अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी गैंगस्टर रियाज भाटी की बीवी रहनुमा भाटी ने आरोप लगाया है कि उनके साथ रेप किया गया है। आरोप क्रिकेट खिलाड़ियों समेत एक बड़े कॉन्ग्रेस नेता पर है।
इस मसले पर कॉन्ग्रेस नेता की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। वैसे यह पहला मामला नहीं है जब कॉन्ग्रेस का कोई नेता (या नेता का सहयोगी) इस तरह के विवादों में घिरा हो। घटना कुछ साल पहले की है। सीनियर कॉन्ग्रेसी नेता राजीव शुक्ला विवादों में आ गए थे। कारण बने थे उनके निजी सहायक (PA) रहे अकरम सैफी। सैफी पर उत्तर प्रदेश अंडर 23 क्रिकेट टीम में सलेक्शन के बदले ‘वेश्या और पैसे’ की डिमांड करने का आरोप लगा था। हालाँकि इस मामले में सैफी को बाद में क्लीनचिट मिल गई थी।
यह मामला 2018 का है। तब राजीव शुक्ला आईपीएल के चेयरमैन हुआ करते थे। उस समय राजीव शुक्ला उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ के निदेशक भी थे। हिंदी समाचार चैनल न्यूज़ 1 ने एक ऑडियो जारी किया था। इसमें राहुल शर्मा नाम के किसी क्रिकेटर से कथित तौर पर सैफी एक लड़की को होटल में भेजने की बात कहते सुनाई पड़ रहा है। वह इसके बदले उसे टीम में सलेक्शन को लेकर निश्चिंत रहने का भी भरोसा दिलाता है। वह ऑडियो आप नीचे सुन सकते हैं।
इन आरोपों के बाद सैफी ने खुद को निर्दोष बताते हुए शुक्ला के पीए पद से इस्तीफा दे दिया था। उसने कहा था कि वह राजीव शुक्ला का सहयोगी है, इसलिए उन्हें बदनाम करने के लिए उस पर आरोप लगाए जा रहे हैं। उस पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी करने का भी आरोप लगा था। तब BCCI के एंटी करप्शन यूनिट के प्रमुख अजीत सिंह ने मामले की निष्पक्ष जाँच और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया था।
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार अकरम सैफ़ी पर दिल्ली में क्रिकेट खिलाडियों के लिए हॉस्टल चलाने का भी आरोप था। इस हॉस्टल में सुविधाओं के नाम पर खिलाड़ियों से मोटी रकम वसूली जाती थी। इन सुविधाओं में ट्रेनिंग भी शामिल थी। बताया जाता था कि चयनकर्ता भी अकरम सैफ़ी की बात को टालने का साहस नहीं कर पाते थे। किसी का टीम में अंदर या बाहर होना अकरम सैफ़ी पर निर्भर करता था। इस हॉस्टल का संचालन अकरम एक पूर्व आईपीएल खिलाड़ी के साथ मिल कर करता था।
इस पूरे घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासनिक कमेटी के चेयरमैन विनोद राय ने तब बताया था कि सैफी BCCI में किसी भी पद पर नहीं था। वह शुक्ला का पर्सनल असिस्टेंट था। इस मामले के बाद उसे हटा दिया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (यूपीसीए) के लोकपाल और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज चंद्रमौली कुमार प्रसाद ने बाद में सैफी को इस मामले में क्लीनचिट दे दी थी। जाँच में उस पर लगाए गए आरोप निराधार पाए गए थे। पाया गया था कि चैनल ने कई ऑडियो रिकॉर्डिग को मिलाकर अपने अनुसार प्रसारित किया था। यह भी पाया गया था कि जिस जगह अकरम ने ऑडियो क्लिप में लड़की को भेजने की बात कही थी, वहाँ कोई लड़की पहुँची ही नहीं थी।
राहुल शर्मा ने 26 जुलाई 2018 को एक हलफनामा दाखिल कर अपने सभी आरोप भी वापस ले लिए थे।
अपडेट: यह रिपोर्ट पहले भी की गई थी। पिछली कॉपी में एक वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता का नाम था। उन पर बलात्कार का आरोप लगाया गया था। इस खबर को मुख्यधारा की कई मीडिया कंपनियों जैसे हिन्दुस्तान, एबीपी न्यूज, डेक्कन हेराल्ड, लोकमत, अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दिप्रिंट आदि ने रिपोर्ट की थी। इन सबकी रिपोर्ट में नाम (कॉन्ग्रेसी नेता) का बकायदा जिक्र भी था। हालाँकि एक-दो दिन के भीतर ही इन सभी नामी मीडिया कंपनियों ने या तो अपनी खबरों को ही डिलीट कर दिया या अपनी प्रकाशित खबरों को एडिट करके वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता का नाम हटा दिया। इस मामले में मुंबई पुलिस से हमने आधिकारिक प्रतिक्रिया लेनी चाही, हालाँकि उधर से कुछ भी कहने या बताने से इनकार कर दिया गया। एक बात जिसकी पुष्टि हो पाई है, वो यह है कि ऐसी शिकायत वास्तव में दर्ज की गई थी। ऐसी परिस्थिति में जहाँ पुलिस भी आरोपितों के नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रही है, साथ ही मीडिया कंपनियों (जो प्राथमिक सोर्स माने जाते हैं) ने भी या तो अपनी खबरों को हटा दिया है या नाम छिपा लिया है, हम भी आरोपित की पहचान उजागर नहीं करने के लिए इस कॉपी को अपडेट कर रहे हैं। इस खबर में जैसे ही कोई अपडेट होगी, हम पाठकों को उससे सूचित करेंगे।
गैंगस्टर रियाज भाटी इस समय सुर्खियों में है। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक उसका नाम लेकर राजनीतिक विरोधियों पर आरोप लगा रहे हैं। रियाज पर अपनी ही बीवी को सेक्स वर्कर बनाने का आरोप भी लगा है। रियाज की बीवी रहनुमा ने आरोप लगाया है कि शौहर उसे हाई प्रोफाइल लोगों के साथ सोने को मजबूर करता था। उसने अपनी शिकायत में 2 बड़े क्रिकेट खिलाड़ियों और एक सीनियर कॉन्ग्रेसी नेता का भी नाम लिया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रियाज़ भाटी अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का करीबी है। वर्ष 2015 और 2020 में न्यायालय के आदेश की अवहेलना कर वह देश से भागने की कोशिश में गिरफ्तार हो चुका है। इसके लिए रियाज़ ने फर्जी पासपोर्ट का सहारा लिया था। फरवरी 2020 में वह विदेश भागने की फिराक में था और मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़ा गया था। उस पर जमीन कब्ज़ाने, धोखाधड़ी, गोली चलाने के साथ रंगदारी माँगने के भी केस दर्ज हैं।
इसी वर्ष सितम्बर माह में उसकी अग्रिम जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी थी। इसके बाद से वह फरार चल रहा है। पुलिस ने उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर रखा है। साल 2006 में मुंबई के मलाड में एक जमीन पर अवैध कब्ज़े के लिए उसने दाऊद इब्राहिम गैंग के सदस्यों की मदद ली थी। उस पर जुहू और अम्बोली थानों में भी रंगदारी माँगने के केस दर्ज हैं। रियाज़ भाटी नेताओं के साथ तस्वीरें खिंचवाने का शौक़ीन बताया जाता है। उसकी फोटो लगभग हर पार्टी के नेताओं के साथ दिख जाती है।
साल 2010 में रियाज़ भाटी पर मकोका के तहत केस दर्ज हुआ था। तब रियाज़ ने अंधेरी के एक प्रोजेक्ट से एक बिल्डर पर बाहर हो जाने का दबाव बनाया था। रियाज़ का नाम मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नरपरमबीर सिंह और बर्खास्त असिस्टेंट इंस्पेक्टर सचिन वाजे से भी जुड़ा है। बताया जा रहा है कि रियाज़ बारों से वसूली करता था। यह वसूली वो सचिन वाज़े के संरक्षण में किया करता था।
रियाज़ भाटी की उम्र लगभग 57 वर्ष है। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मालिक ने भाजपा नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर रियाज़ भाटी को संरक्षण देने के आरोप लगाए हैं। फडणवीस ने इन आरोपों को तथ्यहीन और आधारहीन बताया है।
एकदम ताजे मामले को देखें तो रियाज़ भाटी की बीवी रहनुमा भाटी ने आरोप लगाया है कि उसे हाइप्रोफाइल लोगों के साथ जबरन सेक्स को मजबूर किया गया। ऐसा करने का दबाव उस पर शौहर रियाज़ ने ही बनाया था। रहनुमा के आरोप में जिनका नाम है, उनमें प्रमुख हैं कॉन्ग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और 2 क्रिकेट खिलाड़ी। बताया जा रहा है कि DSP मंजूनाथ शिंदे ने रहनुमा की इस शिकायत पर संज्ञान लिया है।
अपडेट: यह रिपोर्ट पहले भी की गई थी। पिछली कॉपी में एक वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता और कुछ क्रिकेटरों के नाम थे। उन पर बलात्कार का आरोप लगाया गया था। इस खबर को मुख्यधारा की कई मीडिया कंपनियों जैसे हिन्दुस्तान, एबीपी न्यूज, डेक्कन हेराल्ड, लोकमत, अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दिप्रिंट आदि ने रिपोर्ट की थी। इन सबकी रिपोर्ट में इन नामों (कॉन्ग्रेसी नेता और क्रिकेटरों) का बकायदा जिक्र भी था। हालाँकि एक-दो दिन के भीतर ही इन सभी नामी मीडिया कंपनियों ने या तो अपनी खबरों को ही डिलीट कर दिया या अपनी प्रकाशित खबरों को एडिट करके वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता का नाम हटा दिया। इस मामले में मुंबई पुलिस से हमने आधिकारिक प्रतिक्रिया लेनी चाही, हालाँकि उधर से कुछ भी कहने या बताने से इनकार कर दिया गया। एक बात जिसकी पुष्टि हो पाई है, वो यह है कि ऐसी शिकायत वास्तव में दर्ज की गई थी। ऐसी परिस्थिति में जहाँ पुलिस भी आरोपितों के नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रही है, साथ ही मीडिया कंपनियों (जो प्राथमिक सोर्स माने जाते हैं) ने भी या तो अपनी खबरों को हटा दिया है या नाम छिपा लिया है, हम भी आरोपित की पहचान उजागर नहीं करने के लिए इस कॉपी को अपडेट कर रहे हैं। इस खबर में जैसे ही कोई अपडेट होगी, हम पाठकों को उससे सूचित करेंगे।
असम के गुवाहाटी स्थित लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय (LGBI) हवाई अड्डे ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है, जिनमें दावा किया गया था कि एयरपोर्ट पर महिला कर्मचारियों के पारंपरिक परिधान पहनने पर रोक लगा दी गई है। इस एयरपोर्ट का संचालन अडानी ग्रुप करता है। असम के एक बड़े मीडिया हाउस ने इस प्रतिबंध को लेकर खबर प्रकाशित की थी। लेकिन, एयरपोर्ट प्रबंधन ने अपने आधारिक ट्विटर हैंडल से इस दावे को नकार दिया है।
एयरपोर्ट की ओर से जारी बयान में कहा गया है, “एक निजी टीवी चैनल ने आरोप लगाया है कि लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ‘प्रणाम’ सेवा की महिला कर्मचारियों से पारंपरिक कपड़ों और गहने नहीं पहनने को कहा गया है। यह पूरी तरह से निराधार और झूठा है। एयरपोर्ट स्टाफ को ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया गया है। हम असम और पूर्वोत्तर की संस्कृति और परंपराओं की प्रशंसा और उनका सम्मान करते हैं।”
We would like to draw your attention to this fact that the allegation levelled by a private TV channel, against the female team members of Pranaam, is baseless and untrue. #GuwahatiAirport greatly admires the culture and traditions of Assam and the Northeast. pic.twitter.com/DtUtfKt59l
— GUWAHATI INTERNATIONAL AIRPORT (@GuwahatiAirport) November 11, 2021
जिस चैनल ने यह खबर चलाई थी वो प्रतिदिन टाइम्स है। इसका संचालन वामपंथी मीडिया हाउस सादिन-प्रतिदिन समूह करता है। यह मीडिया हाउस राज्य का सबसे बड़ा डेली ‘असोमिया प्रतिदिन‘ भी चलाता है। प्रतिदिन टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि अडानी समूह ने ‘प्रणाम’ नाम की एक कंपनी को ठेका दिया है। उक्त कंपनी (प्रणाम) ने एक ड्रेस कोड जारी किया है जहाँ महिला कर्मचारियों के पारंपरिक कपड़े पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। दावा किया गया था कि महिला कर्मचारियों को सिंदूर और बिंदी भी नहीं लगाने दिया जा रहा है।
प्रतिदिन टाइम्स द्वारा चलाई गई फेक न्यूज
रिपोर्ट में कहा गया है, “नए नियम के अनुसार महिला कर्मचारी मेखला चादर (असम की पारंपरिक पोशाक) चूड़ियाँ, मंगलसूत्र और यहाँ तक कि LGBI हवाई अड्डे पर ड्यूटी के दौरान सिंदूर तक नहीं लगा सकती हैं।” आरोप यहाँ तक लगाए जा रहे हैं कि एयरपोर्ट ने विवाहित महिलाओं के बिंदी लगाने तक पर रोक लगा दिया है। रिपोर्ट में इसे असमिया संस्कृति और परंपरा का सरासर अपमान करार दिया गया है। हालाँकि, एयरपोर्ट प्रबंधन ने इस खबर का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि अडानी समूह से जुड़ी ‘प्रणाम’ ने इस तरह का कोई भी ड्रेस कोड लागू ही नहीं किया है।
वहीं अगर प्रतिदिन मीडिया हाउस की बात की जाए तो यह असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की कड़ी आलोचना करने और उन्हें बदनाम करने के लिए कुख्यात रहा है। LGBI एयरपोर्ट के संचालन का जिम्मा जब से अडानी समूह को दिया गया है, तभी से राज्य में विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। यह रिपोर्ट भी अडानी समूह के खिलाफ दुष्प्रचार के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।
I won’t bow down before Sri Jayanta Baruah of Pratidin. Know him very well since my childhood and I can vouch that he is not Saint (1)
टाइम्स नाउ के शिखर सम्मेलन 2021 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने आतंकवाद के मुद्दे पर प्रमुखता से बात की। उन्होंने बताया कि कैसे स्थानीय कश्मीरी लोग अब आतंकियों के बारे में सेना को जानकारी देते हैं और तभी सुरक्षाबल आतंकियों को ढेर करने में सफल होते हैं। उन्होंने बताया कि अब लोकल लोग ही आतंकियों को लिंच करने की बातें करते हैं जो कि एक बहुत अच्छा साइन हैं।
उन्होंने कहा कि अभी तक ये होता था कि बड़ी संख्या में स्थानीय आतंकियों को जानते थे, वे कहाँ से ऑपरेट करते हैं ये जानते थे। मगर, सिर्फ गोली के डर से वे जानकारी नहीं देते थे। लेकिन अब वे अलग सोच के साथ आगे आ रहे हैं कि या तो हम उनकी (आतंकियों की) हत्या कर देंगे या ऐसा इंतजाम करेंगे कि वे मारे जाएँ।
सीडीएस ने कहा कि आतंकियों के मन में ये डर होना कि इससे पहले वो हमारी (आम जनता) हत्या करेंगे, हम (सेना) उनकी (आतंकी) ही हत्या कर देंगे, ये अच्छा है। उन्होंने पूछा कि आतंकियों को मारना मानवाधिकार का उल्लंघन कैसे हो सकता? उन्होंने कहा आपके इलाके में कोई आतंकी ऑपरेट कर रहा है तो आप उसकी हत्या क्यों नहीं करेंगे।
सीडीएस ने कहा आतंकी किसी एक को निशाना बनाते हैं तो बाकी लोग डर जाते हैं। लेकिन अगर किसी को भी खतरा महसूस होता है तो वो सेना के पास आए। कुछ लोग डर से अपना बेस छोड़कर चले गए हैं जिसपर आतंकियों द्वारा कब्जा कर लिया गया है। लेकिन सेना ऐसा नहीं चाहती। अगर किसी को लगता है कि उनके पास कोई सुरक्षित स्थान नहीं है तो वह सेना के पास आए। यह समस्या अस्थायी है।
उन्होंने पलायन को लेकर कहा कि दुश्मन चाहता यही है कि पलायन हो। लेकिन सेना का मकसद है कि पलायन को रोका जाए। एक दो-हत्याओं पर पलायन शुरू हो जाता है। इसे रोक रहे हैं। कोई आतंकी हमला होता है। 48-72 घंटों के भीतर उन आतंकियों को खत्म कर दिया जाता है। आतंकियों को भी यह बात समझ में आ रही है।
सीडीएस रावत ने पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव पर बात की और चीन को नंबर एक का दुश्मन बताया। उन्होंने कहा कि LAC पर डिसइंगेजमेंट हो सकता है लेकिन डी-एस्केलेशन, यथास्थिति बहाल होने में लंबा समय लगेगा। इसके बाद सीडीएस ने अरुणाचल प्रदेश में चीन के गाँव बसाने की रिपोर्ट्स पर बात की और कहा कि गाँव में निर्माण हमारी सीमाओं पर नहीं हुआ।
अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी गैंगस्टर रियाज भाटी की बीवी रहनुमा भाटी ने आरोप लगाया है कि उनके शौहर ने उन्हें जबरन अपने बिजनेस पार्टनर्स और हाई प्रोफाइल लोगों के साथ सोने को मजबूर किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक (अब डिलीट कर दी गई है) इस लिस्ट में क्रिकेट खिलाड़ियों समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं। इनके अलावा एक कॉन्ग्रेस नेता और एक अन्य व्यक्ति पर भी गैंगस्टर की बीवी ने रेप के आरोप लगाए हैं।
रहनुमा भाटी का कहना है कि उनके शौहर रियाज भाटी ने उन्हें जबरन हाई प्रोफाइल लोगों के साथ सेक्स करने को कहा। रहनुमा ने इस मामले में अभी कोई तारीख, जगह से जुड़ी जानकारियाँ नहीं दी है। लेकिन शिकायत में क्रिकेट खिलाड़ियों और कॉन्ग्रेसी नेता का नाम दिया है।
पीड़िता कोशिश कर रही है कि वो पुलिस में इस मामले की एफआईआर करवा दे। उन्होंने कथित तौर पर कहा,
“मैं पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश कर रही हूँ, लेकिन वह सहयोग नहीं कर रहे। मेरा आवेदन सितंबर में जमा हुआ था। अब नवंबर आ गया है। मैंने विभिन्न स्तरों पर पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन मुझसे पैसे माँगे गए, पर मैं भ्रष्टाचार क्यों बढ़ाऊँ? मैं अपनी जगह पर सही हूँ। ये वो हैं जो अपराधी हैं।”
रहनुमा ने अपने शौहर पर भी मैरिटल रेप के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनसे जबरन सेक्स 2012 में पहली बार करवाया गया था। इसके बाद उनकी कुछ तस्वीर और वीडियोज को लेकर उन्हें धमकाया जाता रहा और बीच में उनके बच्चों को नुकसान पहुँचाने की धमकी भी दी गई। उन्होंने बताया कि एक क्रिकेट खिलाड़ी के साथ उन्हें होटल में रहने और सेक्स करने को कहा गया। रहनुमा के अनुसार एक अन्य क्रिकेट खिलाड़ी उनके पास तब आए थे, जब वो पूरी तरह नशे में धुत थे। उनके साथ दो दोस्त भी थे। सबने उनके साथ अप्राकृतिक संबंध (ओरल सेक्स, एनल सेक्स) बनाए थे।
रहनुमा ने कॉन्ग्रेसी नेता को लेकर कहा कि जब उन्हें उस नेता के साथ सोने को कहा गया तो उन्हें बाद में पता चला कि वो क्रिकेट से जुड़े हैं। उन्होंने ऐसा करने से मना किया तो उस नेता और उनके दोस्तों के सामने उनको मारा गया। वह कहती हैं, “कॉन्ग्रेसी नेता और उसके दोस्तों ने मुझे अपने सामने नंगा नचाया। मैंने दरवाजा खोलकर भागने की कोशिश की लेकिन उस नेता ने मेरे हाथ बाँध दिए। इसके बाद उसने अपने दोस्तों से मेरे साथ सेक्स करने को कहा और फिर उसने मेरा रेप किया।”
पीड़िता का कहना है कि समाज में होने वाली बदनामी के डर से वो इतने समय तक चुप थीं और इन लोगों के विरुद्ध आवाज नहीं उठा पा रही थीं। लेकिन बता दें अब डीएसपी मंजूनाथ शिंघे ने इस केस पर संज्ञान लिया है। अभी आगे कोई जानकारी नहीं आई है। दूसरी ओर सोशल मीडिया पर इस खबर के बाद सवाल उठने शुरू हो गए हैं। शिकायत में कॉन्ग्रेसी नेता का नाम होने के कारण कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेताओं से पूछा जा रहा है कि आखिर उनके विरुद्ध कब कार्रवाई होगी।
ANI ने मुंबई पुलिस के हवाले से रिपोर्ट किया है, “रियाज भाटी (दाऊद इब्राहिम का कथित करीबी सहयोगी) की पत्नी रहनुमा भाटी ने 24 सितंबर को मुंबई के सांताक्रूज पुलिस स्टेशन में बलात्कार-छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। आरोपों की पुष्टि कर रही है पुलिस, लेकिन अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं है।”
सामने आए आरोपों पर अब तक आरोपित क्रिकेटरों और राजनेताओं ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
अपडेट: यह रिपोर्ट पहले भी की गई थी। पिछली कॉपी में एक वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता और कुछ क्रिकेटरों के नाम थे। उन पर बलात्कार का आरोप लगाया गया था। इस खबर को मुख्यधारा की कई मीडिया कंपनियों जैसे हिन्दुस्तान, एबीपी न्यूज, डेक्कन हेराल्ड, लोकमत, अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दिप्रिंट आदि ने रिपोर्ट की थी। इन सबकी रिपोर्ट में इन नामों (कॉन्ग्रेसी नेता और क्रिकेटरों) का बकायदा जिक्र भी था। हालाँकि एक-दो दिन के भीतर ही इन सभी नामी मीडिया कंपनियों ने या तो अपनी खबरों को ही डिलीट कर दिया या अपनी प्रकाशित खबरों को एडिट करके वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता का नाम हटा दिया। इस मामले में मुंबई पुलिस से हमने आधिकारिक प्रतिक्रिया लेनी चाही, हालाँकि उधर से कुछ भी कहने या बताने से इनकार कर दिया गया। एक बात जिसकी पुष्टि हो पाई है, वो यह है कि ऐसी शिकायत वास्तव में दर्ज की गई थी। ऐसी परिस्थिति में जहाँ पुलिस भी आरोपितों के नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रही है, साथ ही मीडिया कंपनियों (जो प्राथमिक सोर्स माने जाते हैं) ने भी या तो अपनी खबरों को हटा दिया है या नाम छिपा लिया है, हम भी आरोपित की पहचान उजागर नहीं करने के लिए इस कॉपी को अपडेट कर रहे हैं। इस खबर में जैसे ही कोई अपडेट होगी, हम पाठकों को उससे सूचित करेंगे।
विश्व के सबसे बड़े इस्लामिक मुल्क इंडोनेशिया में एक महिला को सार्वजनिक रूप से 17 कोड़े लगाने की सजा दी गई है। इसकी आलोचना पूरी दुनिया में हो रही है। महिला के पति का कहना है कि उसकी बीवी के गैर-मर्द के साथ संबंध हैं, इसी की सजा उसे दी गई है। महिला को कोड़े मारने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं।
घटना इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के असह प्रांत की है। यहाँ एक महिला पर आरोप है कि वह अपने शौहर को छोड़कर किसी गैर-मर्द के साथ घूम रही थी। शौहर की शिकायत पर शरिया कानून के हिसाब से महिला को अवैध संबंधों का दोषी करार देते हुए सार्वजनिक रूप से कोड़े लगाने की सजा मिली। जिस महिला को सजा दी गई, उसकी पहचान गुप्त रखी गई है। सजा देने के दौरान महिला सफेद बुर्के में थी।
सजा देने वाली महिला, जिसे अलगोजो कहा जाता है, वह भी बुर्के में पूरी तरह ढँकी हुई थी और उसने लकड़ी की बेंत ले रखी थी। जिस महिला को सजा दी जा रही थी, उसे जमीन पर बैठा दिया गया था। उसके बाद उसके शरीर पर कोड़े बरसाए जाने लगे। इस दौरान वह दर्द से चीखती रही, लेकिन सजा पूरी होने तक उसे पीटा जाता रहा। अंत में महिला बेहोश होकर जमीन पर लुढ़क गई।
महिला के साथ-साथ उसके प्रेमी को भी शरिया कानून के तहत सजा दी गई। दोनों के सजा के दौरान मौके पर पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे। इसके साथ ही वहाँ दर्शकों की भी भारी भीड़ थी, जो इस घटना को देख रहे थे और उसका वीडियो बना रहे थे।
इंडोनेशिया में असह ही एकमात्र ऐसा प्रान्त है, जहाँ शरिया कानून लागू है। यहाँ किसी भी जुर्म की सजा कुरान में बताए गए तरीकों से दी जाती है। गौरतलब है कि कुरान में महिलाओं के लिए सजा का बेहद कड़ा प्रावधान है। मुस्लिम देशों में महिलाओं को ज्यादातर कामों के लिए अपने पिता या पति पर निर्भर रहना पड़ता है। बिना उनकी मर्जी या उनके साथ के वे बाहर नहीं निकल सकतीं। वहीं, निकाह के पूर्व और बाद के यौन संबंधों के लिए कठोर कानून हैं।
साल 2018 में इंडोनेशिया के असह प्रांत की स्थानीय सरकार ने सार्वजनिक रूप से कोड़े मारने की सजा पर रोक लगाने की बात कही थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उस दौरान कहा गया था कि कोड़े मारने की जगह जेल की सजा का प्रावधान किया जाएगा।
पिछले साल जून में इसी असह प्रांत में एक व्यक्ति को सौ कोडे की सजा मिली थी। सजा के दौरान वह शख्स बेहोश हो गया था। इस दौरान कोड़े मारना बंद कर उसके होश में आने का इंतजार किया जाने लगा। होश में आने के बाद उसे फिर कोड़े मारे जाने लगे। उसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। इस शख्स पर भी निकाह से पहले यौन संबंध बनाने का आरोप था।
कंगना रनौत ने कहा है कि भारत को असली आज़ादी तो 2014 में मिली। उनका इशारा नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने से था, जब कॉन्ग्रेस के लंबे शासनकाल का अंत हुआ। उससे पहले गैर-कॉन्ग्रेसी सरकारें बनी तो थीं, लेकिन वो खिचड़ी सरकारें थीं। कॉन्ग्रेस के अलावा किसी एक दल को पूर्ण बहुमत के लिए 2014 तक इंतजार करना पड़ा। आज कंगना रनौत पर स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान करने के आरोप लगा रहे हैं। फिर पेरियार और बाबसाहब भीमराव आंबेडकर से लेकर अन्य ‘दलित चिंतकों’ और वामपंथी दलों की आज़ादी को लेकर क्या राय थी?
इस पर हम बात करेंगे, लेकिन उससे पहले बता दें कि कंगना रनौत पर हमला करने वालों की फ़ेहरिस्त बढ़ती ही जा रही है। पहले भाजपा सांसद वरुण गाँधी ने इसे देशद्रोह करार दिया, उसके बाद AAP नेता प्रीती मेनन ने उनके विरुद्ध पुलिस में शिकायत दायर कर दी और अब कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने उन्हें ‘पागल’ कह दिया है। कंगना रनौत के खिलाफ बयान देकर खुद को देशभक्त साबित करने की होड़ सी लगी है सोशल मीडिया पर। RJ सायमा और स्वरा भास्कर जैसे लोग इस बहते जमजम में अपने हाथ धो रहे हैं।
असली आज़ादी 2014 में: जानिए क्या है पूरा मामला
बता दें कि ‘टाइम्स नाउ’ के एक कार्यक्रम में कंगना रनौत ने अंग्रेजों की क्रूरता का जिक्र करते हुए जलियाँवाला बाग़ नरसंहार और बंगाल के अकाल की भी बात की थी। उन्होंने कहा था कि यहूदियों के साथ और भी बुरा हुआ, जो हमें नहीं बताया गया। साथ ही उन्होंने बताया था कि कैसे अंग्रेज भारतीयों के पीछे पड़ गए थे और उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया था। हाल ही में कंगना रनौत अंडमान के सेल्युलर जेल में भी गई थीं, जहाँ वीर सावरकर को कालापानी की क़ैद दी गई थी।
इसी दौरान उन्होंने कहा था कि 1947 में जो आज़ादी मिली वो भीख थी, देश को असली स्वतंत्रता तो 2014 में मिली। जब वरुण गाँधी ने उन पर निशाना साधा, तो इसके बाद बॉलीवुड अभिनेत्री ने कहा कि उन्होंने स्पष्ट रूप से जिक्र किया था कि 1857 का युद्ध भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था जिसे दबा दिया गया, जिसके बाद अंग्रेजों ने अत्याचार और क्रूरता की घटनाओं को अंजाम देना और तेज कर दिया। कंगना रनौत ने तंज कसते हुए कहा, “प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के लगभग एक सदी बाद हमें गाँधी के भीख के कटोरे में रख कर आज़ादी मिली।
अब चूँकि कंगना रनौत को हाल ही में ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया है और उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले हैं, तो उनके बयानों को मोदी सरकार से जोड़ कर देखना भाजपा विरोधियों के लिए मजबूरी है। ये अलग बात है कि नेशनल अवॉर्ड्स वो कॉन्ग्रेस के राज़ में भी जीतती रही थीं। पत्रकार सबा नकवी कंगना रनौत की तुलना कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी से करते हुए पूछ रही हैं कि उन्हें जेल क्यों नहीं हो रही। कॉन्ग्रेस नेता गौरव पांधी ने कह दिया कि RSS अपने ‘मालिक अंग्रेजों’ का देश छोड़ कर जाना अब तक बर्दाश्त नहीं कर पा रहा।
रेडियो मिर्ची की RJ सायमा कहती हैं कि भले ही कंगना रनौत एक बेहतरीन अदाकारा हैं, लेकिन अब वो उनकी फ़िल्में कभी नहीं देखेंगी। उनके बयान को ‘देशद्रोह’ बताया जा रहा है। लेखक राजू परुलेकर का तो कहना है कि राजद्रोह का मामला ‘टाइम्स नाउ’ और कंगना का इंटरव्यू ले रहीं नाविका कुमार पर भी चलना चाहिए। ‘दलित नेता’ जिग्नेश मेवानी ने ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ की बात करते हुए इस बयान को बेवकूफाना बताया। राजनीतिक विश्लेषक निशांत वर्मा को नाविका कुमार के साथ टीवी डिबेट्स में हिस्सा लेने पर शर्म आने लगी।
यहाँ सवाल ये उठता है कि क्या 15 अगस्त, 1947 को मिली आज़ादी को वास्तविक न मानना और 2014 में असली आज़ादी की बात करना सचमुच इतना बड़ा गुनाह है कि किसी को ‘राजद्रोह’ का मुकदमा चला कर जेल में डाल दिया जाए? फिर पेरियार, बाबासाहब आंबेडकर और वामपंथी दलों की स्वतंत्रता को लेकर जो राय थी, उसे लेकर यही गिरोह विशेष क्या कहेगा? ‘ये आज़ादी झूठी है’ कविता पर नाचने वाले और हर चीज के लिए आज़ादी को कोसने वाले ऐसी बातें करते अच्छे नहीं लगते।
‘दलित चिंतक’ (असल में हिन्दू विरोधी) पेरियार और आज़ादी को लेकर उनके विचार
आइए, पेरियार की बात करते हैं। अपने से 40 वर्ष छोटी लड़की से शादी करने वाले और हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरें जलाने वाले तमिलनाडु के पेरियार को ‘द्रविड़ आंदोलन’ का जनक माना जाता है, जिन्होंने दक्षिण भारतीय राज्य में ब्राह्मणों के विरुद्ध घृणा बोने का काम किया। पेरियार आज देश भर के ‘दलित चिंतकों’ और दलितों के ठेकेदारों के पोस्टर बॉय हैं। हालिया फिल्म ‘जय भीम’ में मुफ्त में मानवाधिकार का केस लड़ने वाले वकील के घर में उनका पोस्टर लगा दिखाया गया है।
पेरियार के अनुयायियों ने 15 अगस्त, 1947 को काले झंडे लेकर ‘शोक दिवस’ मनाया था। जब पूरे देश में राष्ट्रभक्ति गीत गाए जा रहे थे, झंडा फहराया जा रहा था और गाँधी-नेहरू की ख़ुशी का ठिकाना न था, तब पेरियार के समर्थक शोक में डूबे हुए थे। पेरियार के अनुयायियों का मानना था कि अंग्रेजों ने ब्राह्मण-बनिया समुदायों को पावर ट्रांसफर किया है, ये आज़ादी नहीं है। चेन्नई में भी पेरियार की पार्टी के लोग काले कपड़े पहन कर निकले थे। उनका कहना था कि ये आज़ादी ‘सच्ची’ नहीं है।
पेरियार द्वारा स्थापित ‘द्रविड़ कझगम’ के मौजूदा अध्यक्ष के वीरामणि तो अभी भी अपनी पार्टी के उस स्टैंड का बचाव करते हैं। उनका कहना है कि पेरियार और उनकी पार्टी के पास अंग्रेजों के भारत छोड़ने का विरोध करना एकदम जायज था, क्योंकि वो जातिवाद को बिना सुलझाए हुए ही यहाँ से निकल रहे थे। उस दौरान शोक मनाने और आज़ादी का विरोध करने के कारण तिरुनेलवेली और कुडानोर में पेरियार की पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमले भी किए गए थे।
के वीरामणि के अनुसार, 9 अगस्त, 1947 को पेरियार ने कहा था कि हमारे लोग स्वतंत्रता दिवस के किसी भी प्रकार के कार्यक्रमों में शिरकत नहीं करेंगे और इसका बहिष्कार करेंगे। के वीरामणि का कहना है कि राष्ट्रीय एकता से ज्यादा पेरियार ‘सामाजिक इंटीग्रेशन’ में विश्वास रखते थे और उनका मानना था कि अगर हमें देश को आज़ाद करना है तो इसका जाति से स्वतंत्र होना अनिवार्य है। क्या कंगना रनौत की आलोचना करने वाले पेरियार की आलोचना की हिम्मत रखते हैं?
असल में पेरियार भी मोहम्मद अली जिन्ना से कम नहीं थे। वो भी देश को खंडित करना चाहते थे। जिस तरह जिन्ना को पाकिस्तान चाहिए था और अब भी कट्टरपंथी सिख खालिस्तान की बातें करते हैं, पेरियार ने अंग्रेजों से माँग की थी कि दक्षिण भारत को भारत राष्ट्र से अलग काट कर एक ‘द्रविड़नाडु’ नाम का देश बनाया जाए। असल में DK का गठन ही इसीलिए हुआ था, क्योंकि ‘द्रविड़नाडु’ बनाया जा सके। इसी दौरान पार्टी के एक अन्य दिग्गज नेता अन्नादुराई से उनके मतभेद हो गए थे।
पुस्तक ‘Re-distribution of Authority: A Cross-regional Perspective’ का अंश
अन्नादुराई का भी मत वही था, लेकिन उनका कहना था कि हमारी लड़ाई कॉन्ग्रेस से होनी चाहिए, क्योंकि द्रविड़ आंदोलन का उद्देश्य जाति प्रथा को ख़त्म करने के साथ-साथ अंग्रेजों को भगाना था और हमें एक लक्ष्य पूरा होने की ख़ुशी मनानी चाहिए। उन्हें डर था कि कॉन्ग्रेस उनकी पार्टी को आज़ादी का विरोधी साबित करेगी। उस दिन DK के जिन लोगों ने स्वतंत्रता की ख़ुशी मनाई, वो अन्ना के ही समर्थक थे। तभी उन्हें अपनी अलग पार्टी बनाने और राजनीति में आकर चुनाव लड़ने के लिए प्रोत्साहन मिला। फिर 70 से अधिक की उम्र में 30 साल की लड़की से शादी ने पेरियार के रिश्ते अन्ना से जुदा कर दिए।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और ‘पर्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI)’ के अध्यक्ष रहे मार्कण्डेय काटजू कहते हैं कि पेरियार ने हमेशा अंग्रेजों की मदद की। उन्होंने लिखा है, “पेरियार चाहते थे कि भारत में अंग्रेजों का शासन चलता रहे। उनका मानना था कि आज़ादी के बाद देश को आर्य और उत्तर भारतीय चलाएँगे, इसीलिए उन्होंने उस दिन शोक दिवस मनाया। वो एक अलग ‘द्रविड़िस्तान’ चाहते थे, भारत से काट कर। उत्तर भारत को वो आर्यनस्तान कहते थे। उन्होंने 1956 मरीना बीच पर भगवान राम की तस्वीर जलाई।”
बाबसाहब भीमराव आंबेडकर: स्वतंत्रता को लेकर उनके विचार
बाबसाहब भीमराव आंबेडकर के भारत की स्वतंत्रता को लेकर क्या विचार थे, हमें ये भी जानना चाहिए। उनका कहना था कि सिर्फ राजनीतिक रूप से स्वतंत्र भारत ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों के पास बराबर के धार्मिक और राजनीतिक अधिकार होने चाहिए। सभी को आगे बढ़ने के बराबर मौके मिलने चाहिए। गणतंत्र दिवस से पहले दिए गए एक भाषण में उन्होंने शंका जताई थी कि क्या भारत आज़ादी को बरकरार रख पाएगा या फिर गुलाम हो जाएगा?
उन्होंने कहा था कि आज़ादी का मतलब इससे ज्यादा कुछ नहीं है कि एक राष्ट्र को खुद से अपनी सरकार बनाने का अधिकार मिलता है। उनके हिसाब से स्वतंत्रता कैसी है, इसका पता तभी चलेगा कि जब किस तरह की सरकार और समाज का यहाँ निर्माण हो रहा है। बकौल बाबासाहब, स्वतंत्रता का तब ज्यादा मोल नहीं रह जाता जब सरकार और समाज वैसा बन जाए, जिसके खिलाफ दुनिया भर में युद्ध छिड़ा हुआ है। उन्होंने ज्योतिबा फुले को कोट करते हुए अपनी पुस्तक ‘Who Were The Shudras’ में लिखा है कि भारत में विदेशी सत्ता से स्वतंत्रता से ज्यादा ज़रूरी है सामाजिक लोकतंत्र।
बाबासाहब भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि अभी भारतीयों का कोई राष्ट्र नहीं है और अभी तो उसे बनाना बाकी है। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि हम ये सोच कर कि हम एक राष्ट्र हैं, एक बड़े तिलिस्म में जी रहे हैं। उन्होंने पूछा था कि हजारों जातियों में बँटे लोग भला कैसे एक राष्ट्र हो सकते हैं? उन्होंने लोगों को जल्द से जल्द ये महसूस करने को कहा था कि हम सामाजिक और मानसिक रूप से एक राष्ट्र नहीं हैं। उन्होंने ‘फ्रीडम ऑफ माइंड’ को असली आज़ादी बताते हुए कहा था कि कोई व्यक्ति जंजीरों से जकड़ा हुआ नहीं हो, फिर भी उसका दिमाग आज़ाद नहीं हो तो वो ‘दास’ ही है, आज़ाद नहीं है।
जर्नल ‘Economic and Political Weekly’ के अनुसार, आंबेडकर मानते थे कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में इलीट वर्ग का दबदबा रहा है और वो इसे जातिवाद के रास्ते पर आगे ले जाएँगे। इसमें लिखा है कि वो स्वतंत्रता संग्राम के खिलाफ नहीं थे, लेकिन ‘कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले स्वतंत्रता संग्राम’ के खिलाफ थे, क्योंकि उनका मानना था कि इसमें दलितों को राष्ट्रनिर्माण में शामिल नहीं किया गया है। उनका कहना था कि राष्ट्रीय आंदोलन का लक्ष्य आधुनिक भारत का निर्माण होना चाहिए, जहाँ रूढ़िवादी सामाजिक विचारों के लिए कोई जगह न हो।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी तो कहते हैं कि बीआर आंबेडकर के स्वतंत्रता संग्राम की किसी भी गतिविधि में हिस्सा लेने के कोई सबूत हैं ही नहीं। उनका कहना है कि ऐसा कोई लेख या भाषण मौजूद ही नहीं है, जिसमें आंबेडकर भारत की आज़ादी की वकालत करते दिख रहे हों। अरुण शौरी ने कहा था, “हरिजनों ने ऐसा कोई आंदोलन शुरू नहीं किया है जिसमें उनकी माँग हो कि ब्रिटिश से तुरंत पावर ट्रांसफर कराया जाए। उन्होंने कहा था कि वो स्पष्ट करना चाहते हैं कि पिछड़े लोग इसके लिए हल्ला नहीं मचा रहे, न चिंतित हैं।”
वामपंथी दलों की आज़ादी को लेकर क्या रही है सोच?
चीन परस्त वामपंथियों की तो पूछिए ही मत। उनके लिए तो न तब आज़ादी और राष्ट्रीय प्रतीक चिह्नों का कोई मोल था, न अब है। उनके लिए न तब भारतीय सेना के लिए कोई इज्जत थी, न अब है। इस साल 2021 में स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के मौके पर प्रमुख वामपंथी दल CPI(M) ने अपने मुख्यालयों व दफ्तरों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगाँठ को एक आंदोलन में बदला, शायद उससे घबरा कर ही ये फैसला लिया गया था। या फिर राजनीतिक पतन ने उन्हें ये करने को मजबूर कर दिया हो।
एक कहानी आजादी से पहले की। जब 1941 में हिटलर ने USSR पर आक्रमण किया, तब मॉस्को ने भारतीय वामपंथियों को बताया कि असली युद्ध फासिज्म और ‘मित्र राष्ट्रों’ के बीच है। इसीलिए, उन्हें इस युद्ध में अंग्रेजों का समर्थन करने को कहा गया। विजय चौथवेल लिखते हैं कि इसके बाद अचानक से CPI हिटलर का विरोधी बन गया और उसने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ से भी दूरी बना ली। ग्रेट ब्रिटेन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPGP) ने भी CPI को एक पत्र भेजा था। इसमें उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ किसी भी प्रकार के विरोध को रोकने और युद्ध के लिए हथियारों व रसद के उत्पादन के लिए ट्रेड यूनियनों को एकजुट रखने का निर्देश दिया गया था।
हैरी पोलिट के इस पत्र को तब भारत में अंग्रेजों के गृह सचिव रेगीनाल्ड मैक्सवेल ने वामपंथी नेताओं को सौंपा था। इसके बाद अंग्रेजों ने CPI नेताओं को जेल से छोड़ा, उन्हें ट्रेड यूनियनों का नियंत्रण लेने दिया और इसे कानूनी वैधता भी प्रदान कर दी। उसी समय गंगाधर अधिकारी ने 1942 में ‘पाकिस्तान थीसिस’ पेश किया, जिसमें भारत के विभाजन का समर्थन किया गया। 1947 में आज़ादी मिलने के बाद भी CPI ने कभी इसे स्वीकार नहीं किया और पार्टी के वरिष्ठ नेता बीटी रणदिवे ने तब कहा था, “ये आज़ादी झूठी है।”
‘ये आज़ादी झूठी है’: वामपंथी नारे पर नाचने वाले आज आज़ादी के बलिदानियों को क्यों याद कर रहे?
ऐसा भी तो हो सकता है कि देश को खुले में शौच से मुक्त कर के, बिना किसी भेदभाव के सभी को आवास देकर, गाँव-गाँव में शत प्रतिशत बिजली पहुँचा कर, महिलाओं को मिट्टी से चूल्हे से मुक्ति देकर, शहरों को स्वच्छ बना कर, नदियों की स्वच्छता की कल्पना कर, सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण देकर, दलितों-OBC को सत्ता में प्राथमिकता देकर, रोज रिकॉर्ड किलोमीटर सड़कें बना कर, हर घर स्वच्छ जल पहुँचा कर और देश की संस्कृति को पुनर्जीवित कर नरेंद्र मोदी ही आज़ादी के नायकों के सपने का भारत बना रहे हों?
यही तो है ‘असली आज़ादी’, जो स्वतंत्रता के बलिदानियों के सपने का हो। आज़ाद भारत में कालापानी की सज़ा भुगत चुके स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने वाले जब आज आज़ादी की बातें करते हैं तो अच्छे नहीं लगते। ‘असली आज़ादी’ का मतलब सबके लिए अलग-अलग हो सकता है। आंबेडकर के लिए अलग था, पेरियार के लिए अलग था, वामपंथियों के लिए सब कुछ झूठा ही था और है। अगर किसी को अब लगता है कि सच्चे मायनों में आज़ादी मिली है तो दिक्कत क्या है?
बामसेफ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े व इन समुदायों के धर्मांतरित अल्पसंख्यकों के कर्मचारियों के अखिल भारतीय संगठन BAMCEF के एक सम्मलेन में संस्था के अध्यक्ष वामन मेश्राम ने कहा था कि पहले CPI नेता और बाद में ‘अम्बेडकराईट’ बने अण्णाभाऊ साठे ने भी इस आज़ादी को झूठा बताया था। इस भाषण में मेश्राम कहते हैं कि कैसे तब के ‘दलित चिंतकों’ के लिए ‘ब्राह्मणों से आज़ादी’ ज्यादा महत्वपूर्ण थी। जब ये सब कुछ FOE में आ सकता है, फिर कंगना रनौत का बयान ‘देशद्रोह’ कैसे?
उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मान्तरण का रैकेट चलाने के आरोप में एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए मौलाना कलीम सिद्दीकी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इस मामले में मुजफ्फरनगर जिले के चरथावल के रहने वाले अमित प्रजापति की शिकायत पर यूपी पुलिस ने आरोपित मौलाना के खिलाफ नया केस दर्ज किया है। अमित ने मौलाना समेत 6 लोगों पर उसका जबरन गोमांस खिलाने और धर्मान्तरण कराने का आरोप लगाया है। पीड़ित का आरोप है कि उसे 4 लाख रुपए का लालच भी दिया गया था। पुलिस ने धर्मान्तरण कानून के तहत केस दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है।
प्रजापति ने पुलिस को दी शिकायत में खुलासा किया है कि साल 2014 में एक फर्नीचर के शोरूम में वह हाजी सलीम नाम के एक व्यक्ति से मिला था। इसके बाद उसी साल मई में सलीम उसे फूलत मदरसा लेकर गया था। प्रजापति का कहना है कि मदरसे में मौलाना कलीम सिद्दीकी ने उसे कलमा सुनाने और इस्लाम कबूल करने को कहा। उसने 4 लाख रुपए कैश और उसकी पसंद की लड़की से निकाह का लालच देकर उसका धर्मान्तरण करवा दिया। धर्मान्तरण के बाद उसे अब्दुल्ला नाम दिया गया।
प्रजापति के मुताबिक, बाद में उसे महाराष्ट्र के जमात में ले जाया गया और वहाँ वह 40 दिनों तक रहा। जमात में उसे कलमा और नमाज पढ़ने की ट्रेनिंग देने के बाद देवबंद मदरसा भेज दिया गया। देवबंद में उसे उर्दू और अरबी सिखाई गई। बाद में उसे दूसरे लोगों का भी धर्मान्तरण कराने का लालच दिया गया। इतना ही नहीं अमित प्रजापति को 4 लाख रुपए दिए गए, जिससे उसने चरथावल में एक प्लॉट खरीद लिया।
पीड़ित ने पुलिस को अपनी शिकायत में कहा कि इसी साल 25 अक्टूबर 2021 को हाजी सलीम, दिलशाद, जाहिद मुल्ला, नौशाद छोटा, यामीन और इसरार प्रधान उससे मिलने के लिए आए थे। अपने साथ वे लोग टिफिन में गोमांस भी लेकर आए थे। अमित ने आरोप लगाया है कि जब उसने बीफ खाने से इनकार कर दिया तो आरोपितों ने उसके साथ मारपीट करते हत्या की धमकी दी।
पीड़ित के मुताबिक, सिद्दीकी समेत अन्य आरोपितों ने उसे दूसरे धर्मों के खिलाफ भड़काऊ बात कहने के लिए मजबूर किया और उसका वीडियो भी बना लिया। पीड़ित ने दावा किया कि वीडियो अभी भी सिद्दीकी के यूट्यूब चैनल अल्कलम पर मौजूद है।
पुलिस ने कथित तौर पर कार्रवाई में देरी की
अमर उजाला को दिए गए एक बयान के अनुसार, पीड़िता ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश में सामूहिक धर्मांतरण से जुड़े मामले में सिद्दीकी को पहले ही एटीएस द्वारा पकड़ा जा चुका है, इसके बावजूद पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करने में देरी की। पीड़ित ने बताया कि चरथावल थाना पुलिस ने दो दिन तक मामले को दबा कर रखा। जब इस मामले में हिंदू जागरण मंच ने अपनी आवाज बुलंद की तो पुलिस हरकत में आई और त्वरित जाँच का आश्वासन दिया।
मौलाना कलीम सिद्दीकी और धर्मांतरण रैकेट
इस साल सितंबर में पश्चिमी यूपी के सबसे बड़े मौलवियों में से एक और इस्लामिक विद्वान मौलाना कलीम सिद्दीकी धर्म परिवर्तन के आरोप में एटीएस ने गिरफ्तार किया था। पुलिस ने कहा था कि 64 वर्षीय इस्लामिक विद्वान जामिया इमाम वलीउल्लाह ट्रस्ट चलाता है, जो कई मदरसों को फंड करता है और इसके लिए उसे भारी विदेशी फंडिंग मिली थी।
दरअसल, यूपी एटीएस की टीम धर्मान्तरण मामले में मौलाना उमर गौतम और उसके सहयोगी की गिरफ्तारी के दौरान उनसे पूछताछ कर रही थी उसी दौरान इसका नाम सामने आया था। कथित तौर पर दोनों ने अपने अन्य सहयोगियों के साथ इस्लामिक दावा सेंटर (IDC) नाम का एक संगठन चलाया, ताकि लोगों को शादी, नौकरी और पैसे समेत दूसरे प्रलोभन देकर उनका धर्मान्तरण कराया जा सके।
बाद में अक्टूबर में सिद्दीकी की संपत्तियों पर एटीएस ने छापा मारा। जाँच एजेंसी ने राष्ट्रीय राजधानी में कई स्थानों पर की गई छापेमारी के दौरान डेस्कटॉप, टैबलेट और दस्तावेजों से आपत्तिजनक सबूत जब्त किए। नई दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में स्थित सिद्दीकी के आवास के साथ-साथ उसके संगठनों ग्लोबल पीस सेंटर और वर्ल्ड पीस ऑर्गनाइजेशन पर एक अब्दुल रहमान के आवास पर भी छापेमारी की गई।
बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत द्वारा देश की आजादी पर दिए गए बयान के ख़िलाफ़ आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रीति मेनन ने मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मेनन ने कंगना की टिप्पणी को देशद्रोह बताते हुए मुंबई पुलिस से उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने की माँग की है।
प्रीति ने अपने ट्वीट में शिकायत की कॉपी शेयर करते हुए लिखा, “टाइम्स नाऊ पर कंगना रनौत के देशद्रोही और भड़काऊ बयानों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हेतु मुंबई पुलिस को धारा 504, 505, और 124 ए के तहत शिकायत दी है। उम्मीद है मुंबई पुलिस कोई एक्शन लेगी।”
बता दें कि प्रीति मेनन के अलावा शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने, जितना खून, बलिदान बहाया, झांसी की रानी को लेकर, सब बेकार हैं, सिर्फ मालिक खुश होने चाहिए।”
The question asked was about Savarkar, but the response was on a different matter. Navika Kumar then followed up with a question about whether Kangana was expressing her loyalty to the BJP, and Kangana responded by saying she's a patriot. Here's the complete viral sequence. pic.twitter.com/zXwgnRBLOb
वहीं, सांसद वरुण गाँधी ने भी कंगना के बयान पर अपनी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था, “कभी महात्मा गाँधी जी के त्याग और तपस्या का अपमान, कभी उनके हत्यारे का सम्मान, और अब शहीद मंगल पांडेय से लेकर रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और लाखों स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों का तिरस्कार। इस सोच को मैं पागलपन कहूँ या फिर देशद्रोह?”
इसके बाद कंगना ने भी वरुण के इस ट्वीट पर पलटवार किया था। उन्होंन बताया कि उन्होंने स्पष्ट रूप से जिक्र किया था कि 1857 का युद्ध भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था जिसे दबा दिया गया, जिसके बाद अंग्रेजों और अत्याचार और क्रूरता की घटनाओं को अंजाम देना और तेज़ कर दिया। कंगना रनौत ने तंज कसते हुए कहा, “प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के लगभग एक सदी बाद हमें गाँधी के भीख के कटोरे में रख कर आज़ादी मिली। जा और रो अब।”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान के टोक्यो पैरा ओलम्पिक खेलों में पदक जीतने वाले खिलाडियों को सम्मानित किया। यह सम्मान समारोह मेरठ जिले में आयोजित हुआ। इस दौरान केंद्रीय खेलमंत्री अनुराग ठाकुर भी मौजूद रहे। उन्होंने योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद देते हुए ट्वीट भी किया है। उन्होंने लिखा है, “देश भर के पैरा एथलीटस् को उत्तर प्रदेश की खेलभूमि मेरठ में बुलाकर उन्हें सम्मानित करने, उनका मनोबल बढ़ाने व भविष्य के खिलाड़ियों को प्रेरित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हार्दिक आभार।”
देशभर के पैरा एथलीटस् को उत्तर प्रदेश की खेलभूमि मेरठ में बुलाकर उन्हें सम्मानित करने ,उनका मनोबल बढ़ाने व भविष्य के खिलाड़ियों को प्रेरित करने के लिए मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी का हार्दिक आभार… pic.twitter.com/wAzitF0ZPP
इस दौरान बड़ी संख्या में खिलाडी, खेल प्रेमी और आम जनमानस मौजूद रहे। इस आयोजन में प्रदेश के 75 जनपदों से 2078 दिव्यांग खिलाड़ियों ने भी हिस्सा लिया। CM योगी ने इस अवसर पर मेरठ में बन रही यूनिवर्सिटी का नाम दिवंगत हॉकी खिलाडी मेजर ध्यानचंद के नाम पर रखने की घोषणा की। इसी के साथ 19 पदक विजेताओं का भी सम्मान किया गया। यह कार्यक्रम मेरठ के सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय में 11 नवम्बर 2021 (गुरुवार) को आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री योगी ने इसकी जानकारी अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर साझा की है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पैराओलम्पिक में भाग लेने और पदक जीतने वाले नोएडा के जिलाधिकारी IAS सुहास एलवाई की भी तारीफ़ की। मुख्यमंत्री के अनुसार उन्होंने कोरोना के दौरान नोएडा में कार्यरत रहते हुए भी पदक जीता। इसी के चलते उन्हें पाँचवाँ वेतन आयोग भी देने का निर्णय लिया गया।
योगी आदित्यनाथ ने इस समारोह को सम्बोधित करते हुए भाजपा सरकार द्वारा खेलों और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के प्रयासों को गिनाया। उन्होंने मेरठ में बनने वाले खेलों के उत्पादों की सराहना की। मुख्यमंत्री के अनुसार उच्च गुणवत्ता का होने के चलते मेरठ में बनने वाले खेलों के सामानों की माँग पूरी दुनिया में है। उनके अनुसार पहले की सरकारों ने इन उपलब्धियों को नजरअंदाज किया। साल 2018 के बाद जो गति आई है वह बेहद सराहनीय है।
मुख्यमंत्री योगी ने सम्मान समारोह में मेडल जीतने वाले 17 खिलाड़ियों को मोदीपुरम स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय में 31 करोड़ रुपए देकर सम्मनित किया। टोकियो पैराओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को 2 करोड़ रुपए देने की घोषणा की। इसी के साथ रजत पदक विजेताओं को डेढ़ करोड़ रुपए तथा कांस्य पदक विजेताओं को 1 करोड़ रुपए मिलेंगे। इन खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देने वाले प्रशिक्षकों का भी मुख्यमंत्री ने सम्मान किया। प्रशिक्षकों को 10 लाख पुरस्कार देने की घोषणा की गई। साथ ही इस ओलम्पिक में भाग लेने वाले अन्य खिलाडियों को भी 25 – 25 लाख रुपए देने का ऐलान किया।
इस आयोजन की शुरुआत वन्देमातरम और भारत माता की जय के उद्घोष से हुई। इसी के साथ योगी आदित्यनाथ ने 1857 क्रान्ति में मेरठ के योगदान को भी याद दिलाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि भाजपा सरकार खेलों और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए पूरी तरह से संकल्पित है। मुख्यमंत्री ने टोक्यो ओलम्पिक में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन को अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बताया। मुख्यमंत्री ने कोरोना महामारी के बाद भी खिलाडियों द्वारा की गई मेहनत और उनके द्वारा हासिल सफलता को देश भर के लिए गौरव का विषय बताया।
मुख्यमंत्री ने एक जनपद एक उत्पाद योजना का जिक्र किया। इस योजना में उन्होंने मेरठ को खेलों का सामान बनाने के लिए उपयुक्त बताया। मेरठ में खेल यूनिवर्सिटी भी उन्होंने जल्द ही बनाए जाने का ऐलान किया। योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री मोदी की खेलों इंडिया खेलो और सांसद खेल प्रतियोगिता योजनाओं की प्रसंशा की। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं के फलस्वरूप देश भर से प्रतिभाओं को विश्व पटल पर आने का अवसर मिल रहा है।