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यूपी में अब गायों के लिए भी होगी 24×7 एंबुलेंस सेवा, योगी सरकार की योजना के बारे में जानें सबकुछ

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार राज्य में गायों को समय पर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के लिए पुलिस की आपात हेल्पलाइन सेवा ‘डायल 112’ तर्ज पर अभिनव एंबुलेंस सेवा शुरू करने जा रही है। यूपी के डेयरी, मत्स्य पालन एवं पशुपालन मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने रविवार (14 नवंबर 2021) को मथुरा में बताया कि राज्यव्यापी स्तर पर इस सेवा को शुरू करने के लिए 515 एंबुलेंस तैयार कर ली गई है। प्रत्येक एंबुलेंस में एक पशु चिकित्सक और पशु चिकित्सा स्टाफ के दो सदस्य होंगे।

उन्होंने बताया कि यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी तथा इसके लिए लखनऊ में एक कॉल सेंटर बनाया जाएगा। इस सेवा के लिए जो भी कॉल करेगा उसके पास 15 से 20 मिनट में एंबुलेंस पहुँच जाएगी। इस सेवा को अगले माह दिसंबर तक शुरू कर दिया जाएगा। 

इसके अलावा मंत्री ने बताया कि गाय के नस्ल सुधार कार्यक्रम के अन्तर्गत पशुपालकों को तीन बार मुफ्त गर्भाधान कराने की सुविधा दी जाएगी। गाय के शत प्रतिशत गर्भाधान को सुनिश्चित करने वाली अत्याधुनिक भ्रूण ट्रांसप्लांट तकनीक को भी अमल में लाए जाने की तैयारी है। इससे बाँझ गाय भी अधिक मात्रा में दूध देने लगती है।

उन्होंने बताया कि बाराबंकी में इस तकनीक के सफल प्रयोग के बाद इस तकनीक को सभी जिलो में चालू किया जा रहा है। चौधरी ने कहा कि इसके अन्तर्गत एक गाय के उन्नत सीमेन से तैयार भ्रूण को 8-10 गायों में रख दिया जाता है। इसकी विशेषता यह है कि इससे गाय शत-प्रतिशत गर्भवती होती है और इससे पैदा हुई बछिया कम से कम 20 किलो दूध देगी।

उन्होंने कहा कि इससे किसान को आवारा जानवरों की समस्या से निजात मिल सकेगी, क्योंकि कोई किसान अधिक दूध देने वाली बछिया को खुला नहीं छोड़ सकेगा। मंत्री ने कहा कि पाइलट प्रोजेक्ट के रूप मे इस योजना को पहले मथुरा समेत आठ जिलों में शुरू किया जाएगा। गौरतलब है कि राज्य में गायों की सर्वाधिक संख्या मथुरा में है।

लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा कि राज्य के इतिहास में पहली बार योगी आदित्यनाथ सरकार ने आवारा पशुओं को रखने के लिए गोशालाओं को फंड दिया। बता दें कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य में गोशालाओं के रखरखाव पर सालाना करोड़ों रुपये खर्च करती है। योगी आदित्यनाथ प्रशासन ने राज्य में गोशालाओं के रखरखाव के लिए 647 करोड़ रुपए आवंटित कर चुकी है।

चीन के साथ सीमा विवाद के बीच रूस से S-400 मिसाइल डिफेंस की डिलीवरी शुरू, अमेरिका ने दी थी भारत पर प्रतिबंध लगाने की धमकी 

रूस ने भारत को S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की डिलीवरी शुरू कर दी है। इस एयर डिफेंस सिस्टम के लिए भारत और रूस के बीच लगभग 35,000 करोड़ रुपए का सौदा हुआ है। सौदे के तहत 400 किलोमीटर के हवाई रेंज से निपटने के लिए भारत को पाँच स्क्वाड्रन मिलेंगे। इस साल के अंत तक पहली स्क्वाड्रन की डिलीवरी पूरी होने की उम्मीद है। भारत अगले साल जनवरी-फरवरी में इसका संचालन भी शुरू कर देगा।

इस बात की जानकारी रूस के फेडरल सर्विस फॉर मिलिट्री टेक्निकल कोऑपरेशन (FSMTC) के निदेशक दिमित्री शुगेव ने दुबई एयरशो में दी। शुगेव ने कहा, “भारत को एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति शुरू हो चुकी है और नियत समय पर पहुँचाई जा रही है।” FSMTC रूसी सरकार का मुख्य रक्षा निर्यात नियंत्रण संगठन है। सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम S-400 की सप्लाई को लेकर लिए रूस और भारत ने अक्टूबर 2018 में डील की थी और 2019 में रूस को पेमेंट की पहली किश्त के रूप लगभग 800 मिलियन अमरीकी डॉलर दी गई थी।

बढ़ेगी सेना की ताकत: दक्षिण एशिया के आसमान पर होगा भारत का नियंत्रण

जमीन से हवा में मार करने वाली इस प्रणाली के मिलने से भारत की मारक क्षमता और मजबूत हो जाएगी। जानकारी के मुताबिक, इस सिस्टम को सबसे पहले देश की पश्चिमी सीमा के करीब तैनात किया जाएगा, जहाँ से यह पाकिस्तान और चीन से लगी सीमाओं से उत्पन्न खतरों से निपट सकता है। उपकरण को समुद्री और हवाई दोनों मार्गों से भारत लाया जा रहा है। देश में पहले स्क्वाड्रान की तैनाती के बाद वायुसेना देश के भीतर अपने कर्मियों की ट्रेनिंग के लिए संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ इसकी तैनाती को लेकर पूर्वी सीमाओं पर भी ध्यान देगी। भारतीय वायु सेना के कुछ अधिकारी और कर्मियों ने एस-400 को ऑपरेट करने के लिए रूस में ट्रेनिंग भी ली है।

S-400 से भारत को दक्षिण एशिया के आसमान पर बढ़त मिलेगी। इस सिस्टम से लगभग 400 किमी दूरी तक दुश्मन के विमान, बैलिस्टिक व क्रूज मिसाइलें और AWACS तकनीक से लैस विमान रोके जा सकेंगे। इसमें चार तरह की मिसाइलें तैनात हो सकती हैं, जो 400, 250, 120 और 40 किमी दूरी तक वार कर सकती हैं।

क्या अब भारत पर लग सकते हैं अमेरिकी प्रतिबंध?

S-400 मिसाइल सिस्टम की खरीद को लेकर तुर्की पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद ऐसी आशंकाएँ हैं कि भारत पर भी इसी तरह का प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। हालाँकि, पिछले महीने दो अमेरिकी सीनेटरों ने राष्ट्रपति जो बाइडन से रूस से S-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए भारत के खिलाफ दंडात्मक काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सेंक्शंस एक्ट (CAATSA) के प्रावधानों को लागू नहीं करने का आग्रह किया था। दरअसल अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन्स एक्ट’ (पब्लिक लॉ 115-44) कानून पर साइन किए थे।

क्या है CAATSA?

CAATSA एक सख्त अमेरिकी कानून है, जिसके जरिए अमेरिकी प्रशासन उन देशों पर प्रतिबंध लगा सकता है। 2014 में रूस द्वारा क्रीमिया पर कब्जा करने और 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में रूस के कथित हस्तक्षेप को लेकर इसके सख्त उन देशों पर लागू किये जाते हैं, जो रूस से डिफेंस हार्डवेयर खरीदते हैं।

इसके प्रावधानों में रूस के रक्षा और खुफिया सेक्टर को टारगेट करने वाले प्रतिबंध शामिल हैं, जो दुनिया भर में रूसी हथियारों की खरीद को रोकने के लिए अमेरिकी सरकार के लिए एक अहम उपकरण के रूप में काम करते हैं। अमेरिका चाहता था कि भारत एस-400 की जगह पर उसका एयर डिफेंस स‍िस्‍टम पेट्रियाट खरीदे। हालाँकि भारत की मोदी सरकार ने अमेरिका को दो टूक बता दिया था कि वह इस सिस्‍टम को खरीदने से पीछे नहीं हटेगी और रूस के साथ अपनी डील पर आगे बढ़ेगी।

‘7 गो तस्करों के पैर में गोली मारी, इसलिए मेरा ट्रांसफर’: बीजेपी MLA सहित कई संगठनों ने कहा- रद्द हो थाना प्रभारी का तबादला

गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर थाना प्रभारी राजेंद्र कुमार त्यागी के तबादले पर विवाद खड़ा हो गया है। रोजनामचा में त्यागी ने आरोप लगाया है कि गो तस्करों पर कार्रवाई के कारण उनका ट्रांसफर किया गया है। उनके तबादले पर स्थानीय बीजेपी विधायक नंदकिशोर गुर्जर सहित कई सामाजिक संगठनों ने भी आपत्ति जताई है।

रोजनामचे (GD) की एक कॉपी ऑपइंडिया के पास उपलब्ध है। इसमें त्यागी ने स्पष्ट रूप से लिखा है, “11 नवंबर को उनकी टीम की गो तस्करों से मुठभेड़ हुई ​थी। इस दौरान 7 गो तस्करों के पैर में गोली लगी थी। उन्हें लगता है कि इसी कार्रवाई की वजह से उनका ट्रांसफर किया गया है, जिससे उनका मनोबल टूट गया है।” उन्होंने लिखा है, “ट्रांसफर से मनोबल गिरा है। मानसिक स्थिति ठीक नहीं। घर जा रहा हूँ। न नौकरी की जरूरत है, न तनख्वाह की। मानसिक रूप से ठीक होने तक मुझे कार्यमुक्त रखा जाए।” यह GD उन्होंने 13 नवम्बर 2021 (शनिवार) की रात में लगभग 10.38 पर लिखी थी। यह सोशल मीडिया में भी वायरल है।

गौरतलब है कि बीते गुरुवार (11 नवम्बर 2021) को लोनी बॉर्डर पुलिस को पशु कटान की सूचना मिली थी। पुलिस ने बेहटा हाजीपुर के एक गोदाम पर दबिश दी। पुलिस के अनुसार सूचना सही पाई गई और मौके पर मुठभेड़ शुरू हो गई। पुलिस के अनुसार मुठभेड़ में 7 पशु तस्करों के पैर में गोली लगी थी। पुलिस ने ही इन तस्करों को इलाज के लिए भेजा। पुलिस के मुताबिक 2 पशु तस्कर मौके से भागने में सफल रहे थे।

पुलिस द्वारा पकड़े गए घायल तस्करों के नाम मुस्तकीम, सलमान, मोनू, इंतजार, आसिफ, नाजिम और बोलर हैं। पुलिस के अनुसार इस मुठभेड़ के दौरान भूरा और दानिश भागने में सफल रहे थे। गाज़ियाबाद बजरंग दल के जिला संयोजक हरदीप सिंह ने लोनी बॉर्डर थाने में गोदाम मालिक आदिल के विरुद्ध तहरीर दी है। बजरंग दल का आरोप है कि गोदाम मालिक भी गो तस्करों के साथ मिला हुआ है।

इस मुठभेड़ पर पत्रकार शम्स ताहिर खान ने अपनी रिपोर्ट में सवाल उठाया था। कहा था कि मुठभेड़ में पुलिस की तरफ से 16 राउंड और तस्करों की तरफ से 7 राउंड गोलियाँ चलीं। फिर किसी पुलिसकर्मी को गोली क्यों नहीं लगी? साथ ही सवाल उठाया था कि सभी तस्करों को पैरों में एक ही जगह गोली कैसे लग गई?

बताया जा रहा है कि इस मामले ने जब तूल पकड़ा तब गाजियाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पवन कुमार ने इंस्पेक्टर लोनी बॉर्डर राजेंद्र त्यागी को थाने के चार्ज से हटा दिया। लेकिन अब गाजियाबाद के एसएसपी के आदेश का विरोध हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी के लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने गाजियाबाद जिले के पुलिस प्रमुख को पत्र लिख कर इंस्पेक्टर के ट्रांसफर का आदेश फ़ौरन वापस लेने और मुठभेड़ करने वाली पुलिस टीम को इनाम देने की माँग की है।

भाजपा विधायक ने इंस्पेक्टर के सर्मथन में वीडियो भी जारी किया है। उन्होंने कहा है, “गो तस्करों के एनकाउंटर मामलें में थाना प्रभारी राजेन्द्र त्यागी को पुरस्कृत करने के जगह गो तस्करों के दबाव में उनका SSP द्वारा तबादला कर उन्हें अपमानित करने का पाप किया गया है, जबकि गो रक्षा का उनका इतिहास रहा है। यह कार्यवाही गो तस्करों, अपराधियों के हौसले बुलंद करेगी।”

इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी के समर्थन में कई अन्य संगठन भी खड़े हुए हैं। उन्होंने भी इंस्पेक्टर के ट्रांसफर का विरोध किया है।

इस मामले की विस्तृत जानकारी के लिए ऑप इंडिया ने गाजियाबाद जिले के एसएसपी को सम्पर्क किया। उनका फोन उनके PRO ने उठाया। PRO ने बताया कि इंस्पेक्टर लोनी का ट्रांसफर एक रूटीन ट्रांसफर प्रकिया के तहत किया गया है। उनका थाना सामान्य विभागीय तबादला प्रकिया के अंतर्गत बदला गया था। इस मामले में विवाद अथवा कोई अन्य बात नहीं है।

‘सूर्यवंशी में मुस्लिम को क्यों दिखाया नेगेटिव?’: द क्विंट की पत्रकार को रोहित शेट्टी ने लताड़ा, कहा- हिंदू विलेन दिखाए तब क्यों नहीं पूछा

हाल ही में रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्म ‘सूर्यवंशी’ को बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है। इस बीच निर्देशक-निर्माता रोहित शेट्टी ने फिल्म सूर्यवंशी को लेकर ‘द क्विंट’ को इंटरव्यू दिया। इस इंटरव्यू के दौरान जब पत्रकार ने फिल्म में ‘अच्छे मुस्लिम’ और ‘बुरे मुस्लिम’ के सीन को लेकर आपत्ति जताई तो रोहित शेट्टी ने उनको मुँहतोड़ जवाब दिया। उन्होंने पत्रकार से पूछा कि उनकी पिछली तीन फिल्मों में हिंदू खलनायक थे, तब किसी को कोई प्रॉब्लम क्यों नहीं हुई?

‘अच्छे मुसलमान’ और ‘बुरे मुसलमान’ को लेकर प्रॉब्लम

द क्विंट की पत्रकार अबीरा धर ने रोहित शेट्टी से सवाल किया कि उनकी हालिया फिल्म सूर्यवंशी में मुस्लिमों को अच्छे और बुरे दोनों तरह के परिदृश्यों में दिखाया गया है। पत्रकार ने इसे ‘समस्याग्रस्त’ (‘problematic’) बताया। हालाँकि शेट्टी को यह सवाल पसंद नहीं आया और उन्होंने जवाब में सवाल किया कि पिछली फिल्मों के हिंदू खलनायकों पर उनकी जाति के कारण आपत्ति क्यों नहीं जताई गई। उन्होंने कहा, “अगर मैं आपसे एक सवाल पूछूँ… जयकांत शिकरे (सिंघम में) एक हिंदू मराठी थे। फिर दूसरी फिल्म आई, जिसमें एक हिंदू बाबा थे। फिर सिम्बा में दुर्वा रानाडे फिर से महाराष्ट्रियन थे। इन तीनों में नेगेटिव किरदार में हिंदू थे, तो फिर यह कोई समस्या क्यों नहीं है?”

जब धर ने उन्हें काउंटर करने की कोशिश की, तो उन्होंने उन्हें रोक दिया और कहा, “अगर कोई आतंकवादी है जो पाकिस्तान से है, तो वह किस जाति का होगा?” शेट्टी ने कहा कि इस तरह के विवादों ने कई पत्रकारों के बारे में उनका नजरिया बदल दिया है। उन्होंने कहा, “इसने कुछ पत्रकारों के बारे में मेरा नजरिया बदल दिया है, जिन्हें मैं पसंद करता था। कि ओह, वे इसे इस तरह से दिखा रहे हैं जैसे मैंने ब्रैकेट में देखा है कि कोई उच्च जाति के हिंदुओं द्वारा बुरे मुसलमानों का प्रचार कर रहा है, जो कि बहुत गलत है। हमने ऐसा कभी नहीं सोचा था।”

उल्लेखनीय है कि सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म सूर्यवंशी का प्लॉट पाकिस्तानी आतंकवादियों के बारे में है, जो 1993 के मुंबई विस्फोटों के बाद भारत में और अधिक हमले की साजिश रच रहे हैं और फिल्म का हीरो उन्हें रोकने की कोशिश कर रहा है। इसलिए, यह स्वाभाविक है कि फिल्म में खलनायक, लश्कर के आतंकवादी, को मुस्लिमों के रूप में दिखाया गया है। फिल्म निर्माता अक्सर वास्तविकता को विकृत करने के लिए क्रिएटिव लिबर्टी लेते हैं, लेकिन पाकिस्तान के लश्कर आतंकियों को किसी अन्य धर्म का दिखाना फिल्म निर्माता के लिए कुछ ज्यादा ही हो जाता।

‘अगर यह गलत होता तो सभी को आपत्ति होती’

शेट्टी ने कहा कि फिल्म बनाते हुए बहुत सारी चीजें बैकग्राउंड में होती हैं। उनके लिए फिल्म बनाते हुए चीजें स्पष्ट रखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “जब हमारा मन (चेतना) स्पष्ट है और हमने वैसा सोचा भी नहीं होता तो लोग उस पर क्यों बात कर रहे हैं?” वह पूछते हैं, “अगर कोई स्लीपर सेल है जिसपर हम बात कर रहे हैं तो वो किस जाति होगा? आखिर अच्छे और बुरे इंसान को जाति से क्यों जोड़ा जाता है? अगर वह गलत है तो सबको आपत्ति होनी चाहिए। ये सबकी नहींस एक छोटे सेगमेंट की बात है। अगर वे आपत्ति जता रहे हैं तो उन्हें नजरिया बदलने की जरूरत है न कि हमें। “

जब धर ने शेट्टी से पुलिस क्रूरता पर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि लोग उस काम को नहीं सराह रहे जो काम पुलिस ने अच्छे किए हैं। उन्होंने कहा, “हमारे ज्यादातर सीक्वेंस, सिर्फ क्लाइमैक्स को छोड़कर, असल जीवन की कहानियों से प्रेरित होते हैं। वह (पुलिसकर्मी) इस बात को सार्वजनिक नहीं करते कि वो डेलीलाइफ में क्या कर रहे हैं। कई ऐसी घटनाएँ होती हैं जो जनता की नजर में आती भी नहीं।”

उन्होंने कहा, “जो कोई भी पुलिस क्रूरता पर मुझसे पूछता है। मैं सिर्फ उन्हें यही कहता हूँ कि एक दिन के लिए पुलिस हेडक्वार्टर बंद कर दो। तुम 100 मिलाओ और कोई जवाब न हो।” वह कहते हैं कि अगर ट्रैफिक लाइट भी काम करना बंद कर दें तो तुरंत जाम लग जाता है। पुलिस बहुत सारे अच्छे काम करती है जिसे लोगों को जानने की जरूरत है।

‘भारत हरा न हो, उसे भगवा बनाए रखने के प्रयास किए जाए’: दिग्गज अभिनेता विक्रम गोखले ने कंगना का किया समर्थन

मराठी और हिंदी फिल्मों के दिग्गज अभिनेता विक्रम गोखले ने अभिनेत्री कंगना रनौत के ‘भीख में आजादी’ वाले बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि कंगना रनौत ने जो कहा वह उससे सहमत हैं। विक्रम गोखले महाराष्ट्र के पुणे में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुँचे थे। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि भारत को कभी भी ‘हरा’ नहीं होना चाहिए और इसे ‘भगवा’ बनाए रखने के प्रयास किए जाने चाहिए।

विक्रम गोखले ने कहा, “कंगना रनौत ने जो कहा मैं उससे सहमत हूँ। हमें भीख में आजादी मिली। यह दिया गया था। बहुत से स्वतंत्रता सेनानी जिन्हें फाँसी दी गई थी, बड़े-बड़े लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश नहीं की। वे मूकदर्शक बने रहे।” गोखले ने बाद में इंडियन एक्सप्रेस से भी कहा, “कंगना रनौत ने जो कहा, उससे मैं भी सहमत हूँ कि हमें 2014 में असली आजादी मिली थी।”

हालाँकि गोखले ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंधभक्त नहीं हैं। उन्होंने कहा, “जब पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह चुनाव प्रचार पर जाते हैं, तो मैं उनकी बातों से सहमत नहीं होता। लेकिन हाँ, जब वे राष्ट्रहित में काम करते हैं, जैसे कि जिस तरह से उन्होंने चीन को बैकफुट पर पहुँचा दिया है, तो मैं उनका समर्थन करता हूँ।”

वहीं कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण द्वारा कंगना का समर्थन करने पर बीजेपी ज्वाइन कर लेने की सलाह पर गोखले ने कहा कि ये उनके निजी विचार हैं, इससे किसी राजनीतिक पार्टी का कोई सरोकार नहीं है। सभी पार्टियाँ एक जैसी हैं।

बता दें कि कंगना रनौत पिछले दिनों एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में पहुँची थीं जहाँ उन्होंने 1947 में मिली आजादी को ‘भीख’ बताया था। उनका मानना था कि देश में असली आजादी 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद आई है। गोखले ने कंगना के इसी बात का समर्थन किया है।

महाराष्ट्र की राजनीति पर विक्रम गोखले ने कहा, “भाजपा और शिवसेना को एक साथ आना चाहिए। मैंने बीजेपी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुख्यमंत्री पद साझा करने की शर्तों पर दोनों पार्टियों के बीच संभावित गठबंधन पर सवाल भी पूछा था। दोनों पार्टियों को लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश करनी चाहिए। मुझे लगता है कि राजनीतिक पार्टियों को लोगों को धोखा नहीं देना चाहिए क्योंकि लोग उन्हें सजा दे सकते हैं।”

इस्लाम के लिए बॉलीवुड छोड़ा, अब ‘हलाल ब्यूटी प्रोडक्ट्स’ का प्रचार कर रहीं सना खान: जानें कैसे होता है ये तैयार

बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने के बाद इंडस्ट्री से तौबा कर लेनी वाली सना खान अब मौलवी सईद अनस से निकाह करके इस्लाम के रास्ते पर आगे बढ़ रही हैं। उनके यूट्यूब चैनल से लेकर सोशल मीडिया अकॉउंट्स पर हर जगह सिर्फ इस्लाम की बातें हैं। इसी क्रम में उन्होंने बढ़ते हुए ‘हलाल ब्यूटी प्रोडक्ट्स’ को प्रमोट करना शुरू किया है। उनका इंस्टाग्राम पर एक पेज भी है जिसका नाम ‘facespabysanakhan’ है। इसमें कई क्लाइंट्स की छोटी-छोटी क्लिप हैं।

बता दें कि हलाल ब्यूटी प्रोडक्ट का अर्थ है कि उत्पाद, इस्लाम में हराम बताई गई चीजों से न निर्मित हुआ हो। यहाँ तक जो उसमें पानी का इस्तेमाल हुआ हो वो भी अगर इस्लाम मानकों के अनुरूप है तो प्रोडक्ट हलाल कहलाएगा। ISWA हलाल सर्टिफिकेशन डिपार्टमेंट के अनुसार, अगर मेकअप प्रोडक्ट में किसी जानवर से जुड़ी कुछ सामग्री मिली है तो ये भी ध्यान देना होता है कि उस जानवर को हलाल करके मारा गया था या नहीं। संगठन के निदेशक हबीब घानिम का कहना है कि जानवर हलाल तब माना जाता है जब कलमा पढ़ते हुए उसे अल्लाह के नाम पर नंगे हाथ से और एक तय प्रक्रिया के साथ मारा जाए।

हबीब घानिम कहते हैं, “हाल मेकअप कॉस्मेटिक्स की दुनिया में नई चीज नहीं है। दुनिया के 23% मुस्लिम आबादी में ये मशहूर है। अब बाकी मुस्लिम भी हलाल के विकल्प को मेकअप और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में तलाश रहे हैं।” हालाँकि हलाल सर्टिफिकेट पाने के लिए सिर्फ हलाल सामग्रियों का होना जरूरी नहीं है। ये प्रमाण पाने के लिए काफी जरूरतों को उत्पाद से लेकर वितरण तक के स्तर पर पूरा करना होता है। कभी-कभी इस सर्टिफिकेट में 2 साल का समय भी लग जाता है।

हबीब बताते हैं कि हर ब्यूटी प्रोडक्ट लैब में चेक होता है कि कहीं उसमें पोर्क जैसी हराम चीजों का इस्तेमाल तो नहीं हुआ। इसमें 2000 डॉलर तक का खर्चा आ जाता है। इसके बाद ट्रेडमार्क लोगो के लिए भी अलग से पैसा दिया जाता है। सिंगापुर में ये हलाल सर्टिफिकेशन कॉस्मेटिक्स संबंधी चीजों पर आधिकारिक तौर पर कर दिया गया है। इससे मुस्लिम ग्राहक आसानी से उस प्रोडक्ट पर विश्वास कर पाते हैं। कॉस्मेटिक प्रोडक्ट क्लैरिटी की संस्थापक कैरीन एक्टेले कहती हैं कि हलाल सर्टिफाइड प्रोडक्ट्स के कारण मुस्लिमों में उनकी विश्वसनीयता बढ़ती है। उनके मुताबिक ये प्रोडक्ट गैर मुस्लिम इस्तेमाल कर सकते हैं जो कम नुकसानदायक और क्रूरता मुक्त होता है।

जनजातीय गौरव दिवस: जानिए बिरसा मुंडा सहित उन 12 नायकों की गाथा, जिन्होंने अंग्रेजों और इस्लामी आक्रांताओं के दाँत खट्टे किए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इस बार सोमवार (15 नवंबर, 2021) को इसे मनाया जा रहा है। इसी अवसर पर भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नामकरण गोंड शासक रानी कमलापति के नाम पर किया गया है। पीएम मोदी उस दिन मध्य प्रदेश में मौजूद रहेंगे। आइए, यहाँ हम बिरसा मुंडा के अलावा उन जनजातीय नायकों की बात करते हैं, जिन्हें पीएम मोदी याद करेंगे।

कार्यक्रम के लिए तैयारियाँ जोड़ों पर हैं। बड़ी संख्या में जनजातीय लोग भोपाल पहुँच रहे हैं, जिनके आने-जाने और खाने-पीने की व्यवस्था भी की गई है। ढाई लाख जनजातीय लोगों के भोजन की व्यवस्था है। केसर युक्त हलवा, बूंदी, दो सब्जियाँ, दाल और चावल बन रहे हैं। एयरफोर्स के विशेष विमान से पीएम मोदी यहाँ पहुँचेंगे। जंबूरी मैदान के कार्यक्रम के बाद पीएम हेलीकॉप्टर से बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी मैदान जाएँगे और यहाँ से सड़क मार्ग से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पहुँचेंगे।

कौन थे भगवान बिरसा मुंडा, जिनकी जयंती बनी ‘जनजातीय गौरव दिवस’

सबसे पहले बात करते हैं बिरसा मुंडा की, जिनके जन्मदिवस पर ये कार्यक्रम हो रहा है। युवावस्था में ही बिरसा मुंडा अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह में नायक बन कर उभरे और जनजातीय समूह ने उन्हें अपने नेता माना। 25 से भी कम उम्र में इन्होंने देश के लिए बलिदान दे दिया। उनका जन्म छोटानागपुर पठार क्षेत्र में 1875 ईस्वी में हुआ था। ईसाईयों द्वारा संचालित एक विद्यालय में कुछ दिन पढ़ने के दौरान उन्हें अंग्रेजों द्वारा जनजातीय समूह के धर्मांतरण की साजिश का पता चला।

उन्होंने मुंडा और उराँव समुदाय को एकजुट किया। 1886-90 में वो चाईबासा के विद्रोह में शामिल रहे। 3 मार्च, 1900 को चन्द्रक्रधरपुर के जम्कोपाई जंगलों में जब ये अपने साथियों के साथ सो रहे थे, तभी अग्रेजों ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया। उनके संघर्ष और दबाव का ही नतीजा था कि ब्रिटिश सरकार को जनजातीय समुदाय के जमीन के अधिकारों के संरक्षण के लिए कानून बनाना पड़ा। जिस लिहतू गाँव में उनका जन्म हुआ था, वो अब राँची जिले में पड़ता है।

1895 में भी उन्हें गिरफ्तार कर के हजारीबाग के कारागार में डाल दिया गया था। उनका गुनाह सिर्फ इतना था कि 1894 के काल के दौरान उन्होंने गरीबों का लगान माफ़ करने के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलन किया था। अकाल पीड़ित जनता की सहायता के लिए उन्हें ‘धरती बाबा’ की उपाधि लोगों ने दी। 1897-1900 के बीच अंग्रेजों से उनका समाज का कई बार युद्ध हुआ। 1897 में उन्होंने तीर-कमान और तलवार से लैस साथियों के साथ खूँटी थाने पर हमला किया था। 1898 में तांगा नदी के किनारे संघर्ष हुआ। 1900 में डोमबाड़ी पहाड़ी पर संघर्ष हुआ। इस दौरान अंग्रेजों ने काफी क्रूरता की।

आदिवासी समाज के वो 11 नायक, जिन्हें कल विशेष रूप से किया जाएगा याद

  • रघुनाथ शाह और शंकर शाह: मध्य प्रदेश का गोंडवाना, जिसे वर्तमान में जबलपुर के नाम से जाना जाता है, वहाँ के राजा शंकर शाह और उनके बेटे कुँवर रघुनाथ शाह ने अंग्रेजों से लड़ते हुए बलिदान दे दिया था। सितंबर 2021 में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इन जनजातीय नायकों के सम्मान में ‘जनजातीय गौरव समारोह’ में शिरकत की थी। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत ने दोनों को तोपों से बाँधकर उनकी निर्मम हत्या कर दी थी। दोनों ने अपने आसपास के राजाओं को अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट किया था। उनकी कविताओं ने शहरवासियों में विद्रोह की अग्नि सुलगा दी थी। हालाँकि, एक गद्दार के कारण इन दोनों को अंग्रेजों ने पकड़ लिया था।
  • खाज्या नायक: ये जनजातीय नायक गुमा नायक नाम के एक चौकीदार के बेटे थे। अंग्रेजों से लोहा लेते हुए ये बलिदान हुए थे। अंग्रेजों की भील-गोंड पलटन में सिपाही रहे खाज्या नायक सेंधवा-जामली चौकी से सिरपुर तक 24 मील लम्बे मार्ग की निगरानी का कार्य सौंपा गया था। 1831-51 तक नौकरी के बाद उन्होंने एक लुटेरे को एक व्यक्ति को लूटते देखा तो उस पर हमला किया। उसकी मौत हो गई तो इन्हें नौकरी से निकाल कर जेल भेज दिया गया। 1857 के युद्ध में उन्हें वापस बुलाया गया, लेकिन कैप्टन बर्च नाम के एक अंग्रेज अधिकारी ने उनके जाति-समुदाय और रंग-रूप पर भद्दी टिप्पणियाँ की। उन्होंने अपने साथियों के साथ अंग्रेजों को लूटा और कइयों को मार गिराया। बाद में 1860 में एक मुठभेड़ में वो बलिदान हुए। बड़वानी में उनका बड़ा प्रभाव था।
  • सीताराम कँवर: 1857 की क्रांति के दौरान उन्होंने बड़वानी राज्य के नर्मदा पार के क्षेत्र (जिनमें आज का निमाड़ क्षेत्र सम्मिलित है) में ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक बड़े विद्रोह का नेतृत्व किया था। सतपुरा श्रेणी के भीलों में उन्होंने आज़ादी की अलख जगाई। तांत्या टोपे के साथ उनके संपर्क थे। 9 अक्टूबर, 1958 को उनका बलिदान हुआ था। उन्होंने एक साथ कई जगहों पर विद्रोह किया। होल्कर के राजा ने अंग्रेजों के साथ मिल कर इन्हें मारने का कुचक्र रचा। दिलशेर खान को एक बड़ी सेना के साथ भेजा गया था। गाँव वालों को बचाने के लिए ये अंग्रेजी सेना से भिड़ गए। उस युद्ध में 20 जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी बलिदान हुए थे।
  • भीमा नायक: इन्हें ‘निमाड़ का रॉबिनहुड’ भी कहा जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान भी कहा था कि जैसे मेरठ में मंगल पांडेय थे, वैसे ही मध्य प्रदेश में भीमा नायक। जनजातीय लोगों को एकजुट कर 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों से भिड़ने वाले भीमा नायक की कोई तस्वीर/स्केच तक अंग्रेजों के हाथ नहीं लग पाई। बड़वानी रियासत से लेकर महाराष्ट्र के खानदेश तक उनका प्रभाव था। 1857 के अम्बापानी युद्ध में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी। तात्या टोपे ने निमाड़ में उनसे मुलाकात की थी। 29 दिसम्बर, 1876 को पोर्टब्लेयर में उन्होंने अंतिम साँस ली। एक गद्दार की मुखबिरी के कारण उन्हें पकड़ा गया था।
  • रघुनाथ सिंह मंडलोई: ये खरगोन के जनजातीय समाज के ग्राम टांडाबरुड़ के रहने वाले थे। वो भिलाला जनजाति के नायक थे। अक्टूबर 1858 में बीजागढ़ के किले में अंग्रेजों ने उन्हें घेर लिया था। इसी दौरान उन्हें बंदी भी बना लिया गया था। उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल फूँका हुआ था।
  • सुरेंद्र साय: मात्र 18 वर्ष की उम्र से ही इन्होने अंग्रेजों के विरुद्ध हथियार उठा लिया था। इनका जन्म 23 जनवरी, 1809 को संभलपुर के पास खिंडा में हुआ था। उन्होंने गोंड और बिंझल जनजातीय समुदाय के लोगों के हक़ की आवाज़ उठाई। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने देश के लिए योगदान दिया। इसके 5 वर्षों बाद उन्हें अंग्रेजों ने पकड़ लिया। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के असीरगढ़ किले में उन्हें कैद कर के रखा गया था। 23 मई, 1884 को उनका निधन हुआ। ये जनजातीय राजवंश के थे, लेकिन अंग्रेजों ने इन्हें नज़रअंदाज़ कर के राजा के निधन के बाद रानी को सत्ता सौंप दी और रिमोट से शासन चलाने लगे। डेबरीगढ़ में भी उन पर अग्रेजों ने जानलेवा हमला किया था, लेकिन वो वहाँ से किसी तरह बच निकले थे।
  • टंट्या भील: अंग्रेज इन्हें डकैत मानते थे, लेकिन ये एक स्वतंत्रता सेनानी थे। वो अंग्रेजों का धन लूट लेते थे और इसे गरीबों में बाँट देते थे। 19 अक्टूबर, 1889 को इन्हें अंग्रेजों ने मौत की सज़ा दे दी थी। इन्हें फाँसी से लटका दिया गया था। इनका जन्म बरदा तहसीन के पंधाना में 1840 के करीब में हुआ था। अंग्रेजों ने इनका साथ छल किया था। इन्हें माफ़ी देने के नाम पर पकड़ लिया गया था। 12 वर्षों तक इन्होने आक्रांता अग्रेजों की नाक में दम कर रखा था। जनता भी इनका साथ देती थी। सभी उम्र के लोग प्यार से उन्हें ‘मामा’ कहते थे। गुरिल्ला युद्ध में पारंगत रहे टंट्या भील ने कई बार जेल तोड़ डाली थी। उनकी बहन के पति ने ही गद्दारी कर के उन्हें पकड़वा दिया था।
  • मंशु ओझा: ये इन जनजातीय योद्धाओं से कुछ पीढ़ी आगे के नायक हैं। 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान इन्होने अंग्रेजों की नाक में दम किया था। नवंबर 1942 में अंग्रेजों ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया था। नरसिंहपुर जेल में इन्हें कैद कर दिया गया। कड़ी यातनाएँ दी गईं। लेकिन, इन्होंने अपने सपनों का आज़ाद भारत देखा। 28 अगस्त, 1981 को इनका निधन हुआ। रातामाटी में इनका जन्म हुआ था, लेकिन परिवार बाद में घोड़ाडोंगरी के बैतूल में रहने लगा। निर्धनता थी ही, शिक्षा-दीक्षा भी नहीं हो पाई थी। देशभक्ति गीत गाते हुए इन्होंने अपने साथियों के साथ मिल कर रेल की पटरियाँ उखाड़ी थीं। इनके पिता का नाम उमराव ओझा था।
  • रानी दुर्गावती: इनका जन्म 5 अक्टूबर, 1524 ईस्वी को हुआ था। ये अंग्रेजों के शासन से कई 3 सदी पहले की वीरांगना थीं। मध्य प्रदेश के गोंडवाना में उनका शासन था। जिस गढ़मंडला राज्य पर उनका शासन था, उसका केंद्र जबलपुर में था। उनके पति गौड़ राजा दलपत शाह की असामयिक मृत्यु हो गई थी। रानी दुर्गावती ने अपने नाबालिग बेटे वीर नारायण को गद्दी पर बिठाया। हालाँकि, शासन और राजकाज वही संभाला करती थीं। इलाहाबाद के मुग़ल आक्रांता आसफ खान के साथ इनका युद्ध हुआ। इनका शसन 1550-1564 तक चला था। अकबर के आदेश पर जब मुगलों ने उन पर आक्रमण किया, तब उन्होंने होने दीवान से कहा था कि गुलाम रहने से बेहतर है युद्ध के मैदान में सम्मान से मरना। युद्ध में इन्होंने मैदान छोड़ने या दुश्मन के हाथों मरने से अच्छा खुद की जान लेना उचित समझा।
  • मुड्डे बाई: मध्य प्रदेश के जनजातीय लोगों के लिए 9 अक्टूबर का दिन काफी खास रहता है, क्योंकि इस दिन 1930 में अंग्रेजों के विरुद्ध 400 आदिवासियों ने मिल कर जंगल सत्याग्रह आरंभ किया था।ग्रामीणों के इस सत्याग्रह से बौखलाए अंग्रेजों द्वारा मुड्डे बाई, रेनो बाई, देभो बाई और बिरजू भोई की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस गोलीकांड ने अंग्रेजों की क्रूरता का नया अध्याय लिखा। अंग्रेजों ने जंगल पर जनजातीय लोगों के अधिकार को कुचलते हुए उनके लकड़ी काटने तक पर प्रतिबंध लगा रखा था।

मोदी सरकार के निर्णय पर विपक्षी दलों की राजनीति भी शुरू

भारत में कोई फैसला लिया जाए और उस पर राजनीति न हो, ये असंभव है। झारखंड की सत्ताधारी पार्टी JMM ने इस फैसले का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही इसे स्टंट भी करार दिया है। झारखंड में ‘प्रदेश अनुसूचित जनजाति मोर्चा’ ने केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया है। मोर्चा के अध्यक्ष शिव शंकर ओराँव ने कहा कि केंद्र तो तो साबित कर दिया, अब राज्य में हेमंत सोरेन की सरकार बताए कि उसने जनजातियों के लिए क्या किया है। मांडर विधायक बंधु तिर्की ने भी फैसले का स्वागत किया, लेकिन इसे केवल इवेंट न बनाने की हिदायत दे डाली

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भगवा बिरसा मुंडा की जयंती से पहले उन पर बनी एक फिल्म को भी रिलीज किया। इस कार्यक्रम में बीआर चोपड़ा की ‘महाभारत’ में श्रीकृष्ण का किरदार निभाने वाले नीतीश भरद्वाज भी उपस्थित थे। पद्म भूषण एवं पूर्व लोकसभा उपाध्यक्ष कड़िया मुंडा ने इस फिल्म को लिखा है। बिरसा मुंडा के कर्मक्षेत्र खूँटी में इसकी शूटिंग हुई है। अशोक शरण इसके निर्माता-निर्देशक हैं। ‘उलगुलान-एक क्रान्ति’ नाम की ये फिल्म उस आंदोलन पर आधारित है, जिसकी घोषणा बिरसा मुंडा ने दिसंबर 1898 में की थी।

न्यूजीलैंड को 8 विकेट से हरा कर ऑस्ट्रेलिया बना वर्ल्ड चैम्पियन, कंगारुओं ने पहली बार उठाई T20 विश्व कप ट्रॉफी

T20 विश्व कप मुकाबले का फाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड को 8 विकेट से हरा दिया। मिशेल मार्श के साथ बल्लेबाजी करने उतरे ग्लेन मैक्सवेल ने आते ही ताबड़तोड़ बल्लेबाजी शुरू कर दी। इस खेल के हीरो मिशेल मार्श ही रहे, जिन्होंने 50 गेंदों पर 77 रन बनाए।

T20 विश्व कप मुकाबले का फाइनल मैच ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया। ऑस्ट्रेलिया ने इस मैच में टॉस जीत कर पहले गेंदबाजी का फैसला चुना। न्यूजीलैंड ने 4 विकेट के नुकसान पर 20 ओवर में 172 रन बनाए। तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे कप्तान केन विलियम्सन ने 48 गेंदों पर 85 रनों की धुआँधार पारी खेली। इस दौरान उन्होंने 10 चौके और 3 छक्के जड़े। हालाँकि, न्यूजीलैंड के अन्य बल्लेबाजों ने अपेक्षाकृत धीमी बल्लेबाजी की।

सलामी बल्लेबाज मार्टिन गुप्टिल ने जहाँ 35 गेंदों पर 28 रनों की बेहद ही धीमी पारी खेली, ग्लेन फिलिप्स 17 गेंदों पर 18 रन ही बना पाए। ऑस्ट्रेलिया के सबसे प्रमुख गेंदबाज मिशेल स्टार्क की सबसे ज्यादा धुनाई हुई और उन्होंने 4 ओवर में 60 रन दे दिए। हालाँकि, जोस हैजलवुड ने बेहद ही सटीक गेंदबाजी की। उन्होंने 4 ओवर में मात्र 16 रन ही दिए। ऊपर से 3 विकेट भी चटके। 4 ओवर में 26 रन देने वाले एडम जाम्पा ऑस्ट्रेलिया के अन्य सफल गेंदबाज रहे। उन्हें एक विकेट मिला।

173 रनों का टारगेट लेकर उत्तरी ऑस्ट्रेलिया की टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही, क्योंकि सलामी बल्लेबाज एरोन फिंच को तीसरे ही ओवर में स्विंग गेंदबाज ट्रेंट बोल्ट ने चलता किया। हालाँकि, इसके बाद ऑलराउंडर मिशेल मार्श और एक अन्य सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर ने पारी को संभाला। पहले 7 ओवर में इन्होने संभल कर खेलते हुए 50 रन जड़े, वहीं अगले 3 ओवरों में 32 रन ठोक दिए। ईश सोढ़ी के ओवर में डेविड वार्नर ने एक चक्का और दो चौके जड़े। इस नौवें ओवर में 17 रन बने।

11.3 ओवर में ऑस्ट्रेलिया ने 100 रन पूरे कर लिए। डेविड वार्नर ने 34 गेंदों पर अपना पचासा पूरा किया। जिमि निशाम को छक्का लगा कर वो इस मुकाम पर पहुँचे। हालाँकि, इसके बाद वो ज्यादा देर टिक नहीं सके। 13वें ओवर में ट्रेंट बोल्ट फिर से गेंदबाजी करने आए और उन्होंने डेविड वार्नर को चलता किया। इस ओवर में मात्र 3 रन लगे। मिशेल मार्श इस दौरान जमे रहे और 2021 में उन्होंने 600 रन भी पूरे किए। अगला ओवर लेकर आए ईश सोढ़ी के ओवर में उन्होंने एक छक्का और एक चौका जड़ा। उन्होंने 31 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया। इस ओवर में 16 रन लगे। 3 वाइड गेंदें फेंकी गईं।

‘जब मैं CM बना तो कहा गया काँवड यात्रा रोक दी जाए, कानून-व्यवस्था खराब हो जाएगी’: सीएम योगी ने कहा- यात्रा में 4 करोड़ लोग निकलते हैं, लेकिन पत्ता नहीं हिलता

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के दिन जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी सरगर्मी बढ़ती जा रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा जिन्ना पर दिये गए बयान के बाद उनकी खूब किरकिरी हुई, लेकिन वे अपने बयान पर अभी भी कायम हैं। उस बयान को लेकर उनकी अभी भी आलोचना जारी है। इस बयान को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार (14 नवंबर 1021) को राजधानी लखनऊ में अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन्ना का समर्थन करने वाले लोगों ने ही तालिबान का भी समर्थन किया है।

सीएम योगी ने सपा के शासनकाल के कानून-व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के अंदर के हालात इतने खराब थे कि लोगों से गुंडा टैक्स की वसूली की जाती थी, लेकिन आज या तो गुंडों ने गुंडई छोड़ दी है या फिर राज्य ही छोड़ दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजधानी लखनऊ के सामाजिक प्रतिनिधि सम्मेलन में बोल रहे थे।

इस दौरान उन्होंने कैराना से पलायन करने वाले हिंदुओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैराना में पलायन करने वाले परिवार से मिले थे। उस दौरान उन्होंने एक बच्ची से पूछा कि क्या अब भी उसे डर लगता है? इस पर बच्ची ने इनकार करते हुए कहा कि अब तो गुंडे डरते हैं।

काँवड़ यात्रा का जिक्र कर मुख्यमंत्री ने कहा, “याद करिए वो दिन जब सावन के महीने में काँवड़ यात्रा निकलती थी तो उस पर रोक लगा दी जाती थी। उसे निकलने नहीं दिया जाता था। 2017 में जब मैं सीएम बना तो मेरे सामने भी जुलाई के महीने में ऐसा ही प्रस्ताव आया कि काँवड़ यात्रा को रोक दिया जाए, अन्यथा कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। मैंने कहा कि भाई मैं यहाँ काँवड़ यात्रा को रोकने के लिए नहीं आया हूँ। उसे क्यों रोकी जाएगी? एक बार काँवड़ यात्रा को होने ही दीजिए। उसे धूमधाम से निकालिए। सरकारी हेलिकॉप्टर से हम फूलों की वर्षा भी करवाएँगे। आपने देखा होगा साढ़े 4 करोड़ लोग निकलते हैं, लेकिन कहीं तिनका नहीं हिलता है।”

पीएम मोदी की तारीफ की

अपने भाषण के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए भारत के वैश्विक मंच पर स्थापित करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की वजह से ही भारत का आज दुनिया भर में डंका बज रहा है। अगर 1947 के बाद ऐसे ही हालात होते तो देश आज दुनिया में सबसे ताकतवर होता।

महर्षि भारद्वाज से प्रयागराज की पहचान

प्रयागराज में महर्षि भारद्वाज की प्रतिमा स्थापना को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “2019 में प्रयागराज में कुंभ का आयोजन होना था, तब आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने मुझ से कहा था कि यह कुंभ अब तक सबसे अच्छा होना चाहिए। उस दौरान मैंने एक चीज सोची कि दुनिया में पहला गुरुकुल अगर किसी ने बनाया था तो उसके प्रणेता और कुलपति थे महर्षि भारद्वाज। लगभग 13-14 हजार सालों के बाद महर्षि भारद्वाज की भव्य प्रतिमा का निर्माण कराया गया है।” सीएम योगी ने कहा कि यही वो जगह है, जहाँ भगवान राम वन जाते और लौटते वक्त उतरकर गुरु का सम्मान करते हैं और उनके द्वारा किए गए लोक कल्याण के कार्यों की सराहना करते हैं।

सीएम योगी ने आगे कहा, “इतिहास विकृत किया गया है। इतिहास ने चंद्रगुप्त मौर्य को महान नहीं कहा, किसको महान कहा, जो उनसे हार गए। वह सिकंदर को महान कहते हैं। देश को धोखा दिया गया है, लेकिन इतिहासकार इस पर चुप हैं।” गौरतलब है कि ऐतिहासिक अभिलेखागार में बताया गया है कि सिकंदर की आकस्मिक मृत्यु के बाद, सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने सिकंदर द्वारा शासित प्रदेशों पर कब्जा कर लिया था।

महाराष्ट्र के बीड में शादीशुदा नाबालिग के साथ 400 लोगों ने किया रेप, घटना में पुलिसकर्मी भी शामिल, पीड़िता 2 माह की है गर्भवती

महाराष्ट्र के बीड जिले से मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक नाबालिग लड़की का 6 महीने के दौरान एक पुलिसवाले समेत 400 लोगों ने रेप किया। इससे वह गर्भवती भी हो गई। उसके पेट में दो महीने का बच्चा है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बीड जिले अंबाजोगाई की है। पीड़िता नाबालिग है और उसके पिता मजदूरी कर किसी तरह परिवार का करते हैं। 2 साल पहले पीड़िता की माँ का निधन हो गया थआ। उसके बाद पिता ने पीड़िता की शादी कर दी, लेकिन ससुराल में उसे लगातार प्रताड़ित किया जाता था। उसके ससुर ने ही उसके साथ गंदी हरकत की। इसके बाद पीड़िता अपने पिता के घर लौट आई। शादी के बाद वह तकरीबन साल भर अपने ससुराल रही।

पिता के घर आने के बाद वह नौकरी ढूँढने लगी। इस सिलसिले में वह अंबाजोगई शहर गई, जहाँ के एक ऐकेडमी में उसकी मुलाकात दो लोगों से हुई। इन लोगों ने नौकरी दिलाने के नाम पर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद 100 और लोगों ने उसके साथ रेप किया। इनमें एक पुलिसकर्मी भी शामिल था। इस तरह करीब 6 महीने में लगभग 400 लोगों ने उसके साथ बलात्कार किया।

फिलहाल पीड़िता बाल कल्याण समिति की देखरेख में है। समिति की निगरानी में उसका गर्भ गिराने की प्रक्रिया चल रही है, ताकि वह बच्चे को जन्म देने से बच सके। पीड़िता ने समिति के सामने अपने साथ हुए इस घटना का विवरण दिया। उसने बताया कि जब रेप की शिकायत लेकर वह अंबाजोगाई शहर के पुलिस थाने में गई तो उसकी शिकायत किसी ने नहीं सुनी। वहीं, ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस वाले ने मदद के नाम पर उसे एक लॉज में लेकर गया और उसका बलात्कार किया। इस प्रकरण में पुलिसकर्मी के शामिल होने की खबर के बाद सवाल उठने लगे। इसके बाद बीड के पुलिस अधीक्षक आर राजा ने मामले की जाँच का आदेश दिया है। 

ऐसे हुआ खुलासा

इससे पहले मुंबई के ठाणे जिले के डोंबिवली इलाके में 33 लोगों ने एक नाबालिग के साथ गैंगरेप किया था। उसने कहा था कि 29 जनवरी से 22 सितंबर के बीच उसके साथ ये घटना हुई है। उस घटना का वीडियो भी आरोपितों ने बना लिया था। इस मामले में वीडियो के जरिए पीड़िता को ब्लैकमेल करके उसके साथ रेप किया गया। इस केस में आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376, 376 (N), 376 (3), 376 (D) (A) और POCSO अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।