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तमिलनाडु: कोयंबटूर में हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त किए जाने का विरोध करने पर हिन्दू एक्टिविस्ट और IMK प्रमुख अर्जुन संपत गिरफ्तार

हिन्दू एक्टिविस्ट और इंदु मक्कल काची (IMK) के प्रमुख अर्जुन संपत को तमिलनाडु के कोयंबटूर में गिरफ्तार कर लिया गया है। संपत मुथन्ननकुलम झील के किनारे स्थित हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त किए जाने के विरोध में कोयंबटूर कॉर्पोरेशन और तमिलनाडु सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। शुक्रवार (23 जुलाई 2021) को IMK ने ट्वीट करके संपत की गिरफ्तारी की सूचना दी।

IMK ने अपने ट्वीट में कहा कि अर्जुन संपत हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त किए जाने वाली जगह पर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे, तभी उन्हें कोयंबटूर पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। IMK ने संपत को रिहा करने और कोयंबटूर कॉर्पोरेशन से मंदिरों के पुनर्निर्माण की माँग की है। इससे पहले IMK प्रमुख संपत ने हिन्दू भक्तों से अनुरोध किया था कि वे ध्वस्त किए गए मंदिरों के स्थान पर 23 जुलाई 2021 को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करें। उन्होंने यह भी कहा था कि शुक्रवार को उस जगह पर पूजा की जाएगी।

ज्ञात हो कि तमिलनाडु के कोयंबटूर कॉर्पोरेशन ने मंगलवार (जुलाई 13, 2021) को शहर के मुथन्ननकुलम झील के उत्तरी बाँध पर मौजूद 7 मंदिरों को विकास के नाम पर ध्वस्त कर दिया था। प्रशासन ने कथित तौर पर यह फैसला स्मार्ट सिटी मिशन के तहत झील के कायाकल्प और विकास के लिए लिया। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, कॉर्पोरेशन के अधिकारियों ने अम्मन कोविल, बन्नारी अम्मन कोविल, अंगला परमेश्वरी, करुपरायण कोविल, मुनीस्वरन कोविल और कुछ अन्य मंदिरों को ध्वस्त करने के लिए अर्थमूवर और भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया था।

बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात था, जिसका काम विरोध करने वाले लोगों पर एक्शन लेना था। कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस दौरान 150 लोगों को विरोध करने पर हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ अन्य लोगों का कहना है कि 250 लोगों को पकड़ा गया। वहीं, प्रशासन ने इस कदम को उठाने से पहले साल 2020 में झील के आसपास अतिक्रमण का हवाला देते हुए कार्रवाई की थी। उस समय करीब 2,400 परिवारों को वहाँ से हटाकर उनके घर ध्वस्त किए गए थे। इन सभी लोगों को स्लम क्लीयरेंस बोर्ड परियोजनाओं में वैकल्पिक आवास प्रदान किया गया था।

इससे पहले हिंदू मंदिरों को ध्वस्त करने के बाद कई भक्तों और हिंदू कार्यकर्ताओं ने इसके विरोध में सड़कों पर प्रदर्शन किया था। रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू मुन्नानी के हिंदू कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार (जुलाई 16, 2021) को कोयंबटूर के टाउन हॉल में कॉर्पोरेशन कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था और उसके मंदिर विध्वंस अभियान की निंदा की थी।

तब हिंदू मुन्नानी के प्रदेश अध्यक्ष कदेश्वर सुब्रमण्यम ने कहा था, “जब पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे तो संसद में एक अधिनियम पारित किया गया था, जिसमें 75 वर्ष से अधिक पुराने मंदिरों को ध्वस्त करने पर रोक लगाई गई थी, लेकिन कोयंबटूर निगम ने सदियों पुराने मंदिरों को ध्वस्त कर दिया।”

‘कौन है स्वरा भास्कर’: 15 अगस्त से पहले द वायर के दफ्तर में पुलिस, सिद्धार्थ वरदराजन ने आरफा और पेगासस से जोड़ दिया

वामपंथी मीडिया पोर्टल ‘द वायर’ के फाउंडिंग एडिटर सिद्धार्थ वरदराजन का कहना है कि आज (जुलाई 23, 2021) उनके दफ्तर में एक पुलिस कर्मी ने पहुँचकर स्वरा भास्कर, विनोद दुआ और आरफा खानुम शेरवानी से जुड़े सवाल किए। अपने ट्वीट में सिद्धार्थ ने उनकी पेगासस रिपोर्ट से इस घटना को जोड़ा और बताया कि पेगासस प्रोजेक्ट के बाद ये एक उनका एक और दिन है।

उन्होंने लिखा, “आज एक पुलिसकर्मी अपने बेहूदा सवालों के साथ आया और पूछा- विनोद दुआ कौन हैं? स्वरा भास्कर कौन हैं? हम आपका रेंट एग्रीमेंट देख सकते हैं? क्या मैं आरफा से बात कर सकता हूँ?” उनके मुताबिक, जब उन्होंने पुलिस वाले से इस तरह आने का सवाल किया, तो जवाब मिला कि 15 अगस्त के लिए रूटीन चेक है। अपने ट्वीट में सिद्धार्थ इस तरह की चेकिंग को अजीब लिखते हैं।

साभार: सिद्धार्थ वरदराजन का ट्वीट

बता दें इससे पहले द वायर को फर्जी खबरों को लेकर कश्मीर पुलिस द्वारा ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया था। कश्मीर पुलिस ने द वायर पर ‘तथ्यों की गलत बयानी, सनसनीखेज, कुछ अज्ञात विशेषज्ञों की राय के साथ तथ्यों का मनगढ़ंत मिश्रण’ करने का आरोप लगाया था। पोर्टल पर मीडिया ट्रायल में शामिल होने का भी आरोप लगाया गया था।

वहीं फेक न्यूज फैलाने के लिए कुख्ताय विनोद दुआ के बारे में मालूम हो कि वह हाल में केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी द्वारा मदद किए जाने पर चर्चा में आए थे। कोविड से संक्रमित दुआ के लिए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दवाइयों का इंतजाम करवाया था। उनके विरुद्ध झूठी खबरें फैलाने और अराजकता फैलाने के आरोप में 2020 में केस दर्ज हुआ था।

इसी तरह आरफा खानुम शेरवानी भी अपनी इस्लामी पत्रकारिता के लिए कुख्यात हैं। वह न केवल एक सामाजिक अपराध से जुड़े मसले में इस्लामोफोबिया खोज लेती हैं बल्कि जब एक मुस्लिम व्यक्ति दूसरे मुस्लिम व्यक्ति को मारता है तो भी वह नफरत फैलाने के लिए पूरी खबर को अलग एंगल दे देती हैं।।

बता दें कि पहले यह स्पष्ट नहीं था कि पुलिसकर्मी द वायर के दफ्तर में क्यों पहुँचा और वह वहाँ ऐसी पूछताछ क्यों कर रहा था। सिर्फ सिद्धार्थ वरदराजन के दावे पर ही तरह तरह की बातें हो रही थीं। लेकिन अब नई दिल्ली के डीसीपी ने ट्विटर पर साफ किया है कि स्वतंत्रता दिवस से पहले, सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी उपाय जैसे किराएदारों का वेरिफिकेशन, गेस्ट हाउस की जाँच आदि पूरे दिल्ली में किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्थानीय बीट अधिकारी एक कार्यालय का सत्यापन करने गए थे, जिसके प्रवेश द्वार पर कोई साइनबोर्ड नहीं था। अपने ट्वीट में डीसीपी ने कार्यालय के बाहर की फोटो भी शेयर की है।

बिहार के एक गॉंव से अब तक 3 आतंकी गिरफ्तार: हथियार जम्मू-कश्मीर भेजता था अरमान मंसूरी, NIA ने दबोचा

जम्मू-कश्मीर में आतंकी संगठनों को हथियारों की सप्लाई करने के मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार के छपरा से तकरीबन 20 वर्ष की उम्र के एक संदिग्ध आतंकी अरमान मंसूरी को गिरफ्तार किया है। जाँच एजेंसी ने आरोपित को कोर्ट में पेश किया, जहाँ से उसे चार दिन की ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अरमान मूलत: छपरा के मढ़ौरा थाना क्षेत्र के देव बहुआरा गाँव का रहने वाला है और जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को हथियार सप्लाई करने के मामले में वह आरोपित है। नईमुद्दीन अंसारी और ओहिदा खातून के तीन लड़कों में अरमान सबसे बड़ा है और नौवीं कक्षा तक पढ़ा है। आतंकवाद के कनेक्शन में इस गाँव से गिरफ्तार होने वाला अरमान तीसरा शख्स है।

इसके पहले, जाँच एजेंसियों ने इसी गाँव के दो भाईयों, जावेद और मुश्ताक को इसी साल फरवरी में गिरफ्तार किया था। वहीं, आतंकी कनेक्शन के मामले में ही एक हफ्ते पहले ही जाँच एजेंसी ने मोहम्मद गुड्डू नाम के युवक पकड़ा था, जिससे पूछताछ के आधार पर अरमान की गिरफ्तारी हुई है।

इस गिरफ्तारी को लेकर आरोपित अरमान के परिवार का कहना है कि गुरुवार (22 जुलाई 2021) की सुबह जब अरमान सोया था, तभी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। एनआईए ने उसके परिजनों के फोन और उसके दो फोन को जब्त कर लिया। बाद में परिजनों के फोन और अरमान का बेसिक फोन लौटा दिया गया, लेकिन अरमान का एंड्रॉइड फोन जब्त कर लिया गया।

अरमान पहले केरल में टाइल्स लगाने का काम करता था, लेकिन बीते 6 महीने से घर पर ही रहता है। उसके अब्बा भी पहले सऊदी अरब में थे, लेकिन वो भी अभी घर पर ही रह रहे हैं।

इससे पहले, 16 फरवरी 2021 को एनआईए ने आतंकियों को हथियार सप्लाई करने के मामले में जावेद और मुश्ताक को इसी गाँव से गिरफ्तार किया था। जावेद ने पूछताछ में अरमान के बारे में बताया था। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने उसे गवाही के लिए नोटिस भी जारी किया था, लेकिन वो नहीं आया था। इसके बाद एनआईए और बिहार एटीएस की टीम ने अरमान मंसूरी को गिरफ्तार कर लिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, जाँच एजेंसी की पूछताछ में आरोपित अरमान ने कबूल किया है कि उसने ही जावेद के कहने पर एक बैग की डिलीवरी की थी। उसने बताया कि डिलीवरी के बदले में उसे 10 हजार रुपए मिले थे। हालाँकि, पूछताछ में उसने ये नहीं बताया कि बैग में क्या था।

पुलिस अंकल 5 मर्डर हो गया है… जल्दी आ जाओ, मैं अकेली हूँ: 8 साल की बच्ची के कॉल पर दौड़ी गाजियाबाद पुलिस तो क्या हुआ

गाजियाबाद पुलिस के साथ बीते मंगलवार (21 जुलाई 2021) को एक अजीब वाकया हुआ। दोपहर 2:30 बजे पुलिस के पास एक फोन आया। फोन लाइन पर दूसरी तरफ एक बच्ची थी जिसने पुलिस को 5 हत्याओं के बारे में सूचना दी। बच्ची ने पुलिस को पता बताया और फोन काट दिया। जब पुलिस बताए गए पते पर पहुँची तो माजरा कुछ और ही था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार कक्षा 3 में पढ़ने वाली 8 साल की बच्ची ने अपने पिता के मोबाइल फोन से पुलिस को फोन कर दिया। बच्ची ने कहा, “पुलिस अंकल 5 मर्डर हो गया है, गली नंबर 5 सरकारी स्कूल के पास। आप जल्दी आ जो, मैं अकेली हूँ।” सूचना मिलते ही गाजियाबाद पुलिस की टीम तुरंत ही बताए गए पते पर पहुँच गई लेकिन वहाँ पुलिस को ऐसा कुछ भी नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने उसी फोन नंबर पर दोबारा संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन इस बार फोन बंद था।

लगभग 30 मिनट के बाद पुलिसकर्मियों ने एक बार फिर उसी नंबर पर फोन लगाया। इस बार फोन बच्ची के पिता ने रिसीव किया जो एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। लड़की के पिता ने पुलिस से बताया कि उनकी बेटी ने पुलिस के साथ प्रैंक किया है और मर्डर की झूठी सूचना दी थी। एसपी (ग्रामीण) इराज राजा ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि जब वो लड़की के घर पहुँचे तब उन्हें पता चला कि कक्षा 3 में पढ़ने वाली एक बच्ची ने उनके साथ प्रैंक किया है।

राजा ने यह भी बताया कि बच्ची के परिजनों से यह जानकारी मिली कि बच्ची पहले भी ऐसे प्रैंक कॉल कर चुकी है। एक बार उसने अपने अंकल को अपने पिता के एक्सीडेंट की झूठी खबर दे दी थी जिसके बाद सभी रिश्तेदार और पड़ोसी उसके घर पहुँच गए थे। राजा ने बताया कि बच्ची टीवी पर आने वाले क्राइम शो की बहुत बड़ी फैन यही और उसे यह पता चला कि 112 डायल करने पर पुलिस आ जाती है, बस फिर क्या था, पुलिस आती है या नहीं, यही चेक करने के लिए उसने पुलिस को प्रैंक कॉल कर मर्डर की झूठी जानकारी दे दी।

मंगलवार की शाम को ही कवि नगर पुलिस थाने में एक 21 वर्षीय लड़की के अपहरण की शिकायत आई। लड़की के पिता ने पुलिस को अपनी बेटी के अपहरण की सूचना दी लेकिन बाद में पता चला कि वह लड़की अपने बॉयफ्रेंड के साथ बाइक पर घूम रही थी। पुलिस ने लड़की के पिता पर गलत जानकारी देने का मामल दर्ज किया और साथ ही लड़की के बॉयफ्रेंड पर पुलिस के साथ बदतमीजी करने का मामला भी दर्ज किया।

जिस भास्कर में स्टाफ मर्जी से ‘सूसू-पॉटी’ नहीं कर सकते, वहाँ ‘पाठकों की मर्जी’ कॉर्पोरेट शब्दों की चाशनी है बस

लक्ष्मी प्रसाद पंत। दैनिक भास्कर के राष्ट्रीय संपादक हैं। 22 जुलाई को एक ट्वीट करते हैं। समय होता है दोपहर का 12 बज कर 14 मिनट।

“मैं स्वतंत्र हूं, क्योंकि मैं दैनिक भास्कर हूं….!!!”

आजाद देश में सभी स्वतंत्र हैं। पाँचवीं का बच्चा भी, दैनिक भास्कर भी। अपराध साबित होने तक अपराधी भी। 9वीं-10वीं के नागरिक शास्त्र वाली किताबों की सर्वसामान्य बात राष्ट्रीय संपादक स्तर के आदमी को क्यों लिखनी पड़ी? खुद लक्ष्मी प्रसाद पंत (एलपी पंत) ही बता पाएँगे।

आगे बढ़ते हैं। तारीख वही थी, समय हो गया था दोपहर का 1 बज कर 42 मिनट। एलपी पंत फिर से एक ट्वीट करते हैं। बिना शब्दों वाला ट्वीट। सिर्फ फोटो। जो लिखा था, फोटो में ही लिखा था।

दैनिक भास्कर के राष्ट्रीय संपादक एलपी पंत का फोटो वाला ट्वीट

मैं स्वतंत्र हूं
क्योंकि मैं भास्कर हूं
भास्कर में
चलेगी पाठकों
की मर्जी

“भास्कर में चलेगी पाठकों की मर्जी” – फोटो में यह नीचे वाला हिस्सा है। सच्चाई यह है कि इस वाक्य में ईमानदारी नहीं है। कैसे? कोई सबूत? सबूत खुद लेखक है। लेखक जिसने दैनिक भास्कर (ऑनलाइन मीडिया) में काम किया है कभी। जब तक काम किया, इसी के सहारे रोजी-रोटी भी चली थी।

भास्कर में पाठक की मर्जी (तर्क)?

पाठक सुबह अखबार खरीदता है। खोल कर पढ़ता है। पाठक TV देखता है। अपने मन का चैनल बदलता है। पाठक वेबसाइट खोलता है, एक खबर छोड़ दूसरी खबर पर चला जाता है। इसे मर्जी कहते हैं, पाठक की मर्जी। कृपया इसे “भास्कर में पाठक की मर्जी” जैसे चाशनी में डूबे शब्द मत बनाइए। पाठक निरीह है, शब्दों का अफीम देकर उसे मानसिक तौर पर निर्जीव मत बनाइए।

क्यों? क्योंकि सही में भास्कर हो या ‘XYZ टाइम्स’ या ‘ABC तक’… कहीं भी पाठकों की मर्जी नहीं चलती। क्यों नहीं चलती?

क्योंकि… 1.) अस्पताल में डॉक्टर-नर्स तय करते हैं कि पैर में बैंडेज लगाना है या आँख पर। 2.) सीमा पर सेना के अफसर-जवान तय करते हैं कि गोली दागनी है या हथगोला फेंकना है। 3.) संसद में सांसद तय करते हैं कि शाह बानो को क्या चाहिए या उनका खुद का वेतन बढ़े या नहीं… इन तीनों (सिर्फ उदाहरण हैं, तमाम धंधे-बिजनेस-कॉर्पोरेट आप खुद लिख सकते हैं) के जैसे ही किसी मीडिया हाउस में संपादक-संपादक के नीचे वाले-डेस्क वालों से लेकर फील्ड वाले पत्रकार तय करते हैं कि क्या छपेगा, क्या नहीं। फिर ढकोसला क्यों? शब्दों का पहाड़ क्यों?

भास्कर में पत्रकारों की मर्जी (आपबीती)?

दिल्ली में दैनिक जागरण (ऑनलाइन) की नौकरी के बाद दैनिक भास्कर (ऑनलाइन ही) पहुँचा। भेजा गया भोपाल क्योंकि भास्कर के दिल्ली ऑफिस में जगह खाली नहीं थी। जाना तो था ही, सो मैं पहुँचा भोपाल। ऑफिस में कुछ नए दोस्त बने, कुछ सोशल मीडिया पर पहले से दोस्त थे, उनसे मुलाकात हुई। शुरुआती 2-4 दिनों (जब आप चुपचाप बैठे होते हैं, सिर्फ मुंडी हिलाते हैं और काम करते हैं) के बाद ऑफिस को भी देखने लगा। संपादकीय बातों से दूर यह कहानी ऑफिस के दर-ओ-दीवार की ही है।

नित्य क्रिया से निवृत होने वाली बात सरकारी स्कूल की किताबों में दूसरी-तीसरी में पढ़ा दी गई थी। जो बात इन किताबों में छूट गई थी, वो भास्कर के भोपाल ऑफिस ने साक्षात दिखा दी। भास्कर ने सिखाया कि सूसू-पॉटी करने के लिए अलग-अलग लोगों (इंसान, एक ही ऑफिस में काम करने वाले इंसान) के लिए अलग-अलग व्यवस्था होनी चाहिए।

मैं तब संपादकीय टीम का एक अदना सा सिपाही था, इसलिए हमारे लिए जो टॉयलेट थे, वो आम थे। मैनेजमेंट (या शायद तब के संपादक भी जाते होंगे, मैंने हालाँकि कभी झाँक कर देखा नहीं) के लोग जिस टॉयलेट में जाते थे, उस पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था – Executive Toilet… मतलब उनका टॉयलेट खास था।

आम और खास टॉयलेट तक की दीवार को जो संपादक आज तक (कुछ मित्र बताते हैं कि अभी तक है) नहीं गिरा पाए हैं, जो संपादक अपनी संपादकीय टीम के साथी को Executive तक फील नहीं करवा पाते हैं, वो ऑफिस की दीवारों के पार सड़क पर चलते आम पाठकों के लिए इतने भारी-भरकम शब्द कैसे गढ़ लेते हैं?

“पाठकों की मर्जी…” क्यों, काहे?

PS: दैनिक भास्कर समूह पर ज्यादा पैसा कमाने लेकिन टैक्स कम देने का आरोप है। आयकर वालों ने इसे लेकर कई जगह छापे मारे। उसके बाद ‘पत्रकारिता का दमन’, ‘आपातकाल’ जैसे जुमले उछाले गए। मेरी कहानी का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं। बस यह बताने की कोशिश है कि सब कुछ वैसा नहीं, जैसा दैनिक भास्कर बताता है।

चीनी कल-पुर्जे से बना ड्रोन, पाकिस्तान से 5 किलो विस्फोटक लेकर भारत में घुसा: जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मार गिराया

भारत की सीमा में ड्रोन के जरिए नापाक मंसूबों को अंजाम देने की पाकिस्तान की कोशिश एक बार फिर से नाकाम कर दी गई है। जम्मू-कश्मीर के कनाचक इलाके में पुलिस ने एक ड्रोन को मार गिराया है। चीनी पार्ट से एसेंबल कर बनाए गए इस ड्रोन पर 5 किलो विस्फोटक बँधा था। जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर हुए हमले में भी पाकिस्तान ने चीन में तैयार किए गए ड्रोन का ही इस्तेमाल किया था।

जम्मू जोन के एडीजीपी मुकेश सिंह ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया, “गुरुवार की रात हमें आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद द्वारा ड्रोन के जरिए अखनूर सेक्टर में विस्फोटक भेजने की जानकारी मिली थी। हमने टीम को तैनात किया। रात तकरीबन 1 बजे टीम ने फायरिंग शुरू कर दी और ड्रोन को मार गिराया। इस ड्रोन पर करीब 5 किलोग्राम आईईडी बँधा था जो कि पूरी तरह से तैयार स्थिति में था। यह हेक्साक्लॉप्टर था जिसमें फ्लाइट कंट्रोलर के साथ जीपीएस लगा हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि इस फ्लाइट कंट्रोलर का सीरियल नंबर पिछले साल कठुआ में जो ड्रोन मिला था उससे एक अंक ही अलग है। इस ड्रोन का असेंबल करके तैयार किया गया था और इसके कुछ पार्ट्स चीन और ताइवान के थे।”

यह ड्रोन अंतरराष्ट्रीय सीम से 6 किलोमीटर भीतर तक आ गया था, जिसके बाद इसे मार गिराया गया। एडीजीपी मुकेश सिंह ने कहा, “हमने पिछले 1.5 वर्षों में ड्रोन से भेजे गए 16 एके 47 राइफल, 3 एम 4 राइफल, 34 पिस्तौल, 15 ग्रेनेड, 18 आईईडी और 4 लाख रुपए नकद बरामद किए हैं। एयरपोर्ट पर और उसके आसपास ड्रोन रोधी प्रणाली और कुछ अन्य प्रतिष्ठान स्थापित किए गए हैं।”

गौरतलब है कि 27 जून को ही जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर ड्रोन के जरिए दो विस्फोट किए गए थे। हालाँकि, ये विस्फोट ताकवर नहीं थे। हवाई अड्डे के तकनीकी क्षेत्र में कम ताकत वाले दो बम विस्फोटों के दो हफ्ते बाद खुलासा हुआ कि यह हमला पाकिस्तान ने चीन में बने ड्रोन से किया था। फोरेन्सिक जाँच में पता चला था कि ड्रोन चीन में बनाया गया था और इस्तेमाल किए गए इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) को आरडीएक्स और नाइट्रेट को मिलाकर बनाया गया था।

राहुल गाँधी के वायनाड में जंगली सूअरों को मारने की आजादी, हाईकोर्ट ने कहा- केरल सरकार पूरी तरह से फेल

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के संसदीय क्षेत्र केरल के वायनाड के किसानों को केरल हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने वायनाड जिले के किसानों को उनके खेतों में आने वाले जंगली सूअरों को मारने के अनुमति दे दी है। इन सूअरों के कारण किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुँच रहा था। इसके बावजूद, राज्य की वामपंथी सरकार सूअरों से फसलों को बचाने के लिए कुछ नहीं कर रही थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट ने शुक्रवार (24 जुलाई 2021) को इस मामले में अंतरिम आदेश पारित कर निर्देश दिया कि मुख्य वन्य जीव संरक्षक किसानों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 11(1)(बी) के तहत अपनी कृषि भूमि के पास आने वाले जंगली सूअर का शिकार करने की अनुमति देंगे। इसके साथ ही उन्हें एक महीने के भीतर कोर्ट को रिपोर्ट देने के लिए भी कहा गया।

जस्टिस पीबी सुरेश कुमार ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस मामले से निपटने में पूरी तरह से फेल रही है। ऐसी स्थिति में ऐसा निर्देश देना आवश्यक था। इसीलिए कोर्ट मुख्य वन्य जीव वार्डन को अंतरिम आदेश जारी करती है कि वे याचिकाकर्ताओं को उनकी कृषि भूमि पर आने वाले जंगली सूअर के शिकार की इजाजत दें।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “चूंकि यह स्वीकार किया गया है कि राज्य की मशीनरी जंगली सूअर के हमले को नियंत्रित करने के मुद्दे को हल करने में पूरी तरह विफल रही है, इसलिए यह अदालत एक अंतरिम आदेश पारित करना उचित समझती है जिसमें निर्देश दिया गया है कि मुख्य वन्य जीव संंरक्षक याचिकाकर्ताओं को उनकी कृषि भूमि पर आने वाले जंगली सूअर का शिकार करने की अनुमति देंगे।।”

जंगली सूअरों द्वारा किसानों की फसलों को नुकसाने पहुँचाने के मामले में किसानों ने एडवोकेट एलेक्स एम स्कारिया और अमल दर्शन के जरिए हाईकोर्ट में रिट पिटिशन दायर की थी।

यह मामला नया नहीं है। जंगली सूअरों के आतंक से निपटने के लिए पिछले साल ही किसानों के एक समूह ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 62 के तहत जंगली सूअर को हिंसक जानवर घोषित करने की माँग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में आरोप कहा गया था कि जंगली सुअर किसानों के खेतों और फसलों को लगातार अपना निशाना बना रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में शिकायत की थी कि ‘जंगली सूअर’ वर्तमान में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची II के तहत जंगली जानवर है। ऐसे में अपने घर फसलों को बचाने के लिए भी अगर उसे मारा जाता है तो आपराधिक मामला बन सकता है। इस नियम के कारण किसान असहाय थे और उनके पास आपराधिक दंड का जोखिम उठाए बिना अपनी फसलों को जंगली सूअर से बचाने का कोई और साधन नहीं था।

शिल्पा शेट्टी के घर पहुँची मुंबई पुलिस, कुंद्रा की रिमांड 27 जुलाई तक बढ़ी: पूनम पांडे- शर्लिन चोपड़ा ने भी खोले कई राज

पोर्न वीडियो बनाने के मामले में फँसे शिल्पा शेट्टी के पति व कारोबारी राज कुंद्रा को बड़ा झटका लगा है। एक ओर उनकी पुलिस हिरासत की अवधि 27 जुलाई 2021 तक बढ़ा दी गई है और दूसरी ओर गोल्ड स्कीम धोखाधड़ी मामले में वह हाईकोर्ट में केस हार गए हैं। उधर, मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच पोर्न वीडियो केस के संबंध में उन्हें लेकर शिल्पा शेट्टी के घर छापा मारने पहुँची है। इसके अलावा पूनम पांडे और शर्लिन चोपड़ा ने भी कुंद्रा से जुड़े हालिया केस पर कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

गोल्ड धोखाधड़ी मामले में कुंद्रा को मिली हार

गोल्ड स्कीम धोखाधड़ी का मामला लंबे समय से बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित था। इस केस में एक्टर-प्रोड्यूसर सचिन जोशी ने शिल्पा शेट्टी, राज कुंद्रा और सतयुग गोल्ड के ख़िलाफ़ शिकायत की थी। उनका आरोप था कि शिल्पा और राज के नेतृत्व वाली सोने की ट्रेडिंग कंपनी सतयुग गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड द्वारा धोखाधड़ी की गई थी। आज इसी केस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि सतयुग गोल्ड सचिन को एक किलो सोना सौंपने के साथ-साथ एक लाख रुपए का भुगतान करे। इसके साथ कानूनी कार्रवाई में लगे 3,00,000 रुपयों का भी भुगतान करे। सचिन ने इसे सच की जीत बताया है। केस जीतने के बाद सचिन ने कहा, “मेरी लड़ाई उन सभी के लिए थी जिन्होंने सतयुग गोल्ड की इस स्कीम में इनवेस्ट किया था और उन्हें सोना कभी नहीं मिला।”

पूनम पांडे को दी थी कुंद्रा ने धमकी

राज कुंद्रा के ख़िलाफ़ खुलकर बोलने वाली पूनम पांडे ने बॉम्बे टाइम्स से बातचीत में बताया कि कैसे उनसे वो काम करवाया गया जिसे करने के लिए वो तैयार नहीं थीं। उन्होंने बताया कि जब उनका कॉन्ट्रैक्ट Armsprime के साथ खत्म हुआ तो उनके कुछ कंटेंट का गलत इस्तेमाल किया गया। इसे लेकर उन्होंने अलग से कहा भी कि जो वो लोग कर रहे हैं वो फ्रॉड और चोरी है। लेकिन इसके बदले उन्हें जवाब आया, “हम आपके लीगल एक्शन का स्वागत करते हैं।” पूनम पांडे का दावा है कि ये रिप्लाई उन्हें राज कुंद्रा ने ही भेजा था।

पूनम कहती हैं कि कॉन्ट्रैक्ट साइन करते वक्त ये साफ हो गया था कि वह लोग धोखेबाज हैं और बेहद अनप्रोफेशनल हैं। इसलिए पूनम ने अपने कॉन्ट्रैक्ट को उनके साथ तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया। पूनम के अनुसार, “इन लोगों के साथ प्रोफेशनल तौर पर जुड़ना मेरी सबसे बड़ी गलतियों में से एक थी। ये फ्रॉड हैं। मेरा जीवन खुली किताब जैसा है। लेकिन मुझे बहुत ट्रॉमा से गुजरना पड़ा। मैंने इनके साथ अपने पासवर्ड और जरूरी जानकारी शेयर की, इसके लिए मैं खुद को कोसती हूँ। जब हम राज की टीम के पास पहुँचे, हमें कहा गया कि पैसे तब तक नहीं मिलेंगे जब तक कि कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं किया जाता और उनके साथ काम करना दोबारा शुरू नहीं करती। मैंने इसके लिए साफ मना किया।”

पूनम बताती हैं कि राज कुंद्रा ने उन्हें धमकी भी दी थी। वह बताती हैं, “मैं आर्म्सप्राइम के साथ किसी भी तरह के कॉन्ट्रैक्ट को समाप्त करना चाहती थी। मैं चाहती थी कि उन्होंने मेरे नाम से जो ऐप बनाया है, उसे इंटरनेट से हटा दिया जाए। मगर कुछ ही समय बाद, राज कुंद्रा ने मुझसे व्यक्तिगत रूप से एक अन्य ऐप (हॉटशॉट्स) का हिस्सा बनने के लिए संपर्क किया। यह 100% शुद्ध ब्लैकमेल था। यह ऐसा था – ऐसा करो या परिणाम भुगतो। मेरे मना करने पर भी मेरा निजी मोबाइल नंबर उस ऐप पर, इंटरनेट पर लीक हुआ।”

शर्लिन चोपड़ा ने किया था साइबर सेल के सामने खुलासा

पोर्न मामले में कुंद्रा की गिरफ्तारी के बाद यह सवाल उठ रहा था कि आखिर किसने मुंबई पुलिस के सामने राज कुंद्रा का नाम लिया। अब इसी राज से पर्दा उठाते हुए शर्लिन चोपड़ा ने बताया है कि वही वह पहली शख्स थीं जिन्होंने महाराष्ट्र साइबर सेल की जाँच टीम को बयान दिया था। अपने ट्विटर पर वीडियो अपलोड करते हुए उन्होंने कहा, 

“पिछले काफी समय से मुझे पत्रकार राज कुंद्रा के मामले में कुछ कहने के लिए बोल रहे हैं। आप सबको मैं बता दूँ कि महाराष्ट्र साइबर सेल की जाँच टीम को जिसने सबसे पहले इस मामले में अपना बयान दिया वो कोई और नहीं वो मैं हूँ। महाराष्ट्र साइबर सेल की टीम को जिस व्यक्ति ने सबसे पहले आर्म्सप्राइम के बारे में बताया वो कोई और व्यक्ति नहीं मैं हूँ। कहने का मतलब यह है कि जब मुझे साइबर सेल द्वारा नोटिस भेजा गया था। मैं अंडर ग्राउंड नहीं हुई, लापता नहीं हुई, ये देश छोड़कर जाने की कोशिश नहीं की। मार्च 2021 में मैंने साइबर सेल के ऑफिस पर जाकर अपना निष्पक्ष बयान दिया। दोस्तों इस विषय पर कहने को बहुत कुछ है लेकिन फिलहाल इस पर कुछ कहना ठीक नहीं है। इसलिए मैं अनुरोध करती हूँ कि आप महाराष्ट्र साइबर सेल से संपर्क करें और अपने प्रश्न उनके सामने रखें। उनसे मेरे बयान के कुछ अंश शेयर कर देने की विनती करें।”

उल्लेखनीय है कि पोर्न केस में 19 जुलाई को गिरफ्तार हुए राज कुंद्रा की पुलिस हिरासत 23 जुलाई तक थी। लेकिन आज कोर्ट ने पुलिस रिमांड को 27 जुलाई तक कर दिया। कुंद्रा के साथ रायन की भी पुलिस कस्टडी बढ़ाई गई है। मुंबई पुलिस को शक है कि राज ने पोर्नोग्राफी से कमाए गए पैसों का इस्तेमाल ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए किया था। इसलिए राज कुंद्रा के यस बैंक के खाते और यूनाइटेड बैंक ऑफ अफ्रीका के खाते के बीच की लेनदेन की जाँच की जानी चाहिए। अब क्राइम ब्रांच की टीम कुंद्रा को दोबारा भायकला जेल ले जाएगी। हिरासत मिलने के बाद आमतौर पर मुंबई पुलिस आरोपितों को यही रखती है और वहीं अपनी पूछताछ करती है। लेकिन उससे पहले वह शिल्पा शेट्टी के घर छापा मारने पहुँचे हैं।

‘फर्जी जाति प्रमाण-पत्र से बने RAS अधिकारी’: राजस्थान के शिक्षा मंत्री के ‘प्रतिभावान रिश्तेदारों’ को लेकर नया दावा

राजस्थान कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और अशोक गहलोत सरकार में शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के रिश्तेदारों को राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के इंटरव्यू में एक समान नंबर मिलने का मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि उन पर एक नया आरोप लगाया जा रहा है। जयपुर निवासी वकील गोवर्धन सिंह एवं अन्य ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के चेयरमैन को पत्र लिखकर कहा है कि डोटासरा के रिश्तेदारों ने RAS में चयनित होने के लिए OBC के फर्जी प्रमाण-पत्र का उपयोग किया है।

गोवर्धन एवं अन्य ने RPSC के चेयरमैन डॉ. भूपेन्द्र यादव एवं 7 अन्य सदस्यों को पत्र लिखा है। इसमें बताया गया है कि डोटासरा के समधी चुरू के जिला शिक्षा अधिकारी रमेश चंद्र पूनिया को सेवा में 32 वर्ष 3 माह की अवधि पूरी होने के बाद प्रधानाध्यापक पद पर प्रमोशन मिल गया था। ऐसे में उनकी संतान OBC क्रीमीलेयर में आएगी और उन्हें OBC आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता। गोवर्धन समेत अन्य ने आरोप लगाया है कि फिर भी रमेश चंद्र ने अपनी तीनों संतानों प्रतिभा, गौरव और प्रभा का OBC का प्रमाण-पत्र बनवा लिया। प्रतिभा डोटासरा की बहू हैं। वह RAS 2016 में ही चयनित हो गई थीं। उनके भाई गौरव और बहन प्रभा RAS 2018 में चयनित हुए हैं।

गोवर्धन एवं अन्य ने RPSC चेयरमैन डॉ. भूपेन्द्र यादव एवं 7 अन्य सदस्यों को भेजे गए पत्र में कहा है कि RPSC प्रशासन फर्जी प्रमा- पत्र मामले में सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराए अन्यथा RPSC चेयरमैन एवं अन्य सदस्यों एवं डोटासरा के रिश्तेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। सूचना-पत्र में बताया गया है कि फर्जी प्रमाण पत्र के मामले में आईपीसी की धारा 420, 409, 406, 467, 468, 471, 166, 167 और 120-B के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।

हालाँकि डोटासरा के समधी रमेश चंद्र पूनिया ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का पूरी तरह से खंडन किया है। उन्होंने कहा कि बच्चों का OBC प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए उन्होंने वेतन संबंधी एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रशासन को उपलब्ध कराए जिसके बाद तय योग्यता के आधार पर ही उनके बच्चों का प्रमाण-पत्र जारी किया गया है।

ज्ञात हो कि पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब RAS 2018 के इंटरव्यू में डोटासरा की बहू के भाई-बहन को RAS इंटरव्यू में 80-80 नंबर मिले, जबकि दोनों ही लिखित परीक्षा में 50 फीसदी अंक भी प्राप्त नहीं कर सके। इसके अलावा RAS 2016 में चयनित डोटासरा की बहू प्रतिभा को भी इंटरव्यू में 80 नंबर ही मिले थे। वहीं डोटासरा के बेटे अविनाश को उस साल इंटरव्यू में 85 नंबर मिले थी। हालाँकि दोनों ही परीक्षाओं के टॉपर्स की बात करें तो RAS 2016 के टॉपर भवानी सिंह को इंटरव्यू में मात्र 70 नंबर, जबकि RAS 2018 की टॉपर मुक्ता राव को 77 नंबर मिले। RAS 2016 लिखित परीक्षा में अविनाश 50 फीसदी हासिल करने में नाकाम रहे थे तो प्रतिभा को 800 की लिखित परीक्षा में 402 नंबर मिले थे।

मीडिया खबरों के मुताबिक RAS के परिणाम सामने आने के बाद शिक्षा मंत्री डोटासरा पर पद के दुरुपयोग का आरोप भारतीय जनता पार्टी लगा रही है। भाजपा का कहना है कि शिक्षा मंत्री ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्तेदारों को अफसर बनवाने का काम किया है। लेकिन डोटासरा रिश्तेदारों को ‘प्रतिभावान’ बता इन सवालों को खारिज कर चुके हैं।

गौरतलब है कि डोटासरा के रिश्तेदारों को RAS के इंटरव्यू में एक समान नंबर मिलने के मामले के अलावा भी इंटरव्यू प्रक्रिया पहले से ही सवालों के घेरे में है। साक्षात्कार के दौरान ही 23 लाख रु. घूस लेकर अच्छे नंबर दिलाने के मामले में कनिष्ठ लेखाकार को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसमें राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की सदस्य राजकुमारी गुर्जर के पति का भी नाम सामने आया है।

करुवन्नूर बैंक घोटाला: फर्जी नाम पर बाँटे लोन, फिर करोड़ों का वसूली नोटिस; विपक्ष ने बताया- केरल का सबसे बड़ा घोटाला

केरल के त्रिशूर जिले के इरिंजालकुडा क्षेत्र में स्थित करुवन्नूर सेवा सहकारी बैंक में हुए कर्ज घोटाले के मामले में विपक्ष ने सत्ताधारी एलडीएफ सरकार पर आरोप लगाया है। विपक्ष ने कहा कि यह केरल के इतिहास की सबसे बड़ी बैंक लूट है और सीपीएम के नेतृत्व ने इस पर कार्रवाई करने की बजाय घोटाले के आरोपितों को संरक्षण देने का काम किया है।

करुवन्नूर सेवा सहकारी बैंक को सीपीएम नियंत्रित करती है। कर्ज घोटाले के संबंध में विधानसभा में चर्चा करने के लिए प्रस्ताव पेश करते हुए कॉन्ग्रेस विधायक शफ़ी पराम्बिल ने कहा कि यह घोटाला केरल के इतिहास का सबसे बड़ा बैंक घोटाला है और इस घोटाले के आगे तो पॉपुलर हीस्ट सीरीज (money heist) भी फीकी दिखाई दे रही है। पराम्बिल ने बताया कि यह कर्ज घोटाला लगभग 350 करोड़ रुपए का है।

पराम्बिल ने यह भी आरोप लगाया कि करुवन्नूर बैंक की गवर्निंग काउंसिल के कुछ सदस्यों द्वारा बैंक को लूटे जाने की जानकारी मिलने के बाद भी सीपीएम नेतृत्व ने घोटाले को दबाए रखा और गवर्निंग काउंसिल को निलंबित करने के स्थान पर घोटाले के आरोपितों को संरक्षण प्रदान करने के काम किया गया। विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने भी सवाल उठाया कि घोटाला 2018 में ही सामने आया था, उसके 3 साल बाद गुरुवार (23 जुलाई 2021) को गवर्निंग काउंसिल को बर्खास्त किया गया। सतीशन का यहाँ तक कहना है कि घोटाले की जाँच कर रहे सीपीएम के नेता घोटाले से पूरी तरह से परिचित थे। ऐसे में जब अपराध हुआ है तो क्या इस मुद्दे को पार्टी के अंदर सुलझाया जाना पर्याप्त है।

ऐसे हुआ करोड़ों के कर्ज का खेल:

पराम्बिल ने घोटाले के संबंध में एक महिला का उदाहरण दिया जो राष्ट्रीय बैंक से कर्ज लेना चाहती थी। महिला एक राष्ट्रीयकृत बैंक में ऋण लेने के लिए गई, लेकिन वहाँ इस मामले में गिरफ्तार आरोपित अरुण किरण उसे मिला और उसने महिला को करुवन्नूर सेवा सहकारी बैंक से कर्ज लेने के लिए कहा। इसके बाद महिला ने लोन के लिए सहकारी बैंक में सभी दस्तावेज जमा कर दिए। उसके बाद महिला ने इस बैंक के अधिकारियों से कोई संपर्क नहीं किया और ना ही उसके दस्तावेज ही वापस मिले। पराम्बिल ने बताया कि कुछ समय के बाद उस महिला के पास 3 करोड़ रुपए जमा करने का नोटिस आ गया, जबकि उस महिला को बैंक से एक रुपए का कर्ज नहीं मिला था।

पराम्बिल ने आरोप लगाते हुए कहा कि कर्ज देने के लिए 50 काल्पनिक नामों का प्रयोग किया गया और प्रत्येक को 50-50 लाख का कर्ज करुवन्नूर बैंक से दिया गया। इसके अलावा, कई ऐसे भी कर्जधारक थे जिन्होंने बैंक से 13 से 26 करोड़ रुपए तक का कर्ज लिया, लेकिन उसे चुकता नहीं किया। रिपोर्ट के मुतबाकि, घोटालेबाजों ने शुरू में 50,000 रुपए का कर्ज दिया और उसके बाद दस्तावेजों पर हस्ताक्षर के बाद 50 लाख रुपए का कर्ज लिया। खास बात ये है कि जिनके नाम पर ये धोखाधड़ी की गई, वो भी सीपीएम के ही समर्थक हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैंक में पाँच साल में 300 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला हुआ है। सहकारी क्षेत्र के नियमों के अनुसार, कुल निवेश का केवल 70 प्रतिशत ही बैंक ऋण के रूप में जारी कर सकता है। लेकिन ऐसे सभी नियमों का उल्लंघन करते हुए बैंक ने 2018-19 में 437.71 करोड़ रुपए के ऋण जारी किए, जबकि कुल निवेश सिर्फ 401.78 करोड़ रुपए ही था। बैंक फ्रॉड के मामले में इससे पहले इरिंजालकुडा पुलिस ने 120 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की शिकायत पर बैंक के पूर्व सचिव और प्रबंधक सहित छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। हालाँकि, अब पता चला है कि घोटाला पहले शिकायत की गई रकम से तीन गुना अधिक है।