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गृह मंत्रालय ने सस्पेंड किया 9 NGO का FCRA लाइसेंस, ईसाई-इस्लामी समूहों के अलावा पेगासस से भी जुड़े हैं तार

गैर लाभकारी संगठनों (NGO) की आड़ में चल रहे ईसाई और इस्लामी संगठनों पर सख्ती बरतते हुए गृह मंत्रालय ने अब तक इस साल में 9 और पिछले डेढ़ महीने में 6 संगठनों के विदेशी फंडिंग लाइसेंस को निलंबित कर दिया है। जानकारी के मुताबिक एफसीआरए के तहत अब सिर्फ 22,708 सक्रिय एनजीओ और अन्य संघ पंजीकृत हैं।

मालूम हो कि ये एनजीओ लंबे वक्त से फंड का दुरुपयोग करने के कारण जाँच के दायरे में थीं। इससे पहले 27 अगस्त को सुन्नी नेता शेख अबूबकर अहमद से जुड़े केरल के एक NGO, ‘मरकज़ुल इघासथिल कैरियाथिल हिंडिया’ का एफसीआरए लाइसेंस कैंसिल किया गया था। उन पर भी फंड के दुरुपयोग और 2019-20 में वार्षिक एफसीआरए रिटर्न के दौरान तथ्यों को गलत ढंग से पेश करने का आरोप था।

एनजीओ को 146 करोड़ रुपए विदेशों से मिले थे। 35 दानदाता थे जिनमें से 28 केवल यूएई से थे जबकि अन्य ओमान, तुर्की, और ब्रिटेन से थे। इस एनजीओ से पहले लखनऊ की अल हस एड्यूकेशन एंड वेल्फेयर ऑर्गेनाइजेशन पर गाज गिरी थी। फिर हरियाणा के मेवात ट्रस्ट एड्यूकेशनल वेल्फेयर का भी लाइसेंस 180 दिन के लिए सस्पेंड हुआ था।

ईसाई समूहों की बात करें तो ओडिशा की ‘पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन ऑफ एम्पॉवरमेंट ऑफ ट्राइबल एंड हेवनली ग्रेस मिनिस्ट्रीज’ और मदुरई की ‘रुश फाउंडेशन’ को निलंबन का सामना करना पड़ा था। इसके बाद बेंगलुरु स्थित ‘सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज’ और आंध्र प्रदेश से बाहर संचालित होने वाला मिशनरी संगठन ‘होली स्पिरिट मिनिस्ट्रीज’ शामिल है।

पेगासस से जुड़े है तार

बता दें कि गृह मंत्रालय द्वारा जिन एनजीओ के FCRA अप्रूवल निलंबित हुए हैं उनमें कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव नामक एनजीओ भी शामिल है। इसके FCRA अप्रूवल को इस साल जून में सस्पेंड किया गया था। ये सारी जानकारी टाइम्स ऑफ इंडिया में सोमवार को प्रकाशित हुई है। CHRI के अलावा मंत्रालय ने पूरे साल भर में 8 अन्य (कुल 9) NGO को अप्रूवल देने से मना किया है।

ज्ञात हो कि जिस CHRI के FCRA अप्रूवल को सस्पेंड किया गया था उसमें एक सदस्य मदन लोकुर भी हैं। लोकुर वहीं शख्स हैं जिन्हें बंगाल सरकार ने कथित पेगासस जासूसी मामले में जाँच के लिए गठित आयोग का नेतृत्व करने के लिए कहा था। मदन लोकुर सीएचआरआई की कार्यकारी समिति के सदस्य हैं। ये एक ऐसी संस्था है जिसे साल 2021 में अमेरिकी विदेश विभाग (अमेरिकी दूतावास), नई दिल्ली में ब्रिटिश उच्चायोग, कनाडा के उच्चायोग से भारी योगदान मिला।

यूएस की ओर से इस संस्था को किए गए योगदान का उद्देश्य ‘भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों में बंदियों के लिए वकालत और आउटरीच कार्यक्रम’ चलाना था। यूके के लिए ये ‘भारत में न्याय की गति पर शोध और विदेशी राष्ट्रीय बंदियों और अपराध के शिकार लोगों पर उनका प्रभाव’ जानने के लिए था। वहीं कनाडा के लिए योगदान “Reimbursement of Expenditure” के उद्देश्य से था। इनके अलावा, सीएचआरआई को केलिडोस्कोप डायवर्सिटी ट्रस्ट, फ्रेडरिक नौमैन स्टिफ्टंग-जर्मनी, द हैन्स सीडल फाउंडेशन और अन्य से भी योगदान मिला है।

एनजीओ के लिंक द वायर के फाउंडिंग एडिटर सिद्धार्थ वरदराजन से भी हैं। इस समूह की एक पहल साउथ एशिया मीडिया डिफेंडर्स नेटवर्क (SAMDEN) भी है। इस SAMDEN के कोर मेंबर्स में बांग्लादेश के महफूज अनम, नेपाल के हिमाल की कनक मणि, सलिल त्रिपाठी, मृणाल पांडे, सिद्धार्थ वरदराजन,संजोय हजारिका, न्यूयॉर्क टाइम्स के पूर्व पत्रकार, जॉन जुब्रजाइकी (सिडनी के पत्रकार) शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पेगासस मामले में जाँच के लिए 2 सदस्यीय आयोग गठित किया था। उस आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन लोकुर को सौंपी गई थी।

हिंदू इलाकों में पर्चे बँटवाती, मुस्लिम लड़कों से शादी करवाती: उज्जैन की शातिर शिरीन हुसैन से मिलिए

पैसे लेकर उज्जैन में यूनाइटेड इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट में नियुक्ति करने की आरोपित शिरीन हुसैन की गिरफ्तारी के बाद कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। वह अखबारों में पैम्पलेट डालकर महिलाओं को फँसाने का काम करती थी। ये पैम्पलेट हिंदू इलाकों में बाँटे जाते थे। पैम्पलेट में वह महिला उत्पीड़न, जमीनी विवाद, घरेलू हिंसा, श्रमिक शोषण, पुलिस द्वारा FIR दर्ज न करने जैसे मामलों में आवाज उठाने का दावा करती थी।

शिरीन इस तरह के हालात में लोगों को खुद से संपर्क करती। वह घरेलू हिंसा से परेशान लोगों से संपर्क करती और प्रताड़ित करने वाले लोगों से संपर्क कर उन्हें ब्लैकमेल करती। उनसे मोटी रकम वसूलती थी। शिरीन को 11 सितंबर को नागझिरी पुलिस ने धारा 420, 468, 471 व 506 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। शिरीन खुद को यूनाइटेड इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट का राष्ट्रीय महासचिव बताती थी, जबिक उसे पहले ही बर्खास्त कर दिया गया था। 

पुलिस ने कोर्ट में पेशी के बाद रविवार (सितंबर 12, 2021) को उसे चार दिन के रिमांड पर लिया है। पूछताछ के दौरान शिरीन हुसैन पुलिस को भी बरगला रही है। मधु यादव के ऊपर कई आरोप लगा रही है।

यूनाइटेड इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट मानव अधिकार की राष्ट्रीय अध्यक्ष उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी मधु यादव ने बताया कि शिरीन हुसैन उनकी संस्था से 2019 में जुड़ी थी। तब शिरीन हुसैन को मध्य प्रदेश प्रदेश का सचिव नियुक्त किया गया था। लेकिन शिरीन हुसैन को नियुक्ति के दो-तीन माह बाद ही संस्था की अन्य महिला सदस्यों से विवाद के बाद हटा दिया गया था। उसने 30 लोगों से 60-60 हजार रुपए लेकर नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र जारी किए थे। मधु यादव ने छह सितंबर को उसके खिलाफ कार्रवाई को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव को एक ज्ञापन सौंपा था।

रिपोर्ट के अनुसार वह मुस्लिम लड़कों को शादी के लिए हिंदू लड़कियों से मिलवाती थी। पुलिस इसकी भी जाँच कर रही है। शिरीन हुसैन इतनी शातिर है कि वह बुजुर्गों और अधेड़ लोगों की शादी का ठेका लेती थी। उन्हें युवतियों से मिलाती और शादी के नाम पर पैसा लेती थी। इसके बाद उन युवतियों से बुजुर्गों के खिलाफ केस करवाती और पैसे वसूलती। इन आरोपों की जाँच भी पुलिस कर रही है।

लोगों के बीच अपना रुतबा जमाने के लिए शिरीन हुसैन सोशल मीडिया पर अधिकारियों के साथ तस्वीर पोस्ट करती थी। गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले भी वह उज्जैन में कुछ बड़े अधिकारियों से मिली थी। शिरीन के गिरफ्तार होते ही कॉन्ग्रेस और मुस्लिम नेता उसे बचाने के लिए एक्टिव हो गए हैं। इन सभी को शिरीन के घर के बाहर लगे सीसीटीवी फुटेज में पकड़े जाने का डर है। शिरीन हुसैन के घर से कुछ संदिग्ध दस्तावेज भी मिले हैं, जिसकी पुलिस जाँच कर रही है।

शिरीन हुसैन की शादी अनाम हुसैन के साथ हुई है। दोनों की यह दूसरी शादी है। अनाम राजनीतिक कार्यक्रमों में साउंड सिस्टम लगाने का काम करता है। दोनों ने शादी के बाद पैसे भी खूब जमा किए हैं। अनाम और शिरीन लग्जरी कारों से घूमते हैं। इनके नेताओं और बड़े लोगों से भी संबंध हैं।

‘अल्लाह की लानत है तेरे ऊपर, इतनी भी नीचता अच्छी नहीं’: भगवान गणेश के साथ अर्शी खान ने शेयर की बोल्ड तस्वीर, हुईं ट्रोल

‘बिग बॉस’ की एक्स कंटेस्टेंट अर्शी खान गणेश चतुर्थी के मौके पर गणपति बप्पा के पूजन के दौरान अपने बोल्ड लुक को लेकर सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स के निशाने पर आ गई हैं। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं, जिसमें वह काफी बोल्ड कपड़ों में नजर आ रही हैं। अर्शी ने कैप्शन में लिखा है, ”सभी को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएँ। असम लुक के लिए डिजाइनर स्नेहा का धन्यवाद।”

नौशाद खान नाम के यूजर ने ट्विटर पर लिखा, ”इतनी भी नीचता अच्छी नहीं है मैडम। ये सबसे बड़ा गुनाह है।”

एक यूजर ने कहा, ”ऐसे फालतू के ढोंग ना किया करो। तुम जानबूझ के ऐसा कर रही है, ताकि इंडिया में बनी रहो। तू यहाँ के रहमो करम पर पल रही है। हिंदू संस्कृति में ऐसे वाहियात कपड़े पहन कर पूजा नहीं की जाती है। दूसरी बात फोटो ​लेने के लिए और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए भगवान का सहारा ना लें।”

इंस्टाग्राम पर फरहान खान नाम के एक यूजर ने लिखा, ”अल्लाह की लानत है तेरे ऊपर।”

साभार : instagram

इस ट्रोलिंग पर अर्शी खान बुरी तरह भड़क गई हैं और उन्होंने अपना एक वीडियो शेयर कर ट्रोल्स को जवाब दिया है। अर्शी ने कहा है कि उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता और आगे भी वह सभी धर्मों के त्योहार मनाती रहेंगी। अर्शी ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर कहा, “भारत में हम सभी फेस्टिवल खुशी के साथ मनाते हैं। मेरे हिंदू दोस्त मेरे साथ ईद मनाते हैं और मैं उनके साथ गणपति और दिवाली। लेकिन जब मैंने गणपति की पूजा करते हुए अपनी तस्वीरें शेयर की तो लोग इस पर आपत्ति जताने लगे। कुछ लोग कह रहे हैं कि मैंने पब्लिसिटी के लिए यह सब किया है तो कुछ कह रहे हैं कि ये मेरा त्योहार ही नहीं हैं। कुछ लोगों ने मेरे धर्म पर भी सवाल उठाए हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि आप लोग मुझे मत सिखाएँ कि मुझे क्या करना है और क्या नहीं। मुझे जो अच्छा लगेगा मैं करूँगी। जिसे भी मेरे कमेंट बॉक्स में हिन्दू-मुसलमान करना है वो दफा हो जाए।

बता दें कि अर्शी खान से पहले गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करने पर सैफ अली खान का पूरा परिवार ट्रोलर्स के निशाने पर आ गया था। उन्होंने करीना कपूर खान और सारा अली खान की पोस्ट को जमकर ट्रोल किया और उन्हें गालियाँ दी थीं।

‘ये है कॉन्ग्रेस की तकदीर…’: पेट्रोल-डीजल के बहाने बैलगाड़ी पर सवार हो जा रहे थे कर्नाटक विधानसभा, 2 MLA गिरे

सोमवार (सितंबर 13, 2021) को कर्नाटक विधानसभा के मॉनसून सत्र का पहला दिन था। पेट्रोल-डीजल की कीमतों की ओर ध्यान खींचने के लिए विपक्षी दल कॉन्ग्रेस के कई नेता बैलगाड़ी से सदन पहुँचे। इनमें विपक्ष के नेता सिद्धरमैया और प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार भी शामिल थे। लेकिन इस दौरान एक ऐसा वाकया हुआ जिसने नेटिजन्स को सोशल मीडिया में कॉन्ग्रेस का मजाक बनाने का मौका दे दिया।

विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई धक्का-मुक्की में कॉन्ग्रेस के दो विधायक वेंकटरमणप्पा और बीके संगमेश बैलगाड़ी से गिर गए। आदर्श हेगड़े ने इस क्लिप को शेयर करते हुए लिखा, “ये है कॉन्ग्रेस पार्टी की तकदीर… हमेशा गिरते पड़ते रहते हैं। आज कर्नाटक कॉन्ग्रेस ने बैलगाड़ी पर सवार होकर विधानसभा तक विरोध मार्च निकाला था। लेकिन विधानसभा पहुँचने से पहले ही उनके दो विधायक गिर गए।”

आदर्श ने आगे लिखा, “ऐसा लगता है कि इन बैलों को भी कॉन्ग्रेस की नौटंकी अच्छी नहीं लगी।”

वहीं एक अन्य यूजर ने ओवरलोडिंग के लिए पुलिस से कार्रवाई करने की अपील की।

एक यूजर ने लिखा कि वो आशा करते हैं कि बैल सुरक्षित हों।

प्रदर्शन का उद्देश्य राज्य विधानसभा सत्र के पहले दिन बढ़ती महँगाई को रोकने में सत्तारूढ़ सरकार की विफलता को उजागर करना था। शिवकुमार ने कहा, “भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार घरेलू वस्तुओं की बढ़ी हुई कीमतों में कमी नहीं कर रही है। देश भर में कई विरोधों के बावजूद सरकार अपने फैसले पर अड़ी हुई है।”

हालाँकि शिवकुमार ने दावा किया था कि केवल वह और सिद्धारमैया ही विरोध में भाग लेंगे, लेकिन प्रदर्शन में अन्य कॉन्ग्रेस विधायकों की भी भागीदारी देखी गई। उन्होंने कहा था, “सोमवार को भारी यातायात की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए, केवल मैं और सिद्धारमैया ही बैलगाड़ियों पर चलेंगे और विधानसभा के परिसर में विरोध-प्रदर्शन करेंगे।”

‘AAP’ को ईडी ने दिया नोटिस, पार्टी ने बीजेपी पर मढ़ा राजनीतिक साजिश का आरोप: 2014 का मनी लॉन्ड्रिंग मामला

प्रवर्तन निदेशालय ने आम आदमी पार्टी को शेल कंपनियों से चंदा माँगने के मामले में नोटिस भेजा है। इसको लेकर ‘आप’ के प्रवक्ता राघव चड्ढा ने सोमवार (13 सितंबर) को केंद्र सरकार पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी को मोदी सरकार की पसंदीदा एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय से नोटिस मिला है।

चड्ढा ने कहा कि बीजेपी AAP के खिलाफ राजनीतिक साजिश कर रही है। इस मामले पर हम आज दोपहर को प्रेस कॉन्‍फ्रेंस करेंगे। उन्‍होंने ट्वीट किया, “आम आदमी पार्टी को मोदी सरकार की फेवरेट एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय से लव लेटर मिला है। मैं AAP के खिलाफ बीजेपी की राजनीतिक साजिश का पर्दाफाश करने के लिए दोपहर 1.30 बजे AAP मुख्‍यालय पर प्रेस कॉन्‍फ्रेंस को संबोधित करूँगा।”

आम आदमी पार्टी को शेल कंपनियों से मिले 2 करोड़ रुपए, आरोपित गिरफ्तार

मामला अप्रैल 2014 का है जब आम आदमी पार्टी को 4 फर्जी कंपनियों के जरिए चंदा मिला था। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) ने शिकायत दर्ज कराई थी कि चार कंपनियों ने कथित तौर पर 5 अप्रैल 2014 को ‘आप’ को 50-50 लाख रुपए का दान दिया था।

पुलिस ने बताया कि आरओसी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि चारों कंपनियाँ गोल्डमाइन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड, स्काईलाइन मेटल एंड अलॉयज प्राइवेट लिमिटेड, सन विजन एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड और Infolance Software Solutions pvt Ltd नकली थी और उन पतों पर स्थित नहीं थी, जो इसके रिकॉर्ड में थे। इसके अतिरिक्त, कंपनियों को शेयर प्रीमियम राशि के रूप में बड़ी मात्रा में धन राशि प्राप्त हुई थी, लेकिन धन के स्रोतों का खुलासा नहीं किया गया था।

आरओसी ने कंपनियों के सभी निदेशकों को नोटिस जारी किया था, लेकिन इनमें से स्काईलाइन मेटल एंड अलॉयज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक दीपक अग्रवाल को छोड़कर किसी ने भी इसका जवाब नहीं दिया था। वे एजेंसी के समक्ष पेश हुए थे। हालाँकि, उन्होंने दावा किया था कि हस्ताक्षर और फोटोग्राफ, जिसके आधार पर उनके नाम पर डीआईएन जारी किया गया था, उनके नहीं थे। इसके आधार पर 21 नवंबर 2015 को शिकायत दर्ज की गई थी। बाद में 2017 में प्रवर्तन निदेशालय ने मामले पर संज्ञान लिया और ‘आप’ को चंदा देने वाली शेल कंपनियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की।

जाँच के दौरान, पुलिस ने पाया था कि आरओसी रिकॉर्ड के मुताबिक दिए गए पते पर कंपनियाँ मौजूद नहीं थीं। पुलिस ने कहा था कि इन कंपनियों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग, एंट्री ऑपरेशन और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए किया गया था। इस मामले में पिछले साल अगस्त में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था।

‘दूसरे मजहब के साथ कर के देखो’: भगवान गणेश के हाथों में सेनेटरी नैपकिन्स थमाने वाले NGO के खिलाफ हिन्दू महिलाएँ

मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित महू (डॉक्टर आंबेडकर नगर) शहर में गणेश चतुर्थी के मौके पर भगवान गणेश की प्रतिमा के हाथ में सेनेटरी नैपकिन थमा दिए गए। एक NGO ने ये करतूत की, जिसके बाद लोग नाराज़ हो गए और इस तरह हिन्दू त्योहारों व देवी-देवताओं के साथ छेड़छाड़ किए जाने पर आपत्ति जताई। NGO का कहना था कि उसने ‘मेन्सुरल हाइजीन’ को बढ़ावा देने के लिए ऐसा किया।

भगवान गणेश की प्रतिमा के दो हाथों में सेनेटरी नैपकिन्स थमाए हुए देखे जा सकते हैं। ‘अनिवार्य’ नामक NGO ने भगवान गणेश को एक ‘जिम्मेदार पति’ के रूप में प्रदर्शित करने के लिए ऐसा किया। ये संस्था लोगों के बीच ‘मेन्सुरल हाइजीन’ को लेकर जागरूकता फैलाने और सेनेटरी नैपकिन्स के वितरण का दावा करती है। भगवान गणेश की प्रतिमा के दोनों तरफ देवियों रिद्धि और सिद्धि को दिखाया गया था।

महू में भगवान गणेश की प्रतिमा के हाथों में थमा दी सेनेटरी नैपकिन्स

NGO के संस्थापक और युवा लेखक अंकित बागड़ी ने कहा कि ‘बाहुबली’ फिल्म सीरीज की सफलता के बाद बाप्पा को बाहुबली की वेशभूषा में दिखाया गया था, तभी उन्हें ये आईडिया आया कि क्यों न गणेश चतुर्थी के जरिए ‘मासिक धर्म’ को लेकर जागरूकता फैलाई जाए। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2020 से अब तक वो अपने खुद के बचाव हुए रुपयों से 20 लाख सेनेटरी पैड्स का वितरण कर चुके हैं।

उन्होंने कहा कि अब जब हम ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मना रहे हैं, क्योंकि न महिलाओं की स्वतंत्रता के लिए इस तरह के क्रियाकलाप किए जाएँ। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर भी उनकी पहल की प्रशंसा की गई है। हालाँकि, सच्चाई इसके उलट है। सोशल मीडिया पर कई ऐसे हिन्दू भी हैं जिन्हें इस तरह की चीजें पसंद नहीं आईं और उन्होंने ऐसे छेड़छाड़ किए जाने के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।

सुमित गुप्ता ने पूछा कि विज्ञापन करने के लिए ये किस तरह की हरकत है? वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा कि ये सही तरीका नहीं है। एक यूजर ने लिखा, “क्या हम भगवान को सिर्फ भगवान नहीं रहने दे सकते? तथाकथित जागरूकता फैलाने के लिए विज्ञापन ही काफी हैं। हम देवी-देवताओं को मास्क से लेकर ये सारी चीजें पहनना शुरू नहीं कर सकते।” जागृति खन्ना ने इसे बेवकूफी बताते हुए कहा कि जागरूकता फैलाने के और भी कई तरीके हैं।

एक अन्य महिला ने पूछा कि किसी अन्य मजहब में ऐसा क्यों नहीं होता? साथ ही उन्होंने कहा कि ये बेवकूफी है, क्योंकि पब्लिसिटी के लिए हमारे देवी-देवताओं का इस तरह से इस्तेमाल करना गलत है। वहीं अर्चि नाम की महिला ने कहा कि भगवान का सम्मान करना अलग चीज है और मेन्सुरल हाइजीन के प्रति जागरूकता अलग, दोनों को मिलाओ नहीं। लोगों ने कहा कि जागरूकता फैलाने के और भी कई तरीके हैं।

इकबाल शेख ने सास श्याम शिगम के प्राइवेट पार्ट में बाँस डाला, मर गईं: बीवी लीना को खोजने गया था ससुराल

महाराष्ट्र के मुंबई के विले पार्ले में कुछ दिन पहले एक ‘हिस्ट्रीशीटर’ दामाद ने अपनी सास को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। घटना को इतनी नृशंसता से अंजाम दिया गया कि शरीर का अंदर का हिस्सा भी बाहर निकल आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले महिला पर टाइलों से हमला किया गया। उसके बाद चाकू से वार हुआ। और, अंत में उसके प्राइवेट पार्ट में बाँस घुसा दिया गया। इस पूरे मामले में करीब एक हफ्ता पहले पुलिस आईपीसी की धारा 377 और 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर चुकी है और आरोपित पकड़ा जा चुका है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित की पहचान 42 वर्षीय इकबाल अब्बास शेख के तौर पर हुई है। उस पर मुंबई भर में 28 केस दर्ज हैं। चेन स्नैचिंग जैसे मामले में इकबाल पुणे यरवदा जेल में 3 साल से बंद था। 1 सितंबर को जब वह रिहा हुआ तो वह अपनी 61 वर्षीय सास शमाल श्याम शिगम के घर गया ताकि वह अपनी बीवी लीना और दो बच्चों से मिल सके। हालाँकि, शेख को पता चला कि उसकी बीवी ने किसी और से शादी कर ली है जो उसके बच्चों और बीवी की देख-रेख करता है।

शेख ने कहा कि वो अपनी बीवी और बच्चों के साथ नई शुरुआत करना चाहता है। उसने बताया कि अब वह गुरुवार यानी कि अगले दिन (2 सितंबर) लौट कर आएगा। जब वह अगले दिन गया तो उसके बीवी बच्चे नहीं मिले। शेख ने अपनी सास से पूछा तो उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। इससे शेख गुस्सा हो गया और अपनी ही सास को पीटने लगा।

शेख ने पहले अपनी सास का सिर कुचला और फिर चाकू से मारा और बाद में उसके प्राइवेट पार्ट में बाँस डाल कर अंदर के अंग बाहर निकाल दिए। इसके बाद मौके से वहाँ से फरार हो गया। हालाँकि घटना के एक दिन बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अब 14 सितंबर तक वह पुलिस हिरासत में है।

पुलिस ने इस हत्या की गुत्थी सीसीटीवी फुटेज की मदद से सुलझाई और शेख के कुछ दोस्तों से बात करके उसे पकड़ा गया। मिड-डे की रिपोर्ट बताती है कि श्याम शिगम की बेटी लीना की इकबाल शेख से शादी 2011 में हुई थी। उसके विरुद्ध कई मामले दर्ज हैं। इनमें से 8 में वह सजा भुगत रहा था। 1 सितंबर को रिहा होने के बाद उसने अपराध को अंजाम दिया। अपनी सास को मारने से पहले वह सत्कार बार और रेस्ट्रां में गया था। वहाँ उसने मैनेजर और बार मालिक को धमकाया। उनसे 3 हजार रुपए लिए, दो बोतल शराब की ली और चला गया।

मृदुभाषी ‘बिल्डर’ के हाथों में गुजरात की कमान: ‘दादा भगवान’ के भक्त भूपेंद्र पटेल ने ली CM पद की शपथ, गौपूजा भी की

भाजपा नेता भूपेंद्र पटेल ने गुजरात के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। बता दें कि भूपेंद्र पटेल अहमदाबाद के घाटलोडीया से विधायक हैं। 2017 में उन्होंने कॉन्ग्रेस के शशिकांत पटेल को 1.17 लाख वोटों से मात दी थी, जो उस विधानसभा चुनाव की सबसे बड़ी जीत भी थी। पाटीदार समुदाय से आने वाले भूपेंद्र को आनंदीबेन पटेल का करीबी माना जाता है।

आनंदीबेन पटेल ने ही नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री का पद संभाला था। फ़िलहाल वो उत्तर प्रदेश की राज्यपाल हैं। भूपेंद्र पटेल ने अहमदाबाद के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा की डिग्री प्राप्त की है। 2017 विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन भरते समय उन्होंने 5 करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित की थी। भूपेंद्र पटेल ने सोमवार (13 सितंबर, 2021) को दोपहर 2:20 बजे राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उससे पहले उन्होंने स्वामीनारायण मंदिर में गौपूजा भी की।

उससे पहले उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी व उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल से भी मुलाकात की। भूपेंद्र पटेल अब तक भाजपा के लो प्रोफ़ाइल नेता रहे हैं और चुपचाप काम करने में यकीन रखते हैं। उन्हें मृदुभाषी एवं सबके साथ अच्छा व्यवहार करने के लिए जाना जाता है। एक नेता का कहना है कि आनंदीबेन पटेल के मुख्यमंत्रित्व काल में वो AUDA अध्यक्ष थे और सीएम तक उनकी सीधी पहुँच थी, लेकिन उन्होंने कभी इस पर घमंड नहीं किया।

गुजरात में अगले 15 महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। गुजरात में अहमदाबाद, सूरत, राजकोट और बड़ोदरा जैसे बड़े शहर हैं, ऐसे में शहरी क्षेत्र में उनके अनुभव का फायदा सरकार को मिल सकता है। भाजपा ने अबकी ग्रामीण की जगह एक शहरी चेहरे को कमान दी है। AAP गुजरात के शहरों में ही पाँव जमा रही है और सूरत के नगरपालिका चुनाव में उसे कुछ सीटें भी मिली हैं। इसीलिए, भाजपा अपना शहरी गढ़ मजबूत रखना चाहती है।

भूपेंद्र पटेल पाटीदार समाज के ‘कड़वा’ समुदाय से आते हैं। इससे पहले गुजरात में पाटीदार समाज से जो पिछले 4 मुख्यमंत्री ने हैं, वो सभी ‘लेउवा’ समुदाय से आते थे। भाजपा की बैठक में खुद मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने अगले सीएम के रूप में भूपेंद्र पटेल का नाम प्रस्तावित किया। पेशे से बिल्डर होने के बावजूद आज तक किसी विवादित जमीन करार या फिर या रियल्टी प्रोजेक्ट में उनका नाम नहीं आया है।

जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे, जब भूपेंद्र पटेल AMC की स्टैंडिंग कमिटी के अध्यक्ष थे। वो मेमनगर म्युनिसिपल्टी के भी अध्यक्ष रहे हैं। वो ‘दादा भगवान’ सिद्धांत का अनुसरण करते हैं। भूपेंद्र पटेल के शपथग्रहण समारोह में खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मौजूद रहे। भाजपा अब राज्य में नया मंत्रिमंडल भी बनाएगी, जिसमें कई नए चेहरे होंगे। कई पुराने चेहरों की छुट्टी तय मानी जा रही है।

लंबे समय से RSS से जुड़े रहे भूपेंद्र पटेल गुजरात की विजय रुपाणी सरकार में मंत्री भी थे। वो 2015-17 में ‘अहमदाबाद अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (AUDA)’ के अध्यक्ष भी रहे हैं। वर्ष 1999-2000 में भूपेंद्र पटेल स्थायी समिति के अध्यक्ष और मेमनगर नगरपालिका के अध्यक्ष रहे थे। 2010-15 के दौरान वे थलतेज वार्ड से पार्षद रहे थे। पटेल पाटीदार संगठनों सरदार धाम और विश्व उमिया फाउंडेशन में ट्रस्टी भी हैं। 2008-10 में उन्होंने एएमसी के स्कूल बोर्ड के उपाध्यक्ष का पद संभाला था।

‘औरतों के लिए खेलकूद हराम, मर्दों के साथ पढ़ने से भटक जाएँगी’: देवबंद वाले मदनी ने माना, हिंदू-मुस्लिमों के पूर्वज एक

सहारनपुर के देवबंद में स्थित दारुल उलूम के प्रिंसिपल और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में हिन्दुओं एवं मुस्लिमों, दोनों के पूर्वज एक हैं। उन्होंने कहा कि RSS का पुराना रवैया अब बदल रहा है और वो सही रास्ते पर है। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को अपने मुल्क से प्रेम है।

लेकिन, साथ ही वो ये भी कहना नहीं भूले कि आतंकवाद के जिन मामलों में मुस्लिम पकड़े जाते हैं, उनमें से अधिकतर झूठे होते हैं। ‘दैनिक भास्कर’ के साथ बातचीत में मौलाना अरशद मदनी ने पूछा कि अगर यह सब सच्चे हैं तो फिर निचली अदालत से सजा मिलने के बाद हाईकोर्ट या फिर सुप्रीम कोर्ट से लोग कैसे बरी हो जाते हैं? उन्होंने बताया कि उनके संज्ञान में ऐसे कई मामले आई हैं, जहाँ निचली अदालत से फाँसी पाए लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने बरी किया।

मौलाना अरशद मदनी ने कहा, “मुल्क में एक लाख से ज्यादा मस्जिदें हैं, जहाँ 5 वक्त की अजान दी जाती है और 5 वक्त की नमाज भी पढ़ी जाती है। हमें हर मस्जिद के लिए इमाम चाहिए। इन मस्जिदों में जो बच्चे आते हैं, उनको तालीम देने के लिए मौलवी चाहिए, वरना हमारी मस्जिदें वीरान हो जाएँगी। यह हमारा निसाब-ए-तालीम है जो खालिस मजहबी है। हम छात्रों को प्रोफेसर, अधिवक्ता या डॉक्टर नहीं बनाते। हम उनको खालिस मजहबी इंसान बनाते हैं, जो नमाज पढ़ाए, मजहबी तालीम दे।”

महिलाओं को शिक्षा दिए जाने के मुद्दे पर मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि औरतों को मुजाहिद बनाने का मकसद तो न पहले कभी हमारा था और न आज है। उन्होंने कहा कि कई स्कूल-कॉलेज खुले भी, आज लड़कियाँ खूब मजहबी शिक्षा ले रही हैं, लेकिन दारुल उलूम के भीतर लड़कियों को पढ़ाने का हमने कभी मन नहीं बनाया। उन्होंने शरिया का हवाला देते हुए कहा कि महिलाएँ मर्दों से अलग रह कर ही तालीम ले सकती हैं।

उन्होंने कहा कि जहाँ खतरा होगा, वहाँ भटकने का डर होगा। साथ ही बताया कि मर्दों के साथ पढ़ने से महिलाओं के भटकने का खतरा है, इसीलिए वहाँ औरतें नहीं जा सकतीं। उन्होंने कहा कि महिलाएँ जो भी पेशा चुनें, लेकिन परदे के साथ। उन्होंने महिलाओं को ऐसा लिबास पहनने की सलाह दी, जिससे ‘अल्लाह द्वारा ढाली गई उनकी जिस्म’ जाहिर न हो। उन्होंने शरिया के हवाले से कहा कि महिलाओं की आँखों व चेहरे के अलावा कुछ नहीं दिखना चाहिए।

मौलाना अरशद मदनी ने महिलाओं के खिलाड़ी बनने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि औरतों को ऐसा कोई भी कार्य करने की अनुमति नहीं है, जिसमें उनका भागना-दौड़ना कोई मर्द देखे। इससे पहले उन्होंने कहा था कि अगर तालिबान गुलामी की जंजीरों को तोड़कर आजाद हो रहे हैं, तो इसे दहशतगर्दी नहीं कहेंगे। उन्होंने ये भी कहा था कि महिलाएँ बिना क्रीम, लिपस्टिक लगाए, बुर्का पहन कर बाहर औकर विरोध कर सकती हैं।

YouTube पर वापस लौटा मनोज मुन्तशिर का ‘आप किसके वंशज हैं’ Video, मुगल बर्बरता सामने आने से चिढ़ गए थे वामपंथी-कट्टरपंथी

संगठन में शक्ति होती है ये आप सबने सुना और देखा है जब तब ये बात साबित भी होती रहती है। अभी एक बार फिर यह वाकया सच साबित हुआ है कवि-गीतकार मनोज मुन्तशिर के बहुचर्चित वीडियो ‘आप किसके वंशज है?’ के यू ट्यूब पर वापस आने के साथ। जिसे वामपंथी लिबरल गिरोह और कट्टरपंथियों द्वारा भारी रिपोर्टिंग और कई अन्य कारणों की वजह से यू-ट्यूब ने ‘कॉपीराइट’ का हवाला देते हुए अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया था। जिसका लोगों ने मुखर स्वर में सोशल मीडिया के सभी माध्यमों पर विरोध किया, साथ ही मुन्तशिर ने भी यू-ट्यूब के इस एक्शन को चुनौती दी थी।

वहीं अब जब यह वीडियो You Tube पर वापस आ गया है तो लोगों को इसकी सूचना देते हुए मनोज मुन्तशिर ने ट्वीट किया, “आपने साबित कर दिया कि संगठन में शक्ति है और सच परेशान हो सकता है पराजित नहीं! इतनी भारी तादाद में आपने You Tube की तानाशाही के विरुद्ध आवाज़ उठायी, कि #AapKiskeVanshajHain को बे-वजह ब्लॉक करने के बाद,You Tube बे-शर्त वापस करने के लिए मजबूर हो गया।”

पूरा मामला ये है कि पिछले दिनों सोशल मीडिया यूट्यूब ने कवि और गीतकार मनोज मुंतशिर के ‘आप किसके वंशज हैं?’ वीडियो को अपने प्लेटफॉर्म पर से हटा दिया था, जिसमें उन्होंने मुगल बर्बरता का खुलासा किया था और बताया कि कैसे हम भारतीयों ने अपनी विरासत के साथ हुई छेड़छाड़ को आसानी से स्वीकार कर लिया। हालाँकि, इस वीडियो को हटाने के पीछे कॉपीराइट का आरोप लगाया गया था। मनोज मुंतशिर ने इस आरोप को आधारहीन बताते हुए इसे सही साबित करने की चुनौती दी थी।

एक यूजर द्वारा इस वीडियो के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने 9 सितम्बर 2021 को किए ट्वीट में कहा, “कुछ लोगों को चुभने वाली आवाज को नुकसान पहुँचाना कोई नई प्रथा नहीं है। इसकी पहुँच को कम करने के लिए ‘आप किस वंशज हैं’ के खिलाफ एक निराधार कॉपीराइट दावा किया जाता है। हमने दावे को चुनौती दी है। वीडियो जल्द वापस आना चाहिए। समर्थन के लिए आप सभी को धन्यवाद।”

जिसके बाद से ही हिन्दुओं सहित वे सभी जो उनके इस ऐतिहासिक वीडियो से सहमत थे मुखर विरोध पर उतर आए और यू ट्यूब सहित लिबरल गैंग को एक बार फिर हिन्दुओं की जागरूकता और संगठनात्मक शक्ति के आगे मुँह की खानी पड़ी।

बता दें कि कवि मनोज मुंतशिर ने अपने उक्त वीडियो में मुगल बर्बरता का खुलासा किया है, जिसके बाद से उन्हें लिबरलों, इस्लामियों और वामपंथी ‘इतिहासकारों’ के नफरतों का सामना करना पड़ रहा है। जिस पोस्ट में उन्होंने वीडियो को प्रमोट किया, उस पर भी काफी सारे अभद्र कमेंट्स किए गए। इतना ही नहीं, ‘इतिहासकार’ इरफान हबीब, तथाकथित पौराणिक कथाकार देवदत्त पटनायक और आरजे फहद उन लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने भारतीयों के खिलाफ मुगल आक्रमणकारियों की बर्बरता के बारे में बोलने पर कवि मनोज को खारिज किया।

कवि द्वारा शेयर किए गए वीडियो की एक क्लिप में वह यह पूछते हुए दिखाई दे रहे थे कि हम भारतीय अपनी विरासत की विकृति को कैसे स्वीकार कर सकते हैं। उन्होंने पूछा कि हजारों भारतीयों को मारने वाले आक्रमणकारियों और लुटेरों को नायक के रूप में कैसे दिखाया जा सकता है। उन्होंने मुगलों की ‘महिमामंडित डकैतों’ (‘glorified dacoits’) के रूप में आलोचना की। उन्होंने लोगों से अपनी विरासत को पहचानने और बर्बर एवं लुटेरों को नायकों के रूप में महिमामंडित करने से बचने के लिए कहा।

ये रहा पूरा वीडियो: