महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख से जुड़े ‘100 करोड़ रुपए के वसूली’ मामले में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने देशमुख के वकील आनंद डागा को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बताया कि वकील पर देशमुख के खिलाफ जारी जाँच को बाधित करने का आरोप है।
देशमुख के वकील डागा के अलावा सीबीआई ने अपने ही एक ऑफिसर को भी अरेस्ट किया है। उस पर आरोप है कि वो देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की प्रारंभिक जाँच को प्रभावित करने के लिए रिश्वत ले रहा था।
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार सीबीआई ने बताया, कि डागा को मुंबई से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया है जहाँ उनको सीबीआई सब-इंसपेक्टर अभिषेक तिवारी के साथ सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।
Former Maharashtra Home Minister Anil Deshmukh’s lawyer has been arrested. He has been brought to Delhi on transit remand. Two people including the CBI sub-inspector have been arrested in the case so far. Both arrested persons will be produced before the competent court: CBI pic.twitter.com/Qy7Ah1mpUz
सीबीआई प्रवक्ता आरसी जोशी ने कहा, “सीबीआई ने अपने एक सब-इंस्पेक्टर, नागपुर के वकील और अन्य लोगों के खिलाफ अवैध परितोषण सहित कुछ आरोपों में मामला दर्ज किया है। उक्त मामले की जाँच के दौरान सीबीआई ने आज सब इंस्पेक्टर को गिरफ्तार कर लिया है। उक्त अधिवक्ता से पूछताछ की जा रही है। इलाहाबाद और दिल्ली में तलाशी ली गई है।”
उल्लेखनीय है कि ये मामला सीबीआई की संबंधित रिपोर्ट लीक होने से जुड़ा है। देशमुख को कथित तौर पर क्लीन चिट देने संबंधी प्राथमिक जाँच की रिपोर्ट शनिवार रात लीक हो गई थी। इसी के बाद सीबीआई ने रिपोर्ट के लीक होने की जाँच शुरू की और उनको पता चला कि देशमुख की टीम ने एजेंसी के एक उप निरीक्षक रैंक के अधिकारी को कथित तौर पर रिश्वत देकर उनके खिलाफ प्रारंभिक जाँच को प्रभावित करने की कोशिश की।
एक अधिकारी ने बताया, “अनिल देशमुख की टीम का प्रयास बॉम्बे हाईकोर्ट की अवमानना है। जिन्होंने निर्देश दिया था कि सभी संबंधितों को प्रारंभिक जाँच का संचालन करते समय सीबीआई के साथ पूरा सहयोग करना चाहिए। इस मामले में यह सामने आया है कि देशमुख की टीम ने जाँच को उलटने की कोशिश की। हालाँकि, उनके प्रयास सफल नहीं हो पाए क्योंकि सीबीआई में एक प्रक्रिया है जिसमें प्राथमिकी दर्ज करने से पहले रिकॉर्ड हुए साक्ष्य और कानूनी राय भी दर्ज की जाती है। वह ऊँचे पद पर बैठे लोगों को प्रभावित नहीं कर सकते।”
बता दें कि इससे पहले केंद्रीय एजेंसी ने बुधवार (1 सितंबर) को देशमुख के दामाद गौरव चतुर्वेदी और वकील आनंद डागा से अपनी जाँच के संबंध में पूछताछ की थी। इसी के बाद केस के संबंध में मामला दर्ज करके ये गिरफ्तारी हुई। मालूम हो कि अनिल देशमुख से जुड़ा 100 करोड़ रुपए की वसूली का मामला वही केस है जिसके कारण देशमुख को अपना गृहमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और उनके ख़िलाफ़ जाँच शुरू हुई थी।
जेल में बंद भारतीय छात्र विशाल जूड को 15 अक्टूबर 2021 को रिहा करने का आदेश ऑस्ट्रेलिया की एक अदालत ने दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एनएसडब्ल्यू विभाग के लोक अभियोजकों ने जूड पर लगाए के आठ नस्लीय आरोपों को हटा दिया है। इस मामले में ऑपइंडिया ने जूड के वकील से उसकी रिहाई की पुष्टि की है।
विशाल को कथित तौर पर 16 सितंबर 2020 और 14 फरवरी 2021 के बीच हुए झगड़ों के तीन मामूली आरोपों के लिए दोषी ठहराया गया। अंतिम सुनवाई के दौरान अदालत में विशाल के वकील ने जूड को खालिस्तानियों द्वारा उकसाए जाने का वीडियो भी पेश किया। इसी वीडियो के कारण यह विवाद हुआ था। जिन आरोपों के लिए जूड को दोषी ठहराया गया है उसके लिए उनकी गिरफ्तारी के दिन 16 अप्रैल 2021 से छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी। इस तरह अब जूड की सजा 15 अक्टूबर 2021 को समाप्त होगी।
क्या है मामला
ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे हरियाणा के 24 वर्षीय विशाल जूड को 16 अप्रैल को सिडनी में तीन आपराधिक घटनाओं में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। भारतीय राष्ट्रवादियों के एक समूह की ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानियों के साथ झड़प के बाद ऑस्ट्रेलियाई पुलिस अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और मारपीट के आरोप में गिरफ्तार किया था।
कथित तौर पर, विशाल पर तीन अपराधों का आरोप लगाया गया है, जो कथित तौर पर 16 सितंबर 2020 और 14 तथा 28 फरवरी 2021 को हुए थे। दिलचस्प बात यह है कि खालिस्तानियों को तीनों मामलों में ‘पीड़ित’ के रूप में नामित किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से ही उनकी रिहाई की माँग हो रही थी। इसको लेकर जून में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बात रिहाई सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करने की माँग की थी। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने जल्द उनकी रिहाई का भरोसा दिलाया था।
बहरहाल विशाल के भाई ने ऑस्ट्रेलिया टुडे से कहा, “बजरंग बली की कृपा से विशाल जल्द ही हमारे साथ होंगे, हम सिडनी जेल से उनकी रिहाई की उम्मीद कर रहे हैं।”
अफगानिस्तान में तालिबान का शासन आने के बाद से ही पाकिस्तान के साथ उसके संबंधों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। तालिबान ने पाकिस्तान को अपना ‘दूसरा घर’ कहा है। वहीं इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री शेख राशिद ने कबूला है कि पाकिस्तान तालिबान का संरक्षक है।
हम न्यूज चैनल के कार्यक्रम ‘ब्रेकिंग प्वाइंट विद मलिक’ में राशिद ने कहा, “हम तालिबान नेताओं के संरक्षक हैं। हमने लंबे समय तक उनकी देखभाल की है। उन्हें पाकिस्तान में पनाह दी, शिक्षा दी और आशियाना दिया। हमने उनके लिए सब कुछ किया है।” पिछले सप्ताह भी एक इंटरव्यू के दौरान अमेरिका की निंदा औऱ तालिबान का स्वागत करते हुए मंत्री ने खुलासा किया था कि पाकिस्तान लंबे समय तक अमेरिकी सेना को अपने यहाँ रखने की इच्छुक नहीं है।
ज्ञात हो कि राशिद पाकिस्तान के वही मंत्री हैं, जिन्होंने कभी कहा था कि पाकिस्तान के पास ‘स्मार्ट बम’ विकसित करने की तकनीक है, जो भारत में केवल हिंदुओं को मार डालेगी और मुसलमानों को बख्श देगी। उनका ताजा कबूलनामा ऐसे वक्त में आया है जब इमरान खान सरकार तालिबान से उसका किसी भी तरह का सरोकार नहीं होने का दिखावा कर रही है। ऐसा इसलिए कि जैसे-जैसे तालिबान अफगानिस्तान में अपनी स्थिति मजबूत करता जा रहा है, वैसे-वैसे ही पाकिस्तान को तालिबान की मदद से कश्मीर पर ‘फतह’ का अपना सपना और साकार होता सा नजर आने लगा है।
पाकिस्तान के तालिबान प्रेम का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक पाकिस्तानी समाचार चैनल पर बोलते हुए इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी की नेता नीलम इरशाद शेख ने कहा था कि ‘तालिबान हमारे साथ हैं’ और वे कश्मीर को जीतने में मदद करेंगे।
अब शेख राशिद की टिप्पणी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी द्वारा यह कहे जाने के बाद आई है कि अफगानिस्तान का समर्थन करने के लिए पाकिस्तान रचनात्मक भूमिका अदा करता रहेगा। कुरैशी ने अफगानिस्तान को अपना नया पसंदीदा पड़ोसी बनाते हुए कहा, “विश्व समुदाय को अफगानिस्तान के लोगों की आर्थिक मदद करने औऱ वहाँ के हालात को स्थिर करने के लिए अफगानिस्तान के साथ जुड़े रहना जरूरी है।”
हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी एक इंटरव्यू के दौरान तालिबान को ‘सामान्य नागरिक’ की संज्ञा दी थी। जिहादी कार्रवाइयों को सही ठहराते हुए पाक पीएम ने दावा किया था कि तालिबान के सत्ता में आने से अफगान लोगों ने ‘गुलामी की जंजीरों’ को तोड़ दिया है।
पाकिस्तान से प्रगाढ़ संबंध की उम्मीद में तालिबान
ऐसा नहीं है कि सिर्फ पाकिस्तान ही तालिबान के बारे में बात करता है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने भी एक टीवी इंटरव्यू में पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को लेकर बात की थी। मुजाहिद ने भारत के साथ भी अच्छे संबंध स्थापित करने की बात करते हुए कहा था, “पाकिस्तान के साथ अफगानिस्तान अपनी सीमा साझा करता है। जब मजहब की बात आती है तो हम पारंपरिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, दोनों देशों के लोग एक-दूसरे के साथ घुल-मिल जाते हैं। इसलिए हम पाकिस्तान के साथ संबंधों को और गहरा करने की उम्मीद कर रहे हैं।”
गौरतलब है कि अफगानिस्तान के कार्यवाहक राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह तालिबान को पनाह देने के लिए पाकिस्तान की लगातार कड़ी आलोचना करते रहे हैं। वे लगातार दोनों देशों में पनप रहे आतंकी संगठनों के बीच गहरे संबंधों की बात करते रहे हैं।
पिछले सप्ताह काबुल में हुए बम विस्फोट में 100 लोगों के मारे जाने के बाद सालेह ने इस बात को दोहराया था, “हमारे पास मौजूद हर सबूत से पता चलता है कि काबुल में सक्रिय इस्लामिक स्टेट खुरासान (आईएस-के) की जड़ें तालिब और हक्कानी नेटवर्क में पैबस्त हैं। तालिबान का आईएसआईएस के साथ संबंधों से इनकार करना पाकिस्तान द्वारा क्वेटा शूरा के मामले में इनकार की तरह ही है। तालिबों ने मौलवियों से बहुत अच्छी सीख ली है।” इससे पहले, सालेह ने पाकिस्तान पर आतंकवादी कारखाने और शिविर स्थापित करने का आरोप लगाया था जो अफगानिस्तान में अराजकता पैदा करने के लिए तालिबान को विस्फोटक सामग्री प्रदान करते हैं।
बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के विरुद्ध संगीतकार जावेद अख्तर ने पिछले साल मानहानि का मुकदमा दायर करवाया था। इसके बाद से उनके और कंगना के बीच अदालती लड़ाई चल रही है। कंगना ने इस संबंध में 10वीं मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा उनके खिलाफ शुरू की गई पूरी कार्यवाही को रद्द करने की माँग करते हुए एक याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। इसी सुनवाई के दौरान अख्तर ने स्वीकारा की उन्होंने कंगना को ऋतिक रोशन से मामला सुलझाने को कहा था।
अख्तर ने बताया कि कैसे साल 2016 में उन्होंने कंगना और उनकी बहन रंगोली चंदेल से मुलाकात की और उन्हें अभिनेता ऋतिक रोशन के साथ सारे विवाद सुलझाने की सलाह देते हुए उन्हें शांत किया। सुनवाई के दौरान रनौत की ओर से पेश हुए वकील रिजवान सिद्दकी ने मामले का बैकग्राउंड बताया। उन्होंने कहा कि गीतकार ने दोनों पक्षों के जानने वाले एक डॉक्टर की मदद से रनौत बहनों को बुलाया था। डॉक्टर ऋतिक रोशन को भी जानते थे। 2016 में कंगना अपनी बहन के साथ अख्तर से मिलने गई थीं जहाँ डॉक्टर भी मौजूद थे।
सुनवाई में अख्तर ने बताया“मैंने उसे ऋतिक के साथ मुद्दों को सुलझाने के लिए सलाह देने और शांत करने की कोशिश की। हालाँकि, उसने मेरी बात नहीं मानी और मुझसे कहा कि वह अपनी पसंद के अनुसार इस मुद्दे को उठाएगी और वह उसे बता कर रहेगी। वह सुनने के मूड में नहीं थी। मेरे लिए, मैंने विषयों को बदल दिया और उसके साथ अच्छी बातें ही साझा की, इसके बाद उसे कुछ चाय या कॉफी के लिए पूछा और बाद में उसे विदा किया।”
इस सुनवाई में कंगना की ओर से पेश हुए वकील सिद्दकी ने डॉक्टर के उस बयान की ओर ध्यान दिलाया जिसमें उल्लेख है कि अख्तर ने रनौत को कहा था कि वह ऋतिक से माफी माँग लें। डॉक्टर ने ये भी बताया था कि अख्तर ने कंगना को कहा, “आप दोनों सेलिब्रिटी हैं। फर्जी ईमेल के इस पूरे मामले से मीडिया और जनता में हमारी छवि खराब होगी। इसलिए, आपको ऋतिक रोशन को सॉरी कहकर इसे सुलझाना चाहिए।”
उल्लेखनीय है कि इससे पहले कंगना रनौत ने रिपब्लिक भारत को दिए साक्षात्कार में कई हैरान कर देने वाली बातें कही थीं। साक्षात्कार के दौरान ही कंगना ने जावेद अख्तर पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। कंगना ने साक्षात्कार में कहा, “जावेद अख्तर ने मुझे अपने घर बुलाया। इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर मैं ऋतिक रोशन से माफ़ी नहीं माँगी तो मुझे आत्महत्या करनी पड़ेगी।” जिसके बाद साक्षात्कार ले रहे अर्नब गोस्वामी ने कंगना को जवाब दोहराने के लिए कहा। दूसरी बार भी कंगना ने ठीक वही बात कही। कंगना ने बताया था कि जावेद अख्तर ने उनसे क्या-क्या कहा था, “तुम्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी क्योंकि वह तुम्हें जेल में बंद कर देंगे। उन्होंने (ऋतिक रोशन) तुम्हारे खिलाफ़ सारे सबूत इकट्ठा कर लिए हैं। वह समझ चुके हैं कि केस पूरी तरह उनके हाथों में है।”
जगह-जगह अपने लेख छपवाने वाले स्तंभकार सीजे वेरलेमैन ने 1 सितंबर 2021 को ट्विटर पर बिना तारीख वाली वीडियो साझा की। साथ ही दावा किया कि हिंदुओं के एक समूह ने नाथन में मुस्लिमों के कब्रिस्तान को बर्बाद कर दिया। उन्होंने लिखा, “कट्टरपंथी हिंदुओं ने भारत के नाथन में एक मुस्लिम कब्रिस्तान को तबाह कर दिया।”
सीजे वेरलेमैन का ट्वीट
इसके बाद हिंदुओं को बदनाम करने के लिए इस्लामवादी इस वीडियो को शेयर करने लगे। बीबी साजेदा ने लिखा, “क्या ये भक्त शहरीकरण के एजेंट हैं? किस प्राधिकरण ने उन्हें यह कार्यभार दिया है?”
बीबी साजेदा की प्रतिक्रिया
ऐदारस अहमद हिरसी ने कहा, “#HinduvataTerrorist militias ने नाथन #India में एक #मुस्लिम कब्रिस्तान को नष्ट कर दिया।”
ऐदारस अहमद सिरसी का ट्वीट
इसी ट्वीट पर अब्दुल हमीद लोन ने कहा, “हिन्दू कट्टरपंथियों ने भारत के नाथन में एक मुस्लिम कब्रिस्तान को अपवित्र और नष्ट कर दिया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह एक बड़ा प्रश्नचिह्न है कि भारत दक्षिण एशियाई उपमहाद्वीप में किस ओर जा रहा है और आप सभी चुप हैं।”
अब्दुल हमीद लोन द्वारा किया गया ट्वीट
टीपू सुल्तान पार्टी से जुड़े प्रतीत होने वाले कमाल खान ने लिखा, “हिन्दू कट्टरपंथियों ने भारत के नाथन में एक मुस्लिम कब्रिस्तान को अपवित्र करने के बाद उसे बर्बाद कर दिया।”
कमाल खान का ट्वीट
न्यूज एजेंसी मुस्लिम मिरर ने लिखा, “हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के नग्गर तहसील के नाथन गाँव में पुलिस की मौजूदगी में हिन्दू कट्टरपंथियों ने एक मुस्लिम कब्रिस्तान को बर्बाद कर दिया।”
मुस्लिम मिरर के द्वारा किया गया ट्वीट
सीजे वेरलेमन का झूठा दावा
सीजे वेरलेमन ने जो भी दावे किए थे, सभी तथ्य रहित और झूठे निकले। पहली बात ये कि ये घटना नाथन की है ही नहीं, जैसा कि उन्होंने दावा किया है। इस मामले में जानकारी के लिए ऑपइंडिया ने कुल्लू पुलिस से संपर्क किया जिसके अंतर्गत आने वाली नग्गर तहसील में नाथन गाँव स्थित है। कुल्लू पुलिस के एसएचओ अशोक शर्मा ने ऐसी किसी भी घटना से साफ तौर पर इनकार करते हुए कहा कि वो वीडियो कुल्लू जिले का नहीं है और इलाके में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।
वीडियो हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के मुख्यालय नाहन का है और इसमें ‘हिन्दू कट्टरपंथियों’ द्वारा नष्ट किए गए मुस्लिम कब्रिस्तान को नहीं दिखाया गया है, जैसा कि वेरलेमैन ने दावा किया है। दरअसल, वीडियो में प्रशासन के सहयोग से कुछ हिंदू कार्यकर्ताओं को एक अवैध मजार को गिराते हुए दिखाया गया है। अगर आप वीडियो को गहनता से देखेंगे तो मौके पर कुछ पुलिसकर्मियों को भी देखा जा सकता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह बर्बरता नहीं, बल्कि प्रशासन के सहयोग से किया गया था।
हिमाचल प्रदेश में हिंदू जागरण मंच के महासचिव कमल गौतम ने भी कल ही इसी वीडियो को ट्विटर पर शेयर किया था। उन्होंने बताया था कि हिंदू जागरण मंच की सिरमौर इकाई ने “इस्लामिक जिहादियों द्वारा नाहन में भूमि जिहाद एजेंडे के तहत निर्मित एक अवैध मजार को उखाड़ फेंका था।” उन्होंने आगे कहा, “जिहादी मेडिकल कॉलेज नाहन के पास भूमि पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे।”
पंजाब केसरी की एक रिपोर्ट में इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा गया है कि नगर निगम बोर्ड ने एचजेएम सदस्यों के सहयोग से अवैध मजार को ध्वस्त कर दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि नाहन में डॉ. वाई एस परमार मेडिकल कॉलेज के पास कुछ अज्ञात लोगों ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा था। इस मामले में संस्था ने नगरीय निकाय को जानकारी दी थी, जिसके बाद अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिया गया।
एचजेएम के प्रदेश सचिव मनब शर्मा का कहना है कि रात में ही कुछ लोगों ने मजार बनाने के लिए निर्माण सामग्री इकट्ठी की थी। हालाँकि, प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी जानकारी मिलने के बाद प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में अवैध निर्माण को हटा दिया गया।
इसलिए, वीडियो में प्रशासन और पुलिस के पूर्ण सहयोग से हिंदू जागरण मंच द्वारा एक अवैध मजार को ध्वस्त करते हुए दिखाया गया है। ऐसे में सीजे वेरलेमन का ‘हिंदुत्व कट्टरपंथियों’ द्वारा नष्ट किया गया मुस्लिम कब्रिस्तान का दावा पूरी तरह से झूठा है।
पहले भी फैलाया था झूठ
इस्लामिक विचारधारा से प्रभावित सीजे वेरलेमैन ने इससे पहले भी भारत में इस्लामोफोबिया होने का दावा करने के चक्कर एक फेक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। कई मौकों पर उन्होंने भारत सरकार पर मुस्लिमों के दमन के झूठे आरोप लगाए हैं।
अगस्त 2018 में वेरलेमैन ने ट्विटर पर फेक दावा किया था कि भाजपा ने ईद के दौरान पशुओं के वध पर प्रतिबंध लगा दिया है। उन्होंने एक वीडियो में यह भी दावा किया था कि पुलिस अधिकारी एक इमाम को अपने-अपने फॉलोवर्स के लिए ‘कुर्बानी को दंडनीय अपराध’ घोषित करने के लिए मजबूर कर रहा था। वर्ष 2018 में ही 25 मार्च को वेरलेमैन ने औरंगाबाद में ‘हिंदू कट्टरपंथियों’ द्वारा 25 मुस्लिम स्वामित्व वाले व्यवसायों और संपत्तियों को नष्ट करने का दावा करते हुए एक वीडियो शेयर किया था।
वेरलेमैन के सोशल मीडिया पोस्टों से ऐसा प्रतीत होता है कि वो उत्तर प्रदेश से खास तौर पर नफरत करते हैं। संभवत: इसका कारण एक भगवाधारी महंत का राज्य का मुख्यमंत्री होन है। उन्होंने कई ट्वीट्स में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘हिन्दू आतंकवादी’ बताया था।
साल 2018 में वेरलेमैन ने मुस्लिमों को टार्गेट करने के लिए यूपी पुलिस पर हिंदू चरमपंथियों के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद कासगंज पुलिस को उनके आरोपों का खंडन करना पड़ा था। एक बार वेरलेमैन ने महाराष्ट्र में भीमा-कोरेगाँव झड़पों के दौरान हुई हिंसा का एक वीडियो पोस्ट कर दावा किया था कि मुस्लिमों की संपत्ति को हिंदू नष्ट कर रहे हैं।
अक्सर हिंदू घृणा से सने ट्वीट करने वाले और इस्लामी समर्थक सीजे वेरलेमैन के ऊपर शेखर गुप्ता की वेबसाइट ने प्रोफाइल किया, उसे एक पत्रकार के रूप में घोषित किया।
नोट: इस खबर में सीजे वेरलेमैन को पहले शेखर गुप्ता की वेबसाइट “द प्रिंट” का स्तंभकार लिखा गया था, जो एक भूल थी। संपादकीय स्तर पर हुई भूल को अब सुधार लिया गया है।
जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता व ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी का बुधवार (सितंबर 1, 2021) देर रात निधन हो गया। 91 वर्षीय गिलानी गुर्दे संबंधी बीमारी से पीड़ित थे। इसके अलावा उन्हें उम्र संबंधी परेशानियाँ भी थीं।
उनके इंतकाल के बाद जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी। वहीं, आईजीपी विजय कुमार ने भी इस खबर के बाद कश्मीर में कुछ पाबंदियाँ लगाईं। इंटरनेट सेवा भी इसी के मद्देनजर बंद की गई हैं।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, गिलानी को गुरुवार सुबह श्रीनगर के हैदरपोरा इलाके में सुबह 4:37 पर सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान इंटरनेट सेवा बंद रहीं ताकि घाटी में अफवाहों के कारण किसी तरह की परेशानी न हो।
In Valley, @JmuKmrPolice holds its own to facilitate wee-hour burial, at 4:30 am, for Kashmiri separatist Geelani, weeding out all attempts by his aides who tried even in such times to instigate locals with shutdown/protest call
पत्रकार रोहन दुआ के अनुसार, आज सुबह 4:30 बजे जम्मू-कश्मीर पुलिस की देखरेख में कश्मीरी अलगाववादी नेता गिलानी को दफनाया गया। बताया जा रहा है कि गिलानी के कुछ साथियों ने ऐसे समय में भी स्थानीयों को उकसाते हुए विरोध का आह्वान किया था। इसी के मद्देजर कश्मीर पुलिस ने गुरुवार की तड़के किसी भी जुलूस निकालने की उनकी योजना को विफल कर दिया और आवश्यक पाबंदियाँ लगाईं। अनुमान है कि ऐसे समय में पाकिस्तान घाटी में लोगों को उकसाने की कोशिश कर सकता है।
Even as separatist leader Geelani’s acolytes/aides were drumming up support over his death against Indian security forces, Kashmir Police in early hours of Thursday foiled their plan to hold any procession
गिलानी का परिवार भी चाहता था कि उन्हें सुबह 10 बजे के करीब दफनाया जाए। वे रिश्तेदारों को उनके जनाजे में बुलाना चाहते थे लेकिन इसकी इजाजत नहीं दी गई। उनके परिवार में 2 बेटे और 6 बेटियाँ हैं।
उल्लेखनीय है कि गिलानी कश्मीर में सक्रिय अलगाववादी नेता थे। उनका जन्म 29 सितंबर 1929 को सोपोर में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई लाहौर से करने के बाद राजनीति में कदम रखा और 3 बार सोपोर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए।
उन्होंने कभी कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं माना। सन् 1990 में उन्होंने अलगाववाद की राजनीति करने वालों के लिए एक मंच तैयार किया और उसका नाम ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस कर लिया। इसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के विरुद्ध तमाम गुट शामिल हो गए।
गिलानी पर अक्सर पाकिस्तान की फंडिंग के सहारे कश्मीर में अलगाववाद भड़काने के आरोप लगे। उनके विरुद्ध कई केस भी हुए। NIA और ED ने टेरर फंडिंग के मामले में जाँच की थी, जिसमें उनके दामाद समेत कई रिश्तेदारों से पूछताछ हुई थी।
आज उनके इंतकाल के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल के जरिए शोक व्यक्त किया है। साथ ही साथ जहरीला बयान देने से बाज नहीं आए। उन्होंने लिखा, “कश्मीरी नेता सैयद अली शाह गिलानी के इंतकाल की खबर सुनकर बहुत दुखी हूँ। गिलानी जीवनभर अपने लोगों और उनके आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए लड़ते रहे। भारत ने उन्हें कैद करके रखा और प्रताड़ित किया।”
Deeply saddened to learn of the passing of Kashmiri freedom fighter Syed Ali Geelani who struggled all his life for his people & their right to self determination. He suffered incarceration & torture by the Occupying Indian state but remained resolute.
उन्होंने गिलानी को ‘पाकिस्तानी’ बताते हुए ऐलान किया कि वो गिलानी की मौत का शोक मनाएँगे। उन्होंने लिखा, “हम पाकिस्तान में उनके संघर्ष को सलाम करते हैं और उनके शब्दों को याद करते हैं- हम पाकिस्तानी हैं और पाकिस्तान हमारा है। पाकिस्तान का झंडा आधा झुका रहेगा और हम एक दिन का आधिकारिक शोक मनाएँगे।”
इसी तरह पाकिस्तान के जनरल कमर जावेद बाजवा ने अलगाववादी नेता को ‘आइकन’ कहा और उनके निधन पर ‘गहरा दुख’ व्यक्त किया। मालूम हो कि साल 2020 में पाकिस्तान ने उन्हें निशान-ए-पाकिस्तान से नवाजा था।
We in Pakistan salute his courageous struggle & remember his words: “Hum Pakistani hain aur Pakistan Humara hai”. The Pakistan flag will fly at half mast and we will observe a day of official mourning.
बता दें कि गिलानी के जाने के बाद सोपोर क्षेत्र में सुरक्षा के लिहाज से कई पाबंदियाँ लगाई गई हैं। पुलिस ने कहा है कि कर्फ्यू जैसी पाबंदियाँ कश्मीर में लगी हैं। गिलानी के घर के बाहर और जो सड़क वहाँ तक जाती है, सभी जगह बड़ी तादाद में पुलिस तैनात है है। किसी को वहाँ जाने की अनुमति भी नहीं है। जानकारी मिली है कि कश्मीर घाटी में कई जगह मस्जिदों से लाउडस्पीकर से गिलानी के इंतकाल की घोषणा हुई और उनके लिए नारेबाजी हुई है। इसके अलावा लोगों को बड़ी तादाद में जुलूस में शामिल होने के लिए सड़कों पर आने को भी कहा गया।
केंद्र की मोदी सरकार ने इसी साल 6 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गॉंधी के नाम पर रहे खेल रत्न पुरस्कार को मेजर ध्यानचंद का नाम दिया था। अब असम की बीजेपी सरकार ने भी इसी तरह का फैसला किया है। हिमंत बिस्वा सरमा सरकार ने राज्य के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों में से एक से राजीव गाँधी का नाम हटाने का फैसला किया है। गुवाहाटी में आयोजित साप्ताहिक कैबिनेट की बैठक के दौरान राज्य सरकार ने राजीव गाँधी ओरंग राष्ट्रीय उद्यान का नाम बदलकर सिर्फ ओरंग राष्ट्रीय उद्यान करने का फैसला किया।
इसको लेकर कई संगठनों ने राज्य सरकार को अपनी माँगें सौंपी थीं। इसे देखते हुए असम कैबिनेट ने राजीव गाँधी को राष्ट्रीय उद्यान के नाम से हटाने का फैसला किया। राज्य में प्रकृति के क्षेत्र में काम करने वाला संगठन अरण्य सुरक्षा समिति ने पिछले महीने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपकर राजीव गाँधी ओरंग राष्ट्रीय उद्यान का नाम बदलकर ओरंग राष्ट्रीय उद्यान करने की माँग की थी। इसके अलावा इलाके में रहने वाले आदिवासी और चाय जनजाति भी राजीव गाँधी का नाम हटाने की माँग कर रहे थे।
ज्ञात हो कि दारांग, उदलगुरी और सोनितपुर जिलों में ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर स्थित यह राष्ट्रीय उद्यान भारतीय गैंडों, रॉयल बंगाल टाइगर, पिग्मी हॉग, जंगली हाथी, जंगली भैंस जैसे जंगली जानवरों के लिए जाना जाता है। 79.28 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैले इस पार्क को 1985 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था। लेकिन, बाद में 1999 में अपग्रेड कर राष्ट्रीय उद्यान बना दिया गया।
जनता ने राजीव गाँधी नाम का किया था विरोध
ओरंग वन्यजीव अभयारण्य का नाम मूल रूप से 1992 में पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गाँधी के नाम पर रखा गया था। हालाँकि, उस दौरान जनता ने इसका काफी विरोध किया था, जिसके बाद इसे रोक दिया गया था। लेकिन, 1999 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किए जाने के बाद तत्कालीन तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने 2001 में इसका नाम बदलकर राजीव गांधी ओरंग राष्ट्रीय उद्यान कर दिया था। तब से जनता और पर्यावरणविदों के विरोध के बावजूद यह निर्णय जस का तस लागू रहा।
खास बात यह है कि भले ही पार्क का आधिकारिक नाम राजीव गाँधी था, लेकिन प्रदेशवासियों ने कभी भी इसका इस्तेमाल नहीं किया। लोगों ने इसे हमेशा ओरंग नेशनल पार्क के नाम से ही जाना है। इसके अलावा जब साल 2016 में इस पार्क को टाइगर रिजर्व के रूप में भी घोषित किया गया था तो भी इसे केवल ओरंग टाइगर रिजर्व के रूप में नामित किया गया था।
गौरतलब है कि कर्नाटक के नागरहोल में स्थित राजीव गाँधी राष्ट्रीय उद्यान का नाम भी बदलने की माँग हो रही है। हाल में इसके लिए Change.org पर एक ऑनलाइन अभियान शुरू किया गया है। इसमें नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान का नाम कोडंडेरा मडप्पा करियप्पा (Kodandera Madappa Cariappa) के नाम पर रखने की माँग की गई है, जो भारतीय सेना में पहले कमांडर-इन-चीफ थे। बता दें कि कोडागु के मूल निवासी करियप्पा का जन्म 28 जनवरी 1899 को मदिकेरी, कोडागु में हुआ था और उनका तीन दशकों का विशिष्ट सैन्य करियर था।
जन्माष्टमी के मौके पर उर्दू की लेखिका इस्मत चुगतई की जीवनी के कुछ अंश को बीबीसी ने प्रकाशित किया। ऑटोबायोग्राफी में लेखिका ने खुलासा किया है कि किस तरह से वो अपनी हिंदू पड़ोसन के यहाँ भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति उठा ली थीं। इतना ही नहीं, वो धोखे से अपनी हिंदू सहेली सुशी को मांस भी खिला देती थीं।
उर्दू लेखिका इस्मत चुगताई की आत्मकथा ‘कागजी है पैरहन’ के अनुवाद को आधार बना कर बीबीसी ने यह कहानी लिखी है। बीबीसी में प्रकाशित कहानी के अनुसार इस्मत चुगताई लिखती हैं, “चूँकि हमें मालूम था कि सूशी (हिंदू सहेली) गोश्त नहीं खाती, इसलिए उसे धोखे से किसी तरह का गोश्त खिला कर बड़ा इत्मीनान होता था। हालाँकि उसे पता नहीं चलता था, मगर हमारा न जाने कौन सा जज्बा तसल्ली पा जाता था।”
फोटो साभार: BBC
लेखिका लिखती हैं कि उनके घर में टट्टी (टाट) का अहाता बनाकर उसके पीछे बकरीद पर बकरे काटे जाते थे और उसके बाद उस माँस को कई दिनों तक बाँटा जाता था। उन दिनों में सुशी घर के अंदर बंद कर दी जाती थी।
बीबीसी के मुताबिक, इस्मत चुगताई लिखती हैं कि जन्माष्टमी के मौके पर हिंदुओं में काफी धूमधाम से मनाया जा रहा था। पकवानों की खुशबू को सूँघकर अंदर जाने का मन करता। इतने में सुशी दिखी तो उसने उससे पूछा कि क्या है तो वो बोली कि भगवान आए हैं। लेखिका लिखती हैं कि वो चोरी से सुशी के बरामदे तक पहुँच गईं। इसी दौरान वहाँ पर सभी को टीका लगी रहीं एक औरत उसके माथे पर भी टीका चिपकाती चली गई।
इस्मत के मुताबिक, उन्होंने सुना था कि जहाँ टीका लगता है तो उतना गोश्त जहन्नुम को जाता है। यही सोचकर उसे उन्होंने मिटाना चाहा परन्तु अचानक वह रुक गई। इस बीच माथे पर टीका लगा होने के कारण बेधड़क पूजाघर तक चली गईं और वहाँ चाँदी के पालने में झूला झूल रहे भगवान श्रीकृष्ण को उठा लिया। हालाँकि, इसी बीच सुशी की नानी ने उन्हें ऐसा करते हुए पकड़ लिया औऱ वहाँ से हटाकर बाहर कर दिया।
इस बीच कई साल गुजरने के बाद जब इस्मत चुगतई अलीगढ़ से आगरा वापस गई तो वह सुशी की हल्दी की रस्म में गई। इस दौरान वो उसी कमरे में गईं, जहाँ श्रीकृष्ण का मंदिर था। लेखिका ने लिखा कि मैं मुस्लिम हूँ और बुतपरस्ती इस्लाम में गुनाह है।
गौरतलब है कि अस्मत चुगतई उर्दू लेखिका थीं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले में वर्ष 1915 में हुआ था और उनकी मृत्यु साल 1991 में हुई थी।
पटना हाईकोर्ट ने बिहार की राजधानी में बन रहे वक्फ भवन को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब यथास्थिति बहाल रखने का आदेश दिया है। बता दें कि उक्त वक्फ भवन अभी निर्माणाधीन है और इसे पटना हाईकोर्ट के परिसर के बगल में ही बनाया जा रहा है। पटना हाईकोर्ट की सेंटेनरी बिल्डिंग इसके ठीक बगल में स्थित है। उच्च-न्यायालय ने इसे वक्फ एक्ट, बिहार म्युनिसिपल एक्ट और बिहार बिल्डिंग कानूनों का उल्लंघन करार दिया था।
इस मामले में ‘बिहार स्टेट सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड’ और ‘बिहार स्टेट बिल्डिंग कॉर्पोरेशन (BSBCC)’ सुप्रीम कोर्ट पहुँचा था, जहाँ जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट अब 18 अक्टूबर को इस मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाएगी। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा कि ये कार्य नियमानुसार ही हो रहा है और एक सरकारी आर्किटेक्ट से इसकी अनुमति ली गई थी।
बोर्ड की दलील है कि अगर प्रोजेक्ट पर सरकारी आर्किटेक्ट का हस्ताक्षर है तो फिर इसके लिए पटना म्यूनिसपैलिटी से अनुमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। साथ ही जानकारी दी कि बिहार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय द्वारा ये भवन बनवाया जा रहा है। साथ ही उसने कहा कि पटना हाईकोर्ट की आपत्ति के बाद इमारत के उन हिस्सों को ध्वस्त करने के लिए वो राजी हो गया था। हालाँकि, हाईकोर्ट ने इसे डैमेट कंट्रोल के लिए देरी बताते हुए नकार दिया था।
बता दें कि पटना हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग के उत्तरी भाग के नजदीक बन रहे 4 मंजिला ‘वक्फ भवन’ को ध्वस्त करने के आदेश उच्च न्यायालय में 4:1 के जजमेंट के साथ पास कर दिए गए थे। इससे पहले यह मामला अदालत के मुख्य न्यायाधीश के निर्देशों पर जनहित में दायर हुआ था। इस मामले पर पाँच जजों की विशेष पीठ ने सुनवाई की थी। पीठ में जस्टिस अश्विन कुमार सिंह, विकास जैन, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, राजेंद्र कुमार मिश्रा और चक्रधारी शरण सिंह शामिल थे।
मामले की सुनवाई में पीठ के चार जजों ने हाई कोर्ट के पास बने निर्माण को हटाने के पक्ष में फैसला दिया था जबकि अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने इस मामले में अपनी असहमति जताई थी और निर्माण को बस नियम विरुद्ध बताया और उसे अवैध मानने से इनकार किया था। इसके अलावा, उन्होंने टिप्पणी की थी कि उल्लंघन ऐसा नहीं है कि पूर्ण विध्वंस के लिए कहा जाए, उन्होंने प्रस्ताव दिया कि उप-नियम का उल्लंघन करने वाली 10 फीट की ऊँचाई को, अनियमितता को ठीक करने के लिए ध्वस्त किया जा सकता है।
देश की राजधानी दिल्ली में बीते दिनों से हो रही बारिश बवाल बनकर सामने आई है। भारी जल जमाव के कारण सड़कें नाव चलाने लायक हो गई हैं। इस बारिश ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार की तैयारियों के दावों की पोल खोल कर रख दी है। सोशल मीडिया पर लोग सीएम अरविंद केजरीवाल की आलोचना कर रहे हैं और कुछ उनके मजे भी ले रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाके जलमग्न हो गए। रिंग रोड हयात होटल, सावित्री फ्लाई ओवर के दोनो ओर, महारानी बाग, निजामुद्दीन खट्टा, कैरिजवे धौला कुआँ से 11 मूर्ति, आनंद पर्वत गली नबंर 10, एसपी रोड से आरएमएल रोड, पुल प्रह्लादपुर अंडरपास, छत्ता रेल, विज्ञान भवन के पास मोती लाल नेहरू मार्ग और मौलाना आजाद रोड समेत कई इलाके जलमग्न रहे।
इस मामले में सोशल मीडिया के जरिए भाजपा ने कपिल मिश्रा ने मुख्यमंत्री केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा दिल्ली अब केजरीवाल के निकम्मेपन और भ्रष्टाचार में डूब गई है। मिश्रा ने ट्वीट किया, “आज दिल्ली बारिश में नहीं केजरीवाल के भ्रष्टाचार और निकम्मेपन में डूबी हुई है। दिल्ली में इंफ्रास्ट्रक्चर का सारा पैसा जिहादी तुष्टिकरण और मौलानाओं की सैलरी में देने वाली केजरीवाल सरकार ने पूरी दिल्ली को स्लम बना दिया है। दुनिया के सामने आज दिल्ली की हालत का मजाक बन गई है।”
आज दिल्ली बारिश में नहीं केजरीवाल के भ्रष्टाचार और निकम्मेपन में डूबी हुई हैं
दिल्ली में इंफ्रास्ट्रक्चर का सारा पैसा जिहादी तुष्टिकरण और मौलानाओ की सैलरी में देने वाली केजरीवाल सरकार ने पूरी दिल्ली को स्लम बना दिया हैं
दुनिया के सामने आज दिल्ली की हालत का मजाक बन गया है
भाजपा नेता के ट्वीट पर कमेंट करते हुए अल्का नाम की यूजर ने कॉन्ग्रेस कार्यालय के बाहर की तस्वीर भी शेयर की और तंज कसा कि बेतहाशा विकास में कॉन्ग्रेस का भविष्य भी डूब गया।
एक अन्य यूजर ने अरविंद केजरीवाल को सत्ता के मद में डूबा हुआ बताया।
केजरीवाल अपनी सत्ता के घमण्ड के नशे में डूबा हुआ है। अब दिल्ली की जनता मांगे बीजेपी की सरकार दिल्ली में बने और केजरीवाल के दुशासन और फ्री फ्री के घातक लॉलीपॉप से भी बचे.
दिल्ली में बीजेपी लाओ, दिल्ली को गुंडई राज से बचाओ।
आयुष जैन ने तो केजरीवाल को ‘निकम्मा और बेशर्म’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जैसे आज दिल्ली डूबी उसी तरह से एक दिन केजरीवाल की राजनीति भी डूबेगी।
यकीन कीजिए, जिस तरह दिल्ली आज पानी में डूबी हुई है उसी तरह एक दिन केजरीवाल की घटिया राजनीति भी डूबने वाली है और उस समय ये दुनिया के सामने एक मजाक बन जाएगा। इससे ज्यादा निकम्मा और बेशर्म मुख्यमंत्री आज तक नही हुआ।https://t.co/NnWaJOWnvT