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क्षेत्रीय दलों को आधे से अधिक चंदा ‘अज्ञात’ स्रोत से, ADR की रिपोर्ट से खुलासा: जगन-स्टालिन-चंद्रशेखर जैसे CM की पार्टी सबसे आगे

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट जारी की। इसमें खुलासा किया गया है कि वित्त वर्ष 2019-20 में क्षेत्रीय दलों को मिले चंदे का 55 फीसदी से अधिक हिस्सा ‘अज्ञात’ स्रोतों से मिला था। इन स्रोतों का करीब 95 फीसदी हिस्सा यानि करीब 445 करोड़ रुपए से अधिक इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए मिले थे।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2019-20 में देशभर के 25 क्षेत्रीय दलों को 803.24 करोड़ रुपये का चंदा मिला था। इसमें से 445.7 करोड़ रुपए कहाँ से आए, इसका कोई हिसाब नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 426.233 करोड़ रुपए (95.616%) चुनावी बांड से आए, तो वहीं 4.976 करोड़ रुपए स्वैच्छिक दान से आए।

दक्षिण की पार्टियाँ लिस्ट में सबसे आगे

सबसे अहम बात ये है कि के चंद्रशेखर राव की तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS), चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जगनमोहन रेड्डी की पार्टी YSR कॉन्ग्रेस, एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK और देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली JDS अज्ञात स्रोतों से चंदा पाने वाले क्षेत्रीय दलों की सूची में सबसे ऊपर हैं।

इसमें से TRS को 89.158 करोड़ रुपए का चंदा ‘अज्ञात’ स्त्रोतों से मिला। इसके अलावा TDP को 81.694 करोड़ रुपए, YSR कॉन्ग्रेस पार्टी को 74.75 करोड़ रुपए, नवीन पटनायक की BJD को 50.586 करोड़ रुपए और DMK को 45.50 करोड़ रुपए को चंदा अज्ञात स्त्रोतों से मिला।

ज्ञात लोगों ने कुल दान का केवल 22.98% दिया

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि इन क्षेत्रीय दलों को 184.623 करोड़ रुपए का चंदा ज्ञात दानकर्ताओं द्वारा दिया गया, जो कि कुल चंदे का 22.98 फीसदी है। बता दें कि ये वो लोग हैं जिनका रिकॉर्ड चुनाव आयोग के पास उपलब्ध है। इसके अलावा 21.1 फीसदी यानी 172.843 करोड़ रुपए सदस्यता शुल्क, बैंक ब्याज, प्रकाशनों की बिक्री, पार्टी लेवी आदि जैसे ज्ञात स्त्रोतों से मिले।

23 क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का विश्लेषण करने के बाद 2018-19 के लिए भी इसी तरह के आँकड़े दर्ज किए गए हैं।

डोनर्स की लिस्ट सार्वजनिक करने की माँग

एडीआर के प्रमुख मेजर जनरल अनिल वर्मा (सेवानिवृत्त) ने News18 से बात करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को डोनर्स द्वारा दिए गए चंदे की लिस्ट को सार्वजनिक करना चाहिए। संगठन ने कहा, “चूँकि राजनीतिक दलों की आय के एक बहुत बड़े हिस्से के मूल दाताओं का पता नहीं होता, इसलिए सभी दाताओं की पूरी जानकारी को आरटीआई के तहत उपलब्ध कराया जाना चाहिए।” इसमें आगे कहा गया है कि विदेशी फंडिग पाने वाले किसी भी संगठन को किसी उम्मीदवार या पार्टी का समर्थन करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है, “सभी दान के भुगतान का तरीका (20,000 रुपये से ऊपर), कूपन की बिक्री से आय, सदस्यता शुल्क आदि को पार्टियों द्वारा ऑडिट रिपोर्ट में बताया जाना चाहिए और इसे आयकर विभाग और चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए।”

डोनर्स नाम उजागर करने को तैयार नहीं

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) समेत कई दलों के नेताओं का कहना है कि ‘अज्ञात’ चंदा ज्यादातर ऐसे संगठनों या व्यक्तियों द्वारा दिया जाता है, जो सार्वजनिक रूप से अपना नाम नहीं बताना चाहते हैं।

इन पार्टियों का कहना है कि राजनीतिक दल चुनाव आयोग को ‘छुपाए नाम’ के बारे में बताते हैं। एनसीपी नेता मजीद मेमन ने कहा, “यदि फंड के मैनेजमेंट में कहीं कोई गड़बड़ी होती है तो चुनाव आयोग या राज्य चुनाव आयोग इसे राजनीतिक दलों के सामने उजागर कर सकता है।” हालाँकि, एडीआर प्रमुख ने पारदर्शिता से बचने के लिए इसे ‘सुविधाजनक कारण’ बताते हुए उनके बयानों को खारिज कर दिया।

बिना पैन विवरण के मिले 25 करोड़ रुपये से अधिक

अक्टूबर में जारी एक अन्य रिपोर्ट में एडीआर ने खुलासा किया था कि 16 से अधिक क्षेत्रीय दलों ने ऐसे 1026 चंदे (लगभग 25 करोड़ रुपये) प्राप्त किये, जिनके पैन कार्ड के विवरण नहीं थे। रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि शिवसेना, AIADMK, आम आदमी पार्टी, बीजेडी और वाईएसआर-सी जैसी पार्टियों ने साल 2019-20 में सबसे अधिक चंदा पाने की जानकारी दी थी। इतना ही नहीं, AAP और समाजवादी पार्टी को 2018-19 और वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान दान से होने वाली आय में जबरदस्त वृद्धि हुई।

एडीआर क्या है?

एडीआर की वेबसाइट पर बताया गया है कि ADR की स्थापना साल 1999 में इंडियन इस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM), अहमदाबाद के प्रोफेसरों ने मिलकर की थी। एडीआर ने उसी वर्ष दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के आपराधिक, वित्तीय और शैक्षिक रिकॉर्ड का खुलासा करने की माँग की थी।

इसी के आधार पर 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए चुनाव आयोग के समक्ष हलफनामा दाखिल कर अपनी आपराधिक, वित्तीय और शैक्षिक पृष्ठभूमि का के बारे में जानकारी देना अनिवार्य कर दिया था।

MP में बैन हो सकती है सलमान खुर्शीद की किताब, गुलाम नबी ने भी बताया गलत: कॉन्ग्रेस नेता ने ‘हिंदुत्व’ को बताया था ‘ISIS’ जैसा

अपनी किताब में हिंदुत्व की तुलना ISIS और बोको हराम जैसे आतंकी संगठन से करने के बाद कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद को जगह-जगह से लताड़ लग रही है। उनकी खुद की पार्टी के नेता गुलाम नबी आजाद ने उन्हें तथ्यात्मक तौर पर गलत कहा है। वहीं मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने उनकी किताब राज्य में बैन करने की बात कही है। उधर भाजपा नेता राम कदम ने सैंकड़ों हिंदुओं की भावना को ठेस पहुँचाने पर खुर्शीद के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दी है।

यहाँ बता दें कि ‘सनराइज ओवर अयोध्या: नेशनहुड इन ऑवर टाइम्स’ किताब में कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने हिंदुत्व को लेकर विवादित बात लिखी है। ऐसे में में गुलाम नबी आजाद ने ट्वीट किया, “हम भले ही हिंदुत्व को हिंदू धर्म की मिलीजुली संस्कृति से अलग एक राजनीतिक विचारधारा मानकर इससे असहमति जताएँ, लेकिन हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और जेहादी इस्लाम से करना तथ्यात्मक रूप से गलत और अतिशयोक्ति है।”

वहीं नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया में कहा,  “ये बेहद निंदनीय पुस्तक है। दरअसल, हिंदुओं को खंडित करने का, उन्हें जाति में बाँटने का, अपने भारत देश को खंडित करने का,  ये लोग कोई मौका छोड़ते ही नहीं। भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाल्लाह कहने वालों के पास सबसे पहले राहुल गाँधी गए थे। वो वही विचार है जिसे सलमान खुर्शीद आगे बढ़ा रहे हैं। महान भारत नहीं, बदनाम भारत है जो कमलनाथ ने कहा था वो भी उसी (विचार) का हिस्सा है। कैसे भी देश जातियों में बँट जाए। हिंदुत्व के टुकड़े हों और इसीलिए हमारी आस्था पर प्रहार करने का कभी कोई अवसर नहीं छोड़ा जाता है। इस हिंदुत्व के बारे में सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि हिंदुत्व एक जीवन पद्धति है, उस पर भी उन्होंने सवाल उठा दिया है। अब सोनिया गाँधी इस बात को स्पष्ट करें कि वो किसके साथ हैं। मैं विशेषज्ञों से राय लूँगा और मध्यप्रदेश में इस किताब को बैन करेंगे।”

वहीं भाजपा नेता राम कदम ने अपना ट्वीट करके जानकारी दी कि वो सलमान खुर्शीद की गिरफ्तारी के लिए अपनी शिकायत दे चुके हैं। उन्होंने कहा, कॉन्ग्रेस  नेता सलमान खुर्शीद तथा राशिद अल्वी ने हिन्दू समाज की भावनाओं को आहत  किया। इस कारण उन्हें गिरफ़्तार करके उनपर FIR दर्ज करने की माँग घाटकोपर पुलिस ठाणे में की। यदि  FIR दर्ज नहीं हुई तो वह कोर्ट में जाएँगे।

बता दें कि खुर्शीद की किताब में कही गई बात के कारण उनके ऊपर दिल्ली पुलिस में भी शिकायत की गई है। सलमान खुर्शीद के ख़िलाफ़ दिल्ली के पुलिस कमिश्नर से शिकायत करने वाले वकील का नाम विवेक गर्ग है। इनके अलावा विनीत जिंदल ने भी खुर्शीद के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दी है। शिकायतकर्ता विनीत जिंदल की माँग है कि सलमान खुर्शीद पर 153, 153 A, 298 और 505 (2) के तहत मुकदमा चलाया जाए। 

‘मोहतरमा मलाणा क्रीम लेकर ज्यादा बोल रही हैं’: नवाब मलिक ने कहा- कंगना का पद्मश्री वापस ले केंद्र, करे गिरफ्तार

महाराष्ट्र की उद्धव सरकार के मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक आजकल अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। क्रूज ड्रग्स केस में आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद से शायद ही कोई ऐसा दिन बीता हो जब उन्होंने ड्रग्स की बात न की हो। अब उन्होंने अभिनेत्री कंगना रनौत के आजादी वाले बयान को भी ड्रग्स से ही जोड़ दिया है। साथ ही उनसे पद्मश्री वापस लेने और उनकी गिरफ्तारी की भी डिमांड केंद्र सरकार से की है।

मलिक ने कहा है, “हम अभिनेत्री कंगना रनौत के बयान की कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान किया है। केंद्र को उनसे पद्मश्री वापस लेना चाहिए और उन्हें गिरफ्तार करना चाहिए।” उन्होंने कहा, “मोहतरमा मलाणा क्रीम लेकर ज़्यादा बोल रही हैं। मलाणा क्रीम (हशीश- एक विशेष किस्म की ड्रग्स, जो हिमाचल में उगती है) का डोज ज्यादा हो गया है इसलिए उल-जुलूल की बातें कर रहीं हैं। हम माँग करते हैं कि केंद्र सरकार कंगना रनौत का पद्मश्री वापस ले।”

नवाब मलिक के साथ ही कई पार्टियों के नेता भी कंगना के इस बयान को लेकर उनकी आलोचना कर चुके हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रीति मेनन मुंबई पुलिस से शिकायत कर इस मामले में FIR दर्ज करने की माँग कर चुकी हैं। कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने कंगना रनौत को मानसिक बीमार की संज्ञा दी थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्बोधित कर ट्वीट किया था, “मोदी सरकार ने मानसिक बीमार कंगना रनौत को पद्मश्री देकर संविधान, जनतंत्र और स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान किया है। पद्मश्री छीनकर इस पागल को गिरफ़्तार किया जाए।”

वहीं शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने, जितना खून, बलिदान बहाया, झांसी की रानी को लेकर, सब बेकार हैं, सिर्फ मालिक खुश होने चाहिए।” सांसद वरुण गाँधी ने भी कंगना के बयान पर अपनी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था, “कभी महात्मा गाँधी जी के त्याग और तपस्या का अपमान, कभी उनके हत्यारे का सम्मान, और अब शहीद मंगल पांडेय से लेकर रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और लाखों स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों का तिरस्कार। इस सोच को मैं पागलपन कहूँ या फिर देशद्रोह?” कंगना रनौत ने भी इस पर पलटवार किया था। बता दें कि कंगना रनौत पर आरोप है कि उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था कि 1947 में जो आज़ादी मिली वो भीख थी, देश को असली स्वतंत्रता तो 2014 में मिली।

डॉक्टर सुसाइड केस: AAP विधायक जारवाल के खिलाफ आरोप तय, पानी टैंकर के लिए की जाती थी वसूली

दिल्ली की एक अदालत ने डॉक्टर द्वारा की गई आत्महत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक प्रकाश जारवाल और उनके सहयोगी कपिल नागर के खिलाफ आरोप तय किया। कोर्ट ने गुरुवार (11 नवंबर 2021) को इन पर डॉक्टर को आत्महत्या के लिए उकसाने, धमकाने और जबरन वसूली के आरोप तय किए हैं। अदालत ने कहा इनके खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं।

बता दें कि डॉ. राजेंद्र सिंह ने 18 अप्रैल, 2020 को दक्षिणी दिल्ली के दुर्गा विहार में आत्महत्या कर ली थी। राजेंद्र सिंह ने सुसाइड नोट में जारवाल को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया था। जारवाल को आत्महत्या के लिए उकसाने और जबरन वसूली का मामला दर्ज करने के बाद गिरफ्तार किया गया था।

अदालत की विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने जारवाल और नागर के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 386 (किसी व्यक्ति को मौत या गंभीर चोट के डर में डालकर जबरन वसूली), 384 (जबरन वसूली), 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप तय किए। हालाँकि, कोर्ट ने एक अन्य आरोपित हरीश के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 और 386 के तहत लगे आरोप को खारिज कर दिया और आईपीसी की धारा 506 के तहत आरोप तय किया।

अदालत ने कहा, “प्रथम दृष्टया यह बताने के लिए पर्याप्त सामग्री है कि आरोपित प्रकाश जारवाल और कपिल नागर ने मृतक डॉ. राजेंद्र सिंह को दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) में टैंकरों को चलाने के लिए पैसे का भुगतान नहीं करने पर उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी देकर जबरन वसूली की।”

मृतक के बेटे हेमंत सिंह की शिकायत पर FIR दर्ज की गई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके पिता राजेंद्र सिंह 2005 से टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति का काम कर रहे थे। आरोपित प्रकाश जारवाल जीतकर आम आदमी पार्टी के विधायक बने। इसके बाद प्रकाश जारवाल, कपिल नागर और अन्य लोग नियमित रूप से उनके पिता को पैसे के लिए परेशान करने लगे।

उल्लेखनीय है कि मृतक डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के पास से पुलिस ने सुसाइड नोट के अलावा एक डायरी भी बरामद की थी, जिसमें लिखा था, “मेरा इस इलाके में एक क्लीनिक है और मेरे कुछ वाटर टैंकर दिल्ली जल बोर्ड में किराए पर चलते थे, लेकिन एमएलए प्रकाश जारवाल और उसका सहयोगी कपिल नागर मुझसे हर टैंकर के हिसाब से पैसे माँगने लगे। कुछ पैसे दिए भी गए, लेकिन बाद में मेरे सभी टैंकर प्रकाश जारवाल ने दिल्ली जल बोर्ड से हटवा दिए।”

सुसाइड नोट में लिखा था, “टैंकरों को दिल्ली जल बोर्ड से हटवाने के बाद जब उन्हें ओखला के दिल्ली जल बोर्ड में लगवाया गया तो टैंकरों को वहाँ से भी प्रकाश जारवाल द्वारा हटवा दिया गया।” सुसाइड नोट के अनुसार, जारवाल और उनके सहयोगी से उन्हें जान से मारने की धमकी भी मिल रही थी और इस कारण उनका जीना मुश्किल हो गया था।

दिल्ली पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर आप विधायक प्रकाश जारवाल, कपिल नगर और अन्य के खिलाफ जबरन वसूली और आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया था। बता दें कि हाल ही में दिल्ली के मुख्य सचिव रहे अंशु प्रकाश से कथित मारपीट मामले में अंशु प्रकाश के वकील ने कोर्ट से अमानतुल्लाह खान और प्रकाश जारवाल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 506 सहित अतिरिक्त आरोप तय करने का अनुरोध किया।

रेसलर निशा हत्याकांड: मुख्य आरोपित कोच पवन और साथी सचिन को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने द्वारका से किया गिरफ्तार

हरियाणा के सोनीपत निवासी पहलवान निशा और उनके भाई सूरज की हत्या के आरोप में कोच पवन और सचिन को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने की है। हत्या के बाद से ही दोनों आरोपित फरार चल रहे थे। इन पर हरियाणा पुलिस ने 1 लाख रुपए का इनाम भी रखा था। यह गिरफ्तारी दिल्ली के द्वारका इलाके से की गई है। दोनों आरोपितों की गिरफ्तारी 12 नवम्बर 2021 (शुक्रवार) को होना बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आरोपित पवन के पास से लाइसेंसी पिस्टल भी बरामद कर ली गई है। निशा की हत्या करके पवन बाईक से फरार हो गया था। इस काम में उसकी मदद गिरफ्तार किए गए दूसरे आरोपित सचिन ने की थी। हत्यारोपित पवन पिछले 4 साल से निशा को कुश्ती सिखा रहा था। निशा के परिवार वालों का आरोप है कि वह निशा पर गंदी नजर रखता था। इसी के साथ वह मृतका के साथ अक्सर छेड़खानी किया करता था। जब निशा ने इसका विरोध किया तब उसने निशा की हत्या कर दी।

निशा सोनीपत के हलालपुर गाँव के बाहर स्थित सुशील कुमार कुश्ती एकेडमी में ट्रेनिंग ले रही थीं। निशा की हत्या गोली मार कर की गई थी। बाद में दुस्साहसिक रूप से आरोपितों ने उसके घर फोन कर शव को वहाँ से ले जाने को कहा था। घटना की जानकारी होने पर जब पीड़िता की माँ और उसका भाई मदद के लिए पहुँचे तो आरोपितों ने उन पर भी जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में निशा के छोटे भाई सूरज की मौत हो गई थी। बुरी तरह से घायल निशा की माँ का इलाज पीजीआई रोहतक में इलाज चल रहा है।

इस घटना के बाद लोगों में थोड़े समय भ्रम की स्थिति रही। निशा नाम से कई लोगों को ओलम्पिक मेडलिस्ट पर हमले का शक हुआ। कई मीडिया संस्थानों ने भी इसी प्रकार की भ्रामक खबर प्रसारित कर दी थी। यद्द्पि बाद में सोनीपत पुलिस और खुद निशा दहिया ने सामने आ कर स्थिति को साफ किया। इसके बाद लोगों को यह जानकारी हो पाई कि जिस निशा की हत्या हुई वह एक नवप्रवेशी कुश्ती खिलाडी थी। मृतका निशा के पिता दयानंद ने बताया कि उनकी बेटी ने यूनिवर्सिटी स्तर पर एक मेडल जीता था। इस पुरस्कार की राशि निशा ने अपने कोच को दे दी थी।

PM मोदी ने लॉन्च की RBI की 2 योजनाएँ, जानें आम जनता को कैसे मिलेगा घर बैठे फायदा: बताया- 7 साल में 19 गुणा बढ़ी डिजिटल ट्रांजेक्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (नवंबर 12, 2021) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की दो नई स्कीम्स को लॉन्च किया है। इनका नाम RBI रिटेल डायरेक्ट स्कीम और रिजर्व बैंक इंटिग्रेटेड ओंबड्समैन स्कीम है। पीएम ने बताया कि इन स्कीमों से आम लोगों को निवेश का एक सुक्षित और आसान माध्यम मिलेगा। वहीं देश में निवेश के दायरे का विस्तार होगा। इससे बड़े से छोटे निवेशक कैपिटल मार्केट को सरलता से एक्सेस कर पाएँगे। साथ ही पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता भी आएगी।

RBI रिटेल डायरेक्ट स्कीम के तहत, रिटेल निवेशक सरकारी सिक्योरिटीज में पैसा लगा सकेंगे। उन्हें भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा जारी सिक्योरिटीज में सीधे निवेश करने का एक नया रास्ता मिलेगा। इस स्कीम के तहत, निवेशक RBI के साथ, आसानी से सरकारी सिक्योरिटीज अकाउंट को ऑनलाइन मुफ्त में खोल सकते हैं।

वहीं रिजर्व बैंक- इंटिग्रेटेड ओंबड्समैन स्कीम का मकसद RBI द्वारा रेगुलेटेड इकाइयों के खिलाफ ग्राहकों की शिकायतें के समाधान की बेहतर व्यवस्था मिलेगी। ये योजना वन नेशन-वन ओंबड्समैन पर आधारित है। इस योजनाओं में ग्राहकों को शिकायत करने के लिए एक पोर्टल, एक ईमेल और एक एड्रेस की सुविधा दी गई है। इसके अलावा शिकायतकर्ताओं को अपनी परेशानी बताने के लिए, दस्तावेजों को जमा कराने के लिए और फीडबैक देने के लिए एक जगह मिलेगी। इसके साथ एक हर समस्या के समाधान और उसकी शिकायत दर्ज कराने के लिए कई भाषाओं में एक टोल फ्री नंबर भी मिलेगा।

पीएम ने कहा कि आरबीआई ने सामान्य नागरिक को मद्देनजर रखते हुए कई कदम उठाए और उसी क्रम में दोनों योजनाएँ मील का पत्थर साबित होंगी। पीएम ने कॉपरेटिव बैंकों के आरबीआई के दायरे में लाने की बात बताते हुए कहा कि अब गवर्नेंस में सुधार आ रहा है। डिपोजिटर्स के मन में इस प्रणाली के प्रति विश्वास मजबूत हो रहा है। पीएम ने पिछला समय याद दिलाया जब समाज के तमाम वर्गों के लिए बैंकिंग, पेंशन, इनंश्योरेंस की सुविधा दूर होती थीं लेकिन अब समय बदला है। आज 31 करोड़ रुपए से ज्यादा के RUPAY कार्ड ने देश के कोने-कोने में डिजिटल ट्रांजैक्शन को संभव बनाया है। UPI ने भारत को डिजिटल ट्रांजैक्शन में अग्रणी बना दिया है। UPI के माध्यम सिर्फ 7 सालों में भारत ने डिजिटल ट्रांजेक्शंस के मामले में 19 गुणा की छलांग लगाई है। आज 24 घंटे, सातों दिन और 12 महीने देश में कभी भी, कहीं भी देश का बैंकिंग सिस्टम चालू रहता है।

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने 3 और आतंकी मार गिराए, इस साल अब तक 133 को किया ढेर

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों ने बीते 24 घंटे में 3 आतंकियों को ढेर किया है। कुलगाम में हुई मुठभेड़ में दो और श्रीनगर एनकाउंटर में एक आतंकी मारा गया। इनके पास से AK-47 समेत कई हथियार और गोला-बारूद भी बरामद हुआ है। कई आपत्तिजनक सामग्री भी मिली है।

कुलगाम मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादियों की पहचान हिजबुल मुजाहिदीन के जिला कमांडर शिराज मौलवी और यावर भट के रूप में हुई है। शिराज 2016 से सक्रिय था। वह युवाओं की आतंकी भर्ती और कई नागरिकों की हत्या में शामिल था। कश्मीर जोन के आईजीपी विजय कुमार ने बताया है कि अन्य आतंकियों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

इससे पहले श्रीनगर में हुए मुठभेड़ में आमिर रियाज को सुरक्षा बलों ने मार गिराया था। वह आतंकी संगठन मुजाहिदीन गजवतुल हिंद का सदस्य था। आईजीपी विजय कुमार ने बताया कि आमिर रियाज लेथपोरा आतंकी हमले के एक आरोपित का रिश्तेदार था। उसे आतंकी संगठन मुजाहिदीन गजवतुल हिंद ने फिदायीन हमले को अंजाम देने का काम सौंपा था।

कुलगाम में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ से पहले इलाके में फँसे कई स्थानीय परिवारों को सुरक्षित जगह पहुँचाया। पुलिस ने बताया कि नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने के बाद भी आतंकियों को आत्मसमर्पण का मौका दिया गया, लेकिन वह नहीं माने। इसके बाद दहशतगर्द को मार गिराया गया।

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर को दहलाने और आतंकी गतिविधियों को अंजाब देने के मंसूबे से आतंकियों की घुसपैठ लगातार हो रही है। लेकिन सुरक्षाबलों के चौकस जवानों की तत्परता आतंकियों के खतरनाक मंसूबों पर भारी पड़ रही है। आईजीपी विजय कुमार ने बताया कि इस साल कई टॉप कमांडरों समेत 133 आतंकियों को मार गिराया गया है।

‘एक शिया ने मुल्क की नाव डूबो दी’: ऑस्ट्रेलिया से हार के बाद पाकिस्तानियों ने हसन अली को दी माँ-बहन की गालियाँ

टी-20 विश्व कप 2021 के सेमीफाइनल मैच में गुरुवार (11 अक्टूबर 2021) को ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच भिड़ंत हुई, जिसमें पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा। इस मैच को हारने के बाद पाकिस्तानी क्रिकेट फैंस टीम के तेज गेंदबाज हसन अली को सोशल मीडिया पर ट्रोल कर रहे हैं और उन्हें गंदी-गंदी गालियाँ दे रहे हैं।

दरअसल, मैच के दौरान अली ने 4 ओवर गेंदबाजी की थी, जिनमें उन्होंने 44 रन लुटा दिए। मैच में अली के बॉल पर ऑस्ट्रेलियाई टीम की ओर से 4 चौका और 1 छक्का लगाया गया था। हर ओवर में 11 रन का इकॉनमी रेट लेकर चलने के बाद भी वह एक भी विकेट नहीं ले पाए। उन्होंने मैथ्यू वेड का कैच भी छोड़ दिया था, जिसके बाद पाकिस्तानी कप्तान बाबर आजम ने भी उन्हें खरी-खोटी सुनाई थी।

पाकिस्तानियों ने हसन अली को दी भद्दी-भद्दी गालियाँ

हसन से कैच छोड़ने को लेकर बाबर आजम ने कहा, “मैथ्यू वेड का कैच छूटना मैच का टर्निंग प्वॉइंट था। कैच नहीं छूटता तो एक नया बल्लेबाज आता और शायद एक अलग परिणाम होता। एक खिलाड़ी के रूप में आपको हमेशा एड़ी-चोटी का जोर लगाकर किसी भी अवसर का लाभ उठाना चाहिए।” बाबर आजम के इस कमेंट के बाद पाकिस्तानी क्रिकेट के फैंस ने हसन अली के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणियाँ कीं। मैच फिक्सिंग के आरोप लगाने के साथ ही उनकी अम्मी और बीवी को लेकर भद्दे कमेंट किए गए।

उनके हालिया इंस्टाग्राम पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर (@sibghat_._ullah) ने लिखा, “बहन*$ ना गेंदबाजी आती है और न ही बल्लेबाजी।” कबीर नाम के एक दूसरे यूजर ने भी भद्दी टिप्पणी की।

हसन अली के इंस्टाग्राम पोस्ट पर दी गई गालियाँ

जबकि एक यूजर ने तो मर्यादा की सीमाएँ लाँघते हुए अली को दलाल कहा तो दूसरे ने उसे ‘वेश्या का बेटा’ करार दिया। @aemmarmaaenu नाम के यूजर ने लिखा, “बीसी शाहनवाज दहानी तुझसे अधिक अच्छी गेंदबाजी कर सकता था। तुमने पूरे टूर्नामेंट में केवल अपनी गा*& ही मराई।”

हसन अली के इंस्टाग्राम पोस्ट पर दी गई गालियाँ

इसके अलावा कई अन्य पाकिस्तानी प्रशंसकों ने हसन अली की अम्मी और बहन को जमकर गालियाँ दीं। @raees_chase ने तो अली को पाकिस्तानी क्रिकेट टीम को छोड़ने को कह दिया।

हसन अली के इंस्टाग्राम पोस्ट पर दी गई गालियाँ

इसी क्रम में इंस्टाग्राम यूजर @seeker_io0 ने अली पर मैच फिक्सिंग का आरोप लगाते हुए पूछा कि ‘गद्दार’ मैच हराने के लिए ऑस्ट्रेलिया से कितने पैसे लिए?

हसन अली के इंस्टाग्राम पोस्ट पर दी गई गालियाँ

पाकिस्तानियों ने अली पर अपनी भारतीय बीवी को खुश करने के लिए फिक्सिंग का आरोप लगाया

हसन अली की बीवी सामिया आरजू भारतीय हैं, जिसको लेकर एक यूजर @mohammadfayaz ने अली पर आरोप लगाया कि अपनी बीवी को खुश करने के लिए उसने ऐसा किया। यूजर ने लिखा, “हसन अली की बीवी जीत गई और अब उसे अपनी माँ और बहन को भी एक रात के लिए भारत को दे देना चाहिए। मार$# जानबूझकर मैच हार गया।”

हसन अली के इंस्टाग्राम पोस्ट पर दी गई गालियाँ

अली को शिया होने के कारण बना रहे निशाना

पाकिस्तान सुन्नी मुस्लिम बहुल मुल्क है और वहाँ के लोग शिया मुस्लिमों को पसंद नहीं करते हैं। ऐसे में अगर कुछ गलत होता है तो पाकिस्तानी सुन्नी मुस्लिम शियाओं को कोसने से बाज नहीं आते। यही हुआ हसन अली के भी साथ। ऑस्ट्रेलिया से पाकिस्तान की अपमानजनक हार के बाद हसन अली के शिया होने के बारे में सोशल मीडिया पर चर्चा होने लगी।

हसन अली के इंस्टाग्राम पोस्ट पर दी गई गालियाँ
शिया होने के कारण हसन अली को किया जा रहा टार्गेट

एक यूजर ने लिखा, “हसन अली एक शिया है (कम से कम नाम से तो यही पता चलता है)। एक शिया ने पाकिस्तान की नाव को डुबा दिया।” एक ट्विटर यूजर ने अफसोस जताया, “हसन अली शिया हैं? और पाकिस्तान जीतना चाहता था?” सोशल मीडिया पर भले ही पाकिस्तानियों का गुस्सा दिख रहा हो, लेकिन टी-20 विश्व कप 2021 टूर्नामेंट के ग्रुप स्टेज मैचों में पाकिस्तान दुर्जेय टीम की तरह था। हालाँकि, ऑस्ट्रेलिया सेमीफाइनल मुकाबले को 5 विकेट से जीतकर फाइनल में पहुँचने में सफल रहा।

भारत बायोटेक की Covaxin है कोरोना से लड़ने में 77.8% प्रभावी: मेडिकल जर्नल The Lancet ने भी पाया पूरी तरह सुरक्षित

मेक इन इंडिया के प्रयासों को उस समय बहुत बड़ी मजबूती मिली जब द लैंसेट ने भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को कोरोना के विरुद्ध बेहद प्रभावी और कारगर माना। मेडिकल जर्नल द लैंसेट ने कोवैक्सीन को पूरी तरह से सुरक्षित भी बताया। द लैंसेट के अनुसार भारत बायोटेक की कोवैक्सीन 77.8% असरदार है। लांसेट ने अपने अध्ययन में कहा गया है कि कोवाक्सिन, जो कि इनएक्टिवेटेड वायरस तकनीक यानी असक्रिय वायरस को शरीर में भेजकर प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय करने की तकनीक पर काम करती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार द लैंसेट ने अपनी रिसर्च में पाया है कि दोनों खुराक के बाद कोवैक्सीन एक मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा करता है। इस प्रक्रिया में 2 सप्ताह का समय लगता है। अपनी रिसर्च के लिए मेडिकल जर्नल ने भारत में नवम्बर 2020 से मई 2021 के आँकड़ों का अध्ययन किया। इन आँकड़ों के अनुसार 18 से 97 वर्ष के आयु वर्ग के 24419 वॉलंटियर्स पर कोवैक्सीन के ट्रायल के दौरान मृत्यु या कोई अन्य गंभीर समस्या नहीं नोट की गई है।

कोवैक्सीन को भारत बायोटेक और इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च ने मिल कर तैयार किया है। द लैंसेट के अनुसार भारत निर्मित कोवैक्सीन कोविड- 19 के साथ-साथ डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ भी 65.2 प्रतिशत कारगर है। इसी के साथ गंभीर सिम्टोमेटिक कोविड-19 के विरुद्ध यह वैक्सीन 93.4 प्रतिशत तक प्रभावी है।

गौरतलब है कि इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत निर्मित कोवैक्सीन को आपातकालीन उपयोग सूची में शामिल कर लिया था। इसके फलस्वरूप भारत की वैक्सीन को मान्यता देने वाले देशों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ। लगभग 96 देश वर्तमान समय में भारत निर्मित कोवैक्सीन और कोवीशील्ड को मान्यता प्रदान कर चुके हैं।

NCPCR का सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट, हर्ष मंदर के ‘सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज’ सहित कई NGO को संदिग्ध स्रोतों से फंडिंग

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दायर कर बताया है कि देश भर में कई चिल्ड्रेन शेल्टर होम अवैध तरीके से चल रहे हैं और कुछ को संदिग्ध विदेशी संगठनों से फंडिंग हो रही है। आयोग ने 6 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में यह बात विदेशी योगदान नियमन अधिनियम (FCRA) के प्रावधानों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं के जवाब में कही।

संगठनों से फंडिंग पाने वाले NGO में हर्ष मंदर का ‘सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज (सीईएस)’ भी शामिल है। कोर्ट में दिए गए हलफनामे में NCPCR ने हर्ष मंदर के सीईएस समेत कई ऐसे NGO के बारे में बताया गया, जहाँ पैसे को डायवर्ट किया गया या फिर वो पैसा संदिग्ध स्रोतों से प्राप्त किए गए थे।

NCPR ने FCRA अधिनियम की धारा 7 को दी गई चुनौती के संबंध में यह जवाब दाखिल किया। दरअसल यह धारा विदेशी धन के हस्तांतरण को रोकती है। आयोग ने कोर्ट को बताया कि उसने यह हलफनामा एनजीओ द्वारा विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकने के प्रयास के तहत दायर किया है। इससे पहले जस्टिस खानविलकर, दिनेश माहेश्वरी और रवि कुमार वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने 9 नवंबर 2021 तक के लिए फैसले को सुरक्षित रख लिया था।

उल्लेखनीय है कि NCPCR ने हर्ष मंदर के NGO सीईएस द्वारा बनाए गए शेल्टर होम में बाल यौन शोषण और वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा किया था। आयोग ने कई बाल गृहों में छापा मारा था। इसके बाद इसी साल 20 फरवरी 2021 को दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने एनजीओ और अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। जाँच में पता चला था कि मंदर के सीईएस का FCRA रजिस्ट्रेशन है और वह विदेशी फंडिंग ले सकता है, लेकिन उसने जिस रेनबो फाउंडेशन इंडिया को पैसे दिए उसके पास पास FCRA पंजीकरण नहीं है।

इसी तरह, NCPCR ने मरकज-उल-मारीफ द्वारा असम और मणिपुर में संचालित 5 बाल गृहों का भी जिक्र किया है। आयोग ने बताया कि इन संस्थानों को सरकारी अनुदान के अलावा फॉरेन फंडिंग हो रही थी। इसके अलावा हलफनामे में धुबरी के मरकज दारुल यतामा होम का भी जिक्र किया है, जिसे तुर्की के IHH नामक संगठन से फंडिंग की गई। असम पुलिस ने मरकज दारुल यतामा फॉर बॉयज और होजई के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

पिछले साल भी NCPCR ने देशभर में गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संचालित 28,000 बच्चों वाले 600 से अधिक चाइल्ड शेल्टर होम्स में वित्तीय अनियमितता की आशंका व्यक्त की थी। आयोग ने बताया था कि इन आश्रय गृहों को 2018-19 में प्रति बच्चा 6 लाख रुपए विदेशों से मिले थे।