम चलाते हैं, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य से लेकर वेल बीइंग , ड्रग्स और अल्कोहल अवेयरनेस भी शामिल हैं।” यूनिवर्सिटी के मुताबिक, सेक्स वर्क पर धब्बा लगा हुआ है। ऐसे में इस ट्रेनिंग के जरिए उन छात्रों की मदद कर रहे हैं जो ज्यादा खतरे में हैं। यूनिवर्सिटी उन्हें मदद दे रही है जिसकी उन्हें जरूरत है और जिसके वो हकदार हैं।

कार-बम से उड़ाना चाहा पूरा अस्पताल, ड्राइवर ने गेट लॉक कर दिया: आतंकी इमाद अकेले जल कर मर गया

ब्रिटेन के लीवरपुल शहर में एक अस्पताल के बाहर कार में हुए बम ब्लास्ट मामले में पुलिस ने 4 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इस आतंकी हमले में सिर्फ एक की मौत हुई है और वो भी आत्मघाती हमलावर इमाद अल-स्वैलमिन की। एक अन्य शख्स (टैक्सी ड्राइवर) घायल हुआ है। पुलिस ने विस्फोट को आतंकवादी हमला घोषित कर दिया है। आतंकवाद संबंधी कानून के तहत ही संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।

बता दें कि अस्पताल के बाहर हुए बम ब्लास्ट के बाद मालूम चला कि जिस कार में विस्फोट हुआ, वह गाड़ी एक टैक्सी थी जिसे कुछ देर पहले अस्पताल के बाहर लाया गया था। हालाँकि बाद की जाँच में यह सामने आया कि आत्मघाती हमलावर को टैक्सी ड्राइवर (डेविड पेरी) ने असलियत जानने के बाद गाड़ी में बंद कर दिया था वरना उसका प्लान तो एक चर्च के पास विस्फोट करने का था।

डेविड पेरी नामक टैक्सी ड्राइवर ने आत्मघाती हमलावर के पास विस्फोटक देखने के बाद हिम्मत दिखाते हुए उसे कार में लॉक किया था। डेलीमेल की रिपोर्ट के अनुसार, डेविड से आतंकी ने लीवरपूल की पॉपी डे परेड में ले जाने को कहा था। लेकिन उन्होंने जब आतंकी के पास विस्फोटक देखा तो उसे कार में ही वहीं बंद कर दिया। इस हमले में डेविड पेरी घायल हो गए, लेकिन चंद टाँकों के बाद अब वो सुरक्षित अपने घर पर हैं।

जानकारी के मुताबिक पेरी से पहले लीवरपूल के बड़े चर्च में चलने को कहा गया लेकिन बाद में मूड बदला तो लीवरपूल के महिला अस्पताल के पास गाड़ी रोकने को कहा। इसके बाद जब आत्मघाती हमलावर गाड़ी से उतरने लगा तो डेविड ने उसके कपड़ों पर विस्फोटक बंधा हुआ देखा और यह देख वह तुरंत समझ गया कि आखिर ये शख्स कौन है। उसने आतंकी को कार में बंद किया। जिसके बाद कार के भीतर विस्फोट हुआ।

बताया जा रहा है कि आत्मघाती हमलावर एक ऐसे समारोह में हमला करने की फिराक में था जहाँ 2000 से अधिक सैन्य कर्मी, दिग्गज, नागरिक गणमान्य इकट्ठा होने थे। ये समारोह चर्च में था। लेकिन टैक्सी ड्राइवर की सूझबूझ के कारण एक बड़ी घटना होने से रुक गई। अब पुलिस ने जिन संदिग्धों को पकड़ा है वो 21 से 29 साल के लड़के हैं। पुलिस जरूरी पूछताछ कर रही है।

इमाद अल-स्वैलमिन (Emad Al Swealmeen) कौन?

इमाद अल-स्वैलमिन को इंग्लैंड में उसके दोस्त और जान-पहचान वाले ‘एंज़ो अल्मेनी’ के रूप में जानते थे। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वो 2017 में इस्लाम को त्याग कर ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गया था। लेकिन यह उसकी एक चालाकी भर थी। ऐसा इसलिए क्योंकि 2014 में शरणार्थी बनने का उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया था। नाम और धर्म बदल कर उसने 2017 में आखिरकार इंग्लैंड में शरण ले ही ली। इरादा क्या था, वो आत्मघाती हमलावर बन कर मरने से शायद स्पष्ट है।

उसने शादी भी कर ली थी। पत्नी का नाम है मैरियन हिचकॉट, जो एक ईसाई हैं। इस आतंकी घटना के बाद मैरियन ने मीडिया को बताया, “विस्फोट से स्तब्ध हूँ, हम सब बहुत दुखी हैं… हम सब बस उससे प्यार करते थे, वह एक प्यारा लड़का था।”

‘5 नहीं, ₹1.5 करोड़ की ही है घड़ी’: हार्दिक पांड्या की सफाई- खुद देने गया था कस्टम, सारे दस्तावेज दूँगा

क्रिकेटर हार्दिक पांड्या को लेकर कल (15 नवंबर 2021) मीडिया में खबरें आई कि उनकी 2 घड़ियों को इनवॉइस न होने के कारण एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने उनको (घड़ियों) जब्त कर लिया है। अब इसी मामले पर हार्दिक पांड्या ने अपनी पूरी सफाई दी है। उन्होंने साफ किया है कि उन्होंने खुद दुबई में खरीदी गई चीजों की घोषणा की थी। साथ ही जो कस्टम ड्यूटी चुकाने की जरूरी थी उसके भुगतान के लिए वो तैयार थे। उन्होंने ये भी बताया कि घड़ी ₹5 करोड़ की नहीं बल्कि ₹1.5 करोड़ की ही है।

हार्दिक पांड्या ने बयान में कहा,

“दुबई से मैं सोमवार की सुबह (15 नवंबर 2021) आया। एयरपोर्ट पर अपना सामान लेने के बाद मैं खुद से कस्टम विभाग के काउंटर पर गया। ऐसा इसलिए किया ताकि मैं खुद के द्वारा लाए गए सामानों से संबंधित सीमा शुल्क का भुगतान कर सकूँ। इस संबंध में मुंबई के एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग के पास मेरे द्वारा घोषित चीजों को लेकर सोशल मीडिया पर गलत धारणाएँ फैलाई जा रही हैं। इस बारे में कुछ चीजों को लेकर मैं स्थिति स्पष्ट करूँगा।

मैंने जो भी चीजें दुबई से खरीदी हैं, उन सभी वस्तुओं की घोषणा खुद से की थी। साथ ही जो भी कस्टम ड्यूटी चुकाने की जरूरत थी, उसका भुगतान करने के लिए भी मैं खुद से ही तैयार था। कस्टम विभाग ने सभी खरीदी गई वस्तुओं का संबंधित दस्तावेज माँगा था, जो मैंने उन्हें दे भी दिया था। इन सब चीजों का कस्टम विभाग उचित मूल्यांकन कर रहा है, और मैंने पहले ही इन सबको लेकर भुगतान करने की बात कह दी थी।

घड़ी की कीमत लगभग 1.5 करोड़ रुपए है। सोशल मीडिया पर 5 करोड़ रुपए वाली चल रही बात एक अफवाह है।

मैं देश के कानून का पालन करने वाला नागरिक हूँ। मैं सभी सरकारी एजेंसियों का सम्मान करता हूँ। मुझे मुंबई कस्टम विभाग से पूरा सहयोग मिला है, मैंने भी उन्हें अपना पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए उन्हें जो भी दस्तावेज चाहिए होंगे, मैं उन्हें खुद दूँगा। कानून को लाँघ कर कुछ गलत करने जैसा जो भी मेरे खिलाफ आरोप हैं, वो सब पूरी तरह से निराधार हैं।”

बता दें कि लग्जरी लाइफ जीने वाले ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या ने इअगस्त में इंस्टाग्राम पर अपनी कई तस्वीरें एक साथ पोस्ट की थीं। क्रिकेटर ने अपनी कैप और धूप के चश्मे के साथ ली गई तस्वीरों के साथ Patek Philippe Nautilus Platinum 5711 की लग्जरी घड़ी की तस्वीर भी साझा की थी। इस घड़ी में पन्ना मढ़ा हुआ था। घड़ी की कीमत 5 करोड़ रुपए से अधिक बताई जाती है।

GQ India के अनुसार, महँगी घड़ियों के शौकीन पांड्या अपनी बेहद महँगी घड़ियों की कलेक्शन के कारण अभिनेता-कॉमेडियन केविन हार्ट और रैपर ड्रेक जैसी मशहूर हस्तियों के क्लब में शामिल हो गए हैं। यह पहली बार नहीं था, जब ऑलराउंडर का लग्जरी घड़ियों का शौक सबके सामने आया। साल 2019 में जब पांड्या चोटिल हो गए थे और उनकी सर्जरी हुई थी, तब उन्होंने एक चमकदार घड़ी पहने हुए अस्पताल के बिस्तर वाली अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी। सोशल मीडिया यूजर्स ने उस दौरान दावा किया था कि यह घड़ी Patek Philippe Nautilus की है।

7 तस्वीरें, दावा: कुरान जलाई-मस्जिदों में आग लगा दी: त्रिपुरा का नाम लेकर ऐसे जलाया गया महाराष्ट्र

त्रिपुरा के नाम पर महाराष्ट्र में पिछले दिनों मुस्लिम भीड़ ने जमकर उत्पात मचाया। सैंकड़ों की भीड़ ने सड़कों पर उतरकर तोड़फोड़ की, पुलिस पर पथराव किया। अब इसी घटना को लेकर टाइम्स नाऊ ने अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट प्रकाशित की है। मीडिया चैनल के अनुसार, हिंदुओं और हिंदू संगठनों के ख़िलाफ़ ये हिंसा त्रिपुरा के बारे में फर्जी पोस्ट कर करके फैलाई गई। कहीं इसमें कहा गया कि मुस्लिमों पर हमला हुआ तो कहीं बोला गया कि मस्जिद को जलाया गया।

रिपोर्ट में 7 तस्वीरों का जिक्र है और इन्हीं के बल पर दावा किया गया है कि हिंदुओं के विरुद्ध पूरा अभियान फर्जी तस्वीरों (वीडियो में मौजूद) से चलाया गया। एक फोटो में दो लोग हाथ में जली हुई किताब लेकर दिख रहे हैं। इस तस्वीर को कैप्शन दिया गया कि हिंदू गुंडों ने कुरान की प्रतियाँ जलाई हैं जबकि वास्तविकता में ये तस्वीर जून में दिल्ली के एक रिफ्यूजी कैंप से ली गई थी।

दूसरी तस्वीर में एक इस्लामी उलेमा, इमारतों में लगी आग को ये कहकर फैलाता पाया गया कि त्रिपुरा में 16 मस्जिदों में आग लगा दी गई है जबकि तस्वीर त्रिपुरा के अगरतला की है जिसमें सीपीएम ऑफिस को निशाना बनाया गया था न कि मस्जिदों को।

इसी तरह एक अन्य तस्वीर जिसमें बीजेपी का झंडा देख लोगों की भीड़ वाली तस्वीर पर लिखा गया, ‘भगवा आतंकी आपे से बाहर हो रहे हैं।’ अब ये तस्वीर दरअसल कोलकाता में विहिप द्वारा रामनवमी पर निकाले गए जुलूस की है जिसका त्रिपुरा से लेना-देना नहीं है।

अगले पोस्ट में एक फिरोज खान ने कहा कि दंगाइयों को त्रिपुरा पुलिस संरक्षण प्रदान कर रही है। वहीं राज्य पुलिस की साइबर क्राइम ने इसे फेक तस्वीर कहा। ऐसी ही अगली तस्वीर का जिक्र भी रिपोर्ट में है जो असलियत में पाकिस्तान के निजामाबाद की है। वो भी तब की जब एक धमाके में 4 लोग मारे गए थे।

इसके बाद अगली तस्वीर में कहा गया कि त्रिपुरा में मुस्लिमों की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। लेकिन यदि सच का पता लगाएँ तो दावे वाली तस्वीर जौनपुर की है जहाँ 22 अक्टूबर 3 मंजिला बिल्डिंग गिर गई थी। 

बता दें कि महाराष्ट्र में भड़की हिंसा को देखते हुए गृह मंत्रालय पहले ही बयान जारी कर चुका है कि त्रिपुरा में मस्जिद को नुकसान पहुँचाने की खबरें झूठी हैं और तथ्यों को जोड़-तोड़ कर बनाई गई हैं। त्रिपुरा के गोमती जिले के ककराबन इलाके में ऐसी कोई घटना घटित नहीं हुई, जैसी फैलाई जा रही है कि वहाँ मस्जिदों पर हमला हुआ और तोड़फोड़ हुई।

गौरतलब है कि 12 नवंबर को महाराष्ट्र के नांदेड़, अमरावती और मालेगाँव समेत कई शहरों में मुस्लिम संगठनों ने त्रिपुरा हिंसा के नाम पर इकट्ठा होकर उपद्रव मचाया था। भीड़ के डर से बाजार में दुकानें बंद हो गईं थी और पुलिस पर भी पथराव किया गया था। इलाके शांत होने के बाद पता चला था कि इस तरह सड़कों पर उतरने से पहले सोशल मीडिया पर जमकर तस्वीरें शेयर हुई थी। कहीं बांग्लादेश के रोहिंग्याओं को त्रिपुरा के मुस्लिम कहा गया था तो कहीं दूसरे राज्यों की तस्वीरें शेयर हुई थी।

भोपाल में बुर्के में औरतों का हुजूम, हाथों में ‘धन्यवाद मोदी जी’ का पोस्टर: इधर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हरक्यूलिस से लैंड करेंगे PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (16 नवंबर 2021) पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार वे हरक्यूलिस विमान से एक्सप्रेसवे पर लैंड करेंगे। इस दौरान 45 मिनट का एयर शो भी होगा, जिसमें वायुसेना के विमान अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगे। यह एक्सप्रेसवे 341 किलोमीटर लंबा है। यह लखनऊ से होते हुए बाराबंकी, फैजाबाद, अंबेडकरनगर, अमेठी, सुल्तानपुर, आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर से होकर गुजरेगा। प्रधानमंत्री ने जुलाई 2018 में आजमगढ़ में इसकी आधारशिला रखी थी और आज सुल्तानपुर में लोकार्पण करेंगे

इससे एक दिन पहले प्रधानमंत्री मध्य प्रदेश में थे। उन्होंने पहले जनजातीय दिवस (15 नवंबर) पर भोपाल के जंबूरी मैदान में कार्यक्रम को संबोधित किया। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का लोकार्पण किया जो पहले हबीबगंज रेलवे स्टेशन के नाम से जाना जाता था।

भोपाल पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करने के लिए सड़क किनारे बड़ी संख्या में मुस्लिम औरतें भी इकट्ठा हुईं थी। बुर्के में दिख रही इन औरतों के हाथ में पोस्टर था। इसके जरिए तीन तलाक खत्म करने के लिए वे प्रधानमंत्री का धन्यवाद कर रहीं थीं। इनकी अगुवाई कर रही महिला ने दैनिक भास्कर को बताया, “प्रधानमंत्री ने हम लोगों को ट्रिपल तलाक से निजात दिलाया है। उन्होंने ट्रिपल तलाक रोकने के लिए कानून बनाकर अच्छा कार्य किया है। इसलिए वे प्रधानमंत्री मोदी का अभिनंदन करने पहुँची हैं।”

मुस्लिम महिलाओं की यह तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल है। इसमें महिलाओं को सड़क किनारे खड़ा होकर ‘मोदी, मोदी’ का नारा लगाते देखा जा सकता है। गौरतलब है कि कट्टरपंथियों के विरोध के बावजूद मोदी सरकार ने 2019 में कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के दंश से मुक्ति दिलाई थी।

भोपाल में जनजातीय गौरव दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी कहा था, “आज का दिन पूरे देश के लिए बहुत बड़ा दिन है। आज भारत अपना पहला जनजातीय गौरव दिवस मना रहा है। आजादी के बाद देश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर पूरे देश के जनजातीय समाज की कला, संस्कृति, स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को गौरव के साथ याद किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि आजादी के बाद की सरकारों ने आदिवासियों की समृद्ध विरासत के बारे में देश को नहीं बताया।

करी पत्ता की आड़ में गाँजे की ऑनलाइन सप्लाई, अमेजॉन का भी 67% कमीशन: 4 महीने में ₹1.10 करोड़ कीमत की बेच डाला 1000 किलो

ऑनलाइन शॉपिंग के लिए प्रसिद्ध अतंर्राष्ट्रीय ई-कॉमर्स कंपनी अमेजॉन के माध्यम से गाँजा की तस्करी का मामला सामने आया है। गाँजा की तस्करी आंध्र प्रदेश से करी पत्ता की आड़ में की जाती थी। सूचना के आधार पर पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही उनकी निशानदेही पर 20 किलोग्राम गाँजा भी जब्त किया है। पिछले 4 महीने में आरोपियों ने अमेजॉन के जरिए 1,000 किलोग्राम गाँजा की ऑनलाइन आपूर्ति की है, जिसकी कीमत लगभग एक करोड़ 10 लाख रुपये है।

मध्य प्रदेश के भिंड जिले के पुलिस अधीक्षक मनोज सिंह ने बताया, “अमेजॉन द्वारा गाँजे की तस्करी पर कार्रवाई की गई है। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से गाँजा लाकर मध्य प्रदेश से अन्य स्थानों पर 2-2kg का कन्साइनमेंट बनाकर भेजा जा रहा था। कल्लू नाम के एक व्यक्ति को भिंड के छिमका स्थित गोविंद ढाबा से अरेस्ट किया गया है और पिन्टू नाम का जो ढाबा संचालक है, उसके नाम से भी अमेजॉन का कन्साइनमेंट आया था। हरिद्वार के रहने वाले मुकेश जायसवाल को वहाँ के पुलिस के माध्यम से अभिरक्षा में लिया गया है।”

एसपी मनोज सिंह ने बताया कि हर कन्साइनमेंट के साथ अमेजॉन द्वारा 67 प्रतिशत की वसूली की जाती थी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अमेजॉन से जानकारी माँगी गई है और अगर उनकी संलिप्तता पाई जाती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। कल्लू ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उसने अमेजॉन प्लेटफॉर्म के जरिये पिछले 4 महीने में 1 टन (1,000 किलोग्राम) गाँजा की तस्करी की है। आरोपी Babu Tax नाम से एक फर्म बनाकर इसे विशाखापत्तनम में अमेजॉन के सेलर के रूप में पंजीकृत कराया था।

इस मामले पर अमेजॉन इंडिया ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। अमेजॉन इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, “वर्तमान में हम जाँच कर रहे हैं कि विक्रेता की ओर से नन-कम्पलाएंस का मामला तो नहीं है। हम इस मामले की जाँच कर रहे अधिकारियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आवश्यक और पूर्ण सहयोग देंगे।” कंपनी ने आगे कहा, “हम उन उत्पादों की लिस्टिंग और बिक्री की अनुमति नहीं देते हैं, जिन्हें भारत में बेचने के लिए कानून के तहत प्रतिबंधित किया गया है।” पूछताछ के लिए पुलिस ने अमेजॉन के स्थानीय अधिकारी को बुलाया है।

इस मामले के सामने आने के बाद व्यवसायियों की संस्था CAIT (कैट) के प्रदेश (मध्य प्रदेश) अध्यक्ष भूपेंद्र जैन ने कहा कि अमेजॉन से कढ़ी पत्ता के नाम पर गाँजा की सप्लाई होना गंभीर बात है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। कैट मंगलवार (16 अक्टूबर) से देश भर में अमेजॉन पर कार्रवाई के लिए अभियान चलाएगी। इस संबंध में प्रदेश व देश के गृहमंत्री से मिलकर उच्चस्तरीय जाँच की माँग की जाएगी।

दरअसल, मध्य प्रदेश की भिंड पुलिस को अमेजॉन द्वारा गाँजा की तस्करी की सूचना मिली थी, इसके बाद भिंड के एसपी ने साइबर सेल की टीम को इस मामले की जाँच की जिम्मेदारी सौंपी थी। इस मामले में ग्वालियर के मुरार निवासी कल्लू को संदिग्ध पाया गया। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी निशानदेही पर गोविंद ढाबा से पिंटू को भी गिरफ्तार किया गया। वहाँ पुलिस ने 20 किलोग्राम गाँजा सहित अमेजॉन की पैकिंग के डब्बे, रैपर, बारकोड टैगिंग आदि सामान भी जब्त किया है।

गाजियाबाद के ‘मुस्लिम होटल’ में फिर रोटियों पर थूक कर सेंकने का मामला: वीडियो वायरल, यूपी पुलिस ने हिरासत में लिया

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक बार फिर रोटी बनाते समय उसमें थूकने का वीडियो सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो लोनी के बंथला फ्लाईओवर के पास स्थित एक होटल का है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे सफेद रंग की टोपी पहनने वाला शख्स रोटी बनाते समय उस पर थूक रहा है। वायरल वीडियो की शिकायत हिंदू रक्षा दल के लोगों ने थाना लोनी में की है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने आरोपित को हिरासत में ले लिया है।

इस मामले पर गाजियाबाद पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल पर लोनी के सीओ का एक वीडियो शेयर किया है। सीओ इसमें कह रहे हैं कि लोनी क्षेत्र के एक होटल की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें एक व्यक्ति रोटी बनाते हुए उसमें थूक रहा है और उसे तंदूर में डाल रहा है। उन्होंने कहा कि जब वीडियो की जाँच की गई तो पाया गया कि यह लोनी के बंथला फ्लाईओवर के पास स्थित एक होटल का है। यह होटल मुस्लिम होटल के नाम से सं​चालित हो रहा है। रोटी पर थूकने वाले शख्स को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया है। उन्होंने आगे कहा, ”पूरे मामले की गहनता से जाँच की जाएगी और दोषी पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि ​आगे से किसी की भी भावनाएँ आ​हत ना हों।”

गौरतलब है कि एक महीने पहले भी यानी अक्टूबर में गाज़ियाबाद के एक ढाबे पर रोटियों में थूक लगा कर बनाते हुए वीडियो वायरल हुआ था। आरोपित का नाम तमीज़उद्दीन बताया गया था। इस मामले की शिकायत हिन्दू रक्षा दल ने पुलिस में की थी। बता दें कि गाज़ियाबाद में भाटिया मोड़ पर पंचवटी अहिंसा वाटिका नाम की मार्केट है। इसी में चिकन पॉइंट नाम की दुकान काफी समय से चल रही है। आरोपित तमीज़उद्दीन इसी ढाबे में तंदूर पर रोटियाँ बनाने का काम करता था।

हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों को लेकर अदालत ने ‘दंगाइयों’ के वकील महमूद प्राचा को फटकारा, जानें क्या है मामला

दिल्ली की एक अदालत ने राजधानी में हिंदू विरोधी दंगो के आरोपितों के वकील महमूद प्राचा को फटकार लगाई है। यह फटकार महमूद प्राचा को इसलिए लगाई गई है, क्योंकि उसने अदालत में तर्क दिया था, “2020 के दिल्ली दंगों के दौरान केवल मुसलमानों को निशाना बनाया गया था और झूठे मामलों में उन्हें फँसाया गया था।” प्राचा ने यह भी कहा था कि दिल्ली के दंगे वास्तव में सांप्रदायिक दंगे नहीं थे।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट ने 11 नवंबर को आरोपित आरिफ की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए वकील महमूद प्राचा की जमकर खिंचाई की। उन्होंने कहा, “पुलिस ने अपना काम पूरी ईमानदारी से किया, सांप्रदायिक आधार पर नहीं। एक चश्मदीद गवाह को आरोपित द्वारा धमकाया जा सकता है। आपके तर्क बेबुनियाद हैं।” इसके बाद अदालत ने आरोपित आरिफ को जमानत देने से इनकार कर दिया।

यह मामला 25 फरवरी, 2020 को शिव विहार तिराहा के पास आलोक तिवारी की हत्या से संबंधित है, जिसे कई गंभीर चोटें आई थीं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, मृतक को धारदार और नुकीले हथियारों से 13 चोटें आई थीं। दंगों के दौरान हुई हत्या के दो अलग-अलग मामलों में भी आरोपित आरिफ की जाँच चल रही है।

गौरतलब है कि लिबरल गिरोह के वकील महमूद प्राचा दिल्ली दंगा में ‘पीड़ितों’ का केस मुफ्त में लड़ने का दावा करता है और भारत में अघोषित आपातकाल के नैरेटिव को आगे बढ़ाता है। न सिर्फ कोर्ट में, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से भी वो इस्लामी प्रोपेगंडा फैलाने में दक्ष है।

आपको बता दें कि जमात उलेमा-ए-हिन्द ने महमूद प्राचा को कई आतंकवादियों का केस लड़ने के लिए हायर किया था। वकील महमूद प्राचा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के दिल्ली ब्रांच का सदस्य भी है। साउथ एशिया माइनॉरिटी लॉयर्स एसोसिएशन का वो अध्यक्ष है। साथ ही जुलाई 2017 से वो अमेरिका के ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ की तर्ज पर भारत में ‘दलित, माइनॉरिटी एंड ट्राइबल लाइव्स मैटर्स’ नामक अभियान चला रहा है।