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आतंकवाद के खिलाफ कोर्स: JNU को अपनी बपौती समझने वाले वामपंथियों को शिकंजा ढीला होने का डर

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने इंजीनियरिंग के उन छात्रों के लिए आतंकवाद से लड़ने (Counter Terrorism) पर एक कोर्स शुरू किया है, जो डबल डिग्री प्रोग्राम के तहत पढ़ाई कर रहे हैं। छात्रों की ओर से प्रतिक्रिया आती, उससे पहले विपक्षी दलों के नेताओं की ओर से आ गई। इन नेताओं को इस कोर्स के साथ-साथ कोर्स के स्टडी मटेरियल से भी शिकायत है। CPI के राज्यसभा सांसद विनोय विस्वम ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को एक पत्र लिखकर विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किए गए इस कोर्स का विरोध किया।

उन्होंने इस कोर्स के स्टडी मटेरियल को बदलने के लिए उचित व्यवस्था करने का अनुरोध भी किया। विस्वम अपने पत्र में लिखते हैं; “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उच्च शिक्षा का इस्तेमाल करके अंतर्राष्ट्रीय जियो-पोलिटिकल संबंधी विषयों पर ऐसे कोर्स में अर्ध सत्य और अकादमिक तौर पर झूठी सूचना का इस्तेमाल करके सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।” विस्वम का मानना है कि इतिहास को तोड़-मरोड़ कर उसका इस्तेमाल एक ख़ास विचारधारा को आगे बढ़ाने में किया जा रहा है।

उनके ये भी मानना है कि इस कोर्स के कंटेंट में वैश्विक आतंकवाद और उसे समर्थन देनेवाले राजनीतिक सत्ता को लेकर ऐसे दावे किए जा रहे हैं जो सही नहीं हैं। विस्वम आगे लिखते हैं कि जिहादी आतंकवाद को एकमात्र धार्मिक आतंकवाद बताया जा रहा है जो सही नहीं है। विनोय विस्वम को इस बात से भी शिकायत है कि चीन और सोवियत संघ को जिहादी आतंकवाद के समर्थक देशों के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। उनके अनुसार, ये तथ्य ऐतिहासिक रूप से न केवल गलत हैं बल्कि पक्षपातपूर्ण और राजनीतिक से प्रेरित हैं। 

जब लगभग पूरी दुनिया आतंकवाद से पीड़ित है, तब उससे मुकाबले को लेकर एक विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किए गए कोर्स का ऐसा विरोध और देशों में स्वाभाविक नहीं है पर भारत के लिबरल-सेक्युलर राजनीतिक दलों के लिए यह विरोध स्वाभाविक लगता है। लगता है जैसे वर्तमान शिक्षा या शासन व्यवस्था द्वारा कुछ भी किए जाने पर विरोध एक आम प्रतिक्रिया है। CPI के राज्य सभा सांसद के रूप में विस्वम को आज JNU की स्वायत्तता पर इसलिए शंका है क्योंकि वे सत्तापक्ष में नहीं हैं।

उनके पत्र को अपनी राजनीतिक विचारधारा के तहत सामान्य माना जा सकता है पर इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि यह आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक दृष्टिकोण को नकारने का प्रयास है। एक विश्वविद्यालय में किसी भी कोर्स को चुने जाने की एक प्रक्रिया होती है जिससे गुजरने के बाद ही विश्वविद्यालय छात्रों के लिए उस कोर्स की घोषणा करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर JNU जैसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालय के किसी कोर्स में दी जाने वाली अध्ययन सामग्री (Study Material) भी पर्याप्त विमर्श के बाद तय की जाती है।

ऐसे में सीधे तौर पर यह आरोप लगाना कि कोर्स सम्बंधित स्टडी मटेरियल राजनीतिक विचारधारा से प्रेरित है या पक्षपातपूर्ण है, एक ऐसा बचकाने आरोप से अधिक कुछ और नहीं लगता। वैसे भी जिहादी आतंकवाद को वैचारिक दृष्टिकोण के माध्यम से समर्थन देना वामपंथी विचारधारा और बुद्धिजीवियों का पुराना कर्म रहा है। ‘स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज’ के अध्यक्ष प्रोफेसर अरविन्द कुमार, जिन्होंने इस कोर्स को डिज़ाइन किया है, के अनुसार; आज जेहाद पूरे विश्व के लिए चुनौती है और तब, जब तालिबान ने अफगनिस्तान पर आतंकवाद का इस्तेमाल करके कब्ज़ा कर लिया है, ऐसे में इस कोर्स की घोषणा करने का इससे अच्छा समय और क्या हो सकता था?

वैसे भी यह एक ऑप्शनल कोर्स है और उन छात्रों के लिए है जो बी टेक के साथ इंटरनेशनल रिलेशन्स की पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में एक ऑप्शनल कोर्स का इस स्तर पर विरोध समझ से परे है। या फिर ऐसे विरोध के बारे में यही कहा जा सकता है कि दशकों के वर्चस्व के कारण से वामपंथियों को यह विश्वास है कि JNU में जो कुछ भी होना है उस पर उनकी मुहर लगनी आवश्यक है। दशकों तक JNU को अपने शिकंजे में रखने वाले वामपंथी शायद यह सोच कर असहज हो जाते हैं कि उनका शिकंजा ढीला पड़ रहा है। 

कोर्स का विरोध करने वालों को यह समझने की आवश्यकता है कि वर्तमान में आतंकवाद का जो वैश्विक चेहरा है वह इतना पुराना नहीं है जिसे लेकर विश्व समुदाय को किसी तरह का संशय हो। आतंकवाद का वर्तमान स्वरूप आज जहाँ है उस दूरी को तय करने में उसे दो ढाई सौ वर्ष नहीं बल्कि लगभग सात दशक लगे हैं। इन सात दशकों में जो भी घटा है लगभग सब कुछ के प्रमाण कई माध्यमों और शक्ल में दुनिया भर ने देखा है।

यह किसी मुग़ल बादशाह के पक्ष में निर्मित ऐतिहासिक कहानी नहीं जिन्हें बार-बार लिख और बोलकर इतिहासकार तथ्य साबित कर दे और फिर जगह-जगह यह कहता फिर कि; चूँकि हम ऐसा लिख या कह रहे हैं इसलिए यही सत्य है। यह NCERT के कोर्स में पढ़ाया जानेवाला इतिहास भी नहीं है जिसके बारे में लिखित तथ्य न रहने की वजह से बार-बार कुछ भी लिख कर उसे एक दिन तथ्य घोषित कर दिया जाय। आधुनकि आतंकवाद के विरुद्ध लगभग सारे तथ्य किसी न किसी माध्यम में दुनिया भर की सरकारों और विशेषज्ञों ने सुरक्षित कर रखे हैं और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सारे साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकते हैं। 

इसलिए भारत के वर्तमान विपक्षी नेताओं को यह स्वीकार करने की आवश्यकता है कि जिहादी आतंकवाद जैसे कुछ राष्ट्रीय महत्व के विषय में की जाने वाली पुरानी राजनीति को तज देने का समय आ गया है। आतंकवाद के समर्थन का परिणाम भारत पहले भुगत चुका है। आज का वैश्विक परिवेश ऐसा है जिसमें लाखों शरणार्थियों को अपनी बाँहें खोलकर स्वीकार करने वाला यूरोप भी परेशान है और तालिबानियों को एक समय वंडरफुल पीपुल बताने वाला अमेरिका भी। ऐसे में भारत अपने एक भी नागरिक से जिहादी आतंकवाद को समर्थन का खतरा नहीं उठा सकत

घूसखोरी व मनी लॉन्ड्रिंग में घिरे ममता बनर्जी के दो मंत्री, ED ने दायर की चार्जशीट: समन व पूछताछ की तैयारी शुरू

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार (1 सितंबर 2021) को चर्चित नारदा स्टिंग के मामले में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित PMLA कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दिया है। इसमें जाँच एजेंसी ने ममता सरकार के दो मंत्रियों फरहाद हाकिम और सुब्रत मुखर्जी समेत कई अन्य को आरोपित बनाया है। सभी के खिलाफ रिश्वतखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के चार्जेस लगाए गए हैं।

आरोप पत्र में जाँच एजेंसी ने आरोपितों के कबूलनामें का भी जिक्र किया है। नारदा स्टिंग मामले में दो मंत्रियों के अलावा टीएमसी के विधायक मदन मित्रा, कोलकाता के पूर्व मेयर सोवन चटर्जी और निलंबित आईपीएस एसएमएच मिर्जा शामिल हैं। अदालत ने इन सभी को पूछताछ के लिए समन जारी करने का आदेश दिया है। सभी आरोपितों को 16 नवंबर 2021 को सीबीआई अदालत ने पेश होने को कहा है।

इसके साथ ही कोर्ट ने अपने निर्देश में राज्य विधानसभा के कार्यालय की ओर से मुखर्जी, हाकिम और मित्रा को समन भेजने को कहा है, क्योंकि ये तीनों विधानसभा सदस्य हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय ने सभी आरोपितों को अदालत से अधिक से अधिक सजा देने की माँग करते हुए चार्जशीट में आरोप लगाया है कि ये आरोपित काले धन को सफेद करने की कोशिश में लगे हुए थे।

गौरतलब है कि इससे पहले केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) ने इसी मामले में ममता सरकार के मंत्री फिरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी, विधायक मदन मित्रा और पूर्व मेयर सोवन चटर्जी को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद कोलकाता के निजाम पैलेस स्थित सीबीआई कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गई थीं। उन्होंने जाँच एजेंसी को खुद की गिरफ्तारी की भी चुनौती दी थी। इतना ही नहीं नारदा केस में गिरफ्तारी के विरोध में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं ने जाँच एजेंसी के दफ्तर पर पत्थरबाजी की थी।

‘गाय घोषित हो राष्ट्रीय पशु, गोरक्षा हिन्दुओं का मूलभूत अधिकार’: इलाहाबाद HC की बड़ी टिप्पणी – संस्कृति पर चोट से कमजोर होता है राष्ट्र

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि गाय को भारत का राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए और गोरक्षा हिन्दुओं का मूलभूत अधिकार होना चाहिए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी देश की संस्कृति और उसकी आस्था पर चोट पहुँचती है तो वो राष्ट्र कमजोर हो जाता है। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट जावेद नाम के व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया, जिस पर गोहत्या के आरोप थे।

जस्टिस शेखर यादव की पीठ ने ये फैसला सुनाया। उच्च-न्यायालय ने पाया कि जावेद ने न सिर्फ गाय को चुराया, बल्कि गला काट के उसकी हत्या भी कर दी और गोमांस का भी इस्तेमाल किया। अदालत ने कहा कि बीफ खाने वालों को ही सिर्फ मूलभूत अधिकार नहीं मिले हुए हैं, बल्कि गाय की पूजा करने वालों और जिनकी जीविका गाय पर ही आधारित है, उन्हें भी एक सार्थक/अर्थपूर्ण जीवन जीने का पूरा अधिकारी है।

अदालत ने कहा कि जीवन का अधिकार सबसे ऊपर है और किसी की हत्या के अधिकार और बीफ खाने के अधिकार को इससे ऊपर नहीं रखा जा सकता। उच्च-न्यायालय ने कहा कि गाय जब बूढ़ी और बीमार हो जाती है, तब भी काफी उपयोगी होती है। साथ ही बताया कि कैसे गाय के गोबर का खाद बनाने में और गोमूत्र का दवाओं में उपयोग किया जाता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि गाय बूढ़ी हो या बीमार, उसकी पूजा माँ के रूप में होती है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, “सिर्फ हिन्दू ही नहीं, गाय कई मुस्लिमों ने भी अपने शासनकाल में गाय को अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना है। बाबर, हुमायूँ और अकबर ने इस्लामी त्योहारों में गोहत्या पर पाबंदी लगाई। 5 मुस्लिम शासकों ने गोहत्या प्रतिबंधित की थी। मैसूर के नवाब हैदर अली ने गोहत्या को दंडनीय अपराध घोषित किया था। गाय की महत्ता और लोगों की आस्था को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट तक ने कई फैसले दिए हैं।”

उच्च-न्यायालय ने नोट किया कि देश के लोगों से लेकर संसद तक ने गोरक्षा के लिए नियम-कानून बनाए हैं। कोर्ट ने कहा कि ये काफी दुःखी करने वाला है कि जो गोरक्षा की बात करते हैं, वही गोमांस का भी भक्षण करने लगते हैं। साथ ही कहा कि सरकार गोशालाएँ बनाती हैं, लेकिन इनकी देखभाल की जिम्मेदारी जिन्हें दी जाती है वो लापरवाही करते हैं। गोशालाओं में भूख और बीमारी से गायों की मृत्यु पर हाईकोर्ट ने आपत्ति जताई।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कई बार गायों को गंदे माहौल में रखा जाता है, जहाँ उन्हें भोजन तक नसीब नहीं होता और वो पॉलीथिन खाने लगती हैं। इससे उनकी मृत्यु हो जाती है। साथ ही ध्यान दिलाया कि कैसे दूध न देने वाली गायों को सड़क पर छोड़ दिया जाता है। उच्च-न्यायालय ने कहा कि ये सब देख कर संशय होता है कि गाय की रक्षा का दावा करने वाले लोग क्या कर रहे हैं। बता दें कि गोरक्षा पिछले कई दिनों से मुद्दा बना हुआ है।

‘₹500 लो और हिन्दू देवी-देवताओं को गाली दो, येशु दूर करेंगे गरीबी’: महिलाओं के धर्मांतरण में लगा रामचंद्र चढ़ा यूपी पुलिस के हत्थे

पिछले कुछ दिनों में देश में ईसाई मिशनरियों की करतूतों को लेकर बहस तेज़ है। ताजा मामला आजमगढ़ जिले करतालपुर का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईसाई धर्म अपनाने के लिए पैसों का लालच देने वाले वाराणसी के हुकुलगंज के रहने वाले राम चन्द्र को पुलिस ने मंगलवार (31 अगस्त, 2021) को गिरफ्तार कर लिया है।

राम चन्द्र पर महिलाओं को भड़काने और उन्हें ईसाई समाज की पुस्तकें बाँटने का आरोप है। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि आरोपित व्यक्ति के खिलाफ धारा 273/ 21, 298/504 के तहत FIR दर्ज कर ली गई है। इसके साथ ही इस गिरोह में शामिल अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। पुलिस ने बताया कि अभी तक कितने लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा चुका है, इसकी जाँच जारी है।

प्रभारी निरीक्षक ब्रह्मदीन पांडेय ने बताया, ”सराय मंदराज गाँव के निवासी जित्तू सोनकर की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। वह पिछले कई महीने से करतालपुर में गरीब परिवार के सदस्यों पर धर्म बदलने का दबाव बना रहा था।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित राम चन्द्र गरीब व दलित महिलाओं को अपना निशाना बनाता था। वह महिलाओं को 500 रुपए का लालच देकर उन्हें हिन्दू-देवी देवताओं को गाली देने के लिए कहता था। साथ ही महिलाओं से कहता था कि अगर तुम ईसाई धर्म स्वीकार कर लोगी तो येशु तुम लोगों की दरिद्रता दूर कर देंगे।

बता दें कि पिछले साल दिसंबर में आजमगढ़ में ईसाई धर्मांतरण कराने में लिप्त 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। दीदारगंज के डीह कथौली गाँव में ईसाई धर्मांतरण कराने के लिए 3 लोग पहुँचे थे, जिन्हें सूचना मिलते ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। स्थानीय भाजपा नेता अशोक यादव ने इस मामले में थाने में तहरीर दी थी, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की गई थी।

रिकॉर्ड GST कलेक्शन, GDP विकास दर में उछाल, महँगाई घटी, उत्पादन बढ़ा: आर्थिक मोर्चे पर देश के लिए 4 अच्छी खबरें

आर्थिक मोर्चे पर देश के लिए अच्छी खबर सामने आई है। वित्त मंत्रालय ने बुधवार (1 सितम्बर, 2021) को जीएसटी कलेक्शन को लेकर आँकड़े जारी किए, जिसके मुताबिक, अगस्त महीने में देश में जीएसटी का कलेक्शन 1.12 लाख करोड़ रुपए के पार रहा, जो कि समान अवधि में पिछले साल के मुकाबले 30 फीसदी अधिक है। ऐसा दूसरी बार है जब लगातार दूसरे महीने देश का जीएसटी कलेक्शन एक लाख करोड़ रुपए है।

अगस्त माह में 1.12 लाख करोड़ रुपए क GST कलेक्शन

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने जानकारी दी है कि अगस्त 2021 में सकल जीएसटी रेवेन्यू 1,12,020 करोड़ रुपए है, जिसमें केंद्रीय जीएसटी (CGST) के 20,522 करोड़ रुपए, राज्य जीएसटी (SGST) के 26,605 करोड़ रुपए, इंटीग्रेटेड जीएसटी के 56,247 करोड़ रुपए (माल के आयात पर जमा 26,884 करोड़ रुपए सहित) और उपकर (सेस) के 8,646 करोड़ रुपए (माल के इम्पोर्ट पर जमा 646 करोड़ रुपए सहित) हैं। हालाँकि, आँकड़ों पर नजर डालें तो अगस्त में जीएसटी कलेक्शन जुलाई 2021 के मुकाबले 1.16 लाख करोड़ रुपए कम है।

वित्त मंत्रालय के मुताबिक, पिछले साल अगस्त 2020 में 86,449 करोड़ रुपए था। जबकि, वर्ष 2019 में अगस्त के ही महीने में यह 98,202 रुपए था। वित्त मंत्रालय ने आने वाले समय में जीएसटी कलेक्शन के और अधिक बढ़ने की उम्मीद जताई है।

कोरोना संकट से उबरने लगा देश: GDP ने भी दी खुशखबरी

कोरोना संकट के बीच मोदी सरकार और देश के लिए आर्थिक मोर्चे पर एक और अच्छी खबर सामने आई। वित्त मंत्रालय के आँकड़ों में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2021-2022 में पहली तिमाही में देश के जीडीपी की रफ्तार 20% से भी अधिक रही है। इससे अर्थव्यवस्था के सुस्ती से उबरने के स्पष्ट संकेत मिले हैं।

कोर सेक्टर का उत्पादन बढ़ा

मंगलवार को केंद्र सरकार द्वारा जारी आँकड़ों में बताया गया है कि इस साल जुलाई 2021 में कोर सेक्टर (कोयला, कच्चा तेल, रिफाइनरी, उर्वरक, इस्पात और सीमेंट व बिजली क्षेत्र) की आठ इंडस्ट्री में उत्पादन बढ़ा है। कोर सेक्टर में 9.4 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है।

खुदरा महँगाई घटी

अर्थव्यवस्था में आ रही तेजी का असर बाजार पर दिखने लगा है। श्रम मंत्रालय के आँकडो़ं के मुताबिक, औद्योगिक कामगारों के लिए खुदरा महँगाई जुलाई 2021 में घटकर 5.27 प्रतिशत हो गई है। इससे पहले जून के महीने में यह 5.57 थी, जबकि पिछले साल जुलाई 2020 में यह 3.33 प्रतिशत थी।

जन्मदिन पर मेल प्राइवेट पार्ट के आकार का केक काटा, अपनी ‘कजन’ के साथ लिपलॉक किस: ‘Bigg Boss 15’ में निया शर्मा की एंट्री

बॉलीवुड पर अश्लीलता फैलाने के आरोप नए नहीं हैं, ऐसे में अक्सर कई फिल्मों और वेब सीरीज के जरिए आरोप लगते रहे हैं कि वो फूहड़ता को बढ़ावा देता है। अब OTT पर चल रहे ‘बिग बॉस 15’ में अभिनेत्री निया शर्मा की एंट्री हुई है। निया शर्मा कभी मेल प्राइवेट पार्ट के आकार का केक काट कर सुर्ख़ियों में आ चुकी हैं। ‘Voot’ एप पर चल रहे ‘बिग बॉस’ के 2021 संस्करण में आते ही उन्हें ‘बॉस लेडी’ का तमगा मिला।

निया शर्मा की इस तस्वीर को लेकर लोगों ने जताई थी नाराज़गी

बता दें कि अक्टूबर 2020 में निया शर्मा ने अपने 30वें जन्मदिन के अवसर पर मेल प्राइवेट पार्ट के आकार का केक काटा था। उन्होंने कहा था कि ये उनका सबसे ‘डर्टी’ जन्मदिन है। इसके बाद उनके कई फैंस ने भी शर्मिंदगी जताई थी और उन पर अश्लीलता फैलाने के आरोप लगे थे। ‘नागिन’ सीरियल के चौथे और पाँचवें संस्करण में काम कर चुकी अभिनेत्री ने तब आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वो सोशल मीडिया की बहस में नहीं पड़ना चाहतीं।

निया शर्मा ने इसे बताया था अपना सबसे ‘डर्टी’ जन्मदिन

बता दें कि OTT पर ‘बिग बॉस 15’ के होस्ट फिल्म निर्देशक करण जौहर हैं। निया शर्मा ने इसमें बतौर ‘कार्ड कंटेस्टेंट’ एंट्री ली है। ‘जमाई राजा’ सीरियल से टीवी की दुनिया में नाम कायम करने वाली निया शर्मा ने ‘एक हजारों में मेरी बहना है’ सीरियल में मानवी चौधरी के किरदार से छोटे पर्दे पर अपनी पहचान बनाई थी। ‘बिग बॉस 15’ में आने के बाद वो ट्विटर पर ट्रेंड करने लगीं और फैंस ने उनका स्वागत किया।

निया शर्मा को अपनी सही अभिनेत्री रेहाना पंडित के साथ लिपलॉक किस करने के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने कहा था कि अगर वो अपनी माँ को किस कर सकती हैं तो अपनी उस दोस्त को क्यों नहीं, जो मेरी ‘कजन’ की तरह हैं। अब रहना पंडित ने ‘बिग बॉस’ के अन्य प्रतिभागियों को निया से बच कर रहने की सलाह दी है। ‘जमाई राजा 2.0’ में अभिनेता रवि दुबे के साथ एक किसिंग सीन के कारण भी निया शर्मा चर्चा में आई थीं।

अदालतों व NGT के कारण अटकी पड़ी है कई परियोजनाएँ, PM मोदी ने मंत्रालयों से तलब की सूची: रिपोर्ट

परियोजनाओं में हो रही देरी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अगस्त, 2021 को समीक्षा बैठक की थी। उस दौरान पीएम मोदी ने विभिन्न अदालतों और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों के कारण विलंबित बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की सूची तलब की। नेटवर्क 18 की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, कैबिनेट सचिव राजीव गौबा संबंधित मंत्रालयों के साथ होने वाले इस व्यापक चर्चाओं का नेतृत्व करेंगे।

चार मंत्रालयों को इस अभ्यास में सहयोग करने व देरी के कारण सरकारी खजाने को हुए नुकसान की लिस्ट को तैयार करने का आदेश दिया गया है।

News18 ने बैठक के बारे में बताया है, “पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, रेलवे और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, कानून और न्याय मंत्रालय को माननीय न्यायालयों, एनजीटी, आदि के भूमि अधिग्रहण, वन या अन्य मंजूरी से जुड़े फैसलों की पहचान करनी चाहिए, जिनके कारण बुनियादी ढाँचागत परियोजनाओं में देरी हो रही है।”

इसमें आग कहा गया है, “कैबिनेट सचिव को इस तरह की कवायद की निगरानी करनी चाहिए। इस तरह के अदालती फैसलों और आदेशों के कारण विलंबित परियोजनाओं की सूची, जिसमें राजकोष को हुए नुकसान भी शामिल है, कैबिनेट सचिव द्वारा तैयार और संकलित की जा सकती है।”

इस तरह की कवायद के पीछे का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है, हालाँकि, रिपोर्ट बताती है कि पीएम मोदी के निर्देश और कानून मंत्रालय की भागीदारी से होने वाला यह अभ्यास कई बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को पूरा करने में उत्पन्न होने वाली बाधाओं को दूर करने में मदद कर सकता है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएम मोदी ने एक हफ्ते के भीतर ऐसी परियोजनाओं की पूरी लिस्ट माँगी थी। बैठक के ठीक बाद पीएमओ कार्यालय द्वारा जारी एक प्रेस बयान, जिसमें आठ परियोजनाओं की समीक्षा की गई थी, उसमें कहा गया था कि ‘प्रधानमंत्री ने इनके समय पर पूरा होने को लेकर जोर दिया था।’

परियोजनाओं में देरी से पीएम नाराज

रिपोर्ट यह भी बताती है कि प्रतिष्ठित ‘वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ में देरी से प्रधानमंत्री नाराज थे। उन्होंने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को ‘मिशन मोड’ में आने और 15 सितंबर, 2021 तक दिल्ली के शहरी विस्तार सड़क को पूरा करने का निर्देश दिया।

परियोजनाओं में देरी के कारण होने वाले नुकसान को कम करने के लिए एक अलग दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने फरवरी में कैबिनेट सचिव को बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से तैयार करने के लिए एक प्रक्रिया तैयार करने के लिए कहा था।

504 परियोजनाओं में देरी

इकोनॉमिक टाइम्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 504 परियोजनाएँ समय से पीछे चल रही हैं और अन्य 483 बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की लागत में वृद्धि की सूचना है। यह रिपोर्ट सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आँकड़ों पर आधारित है।

देरी के प्राथमिक कारणों में भूमि अधिग्रहण, वन और पर्यावरण मंजूरी प्राप्त करने में देरी, और बुनियादी ढाँचे के समर्थन और लिंकेज की कमी शामिल है।

‘मेरा येशु येशु’: अपनी ही अनुयायी का रेप कर चुका है सूट-बूट वाला पादरी बजिंदर सिंह, सभा में सुंदर युवतियों पर रखता था नजर

सात साल पुराना ‘मेरा यशु यशु’ गाने का मीम वीडियो बीते ​कुछ दिनों से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक लड़के को रोते हुए दिखाया गया है, जिसे एक आदमी (जो कि शायद पादरी होता है) उससे पूछता है कि क्या उसकी बहन पहले बोल सकती थी। लड़का ‘नहीं’ में जवाब देता है। फिर उससे पूछा जाता है कि क्या वह अब बोल सकती है, और इस बार वह ‘हाँ’ में जवाब देता है। तभी बैकग्राउंड में गाना बजता है, “मेरा यशु यशु।”

दरअसल, इसमें नजर आने वाले पादरी का नाम बजिंदर सिंह है, जिसे जीरकपुर पुलिस ने कथित बलात्कार के मामले में 3 साल पहले गिरफ्तार किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हरियाणा का जाट था, जिसने बाद में ईसाई धर्म अपनाकर पंजाब में इसका प्रचार करना शुरू कर दिया था।

भविष्य में होने वाली घटनाओं की भविष्यवाणी करने वाले 39 वर्षीय पादरी बजिंदर सिंह को जीरकपुर पुलिस ने उसी की फॉलोअर युवती से रेप करने के आरोप में दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। 2017 में एक लड़की ने जालंधर के चर्च के पादरी बजिंदर पर आरोप लगाया था कि उसने विदेश भेजने के नाम पर उससे रेप किया और वीडियो भी बनाई। वह 21 जुलाई 2018 को दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से लंदन भागने की फिराक में था, तभी पुलिस ने उसे धर दबोचा था।

पुलिस ने पादरी बजिंदर सिंह पर रेप करने की धारा 376, 420, 354, 294, 323, 506, 147, 149 व 67 आईटी एक्ट की धारा के तहत केस दर्ज किया था।

बजिंदर के यूट्यूब पर कई ऐसे वीडियो हैं, जिसमें वह सलमान खान से लेकर कई बड़े सितारों की भविष्यवाणी करने का दावा कर रहा है। सूट-बूट और सिक्योरिटी में रहने वाला बजिंदर सिंह अपने भाषणों के दौरान सुंदर लड़कियों पर नजर रखता था। बाद में उन लड़कियों को अपनी स्पेशल टीम में शामिल करता था। जिस लड़की के साथ उसने बलात्कार किया, वह भी बजिंदर सिंह की सभाओं में जाती थी। वहीं बजिंदर ने उसे देखा और बाद में उसे अपने जाल में फँसा लिया।

बताया जाता है कि वह मूलरूप से यूपी के मुजफ्फरनगर का रहने वाला है और उसका पासपोर्ट राजस्थान का बना हुआ है, जहाँ उसकी ससुराल है। रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि वह देश भर में अलग-अलग जगह वह अपनी सभाएँ करता था। सभाओं में यह ऐसा ड्रामा करवाता था कि मानो यह सारी समस्याएँ दूर कर सकता है। दूर-दूर से लोग उसके पास आते थे और अपनी समस्याएँ उसे बताते थे।

बजिंदर दावा करता था कि वह उनकी दिक्कतें चुटकियों में दूर कर देगा। पादरी के यूट्यूब चैनल ‘Jesus Miracles‘ पर ऐसी कई घटनाओं के वीडियो आपको मिल जाएँगे। इसमें सबसे वायरल वीडियो में दिखाया गया था कि वह कैसे एक मरे हुए बच्चे को जीवित कर सकता है। इस कार्यक्रम की बहुत आलोचना भी हुई थी और कई लोगों ने कहा कि घटना से पहले बच्चे को नशीला पदार्थ दिया गया था।

उसने जल्द से जल्द लोकप्रियता हासिल करने के लिए जालंधर, अजनाला, अमृतसर, गुरदासपुर और कुराली में कार्यक्रम आयोजित किए। विदेशों में भी उसके अनुयायी थे। उनके अनुयायी उन्हें दो से चार दिनों के कार्यक्रम के लिए आमंत्रित करते थे। वह 21 जुलाई 2018 को होने वाले कार्यक्रम के लिए लंदन जा रहा था, तभी उसे दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया था।

राष्ट्रीय मसीही संघ के सदस्य, जिनसे वह जुड़ा था, उन्होंने बताया था कि पादरी अक्सर जालंधर और चंडीगढ़ के बीच ज्यादा अपडाउन करता था। वह अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ चंडीगढ़ के सेक्टर-15 में रहता था।

रेप मामले में राष्ट्रीय मसीही संघ के सदस्यों ने कहा, “हम यह यकीन से नहीं कह सकते हैं कि हम इस मामले में उनका समर्थन करेंगे या नहीं। हमारे पास अभी इस मामले से जुड़े कोई भी तथ्य नहीं हैं।” वहीं, जालंधर के पीआरओ फादर पीटर ने कहा कि पादरी किसी भी तरह से हमारे साथ नहीं जुड़ा था। उसने अपना स्वतंत्र चर्च चलाया, जिसे मान्यता भी नहीं थी। उसके प्रचार करने का तरीका मेनलाइन चर्चों के अनुरूप नहीं था।

बता दें कि पादरी चर्च ऑफ विजडम एंड ग्लोरी चला रहा था, जो एक पेंटेकोस्टल चर्च, जिसे उसने करीब 2016 में नकोदर रोड पर ताजपुर गाँव में स्थापित किया था।

नॉर्दर्न अलायंस का दावा- पंजशीर पर हमले में 350 तालिबानी ढेर, 40 पकड़े गए: ‘अल्लाहु अकबर’ के साथ अमेरिका-नाटो का जनाजा

एक तरफ अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की विदाई के बाद तालिबान जश्न मना रहा है। दूसरी तरफ पंजशीर पर हमले में 350 तालिबानियों के मारे जाने और 40 के पकड़े जाने का दावा किया जा रहा है। पंजशीर वह इलाका है जहाँ अभी भी तालिबान का नियंत्रण नहीं है।

नॉर्दर्न अलायंस ने दावा किया है कि बीती रात खावक में हमला करने आए करीब 350 तालिबानी मारे गए हैं और 40 से अधिक को उसने बंधक बनाया है। इस दौरान कई अमेरिकी वाहन और हथियार भी उसके हाथ लगे हैं।

इससे पहले पंजशीर में मौजूद स्थानीय पत्रकार नातिक मालिकज़ादा ने ट्वीट कर जानकारी दी थी कि गुलबहार में तालिबान और नॉर्दर्न एलायंस के बीच लड़ाई जारी है। तालिबान द्वारा यहाँ एक पुल ध्वस्त करने और और 8 तालिबानियों के मार जाने की भी बात कही गई थी।

दूसरी ओर तालिबान ने अमेरिकी और नाटो के झंडे को ताबूत में लगाकर उनका प्रतीकात्मक जनाजा निकाला है। रिपोर्ट के मुताबिक, खोस्त के हजारों स्थानीय लोगों ने इसमें हिस्सा लिया और अफगानिस्तान से अमेरिका और उसके सहयोगी बलों की वापसी का जश्न मनाने के लिए सड़कों पर उतरे।

रॉयटर्स के अनुसार, तालिबानी प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने काबुल हवाई अड्डे पर अमेरिका के देश से जाने का जश्न मनाया और कहा, “हमें इन क्षणों पर गर्व है कि हमने अपने देश को एक महान शक्ति से मुक्त किया।” मुजाहिद ने यह भी कहा कि “इस्लामिक अमीरात पूरी दुनिया के साथ अच्छे राजनयिक संबंध बनाना चाहता है।”

इस बीच प्रतीकात्मक जनाजे के दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हैं।

एक अन्य वीडियो में ‘नारा-ए-तकबीर और अल्लाहु अकबर’ के नारे के साथ जनाजा निकालने के लिए जुटी भारी भीड़ देखी जा सकती है।

चेतन भगत की वजह से PM मोदी देने वाले थे इस्तीफा? फिर बन गया टीकाकरण का रिकॉर्ड… जानिए क्या है मामला

भारत ने 2 दिन एक-एक करोड़ से अधिक लोगों के कोरोना टीकाकरण का रिकॉर्ड बनाया। अब इसका क्रेडिट लेने के लिए एक व्यक्ति सामने आया है। न-ना, कोई नेता, अधिकारी या स्वाथ्यकर्मी नहीं – लेखक। जी हाँ, लेखक चेतन भगत ने भारत के कोरोना वैक्सीनेशन अभियान का श्रेय लिया है। उनका दावा है कि उन्होंने एक लेख के जरिए टीकाकरण अभियान में 5-10 गुना तेज़ी की वकालत की थी, इसीलिए इसमें उनका भी योगदान है।

अब लोग भी भला कहाँ मानने वाले थे। उन्होंने चेतन भगत को अपने अंदाज़ में जवाब देना शुरू कर दिया। ‘द स्किन डॉक्टर’ ने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पूरा का पूरा फेक बयान ही चेंप दिया, जिसमें वो कहते हैं – “जब हमने टीकाकरण शुरू किया था तो वैज्ञानिकों ने मुझसे कहा कि साहब जल्दी का काम तो शैतान का होता है। इसलिए हम धीरे-धीरे लगे हुए थे। फिर एक दिन चेतन भगत का ट्वीट देखा। वो कह रहे थे जल्दी लगाओ भाई। वो देख हम नींद से जागे। मैं समझता हूँ कि टीकाकरण में आई तेजी का श्रेय उन्हें ही जाता है।”

ऋषि बागरी नामक ट्विटर यूजर “मुर्ग़े को यही लगता है कि उसके बांग देने से ही सवेरा होता है। इस बात से चेतन भगत का कोई लेना देना नहीं है।”

लेखिका शेफाली वैद्य ने तंज कसा, “चेतन भगत का अगला बयान ये हो सकता है – ‘भगवान श्रीकृष्ण जी को मैंने ही कहा था अर्जुन को कुरुक्षेत्र के रण में थोड़ा उपदेश देने के लिए।'”

किसी ने उनके लेखन का उपहस उड़ाते हुए कहा कि लोगों को धमकी दी गई थी जो टीका नहीं लगवाएगा उनको आपकी किताबें पढ़ाई जाएँगे तभी ये सम्भव हो पाया है, तो किसी ने ये लिखा कि लोगों को चेताया गया था कि कोई जाँच के लिए मना करेगा तो उसे तो उसे ‘हाफ गर्लफ्रैंड’ फिल्म 2 बार दिखाई जाएगी। बता दें कि ये फिल्म चेतन भगत की पुस्तक पर ही आधारित है।

मिस्टर सिन्हा नामक यूजर ने चेतन भगत को याद दिलाया कि वो 20% GDP विकास दर और सेंसेक्स के रिकॉर्ड स्तर को छूने के लिए क्रेडिट लेना भूल गए हैं।

सुमित नाम के यूजर ने चेतन भगत के लिए ‘भारत रत्न’ पुरस्कार की माँग करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो उनके लेख पढ़ कर इस्तीफा ही देने का सोच लिया था, लेकिन वैज्ञानिकों ने उन्हें बताया कि उन सबने भी चेतन भगत का लेख पढ़ लिया है और इसीलिए अब टीकाकरण अभियान तेज़ हो जाएगा।

एक व्यक्ति ने तो अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन की तस्वीर के साथ ही उनका ये फेक बयान जोड़ दिया, “मैंने अमेरिकी नागरिकों से वादा किया था कि मैं अफगानिस्तान से लोगों को निकालने की प्रक्रिया पर चेतन भगत की सलाह का अनुसरण करूँगा। अब युद्ध समाप्त है।”

बता दें कि देश में मंगलवार (31 अगस्‍त, 2021) को कोरोना के 1.30 करोड़ से अधिक टीके लगाए गए। इससे पहले 27 अगस्त को भी 1 करोड़ से अधिक लोगों का टीकाकरण हुआ था। ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)’ भी इसके लिए मोदी सरकार की सराहना कर चुका है।