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योगी सरकार ने दी बड़ी राहतः कोरोना काल में दर्ज 3 लाख मुकदमे होंगे वापस, 90000+ किसानों को बर्बाद फसल का मुआवजा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के लोगों को मंगलवार (26 अक्टूबर 2021) को दो बड़ी राहतें दीं। एक तो आम आदमी पर कोरोना काल में दर्ज हुए तीन लाख से ज्यादा मुकदमों की वापसी का आदेश जारी कर दिया, दूसरी ओर बेमौसम बरसात और बाढ़ से बर्बाद फसलों का 90 हजार से ज्यादा किसानों को 35 जिलों में मुआवजा देने के लिए 30.54 करोड़ रुपए की धनराशि जारी की है।

योगी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए कोरोना काल में आम लोगों पर दर्ज लाखों अपराधिक मुकदमे वापस लेने का निर्णय लिया है। इससे संबंधित आदेश न्याय विभाग ने मंगलवार को जारी कर दिया। वर्तमान या पूर्व सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य इस दायरे से बाहर रखे गए हैं। इनके मामले में हाईकोर्ट की अनुमति से ही अलग से विचार किया जाएगा। 

कानून मंत्री बृजेश पाठक ने बताया कि कोविड -19 प्रोटोकाल व लॉकडाउन के उल्लंघन में दर्ज मुकदमें वापस लेने के लिए सभी जिला मजिस्ट्रेट से लिखित रूप से कहा गया है। अब अदालत में दर्ज हो चुके ऐसे मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यह पहली बार हुआ है कि एक निर्णय से इतनी बड़ी संख्या में मुकदमे वापस लिए जा रहे हैं।

इस बीच न्याय विभाग के प्रमुख सचिव प्रमोद कुमार श्रीवास्तव द्वितीय द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005, महामारी अधिनियम 1897 व आईपीसी की धारा 188 आदि में प्रदेश भर में तीन लाख से अधिक दर्ज मुकदमे, जिनमें आरोप पत्र दाखिल हो चुका है, वापस लेने की कार्यवाही शुरू की जाए।

असल में इस मामले में सरकार को यह कार्यवाही तीन महीने में पूरी कर अमल रिपोर्ट इलाहाबाद उच्च न्यायालय को देनी है। अगर इस तरह के मुकदमे वापस नहीं लिए जाएँगे तो संबंधित व्यक्ति को अदालत द्वारा अधिकतम दो साल की सजा देने व साथ ही जुर्माना लगाने का प्रावधान है। 

‘सच्चा इतिहास इन्हीं कोठरियों में’: नेशनल अवॉर्ड मिलने के बाद कालापानी पहुँचीं कंगना, वीर सावरकर सेल का किया दर्शन

बॉलीवुड की क्वीन कहे जाने वाली कंगना रनौत को चार बार नेशनल अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है। कंगना ने मंगलवार (26 अक्टूबर 2021) को अंडमान द्वीप पर स्थित काला पानी जेल में वीर सावरकर सेल का दौरा किया। उन्होंने इसकी तस्वीरें अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी शेयर की हैं। इसके साथ ही धाकड़ कंगना ने अपने देश के इतिहास को लेकर कहा, ”सच्चा इतिहास इन कोठरियों में ही है। किताबों में जो पढ़ाया जाता है, वो सच नहीं है।”

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, ”आज अंडमान द्वीप पहुँचने पर मैंने काला पानी, सेलुलर जेल, पोर्ट ब्लेयर में वीर सावरकर के कक्ष का दौरा किया। मैं अंदर तक हिल गई, जब अमानवीयता अपने चरम पर थी, लेकिन सावरकर जी के रूप में मानवता शीर्ष पर थी। उन्होंने आँखों में आँखे डालकर हर क्रूरता का मुकाबला दृढ़ संकल्प के साथ किया।”

‘थलाइवी’ फिल्म की एक्ट्रेस ने आगे लिखा, ”उन दिनों उनका कितना डर रहा होगा कि ना सिर्फ उन्हें काला पानी में रखा गया, बल्कि समंदर के बीचों बीच इस छोटी-सी कोठरी से निकलकर भागना असंभव रहा होगा, फिर भी उन्हें जेल की मोटी दीवारों के बीच जंजीरो में जकड़कर रखा गया। कल्पना कीजिए उस डर का कि अनंत समंदर के बीच कहीं हवा में गायब ना हो जाएँ। कितने कायर थे वो लोग। यह कोठरी आजादी का सच है, ना कि वो जो हमें किताबों में पढ़ाया जाता है।” अंत में उन्होंने कहा, ”मैंने कोठरी में देखा और वीर सावरकर जी के प्रति अपनी कृतज्ञता और गहरा सम्मान जताया। स्वतंत्रता संग्राम के इस सच्चे नायक को मेरा कोटि-कोटि नमन। जय हिंद।”

बता दें कि वीर सावरकर को जहाँ बंदी बनाकर रखा गया था कंगना आज जेल की उस कोठरी में पहुँची थीं। यहाँ वह सावरकर की तस्वीर के सामने नतमस्तक दिखाई दीं। एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम पर 7 तस्वीरें शेयर की हैं। इसमें जेल के अंदर की भी तस्वीर भी है। जिस सेल में सावरकर को रखा गया था, उसके बाहर एक पट्टिका लगी है, जिस पर लिखा गया है कि विनायक दामोदर सावरकर इस कोठरी में 1911 से 1921 तक रहे थे।

इधर कोयले की डिमांड उधर थर्मल पावर बंद करने की माँग: केजरीवाल सरकार ने लगातार लगाया केंद्र-राज्य संबंधों को पलीता

इस महीने देश में कोयले की कमी हुई। चूँकि कोयला केंद्र का विषय है इसलिए इस कमी का राजनीतिकरण भी किया गया। वक्तव्य वगैरह दिए गए। अलग-अलग मंचों पर उसकी चर्चा हुई और इस कमी से उभरने वाली संभावित परिस्थितियों को लेकर चिंता प्रकट की गई। ऊर्जा की कमी की वजह से लोगों का चिंतित होना स्वाभाविक है पर इस चिंता को व्यक्त करने के लिए जो वक्तव्य दिए गए उनमें से कुछ धीरे-धीरे शोर में परिवर्तित हो गए। जिन लोगों ने आने वाले संभावित संकट को लेकर शोर मचाया उनमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सबसे आगे थे। वैसे यह आश्चर्य की बात नहीं थी। केजरीवाल भारत के सबसे बड़े शोर मचाऊ मुख्यमंत्री हैं।


मानसून के बाद कोयले की कमी पावर सेक्टर के लिए सामान्य बात है। ऐसा हर वर्ष होता है। इस वर्ष मानसून के दौरान बारिश की अधिकता के कारण यह कमी सामान्य से अधिक रही। केंद्र सरकार की ओर से बार-बार आश्वासन के बावजूद कोयले की कमी को लेकर लगातार शोर मचाया गया। बाद में जब सरकारी कोयला कंपनियों की ओर से वक्तव्य आने लगे तब यह खुलासा हुआ कि कैसे बार-बार अनुरोध के बावजूद कुछ राज्य सरकारों ने अपने हिस्से का कोयला या तो उठाया नहीं या फिर सरकारी कोयला कंपनियों को बकाया राशि का भुगतान नहीं करने की वजह से नहीं उठा सके। इन खुलासों के बाद लगातार चल रहा शोर शांत हो गया।


सबसे दिलचस्प खुलासा दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी को लेकर हुआ। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष अक्टूबर में ही पार्टी ने दिल्ली और आस-पास के इलाकों में थर्मल पावर प्लांट बंद करवाने की माँग की थी। एक वर्ष पहले यह माँग करने वाले केंद्र सरकार द्वारा लगातार दिए जा रहे आश्वासन के बावजूद कोयले की कमी को लेकर शोर मचा रहे थे। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने तो इस कमी को ऑक्सीजन की कमी से तुलना करते समय यह भी भूल गए कि कैसे न्यायालय द्वारा ऑक्सीजन की ऑडिट की बात कहे जाने के बाद अचानक दिल्ली में ऑक्सीजन की उपलब्धता न केवल बढ़ गई थी बल्कि दिल्ली सरकार पड़ोसी राज्यों को ऑक्सीजन देने के लिए उतारू थी।

दिल्ली सरकार द्वारा ऑक्सीजन की कमी का शोर जब मचाया जा रहा था तब न केवल केंद्र सरकार बल्कि विशेषज्ञों के बातों की भी परवाह नहीं की गई थी। ठीक उसी तरह कोयले की तथाकथित कमी पर भी केंद्र सरकार के वक्तव्य और आश्वासनों को दरकिनार करके शोर मचाया गया और मंत्रियों द्वारा बयान जारी किए गए।

मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के द्वारा शोर मचाए जाने के बाद अब एक नया खुलासा हुआ है। एक रिपोर्ट के अनुसार कोयले की कमी पर शोर मचाने और ऊर्जा संकट की भविष्यवाणी करने के कुछ दिनों बाद ही दिल्ली सरकार ने पावर एक्सचेंज पर 635 मेगावॉट बिजली की बिक्री की। यह भी तब जब बिजली की बिक्री करने वाले अन्य राज्य जैसे पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ या ओड़ीसा की तरह दिल्ली के पास बिजली उत्पादन की सुविधा नहीं है। इन सबके ऊपर केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने राज्यों को यह हिदायत दी थी कि वे अपने यहाँ बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के बाद ही बिजली की बिक्री करें। दिल्ली में बिजली के सीमित उत्पादन को पावर एक्सचेंज पर बिजली की इस बिक्री के आड़े नहीं आने दिया गया।

ये खुलासे दिल्ली सरकार और उन्हें चलाने वालों के बारे में जो भी कहते हैं, अब यह किसी को आश्चर्यचकित नहीं करता। केजरीवाल जब से ‘दिल्ली के मालिक’ बने हैं, प्रदेश की समस्याओं के लिए उन्होंने केंद्र सरकार से लेकर पंजाब और हरियाणा सरकार तक को जिम्मेदार ठहराया है। प्रश्न यह है कि राजनीति क्या शासन का विकल्प हो सकता है? एक प्रश्न यह भी है कि सरकार में संवैधानिक पदों पर बैठे लोग जब इस तरह का आचरण करते हैं तब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न लोगों को कैसा सन्देश जाता है और उनके ऐसे बयानों का इस्तेमाल किस तरह से किया जाता है? यह समझना क्या असंभव है कि ऐसी घटनाओं, बयानों या आचरण में बाहर के लोग अपने-अपने तरीके से फॉल्ट लाइन खोजते होंगे ताकि उनका इस्तेमाल भारत के विरुद्ध किया जा सके?

आम आदमी पार्टी के नेताओं और दिल्ली सरकार के मंत्रियों के ऐसे आचरण से केंद्र सरकार के काम करने के तरीकों के प्रति लोगों के मन में भ्रम पैदा करने का काम बार-बार किया जा रहा है। पार्टी और उसके नेता जो आरोप पहले उप राज्यपाल के विरुद्ध इस्तेमाल करते हुए वहीं तक सीमित रखते थे वे सारे आरोप अब केंद्र सरकार के विभागों पर बड़ी आसानी से लगाए जाते हैं। केंद्र के विभागों और मंत्रालयों की प्रतिकूल कार्रवाई को बदले की भावना से किया जाने वाला बता दिया जाता है। बात-बात पर शासन और प्रशासन में राजनीति किए जाने से केंद्र-राज्य के संबंधों को जो नुकसान पहुँचता है उस पर न केवल बहस होनी चाहिए बल्कि उसका हिसाब भी किया जाना चाहिए। देश के संघीय ढाँचे की रक्षा और उसे सुदृढ़ करने के लिए यह आवश्यक है।

‘मुझे गोली मरवा सकते हैं लालू यादव’: RJD सुप्रीमो के पटना पहुँचने पर बोले CM नीतीश, की थी ‘विसर्जन’ की बात

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार (26 अक्टूबर 2021) को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, ”लालू उन्हें गोली मरवा सकते हैं।” दरअसल, नीतीश ने यह प्रतिक्रिया लालू यादव के सोमवार वाले बयान पर दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह दिल्ली से पटना नीतीश कुमार का विसर्जन करने आए हैं। इसको लेकर मुख्यमंत्री ने तीखे अंदाज में कहा, ”लालू कुछ और तो कर नहीं सकते हैं मगर उनको गोली जरूर मरवा सकते हैं।”

न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव ने सोमवार को कहा, ”मैं अस्वस्थ था और हिरासत में था, जिसकी वजह से मैं दो चुनावों में प्रचार नहीं कर पाया। लेकिन अब उपचुनाव हो रहे हैं और लोगों के प्यार के कारण मैं वापस आने में कामयाब रहा हूँ। इसलिए 27 अक्टूबर को मैं कुशेश्वर स्थान और तारापुर उपचुनाव सीटों पर जनता को संबोधित करूँगा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राज्य में सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के ‘विसर्जन’ को सुनिश्चित करेंगे।”

अक्सर विवादित बयान देकर सुर्खियों में बने रहने वाले लालू प्रसाद यादव ने हाल ही में कॉन्ग्रेस के प्रदेश प्रभारी भक्तचरण दास को ‘भकचोन्हर’ करार दिया था। जमानत पर जेल से छूटने के बाद पहली बार बिहार दौरे पर जा रहे लालू यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान यह बयान दिया था।

गौरतलब है कि इससे पहले लालू यादव ने कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन की बातों को नकार दिया था। उन्होंने कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन के सवाल पर कहा था, “अरे, बेकार की बात है। गठबंधन क्या होता है? क्या होता है कॉन्ग्रेस का गठबंधन? हारने के लिए उसे सीट दे देते हम? जमानत जब्त करवाने के लिए? भक्तचरण दास तो ‘भकचोन्हर’ है ही। उसे कुछ पता है क्या? मैं पटना जा रहा हूँ।” लालू यादव पर आरोप लगे हैं कि उन्हें स्वास्थ्य के आधार पर जमानत मिला है, इसीलिए वो चुनाव प्रचार नहीं कर सकते।

मुख़्तार अंसारी की बीवी के नाम पर बन रहा था शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, योगी सरकार ने किया कुर्क: ₹2.84 Cr की संपत्ति जब्त

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में जिला प्रशासन ने बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी पर बड़ी कार्रवाई की है। मुख्तार के निर्माणाधीन शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को कुर्क कर लिया गया है। पुलिस ने मंगलवार (26 अक्टूबर, 2021) दोपहर कुर्की से पहले निर्माणाधीन कॉम्प्लेक्स परिसर में मुनादी करवा कुर्की की कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की। यह निर्माणाधीन शॉपिंग काम्प्लेक्स मुख्तार की बीबी अफशा अंसारी के नाम था। शहर के लाल दरवाजा क्षेत्र में स्थित निर्माणाधीन काम्प्लेक्स की कीमत 2 करोड़ 84 लाख रुपए है।

सीओ सदर ओजस्वी चावला ने बताया कि प्रदेश में माफियाओं के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत जिलाधिकारी एमपी सिंह के आदेश पर गैंगस्टर एक्ट की धारा में कुर्क करने कार्रवाई की गई। कार्रवाई गैंग के लीडर मुख्तार अंसारी की बीबी मुहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के दर्जी मोहल्ला निवासी आफसा अंसारी के खिलाफ हुई है। यह कॉम्प्लेक्स सदर कोतवाली ड्योढी बल्लभदास मोहल्ले में 32 रकबा 1150 वर्ग मीटर भूमि में बन रहा था। कार्रवाई के दौरान सदर कोतवाल दीपेंद्र सिंह, सदर एसडीएम अनिरुद्ध प्रताप सिंह, नायब तहसीलदार सहित अन्य अधिकारी और पुलिसकर्मी मौजूद थे।

सीओ सिटी ओजस्वी चावला ने बताया कि मुख्तार अंसारी का नाम पुलिस रिकॉर्ड में आईएस 191 के गैंग लीडर के तौर पर दर्ज है। प्रशासन ने पिछले दिनों मुख्तार अंसारी की ससुराल में रखी विदेशी ब्रांड की कार और मुख्तार की बीबी के नाम पर लखनऊ में एक फ्लैट को भी कुर्क कर लिया था।

पूर्व में भी मुख्‍तार और अफ्शा की संपत्ति को कुर्क किया जा चुका है। दरअसल बाहुबली और उनके कुनबे के नाम पर काफी अवैध संपत्तियाँ पूर्वांचल सहित लखनऊ तक फैली हुई थीे। वहीं मुख्‍तार के करीबियों के पास भी काफी अवैध संपत्ति मौजूद थी, वह सभी बीते कुछ दिनों से कार्रवाई के दायरे में आए हैं। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई के बाद भी आने वाले दिनों में और कार्रवाई मुख्‍तार गिरोह से जुड़े लोगों पर ही जाएगी। जबकि लखनऊ में भी एक संपत्ति के लिए आजमगढ़ जिले की पुलिस कार्रवाई की तैयारी में है। जल्‍द ही वह संपत्ति भी कुर्क की जाएगी।

गौरतलब है कि पिछले दिनों खबर आई थी कि लखनऊ में माफिया मुख्तार के बेटों के नाम पर डालीबाग में बने मकान को गिराने के बाद अब मुख्तार की बीबी आयशा अंसारी की जमीन पर बने पेट्रोल पंप को बंद करने की तैयारी चल रही है। बताया गया कि इस पेट्रोल पंप का कोई भी एग्रीमेंट हिंदुस्तान पेट्रोलियम के पास नहीं है। इस पेट्रोल पंप को नियमों को दरकिनार कर बनाया गया है। एलडीए के अफसरों के मुताबिक पेट्रोल पंप करीब 8900 वर्ग फीट पर बना है और इसका एक हिस्सा मुख्तार अंसारी की बीबी के पास है। एलडीए की रिपोर्ट में पूरी जमीन के एक बड़े हिस्से की लीज भी खत्म हो गई है और इसका नक्शा भी प्राधिकरण से मंजूर नहीं है।

‘देशद्रोह से बड़ा कोई अपराध नहीं, J&K में दशकों से चल रहा छद्म युद्ध’: कोर्ट ने हिज्बुल के 4 आतंकियों को सुनाई सज़ा, की सख्त टिप्पणी

दिल्ली की एक अदालत ने हिज़्बुल मुजाहिद्दीन के 4 आतंकियों को सज़ा सुनाते हुए तल्ख़ टिप्पणी की है। पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष न्यायाधीश प्रवीन सिंह ने मोहम्मद शफी शाह और मुजफ्फर अहमद दार को 12-12 वर्षों की सज़ा सुनाई। वहीं तालिब लाली और मुस्ताक अहमद लोन को 10-10 साल की कड़ी सजा सुनाई गई। ये सभी IPC और UAPA की विभिन्न धाराओं में दोषी पाए गए। हिज़्बुल मुजाहिद्दीन को पाकिस्तान से लगातार फण्ड मिल रहा है और वो ‘कश्मीरी एफेक्टीज रिलीफ ट्रस्ट (JKART)’ बना कर अपने एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है।

इस दौरान अदालत टिप्पणी करते हुए कहा, “वो हाथ जो बन्दूक देते हैं और बंदूक उठाने के लिए उकसाते हैं, वो भी उतने ही दोषी हैं जितने ही उस बन्दूक से गोलीबारी करने वाले हाथ। आरोपित इस मामले में भले ही किसी प्रत्यक्ष आतंकी गतिविधि में चार्ज नहीं किए गए हों जिससे जानमाल की क्षति हुई हो, लेकिन जम्मू कश्मीर में कई दशकों से एक छद्म युद्ध चल रहा है। उसने कई जिंदगियाँ लील ली हैं और सरकारी संपत्ति को भी खासा नुकसान पहुँचाया है।”

अदालत ने पाया, “आरोपितों द्वारा किसी की हत्या या संपत्ति के नुकसान की बात साबित नहीं हुई है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि ये हत्याओं और सम्पत्तियों के नुक़सान के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। इन्होने जो टेरर फंडिंग की, उससे कई ज़िंदगियाँ चली गईं और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचा। पाकिस्तान में बैठे इनके आकाओं द्वारा चलाई जा रही फंडिंग से ही ये सब हो रहा है। अगर इस नेटवर्क द्वारा लॉजिस्टिक सपोर्ट न दिया जाए तो आतंकी गतिविधियाँ नहीं होंगी।”

लेकिन, अदालत ने माना कि इन आतंकियों द्वारा किए गए अपराधों की प्रकृति काफी गंभीर है, क्योंकि इन्होंने देश को जड़ से हिलाने की कोशिश की थी और सारी साजिश इसके लिए ही रची गई। मोहम्मद शादी शाह हिज्बुल मुजाहिद्दीन का डिविजनल कमांडर था। अदालत ने कहा कि देशद्रोह से बड़ा कोई अपराध नहीं हो सकता, क्योंकि इससे पूरी सामाजिक व्यवस्था प्रभावित होती है। इन आतंकियों को भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने, या युद्ध छेड़ने का प्रयास, या युद्ध छेड़ने के लिए उकसाने के लिए भी दोषी ठहराया गया।

‘मैं मुसलमानों से नहीं डरा, देवबन्द से नहीं डरा… तो दो कौड़ी के अधिकारियों से क्या डरूँगा’: नरसिंहानंद का वीडियो वायरल

अपने विवादित ​बयानों के कारण अक्सर विवादों में रहने वाले डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। ट्विटर पर शेयर किए गए वीडियो में नरसिंहानंद दो अफसरों के सामने कहते हैं, ”अभी तो मैं एक आदमी हूँ, तुम मुझे जेल में डालोगे में क्रांति बनूँगा और मेरी हत्या करवाओगे तो मैं विचार बनूँगा।” उन्होंने आगे कहा, “ये तो आपके डीएम साहब यहाँ आए थे, वो कहकर गए थे कि महाराज आप शांत रहना। इसलिए हमने एक भी बयान नहीं दिया। विधायक अजीत पाल त्यागी और नंद किशोर गुर्जर से पूछो जो ये कहने आए थे कि मुख्यमंत्री योगी जी का निवेदन है कि आप शांत रहिए।”

गुंडा एक्ट लगाने की प्रक्रिया से बौखलाए नरसिंहानंद ने कहा, ”मैं इन मुसलमानों से नहीं डरा, दारुल उलूम देवबन्द से नहीं डरा, सऊदी अरब से नहीं डरा तो मैं इन दो-दो पैसों में बिकने वाले दो कौड़ी के अधिकारियों से डरूँगा क्या?”

दरअसल, गाजियाबाद पुलिस ने नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ ‘गुंडा एक्ट‘ लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्हें हाल ही में जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर नियुक्त किया गया था। नरसिंहानंद पर मारपीट, हत्या की कोशिश, महिलाओं से अभद्रता जैसे कई आरोप हैं। वहीं दिल्ली के अलावा गाजियाबाद के विभिन्न पुलिस थानों में उनके खिलाफ 10 मामले दर्ज हैं।

बताया जाता है कि आए दिन मंदिर के परिसर में तरह-तरह की गैर-कानूनी गतिविधियाँ होती रहती हैं। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस की एक अस्थायी टीम को भी वहाँ तैनात किया गया है, लेकिन अराजकता के कारण हालात बदतर होते जा रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए महंत नरसिंहानंद के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि इसकी मंजूरी के लिए एसडीएम के पास फाइल भेजी गई है। इसकी मंजूरी मिलते ही आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

गौरतलब है कि यति नरसिंहानंद सरस्वती लगातार विवादों में बने रहते हैं। इसी साल अगस्त महीने में उन्होंने महिला नेताओं को रखैल करार दिया था। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में महंत यति नरसिंहाननद सरस्वती ने कहा था, “अब सरकारी ठेकों का रेट 10% हो गया है। जितनी भी भाजपा की महिला नेताएँ आपको दिखाई दे रही हैं, वो एक नेता के पास गईं और दूसरे के पास नहीं गईं तो दूसरा उनका काम नहीं करेगा। तीसरे से काम है तो तीसरे के पास जाना है। ये है राजनीति। पूरा मजा आ रहा है। इतनी महिलाएँ राजनीति में घूम रही हैं, पूरा मजा आ रहा है।”

लखीमपुर खीरी में BJP कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में गुरविंदर और विचित्र सिंह गिरफ्तार, दूसरे पक्ष पर हुई कार्रवाई

यूपी के लखीमपुर हिंसा में पुलिस ने अब दूसरे पक्ष के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी है। घटना के दौरान बीजेपी कार्यकर्ता की पीटकर हत्‍या करने के मामले में मंगलवार (26 अक्टूबर 2021) को दो प्रदर्शनकारियों विचित्र सिंह और गुरविंदर सिंह को गिरफ्तार किया गया है। इनको शुरुआती पूछताछ के लिए पुलिस लाइन में बने क्राइम ब्रांच के दफ्तर में लाया गया था, जहाँ से दोनों को जेल भेज दिया गया है। दोनों आरोपित लखीमपुर खीरी जिले के ही रहने वाले हैं।

जानकारी के मुताबिक गुरविंदर सिंह लखीमपुर के गोला इलाके के मोकरामऊ अलीगंज का निवासी है जबकि विचित्र सिंह इसी जिले के भीरा इलाके का रहने वाला है। हिंसा से जुड़े वीडियो वायरल होने के बाद विशेष जाँच दल ने विचित्र सिंह और गुरविंदर सिंह को पूछताछ के लिए बुलाया था। इन दोनों को बुधवार (27 अक्टूबर 2021) को कोर्ट में पेश किया जाएगा। दूसरे पक्ष की तरफ से, सुमित जायसवाल नामक व्यक्ति ने एफआईआर दर्ज कराई थी।

गौरतलब है कि किसानों की तरफ से दर्ज कराए गए एफआईआर में अभी तक 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा के अलावा बीजेपी सभासद सुमित जायसवाल के साथ-साथ अंकित दास, लतीफ उर्फ काले, शेखर भारती, शिशुपाल, सत्य प्रकाश त्रिपाठी, नंदन सिंह बिष्ट, आशीष पांडे, लवकुश राणा, मोहित त्रिवेदी, रिंकू राणा तथा धर्मेंद्र नामक आरोपित शामिल हैं। वहीं, दूसरे पक्ष की तरफ से ये पहली गिरफ्तारियाँ हुई हैं।

उल्लेखनीय है कि तीन अक्टूबर को लखीमपुर खीरी कांड में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हुई थी। इस मामले में दो मुकदमे दर्ज किए गए थे। एक मामले में आशीष मिश्रा और 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। वहीं, दूसरा मुकदमा अज्ञात लोगों के खिलाफ दो बीजेपी कार्यकर्ताओं समेत चार लोगों की पीट-पीटकर हत्या के आरोप में दर्ज किया गया था।

सुमित जायसवाल ने दूसरे मुकदमे में आरोप लगाया था कि प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच मौजूद कुछ अराजक तत्वों ने लाठियों और ईंट-पत्थरों से वाहन पर हमला किया जिसकी वजह से चालक हरिओम घायल हो गया और उसने सड़क के किनारे कार रोक दी। इसके बाद पत्रकार रमन कश्यप, कार चालक हरि ओम और बीजेपी कार्यकर्ताओं शुभम मिश्रा तथा श्यामसुंदर को प्रदर्शनकारियों ने पीट-पीटकर मार डाला।

जब पाकिस्तान ने गुजरात के द्वारका को बनाना चाहा था निशाना, नष्ट करने के लिए भेजे 7 जहाजों का नौसैनिक बेड़ा

7 सितंबर, 1965 वह तारीख है जब पाकिस्तानी सेना ने जम्मू-कश्मीर के भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर लिया था। भारतीय सेना भी पाकिस्तानी सेना को मुँहतोड़ जवाब दे रही थी। पाकिस्तान उत्तर पश्चिमी भारत में गुजरात के पवित्र हिंदू शहर द्वारका पर हमला करने के फिराक में था, दोनों देशों के बीच युद्ध अपने चरम पर था।

इधर सशस्त्र बल पंजाब और कश्मीर में लड़ाई में व्यस्त थे, उधर पाकिस्तान ने अपनी नौसेना तैनात कर दी। पाकिस्तानी नौसेना की इस छापेमारी की विस्तृत जानकारी संदीप उन्नीथन ने DailyO में प्रकाशित किया है।

द्वारका कराची से लगभग 200 किमी दूर स्थित है। पाकिस्तान के प्रमुख बंदरगाह शहर से इसकी नजदीकी के कारण, पाकिस्तानी नौसेना ने 7 नौसैनिक जहाजों का एक बेड़ा भेजा। इसमें एक हल्का क्रूजर (PNS Babur), और 6 विध्वंसक- पीएनएस खैबर, पीएनएस टीपू सुल्तान, पीएनएस बद्र, पीएनएस जहाँगीर, पीएनएस शाहजहाँ और पीएनएस आलमगीर शामिल थे।

द्वारका पर हमले के पीछे पाकिस्तान की साजिश

दिलचस्प बात यह है कि बेड़े का नाम उन सभी इस्लामी आक्रमणकारियों के नाम पर रखा गया था जिन्होंने हिंदुओं के खिलाफ क्रूर अत्याचार किए थे। पाकिस्तान उत्तरी मोर्चे से भारतीय वायु सेना (IAF) का ध्यान हटाना चाहता था और भारतीय नौसेना को अपने जहाजों को मुंबई (तब बॉम्बे) से द्वारका की ओर लाने के लिए मजबूर करना चाहता था। पाकिस्तानी नौसेना ने द्वारका में कथित रडार प्रणाली को नष्ट करने और अपनी पनडुब्बी, पीएनएस गाजी का उपयोग करके भारतीय जहाजों को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की।

पाकिस्तानी नौसेना मुख्यालय से एक संकेत भेजा गया था। इसमें लिखा था, “पीएनएस बाबर, पीएनएस खैबर, पीएनएस बद्र, पीएनएस जहाँगीर, पीएनएस आलमगीर, पीएनएस शाहजहाँ और पीएनएस टीपू सुल्तान का टास्क ग्रुप द्वारका लाइटहाउस से 120 मील की दूरी पर 071800 E सितंबर तक 239 डिग्री पर तैनात है।”

इसमें आगे कहा गया, “इसके बाद टास्क ग्रुप ने प्रति जहाज 50 राउंड का उपयोग करके लगभग आधी रात को द्वारका पर बमबारी की। फोर्स को 080030 E सितंबर तक बमबारी का काम खत्म करके पूरी गति से वर्तमान पेट्रोलिंग एरिया में वापस आना है। दुश्मन के हवाई खतरे के अलावा क्षेत्र में एक या दो दुश्मन युद्धपोतों के मुठभेड़ की उम्मीद की जा सकती है।” तत्कालीन कमोडोर एसएम अनवर की देखरेख में भयावह योजना को अंजाम दिया जाना था।

पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन द्वारका’ को बताया सफल

पाकिस्तानी दावों के अनुसार, उनके युद्धपोतों ने नौ गोले दागे, जिसने द्वारका में भारतीय नौसेना रडार स्टेशन के बुनियादी ढाँचे को नष्ट कर दिया। पाकिस्तानी सेना ने 13 भारतीय नाविकों और दो अधिकारियों के मारे जाने का भी दावा किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारतीय राडार प्रणाली का इस्तेमाल भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान पर हमला करने के लिए किया जाना था, जो कथित तौर पर पाकिस्तान के नौसेना के जहाजों द्वारा गोलाबारी के कारण ठप हो गया था।

एक सफल ऑपरेशन के रूप में ‘छापे’ की सराहना करते हुए, Parhlo ने लिखा, “द्वारका ऑपरेशन की सफलता का श्रेय देशभक्ति और बलिदान की उच्चतम भावना द्वारा चिह्नित कर्तव्य से परे राष्ट्र की सेवा करने के लिए अडिग भावना को दिया जाता है। हालाँकि युद्ध अनिर्णायक था, भारत को पाकिस्तान की तुलना में बहुत अधिक सामग्री और कर्मियों के हताहत होने का सामना करना पड़ा।”

इसके बाद पाकिस्तानी रेडियो स्टेशन ने भी फर्जी सूचनाओं को आगे बढ़ाने में आग में घी डालने का काम किया। इसने दावा किया कि पीएनएस बाबर ने द्वारका पर बमबारी की और उसे इस तरह क्षतिग्रस्त किया कि धुएँ का छल्ला 10 मील से दिखाई दे रहा था।

भारतीय सेना ने बताई असली कहानी 

घटना को याद करते हुए भारतीय वायुसेना के पूर्व सार्जेंट रमेश मदान ने लिखा, “मैंने अपनी घड़ी की ओर देखा। 8 सितंबर, 1965 की सुबह के 01:15 बज रहे थे। मैं अपने साथी से कुछ कहना चाह रहा था, तभी जोर से SWIIISHHH और बूम की आवाज आई। मेरे दोनों साथी और मैंने उस दिशा की ओर देखा लेकिन पहले बूम के बाद और अधिक SWIIIISHES और BOOMS की आवाज आई! यूनिट और शहर में हर कोई चारों ओर दौड़ रहा था। लोग इस गोलाबारी से बचने के लिए खाइयों में कूद रहे थे या जमीन पर गिर रहे थे।”

उन्होंने कहा कि 10 मिनट के बाद ही गोलाबारी बंद हो गई, जिसके बाद सभी खाइयों से बाहर निकल गए। अपने परिवार को लिखे पत्र में, सार्जेंट रमेश मदान ने कहा, “द्वारका में लोगों की तुलना में अधिक गधे हैं और कोई भी गधा घायल नहीं हुआ है, तो लोगों के बारे में कोई क्या ही कह सकता है।” उन्होंने बताया कि पाकिस्तानियों ने जिस धुआँ का दावा किया था, वह वास्तव में एक एसोसिएटेड सीमेंट कंपनी के कारखाने से था। उक्त कारखाना द्वारका में भारतीय अड्डे से 0.5 मील की दूरी पर स्थित था और धुआँ 20 मील दूर तक देखा जा सकता था।

ग्रामीणों की मदद से उन्होंने करीब 25 से 30 गोले बरामद किए। उस पर 1940-1946 के बीच की तारीख अंकित था। इससे यह स्पष्ट हो गया कि पाकिस्तानी जहाजों द्वारा दागे गए गोला-बारूद विभाजन के समय उन्हें सौंपे गए थे। द्वारकाधीश मंदिर और रेलवे स्टेशन के बीच मैदान पर भारी संख्या में गोले गिरे थे।

IAF सार्जेंट रमेश मदान ने कहा, “बाकी सब गोले गाँव में और खेतों में जा गिरे। इसके पीछे चमत्कार यह था कि पाकिस्तानी जहाज के अपनी स्थिति सँभालने के समय से लेकर गोलाबारी शुरू होने तक समुद्र का स्तर बढ़ गया था। इसके परिणामस्वरूप अधिकांश गोले द्वारका के ऊपर से गुजरे।” IAF सार्जेंट रमेश मदान ने निष्कर्ष निकाला।

फिर भी, पाकिस्तानी कोई नुकसान करने में विफल रहे और बाद में 1965 का युद्ध भी हार गए। लेकिन चूँकि पाकिस्तान झूठे इतिहास पर चलता है, इसलिए यह 8 सितंबर को ‘पाकिस्तान नौसेना दिवस’ के रूप में मनाता है। DailyO के अनुसार, द्वारका में पाकिस्तानी गोलाबारी में एकमात्र गाय की मौत हुई।

भारतीय नौसेना पर ‘ऑपरेशन द्वारका’ का प्रभाव

पाकिस्तान के छापेमारी के कारण बाद के दशकों में भारतीय नौसेना का जबरदस्त आधुनिकीकरण हुआ। भारतीय नौसेना के वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) गुलाब हीरानंदानी ने लिखा,“भारत ने नवीनतम जहाजों और पनडुब्बियों के लिए भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सोवियत संघ के लंबित प्रस्ताव को स्वीकार करने का निर्णय लिया। द्वारका की तरह तटीय बंदरगाहों पर हमलों को रोकने के लिए, इंडोनेशियाई और मिस्र की नौसेनाओं को आपूर्ति की गई सोवियत मिसाइल नौकाओं को तैनात किया गया।”

1966 और 1971 के बीच, भारत ने सोवियत रूस से 5 गश्ती नौकाओं, 5 पनडुब्बी चेज़र, 2 लैंडिंग जहाजों, 4 पनडुब्बी, एक पनडुब्बी डिपो जहाज, एक पनडुब्बी बचाव पोत और 8 मिसाइल नौकाओं का अधिग्रहण किया।

‘वापस आऊँगा, फिर से लौटेगा हिंदू धर्म’: मुस्लिम बहुल इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति की बेटी ने त्यागा इस्लाम, बनीं हिंदू

इंडोनेशिया के संस्थापक और पहले राष्ट्रपति सुकर्णो की बेटी और पाँचवें राष्ट्रपति मेगावती सोकर्णोपुत्री की बहन सुकमावती सुकर्णोपुत्री ने आज इस्लाम का त्याग कर दिया है और हिंदू धर्म को अपना लिया है। इसके साथ ही इंडोनेशिया में 500 साल पुरानी उस भविष्यवाणी के सच साबित होने की बात की जाने लगी है, जिसमें कहा गया था, ”मैं वापस आऊँगा और हिंदू धर्म फिर से लौटेगा।”

सुकमावती ने कड़ी सुरक्षा के बीच अपने 70वें जन्मदिन पर हिंदू धर्म को आत्मसात किया है। कोविड महामारी के कारण सुधी वदानी रस्म के दौरान लगभग 50 मेहमान ही थे, उसमें से भी अधिकतर परिवार के सदस्य ही थे। 

इसके लिए बाली में सुकर्णो सेंटर हेरिटेज एरिया में एक पारंपरिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। सुकमावती की दादी न्योमन राय सिरिम्बेन हिंदू बनने के इस फैसले के लिए काफी हद तक वजह बनी हैं। उनकी दादी न्योमन राय सिरिम्बेन भी एक हिंदू हैं, जो बाली की रहने वाली थीं।

उल्लेखनीय है कि आज इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है। एक समय में यहाँ हिंदू धर्म का मजबूत प्रभाव था। यह पहली शताब्दी की शुरुआत में जावा और सुमात्रा के द्वीपों में फैल गया और 15 वीं शताब्दी तक समृद्ध हुआ। हालाँकि, यहाँ इस्लाम के आगमन के बाद हिंदुओं की संख्या घटने लगी, जिससे देश में हिंदुओं को अल्पसंख्यक दर्जा दे दिया गया। आज भी इंडोनेशिया के हिंदू अपने पूर्वजों विशेष रूप से राजा जयभय और पुजारी सबदापालन की भविष्यवाणियों पर विश्वास रखते हैं।

सबदापालन इंडोनेशिया के सबसे शक्तिशाली मजापहित साम्राज्य के राजा ब्रविजय पाँचवीं के दरबार में एक सम्मानीय पुजारी थे। जब देश का इस्लामीकरण होना शुरू हुआ और 1478 में ब्रविजय पाँचवीं इस्लाम में परिवर्तित हो गए, तब सबदापालन ने राजा को शाप दिया था। उन्होंने देश में प्राकृतिक आपदा आने और राजनीतिक भ्रष्टाचार का शाप देते हुए 500 साल बाद यहाँ लौटने की कसम खाई थी। साथ ही पुजारी ने इस्लाम के चंगुल से इस देश को मुक्त करने और फिर से यहाँ हिंदू धर्म को मानने वालों की संख्या बढ़ेगी, ऐसी भविष्यवाणी की थी