Home Blog Page 3416

‘नारकोटिक्स जिहाद’ बयान पर भड़की इस्लामी संस्थाएँ, केरल बिशप के घर के बाहर जुटी भीड़: समर्थन में ईसाई समुदाय भी सड़क पर

केरल के कोट्टयम में सायरो मालाबार चर्च पाला धर्मप्रांत के ‘मार जोसेफ कल्लारंगट’ नामक बिशप ने ईसाई लड़कियों के साथ ‘लव जिहाद’ के साथ-साथ ‘नारकोटिक्स जिहाद’ को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद मुस्लिमों ने उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनके घर के बाहर भी कई मुस्लिमों ने विरोध प्रदर्शन किया। ‘मुस्लिम कोआर्डिनेशन कमिटी’ ने 200 लोगों के साथ विरोध प्रदर्शन किया।

कई मुस्लिम संस्थाओं ने भी उन पर सांप्रदायिक विभाजन को हवा देने का आरोप लगाया है। ‘कोट्टायम महलु मुस्लिम कोआर्डिनेशन कमिटी’ ने उनके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई है। PDP ने भी बिशप के घर के बाहर एक विरोध मार्च आयोजित किया। हालाँकि, स्थानीय भाजपा यूनिट ने बिशप का समर्थन किया है। प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने कहा कि ये एक गंभीर मुद्दा है, जिस पर समाज को चर्चा करनी चाहिए।

 कोट्टायम पुलिस प्रमुख के समक्ष बिशप के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। उनके खिलाफ गैर-जमानती धारा-153A (विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करने वाला बयान देना) के तहत कार्रवाई की भी माँग की गई है। मुस्लिम संस्थाओं ने कहा कि एक पवित्र पुस्तक में वर्णित एक पवित्र शब्द को बिशप ने गलत घटनाओं से जोड़ा है। इन संस्थाओं ने भाजपा पर ईसाई-मुस्लिम दुश्मनी को बढ़ावा देने के आरोप लगाए।

मुस्लिम संस्थाओं ने कहा कि किसी भी जाँच एजेंसी को ‘नारकोटिक्स जिहाद’ जैसा कुछ नहीं मिला है। मुस्लिमों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें बैरिकेड लगा कर रोका, जिसके बाद उनमें झड़प भी हुई। केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (KCBC) ने कहा है कि बिशप का बयान किसी समुदाय को निशाना बना कर नहीं दिया गया था, इसकी गंभीरता पर बहस होनी चाहिए। संस्था ने नारकोटिक्स माफिया के खिलाफ जाँच की भी माँग की।

वहीं कई कैथोलिक संस्थाएँ भी बिशप के समर्थन में उतर आई हैं और उन्होंने भी मार्च निकाल कर बिशप के प्रति अपना समर्थन जताया। चर्च ने कहा कि वो समुदाय के हित की बात कर रहे हैं। ईसाईयों ने कहा कि ‘नारकोटिक्स जिहाद’ से ईसाई युवाओं पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। इससे वो ड्रग अडिक्ट बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि होटलों व जूस कॉर्नरों द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के पीछे ‘हार्डकोर जिहादी’ ही हैं।

इस बयान पर मुख्यमंत्री पिनराई विजयन भड़क गए थे। उन्होंने कहा कि समाज में धर्म के आधार पर विभाजन पैदा करने वाले बयान नहीं दिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा, “पाला बिशप एक काफी प्रभावशाली व धार्मिक विद्वान हैं। हमलोग पहली बार ‘नारकोटिक्स जिहाद’ नाम का कोई शब्द सुन रहे हैं। नारकोटिक्स की समस्या किसी एक खास धर्म को ही निशाना नहीं बनाती। ये पूरे समाज पर अपना दुष्प्रभाव डालती है। इसे लेकर हम काफी चिंतित हैं।”

‘गाँधी ईश्वर-अल्लाह गाते रह गए, मुस्लिम हर-हर महादेव नहीं बोलेगा’: शाहिद हुसैन की टिकैत को दो टूक – ‘संभव नहीं हिन्दू-मुस्लिम भाईचारा’

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में किसान मोर्चा की महापंचायत के दौरान अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाने वाले राकेश टिकैत से कुछ लोग बेहद नाराज हैं। वहाँ के स्थानीय निवासी शाहिद हुसैन ने उनके भाषण पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। किसान नेता पर शाहिद हुसैन की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। ट्विटर पर चार्टर्ड अकाउंटेंट आलोक भट्ट ने उनका वीडियो शेयर किया है।

उनसे सवाल किया गया कि राकेश टिकैत ने अल्लाह-हू-अकबर और हर हर महादेव का नारा दिया इसमें क्या दिक्कत हो गई। इसको लेकर हुसैन ने कहा, “मुसलमान हर हर महादेव नहीं बोलेगा। यह आज का कोई एकांकी नाटक नहीं है। जब महात्मा गाँधी सक्रिय राजनीति में आए, तब वो भी हिंदू-मुस्लिम भाई चारा बढ़ाने के लिए, रोजाना ईश्वर अल्लाह तेरो नाम सबको सन्मति दे भगवान गाया करते थे, लेकिन मुसलमानों ने इसे कभी भी नहीं गाया। यहाँ तक की देश का विभाजन भी हो गया, तभी भी इसे किसी भी मुसलमान ने नहीं गाया।”

उन्होंने आगे कहा, ”आज किसान के नाम पर राकेश टिकैत राजनीति कर रहे हैं। जहाँ तक उनके अल्लाह-हू-अकबर और उसके प्रतिवाद में हर हर महादेव कहने की बात है, तो वो कहते रहें। लेकिन मुसलमान हर हर महादेव कभी नहीं कहेगा। ऐतिहासिक रूप से मुझे इसकी जानकारी है।”

जब हुसैन से पूछा गया कि क्या आप नहीं चाहते कि हिंदू-मुस्लिम भाई चारा बढ़े। इस पर वो कहते हैं, ”नहीं, भारत में हिंदू-मुस्लिम भाई चारा ना कभी संभव था, ना है और ना कभी रहेगा। दोनों की विचारधारा का मौलिक अंतर है। जहाँ जहाँ इस्लाम गया वहाँ इस्लामिक सिद्धांत के अलावा सब फेल हुआ। अखंड भारत की बात करें तो अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश इसी का हिस्सा थे, जो हिस्सा बँट गया उसमें से हर हर महादेव कट गया और अल्लाह-हू-अकबर रह गया। यहाँ भी जो हिस्सा कट जाएगा उसमें अल्लाह-हू-अकबर रह जाएगा और बाकी हर हर महादेव रह जाएगा। उन्होंंने कहा कि ये वो रोजाना गाते रहें, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा।”

मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ये दंगे भाजपा ने नहीं कराए थे, बल्कि भारतीय किसान यूनियन के नाम पर राकेश टिकैत ने हर स्टेज को तैयार किया था। 27 तारीख को सचिन और गौरव की हत्या के बाद सबसे पहले वहाँ जाने वाले आमिर आलम और राकेश टिकैत ही थे। इसके बाद 31 तारीख को घोषणा करने वाले राकेश टिकैत थे।

हुसैन ने कहा, “जहाँ तक किसान यूनियन और राकेश टिकैत की बात है तो ये दोनों एक ही हैं, इनमें कोई विरोधाभास नहीं है। दोनों का एक ही मिशन है सत्ता पर काबिज होना। वर्तमान में ये केवल राजनीति में आना और अपना लक्ष्य प्राप्त करना चाहते हैं।”

शाहिद हुसैन ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश में अपराधी जिनमें मुस्लिम भी हैं, वे पुलिस से बचने के लिए किसान यूनियन में शामिल हो रहे हैं। ये इनके लिए बहुत अच्छा मंच है। इन अपराधियों की बीजेपी में कोई अच्छी पकड़ नहीं है, इसलिए ये किसान यूनियन के लोगों की मदद से पुलिस से अपना बचाव कर रहे हैं। उन्होंने कि हिंदू मुस्लिम भाई चारे की बात केवल एक नाटक है।

बता दें कि इससे पहले अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाने वाले राकेश टिकैत को एक आम मुसलमान ने संदेश दिया था, “हमें 113 मस्जिदें दो। मुजफ्फरनगर दंगों के लिए सभी जाटों की तरफ से माफी माँगो। तुम अल्लाह-हू-अकबर बोलो, हम हर हर महादेव कभी नहीं बोलेंगे!” ये संदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने भी शेयर किया था।

‘कॉन्ग्रेस राज़ में धर्मांतरण का खेल, दोषियों को बचा रही बघेल सरकार, रोकने वालों पर ही कार्रवाई’: छत्तीसगढ़ में हिन्दुओं का प्रदर्शन

छत्तीसगढ़ में धर्म परिवर्तन को लेकर सिसायत तेज हो गई है। राज्य में अब इस मुद्दे को लेकर भाजपा और कॉन्ग्रेस आमने-सामने है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा भाजपा सरकार के कार्यकाल में सबसे ज्यादा धर्म परिवर्तन होने का आरोप लगाया था, जिसके बाद भाजपा की तरफ से जवाब आया है। 

प्रदेश में इस मामले के तूल पकड़ने के बाद भाजपा ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की जानकारी दी है। भारतीय जनता पार्टी के विधायक प्रदेश में धर्मांतरण के मामले में राज्यपाल अनुसुइया उइके को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में कहा गया है, “राजधानी से दूर-दराज के इलाकों में धर्मांतरण गतिविधियों की सूचना दी जा रही थी और बघेल सरकार कार्रवाई करने के बजाय, उनमें शामिल लोगों की रक्षा कर रही थी।”

वहीं इस मामले पर बोलते हुए भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, “छत्तीसगढ़ में कई धर्मांतरण हो रहे हैं और उन्हें रोकने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।”

शनिवार (सितंबर 11, 2021) को भारी बरसात के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं ने तरबतर होते हुए पैदल मार्च निकाला। प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय की अगुवाई में भाजपा ने आजाद चौक स्थित महात्मा गाँधी की प्रतिमा से राजभवन तक पैदल मार्च निकाला

इस दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष साय ने आरोप लगाया कि राज्य की कॉन्ग्रेस नीत सरकार आदिवासियों की संस्कृति दूषित करना चाह रही है। भोले-भाले आदिवासियों को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों के खिलाफ शिकायत करने पर भी कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। इससे आदिवासियों और परिवर्तित आदिवासी में संघर्ष की स्थिति बन रही है। जो भविष्य में कभी भी विकराल रूप ले सकती है।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि बस्तर से सरगुजा तक षड्यंत्र पूर्वक सरकार के संरक्षण में बलपूर्वक ईसाई मिशनरी धर्म परिवर्तन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इसकी पराकाष्ठा दिखी जब थाने के अंदर मिशनरी कहते हैं कि धर्म परिवर्तन हम कर रहे हैं और करेंगे जिसमें हिम्मत हो रोक ले। मिशनरी संविधान का सम्मान न कर उसे जलाने की बात कह रहे हैं। यह साफ इंगित करता है कि उनके पीछे देश को अस्थिर करने वाली ताकतें काम कर रही है।’’

‘राज्य सरकार को सख्त कार्रवाई के निर्देश दें राज्यपाल’

यह दावा करते हुए कि ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाने वालों को परेशान किया जा रहा है, भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से हस्तक्षेप की माँग करते हुए कहा कि उन्हें राज्य सरकार को धर्मांतरण की घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करने और ऐसी शिकायतों पर त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश देना चाहिए।

भाजपा ने आगे आरोप लगाया कि रायपुर के पुलिस अधीक्षक से यहाँ भटगाँव इलाके में कुछ लोगों के कथित धर्मांतरण के बारे में शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसमें दावा किया गया था कि पुरानी बस्ती पुलिस में इस प्रकरण के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

भाजपा ने पादरी पर हमले के आरोप में गिरफ्तार लोगों की रिहाई की माँग की

5 सितंबर को यहाँ पुरानी बस्ती थाने के अंदर भीड़ ने एक पादरी और दो अन्य के साथ कथित तौर पर मारपीट की और गाली-गलौज की, जिसके बाद दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु देव साई के नेतृत्व में 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने कुछ दिन पहले यहाँ एक पुलिस थाने में एक पादरी और दो अन्य के साथ कथित तौर पर मारपीट और गाली देने के आरोप में गिरफ्तार लोगों की रिहाई की भी माँग की और इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने की माँग की।

बता दें कि इससे पहले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी सरकार के तहत बढ़ते धर्मांतरण के भाजपा के आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि राज्य में भाजपा शासन के तहत सबसे अधिक चर्चों का निर्माण किया गया था। रिकार्ड बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में भाजपा के शासन में सबसे ज्यादा चर्च बनाए गए।

पिछले कुछ महीनों से गरमाया है माहौल

धर्मांतरण के मुद्दे पर प्रदेश का माहौल पिछले कुछ महीनों से गरमाया हुआ है। सबसे पहले भाजपा की सरगुजा इकाई ने आरोप लगाया कि वहाँ रोहिंग्या मुसलमानों को बसाया जा रहा है। फिर बात ईसाई मिशनरियों की सक्रियता की आई। जुलाई में सुकमा एसपी ने मातहतों को एक पत्र लिखकर ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा। उनका कहना था कि इससे आदिवासियों के मूल और धर्मांतरित समुदायों के बीच तनाव बढ़ सकता है। भाजपा ने उस पत्र के बहाने सरकार को घेरा। विधानसभा में भी यह मुद्दा उठा। 

देश के 61% कोरोना मरीज केरल में, 1 दिन में 66% मामले अकेले यहीं से: ताज़ा आँकड़ों से समझिए ‘केरल मॉडल’ की सच्चाई

जब पूरे देश में कोरोना का प्रकोप शुरू हुआ था, तभी से लिबरल गिरोह के लोगों ने ‘केरल मॉडल’ की रट लगानी शुरू कर दी थी। देश के छोटे से जनसंख्या वाले राज्य में आज कोरोना के कारण हालात इतने भयावह हैं कि पूरे देश में इस वैश्विक महामारी की तीसरी लहर यहीं से फैलने की आशंका है। राज्य में CPI(M) सत्ता में लौट कर ज़रूर आई और पिनराई विजयन दोबारा मुख्यमंत्री बने, लेकिन कोरोना का प्रकोप ज्यों का त्यों रहा।

आइए, आँकड़ों की बात कर लेते हैं। देश में फ़िलहाल कोरोना के 3,80,453 सक्रिय मामले हैं। इनमें से 2,31,829 अकेले केरल में हैं। अर्थात, देश के कुल सक्रिय कोरोना मामलों का 60.93% इसी छोटे से दक्षिण भारतीय राज्य में है। कुल सक्रिय मामलों की सूची में फ़िलहाल केरल देश के सभी राज्यों में नंबर-1 पर है। लेकिन, लिबरल गिरोह के पत्रकारों के मुँह से चूँ तक न निकल रहा क्योंकि ये सब उत्तर प्रदेश में नहीं हो रहा।

इसी तरह पिछले 24 घंटों में पूरे देश में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 31,288 मामले सामने आए हैं। आपको जान कर हैरानी होगी कि इनमें से 20,487 मामले अकेले केरल से ही सामने आए। यानी, पूरे देश में पिछले 1 दिन में कोरोना के जितने नए मामले आए हैं, उनमें केरल का योगदान 65.47% है। कुल मिला कर देखा जाए तो लगभग दो तिहाई कोरोना मामले केरल से ही आ रहे हैं पिछले कुछ दिनों से।

केरल में अब तक कोरोना से कुल 22,484 लोगों की जा गई है और इस मामले में ये छठे स्थान पर है। मृतकों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र पूरे देश में अव्वल है, जिसके बाद कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली और उत्तर प्रदेश का स्थान आता है। केरल में भारत की 2.76% जनसंख्या रहती है और ये देश के सबसे छोटे राज्यों में से एक है, लेकिन यहाँ सभी बड़े राज्यों से ज्यादा कोरोना के मामले आ रहे हैं।

‘आतंकी नहीं हैं तालिबानी, महिलाएँ बिना क्रीम-लिपस्टिक के कर सकती हैं प्रदर्शन’: जमीयत उलमा-ए-हिंद के मौलाना अरशद मदनी

जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष व दारुल उलूम के हदीस के उस्ताद मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि वो तलिबान को दहशतगर्द नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि अगर तालिबान गुलामी की जंजीरों को तोड़कर आजाद हो रहे हैं, तो इसे दहशतगर्दी नहीं कहेंगे। आजादी सबका हक है। अगर वह गुलामी की जंजीर तोड़ते हैं तो हम ताली बजाते हैं। अगर यह दहशतगर्दी है तो फिर नेहरु और गाँधी भी दहशतगर्द थे। शेखुद्दीन भी दहशतगर्द थे। वे सारे लोग जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई लड़ी वे सारे दहशतगर्द हैं।

अरश्द मदनी ने यह बात दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में कहा। इस दौरान मदनी ने तालिबान से संबंधित कई मुद्दों पर बात की। उन्होंने तालिबान को दारुल उलूम से जोड़ने के आरोपों पर कहा कि तालिबान का देवबंद और दारुल उलूम से कोई ताल्लुक नहीं है। तालिबान को देवबंद से जोड़ना गलत है।

मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि कुछ फिरकापरस्त ताकतें बेवजह यह भ्रम फैला रही हैं कि तालिबानी देवबंद के पढ़े हुए हैं। इन लोगों ने कभी दारुल उलूम आकर कोई तालीम हासिल नहीं की। उन्होंने तालिबान और दारुल उलूम की विचारधारा पर बात करते हुए कहा कि दोनों गुलामी के खिलाफ हैं। वहीं महिलाओं के विरोध प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि महिलाएँ बिना क्रीम, लिपस्टिक लगाए, बुर्का पहन कर बाहर औकर विरोध कर सकती हैं।

इसके अलावा अफगानिस्तान में तालिबानियों द्वारा शरिया लागू करने एवं मर्द और औरत को अलग-अलग पढ़ने का फरमान जारी करने पर मदनी का कहना था कि कौन कहता है कि सिर्फ शरिया ही कहता है कि लड़के और लड़कियाँ साथ नहीं पढ़ सकते। हिंदुस्तान के अंदर कितनी यूनिवर्सिटी और कॉलेज हैं जो कोएड नहीं हैं। लड़कियों के अलग और लड़कों के लिए अलग कॉलेज हैं। तो क्या इन कॉलेजों की बुनियाद तालिबान ने रखी थी? क्या इन्हें स्थापित करने वाले सब तालिबान के बाप हैं? हिंदुस्तान में तालिबान की गवर्नमेंट है क्या?

गौरतलब है कि पिछले दिनों अरशद मदनी ने जमीयत-उलेमा-ए-हिंद की कार्यसमिति की बैठक में गहन चर्चा के बाद कहा था कि लड़कियों के लिए अलग स्कूल और कॉलेज होने चाहिए। इनका कहना था कि गैर-मुस्लिम अपनी बेटियों को ‘अनैतिकता और दुर्व्यवहार से दूर रखने’ के लिए सह-शिक्षा (लड़के-लड़कियों की एक साथ पढ़ाई) वाले स्कूल या कॉलेजों में न भेजें। आगे उन्होंने कहा कि लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग स्कूल बनाने में प्रभावशाली और धनी लोग मदद करें। मुसलमान अपने बच्चों को किसी भी कीमत पर उच्च शिक्षा दें… लेकिन धार्मिक माहौल में।

इनका कहना था, “अनैतिकता और अश्लीलता किसी धर्म की शिक्षा नहीं है। दुनिया के हर धर्म में इसकी निंदा की गई है क्योंकि यही चीजें हैं, जो समाज में दुर्व्यवहार फैलाती हैं। इसलिए, हम अपने गैर-मुस्लिम भाइयों को भी सह-शिक्षा देने से परहेज करने के लिए कहेंगे।”

हिन्दू महिलाओं के खिलाफ विषवमन, हिन्दू धर्म को रेप से जोड़ा, ब्राह्मण ‘घातक’: जानिए हिन्दू विरोधी कॉन्फ्रेंस में क्या-क्या हुआ

हिन्दू विरोधियों ने अमेरिका में ‘Dismantling Global Hindutva’ कॉन्फ्रेंस आयोजित किया, जिसका अर्थ है वैश्विक हिंदुत्व के टुकड़े-टुकड़े करना। लेकिन, उनका ये प्रयास फ्लॉप रहा। YouTube पर भी इस कॉन्फ्रेंस को इक्का-दुक्का लोग ही देखते हुए नजर आए। वहीं इसके खिलाफ हुए हिन्दू कार्यकर्ताओं के कॉन्फ्रेंस में बड़ी संख्या में लोगों ने मौजूदगी दर्ज कराई व वक्ताओं को हजारों लोगों ने सुना।

आइए, आपको बताते हैं कि ‘वैश्विक हिंदुत्व के टुकड़े-टुकड़े’ करने का दावा करने वाले इस कॉन्फ्रेंस में किस-किस किस्म की बातें की गईं। इसमें आयुर्वेद को भी भला-बुरा कहा गया और वैदिक विज्ञान को नीचा दिखाने की कोशिश की गई। कहा गया कि पश्चिमी मेडिकल विज्ञान को चुनौती देने के लिए ‘बोगस’ आयुर्वेद को लाया गया। कहा गया की आयुर्वेद के जरिए गोरक्षा के नाम पर हिंसा को ढका जा रहा है।

इस ‘Dismantling Global Hindutva’ में ये भी कहा गया कि नरेंद्र मोदी की सरकार ‘झूठे इतिहास’ के जरिए खुद के वैज्ञानिक सभ्यता होने की बात को आगे बढ़ा रही है। हिंदुत्व को ‘राजनीतिक राष्ट्रवाद’ बताते हुए वक्ताओं ने इसकी तुलना महामारी तक के कर दी। साथ ही भारत को शरणार्थियों के खिलाफ भी बताया गया। जम्मू कश्मीर में मोदी सरकार की कार्रवाई को लेकर हिंदुत्व को ‘मुस्लिम विरोधी’ भी करार दिया गया।

साथ ही इस कॉन्फ्रेंस के वक्ताओं ने ‘अखंड भारत’ की परिकल्पना पर भी तंज कसते हुए इसे एक ‘मिथक’ करार दिया। साथ ही कहा कि ‘हिन्दू राष्ट्र’ में उत्तर-पूर्व भारत व आदिवासियों के लिए कोई जगह नहीं होगी। कहा गया कि भावनाओं के अधिकार को भी ‘तानाशाही सरकार’ कुचल रही है। कहा गया कि असम के मुस्लिमों को ‘बाहरी’ बताया जा रहा है। साथ ही घुसपैठ की समस्या की आड़ में सरकार विरोधियों की गिरफ़्तारी के भी आरोप लगाए गए।

साथ ही ‘सवर्ण महिलाओं’ पर हिंदुत्व के लिए काम करने का आरोप भी लगाया गया। कहा गया कि ‘हिंदुत्व महिलाएँ’ सामाजिक कार्यों के नाम पर हिन्दू धर्म को फैला रही हैं। आरोप लगाया गया कि इसके जरिए वो ‘पितृसत्ता’ का भी प्रचार कर रही हैं। उन पर पुरुषों की हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप लगाए गए। ‘यौन हिंसा’ को हिंदुत्व की नीति बताते हुए मुजफ्फरनगर दंगों को याद किया गया। साथ ही हिन्दू धर्म को मानने वालों को बलात्कारी बताने की कोशिश हुई।

हिन्दू महिलाओं पर आरोप मढ़ा गया कि वो शाखाओं व शिक्षा में अपनी जगह बना कर हिन्दू धर्म का प्रचार कर रही हैं। हिन्दुओं पर ‘यौन राजनीति’ करने के आरोप लगाए गए। उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई घटना पर भी चर्चा हुई। साथ ही कहा गया कि अब तक हिन्दुओं ने जाति-प्रथा के भेदभाव के खिलाफ कोई अभियान नहीं छेड़ा। कहा गया कि हिंदुत्व में दलितों के लिए कोई जगह नहीं। ब्राह्मणों को भी भला-बुरा कहा गया।

इस ‘Dismantling Global Hindutva’ कॉन्फ्रेंस के वक्ताओं ने कहा कि ब्राह्मणों का साहित्य एक ऐसी दुनिया के बारे में बात करता है, जिसका कभी कोई अस्तित्व ही नहीं था। जाति व जातिवाद को समान बताते हुए कहा गया कि RSS प्रमुख मोहन भागवत लाठी चलना सिखाते हैं, जो ‘घातक ब्राह्मणवाद’ है। हिटलर की विचारधारा को भी ब्राह्मणों से जोड़ा गया। दिल्ली में रेप की एक घटना को लेकर हिन्दू पुजारियों को भला-बुरा कहा गया।

शराब पिला कर सुहैब व फहद सहित 4 ने किया गैंगरेप, ऑनलाइन फ्रेंड से मिलने 300 Km दूर गई थी महिला: केरल की घटना

केरल के कोझिकोड गैंगरेप मामले में पुलिस ने फरार दो अन्य आरोपितों को शनिवार (11 सितंबर) को गिरफ्तार कर लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वारदात का खुलासा होने के बाद अथोली के मूल निवासी निजाज और सुहैब फरार हो गए थे, लेकिन अब महिला के ऑनलाइन दोस्त अजनाज के साथ फहद, निजाज और सुहैब चारों आरोपित पुलिस की हिरासत में हैं।

बताया जा रहा है कि हाल ही में कोझिकोड जिले के चेवयूर के एक फ्लैट में कोल्लम की 32 वर्षीय एक महिला को नशीला पदार्थ और शराब पिलाकर उसके साथ उसके ऑनलाइन दोस्त अजनाज सहित चार लोगों ने बलात्कार किया था। इनमें से दो 26 वर्षीय के एम अजनाज और 36 वर्षीय एन पी फहद को पुलिस ने शुक्रवार (10 सितंबर) को ही गिरफ्तार कर लिया था। दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहाँ उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अजनाज और फहद को अथोली से पकड़ा गया था। अजनाज अथोली के पास मीथल हाउस, कोलियॉट्टुथाज़म जंक्शन के पास रहता है, जबकि फहद अथोली के इदाथिलथाझाम इलाके में नेदुविलपोयिल हाउस के पास रहता है। अजनाज कथित तौर पर दो साल पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘टिकटॉक’ के जरिए महिला के संपर्क में आया था। उसके बुलाने पर कोल्लम निवासी महिला कोझिकोड आई थी।

पुलिस ने बताया, “अजनाज और उसका दोस्त फहद उसे शहर के बाहरी इलाके में एक फ्लैट में ले गए। यहाँ अजनाज ने उसके साथ बलात्कार किया, जिसके बाद उसने अन्य आरोपितों को कमरे में बुलाया। उन्होंने उसे शराब और अन्य नशीले पदार्थ लेने के लिए मजबूर किया और बाद में उसके साथ बलात्कार किया। उन्होंने इस हरकत को मोबाइल फोन में भी रिकॉर्ड किया।”

पुलिस ने आगे बताया कि दो दिन पहले ही अजनाज महिला को फ्लैट पर लेकर गया था। रात को 11 बजे तक उसके तीन दोस्तों ने, जिन्होंने उसी अपार्टमेंट में एक अलग से कमरा बुक किया था महिला के साथ बलात्कार किया। चारों ने महिला को नशीला पदार्थ देकर छत पर उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया।

एसीपी के सुदर्शन के मुताबिक, चारों ने महिला के साथ बर्बरतापूर्ण रेप किया था। जब महिला बेहोश हो गई तो वे डर गए और उसे एक निजी अस्पताल में छोड़कर वहाँ से भाग गए। महिला ने होश आने के बाद घटना की जानकारी अस्पताल स्टाफ को दी, जिन्होंने पुलिस को इस बारे में सूचित किया। महिला को शनिवार को अस्पताल से छुट्टी दे गई है।

आम्रपाली फ्लैट्स के ‘बेनामी’ मालिकों में MS धोनी का भी नाम, बकाया चुकाने का आदेश जारी: नोएडा में पूर्व कप्तान के नाम पर 2 फ्लैट्स

उत्तर प्रदेश के नोएडा में ‘आम्रपाली हाउसिंग प्रोजेक्ट’ के सभी ग्राहकों को उनका बकाया रकम चुकाने के लिए कहा गया है। इनमें भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान MS धोनी का नाम भी शामिल है। कुल 1800 ऐसे लोगों के नाम हैं, जिन्हें बकाया रकम चुकाने का आदेश दिया गया है। इन लोगों में महेंद्र सिंह धोनी का नाम भी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त अधिकारी ने 15 दिनों के भीतर बकाया रकम चुकाने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है।

इन सभी ने ‘आम्रपाली’ नामक कंपनी से घर खरीदे थे। इस मामले में ग्राहकों का डेटा सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जुटाया जा रहा है। कहा गया है कि अगर बकाया रकम नहीं चुकाया जाता है तो घर खरीदने वालों के नाम पर फ्लैट्स की बुकिंग ऑटोमैटिक रूप से रद्द कर दी जाएगी। गुरुवार (9 सितंबर, 2021) को इस सम्बन्ध में सार्वजनिक नोटिस जारी किया गया और उसके बाद से 15 दिनों का समय दिया गया है।

‘आम्रपाली’ अब अस्तित्व में नहीं है। अप्रैल 2016 में MS धोनी ने भी इसके ब्रांड एम्बेसडर के पद से इस्तीफा दे दिया था। ‘आम्रपाली स्टॉल्ड प्रोजेक्ट्स इंवेस्टमेंट्स रिकंस्ट्रक्शन इस्टैब्लिशमेंट (ASPIRE)’ का गठन नोएडा और ग्रेटर नोएडा में रुके हुए प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए हुआ है। उसने एक बड़े अख़बार में विज्ञापन देकर बकायदारों को चेताया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमिटी की निगरानी में 8000 करोड़ रुपयों की लागत से 20 अटके हुए प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामला हाथ में लेने के बाद आम्रपाली से घर खरीदने वालों ग्राहकों को उनके सारे विवरण जमा करने को कहा था। MS धोनी ने नोएडा के सेक्टर 45 में सफायर फेज-1 में C-P5 और C-P6 नाम के दो फ्लैट्स बुक किए थे। MS धोनी से जुड़ी कंपनी ‘रीती स्पोर्ट्स मैनेजमेंट कंपनी’ के अरुण पांडेय के नाम पर भी C-P4 नाम का फ्लैट बुक है। अब ग्रेटर नोएडा प्रोजेक्ट के खरीददारों को भी नोटिस दिया जाएगा।

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली प्रोजेक्ट्स के 9500 फ्लैट्स की बुकिंग रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की थी। ये वो फ्लैट्स हैं, जिनका कोई दावेदार नहीं था या फिर जिन्हें कल्पित लोगों के नाम पर बुक किया गया था। इनमें से कई बेनामी भी थे। 9538 खरीददार अगर नोटिस का जवाब नहीं देते हैं तो इन फ्लैट्स की नीलामी होगी। इस फण्ड से पेंडिंग प्रोजेक्ट्स पूरे किए जाएँगे। कुल 5229 फ्लैट्स नहीं बिके। कइयों को 1, 11 और 12 रुपए प्रति स्क्वायर फ़ीट में बेच दिया गया था।

‘हर जगह नहीं हो सकती पुलिस’: मुंबई में रेप पीड़िता की मौत के बाद बोले उद्धव के पुलिस कमिश्नर, प्राइवेट पार्ट में घुसा दिया था छड़

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में ‘निर्भया’ जैसी हैवानियत की शिकार हुई 30 वर्षीय महिला की मौत के बाद पुलिस कमिश्नर हेमंत नागराले के बयान से पूरे राज्य में आक्रोश है। मुंबई पुलिस कमिश्नर ने शनिवार (11 सितंबर) को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कंट्रोल रूम में कॉल मिलने के 10 मिनट के भीतर पुलिस मौके पर पहुँच गई। उन्होंने आगे कहा, ”घटना के समय पुलिस हर जगह नहीं हो सकती, लेकिन सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी महिला को फौरन अस्पताल ले गए।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एसीपी ज्योत्सना रसम के नेतृत्व में एक विशेष जाँच दल (एसआईटी) की टीम पीड़िता के साथ बलात्कार और उसकी हत्या की जाँच करेगी। वहीं, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने आदेश दिया है कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट होगी। उन्होंने कहा कि साकीनाका की घटना इंसानियत को शर्मसार करने वाली है।

वारदात को अंजाम देने वाले 45 साल के आरोपित मोहन चौहान को पुलिस ने घटना के कुछ ही घंटों बाद दबोच लिया था। आरोपित को 11 सितंबर को अदालत में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उसे 21 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। CCTV फुटेज में खुलासा हुआ था कि वारदात को मुंबई के साकीनाका में देर रात 2.30 से 3 बजे के बीच अंजाम दिया गया था।

बता दें कि मुंबई के साकीनाका इलाके के खैरानी रोड पर दरिंदों की बर्बरता की शिकार हुई महिला ने तीन दिन बाद शनिवार (11 सितंबर) को घाटकोपर के राजावाड़ी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। 9 सितंबर को 30 वर्षीय महिला खैरानी रोड पर बलात्कार के बाद बेहोशी की हालत में मिली थी। रेप करने के बाद दरिंदों ने पीड़िता को रॉड से पीटा फिर उसे उसके प्राइवेट पार्ट में डाल दिया। मौके पर पहुॅंची पुलिस ने खून से लथपथ महिला को अस्पताल पहुॅंचाया था।

‘जहाँगीर व तैमूर काफी सुंदर नाम, मैं अपने जीवन को ट्रोल्स के नजरिए से नहीं देखती’: करीना कपूर

बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर ने अपने पहले बेटे का तैमूर रखा था, जिसके बाद काफी विरोध हुआ था। उन पर एक विदेशी आक्रांता के महिमामंडन के आरोप लगे थे। अब उन्होंने अपने दूसरे बेटे का नाम जहाँगीर रखा है, जो एक मुग़ल आक्रांता का नाम है। इस पर करीना कपूर व उनके पति सैफ अली खान खासे ट्रोल किए गए। अब करीना कपूर ने कहा है कि वो अपने परिवार व बच्चों के नामों को लेकर ट्रोल किए जाने पर आतंकित महसूस करती हैं।

करीना कपूर ने विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “ईमानदारी से कहूँ तो हमें यही नाम पसंद आए। इसमें कुछ और बात नहीं हैं। दोनों काफी सुंदर बच्चे हैं और ये काफी सुंदर नाम भी हैं। ये समझ से बाहर है कि कोई बच्चों को क्यों ट्रोल करेगा। मैं कभी-कभी आतंकित महसूस करती हूँ, लेकिन फिर हमें फोकस करना है और इससे आगे बढ़ना है। मैं अपने जीवन को इन ट्रॉल्स के नजरिए से नहीं देखती रह सकती।”

करीना कपूर की ननद सबा अली खान ने भी कहा है कि किसी भी माता-पिता को अपने बच्चों का नाम रखने व पालन-पोषण का अधिकार होता है। उन्होंने कहा कि जब कोई माँ 9 महीने तक बच्चे को अपने गर्भ में रखती हैं तो सिर्फ उसे व बच्चे के पिता को अधिकार है कि उसका क्या नाम रखे। वही निर्णय लेंगे कि बच्चा कैसे बड़ा होगा। सबा ने कहा कि बाकी किसी को भी, अन्य परिवार के सदस्यों को भी इसमें कुछ भी बोलने का कोई हक़ नहीं है।

बता दें कि बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर खान ने शुक्रवार (10 सितंबर, 2021) को गणेश चतुर्थी के मौके पर पति सैफ अली खान व बेटे तैमूर अली खान के साथ पूजा करते हुए कुछ तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर की हैं। इस पोस्ट पर उन्हें खूब ट्रोल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर ट्रोल्स उन्हें काफिर कह रहे हैं। वहीं, कुछ यूजर्स उनकी पोस्ट पर ‘लानत है ऐसे मुसलमानों पर’ लिख रहे हैं।