Home Blog Page 3413

शाहरुख खान ने इस बार नहीं दी गणेश चतुर्थी की बधाई, तस्वीरें भी शेयर नहीं की: कट्टरपंथी तो नहीं वजह?

पिछले कई साल से सोशल मीडिया पर गणेश चतुर्थी की बधाई देने के बाद कट्टरपंथियों के निशाने पर आने वाले अभिनेता शाहरुख खान ने इस वर्ष अपने फैन्स को इस त्योहार की बधाई नहीं दी। इससे पहले तक उन्हें हर बार कट्टरपंथियों ने हिंदू त्योहारों पर कहा था कि शाहरुख को मुसलमान होने के नाते हिंदू देवी-देवताओं को नहीं पूजना चाहिए।

2018 में शाहरुख खान ने अपने बेटे अबराम खान की एक तस्वीर शेयर की थी। इसमें वह गणेश मूर्ति के आगे हाथ जोड़ कर खड़ा था। तस्वीर बेहद प्यारी थी, जिसके जरिए शाहरुख खान बता रहे थे कि अबराम गणपति बप्पा को ‘पप्पा’ कहता है। मगर, इस फोटो के लिए इस्लामियों ने उन्हें ट्रोल किया और कहा कि सच्चा मुसलमान वो है जो अल्लाह के सिवा किसी पर विश्वास न करे।

एक ट्विटर यूजर ने तो यह नजारा देखने के बाद मोहम्मद अली जिन्ना को पाकिस्तान बनाने के लिए शुक्रिया कहा। उसका तर्क था कि अच्छा हुआ पाकिस्तान बन गया वरना भारतीय मुस्लिमों को भारत सरकार को खुश रखने के लिए हिंदू देवताओं की प्रार्थना करनी होती है। 

साल 2019 में दोबारा यही चीज देखने को मिली, जब अभिनेता ने गणेश चतुर्थी की बधाइयाँ दीं। उस समय कट्टरपंथियों ने शाहरुख खान को ‘जहान्नुम मुबारक’ कहा। साथ ही साथ समझाया कि शाहरुख की बीवी अगर हिंदू है तो वो ये सब कर ले, मगर कम से कम उनको मूर्ति पूजन नहीं करना चाहिए। नाम के ही सही लेकिन हैं तो मुस्लिम हीं।

इसके अतिरिक्त उन्हें काफिर और न जाने क्या-क्या कहा गया। कुछ पाकिस्तानियों ने तो ये भी कहा कि पूजा करना जरूरी है अगर हिंदू बहुल देश में रहना चाहते हो।

यही सिलसिला 2020 में भी जारी रहा। हालाँकि, उस वक्त शाहरुख खान ने गणपति बप्पा की तस्वीर शेयर करने की जगह अपनी फोटो शेयर कर दी। इसमें उन्होंने तिलक लगाया हुआ था। ये चीज भी कट्टरपंथियों से नहीं देखी गई। गणेशोत्सव को लेकर कहा गया कि ये शिर्क़ है और मूर्ति पूजा पाप है।

उल्लेखनीय है कि ये बात केवल गणेश चतुर्थी की ही नहीं है। शाहरुख खान अपनी और अपने परिवार की कई तस्वीरें विभिन्न त्योहारों पर शेयर करते रहते हैं। ऐसे में हर बार ये गाली-गलौच का क्रम जारी दिखता है। शायद यही वजह है कि इस दफा शाहरुख खान अपने घर में शांति से गणेश चतुर्थी मना रहे हैं और ऐसी नकारात्मक बातों से अपने और अपने परिवार को दूर रख रहे हैं।

‘चर्च चलो सिरदर्द ठीक हो जाएगा, पैसे मिलेंगे’: महोबा में पकड़ा गया ईसाई प्रचारक, धर्मांतरण का बना रहा था दबाव

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में 40 साल का एक ईसाई धर्म प्रचारक पकड़ा गया है। उसकी पहचान आशीष जॉन के तौर पर हुई है। वह 20 साल पहले ईसाई बना था। उस पर पड़ोसी संजय द्विवेदी पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने और लालच देने का आरोप है।

द्विवेदी की शिकायत मिलने के बाद आशीष जॉन को गिरफ्तार किया गया। मामला महोबा के पनवाड़ी थाना क्षेत्र के ठाकुरदास मोहल्ला का है। रिपोर्टों के अनुसार द्विवेदी कई दिनों से बीमार चल रहा था। आशीष जॉन को इस बात की जानकारी थी। आरोप है कि आशीष बीमारी ठीक करने और व्यापार के लिए पैसा देने का लालच दे धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था। पुलिस ने आरोपित को धर्म परिवर्तन प्रतिरोध अध्यादेश 2020 की धारा 3, धारा 5 के तहत मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है।

द्विवेदी ने शिकायत में कहा है कि उसे लगातार सिरदर्द की शिकायत रहती है। एक महीने पहले उसने इसके बार में आशीष जॉन को बताया तो उसने एक ड्रिंक दी। हाल ही में आरोपित ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता से फिर से उसके दर्द के बारे में पूछा। जब द्विवेदी ने कहा कि ड्रिंक से कोई फायदा नहीं हुआ, तो जॉन ने इस समस्या को दूर करने के लिए उसे ईसाई धर्म अपनाने को कहा। 

पुलिस ने बताया कि कुछ दिनों बाद जॉन ने कथित तौर पर द्विवेदी को अपने साथ चर्च चलने को कहा। जब शिकायतकर्ता ने मना कर दिया तो जॉन ने उससे कहा कि उसका सिरदर्द कभी ठीक नहीं होगा। पुलिस ने कहा कि आरोपित ने कथित तौर पर अपने पड़ोसी से कहा कि उसे व्यवसाय शुरू करने के लिए 12,000 रुपए मिलेंगे। इसके अलावा उसने उसे कुछ धार्मिक किताबें भी दीं। हिंदू संगठनों की सूचना पर पहुँची पुलिस ने आरोपित को दबोच लिया। 

गौरतलब है कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के बहराइच में तीन हिंदू परिवारों ने ईसाई धर्म अपना लिया था। रिसिया थाना क्षेत्र के एक गाँव में परिवार की महिला ने ईसाई धर्म अपना लिया। इसके बाद वह परिवार के बाकी लोगों पर धर्मान्तरण करने का दवाब बनाने लगी। इसके बाद परिजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिले के कलेक्टर को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई थी। बबलू ने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अपने छोटे भाई की पत्नी के धर्मान्तरण करने और घर के बाकी सदस्यों पर भी धर्म परिवर्तन करने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया था।

Video वायरल, दावा- महिला पर कोड़े बरसा रहा तालिबान: मजार-ए-शरीफ में आपस में ही संघर्ष की खबरें

अफगानिस्तान में तालिबानी शासन आने के बाद महिलाओं के पास नाम के अधिकार भी नहीं बचे हैं। इसका ताजा सबूत एक वीडियो है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दो शख्स कोड़े बरसाते नजर आ रहे हैं और महिला के चीखने की आवाज सुनाई दे रही है। सामने गाड़ी होने की वजह से यह बता पाना मुश्किल है कि इस बर्बरता का शिकार कौन हो रहा है।

दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो अफगानिस्तान का है। NRF (national resistance front) से जुड़ी खबरों को ट्विटर पर शेयर करने वाले पेज Panjshir_Province ने यह वीडियो शेयर किया है। इसमें तालिबान लड़ाकों द्वारा एक महिला को कोड़े मारते दिखाया जा रहा है। पेज पर लिखा गया, “यह बर्बर है। तालिबान एक महिला को बेरहमी से कोड़े मार रहा है, जबकि वह बेबस होकर चिल्ला रही है।”

वीडियो में देखा जा सकता है कि तालिबानी अफगान महिला पर कोड़े बरसा रहे हैं और वह दर्द से चीख रही है। वीडियो में एक गाड़ी और आसपास कुछ लोग खड़े देखे जा सकते हैं। अभी तक ऐसे कई वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा चुके हैं जो तालिबान के अत्याचारों का दावा करते हैं। वहीं प्रदर्शनकारियों पर तालिबान को गोली बरसाते हुए भी देखा जा चुका है।

इस बीच अफगानिस्तान के बल्ख प्रांत की राजधानी मजार-ए-शरीफ में दो तालिबानी समूहों के बीच सशस्त्र संघर्ष की भी खबर आ रही है। तीन चश्मदीद ने अफगानी न्यूज चैनल से इसकी पुष्टि की है। हालाँकि इसमें किसी तरह की कोई हताहत नहीं होने की बात कही जा रही है।

इधर तालिबान के एक सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि तालिबान सैनिकों ने बल्ख में पीडी8 मजार-ए-शरीफ में हथियारबंद अपहरणकर्ताओं को ढूँढने के लिए छापा मारा। इस दौरान 4 अपहरणकर्ताओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई और 2 को हिरासत में लिया गया एवं बच्चों को मुक्त कर दिया गया। एक अफगानी रिपोर्टर ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान की पंजशीर घाटी पर नियंत्रण हासिल करने के बाद तालिबान कत्लेआम मचा रहा है। कथित तौर पर वह रेजिस्टेंस फ्रंट के नेताओं के परिजनों और अन्य नागरिकों की हत्या कर रहा है। बीते हफ्ते तक यह इलाका रेजिस्टेंस फ्रंट के नियंत्रण में था। फ्रंट के नेताओं के पहाड़ियों में पनाह लेने के बाद से तालिबानी तेजी से गाँवों में घुस रहे हैं और जो भी मिलता है उसे प्रताड़ित और हत्याएँ कर रहे हैं।

हाल ही में पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह के भाई रोहुल्लाह सालेह की हत्या कर दी गई थी। तालिबान ने जब पंजशीर पर पूर्ण नियंत्रण का दावा किया उसके बाद पंजशीर का शेर और अफगान नायक कहे जाने वाले अहमद शाह मसूद के मकबरे को भी नष्ट कर दिया था।

PM मोदी के अलीगढ़ दौरे से पहले BJP दफ्तर में तोड़फोड़ करने वाला बाबू सिद्दीकी धराया, टॉयलेट में डाली गई जिन्ना की तस्वीर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले उत्तर प्रदेश के अलीगढ का राजनीतिक मौसम पल-पल बदल रहा है। अलीगढ़ में कहीं भाजपा दफ्तर में तोड़फोड़ हुई तो कहीं मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर टॉयलेट से मिली। अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के महानगर अध्यक्ष इमरान सैफी के भाजपा कार्यालय में तोड़फोड़ मचाई गई है। इस दौरान लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरें फाड़ डालीं।

लोधा में राजा महेंद्र प्रताप के नाम से स्टेट यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अलीगढ़ आने वाले हैं। इसी बीच भुजपुरा के रहने वाला बाबू अपने भाई सद्दीक व कुछ अन्य लोगों के साथ भाजपा कार्यालय में धमका और इन लोगों ने भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की। कार्यालय को बम से उड़ाने की भी धमकी दी गई। इस सम्बन्ध में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

सीएम योगी के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने ट्वीट कर जानकारी दी, “इस करतूत के मुख्य आरोपी बाबू सिद्दीकी धर लिए गए हैं, कंन्फ्यूज हो गए थे कि बंगाल में हैं। अब पूरी तरह समझ आ रहा है कि यूपी है।” जिस कार्यालय में तोड़फोड़ हुई, उसे अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के नवनियुक्त अध्यक्ष इमरान सैफी ने गुरुवार (9 सितंबर, 2021) को ही स्थापित किया था। इसी बीच बाबू और सद्दीक वहाँ आ धमके

उन्होंने कहा कि अगर अगली बार यहाँ भाजपा की बैठक हुई तो कार्यालय को बम से उड़ा डाला जाएगा। साथ ही दफ्तर में रखे समान को भी इधर-उधर फेंका। कोतवाली पुलिस सूचना पाकर मौके पर पहुँची ज़रूर, लेकिन उससे पहले हमलावर भाग खड़े हुए थे। उधर ‘अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU)’ में लगी पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर भी विवाद बढ़ता ही जा रहा है।

भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिन्ना की तस्वीर हटवाने के लिए विरोध प्रदर्शन भी किया है। इसके बाद उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर टॉयलेट में लगा डाली। भाजपा के मंडल प्रवक्ता शिवांग तिवारी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में जबरदस्त नारेबाजी हुई और जिन्ना की तस्वीरें फाड़ी गईं। गाँधी पार्क बस अड्‌डे पर जिन्ना की तस्वीर टॉयलेट में लगाई गई। हालाँकि, सूचना मिलते ही प्रशासन ने वहाँ पहुँच कर तस्वीर को हटाया।

इन युवाओं ने 9 सितंबर को जिन्ना की तस्वीर के विरोध में प्रदर्शन किया था और खून से पत्र लिखकर पीएम मोदी से माँग की थी कि जिन्ना की तस्वीर को AMU से हटाई जाए। प्रशासन ने उनके ज्ञापन को केंद्र सरकार तक भेजे जाने का आश्वासन दिया था। रविवार को भाजपा ने फिर विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने घर में नजरबंद किए जाने के भी आरोप लगाए, जिसे प्रशासन ने नकार दिया है।

‘शाहरुख, अक्षय और सलमान को चुम्मा लेते नहीं देखा’: जानिए प्राची देसाई का पुराना वीडियो क्यों हो रहा वायरल

टेलीविजन जगत से बॉलीवुड में एंट्री करने वाली प्राची देसाई ने 12 सितंबर को अपना 33वाँ जन्मदिन सेलिब्रेट किया। उनके जन्मदिन के मौके पर उनके पुराने इंटरव्यू का एक वीडियो खूब खबरों में रहा। ये वीडियो बोल बच्चन फिल्म के प्रमोशन के वक्त का है। इसमें उन्होंने अजय देवगन, सलमान खान, अक्षय कुमार और शाहरुख खान के बारे में बात की थी।

प्राची ने उस इंटरव्यू में कहा था, “2 साल पहले तक (संभवत: 2010 के करीब) एक ट्रेंड था जब लोग सीन्स को बहुत गंभीरता से लेते थे। उन्हें लगता था कि वो सीन फिल्म को बेचने के लिहाज से उनकी फिल्म के लिए बहुत गंभीर हैं। मुझे लगता है वो करना गलत था। आज का ट्रेंड आइटम नंबर्स का है और संभव है कि दो साल बाद किसी और चीज का ट्रेंड हो। मुझे नहीं मालूम किस चीज का…लेकिन जाहिर है कुछ ऐसा आएगा जो लोगों को उत्साहित करेगा। “

अपने इंटरव्यू में वह बोलीं, “मैंने कभी भी अजय देवगन को होठों पर किस करते नहीं देखा। मैंने शाहरुख खान, अक्षय कुमार और सलमान खान को ऑन स्क्रीन किसिंग या लवमेकिंग सीन्स करते नहीं देखे। तो मुझे लगता है कि अगर ये आज के सुपरस्टार हैं और बिन ये सब किए फिल्म पा रहे हैं जो बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कर रही हैं। मुझे लगता है कि हम लड़कियाँ भाग्यशाली हैं कि हमें कुछ ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं किया जाता है जिसमें हम असहज हों या जो हमें पसंद न हो। तो मैं इस इंडस्ट्री के इस फेज से खुश हूँ। गर्व महसूस करती हूँ जहाँ आप जूही, काजोल और माधुरी जैसी चीजें जल्दी या बाद में कर सकते हैं।”

बता दें कि टेलीविजन व बॉलीवुुड अभिनेत्री प्राची देसाई ने अपना करियर मुख्य तौर पर जीटीवी के कसम सीरियल से शुरू किया था। इसके बाद वह बॉलीवुड में भी दिखीं। पिछले साल जब अजय देवगन ने बोल बच्चन फिल्म जिसमें कि वह भी हिरोईन थीं, उस फिल्म के 8 साल पूरे होने पर ट्वीट किया था और सिर्फ अमिताभ बच्चन की तारीफ की थी, तब प्राची ने नाराजगी जाहिर करते हुए ट्वीट लिखा था, “हे अजय देवगन, ऐसा लग रहा है कि आप हम बाकी के लोगों को टैग करना भूल गए। असिन, कृष्णा, असरानी जी, नीरज वोहरा जी और जीतू वर्मा, आप और हम सभी लोग इस फिल्म का हिस्सा थे जिन्होंने मिलकर इसे हिट किया।”

बढ़ सकती है नस्लीय हिंसा की घटनाएँ, हिंदुत्व के खिलाफ कॉन्फ्रेंस से सहमे हुए हैं USA के हिन्दू: अमेरिकी सीनेटर ने भी जताया डर

हिन्दू धर्म के खिलाफ अमेरिका में वामपंथियों द्वारा आयोजित ‘Dismantling Global Hindutva’ कॉन्फ्रेंस के बाद वहाँ हिन्दुओं के विरुद्ध नस्लीय हमले बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। ‘वैश्विक हिंदुत्व के टुकड़े-टुकड़े’ करने वाला दावा करने वाले इस कॉन्फ्रेंस ने हिन्दुओं के खिलाफ घृणा की भावना को और बढ़ावा दिया है, जिससे अमेरिका में रह रहे हिन्दुओं को डर है कि उनके खिलाफ नस्लीय हमलों में बढ़ोतरी हो सकती है।

दूरदर्शन के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने भी इस तरफ लोगों का ध्यान दिलाया है कि किस तरह हिंदुत्व को उखाड़ फेंकने के दावे के साथ बाकायदा एक वैश्विक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि इसमें कई विश्वविद्यालयों के नाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इसमें 50 से ज्यादा विश्वविद्यालयों के शामिल होने की बात है, लेकिन इसके पीछे दिमाग उन लोगों का है जो हिन्दुओं से घृणा करते हैं।

अमेरिका में कई जगहों पर इस कॉन्फ्रेंस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। उन हिन्दुओं का कहना है कि कई भारतीय व हिन्दू छात्र-छात्राएँ इन विश्वविद्यालयों में पढ़ते हैं, ऐसे में उनके खिलाफ घृणा फैलाए जाने के खतरनाक परिणाम हो सकते हैं। कई अन्य देशों में भी इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। आशंका है कि अन्य देशों में भी ऐसे कॉन्फ्रेंस आयोजित किए जा सकते हैं, इसीलिए वहाँ के हिन्दू सहमे हुए हैं।

अमेरिका के एक लोकप्रिय सीनेटर ने भी इसे एक नस्लीय कार्यक्रम करार दिया है। उन्होंने इसे हिन्दू-विरोधियों का जमावड़ा बताते हुए विश्वविद्यालयों से इसका लोगो हटाने का निवेदन किया। ओहियो के सीनेटर नीरज एंटनी ने कहा कि ये हिन्दूफ़ोबिया से ग्रसित कार्यक्रम है, जिसके खिलाफ लोगों को खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम अमेरिका में हिन्दुओं पर हमले का प्रतिनिधित्व करता है।

वो अमेरिकी इतिहास में सीनेटर चुने जाने वाले सबसे युवा हिन्दू हैं। Coalition of Hindus of North America (CoHNA) ने भी इस कॉन्फ्रेंस के खिलाफ 3.5 लाख से भी अधिक इमेल्स लिखे हैं। इस कॉन्फ्रेंस से जुड़े विश्वविद्यालयों, अकादमिक लोगों व अन्य हितधारकों को ये इमेल्स भेजे गए। इस कॉन्फ्रेंस पर आरोप है कि ये हिन्दुओं के साथ सदियों से हुए व हो रहे अत्याचार को दरकिनार कर उन्हें कट्टरपंथियों से जोड़ रहा है।

कुछ यूनिवर्सिटीज ने कहा है कि वो इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं, सिर्फ उनके कुछ फैकल्टज इसमें हिस्सा ले रहे हो सकते हैं। हिन्दुओं के खिलाफ एक व्यवस्थित तरीके से घृणा फ़ैलाने का अभियान चल रहा है। लोगों का कहना है कि जब अफगानिस्तान में तालिबानी शासन आने के बाद पूरी दुनिया को इस्लामी कट्टरवाद पर बहस करनी चाहिए, अलकायदा द्वारा किए गए 9/11 हमले की बरसी पर हिन्दुओं को बदनाम किया जा रहा है।

कुछ देशों में पहले से ही भारतीयों पर नस्लीय हमले होते रहे हैं और मार्च 2021 में केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस मुद्दे को यूके के साथ उठाया भी था। इसी तरह अमेरिका में भी हिन्दुओं पर हमले की ख़बरें आती रहती हैं। भारतीय-अमेरिकी समूह ने इस सम्बन्ध में आवाज़ भी उठाई थी। शरणार्थियों के खिलाफ हमलों व घृणा फ़ैलाने के मामले में अमेरिका को काफी काम करने की जरूरत है, ऐसा इन समूहों का मानना है।

बता दें कि इस कार्यक्रम में शामिल पैनलिस्टों में से एक आकांक्षा मेहता ने सम्मेलन में एक बार फिर कहा कि उनका लक्ष्य हिंदुत्व को खत्म करना है। इसके पीछे का तर्क देते हुए वह कहती हैं, “हिंदुत्व हिंदू धर्म नहीं है, यह बहुत खतरनाक हैं और यह हमें भविष्य में वहाँ नहीं ले जाएगा जहाँ हम जाना चाहते हैं।” एक अन्य पैनलिस्ट ने कहा कि किन्नरों और ट्रांसजेंडर के साथ हिंदुत्व की राजनीति की नजदीकियाँ बढ़ रही हैं, जो हाशिए पर चल रहे समुदायों के खिलाफ हिंदुत्व के बढ़ने का एक और संकेत है।

सबको सरकारी नौकरी, तंबाकू-बीड़ी, फेयर ऐंड लवली… बिहार में उम्मीदवार कर रहे वादे भरपूर: पोस्टर वायरल

बिहार में त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रशासन ने भी शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न कराने के लिए तैयारी तेज कर दी है। इस बीच चुनावी मैदान में खड़े उम्मीदवारों को लेकर सोशल मीडिया में अजीबोगरीब खबरें सामने आ रही है। मुजफ्फरपुर के ग्राम पंचायत राज मकसूदा के प्रधान पद के उम्मीदवार तुफैल अहमद का घोषणा-पत्र पढ़ने के बाद हर कोई हैरान रह गया। सोशल मीडिया पर अब इसकी तस्वीर वायरल हो रही है, अजीबोगरीब घोषणाएँ पढ़ लोग पेट पकड़कर हँसने पर मजबूर हो गए हैं।

इंटरनेट पर इन दिनों पंचायत चुनाव के लिए नामांकन भरने वाले उम्मीदवार युवा मोहम्मद तुफैल अहमद की घोषणाओं का पोस्टर जमकर वायरल हो रहा है। उन्होंने प्रधानी जीतने के लिए गाँव वालों से गजब के वादे किए हैं। घोषणा पत्र का स्लोगन भी दिलचस्प है, इसमें लिखा है, “आप रखिए हम पर विश्वास, एक-एक का होगा विकास।” आगे लिखा है, “ग्राम पंचायत राज मकसूदा से मुखिया पद के भावी उम्मीदवाद सुयोग्य, शिक्षित एवं युवा मोहम्मद तुफैल अहमद।”

सात मुख्य वादे

वायरल पोस्ट में गाँव वालों से सात मुख्य वादे किए गए हैं। ऐसे वादे शायद ही आज तक किसी उम्मीदवार द्वारा किए गए होंगे। ये है उम्मीदवार प्रधान के मुख्य वादे-

  • प्रधान बनते ही पूरे गाँव को सरकारी नौकरी। 
  • गाँव में हवाई अड्डे की सुविधा।
  • सभी सिंगल युवाओं को अपाचे बाइक। 
  • लड़कियों के लिए फ्री ब्यूटी पार्लर एवं एक सिलाई मशीन की व्यवस्था। 
  • नल-जल योजना में पानी की जगह दूध का सप्लाई किया जाएगा।
  • बुजुर्गों के लिए प्रतिदिन एक-एक पैकेट तंबाकू एवं बीड़ी का व्यवस्था। 
  • रोडों के साथ-साथ खेतों में टाइल्स लगाकर शहरीकरण करना। 

सोशल मीडिया पर मजे ले रहे लोग

इस घोषणा पत्र के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स काफी मजे ले रहे हैं और तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं।

अरुण कुमार पांडेय ने लिखा, पंचर पुत्र तुफैल अहमद पाकिस्तान छोड़कर बिहार चले आए चुनाव लड़ने के लिए।

वहीं ठाकुर रणजीत सिंह राठौड़ ने लिखा, “मित्रो ये हैं पंचर पुत्र तुफैल अहमद मुजफ्फरपुर बिहार से। इसे तो पाकिस्तान से चुनाव लड़ना चाहिए। इसका घोषणा-पत्र पढ़ कर इमरान खान कोमा में हैं।”

श्रीकृष्ण शर्मा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “मोहम्मद तुफैल अहमद जैसे उम्मीदवार यदि जीत गए तो पूरे गाँव की ‘पौ-बारह’ है।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “बिहार के ग्राम प्रधान चुनाव घोषणा-पत्र में आप भी कुछ आश्वासन जोड़ सकते हो। मेरी तरफ से ये रहा- मुखिया नल जल योजना में पानी की जगह दारू सपलाई का वादा करते हैं।”

एक और पोस्टर वायरल

यह घोषणा-पत्र ग्राम पंचायत राज भवराजपुर के भावी मुखिया प्रत्याशी राहुल कुमार का है। इसमें राहुल को दबंग मुखिया प्रत्याशी बताया गया है। राहुल के घोषणा-पत्र में भी तुफैल के जैसे ही वादे किए गए हैं। अब नजर डालते हैं ‘राहुल भाई’ के घोषणा पत्र पर। इन्होंने भी जनता से 7 वादे किए हैं।

  • मुखिया बनने के बाद पूरे पंचायत के युवकों को पकड़ पकड़ कर सरकारी नौकरी दिया जाएगा।
  • हर गाँव में हवाई अड्डा।
  • गाँव के सिंगल युवक को एक-एक अपाची बाइक और प्रतिदिन 8000 सीधे खाते में।
  • प्रत्येक लड़की को एक-एक किलो फेयर ऐंड लवली क्रीम प्रति दिन।
  • नल-जल योजना के तहत पानी की जगह दूध बहेगा।
  • रोड के साथ-साथ खेतों में भी टाइल्स लगा दिया जाएगा।
  • नशेड़ियों को नशा के लिए देश-विदेश से चरस गांजा मँगाया जाएगा।

नीचे लिखा हुआ है, “चाहते हैं परिवर्तन तो कीजिए समर्थन।” सोशल मीडिया यूजर ने इसे शेयर करते हुए लिखा, “भारी मतों से विजयी बनाएँ।” इसके साथ ही उन्होंने हँसने वाला इमोजी भी लगाया है। हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि वायरल हो रहे ये पोस्टर्स असली हैं या फोटोशॉप, मगर यह सोशल मीडिया पर लोगों का खूब मनोरंजन कर रहे।

T20 वर्ल्ड कप के बाद विराट कोहली नहीं होंगे कप्तान, रोहित शर्मा को मिलेगी कमान: जानिए क्यों लग रहे कयास, क्या कहते हैं आँकड़े

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस साल होने वाले T-20 वर्ल्ड कप के बाद विराट कोहली की जगह रोहित शर्मा का भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान बनना तय है। रोहित शर्मा पिछले 9 वर्षों से IPL में ‘मुंबई इंडियंस’ के कप्तान रहे हैं और उनकी कप्तानी में टीम ने 5 बार ट्रॉफी फतह की है। बताया जा रहा है कि जहाँ टेस्ट्स में विराट कोहली कप्तान बने रहेंगे, लिमिटेड ओवर्स में ये जम्मेदारी रोहित शर्मा को सौंपी जाएगी।

विराट कोहली भी अब बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं, इसीलिए लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट में उन्होंने कप्तानी छोड़ने का निर्णय लिया है। दुनिया के महानतम बल्लेबाजों में गिने जाने वाले विराट कोहली फ़िलहाल तीनों फॉर्मेट में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान हैं और टेस्ट क्रिकेट में उनके नेतृत्व में भारतीय टीम को कई ऐतिहासिक जीत भी मिली है। रोहित शर्मा इससे पहले इक्का-दुक्का मौकों पर भारतीय टीम की कप्तानी संभाल चुके हैं।

उनके रिकॉर्ड इस मामले में भी काफी अच्छा है। इस बार T-20 वर्ल्ड कप UAE में होना है, जिसके बाद ये बदलाव किया जाएगा। TOI ने एक सूत्र के हवाले से जानकारी दी है कि इस बदलाव की घोषणा विराट कोहली खुद करेंगे, क्योंकि वो अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। वो फिर से दुनिया के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज का अपना ख़िताब वापस लेना चाहते हैं। 32 वर्षीय विराट कोहली ने अब तक 95 ODIs में भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी की है।

इनमें से 65 में टीम को जीत मिली है, जबकि 27 मैचों में हार का सामना करना पड़ा है। ODIs में विराट कोहली की जीत का प्रतिशत 70.43% रहा है। वहीं T20Is की बात करें तो उन्होंने 45 मैचों में भारतीय क्रिकेट टीम की कमान संभाली है, जिसमें टीम को 27 में कामयाबी मिली और 14 मैचों में उसे मुँह की खानी पड़ी। वहीं विराट कोहली अब तक 10 ODIs में भारतीय टीम की कप्तानी कर चुके हैं।

इनमें से 8 मौकों पर जीत को सफलता मिली और 2 बार हार का सामना करना पड़ा। 34 वर्षीय रोहित शर्मा ने 19 T20Is मैचों में भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी की है, जिनमें से 15 में टीम को जीत मिली और 4 मैचों में हार का सामना करना पड़ा। विराट कोहली का मानना है कि तीनों फॉर्मेट में कप्तान से उनकी बल्लेबाजी पर असर पड़ रहा है। फिटनेस को देखते हुए वो 6-7 साल और आराम से क्रिकेट खेल सकते हैं और भारतीय बल्लेबाजी की धुरी बन सकते हैं।

विराट कोहली की इसीलिए भी आलोचना होती रही है क्योंकि मुख्य ICC ट्रॉफीज लाने में वो असफल रहे हैं। इसी साल जून में भारतीय क्रिकेट टीम को ‘वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप’ में न्यूजीलैंड के हाथों हार का सामना करना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पिछले कुछ महीनों में विराट कोहली और रोहित शर्मा के साथ BCCI की कुछ बैठकें भी हुई हैं, जिनमें इस बदलाव पर चर्चा हुई। व्हाइट बॉल क्रिकेट में जल्द ही ये बदलाव देखने को मिल सकता है।

विराट कोहली ने अब तक 65 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की है, जिनमें से 38 में टीम को जीत मिली है। वो देश के अब तक के सबसे सफल टेस्ट कप्तान भी हैं। IPL की बात करें तो विराट कोहली ने जहाँ 132 मैचों में कप्तानी कर के 62 बार अपनी टीम RCB को जिताया है, रोहित शर्मा के मामले में ये आँकड़ा 123 में 74 का है। कोहली को 66 तो रोहित शर्मा को 49 मौकों पर हार नसीब हुई है।

2007 में ऐसा हो चुका है जब टेस्ट टीम की कप्तानी स्पिनर अनिल कुंबले के पास थी, जबकि बाकी दोनों फॉर्मैट्स में महेंद्र सिंह धोनी के हाथों में कमान थी। ऑस्ट्रेलिया में स्टीव वॉ और मार्क टेलर अलग-अलग फॉर्मैट्स के कप्तान थे। पिछले दशक में ही देखें तो दक्षिण अफ्रीका में एबी डिविलियर्स और फाफ डुप्लेसी कप्तान थे। ऑस्ट्रेलिया ने तो तीनों फॉर्मैट्स में अलग-अलग कप्तान बना डाले। इंग्लैंड में भी जो रुट को टेस्ट की और मॉर्गन को बाकि फॉर्मैट्स की कप्तानी दी गई।

अंतिम संस्कार में भी कुत्ते ने नहीं छोड़ा बंगाल BJP वर्कर अभिजीत सरकार का साथ, पत्नी ने बताया था- माँ के सामने की गई थी हत्या

पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा के दौरान टीएमसी के गुंडों द्वारा बेरहमी से मारे गए भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार के अंतिम संस्कार की तस्वीरें रविवार (सितंबर 12, 2021) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर शेयर की गईं। तस्वीरों में एक कुत्ता भी दिख रहा। यह अभिजीत सरकार का पालतू कुत्ता है। इसका जिक्र उन्होंने मौत से पहले बनाए गए अपने वीडियो में भी किया था। बंगाल बीजेपी कार्यकर्ता प्रत्युष सिंह के मुताबिक, कुत्ता अभिजीत सरकार के अंतिम संस्कार की जगह से हटने के लिए तैयार नहीं हुआ। वह वहीं पर बैठा रहा।

2 मई को भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार ने फेसबुक लाइव के माध्यम से TMC के गुंडों की हरकतों के बारे में बताया था। उसके कुछ ही देर बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। उन्हें पता भी नहीं था कि फेसबुक पर लाइव कैसे आते हैं, लेकिन उन्होंने किसी तरह वीडियो बनाया और बताया कि TMC के गुंडे लगातार बमबारी कर रहे हैं और उन्होंने उनके घर और दफ्तर को तहस-नहस कर डाला है। उन्होंने कहा था कि उनकी एक ही गलती है कि वे भाजपा कार्यकर्ता हैं। अभिजीत सरकार ने बताया था कि वे कुत्तों से काफी प्यार करते थे।

उन्होंने कई बेसहारा कुत्तों को पाला था, जिनका कोई नहीं था। उनमें से एक मादा कुत्ते ने कुछ बच्चों को भी जन्म दिया था। अभिजीत सरकार ने एक कुत्ते की तरफ इशारा करते हुए कहा था कि गुंडों ने इसके बच्चों को भी नहीं बख्शा और उन सभी को मार डाला। उन्होंने रोते-रोते इन हरकतों के बारे में बताया था। एक अन्य वीडियो में उन्होंने बताया था कि उनके घर और NGO दफ्तर को तोड़ डाला गया है। कुत्ते के 5 बच्चे को मार डाला गया।

उन कुत्तों के बच्चों की तस्वीरें अभिजीत सरकार ने अपने फेसबुक हैंडल से शेयर भी की थी। उन्होंने बताया था कि कोलकाता के बेलिहाता में वॉर्ड संख्या 30 से हिंसा की शुरुआत हुई और परेश पॉल व स्वप्न समंदर जैसे तृणमूल नेताओं के नेतृत्व में ये सब हुआ। अभिजीत सरकार ने फेसबुक के वीडियो के माध्यम से पूछा था कि क्या ये लोग मनुष्य भी हैं? उन्होंने पूछा कि उन्हें क्यों नुकसान पहुँचाया जा रहा है, उनकी क्या गलती है?

इन दोनों वीडियो के अपलोड करने के बाद पीट-पीट कर उनकी हत्या कर दी गई। उन्हें उनके घर के बाहर घसीटा गया, बेरहमी से पीटा गया और तार से गला घोंट दिया गया। घर से कुछ दूरी पर उनका शव मिला था। अभिजीत सरकार की पत्नी जो इस घटना की चश्मदीद भी हैं ने एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया था, “भीड़ ने उनके गले में सीसीटीवी कैमरे का तार बाँध दिया। गला दबाया। ईंट और डंडों से पीटा। सिर फाड़ दिया और माँ के सामने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। आँखों के सामने बेटे की हत्या होते देख उनकी माँ बेहोश होकर मौके पर ही गिर गईं।”

‘गर्दन कट जाए पर हर-हर महादेव नहीं बोलेंगे, अपने नबी के अलावा किसी का नाम नहीं लेंगे’: मुस्लिमों की राकेश टिकैत को दो टूक

मुजफ्फरनगर में हुई किसान महापंचायत में BKU नेता राकेश टिकैत ने ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगाया और कहा कि मुस्लिम भी ‘हर-हर महादेव’ का नारा लगाएँगे तो भाईचारा बढ़ेगा। हालाँकि, मुस्लिमों ने उनके इस प्रस्ताव को नकार दिया है। अब सहारनपुर के मुस्लिमों ने उन्हें जवाब देते हुए कहा है कि भले ही हमारी गर्दन कट जाए, लेकिन हम ‘हर-हर महादेव’ नहीं बोलेंगे। मुस्लिमों ने इस सम्बन्ध में ‘BGT News’ से बात की।

एक मुस्लिम युवक ने कहा कि अल्लाह एक ही है, इसीलिए मुस्लिम सिर्फ ‘अल्लाहु अकबर’ ही बोलेंगे, ‘हर-हर महादेव’ नहीं। ‘हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे’ पर उक्त युवक ने कहा कि राकेश टिकैत भले ‘अल्लाहु अकबर’ बोलें, लेकिन हम अपने नबी के अलावा किसी और का नाम नहीं लेंगे। वहीं एक मुस्लिम बुजुर्ग ने भी कहा कि हमारा मजहब जिस चीज के लिए मना करता हो, वो हम कैसे बोल सकते हैं?

बुजुर्ग ने कहा कि ‘किसान आंदोलन’ में मुस्लिम भी जुड़े हुए हैं, इसीलिए राकेश टिकैत ने ऐसा कहा होगा। वहीं एक अन्य मुस्लिम व्यक्ति ने कहा कि मुजफ्फरनगर में दंगे के कारण हिन्दू-मुस्लिम में दरार थी, जिसके लिए राकेश टिकैत ने ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगाया। उसने कहा कि प्यार करने के कई तरीके हैं, नारा लगाना सिर्फ मुद्दा नहीं है। उसने कहा कि राकेश टिकैत ने सिर्फ हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए ऐसा बोला।

एक अन्य मुस्लिम युवक ने कहा कि राकेश टिकैत ने भाईचारे के लिए एक संदेश दिया, लेकिन हम ‘हर-हर महादेव’ नहीं बोलेंगे। एक अन्य मुस्लिम बुजुर्ग ने कहा कि राकेश टिकैत ने जबरदस्ती किसी से नहीं कहा कि वो ‘हर-हर महादेव’ बोलें, ये गोदी मीडिया की साजिश है जो प्यार-मोहब्बत की बात पर भी ज़हर फैलाती है। उसने कहा कि 7-8 वर्ष पहले भी एक पंचायत हुई थी, जिसे भाजपा ने आगे बढ़ाया है।

राकेश टिकैत के ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘हर-हर महादेव’ के नारे पर मुस्लिमों ने दी प्रतिक्रिया

उक्त मुस्लिम बुजुर्ग ने कहा कि वो हिन्दुओं के नमस्ते का जवाब नमस्ते में देता है और कई हिन्दू भी आकर ‘अस्सलाम वालेकुम’ भी कहते हैं। वहीं वहाँ मौजूद कुछ हिन्दुओं ने राकेश टिकैत के बयान को भाईचारे का प्रतीक बताया। लेकिन, एक अन्य मुस्लिम युवक ने भी स्पष्ट किया कि वो ‘हर-हर महादेव’ नहीं बोलेगा। हालाँकि, एक मुस्लिम बुजुर्ग ने कहा कि उन्हें इससे कोई समस्या नहीं है। कुछ मुस्लिम बुजुर्गों ने कहा कि अगर हिन्दुओं का कोई नेता अल्लाह का नारा लगाता है तो उन्हें महादेव के नारे से दिक्कत नहीं।

कुछ अन्य मुस्लिम लोगों ने कहा कि भाईचारे के लिए सब कुछ कहा जा सकता है, लेकिन वो ‘हर-हर महादेव’ का नारा नहीं लगाएँगे। उन्होंने कहा कि विचारधारा के मामले में वो राकेश टिकैत के साथ हैं। वहाँ उपस्थित कुछ मुस्लिम दुकानदारों ने कहा कि अगर किसान नेता ‘अल्लाहु अकबर’ बोलते हैं तो वो ‘हर-हर महादेव’ बोल सकते हैं। लोगों ने कहा कि ये नारा महेंद्र टिकैत ने दिया था। उन्होंने कहा कि मीडिया तो कुछ भी बुलवा कर दो फाड़ करवा देती है।

इससे पहले मुजफ्फरनगर के शहीद हुसैन ने कहा था, “मुस्लिम हर हर महादेव नहीं बोलेगा। यह आज का कोई एकांकी नाटक नहीं है। जब महात्मा गाँधी सक्रिय राजनीति में आए, तब वो भी हिंदू-मुस्लिम भाई चारा बढ़ाने के लिए, रोजाना ईश्वर अल्लाह तेरो नाम सबको सन्मति दे भगवान गाया करते थे, लेकिन मुस्लिमों ने इसे कभी भी नहीं गाया। यहाँ तक की देश का विभाजन भी हो गया, तभी भी इसे किसी भी मुस्लिम ने नहीं गाया।”