बिहार में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व पश्चिम चंपारण से सांसद संजय जायसवाल ‘स्टीवंस जॉनसन सिंड्रोम (SJS/TEN)’ नामक गंभीर व दुर्लभ बीमारी से पीड़ित पाए गए हैं। उनका इलाज पटना एम्स में चल रहा है। डॉक्टर उन्हें हर संभव कोशिश करके अच्छा इलाज देने का प्रयास कर रहे हैं। इस बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने अपना हेल्थ अपडेट फेसबुक लाइव के माध्यम से दिया है।
मौजूदा जानकारी के अनुसार, स्टीवंस जॉनसन सिंड्रोम एक बहुत गंभीर और दुर्लभ बीमारी है। इस बीमारी में पीड़ित को सामान्य फ्लू जैसे लक्षण दिखते हैं और कुछ दिन बाद जगह-जगह छाले होकर फूटने लगते हैं। इसके बाद उन्हीं छालों के निशान सामान्य त्वचा से अलग दिखते हैं और दर्द भी देते हैं। इस बीमारी के कारण डिहाइड्रेशन, सेप्सिस, निमोनिया और मल्टीपल ऑर्गन फेलियर जैसी चीजें हो सकती हैं।
SJS/TEN- नामक इस बीमारी में ऐसा लगता है जैसे शरीर जल गया हो, इसलिए कई अस्पतालों में इसका इलाज भी बर्न यूनिट में ही किया जाता है। सामान्यत: इसके होने के पीछे का कारण कुछ दवाइयों का सेवन होता है। ये बीमारी आँखों, मुँह और गुप्तांगों को प्रभावित करती है। इसके अलावा इसे होने की वजह निमोनिया, हर्प्स और हेपाटाइटस जैसा संक्रमण भी हैं। यह बीमारी लाखों लोगों में से 2 से 6 लोगों में पाई जाती है।
बता दें कि इसी दुर्लभ बीमारी के संबंध में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर बताया कि उनकी तबीयत अब ठीक है। वह कहते हैं, “मेरी तबीयत कलकत्ता में ही खराब हो गई थी। मुझे बुखार हो गया था। चूँकि मैं खुद जल संसाधन समिति का सदस्य हूँ, तो मैंने कोलकाता और गुवाहाटी में अपना कर्तव्य पूरा किया और फिर पटना लौट आया। पटना लौटने पर मेरी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। इस वजह से पटना एम्स में भर्ती होना पड़ा। एक बहुत रेयर बीमारी होती है स्टीवंस जॉनसन सिंड्रोम, जिसमें आपका शरीर आपके खिलाफ काम करने लगता है। शरीर में जितने भी तरह के चमड़े हैं, सब में परेशानी आ जाती है। सूजन और सकफ्फिंग होने लगता है। फिलहाल इसी बीमारी से ग्रसित हूँ।”
उन्होंने बताया कि इस बीमारी को पकड़ना बहुत मुश्किल था लेकिन पटना एम्स के डॉक्टरों ने इसे डिटेक्ट कर लिया। इसके कारण वह अब ठीक हैं। उन्हें इन दिनों 104 डिग्री बुखार रहा। अन्य दिक्कतें भी हुईं जिस वजह से वह अस्पताल में भर्ती हुए। उन्होंने बताया कि अभी उनके शरीर के चमड़े खुले हैं, जब तक ये ठीक नहीं होंगे तब तक वह किसी से नहीं मिलेंगे।
हैदराबाद में नवंबर 2019 में महिला डॉक्टर दिशा (बदला हुआ नाम) को गैंगरेप के बाद जला दिया गया था। इस घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। 6 दिसंबर 2019 को पुलिस ने इस मामले के चार आरोपितों मोहम्मद पाशा, नवीन, चिंताकुंता केशावुलु और शिवा का उसी जगह पर एनकाउंटर कर दिया, जहाँ पर दिशा को दरिंदगी के बाद जला दिया गया था। दरअसल पुलिस क्राइम सीन को रिक्रिएट करने के लिए चारों आरोपितों को एनएच-44 पर लेकर गई थी। लेकिन, वहाँ पर चारों ने भागने की कोशिश की। पुलिस की चेतावनी के बावजूद वे नहीं रूके और आखिर में पुलिस ने उन्हें ढेर कर दिया।
इस घटना के 6 दिन बाद 12 दिसंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने जाँच के लिए 3 सदस्यीय समिति नियुक्त की थी। समिति ने 21 अगस्त 2021 को गवाहों से पूछताछ का पहला शेड्यूल रखा। पहले शेड्यूल में 6 गवाहों से पूछताछ की जानी थी, लेकिन 26, 27 और 28 को तीन गवाहों से ही पूछताछ की जा सकी। इस दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए, जिसमें जाँच अधिकारी की तरफ से हुई चूक भी शामिल है।
आयोग ने मामले के जाँच अधिकारी जे सुरेंद्र रेड्डी से पूछताछ की। वह अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) भी हैं। पूछताछ के दौरान कई पहलुओं की अनदेखी और विसंगतियाँ सामने आई। उनसे दो दिन से अधिक पूछताछ की गई। सुरेंद्र रेड्डी से आरोपितों को रखने वाले गेस्ट हाउस और शादनगर में लगी सीसीटीवी फुटेज के बारे में पूछताछ की गई। जाँच अधिकारी के बयान और पुलिस हलफनामे में विरोधाभास पाया गया।
इसके अलावा उनसे बंदूकों की सेफ्टी लैच (Safety latch), पुलिस ने जहाँ से फायरिंग की वहाँ से दूरी और आरोपितों को जेल में डालने के समय को लेकर पूछताछ की। जाँच अधिकारी ने इस सवाल को यह कहते हुए टाल दिया कि यह जेल विभाग से जुड़ा मामला है।
दूसरी गवाह दिशा की बहन ने आयोग को बताया कि दिशा के लापता होने और मुठभेड़ में हत्याओं के बाद शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने उससे कभी संपर्क नहीं किया। हालाँकि, जाँच अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने बहन से संपर्क किया था और उसने दिशा के बरामद सेल फोन और अन्य सामानों की पहचान की थी।
मामले में पहले गवाह तेलंगाना के गृह सचिव रवि गुप्ता थे। उनसे आयोग के वकीलों और पुलिस का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने कई प्रश्न पूछे। अपने हलफनामे में, गृह सचिव ने विश्वास के साथ कहा था कि पुलिस अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई आत्मरक्षा में थी और कानूनी रूप से इसे हत्या नहीं कहा जाएगा। आयोग ने इस बिंदु पर जाँच की और विचार-विमर्श किया। आयोग ने शीर्ष नौकरशाह द्वारा दायर हलफनामे के आधार पर कई सवाल भी उठाए। आयोग ने यह भी पाया कि तेलंगाना सरकार ने इस घटना की न्यायिक जाँच नहीं की।
दिग्गज बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह द्वारा अफगानिस्तान में तालिबान की जीत का जश्न मनाने के लिए भारतीय मुसलमानों की आलोचना करने के बाद से ही तमाम भारतीय मुस्लिम, तथाकथित लिबरल-वामपंथी पत्रकारों सहित कट्टरपंथी मुस्लिमों की लॉबी पुरस्कार विजेता अभिनेता को गाली देने और लताड़ने के लिए खुलेआम सोशल मीडिया पर नंगई पर उतर आई है। नसीरुद्दीन शाह ने एक वीडियो जारी कर हिन्दुस्तानी मुसलमानों से शांति और अहिंसा का पालन करने और कट्टरपंथी बहशी इस्लामी समूह का समर्थन नहीं करने के लिए कहा था।
बुधवार को नसीरुद्दीन शाह ने एक वीडियो जारी कर अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे का जश्न मनाने के लिए हिंदुस्तानी मुसलमानों के एक वर्ग की निंदा की। दिग्गज अभिनेता ने अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी का जश्न मना रहे भारतीय मुसलमानों के एक वर्ग को बेहद खतरनाक करार दिया।
नसीरुद्दीन शाह ने वीडियो में कहा, “हालाँकि, अफगानिस्तान में तालिबान का फिर से हुकूमत पा लेना दुनिया भर के लिए फिक्र का बायस (चिंता का विषय) है, इससे कम खतरनाक नहीं है हिन्दुस्तानी मुसलमानों के कुछ तबकों का उन बहशियों की वापसी पर जश्न मनाना।”
उनका वीडियो भारतीय मुसलमानों के एक वर्ग पर प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया था, जिसमें कट्टरपंथी इस्लामी संगठन तालिबान को बन्दूक के बलपर अफगानिस्तान पर कब्जा करने के लिए सराहा जा रहा था। ऐसा करने वालों में प्रमुख मुस्लिम मौलवियों, कट्टरपंथी मुस्लिमों के साथ लिबरल गिरोह का एक वर्ग भी शामिल था जिसने अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के लिए बधाई दी थी और कहा था कि युद्धग्रस्त देश में तालिबान की जीत पूरे इस्लामी समुदाय के लिए जश्न का क्षण है। .
इस तरह के बधाइयों और जश्न के जवाब में, 71 वर्षीय अभिनेता ने एक वीडियो जारी किया था जिसमें कहा गया था कि तालिबान के फिर से आने के कारण खुश होने वालों को खुद से सवाल करना चाहिए कि क्या वे अपने मजहब में सुधार करना चाहते हैं या पुरानी बर्बरता के साथ रहना चाहते हैं।
वीडियो में, शाह ने यह भी कहा, “आज हर हिंदुस्तानी मुसलमान को अपने आप से यह सवाल पूछना चाहिए कि उसे अपने मजहब में इस्लाम रिफॉर्म्ड और जिद्दत पसंदी (आधुनिक इस्लाम) चाहिए या पिछली सदियों के बहशीपन का इकदार (वैल्यूज़)।”
अनुभवी अभिनेता शाह ने मिर्ज़ा ग़ालिब का हवाला देते हुए अंत में कहा, “मैं एक हिंदुस्तानी मुसलमान हूँ, और जैसा कि मिर्जा गालिब एक अरसा पहले फरमा गए हैं कि मेरा रिश्ता अल्लाह मियाँ के साथ बेहद बेतकल्लुफ़ है। मुझे सियासी मजहब की कोई जरूरत नहीं है।”
नसीरुद्दीन शाह ने आगे ‘हिंदुस्तानी इस्लाम’ और कहीं और प्रचलित इस्लाम के बीच अंतर बताया है। वीडियो में अंत में उन्होंने कहा, “ईश्वर ऐसा समय न लाएँ जब हिन्दुस्तान में इस्लाम इतनी तेजी से बदल जाए कि इसे पहचाना ही न जा सके।”
भड़के कट्टरपंथी मुस्लिम और लिबरल गिरोह
नसीरुद्दीन शाह द्वारा हिंदुस्तानी मुसलमानों को तालिबान जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों से दूर रहने की सलाह देने वाले वीडियो ने मुस्लिम समुदाय में आक्रोश पैदा कर दिया है। पढ़े-लिखे तमाम मुस्लिमों ने भी ने दिग्गज अभिनेता के वीडियो पर आपत्ति जताई है और उन्हें इस्लाम पर टिप्पणी करने से दूर रहने के लिए कहा है।
आप समर्थक ब्लॉग ‘जनता का रिपोर्टर’ के रिफत जावेद ने नसीरुद्दीन शाह को उनकी टिप्पणियों के लिए फटकार लगाई है और कहा कि उन्हें अपनी फिल्मों में लगे रहना चाहिए और उन विषयों से दूर रहना चाहिए जिन्हें वह नहीं जानते हैं।
नसीरुद्दीन शाह को ‘नॉन-प्रैक्टिसिंग’ मुस्लिम बताते हुए, जावेद ने इस्लाम में मजहबी सुधारों की माँग के लिए अनुभवी अभिनेता पर हमला किया। रिफत जावेद ने अपने ट्विटर पोस्ट में कहा कि काश, उन्होंने इस भयावह सलाह को देने से पहले थोड़ा इस्लाम का पालन भी कर लिया होता।
एक अन्य ‘पत्रकार’ सबा नकवी को भी हिन्दुस्तानी मुसलमानों को नसीरुद्दीन शाह की सलाह से तकलीफ हुई है। सबा नकवी ने ट्विटर पर पूछा कि भारतीय मुसलमानों को तालिबान की निंदा करने के लिए क्यों कहा जा रहा है। उन्होंने पूछा कि क्या भारतीय मुसलमानों ने तालिबान को भारत में चुना, वोट दिया या फिर आमंत्रित किया।
सबा नकवी ने आगे कहा कि दिग्गज अभिनेता तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने के मुद्दे पर बोल कर बुरी तरह फँस गए हैं।
खैर, यह सिर्फ रिफत और सबा की बात नहीं है। कल से ही कई मुस्लिम सोशल मीडिया यूजर नसीरुद्दीन शाह को उनके हिंदुस्तानी मुस्लिमों को ‘दोस्ताना’ सलाह देने के लिए गाली देने और निंदा करने में लगे हुए हैं।
मोहम्मद हजार इमाम ने नसीरुद्दीन शाह को यह कहते हुए सलाह दे डाली कि इस्लाम में सुधार की कोई जरूरत नहीं है और कोई भी इस मजहब में सुधार नहीं ला सकता है। हजार इमाम ने यह भी दावा किया कि यदि कोई पूरी ईमानदारी के साथ इस्लाम का पालन करता है, तो वह न केवल अपने इस जीवन में बल्कि इंतकाल के बाद के जीवन में भी सफल होगा।
एक अन्य यूजर अब्दुल शाहिद ने कहा कि इस्लाम कुरान का पालन करने और नबी की सुन्नत का पालन करने के बारे में है और कुछ नहीं। नसीरुद्दीन शाह का खंडन करते हुए, शाहिद ने दावा किया कि 1400 साल पहले इस्लाम अपनी स्थापना से पहले ही पूरा हो चुका था और अब इस मजहब में जोड़ने या हटाने के लिए कुछ भी नहीं है।
वे द वायर की पत्रकार आरफ़ा खानम शेरवानी द्वारा साझा किए गए वीडियो का जवाब दे रहे थे। हालाँकि, अरफ़ा तब से पूरे मामले पर पलटी ही मारी है। शुरुआत में, आरफ़ा ने अपनी टाइमलाइन पर नसीरुद्दीन शाह का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा था, “हिंदुस्तानी मुसलमानों को ये सोचना चाहिए कि उनको अपने मज़हब में सुधार और आधुनिकतावाद चाहिए या पिछली सदियों के मूल्य।”
हालाँकि, कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा उनके टाइमलाइन पर गाली देने के बाद अरफ़ा ने यू-टर्न ले लिया। मुस्लिमों की लताड़ के डर से, आरफ़ा ने यह कहते हुए यू-टर्न लिया कि वह नसीरुद्दीन शाह से असहमत हैं। उन्होंने कहा कि वह प्रमाणित नहीं कर सकते कि एक आदर्श या पूर्ण मुसलमान कौन है?
आरफा ने कहा, “केवल अल्लाह ही जानता है कि हम सभी में सबसे नेक कौन है।” उन्होंने यह भी कह डाला कि वह नसीरुद्दीन शाह की हर बात से सहमत नहीं हैं।
आरफा खानम शेरवानी को जवाब देते हुए, जो शुरू में नसीरुद्दीन शाह से इत्तेफाक रखती नजर आ रही थीं, लेकिन बाद में इस्लामवादियों द्वारा ट्रोल किए जाने के बाद अपना रुख बदल लिया था, वसीम शेख ने आरफ़ा और नसीर दोनों को इस मुद्दे पर अपनी राय नहीं देने की चेतावनी देते हुए कहा, “अरफ़ा जी नसीर साहब से कह दीजिए कि तुम और तुम्हारे जैसे लोगों की दीन में कोई हैसियत नहीं है और रही वहशीपन की बात तो मंगोल जैसे मुस्लिम होते तो अब तक सिर्फ मुस्लिम ही होते।”
तकी खान ने परोक्ष रूप से नसीरुद्दीन शाह की तुलना कुत्ते से करते हुए तंज किया।
गौरतलब है कि जब से तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया है, तब से तमाम लोगों ने मानवाधिकारों के उल्लंघन के साथ-साथ महिलाओं के अधिकारों पर भी चिंता जताई है। अफगानिस्तान से चौंकाने वाले दृश्य तब से सामने आ रहे हैं जब से काबुल पर तालिबान ने कब्ज़ा किया। लोग तब से ही बेहतर भविष्य की उम्मीद में देश से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। उड़ान भरते समय लोगों के विमानों पर लटके होने के दृश्य भी वायरल हुए कि कैसे लोग जान जोखिम में डालकर भी वहाँ से भागना चाहते हैं। और साथ ही इन विमानों से आसमान से गिर रहे अफगानों के दृश्य भी वायरल हुए। इन सब के बीच, कई भारतीय मुसलमानों ने अफगानिस्तान के तालिबान के कब्जे का स्वागत किया है।
अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने वोग मैग्जीन के साथ अपने हालिया फोटोशूट में डिजाइनर ब्रांड Bvlgari का मंगलसूत्र पहना और इसकी एक झलक अपने इंस्टाग्राम पर भी शेयर की। इस तस्वीर को देखने के बाद कई नारीवादी भड़क उठे और अभिनेत्री पर ‘पितृसत्तात्मक उत्पीड़न’ का प्रतीक पहनने का आरोप लगाया। उन्होंने मंगलसूत्र को निशाना बनाते हुए अपनी घृणा व्यक्त की। साथ ही प्रियंका को आर्थिक लाभ के लिए ऐसे चिह्नों का प्रमोशन करने वाला बताया।
एक 19 साल की ट्विटर यूजर जो खुद के बायो में मार्क्सवादी फेमिनिस्ट लिखती हैं। वो प्रियंका की यह तस्वीर देख कर उन पर आर्थिक फायदे के लिए फेमिनिज्म को बर्बाद करने का आरोप लगाती हैं। वह कहती हैं, ” ‘मंगलसूत्र उन महिलाओं के लिए जो अपने जीवन की गाड़ी खुद चलाती हैं’ जब क्रांति आएगी, प्रियंका चोपड़ा तुम कहाँ छुपोगी।”
एक अन्य फेमिनिस्ट प्रियंका चोपड़ा से इसी बात पर नाराज दिखती हैं कि आखिर वह डिजाइनर ब्रांड के साथ जुड़कर बहुत पैसे कमा रही हैं। यूजर ने अपनी कुंठा निकालने के लिए शादी जैसे पवित्र बंधन की दहेज जैसी सामाजिक कुरीति से तुलना की और इसी आधार पर शादी का मजाक उड़ाया।
"mangalsutra for the modern indian woman who takes charge of her own life" when the revolution comes, priyanka chopra, where will you hide?
सोशल मीडिया फेमिनिस्टों के अलावा इंडिया टुडे की पत्रकार ऐश्वर्य सुब्रमण्यम ने भी प्रियंका के इस फोटोशूट पर नाराजगी व्यक्त की। ये वही पत्रकार हैं जो ‘जेनऊ’ जैसे हिंदू प्रतीकों का भी मजाक उड़ाती रही हैं।
इसके अलावा वह एक क्लब हाउस चर्चा का भी हिस्सा रही थीं, जहाँ सुब्रमण्यम को ‘वोक लिबरलों’ के रेप कल्चर को सही ठहराते हुए पाया गया था। उस समय क्लब हाउस में बलात्कार की संस्कृति को सामान्य करने वाली बातचीत सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी।
ऐसे ही उन्होंने एक और क्लबहाउस चर्चा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी जिसमें कुशा कपिला जैसे अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ‘hate sex’ with Sanghis’ पर चर्चा कर रहे थे।
बता दें कि अपने फोटोशूट में प्रियंका चोपड़ा ने जो Bvlgari का मंगलसूत्र पहना है, उसकी कीमत ₹3, 49,000 है।
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव महागठबंधन बनाने की कोशिशों में लगे हैं। फिलहाल उनकी यह कोशिश परवान चढ़ती नहीं दिख रही है। इस बीच अखिलेश ने गुरुवार (2 सितंबर 2021) को एक वीडियो ट्वीट करते हुए 400 पार का नारा दिया।
उन्होंने ट्वीट किया, “बड़ों का हाथ, युवाओं का साथ और बच्चों के प्यार से साइकिल इस बार प्रदेश में 400 पार!” साथ ही बाइस में बाइसिकल का हैशटैग लगाया। इस वीडियो में कुछ बच्चे एक ही साइकिल पर सवार दिखते हैं।
अखिलेश यादव ने लखनऊ में 400 सीटें जीतने का दावा करते हुए कहा, “समाजवादी कह चुके हैं ‘अबकी बार 400 पार’। हमारा प्रयास होगा कि लोगों को अपने साथ लाएँ। आप उनकी नाराजगी की कल्पना नहीं कर सकते। वे भाजपा की सरकार नहीं देखना चाहते। किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई, लेकिन गैस सिलेंडर के दाम दोगुने हो गए।”
Samajwadis have said ‘abki baar 400 paar’…Our effort will be to take people with us. You can’t imagine the unhappiness among them, they don’t want to see BJP govt. The incomes of farmers weren’t doubled but price of gas cylinder was doubled: SP chief Akhilesh Yadav, in Lucknow pic.twitter.com/rA12cCbQvY
इस बीच अखिलेश यादव के ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया में तरह तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। बहुतेरे उनके 400 पार के दावे का माखौल उड़ा रहे हैं। जय प्रकाश सिंह नाम के यूजर ने लिखा है, आज भैया जी सुबह-सुबह ही ले लिए हैं। 403 में से 400 पार।”
आज आदरणीय टोटिचोर अखिलेश यादव जी ने भी जन्माष्टमी की बधाई दी ।
उनका कहना है की भगवान श्री कृष्ण माखनचोर थे और वो टोटिचोर हैं इसलिए देश की जनता को उनके किए गये चोरी का बुरा नहीं मानना चाहिये – ; टोटिचोर सैफैयी वाले
वैसे आज भैया जी सुबह-सुबह ही ले लिए हैं – 403 में से 400 पार..?
शेर सिंह राठौर ने कहा कि अगर अखिलेश यादव खुद के श्रीकृष्ण के वंशज होने का दम भरते हैं तो पहले श्रीकृष्ण मंदिर पर बने अवैध निर्माण पर बोलने का साहस दिखाएँ।
अगर अखिलेश यादव भगवान श्री कृष्ण के वंशज होने का दम भरते हैं तो श्री कृष्ण मंदिर पर बने अवैध निर्माण पर बोलने का साहस दिखाएं किस तरह के यादव हैं आप सदैव राम मंदिर और सनातन के खिलाफ ही रहे हो,,,,?
दिनेश चावला ने समाजवादी पार्टी के मुस्लिम प्रेम पर तंज कसा है।
प्रश्न – एक साईकिल पर कितने बच्चे हैं? उत्तर – पाँच प्रश्न – पाँच-पाँच दस-दस बच्चे किनके होते हैं? उत्तर – मुसलमानों के तो बस उत्तर प्रदेश के हिंदू समझ जायें कि साईकिल पर कौन सवार होगा। अब ये आपके हाथ में है कि साईकिल चलेगी या भगवा ध्वज़ लहरायेगा। जय श्री राम ??
प्रियंका शर्मा ने अखिलेश यादव के वीडियो पर कमेंट करते हुए जनसंख्या कानून का समर्थन किया। उन्होंने लिखा, “एक साइकिल पे पाँच बच्चे, इसीलिए जनसंख्या नियंत्रण कानून बहुत जरूरी है।”
एक साइकिल पे पांच बच्चे, इसीलिए जनसंख्या नियंत्रण कानून बहुत जरूरी है।
इससे पहले जब आम आदमी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कही थी तब भी सोशल मीडिया में इसी तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। पार्टी के प्रभारी व राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा था कि उनकी पार्टी आने वाले चुनावों में अपने बलबूते पर खड़ी होगी और सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी। साथ ही कहा था कि प्रत्याशियों के नाम की घोषणा अगले 15 दिन के अंदर की जाएगी।
टीवी एक्टर सिद्धार्थ शुक्ला का आज (सितंबर 2, 2021) सुबह निधन हो गया। इस खबर के सामने आने के कुछ ही मिनटों बाद सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने एक वीडियो पोस्ट करते हुए दावा किया कि एक्टर की मौत का फुटेज सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है। सोशल मीडिया यूजर @HalkutManus ने ट्विटर पर सीसीटीवी फुटेज पोस्ट किया और दावा किया कि दिल का दौरा पड़ने से सिद्धार्थ शुक्ला की मौत सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई।
वायरल वीडियो में, अपने वर्कआउट आउटफिट में एक युवक को सीढ़ियाँ चढ़ते हुए देखा जा सकता है, मगर वह अचानक रूक जाता है और आराम करने के लिए सीढ़ियों पर बैठ जाता है। वीडियो देखकर लगता है कि उसके सीने में कुछ तकलीफ है, क्योंकि सीढ़ी पर बैठ वह लगातार अपनी छाती को दबाता है। एक मिनट बाद वह युवक, जिसे सिद्धार्थ शुक्ला बताया जा रहा है, वह फिर से सीढ़ियों पर चढ़ने की कोशिश करता है। हालाँकि उसे फिर से तकलीफ में देखा जा सकता है, जिसके बाद वह सीढ़ियों पर बैठ जाता है। इसके तुरंत बाद वह अपना होश खो बैठता है और फर्श पर गिर जाता है। बता दें कि इंटरनेट पर वायरल हुआ कथित वीडियो अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला का नहीं है।
वायरल वीडियो पिछले एक हफ्ते से अधिक समय से इंटरनेट पर घूम रहा है। यह सीसीटीवी फुटेज बेंगलुरु के एक अपार्टमेंट का है। यह वीडियो बेंगलुरू के एक 33 वर्षीय युवक की है, जिसकी व्यायाम के बाद दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।
33 years young man died due to #HeartAttack, after workout in #gym in Bangalore. His final moments captured on CCTV. Youngsters should be careful about excessive workout. They should do gyming only after a thorough #Heart checkup and advice from doctor? pic.twitter.com/iFOKBf5WVq
जिम सेशन के बाद दिल का दौरा पड़ने से युवक की मौत हो गई। संयोग से, सीसीटीवी फुटेज पर एक टाइम स्टैंप है जो स्पष्ट रूप से दिखाता है कि यह घटना सिद्धार्थ शुक्ला की मौत से लगभग एक हफ्ते पहले 25 अगस्त 2021 को रिकॉर्ड की गई थी। इसलिए, वीडियो का सिद्धार्थ शुक्ला की मौत से कोई संबंध नहीं है।
अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला ने ‘बालिका वधू’ जैसे धारावाहिकों में अपनी भूमिका से लोकप्रियता हासिल की और रियलिटी शो बिग बॉस 13 में विजेता भी बने। उन्होंने ‘दिल से दिल तक’ में भी अभिनय किया और क्राइम ड्रामा सीरीज ‘सावधान इंडिया’ एवं रियलिटी शो ‘इंडियाज गॉट टैलेंट’ को होस्ट किया। उन्होंने 2014 में फिल्म ‘हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक बीती रात उन्होंने दवाई ली लेकिन सुबह नहीं उठे। हालाँकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने किस चीज की दवाई ली थी।
बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के भाई फैसल खान इन दिनों चर्चा में है। उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू में आमिर और परिवार के साथ अपने रिश्तों को लेकर खुलकर बात की है। बताया है कि कैसे उन्हें घर में बंद कर रखा गया था और जबरन दवाइयाँ दी जाती थी। नवभारत टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भले ही उन्होंने आमिर को माफ कर दिया है, लेकिन वह उस घटना को नहीं भूल सकते।
फैसल ने बताया, “उस समय मैं परिवार वालों से नहीं मिल रहा था, क्योंकि मुझे लग रहा था कि मैं मिलूँगा तो लड़ाई-झगड़े होंगे, इसलिए मैंने दूरी बना ली। मगर उन्होंने उड़ा दिया कि ये पागल हो गया है। वो लोग मुझे जबरन दवा देने लगे। आमिर ने मुझे 1 साल तक हाउस अरेस्ट रखा। बॉडीगार्ड नियुक्त कर दिया था, मेरा फोन छीन लिया, किसी से मिलने नहीं दे रहे थे, जबरन दवाइयाँ दे रहे थे। मैं 103 किलो का हो गया। फिर वो लोग मुझे थोड़ी-थोड़ी आजादी देने लगे तो मुझे लगा कि सुधर जाएँगे, लेकिन वह हुआ नहीं।”
वह आगे बताते हैं, “2004 में मैं जबरन पकड़ा गया। आमिर ने जो भी किया वह गैरकानूनी था। वो पुलिस के साथ आए और मुझसे कहा कि चलना पड़ेगा, नहीं चलोगे तो आपको इंजेक्शन देगा पड़ेगा, बेहोश करना पड़ेगा, फिर ले जाया जाएगा, तो मैंने कहा कि इतना सब कुछ करने की जरूरत नहीं है। मैं चलता हूँ। मुझे लगा कि एक नर्सिंग होम में ले जाकर टेस्ट करवाएँगे, फिर डॉक्टर मुझे घर जाने के लिए कहेगा, लेकिन उनलोगों ने तो मुझे कैद ही कर लिया। मेरे पानी में इंजेक्शन देकर दवा देने लगे। मैं 18-18 घंटे तक सोया रहता था। मेरी जान को भी खतरा था।”
फैसल ने बताया कि 1 साल के बाद आमिर ने उन्हें छोड़ दिया। जिसके बाद वो आम जिंदगी जीने लगे। वह कहते हैं, “मुझे लगा कि अब सब कुछ नॉर्मल हो गया है, मगर 2007 में एक दिन फिर आमिर ने मुझे बुलाया और कहा कि मुझे तुम्हारा हस्ताक्षर का अधिकार (Signatory Rights) चाहिए। तुम्हें कल कोर्ट में जाना है और बोलना है कि तुम पागल हो, तुम अपना कोई फैसला नहीं ले सकते, तभी तुम्हें अभिभावक मिलेगा (Guardian), फिर तुम्हारा हस्ताक्षर का अधिकार मैं ले लूँगा, तुम साइन नहीं कर पाओगे, कुछ भी नहीं कर पाओगे। मैं थोड़ा सा शॉक्ड हो गया कि अब ये क्या हो रहा है। उस समय तो मैंने हाँ बोल दिया लेकिन फिर मुझे समझ में आया कि मेरी फैमिली ही मुझे खत्म करना चाहती है तो फिर मैंने घर छोड़ा।”
फैसल खान आगे कहते हैं, “केस जीत कर साबित किया था कि मेंटल नहीं हूँ मैं। इससे पहले आमिर खान की फैमिली की बात सुन कर कोई भी सामने नहीं आना चाहता था। कोई भी मेरे पक्ष में बोलने के लिए तैयार नहीं था। कोर्ट बंद होने के समय एक शख्स मेरे पक्ष में आया। जिसके बाद कोर्ट ने मुझे हॉस्पिटल भेज दिया। फरवरी में जज ने मेरे पक्ष में फैसला सुनाया और मुझे आजाद कर दिया।”
फैसल ने कहा, “मैंने आमिर खान को माफ तो कर दिया है, लेकिन भूल नहीं पा रहा कि मेरे साथ इतना बड़ा हादसा हो गया। आमिर खान ने इतना बुरा किया है मेरे साथ कि मुझे अब डर लगता है। दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँक कर पीता है।” बता दें कि फैजल जल्द ही एक्टर और डायरेक्टर के रूप में ‘फैक्ट्री’ नामक एक फीचर फिल्म लेकर आ रहे हैं।
गौरतलब है कि फैसल खान ने इससे पहले 2007 में भी आमिर खान और अपने परिवार पर आरोप लगाया था कि उन्हें जानबूझ कर मानसिक बीमारी की दवाएँ दी गईं और 1 साल के लिए हाउस अरेस्ट में रखा गया। इसे याद करते हुए फैसल ने कहा कि उन्हें जबरन पागल घोषित करने का प्रयास किया गया था। उन्होंने कहा कि करण जौहर ने उन्हें उनके भाई आमिर खान के 50वें जन्मदिन के मौके पर आयोजित पार्टी में ही अपमानित किया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए धार्मिक शिक्षा पर फंडिंग को लेकर बुधवार (1 सितम्बर, 2021) को यूपी की योगी सरकार से कई बिंदुओं पर जानकारी माँगी है। हाईकोर्ट ने सवाल किया कि क्या एक धर्म निरपेक्ष राज्य मदरसों को फंडिंग कर सकता है? क्या संविधान के अनुच्छेद-28 के तहत मदरसे धार्मिक शिक्षा और पूजा पद्धति की शिक्षा दे सकते हैं? यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने प्रबंध समिति मदरसा अंजुमन इस्लामिया फैजुल उलूम की याचिका पर दिया है। मदरसे ने अतिरिक्त पदों पर भर्ती के लिए माँगी गई अनुमति को योगी सरकार द्वारा खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।
Allahabad High Court seeks UP Govt’s response in 4 week’s time over state funding of religious educational institutions like madarsas, especially whether the state funding to madrasas and other religious institutions is consistent with the Indian Constitution’s secular scheme pic.twitter.com/v7TO92nquT
हाईकोर्ट ने योगी सरकार से ये भी पूछा कि क्या मदरसों में महिलाओं को प्रवेश मिलता है? अगर नहीं मिलता तो क्या ये विभेदकारी नहीं है? हाईकोर्ट ने पूछा है कि स्कूलों में खेल मैदान रखने के अनुच्छेद 21 व 21ए की अनिवार्यता का पालन किया जा रहा है? क्या अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के धार्मिक शिक्षा संस्थानों को सरकार फंड दे रही है? कोर्ट ने पूछा कि क्या मदरसे संविधान के अनुच्छेद 25 से 30 तक प्राप्त मौलिक अधिकारों के तहत सभी धर्मों के विश्वास को संरक्षण दे रहे हैं?
हाईकोर्ट ने राज्य की योगी सरकार से पूछे ये सवाल
क्या मदरसे अनुच्छेद 28 के तहत धार्मिक शिक्षा दे सकते हैं?
क्या सरकार दूसरे धार्मिक अल्पसंख्यकों के धार्मिक शिक्षा संस्थानों को फंड दे रही है?
क्या मदरसों में महिलाओं के प्रवेश पर रोक है?
क्या मदरसे 25 से 30 तक प्राप्त मौलिक अधिकारों के तहत सभी धर्मों के विश्वासों को संरक्षण दे रहे हैं?
क्या यहाँ अनुच्छेद 21 और 21ए के तहत खेल के मैदान हैं?
कोर्ट ने इन सभी सवालों का राज्य की योगी सरकार से चार हफ्ते में जवाब माँगा है। याचिका की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी।
यह आदेश जस्टिस अजय भनोट ने प्रबंध समिति मदरसा अंजुमन इस्लामिया फैजुल उलूम की याचिका पर दिया है. यह मदरसा, मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त है और राजकीय सहायता प्राप्त है। कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि मदरसों के पाठ्यक्रम, शर्तें, मान्यता का मानक, खेल मैदान की अनिवार्यता के पालन किया जा रहा है।
हाईकोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्या धार्मिक शिक्षा देने वाले अन्य धर्मों के लिए कोई शिक्षा बोर्ड है? कोर्ट ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में पंथनिरपेक्ष राज्य की स्कीम है तो सवाल है कि क्या पंथनिरपेक्ष राज्य धार्मिक शिक्षा देने वाले स्कूलों को फंड दे सकती है। सरकार की ओर से जवाब दाखिल होने पर कोर्ट मामले की सुनवाई करेगी।
वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलवी सुफियान निजामी ने कहा, “अदालत को यह समझने की जरूरत है कि मदरसों में केवल धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाती। इसके अलावा राज्य सरकार दूसरे समुदायों से जुड़ें त्योहारों एवं धार्मिक आयोजनों पर भी पैसे खर्च करती है।”
बिग बॉस 13 के विजेता, टेलीविजन के मशहूर एक्टर और इंटरनेट पर युवाओं के लिए आइकन बन चुके सिद्धार्थ शुक्ला का आज (सितंबर 2, 2021) सुबह 10:30 बजे हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया। जानकारी के मुताबिक सिद्धार्थ शुक्ला के दीदी और जीजा उन्हें बेहोशी की हालत में कूपर अस्पताल लेकर पहुँचे थे।
No injuries were sustained on the body of actor Siddharth Shukla. The cause of the death is yet to be ascertained. A team of police is present at the Shukla’s residence for investigation: Mumbai Police
उनकी मौत का कारण अबतक स्पष्ट नहीं हो सका है। आजतक की रिपोर्ट बता रही है कि वह कल रात कोई दवाई लेकर सोए थे। ये दवाई किस चीज की थी, इसका पता नहीं चल सका है। कूपर अस्पताल में ही उनका शरीर पंचनामे के लिए रखा गया है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट बता रही है कि बीती रात जिस कार से फ्लैट पहुँचे उसका पिछला शीशा बुरी तरह टूटा था।
इस मामले में पुलिस ने कहा है कि पोस्टमार्टम के बाद ही सिद्धार्थ की मौत की वजह पता चलेगी। इस मामले में उनके परिवार और करीबी लोगों का बयान नहीं दर्ज कराया जाएगा। सिद्धार्थ शुक्ला के शरीर पर अभी तक कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। पुलिस इसे लेकर कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहती है। उनके आवास पर एक पुलिस टीम मौजूद है।
कूपर अस्पताल के मुताबिक, सिद्धार्थ शुक्ला को जब वहाँ पर लाया गया तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी। घर से जब सिद्धार्थ को ले जाया गया, तभी अस्पताल में में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती रिपोर्ट्स में सिद्धार्थ की मृत्यु का कारण हार्ट अटैक बताया गया है।
उल्लेखनीय है कि सिद्धार्थ की मृत्यु की खबर सुनकर कई लोग सदमे में हैं। टीवी इंडस्ट्री के लोग जहाँ उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। वहीं सोशल मीडिया पर एक नई बहस शुरू हो गई है। ये बहस कूपर अस्पताल को लेकर है जहाँ उन्हें आखिरी समय लेकर ले जाया गया। इस केस को सुशांत सिंह से जोड़कर कहा जा रहा है कि पहले सुशांत और अब सिद्धार्थ शुक्ला। वही कूपर अस्पताल। यकीन है कि ये भी मर्डर ही होगा।
First Sushant Singh Rajput, Now Siddharth Shukla. Same cooper hospital. I am sure it’s a murder too.#CBIForSiddharthShukla
मोक्ष्वी नाम की यूजर पूछती है, “उनके शव को कूपर अस्पताल क्यों ले गए। सुशांत सिह राजपूत का शव भी कूपर अस्पताल में था। यह इतना चौंकाने वाला है कि आखिर ऐसी रहस्यमय मौतों को केवल कूपर तक कैसे ले जाया जाता है? दोस्तों कूपर का रहस्य खोलो। ऐसे नहीं चल सकता, अच्छे अभिनेता को मर्डर किया जा रहा है। “
His body taken to Cooper hospital why? Even #SushantSinghRajput body was to Cooper hospital. It's so shocking that how come the mysterious deaths are only taken to Cooper? Guys open the mystery of Cooper.aise nhi chal skta,acche actors ko murder kia ja rha hai?#SiddharthShukla
कुछ लोग तो ये भी कह रहे हैं कि जब भी कूपर का नाम आए तो समझ जाओ कि मामला हत्या का है।
Shocked and saddened to hear about @sidharth_shukla sudden death. Unbelievable what a young talent gone. Strength and prayers for his family and friends ??
रीवा धीमन कहती हैं, “यकीन ही नहीं हो रहा कि ये न्यूज एक बार फिर मर्डर जैसी लग रही है जैसे पिछले साल सुशांत की लगी थी। अब बस सिद्धार्त शुक्ला है और वही कूपर अस्पताल है।”
could not believe this news looks like its a murder again last year sushant now sidharth shukla n again cooper hospital is involved ! #ripsidharthshukla
बता दें कि कूपर अस्पताल सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद चर्चा में आया था। सुशांत की मौत के बाद उनका पोस्टमॉर्टम मुंबई के कूपर अस्पताल में ही किया गया था। पोस्टमॉर्टम के अगले दिन रिया सुशांत के शव को देखने के लिए अस्पताल पहुँची थी। अस्पताल की ओर से रिया को शव को देखने की इजाजत दी गई थी। इसी पर महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने कूपर अस्पताल और मुंबई पुलिस से जवाब माँगा था।
झारखंड के चतरा जिले में बुधवार (1 अगस्त 2021) को मास्क न पहनने पर भारतीय सेना के जवान पवन कुमार यादव को पुलिस द्वारा बेरहमी से पीटने का मामला प्रकाश में आय़ा है। खास बात यह है कि चेकिंग के दौरान न तो पुलिस वाले और न ही मास्क चेकिंग अभियान के वरिष्ठ अधिकारी ठीक से मास्क पहने हुए थे।
घटना का वीडियो वायरल होने के बाद चतरा के एसपी राकेश रंजन ने बुधवार देर रात तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया और दो को पुलिस लाइन भेज दिया। एसपी ने बताया, “तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है और दो पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन से जोड़ा गया है। लेकिन प्रारंभिक जाँच से पता चला है कि सेना के जवान की गलती थी, जिसने पहले ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को गालियाँ दीं थीं।”
घटना जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर मयूरहंद थाना क्षेत्र के कर्मा चौक की है। हजारीबाग के कटकमसांडी थाना क्षेत्र के अरबहुसाही गाँव के रहने वाले सेना के जवान अपनी बाइक से चौक से गुजर रहे थे। जवान ने मास्क नहीं पहन रखा था, इसलिए पुलिसवालों ने उसे रोका और हवलदार संजय बहादुर राणा ने जवान की बाइक की चाबी निकाल ली। इसी बात से जवान यादव नाराज हो गए। जवान ने पुलिस के इस व्यवहार का जोरदार विरोध करते हुए उन्हें ठीक से व्यवहार करने की चेतावनी दी।
इस बीच पुलिसकर्मियों ने सेना के जवान यादव को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। खास बात यह है कि ये सब मजिस्ट्रेट सह प्रखंड विकास अधिकारी साकेत कुमार सिंह और सहायक उप निरीक्षक जवाहर राम और मुन्ना प्रसाद की मौजूदगी में हुआ। जवान ने अपनी पहचान बताई थी, बावजूद इसके ये सभी चुपचाप पुलिस को यादव पर हमला करते हुए देख रहे थे। उल्लेखनीय है कि यादव जोधपुर में जीडी जवान के रूप में तैनात हैं।
भारी हंगामे के बीच जवान को थाने ले जाया गया। स्थानीय निवासियों ने पुलिस द्वारा सेना के जवान को घसीटने और पीटने का विरोध करते हुए इटखोरी-जिहू मार्ग को जाम कर दिया। मामले में चतरा एसपी द्वारा तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित करने और दो पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन से जोड़ने के बाद बुधवार देर रात इस नाकाबंदी को हटाया जा सका।
इस घटना की ओर किसी का ध्यान नहीं गया और न ही किसी ने इसकी रिपोर्टिंग हुई। लेकिन, किसी ने पुलिसकर्मियों की इस करतूत को शूट करने के बाद इसे सोशल साइट्स पर अपलोड कर दिया, जो कुछ ही समय में वायरल हो गया। इस मामले में स्थानीय भाजपा सांसद सुनील कुमार सिंह ने चतरा के एसपी राकेश रंजन से बात की। चतरा जिले के एसपी ने डीएसपी (मुख्यालय) केदार राम को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। रिपोर्ट के आधार पर चतरा एसपी ने पाँच पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की है।
हालाँकि, इस मामले में स्थानीय निवासी मोहम्मद सरफराज ने कहा कि चतरा के एसपी को अपने पुलिस वालों को अनुशासन और नागरिक भावना सिखाने की आवश्यकता है। सरफराज ने कहा, “यहाँ चतरा में एक पुलिस वाला भी IPS होने का घमंड दिखाता है। वे मास्क और हेलमेट चेकिंग के नाम पर नागरिकों को गाली देते हैं।”