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लखीमपुर खीरी केस: पूर्व जज की निगरानी में जाँच को तैयार UP सरकार, SC ने SIT अपग्रेड करने के दिए निर्देश

उत्तर प्रदेश सरकार लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में रिटायर्ड जज की निगरानी में जाँच के लिए तैयार है। प्रदेश सरकार की तरफ से पेश वकील हरीश साल्वे ने सोमवार (15 नवंबर 2021) को यह बातें कही। इस पर संज्ञान लेते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ ने मामले को बुधवार (17 नवंबर 2021) के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में मुख्य आरोपित केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा और दो अन्य की जमानत याचिका पर सुनवाई हो रही थी। 

सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लखीमपुर हत्याकांड की जाँच कर रहे अधिकारियों को अपग्रेड किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से वरिष्ठ अधिकारियों की सूची भी माँगी। जिसके बाद यूपी सरकार ने जाँच का नेतृत्व करने के लिए हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज का चुनाव करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से कहा। कोर्ट ने कहा कि नामों पर विचार करने के लिए उसे एक दिन की जरूरत है।

इसके अलावा कोर्ट ने जाँच टीम में अधिकारियों के स्तर को लेकर चिंता जाहिर की। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने कहा, “चिंता यह है कि आपको मामले की जाँच कर रहे टीम को अपग्रेड करना होगा। इसमें उच्च ग्रेड के अधिकारियों की होने की जरूरत है।”

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भी इस पर सहमति व्यक्त करते हुए कहा, “मौजूदा एसआईटी में ज्यादातर अधिकारी लखीमपुर से ही हैं। आप हमें उन आईपीएस अधिकारियों के नाम बताएँ जो यूपी कैडर से हैं लेकिन यूपी से संबंधित नहीं हैं।”

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के तिकुनिया इलाके में तीन अक्टूबर को हिंसा के दौरान चार किसान, एक पत्रकार समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के बेटे आशीष मिश्र समेत 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ बलवा, हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में 13 आरोपित जेल में हैं। दूसरे पक्ष से सभासद सुमित जायसवाल की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

सुमित जायसवाल ने मुकदमे में आरोप लगाया था कि प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच मौजूद कुछ अराजक तत्वों ने लाठियों और ईंट-पत्थरों से वाहन पर हमला किया जिसकी वजह से चालक हरिओम घायल हो गया और उसने सड़क के किनारे कार रोक दी। इसके बाद पत्रकार रमन कश्यप, कार चालक हरि ओम और बीजेपी कार्यकर्ताओं शुभम मिश्रा तथा श्यामसुंदर को प्रदर्शनकारियों ने पीट-पीटकर मार डाला।

पहले ‘जनजातीय गौरव दिवस’ पर PM मोदी ने बिरसा मुंडा को दी पुष्पांजलि, रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का किया लोकार्पण

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान में सोमवार (15 नवंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। जनजातीय गौरव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने सभी लोगों को बिरसा मुंडा के जन्मदिन की शुभकामनाएँ दीं। इस मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्यपाल मंगूभाई पटेल सहित कई नेता मौजूद रहे। साथ ही प्रधानमंत्री ने रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का लोकार्पण भी किया। पहले इस स्टेशन का नाम हबीबगंज रेलवे स्टेशन था, जिसे अब बदल दिया गया है।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, ”आज का दिन पूरे देश के लिए बहुत बड़ा दिन है। आज भारत अपना पहला जनजातीय गौरव दिवस मना रहा है। आजादी के बाद देश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर पूरे देश के जनजातीय समाज की कला, संस्कृति, स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को गौरव के साथ याद किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि आजादी के बाद की सरकारों ने आदिवासियों की समृद्ध विरासत के बारे में देश को नहीं बताया। 

उन्होंने कहा कि अपने जीवन के महत्वपूर्ण कालखंड को वे आदिवासियों के बीच बिताएँ हैं। जीवन जीने का कारण, जीवन जीने के इरादे को आदिवासी परंपरा बखूबी प्रस्तुत करती है। पीएम ने अपने संबोधन में कहा कि जल जीवन मिशन के तहत 30 लाख परिवारों को अब नल से जल मिलना शुरू हो गया है। इनमें ज्यादातर इलाके जनजातियों के हैं। पहले की तरह हमारी बहन-बेटियों को अब पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ता है। पहले केवल बहाने बनाए जाते थे कि आम लोगों तक सुविधाएँ पहुँचाना मुश्किल है। ऐसा कहकर आदिवासियों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता था।

वहीं, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनजातीय गौरव दिवस और हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति के नाम करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी पर हमला करते हुए कहा, ”पुरानी सरकारों ने सिर्फ एक परिवार को महिमामंडित किया, बल्कि आदिवासियों के योगदान को अपने षड्यंत्र से भुलाया। प्रधानमंत्री जी ने जनजातीय गौरव दिवस की घोषणा करके भारत माता का कर्ज उतारा है।” उन्होंने आगे कहा, ”भोपाल केवल नवाबों का इतिहास नहीं था, बल्कि अफगानी लुटेरे दोस्त मोहम्मद ने गोंड रानी कमलापति को इतना परेशान किया कि उन्हें जल समाधि लेना पड़ी। पीएम मोदी ने ऐसी रानी के नाम को सम्मान देकर अभूतपूर्व काम किया है।”

6 मर्डर करो और छैमार गैंग का सरगना बनो: वारदात से पहले पार्टी करते, लाठी से सिर फोड़ देते

राजस्थान में जयपुर पुलिस को कुख्यात छैमार गैंग के विरुद्ध बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने डकैती, हत्या और लूट जैसे संगीन अपराधों में शामिल इस गैंग के 9 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों में साहिब खान उर्फ़ शेफ अली उर्फ़ मुनाजिर भी शामिल है। साहिब खान पर उत्तर प्रदेश पुलिस की STF यूनिट ने 25 हजार रुपए का इनाम भी घोषित कर रखा है। साहिब खान उर्फ़ मुनाजिर का अब्बा आदिल उर्फ़ शेर खान भी गिरफ्तार किया गया है। छापेमारी 11 और 12 नवम्बर 2021 को की गई।

यह कार्रवाई जयपुर कमिश्नरेट की CAT टीम, मानसरोवर थाना मुहाना और शिप्रा पथ थाना पुलिस ने मिल कर की। इन टीमों ने मिलकर एक वृहद सर्च अभियान छेड़ा था। जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में डीसीपी (क्राइम) डॉ. अमृता दुहान के मुताबिक, क्राइम ब्रांच टीम को संदिग्धों की सूचना मिली थी। इस अभियान में कुल 54 संदिग्धों को पकड़ा गया था। यह अभियान शहर में होने वाले अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए डेरों और कच्ची बस्तियों में छेड़ा गया था। इसी सर्च अभियान के दौरान छैमार गिरोह के सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं। बाकी संदिग्धों से भी पूछताछ जारी है।

छैमार गिरोह के गिरफ्तार आरोपितों के नाम आदिल उर्फ शेर खान, साहिब उर्फ सैफ अली, करीम खान, मादिल उर्फ मोहिन खान, सावेश खान, माजिद अली, आमिर उर्फ जाहिर, शाहिद खान, नदीम उर्फ बॉबी हैं। आदिल उर्फ शेरखान उत्तर प्रदेश का निवासी है। वह जयपुर के मानसरोवर के पास एक कब्रिस्तान के बगल छुपा हुआ था। गिरोह के सरगना साहिब को UP की औरैया पुलिस को सौंप दिया गया है।

जयपुर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अजयपाल लांबा ने इनकी आपराधिक कार्यशैली की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ये समूह घटना से पहले रात 9 से 10 बजे के बीच अपने लक्ष्य के आसपास एक सुनसान जगह पर मीटिंग करते हैं। वहीं पर ये सभी माँस और मदिरा का सेवन करते हैं। इसके बाद ये समूह एक हरे पेड़ से लकड़ियों को काटकर उसकी पूजा करते हैं। ये रात लगभग 2 बजे अपने टारगेट वाले घर में घुसते हैं। एक सदस्य छत से जा कर मुख्य द्वार खोलता है। फिर गिरोह के सारे सदस्य भी अंदर घुस जाते हैं।

जानकारी के मुताबिक यह छैमार गिरोह उत्तर प्रदेश के सहारनपुर मुरादाबाद, अयोध्या, सम्बल, अमरोहा, फर्रूखाबाद और कानपुर के आस-पास डेरा डाल कर रहता है। भारत भर में घूमने के लिए ये ट्रेनों का इस्तेमाल करते हैं। छैमार गैंग 2 भागों में बँटा हुआ है। पहला पंजाबी भाषा में बात करने वाला पंजाबी छैमार और दूसरा पूरविया छैमार। छैमार गैंग में वही मुखिया बनता है जो कम-से-कम 6 हत्याएँ करता निर्धारित किए गए हैं। ये अपना निशाना घर के गेट पर शुभ विवाह और आपका हार्दिक स्वागत जैसे शब्द लिखा दे कर तय करते हैं। इसी के आधार पर ये घर में पैसे, जेवर आदि का अनुमान लगाते हैं। गिरफ्तारी के बाद ये जमानत में भी फर्जी कागज़ात लगा लेते हैं और अपना डेरा दूसरी जगह लगा लेते हैं।

छैमार गिरोह के सरगना फाती उर्फ कदीम उर्फ अशद खान को बुधवार (11 अगस्त 2021) को यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। तब फाती ने बताया था कि जिस भी शहर में उसे डकैती करनी होती थी तो उस इलाके में ये महिलाओं से भिखारी का वेश बनाकर रेकी करवाते थे और बाद में वारदात को अंजाम देते थे। रिपोर्ट के मुताबिक, 1997 में राजस्थान में इस गिरोह ने 7 लोगों की हत्याएँ की थी, जिसमें 2 बच्चे भी शामिल थे। एसटीएफ के खुलासे में बताया गया था कि यह गिरोह अब तक 200 लोगों की हत्याएँ कर चुका है। फाती ने दावा किया था कि वो केवल 15 दिनों में ही अपना गिरोह फिर से तैयार कर सकता है।

तब रोहिंग्या, इस बार त्रिपुरा बना रजा अकादमी का हथियार; दोनों बार निशाने पर हिन्दू और जला महाराष्ट्र: लाचारी या मुस्लिम तुष्टिकरण

महाराष्ट्र के मालेगाँव, नांदेड़ और अमरावती जिलों में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के संरक्षण की माँग की आड़ में जो कुछ भी हुआ वह पूरे देश ने देखा। प्रशासन को ज्ञापन देने के नाम पर जमा की गई अनियंत्रित (या फिर मुस्लिम संगठन द्वारा नियंत्रित?) भीड़ ने जो किया वह देश के सामने है। साथ ही सामने है सांप्रदायिक शक्तियों के आगे झुकने वाली राज्य सरकार, सत्ताधारी दलों के नेताओं द्वारा किसी तथाकथित साजिश के नाम पर जारी किए जाने वाले बयान और महाराष्ट्र प्रशासन की बेबसी जो पिछले कई वर्षों में बार-बार दिखाई दी है। जो भी हुआ वह हर तरह से न केवल सरकार, समाज, संविधान और कानून के विरुद्ध था बल्कि वर्तमान प्रशासन की क्षमता और संविधान की रक्षा के प्रति उसके दृष्टिकोण और वचनबद्धता को भी दर्शाता है।

शुक्रवार 12 नवंबर, 2021 के दिन जो हुआ वह अचानक नहीं हुआ। यह रज़ा अकादमी, अन्य संगठनों और व्यक्तियों द्वारा पूर्व घोषित था। पहले से वायरल हो रहे वीडियो वगैरह में बाकायदा इस बात की घोषणा की गई थी कि लोग दुकानें अपनी जिम्मेदारी पर खोलें क्योंकि भीड़ चाहती है कि सबकुछ बंद रहे। आखिर प्रशासन के लिए हिंसा का पूर्वानुमान लगाया जाना संभव क्यों नहीं था? वैसे भी भीड़ जमा करके उसे अनियंत्रित छोड़ने का रजा अकादमी जैसे मुस्लिम संगठनों का रिकॉर्ड पुराना है। ऐसा भी नहीं था कि रजा अकादमी महाराष्ट्र की धरती पर पहली बार भीड़ जमा करने वाली थी। आखिर आज़ाद मैदान में इसी संगठन ने अगस्त 2012 में जो कुछ भी किया और करवाया था उसे बीते अभी एक दशक नहीं हुए हैं।

इसबार इन जिलों में रजा अकादमी ने त्रिपुरा में अल्पसंख्यकों पर हुए तथाकथित जुल्म को आगे रखकर लोगों को जमा किया था। प्रश्न यह है कि जिस विषय या घटना को आगे रखकर यह भीड़ जमा की गई क्या वह विषय प्रासंगिक था? स्मरण रहे कि त्रिपुरा की सरकार और स्थानीय प्रशासन ने 29 अक्टूबर को जिम्मेदारी के साथ यह घोषणा की थी कि जिस मस्जिद के जलाए जाने की अफवाहें उड़ाई गई हैं उस मस्जिद को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ है और ये अफवाह झूठी थी। 29 अक्टूबर और 12 नवंबर के बीच इस लंबे अंतराल में रजा अकादमी के लिए यह समझना क्या वाकई मुश्किल था कि त्रिपुरा में अल्पसंख्यकों पर हुए जुल्म की अफवाह झूठी है? क्या अकादमी के लिए त्रिपुरा सरकार की घोषणा पर विश्वास न करने का कोई कारण था?

प्रश्न यह है कि त्रिपुरा सरकार और स्थानीय प्रशासन की घोषणा के बाद इस भीड़ को जमा करने का क्या तुक था? जब देश एक महामारी से दो-चार हो रहा है तब प्रशासन को ज्ञापन देने के लिए आठ हज़ार लोगों को जमा करना किस हद तक तार्किक है? और यदि रजा अकादमी ने ऐसा कुछ करने की घोषणा कर भी दी थी तो महाराष्ट्र सरकार और इन जिलों में स्थानीय प्रशासन ने बातचीत करके इस भीड़ को जमा होने से रोकने का प्रयास क्यों नहीं किया? स्थानीय स्तर पर रजा अकादमी जैसे संगठन से सामयिक और उचित प्रश्न पूछना इतना दुर्लभ क्यों है? या फिर स्थानीय प्रशासन के लिए ऐसा करना कहीं इसलिए तो मुश्किल नहीं कि अकादमी को किसी तरह का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है?

ऐसे प्रश्नों के पीछे कारण हैं। दरअसल सच यह है कि वर्तमान महाराष्ट्र सरकार रजा अकादमी की जायज़-नाजायज़ माँगों को हाल के वर्षों में लगातार कान देती रही है। अकादमी के लोग मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और अन्य नेताओं से बार-बार मिलते रहे हैं। शायद यही कारण है कि संगठन समय-समय पर किसी न किसी बहाने महाराष्ट्र में अपनी ताक़त दिखाता रहा है। अगस्त 2012 में म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर होने वाले जुल्म को आगे रखकर विरोध के नाम पर जमा भीड़ ने कैसे आज़ाद मैदान में दंगा किया यह देश को अभी तक याद है। सऊदी अरब में सिनेमा हाल खुलने के विरोध से लेकर फ्रांस के राष्ट्राध्यक्ष के खिलाफ फतवा जारी करने की माँग हो, CAA और NRC का विरोध, COVID प्रोटोकॉल को लचीला बनाकर मस्जिद खोलने की माँग हो या उस दौरान जुलूस निकालने की, यह संगठन हर मुद्दे पर माँगों के बहाने अपनी ताक़त दिखाने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहता।

यह सरकार द्वारा बार-बार माँगे सुनने का असर ही है जो रजा अकादमी के नेताओं को अपनी जायज-नाजायज माँगे बार-बार रखने के लिए प्रेरित करता है। वैसे संगठन का नाम इसके अकादमिक संगठन होने का आभास देता है पर सच यह है कि इसके द्वारा जमा की गई भीड़ ने समय-समय पर जिस तरह का आचरण किया है उससे निपटना सरकार और प्रशासन के लिए चुनौती साबित हुआ है। शायद यही कारण है कि संगठन बार-बार सरकार की बाँह ऐंठने में कामयाब होता दिखाई देता है। पर प्रश्न यह है कि इन सब के बीच कानून और संवैधानिक व्यवस्था तथा सांप्रदायिक वातावरण का भविष्य कैसा दिखाई देता है? यह ऐसा प्रश्न है जो महाराष्ट्र की राज्य सरकार से इसलिए किया जाएगा क्योंकि वह बार-बार इसके आगे लाचार दिखाई देती रही है।

इस प्रश्न का उत्तर संवैधानिक और कानून व्यवस्था का भविष्य तय करेगा।

‘दिव्यांग को पीटा, ऊंगली तोड़ी’ : JNU में वामपंथियों ने फिर ABVP पर किया हमला, लगाए- RSS मुर्दाबाद के नारे

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में वामपंथी छात्रों ने 14 नवंबर 2021 को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्रों से बुरी तरह मारपीट की। इस घटना में ABVP के कई कार्यकर्ता घायल हो गए। उधर SFI की अध्यक्ष आइशी घोष ने हमले के लिए एबीवीपी को जिम्मेदार ठहराया। इस पूरी घटना में 10 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। संगठन की राष्ट्रीय सचिव निधि त्रिपाठी ने बताया कि ये हमला बैठक के दौरान हुआ। इसमें एक कार्यकर्ता की ऊंगली तोड़ी गई और एक दिव्यांग को भी मारा गया।

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, एबीवीपी छात्रों पर 100-200 के करीब वामपंथियों ने हमला बोला। जिसके बाद 10 छात्र घायल हो गए। एबीवीपी की जेएनयू ईकाई के अध्यक्ष शिवम ने बताया कि वो लोग शेड्यूल मीटिंग के लिए इकट्ठा हुए थे। लेकिन वामपंथी वहाँ रात 9:45 पर घुसे और कहने लगे कि उनकी मीटिंग वहाँ होगी। इस पर एबीवीपी की ओर से कहा गया कि वो लोग मीटिंग खत्म करके चले जाएँगे लेकिन उसके बाद वामपंथी नहीं मानें और खुद को कमरे का मालिक बताने लगे। इसके बाद ‘ढपली वाले ग्रुप’ ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर हमला किया।

शिवम ने बताया कि जैसे 5 जनवरी को होस्टल कैंपस में घुस कर मारपीट की गई थी वैसे ही इस बार भी हुआ है। उनके मुताबिक ये लोग जहाँ भी बहुसंख्यक होते हैं वहाँ यही होता है। उनके ऊपर 5 जनवरी बाद बार-बार ऐसे अटैक हो रहे हैं। उनकी माँग है कि पुलिस प्रशासन इस पर संज्ञान ले और घायलों को न्याय दिलाए।

एबीवीपी के मुताबिक वामपंथियों ने महिलाओं और दिव्यांगों पर हमला किया। इस घटना में संगठन से जुड़ी श्रीदेवी और दिव्यांग अंकित पर अटैक हुआ। वहीं कन्हैया और अभिषेक नाम के छात्र गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

बता दें कि घटना की बाबत ऑपइंडिया ने शिवम चौरसिया से बात की। उन्होंने सारी घटना विस्तार से बताकर कहा कि वामपंथी उन लोगों के सामने आरएसएस मुर्दाबाद, एबीवीपी मुर्दाबाद, एबीवीपी कैंपस छोड़ो के नारे लगा रहे थे। वह लोग संगठन के नए सदस्यों को डरा धमका रहे थे।

इस पूरे हमले की घटना में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की नेता और जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष ने बयान जारी किया है। घोष के मुताबिक पूरी हिंसा एबीवीपी वालों ने की और कैंपस लोकतंत्र को बाधित किया। उन्होंने एबीवीपी कार्यकर्ता को गुंडा बताया और पूछा कि क्या जेएनयू प्रशासन अब भी कार्रवाई नहीं करेगा।

छत्रपति शिवाजी महाराज की गाथा को जन-जन तक पहुँचाने वाले साहित्यकार बाबासाहेब पुरंदरे का निधन, PM मोदी ने कहा- दिलों में जीवित रहेंगे

छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन-चरित्र को जन-जन तक पहुँचाने वाले मराठी के वरिष्ठ साहित्यकार शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे का सोमवार (15 नवंबर 2021) को सुबह करीब 5 बजे पुणे के दीनानाथ मंगेशकर मेमोरियल अस्पताल में निधन हो गया। पिछले तीन दिनों से वे काफी बीमार चल रहे थे। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, पुरंदरे को शनिवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ हालात गंभीर होने के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।

शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, “मैं इस सूचना से दुखी हूँ और मेरे पास शब्द नहीं हैं। बाबासाहेब पुरंदरे का निधन इतिहास और संस्कृति की दुनिया में एक बड़ा शून्य छोड़ गया। उन्हीं की बदौलत आने वाली पीढ़ियाँ छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ेंगी। उनके अन्य कार्यों को भी याद किया जाएगा।”

उन्होंने एक ट्वीट में शोक जताते हुए कहा, “शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे अपने व्यापक कार्यों के कारण जीवित रहेंगे। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएँ उनके परिवार और अनगिनत प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।”

बाबासाहेब पुरंदरे के निधन के बाद छात्रपति शिवाजी महाराज पर किए गए उनके कार्यों को लेकर सोशल मीडिया पर लोग उन्हें याद कर रहे हैं। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने भी उन्हें याद करते हुए ट्वीट किया, “छत्रपति शिवाजी महाराज की गाथा को पीढ़ी दर पीढ़ी बताने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है।”

इतिहासकार विक्रम संपत ने दुख जताते हुए लिखा, “भारतीय इतिहासलेखन के एक महान युग का अंत… एक बौद्धिक दिग्गज, जिन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और समय को पुनर्जीवित करने के लिए अथक प्रयास किया। शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे जी को भावभीनी श्रद्धांजलि। ओम शांति।”

भारत सरकार के सूचना आयुक्त ने ट्वीट करते हुए लिखा, “लोकमान्य तिलक के बाद 20वीं सदी में छत्रपति शिवाजी को अपने प्रचार-प्रसार से अमर करने में अहम भूमिका निभाने वाले व्यक्ति नहीं रहे। शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे के निधन पर उन्हें मेरी श्रद्धांजलि। एक बार मेरे अहमदाबाद स्थित घर पर मुझे उनकी अगवानी का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह देश के लिए अहम क्षति है।”

उल्लेखनीय है कि 29 जुलाई 1922 को पुणे के नजदीक ससवाड़ में जन्मे पुरंदरे को 2019 में भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उन्हें 2015 में महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार दिया गया था। पुरंदरे बेहद कम उम्र में ही छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से मोहित हो गए थे और उन्होंने उन पर काफी रिसर्च कर निबंध और कहानियाँ लिखीं, जो बाद में एक पुस्तक ‘थिनाग्य’ (स्पार्क्स) में प्रकाशित हुईं

अपने लेखन और थिएटर करियर के आठ दशकों में पुरंदरे ने छत्रपति शिवाजी पर 12,000 से अधिक व्याख्यान दिए, मराठा साम्राज्य के सभी किलों और इतिहास का अध्ययन किया, जिससे उन्हें इस विषय पर काफी महारथ हासिल हो गई। उन्होंने एक ऐतिहासिक नाटक ‘जांता राजा’ (1985) लिखा और निर्देशित किया, जो 200 से अधिक कलाकारों द्वारा प्रदर्शित एक नाट्य कृति है। इसका पाँच भाषाओं में अनुवाद और मंचन किया गया है। उन्होंने महाराष्ट्र, गोवा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में 1250 से अधिक स्टेज शो किए। 

पुरंदरे की प्रमुख कृतियों में ‘राजे शिवछत्रपति’, ‘जांता राजा’, ‘महाराज’, ‘शेलारखिंड’, ‘गडकोट किल्ले’, ‘आगरा’, ‘लाल महल’, ‘पुरंदर’, ‘राजगढ़’, ‘पन्हलगढ़’, ‘सिंहगढ़’, ‘प्रतापगढ़’, ‘पुरंदरयांची दौलत’, ‘मुजर्याचे मंकारी’, ‘फुलवंती’, ‘सावित्री’, ‘कलावंतिनिचा सज्जा’हैं। 

बेनीपट्टी के अविनाश झा हत्याकांड में 6 गिरफ्तार, फिर भी हत्या की वजह अनसुलझी: उच्चस्तरीय जाँच की डिमांड

बिहार के चर्चित बुद्धिनाथ झा उर्फ अविनाश हत्याकांड में पुलिस ने एक महिला सहित 6 को गिरफ्तार किया है। 14 नवम्बर 2021 (रविवार) को प्रेस को जारी बयान में पुलिस ने बताया है कि रोशन कुमार, पवन कुमार, मनीष कुमार, बिट्टू कुमार, दीपक कुमार और पूर्णकला देवी को गिरफ्तार किया गया है। जॉंच जारी होने का हवाला देकर पुलिस ने हत्या की वजह नहीं बताई है।

हत्या की वजह को लेकर ऑपइंडिया ने बेनीपट्टी DSP से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि वर्तमान गिरफ्तारियों को अंतिम निष्कर्ष न समझा जाए। इस घटना से जुड़े हर बिंदु पर पुलिस अनुसंधान कर रही है। बेनीपट्टी थाना प्रभारी ने जाँच का अंतिम निष्कर्ष आने तक कुछ भी बताने से इनकार किया। उनके मुताबिक अभी तक सामने आए तथ्य सार्वजनिक करने से आगे की जाँच प्रभावित हो सकती है।

पुलिस प्रेस नोट

मृतक अविनाश के भाई चंद्रशेखर झा ने ऑपइंडिया को बताया कि गिरफ्तार किए गए लोग उन बड़े लोगों के हाथ की कठपुतली हो सकते हैं जो उनके भाई को रास्ते से हटाना चाहते थे। उन्होंने बताया कि पुलिस ने जिस महिला पूर्णकला देवी को गिरफ्तार किया है, वह अनुराग हेल्थ केयर नर्सिंग होम में नर्स थी। अविनाश इस नर्सिंग होम के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहा था। उन्होंने पूर्णकला को जाल के तौर पर इस्तेमाल किए जाने का संदेह जताया है।

चंद्रशेखर ने ये भी बताया कि आरोपित रोशन कुमार ने अपना नया नर्सिंग होम खोला था। उसे अविनाश पर हमले के लिए उकसाया गया होगा। पकड़े गए आरोपित अविनाश का काफी सम्मान करते थे। अगर उन्हें अविनाश को बहाने से बुला कर लाने या पकड़ कर लाने का टास्क भी दिया गया रहा होगा तो भी उन्हें ये नहीं पता रहा होगा कि उसकी हत्या कर दी जाएगी।

सर्वदलीय संघर्ष समिति की माँग

इस हत्या के विरोध में सर्वदलीय संघर्ष समिति ने बेनीपट्टी में मार्च निकाला। समिति ने मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपए मुआवजे के साथ परिवार के एक सदस्य के लिए सरकारी नौकरी की माँग की है। जिले में चल रहे अवैध नर्सिंग होम पर कार्रवाई माँगते हुए समिति ने 72 घंटे के अल्टीमेटम के साथ आरोपितों का केस फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की भी डिमांड रखी है।

गौरतलब है कि बिहार के मधुबनी जिले में RTI कार्यकर्ता और स्थानीय पत्रकार अविनाश झा 9 नवम्बर 2021 को अचानक लापता हो गए थे। उनका शव बेनीपट्टी से सटे उड़ेन गाँव के पास से 12 नवम्बर को बरामद किया गया था। इस मामले में परिजनों ने जिले के नर्सिंग होम माफियाओं पर आरोप लगाया था। अविनाश लगातार आरटीआई के जरिए नर्सिंग होम के फर्जीवाड़े को उजागर कर रहे थे। इसकी वजह से कई नर्सिंग होम पर कार्रवाई के लिए प्रशासन को मजबूर होना पड़ा था।

‘मुस्लिम भीड़ का पत्थरों-तलवारों से हमला, हिंदू प्रतिष्ठानों और मंदिरों में तोड़फोड़’: अमरावती हिंसा पर भाजपा नेता का खुलासा

महाराष्ट्र के अमरावती जिले में पिछले कुछ दिनों से अशांति का महौल है। 12 नवंबर से शुरू हुई हिंसा में अब तक सार्वजनिक एवं निजी संपत्तियों को काफी नुकसान पहुँचा है। शहर में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए चार दिन का कर्फ्यू भी लगाया गया है। प्रशासन के फैसले के बाद से लोग अपने घरों में बंद हैं।

भाजपा नेता तुषार भारतीय ने इस मामले पर ऑपइंडिया से बातचीत की। उन्होंने बताया, “अभी माहौल शांत है और स्थिति नियंत्रण में है। पुलिस ने तलाशी अभियान शुरू कर दिया है और अब सीसीटीवी कैमरों के जरिए उन बदमाशों की पहचान कर रही है, जो शहर में अराजकता फैलाने और कानून की धज्जियाँ उड़ाने के लिए जिम्मेदार हैं।”

12 नवंबर को हुई घटनाओं का खुलासा करते हुए भाजपा के तुषार भारतीय ने ऑपइंडिया को बताया कि शुक्रवार को रजा अकादमी के नेतृत्व में विरोध मार्च हिंसक होना तय था, क्योंकि कुख्यात समूह का हिंसक घटनाओं में शामिल होने का इतिहास रहा है। भारतीय ने कहा, “विरोध प्रदर्शन हिंसा का रूप लेने जा रहे थे, क्योंकि रजा अकादमी को भावनाओं को भड़काने के लिए जाना जाता है। उनके द्वारा 3 विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया गया था, जिनमें से सभी हिंसा और अराजकता के रूप में सामने आए हैं।”

इस्लामी समूह रजा अकादमी सहित मुस्लिम संगठनों के अनुयायी वही हैं, जो 2012 में मुंबई में आजाद मैदान दंगों के लिए जिम्मेदार थे। इसके साथ ही मुस्लिम शासक टीपू सुल्तान को अपना आदर्श मानने वाले एक कट्टरपंथी समूह के सदस्यों ने एक विरोध रैली में भाग लिया, जिनका उद्देश्य त्रिपुरा में मस्जिदों में कथित तोड़फोड़ की जाँच की माँग को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुँचकर ज्ञापन सौंपना था।

विरोध रैली काफी हद तक नियंत्रण में थी, जब तक कि यह हिंदू बहुल क्षेत्र चित्रा चौक तक नहीं पहुँच गई। ऑपइंडिया के साथ बातचीत में भारतीय बताते हैं कि जल्द ही यह चित्रा चौक को पार कर गई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने दंगा, हिंदू मंदिरों पर पथराव शुरू कर दिया। उन्होंने हिन्दुओं की दुकानों में तोड़फोड़ भी की।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने लापरवाही बरती, जिसके चलते वह मुस्लिम भीड़ को काबू नहीं कर सके। भारतीय ने आगे कहा, ”हजारों प्रदर्शनकारियों के मुकाबले बेहद कम संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शनकारी अधिक संख्या में थे। इसका फायदा उठाते हुए उन्होंने पथराव किया और सार्वजनिक एवं निजी संपत्तियों को भी नुकसान पहुँचाया।

भाजपा, बजरंग दल के समर्थकों के खिलाफ लाठीचार्ज

अगले दिन यानी शनिवार को भी हिंसा जारी रही। पुलिस अधिकारियों ने भाजपा, बजरंग दल और अन्य संगठनों के समर्थकों के खिलाफ लाठीचार्ज किया। भारतीय ने कहा कि हिंदू प्रदर्शनकारी अपनी आत्मरक्षा के लिए लाठियाँ ले जा रहे थे, जबकि विरोधियों के पास तलवारें और पत्थर थे।

यह जानने के लिए कि शनिवार को पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प किस वजह से हुई थी ऑपइंडिया ने भाजपा नेता और BJYM के उपाध्यक्ष बादल कुलकर्णी से भी संपर्क किया। भाजपा नेता ने कहा कि विरोध तब तक शांतिपूर्ण रहा, जब तक पुलिस अधिकारियों ने उन प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज नहीं किया, जो मुस्लिम समर्थकों द्वारा उन पर की गई हिंसा के विरोध में एकजुट हुए थे।

कुलकर्णी ने बताया, “भाजपा, बजरंग दल, विहिप और अन्य संबंधित संगठनों ने शनिवार को बंद का आह्वान किया था। हमारे बंद को सभी व्यापार संघों का समर्थन मिला, जो मुस्लिम समर्थकों द्वारा की गई रैली के दौरान भड़की हिंसा से त्रस्त थे। कुलकर्णी ने कहा, “पुलिसकर्मियों द्वारा उनके साथ किए गए अन्याय के विरोध में शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ लाठीचार्ज करने के बाद झड़पें शुरू हो गईं।”

मुस्लिम प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया

कुलकर्णी ने यह भी बताया कि मुस्लिम प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई लाठीचार्ज, आँसू गैस या अन्य सख्त कदम नहीं उठाया गया। लेकिन पुलिस अधिकारियों ने हमारे समर्थकों पर हमला करने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई, जो केवल शांतिपूर्वक विरोध कर रहे थे।

प्राचीन शनि मंदिर में तोड़फोड़

कुलकर्णी ने अमरावती में हंगामा करने वाली मुस्लिम भीड़ की क्रूरता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में कथित मस्जिद में तोड़फोड़ के विरोध में इकट्ठे हुए मुस्लिम प्रदर्शनकारियों की एक टुकड़ी 25,000 से 30,000 के करीब चित्रा चौक के पास हिंदू बहुल क्षेत्र से गुजरते ही हिंसक हो गई थी। कुलकर्णी ने यह भी खुलासा किया कि प्राचीन शनि मंदिर में भी तोड़फोड़ की गई। यह मंदिर हिंदू-बहुल क्षेत्र के किनारे और मुस्लिम-बहुल कॉलोनी से सटा हुआ है। मंदिर की देखभाल करने वाले परिवार के घर में भी बदमाशों ने धावा बोल दिया था। यहाँ तक कि मंदिर के पंडित को भी पीटा गया था।

बता दें कि त्रिपुरा में एक मस्जिद को जलाने की झूठी घटना के विरोध में मुस्लिम संगठनों द्वारा शुक्रवार (12 नवंबर) को आयोजित की गई रैलियों के दौरान इन घटनाओं का सिलसिला शुरू हुआ था। अमरावती के अलावा नांदेड़, मालेगाँव, वाशिम और यावतमाल में रैलियाँ आयोजित की गई थीं। इन रैलियों के लिए पुलिस की इजाजत भी नहीं ली गई थी। वहीं त्रिपुरा पुलिस ने स्पष्ट किया था कि जिस कथित घटना को लेकर महाराष्ट्र में हिंसा हो रही है वो घटना हमारे यहाँ हुई ही नहीं है।

दिल्ली में लगेगा टोटल लॉकडाउन? केजरीवाल सरकार के ‘प्रदूषण’ से उखड़ा सुप्रीम कोर्ट, कहा- प्रचार पर हो रहा खर्चा, ऑडिट करा दूँगा

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के मामले में निष्क्रियता दिखाने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (15 अक्टूबर) को अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह प्रदूषण नियंत्रण पर दिल्ली सरकार बहाने बना रही रही है, उसको देखते हुए कोर्ट को सरकार की आय और प्रचार के लिए विज्ञापनों पर किए जा रहे खर्चों का ऑडिट कराने का आदेश देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए दिल्ली सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। दिल्ली सरकार के पास सड़कों पर से धूल-मिट्टी हटाने के लिए कितनी मशीनें हैं? इस पर दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि रोड को साफ करने का काम नगर निगम के अंतर्गत आता है। दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि प्रदूषण को रोकने के लिए नगर निगमों को भी कुछ उठाने चाहिए। इस पर कोर्ट ने पूछा कि प्रदूषण के लिए क्या वे नगर निगमों पर दोष लगा रहे हैं?

इसके बाद मेहरा ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली में रोड साफ करने वाली 69 मशीनें हैं। तब कोर्ट ने पूछा कि दिल्ली में और कितनी मशीनें चाहिए और वो कैसे आएँगी इसके बारे में बताइए। तब वकील मेहरा ने कहा कि ये बात नगर निगम के कमिश्नर बताएँगे। इस पर चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कहा, “मेरी दादी एक एक चेन की कहानी सुनाती थी और बताती थी कि कैसे मछली मर गई। आप लोग नगर निगम पर आरोप लगा रहे हैं।”

सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट को ऑडिट कराने के मजबूर होना पड़ेगा, जिसमें देखा जाएगा कि सरकार को कितनी आय हो रही और वह अपने विज्ञापनों पर कितना खर्च कर रही है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि नगर निगम कोर्ट को पहले ही बता चुका है कि उसके पास कर्मचारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं हैं। इस पर दिल्ली सरकार ने कहा कि वह नगर निगम को फंड जारी के लिए तैयार है।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि दिल्ली में प्रदूषण का कारण पराली जलाना नहीं है। केंद्र ने बताया कि प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान सिर्फ 10 प्रतिशत है। इस पर कोर्ट को पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा के मुख्य सचिवों को केंद्र द्वारा कल की आपातकालीन बैठक के लिए उपस्थित रहने के लिए कहा। कोर्ट ने कहा कि सरकार इस पर भी गौर करे कि प्रदूषण को रोकने के लिए किन उद्योगों, वाहनों, बिजली संयंत्रों को कुछ समय के लिए बंद किया सकता है। कोर्ट ने बुधवार शाम तक दिल्ली और केंद्र सरकार से इस पर जवाब माँगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्रों के राज्यों को इस बीच घर से काम करने का निर्देश दिया। इस पर दिल्ली सरकार ने कहा कि वह पूर्ण लॉकडाउन के तैयार है। दिल्ली सरकार ने सोमवार से एक सप्ताह के लिए स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को छोड़कर, जहाँ परीक्षाएँ आयोजित की जा रही हैं, शारीरिक कक्षाएँ बंद करने की घोषणा कर दी है। इस मामले पर अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

गौरतलब है कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर गंभीर स्तर तक पहुँच चुका है। राष्ट्रीय राजधानी में रविवार को 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 330 दर्ज किया गया, जबकि शुक्रवार को एक्यूआई 471 था, जो इस सीजन में अब तक का सबसे खराब है। शीर्ष अदालत ने शनिवार को प्रदूषण के स्तर में वृद्धि को ‘आपात स्थिति’ बताते हुए राष्ट्रीय राजधानी में तालाबंदी का सुझाव दिया था।

107 वर्ष बाद काशी विश्वनाथ धाम में माँ अन्नपूर्णा की प्राण-प्रतिष्ठा, CM योगी ने उठाई पालकी

वाराणसी से 107 साल पहले चोरी हुई माँ अन्नपूर्णा की दुर्लभ प्रतिमा श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुँची जहाँ विधि-विधान से माँ प्राचीन प्रतिमा की पुनर्स्थापना सोमवार (15 नवंबर, 2021) को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में मुख्य मंदिर के ईशान कोण पर कर दी गई है। CM योगी आदित्यनाथ ने वैदिक मंत्रोच्चार, माँ अन्नपूर्णा के जयकारे और हर-हर महादेव के उद्घोष के बीच मंदिर के मुख्य द्वार पर प्रतिमा यात्रा की अगवानी की। भव्य रूप से सजाए गए मंदिर परिसर में सीएम योगी की उपस्थिति में काशी विश्वनाथ मंदिर का अर्चक दल द्वारा काशी विद्वत परिषद की निगरानी में प्राण प्रतिष्ठा की संपूर्ण प्रक्रिया को पूर्ण कराया गया।

बाबा विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी के अनुसार, बाबा काशी विश्वनाथ की रंगभरी एकादशी की रजत पालकी और सिंहासन को माँ अन्नपूर्णा के स्वागत के लिए भेजा गया। माँ की प्रतिमा ज्ञानवापी के प्रवेश द्वार से इसी पालकी में सिंहासन पर विराजमान होकर काशी विश्वनाथ धाम में प्रवेश कीं। जहाँ मुख्यमंत्री योगी सहित तमाम गणमान्य लोगों ने पालकी को कन्धा देकर स्थापना स्थल तक ले गए। मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के बाद CM योगी आदित्यनाथ ने बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार में जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक कर बाबा से विश्व के कल्याण के लिए आशीर्वाद माँगा।

बता दें कि माँ अन्नपूर्णा की शोभायात्रा उत्तर प्रदेश के 18 जिलों से होती हुई आज सुबह ही काशी पहुँची थी।

माँ अन्नपूर्णा की इस प्रतिमा के एक हाथ में खीर का कटोरा तो दूसरे हाथ में चम्‍मच है। माँ अन्नपूर्णा के इस स्वरूप पीछे काशी में मान्यता है कि यहाँ कभी कोई भूखा नहीं रहता। माँ स्वयं अपने हाथों के चम्मच से खीर का प्रसाद भक्तों के बीच बाँटकर उन्हें धन-धान्‍य से परिपूर्ण होने का आशीर्वाद दे रही हैं।

गौरतलब है कि वाराणसी में काशी विश्वनाथ परिसर से ही 1913 के आसपास माँ अन्नपूर्णा की मूर्ति चोरी हुई थी। चोरी होने के बाद मूर्ति तस्करों द्वारा गुपचुप तरीके से यह मूर्ति कनाडा ले जाई गई और फिर मैकेंजी आर्ट गैलरी में सैलून तक रखी रही। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिमा का अध्ययन करने के बाद दिव्या मेहरा ने भारतीय दूतावास को इस प्राचीन मूर्ति बारे में सूचित किया। मूर्ति का इतिहास सामने आने के बाद PM मोदी के आग्रह पर कनाडा सरकार ने इसे भारत सरकार को शिष्‍टाचार भेंट के तौर पर लौटाने की पेशकश की। जिसके बाद ही यह मूर्ति एक लम्बी दूरी तय करके आज अपने मूल स्थान काशी पहुँची है। जहाँ आज विधिवत पुनः स्थापना की गई है।

जानकारी के लिए बता दें कि चुनार के बलुआ पत्‍थर से बनी माँ अन्नपूर्णा की यह प्राचीन प्रतिमा कई मायनों में खास है। औरंगजेब द्वारा काशी के कई मंदिरों और मूर्तियों को नुकसान पहुँचाने और नष्ट करने के बाद जब पुनः काशी में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा हुई यह मूर्ति भी तब की है। वाराणसी में आज भी इसी काल की कई मूर्तियाँ हैं, जो काशी के प्रस्‍तर कला की पहचान हैं। वैसे मूर्ति विशेषज्ञों ने माँ अन्नपूर्णा की इस प्रतिमा को 18वीं सदी का बताया है।