Home Blog Page 3532

‘संस्कारी थी जब तक सहती रही, बदतमीज हो गई जब बोल पड़ी’: हनी सिंह की बीवी, घरेलू हिंसा और वायरल हो रहे पोस्ट

मशहूर रैपर यो यो हनी सिंह (हृदेश सिंह) के ख़िलाफ़ उनकी पत्नी शालिनी तलवार ने घरेलू हिंसा का मुकदमा दायर करवाया है। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने याचिका पर हनी सिंह से जवाब माँगा है। अब इस मामले की सुनवाई 28 अगस्त को होनी है। इस बीच बीते कुछ महीनों में शालिनी तलवार द्वारा किए गए कुछ सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहे हैं।

बीते दो महीने में शालिनी ने इंस्टाग्राम पर ऐसे कई पोस्ट किए हैं जो घरेलू हिंसा, पति की प्रताड़ना की ओर इशारा करते हैं। 30 मई 2021 को एक कोट पोस्ट किया है, जिसमें लिखा है, “इमोशनल पोस्ट किसी की पहचान को खत्म कर सकता है औऱ ये मनोवैज्ञानिक औऱ भावनात्मक तौर पर गलत है।”

शालिनी के 24 जून 2021 के एक अन्य पोस्ट में लिखा था, “वो संस्कारी थी जब तक सहती रही, बदतमीज हो गई जब बोल पड़ी।” इसके साथ ही उन्होंने कैप्शन में लिखा कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप कौन से समाज से हैं, पढ़े-लिखे हैं या अनपढ़ हैं। सच केवल इतना है कि हर समाज में महिलाओं की दुर्दशा एक जैसी ही होती है।

साभार: शालिनी तलवार

20 जुलाई को उन्होंने एक अन्य इंस्टाग्राम पोस्ट शेयर किया था। इसमें शालिनी ने लिखा, “कभी भी किसी को बार-बार झूठ बोलने के लिए माफ नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये उसकी चरित्रहीनता, धोखा औऱ गंदी मानसिकता का परिचायक है।”

साभार: शालिनी तलवार

इसके अलावा शालिनी ने हनी सिंह पर ये भी आरोप लगाया है कि उन्होंने कई महिलाओं के साथ ‘कैजुअल संबंध’ भी बनाए हैं।

गौरतलब है कि हनी सिंह से मिलने से पहले तक शालिनी तलवार एक मॉडल थीं। उन्होंने 2004 में आई फिल्म रन में कैमियो रोल भी किया था। कोर्ट में दी गई याचिका में शालिनी ने बताया है कि वो और हनी सिंह दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे। उन दोनों को 2001 में प्यार हुआ था। इसके बाद दोनों ने 2011 में शादी कर ली थी। हालाँकि, हनी सिंह ने अपनी शादी को पूरी तरह से सीक्रेट रखा। वर्ष 2014 में एक रियलिटी टीवी शो के दौरान पहली बार हनी सिंह ने अपनी वाइफ की पहचान को उजागर किया।

गौरतलब है कि शालिनी तलवार ने हनी सिंह के खिलाफ घरेलू हिंसा का मुकदमा दायर करवाया है। शालिनी ने ‘द प्रोटेक्शन ऑफ वुमन फ्रॉम डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट’ के तहत तीस हजारी कोर्ट में याचिका दी थी। इसमें उन्होंने उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें मारा पीटा जाता रहा, उनके बाल खींचे गए, दीवार में सिर मारा गया। उन्होंने ये भी बताया कि उन्हें हनी सिंह से शादी के बाद कभी घर में आने वाला कोई पैसा नहीं मिला।

‘अपनी बेटी की तरह रेप..’: इतना पीटा ब्रेस्ट सर्जरी करानी पड़ी, अरबपति की ‘सेक्स कालकोठरी’ में कई महिलाओं का यौन शोषण

अन्तरराष्ट्रीय अरबपति कारोबारी जॉर्ज सोरोस को ‘न्यू वर्ल्ड ऑर्डर’ बनाने के उनके पागलपन के लिए जाना जाता है, जिनकी संस्था द्वारा कई देशों में दंगों से लेकर अराजतका में फंडिंग की बात सामने आई है। अब जॉर्ज सोरोस के मनी मैनेजर रहे होवार्ड रुबिन पर BDSM सेशन के जरिए कई महिलाओं के यौन शोषण व प्रताड़ना के आरोप लगे हैं। BDSM के तहत अक्सर यौन पार्टनर को प्रताड़ित कर के ‘दर्द से मजे’ लिए जाते हैं।

होवार्ड रुबिन और उनकी पत्नी को ‘सामाजिक कार्यों के लिए बड़ा दान देने वाले’ लोगों में भी गिना जाता है। उनकी अरबों की संपत्ति है। अब मेनहट्टन में उनके एक पेंटहाउस के बारे में पता चला है, जहाँ कई ‘प्लेबॉय मॉडल्स’ के साथ उनकी तस्वीरें सामने आई हैं। कहा जा रहा है कि यहाँ वो अक्सर BDSM सेशन आयोजित किया करते थे। 66 वर्षीय रुबिन पर इसी पेंटहाउस में कई महिलाओं के साथ यौन हिंसा व प्रताड़ना के आरोप हैं।

इसे इनकी ‘सेक्स कालकोठरी’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान एक महिला को तो उन्होंने इतनी बुरी तरह पीटा कि उसका ब्रैस्ट ही डैमेज हो गया। वो इतनी जख्मी हो गई थीं कि प्लास्टिक सर्जनों ने भी उनका ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया था। एक BDSM सेशन के लिए प्रत्येक महिला को $5000 (3.70 लाख रुपए) दिए जाते थे। लेकिन, पीड़ित महिलाओं का कहना है कि जिस तरह की हिंसा उनके साथ हुई और जो अपमान किया गया, उनकी उन्हें आशंका नहीं थी।

इसी तरह की एक पीड़िता ने अपना दर्द बताया है, जिसे रुबिन अपनी कालकोठरी में ले गए थे। उन्होंने उससे कहा था, “मैं उसी तरह तुम्हारा बलात्कार करूँगा, जैसा मैं अपनी बेटी के साथ करता हूँ।” बता दें कि रुबिन के दो बेटे और बेटी हैं। वो फ़िलहाल $41.3 मिलियन (305.97) करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं, लेकिन उनका कारोबार इससे कहीं ज्यादा फैला हुआ है। उनकी पत्नी ने 2017 में तलाक के लिए आवदेन देते हुए भी उन पर कई आरोप लगाए थे।

जॉर्ज सोरोस के साथ काम करने वाले एक अधिकारी का कहना है कि होवार्ड रुबिन उन्हें एक विनम्र यहूदी व्यक्ति लगे थे, लेकिन वो ये जान कर आश्चर्यचकित हो गई थीं कि सेक्स के लिए उन्होंने अलग से एक कालकोठरी बना रखी है। कभी-कभी तो वो दफ्तर में भी नियंत्रण से बाहर हो जाते थे। ऑफिस में घाटा होने पर वो कुर्सियाँ फेंका करते थे। 2017 में फ्लोरिडा की 2 मॉडल्स ने उन पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे।

उन पर मानव तस्करी के भी आरोप हैं। लड़कियों को खरीद कर लाने और फिर उनके साथ यौन हिंसा करने के आरोप उन पर लगे थे। एक बार उन्होंने एक महिला को ड्रग का आदी बना दिया था और अपने 6 BDSM पार्टनर्स के साथ यौन हिंसा की थी। इन महिलाओं का कहना है कि उन्हें बस गेम्स और फोटो सेशन के लिए वहाँ लाया गया था, लेकिन उसके बाद जो हुआ उसकी उम्मीद नहीं थी। महिलाओं के साथ करार तो होते थे लेकिन एग्रीमेंट के पेपर्स पढ़ने के लिए उन्हें वक़्त ही नहीं दिया जाता था।

जॉर्ज सोरोस अपने भारत विरोधी फंडिंग के लिए जाने जाते हैं और उन्होंने ‘राष्ट्रवाद व हिंदुत्व’ के खिलाफ लड़ाई के लिए बड़ी फंडिंग की है। हंगरी-अमेरिकी अरबपति कारोबारी ने कम से कम 30 देशों में अपना प्रभाव जमा रखा है। उन्होंने अपने NGO ‘ओपन सोसाइटी’ के जरिए एमनेस्टी सहित कई संस्थाओं को फंडिंग की है। बराक ओबामा के काल में उनके OSF ने भारत में पाँव जमाने की कोशिश की थी।

भारतीय हॉकी का ‘द ग्रेट वॉल’: जिसे घेर कर पीटने पहुँचे थे शिवसेना के 150 गुंडे, टोक्यो ओलंपिक में वही भारत का नायक

आपने क्रिकेटर राहुल द्रविड़ का नाम सुना होगा। आप उन्हें ‘द वॉल’ भी कहते होंगे। लेकिन, क्या आप एक ऐसे हॉकी खिलाड़ी को जानते हैं, जिसकी गोलकीपिंग से प्रभावित होकर लोगों ने उसे ‘द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया’ बुलाना शुरू कर दिया। PR श्रीजेश हॉकी की दुनिया में एक ऐसा ही नाम हैं। वो भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान हैं। ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ टोक्यो ओलंपिक सेमीफाइनल में उनके प्रदर्शन की विरोधियों ने भी दाद दी। लेकिन, क्या आपको पता है कि शिवसेना वाले उन्हें पीटने वाले थे?

आपने बिलकुल ठीक पढ़ा है। ये बात अब की नहीं, आज से साढ़े 8 साल पहले की है। जनवरी 2013 में शिवसेना वालों ने उनसे पूछा था – “क्या तुम पाकिस्तानी हो?” अपने ही देश में राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ी के साथ इस तरह का व्यवहार होते देख कर PR श्रीजेश को हैरत हुई, लेकिन उन्होंने जवाब दिया – “यार, तुमलोग अपने भारत के खिलाड़ियों पहचानते ही नहीं हो तो पाकिस्तानी खिलाड़ियों को कैसे पहचानोगे?”

असल में शिवसेना वाले पाकिस्तानी हॉकी खिलाड़ियों को ढूँढ कर पीटने गए थे। तब शिवसेना ने ‘हॉकी इंडिया लीग’ में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के हिस्सा लेने के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ था। महिंद्रा हॉकी स्टेडियम में उन्होंने ‘मुंबई मैरीन हॉकी टीम’ को प्रैक्टिस करने से रोक दिया था। वहाँ कोई पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं था। लेकिन, शिवसेना के 150 उपद्रवी जमा हो गए और उन्होंने ड्रेसिंग रूम में जाने की जिद ठान दी।

फिर भी वो खुद से जाकर जाँच करने की बात कहने लगे। जब वो गए तो उन्हें PR श्रीजेश मिले, जिनसे शिवसेना वालों ने पूछा कि क्या तुम पाकिस्तानी हो? PR श्रीजेश का कहना है कि ये सब उन्हें काफी हास्यास्पद लगा था। वहाँ शिवसेना वालों के आने से पहले 4 पाकिस्तानी खिलाड़ी थे, लेकिन उन्हें पहले ही कहीं और सुरक्षित पहुँचा दिया गया था। PR श्रीजेश का कहना था कि एक भारतीय खिलाड़ी को पाकिस्तानी कहा जाएगा, इसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी। भारत के लिए ओलंपिक खेलने वाले इन्हीं PR श्रीजेश को कभी शिवसेना के गुंडे पीटने वाले थे।

अब टोक्यो ओलंपिक में इन्हीं PR श्रीजेश ने धमाल मचाया। आज से 12 वर्ष पहले वो भारतीय टीम में जगह के लिए निश्चित नहीं थे, लेकिन तब गोलकीपर रहे बलजीत सिंह को उनकी प्रतिभा के बारे में पता था। 2009 में कॉमनवैल्थ गेम्स से पहले एक दुर्घटना में बलजीत की पुणे में प्रशिक्षण के दौरान उनकी दाईं आँख की रोशनी चली गई थी। उनकी जगह PR श्रीजेश को लाया गया। आज आँखों में आँसू लेकर बलजीत कहते हैं कि उन्होंने सही प्रतिभा की पहचान की थी।

PR श्रीजेश अकेले ऐसे खिलाड़ी थे, जो ड्रेसिंग रूम में बलजीत से काफी सवाल किया करते थे। उनका कहना है कि केरल में जन्मे श्रीजेश न सिर्फ इस खेल की अच्छी समझ रखते हैं, मैदान पर वो एक अच्छे लीडर भी हैं। जब टोक्यो ओलंपिक क्वार्टरफाइनल में कप्तान मनप्रीत सिंह 6 मिनट के लिए खेल से बाहर हुए थे, तब PR श्रीजेश ने ही टीम को संभाला और आत्मविश्वास भरा। पिछले एक दशक से वो फ्रंट लाइन पर हैं, ऐसे में भारत को जल्द ही भविष्य के लिए उनका रिप्लेसमेंट भी ढूँढना है।

मस्जिद का 50 साल का इमाम, मदरसे की 14 साल की बच्ची को 2 दिन तक घर में बनाकर रखा बंधक; करता रहा रेप

बांग्लादेश में कोमिला के चंदिना उपजिला में 14 साल की मदरसा में पढ़ने वाली छात्रा को बंधक बनाकर दो दिनों तक रेप करने का मामला सामने आया है। आरोपित इमाम अबुल बशर को सोमवार (2 अगस्त 2021) को गिरफ्तार किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, नाबालिग के साथ कई बार बलात्कार का आरोपित अबुल बशर (50) चंदीना के तीरचर स्थित नोयाबारी मस्जिद का इमाम है।

उसे रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) ने सदर दक्षिण उपजिला से गिरफ्तार किया। उसे गिरफ्तार करने वाले आरएबी 11 सीपीसी कंपनी के कमांडर मेजर मोहम्मद साकिब हुसैन के अनुसार, इमाम बशर ने 22 से 23 जुलाई के दौरान लड़की को अपने घर में बंधक बनाकर रखा था। इसी दौरान उसने पीड़िता का बार-बार बलात्कार किया। बार-बार रेप होने से उसकी तबीयत खराब हो गई, जिसके बाद आरोपित लड़की को उसके घर छोड़कर फरार हो गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, घर पहुँचने के बाद पीड़िता ने अपने अब्बू से इसके बारे में बताया, जिसके बाद उन्होंने चंदीना थाने में इमाम बशर के खिलाफ रेप का केस दर्ज कराया। खास बात यह है कि आरोपित बशर निजी ट्यूटर के तौर पर लड़की को अरबी पढ़ाता था। फिलहाल, शिकायत के आधार पर आरएबी ने मामले की छानबीन शुरू कर दी। इस बीच पुलिस की एलीट यूनिट ने सोमवार देर रात बशर को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित ने शुरुआती पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया है कि लड़की को बरगलाकर अपने घर बुलाया था औऱ उसे कैद कर लिया।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में रेप के बढ़ते मामलों को काबू करने के लिए वहाँ की सरकार ने नवंबर 2020 में बलात्कार करने पर मौत की सजा मुकर्रर की थी, लेकिन इस कानून के बाद भी वहाँ महिलाओं से रेप की घटनाएँ लगभग हर दिन हो रही हैं। इस मामले में हाल ही में पुलिस मुख्यालय ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसके मुताबिक पिछले पाँच वर्षों में देश भर में 26,695 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए।

लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले समूह ‘अईन ओ सलीश केंद्र’ (ASK) के आँकड़े कहते हैं कि साल 2020 में 1018 बच्चों के साथ रेप की घटना हुई थी, लेकिन केवल 683 केस ही दर्ज किए गए। वहीं जिन लोगों के साथ रेप हुआ था, उनमें से 116 छह साल या उससे कम उम्र के थे।

एक अन्य आँकड़े के मुताबिक, पिछले साल कुल मिलाकर 1627 बलात्कार के केस दर्ज किए गए थे, जिसमें से 53 महिलाओं की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी, जबकि 14 ने आत्महत्या कर ली थी। हालाँकि, सहायता करने वाली एजेंसियों का कहना है कि रेप के मामले में एएसके के आँकड़े काफी कम हैं, जबकि हकीकत ये है अधिकतर महिलाएँ बलात्कार का केस दर्ज कराने से ही डरती हैं। एएसके के मुताबिक इस साल जनवरी से जून के बीच देश में 532 रेप और 139 गैंगरेप हो चुके हैं।

अफगानिस्तान के सबसे सुरक्षित इलाके में तालिबानी हमला, रक्षा मंत्री निशाना: ब्लास्ट-गोलीबारी, सड़कों पर ‘अल्लाहु अकबर’

तालिबान के आतंकियों ने अब अफगानिस्तान के सबसे बड़े शहर और वहाँ की राजधानी काबुल में दस्तक दे दी है। मंगलवार (3 अगस्त, 2021) को काबुल के विभिन्न हिस्सों में गोलीबारी और बम ब्लास्ट की आवाज़ें आईं। शहर के उस ‘ग्रीन जोन’ में भी ये सब हुआ, जो कड़ी सुरक्षा वाला इलाका है। मुल्क के अधिकतर नेताओं/अधिकारियों के आवास यहीं पर हैं। कई विदेशी राजनयिक भी यहीं पर रहते हैं।

तालिबान के आतंकियों ने अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री को निशाना बनाने की कोशिश की। इसके लिए कार बम का इस्तेमाल किया गया। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री के घर के बाहर ये बम ब्लास्ट हुआ। उनके घर के बगल में ही एक अन्य सांसद का घर है। हालाँकि, नेतागण सुरक्षित हैं। कार्यकारी रक्षा मंत्री बिस्मिल्लाह मोहम्मदी ने कहा कि उनके कुछ सुरक्षा गार्ड्स घायल हुए हैं, लेकिन वो और उनका परिवार सुरक्षित हैं।

पहले बम ब्लास्ट के बाद ही कुछ बंदूकधारी उस क्षेत्र में घुस गए थे। इसके बाद पुलिस व सुरक्षा बलों ने एक क्लीनअप ऑपरेशन चला कर आतंकियों को मार गिराया। तीन आतंकियों को मार गिराया गया है। रक्षा मंत्री के घर व गेस्ट हाउसेज की तरफ जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया गया है। इसके कुछ घंटों बाद उसी क्षेत्र में फिर से गोलीबारी हुई। सैकड़ों स्थानीय लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुँचाया गया।

सुरक्षा बल वहाँ के हर घर की तलाशी ले रहे हैं, क्योंकि आतंकी अब भी वहाँ छुपे हो सकते हैं। कम से कम 10 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल पहुँचाया गया है। पहले हमले में 6 घायलों को अस्पताल पहुँचाया गया था। हालाँकि, अब तक तालिबान ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। लेकिन, इसे तालिबान की हरकरत माना जा है है क्योंकि अमेरिकी सेना के वापस जाने के बाद से वो मुल्क के एक बड़े हिस्से पर कब्जे करने में मुहिम पर है।

काबुल के केंद्र में ये हमला हुआ, जिसे राजधानी का दिल भी कहते हैं। इस क्षेत्र को ‘रिंग ऑफ स्टील’ कहा जाता है। यहाँ कई चेकपॉइंट्स हैं। जहाँ कार बम ब्लास्ट हुआ, उससे कुछ ही दूर पर एक चेकपॉइंट है। अमेरिका ने इसे तालिबान की करतूत बताते हुए कहा है कि अफगानिस्तान सिविल वॉर की तरफ जा रहा है, जो चिंता का विषय है। स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा कि तालिबान दोहा में हुए समझौते का उल्लंघन कर रहा है।

जब पहला ब्लास्ट हुआ, तब स्थानीय युवा आसपास के रेस्टॉरेंट्स में खाने के लिए इकट्ठा हुए थे। एक रेस्टॉरेंट का वीडियो भी वायरल हुआ है, जहाँ धमाके की आवाज़ आने के बाद लोग खिड़कियों से भागते दिखे। इस दौरान बिना खाया हुआ भोजन टेबलों पर पड़ा रहा। काबुल के कमर्शियल इलाके ‘शहर-ए-नव’ में अफरा-तफरी मच गई। इस ब्लास्ट के कुछ देर बाद स्थानीय लोगों ने घर से बाहर निकल कर सेना के समर्थन में ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाए।

हाल ही में अफगानिस्तान के कार्यकारी रक्षा मंत्री बने बिस्मिल्लाह मोहम्मदी इससे पहले एक वरिष्ठ कमांडर और अफगान सेना के मुखिया भी रह चुके हैं। 20 साल पहले जब अंतरराष्ट्रीय सेनाएँ अफगानिस्तान में आईं, उससे पहले वो कमांडर हुआ करते थे। 90 के दशक में उन्होंने तालिबान से लड़ाई लड़ी है। उससे पहले वो सोवियत रूस के मुहाजिदिन आतंकियों से युद्ध कर चुके हैं। अब आतंकियों ने उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की है।

वहीं अफगानिस्तान सेना की कार्रवाई में अब तक 375 तालिबानी आतंकी मारे जा चुके हैं और 193 घायल हुए हैं। हेलमंद प्रांत की राजधानी लश्करगाह में हालिया कार्रवाई में 20 तालिबानी मारे गए। सेना ने सलाह दी है कि स्थानीय लोग तालिबान के कब्जे वाले इलाकों से कहीं और शिफ्ट हो जाएँ। अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में से 17 की राजधानियाँ तालिबान के खतरे में हैं। 2016 जिले आतंकियों के कब्जे में बताए जा रहे हैं।

एक मंदिर जिसे कहते हैं तांत्रिकों की यूनिवर्सिटी, इसके जैसा ही है लुटियंस का बनाया संसद भवन: मुरैना का चौसठ योगिनी मंदिर

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित है, चौसठ योगिनी मंदिर। भारत की तांत्रिक यूनिवर्सिटी कहे जाने वाले इस गोलाकार मंदिर से ही प्रेरित होकर भारत की संसद का निर्माण हुआ था। आज से 700 वर्षों पहले निर्मित इस मंदिर में सूर्य के गोचर के आधार पर ज्योतिष और गणित में शिक्षा प्रदान की जाती थी। कहा जाता है कि आज भी मंदिर में रात को कोई नहीं रुक सकता, न तो मानव और न ही पशु-पक्षी।

इतिहास

मुरैना के पडावली के पास मितावली गाँव में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर को एकट्टसो महादेव मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर और उसके आसपास के शिलालेखों के अनुसार इसका निर्माण सन् 1323 में गुर्जर राजा देवपाल द्वारा कराया गया था। ऐसा कहा जाता है कि मंदिर सूर्य के गोचर के आधार पर ज्योतिष और गणित में शिक्षा प्रदान करने का स्थान था। इसके अलावा यह तंत्र साधना का एक महत्वपूर्ण स्थान भी था। देश के कोने-कोने से साधक अपनी तंत्र साधना के लिए यहाँ पहुँचते थे। यही कारण है कि इस मंदिर को भारत की तांत्रिक यूनिवर्सिटी कहा जाता है।

चौसठ योगिनी मंदिर, भारत के कुछ गिने-चुने गोलाकार मंदिरों में से एक है। यहाँ 64 कक्षों का निर्माण है। प्रत्येक कक्ष में एक योगिनी और एक शिवलिंग है। सभी चौसठ योगिनियाँ माता काली का अवतार मानी जाती हैं। इन चौसठ योगिनियों में 10 महाविद्याओं और सिद्ध विद्याओं की गिनती भी की जाती है। मंदिर परिसर के मध्य में एक मंडप स्थापित है जहाँ मुख्य शिवलिंग विराजमान है।

स्थानीय निवासी आज भी मानते हैं कि यह मंदिर अभी भी शिव की तंत्र साधना के कवच ढका हुआ है। यहाँ स्थित सभी योगिनियाँ तंत्र और योग विद्या से सम्बंधित हैं, ऐसे में यहाँ आज भी योगिनियों को जागृत किया जाता है। इस मंदिर की महिमा कुछ ऐसी थी यहाँ विदेशों से भी तंत्र शक्ति प्राप्त करने के लिए जिज्ञासु प्रवृत्ति के लोग आया करते थे। इस मंदिर में आज भी रात में रुकने की मनाही है। इंसान तो क्या पशु और पक्षी भी रात में यहाँ दिखाई नहीं देते हैं।

मंदिर से प्रेरित था संसद भवन

वैसे तो यह बात आधिकारिक तौर पर कहीं भी दर्ज नहीं है कि इसी मंदिर से प्रेरित होकर अंग्रेज वास्तुकार एडविन के लुटियंस ने 1921-27 के दौरान भारतीय संसद का निर्माण करवाया। ऐसा इसलिए क्योंकि जिन अंग्रेजों का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को नष्ट करना था वो कभी भी यह स्वीकार कर ही नहीं सकते थे कि भारत की सबसे महत्वपूर्ण इमारत का निर्माण एक हिन्दू मंदिर से प्रेरित है। लेकिन आज भी यदि कोई से भी देखेगा तो उसे यह समझते देर नहीं लगेगी कि संसद का निर्माण इसी मंदिर की डिजाइन को ध्यान में रखकर हुआ।

चौसठ योगिनी मंदिर 101 स्तम्भों पर टिका हुआ है वहीं भारतीय संसद 144 स्तम्भों पर। दोनों ही गोलाकार आकृति के हैं। मंदिर में 64 कक्ष हैं जबकि संसद भवन में 340 कक्ष। दोनों में सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जिस प्रकार चौसठ योगिनी मंदिर के केंद्र में एक विशाल मंडप है जहाँ भगवन शिव का शिवलिंग स्वरुप विराजमान है, उसी प्रकार संसद भवन के केंद्र में भी एक बड़ा सा हॉल निर्मित है।

कैसे पहुँचे?

मंदिर से निकटतम हवाईअड्डा ग्वालियर में स्थित है जो यहाँ से लगभग 28 किमी की दूरी पर है। इसके अलावा झाँसी हवाईअड्डे से मंदिर की दूरी लगभग है। चौसठ योगिनी मंदिर का नजदीकी रेलवे स्टेशन गोहद है जो यहाँ से 18 किमी दूर है। सड़क मार्ग के द्वारा इस मंदिर तक पहुँचा जा सकता है। ग्वालियर और मुरैना की मितावली से दूरी क्रमशः 40 किमी और 25 किमी है।

कब आ सकती है कोविड की तीसरी वेब? केरल का बुरा हाल: जानिए क्या कहता है IIT प्रो. मणींद्र का गणितीय मॉडल

कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल और उनकी टीम कोरोना की पहली लहर से ही संक्रमण की रफ्तार के आकलन पर काम कर रही है। उन्होंने इसके लिए अपना गणितीय मॉडल ‘सूत्र’ ईजाद किया है। प्रो. अग्रवाल और उनकी टीम कोरोना फर्स्ट वेव और सेकेंड वेव को लेकर कई सटीक आकलन कर चुकी है। उन्होंने कोरोना की तीसरी लहर को लेकर भी आकलन किया है।

प्रो. मणींद्र का कहना है कि अगर हमने यूँ ही संयम, एहतियात और सजगता बरती तो इस माह के अंत तक देश में रोजाना आने वाले कोरोना संक्रमितों की संख्या घटकर करीब 22 हजार रह जाएगी। उनका कहना है कि देश में कोरोना के नए मामलों की रफ्तार घटी है और जो इस वायरस से संक्रमित हो भी रहे हैं, वे जल्दी स्वस्थ हो जा रहे हैं। 

तीसरी लहर के आने का अंदेशा बहुत ही कम है

प्रो. अग्रवाल के मुताबिक कोरोना की तीसरी लहर के आने का अंदेशा बहुत ही कम है। अगर वायरस का कोई नया वैरिएंट आता है तभी तीसरी लहर आएगी, लेकिन कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए एहतियात जरूरी है। टीकाकरण अभियान में और तेजी लानी होगी। उन्होंने चेताया भी है कि यदि कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ तो संक्रमण की यथास्थिति बनी रहने, बल्कि बढ़ने का भी अंदेशा है।

स्वस्थ हुए लोगों की संख्या बताती है हर्ड इम्युनिटी

प्रोफेसर और उनकी टीम का कहना है कि कोरोना टीकाकरण व पूर्व में संक्रमित होने के बाद स्वस्थ हुए लोगों की संख्या को देखकर कह सकते हैं कि लोगों में हर्ड इम्युनिटी विकसित हुई है। उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश समेत उत्तर भारत के अन्य राज्यों में दूसरी लहर के दौरान काफी संख्या में लोग कोरोना की चपेट में आ गए थे। उनके अंदर एंटीबॉडी तैयार हो गई है, जबकि टीकाकरण भी रक्षा करेगा।

मणींद्र अग्रवाल ने ट्वीट किया है कि 15 अगस्त तक केरल में प्रतिदिन 25 हजार केस आने का अनुमान है। यह स्थिति 20 से 22 अगस्त तक रहेगी, उसके बाद केस घटेंगे। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में रोज 1800 से 2000 के बीच नए मरीज आ सकते हैं। इसमें गिरावट अगस्त के दूसरे हफ्ते से होगी। आपको बता दें कि इससे पहले प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने कोरोना की दूसरी लहर के पीक और उसके डिक्लाइन को लेकर जो आकलन किया था वह तकरीबन सही साबित हुआ था।

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “वर्तमान में लगभग 52% सेरोपोसिटिविटी और लगभग पूरी आबादी में फैली महामारी के साथ इम्युनिटी तक पहुँचने से पहले एक लंबा रास्ता तय करना है। अब दो विकल्प उपलब्ध हैं: पहला कि लॉकडाउन के जरिए कम से कम लोगों के संपर्क में आएँ या फिर लॉकडाउन हटा कर इसे फैलने दें।”

5 करोड़ कोविड टीके लगाने वाला पहला राज्य बना उत्तर प्रदेश, 1 दिन में लगे 25 लाख डोज: CM योगी ने लोगों को दी बधाई

उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने पाँच करोड़ कोरोना वैक्सीनेशन का आँकड़ा पार कर लिया है। यही नहीं मंगलवार (3 अगस्त 2021) को यूपी ने 25 लाख लोगों को वैक्सीन डोज लगाए हैं। इसके साथ ही एक दिन में सर्वाधिक वैक्सीन डोज देने का मध्य प्रदेश का रिकॉर्ड टूट गया है।

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने ट्विटर पर मंगलवार को 22 लाख डोज का लैंडमार्क पार करने के लिए सरकार और राज्य के लोगों को बधाई दी। उन्होंने पीएम मोदी को उनके मार्गदर्शन और राज्य के लोगों की सक्रिय भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया, जिसके बिना यह मुकाम हासिल करना संभव नहीं था।

उन्होंने लोगों को यह याद दिलाते हुए अपने पोस्ट को समाप्त किया कि घातक महामारी के खिलाफ कोविड -19 वैक्सीन आपका एकमात्र ‘सुरक्षा कवच’ है, और सभी से अपना ‘टीका जीत का’ लेने और कोविड -19 को हराने में मदद करने का आग्रह किया।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने मंगलवार को ही टीकाकरण का नया रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य रखा था। राज्य सरकार ने एक दिन में 20 लाख कोविड-19 वैक्सीन खुराक देने का लक्ष्य रखा है। इस मेगा अभियान के लिए राज्य में 12,000 से अधिक टीकाकरण केंद्र संचालित हैं।

1 महीने में टीकाकरण दर को तीन गुना करने का दिया गया था निर्देश

‘मिशन जून’ की घोषणा के बाद, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4 जून को राज्य के अधिकारियों को एक महीने में राज्य की रोजाना कोविड -19 टीकाकरण दर को तीन गुना करने का निर्देश दिया था। बता दें कि मिशन जून’ की घोषणा के तहत 1 जून से बड़े पैमाने पर कोविड टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था।

एक सरकारी बयान के अनुसार, सीएम ने टीकाकरण अभियान को बढ़ावा देने के लिए नए निर्देश दिए थे। 4 जून को उच्च स्तरीय कोविड-19 समीक्षा बैठक में योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया, “दैनिक टीकाकरण क्षमता बढ़ाने के लिए हर आवश्यक कार्रवाई की जाए।”

सीएम ने कहा था, “मौजूदा क्षमता को एक महीने के भीतर तीन गुना बढ़ाने की जरूरत है।” वर्तमान में 6,000 स्थानों पर टीकाकरण किया जा रहा है और जून में शुरू किए गए अभियान से मंगलवार तक 14.68 लाख से अधिक लोगों को टीकाकरण किया जा चुका है। इसमें 4 जून को ही लगाए गए 3.94 लाख टीकाकरण भी शामिल हैं। इस कैलकुलेशन के अनुसार, तीन गुना लक्ष्य पूरा करने के लिए एक दिन में 10 लाख से अधिक टीका देना होगा।

इमरान खान ने भैंसें नीलाम करने के बाद पीएम आवास ही चढ़ाया किराए पर, कंगाली दूर करने के लिए अब वहाँ होंगे फैशन कार्यक्रम

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने इस्लामाबाद में स्थित प्रधानमंत्री आवास को किराए पर देने का फैसला किया है। इससे पहले खान ने इस इमारत को शिक्षा केंद्र में बदलने की कसम खाई थी। मगर, अब उन्होंने इसे फैशन, सांस्कृतिक और शैक्षिक कार्यक्रमों के लिए किराए पर देने का निर्णय किया है।

‘Samaa TV’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला पाकिस्तान के संघीय मंंत्रिमंडल ने लिया है। इस संबंध में उन्होंने इन आयोजनों के दौरान पीएम हाउस की ‘सज्जा’ और ‘अनुशासन’ को बनाए रखने के लिए दो समितियों का गठन किया है। रही बात मुल्क के प्रधानमंत्री इमरान खान की तो उन्होंने इस आवास को साल 2019 के अगस्त महीने में खाली कर दिया था और बानी गाला में बने अपने आलीशान घर में चले गए थे।

सितंबर 2018 में इमरान खान ने पीएम हाउस की 8 भैंसों की नीलामी 23 लाख रुपए में की थी। इस संबंध में पाकिस्तानी मीडिया ने बताया था कि पाक पीएम का यह फैसला उस अभियान का हिस्सा है जिसके तहत आर्थिक संकट के बीच सरकारी खर्चों में कटौटी करने की कसम खाई गई थी।

इसी क्रम में पाकिस्तानी प्राइम मिनिस्टर ने 61 लक्जरी गाड़ियों की नीलामी भी करवाई थी। उससे उन्हें 20 करोड़ रुपए मिले थे, जिसे बाद में सरकारी खजाने में जमा करवाया गया था। इसके बाद पीएम खान ने बिल्डिंग को विश्वविद्यालय में बदलने की बात कही थी और इस संबंध में एक बैठक की अध्यक्षता भी की थी और साथ में कुछ फैसले भी लिए थे। लेकिन अब इस फैसले को टाल दिया गया है।

View Post

View Post

बता दें कि ये पहली दफा नहीं है कि पाकिस्तान प्रधानमंत्री आवास कार्यक्रमों के लिए किराए पर दिया गया हो। इससे पहले अगस्त 2019 में इमरान खान के राज में पीएम का आवास एक निकाह समारोह के लिए भी रेंट पर दिया गया था। उस समय वहाँ ब्रिगेडियर वसीम इफ्टिख्यार चीमा की बेटी अनम वसीम की शादी हुई थी। चीमा पाकिस्तान मिलिट्री में सेक्रेट्री पद पर थे। इस वाकये के बाद सोशल मीडिया पर खान को ट्रोल किया गया था। लेकिन किसी को क्या मालूम था कि कुछ साल बाद इसी पैंतरे को इस्तेमाल कर पीएम सरकारी खजाने में पैसे जोड़ेंगे।

अ शिगूफा अ डे, मेक्स द सीएम हैप्पी एंड गे: केजरीवाल सरकार का घोषणा प्रधान राजनीतिक दर्शन

अ शिगूफा अ डे, मेक्स द सीएम हैप्पी एंड गे। एक प्रसिद्ध अंग्रेजी कहावत की इस पैरोडी में अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक और प्रशासनिक दर्शन को एक वाक्य में समेट देने की क्षमता है। शिगूफा प्रधान उनका शासन पिछले कई सालों से यही करता आ रहा है। वे अपनी घोषणाओं से समय-समय पर दिल्ली की जनता को चमत्कृत करने का काम करते रहते हैं। जब नहीं कर पाते तो पंजाब, गोवा, गुजरात और ऐसे ही अन्य राज्यों की जनता को चमत्कृत करने निकल पड़ते हैं। इन राज्यों में भी उनका सारा प्रयास बिजली के इर्द-गिर्द रहता है। घोषणाएँ और वादे बिजली से शुरू होकर बिजली की गति से उसी पर ख़त्म होते हैं। वे जहाँ जाते हैं वहाँ की जनता को बताते हैं कि पूरे देश में सबसे महंगी बिजली उसी राज्य में है। वहाँ की जनता को चमत्कृत करके दिल्ली लौटते हैं और दिल्ली वालों को चमत्कृत करने का प्रयास नए सिरे से करते हैं।  

वैसे दिल्ली में भी उन्होंने बिजली की इसी महंगाई से बात शुरू की थी और चूँकि अपनी घोषणाओं की बिक्री में सफल रहे इसलिए वहाँ घोषणाएँ बिजली से आगे ले जाकर पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी कर लेते हैं। यह अलग बात है कि फ्री पानी कितना उपलब्ध है यह जगजाहिर है। अपने वादों और घोषणाओं के लंबे सिलसिले में उन्होंने पहले दिल्ली को सिंगापुर बनाने का वादा किया। बाद में शायद उन्हें लगा कि वादा पूरा करना मुश्किल है तो दिल्ली को लंदन बनाने का वादा किया। चूँकि उनके अंदर वादे भूल जाने का विशेष गुण है इसलिए उनके लिए वादे करने में सुभीता रहता है। दिल्ली वासियों को उनके घर की टोंटी में पीने का पानी देने का वादा वे लगभग हर साल करते रहे हैं। यमुना की सफाई करने का वादा भी लगभग हर साल करते रहे हैं। उनके अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में मोहल्ला क्लिनिक वाले मॉडल को अमेरिका में लागू करने का प्रयास हो रहा है।


हाल में मानसून की वजह से दिल्ली में शुरू हुए पानी के जमाव को लेकर सोशल मीडिया पर मीम आने शुरू ही हुए थे कि शिगूफों की अपनी सिलसिलेवार कहानी में अब उन्होंने एक नया शिगूफा जोड़ दिया है। उन्होंने Dilli@2047 नाम से एक प्लेटफार्म लॉन्च किया है जिसका उद्देश्य दिल्ली सरकार और CSR और अन्य परहितकारी संस्थानों (मूलतः एनजीओ पढ़ें) के बीच एक साझेदारी विकसित करना होगा। केजरीवाल ने अफसरशाही से स्टडी लीव लेकर एनजीओ बनाया और आज दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं पर शायद एनजीओ के प्रति उनके मन में जो स्थान है उससे निकल पाना उनके लिए असंभव सा लगता है। दिल्ली जैसे छोटे से राज्य में जहाँ शासन प्रणाली में बहुत सी जिम्मेदारियाँ केंद्र सरकार के पास हैं, उसमें अपनी योजनाओं को लागू करने में दिल्ली सरकार को एनजीओ की क्या आवश्यकता है?  

उन्होंने साथ ही यह घोषणा की है कि वे दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय अब सिंगापुर की प्रति व्यक्ति आय तक ले जाएँगे। दिल्ली को सिंगापुर बनाने वाली घोषणा केवल घोषणा रह गई तो अपनी नीतियों में सिंगापुर की एंट्री एक बार फिर प्रति प्रति व्यक्ति आय के बहाने कर दिया। घोषणा प्रधान शासन के मूल में शायद यही दर्शन है कि यदि घोषणाओं और वादों को पूरा कर दिया गया तो एक दिन सारी संभावित घोषणाएँ ख़त्म हो जाएगी और यदि ऐसा हुआ तो दल के राजनीतिक अस्तित्व का क्या होगा? 

दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय सिंगापुर के स्तर तक ले जाने के अलावा उन्होंने दो और महत्वपूर्ण घोषणाएँ की। पहली घोषणा यह है कि दिल्ली साल 2048 के ओलंपिक का आयोजन करने की मंशा रखती है और दूसरी घोषणा यह थी कि अगले चुनाव से पहले हर घर में पीने का पानी पहुँच जाएगा। इसके अलावा अरविंद केजरीवाल दिल्ली की सड़कों को यूरोप की सड़कों सा बनाना चाहते हैं। प्रश्न यह उठता है कि साल 2021 में भी यदि हमारी सरकारें अपने लिए स्तर भी बाहरी देशों के अनुसार बनाना चाहती हैं तो फिर यह सोच क्या औपनिवेशिकता के प्रति हमारी मानसिक गुलामी को नहीं दर्शाती? पीने के पानी को लेकर केंद्र सरकार ने अपनी योजना की घोषणा कर ही रखी है जिसे समय पर पूरा करने का काम चल रहा है। ऐसे में यह देखने वाली बात होगी कि राज्य सरकार की घोषणा का क्या अर्थ है?  

हो सकता है अरविंद केजरीवाल की ये घोषणाएँ अगले दिल्ली महानगर पालिका चुनावों को ध्यान में रखकर की गई हों पर इनमें जो सबसे महत्वपूर्ण घोषणा है वह सरकार और एनजीओ के बीच साझेदारी को लेकर है। प्रश्न यह किया जाना चाहिए कि यह साझेदारी किस तरह की रहेगी और ऐसी साझेदारी के पीछे दिल्ली सरकार की मंशा क्या है? यह एक राज्य सरकार द्वारा सरकारी नीतियों में एनजीओ स्थान देने का वही खेल तो नहीं जो हम यूपीए की पहली सरकार के समय पर देख चुके हैं? या ये घोषणा केंद्र सरकार की उस नीति के विरोध में है जिसके तहत केंद्र सरकार ने इस तरह के संस्थानों को न केवल कानून और नियम मानने पर मज़बूर कर दिया बल्कि उनकी तरफ जाने वाली सरकारी फंड की धारा को भी रोकने की सफल रही? 

कारण जो भी हो, लगता यही है कि फिलहाल दिल्ली का वादों और घोषणाओं के चक्र से निकलना आसान नहीं क्योंकि केजरीवाल अपनी घोषणा प्रधान राजनीतिक दर्शन को त्यागने के लिए तैयार नहीं दिखते।