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अगस्त में भारत बनेगा UNSC का अध्यक्ष: तालिबान, समुद्री सुरक्षा समेत आतंकवाद रहेगा प्रमुख मुद्दा

इस साल अगस्त में भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का अध्यक्ष का पद सँभालेगा। इस दौरान समुद्री सुरक्षा, टेक्नोलॉजी व शान्ति रक्षा के साथ-साथ आतंकवादी गतिविधियों के कारण अंतर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा के लिए उत्पन्न होने वाले खतरों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दरअसल, सुरक्षा परिषद का हर सदस्य देश एक महीने के लिए परिषद का अध्यक्ष बनता है। जुलाई में फ्रांस इसका अध्यक्ष बना था। 

अफगानिस्तान में आतंकवादी संगठन तालिबान के बढ़ते दबदबे और दक्षिण एशिया सहित दुनिया भर में बदलते घटनाक्रम के बीच भारत की अध्यक्षता बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि आतंकवाद से त्रस्त भारत का मुख्य बिंदु आतंकवाद ही होगा। हालाँकि, इस संबंध में विदेश मंत्रालय कई महीनों से एजेंडा तैयार कर रहा है।

इसके पहले जून में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने के लिए सुरक्षा परिषद में ठोस और परिणाम वाली कार्रवाई का प्रयास करेगा। भारत से संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समितियों द्वारा संस्थाओं और व्यक्तियों को सूचीबद्ध करने और हटाने में अधिक पारदर्शिता की माँग करने की भी उम्मीद है।

बुधवार (21 जुलाई 2021) को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष बोजकिर ने अध्यक्षता के दौरान किए जाने वाले कार्यों को लेकर भारत की प्रशंसा की थी। संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने भारत की अध्यक्षता के दौरान होेने वाली गतिविधियों के बारे में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कान बोजकिर को बताया था।

भारत को वर्ष 2021 और 2022 के लिए परिषद के अस्थाई सदस्य के रूप में चुना गया था और भारत का दो वर्षीय कार्यकाल 1 जनवरी 2021 को शुरू हुआ था। दरअसल, सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य हैं। इनमें पाँच सदस्य स्थाई हैं, जिनमें अमेरिका, चीन, रुस, ब्रिटेन और फ्रांस शामिल हैं। वहीं, 10 अस्थाई सदस्यों का दो वर्ष के लिए चुनाव होता है।

‘माँ और बच्चे की कामुकता’ पर पोस्ट कर जनआक्रोश भड़काने वाली महिला ने ‘बीडीएसएम वर्कशॉप’ का ऐलान कर छेड़ा नया विवाद

सेक्स एजुकेटर (Intimacy coach) पल्लवी बरनवाल ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट शेयर कर हलचल मचा दी है। दरअसल, वह जल्द ही ‘बीडीएसएम फॉर बिगिनर्स’ पर एक वर्कशॉप आयोजित करने वाली हैं। बीडीएसएम ‘bondage and discipline, dominance and submission, sadism and masochism’ अर्थात ‘बंधन और अनुशासन, प्रभुत्व और अधीनता, प्रताड़ना और पुरुषवाद’ का संक्षिप्त रूप है। एक यौन जीवन शैली जहाँ एक साथी प्रभुत्व की भूमिका निभाता है और दूसरा अधीनता की।

बीडीएसएम में आमतौर पर प्रताड़ना और दो पाटर्नर के बीच ‘मालिक-गुलाम’ का संबंध शामिल होता है। पल्लवी बरनवाल का दावा है वह उन लोगों के लिए एक वर्कशॉप आयोजित करेंगी, जो ऐसा करके अपनी जीवन शैली बेहतर बनाना चाहते हैं।

फोटो : ट्विटर

सोशल मीडिया पर वर्कशॉप का पोस्टर शेयर करके वह लोगों के निशाने पर आ गई हैं। लोगों ने उन्हें ट्रोल करते हुए कहा कि वे sexual degeneracy को क्या मानती हैं। वर्कशॉप को बकवास जोक्स बताते हुए लोगों ने उनके पोस्टर का जमकर मजाक भी उड़ाया।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब बरनवाल सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आई हों। इससे पहले उनकी एक फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट इंटरनेट पर वायरल हुआ था, जिसमें उन्हें ‘mother and child sexuality’ पर बेहद विवादित टिप्पणी करते देखा जा सकता था।

हमें फेसबुक पर वह पोस्ट नहीं मिली। संभव है कि उसे हटा दिया गया होगा। फिर भी हम इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर सकते। हालाँकि, पिछले कुछ वर्षों में इसे व्यापक रूप से फैलाया गया है। पोस्ट में पल्लवी बरनवाल बाल यौन शोषण के एक पीड़ित की बात करती हैं, जिसका अपनी ही माँ द्वारा यौन शोषण किया गया था।

Source: Reddit

पीड़ित व्यक्ति अपराध, क्योंकि उसकी माँ ने उसे उसके शरीर के अंगों को लेकर कुछ उचित बातें नहीं बताई थीं। यह विवादित हिस्सा पोस्ट के अंत में लिखा गया है, जो कहीं न कहीं दुराचार का समर्थन करता है। उन्होंने लिखा, “मैंने दीपक (असली नाम) को अपराधबोध से दूर रहने के लिए कहा। ऐसा तब होता है जब किसी नेचुरल ड्राइव सेक्स ड्राइव को दबा दिया जाता है। दीपक और उनकी माँ दोनों ही यौन इच्छा दबाने वाली संस्कृति के शिकार हैं, जहाँ सेक्स को व्यक्त नहीं किया जाना चाहिए और न ही इस बारे में बात की जानी चाहिए।”

एक यौन उत्पीड़न करने वाली महिला के लिए उनकी सहानुभूति ने सोशल मीडिया पर लोगों को खासा नाराज कर दिया था। काफी लोगों ने इसके लिए उनकी आलोचना भी की। हालाँकि, ऐसा लगता है कि इससे उनके करियर को कोई नुकसान नहीं पहुँचा है, क्योंकि वह बीडीएसएम पर एक वर्कशॉप के साथ फिर से वापसी कर रही हैं।

‘No Bra Money’: UK में बढ़ती गर्मी के बीच दुकानों के बाहर लगा नोटिस, सोशल मीडिया में छिड़ी बड़ी बहस

यूनाइटेड किंगडम (UK) में रहने वाले लोग इस समय भीषण गर्मी से परेशान हैं। लंदन समेत UK के कई अन्य इलाकों (विशेषकर दक्षिणी) में तापमान मौसम विभाग द्वारा बताए गए 30 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुँच गया है, जो वहाँ के वातावरण के हिसाब से बहुत अधिक है। इसी गर्म मौसम के चलते डबलिन के एक दुकानदार ने ग्राहकों से अपील की है कि वह पसीने से तरबतर नोट न दें और इसके लिए उसने बाकायदा नोटिस जारी किया है जिसमें कहा गया है कि स्टोर में Bra Money (ब्रा में रखे गए नोट) नहीं लिया जाएगा।

माइकल फ्लिन द्वारा चलाए जाने वाले स्टोर मैट्रेस मिक ने अपने फेसबुक एकाउंट में एक फोटो पोस्ट की। इस फोटो में हाथ से लिखा गया नोटिस था। इस नोटिस में लिखा गया था, ‘No Bra Money’। नोटिस में आगे लिखा हुआ था, “लगातार बढ़ते हुए तापमान और अपनी खुद की सुरक्षा के लिए हम Bra Money (ब्रा में रखे हुए नोट) को स्वीकार नहीं करेंगे। असुविधा के लिए खेद है।” इस फोटो के साथ लिखे गए कैप्शन में ग्राहकों को सलाह दी गई थी कि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ-साथ सुरक्षित तरीके से व्यापार करने के लिए ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वो अपने यूरो नोट हमेशा अपने पर्स या हैंडबैग में रखें।

मैट्रेस मिक की तरह ही दक्षिणी डबलिन के एक कैफे ने भी ग्राहकों से Bra Money अदा न करने की अपील की है और कैफे ने तो मात्र कार्ड के जरिए ही पेमेंट स्वीकार करने की बात कही है। कैफे ने साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि इस नियम से किसी को छूट प्रदान नहीं की जाएगी। UK में बढ़ रही गर्मी के कारण डबलिन का यह कैफे पसीने से भीगे हुए नोटों को स्वीकार नहीं करना चाहता है जो अक्सर महिलाएं अपने ब्रा के अंदर रखती हैं।

ज्ञात हो कि UK में बढ़ते हुए तापमान के कारण हालात खराब हैं। ऐसे में पसीने से भीगे हुए नोटों की समस्या ने दुकानदारों की चिंता को और भी बढ़ा दिया है। अक्सर महिलाओं के कपड़ों में जेबों की कमी देखने को मिलती हैं ऐसे में दुकानदारों को ब्रा में रखे गए नोट लेने पड़ते हैं जो बढ़े हुए तापमान के कारण पसीने में भीगे रहते हैं। इसी कारण दुकानदार ‘No Bra Money’ का नोटिस अपने स्टोर के सामने लगा रहे हैं। हालाँकि दुकानदारों द्वारा लिए गए इस फैसले पर सोशल मीडिया दो भागों में बँटा हुआ है। कई सोशल मीडिया यूजर उनके इस नोटिस का समर्थन कर रहे हैं तो इसका पर्याप्त विरोध भी हो रहा है।

अल्मोड़ा में ‘लव जिहाद’: नाबालिग हिंदू लड़की को फँसा कर रेस्तरां बुलाने वाले कासिफ, अरमान, साने और फरमान गिरफ्तार

उत्तराखंड के अल्मोड़ा में लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। मुरादाबाद और हरिद्वार के रहने वाले चार मुस्लिम युवकों के साथ बग्वालीपोखर इलाके की रेस्तरां में एक नाबालिग हिंदू लड़की को देखकर स्थानीय लोगों और कुछ हिंदू संगठनों ने लव जिहाद का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत की। शिकायत के बाद पुलिस ने शुक्रवार (23 जुलाई 2021) को चार मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन युवकों पर अपहरण के मकसद से हिंदू लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप है। चारों आरोपियों की उम्र 19 से 27 साल के बीच है और उत्तराखंड के हरिद्वार और उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के रहने वाले हैं। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए चारों युवकों में से एक ने कुछ महीने पहले सोशल मीडिया पर इस लड़की से दोस्ती की थी।

मामले की जानकारी रखने वाले एक पुलिस अधिकारी ने खुलासा किया, “एक आरोपित अपने दोस्तों के साथ लड़की से मिलने के लिए शुक्रवार (जुलाई 23, 2021) शाम बग्वालीपोखर इलाके में आया था। उसने लड़की को एक स्थानीय रेस्तरां में बुलाया, जहाँ रेस्तरां के मालिक को उन पर शक हुआ और उसने स्थानीय लोगों को इसके बारे में सूचित किया।”

इसके तुरंत बाद, स्थानीय लोग रेस्तरां में पहुँचे और उन्हें धर दबोचा। उन्होंने ‘लव जिहाद’ का आरोप लगाते हुए चारों युवकों को पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने कहा कि कुछ स्थानीय लोगों ने लड़की के पिता को सूचित किया और वह मौके पर पहुँच गए। लड़की के पिता ने पुलिस को बताया कि चारों आरोपितों ने अपहरण के उद्देश्य से उनकी बेटी को लालच देकर बुलाया है।

बीजेपी विधायक महेश सिंह नेगी के दखल के बाद आरोपित पर केस दर्ज

हालाँकि, कुछ हिंदू संगठनों ने पुलिस पर आरोपितों के खिलाफ चार्ज नहीं लगाने का आरोप लगाया। जागरण में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एसएचओ आरोपितों का नाम उजागर करने से इनकार करते रहे। देर रात स्थानीय विधायक महेश सिंह नेगी के हस्तक्षेप के बाद ही पुलिस ने गिरफ्तार युवक के नामों का खुलासा किया।

आरोपितों की पहचान हरिद्वार और मुरादाबाद निवासी कासिफ, अरमान, साने आलम और फरमान के रूप में हुई है। थाने पहुँचकर द्वाराहाट विधायक महेश सिंह नेगी ने पुलिस से आरोपितों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने को कहा। चारों पर ‘अपहरण और छेड़छाड़’ एवं पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है।

योगी सरकार के एक्शन के डर से 3 कुख्यात गैंगस्टर मोमीन, इन्तजार और मंगता हाथ उठाकर पहुँचे थाने, किया आत्मसमर्पण

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बढ़ते अपराधों पर नकेल कसने के लिए ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है। प्रदेश की पुलिस कुख्यात अपराधियों और उनके गिरोह के अन्य सहयोगियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। यही कारण है कि योगी सरकार के डर से राज्य के अधिकतर थानों से फरार अपराधी खुद ही पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर रहे हैं। ताजा मामला यूपी के शामली जिले का है।

शनिवार (24 जुलाई 2021) को शामली के तीन गैंगस्टर्स (Gangsters) मोमीन पुत्र समसुदीन, इन्तजार पुत्र बशीर और मंगता पुत्र नूरहसन निवासी ग्राम रामडा पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी के डर से हाथ उठाकर थाने पहुँचे और आत्मसमर्पण कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सभी गैंगस्टर्स ने कहा कि वो अपराध से तौबा कर भविष्य में अपराध न करने की कसम खाते हैं। पुलिस अधीक्षक शामली सुकीर्ति माधव ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ थाना कैराना पर बलवा, हत्या का प्रयास के केस पहले से ही पंजीकृत हैं, जिन पर अंकुश लगाने के लिए आरोपितों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की गई है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने कैराना कोतवाली में गैंगस्टर एक्ट में वांछित चल रहे तीनों गैंगस्टरों को गिरफ्तार कर चालान कर दिया है।

गौरतलब है कि योगी सरकार के कार्यकाल में गैंगस्टर अधिनियम के तहत कुल 15 अरब 74 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध संपत्ति को जब्त किया गया है। इसमें सर्वाधिक कार्रवाई जनवरी 2020 से अब तक की गई है। इस दौरान रिकॉर्ड कुल 13 अरब, 22 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध संपत्ति गैगेंस्टर अधिनियम के तहत जब्त की है।

जहाँ से इस्लाम शुरू, नारीवाद वहीं पर खत्म… डर और मौत भला ‘चॉइस’ कैसे: नितिन गुप्ता (रिवाल्डो)

हिंदू लड़कियों के साथ हो रहे जबरन धर्मांतरण में सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर नारीवादी चुप हैं और यह बिलकुल भी आश्चर्यजनक नहीं है। क्योंकि हिंदुस्तान में नारीवाद वहीं पर खत्म हो जाता है, जहाँ से इस्लाम शुरू होता है। ये तीन तलाक, निकाह, हलाला पर चुप रहती हैं। तृप्ति देसाई सबरीमाला चली जाती हैं, लेकिन हाजी अली में नहीं घुसती हैं।

हैरत की बात ये है कि जिस चीज का ये लोग डर से बुराई नहीं कर पाते हैं, उसे ये ‘चॉइस’ कह देते हैं। ईरान में सिर न ढँकने पर जेल की सजा है और इसे चॉइस बोला जा रहा है। जबरन धर्मांतरण को लेकर कहा जा रहा है कि लड़कियाँ निकाह के बाद अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन करती हैं। कई मामलों में तो निकाह ही जबरदस्ती किया जाता है और फिर परिवार को मारने की धमकी देकर धर्म परिवर्तन करवाया जाता है। इसे आप ‘चॉइस’ कहेंगे? जब इंसान के पास दूसरा विकल्प माँ-बाप की मौत होगी, तो वह क्या चुनेगा? उसे ‘चॉइस’ नहीं कहते।

पूरी वीडियो को इस लिंक पर क्लिक करके देखें।

नोट: यह एक सीरीज है, इस सीरीज का यह तीसरा वीडियो है। इसी सब्जेक्ट (हिंदू लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन) पर और भी वीडियो आप हमारे यूट्यूब चैनल पर आगे देख पाएँगे।

PM मोदी से The Hindu की चेयरपर्सन मालिनी पार्थसारथी की मुलाकात पर ‘खिसियाए’ पूर्व एडिटर-इन-चीफ एन राम

‘द हिन्दू’ प्रकाशन समूह की चेयरपर्सन मालिनी पार्थसारथी ने गुरुवार (22 जुलाई 2021) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, लेकिन यह मुलाकात ‘द हिन्दू’ के डायरेक्टर एन राम को पसंद नहीं आई। उन्होंने इस मुलाकात से खुद को अलग करते हुए इशारा किया कि पार्थसारथी ने दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री से मुलाकात करके वामपंथी प्रकाशन समूह की बरसों पुरानी प्रतिष्ठा को गँवा दिया।

पार्थसारथी की पीएम मोदी से मुलाकात के संबंध में @Mrs_DoSoLittle नाम के एक ट्विटर यूजर की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए एन राम ने कहा कि इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि मेहनत से कमाई गई ‘द हिन्दू’ की प्रतिष्ठा और गँवाई जा रही 142 से अधिक सालों की लीगेसी को बचाने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। हालाँकि, पार्थसारथी इस पर चुप नहीं रहीं और उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद ‘द हिन्दू’ की प्रतिष्ठा भंग नहीं होगी और 142 वर्षों से अधिक की लीगेसी तथ्यात्मक पत्रकारिता करके हासिल हुई है न कि राजनैतिक पक्षपात के द्वारा।

उन्होंने यह भी कहा कि ‘द हिन्दू’ की ईमानदारी और साख को पुनर्स्थापित करने के लिए वह संकल्पित हैं और लीगेसी को पुनर्जीवित करने का यही एक जरिया है। दरअसल पार्थसारथी के कहने का यही मतलब था कि वह ‘द हिन्दू’ की उस प्रतिष्ठा को पुनः अर्जित करना चाहती हैं, जो प्रकाशन समूह के एडिटर-इन-चीफ रहते हुए एन राम के कार्यकाल में धूमिल हो गई थी।

यह पहली बार नहीं है जब ‘द हिन्दू’ से जुड़े दो वरिष्ठ पत्रकार आमने-सामने हैं। एन राम की बात करें तो वह लगातार राफेल के सौदे को लेकर घोटाले का आरोप लगाते रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान भी उन्होंने क्रॉप की गई फोटो प्रकाशित करके राफेल सौदे में घोटाले का आरोप लगाया था। वहीं, पार्थसारथी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने की बात कह चुकी हैं। उन्होंने सीधे तौर पर यह कहा था कि वह निजी तौर पर यह मानती हैं कि राफेल के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सत्यनिष्ठा पर कोई प्रश्न नहीं उठाया जा सकता है।

इससे पहले भी अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा बच्चों को बिना प्याज और लहसुन का भोजन देने के मामले में ‘द हिन्दू’ ने फाउंडेशन की आलोचना करते हुए रिपोर्ट प्रकाशित की थी। हालाँकि, सोशल मीडिया पर आलोचना होने के बाद पार्थसारथी ने खुद को इस रिपोर्ट से यह कहते हुए अलग कर लिया था कि वह प्रतिदिन प्रकाशित होने वाले न्यूज कंटेन्ट को नहीं देखतीं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि प्रकाशन द्वारा अक्षय पात्र पर निशाना साधना अनुचित है।

इस मुद्दे पर एन राम के विचार कुछ अलग थे। उन्होंने ‘द हिन्दू’ के ‘संपादकीय मूल्यों’ का हवाला देते हुए पार्थसारथी पर बाहरी आलोचनाओं से प्रभावित होने का आरोप लगाया था। हालाँकि, इसके बाद भी पार्थसारथी ने कहा था कि अक्षय पात्र पर उनके प्रकाशन की रिपोर्ट एकतरफा पत्रकारिता का उदाहरण है।

15 हजार फीट की ऊँचाई पर लटके जवान को बचाने में मेजर पंकज पांडे बलिदान, साथी खतरे से बाहर

उत्तर प्रदेश के हरदोई में रहने वाले मेजर पंकज पांडे अपने साथी की जान बचाने में बलिदान हो गए। मेजर पांडे अरुणाचल प्रदेश के तंबौला में तैनात थे। बताया जा रहा है कि उनका एक साथी 15 हजार फीट ऊँचाई से गहरी खाई में गिरने वाला था। उसे इस हालत में देखकर वह परेशान हो गए और साथी की जान बचाने में वह भी खाई में गिर गए। इससे मेजर गंभीर रूप से घायल हो गए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार (2 जुलाई 2021) देर रात गुवाहाटी के हॉस्पिटल में उन्होंने दम तोड़ दिया। वहीं, उनका साथी खतरे से बाहर बताया जा रहा है। मेजर की मौत की खबर से उनके परिवार और जिले में शोक की लहर दौड़ गई। शनिवार (24 जुलाई 2021) को पूरे सैन्य सम्मान के साथ असम के लेखापानी में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

पंकज की रेजीमेंट बी सिख के अधिकारियों ने बताया कि 19 जुलाई की सुबह करीब 15 हजार फीट पर ड्यूटी के दौरान उनका एक साथी खाई में गिर रहा था। साथी की जान बचाने में पंकज और उनका साथी नीचे खाई में गिर गए। कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को किसी तरह खाई से बाहर निकाला गया। खाई में गिरने से दोनों गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। दोनों को गुवाहाटी के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। यहाँ साथी तो खतरे से बाहर है, लेकिन पंकज ने दम तोड़ दिया।

हरदोई जिले के महोलिया शिवपार इलाके में रहने वाले व्यवसायी अवधेश पांडे ने बताया कि उनके दो बेटे हैं। बड़ा बेटा पंकज पांडे सेना में मेजर था और छोटा बेटा आशीष पांडे है। उन्होंने बताया कि 19 जुलाई की दोपहर उनके पास फोन आया कि एक हादसा में उनका बेटा पंकज बुरी तरह से घायल हो गया है। इसके बाद वे फौरन अपने छोटे बेटे आशीष को लेकर गुवाहाटी के अस्पताल पहुँचे, जहाँ पंकज को भर्ती कराया गया था। हालाँकि, इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

बता दें कि 5 साल पहले ही मेजर पंकज का ​विवाह कंचन के साथ हुआ था। उनकी डेढ़ साल की एक बेटी भी है। ​पति के बलिदानी होने के बाद से पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। वह भी बाकी परिजनों के साथ गुवाहाटी पहुँच गई हैं।

NH के बीच आने वाले धार्मिक स्थलों को बचाने से केरल HC का इनकार, निजी मस्जिद बचाने के लिए राज्य सरकार ने दी सलाह

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार (23 जुलाई, 2021) को उस याचिका को रद्द कर दिया, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए जमीन अधिग्रहण में गड़बड़ियों की बात की गई थी और उच्च-न्यायालय से इसमें हस्तक्षेप की माँग की गई थी। कोल्लम में NH-66 के निर्माण कार्य के बीच में धार्मिक स्थलों के आ जाने के कारण इस याचिका में उन्हें बचाने की माँग की गई थी, लेकिन केरल हाईकोर्ट ने इससे इनकार कर दिया।

केरल हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में न्यायालय को समीक्षा की अनुमति नहीं है, इसीलिए राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के कार्य में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णन ने अपने फैसले में कहा कि अगर राजमार्ग के निर्माण कार्य से धार्मिक स्थल प्रभावित होते हैं तो भगवान हमें माफ़ कर देंगे। याचिकाकर्ता की मुख्य शिकायत ये थी कि इस मामले में राज्य सरकार के निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है।

बताया गया है कि सड़क के बाईं ओर दो मंदिर और एक मस्जिद है, लेकिन सड़क के दाईं ओर दिखाई गई मस्जिद एक निजी मस्जिद है। केरल की सरकार ने इस निजी मस्जिद को बचाने के लिए अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए चौड़ीकरण की प्रक्रिया में बदलाव का सलाह दिया। इससे सड़क के बाईं ओर जहाँ दो मंदिर और एक मस्जिद स्थित है, अब राजमार्ग का निर्माण करू फ़ैल कर वहाँ आ गया है।

हालाँकि, केरल की सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों का कहना था कि याचिकाकर्ता ने जैसा बताया वैसा कुछ भी नहीं हुआ है और स्थान में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। साथ ही दावा किया कि सड़क निर्माण के लिए माप, डिजाइन और आसपास के धार्मिक स्थलों को बचाने के लिए नियम का पालन किया गया है। याचिकाकर्ता का पूछना था कि क्या मौजूदा बदलाव ठीक है?

केरल हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट को उद्धृत करते हुए कहा कि ‘राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण’ एक वैध और प्रोफेशनल संस्था है, जो राजमार्गों के निर्माण से लेकर उनके प्रबंधन तक के कार्यों में विशेषज्ञता रखता है। NHAI ने कहा कि वो याचिकाकर्ता के सुझावों को मानने की स्थिति में नहीं है। केरल हाईकोर्ट ने भी पाया कि कुछ भी दुर्भावनापूर्ण तरीके से नहीं किया गया है। केरल हाईकोर्ट ने कहा कि अधिग्रहण के लिए कुछ भी छोड़ने की ज़रूरत नहीं है।

केरल हाईकोर्ट ने कहा, “सर्वशक्तिमान ईश्वर सर्वव्यापी है। वह पृथ्वी पर, आकाश में, खम्भों में और युद्ध के मैदान में – हर जगह है। वह दयालुता का ही एक रूप है और दया के प्रकाश के रूप में सभी के दिलों में निवास करता है। राष्ट्रीय राजमार्ग के विकास के लिए यदि धार्मिक संस्थान प्रभावित होते हैं, तो ईश्वर हमें क्षमा करेंगे। परमेश्वर याचिकाकर्ताओं, अधिकारियों और इस निर्णय के लेखक की भी रक्षा करेंगे। भगवान हमारे साथ रहेंगे।”

यूपी में स्वीकृत सभी 548 ऑक्सीजन प्लांट 15 अगस्त 2021 तक हों चालू: योगी सरकार ने DM को दिया सुनिश्चित करने का निर्देश

जल्द ही भारत में चीनी कोरोना वायरस की तीसरी लहर आने की अटकलों के बीच, उत्तर प्रदेश सरकार उससे निपटने के लिए खुद को तैयार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार 15 अगस्त तक यूपी में 548 ऑक्सीजन संयंत्रों को चालू करने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिससे यह आश्वासन मिलता है कि यदि राज्य में तीसरे चरण का संक्रमण होगा तो उत्तर प्रदेश के हर जिले में पर्याप्त ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने राज्य के आयुक्तों और विभिन्न जिलाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि उनके अंतर्गत आने वाले जिलों में स्वीकृत सभी 548 ऑक्सीजन प्लांट 15 अगस्त 2021 तक चालू हो जाएँँ।

राजेंद्र कुमार तिवारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान अधिकारियों को कहा, “वर्तमान में 548 ऑक्सीजन संयंत्रों में से 214 क्रियाशील हैं। यह देखें कि उनमें से बाकी भी 15 अगस्त तक चालू हो जाएँ।” उन्होंने आगे बताया कि प्रत्येक ऑक्सीजन संयंत्र में उत्पादन की निगरानी के लिए कम से कम दो टेक्नीशियन को नियुक्त किया जाएगा।

राजेंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि अब तक 280 टेक्निशियन को शॉर्टलिस्ट किया गया है। यूपी के सीएस ने अधिकारियों को बाल चिकित्सा वार्डों की देखरेख करने और यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा कि वहाँ भी ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति हो।

ऑक्सीजन प्लांट का सिविल वर्क अंतिम चरण में

रिपोर्टों के अनुसार, यूपी के मुख्य सचिव ने कहा है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा स्थापित किए गए प्रेशर स्विंग अवशोषण (Pressure Swing Absorption) ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों का सिविल कार्य अपने अंतिम चरण में है। शेड लगाए जाने के बाद, संयंत्रों को 15 अगस्त तक चालू कर दिया जाएगा।

यूपी कोविड -19 की प्रत्याशित तीसरी लहर से निपटने के लिए तैयार

गौरतलब है कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस साल मई में नोएडा फिल्म सिटी में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि राज्य पूरी तैयारी के साथ कोविड-19 की प्रत्याशित तीसरी लहर से लड़ने के लिए खुद को तैयार कर रहा है।

चूँकि, भविष्यवाणियों के अनुसार, तीसरी लहर बच्चों, महिलाओं और अन्य कमजोर समूहों को प्रभावित कर सकती है, योगी सरकार बच्चों की उचित और विशेष देखभाल के लिए सभी जिलों में न्यूनतम 100 बिस्तरों की क्षमता वाले बाल चिकित्सा आईसीयू स्थापित कर रही है। साथ ही मेडिकल कॉलेजों में भी अतिरिक्त वार्ड बनाए जा रहे हैं।

इसके अलावा, तीसरी लहर की चेतावनी के बीच, यूपी सरकार युद्ध स्तर पर टीकाकरण अभियान चला रही है। 4 जून को, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के अधिकारियों को एक महीने में राज्य की दैनिक कोविड-19 टीकाकरण दर को तीन गुना करने का निर्देश दिया था। कैलकुलेशन के अनुसार, तीन गुना लक्ष्य के लिए एक दिन में 10 लाख से अधिक टीके देना होगा।