13 साल पहले एक अफगान दुभाषिए (Interpreter) ने जो बायडेन की कड़ाके की ठंड में 30 घंटे खड़े होकर रक्षा की थी, आज वही शख्स जो बायडेन से अपने परिवार के लिए मदद माँग रहा है। मोहम्मद नाम के इस व्यक्ति ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन से अपने परिवार की सुरक्षा की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा है- “यहाँ मुझे भूलिए मत।”
तालिबान के आने के बाद से मोहम्मद, उनकी बीवी और 4 बच्चे छिपते घूम रहे हैं। उनका दावा है कि उन्होंने साल 2008 में तत्कालीन सेनेटर बायडेन और पूर्व सेनेटर चक हेगल, आर-नेब और जॉन केरी, डी-मास को बचाने में मदद की थी। उस समय बर्फीले तूफान के कारण उनके हेलीकॉप्टर को लैंड करना पड़ा था। वह तब अफगान के सुदूर घाटी में फँसे थे।
“Don’t forget me here.”
Mohammed, an Afghan interpreter who helped rescue Joe Biden 13 years ago in Afghanistan is imploring the US President for help as American troops left behind countless Afghan allies like him.https://t.co/lMVJrPShEA
मोहम्मद तब यूएस आर्मी के लिए दुभाषिए के तौर पर काम करते थे। उन्होंने अफगान फौजियों और यूएस सैनिकों के साथ तब कड़ाके की ठंड में खड़े होकर तीन देश के नेताओं की मदद की थी। आज वह कहते हैं, “मैं अपना घर नहीं छोड़ सकता। बहुत डरा हुआ हूँ।” जानकारी के मुताबिक, मोहम्मद ने ये आपबीती वॉल स्ट्रीट जर्नल को अपना पूरा नाम न बताने की शर्त पर सुनाई है।
आज अफगान के हालात बदलने के बाद ऐसा लगता है कि देर-सवेर ही सही मोहम्मद के द्वारा की गई अपील सुन ली गई है। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा कि अमेरिका उन्हें और उनके परिवार को देश से निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं। साकी ने कहा, “हम आपको बाहर निकालेंगे, हम आपकी सेवा का सम्मान करेंगे, और हम ठीक ऐसा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
उल्लेखनीय है कि मोहम्मद की तरह अफगानिस्तान में कई लोग हैं जिन्होंने कभी अमेरिकी सेना की मदद की थी लेकिन अब वह तालिबान के डर में छिपे हैं। मोहम्मद और उनके जैसे लोगों को अप्रवासी वीजा की दिक्कत आ रही है। मोहम्मद की वीजा एप्लीकेशन में होती लेट का कारण बताया जा रहा है कि उनके डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर जिसके लिए उन्होंने काम किया, उसने रिकॉर्ड गुमा दिया है। मोहम्मद ने, हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से भी जाने की कोशिश की थी लेकिन उन्हें कहा गया कि उन्हें तो अफगानिस्तान से ऐसे ले जाया जा सकता है लेकिन उनके परिवार को नहीं।
देश भर में रिकॉर्ड वैक्सीनेशन के बीच फेक वैक्सीन का मामला भी प्रकाश में आया है। फर्जी वैक्सीन घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार (1 सितंबर 2021) को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक साथ 10 स्थानों पर छापा मारा। इस मामले में जाँच एजेंसी ने वैक्सीन की जमाखोरी, कालाबाजारी और नकली दवाओं समेत 6 केस दर्ज किए हैं। कई लोगों से पूछताछ भी की जा चुकी है।
Enforcement Directorate (ED) conducts raid across 10 locations in Kolkata in connection with fake vaccine scam: ED officials
दरअसल, 3 जुलाई 2021 को एसआईटी टीम के एक जाँच दल ने कोलकाता में फर्जी वैक्सीनेशन सेंटर चला रहे फर्जी आईएएस अधिकारी देबाजन देब के यहाँ छापा मारा था। मामले का खुलासा होने के बाद कोलकाता पुलिस ने आऱोपित को गिरफ्तार कर लिया था। इस दौरान पुलिस ने काफी सामान बरामद किया था। इसमें अटेंडेंस रजिस्टर, विजिटर स्लिप, नौकरी के लिए आवेदन, फर्जी टेंडर के कागजात शामिल थे।
पूछताछ के दौरान आरोपित ने पुलिस को बताया था कि वह कोरोना वैक्सीनेशन सेंटर में कोविशील्ड वैक्सीन की जगह लोगों को निमोनिया का इंजेक्शन दे रहा था। देबांजन देब कोविशील्ड वैक्सीन के ग्राफिक्स को प्रिंट करके उसे वैक्सीन पर लगाता था। इसके पहले पिछले साल उसने सैनेटाइजर का भी बिजनेस शुरू किया था। फिलहाल उसके टीएमसी के नेताओं के साथ लिंक्स को खंगाल रह है।
इस मामले में एक निजी कंपनी ने अपने 172 कर्मियों के वैक्सीन के लिए आरोपित को 1.2 लाख रुपए देने का दावा करते हुए कसबा पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई थी। जबकि एक ठेकेदार ने स्टेडियम निर्माण के निविदा के लिए 90 लाख रुपए देने का दावा किया है। इसके अलावा एक अन्य दवा कंपनी का दावा है कि उसने आरोपित को निविदा निकालने के लिए 4 लाख रुपए दिए थे।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार कोरोना को मात देने के लिए देशभर में युद्ध स्तर पर टीकाकरण अभियान चला रही है। देश में 28 अगस्त को केवल एक ही दिन में एक करोड़ लोगों को टीका लगाया गया। उस दौरान वैक्सीनेशन के मामले में उत्तर प्रदेश देशभर में नंबर 1 पर रहा है। ऐसा पहली बार हुआ था जब एक दिन में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का टीकाकरण किया गया हो।
स्मिता राजन की गिनती मोहिनीअट्टम के सबसे उम्दा कलाकारों में होती है। स्मिता प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना कल्याणीकुट्टी अम्मा की नतिनी हैं। उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए उन इतिहासकारों और बुद्धिजीवियों को निशाने पर लिया है जो मोपला हिंदू नरसंहार पर पर्दा डाल इसे ‘स्वतंत्रता आंदोलन’ बताने की कोशिश करते हैं। साथ ही बताया है कि कैसे इस नरसंहार के दौरान इस्लामवादियों ने उनकी नानी के पुश्तैनी घर पर हमला किया था। आज भी इस घर पर मुस्लिमों का कब्जा है।
स्मिता ने बताया है कि जब उनकी नानी को मजहबी कट्टरता के कारण 1921 में जान बचाकर भागना पड़ा तब वह केवल छह साल की थीं। उन्होंने लिखा है कि मजहबी कट्टरपंथियों के एक समूह ने कल्याणीकुट्टी अम्मा के घर को मोपला हिंदू नरसंहार के दौरान एक रात घेर लिया था। उनका परिवार उस समय खतरे में था।
स्मिता राजन अपनी पोस्ट में आगे लिखती हैं, “महिलाओं और बच्चों को घर के पिछले दरवाजे से जंगल में भागने के लिए मजबूर होना पड़ा था। हमले की रात कई परिवार अपने घरों, खेतों को छोड़कर अपनी जान बचाने के लिए अँधेरे में ही नदी पार कर गए थे। कई अभागे जो पलायन नहीं कर सके, उन्हें बेरहमी से मार दिया गया। मशहूर शास्त्रीय नृत्यांगना कल्याणीकुट्टी अम्मा उस समय सिर्फ छह साल की बच्ची थी, जो जान बचाने के लिए अपनी मातृभूमि से भाग गईं थी।”
स्मिता राजन ने बताया है कि इस नरसंहार को प्रत्यक्ष देखने के बाद कल्याणीकुट्टी अम्मा जीवन भर दुख और पीड़ा से उबर नहीं पाईं। राजन ने यह भी कहा कि मुस्लिम परिवारों ने कल्याणीकुट्टी अम्मा के पैतृक घर पर कब्जा कर रखा है।
उन्होंने मोपला हिंदू नरसंहार को स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बताने वाले इतिहासकारों, बुद्धिजीवियों और नेताओं की आलोचना करते हुए कहा है कि आतंक के शिकार लोगों की एक पीढ़ी आज भी उस भयावह मंजर को नहीं भूल पाई है, जिसमें हजारों लोगों ने अपनी जान गँवाई थी। स्मिता ने अपने पोस्ट के अंत में उम्मीद जताई कि अगली पीढ़ी कम से कम समझ जाएगी कि सच क्या है और वे गलतियों को नहीं दोहराएँगे।
गौरतलब है कि मोपला हिन्दू नरसंहार को अक्सर ‘मालाबार विद्रोह’, या अंग्रेजी में ‘Rebellion‘ कह कर सम्बोधित किया जाता है। केरल भाजपा के अध्यक्ष रहे कुम्मनम राजशेखरन की मानें तो 1921 में हुई ये घटना राज्य में ‘जिहादी नरसंहार’ की पहली वारदात थी। केरल के मालाबार में हिंदुओं पर अत्याचार के उन 4 महीनों ने हजारों हिंदुओं की जिंदगी तबाह की। बताया जाता है कि मालाबार में ये सब स्वतंत्रता संग्राम के तौर पर शुरू हुआ, लेकिन जब खत्म होने को आया तो उसका उद्देश्य साफ पता चला कि वरियमकुन्नथु जैसे लोग केवल उत्तरी केरल से हिंदुओं की जनसंख्या कम करना चाहते थे।
खिलाफत आंदोलन का सक्रिय समर्थक वरियमकुन्नथु ने अपने दोस्त अली मुसलीयर के साथ मिलकर मोपला दंगों का नेतृत्व किया, जिसमें 10000 हिंदुओं का केरल से सफाया हुआ। माना जाता है कि इसके बाद करीब 1 लाख हिंदुओं को केरल छोड़ने पर मजबूर किया गया। इस दौरान हिंदू मंदिरों को ध्वस्त किया गया। जबरन धर्मांतरण हुए और कई प्रकार के ऐसे अत्याचार हिंदुओं पर किए गए, जिन्हें शब्दों में बयान कर पाना लगभग नामुमकिन है।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने निर्णय लिया है कि भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा के में सब शराब की बिक्री नहीं होगी। तथाकथित पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी यूपी सरकार के इस फैसले से भड़क गईं। उन्होंने इसे ‘बहुसंख्यकों द्वारा अत्याचार’ करार देते हुए कहा कि अब बहुसंख्यक निर्णय ले रहे हैं कि अल्पसंख्यक क्या खाएँगे, क्या पहनेंगे और कैसे अपना जीवन व्यतीत करेंगे। वहीं लक्षद्वीप पर उनकी राय वहाँ के बहुसंख्यकों के पक्ष में थी।
बता दें कि अब मथुरा के सातों शहरों वृन्दावन, गोवर्धन, नन्दगांव, बरसाना, गोकुल, महावन और बलदेव में मांस व शराब की बिक्री प्रतिबंधित करने की माँग कई वर्षों से की जा रही थी। सोमवार (30 अगस्त, 2021) को जन्माष्टमी के मौके पर यहाँ पहुँचे सीएम योगी आदित्यनाथ ने जनता की इस माँग पर ये ऐलान किया। इस दौरान उन्होंने ब्रज भूमि के विकास और इसे नए कलेवर देने पर भी चर्चा की।
The tyranny of the majority! The majority decides what the minorities will eat, wear and how they will live their lives. This cruelty and oppression have become the order of the day. UP CM Yogi Adityanath Bans Meat, Alcohol Sales in Mathura https://t.co/DRcmp7kSrw
सीएम योगी ने इस दौरान कहा था, “चार वर्ष पूर्व 2017 में यहाँ की जनता की माँग पर मथुरा और वृन्दावन नगर पालिकाओं को मिलाकर नगर निगम का गठन किया गया था। फिर यहाँ के सात पवित्र स्थलों को राजकीय रूप से तीर्थस्थल घोषित किया। अब जनता की कामना है कि इन पवित्र स्थलों पर शराब और मांस की बिक्री न की जाए, तो मैं आश्वस्त करता हूँ कि ऐसा ही होगा। जो लोग इन कार्यों से जुड़े हैं, उन्हें अन्य कार्यों का प्रशिक्षण देकर उनका पुनर्वास किया जाएगा।”
उन्होंने जिला प्रशासन को इस सम्बन्ध में कदम उठाने के निर्देश दिए। इस तरह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न सिर्फ श्रद्धालुओं की बात मान ली, बल्कि मांस व शराब विक्रेताओं व इन कारोबारों से जुड़े लोगों के प्रशिक्षण से लेकर अन्य क्षेत्रों में व्यवस्थित पुनर्वास की भी घोषणा की। उनके लिए दुग्धपालन के छोटे-छोटे स्टॉल की व्यवस्था करने की घोषणा की गई। साथ ही उनकी व्यवस्थित तरीके से काउंसिलिंग भी होगी।
लेकिन, आरफा खानुम शेरवानी जैसे ‘पत्रकारों’ को ये नहीं पचा। मथुरा में बहुसंख्यक हिन्दुओं पर अत्याचार का आरोप लगा रहीं अरफ़ा खानुम शेरवानी लक्षद्वीप के बहुसंख्यक मुस्लिमों की भी ठेकेदार बनती रही हैं। उन्होंने लक्षद्वीप के ‘बहुसंख्यक’ मुस्लिमों पर अत्याचार की बात करते हुए उसके ‘भगवाकरण’ का आरोप लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि लक्षद्वीप को नष्ट किया जा रहा है।
Why did Lakshadweep do its first united protest in history ? Has the agenda from the 'House of Saffron' reached the 'paradise'? https://t.co/7YqYJ9le5Y Hear these important voices from the island and what former administrator Wajahat Habibullah has to say on the issue.
बता दें कि अब तक लक्षद्वीप में एक तरह से शरीयत का कानून चलता आ रहा था, जिस कारण भारत के सबसे सुंदर स्थलों में से एक होने के बावजूद इसका एक बड़े पर्यटन स्थल के रूप में विकास नहीं हो पाया। लक्षद्वीप में 98% जनसंख्या मुस्लिमों की है। लक्षद्वीप के प्रशासन ने क्षेत्र के विकास व पर्यटन के लिए कुछ कानूनों को मंजूरी दी है, जिसके कारण भारतीय द्वीप समूह के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल के खिलाफ विपक्षी नेता और लक्षद्वीप के स्थानीय मुस्लिम कट्टरपंथी लामबंद हैं।
वहीं अफगानिस्तान में तालिबान की क्रूरता पर भी आरफा खानुम शेरवानी दक्षिणपंथियों को कोसने से बाज नहीं आ रहीं। उन्होंने हाल ही में लिखा था, “दक्षिणपंथी भारतीय मुसलमानों को ट्रोल कर रहे हैं क्योंकि तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया है। सबसे बड़ी मानव त्रासदी भी इनके लिए केवल अवसर है। शर्म आनी चाहिए तुम्हें संघियों!” आरफा खानुम शेरवानी के लिए मुद्दा ये है कि ‘संघी’ भारतीय मुसलमानों से सवाल कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आज (1 सितंबर, 2021) को जारी अपने बयान में उन सभी रिपोर्टों का खंडन किया जिसमें दावा किया गया था कि अफगानिस्तान में तालिबान के आने के बाद कश्मीर से 60 युवा लापता हो गए हैं।
Some #SocialMedia platforms are running that 60 youth have gone #missing from different parts of the #Kashmir Valley amid the taliban takeover of Afghanistan. This is totally #fake news: IGP Kashmir@JmuKmrPolice
ट्वीट करते हुए, आईजीपी कश्मीर विजय कुमार ने कहा, “कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चला रहे हैं कि अफगानिस्तान के तालिबान के अधिग्रहण के बीच कश्मीर घाटी के विभिन्न हिस्सों से 60 युवा लापता हो गए हैं। यह #फर्जी खबर है।”
Kashmir Police refutes reports claiming that 60 youths have gone missing from different parts of Kashmir valley amid Taliban takeover of Afghanistan pic.twitter.com/XcP1DUuxJh
कई समाचार प्लेटफार्मों ने NDTV के आधार पर, इस रिपोर्ट को कवर किया है कि तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद से कश्मीर के विभिन्न हिस्सों से 60 युवा कथित तौर पर लापता हो गए हैं। नीचे NDTV का उस रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट है जिसके आधार पर कई मीडिया संस्थानों ने अपनी रिपोर्ट पब्लिश की थी।
“Amid Taliban Takeover Of Afghanistan, A Worrying Trend In J&K” शीर्षक वाली एक रिपोर्ट में, एनडीटीवी ने यह दावा किया कि अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी का प्रभाव घाटी में देखा जा सकता है। साथ कई पुलिस अधिकारियों को कोट करते हुए अपनी रिपोर्ट को वैलिडिटी दी थी जो अब फेक साबित हुआ है।
NDTV ने अपनी रिपोर्ट में एक सीनियर पुलिस अधिकारी से बातचीत का दावा करते हुए कोट किया था, “बीते एक महीने से हर दिन कोई न कोई हमला होता है। चाहे यह अटैक सिक्योरिटी फोर्सेज पर हो या फिर राजनीतिक नेताओं पर हो रहा हो।” NDTV की इसी रिपोर्ट में यह भी दावा था कि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन लॉन्च पैड में भी आतंकी गतिविधियाँ बढ़ी हैं, जहाँ फरवरी में हुए सीजफायर के बाद से ऐसी कोई हलचल नहीं थीं।
NDTV के दावे के अनुसार, कश्मीर के टॉप पुलिस अधिकारी विजय कुमार को कोट करते हुए लिखा, “पिछले कुछ महीनों में जम्मू कश्मीर में कम से कम 60 युवा अपने घरों से बहाने करके निकले और लापता हो गए हैं। ये लोग यह कहकर गए थे कि वे किसी काम से बाहर जा रहे हैं, लेकिन अब गायब है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह बड़ी चिंता की बात है। हम जम्मू-कश्मीर के सभी मिसगाइडेड युवाओं से अपील कर रहे हैं कि वे हिंसा छोड़ें और मुख्यधारा में वापसी करें।”
हालाँकि, अब जम्मू कश्मीर पुलिस के बयान के बाद यह खबर फर्जी साबित हो चुकी है। ऑपइंडिया हिंदी ने भी NDTV और कुछ दूसरे मीडिया पोर्टलों के आधार पर यह खबर प्रकाशित की थी जिसे ताजा सूचनाओं के आधार पर अपडेट कर दिया गया है। नीचे उन कुछ दूसरे मीडिया पोर्टलों के स्क्रीनशॉट हैं जिन्होंने NDTV को ही आधार बनाते हुए खबर प्रकाशित की थी। हालाँकि, अभी भी जम्मू कश्मीर पुलिस के खंडन के बाद भी NDTV ने अपनी रिपोर्ट न हटाई है और न अपडेट की है।
ऑपइंडिया से बात करते हुए, आईजीपी कश्मीर के कार्यालय ने पुष्टि की है कि एक मानक प्रक्रिया है जिसके तहत कश्मीर पुलिस फर्जी खबरें फैलाने वाले पोर्टलों और एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई करती है। 60 युवाओं के लापता होने की फर्जी खबर को कवर करने वाले इन पोर्टलों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
जहाँ एक तरड़ रवीश कुमार के गिरोह के तथाकथित पत्रकारगण ये आरोप लगाते हुए हंगामा मचाए हुए हैं कि मीडिया में तालिबान की बातें क्यों हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ खुद रवीश कुमार फेसबुक के जरिए तालिबान का रट्टा लगा रहे हैं। उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई है कि केंद्रीय विदेश मंत्रालय तालिबान से क्यों बात कर रहा है और साथ ही भविष्यवाणी की कि ‘गोदी मीडिया’ अब तालिबान का स्वागत करेगा।
ध्यान दीजिए, ये वही तालिबान है जिसने रवीश कुमार के ही गिरोह के पत्रकार दानिश सिद्दीकी की क्रूर तरीके से हत्या कर दी थी, जिसके बाद इन सब ने मिल कर हिन्दुओं को निशाना बनाया था। जिस तालिबान ने ये सब किया, उसके खिलाफ एक शब्द तक नहीं कहा गया था। उलटा ‘हिन्दू आतंकवाद’ की बातें की गई थीं, भले ही तालिबान ‘अल्लाहु अकबर’ बोल कर ही क्यों न लोगों की हत्या करता हो।
केंद्रीय विदेश मंत्रालय के बयान को देखें तो स्पष्ट होता है कि भारत नहीं गया था तालिबान से बात करने, बल्कि तालिबान के निवेदन पर ये बातचीत हुई है। क्यों? क्योंकि वहाँ जो भी हिन्दू व सिख हैं, जो भी भारतीय बचे हुए हैं, उन्हें कोई नुकसान न पहुँचे। अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों को भारत आने में परेशानी न हो, इसीलिए बातचीत हुई। अफगानिस्तान की मिट्टी का इस्तेमाल भारत के खिलाफ न हो, इसीलिए बातचीत हुई।
यानी, अगर सरकार अपने देश की जनता के हित व सुरक्षा के लिए कोई कदम उठाती है तो इससे भी रवीश कुमार को दिक्कत है। लाशों पर राजनीति करने वाला यही गिरोह तब मोदी सरकार को गाली देते नहीं थकेगा, अगर अफगानिस्तान में फँसे भारतीयों को कोई नुकसान पहुँचे। भारत सरकार ने बस अपने दायित्व का निर्वहन किया है। याद कीजिए, 1990 में कुवैत में फँसे भारतीयों की सकुशल वापसी के लिए तत्कालीन विदेश मंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने इराक़ के तानाशाह सद्दाम हुसैन को गले लगाया था।
तालिबान पर बातें कर रहे रवीश कुमार, भूले GDP और टीकाकरण
लेकिन, रवीश कुमार को सिर्फ प्रोपेगंडा का ज़हर बोना है। उन्होंने पूछा है कि तालिबान के बारे में बात क्यों की जा रही है (जबकि वो खुद ऐसा कर रहे)? असल में वो जानते हैं कि सोशल मीडिया की इस दुनिया में तालिबान की एक-एक करतूत लोगों को पता चल रही हैं। पुरुषों से रेप से लेकर महिलाओं की तस्करी, अमेरिकी नागरिक को हैलीकॉप्टर से लटका कर मार डालने और बच्चियों तक के अपहरण के कई वीडियोज लोगों के सामने इस्लामी कट्टरवाद की पोल खोल रहे।
इसीलिए, रवीश चिंतित हैं कि कहीं इस्लामी आतंकवाद के इस मुद्दे से उनका प्रोपेगंडा ध्वस्त न हो जाए। जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाने से लेकर ‘हिन्दू आतंकवाद’ तक की झूठी बातें बेनकाब न हो जाएँ। इसीलिए, ये लोग चाहते हैं कि भारत के लोग कुएँ के मेंढक बने रहें और देश-दुनिया के बारे में न जानें। रवीश कुमार इस बात से भी चिंतित हैं कि भाजपा नेता तालिबान को आतंकी क्यों कह रहे। तालिबान की छवि चमकाने का NDTV ने तो ठेका ही ले रखा है।
लेकिन, यही रवीश कुमार अब कोरोना वायरस के खिलाफ भारत की सशक्त लड़ाई का जिक्र तक नहीं कर रहे। इसका कारण है। इसका कारण ये है कि भारत ( 31 अगस्त, 2021) को पिछले सारे रिकार्ड्स ध्वस्त करते हुए एक दिन में 1.30 करोड़ लोगों को टीका लगा दिया। इससे कुछ ही दिन पहले एक दिन में 1 करोड़ लोगों का टीकाकरण हुआ था। उससे पहले एक दिन में 80 लाख का रिकॉर्ड बना था।
अब आँकड़े तो सच बोलते हैं और सच तो रवीश कुमार सुनना तक नहीं पसंद करेंगे, लोगों को बताने की बात तो दूर, क्योंकि इसी पता चलेगा कि किस तरह नरेंद्र मोदी की सरकार दुनिया का सबसे व्यापक टीकाकरण अभियान चला रही है। अब वो ‘गोदी मीडिया’ और ‘आईटी सेल’ की रट भी नहीं लगा सकते, क्योंकि ये आँकड़े भाजपा के नहीं हैं। ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)’ ने इसके लिए भारत की तारीफ़ की है।
ये वही रवीश कुमार हैं, जिन्होंने कोरोना टीके के दाम को लेकर सरकार पर छींटाकशी की थी। इसीलिए, ये बता ज़रूरी है कि सुदूर गाँवों तक लोगों का मुफ्त टीकाकरण कराया जा रहा है। जून 2021 में रवीश ने सवाल दागा था कि वैक्सीन के लिए समय पर ऑर्डर क्यों नहीं दिए गए। उन्होंने मोदी सरकार को ‘छपास रोग’ का शिकार तक करार दिया था और देश में वैक्सीन की कमी का नैरेटिव आगे बढ़ाया था।
उसी महीने उन्होंने ये भी कहा था कि जिस वैक्सिनेशन प्रोग्राम को विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान कहकर प्रचारित किया जा रहा था, उसकी पोल खुल गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया था कि वो टीका बनाने वाले वैज्ञानिकों का नाम नहीं ले रहे। जबकि सच्चाई ये है कि वैक्सीन के निर्माण के समय ही पीएम मोदी अहमदाबाद और हैदराबाद गए थे व सीरम के अलावा ‘भारत बायोटेक’ के लैब का भी निरीक्षण किया था।
इसके अलावा रवीश अर्थव्यवस्था पर भी चुप हैं। मई 2021 में उन्होंने महँगाई बढ़ने व अर्थव्यवस्था गिरने के आरोप पीएम मोदी पर मढ़े थे। जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था कोरोना व लॉकडाउन के कारण गिर रही थी, तो उसका ठीकरा भी रवीश ने मोदी सरकार पर ही फोड़ा था। उन्होंने कहा था कि अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है और जो बिज़नेस में हैं, उन्हें सच्चाई मालूम है। उन्होंने थाली बजवाने और सेना द्वारा डॉक्टरों का सम्मान करने पर भी तंज कसा था।
अब रवीश कुमार अर्थव्यवस्था पर चुप हैं। इसका कारण ये है कि इसका कारण ये है कि अप्रैल से जून 2021 के दौरान, यानी मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की GDP ग्रोथ रेट में 20 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल देखने को मिला है। पिछले साल कोरोना महामारी के कारण देश की GDP में गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन अब इसमें सुधार दिखने लगा है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी की ग्रोथ में 20.1 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है।
असली बात तो ये है कि रवीश कुमार को पहले तालिबान की क्रूरता भारत की जनता के सामने छिपानी थी, अब उन्हें GDP विकास दर और कोरोना टीकाकरण पर मोदी सरकार की उपलब्धियों से जनता का ध्यान भटकाना है। इसीलिए, तालिबान की आलोचना हो तो वो अर्थव्यवस्था व वैक्सीनेशन की बातें करते हैं और जब अर्थव्यवस्था व वैक्सीनेशन को लेकर उनका प्रोपेगंडा ध्वस्त होता है तो तालिबान-तालिबान रटते हैं।
साल 2022 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी ने सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों से अकेले लड़ने का ऐलान किया है। प्रदेश में पार्टी के प्रभारी व राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी आने वाले चुनावों में अपने बलबूते पर खड़ी होगी और सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी।
संजय सिंह ने यह भी बताया कि सीटों पर प्रत्याशियों के नाम की घोषणा अगले 15 दिन के अंदर की जाएगी। अभी तक 120 सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची तैयार हुई है। AAP नेता का कहना है कि उनकी पार्टी इन चुनावों में भाजपा के फर्जी राष्ट्रवाद और AAP के असली राष्ट्रवाद के मुद्दे को लेकर चुनाव में उतरेगी।
उनके मुताबिक उनका राष्ट्रवाद हर गरीब के बच्चे को पढ़ने के लिए लिए बेहतर स्कूल देना है। मोहल्ला क्लिनिक की तरह हर गाँव में बेहतर अस्पताल प्रदान करना है। इसके अलावा दिल्ली की तरह 300 यूनिट बिजली भी उनका वादा है।
यूपी की सभी 403 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी आप,जल्द होगी प्रत्याशियों की घोषणा। https://t.co/pKzZsthJMP
मालूम हो कि एक ओर जहाँ आम आदमी पार्टी जोर-शोर से भाजपा को हराने के प्रयासों में जुटी है, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर इस ऐलान के बाद से नेटीजन्स ने अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। कुछ लोग जहाँ इसे बस एक शुरुआत मान रहे हैं और आने वाले समय में आप को केंद्र में बैठाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। तो कुछ लोग ऐसे भी हैं जो संजय सिंह द्वारा साझा की गई जानकारी पर कह रहे हैं कि AAP के किसी नेता में इतना दम नहीं है कि वो योगी आदित्यनाथ के सामने खड़ा हो सके।
मैं एक बार फिर कह रहा हु योगी जी के सामने खड़ने होने किया हैसीयत अभी AAP पार्टी के किसी भी नेता में नहीं है।
कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे। इसलिए अपने पैर दिल्ली तक ही रखो।
कुछ यूजर्स संजय सिंह की एक पुरानी तस्वीर शुभम थिएटर के साथ शेयर करके कह रहे हैं, “क्षमा करें क्योंकि टिकटें आप की हैं इसलिए ब्लैक सम्भव नहीं। हार के लिए तैयार हो तो फ्री में लो और शर्मिंदा न हों।”
क्षमा करें क्योंकि टिकटें आप की हैं इसलिए ब्लैक सम्भव नहीं ।हार के लिये तैयार हो तो फ्री में लो और शर्मिंदा न हों। pic.twitter.com/ptrRerOrXC
एक यूजर कहता है, “सोचों देशवासियों ये दिल्ली में अंधाधुंध पैसा कमा कर दूसरे प्रदेशों में बर्बाद कर रहा है, ये जानते हुए कि सारी सीटों पर ज़मानत जब्त होनी है। दिल्ली वालों ये आपका विकास नहीं आपको बर्बाद करेंगे।”
देश बचाओ पार्टी उस दल की साथ जाएगी जो ढोंगी राज हराएगा हम बीजेपी को लाभ नहीं होने देंगे अपने निजी स्वार्थ मे ऐसा हमारा नेता कहता है हजारों कार्यकर्ता और बीस से अधिक जिलों मे हमारा भी संगठन है लेकिन बीजेपी हराने वालों से कोई शर्त नहीं. @yadavakhilesh@samajwadiparty@NareshUttamSP
अफगानिस्तान में तालिबान के आने से डर और दहशत का माहौल कायम है ऐसे में वहाँ से आया एक फोन कॉल का रिकॉर्ड ऑडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वायरल ऑडियो में कानपुर की रहने वाली हिना खान अफगानिस्तान में फँसी है और अपने परिजनों से मदद माँग रही है कि कोई उसे भारत ले आएँ। महिला की आपबीती सुनकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चा छिड़ गई है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मामला कानपुर महानगर के बाबूपुरवा थाना क्षेत्र का है। हिना नाम की एक महिला अपने तीन बच्चों के साथ अफगानिस्तान में फँसी हुई है। हिना के अब्बू इखलाक अहमद की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। और अब बेटी को लेकर बाबूपुरवा इलाके के बगाही में रहने वाली उसकी माँ समीरुन निशा बहुत परेशान हैं। हिना की माँ ने सोमवार को पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए पुलिस और मोदी सरकार से मदद की गुहार लगाईं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस को दिए तहरीर में माँ ने बताया, “मेरी बेटी हिना खान उर्फ पम्मो मुंबई में अपने चाचा के पास रहती थी। वहाँ एक बार में काम करती थी, तभी उसकी मुलाकात अफगानिस्तान निवासी मोहम्मद गनी से हुई, जो काबुल से 80 किलोमीटर दूर जुरमुट का रहने वाला है। मोहम्मद गनी ने बेटी को प्रेमजाल में फँसाकर निकाह करने के बाद मुंबई में ही रहने लगा। दोनों के एक बेटा व दो बेटियाँ हैं। कुछ समय पहले वह बेटी व बच्चों को लेकर अफगानिस्तान चला गया था। जिसके कुछ दिन बाद शौहर मोहम्मद गनी मुंबई वापस लौट आया। लेकिन हिना वहीं रहने लगी।”
लेकिन अब अपनी बेटी हिना से फोन पर बात के बाद की माँ का सीधा आरोप है कि मोहम्मद गनी ने हिना को वहाँ पर बेच दिया था। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी को अफगानिस्तान में बंधक बनाकर रखा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 28 अगस्त की रात को हिना ने अपनी माँ समीरुन निशा को फोन कर बताया कि अभी काबुल से 80 किलोमीटर दूर जुरमुट इलाके में फँसी हुई हैं। उसने अपनी माँ से अफगानिस्तान से उसे और उसके बच्चों को निकालने की गुहार भी लगाई है।
जिसके बाद समीरन निशा पुलिस के पास पहुँची और अपनी बेटी को अफगानिस्तान से हिंदुस्तान लाने की प्रार्थना की। हिना ने अपनी माँ को बताया कि काबुल और जुरमुट में हालात बेहद खराब हैं। वहाँ खाने और पीने को भी कुछ नहीं मिल रहा है। हर वक्त बस यह लगता है कि मौत कब उन्हें अपने आगोश में ले लेगी। हिना गुहार लगा रही है कि किसी भी तरह उसकी और उसके बच्चों की जान बचा ली जाए। हिना की माँ की माने तो मोहम्मद गनी मुंबई में किसी दूसरी महिला के साथ रह रहा है और उसकी बेटी को वापस लाने के लिए पैसों की माँग भी रख रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कानपुर पुलिस ने इस मामले के बारे में विदेश मंत्रालय को ईमेल के द्वारा सूचित कर दिया है। साथ ही पुलिस इस बात की भी जाँच भी कर रही है कि कहीं ये मानव तस्करी से जुड़ा मामला तो नहीं है।
वहीं भारत सरकार के स्तर पर अफगानिस्तान में फँसी हिना खान और उसके बच्चों को बचाने की कवायद शुरू हो गई। सोमवार देर रात एडीसीपी साउथ डॉ. अनिल कुमार ने विदेश मंत्रालय को इस मामले की पूरी जानकारी दी है। पुलिस कमिश्नर असीम अरुण और डीसीपी साउथ रवीना त्यागी को भी मामले से अवगत कराया है। साथ ही पुलिस कमिश्नर ने बताया कि महिला ने जो तहरीर दी है, उसमें अपने दामाद पर आरोप लगाए हैं। उसकी भी जाँच शुरू कर दी गई है।
पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा के मामले में कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार (1 सितंबर 2021) को 10 नए केस दर्ज किए। इसके साथ ही सीबीआई द्वारा दर्ज मामलों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है।
ज़ी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक सीबीआई प्रवक्ता आरसी जोशी ने नए मामलों के संबंध में जानकारी साझा करते हुए कहा, “सीबीआई ने डब्ल्यूपीए (पी) के मामले में पारित माननीय कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में दस और मामले दर्ज किए हैं। केस नंबर 142, 143, 144, 145, 146, 147, 148, 149 और 167 की जाँच अपने हाथ में ले ली जो पश्चिम बंगाल के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में दर्ज थे।” पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में भाजपा कार्यकर्ता धर्म मंडल और दो अन्य की हत्या के आरोप में 28 अगस्त 2021 को बीजू और आसीमा घोष को गिरफ्तार करने के बाद सीबीआई ने यह कदम उठाया है।
सीबीआई द्वारा दर्ज किए गए 10 केसों में पहला मामला बीरभूम जिले के नलहाटी पुलिस स्टेशन में 14 मई को जगधारी गाँव के एक ग्रामीण के धान के खेत में मृत पाए जाने के बाद दर्ज किया गया था। दूसरा मामला शांतिनिकेतन थाने में दर्ज एक भीषण सामूहिक दुष्कर्म का था। तीसरा मामला दुकानदारों से रंगदारी वसूलने और हत्या से जुड़ा है। इस मामले में पीड़िता के पिता ने दक्षिण 24 परगना के रामनगर थाने में मामला दर्ज कराया था।
चौथा मामला एक बाइक सवार को पीट-पीटकर मार डालने के मामले में 24 परगना के जगद्दल थाने में दर्ज किया गया था। इस घटना में मृतक के बड़े भाई को भी बेरहमी से पीटा गया था और एक आरोपित ने उसके मुँह में बन्दूक डालकर उसके छाती पर बैठ गया था। एक अन्य आरोपित ने उसे हथियार के बट से लगातार पीट रहा था। इसके बाद आरोपितों ने पीड़ित के पेट में गोली मार दी और बम फेंक कर फरार हो गए। बाद में घायलों ने दम तोड़ दिया।
दक्षिण 24 परगना के नरेंद्रपुर थाने में दर्ज एक अन्य मामला हत्या और छेड़छाड़ का है। शिकायतकर्ता के घर पर लोहे की रॉड, बाँस, पिस्टल और डंडे से हमला किया गया था। दर्ज किए गए नए मामलों में छह हत्या के, दो गैंगरेप और रेप के आरोप में दर्ज किए गए थे और अन्य हमले और संपत्ति को नष्ट करने से संबंधित हैं।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 19 अगस्त को पश्चिम बंगाल में हुई राजनीतिक हिंसा के मामले की जाँच CBI को सौंपी थी। राज्य में 2 मई को चुनाव परिणाम तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के पक्ष में आने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं व समर्थकों के खिलाफ जम कर हिंसा हुई थी।
अभिनेत्री पायल रोहतगी के खिलाफ महाराष्ट्र के पुणे में FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि उन्होंने महात्मा गाँधी के अलावा देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। आरोप है कि उन्होंने इनके लिए आपत्तिजनक शब्द भी इस्तेमाल किए। पायल रोहतगी के एक वीडियो को लेकर ये मामला दर्ज किया गया है, जो उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर किया था।
उनके खिलाफ ‘भारतीय पैनल कोड’ की धाराओं 153(a) (लिखित या मौखिक रूप से ऎसा बयान जिससे साम्प्रदायिक दंगा या तनाव फैलता है या समुदायों के बीच शत्रुता पनपती है), 500 (किसी की मानहानि करना), 505(2) (विभिन्न समुदायों के बीच शत्रुता, घॄणा या वैमनस्य की भावनाएँ पैदा करने के आशय से असत्य कथन, जनश्रुति, आदि, परिचालित करना) और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
शिवाजी नगर पुलिस थाने में ‘पुणे सिटी कॉन्ग्रेस कमिटी’ के पदाधिकारियों ने ये मामला दर्ज करवाया है। पार्टी के सिटी प्रवक्ता रमेश अय्यर ने कहा कि उन्हें एक पोस्ट मिला है, जो हाल ही का लगता है और इसमें पायल रोहतगी ने गाँधी-नेहरू परिवार को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की हैं। साइबर क्राइम सेल के समक्ष इस मामले में शिकायत दी गई थी। पुलिस का कहना है कि 36 वर्षीय अभिनेत्री के खिलाफ जाँच चल रही है।
A case has been registered against actress Payal Rohatgi (in file pic) in Pune for allegedly using objectionable words against Mahatma Gandhi, Jawaharlal Nehru, Indira Gandhi & Rajiv Gandhi in a video shared on social media, under sections 153 (a), 500, 505(2) and 34 of IPC pic.twitter.com/6PICoD2sNm
बता दें कि 2019 में भी पायल रोहतगी ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और जवाहरलाल नेहरू के पिता पंडित मोतीलाल नेहरू को लेकर एक एक विवादित ट्वीट किया था। इसी ट्वीट को लेकर राजस्थान यूथ कॉन्ग्रेस के नेता चर्मेश शर्मा की तहरीर पर पायल रोहतगी के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66 और 67 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया था। उनका एक वीडियो भी खूब वायरल हुआ था, जिसमें वह बता रही हैं कि मोतीलाल नेहरू की पाँच पत्नियाँ थीं।
उन्होंने यह दावा प्रधानमंत्री नेहरू के निजी सचिव रहे एमओ मथाई की जीवनी का हवाला देते हुए किया था। पायल के मुताबिक, यह जीवनी एडिना रामकृष्ण ने लिखी है और उन्होंने इसमें कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। वीडियो में पायल ने बताया था कि स्वरूप रानी नेहरू उनकी लीगल वाईफ यानी वैध बीवी थीं मगर इसके अलावा उनकी चार और बीवियाँ भी थीं जिसमें थुस्सू रहमानबाई, श्रीमती मंजरी, एक ईरानी महिला और एक नौकरानी शामिल थीं।