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राजस्थान में भगवा ध्वज फाड़ने वाले कॉन्ग्रेस MLA को लोगों ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा: वायरल वीडियो का FactChek

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दिख रहा है कि लाठी-डंडा लिए भीड़ एक शख्स को दौड़ा-दौड़ाकर पीट रही है। कहा जा रहा है कि वीडियो में जिस शख्स को पिटा जा रहा है वह कॉन्ग्रेस विधायक हैं और उन्होंने कुछ दिन पहले जयपुर में भगवा ध्वज को फाड़ दिया था। इसलिए लोग विधायक को दौड़ा-दौड़ा कर पीट रहे हैं।

क्या है सच?

इस वायरल वीडियो का सच जानने के लिए ऑपइंडिया ने वीडियो को रिवर्स सर्च किया। रिजल्ट में हमें नीचे दिया गया वीडियो यूट्यूब चैनल पर मिला। इसके टाइटल में लिखा है, “पूर्व विधायक रामकेश मीणा को गंगापुर सिटी में दौड़ा दौड़ाकर पीटा।”

इस दौरान पता चला कि इस वीडियो को 10 अप्रैल 2018 को अपलोड हुआ था। जब हमने इससे संबंधित कीवर्ड को सर्च किया तो इस वायरल वीडियो से जुड़ी न्यूज़ हमें न्यूज 18 की वेबसाइट पर मिली।

इसमें खबर में बताया गया है, “2 अप्रैल को किए गए भारत बंद के दौरान सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सिटी कस्बे का उपद्रव भले ही शांत हो गया है, लेकिन गंगापुर सिटी के पूर्व विधायक रामकेश मीणा की उपद्रवियों द्वारा की गई पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उपद्रवी रामकेश मीणा को दौड़ा-दौड़ा कर पीटते हुए दिखाई दे रहे हैं।”

यह खबर 7 अप्रैल को पब्लिश की गई थी। इस खबर में राजस्थान के गंगापुर सिटी की घटना का जिक्र है, जिसमें भारत बंद के दौरान हुई वारदात के बारे में बताया गया है। खबर में कहा गया है कि 2 अप्रैल को भारत बंद का आयोजन किया था। उसी दौरान सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सिटी के पूर्व विधायक रामकेश मीणा को उपद्रवियों ने दौड़ा-दौड़ाकर पीट दिया। उस घटना का वीडियो खूब वायरल हुआ था।

उसी वीडियो को ‘भगवा झंडे का अपमान करने के बाद भीड़ द्वारा पिटाई’ बताकर फैलाया जा रहा है। ऑपइंडिया की जाँच में यह वायरल वीडियो में किया गया दावा झूठा पाया गया है।

दैनिक भास्कर के ₹2,200 करोड़ के फर्जी लेनदेन की जाँच कर रहा है IT विभाग: 700 करोड़ की आय पर टैक्स चोरी का खुलासा

टैक्स चोरी के आरोपों का सामना कर रहे दैनिक भास्कर को लेकर आयकर विभाग ने बड़ा दावा किया है। आईटी विभाग ने शनिवार (24 जुलाई) को दावा किया कि दैनिक भास्कर मीडिया समूह के कई कार्यालयों पर छापेमारी के दो दिन बाद 2,200 करोड़ रुपए के ‘काल्पनिक लेनदेन’ का पता चला है। वहीं, मीडिया समूह की तलाशी में छह वर्षों में ₹700 करोड़ की आय पर अवैतनिक कर, शेयर बाजार के नियमों का उल्लंघन और लिस्टेड कंपनियों से लाभ की हेराफेरी के आयकर विभाग को सबूत मिले हैं।

आयकर विभाग ने प्रेस रिलीज में बताया, ”22 जुलाई को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 132 के तहत एक प्रमुख व्यवसायी समूह पर तलाशी अभियान चलाया गया, जो मीडिया, बिजली, कपड़ा और रियल एस्टेट सहित विभिन्न क्षेत्रों के व्यवसायों में शामिल है। इस ग्रुप का सालाना 6,000 करोड़ प्रति वर्ष का टर्न ओवर है। मुंबई, दिल्ली, भोपाल, इंदौर, नोएडा और अहमदाबाद सहित 9 शहरों में फैले 20 आवासीय और 12 व्यावसायिक परिसरों को कवर किया गया है।

प्रेस रिलीज

इस ग्रुप में होल्डिंग और सहायक कंपनियों सहित 100 से अधिक कंपनियाँ हैं। तलाशी के दौरान पता चला कि वे अपने कर्मचारियों के नाम पर कई कंपनियों का संचालन कर रहे हैं, जिनका इस्तेमाल फर्जी खर्चों की बुकिंग और फंड के रूटिंग के लिए किया गया है। तलाशी के दौरान कई कर्मचारियों, जिनके नाम शेयरधारकों और निदेशकों के रूप में इस्तेमाल किए गए थे। उन्होंने स्वीकार किया है कि उन्हें ऐसी कंपनियों के बारे में पता नहीं था और उन्होंने अपने आधार कार्ड और डिजिटल हस्ताक्षर नियोक्ता के विश्वास पर दिए थे। इसमें कुछ रिश्तेदार पाए गए, जिन्होंने स्वेच्छा से और जानबूझकर कागजात पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन कंपनियों की व्यावसायिक गतिविधियों का कोई नियंत्रण नहीं था, जिसमें उन्हें निदेशक और शेयरधारक माना जाता था।

उन्होंने कहा कि इस तरह की कंपनियों का उपयोग कई उद्देश्यों के लिए किया गया है, जैसे कि फर्जी खर्चों की बुकिंग और सूचीबद्ध कंपनियों से लाभ कमाना, निवेश करने के लिए उनकी करीबी कंपनियों में फंड को स्थानांतरित करना और सर्कुलर लेनदेन करना आदि। आयकर विभाग ने विज्ञप्ति में यह भी कहा कि मीडिया हाउस ने खनन, प्रसंस्करण और शराब, आटा व्यवसाय, अचल संपत्ति की बिक्री के माध्यम से 90 करोड़ रुपए की बड़ी आय अर्जित की। आयकर विभाग ने पाया है कि डीबी समूह की कई कंपनियों ने फर्जी खर्च बुक किया है और सूचीबद्ध कंपनियों के मुनाफे में से 700 करोड़ की राशि का गबन किया है।

अब तक पता चला है कि इन तरीकों का इस्तेमाल आयकर देने से बचने के लिए किया गया है। इसके अलावा कंपनी अधिनियम के S.2 (76) (vi) और सूचीबद्ध कंपनियों के लिए सेबी द्वारा निर्धारित लिस्टिंग समझौते के खंड 49 का उल्लंघन शामिल है। बेनामी लेनदेन निषेध अधिनियम के आवेदन की भी जाँच की जाएगी।

पेगासस विवाद के पीछे बीडीएस या कतर, वॉशिंगटन पोस्ट की संपादक ने भी फोन नम्बरों की पुष्टि से किया इनकार: एनएसओ सीईओ

पेगासस विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच इजराइल की साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप ने अपना बचाव किया है। स्पाइवेयर पेगासस के मालिक एनएसओ ग्रुप के सीईओ ने कहा, ”मौजूदा ‘स्नूपगेट’ विवाद के पीछे बीडीएस मूवमेंट या कतर का हाथ हो सकता है।”

समूह के सह संस्थापक सीईओ शैलेव हुलियो ने इजराइल ह्योम को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि ‘संभावित’ पेगासस टार्गेट के रूप में जारी किए गए फोन नंबरों की सूची किसी भी तरह से उनसे जुड़ी नहीं है।

शैलेव हुलियो ने कहा, “जारी की गई सूची से हमारा कोई संबंध नहीं है और न ही इसका कभी कोई संबंध रहा है। ऐसे में अगर हमें यह पता चलता है कि कुछ क्लाइंट थे, जिन्होंने पत्रकारों या मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को ट्रैक करने के लिए हमारे सिस्टम का दुरुपयोग किया, तो उन्हें तत्काल प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। हमने यह साबित कर दिया है कि पूर्व में, हमारे कुछ सबसे बड़े क्लाइंट के साथ और हमने उनके साथ काम करना बंद कर दिया है।” उन्होंने कहा कि वह मामले की जाँच का स्वागत करेंगे।

एनएसओ के सीईओ ने कहा कि एक परिचित ने उन्हें बताया कि ‘वे’ साइप्रस में एनएसओ सर्वरों में सेंध लगा चुके हैं और टार्गेट की एक सूची तक पहुंचने के बाद उन्होंने उनके सर्वर की जांच की।

हुलियो ने कहा, “इस बीच हमने अपने सर्वर की जाँच की। हमने अपने ग्राहकों के साथ जाँच की और हमें ऐसा कुछ भी नहीं मिला जो यहाँ से लिया गया हो। लेकिन यह बेहद अजीब लग रहा था, मैंने उस आदमी से लीक सूची से कुछ नंबर लाने को कहा। हमने उनसे कुछ फोन नंबर प्राप्त किए और अपने ग्राहकों के साथ उनकी जाँच करना शुरू किया। पेगासस के लिए एक भी टार्गेट नहीं था। मुझे एहसास हुआ कि इसका हमसे कोई लेना-देना नहीं है और हम आगे बढ़ गए।”

शैलेव हुलियो ने कहा कि वकीलों को काम पर रखने और पत्र भेजने के बाद अधिकांश मीडिया संगठन घटनाओं के एनएसओ संस्करण के बारे में आश्वस्त थे। उन्होंने कहा, “वाशिंगटन पोस्ट के संपादक [इन चीफ] ने यहाँ तक लिखा था कि उन्हें नहीं पता था कि सूची कहाँ से आई थी या किसने नंबर लगाए थे, और उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी ये कि नंबर पेगासस से जुड़े थे या कभी भी टार्गेट थे या फिर संभावित टार्गेट रहे हैं।”

‘विवाद के पीछे बीडीएस या कतर’: शालेव हुलियो

शालेव हुलियो ने कहा कि उन्हें इसके पीछे बीडीएस मूवमेंट या कतर का हाथ होने का संदेह है। बीडीएस बहिष्कार, विभाजन और आर्थिक प्रतिबंध लगाने का फिलिस्तीन द्वारा इजरायल के खिलाफ उनका एक आंदोलन है।

हुलियो ने कहा, “ऐसा लगता है कि किसी ने हमें टारगेट करने की कोशिश की है। यह पूरी कहानी आकस्मिक नहीं है। इजरायल का साइबर क्षेत्र सामान्य रूप से हमले के अधीन है। दुनिया में बहुत सारी साइबर खुफिया कंपनियाँ हैं, लेकिन हर कोई सिर्फ इजरायल पर ध्यान केंद्रित करता है। दुनिया भर के पत्रकारों का इस तरह एक संघ बनाना और एमनेस्टी [इंटरनेशनल] को इसमें लाना ऐसा लगता है कि मानो इसके पीछे किसी का हाथ है, जो इसे संचालित कर रहा है।”

शैलेव हुलियो ने कहा कि जब कंपनी की स्थापना हुई थी, तब चार नियमों पर सहमति बनी थी। पहला नियम कि हम केवल इस तकनीक को सरकारों को बेचेंगे, न कि कंपनियों या फिर व्यक्तियों को। आप कल्पना कर सकते हैं कि कितने लोगों और कंपनियों ने इस तकनीक को हमसे खरीदने की कोशिश की, और हमने हमेशा कहा कि नहीं। दूसरा नियम यह है कि हम हर सरकार को नहीं बेचते, क्योंकि दुनिया की हर सरकार के पास ये उपकरण नहीं होने चाहिए। कंपनी की स्थापना के 11 साल बाद, हमारे पास 45 ग्राहक हैं, लेकिन 90 देश हैं जिन्हें हमने बेचने से इनकार कर दिया है।

उन्होंने आगे कहा, “तीसरा नियम यह है कि हम सिस्टम को सक्रिय नहीं करते हैं, हम बस इसे स्थापित करते हैं और निर्देश देते हैं कि इसका उपयोग कैसे करें और छोड़ देते हैं। चौथा नियम यह है कि हम रक्षा मंत्रालय की नियामक निगरानी में रहना चाहते हैं। हम 2010 से स्वैच्छिक निरीक्षण के अधीन हैं, भले ही साइबर कंपनियों की रक्षा और सुरक्षा निरीक्षण के लिए कानून केवल 2017 में बना था। हमने कभी भी ऐसा कोई सौदा नहीं किया जो निगरानी में न हो।

अगस्त में भारत बनेगा UNSC का अध्यक्ष: तालिबान, समुद्री सुरक्षा समेत आतंकवाद रहेगा प्रमुख मुद्दा

इस साल अगस्त में भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का अध्यक्ष का पद सँभालेगा। इस दौरान समुद्री सुरक्षा, टेक्नोलॉजी व शान्ति रक्षा के साथ-साथ आतंकवादी गतिविधियों के कारण अंतर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा के लिए उत्पन्न होने वाले खतरों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दरअसल, सुरक्षा परिषद का हर सदस्य देश एक महीने के लिए परिषद का अध्यक्ष बनता है। जुलाई में फ्रांस इसका अध्यक्ष बना था। 

अफगानिस्तान में आतंकवादी संगठन तालिबान के बढ़ते दबदबे और दक्षिण एशिया सहित दुनिया भर में बदलते घटनाक्रम के बीच भारत की अध्यक्षता बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि आतंकवाद से त्रस्त भारत का मुख्य बिंदु आतंकवाद ही होगा। हालाँकि, इस संबंध में विदेश मंत्रालय कई महीनों से एजेंडा तैयार कर रहा है।

इसके पहले जून में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने के लिए सुरक्षा परिषद में ठोस और परिणाम वाली कार्रवाई का प्रयास करेगा। भारत से संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समितियों द्वारा संस्थाओं और व्यक्तियों को सूचीबद्ध करने और हटाने में अधिक पारदर्शिता की माँग करने की भी उम्मीद है।

बुधवार (21 जुलाई 2021) को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष बोजकिर ने अध्यक्षता के दौरान किए जाने वाले कार्यों को लेकर भारत की प्रशंसा की थी। संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने भारत की अध्यक्षता के दौरान होेने वाली गतिविधियों के बारे में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कान बोजकिर को बताया था।

भारत को वर्ष 2021 और 2022 के लिए परिषद के अस्थाई सदस्य के रूप में चुना गया था और भारत का दो वर्षीय कार्यकाल 1 जनवरी 2021 को शुरू हुआ था। दरअसल, सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य हैं। इनमें पाँच सदस्य स्थाई हैं, जिनमें अमेरिका, चीन, रुस, ब्रिटेन और फ्रांस शामिल हैं। वहीं, 10 अस्थाई सदस्यों का दो वर्ष के लिए चुनाव होता है।

‘माँ और बच्चे की कामुकता’ पर पोस्ट कर जनआक्रोश भड़काने वाली महिला ने ‘बीडीएसएम वर्कशॉप’ का ऐलान कर छेड़ा नया विवाद

सेक्स एजुकेटर (Intimacy coach) पल्लवी बरनवाल ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट शेयर कर हलचल मचा दी है। दरअसल, वह जल्द ही ‘बीडीएसएम फॉर बिगिनर्स’ पर एक वर्कशॉप आयोजित करने वाली हैं। बीडीएसएम ‘bondage and discipline, dominance and submission, sadism and masochism’ अर्थात ‘बंधन और अनुशासन, प्रभुत्व और अधीनता, प्रताड़ना और पुरुषवाद’ का संक्षिप्त रूप है। एक यौन जीवन शैली जहाँ एक साथी प्रभुत्व की भूमिका निभाता है और दूसरा अधीनता की।

बीडीएसएम में आमतौर पर प्रताड़ना और दो पाटर्नर के बीच ‘मालिक-गुलाम’ का संबंध शामिल होता है। पल्लवी बरनवाल का दावा है वह उन लोगों के लिए एक वर्कशॉप आयोजित करेंगी, जो ऐसा करके अपनी जीवन शैली बेहतर बनाना चाहते हैं।

फोटो : ट्विटर

सोशल मीडिया पर वर्कशॉप का पोस्टर शेयर करके वह लोगों के निशाने पर आ गई हैं। लोगों ने उन्हें ट्रोल करते हुए कहा कि वे sexual degeneracy को क्या मानती हैं। वर्कशॉप को बकवास जोक्स बताते हुए लोगों ने उनके पोस्टर का जमकर मजाक भी उड़ाया।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब बरनवाल सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आई हों। इससे पहले उनकी एक फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट इंटरनेट पर वायरल हुआ था, जिसमें उन्हें ‘mother and child sexuality’ पर बेहद विवादित टिप्पणी करते देखा जा सकता था।

हमें फेसबुक पर वह पोस्ट नहीं मिली। संभव है कि उसे हटा दिया गया होगा। फिर भी हम इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर सकते। हालाँकि, पिछले कुछ वर्षों में इसे व्यापक रूप से फैलाया गया है। पोस्ट में पल्लवी बरनवाल बाल यौन शोषण के एक पीड़ित की बात करती हैं, जिसका अपनी ही माँ द्वारा यौन शोषण किया गया था।

Source: Reddit

पीड़ित व्यक्ति अपराध, क्योंकि उसकी माँ ने उसे उसके शरीर के अंगों को लेकर कुछ उचित बातें नहीं बताई थीं। यह विवादित हिस्सा पोस्ट के अंत में लिखा गया है, जो कहीं न कहीं दुराचार का समर्थन करता है। उन्होंने लिखा, “मैंने दीपक (असली नाम) को अपराधबोध से दूर रहने के लिए कहा। ऐसा तब होता है जब किसी नेचुरल ड्राइव सेक्स ड्राइव को दबा दिया जाता है। दीपक और उनकी माँ दोनों ही यौन इच्छा दबाने वाली संस्कृति के शिकार हैं, जहाँ सेक्स को व्यक्त नहीं किया जाना चाहिए और न ही इस बारे में बात की जानी चाहिए।”

एक यौन उत्पीड़न करने वाली महिला के लिए उनकी सहानुभूति ने सोशल मीडिया पर लोगों को खासा नाराज कर दिया था। काफी लोगों ने इसके लिए उनकी आलोचना भी की। हालाँकि, ऐसा लगता है कि इससे उनके करियर को कोई नुकसान नहीं पहुँचा है, क्योंकि वह बीडीएसएम पर एक वर्कशॉप के साथ फिर से वापसी कर रही हैं।

‘No Bra Money’: UK में बढ़ती गर्मी के बीच दुकानों के बाहर लगा नोटिस, सोशल मीडिया में छिड़ी बड़ी बहस

यूनाइटेड किंगडम (UK) में रहने वाले लोग इस समय भीषण गर्मी से परेशान हैं। लंदन समेत UK के कई अन्य इलाकों (विशेषकर दक्षिणी) में तापमान मौसम विभाग द्वारा बताए गए 30 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुँच गया है, जो वहाँ के वातावरण के हिसाब से बहुत अधिक है। इसी गर्म मौसम के चलते डबलिन के एक दुकानदार ने ग्राहकों से अपील की है कि वह पसीने से तरबतर नोट न दें और इसके लिए उसने बाकायदा नोटिस जारी किया है जिसमें कहा गया है कि स्टोर में Bra Money (ब्रा में रखे गए नोट) नहीं लिया जाएगा।

माइकल फ्लिन द्वारा चलाए जाने वाले स्टोर मैट्रेस मिक ने अपने फेसबुक एकाउंट में एक फोटो पोस्ट की। इस फोटो में हाथ से लिखा गया नोटिस था। इस नोटिस में लिखा गया था, ‘No Bra Money’। नोटिस में आगे लिखा हुआ था, “लगातार बढ़ते हुए तापमान और अपनी खुद की सुरक्षा के लिए हम Bra Money (ब्रा में रखे हुए नोट) को स्वीकार नहीं करेंगे। असुविधा के लिए खेद है।” इस फोटो के साथ लिखे गए कैप्शन में ग्राहकों को सलाह दी गई थी कि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ-साथ सुरक्षित तरीके से व्यापार करने के लिए ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वो अपने यूरो नोट हमेशा अपने पर्स या हैंडबैग में रखें।

मैट्रेस मिक की तरह ही दक्षिणी डबलिन के एक कैफे ने भी ग्राहकों से Bra Money अदा न करने की अपील की है और कैफे ने तो मात्र कार्ड के जरिए ही पेमेंट स्वीकार करने की बात कही है। कैफे ने साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि इस नियम से किसी को छूट प्रदान नहीं की जाएगी। UK में बढ़ रही गर्मी के कारण डबलिन का यह कैफे पसीने से भीगे हुए नोटों को स्वीकार नहीं करना चाहता है जो अक्सर महिलाएं अपने ब्रा के अंदर रखती हैं।

ज्ञात हो कि UK में बढ़ते हुए तापमान के कारण हालात खराब हैं। ऐसे में पसीने से भीगे हुए नोटों की समस्या ने दुकानदारों की चिंता को और भी बढ़ा दिया है। अक्सर महिलाओं के कपड़ों में जेबों की कमी देखने को मिलती हैं ऐसे में दुकानदारों को ब्रा में रखे गए नोट लेने पड़ते हैं जो बढ़े हुए तापमान के कारण पसीने में भीगे रहते हैं। इसी कारण दुकानदार ‘No Bra Money’ का नोटिस अपने स्टोर के सामने लगा रहे हैं। हालाँकि दुकानदारों द्वारा लिए गए इस फैसले पर सोशल मीडिया दो भागों में बँटा हुआ है। कई सोशल मीडिया यूजर उनके इस नोटिस का समर्थन कर रहे हैं तो इसका पर्याप्त विरोध भी हो रहा है।

अल्मोड़ा में ‘लव जिहाद’: नाबालिग हिंदू लड़की को फँसा कर रेस्तरां बुलाने वाले कासिफ, अरमान, साने और फरमान गिरफ्तार

उत्तराखंड के अल्मोड़ा में लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। मुरादाबाद और हरिद्वार के रहने वाले चार मुस्लिम युवकों के साथ बग्वालीपोखर इलाके की रेस्तरां में एक नाबालिग हिंदू लड़की को देखकर स्थानीय लोगों और कुछ हिंदू संगठनों ने लव जिहाद का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत की। शिकायत के बाद पुलिस ने शुक्रवार (23 जुलाई 2021) को चार मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन युवकों पर अपहरण के मकसद से हिंदू लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप है। चारों आरोपियों की उम्र 19 से 27 साल के बीच है और उत्तराखंड के हरिद्वार और उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के रहने वाले हैं। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए चारों युवकों में से एक ने कुछ महीने पहले सोशल मीडिया पर इस लड़की से दोस्ती की थी।

मामले की जानकारी रखने वाले एक पुलिस अधिकारी ने खुलासा किया, “एक आरोपित अपने दोस्तों के साथ लड़की से मिलने के लिए शुक्रवार (जुलाई 23, 2021) शाम बग्वालीपोखर इलाके में आया था। उसने लड़की को एक स्थानीय रेस्तरां में बुलाया, जहाँ रेस्तरां के मालिक को उन पर शक हुआ और उसने स्थानीय लोगों को इसके बारे में सूचित किया।”

इसके तुरंत बाद, स्थानीय लोग रेस्तरां में पहुँचे और उन्हें धर दबोचा। उन्होंने ‘लव जिहाद’ का आरोप लगाते हुए चारों युवकों को पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने कहा कि कुछ स्थानीय लोगों ने लड़की के पिता को सूचित किया और वह मौके पर पहुँच गए। लड़की के पिता ने पुलिस को बताया कि चारों आरोपितों ने अपहरण के उद्देश्य से उनकी बेटी को लालच देकर बुलाया है।

बीजेपी विधायक महेश सिंह नेगी के दखल के बाद आरोपित पर केस दर्ज

हालाँकि, कुछ हिंदू संगठनों ने पुलिस पर आरोपितों के खिलाफ चार्ज नहीं लगाने का आरोप लगाया। जागरण में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एसएचओ आरोपितों का नाम उजागर करने से इनकार करते रहे। देर रात स्थानीय विधायक महेश सिंह नेगी के हस्तक्षेप के बाद ही पुलिस ने गिरफ्तार युवक के नामों का खुलासा किया।

आरोपितों की पहचान हरिद्वार और मुरादाबाद निवासी कासिफ, अरमान, साने आलम और फरमान के रूप में हुई है। थाने पहुँचकर द्वाराहाट विधायक महेश सिंह नेगी ने पुलिस से आरोपितों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने को कहा। चारों पर ‘अपहरण और छेड़छाड़’ एवं पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है।

योगी सरकार के एक्शन के डर से 3 कुख्यात गैंगस्टर मोमीन, इन्तजार और मंगता हाथ उठाकर पहुँचे थाने, किया आत्मसमर्पण

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बढ़ते अपराधों पर नकेल कसने के लिए ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है। प्रदेश की पुलिस कुख्यात अपराधियों और उनके गिरोह के अन्य सहयोगियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। यही कारण है कि योगी सरकार के डर से राज्य के अधिकतर थानों से फरार अपराधी खुद ही पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर रहे हैं। ताजा मामला यूपी के शामली जिले का है।

शनिवार (24 जुलाई 2021) को शामली के तीन गैंगस्टर्स (Gangsters) मोमीन पुत्र समसुदीन, इन्तजार पुत्र बशीर और मंगता पुत्र नूरहसन निवासी ग्राम रामडा पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी के डर से हाथ उठाकर थाने पहुँचे और आत्मसमर्पण कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सभी गैंगस्टर्स ने कहा कि वो अपराध से तौबा कर भविष्य में अपराध न करने की कसम खाते हैं। पुलिस अधीक्षक शामली सुकीर्ति माधव ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ थाना कैराना पर बलवा, हत्या का प्रयास के केस पहले से ही पंजीकृत हैं, जिन पर अंकुश लगाने के लिए आरोपितों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की गई है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने कैराना कोतवाली में गैंगस्टर एक्ट में वांछित चल रहे तीनों गैंगस्टरों को गिरफ्तार कर चालान कर दिया है।

गौरतलब है कि योगी सरकार के कार्यकाल में गैंगस्टर अधिनियम के तहत कुल 15 अरब 74 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध संपत्ति को जब्त किया गया है। इसमें सर्वाधिक कार्रवाई जनवरी 2020 से अब तक की गई है। इस दौरान रिकॉर्ड कुल 13 अरब, 22 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध संपत्ति गैगेंस्टर अधिनियम के तहत जब्त की है।

जहाँ से इस्लाम शुरू, नारीवाद वहीं पर खत्म… डर और मौत भला ‘चॉइस’ कैसे: नितिन गुप्ता (रिवाल्डो)

हिंदू लड़कियों के साथ हो रहे जबरन धर्मांतरण में सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर नारीवादी चुप हैं और यह बिलकुल भी आश्चर्यजनक नहीं है। क्योंकि हिंदुस्तान में नारीवाद वहीं पर खत्म हो जाता है, जहाँ से इस्लाम शुरू होता है। ये तीन तलाक, निकाह, हलाला पर चुप रहती हैं। तृप्ति देसाई सबरीमाला चली जाती हैं, लेकिन हाजी अली में नहीं घुसती हैं।

हैरत की बात ये है कि जिस चीज का ये लोग डर से बुराई नहीं कर पाते हैं, उसे ये ‘चॉइस’ कह देते हैं। ईरान में सिर न ढँकने पर जेल की सजा है और इसे चॉइस बोला जा रहा है। जबरन धर्मांतरण को लेकर कहा जा रहा है कि लड़कियाँ निकाह के बाद अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन करती हैं। कई मामलों में तो निकाह ही जबरदस्ती किया जाता है और फिर परिवार को मारने की धमकी देकर धर्म परिवर्तन करवाया जाता है। इसे आप ‘चॉइस’ कहेंगे? जब इंसान के पास दूसरा विकल्प माँ-बाप की मौत होगी, तो वह क्या चुनेगा? उसे ‘चॉइस’ नहीं कहते।

पूरी वीडियो को इस लिंक पर क्लिक करके देखें।

नोट: यह एक सीरीज है, इस सीरीज का यह तीसरा वीडियो है। इसी सब्जेक्ट (हिंदू लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन) पर और भी वीडियो आप हमारे यूट्यूब चैनल पर आगे देख पाएँगे।

PM मोदी से The Hindu की चेयरपर्सन मालिनी पार्थसारथी की मुलाकात पर ‘खिसियाए’ पूर्व एडिटर-इन-चीफ एन राम

‘द हिन्दू’ प्रकाशन समूह की चेयरपर्सन मालिनी पार्थसारथी ने गुरुवार (22 जुलाई 2021) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, लेकिन यह मुलाकात ‘द हिन्दू’ के डायरेक्टर एन राम को पसंद नहीं आई। उन्होंने इस मुलाकात से खुद को अलग करते हुए इशारा किया कि पार्थसारथी ने दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री से मुलाकात करके वामपंथी प्रकाशन समूह की बरसों पुरानी प्रतिष्ठा को गँवा दिया।

पार्थसारथी की पीएम मोदी से मुलाकात के संबंध में @Mrs_DoSoLittle नाम के एक ट्विटर यूजर की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए एन राम ने कहा कि इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि मेहनत से कमाई गई ‘द हिन्दू’ की प्रतिष्ठा और गँवाई जा रही 142 से अधिक सालों की लीगेसी को बचाने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। हालाँकि, पार्थसारथी इस पर चुप नहीं रहीं और उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद ‘द हिन्दू’ की प्रतिष्ठा भंग नहीं होगी और 142 वर्षों से अधिक की लीगेसी तथ्यात्मक पत्रकारिता करके हासिल हुई है न कि राजनैतिक पक्षपात के द्वारा।

उन्होंने यह भी कहा कि ‘द हिन्दू’ की ईमानदारी और साख को पुनर्स्थापित करने के लिए वह संकल्पित हैं और लीगेसी को पुनर्जीवित करने का यही एक जरिया है। दरअसल पार्थसारथी के कहने का यही मतलब था कि वह ‘द हिन्दू’ की उस प्रतिष्ठा को पुनः अर्जित करना चाहती हैं, जो प्रकाशन समूह के एडिटर-इन-चीफ रहते हुए एन राम के कार्यकाल में धूमिल हो गई थी।

यह पहली बार नहीं है जब ‘द हिन्दू’ से जुड़े दो वरिष्ठ पत्रकार आमने-सामने हैं। एन राम की बात करें तो वह लगातार राफेल के सौदे को लेकर घोटाले का आरोप लगाते रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान भी उन्होंने क्रॉप की गई फोटो प्रकाशित करके राफेल सौदे में घोटाले का आरोप लगाया था। वहीं, पार्थसारथी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने की बात कह चुकी हैं। उन्होंने सीधे तौर पर यह कहा था कि वह निजी तौर पर यह मानती हैं कि राफेल के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सत्यनिष्ठा पर कोई प्रश्न नहीं उठाया जा सकता है।

इससे पहले भी अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा बच्चों को बिना प्याज और लहसुन का भोजन देने के मामले में ‘द हिन्दू’ ने फाउंडेशन की आलोचना करते हुए रिपोर्ट प्रकाशित की थी। हालाँकि, सोशल मीडिया पर आलोचना होने के बाद पार्थसारथी ने खुद को इस रिपोर्ट से यह कहते हुए अलग कर लिया था कि वह प्रतिदिन प्रकाशित होने वाले न्यूज कंटेन्ट को नहीं देखतीं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि प्रकाशन द्वारा अक्षय पात्र पर निशाना साधना अनुचित है।

इस मुद्दे पर एन राम के विचार कुछ अलग थे। उन्होंने ‘द हिन्दू’ के ‘संपादकीय मूल्यों’ का हवाला देते हुए पार्थसारथी पर बाहरी आलोचनाओं से प्रभावित होने का आरोप लगाया था। हालाँकि, इसके बाद भी पार्थसारथी ने कहा था कि अक्षय पात्र पर उनके प्रकाशन की रिपोर्ट एकतरफा पत्रकारिता का उदाहरण है।