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Tokyo Olympics 2020: रेसलर रवि कुमार दहिया ने फाइनल में बनाई जगह, भारत का एक और मेडल हुआ पक्का

परुषों की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती में भारत के रवि कुमार दहिया (Ravi Kumar Dahiya) ने फाइनल में अपनी जगह बना ली है। इसी के साथ टोक्यो ओलंपिक्स में भारत का चौथा मेडल भी पक्का हो चुका है। बुधवार (4 अगस्त, 2021) को खेले गए सेमीफाइनल मैच में रवि ने कजाकिस्तान के नूरइस्लाम सानायेव को मात दिया। ओलंपिक्स में कुश्ती के फाइनल में पहुँचने वाले दहिया दूसरे भारतीय हैं। इससे पहले यहाँ तक सुशील कुमार पहुँचे थे।

बता दें कि रवि दहिया ने पहले दौर में कोलंबिया के टिगरेरोस उरबानो आस्कर एडवर्डो को 13-2 से हराने के बाद बुल्गारिया के जॉर्जी वेलेंटिनोव वेंगेलोव को 14-4 से हराया था। ऐसे में उन्हें फाइनल मुकाबले में प्रवेश का प्रबल दावेदार माना जा रहा था।

बुल्गारिया के जॉर्जी वेलेंटिनोव वेंगेलोव के खिलाफ दहिया शुरू से ही हावी रहे और उन्होंने उन्हें इस मैच में कोई मौका नहीं दिया। इससे पहले प्री-क्वॉर्टर फाइनल में रवि कुमार और कोलंबिया के पहलवान के बीच पहले राउंड की शुरुआत में कड़ा मुकाबला देखने को मिला। दहिया ने शानदार प्रदर्शन कर पहले मिनट में दो अंक हासिल किए, लेकिन उरबानो ने रिवर्स टेकडाउन से स्कोर बराबर कर लिया। इसके बाद रवि ने वापसी की और एक और अंक अर्जित किया। इसके साथ ही वो टिगरेरोस उरबानो से पहला राउंड 13-2 से जीतने में कामयाब रहे। सेमीफाइनल में पुनिया का सामना अमेरिका के पहलवान डेविड टेलर से होगा।

बता दें कि इससे पहले भारतीय महिला बॉक्सर लवलीना बोरगेहेन को टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक प्राप्त हुआ है। हालाँकि, सेमीफाइनल में उन्हें तुर्की की बुसेनज सुरमैनेली ने हरा दिया। 23 वर्ष की लवलीना बोरगेहेन ने पहले ही भारत के लिए मेडल सुनिश्चित कर लिया था। उन्हें वीमेंस वेल्टरवेट (69 किलोग्राम) वर्ग में ये ख़िताब प्राप्त हुआ। पहले दोनों राउंड में लवलीना ने अच्छी शुरुआत की, लेकिन तुर्की की खिलाड़ी ने अंतिम कुछ सेकेंड्स में वापसी की।

‘धर्म में मेरा भरोसा, कर्म के अनुसार चाहता हूँ परिणाम’: कोरोना से लेकर जनसंख्या नियंत्रण तक, सब पर बोले CM योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने स्पष्ट विचारों और सीधी बात के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कई बार विभिन्न मंचों से अपनी बात जनता के सामने रखी। इसी क्रम में द हिन्दू को दिए गए साक्षात्कार में भी सीएम योगी आदित्यनाथ ने धर्म, देश-प्रदेश की राजनीति, राज्य में कानून व्यवस्था, Covid-19 और कई अन्य मुद्दों पर बात की। इसके साथ ही उन्होंने किसान आंदोलन और जनसंख्या नियंत्रण पर भी अपने विचार रखे।

भगवान पर भरोसा, अंधविश्वास में नहीं

पत्रकारों ने सीएम आदित्यनाथ से नोएडा और बिजनौर के विषय में प्रश्न किया जिसके बारे में कहा जाता रहा है कि उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री कभी भी इन जिलों का दौरा नहीं करता क्योंकि ऐसा करने से वह अगला चुनाव हार जाता है। सपा शासन के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री रहे अखिलेश यादव समेत कई अन्य मुख्यमंत्री भी कभी इन जिलों के दौरों पर नहीं गए। इसके बारे में सीएम आदित्यनाथ ने कहा कि नोएडा और बिजनौर के बारे में कुछ भी कहा जाए, वह उनके कर्त्तव्य के रास्ते में नहीं आ सकता क्योंकि वह पूरे राज्य के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि वह भगवान पर भरोसा करते हैं और अपने धर्म एवं परम्पराओं का पालन करते हैं लेकिन उन्हें इस तरह के अंधविश्वास में कोई रुचि नहीं है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि वह अपने कर्मों के अनुसार ही परिणाम की प्राप्ति करना चाहते हैं।

सीएम आदित्यनाथ ने बताया कि मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के अंतर्गत विधायकों को किसी भी धार्मिक स्थान के सौंदर्यीकरण का सुझाव देने के लिए कहा गया है। इनके लिए सरकार फंड मुहैया कराएगी। हालाँकि अब सपा विधायक भी दरगाह या मस्जिद की जगह मंदिर का सुझाव दे रहे हैं, ऐसे में अधिकतर सुझाव मंदिरों के हैं।

कानून तोड़ने वाले को मिलेगी सजा

राज्य में कानून व्यवस्था और विपक्षी पार्टियों द्वारा ब्राह्मण-विरोधी कार्रवाई करने के आरोप के बारे में सीएम आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार ने कभी भी जाति, वर्ण अथवा समुदाय देखकर कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि जिसने भी राज्य में कानून तोड़ने की कोशिश की उसके खिलाफ कार्रवाई की गई और सपा-बसपा को समाजिक सौहार्द्र के बारे में बात करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उनका इतिहास ही सामाजिक द्वेष फैलाने का रहा है। सीएम आदित्यनाथ ने ब्राह्मणों को लेकर चल रही राजनीति पर कहा कि विपक्षी पार्टियाँ अपनी खिसकती राजनीतिक जमीन बचाने के लिए यह सब कर रही हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के विषय में उन्होंने कहा कि उनकी सरकार में NSA का उपयोग समुदाय देखकर नहीं हुआ बल्कि राज्य में कानून व्यवस्था स्थापित करने के लिए जहाँ जरूरी समझा गया वहाँ जाँच करने के बाद ही NSA के अंतर्गत कार्रवाई की गई। सीएम आदित्यनाथ ने यह भी बताया कि राज्य में अशांति फैलाने के लिए दंगों की साजिश की गई जिसके कारण राज्य सरकार दंगाईयों की संपत्ति को जब्त करने का कानून लेकर आई क्योंकि किसी को भी सार्वजानिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का कोई अधिकार नहीं है।

Covid-19, किसान आंदोलन और जनसंख्या नियंत्रण कानून

सीएम आदित्यनाथ ने Covid-19 महामारी के दौरान राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि महामारी की पहली लहर के दौरान भी दूसरे राज्यों में फँसे छात्रों और मजदूरों के लिए व्यवस्था की गई थी। हालाँकि इस दौरान भी कई नेताओं के द्वारा अशांति फैलाने का प्रयास किया गया था। उन्होंने कहा कि दूसरी लहर के दौरान भी गंगा के किनारे दफनाई गई लाशों और पानी में तैरते शवों के आधार पर राज्य सरकार पर आरोप लगाया गया लेकिन यह पहले से होता आया है। कई समुदायों में गंगा किनारे लाशों को दफनाने और पानी में शवों को प्रवाहित करने की प्रथा रही। हालाँकि सरकार ने इसके विषय में प्रयास किया है और लोगों को जागरुक किया।

सीएम आदित्यनाथ ने कहा कि दूसरी लहर के दौरान जब स्वास्थ्य सुविधाओं पर दबाव बढ़ गया तब भी राज्य सरकार ने महामारी को नियंत्रित करने के लिए ऑक्सीजन और अन्य दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए अपने प्रयास में कोई कमी नहीं रखी। गाँवों में लगातार जाँच की गई और यही कारण है कि आज भी यूपी सर्वाधिक टेस्ट कर रहा है और न्यूनतम संक्रमण दर देखने को मिल रही है।

केंद्रीय कृषि सुधार कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलनों के बारे में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने किसानों के लिए लगातार योजनाएँ चलाई हैं जिनसे किसानों को लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में चल रहा किसान आंदोलन राजनैतिक है और यूपी के आम लोग और किसान इस आंदोलन का कभी समर्थन नहीं करेंगे।

सीएम आदित्यनाथ ने जनसंख्या नियंत्रण पर बात करते हुए कहा कि यह आज की जरूरत है और जनसंख्या नियंत्रण बिल सार्वजनिक कर दिया गया है जिस पर लोगों के सुझाव आमंत्रित हैं।

शराब के नशे में धुत लड़की जब बीच सड़क पर करने लगी स्ट्रेचिंग, देखें वायरल वीडियो

पुणे की सड़क पर मंगलवार (अगस्त 3, 2021) को एक अजीब नजारा देखने को मिला जब शराब के नशे में धुत एक लड़की बीच सड़क पर बैठकर व्यायाम करने लगी। घटना की वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें नजर आ रहा है कि युवती कैसे शराब के नशे में पुणे की चलती सड़क पर लेट कर एक्सरसाइज वाले पोज दे रही और इसकी वजह से कई गाड़ियों को रास्ता बदल-बदल कर जाना पड़ रहा है।

मात्र 15 सेकेंड की वीडियो में दिख रहा है कि बीच सड़क पर रेड टॉप और ब्लैक पैंट में एक लड़की बैठी है। वो कभी स्ट्रेचिंग करती है तो कभी सड़क पर लेट जाती है। इस बीच आगे पीछे गाड़ियाँ चलती रहती हैं और उसे देख थोड़ा साइड से निकल जाती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पूरी घटना महाराष्ट्र के स्वरगेट इलाके की है। लड़की ने शराब ज्यादा पी ली थी, इसलिए उसे होश नहीं था कि वो क्या कर रही है। लेकिन पुलिस के पहुँचने के बाद लड़की वहाँ से उठकर चली गई।

स्वरगेट पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक बालासाहेब कोपनार ने कहा, “घटना मंगलवार रात करीब 11 बजे हीराबाग के पास हुई। हमें कुछ लोगों का फोन आया कि एक महिला सड़क पर सीन कर रही है। हालाँकि, जब उसने पुलिसकर्मियों को अपने पास आते देखा, तो वह उठ गई और चली गई।” पुलिस का कहना है कि अभी उन्होंने इस संबंध में कोई केस दर्ज नहीं किया है। उन्हें बस कुछ लोगों का फोन आया था इसलिए वह घटना वाली जगह पहुँचे थे।

वहीं सोशल मीडिया पर भी इस वीडियो को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। कुछ लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं कि यही तो लिंग समानता है। वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि सोशल मीडिया पर हर किसी के लिए कुछ भी मजाक का विषय बन जाता है लेकिन कोई ये नहीं सोचता कि लड़की किसी की बहन भी हो सकती है। उसके घरवाले उसकी चिंता कर रहे होंगे।

वाराणसी के एक गाँव का हिंदू परिवार, लालच दे बना रहे थे ईसाई: महिला समेत 3 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र के करखियाँव गाँव में गरीब हिंदू परिवारों को लालच देकर उनका ईसाई धर्मान्तरण कराने की कोशिश करने का मामला सामने आय़ा है। इस मामले में तीन लोगों को ग्रामीणों और हिंदू जागरण मंच के लोगों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया है।

गिरफ्तार किए गए आरोपितों में एक महिला भी है। तीनों एक गरीब हिंदू परिवार लालजी विश्वकर्मा के घर आए थे। ये उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के एवज अच्छी शिक्षा, पैसा और परवरिश का प्रलोभन दे रहे थे। आरोपितों में से एक नील तुरै मूल रूप से तमिलनाडु से है औऱ वाराणसी के वीरभानपुर गाँव में रहता है। दो अन्य विजय कुमार और उसकी पत्नी जिले के ही भाऊपुर गाँव के रहने वाले हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि तीनों को अक्सर गाँवों में आर्थिक रूप से कमजोर और कम पढ़े-लिखे लोगों को ईसाई धर्मान्तरण का लालच देते देखा गया है। इस मामले में हिंदू जागरण मंच के प्रदेश मंत्री गौरीश सिंह ने कहा कि मंगलवार (3 अगस्त 2021) को उन्हें ग्रामीणों से इन तीनों के करखियाँव गाँव में आकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए दवाब डालने की जानकारी मिली थी। मौके पर पहुँचने के बाद इनके पास से ईसाई धर्म से जुड़ी पुस्तकें मिलीं। आरोपितों ने दो घरों में धर्मान्तरण कराने की कोशिश की बात भी कबूली।

गौरीश सिंह की शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीनों को हिरासत में ले लिया है। फूलपुर के थाना प्रभारी सुनील सिंह का कहना है कि इनसे पूछताछ की जा रही है। इससे पहले भी वाराणसी के जंसा, फूलपुर औऱ चौबेपुर जैसी जगहों पर धर्मान्तरण कराने के कई मामले सामने आए थे। उन मामलों में पुलिस ने कार्रवाई भी की थी।

ईसाई बने तो नहीं ले सकते SC वर्ग के लिए चलाई जा रही केंद्र की योजनाओं का फायदा: संसद में मोदी सरकार

केंद्र सरकार ने मंगलवार (अगस्त 3, 2021) को संसद में एक सवाल का जवाब देते हुए यह साफ कर दिया कि कोई भी व्यक्ति जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म से अलग धर्म का अनुसरण करता है उसे अनुसूचित जाति वर्ग का नहीं माना जाएगा। सरकार ने कहा कि उनकी योजनाओं का उद्देश्य अनुसूचित जाति का कल्याण और विकास है। उनका लाभ कन्वर्टेड ईसाइयों को नहीं दिया जा सकता।

केंद्र सरकार ने यह जानकारी आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा 30 जुलाई को जारी एक आदेश के संबंध में दी। इसमें कहा गया था कि राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जातियों (हिंदुओं) को दी गई गैर-सांविधिक रियायतें अनुसूचित जाति के ईसाई और बौद्ध धर्म में परिवर्तित लोगों को दी जाएँगी। हालाँकि केंद्र सरकार ने इस मामले पर कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार की योजना केंद्र से मिलने वाले लाभों पर लागू नहीं होगी।

आंध्र प्रदेश में ईसाई धर्म अपनाने वाले 80% SC

रिपोर्ट्स के अनुसार, आंध्र प्रदेश में ईसाई धर्म में कन्वर्ट होने वाले 80 प्रतिशत लोग SC वर्ग से आते हैं और 1977 के आदेश के तहत योजनाओं से मिलने वाले हर किस्म के लाभ का फायदा भी उठाते हैं। फिर चाहे वह कोई आवास योजना हो, फ्री बिजली की व्यवस्था हो या फिर लोन लेना आदि। लेकिन, बता दें 1950 के राष्ट्रपति के आदेश में कहा गया है कि ‘केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्मों को मानने वालों को ही हिंदू माना जाएगा। जिस क्षण कोई मौजूदा अनुसूचित जाति का व्यक्ति उपरोक्त धर्मों का पालन और पालन करना बंद कर देता है, वह अनुसूचित जाति नहीं रह जाता है और अनुसूचित जाति के लिए कोई लाभ उसे या उसके लिए नहीं दिया जा सकता है।’ इसलिए इसी आदेश के अनुसार अगर कोई अनुसूचित वर्ग का व्यक्ति ईसाई धर्म अपनाता है तो उसे इसके फायदे नहीं मिलेंगे।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी सरकार द्वारा ईसाइयों को दी जाने वाली मुफ्त की सुविधाओं पर विशेषज्ञों ने चिंता जाहिर की थी। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की मुफ्तखोरी से न केवल जनता के पैसे का नुकसान हो रहा बल्कि तुष्टिकरण की योजनाओं से आंध्र प्रदेश के नागरिकों को धर्मांतरण के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार, आंध्र प्रदेश की कुल आबादी मे ईसाई समुदाय का लगभग 1.4% हिस्सा है, हालाँकि, धर्मांतरण की बढ़ती घटना के कारण राज्य में इनकी संख्या अधिक होने का अनुमान है।

साल 2020 में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने आंध्र प्रदेश समाज कल्याण विभाग को हिंदू एससी / ओबीसी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग करके आपदा राहत कोष के तहत मानदेय प्राप्त करने वाले ईसाई पादरियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इस संबंध में लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम ने आवाज उठाई थी और पूरे स्कैम पर सरकार का ध्यान दिलाया था।

‘जब बिल आया तो राहुल, सोनिया कहाँ थे?’ – कृषि बिल को लेकर सड़क पर भिड़े हरसिमरत कौर और कॉन्ग्रेस MP रवनीत सिंह: देखें Video

केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध को लेकर विपक्ष संसद के मानसून सत्र में लगातार हंगामा कर रहा है। इसका असर अब संसद भवन के बाहर भी दिखने लगा है। इस क्रम में बुधवार (4 अगस्त 2021) को शिरोमणि अकाली दल की नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल औऱ कॉन्ग्रेस के सांसद रवनीत सिंह राणा के बीच सड़क पर जमकर जुबानी बहस हो गई। कॉन्ग्रेस नेता ने हरसिमरत कौर बादल पर केंद्र सरकार की मदद करने का आरोप लगाया, जिस पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कॉन्ग्रेस पर इस मुद्दे से भागने का आरोप लगाया है।

समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, शिरोमणि अकाली दल के कार्यकर्ताओं के साथ हरसिमरत कौर बादल संसद भवन के बाहर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रही थीं, उसी दौरान उनकी कॉन्ग्रेस सांसद के साथ बहस हुई। इस दौरान कॉन्ग्रेस सांसद ने उन पर ड्रामा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस वक्त सदन में ये बिल पेश किया गया उस दौरान इनकी पार्टी (शिअद) सरकार के साथ थी। बिल पास होने के बाद इन्होंने घर जाकर इस्तीफा दिया।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस सांसद रवनीत राणा के आरोपों को हरसिमरत कौर ने तुरंत ही खारिज कर दिया औऱ उन्होंने कॉन्ग्रेस पर भागने का आरोप लगाया। इसके बाद रवनीत राणा ने कहा कि जिस दिन इस बिल को पेश किया गया, उस दिन तो हरसिमरत कौर ने एक बार भी इस बिल का विरोध नहीं किया।

इस पर शिरोमणि अकाली दल की नेता ने रवनीत राणा से पूछा, “उस दिन दौरान राहुल गाँधी औऱ सोनिया गाँधी कहाँ थे, जब किसान बिल लाया गया था? सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी ने कृषि बिल के विरोध में सदन में अपनी बात क्यों नहीं रखी? इस पार्टी (कॉन्ग्रेस) ने सदन से वॉक आउट करके कृषि बिल को पास कराने में मदद की।”

इसके बाद संसद के अंदर जाते हुए कॉन्ग्रेस सांसद ने पत्रकारों से बात करते हुए शिरोमणि अकाली दल पर किसानों को मारने की कोशिश करने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि अब ये लोग ड्रामा कर रहे हैं।

‘नंगी होकर होटल के कमरे से बाहर आती थी, पुलिस को डराती थी’: नाराज़ ऑस्ट्रेलिया ने ब्रिटिश कमेंटेटर को वापस भेजा

यूनाइटेड किंगडम की ‘यूके इंडिपेंडेन्स पार्टी’ से जुड़ीं राजनीतिक विश्लेषक केटी हॉपकिंस ने स्वीकार किया है कि जब वो जुलाई 2021 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में गई थीं तो उन्होंने जानबूझ कर कोरोना वायरस दिशानिर्देशों व क्वारंटाइन के नियमों का उल्लंघन किया था। सिडनी में उन्हें एक होटल में क्वारंटाइन कर के रखा गया था। वहाँ से लौटने के बाद उन्होंने बड़े गर्व से अपने इंस्टाग्राम फॉलोवर्स को इस वाकये के बारे में बताया।

बतौर केटी हॉपकिंस, वो सिक्योरिटी गार्ड्स के सामने न्यूड होकर चली जाती थीं और मास्क भी नहीं लगाती थीं। उनका कहना है कि वो सुरक्षाकर्मियों को डराने के लिए ऐसा करती थीं। केटी हॉपकिंस ने बताया कि होटल में जिस पुलिसकर्मी ने उनका चेकइन कराया था, उसने कहा था कि दरवाजा खटखटाए जाने के 30 सेकेंड बाद उन्हें बाहर निकलना है और अपने भोजन लेना है। लेकिन, इस दौरान वो फेस मास्क पहनी होनी चाहिए।

केटी हॉपकिंस ने हँसते हुए इंस्टाग्राम पर ये वाकया शेयर किया। उन्होंने बताया कि जैसे ही उनका दरवाजा खटखटाया जाता था, वो जल्द से जल्द इसे खोलने की कोशिश करती थीं और 30 सेकेंड के इंतजार वाले नियम को धता बताती थीं। उन्होंने बताया “मैं इन सुरक्षाकर्मियों को डराने के लिए बिना मास्क के, नंगी होकर दरवाजा खोल देती थी। मैं बाहर निकल कर तब तक नंगी खड़ी हो जाती थी, जब तक पुलिसकर्मी मुझे जाने को नहीं कहते थे।” इस खुलासे के बाद ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें वापस ब्रिटेन डिपोर्ट कर दिया है।

कई लोगों ने उनके इस व्यवहार की निंदा की है। हालाँकि, उन्होंने अपने ये इंस्टाग्राम वीडियो हटा लिया है। विक्टोरियन सांसद एंड्रू गिल्स ने कहा कि इस महामारी फ्रंटलाइन वर्कर्स हमें सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं, उनके साथ इस तरह का व्यवहार काफी अपमानजनक है। एक सांसद ने कहा कि ये वही महिला है जिसे इस्लाम को ‘घिनौना’ कहा था और शरणार्थियों को ‘कॉकरोच’ बता कर ‘फाइनल सॉल्यूशन’ की बात की थी। 17 जुलाई को उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में कोरोना नियमों के उल्लंघन वाला खुलासा किया था।

केटी हॉपकिंस ने ये भी बताया कि वो 28वें माले पर स्थित अपने कमरे की खिड़की के सामने नंगी खड़ी हो जाती थीं, ताकि नीचे से सुरक्षाकर्मी देख सकें। कई लोगों को तो इस बात से आश्चर्य हुआ कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया का वीजा कैसे मिल गया। असल में उन्हें एक शो में हिस्सा लेने के लिए वहाँ बुलाया गया था। केटी हॉपकिंस लॉकडाउन को एक मजाक भी बता चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि वो लॉकडाउन में विश्वास नहीं रखतीं। उन्होंने कहा कि कोरोना के चंद मामले ही आए थे, लेकिन सिडनी और मेलबर्न में लॉकडाउन लगा दिया गया।

‘इस महीने का चेक नहीं पहुँचा या पेमेंट रोक दी गई?’: केजरीवाल के 2047 वाले विज्ञापन के बाद ट्रोल हुए ‘क्रांतिकारी पत्रकार’

सोशल मीडिया पर लोग ‘क्रांतिकारी पत्रकार’ पुण्य प्रसून बाजपेयी को ट्रोल कर रहे हैं। असल में उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी (AAP) के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की आलोचना की है। जी हाँ, आपने बिलकुल ठीक पढ़ा। पुण्य प्रसून बाजपेयी ने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा है। कई अख़बारों के प्रथम पृष्ठ पर दिए गए दिल्ली सरकार के विज्ञापनों की तस्वीरें ट्वीट करते हुए उन्होंने कुछ ऐसा कहा, जिससे लोग हैरान हो गए।

पुण्य प्रसून बाजपेयी ने लिखा, “गज़ब.. 2047 तक दिल्ली वर्ल्ड क्लास सिटी.. यानी, अगले 5 चुनाव में जिताएँ, 79 साल की उम्र तक मुख्यमंत्री बनाएँ, और टैक्सपेयर्स के पैसे पर प्रचार अभी से पाएँ।” जिन अरविंद केजरीवाल के साथ इंटरव्यू की ‘सेटिंग’ करते समय बाजपेयी को ‘क्रांतिकारी’ का ख़िताब मिला था, उसके लिए ही इस तरह के शब्दों का प्रयोग किए जाने पर लोगों को हैरानी हुई। पुण्य प्रसून बाजपेयी अपने मोदी-विरोधी प्रोपेगंडा के लिए जाने जाते हैं।

लेखक आनंद कुमार ने तंज कसते हुए लिखा, :तो क्या पुण्य प्रसून बाजपेयी जैसे पक्षकार भी मोदी की गोद में जा बैठे हैं जो ऐसे ट्वीट करके ‘क्रांतिकारी, बहुत क्रांतिकारी अरविंद केजरीवाल सड़ जी के खिलाफ उतर आए?” वहीं ‘देसी फॉक्स’ नाम के ट्विटर हैंडल ने लिखा, “अरे क्या हुआ क्रांतिकारी पत्रकार जी? इतनी जल्दी? पैसा नहीं मिल रहा या कुछ और झमेला है? स्वतंत्र पत्रकार बनने का कीड़ा काट गया क्या?”

डॉक्टर कीटाणु किलर ने लिखा, “बाजपेयी साहब जब इस तरीके से ट्वीट करते हैं तो शक होता है कहीं ऐसा तो नहीं है कि पेमेंट लेट आ रही है?” वहीं हेमंत गुप्ता नामक ट्विटर यूजर ने इसे ‘पेमेंट का रिमाइंडर’ बताया। वहीं ‘विश्वस्तमा’ नामक हैंडल ने भी उनसे पूछा क्या इस महीने पैसे नहीं पहुँचे हैं? हेमंत पाठक ने पूछा कि कहीं उन्होंने केजरीवाल से राज्यसभा तो नहीं माँगा था? पत्रकार आशुतोष भी यही माँग पूरी न होने के कारण AAP से निकले थे।

दिनेश सिंह रावत ने पूछा कि कहीं उनकी तबीयत तो नहीं खराब हो गई? उन्होंने लिखा, “जिस अरविंद केजरीवाल के क्रांतिकारी इंटरव्यू के चक्कर में इन्होंने अपना करियर बर्बाद कर लिया, आप उन्हीं के विज्ञापन पर कटाक्ष कर रहे हैं?” रणवीर सिंह बिष्ट ने आशंका जताई कि ‘क्रांतिकारी महोदय’ के पैसे रुके हुए हैं, इसीलिए आज वो कटाक्ष पर उतर आए हैं।

एचएम राठी नामक व्यक्ति ने पूछा, “क्या हुआ भाई? चेक नहीं आया क्या इस बार, जो उलटी गंगा बहा रहे आज?” नीरज नामक यूजर ने भी हैरानी जताते हुए लिखा, “कहाँ से सूरज उदित हुआ है आज? क्या बात है? इस महीने की किश्त नहीं मिली क्या?” वहीं कुछ AAP समर्थकों ने तो उन्हें ‘कॉन्ग्रेस का एजेंट’ करार दिया। गोपाल नाम के यूजर ने पूछा कि आज अचानक से ‘ज्ञान चक्षु’ खुल गए या मदद रोक दी गई?

इसी साल 26 जनवरी को हुई किसानों की हिंसा के बाद पुण्य प्रसून ने लिखा ता कि AAP के मुखिया किसान आंदोलन का समर्थन करते हैं। उन्होंने लिखा था कि योगेन्द्र यादव किसान आंदोलन के नेता हैं लेकिन दोनों एक-दूसरे को बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। साथ ही सुझाव दिया था कि दोनों को अपने मतभेद भुलाकर साथ आना चाहिए तभी यह आंदोलन सफल होगा। बाजपेयी ने लिखा था, “बँटने से बचें, मौकापरस्ती छोड़ें और साथ आएँ। तभी सफल होंगे।”

चीनी पहलवान को पटखनी दे सेमीफाइनल में दीपक पुनिया, मेडल की रेस में रवि दहिया भी

भारतीय पहलवान दीपक पुनिया ने टोक्यो ओलंपिक में कुश्ती स्पर्धा के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्रीस्टाइल 86 किलोग्राम भारवर्ग में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले पुनिया ने चीनी पहलवान जुशेन लिन को 6-3 के अंतर से हराकर पुरुषों की फ्रीस्टाइल के सेमीफाइनल में प्रवेश किया। अब वह सेमीफाइनल में अमेरिका के डेविड मॉरिस टेलर से भिड़ेंगे।

इससे पहले उन्होंने क्वार्टर फाइनल में नाइजीरिया के एकेरेकेमे एजियोमोर को हराया था। सेमीफाइनल 5 अगस्त (गुरुवार) को होंगे। पुनिया टोक्यो ओलंपिक 2021 में देश के लिए पदक सुनिश्चित करने से बस एक जीत की दूर पर हैं। पुनिया के अलावा, भारत के पहलवान रवि दहिया ने भी 57 किलोग्राम भारवर्ग में पुरुष फ्रीस्टाइल के क्वार्टर फाइनल में बुल्गारिया के जॉर्जी वांगेलोव को 14-4 के बड़े अंतर से हराकर सेमीफाइनल में अपनी जगह बनाई है।

दोनों पहलवान आज ही सेमीफाइनल के लिए भिड़ेंगे औऱ अगर सबकुछ ठीक रहा तो भारत की झोली में दो और मेडल शामिल हो सकते हैं। इस ओलंपिक में भारत को अब तक तीन पदक मिले हैं। तीसरा पदक महिला बॉक्सर लवलीना बोरगेहेन ने कांस्य के रूप में जीता है। सेमीफाइनल में उन्हें तुर्की की बुसेनज सुरमैनेली से हार का सामना करना पड़ा। 23 वर्ष की लवलीना को वीमेंस वेल्टरवेट (69 किलोग्राम) वर्ग में ये ख़िताब प्राप्त हुआ।

टोक्यो ओलंपिक में भारत को तीसरा मेडल: बॉक्सर लवलीना बोरगेहेन ने जीता कांस्य पदक, जानिए असम के छोटे से गाँव से यहाँ तक का सफर

भारतीय महिला बॉक्सर लवलीना बोरगेहेन को टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक प्राप्त हुआ है। हालाँकि, सेमीफाइनल में उन्हें तुर्की की बुसेनज सुरमैनेली ने हरा दिया। 23 वर्ष की लवलीना बोरगेहेन ने पहले ही भारत के लिए मेडल सुनिश्चित कर लिया था। उन्हें वीमेंस वेल्टरवेट (69 किलोग्राम) वर्ग में ये ख़िताब प्राप्त हुआ। पहले दोनों राउंड में लवलीन ने अच्छी शुरुआत की, लेकिन तुर्की की खिलाड़ी ने अंतिम कुछ सेकेंड्स में वापसी की।

बता दें कि वो असम के गोलाघाट स्थित एक छोटे से गाँव की रहने वाली हैं। एक और बात जानने लायक है कि ये साल भी लवलीना बोरगोहेन के लिए काफी संघर्ष भरा रहा है। इसी साल लवलीना की माँ मैमोनी बोरगोहेन का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। डॉक्टरों ने बताया था कि उनकी दोनों किडनियाँ काम करने लायक नहीं बची हैं। इसके बाद लवलीना ने खुद डोनर खोजा था और अपनी कैश प्राइज से माँ का इलाज कराया। इस दौरान वो प्रैक्टिस भी करतीं और अस्पताल में माँ की सेवा भी। किडनी ट्रांसप्लांट में 25 लाख रुपए लग गए थे

अस्पताल में समय व्यतीत करने के कारण उन्हें कोरोना वायरस संक्रमण ने भी अपनी चपेट में ले लिया था। इसी बीच उन्हें 52 सदस्यीय दल के साथ ओलंपिक गेम्स की ट्रेनिंग के लिए यूरोप भी जाना था। कोरोना ने दुनिया भर में जैसा आतंक मचाया, भारत में भी उसका असर देखने को मिला। बॉक्सरों को प्रैक्टिस के लिए समय नहीं मिल पाया, इसीलिए ये ट्रेनिंग कैम्प ज़रूरी था। सरकार ने लवलीना बोरगोहेन की मदद की और असम में उनके लिए एक व्यक्तिगत ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया।

लवलीना की दोनों बहनें लीचा और लीमा भी किक बॉक्सर्स हैं। कम संसाधन होने के बावजूद माता-पिता तीनों बेटियों को खेल के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए पूरा प्रोत्साहन देते रहे हैं। तीनों बेटियों के सपने को पूरा करने के लिए माँ स्थानीय कोऑपरेटिव से लोन लिया करती थीं। अब टिकेन के पास एक छोटा सा चाय का बागान भी है। लेकिन, कभी वो मात्र 2500 रुपए का महीना ही कमाते थे। उन्होंने कहा कि फिर भी वो कभी रुपयों की कमी को बेटियों के करियर के आड़े नहीं आने देना चाहते थे। अब लवलीना बोरगेहेन को टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक मिला है।