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‘मिस इंडिया यूनिवर्स’ बताने वाली मॉडल का पोर्न वीडियो: राज कुंद्रा केस से कनेक्शन, आलिसा खान और मोनू खान गिरफ्तार

अश्लील वीडियोज बनाने के मामले में फँसे राज कुंद्रा के केस में अब मॉडल परी उर्फ प्रियंका पासवान ने अपना बयान दिया है। धनबाद की रहने वाली मॉडल ने मुंबई की एक प्रोडक्शन कंपनी पर गंभीर आरोप मढ़े हैं। उनका कहना है कि एक प्रोडक्शन कंपनी ने उनके साथ भी गंदा काम किया था। हालाँकि वो ये नहीं जानतीं कि कंपनी किसकी है

राज कुंद्रा केस में पोर्न फिल्म में काम करने के सवाल पर परी पासवान का कहना है कि अपने मॉडलिंग के दिनों में वह काम ढूँढने मुंबई गईं थी और उसी दौरान उनके साथ अश्लील घटना हुई। परी के अनुसार, “मैं काम ढूँढने मुंबई गई थी, जहाँ मुझे कोल्ड ड्रिंक में नशा मिलाकर पिलाया गया और मेरा पोर्न वीडियो बनाया गया। जब मुझे इसकी जानकारी हुई तो मैंने मुंबई पुलिस में जाकर शिकायत की। अब पूरा मामला मुंबई पुलिस में चल रहा है।”

उल्लेखनीय है कि प्रोडक्शन कंपनी पर आरोप मढ़ने से पहले अपने आप को मिस इंडिया यूनिवर्स का खिताब जीत चुकी बताने वाली परी पासवान अपने पति पर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाने के कारण चर्चा में आई थीं। कुछ समय पहले ही धनबाद के कतरास थाने में पुलिस ने उनकी शिकायत पर उनके पति नीरज पासवान को गिरफ्तार करके जेल भेजा था। पति के अलावा इस केस में उन्होंने अपने जेठ चंदन और सास आशा देवी पर भी आरोप लगाया था।

बता दें कि झारखंड की गुमला की रहने वाली मॉडल परी ने कुछ समय पहले ही कतरास निवासी नीरज पासवान से शादी की थी। मगर, अभी दहेज प्रताड़ना के आरोप में उनके पति जेल में हैं। उनके ससुराल वालों का कहना है कि जैसे ही उन्हें इस बात की जानकारी हुई कि परी पोर्न वीडियो बनाती हैं उन्होंने तुरंत ही शादी से इंकार कर दिया लेकिन परी ने डरा धमका कर उनके बेटे से शादी की।

परी के ससुराल वाले आरोप लगा रहे हैं कि परी ने नीरज से पहले भी दो लोगों की जिंदगी बर्बाद की थी। वह महिला होने का नाजायज फायदा उठाती हैं। उसके शादी से पहले बच्चे थे। ऐसे मे जब नीरज ने शादी से मना किया तो उसने यौन शोषण का केस करने की धमकी दी। ससुरालवालों के अनुसार परी पासवान, राज कुंद्रा के साथ मिलकर पोर्न वीडियो बनाने का काम भी करती थी जिसका कई वीडियो हॉट हिट इंडियन कॉन्टेंट वीडियो के साइड में मौजूद है।

वहीं, परी पासवान ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि ये सब उनके ससुराल वालों की साजिश है। वह कहती हैं कि चूँकि उन्होंने अपने ससुराल वालों के ख़िलाफ़ शिकायत लिखवाई है इसलिए अब वह लोग उन्हें बेवजह बदनाम करने में लगे हैं।

उनके अनुसार, 26 मई 2021 को नीरज से उनकी शादी सबकी रजामंदी से हुई थी। दोनों एक दूसरे को साल 2019 से जानते थे। शादी के बाद नीरज के घरवालों ने दहेज के तौर पर 5 लाख रुपए व एक गाड़ी की माँग की। इसके अलावा 16 जुलाई को ससुराल वालों ने उनसे मारपीट की। इसी के बाद उन्होंने कतरास थाने में शिकायत दी और पुलिस ने कार्रवाई में नीरज को पकड़ा।

वह कहती हैं कि मुंबई में एक गिरोह है जो लड़कियों को धोखे में रखकर वीडियो बनाता है और बाद में वायरल करता है। वह उस मामले की पीड़िता हैं। उन्होंने इस संबंध में गिरोह के सदस्यों के खिलाफ़ मालवानी थाने में शिकायत कराई हुई है। मामले में दो लोगों (आलिसा खान और मोनू खान) की गिरफ्तारी भी हुई। अभी दोनों जमानत पर बाहर हैं।

‘गौमाता को बेघर नहीं देख सकता, कॉन्ग्रेस MLA दे रहा मंदिर तोड़ने की धमकी’: गौशाला संचालक ने लाइव आकर की आत्महत्या

पंजाब के जालंधर स्थित लांबड़ा में एक गौशाला संचालक ने फेसबुक पर लाइव आकर ज़हर पी लिया। इस घटना में 50 वर्षीय धर्मवीर बख्शी की मौत हो गई। वो कई वर्षों से इस गौशाला की सेवा कर रहे थे। सोमवार (30 अगस्त, 2021) को किए गए फेसबुक लाइव में उन्होंने कॉन्ग्रेस विधायक सुरेंद्र चौधरी के अलावा अधिकारी पुष्प बाली, संजीव काला, गौतम मोहन और श्रीराम काला पर गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने इन लोगों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए फेसबुक लाइव वीडियो में ही ज़हर पी लिया था। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ मंगलवार सुबह साढ़े 7 बजे उनकी मौत हो गई। धर्मवीर बख्शी में लाइव वीडियो में आरोप लगाया था कि उन्हें गौशाला व हनुमान मंदिर तोड़ने के लिए लगातार धमकियाँ दी जा रही हैं। उन्होंने कहा था कि इन धमकियों से वो दुःखी हैं।

SSP नवीन सिंगला ने इस मामले की जाँच के आदेश दिए हैं। जालंधर देहात की पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है। मृतक के भाई व भाजपा नेता मनदीप बख्शी ने कहा कि उनके भाई पिछले 10 वर्षों से इन धमकियों से परेशान थे। धर्मवीर बख्शी ने लाइव वीडियो में भी कहा था कि कॉन्ग्रेस सरकार उन्हें परेशान कर रही है। उन्होंने पुष्प बाली नामक पुलिस अधिकारी का नाम लेते हुए कहा था कि वो ‘गुंडा’ है और लोगों को बिना शिकायत परेशान करता रहता है।

उन्होंने कॉन्ग्रेस विधायक समेत इन लोगों के नाम लेते हुए कहा था कि मेरी मौत होती है तो इसके लिए यही जिम्मेदार होंगे। उन्होंने कहा था कि वो गौशाला चलाते हैं, कोई अफीम नहीं बेचते, लेकिन पुष्प बाली जब भी आता है तो उन्हें दो डंडे लगा कर चला जाता है। उन्होंने सुरेंद्र चौधरी पर भी लोगों को उठवाने के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था, “मैं गौमाता से प्यार करता हूँ। इसीलिए, अपनी आँखों से उन्हें बेघर होते नहीं देख सकता।”

लाइव वीडियो में धर्मवीर बख्शी ने पिया ज़हर

इन्हीं मुद्दों को आत्महत्या का कारण बताते हुए उन्होंने अंत में ‘जय माता दी’ और ‘आखिरी सलाम’ बोलते हुए ज़हर पी लिया। धर्मवीर ने ये भी कहा कि उन्होंने अपनी जेब से पैसे लगाकर गोशाला को बनवाया है और लोग उसे तोड़ने की धमकी दे रहे हैं। बता दें कि सुरेंद्र सिंह चौधरी करतारपुर से कॉन्ग्रेस के विधायक हैं। उनकी स्थिति गंभीर होने के कारण पुलिस उनका बयान भी दर्ज नहीं कर पाई थी।

आदिवासियों के थे ‘भगवान’, महल पर कॉन्ग्रेस सरकार ने करवाई फायरिंग और बस्तर में जमे नक्सली: चर्चा में ‘आइ प्रवीर द आदिवासी गॉड’

इक्कीसवीं सदी में यदि कोई समाज लोकतंत्र की अपेक्षा राजतन्त्र पर अधिक विश्वास करे तो उस समाज के बारे में कैसी धारणा बनेगी? शायद उसे पिछड़ा कहा जाए या फिर यह कहा जाए कि उसे वर्तमान विश्व और वैश्विक राजनीतिक व्यवस्था की समझ नहीं है। पर ऐसा एक समाज है और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में है। यह समाज बस्तर के भूतपूर्व राजा प्रवीर चंद्र भंजदेव का समाज है जो अपने राजा को न केवल अपना भगवान मानता है, बल्कि उसे यह विश्वास भी है कि यदि 1966 में उनकी हत्या न हुई होती तो बस्तर की सामाजिक व्यवस्था, आर्थिक विकास और राजनीतिक इतिहास कुछ और होता। बस्तर तब नक्सली आंदोलन का शिकार न होता और न ही जिले के प्राकृतिक संसाधनों का निर्दयता के साथ दोहन होता।

फिल्मकार विवेक कुमार की शॉर्ट फिल्म ‘आइ प्रवीर द आदिवासी गॉड (I Pravir the Adivasi God)’ हमें बस्तर के भूतपूर्व राजा प्रवीर चंद्र भंजदेव के बारे में बताती है, जिनकी 1966 में पुलिस फायरिंग में मृत्यु हो गई थी। वे अपनी प्रजा के लिए तब की सरकार से लड़ रहे थे। यह राजा और उनकी प्रजा के बीच के रिश्तों के बारे में भी बताती है। प्रवीर चंद्र भंजदेव काकातिया राजघराने की ही एक शाखा के राजा थे, जिन्हें बस्तर के आदिवासी आज भी पूजते हैं और ऐसा मानते हैं कि बस्तर जो भी है उन्हीं के कारण है। फिल्म में आज के बस्तर के आदिवासी अपने राजा को याद करते हुए यहाँ तक कहते हैं कि आज भले ही देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था है पर राजा अपने लोगों और उनकी आकांक्षाओं को अधिक समझते थे। 

फिल्म बस्तर के ऐसे लोगों से मिलाती है जो यह मानते हैं कि भले ही लोकतांत्रिक व्यवस्था में विकास हुआ है पर उसका जितना फायदा आदिवासियों को होना चाहिए उतना नहीं हुआ। राजा आदिवासियों के हितों के बारे में अधिक सोचते और समझते थे। यही कारण है कि आदिवासियों के घरों में आज भी राजा प्रवीर चंद्र की फोटो पाई जाती है और ये आदिवासी उनकी पूजा करते हैं। पाँच दशक बीत जाने के बाद भी प्रजा के मन में अपने राजा के लिए जो आदर है वह राजा प्रवीर चंद्र के बारे में बहुत कुछ बताता है। इन स्थानीय आदिवासियों का तो यह मानना है कि यदि पुलिस फायरिंग में उनकी मृत्यु न हुई होती तो बस्तर में नक्सली संघर्ष की शुरुआत नहीं होती। 

राजा प्रवीर चंद्र भंजदेव अविभाजित मध्य प्रदेश में जगदलपुर से विधायक भी थे। वे आदिवासियों के हितों को लेकर मुखर भी थे और उनका यह मानना था कि जिले के प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय आदिवासियों का हक़ सबसे अधिक है। आदिवासियों के इन्हीं हितों के लिए वे तत्कालीन सरकार के विरुद्ध खड़े हुए थे। तत्कालीन सरकार के साथ अपनी लड़ाई के दौरान ही 25 मार्च 1966 की रात पुलिस फायरिंग में उनके ही महल में उनकी मृत्य हो गई थी। साथ ही उनके सात समर्थकों की मृत देह मिली थी। इस घटना की एक सदस्यीय जाँच में प्रशासन की आलोचना तो की गई पर घटना के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सका था। अविभाजित मध्य प्रदेश में जब यह घटना हुई थी तब द्वारका प्रसाद मिश्र के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार चल रही थी।

‘आइ प्रवीर द आदिवासी गॉड’ का ट्रेलर

ये बातें तो इस शॉर्ट फिल्म का हिस्सा हैं जिसमें प्रमुख रूप से एक राजा और उसकी प्रजा, समर्थकों और समाज के बीच के संबंधों को देखने का प्रयास किया गया है पर यदि इस फिल्म से हटकर भी देखा जाए तो पुलिस फायरिंग में राजा प्रवीर चंद्र भंजदेव की मृत्यु के पाँच दशक पश्चात आज जब बात होती है तो यही कहा जाता है कि यदि ऐसा न हुआ होता तो नक्सलवाद शायद बस्तर में इस तरह से न पनपता। इस धारणा को अनुमान बताकर भले नकारा जा सकता है पर ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो बात गलत नहीं लगती। 

बस्तर में हुई इस घटना की एक पृष्ठभूमि है। 1961 में भी जब प्रवीर चंद्र भंजदेव आदिवासियों और समर्थकों की अगुवाई में स्थानीय हितों को लेकर सरकार का विरोध कर रहे थे तब भी तत्कालीन सरकार ने उसे रोकने के लिए पुलिस फायरिंग का सहारा लिया था और उसमें उनके 12 समर्थकों की मृत्यु हो गई थी। इसके साथ ही राजा प्रवीर चंद्र भंजदेव को गिरफ्तार कर लिया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री कैलाश काटजू (जगप्रसिद्ध जस्टिस मार्कंडेय काटजू के दादा जी ) ने जाँच की माँग ठुकरा दी थी। बस्तर में हुई इस पुलिस फायरिंग का जिक्र कई जगह मिलता है, क्योंकि घटना को लेकर तब के पत्रकार ही नहीं बल्कि साहित्यकारों ने भी लिखा है। 

हाँ, उस प्रशासनिक कार्रवाई या पुलिस फायरिंग के बारे में बहुत अधिक चर्चा नहीं होती जिसमें राजा प्रवीर चंद्र भंजदेव की मृत्यु हुई थी। तत्कालीन सरकार या प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात पर बहुत कुछ कहा या लिखा हुआ नहीं मिलता। तत्कालीन विपक्ष द्वारा तीव्र विरोध की बात अवश्य मिलती है। घटना के बाद संसद में विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा दिए गए भाषण में पुलिस को जिम्मेदार ठहराने की बात सामने आती है। उसके साथ ही ऐतिहासिक तथ्य यह बताते हैं कि राजा प्रवीर चंद्र भंजदेव का अंतिम संस्कार बिना उनके परिवार की उपस्थिति के ही कर दिया गया और परिवार को केवल उनके कपड़े थमा दिए गए थे। प्रशासन ने दिल्ली से उनकी धर्मपत्नी की वापसी तक भी इंतज़ार करना उचित नहीं समझा था। यह एक ऐसी बात है जिसका मलाल आज भी वहाँ के आदिवासियों में पाया जाता है। 

यह अनुमान का विषय रहेगा कि पुलिस फायरिंग में राजा प्रवीर चंद्र भंजदेव की मृत्यु न हुई होती तो बस्तर कैसा होता। पर यह ऐतिहासिक घटना बताती है कि केंद्र या राज्य स्तर पर तत्कालीन कॉन्ग्रेस पार्टी का नेतृत्व कैसा था तथा शासन, प्रशासन और समस्याओं को लेकर पार्टी का दृष्टिकोण क्या रहा होगा। लोकतान्त्रिक प्रक्रियाओं को आगे रखकर राजनीति करने वाले पार्टी का लोकतंत्र में विश्वास किस स्तर का था या आज है, वह काफी हद तक देश के सामने है। इसलिए आवश्यकता है कि समय -समय पर ऐसी ऐतिहासिक तथ्यों और घटनाओं पर बात हो जिनके बारे में चर्चा की कमी दिखाई देती रही है।

‘मुहम्मद के कार्टून दिखाओ, मस्जिदों को ध्वस्त करो’ – इस्लाम को ‘राक्षस’ बताने वाले डच MP फिर से चर्चा में

नीदरलैंड्स के कारोबारी व राजनीतिज्ञ ग्रीट विल्डर्स का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने इस्लाम के लिए ‘Monster (दैत्य)’ शब्द का प्रयोग किया था। उन्होंने कहा था कि ये कुछेक सड़े हुए सेबों की बात नहीं है, जिनके कारण पूरा इस्लाम बदनाम है। ग्रीट विल्डर्सने नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री को भी चेताया था कि वो एक बेतुकी ‘परीकथा’ बेचना बंद करें। उन्होंने जुलाई 2016 को ये बयान दिया था।

डच कारोबारी व नेता ने कहा था कि बात कुछ लोगों की नहीं है, बल्कि 9 लाख में से 7 लाख मुस्लिम ऐसे हैं जो ‘फ्री सोसाइटी’ की देश की अवधारणा को नकारते हैं। उन्होंने नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री पर तब आरोप लगाए थे कि उन्होंने इस्लाम नाम के एक ‘मॉन्स्टर’ को आयात किया है, जिससे देश में खतरे का माहौल पैदा हो गया है। बकौल ग्रीट विल्डर्स, वो लाखों बार कह चुके हैं कि आधिकारिक रूप से इस्लाम को एक ‘हिंसक समाज’ घोषित किया जाए।

संसद में दिए गए इस भाषण में 22 सांसदों वाली ‘पार्टी फॉर फ्रीडम’ के मुखिया ग्रीट विल्डर्स ने आगे कहा था कि कैबिनेट इस्लाम को प्रतिबंधित करे, क्योंकि घृणा और आतंकवाद का नीदरलैंड्स में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने मुस्लिम देशों से आने वाले शरणार्थियों के लिए देश की सीमाएँ पूर्ण रूप से बंद करने की भी अपील की थी। साथ ही माँग की थी कि ‘ओपन बॉर्डर्स ट्रीटी’ से पीछे हटा जाए।

उन्होंने सीमा पर सुरक्षा कड़ी करने की माँग करते हुए कहा था कि इस्लाम से जुड़े सभी संस्थानों को भंग कर दिया जाना चाहिए। उदाहरण देते हुए उन्होंने सभी मस्जिदों को ध्वस्त करने की माँग की थी, खासकर उन्हें जिन्हें विदेश से फंडिंग मिल रही हो। उन्होंने दावा किया था कि ऐसी मस्जिदों के कारण ही देश में नियम-कानून हम नहीं, बल्कि तुर्की का मजहबी मंत्रालय बनाता है। साथ ही उन्होंने हिंसा करने वालों को जेल में बंद करने या उन्हें प्रत्यर्पित कर देने का सुझाव दिया था।

पिछले 23 सालों से लगातार सांसद बन रहे गीर्ट विल्डर्स ने कहा था, “नीदरलैंड में जिहादी आंदोलनों को अंजाम देने वाले सैकड़ों लोगों और उनके साथ सहानुभूति जताने वाले हजारों को पकड़ा जाना चाहिए। ज़रूरी पड़े तो उन्हें हमेशा के लिए जेल होना चाहिए। सभी स्कूलों, अख़बारों और मीडिया को आदेश दिया जाना चाहिए कि वो पैगंबर मुहम्मद के कार्टून दिखाएँ – किसी को भड़काने के लिए नहीं, ये दिखाने के लिए कि हम धमकियों व हिंसा के सामने झुक नहीं सकते। हम अपनी स्वतंत्रता का गर्व से समर्थन करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा था, “मैं पूरे नीदरलैंड्स के मुस्लिमों को एक संदेश देना चाहता हूँ। जो हमारे लोकतंत्र, हमारी स्वतंत्रता व हमारे मूल्यों का सम्मान नहीं करेगा, जो लोग सेक्युलर कानून के ऊपर कुरान को महत्ता देते हैं.. उनकी संख्या लाखों में हैं, रिसर्च के मुताबिक 7 लाख। मेरा उन्हें एक ही संदेश है – बाहर निकलो। भागो। किसी इस्लामी मुल्क में जाओ। वहाँ आपलोग अपने इस्लामी कानून का आनंद लो। ये हमारा देश है, तुम्हारा नहीं।”

ग्रीट विल्डर्स ने जब जुलाई 2016 में ये बयान दिया था, जब पूरे यूरोप में सीरिया के शरणार्थियों का मुद्दा गरमाया हुआ था। जर्मनी में सीरिया के ही एक शरणार्थी ने ISIS के नाम पर आत्मघाती हमला किया था, जिसमें 15 लोग घायल हुए थे। तब उन्होंने जर्मनी की चांसलर एंजेला मोर्केल व नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री मार्क रुट्टे पर आरोप लगाया था कि उन्होंने यूरोप की सीमाएँ खोल दी हैं। उन्होंने आतंकी घटनाओं के मद्देनजर ये बात कही थी।

ग्रीट विल्डर्स का वो वीडियो फिर से चर्चा में आ गया है। अफगानिस्तान में तालिबान शासन के बाद वहाँ से भाग रहे शरणार्थियों को जगह देने/पड़ोसी देशों के बॉर्डर खोलने वाले तर्कों की खबरों के कारण शायद ऐसा हुआ हो।

लड़के-लड़कियों के साथ पढ़ने से अनैतिकता… गैर-मुस्लिम अपनी बेटियों को दूर रखें सह-शिक्षा से: जमीयत वाले मदनी

  • लड़कियों के लिए अलग स्कूल और कॉलेज होने चाहिए।
  • अनैतिकता से दूर रखने के लिए गैर-मुस्लिमों को अपनी बेटियों को सह-शिक्षा (लड़के-लड़कियों की एक साथ पढ़ाई) देने से बचना चाहिए।
  • लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग स्कूल बनाने में प्रभावशाली और धनी लोग मदद करें।
  • मुसलमान अपने बच्चों को किसी भी कीमत पर उच्च शिक्षा दें… लेकिन धार्मिक माहौल में।

ये 4 पॉइंट पढ़िए। कल वाली अफगानिस्तान-तालिबान वाली खबर है? नहीं। खबर भारत से है। यहाँ के मुस्लिमों की एक प्रमुख संस्था की ओर से आए हैं ये सारे सलाह। जमीयत उलेमा-ए-हिंद – ये इस संस्था का नाम है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सोमवार (30 अगस्त 2021) को एक मीटिंग की। इसमें समाज में कैसे सुधार हो, इसके तरीकों पर चर्चा की गई। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने इस संस्था की कार्यसमिति की बैठक में गहन चर्चा के बाद ऊपर के 4 पॉइंट दिए।

अपनी बेटियों (मुस्लिम की बेटियों) को अनैतिकता और दुर्व्यवहार से दूर रखने के लिए लड़के और लड़कियों के अलग-अलग स्कूल-कॉलेज की वकालत जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने की है। एक कदम आगे बढ़ते हुए गैर-मुस्लिमों से भी इस संस्था ने लड़के-लड़कियों के लिए अलग शिक्षण संस्थान का तर्क दिया। इनका कहना है कि गैर-मुस्लिम अपनी बेटियों को ‘अनैतिकता और दुर्व्यवहार से दूर रखने’ के लिए सह-शिक्षा वाले स्कूल या कॉलेजों में न भेजें।

इनके अनुसार:

“अनैतिकता और अश्लीलता किसी धर्म की शिक्षा नहीं है। दुनिया के हर धर्म में इसकी निंदा की गई है क्योंकि यही चीजें हैं, जो समाज में दुर्व्यवहार फैलाती हैं। इसलिए, हम अपने गैर-मुस्लिम भाइयों को भी सह-शिक्षा देने से परहेज करने के लिए कहेंगे।”

जमीयत उलेमा-ए-हिंद = तालिबान

क्यों? क्योंकि जिस सोमवार को जमीयत उलेमा-ए-हिंद मीटिंग करके लड़के-लड़कियों के लिए अलग शिक्षा की बात कर रहा था, ठीक उसी दिन पड़ोसी देश अफगानिस्तान से एक खबर आती है – लड़की को लड़कों के साथ पढ़ने की आजादी नहीं। सह-शिक्षा सिस्टम जारी रखने पर को कोई तर्क नहीं, न ही कोई विकल्प।

स्पष्ट है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद नाम की संस्था तालिबान के समानांतर सोच रखती है। और इसके अध्यक्ष अरशद मदनी? इनकी सोच एक क्रिकेटर से मिलती है। शाहिद अफरीदी नाम का यह क्रिकेटर पहले क्रिकेट खेलता है, अब धर्म (सिर्फ इस्लाम) से खेलता है। इस क्रिकेटर ने भी लड़के-लड़कियों की पढ़ाई, खेलकूद को लेकर तालिबानी परिभाषा दी है।

कौन है जमीयत उलेमा-ए-हिन्द?

उतर प्रदेश आतंकवाद रोधी दस्ता ने दो मुस्लिम युवकों को आतंकवाद के आरोप में गिरफ़्तार किया था। दोनों पर अलकायदा की शाखा ‘अंसार ग़ज़वतुल हिन्द’ से जुड़े होने के आरोप थे। जमीयत उलेमा-ए-हिंद वो संस्था है, जिसने इन दोनों के परिवारों को कानूनी सहायता देने का निर्णय किया था। उस निर्णय के पहले भी कुछ इसी तरह की कार्यसमिति की बैठक की गई थी।

कमलेश तिवारी हत्याकांड को याद कीजिए। जमीयत उलेमा-ए-हिंद वो संस्था है, जो इस हत्याकांड के 5 आरोपितों को बचाने में भी कूद गया था। तब इस संस्था ने कहा था कि जो भी कानूनी खर्च आएगा, उसे वो वहन करेंगे।

‘घंटों बैठे रहते हैं पर प्रसाद नहीं लेते, टीका नहीं लगाते’: विश्वनाथ मंदिर में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित वाला साइनबोर्ड

उत्तराखंड के गुप्तकाशी स्थित विश्वनाथ मंदिर में हाल ही में अन्नकूट मेला संपन्न हुआ है। अब इस मंदिर के बाहर लगा एक साइनबोर्ड चर्चा में है। इस पर लिखा है- मंदिर परिसर में गैर हिन्दू प्रवेश वर्जित है।

ईटीवी भारत की रिपोर्ट के अनुसार अन्नकूट मेले के दौरान मंदिर आने वाले गैर हिंदुओं के व्यवहार को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। इसके अनुसार गैर हिंदू मंदिर में आकर घंटों बैठे रहते थे, लेकिन प्रसाद लेने और टीका लगाने से इनकार कर देते थे। इसे देखते हुए स्थानीय लोगों ने इनके बहिष्कार का फैसला किया है।

रिपोर्ट में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के जिलाध्यक्ष श्रीराम गोस्वामी के ​हवाले से बताया गया है कि गैर हिंदू मंदिर आकर माहौल भी बिगाड़ रहे थे। मंदिर में आने वाली महिलाओं और लड़कियों पर कमेंट करते थे। यहाँ तक कि हिंदुओं की भावना को ठेस पहुँचाने के लिए शौच के बाद शीतल कुंड में हाथ धो लेते थे।

गोस्वामी गौ सेवा रक्षक के जनपद प्रभारी भी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि गैर हिंदुओं के लिए मंदिर के बाहर जल्द पेयजल की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही मंदिर के बाहर बोर्ड लगाने के लिए देवस्थानम बोर्ड से जल्द अनुमति लेने की बात भी उन्होंने कही है।

उल्लेखनीय है कि इसी साल मार्च में उत्तराखंड के कई मंदिरों के बाहर बैनर लगाकर गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित होने की बात कही गई थी। हिंदू युवा वाहिनी की ओर से राज्य के करीब 150 मंदिरों के प्रवेश द्वार पर ऐसे बैनर लगाए गए थे। देहरादून के चकराता रोड, सुद्धोवाला और प्रेम नगर इलाकों में स्थित मंदिरों पर ये बैनर लगे थे। बाद में इसको लेकर हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश (उत्तराखंड) महासचिव जीतू रंधावा के खिलाफ देहरादून में एफआईआर भी दर्ज की गई थी।

उस समय रंधावा ने कहा था कि पुलिस ने उन्हें शहर में ऐसे पोस्टर न लगाने की चेतावनी दी है। साथ ही उन्होंने प्रशासन से पूछा था “वो मुसलमानों का ऐसे पक्ष क्यों ले रहे हैं? मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि उत्तराखंड जैसी जगह पर ऐसा हो रहा है। मुझे फर्क नहीं पड़ता कि वो मेरे खिलाफ केस कर दें, लेकिन मैं सुनिश्चित करूँगा कि ऐसे पोस्टर उत्तराखंड के सभी मंदिरों के बाहर लगाए जाएँ।”

‘जन्माष्टमी के दिन मंदिर में घुसे मुल्ले पुलिस वाले, तोड़ डाली श्रीकृष्ण की मूर्तियाँ’: वीडियो में महिला ने बताया सब कुछ

पाकिस्तान के संघार जिले के किप्रो क्षेत्र में एक हिन्दू मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमाएँ विखंडित कर दी गईं। ये घटना सोमवार (30 अगस्त, 2021) को जन्माष्टमी के दिन हुई। एक स्थानीय महिला से जब पूछा गया कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमाएँ किसने तोड़ी हैं, तो उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस घटना को अंजाम दिया है। महिला से ये भी पूछा गया कि क्या वो उन पुलिसवालों को पहचान सकती हैं?

वीडियो में देखा जा सकता है कि रिपोर्टर के इस सवाल पर महिला ने सिंधी भाषा में बोलते हुए कहा कि मंदिर में घुस कर देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ तोड़ने वाले पुलिसकर्मी ‘मुल्ले’ थे, जिनमें से एक गंजा था और एक ने लंबी दाढ़ी रखी हुई थी। हिन्दुओं ने वीडियो के जरिए पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश से गुहार लगाई कि वो इस मामले में कार्रवाई करें, अन्यथा उन लोगों को भी मार डाला जा सकता है। इलाके के हिन्दू भयभीत हैं।

दरअसल, जन्माष्टमी के दिन हिंदू समुदाय के लोग अपने त्योहार कृष्ण जन्माष्टमी पर पूजा कर रहे थे, जिससे मुस्लिम कट्टरपंथी भड़क गए। कुछ देर बाद ही कट्टरपंथियों की भीड़ पूजा स्थल पर गई और उन्होंने कृष्ण जन्माष्टमी पर पूजा कर रहे लोगों को मारपीट कर वहाँ से भगा दिया। इसके बाद उन्होंने भगवान कृष्ण के मूर्ति को भी क्षतिग्रस्त किया। सोशल मीडिया पर इस घटना की तस्वीरें शेयर की जा रही हैं।

पाकिस्तानी एक्टिविस्ट और वकील राहत ऑस्टिन ने ट्वीट कर बताया, ”सिंध के खिप्रो में एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की गई है। हिंदू भगवान का अपमान किया गया है, क्योंकि वे भगवान कृष्ण का जन्मदिन (जन्माष्टमी) मना रहे थे। पाकिस्तान में इस्लाम के खिलाफ ईशनिंदा के झूठे आरोप में भी मॉब लिंचिंग या मौत की सजा दी जाती है, लेकिन गैर-मुस्लिम देवताओं के खिलाफ अपराध में कोई सजा नहीं होती है।”

इसी महीने के शुरुआत की बात है, जब पाकिस्तान के रहीम यार खान जिले के भोंग शहर में सैकड़ों लोगों ने मिल कर एक हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़ मचाई थी। लाहौर से 590 किलोमीटर की दूरी पर हुई घटना में कट्टरपंथियों ने लाठी-डंडों व बाँस लेकर हमला किया। मंदिर के एक हिस्से को जला भी दिया गया था। लेकिन, तमाम घटनाओं के बावजूद अब तक पाकिस्तान में हिन्दू मंदिरों पर हमले की घटनाएँ रुकी नहीं हैं।

’25 जाट लड़के मुझे पीट रहे थे, कह रहे थे- कट्टा निकाल, गोली मार’: राजकुमार राव ने जब बताया गुड़गाँव में क्यों गिड़गिड़ा रहे थे

राजकुमार राव की गिनती बॉलीवुड के उम्दा अभिनेताओं में होती है। 31 अगस्त उनका जन्मदिन है। उनसे जुड़ी एक दिलचस्प कहानी अक्सर चर्चा में रहती है। ये तब की है जब राव की बॉलीवुड में एंट्री नहीं हुई थी और गुड़गाँव (गुरुग्राम) में उनकी कुछ लड़कों ने पिटाई कर दी थी।

इस घटना का जिक्र राजकुमार राव ने ‘EIC vs Bollywood’ नामक शो में कुछ साल पहले किया था। यह घटना उनके कॉलेज के दिनों से जुड़ी है। इसमें उन्होंने बताया था कि वे अभिनेता ही बनना चाहते थे। अपनी इस दीवानगी का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया था कि जब उन्हें 25 जाट लड़के पीट रहे थे तब वे उनसे कह रहे थे कि मुँह पर मत मारना, मुझे एक्टर बनना है।

इस शो में बॉलीवुड अभिनेता ने बताया था कि वह बचपन में गुंडे की तरह थे। 11वीं में उन्होंने एक्टिंग में करियर बनाने का फैसला किया। इसी दौरान बॉस्केटबॉल खेलती एक लड़की को देख उन्हें प्यार हो गया। उन्होंने उस लड़की का जिक्र करते हुए कहा था कि वह कोई आम लड़की जैसी नहीं थी। शाहरुख खान की फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ की अंजलि की तरह थी। राजकुमार भी शाहरुख खान के फैन थे, लेकिन अंजलि पहले से ही किसी अमन के साथ थी।

इसी शो के शुरुआती हिस्से में ही राजकुमार राव ने उस घटना का जिक्र किया है

बावजूद उन्होंने उस लड़की के साथ डेट किया था। राजकुमार राव ने बताया था, “मैं गुड़गाँव के मॉर्डन फैंसी ब्लू बेल्स स्कूल में पढ़ाई करने चला गया। उस समय मैं यंग था। उसी समय से मैं शाहरुख खान का बहुत बड़ा फैन हूँ। इसलिए ‘कुछ कुछ होता है’ मेरे दिमाग पर पूरी तरह से हावी था। उसी स्कूल में मैंने एक लड़की को बास्केटबॉल खेलते देखा। लड़की पूरी तरह से काजोल यानी अंजलि की तरह दिख रही थी। फिर किसी तरह हमने डेटिंग शुरू की, लेकिन उसका पहले से एक बॉयफ्रेंड था।”

आगे उन्होंने बताया था कि जब लड़की के बॉयफ्रेंड को यह बात पता चली तो लॉ कॉलेज के 25 जाट लड़के उन्हें मारने आ गए थे। राजकुमार राव के अनुसार तब तक वे सीधे हो चुके थे और उन्होंने सोच लिया था कि अब किसी से मारपीट नहीं करनी है। उन्होंने कहा, “25 लड़के मुझे पीट रहे थे। आपस में बात कर रहे थे कट्टा निकाल, कट्टा निकाल, गोली मार। मैं एकदम चुपचाप बैठ गया। मेरे साथ मेरे दो पंजाबी दोस्त थे जो कह रहे थे उसे मत मारो, चाहो तो मुझे मारो। मार खाने के दौरान मैं केवल एक चीज बोल रहा था। आप विश्वास नहीं करेंगे लेकिन यह एक सच्ची कहानी है, मैं कहा रहा था मेरे चेहरे पर मत मारो, मुझे ऐक्टर बनना है।”

2010 में लव सेक्स धोखा नामक फिल्म से बॉलीवुड में एंट्री करने वाले राजकुमार राव गैंग्स ऑफ वासेपुर, शाहिद, सिटीलाइट्स, अलीगढ़, न्यूटन जैसी फिल्मों में दिख चुके हैं।

‘मंदिर बंद क्यों जब सारे पब और बार खुले हैं, शराब की दुकानों पर लंबी लाइनें’ – उद्धव सरकार से अन्ना हजारे का सवाल

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र सरकार के दोहरे रवैये पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने महाराष्ट्र की ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ सरकार से पूछा कि जब राज्य में सारे बार और पब खुले हुए हैं, ऐसे में मंदिरों को बंद रखने का क्या तुक है? उन्होंने ऐलान किया कि अगर मंदिरों को बंद रखे जाने के विरुद्ध आंदोलन शुरू होता है तो वो उसका समर्थन करेंगे। बता दें कि उद्धव ठाकरे सरकार के कोरोना दिशानिर्देशों के नाम पर मंदिरों को बंद रखा हुआ है।

अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र सरकार का ध्यान शराब की दुकानों के बाहर लग रही लंबी लाइनों की तरफ भी दिलाया। हाल ही में कुछ लोगों ने अन्ना हजारे से मुलाकात कर के उन्हें बताया कि कैसे मंदिरों के साथ उद्धव ठाकरे की सरकार भेदभाव कर रही है। अन्ना हजारे ने पूछा, “राज्य सरकार मंदिरों को क्यों नहीं खोल रही है? आम जनता के लिए मंदिरों को खोलने में सरकार को क्या खतरा नजर आ रहा है?”

84 वर्षीय अन्ना हजारे ने कहा कि अगर कोरोना वायरस संक्रमण दिशानिर्देश इसका कारण तो फिर शराब की दुकानों के सामने बड़ी भीड़ क्यों लग रही है? भाजपा ने भी अपने प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल के नेतृत्व में ‘शंखनाद आंदोलन’ शुरू किया है। मुंबई, पुणे, नासिक, सोलापुर और नागपुर के कई मंदिरों के सामने विरोध प्रदर्शन किया गया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने मंदिरों के सामने शंखनाद करते हुए प्रदर्शन किया।

पाटिल ने कहा कि MVA सरकार गहरी निद्रा में सोई हुई है, इसीलिए उसे जगाने के लिए शंखनाद आवश्यक है। पिछले 15 महीनों में कई बार मंदिरों को खोलने की माँग की गई है, लेकिन राज्य सरकार ने इसे अनसुना कर दिया। बता दें कि अब मुंबई की लोकल ट्रेनों में भी पूरी तरह वैक्सीनेटेड लोगों को यात्रा की अनुमति दे दी है। हालाँकि, धार्मिक स्थानों को खोलने के लिए सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है।

तालिबान बड़े पॉजिटिव… लेडीज को जॉब, क्रिकेट को सपोर्ट: शाहिद अफरीदी, शिखर धवन से मिला था ‘गब्बर’ जवाब

“देखिए… नो डाउट… तालिबान आए हुए हैं इस वक्त… और बड़े पॉजिटिव फ्रेम ऑफ माइंड के साथ आए हुए हैं, ये चीज हमें पहले नजर नहीं आई और माशाअल्लाह ये चीज बड़ी जबरदस्त पॉजिटिविटी की तरफ चीजें नजर आ रही हैं… कि लेडीज को काम करने की इजाजत… पॉलिटिक्स में… बाकी जॉब्स की तरह उनको… मतलब इजाजत है… ऐंड देन (और/इसके अलावा) क्रिकेट को सपोर्ट कर रहे हैं, क्रिकेट सीरीज हो जाती लेकिन श्रीलंका में मेरे ख्याल से कोविड की सिचुएशन ठीक नहीं थी, इसकी वजह से सीरीज नहीं हुई, तो मैं समझता हूँ कि तालिबान क्रिकेट को बहुत ज्यादा पसंद करते हैं।”

ऊपर वाली बात शाहिद अफरीदी ने कही है। एक बार फिर पढ़िए, जितनी बार “…” का प्रयोग किया गया है, उतनी बार शाहिद अफरीदी ने अपनी लड़खड़ाती जबान को संभालने के लिए ऐं-वें-उ-ऊ से शब्दों के खाली स्थान को भरा है।

गौर कीजिए। क्रिकेट पर बात के दौरान शाहिद अफरीदी की जुबान नहीं लड़खड़ाती है। यह सब कुछ महिला अधिकारों, महिलाओं को जॉब, महिलाओं के लिए पॉलिटिक्स में काम जैसे जुमलों पर होता है। क्यों? क्योंकि शाहिद अफरीदी खुद भी ‘तालिबान’ हैं। चौंकिए मत। सबूत है।

शाहिद अफरीदी की चमड़ी जितनी सुंदर है, दिल और मानसिकता उतनी ही काली है – कम से कम महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर। पाकिस्तान के एक गर्ल्स कॉलेज जाकर इन साहब ने तो लड़कियों को इस्लामी सिद्धांत अपनाने और जीवन सफल करने का मंत्र तक दे डाला।

और हाँ। शाहिद अफरीदी भेदभाव नहीं करते। जो सोच दूसरी लड़कियों को लेकर उनके दिल में है, वही सोच वो अपनी बेटियों तक के लिए रखते हैं। ‘गेम चेंजर’ नाम की ऑटोबायोग्रफी में अफरीदी लिखते हैं कि उनकी बेटियों के लिए क्रिकेट या किसी भी तरह के आउटडोर खेलों की मनाही है। इसके पीछे उन्होंने सामाजिक और धार्मिक वजह वाला तर्क दिया है।

दो उदाहरणों से गणित की तरह सिद्ध हुआ कि शाहिद अफरीदी खुद भी ‘तालिबान’ हैं।

महिलाओं को ‘जॉब’ देने वाले ‘पॉजिटिव तालिबानियों’ की शाहिद अफरीदी क्यों तारीफ कर रहे हैं, यह बड़ा सवाल है। जवाब तो सिर्फ और सिर्फ उनके पास होगा, हम सिर्फ कयास लगा सकते हैं कि शायद फट के फलावर हुई पड़ी है सभी पाकिस्तानियों की। क्यों? क्योंकि आम पाकिस्तानी तो छोड़िए, अफगानिस्तान पर शासन के बाद तालिबान अब तो डायरेक्ट पाकिस्तान के पीएम इमरान खान तक को धमकी देने लगे हैं।

एक और बात। खुशखबरी है शाहिद अफरीदी के लिए। उन्हें तालिबान का अगला प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है। इसकी डिमांड शुरू भी हो गई है। देखिए ट्वीट। पावरफुल लोग शाहिद अफरीदी के लिए लॉबिंग कर रहे हैं।

शाहिद अफरीदी को शिखर धवन का जवाब

जम्मू कश्मीर के अवैध पाकिस्तानी कब्जे वाले हिस्से में एक बार शाहिद अफरीदी गए। वहाँ से भारत के लिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भला-बुरा कहा था। हालाँकि रगड़ दिए गए थे। वैसे तो गौतम गंभीर, हरभजन सिंह, युवराज सब ने लताड़ लगाई थी लेकिन शिखर धवन ने अपने ‘गब्बर’ वाले अंदाज में बाउंड्री के पार मारा था शाहिद अफरीदी को।

शिखर धवन ने जवाब देते हुए लिखा था, “इस वक्त जब सारी दुनिया कोरोना से लड़ रही है, उस वक्त भी तुमको कश्मीर की ही पड़ी है? कश्मीर हमारा था, हमारा है और हमारा ही रहेगा… तुम चाहे पूरे 22 करोड़ लोगों को लेकर आ जाओ, यहाँ का एक-एक व्यक्ति सवा लाख के बराबर है।”