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साहिल को मारने वालों में परवेज भी, भीम आर्मी ने RSS को बदनाम करने के लिए फैलाया झूठ: UP पुलिस ने ऐसे खोली पोल

31 अगस्त को ट्विटर पर भीम आर्मी भारत एकता मिशन के दिल्ली जिलाध्यक्ष और आईटी सेल व सोशल मीडिया इन्चार्ज शिव चावला एएसपी ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए आरएसएस पर निशाना साधा। इस वीडियो में कुछ लोगों की भीड़ एक युवक को रॉड और लाठी से मारती नजर आ रही थी। चावला ने दावा किया कि ‘आरएसएस के गुंडे’ युवक को अंधाधुंध इसलिए मार रहे हैं क्योंकि वो ‘जय श्रीराम’ नहीं बोल रहा।

उन्होंने ये भी दावा किया कि ये पूरा मामला मुरादाबाद पुलिस थाने के नजदीक पुलिस बूथ के सामने घटित हुआ। उन्होंने यूपी पुलिस और डीजीपी को टैग करते हुए ‘आरएसएस गुंडों’ के ख़िलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की।

हालाँकि, पूरे दावे की पोल उस समय खुली जब यूपी पुलिस ने इस मामले में संज्ञान लिया और भीम आर्मी नेता के दावे का फैक्ट चेक किया। मुरादाबाद पुलिस ने कन्फर्म किया कि ये वीडियो हरियाणा के यमुना नगर की है और उनके अधिकार क्षेत्र में ये मामला नहीं आता।

उन्होंने भीम आर्मी को अपने ट्वीट से यह भी बताया कि तथ्यों को गलत ढंग से प्रसारित किए जाने के मामले में उनके विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई निर्देशित की गई है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपने आधिकारिक फैक्ट चेक ट्विटर अकॉउंट पर इस पूरी खबर का फैक्ट चेक किया। उन्होंने दैनिक जागरण की रिपोर्ट शेयर करते हुए कहा कि ये वीडियो यूपी पुलिस से जुड़ी हुई नहीं है बल्कि यमुनानगर के थाना हमीदा की है।

दावा

उल्लेखनीय है कि यह वीडियो जिसमें कुछ युवक रॉड और छड़ी से एक युवक को पीटते दिख रहे हैं, उसे वॉट्सएप पर शेयर किया जा रहा है। इसके साथ शेयर मैसेज में लिखा है, “हरियाणा में मेवात की ये घटना है, जहाँ बजरंग दल के कुछ लड़के एक मुस्लिम लड़के की पिटाई कर रहे हैं, क्या कोई जबरदस्ती ‘जय श्रीराम’ कहकर हिंदू बन सकता है या कोई जबरदस्ती ‘अल्लाह-हू- अकबर’ कह कर मुसलमान बन सकता है, आइए हम अपने देश को हिन्दू राष्ट्र गुंडा राज बनने से रोकें और हमारी आने वाली पीढ़ियों को संस्कार दें।”

व्हाट्सएप के संदेश में देखें तो उसमें लिखा है कि इस संदेश को कई बार शेयर किया गया है।

फैक्ट चेक

जागरण द्वारा 18 अगस्त को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, घटना 12 अगस्त को हुई थी। पीड़ित की पहचान साहिल अल्वी के रूप में की गई थी, जिसे हरियाणा के यमुनानगर जिले में युवकों के एक समूह ने पीटा था और उस समय हरियाणा पुलिस ने भी आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

उसी दिन ज़ी न्यूज़ जैसे मीडिया हाउस ने भी इस खबर को कवर किया था। उस समय रिपोर्ट्स में बताया गया था कि युवक को उस समय घेरा गया था जब वह 12 अगस्त को 4 अन्य लोगों के साथ अदालत की सुनवाई से लौट रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच अनबन कई साल पुरानी है। साहिल पर हमला करने वाले पुरुषों का समूह किसी विशेष धर्म से संबंधित नहीं था, जैसा कि रिपोर्ट में बताया गया है।

साहिल के चाचा आमिर ने भी इस मामले में सांप्रदायिक कोण का खंडन किया था। उन्होंने यह भी पुष्टि की थी कि एक समय था जब हमलावरों में से एक और साहिल दोस्त थे। साहिल ने भी इस दावे का खंडन किया था कि घटना सांप्रदायिक रूप से प्रेरित थी। उन्होंने कहा, “हमलावरों में एक मुस्लिम व्यक्ति भी शामिल है। उसका नाम परवेज था।”

हमीदा पुलिस स्टेशन के एसएचओ और यमुनानगर के एसपी कमलदीप ने भी सोशल मीडिया के इस दावे का खंडन किया था कि घटना में बजरंग दल शामिल था। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि घटना सांप्रदायिक नहीं थी। हरियाणा पुलिस ने तब एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया था और बाकी की तलाश कर रही थी।

कुल मिला कर कहें तो सार्वजनिक प्लेटफॉर्म्स पर घटना संबंधी जानकारी होने के बावजूद भीम आर्मी नेता ने पुरानी वीडियो शेयर करके झूठ फैलाया और अपराध की एक कहानी को दुर्भावनापूर्ण रूप से फैलाने के लिए इस्तेमाल किया, बिलकुल वैसे जैसे अक्सर लिबरल और इस्लामवादी करते हैं।

इससे पहले हमने आपको उन 20 घटनाओं की जानकारी दी थी जब जय श्रीराम नारे का इस्तेमाल एक सामान्य अपराध घटना को हेट क्राइम में बदलने के लिए किया गया।

भारत की GDP में अप्रैल-जून में हुई 20% से अधिक की दर से बढ़ोतरी: ग्रोथ रेट ने तोड़े अब तक के सभी पुराने रिकॉर्ड

अप्रैल से जून 2021 के दौरान यानी मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट में 20 फीसदी से ज्यादा का उछाल देखने को मिला है। पिछले साल कोरोना म​हामारी के कारण देश की जीडीपी में गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन अब इसमें सुधार दिखने लगा है।

सरकार ने मंगलवार (31 अगस्त) को जीडीपी के ताजा आँकड़े जारी किए गए हैं। वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही यानी अप्रैल 2021 से जून 2021 में भारत की जीडीपी की ग्रोथ में 20.1 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है।

आँकड़ों के अनुसार 2021-22 की पहली तिमाही में जीडीपी 32.38 लाख करोड़ रुपए रही है, जो 2020-21 की पहली तिमाही में 26.95 लाख करोड़ रुपए थी। यानी साल दर साल के आधार पर जीडीपी में 20.1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले साल अप्रैल-जून के दौरान देश की जीडीपी में 24.4 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई थी।

अर्थशास्त्रियों द्वारा पहले की गई भविष्यवाणियों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की जीडीपी में 20.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि एक साल पहले इसी समय अवधि में कोरोनो महामारी की पहली लहर के दौरान लॉकडाउन के परिणामस्वरूप 24.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अलावा, सकल मूल्य वर्धित (Gross Value Added) भी पहली तिमाही में 18.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा है।

बता दें कि 1990 के दशक के मध्य से आधिकारिक जीडीपी ग्रोथ रेट के आँकड़ों पर नजर डाले तो जीडीपी की इतनी शानदार ग्रोथ रेट कभी नहीं रही है। यानी पहली तिमाही में 20.1 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि सबसे अधिक तिमाही विस्तार है। यह वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही में दर्ज 1.6 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का लगभग 13 गुना है।

दोहा में तालिबान के अनुरोध पर भारतीय राजदूत ने की शेर मोहम्मद स्टानिकजई से मुलाकात, इन प्रमुख मुद्दों पर हुई बात

कतर में भारत और तालिबान के बीच मंगलवार (31 अगस्त) को पहली औपचारिक बैठक हुई। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, कतर में भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने तालिबान के नेता शेर मोहम्मद स्टानिकजई से मुलाकात की। स्टानिकजई दोहा में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख हैं। दोनों प्रतिनिधि दोहा स्थित भारतीय दूतावास में मिले।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि यह दोनों पक्षों के बीच पहली आधिकारिक बैठक है। यह बैठक तालिबान के अनुरोध पर भारतीय दूतावास दोहा में हुई। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि तालिबान नेता और भारतीय राजदूत के बीच अफगानिस्तान में मौजूदा समय में फँसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनके जल्द से जल्द भारत लौटने पर चर्चा हुई। ऐसे अफगान नागरिक, खासकर अल्पसंख्यक जो कि भारत जाना चाहते हों, उन्हें लेकर भी भारत ने बात की। 

Source: Sidhant Sibal/WIONews

राजदूत मित्तल ने भारत को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल किसी भी तरह से भारत विरोधी गतिविधियों और आतंकवाद के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इसको लेकर तालिबान प्रतिनिधि ने उन्हें सभी मुद्दों पर आश्वासन दिया और कहा कि इन्हें सकारात्मक ढंग से सुलझाया जाएगा।

कौन है शेर मोहम्मद स्टानिकजई

तालिबानी नेतृत्व का प्रमुख चेहरा स्टानिकजई कभी उत्तराखंड के देहरादून में प्रतिष्ठित भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) के 1982 बैच में रह चुका है। यहाँ उसके सहपाठी उसे प्यार से ‘शेरू’ कह कर बुलाते थे। बताया जाता है कि जब वह आईएमए में भगत बटालियन की केरेन कंपनी में शामिल हुआ था, तब वह 20 साल का होने वाला था। उसने भारत-अफगान रक्षा सहयोग कार्यक्रम के तहत भारत की यात्रा की। उसके साथ 44 अन्य विदेशी कैडेट भी इस बटालियान का हिस्सा थे।

लोगार प्रांत के बाराकी बराक जिले में 1963 में स्टानिकजई का जन्म हुआ था। वह मूल रूप से पश्तून हैं और तालिबान में सबसे अधिक पढ़े-लिखे नेता है। राजनीति विज्ञान में मास्टर्स करने के बाद शेर मोहम्मद स्टानिकजई ने डेढ़ साल में आईएमए में अपना प्री-कमीशन प्रशिक्षण पूरा किया था।

उसने सोवियत-अफगान युद्ध और अफगानिस्तान की मुक्ति के लिए लड़ाई लड़ी। इसके बाद साल 1996 में उसने सेना छोड़ दी और तालिबान में शामिल हो गया।  लेकिन अफगान बलों के साथ उनके समय और उनके अंतरराष्ट्रीय अनुभव ने उन्हें तालिबान से अलग कर दिया। न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में, स्टानिकजई के पुराने दोस्त ने कहा कि वह शुरू में आतंकवादी संगठन के साथ अच्छी तरह से फिट नहीं थे।

हालाँकि, बाद में जब साल 1996 से 2001 के बीच जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर शासन किया, त​ब स्टानिकजई को उपविदेश मंत्री बनाया गया था। वह तालिबान शासन के दौरान अक्सर विदेशी मीडिया को इंटरव्यू देता था। बताया जाता है कि वह काफी अच्छी अंग्रेजी बोलता था।

1996 में, स्टानिकजई ने क्लिंटन प्रशासन से तालिबान शासित अफगानिस्तान की राजनयिक मान्यता प्राप्त करने के लिए कार्यवाहक विदेश मंत्री के रूप में वाशिंगटन डीसी की यात्रा की थी। बाद में जब अमेरिका ने तालिबान को अफगानिस्तान से उखाड़ फेंका तो स्टानिकजई भी बाकी कमांडर्स के साथ विदेश भाग गया था।

मर्द से भी रेप कर रहे तालिबानी, औरतों को ताबूत में डाल भेज रहे विदेश

अफगानिस्तान में तालिबान के कारण हाहाकार मचा है। हाल में एक समलैंगिक पुरुष को इनकी बर्बरता का सामना करना पड़ा। युवक को उसके समलैंगिक होने के कारण न केवल मारा गया बल्कि उसका रेप भी हुआ। पीड़ित की पहचान नहीं हो सकी है।

डेलीमेल की रिपोर्ट बताती है कि वह डर से काबुल में छिपा हुआ था लेकिन दो तालिबानियों ने उससे दोस्त बन कर बाहर निकलने को कहा और आश्वसन दिया कि वो उसे मुल्क से बाहर भेजेंगे। हालाँकि, जब युवक उनसे मिला तो उन्होंने उससे मारपीट कर उसका रेप किया और बाद में उस व्यक्ति के पिता का नंबर लेकर उन्हें बताया कि उनका बेटा गे है। 

जानकारी के अनुसार, पीड़ित के साथ हुई इस घटना के बारे में अफगान राइट्स एक्टिविस्ट अर्तमिस अकबरी (Artemis Akbary) ने सूचना दी है। वह अभी तुर्की में रहते हैं और व्यक्ति से संपर्क में हैं। अफगान में तालिबान की बर्बरता का सबसे हालिया उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ये हमला सिर्फ एक उदाहरण है कि आखिर तालिबानी शासन में समलैंगिक लोगों को जीवन कैसा होगा।

अकबरी कहते हैं, “वो (तालिबान) बस दुनिया को बताना चाहते हैं कि हम बदल गए और हमें स्त्री अधिकार और मानवाधिकारों से कोई आपत्ति नहीं है। वो झूठ बोल रहे हैं। तालिबान नहीं बदला है क्योंकि उनकी विचारधारा नहीं बदली है। मेरे दोस्त अफगानिस्तान में डरे हुए हैं। उन्हें नहीं पता कि उनके साथ भविष्य में क्या होगा, तो वो बस खुद को छिपाने का प्रयास कर रहे हैं।”

ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले अफगान की एक पूर्व जज नजला, जो अब यूएस में रहती हैं, उन्होंने बताया था कि तालिबान ने कैसे एक महिला को आग के हवाले कर दिया था क्योंकि उन्हें उसके हाथ का बना खाना पसंद नहीं आ रहा था। इसके अलावा उन्होंने बताया था कि अफगान में महिलाओं को ताबूत में बंद करके सेक्स स्लेव बनाकर विदेश भेजा जा रहा है।

कई लोग ऐसे हैं जिन्हें नाइट लेटर्स देकर तालिबान की अदालत में पेश होने को कहा गया है। उन्हें आदेश दिया गया है कि या तो वो रिपोर्ट करें वरना मरने के लिए तैयार रहें। इनमें से एक 34 वर्षीय नाज भी हैं जो 6 बच्चों के पिता है उन्होंने कभी यूके मिलिट्री को हेलमंड में सड़के बनाने में मदद की थी। अब उन्हें तालिबान ने लेटर दिया है। नाज कहते हैं, “पत्र आधिकारिक है और तालिबान की मोहर भी लगी हुई है। संदेश साफ है कि वो मुझको मारना चाहते हैं।”

नाज के मुताबिक, “अगर मैंने कोर्ट अटेंड किया तो मुझे जीवन भर की सजा दी जाएगी। अगर नहीं तो मुझे मार दिया जाएगा, इसीलिए मैं छिपा-छिपा घूम रहा हूँ। ताकि मैं बचने का रास्ता निकाल सकूँ। लेकिन मुझको मदद चाहिए।” इसी तरह एक व्यक्ति जो ब्रिटिश मिलिट्री में ट्रांस्लेटर था, उसको भी जान से मारने की धमकी दी गई है। अगला लेटर एक दुभाषिए के भाई को चेतावनी देने के लिए दिया गया। जिसमें लिखा था कि दुभाषिए को आश्रय देने के लिए उसे मौत की सजा दी जाती है।

‘तुलसी की माला नहीं तोड़ूँगा, मैं अपने धर्म का पालन करूँगा’: ऑस्ट्रेलिया में 12 साल के हिंदू लड़के को खेल के मैदान से किया बाहर

ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में भारतीय मूल के 12 वर्षीय हिंदू फुटबॉल खिलाड़ी शुभ पटेल को तुलसी की माला (कंठी माला) पहनने के कारण खिलाने से मना कर मैदान से बाहर भेज दिया गया। द ऑस्ट्रेलिया टुडे के अनुसार, शुभ ने रेफरी से माला उतारने से इनकार कर दिया, जिसे उसने 5 साल की उम्र से पहना हुआ है। शुभ ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “सिर्फ एक फुटबॉल मैच के लिए मैं इसे तोड़ने के बजाय अपने धर्म का पालन करना पसंद करूँगा।”

टूवॉन्ग क्लब के युवा सदस्य ने बताया कि माला उतारना हिंदू धर्म के खिलाफ है। सनातन परंपरा में पूजा में प्रसाद के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली तुलसी की माला को धारण करना और उससे जप करना अत्यंत ही मंगलकारी माना गया है। स्वामीनारायण के भक्त शुभ ने आगे कहा, “अगर मैं इसे उतार देता तो उस समय भगवान को लगता कि मुझे उन पर विश्वास नहीं है।”

हिंदू लड़के ने जोर देकर कहा कि माला उसे आत्मविश्वास देती और उसे सुरक्षित महसूस कराती है। इसके बाद शुभ एक कोने में बैठकर अपनी टीम को खेलते हुए देखने लगा।

यह पहला मौका था, जब शुभ को अपनी माला उतारने को कहा गया। रिपोर्ट बताती है कि उन्होंने 15 मैच माला पहनकर ही खेले हैं और एक बार भी उन्हें अपने कोच या टीम के साथी द्वारा इसे उतारने के लिए नहीं कहा गया था।

‘यह कोई धार्मिक चिन्ह नहीं’ क्या कहते हैं नियम

कथित तौर पर, फेडरेशन इंटरनेशनेल डी फुटबॉल एसोसिएशन (फीफा) के नियमों के अनुसार, एक खिलाड़ी को खेलते समय कोई भी उपकरण या कुछ भी खतरनाक चीज को नहीं पहनना चाहिए। 2014 से पहले फीफा ने भी हिजाब पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा था कि इससे खिलाड़ी के सिर या गर्दन पर चोट लगने का खतरा होता है।

फुटबॉल क्वींसलैंड ने माफी माँगी

फुटबॉल क्वींसलैंड, ऑस्ट्रेलिया में फुटबॉल और फुटसल की गवर्निंग बॉडी है। फुटबॉल क्वींसलैंड ने एक जाँच शुरू की है और इस घटना के बाद शुभ पटेल के परिवार और टूवॉन्ग सॉकर क्लब से माफी भी माँगी है। फुटबॉल क्वींसलैंड ने एक बयान में कहा, “क्वींसलैंड में फुटबॉल सबसे स्वागत योग्य और समावेशी खेल है, जो सभी संस्कृतियों और धर्मों का सम्मान करता है।”

जलियाँवाला बाग के नए लुक पर रो रहे कॉन्ग्रेसी-वामपंथी: राहुल गाँधी का गुस्से वाला ट्वीट, कॉन्ग्रेसी CM ने कहा- ‘अच्छा दिख रहा’

भारत के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज जलियाँवाला बाग स्मारक के नए स्वरुप को लेकर विपक्षी दलों के साथ-साथ वामपंथियों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। पूरा विवाद प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शनिवार (28 अगस्त, 2021) को जलियाँवाला बाग़ के पुनर्निर्मित परिसर के उद्घाटन बाद सामने आया है। जबकि इस उद्घाटन सत्र में पंजाब के CM कैप्टेन अमरिंदर सिंह भी उपस्थित थे। उस दिन PM मोदी ने अमृतसर स्थित जलियाँवाला बाग स्मारक स्थल पर विकसित चार संग्रहालय दीर्घाओं का भी लोकार्पण किया।

जहाँ सरकार के इस कदम की बड़े पैमाने पर सराहना हो रही थी वहीं अब वामपंथी इतिहासकारों, विपक्षी नेताओं और कॉन्ग्रेस से जुड़े लोगों ने सोशल मीडिया पर मोदी सरकार के इस काम पर उन्हें घेरने की कोशिश की है और आरोप लगाया कि ऐतिहासिक धरोहरों से मोदी सरकार छेड़छाड़ कर रही है।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने भी एक ट्वीट में इसे शहीदों का अपमान बताया। इस पूरे मामले पर राहुल गाँधी ने खुद को ‘शहीद का बेटा’ बताते हुए एनडीटीवी इंडिया की खबर शेयर करते हुए लिखा है, “जलियाँवाला बाग के शहीदों का ऐसा अपमान वही कर सकता है जो शहादत का मतलब नहीं जानता। मैं एक शहीद का बेटा हूँ- शहीदों का अपमान किसी क़ीमत पर सहन नहीं करूँगा। हम इस अभद्र क्रूरता के खिलाफ हैं।”

जबकि उनके इसी ट्वीट से इत्तेफाक न रखते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री ने जलियाँवाला बाग में हुए नए परिवर्तन को बहुत अच्छा बताया है। उन्होंने कहा, “मैं नहीं जानता क्या हटाया गया है मेरे लिए जो भी हुआ है अच्छा दिख रहा है।”

वहीं इस मामले में वामपंथी इतिहासकार इरफान हबीब ने लिखा- “यह स्मारकों का निगमीकरण है। आधुनिक संरचनाओं के नाम पर यह अपना असली मूल्य खो रहे हैं।” वहीं वामपंथी नेता सीताराम येचुरी ने भी ट्वीट करते हुए लिखा है, “केवल वे जो स्वतंत्रता संग्राम से दूर रहे, वे ही इसी प्रकार का कांड कर सकते हैं।”

वामपंथी इतिहासकार एस इरफान हबीब ने एक और वामपंथी जॉय दास के ट्वीट की रीट्वीट किया है। जॉय दास ने अपने ट्वीट में लिखा है, “पहली तस्वीर जलियाँवाला बाग का मूल प्रवेश द्वार है, जहाँ से जनरल डायर ने नरसंहार का आदेश देने से पहले प्रवेश किया था। यह उस भयानक दिन की याद दिलाती है। दूसरी तस्वीर नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा इसे ‘संरक्षण’ के नाम पर पुनर्निर्मित करने के बाद की है। देख लें ये कैसा दिखता है।”

बता दें कि जलियाँवाला बाग के इस नए अवतार से कॉन्ग्रेस के भड़कने को उनके परिवार के इस ट्रस्ट से बाहर होने को भी जोड़कर देखा जा रहा है। पंजाब के अमृतसर स्थित ऐतिहासिक जालियॉंवाला बाग के प्रबंधन से संबंधित ट्रस्ट से 2019 में ही कॉन्ग्रेस को मोदी सरकार ने बेदखल कर दिया गया था। राज्यसभा ने जैसे ही 20 नवम्वर, 2019 को जालियॉंवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक (संशोधन) विधेयक-2019 को मंजूरी दी थी उसके साथ ही यह काम पूरा हो गया था क्योंकि लोकसभा में यह बिल पहले ही पास हो चुका था।

इस संशोधन के बाद से ट्रस्ट में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के होने की अनिवार्यता समाप्त हो गई थी। अब इसकी जगह लोकसभा में विपक्ष के नेता या सबसे बड़े दल के नेता को सदस्य बनाया गया है। मोदी सरकार ने उसी समय बताया था कि 2023 में मौजूदा न्यास का कार्यकाल समाप्त होने पर नए सदस्यों में शहीदों के परिजन भी होंगे। संस्कृति मंत्रालय ने तब एक बयान जारी कर कहा था कि इस बिल का मकसद जालियाँवाला बाग़ प्रबंधक ट्रस्ट को राजनीति से दूर रखना है।

गौरतलब है कि अप्रैल 13, 1919 को जलियाँवाला बाग़ में जनरल डायर के आदेश पर निर्दोष लोगों पर ताबड़तोड़ गोलीबारी की गई थी। इस नृशंस नरसंहार में सैकड़ों लोग मारे गए थे। इनमें कई बच्चे भी थे। मारे जाने वालों में वृद्ध और महिलाएँ भी शामिल थीं। ख़ुद डायर ने स्वीकार किया था कि उनकी पलटन ने 1700 राउंड फायरिंग की थी। बलिदानियों की याद में बाग का प्रबंधन देखने के लिए ट्रस्ट की स्थापना 1921 में की गई थी। आजादी के बाद 1951 में नए ट्रस्ट का गठन किया गया था।

‘…महिलाएँ राजनीति करती घूम रही हैं, पूरा मजा आ रहा है’: यति नरसिंहानंद के खिलाफ़ 2 FIR दर्ज, BJP महिलाओं को लेकर वीडियो में की थी गंदी बात

गाजियाबाद के डासना स्थित शिव शक्ति धाम मंदिर के पुजारी यति नरसिंहानंद सरस्वती की विवादित वीडियो वायरल होने के बाद उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ है। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने इस बाबत दो एफआईआर के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए यह जानकारी दी।

एफआईआर गाजियाबाद जिले के थाना मसूरी में आईपीसी की धारा 505 (1) (सी), 509, 504 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत दायर की गई है। यति नरसिंहानंद सरस्वती के ख़िलाफ़ दोनों एफआईआर 31 अगस्त को ही की गई हैं।

अपने ट्वीट में रेखा शर्मा ने तजिंदर सिंह बग्गा, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को टैग करते हुए एफआईआर की सूचना दी। इससे पहले भाजपा नेता तजिंदर पाल बग्गा ने इस वीडियो को देखने के बाद यूपी पुलिस से और रेखा शर्मा से नरसिंहानंद के ख़िलाफ़ एक्शन लेने को कहा था। जिसके बाद महिला आयोग ने संज्ञान लेते हुए नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ FIR दर्ज करने और तुरंत गिरफ्तार करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजीपी को पत्र लिखा था।

वीडियो में क्या कहा?

बता दें कि यति नरंसहानंद सरस्वती की वीडियो वायरल होने के बाद से यह पूरा मामला गरमाया हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियो में वह कहते हैं, “ये अमूल्य ज्ञान कहीं दुनिया में सुनने को नहीं मिलेगा। राजनीति में जो महिलाएँ दिखाई पड़ती थीं वो किसी न किसी एक नेता की &%$# हुआ करती थीं। या किसी बड़े नेता की बेटी-बहन या बहू-पत्नी…उसके बाद आई समाजवादी पार्टी वालों की सरकार, वहाँ भी महिला किसी एक की ही होती थी। फिर आई मायावती की सरकार, ये औरतों वाला मामला उनकी सरकार में नहीं चलता था। वहाँ कोई भी नेता किसी भी औरत को टिकट नहीं दिलवा सकते। न वादा कर सकते कि मैं तुम्हारी सिफारिश बहनजी से कर दूँगा। पता चला कि बहनजी ने उसका ही टिकट काट दिया।”

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नरसिंहानंद ने आगे कहा, “इसके बाद आई ईमानदार सरकार और बहुत चरित्रवान लोगों की सरकार, अब सरकारी ठेकों का रेट हो गया 10 पर्सेंट…खुला रेट। BJP में जितनी भी महिलाएँ दिखाई दे रही हैं, वह एक नेता के पास गईं और दूसरे के पास नहीं तो दूसरा उनका काम नहीं करेगा…तीसरे से काम है तो तीसरे के पास जाना है। अब ये हैं ईमानदार और चरित्रवान लोग। ये है राजनीति। जितनी महिलाएँ राजनीति करती घूम रही हैं, पूरा मजा आ रहा है। मैं कह तो कुछ नहीं सकता, मातृशक्ति हैं…मैं मातृशक्ति को प्रणाम करता हूँ।”

वीडियो वायरल के बाद माँगी माफी

इस वीडियो के संबंध में न्यूज इंडिया को दिए बयान में यति नरसिंहानंद ने सफाई देते हुए कहा था कि अगर भाजपा इस वीडियो पर कार्रवाई कर रही है, तो कार्रवाई उनका अधिकार है, कार्रवाई होनी चाहिए, इसका स्वागत होगा। आगे उन्होंने कहा, “ये अनऑफिशियल चर्चा हो रही थी और किसी अपने ने उसे रिकॉर्ड करके बड़े शातिराना ढंग से एडिट किया और फिर वायरल कर दिया। उससे लग रहा है कि मैं महिलाओं के बारे में अपशब्द कह रहा हूँ जबकि ये सच नहीं है। वो मेरी बात का अर्थ का अनर्थ किया गया हैं। मैं सब सिस्टम में महिलाओं का जो शोषण होता है उस पर चर्चा कर रहा था। मैं कह रहा था कि राजनीति आज बॉलीवुड से भी गंदा धंधा है। यहाँ हर स्तर महिलाओं का शोषण हो रहा है। मैं केवल उन लोगों के साथ चर्चा कर रहा था। वीडियो धोखे से रिकॉर्ड करके सिर्फ विश्वासघात हुआ है। वीडियो वैसा नहीं है जैसा मैंने कहा है। लेकिन फिर भी वीडियो में जो शब्द थे मैं उसके लिए माताओं, बहनों, बेटियों से क्षमा चाहता हूँ। “

माँ ज्वाला मंदिर में कटवाई गाय, वराह की मूर्ति तोड़ तालाब में फिंकवाया: शराबी जहाँगीर को बताया जाता है उदार

जहाँगीर चौथा मुग़ल बादशाह था। अब ये बताने की ज़रूरत नहीं है कि उससे पहले क्रमशः बाबर, हुमायूँ और अकबर ने दिल्ली की गद्दी पर राज़ किया था। ये सब तो हमारी पाठ्य पुस्तकों का एक अहम हिस्सा रही हैं। नवंबर 1605 से अक्टूबर 1627 तक राज़ करने वाले जहाँगीर के 22 वर्षों के शासन में इतिहास में काफी उपलब्धियाँ गिनाई जाती हैं। लेकिन, माँ ज्वालामुखी मंदिर में गाय काटने वाली बात छिपा ली जाती है।

इस घटना पर चर्चा करेंगे, लेकिन उससे पहले आपको बता दें कि जहाँगीर को धार्मिक रूप से एक उदार राजा के रूप में किताबों में पढ़ाया जाता है। बताया जाता है कि वो सुन्नी होने के बावजूद शिया मुस्लिमों से घृणा नहीं करता था, अब्दुर्रहीम खानखाना का शिष्य होने के कारण उनके सूफी व्यक्तित्व का उस पर भी प्रभाव था, वो अपने अब्बा अकबर के दीन-ई-लाही को पसंद करता था, और अक्सर हिन्दू-मुस्लिम-ईसाई धर्मगुरुओं को बुला कर बड़े प्यार से उनकी चर्चाओं को सुनता था।

लेकिन, यही इतिहासकार ये नहीं बताते कि किस तरह जहाँगीर हमेशा अपने दरबार में बैठे कट्टर इस्लामी मौलानाओं को खुश करने में लगा रहता था। आपको प्रयागराज (पहले इलाहाबाद) के पातालपुरी मंदिर के बारे में पता होगा। यहीं पर अकबर ने अपना किला भी बनवाया था। पातालपुरी मंदिर के अधिकतर हिस्सों को जहाँगीर व उसके बेगमों के आदेश के बाद नष्ट कर दिया गया था। इतना ‘उदार’ था जहाँगीर!

असल में अकबर ने हिन्दुओं के खिलाफ ‘छिपी छुरी का अत्याचार’ की नीति अपनाई थी, जिसके कारण उसने इतिहास में अपनी ‘उदार’ वाली छवि चमकाने की भरसक कोशिश की। इस कारण उस समय मुस्लिमों का एक कट्टरवादी समूह उससे नाराज़ हो गया था, लेकिन उसे यकीन था कि जहाँगीर उन्हीं नीतियों को खुलेआम अपनाएगा, जिन्हें अकबर छिप कर लागू करता था। लेकिन, इतिहासकारों को सिर्फ यही दिखता है कि अब्दुर्रहीम खानखाना वैष्णव से प्रभावित थे, इसीलिए कल को वो कहीं जहाँगीर को विष्णुभक्त न साबित कर दें।

असल में जहाँगीर ने जब हिमाचल प्रदेश में काँगड़ा पर हमला किया था, तो उसने ज्वालामुखी मंदिर को भी तहस-नहस किया था। वो सन् 1620 का समय था, जब ये घटना हुई। उसने काजी और अपने अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस्लाम के कानून के हिसाब से सारे काम किए जाएँ। ज्वालामुखी मंदिर परिसर में उसने किले पर कब्ज़ा किया, खुत्बा पढ़ा गया और फिर वहाँ एक गाय की हत्या की गई।

ये सब जानबूझ कर किया गया था। जहाँगीर ने खुद लिखा है कि उसने वहाँ पर ऐसी-ऐसी चीजें करने का आदेश दिया, जो मंदिर परिसर में अब तक कभी नहीं हुई थी। उसने ये लिखा है कि ये सब उसकी उपस्थिति में हुआ। अजमेर के पास पुष्कर में जब उसने भगवान विष्णु के अवतार वराह की पूजा करते हुए लोगों को देखा तो वो आक्रोशित हो गया और उसने वराह मंदिर को ध्वस्त करने के आदेश दिए।

उसने कहा कि दशावतार की हिन्दू ‘कहानी’ पर उसे भरोसा नहीं है, इसीलिए भगवान वराह की प्रतिमा को खंड-खंड कर के तालाब में डुबो दिया जाए। जम्मू कश्मीर के राजौरी में जब जहाँगीर ने देखा कि कुछ हिन्दुओं ने मुस्लिम महिलाओं से शादी की थी तो वो क्रोधित हो उठा। वो इसे बर्दाश्त नहीं कर पाया कि इन मुस्लिम लड़कियों ने हिन्दू धर्म में दीक्षित होकर हिन्दुओं से शादी की थी। उसने ऐसे सभी हिन्दुओं को कड़ा दंड देने का आदेश दिया।

जहाँगीर ने मेवाड़ के विरुद्ध युद्ध को भी ‘जिहाद’ बताया था। काँगड़ा पर हमले को भी उसने ‘जिहाद’ करार दिया था, जबकि विक्रमजीत नाम का एक राजा उसके साथ लड़ने गया था। उसने कांगड़ा पर कब्जे के बाद किले में मस्जिद के निर्माण की भी आधारशिला रखी। वो काँगड़ा में ये देख कर भौंचक हो गया था कि न सिर्फ बड़ी संख्या में हिन्दू, बल्कि दूर-दूर से कई मुस्लिम भी माँ ज्वालामुखी की पूजा के लिए आते हैं।

उसने माँ ज्वालामुखी की प्रतिमा को एक ‘काला पत्थर’ कह कर सम्बोधित किया था। इसी तरह गुजरात में उसने सारे जैन मंदिरों को बंद किए जाने और जैन संतों के आश्रमों पर लोगों के जाने पर पाबंदी लगा दी थी। उसने इसके पीछे नैतिकता का बहाना बनाते हुए अपने आदेश में कहा था कि श्रद्धालुओं की बहन-बेटियाँ इन जैन संतों के आश्रम में जाती हैं। हालाँकि, इस आदेश को लागू करने में मुगलों के पसीने छूट गए।

जहाँगीर का सबसे बड़े बेटे का नाम खुसरो था। उसने सन् 1606 में अपने अब्बा के खिलाफ ही बगावत कर दी थी। इस दौरान अमृतसर में उसने गुरु अर्जुन देव से भी मुलाकात की थी। वो सिखों के पाँचवें गुरु थे। जहाँगीर को जैसे ही इसका पता चला, उसने गुरु अर्जुन देव पर 2 लाख रुपए का जुरमाना लगा दिया। ऐसा न करने पर उन्हें बेरहमी से मार डाला गया था। उधर खुसरो ने लाहौर पर कब्ज़ा कर लिया था।

जहाँगीर लाहौर के लिए निकला और भैरोंवाल के युद्ध में उसने खुसरो को हरा दिया। इसके बाद उसे दिल्ली लाकर हाथी पर बिठा कर लोगों के सामने परेड कराया गया। इस दौरान उसके अगल-बगल उसके लोगों को बिठाया गया था। जब भी कोई चौक-चौराहा आता, उसके एक व्यक्ति की आँतों में सूली घोंप कर उसे उठा दिया जाता था और फेंक दिया जाता था। इस तरह खुसरो के सामने ही उसका साथ देने वालों को सार्वजनिक रूप से भयानक मौत दी गई।

इतना ही नहीं, उसने ईसाईयों के साथ भी क्रूरता की नीति अपनाई थी। पुर्तगालियों से युद्ध के समय सारे चर्च बंद कर दिए गए थे क्योंकि जहाँगीर चर्चों को ध्वस्त करवा देता था। वाराणसी में राजा मानसिंह द्वारा बनवाए गए एक मंदिर को उसने ध्वस्त करवाया था। उसने खुद लिखा है कि उस मंदिर को ध्वस्त करवा कर उसने मस्जिद की नींव रखी, वो भी मंदिर के ही मैटेरियल से। जहाँगीर के माँ के हिन्दू होने की बात कह उसका बचाव करने वाले उसकी करनी को अक्सर छिपा देते हैं।

असल में जहाँगीर ने ही हिन्दुओं पर अत्याचार के कई उदाहरण कायम किए, जिन पर उसका बेटा शाहजहाँ वो पोता औरंगजेब चला। इतिहासकार अक्सर ये नैरेटिव फैलाते हैं जहाँगीर के दरबार में फलाँ हिन्दू प्रथा थी, ये त्योहार मनाए जाते थे – लेकिन वो ये भूल जाते हैं कि मुगलों के दरबार में कई हिन्दू भी बड़े-बड़े पदों पर होते थे। ये हारे हुए या समर्पण करने वाले लोग होते थे। मुगलों का महिमामंडन ऐसे ही लोगों द्वारा आज भी बदस्तूर जारी है।

जहाँगीर के बारे में कई इतिहासकारों ने माना है कि वो शराबी था। उसने शराब पीने के मामले में अपने सारे पूर्वजों के रिकॉर्ड्स तोड़ दिए थे और 1605 में गद्दी पर बैठने के साथ उसका ये शौक और परवान चढ़ा। वो शराब का इतना शौक़ीन था कि एक बार बैठता था तो 20 कप डबल डिस्टिल्ड दारू पी जाता था। बता दें कि जब भी शराब को गर्म किया जाता है और उसे भाप में बदल कर फिर से वापस शराब बनाया जाता है, तो इसे डिस्टिल करना कहते हैं।

भारत विरोधी नारे लगवाने वाले शौहर का JNU की प्रोफेसर ने किया बचाव, कहा- मानसिक स्थिति ठीक नहीं

हरियाणा के गुरुग्राम में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगवाने वाले जेएनयू की प्रोफेसर रोसिना नासिर के शौहर अनवर सैयद फैजुल्ला हाशमी के खिलाफ हाल ही में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसी बीच अपने शौहर का बचाव में रोसिना नासिर ने नया दावा किया है। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, रोसिना का कहना है कि उसके पति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। वहीं, डीसीपी क्राइम धीरज सेतिया ने उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमने मामले पर कानूनी राय माँगी है, जिसके आधार पर हम आगे की कार्रवाई करेंगे।” उन्होंने कहा कि मुझे बताया गया है कि हाशमी की पत्नी ने एक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने कहा ​है कि उनके पति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि हम सभी पहलुओं पर गौर कर रहे हैं। इस मामले की गहनता से जाँच की जाएगी।

गौरतलब है कि इंपीरियल गार्डन सोसाइटी में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाने वाले अनवर सैयद फैजुल्ला हाशमी के खिलाफ सोसायटी के लोगों ने 28 अगस्त को शिकायत दर्ज कराई थी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था, जिसमें उन्हें ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाते हुए सुना जा सकता है। हालाँकि यह वीडियो कब की है, यह साफ़ नहीं है।

शिकायत में निवासियों ने कहा था, “हम, इंपीरियल गार्डन सोसाइटी, सेक्टर 102, गुरुग्राम के निवासी, आपको एक गंभीर मुद्दे से अवगत कराना चाहते हैं, जहाँ अनवर सैयद फैजुल्ला हाशमी निवासी फ्लैट आईजी-01-1501 ने अपने अपार्टमेंट की बालकनी से पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए। यह भारतीय दंड संहिता के तहत विभिन्न धाराओं के तहत एक गंभीर अपराध है। यह हरकत वीडियो कैमरे में कैद हो गई। इस पत्र के साथ वीडियो सबूत के तौर पर एक पेन ड्राइव में दिया जा रहा है।”

वीडियो में एक व्यक्ति (जिसके बारे में बताया जा रहा है कि वह रोसिना नासिर का शौहर अनवर सैयद फैजुल्ला हाशमी है) को एक बच्चे को ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ चिल्लाना सिखाने की कोशिश करते हुए सुना जा सकता है।

कब्रिस्तान के पास कुलदीप को घेर कर पीटा, ‘न लोड पड़े हथियारों की’ गाने के साथ Video वायरल – इकबाल, शोएब समेत 5 पर केस

मध्य प्रदेश के हरदा में बने एक कब्रिस्तान के पास से 5 युवकों का वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो में देख सकते हैं कि पाँचों युवक कैसे एक अन्य युवक को बेरहमी से पीट रहे हैं। आरोपितों ने वीडियो को खुद ही सोशल मीडिया पर बैकग्राउंड में गाना एड करके अपलोड किया।

वीडियो वायरल होने के बाद से मामले ने तूल पकड़ा हुआ है। जानकारी होने पर पुलिस भी क्षेत्र में पहुँच गई है। पाँचों के विरुद्ध मामला दर्ज हुआ है। इनमें 2 गिरफ्तार हो गए हैं, बाकियों से पूछताछ हो रही है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरा मामला हरदा जिला मुख्यालय से दो किमी दूर उड़ा गाँव के पास का है। वहाँ सोमवार (अगस्त 30, 2021) की दोपहर कुलदीप योगी नाम के युवक को शोएब, आकिब, आरिफ, इकबाल और सैफ ने रोका और उसे लात-घूँसों से पीटने लगे।

एसपी मनीष अग्रवाल ने बताया कि इस मामले में दो रिपोर्ट दर्ज की गई हैं। एक मामला पीड़ित ने ही दर्ज करवाया है जबकि दूसरा केस अभिषेक राठौर ने करवाया है। राठौर ने गाँव में दहशत फैलाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर करवाई है।

वीडियो में देख-सुन सकते हैं कि सारे युवक कैसे पीड़ित को मार रहे हैं और पीछे गाना चल रहा है ‘न लोड पड़े हथियारों की’। इस वीडियो को आरोपितों ने ही वायरल किया। अब युवक के परिवार वाले और उसके समाज के लोग यह सब देख गुस्से में हैं। मामले की जानकारी होने पर पुलिस रात में ही गाँव पहुँची और इकबाल, शोएब,आरिफ, आकिब और सैफ के खिलाफ मारपीट, दहशत फैलाने सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया।

पीड़ित ने बताया कि उसे कब्रिस्तान में बुला कर मारपीट की गई और इस दौरान गंदी-गंदी गालियाँ भी दी गईं। पीड़ित के मुताबिक, उसे हाथ, पैर, गालों में चोटें आई हैं। इसके अलावा उसे धमकी दी गई है कि यदि वह दोबारा उनसे (आरोपितों से) उलझा तो उसे जान से मार दिया जाएगा। इस केस को पुलिस ने 294, 323,506 और 34 के तहत दर्ज किया है। बाकी तीनों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।