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चीन में कोरोना के कारण फिर हो सकते हैं हालात बदतर, डर से लगा लॉकडाउन, भारत में भी घातक वेरिएंट मिला

कोरोना संक्रमण का खतरा अभी थमा नहीं है। पूरा विश्व अभी भी इससे त्रस्त है। चीन में तो दोबारा लॉकडाउन लगा दिया गया है। वहीं भारत में कोरोना का खतरनाक वेरिएंट सामने आया है जो कि अधिक संक्रामक और घातक है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन सरकार ने उत्तर-पश्चिमी शहर लान्झोउ में लॉकडाउन लगाया है। प्रशासन ने कहा है कि इमरजेंसी की स्थिति में ही लोगों को घर से बाहर निकलने की अनुमति मिलेगी। इस शहर की जनसंख्या करीबन 40 लाख है जहाँ हाल में 6 नए केस मिले हैं।

चीनी प्रशासन लान्झोउ में लोगों के आने-जाने पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। निर्देश दिए गए हैं कि केवल जरूरी चीजों की सप्लाई या फिर मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए ही घर से बाहर निकलें। इसके अलावा पर्यटन स्थलों पर भी लोगों की आवाजाही सीमित की गई है। स्थानीय आपस में मिल भी नहीं सकते। 

35,700 आबादी वाले इनर मंगोलिया के एजिन काउंटी में भी लोगों को घर में रहने को कहा गया है। वहाँ बीते हफ्ते 150 से ज्यादा लोग संक्रमित पाए गए थे। इसके बाद वहाँ के स्वास्थ्य आयोग ने चेतावनी जारी की थी कि अगर मात्र 1 हफ्ते में कोविड इन्फेक्शन 11 राज्यों में फैल गया है तो आने वाले समय में तो हालात और बदतर होंगे।

बता दें कि चीन में जहाँ कोरोना के डेल्टा वेरिएंट के कारण संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। वहीं भारत के मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में कोविड के डेल्टा वेरिएंट के सबलाइन के मामलों का पता चला है। नेशनल सेंटर ऑफ डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) से जारी जीनोम सीक्वेंसिंग रिपोर्ट में इंदौर में इस नए वेरिएंट के 7 केसों का पता चला था। इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ बीएस सैत्य ने कहा कि संक्रमित लोगों में से 2 लोग महू छावनी में तैनात सेना अधिकारी हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि नया संस्करण डेल्टा स्ट्रेन की तुलना में अधिक संक्रामक और घातक है। इसे डेल्टा प्लस-AY4.2 कहा जाता है। स्वास्थ्य एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस नए वेरिएंट में सभी अनुक्रमों का लगभग 6 फीसद हिस्सा है। इसे यूके स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी (UKHSA) द्वारा VUI-21OCT-01 नाम दिया है। समस्या की बात ये है कि कोरोना का यह वेरिएंट बहुत तेजी से फैलता है।

पाकिस्तानी पत्रकार अरूसा आलम ने सिद्धू पति-पत्नी को बताया ‘रंगा सियार’, कहा- अब भारत नहीं आऊँगी: कैप्टन से झगड़े में कॉन्ग्रेस ने घसीटा था

पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के साथ चल रहे राजनीतिक विवाद में कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा खुद को घसीटे जाने पर पाकिस्तानी पत्रकार अरूसा आलम ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पंजाब के गृह मंत्री सुखजिंदर रंधावा, पंजाब कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष नवोजत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी नवजोत कौर की तुलना “रंगा सियार (pack of hyenas)” से की है। साथ ही कहा है कि अब वे कभी भारत नहीं आएँगी।

अरूसा आलम ने कहा है कि इस घटना ने उन्हें बेहद आहत किया है। वे पंजाब कॉन्ग्रेस के नेताओं से बेहद निराश हैं। उनका दिल टूट गया गया है। इसलिए उन्होंने फैसला किया है कि वह कभी वापस भारत नहीं जाएँगी

दरअसल, पिछले हफ्ते पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा था कि अरूसा आलम के कथित आईएसआई लिंक की जाँच की जाएगी। इसको लेकर उन पर पलटवार करते हुए कैप्टन अमरिंदर ने सोनिया गाँधी के साथ अरूसा की तस्वीर जारी कर पूरी कॉन्ग्रेस को घेरा था।

अरूसा आलम के आईएसआई से लिंक और पंजाब पुलिस द्वारा इसकी जाँच को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के मीडिया सलाहकार ने एक तस्वीर पोस्ट की थी। इसमें कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और अरूसा आलम को हाथ मिलाते हुए देखा जा सकता है। तस्वीर के साथ ही तंज कसते हुए उन्होंने ‘Just by the way’ लिखा था।

अमरिंदर सिंह के मीडिया सलाहकार ने स्पष्ट किया था कि अरूसा आलम का वीजा पूर्व सीएम ने ही स्पॉन्सर किया था, वो भी 16 सालों तक। लेकिन उसकी पूरी प्रक्रिया एक सामान्य पाकिस्तानी नागरिक के वीजा प्रोसेस के तहत (विदेश मंत्रालय, हाई कमीशन, रॉ, आईबी) ही हुई थी। 2007 में जब अमरिंदर सिंह सीएम नहीं थे, तब देश के पीएम मनमोहन सिंह के आदेश पर अरूसा आलम को वीजा देने के लिए NSA द्वारा इन्क्वायरी की गई थी।

बता दें कि अरूसा आलम ने कहा था, “पंजाब में कॉन्ग्रेस अपनी जमीन खो चुकी है। युद्ध के बीच में अपने सेनापति को कौन बदलता है? अब कृपया अपनी लड़ाई अपने दम पर लड़ें, आप मुझे इस पंजाब कॉन्ग्रेस और सरकार के झमेले में क्यों घसीट रहे हैं? अब जब उन्होंने मुझे इसमें घसीटा है, तो मैं केवल ‘आपको बंदर, सर्कस’ कह सकती हूँ।”

अरूसा आलम को क्यों कहते हैं ‘पंजाब की फर्स्ट लेडी’

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पाकिस्तानी रक्षा मामलों की पत्रकार अरूसा आलम के बीच काफ़ी नजदीकी रिश्ते बताए जाते हैं। हालाँकि दोनों सार्वजनिक रूप से इस पर बात करने से कतराते रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार सीमा मुस्तफ़ा ने अरूसा आलम को ‘पंजाब की पहली महिला’ कहा था। अरूसा आलम पेशे से पाकिस्तानी रक्षा मामलों की पूर्व पत्रकार हैं और पाकिस्तानी सेना के तंत्र में अच्छी पकड़ रखती हैं। अरूसा, अकलीन अख्तर की बेटी हैं जो जनरल रानी के नाम से मशहूर हैं।

डिकॉक ने ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ के समर्थन में घुटने के बल बैठने से किया इनकार, मैच से बाहर किए गए: एक्शन लेगा दक्षिण अफ्रीका बोर्ड

दक्षिण अफ्रीका के सलामी बल्लेबाज और विकेटकीपर क्विंटन डिकॉक ने ‘ब्लैक लाइव्स मैटर (BLM)’ के समर्थन के लिए घुटने के बल बैठने से इनकार कर दिया है। बता दें कि मंगलवार (26 अक्टूबर, 2021) को दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज का मैच चल रहा है। क्विंटन डिकॉक ने BLM के समर्थन में घुटने के बल बैठने से इनकार कर दिया, जिस वजह से उन्हें इस मैच से बाहर होना पड़ा है।

बता दें कि भारतीय टीम ने भी घुटने के बल बैठ कर ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ का समर्थन किया था। इसके बाद लोगों ने सवाल पूछे थे कि उन्हें विदेशी प्रोपेगंडा का हिस्सा बनने में कोई गुरेज नहीं है, लेकिन बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर उन्होंने ऐसा कुछ क्यों नहीं किया? भारतीय खिलाड़ियों को पश्चिम के एजेंडे में न फँसने की सलाह दी गई। उन्हें पड़ोसी इस्लामी मुल्कों पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे जुर्म याद दिलाए गए।

दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट बोर्ड ने कहा है कि उसने क्विंटन डिकॉक के इस फैसले का संज्ञान लिया है। ‘क्रिकेट साउथ अफ्रीका (CSA)’ ने कहा कि क्विंटन डिकॉक ने घुटने के बल न बैठने का व्यक्तिगत निर्णय लिया, जिसका हमने संज्ञान लिया है। CSA ने कहा कि बोर्ड ने नस्लवाद के खिलाफ एकजुटता और निरंतरता से खड़ा होने का निर्णय लिया, उसी अनुरूप दिशानिर्देश जारी किए गए थे सभी खिलाड़ियों के लिए घुटने के बल बैठ कर BLM को समर्थन दिखाना अनिवार्य होगा।

बोर्ड ने कहा, “खिलाड़ियों के ‘फ्रीडम ऑफ चॉइस’ सहित सभी मुद्दों पर विचार करते हुए हमने निर्णय लिया था कि सभी खिलाड़ियों के लिए नस्लवाद के विरुद्ध स्टैंड लेना अनिवार्य है, खासकर दक्षिण अफ्रीका के इतिहास को देखते हुए। हमारा मानना है कि रोजमर्रा की ज़िंदगी में विविधता विभिन्न रूपों में प्रदर्शित की जा सकती है, लेकिन नस्लवाद के विरुद्ध अभियान में ये मायने नहीं रखता। टीम मैनेजमेंट की अगली प्रतिक्रिया के बाद बोर्ड आगे का निर्णय लेगा।”

CSA ने साफ़ कर दिया है कि T20 विश्व कप के अगले सभी मैचों में नस्लवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए खिलाड़ियों के लिए घुटने के बल बैठना अनिवार्य है। साथ ही उसने ‘महत्वपूर्ण और सार्वजनिक स्टैंड’ लेने के लिए अपने अन्य खिलाड़ियों को धन्यवाद दिया। दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कोच मार्क बाउचर भी इसी को लेकर विवादों में घिरे थे। पूर्व अश्वेत खिलाड़ियों ने आरोप लगाया था कि उनके समय में नस्लवाद हावी था।

इंडिया टुडे ने न्यूजलॉन्ड्री के ‘पत्रकारों’ पर ठोका केस, माँगा ₹2 करोड़ का हर्जाना: जानिए क्या है मामला

इंडिया टुडे ने न्यूजलॉन्ड्री के ‘पत्रकारों’ के खिलाफ वेबसाइट पर प्रकाशित लेखों को लेकर मुकदमा दायर किया है। ग्रुप ने उनसे 2 करोड़ रुपए का हर्जाना भी माँगा है। न्यूजलॉन्ड्री के ‘पत्रकार’ आयुष तिवारी ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है। तिवारी ने ट्वीट किया है, “न्यूजलॉन्ड्री के मेरे सहयोगियों और मुझ पर इंडिया टुडे ग्रुप ने मुकदमा दायर किया है। उसने 2 करोड़ रुपए के हर्जाने के साथ स्थायी निषेधाज्ञा की माँग की है। मुझे 2 वर्षों में इस मीडिया समूह पर की गई 2 स्टोरी के लिए निशाने पर लिया गया है।”

आयुष ने अपने ट्वीट थ्रेड में उन लेखों का भी जिक्र किया है। ऐसे एक लेख में उन्होंने सवाल किया था कि इंडिया टुडे के अन्य एंकरों को राजदीप सरदेसाई की तरह दंडित क्यों नहीं किया गया? तिवारी के अनुसार, इंडिया टुडे ने इस लेख को बेहद घटिया (vicious) बताया है।

तिवारी का दूसरा लेख गौरव सावंत पर था। इस एंकर को उन्होंने ‘फेक न्यूज डिपार्टमेंट में जाना-माना अपराधी’ कहा था, जिसे उनके चैनल ने विवादित बताया है। तिवारी ने कहा कि इंडिया टुडे ने दिल्ली हाई कोर्ट से न्यूजलॉन्ड्री को चैनल और उसके एंकरों के खिलाफ कोई भी अपमानजनक सामग्री लिखने, ट्वीट करने या प्रकाशित करने से रोकने का अनुरोध किया है।

इंडिया टुडे ने यह भी आरोप लगाया है कि न्यूजलॉन्ड्री ने कॉपीराइट का उल्लंघन किया है। बूम लाइव की रितिका जैन के अनुसार, “चैनल के समाचार, रिपोर्टिंग, प्रबंधन और न्यूज एंकरों के बारे में अनुचित, अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण रूप से अपमानजनक टिप्पणी की गई है।”

जैन के अनुसार, न्यूजलॉन्ड्री के सीईओ अभिनंदन सेखरी, डायरेक्टर प्रशांत सरीन और रूपक कपूर, कार्यकारी संपादक मनीषा पांडे और अतुल चौरसिया, प्रबंध संपादक रमन कृपाल, संवाददाता आयुष तिवारी और स्तंभकार हृदयेश जोशी को इस मामले में पक्षकार बनाया गया है। साथ ही सोशल मीडिया दिग्गज ट्विटर, फेसबुक और गूगल को भी इस मुकदमे में पक्षकार बनाया गया है। वहीं, गौरव सावंत ने अभी तक अपने ट्विटर अकाउंट पर इस मामले पर कुछ भी नहीं कहा है।

‘गवाह ने पैसे के लिए समीर वानखेड़े पर लगाए झूठे आरोप’: स्टिंग जारी करने वाले ने कहा – नवाब मलिक से मेरे परिवार को खतरा

आर्यन खान ड्रग्स मामले में रोज नया ट्विस्ट आ रहा है। एक तरफ ये मामला अदालत में चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ कई खुलासे हो रहे हैं। अब एक स्टिंग के हवाले से दावा किया गया है कि आर्यन खान ड्रग्स मामले में गवाह प्रभाकर साईल ने रुपए लेकर NCB की टीम और समीर वानखेड़े पर आरोप लगाए थे। मीडिया रिपोर्ट्स इस स्टिंग की पुष्टि नहीं कर रहे हैं, लेकिन एक भाजपा का दावा है कि गवाह को खरीदा गया, ताकि वो NCB को बदनाम करे।

भाजपा नेता मोहित कम्बोज ने ‘नोटरी राम जी गुप्ता का स्टिंग ऑपरेशन’ के नाम से वीडियो शेयर किया है। बता दें कि मोहित कम्बोज भाजयुमो मुंबई के अध्यक्ष रहे हैं और मुंबई भाजपा के जनरल सेक्रेटरी का पद भी संभाल चुके हैं। उन्होंने लिखा कि किरण गोसावी से पैसे वसूलने के लिए उनके बॉडीगार्ड प्रभाकर साईल ने ये सब किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे ‘मियाँ नवाब’ और ‘मनोज’ का हाथ है।

वायरल वीडियो में एक व्यक्ति कहता दिख रहा है कि प्रभार साईल जो है वो केपी गोसावी का बॉडीगार्ड था और उसने उससे रुपए माँगे थे, जो उसने नहीं दिए। मोहित कम्बोज ने अपने और अपने परिवार की जा को महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक से खतरा बताते हुए केंद्र सरकार से सुरक्षा की गुहार भी लगाई है। उन्होंने नवाब मलिक के विरुद्ध पुलिस में आपराधिक शिकायत भी दायर की है और आरोप लगाया कि वो उन्हें बदनाम कर रहे हैं।

बता दें कि प्रभाकर साईल ने दावा किया था कि उसे भी उस जहाज पर ले जाया गया था, जहाँ ड्रग्स पार्टी की बातें कही जा रही थीं। वहाँ उसे कुछ फोटोग्राफ्स दिए गए थे और दरवाजे पर खड़ा करा कर कहा गया था कि इनमें से कोई अंदर जाए तो सूचित करना। इसके बाद 13 लोगों की गिरफ़्तारी की खबर आई। उसका दावा है कि उसी इनोवा कार में NCB अधिकारी आर्यन खान को लेकर गए। उसने बड़ा आरोप लगाया है कि पंच के रूप में उससे 10 खाली कागज पर NCB ने हस्ताक्षर ले लिए।

इसके बाद उससे आधार कार्ड माँगा गया, जिसे उसने व्हाट्सएप्प के माध्यम से भेजा। बॉडीगार्ड प्रभाकर ने बड़ा आरोप लगाया है कि उसने केपी गोसावी को किसी से 25 करोड़ रुपए की बात करते हुए सुना, जिसमें वो कह रहे थे कि 18 करोड़ रुपए पर बात बन सकती है, क्योंकि 8 करोड़ समीर वानखेड़े को देने हैं। उसने बताया है कि कुछ देर बाद एक मर्सिडीज में पूजा डडलानी और केपी गोसावी की मुलाकात हुई।

‘मैं 4 घंटे पूरी नंगी थी… सब खुलेआम सेक्स कर रहे थे’: ईसाई पर्व पर मॉडल ने बताया प्लेबॉय पार्टी का सच

अमेरिका की हाई सोसायटी पार्टी का एक चौंकाने वाला चेहरा सामने आया है। जेना बेंतली (Jenna Bentley) नामक 32 वर्षीय मॉडल ने हैलोईन पार्टी (Halloween parties) की हकीकत बताई है। उन्होंने अपना अनुभव याद करते हुए बताया कैसे उन्हें प्लेबॉय मेंशन में घंटों नंगे रहने पड़ा था। उनके शरीर पर सिर्फ पेंट (रंग) हो रखा था जबकि चारों ओर बाकी जाने-माने लोग खुलेआम सेक्स कर रहे थे। जेना का कहना है कि उन्हें उस रात बहुत मजा आया था और ये एहसास हुआ था कि उनको लड़कियाँ भी पसंद हैं।

डेलीमेल की रिपोर्ट के अनुसार, मोंटाना (Montana) की जेना बताती हैं कि जब वो 18 साल की थीं तो प्लेबॉय फाउंडर हुग हेफनर की हैलोईन पार्टी में बंगले पर गईं थी। वहाँ जब उन्होंने ने प्लेबॉय फाउंडर से मुलाकात की तो उनसे पूछा गया कि क्या वो कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नंगे होकर अपने शरीर को रंगवाना चाहेंगी बिलकुल तितली की तरह। इस पर वह मान गईं और करीब 4 घंटे उन्होंने अपने शरीर पर सिर्फ रंगों के साथ बिताए। 

जेना कहती हैं कि बंगले पर हर कोई सेक्स कर रहा था। चाहे वो किचन हो, गार्डन हो या फिर पूल हो। उस रात उन्होंने उन्हीं लोगों के बीच बिताई क्योंकि वह भी उनमें से एक बनना चाहती थीं। उस पार्टी में उन्हें महसूस हुआ कि उन्हें महिलाएँ कितनी पसंद हैं औ वो उनकी ओर आकर्षित होती हैं।

जेना आज अपने इंस्टाग्राम पर अपनी बोल्ड तस्वीरों के कारण पहचानी जाती हैं और फैनपेज के कारण करोड़पति हैं। अब हाल में उन्होंने उस पार्टी की कुछ तस्वीरों को मीडिया में शेयर किया है। वह कहती हैं कि वो हैरान थीं कि पार्टी में सारी चीज पर्फेक्ट थी। उनके मुताबिक उन्होंने पार्टी शुरू होने से पहले हुग से मुलाकात की थी। और जब उनसे शरीर को रंगवाने को कहा गया तो वह तैयार हुईं और 4 घंटे नंगे वहीं खड़ी रहीं।

जेना ने उस पार्टी की तस्वीरें दिखाई हैं। इसमें उनके शरीर पर रंग बिरंगे कलरों से पेंट होते साफ दिख रहा है। वह कहती हैं कि 18 साल की उम्र में जब वो ये करवा रही थीं तो उन्हें चिंता थी कि अगर पसीना आया और पेंट हट गया तो क्या होगा। वह कहती हैं, “मैं पूरी नंगी थी। एक बाल तक मेरे शरीर पर नहीं था। कॉस्ट्यूम इतनी बारीकी से बनी थी कि उसमें छोटे-छोटे जेवर भी डिजाइन किए गए थे। मैं चिंता में थी कि कहीं पसीने आएँ और पेंट निकलकर बह जाए, लेकिन सब एकदम पर्फेक्ट था।” मॉडल ने बताया कि उस पार्टी में सबके कपड़े अलग थे। बंगले के अंदर पार्टी नहीं हुई थी, बाहर ग्राउंड में सब जारी था। 

जेना ने खुलासा किया कि उन्होंने तब अपनी बॉडी रंगवाने के बाद कई लोगों के साथ करीबियाँ बढ़ाईं। इसके साथ उन्होंने अन्य मॉडल्स का नाम लेने से मना किया जो उस पार्टी में उनके साथ थी। बस ये बताया कि वहाँ मशहूर संगीतकार, राजनेता और सितारे भी थे। उनके मुताबिक, “लोग चारों ओर सेक्स कर रहे थे। बाहर, पूल में यहाँ तक पम्पकीन पैच तक में मैंने लोगों को सेक्स करते देखा। मैं किसी का नाम नहीं ले सकती । ये बहुत नीच और गंदा हो जाएगा। लेकिन आप मान सकते हैं कि वहाँ मशहूर संगीतकार, राजनेता और सेलेब्रिटी थे। बहुत मजा आया था। दीवार भी बात कर सकती थीं…बाकी लड़की बहुत सुंदर थीं और मैंने बहुत मजे किए थे। वो रात खास थी क्योंकि उसी रात ये एहसास हुआ कि मैं लड़कियों की ओर आकर्षित होती हूँ। वरना मैं अपने आपको सीधा समझती थी। मुझे इतनी जवानी में औरतों के लिए फीलिंग आ रही थीं पर मुझे तब लगा कि मैं उन्हें सुंदर समझकर उन्हें देखना चाह रही हूँ। जैसे जैसे मैं बड़ी हुई ये एहसास स्पष्ट हो गया, लेकिन मैंने अपने घर में किसी को नहीं बताया क्योंकि मैं कन्फ्यूज थी।”

CM योगी का मुखौटा पहना घसीटा-मारा: केरल में इस्लामी संगठन PFI का कारनामा, इसी के सदस्य को धरा था UP पुलिस ने

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ एक घृणित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है। यह वीडियो केरल में बनाया गया है। इसमें आप देख सकते हैं कि सीएम योगी का मुखौटा लगाए और उन्हीं की तरह भगवा वस्त्र धारण करने वाले एक व्यक्ति को तीन ओछी मानसिकता वाले लोग गाना गाते हुए रस्सी से बाँधकर घसीटते हुए ले जा रहे हैं।

सीएम योगी से नफरत करने वाले तीनों लोग उस व्यक्ति को थप्पड़ मारने का नाटक करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। यह घिनौना वीडियो इंटरनेट पर वायरल है। बताया जा रहा है कि वीडियो को इस्लामिक ग्रुप कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया द्वारा की गई रैली के दौरान शूट किया गया था, जो सिद्दीकी कप्पन के खिलाफ मुकदमा चलाने को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है। दरअसल, 8 पीएफआई कार्यकर्ताओं में से एक पर हाथरस की घटना के दौरान सांप्रदायिक अशांति भड़काने का आरोप लगाया गया था। बता दें कि कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया इस्लामिक संगठन पीएफआई (PFI) की छात्र शाखा है।

यूपी पुलिस ने हाथरस की घटना को लेकर अशांति फैलाने के आरोप में सिद्दीकी कप्पन सहित पीएफआई कार्यकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की थी। उन्होंने इस मामले में कप्पन को गिरफ्तार किया था, वह तब से जेल में बंद है। यही कारण है कि इन लोगों ने योगी आदित्यनाथ के खिलाफ नफरत भरा वीडियो बनाया है।

सिद्दीकी कप्पन नामक एक पत्रकार को किया गया था गिरफ्तार

इस साल अक्टूबर की शुरुआत में उत्तर प्रदेश के हाथरस केस के दौरान सिद्दीकी कप्पन नामक एक पत्रकार को गिरफ्तार किया गया था। इसके खिलाफ यूपी की स्पेशल टास्क फोर्स ने 5,000 पेज की चार्जशीट दाखिल की थी। हलफनामे में एक जाँच अधिकारी का डायरी नोट भी था। इसमें उन्होंने कप्पन के उन 36 आर्टिकल्स को हाईलाइट किया था, जो उसके लैपटॉप से बरामद हुए थे। इन लेखों में निजामुद्दीन मरकज, एंटी सीएए प्रोटेस्ट, दिल्ली दंगे, राम मंदिर, शरजील इमाम जैसे मुद्दों पर बात की गई थी।

हलफनामे में यह भी बताया गया था कि कप्पन जिम्मेदार पत्रकार की तरह नहीं लिखता था। उसका काम सिर्फ मुस्लिमों को भड़काने का था। उसकी संवेदनाएँ माओवादी और कम्युनिस्टों के साथ थीं। एएमयू में हुए सीएए प्रोटेस्ट पर लिखे लेख में उसने ऐसे दिखाया था जैसे पीटे गए मुस्लिम पीड़ित हों और पुलिस ने उन्हें पाकिस्तान जाने को कहा हो। एसटीएफ ने इस प्रकार की लेखनी को सांप्रदायिक बताया था। कप्पन सिर्फ और सिर्फ मुस्लिमों को भड़काता था, जो कि पीएफआई का छिपा हुआ मुख्य एजेंडा है।

सीएफआई की उत्पत्ति आतंकी संगठन सिमी से हुई

साल, 2009 में शुरू किया गया कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई) ने खुद को ‘नव-सामाजिक छात्र आंदोलन’ के रूप में पेश किया, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी के कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना था। हालाँकि, यह समाज के उत्पीड़ित वर्गों की आवाज होने का दावा करता है। लेकिन इस संगठन की उत्पत्ति का मूल स्रोत आतंकवादी संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) था, जिसे 1970 के दशक के अंत में जमात-ए-इस्लामी-ए-हिंद के समर्थकों के एक समूह द्वारा बनाया गया था।

PFI की छात्र शाखा CFI, चरमपंथी इस्लामी संगठन

कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पीएफआई का हिंसा फैलाने का काफी पुराना इतिहास है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के मद्देनजर दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों और देश भर में हिंसा की जाँच के दौरान पीएफआई की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। साथ ही, पीएफआई के कई सदस्यों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार भी किया गया था। इसके अलावा, पिछले साल नवंबर में कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने देश के विभिन्न हिस्सों में दंगे और हिंसा उकसाने के आरोपित किसानों के सरकार विरोधी प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया था। उसने प्रदर्शनकारियों को संविधान के संरक्षण के लिए संघर्ष करने के लिए कहा था।

‘एक दिल्ली वाले हैं… पहले भगवान राम को गाली देते थे, अब उनका दर्शन कर रहे’: केजरीवाल के अयोध्या दौरे पर CM योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा-बसपा के साथ-साथ AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की नई-नई ‘राम भक्ति’ पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ये सपा-बसपा-कॉन्ग्रेस और अब एक दिल्ली वाले भी पहले भगवान श्री राम को गाली देते थे और अब माथा टेकने अयोध्या जा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या इस प्रदेश में सपा, बसपा और कॉन्ग्रेस को शासन करने का अवसर नहीं मिला था?

वहीं उन्होंने आगे सवाल किया कि क्या उत्तर प्रदेश के प्रति उनकी जिम्मेदारी नहीं थी? सीएम योगी ने कहा, “एक दिल्ली वाले हैं। उन्होंने तो यूपी-बिहार वालों को ही दिल्ली से भगा दिया। वो कह रहे हैं कि ये फ्री देंगे, वो फ्री देंगे। जब अवसर मिला था कुछ करने का, तब सबसे पहले इन्होंने यूपी के नागरिकों को दिल्ली से भगाने का काम किया था। इनको बताने की ज़रूरत है। एक छोटी सी दिल्ली संभाल नहीं पाए। यूपी-बिहार के लोगों को वहाँ से भगा दिया।”

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब राज्य में विधानसभा का चुनाव आ रहा है, तब उन्हें उत्तर प्रदेश नजर आ रहा है। उन्होंने कहा, “पहले भगवान राम को गाली देते थे। लेकिन, आज जब लगता है कि अब राम के बिना नैया पार होने वाली नहीं है, तो अब अयोध्या में भगवान राम के दर्शन करने आ रहे हैं। अच्छी बात है। कम से कम राम के अस्तित्व को, राम के महत्व को उन्होंने स्वीकार तो किया। अन्यथा विपक्षी दलों का कोई नेता ऐसा नहीं है, जिसने 6 दिसंबर 1992 को स्वर्गीय बाबूजी (दिवंगत कल्याण सिंह) को कोसा न हो, कटघरे में न खड़ा किया हो।”

बता दें कि अरविंद केजरीवाल ने एक रैली में कहा था, “जब बाबरी मंदिर का ध्वंस हुआ तब मैंने अपनी नानी से पूछा कि नानी आप तो अब बहुत खुश होंगी? अब तो आपके भगवान राम का मंदिर बनेगा। नानी ने जवाब दिया – ना बेटा, मेरा राम किसी की मस्जिद तोड़ कर ऐसे मंदिर में नहीं बस सकता।” केजरीवाल ने मार्च 2014 में ये बयान दिया था। एक अन्य बयान में उन्होंने ‘मंदिर वहीं बनाएँगे, पर तारीख़ नहीं बताएँगे’ वाले नैरेटिव को आगे बढ़ाया था।

‘गवाहों को प्रभावित कर रहीं SRK की मैनेजर पूजा ददलानी, जाँच से छेड़छाड़ भी’: NCB ने बॉम्बे HC को बताया, आर्यन की जमानत पर सुनवाई

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की जमानत याचिका का विरोध किया। जाँच एजेंसी ने आरोप लगाया कि शाहरुख खान की मैनेजर पूजा ददलानी ने चल रही जाँच के बीच गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की है।  

35 पन्नों के जवाब में एनसीबी ने गवाह प्रभाकर सेल द्वारा दायर हलफनामे का जिक्र किया और कहा कि चल रही जाँच में छेड़छाड़ की कोशिश की गई। इसमें आगे कहा गया है कि खान की जमानत याचिका को इस आधार पर खारिज किया जा सकता है कि चल रही जाँच के बीच गवाहों को प्रभावित करने, छेड़छाड़ करने के स्पष्ट उदाहरण हैं।

एजेंसी ने कहा, “महत्वपूर्ण बात यह है कि इस तरह के कथित हलफनामे में इस आवेदक से जुड़ी एक मैनेजर पूजा ददलानी का नाम है। ऐसा लगता है कि जाँच के दौरान उक्त महिला ने गवाह को प्रभावित किया है। जाँच के स्तर पर इस तरह का हस्तक्षेप यह सुनिश्चित करने के लिए एक दुर्भावनापूर्ण प्रयास है कि यह पटरी से उतर जाए और सच सामने न आ पाए।”

आर्यन खान ड्रग केस

2 अक्टूबर को, अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को एनसीबी द्वारा छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वह मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद है। जाँच एजेंसी द्वारा विरोध के बाद अदालत ने उनकी जमानत याचिका कई बार खारिज कर दी है।

यूपी पुलिस के खौफ से भगोड़े हिस्ट्रीशीटर बशीरुद्दीन ने खुद हाथ जोड़े थाने पहुँच किया सरेंडर, अपराध से की तौबा

उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर के खौफ से अब तक सैकड़ों अपराधी अपराध से तौबा कर पुलिस के समक्ष आत्मससमर्पण कर चुके हैं। मेरठ, बागपत के बाद सोमवार  (अक्टूबर 25, 2021) को मुजफ्फरनगर में एक हिस्ट्रीशीटर ने अपराध से तौबा कर पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। हिस्ट्रीशीटर हाथ जोड़कर थाने पहुँचा और भविष्य में अपराध न करने की कसम खाई। कोतवाली में जाते हुए उसका वीडियो भी सामने आया है।

शहर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक आनंद देव मिश्रा ने बताया कि एसएसपी के आदेश पर अपराधियों की धर-पकड़ के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस की कार्रवाई से डर कर खालापार निवासी गैंगस्टर बशीरुद्दीन ने शहर कोतवाली पहुँच कर सरेंडर कर दिया। उस पर चोरी और चोरी का माल ठिकाने लगाने के कई मुकदमे दर्ज हैं।

मुजफ्फरनगर पुलिस ने इसकी जानकारी देते हुए ट्वीट किया, “गैंगस्टर के अभियोग में वांछित अभियुक्त ने थाने पहुँच कर किया आत्मसमर्पण। शातिर अभियुक्त द्वारा कार्यवाही के डर से थाना कोतवाली नगर पहुँच कर आत्मसमर्पण किया गया। अभियुक्त थाना कोतवाली नगर से गैंगस्टर के अभियोग में वांछित अपराधी है।”

वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने इसका वीडियो शेयर करते हुए ट्विटर पर लिखा, “मुजफ्फरनगर के कुख्यात बशीरूद्दीन को देख बाहुबली भी हाथ जोड़ लेते थे, पर पुलिस के ख़ौफ़ से भागे बशीरुद्दीन ने खुद हाथ जोड़े थाने पहुँच सरेंडर कर दिया, ये है नया यूपी।”

मुठभेड़ में मारे जाने के डर से किया सरेंडर

बदमाशों को जेल की सलाखों के पीछे भेजने के लिए पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है। ऐसे में पुलिस की गोली से बचने के लिए बशीरुद्दीन ने सरेंडर करना ही सही समझा। पुलिस कार्रवाई के डर ने उसे सरेंडर करने के लिए मजबूर कर दिया।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पुलिस से डर कर 5 अपराधियों ने सरेंडर कर दिया था। यह सभी आरोपित हत्या का प्रयास और लूट सहित कई संगीन मामलों में फरार चल रहे थे। लंबे समय से फरार चल रहे इन अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट लगाया था। इन अपराधियों पर बलवा, हत्या का प्रयास व लूट सहित कई मामले दर्ज थे। गैंगस्टर एक्ट लगाने के बाद इन अपराधियों को योगी की पुलिस से जान का खतरा सताने लगा था। पुलिस एनकाउंटर में जान जाने के डर से पाँचों अपराधियों ने शामली पुलिस के आगे सरेंडर कर दिया।

कैराना कोतवाली के एसएचओ प्रेमवीर राणा ने कहा कि आरोपित हाथ उठाकर थाने आए थे। पुलिस के सामने आने से पहले अपराधियों ने कहा कि वे सभी आपराधिक गतिविधियों को छोड़ना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने आत्मसमर्पण करने का फैसला किया।