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कब्रिस्तान के पास कुलदीप को घेर कर पीटा, ‘न लोड पड़े हथियारों की’ गाने के साथ Video वायरल – इकबाल, शोएब समेत 5 पर केस

मध्य प्रदेश के हरदा में बने एक कब्रिस्तान के पास से 5 युवकों का वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो में देख सकते हैं कि पाँचों युवक कैसे एक अन्य युवक को बेरहमी से पीट रहे हैं। आरोपितों ने वीडियो को खुद ही सोशल मीडिया पर बैकग्राउंड में गाना एड करके अपलोड किया।

वीडियो वायरल होने के बाद से मामले ने तूल पकड़ा हुआ है। जानकारी होने पर पुलिस भी क्षेत्र में पहुँच गई है। पाँचों के विरुद्ध मामला दर्ज हुआ है। इनमें 2 गिरफ्तार हो गए हैं, बाकियों से पूछताछ हो रही है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरा मामला हरदा जिला मुख्यालय से दो किमी दूर उड़ा गाँव के पास का है। वहाँ सोमवार (अगस्त 30, 2021) की दोपहर कुलदीप योगी नाम के युवक को शोएब, आकिब, आरिफ, इकबाल और सैफ ने रोका और उसे लात-घूँसों से पीटने लगे।

एसपी मनीष अग्रवाल ने बताया कि इस मामले में दो रिपोर्ट दर्ज की गई हैं। एक मामला पीड़ित ने ही दर्ज करवाया है जबकि दूसरा केस अभिषेक राठौर ने करवाया है। राठौर ने गाँव में दहशत फैलाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर करवाई है।

वीडियो में देख-सुन सकते हैं कि सारे युवक कैसे पीड़ित को मार रहे हैं और पीछे गाना चल रहा है ‘न लोड पड़े हथियारों की’। इस वीडियो को आरोपितों ने ही वायरल किया। अब युवक के परिवार वाले और उसके समाज के लोग यह सब देख गुस्से में हैं। मामले की जानकारी होने पर पुलिस रात में ही गाँव पहुँची और इकबाल, शोएब,आरिफ, आकिब और सैफ के खिलाफ मारपीट, दहशत फैलाने सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया।

पीड़ित ने बताया कि उसे कब्रिस्तान में बुला कर मारपीट की गई और इस दौरान गंदी-गंदी गालियाँ भी दी गईं। पीड़ित के मुताबिक, उसे हाथ, पैर, गालों में चोटें आई हैं। इसके अलावा उसे धमकी दी गई है कि यदि वह दोबारा उनसे (आरोपितों से) उलझा तो उसे जान से मार दिया जाएगा। इस केस को पुलिस ने 294, 323,506 और 34 के तहत दर्ज किया है। बाकी तीनों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

जामताड़ा के साइबर जालसाजों ने बदली चाल: दिल्ली पुलिस का खुलासा, मास्टरमाइंड अल्ताफ और गुलाम अंसारी सहित 14 को दबोचा

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने झारखंड के जामताड़ा से 14 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। साइबर सेल के डीसीपी अन्येश रॉय ने मंगलवार (31 अगस्त 2021) को बताया, “हमने देश के साइबर क्राइम के हॉटस्पॉट को लक्षित करते हुए ‘साइबर प्रहार’ भाग 2 लॉन्च किया है। जामताड़ा बेल्ट जिसमें जामताड़ा, देवघर, गिरिडीह और जमुई शामिल हैं, यहाँ एक बड़ी कार्रवाई में हमने 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये वहाँ एक बड़ा रैकेट संचालित कर रहे थे।”

डीसीपी ने बताया ये लोग मुख्य रूप से UPI पेमेंट से संबंधित धोखाधड़ी करते थे। साइबर ठग KYC पूरी न होने पर SIM बंद करने की आखिरी तारीख मेंशन कर या बैंक खाते को बंद करने के बहाने यूपीआई के जरिए पेमेंट करने के लिए कहते थे।

उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में हमने नोटिस किया कि उन्होंने अपने ठगी के तरीकों को बदला है। पहले वे लोगों को कॉल करते थे और उनसे बैंक की डिटेल माँगते थे, लेकिन अब वे इस तकनीक का इस्तेमाल नहीं करते हैं। उन्होंने अब ठगी का नया तरीका निकाला है। जैसे अब ये गूगल पर अस्थायी वेबसाइट बनाते हैं और छोटे URL वाले कई मैसेज भेजते हैं।

गिरफ्तार किए गए 14 ठगों पर 9 राज्यों के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर 36 मामले दर्ज हैं। उन्होंने इन 36 मामलों में करीब 1.2 करोड़ रुपए की ठगी की है। साइबर ठगों ने रोजाना 4-5 लोगों को ठगने की बात स्वीकार की है।

अन्येश रॉय ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि इस रैकेट का मास्टरमाइंड अल्ताफ अंसारी उर्फ रॉकस्टार और गुलाम अंसारी उर्फ मास्टर जी है। अल्ताफ के पास बड़ी संख्या में कॉलर हैं। पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वह इन लोगों को उस स्थान पर रखता है, जहाँ से वह काम करता है।

गुलाम फेक वेबसाइट बनाने और उन्हें Google विज्ञापनों के माध्यम से ऑनलाइन रन कराने में माहिर है। अल्ताफ एड कैंपेन चलाने के लिए रोजाना 40,000 से 50,000 रुपए देता था। जाँच में एक और बात जो सामने आई है कि ठगों ने छोटे मॉड्यूल में अपने कार्यों का विस्तार किया है।

‘जावेद’ ने बनाया था मुस्लिम महिलाओं की अश्लील तस्वीरों वाला ‘Sullideals’ एप? देखें वायरल स्क्रीनशॉट्स

हाल ही में एक इंटरनेट एप्लिकेशन को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। ‘Sullideals’ नाम के इस एप की मदद से मुस्लिम महिलाओं को आपत्तिजनक रूप से दिखाने के आरोप लगे थे। अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने इस मामले का संज्ञान लिया है। आरोप लगे हैं कि मुस्लिम महिलाओं को डील के रूप में ऑफर करने वाले इस एप का निर्माण एक मुस्लिम व्यक्ति ने ही किया है।

इससे पहले इस्लामी कट्टरपंथियों ने आरोप लगाए थे कि हिन्दुओं ने इस एप को बनाया है और इसके माध्यम से मुस्लिमों को बदनाम किया जा रहा है। मेनस्ट्रीम मीडिया ने भी इसी नैरेटिव को आगे बढ़ाया था। अब ‘sullidealsXpose’ नाम के एक ट्विटर हैंडल ने आरोप लगाया है कि इस एप के पीछे जो व्यक्ति है, उसका नाम जावेद है। आरोप है कि जावेद ने @AnonMark3 और @AnonHindu4 नाम के दो ट्विटर हैंडल्स भी बना रखे हैं।

जहाँ एक हैंडल से हिन्दू महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्रियाँ प्रसारित की जा रही थीं, वहीं दूसरे से मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ अश्लील बातें की जा रही थीं। आरोप है कि ये दोनों ही हैंडल्स अश्लील सामग्रियों से भरे पड़े हैं। इस एप को एक्सपोज करने का दावा करने वाले ने एक मुस्लिम महिला से इस सम्बन्ध में सूचना मिलने की बात कही। जावेद के साथ एक मुस्लिम महिला की कथित बातचीत की स्क्रीन रिकॉर्डिंग भी शेयर हुई है।

इसमें जावेद को कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करते हुए देखा जा सकता है। इस बातचीत के टेक्स्ट में ‘जावेद’ उक्त मुस्लिम महिला से अंतर-धार्मिक प्यार के बारे में पूछ रहा है, खासकर किसी हिन्दू पुरुष के साथ। ‘जावेद’ ने महिला से पूछा कि कैसे वो इस रिश्ते में आए, जिसके बाद महिला ने बताया कि उक्त व्यक्ति ने उसे प्रोपोज किया था। इस दौरान जावेद ने हिन्दू-मुस्लिम के बीच अंतर-धार्मिक रिश्ते को ‘सुंदर’ बताते हुए कहा कि ऐसे संबंधों की संख्या ज्यादा होनी चाहिए।

स्क्रीन रिकॉर्ड की मानें तो ‘जावेद’ इस बातचीत में खुद को हिन्दू दिखाते हुए एक घटना के बारे में बताता है। वो कहता है कि कॉलेज के दिनों में उसकी एक मुस्लिम गर्लफ्रेंड थी। उसने दावा किया कि अंतर-धार्मिक रिश्तों को बढ़ावा देने के लिए उसने ‘इंटरफेथ इरोटिका’ कंटेंट्स वाला हैंडल बनाया है। इसके बाद एक संभवतः टेलीग्राम कंवर्शेशन का स्क्रीन रिकॉर्ड शेयर किया गया, जिसमें पता चलता है कि ‘जावेद’ ने मुस्लिम महिलाओं के गलत इस्तेमाल के लिए एक एप बनाया है।

हालाँकि, इसमें कहीं ‘Sullideals’ का नाम नहीं लिया जाता है। जब उससे उन मुस्लिम महिलाओं के बारे में पूछा गया जिनकी तस्वीरों का उसने गलत इस्तेमाल किया, तो वो भद्दी भाषा का प्रयोग करते हुए कहते हैं कि वो सभी ‘वेश्याएँ’ थीं। वो कहता है कि उसने इसका कोई पछतावा नहीं है। एक कंवर्शेशन में वो बताता है कि कैसे उसने हिन्दुओं पर इस एप को बनाने की बदनामी डाल दी। उसकी पहचान मथुरा के GLA यूनिवर्सिटी के ‘जावेद आलम’ के रूप में बताई जा रही है।

एक्सपोज करने वाले हैंडल ने दो फोन नंबर्स मिलने का भी दावा किया है। 24 जुलाई, 2021 को एक मीडिया संस्थान ने जावेद से संपर्क करने का दावा किया था। इसमें उसने ‘Sullideals’ से अपना सम्बन्ध होने की बात नकार दी थी, लेकिन एक महिला के साथ इंटरफेथ रिलेशनशिप पर सामान्य बातचीत होने की बात कबूली थी। उसने धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले बयान देने की बात भी नकार दी थी।

JNU में ‘काउंटर टेररिज्म’ की पढ़ाई: जिहाद, इस्लाम और चीन के जिक्र से भड़के वामपंथी

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने अपनी अकादमिक परिषद द्वारा ड्यूअल डिग्री प्रोग्राम में पढ़ाई कर रहे इंजीनियरिंग छात्रों के लिए एक नए ‘आतंकवाद विरोधी’ (Counter-Terrorism) पाठ्यक्रम के रूप में एक नए कोर्स की मंजूरी दे दी है। जिसके बाद से ही CPI सहित कई विपक्षी दलों ने इस विशेष पाठ्यक्रम को शामिल करने का विरोध किया है जिससे विश्वविद्यालय परिसर में एक नया तूफान खड़ा हो गया है।

माकपा (CPI) के राज्यसभा सांसद बिनॉय विश्वम ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर जेएनयू के पाठ्यक्रम जिसका टाइटल है- ‘काउंटर टेररिज्म- एसिमेट्रिक कॉनफ्लिक्ट्स एंड स्ट्रेटजीज फॉर कोऑपरेशन अमांग मेजर पावर’ के पाठ्य सामग्री को पूर्वाग्रहपूर्ण और गलत प्रकृति को बढ़ावा देता हुआ बताकर आपत्ति जताई है।

CPI नेता ने 31 अगस्त, 2021 को शिक्षा मंत्री को लिखे अपने पत्र में खेद व्यक्त किया है, जिसमें उन्होंने कहा, “उच्च शिक्षा का उपयोग अर्ध-सत्य और अकादमिक रूप से गलत जानकारियों के माध्यम से भू-राजनीतिक मुद्दों को सांप्रदायिक और राजनीतिक बनाने के लिए एक मंच के रूप में किया जा रहा है।”

पाठ्यक्रम की आलोचना करते हुए, सीपीआई नेता बिनॉय विश्वम ने इसे कुछ विचारधाराओं के निहित राजनीतिक और सांप्रदायिक हितों की सेवा के लिए ‘इतिहास की विकृति’ भी बताया। विश्वम ने लिखा है कि पाठ्यक्रम की सामग्री वैश्विक आतंकवाद और इसका समर्थन करने वाले राजनीतिक शासन से संबंधित कई अविश्वसनीय दावे करती है।

उन्होंने अपने पत्र में कहा कि इस आतंकवाद विरोधी मॉड्यूल में बयान में “जिहादी आतंकवाद” जैसे कट्टरपंथी-धार्मिक आतंकवाद का एकमात्र रूप शामिल है। पाठ्यक्रम, मॉड्यूल के तहत, ‘राज्य-प्रायोजित आतंकवाद: इसका फैलाव और प्रभाव’ भी राज्य प्रायोजित आतंकवाद के लिए अकेले सोवियत संघ और चीन को संदर्भित करता है जिसने “कट्टरपंथी-इस्लामी राज्यों” को प्रभावित किया। मॉड्यूल में छात्रों को क्या पेश करना है, इस पर नाराज़ होते हुए, भाकपा नेता ने कहा कि ये बयान “गहरे पूर्वाग्रह और राजनीति से प्रेरित” हैं।

CPI द्वारा लिखे गए पत्र का स्क्रीनशॉट

पाठ्यक्रम का मसौदा तैयार करने वाले जेएनयू अधिकारियों की आलोचना करते हुए, विश्वम ने कहा कि यह शिक्षा और क्रिटिकल थिंकिंग के उस लोकाचार के खिलाफ है जो जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की पहचान रही है।

उन्होंने अपने पत्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री से हस्तक्षेप करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि पाठ्यक्रम सामग्री की व्यापक समीक्षा करने के लिए विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसरों को तैनात करें, जो इस विषय के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि इस तरह के ‘पक्षपाती’ पाठ्य सामग्री को अनुमति नहीं देनी चाहिए।

गौरतलब है कि 17 अगस्त को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद द्वारा ‘काउंटर टेररिज्म, असममित संघर्ष और प्रमुख शक्तियों के बीच सहयोग के लिए रणनीतियाँ’ शीर्षक से नए वैकल्पिक पाठ्यक्रम को मंजूरी देने के बाद ही विवाद शुरू हो गया। नया वैकल्पिक पाठ्यक्रम उन इंजीनियरिंग छात्रों के लिए पेश किया गया है जो जेएनयू में बीटेक पूरा करने के बाद दोहरी डिग्री का विकल्प चुनते हैं और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में विशेषज्ञता के साथ एमएस की पढ़ाई करते हैं।

इस तथ्य के बावजूद कि यह पेपर वैकल्पिक है, इंजीनियरिंग के छात्र इस संबंध में आतंकवाद और विश्व शक्तियों की भूमिका से निपटना सीखेंगे।

बता दें कि ‘कट्टरपंथी-धार्मिक आतंकवाद और उसके प्रभाव’ शीर्षक वाले नए पाठ्यक्रम के मॉड्यूल में से एक में लिखा है: “कट्टरपंथी धार्मिक-प्रेरित आतंकवाद ने 21 वीं सदी की शुरुआत में आतंकवादी हिंसा को जन्म देने में एक बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रमुख भूमिका निभाई है। कुरान की विकृत व्याख्या के परिणामस्वरूप जिहादी पंथवादी हिंसा का तेजी से प्रसार हुआ है जो आत्मघाती और हत्या के रूपों में आतंक द्वारा मौत का महिमामंडन करती है।”

इसी में आगे कहा गया है, “कट्टरपंथी इस्लामी मजहबी मौलवियों द्वारा साइबर स्पेस के फैलाव के परिणामस्वरूप दुनिया भर में जिहादी आतंकवाद का इलेक्ट्रॉनिक प्रसार हुआ है। जिहादी आतंकवाद के ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक प्रसार के परिणामस्वरूप गैर-इस्लामिक समाजों में भी हिंसा में तेजी आई है जिसके परिणाम स्वरुप जो धर्मनिरपेक्ष हैं, अब वो भी हिंसा की चपेट में हैं और ये तेजी से बढ़ रहा है।”

तालिबान एयर फोर्स के हेलीकॉप्टर से पट्रोलिंग या फाँसी: वायरल वीडियो है लेकिन दिल दहलाने वाला

अफगानिस्तान से एक वीडियो वायरल हो रहा है। तालिबानी शासन में उड़ते हेलीकॉप्टर के वीडियो को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। पहले वीडियो देख लेते हैं।

अब बात इस वीडियो के पीछे किए जा रहे दावों की। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो में हेलीकॉप्टर से लटके शख्स को तालिबानियों द्वारा फाँसी की सजा पाया गया बता रहे हैं।

जो ऐसे दावे कर रहे हैं, देखें उनका क्या कहना है:

इस्लामी अमीरात अफगानिस्तान से ‘आधिकारिक समाचार’ देने (देने का दावा करने वाले) वाले ट्विटर अकाउंट तालिब टाइम्स का हालाँकि कुछ और ही कहना है।

“हमारी वायु सेना! इस्लामी अमीरात के वायु सेना के हेलीकॉप्टर इस समय कंधार शहर के ऊपर से उड़ान भर रहे हैं, शहर में गश्त कर रहे हैं।”

वीडियो को गौर से देखें तो हेलिकॉप्ट UH-60 ब्लैक हॉक प्रतीत होता है। यानी अमेरिकी सैनिक जत्थों का आखिरी विमान जिस दिन अफगानिस्तान छोड़ कर उड़ा, उसी दिन इस्लामी अमीरात अफगानिस्तान ने ‘अपने एयर फोर्स’ को उड़ा कर मंशा जता दी।

ट्विटर पर घिरे अमरिंदर: खट्टर ने गिनाए BJP सरकार के काम, कॉन्ग्रेस सरकार की खेती-किसानी का रिपोर्ट कार्ड भी माँगा

हरियाणा के करनाल में कृषि कानूनों के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन कर रहे ​कथित किसानों पर पुलिस लाठीचार्ज पर सियासत गरमा गई है। इसको लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और उनके हरियाणा के समकक्ष मनोहर लाल खट्टर के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है।

अमरिंदर सिंह ने इस घटना के लिए हरियाणा के सीएम एमएल खट्टर को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की माँग की। उन्होंने कहा कि खट्टर प्रदर्शन कर रहे किसानों से माफी माँगे। सिंह ने पुलिस कार्रवाई को बर्बरतापूर्ण बताते हुए इसे ‘सरकार प्रायोजित हमला’ बताया है। पंजाब के सीएम ने टिप्पणी की, “हमारे अन्नदाता (किसानों) साथ ऐसा बर्ताव नहीं किया जाना चाहिए। खट्टर घायल किसानों को मुआवजा दें।”

सिंह की इस्तीफे की माँग पर जवाब देते हुए खट्टर ने कहा, “पंजाब के मुख्यमंत्री कौन होते हैं मुझसे त्यागपत्र माँगने वाले, बल्कि उन्हें त्यागपत्र दे देना चाहिए। उन्होंने आंदोलन के लिए पंजाब के लोगों को उकसाया है।”

खट्टर ने आगे कहा, “हम हरियाणा में अपने किसानों की देखभाल कर रहे हैं। हरियाणा का कोई भी किसान टिकरी या सिंघु बॉर्डर पर नहीं बैठा है।” खट्टर ने सिंह पर पंजाब के लोगों को उकसाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, “पंजाब में अमरिंदर सिंह किसानों को भड़का रहे हैं। हरियाणा में भूपिंदर सिंह हुड्डा और अन्य कॉन्ग्रेसी नेता उन्हें भड़का रहे हैं। आपको लगता है कि हम नहीं जानते?”

करनाल एसडीएम आयुष सिन्हा की कथित टिप्पणी, जिसने इस विवाद को जन्म दिया उसको लेकर खट्टर ने कहा कि कानून और व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सख्ती बनाए रखना जरूरी है। हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा, “मुझे लोगों के फोन आ रहे हैं कि किसानों से सख्ती से निपटने की जरूरत है, लेकिन हम संयम बरत रहे हैं क्योंकि वे हमारे लोग हैं।”

खट्टर का सवाल, पंजाब सरकार का पर्दाफाश

आरोप-प्रत्यारोप के बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री ने अपने राज्य में किसानों के लिए किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला। अपने ट्वीट्स में पंजाब के सीएम को टैग करते हुए उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) का इस्तेमाल कर एमएसपी पर 10 फसलों की खरीद करता है। उन्होंने सिंह से सवाल किया कि कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार एमएसपी पर कितनी फसल खरीदती है?

खट्टर ने बताया कि जो किसान धान की खेती छोड़ कुछ और करना चाहते हैं उन्हें सरकार 7,000 रुपए प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान करती है। धान की बुआई करने वाले किसान को 5,000 रुपए प्रति एकड़ का प्रोत्साहन देती है। पंजाब अपने किसानों को कितनी प्रोत्साहन रााशि देती है?

एमएल खट्टर का ट्विटर थ्रेड।

खट्टर ने एक ट्वीट में कहा, “हरियाणा पिछले 7 वर्षों से अपने किसानों को गन्ने के लिए देश में सबसे अधिक एमएसपी का भुगतान कर रहा है।” हरियाणा के मुख्यमंत्री ने आगे बागवानी और सिंचाई योजनाओं का उल्लेख करते हुए विभिन्न योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आई-फॉर्म की मँजूरी से 72 घंटे से अधिक भुगतान में देरी होने पर उनकी सरकार किसानों को 12% की दर से ब्याज देती है। उन्होंने पूछा क्या पंजाब की सरकार ऐसा करती है?

खट्टर ने कहा कि हरियाणा सरकार ने किसानों को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए भावांतर भरपाई योजना शुरू की, ताकि उन्हें अपने फल-सब्जियों को कम दामों पर बेचने को मजबूर न होना पड़े। उन्होंने पूछा कि कैप्टन अमरिन्दर की सरकार बागवानी किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए क्या करती है? सिंह के किसान विरोधी आरोप पर करारा जवाब देते हुए हरियाणा के सीएम ने यह पूछकर, “किसान विरोधी कौन है, कैप्टन अमरिंदर जी? पंजाब या हरियाणा?” अपना ट्विटर टैग समाप्त कर दिया।

कॉन्ग्रेस नेता ने की हिन्दू धर्म और महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी, निकाला गया रोष मार्च: पंजाब के वित्त मंत्री भी घेरे में

पंजाब के बठिंडा में कॉन्ग्रेस पार्टी के पार्षद सुखराज औलख ने हिन्दू धर्म के ऊपर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद सही उनका विरोध चालू है। सोमवार (30 अगस्त, 2021) को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर ही हिन्दू संगठनों व कार्यकर्ताओं ने हरि कीर्तन करते हुए कॉन्ग्रेस के पार्षद के खिलाफ आक्रोश जताया। ये मार्च फायर ब्रिगेड चौक से अमरीक सिंह रोड के अन्नपूर्णा मंदिर तक पहुँचा।

साथ ही पोस्ट ऑफिस बाजार के प्राचीन हनुमान मंदिर और सनातन धर्म मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों तक भी ये मार्च गया। इसमें गणमान्य हिन्दुओं के अलावा कई महिलाओं-पुरुषों ने शिरकत की। जन्माष्टमी की झाँकी देखने पहुँचे श्रद्धालुओं ने भी कॉन्ग्रेस के पार्षद के बयान की निंदा की। वीनू गोयल ने इस आंदोलन का नेतृत्व किया। इस रोष मार्च के पीछे का उद्देश्य बताते हुए उन्होंने याद किया कि तरह श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाई थी।

कॉन्ग्रेस के पार्षद पर हिन्दू बहू-बेटियों पर आपत्तिजनक बयान देने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की सरकार के लोगों का विश्वास अब उठ चुका है। साथ ही इस मामले में तुरंत FIR भी दर्ज करने की माँग की। वहीं ‘श्री हिन्दू तख़्त’ के संदीप पाठक ने आरोप लगाया कि राज्य के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल कॉन्ग्रेस पार्षद का बचाव कर रहे हैं। उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस के बॉयकॉट की भी बात कही।

इससे पहले कॉन्ग्रेस पार्षद व पंजाब के वित्त मंत्री के पुतले भी फूँके चुके हैं। उस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सुखपाल सिंह सरां ने आरोप लगाया था कि कॉन्ग्रेस पार्षद सुखराज औलख ने यज्ञ, व जाप के अलावा ब्राह्मण समाज व महिलाओं पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की है। उन्होंने याद किया कि कैसे कॉन्ग्रेस आलाकमान के इशारे पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार मलविंदर मल्ली ने देश के खिलाफ राग अलापा था।

उन्होंने सुखराज औलख का बॉयकॉट करने की बात करते हुए हर कार्यक्रम से उन्हें बहिष्कार किए जाने की बात कही। वहीं ब्राह्मण समाज के नेता आशुतोष तिवारी व नितिन गौड़ ने कहा कि कॉन्ग्रेस की हिन्दुओं के लिए हमेशा हीन भाव की मानसिकता रही है। मेयर रमन गोयल को माँग पत्र भी सौंप कर सुखराज औलख को निगम हाउस से बरखास्त किए जाने की माँग हुई थी। अदालत का दरवाजा खटखटाने की बात भी कही गई है।

900+ फ्लैट, 40 मंजिला ट्विन टावर सुपरटेक को ढहाना होगा… वो भी खुद के पैसे से: SC का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्‍टेट कंपनी सुपरटेक को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने नोएडा स्थित एक हाउजिंग प्रॉजेक्‍ट (सुपरटेक एमरॉल्ड कोर्ट) में कंपनी के दो- 40 मंजिला टावर को गिराने का आदेश दिया है। फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें इन बिल्डिंग्स को अवैध करार दिया गया था। इसके अलावा नोएडा अथॉरिटी को भी अदालत ने फटकार लगाई।

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार (अगस्त 31, 2021) को अपना फैसला सुनाते हुए कहा इन टावरों का निर्माण नोएडा प्राधिकरण और सुपरटेक के अधिकारियों के बीच मिलीभगत का परिणाम था। इससे पहले कोर्ट ने 3 अगस्‍त को पिछली सुनवाई में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। उस समय भी कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी को खूब फटकारा था।

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और एम आर शाह की पीठ ने मामले की सुनवाई में पाया कि अतिरिक्त टावरों का निर्माण जिसमें तकरीबन 1000 फ्लैट बनने थे, वह नियम और कानून के विरुद्ध है। फैसले में ये भी कहा गया है कि ये निर्माण सुपरटेक द्वारा अपनी लागत पर दो माह के भीतर तोड़ा जाना चाहिए।

बेंच ने रियल स्टेट कंपनी को उन सभी लोगों के पैसे लौटाने का निर्देश दिया जिन्होंने इस बिल्डिंग में घर के लिए पेमेंट की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक को इन ट्विन टावरों के सभी फ्लैट मालिकों को 12% ब्याज के साथ रकम वापस करने का आदेश दिया है।

इससे पहले इसी मामले में ऐसा ही फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुनाया था। साल 2014 में कोर्ट ने निर्देश दिया था कि कंपनी घर खरीददारों को सारा पैसा वापस दे जिन्होंने नोएडा के सेक्टर 93ए में एमरॉल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के लिए पहले से बुकिंग कराई है।

हाई कोर्ट के इसी फैसले के बाद कंपनी ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जिसके कारण आदेश पर स्टे लग गया, लेकिन घर खरीददारों का पैसा वापस करने का निर्देश बरकरार रहा। जब मामला सर्वोच्च न्यायालय में चल रहा था उस समय नोएडा अथॉरिटी ने कहा कि पूरा निर्माण स्वीकृत योजना के तहत हो रहा है, इसमें कोई अवैधता नहीं है। जबकि एम्रॉल्ड कोर्ट ओनर आरडब्लूए की ओर से कहा गया कि दो टावरों का बनना पूर्णत: यूपी अपार्टमेंट एक्ट का उल्लंघन हैं। इसके लिए प्लॉन चेंज करने से पहले कोई अप्रूवल भी नहीं लिया गया।

कोर्ट ने अपने जजमेंट में आरडब्लूए की इस याचिका पर संज्ञान लिया और नोएडा व बिल्डर के पक्ष को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अथॉरिटी को फटकारा और कहा कि उनकी और बिल्डर्स की मिलीभगत से ये अवैध निर्माण हुआ। मालूम हो कि सुपरटेक के दोनों टावरों में 950 से ज्‍यादा फ्लैट्स बनाए जाने थे। 32 फ्लोर का कंस्‍ट्रक्‍शन पूरा हो चुका था जब एमरॉल्‍ड कोर्ट हाउजिंग सोसायटी के लोगों की याचिका पर टावर ढहाने का आदेश आया। जानकारी के मुताबिक, 633 लोगों ने फ्लैट बुक कराए थे जिनमें से 248 रिफंड ले चुके हैं, 133 दूसरे प्रॉजेक्‍ट्स में शिफ्ट हो गए, लेकिन 252 ने अब भी निवेश कर रखा है।

हरियाणा का 17 साल का टेनिस खिलाड़ी, कोचिंग के नाम पर राजस्थान में हनीट्रैप: 3 साल में लाखों ऐंठे, ब्लैकमेल करने वालों में पत्रकार भी

हरियाणा के एक खिलाड़ी के साथ राजस्थान में हनीट्रैप का मामला सामने आया है। पीड़ित लॉन टेनिस का अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी है और उसकी उम्र मह​ज 17 साल है। हनीट्रैप में फँसाकर उससे लाखों रुपए ऐंठने की बात भी सामने आई है। खबरों के अनुसार पीड़ित खिलाड़ी को कोचिंग के नाम पर जयपुर बुलाकर एक होटल में ठहराया गया। यहॉं रवीना नाम की युवती ने उससे शारीरिक संबंध बनाए और वीडियो बना ली। इसके बाद युवती और उसका पत्रकार ब्लैकमेल कर तीन साल से खिलाड़ी से वसूली कर रहे थे।

लंबे समय से चली ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर खिलाड़ी ने इस बारे में अपने परिजनों को बताया, तब जाकर यह मामला सामने आया। खिलाड़ी की माँ ने जयपुर के अशोक नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के मुताबिक, 23 जून 2018 को करनाल में लॉन चैंपियनशिप के दौरान उनके बेटे की मुलाकात एक युवती से हुई थी। उसने उसके बेटे के खेल की तारीफ की। उन्होंने बताया कि रवीना नाम की युवती ने उनके बेटे को अपना मोबाइल नंबर दिया और जयपुर में आकर कोचिंग के जरिए अच्छा पैसा कमाने का झाँसा दिया।

खिलाड़ी की माँ ने बताया है कि जब उनका लड़का जयपुर पहुँचा तो होटल के कमरे में युवती ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और उसके दोस्तों ने इसका वीडियो बना लिया। शिकायत में खिलाड़ी की माँ ने ​बताया कि आरोपित इसके बाद से उसके बेटे को ब्लैकमेल करते आ रहे थे। वे उसे दुष्कर्म के मामले में फँसाने और उसका वीडियो वायरल करने की धमकियाँ देते थे। करण तिवारी खुद को न्यूज चैनल का पत्रकार बताकर धमकाता था। पीड़ित ने धमकियों से डरकर आरोपितों के अलग-अलग अकाउंट में पैसे जमा कराए।

उन्होंने आगे बताया कि 23 जुलाई को आरोपितों ने खिलाड़ी को फिर धमकाया और उससे 10 लाख रुपए माँगे। तब जाकर पीड़ित ने परिवार वालों को इसकी जानकारी दी। पीड़ित की माँ ने रविवार (29 अगस्त) रात जयपुर के अशोक नगर पहुँचकर केस दर्ज कराया। उन्होंने पुलिस को ब्लैकमेलिंग के कई सबूत भी सौंपे हैं।

माँ की शिकायत पर पुलिस ने इस मामले में पत्रकार करण तिवारी, उसकी महिला मित्र रवीना और दो अन्य युवतियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। वहीं, एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में इस मामले में पत्रकार, 4 महिलाओं समेत 1 अन्य व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

J&K से 60 लड़के गायब, तालिबान शासन से ऐसे बढ़ रही भारत की सुरक्षा चिंता- सीमा-पार 300 आतंकी सक्रिय: रिपोर्ट्स

डिस्क्लेमर: जम्मू कश्मीर पुलिस ने आज (1 सितम्बर, 2021) को जारी अपने बयान में घाटी से 60 लड़कों के गायब होने की खबर को भ्रामक और झूठा बताते हुए ख़ारिज कर दिया है। तो नई सूचनाओं के आधार पर यहाँ डिस्क्लेमर देते हुए हम एक दूसरी रिपोर्ट में पूरी बात रख रहे हैं।

अफगानिस्तान में तालिबानी शासन के आने और वहाँ से अमेरिकी सैनिकों के जाने का असर जम्‍मू-कश्‍मीर में भी दिखने लगा है। घाटी में छिपे हुए आतंकियों के सक्रिय होने से भारत की सुरक्षा चिंता बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, खुफिया एजेंसियों का कहना है कि कम से कम 6 आतंकियों के समूहों ने बड़े टारगेट को ध्‍यान में रखते हुए जम्‍मू-कश्‍मीर में घुसपैठ की है। ऐसा बताया जा रहा है इन आतंकियों के निशाने पर कुछ बड़े प्रतिष्ठान या लोग हो सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक 25 से 30 आतंकी ऐसे हैं, जिनकी पड़ताल खुफिया एजेंसियाँ कर रही हैं। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर घाटी से 60 लड़कों के गायब होने से भी सुरक्षा एजेंसियाँ चौकन्ना हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ये लोग बीते कुछ महीनों में ही गायब हुए हैं और इन्हें लेकर यह आशंका जताई जा रही है कि ये किसी आतंकी संगठन या फिर तालिबान से ही जुड़ गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने बताया जमीनी स्‍तर के सबूतों पर अगर ध्‍यान दें तो पता चलता है कि अफगानिस्तान में तालिबान के आने के बाद जम्‍मू-कश्‍मीर में पिछले एक महीने में ही हिंसा की घटनाओं में अचानक से बढ़ोतरी हुई है।

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, “बीते एक महीने से हर दिन कोई न कोई हमला होता है। चाहे यह अटैक सिक्योरिटी फोर्सेज पर हो या फिर राजनीतिक नेताओं पर हो रहा हो।” पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन लॉन्‍च पैड में भी आतंकी गतिविधियाँ बढ़ी हैं, जहाँ फरवरी में हुए सीजफायर के बाद से ऐसी कोई हलचल नहीं थीं। सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि कम से कम 300 आतंकियों ने एक बार फिर से लाइन ऑफ कंट्रोल के आसपास के कैंपों में डेरा जमा लिया है। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इसे लेकर सुरक्षाबल पूरी तरह मुस्‍तैद हैं।

NDTV के अनुसार, कश्मीर के टॉप पुलिस अधिकारी विजय कुमार ने मीडिया को बताया कि पिछले कुछ महीनों में जम्‍मू कश्मीर में कम से कम 60 युवा अपने घरों से बहाने करके निकले और लापता हो गए हैं। ये लोग यह कहकर गए थे कि वे किसी काम से बाहर जा रहे हैं, लेकिन अब गायब है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह बड़ी चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि हम जम्मू-कश्मीर के सभी मिसगाइडेड युवाओं से अपील कर रहे हैं कि वे हिंसा छोड़ें और मुख्यधारा में वापसी करें।

गौरतलब है कि बीते करीब दो सप्ताह से तालिबान को बधाईयाँ देने वाले और तालिबान के जीत का जश्न मनाने वाले संदेश भी सोशल मीडिया पर देखे जा रहे हैं। इससे भी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियाँ चौकन्ना हैं। जम्मू-कश्मीर में बीते 15 दिनों में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा करीब 10 अलर्ट जारी किए जा चुके हैं। मालूम हो कि 15 अगस्त 2021 को तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा जमाया था। उसके बाद से ही यह माना जा रहा है कि तालिबान का समर्थन करने वाले और भारत पर निशाना साधने वाले लोग एक बार फिर से सक्रिय हो गए हैं।

बता दें कि हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो से जम्मू-कश्मीर का पाक अधिकृत हिस्सा फिर से चर्चा में आ गया है। इस वीडियो में तालिबान के साथ लड़ने के लिए अफगानिस्तान गए कुछ आतंकी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर वापस आ गए हैं। वीडियो से पता चलता है कि पीओके में उनका हीरो जैसा स्वागत हुआ। सुरक्षा एजेंसियाँ इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलर्ट हैं, वे लगातार सोशल मीडिया देख रहे हैं ताकि ऐसे वीडियो पर नजर रख सकें। ये वीडियो क्लिप भी कश्मीरी लड़कों को आतंक का रास्ता अपनाने को प्रेरित करते हैं।