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‘धर्मांतरण कोई समस्या नहीं, अपने घर में सम्मान न मिले तो दूसरे के घर जाएँगे ही’: मिशनरी साजिश पर बिहार के पूर्व CM

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और ‘हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM)’ के अध्यक्ष जीतन राम माँझी के महादलितों के धर्मांतरण का बचाव किया है। गया में पिछले कई वर्षों से सिलसिलेवार तरीके से ईसाई धर्मांतरण की साजिश का खुलासा हुआ है। कई गाँवों में अंधविश्वास के आधार पर धर्मांतरण का जाल फैलाया गया। माँझी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हिन्दू धर्म के भीतर भेदभाव धर्मांतरण का बड़ा कारण है।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “धर्म को लेकर भेदभाव ही धर्मांतरण का प्रमुख कारण है। जब अपने घर में मान न मिले तो स्वभाविक है लोग दूसरे घरों में जाएँगे ही। धर्म-परिवर्तन से हिंदुस्तान की एकता पर कोई खतरा नहीं है क्योंकि यह धर्मनिरपेक्ष (Secular) देश है। यहाँ आपको इसकी स्वतंत्रता है कि आप अपने मन के अनुसार धर्म पालन कर सकते हैं, इसका प्रचार-प्रसार कर सकते हैं।”

माँझी ने कहा कि ऐसी स्थिति में कौन किस धर्म में जा रहा है, उनकी समझ में ये कोई समस्या का विषय नहीं है। HAM सुप्रीमो ने कहा कि जब अपने घर में मान, इज्जत व मर्यादा न मिले और दूसरी जगह मान इज्जत और मर्यादा मिल रही है तो स्वाभाविक है लोग वहीं जाएँगे। माँझी ने साथ ही कहा कि घर के मालिक को समझना चाहिए कि आखिर ये लोग क्यों जा रहे हैं और क्या आपके यहाँ उनका विकास संभव नहीं है?

साथ ही जीतन राम माँझी ने कहा कि आप छुआछूत की बात करते हो, लेकिन याद रखने की ज़रूरत है कि जब-जब अपना घर लचीला होता है, तब-तब उस धर्म का प्रचार हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म कड़ा हुआ है, तब उसका प्रचार हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा कि एक मुख्यमंत्री जब किसी मंदिर में जाते हैं तो उनके निकलने के बाद उसे धोया जाता है। उन्होंने पूछा कि इसे क्या समझा जाए?

उन्होंने दावा किया कि महादलितों की उपेक्षा से उनकी भावनाओं को ठेस पहुँची, जिसके बाद उन्होंने धर्म-परिवर्तन किया। साथ ही ये दावा भी कर बैठे कि महादलित बिना किसी दबाव के ये सब कर रहे हैं। उन्होंने इसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा होने की बात भी नकार दी। उन्होंने कहा कि अगर स्थिति यही रही तो धर्म-परिवर्तन की कई अन्य घटनाएँ भी सामने आएँगी। इस दौरान उन्होंने बाबसाहब भीमराव आंबेडकर की भी प्रशंसा की।

बता दें कि गया के महादलितों को एक साजिश के तहत निशाना बनाया जा रहा है, ऐसा कई मीडिया रिपोर्ट्स से खुलासा हुआ है। सिर्फ पिछले 2 वर्षों में ही जिले के लगभग आधा दर्जन गाँवों में धर्मांतरण हुआ है। ध्यान देने वाली बात ये भी है कि जिन लोगों पर धर्मांतरण कराने के आरोप लगे हैं, उनमें अधिकतर पहले हिन्दू हुआ करते थे। गया के नैली पंचायत के बेलवादीह गाँव में 50 हिन्दू परिवारों द्वारा ईसाई मजहब अपनाए जाने की खबर आई थी।

इसी तरह 6 वर्ष पहले मानपुर प्रखंड के खंजाहापुर गाँव में 500 लोग हिन्दू से बौद्ध बन गए थे। टेकारी के केवड़ा, मुफ्फसिल के दोहारी, अतरी के टेकरा, बोधगया के अतिया और गया सदर के रामसागर टैंक इलाके में धर्म-परिवर्तन की घटनाएँ सामने आई हैं। डोभी से लेकर बाराचट्‌टी तक, कई गाँवों में धर्मांतरण की ख़बरें सामने आती रहती हैं। इसके पीछे अंधविश्वास को कारण बताया जा रहा है। सालों से इसके पीछे लगे गिरोह इसकी तैयारी करते हैं।

राज कुंद्रा के घर गई पुलिस, शिल्पा शेट्टी ने दिया इस्तीफा: बस कंडक्टर का बेटा कैसे बना ₹4093 करोड़ का मालिक?

पोर्नोग्राफी के मामले में गिरफ्तार राज कुंद्रा की कस्टडी बढ़ने के बाद शिल्पा शेट्टी से भी क्राइम ब्रांच ने पूछताछ की। राज कुंद्रा को लेकर क्राइम ब्रांच उनके घर गई थीं और वहाँ उन्होंने शिल्पा से इस केस के बारे में पूछताछ की गई। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक शिल्पा इस मामले में इसलिए शक के घेरे में हैं क्योंकि उन्होंने वियान इंडस्ट्री (जिसका कनेक्शन इस मामले से जुड़ा है) से इस्तीफा दे दिया है। शिल्पा शेट्टी के बैंक अकाउंट डिलेट्स की भी जाँच की जा रही है।

राज कुंद्रा इन दिनों पोर्नोग्राफी से जुड़े केस को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बीच उनका बस कंडक्टर के बेटे से बड़ा बिजनेसमैन बनने का सफर काफी चर्चा में है। एक बस कंडक्टर के बेटे से लेकर करोड़पति बनने तक, उनकी सफलता की कहानी काफी दिलचस्प है लेकिन निश्चित रूप से विवादों से घिरी हुई है। उनके पिता बाल कृष्ण कुंद्रा लुधियाना से लंदन चले गए थे और एक मध्यमवर्गीय व्यवसायी बनने से पहले एक बस कंडक्टर के रूप में काम करते थे। उनकी माँ उषा रानी कुंद्रा एक दुकान सहायिका हुआ करती थीं।

इसके बारे में कुंद्रा ने फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में बात की थी। उन्होंने कहा था, “मैं बेहद साधारण बैकग्राउंड से आता हूँ। मेरे पिता 45 साल पहले लंदन चले गए थे और एक बस कंडक्टर की नौकरी करते थे। मेरी माँ एक फैक्ट्री में काम करती थी। हमारे लिए परिस्थितियाँ कभी आसान नहीं थीं। 18 की उम्र के बाद जब से मैंने कॉलेज छोड़ा है, तब से मैंने खुद को बनाया है। जब शिल्पा मुझे लापरवाही से खर्च करने के लिए रोकती है तो मैं उससे कहता हूँ कि मुझे अपने कमाए हुए पैसे खर्च करने में कोई हर्ज नहीं है।”

राज ने बताया, “मेरे गुस्से ने मुझे आगे बढ़ाया है। मुझे गरीबी से इतनी नफरत थी कि मैं अमीर बनना चाहता था। और मैंने जिंदगी में कुछ अलग कर लिया है। शिल्पा मेरी इज्जत करती है क्योंकि उसने भी अपने बल पर सब कुछ हासिल किया है।” इस इंटरव्यू में राज ने ये भी बताया कि किस तरह उन्हें शिल्पा से प्यार हुआ था। राज कहते हैं, “हर कोई शिल्पा को एक सेक्स सिंबल के, ग्लैमरस क्वीन के तौर पर देखता है। लेकिन मुझे देखने को मिला कि वो असल में कैसी इंसान हैं।”

बता दें कि राज कुंद्रा ने 18 साल की उम्र में करोड़पति बनने की अपनी यात्रा का पहला कदम उठाया था। कॉलेज छोड़ने के बाद उन्होंने इंग्लैंड में पश्मीना शॉल व्यापारी के रूप में अपना व्यवसायिक करियर शुरू किया। उन्होंने उन शॉलों को ब्रिटेन के सभी प्रमुख फैशन हाउसों को बेचकर अपना पहला मिलियन पाउंड कमाया। फिर वहाँ से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पश्मीना शॉल व्यवसाय के सफल होने के बाद, वह दुबई में हीरे के व्यवसाय में चले गए।

इंग्लैंड की एक लोकप्रिय पत्रिका द्वारा दी गई रैंकिंग के अनुसार वह वर्ष 2004 तक 198वें सबसे अमीर ब्रिटिश एशियाई बन गए थे। अपने सफल व्यवसायिक करियर के बीच, उन्होंने शादी करने का फैसला किया और वर्ष 2003 में पहली पत्नी कविता के साथ शादी के बंधन में बँध गए, लेकिन 2006 में वे अलग हो गए। हालाँकि, अगले ही साल, राज की मुलाकात बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी से हुई। शिल्पा शेट्टी ने उस समय ब्रिटिश रियलिटी शो ‘बिग ब्रदर’ जीतकर वैश्विक प्रसिद्धि हासिल की थी। तभी दोनों के बीच प्यार हो गया। 

नवजात बच्ची को कविता के साथ छोड़ कर अपनी पहली शादी से बाहर निकलने वाले राज कुंद्रा 2009 में अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के साथ शादी के बंधन में बँध गए। इस समय तक, राज ने बॉलीवुड फिल्मों के निर्माण और उसमें पैसा लगाने में भी दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया था। 2012 में ‘सुपर फाइट लीग’ शुरू करने के बाद, उन्होंने 2014 में वियान इंडस्ट्रीज को लॉन्च किया और कंपनी के अध्यक्ष और गैर-कार्यकारी निदेशक बने। इतना ही नहीं, वह अभिनेता अक्षय कुमार के साथ एक भारतीय होम शॉपिंग चैनल के प्रमोटरों में से एक बन गए।

उन्होंने अपनी पत्नी शिल्पा शेट्टी के साथ इंडियन प्रीमियर लीग की राजस्थान रॉयल्स फ्रैंचाइज़ी में भी निवेश किया और सह-मालिक बन गए, लेकिन उनका नाम आईपीएल सट्टेबाजी कांड में सामने आया, जिसके लिए उन्हें क्रिकेट गतिविधियों से आजीवन प्रतिबंधित कर दिया गया था। 

बाद में, वर्ष 2018 में, प्रवर्तन निदेशालय द्वारा बिटकॉइन घोटाले में उनकी संलिप्तता के लिए उनसे पूछताछ भी की गई थी। हालाँकि, सभी विवादों के बावजूद, इस समय राज कुंद्रा को दुनिया के सफल व्यवसायियों में गिना जाता है, जिनकी कुल संपत्ति लगभग 550 मिलियन डॉलर (4093 करोड़ रुपए, आज की मुद्रा दर के अनुसार) है।

गौरतलब है कि एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के पति और बिजनेसमैन राज कुंद्रा को अश्लील फिल्में बनाने के आरोप में मुंबई की क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया। गिरफ्तार होने के बाद 23 जुलाई तक राज को कस्टडी में भेजा था और शुक्रवार (23 जुलाई, 2021) को राज की कस्टडी 27 जुलाई तक बढ़ा दी है।

‘हमने मोदी को जिताया की रट लगाते हो, खुद 2 बार लड़े तो क्यों नहीं जीत गए?’ महिला पत्रकार ने उतार दी राकेश टिकैत की ‘बक्कल’

दिल्ली की सीमाओं पर कई महीने से चल रहे ‘किसान आंदोलन’ से यौन शोषण से लेकर मारपीट तक की कई खबरें आई हैं। आंदोलन के शीर्ष नेताओं में से एक राकेश टिकैत अक्सर मीडिया में आकर बयानबाजी करते रहते हैं और ‘बक्कल उतारने’ की बातें करते हैं। लेकिन, ‘इंडिया 1 न्यूज़’ पर कुछ ऐसा हुआ कि लोग कहने लगे कि महिला पत्रकार ने ही भारतीय किसान यूनियन (BKU) के प्रवक्ता राकेश टिकैत की ‘बक्कल’ उतार दी।

हुआ कुछ यूँ कि पत्रकार गरिमा सिंह ने कहा कि राकेश टिकैत बार-बार कह रहे हैं कि मेल-मुलाकात से चीजें ठीक हो जाएँगी, फिर इतना कड़ा होने की ज़रूरत क्या है? इस पर राकेश टिकैत ने जवाब दिया कि दिमाग की बुखार कड़वी दवाई से ही ठीक होती है। साथ ही गरिमा सिंह ने राकेश टिकैत के इस बयान को लेकर भी सवाल पूछा जिसमें वो बार-बार कहते हैं कि इस सरकार को ‘हमने जिताया’।

गरिमा सिंह ने पूछा कि अगर भाजपा और नरेंद्र मोदी को आपने जिताया तो फिर खुद दो-दो बार चुनाव लड़ने के बावजूद क्यों नहीं जीत गए? इस पर राकेश टिकैत ने कहा कि उन्हें जनता ने वोट नहीं दिया और वो हार गए। फिर पत्रकार से ही उलटा सवाल पूछने लगे कि उन्होंने किसे वोट दिया है। गरिमा सिंह ने कहा कि वो यहाँ बताने के लिए नहीं, पूछने के लिए बैठी हैं। इस पर राकेश टिकैत पूछने लगे कि क्या आप भाजपा से डरते हो?

पत्रकार ने कहा कि भाजपा के लोग आते हैं तो वो भाजपा से भी सवाल पूछती हैं। राकेश टिकैत ने कहा कि हम किसे वोट देंगे, ये हम तय करेंगे और इसे हमें गोपनीय रखने का अधिकार है। राकेश टिकैत बार-बार ये कहते रहे कि उन्हें जनता ने वोट नहीं दिया और वो हार गए। फिर कहने लगे कि आंदोलन में उनकी ‘जीत’ हुई है। उन्होंने दावा कर दिया कि दिल्ली के चारों तरफ बैठ कर उन्होंने ‘गोरा-लाठी’ की है और तब तक दिल्ली में बैठे रहेंगे जब तक सरकार बात नहीं मान लेगी।

बता दें कि हाल ही में राकेश टिकैत ने अब समानांतर संसद चलाने की धमकी दी है। टिकैत ने यह धमकी आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार द्वारा ‘किसानों’ को केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने के बाद दी थी। टिकैत ने कहा था, “किसान अपनी संसद चलाएँगे। सदन में किसानों के लिए आवाज नहीं उठाने पर संसद सदस्यों (सांसदों) की उनके निर्वाचन क्षेत्रों में आलोचना की जाएगी।”

महाराष्ट्र में बारिश से हाहाकार: 2 दिन में 129 लोगों की मौत, 70 से अधिक हैं गायब

महाराष्ट्र के कई इलाकों में पिछले कुछ दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने तबाही मचा दी है। बारिश की वजह से पिछले दो दिनों में 129 लोगों की मौत हो गई है, जबकि पुणे मंडल के तहत 84,452 लोगों को शुक्रवार (23 जुलाई 2021) को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। वहीं कुछ लोगों के अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका है। जानकारी के अनुसार 70 लोग गायब बताए जा रहे हैं।

बता दें कि पिछले 24 घंटों में रायगढ़, रत्नागिरी और सतारा में हुई भारी बारिश की वजह से कई जगहों पर हुई दुर्घटनाओं में कई लोगों ने जान गँवा दी है। बाढ़ग्रस्त इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के लिए एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ के अलावा नौसेना ने भी मोर्चा संभाल रखा है। ज्यादातर मौतें रायगढ़ और सतारा जिलों से हुई हैं।

रायगढ़ जिले के महाड़ तहसील के तलीये गाँव में पहाड़ से चट्टान खिसकने के चलते भीषण हादसा हो गया। जिसमें 36 लोगों की मौत हो गई। यह चट्टान खिसक कर लोगों के घरों पर जा गिरी। इसके चलते पूरा गाँव में तबाही मच गई। चट्टान गिरने से गाँव के 35 घर इसके नीचे दब गए। आशंका जताई जा रही है कि मलबे के नीचे बड़ी संख्या में लोग दबे हो सकते हैं।

वहीं मुंबई में एक मकान गिरने से चार लोगों की मौत हुई व सात घायल हुए हैं। इसके अलावा सतारा व रायगढ़ में अलग-अलग घटनाओं में 28 लोंगों की जान चली गई है। महाबलेश्वर, नवाजा, रत्नागिरी, कोल्हापुर में भारी बारिश ने बाढ़ का रूप ले लिया और सैकड़ाें गाँवों से संपर्क टूट गया है।

पूर्वी मुंबई के गेवांडी के शिवाजी नगर इलाके में मकान गिर जाने से 15 लोग मलबे में दब गए जिन्हें सुरक्षित निकाल लिया गया है जिनमें 11 लोग बुरी तरह घायल थे, सबको दो अलग-अलग अस्पताल पहुँचाया गया है।

वहीं सातारा की पाटण तहसील में पहाड़ी की तराई में बसे आंबेघर में आधी रात को हुए भूस्खलन से बच्चों समेत 12 लोगों की मौत हो गई, 15 लोग घायल हैं। मीरागांव में एक मकान के मलबे में दबे 8 लोगों की मौत हुई।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चिपलून के अपरांत कोविड हॉस्पिटल में पानी घुसने से वेंटिलेटर पर इलाज करवा रहे आठ मरीजों ने दम तोड़ दिया। हालाँकि कलेक्टर बी एन पाटिल ने बताया कि चार लोग वेंटिलेटर पर थे। अत्यधिक बरसात की वजह से अपरांत अस्पताल में बिजली चली गई थी, जिससे वेंटिलेटर पर जो मरीज थे उनकी हालत खराब हो गई और 4 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा 4 अन्य की मौत शायद ट्रॉमा की वजह से हो गई। अपरांत अस्पताल में 22 अन्य मरीज को स्थानांतरित कर दिया गया है।

कोंकण रेलवे ट्रैक के सेक्शन भी बह गए। कोंकण रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि मडगाँव में दो ट्रेनें फँसी हुई हैं। शनिवार तक लाइन के चालू होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में लगातार भारी बारिश होने के साथ रत्नागिरि जिले में भूस्खलन होने के बाद 10 लोगों के मलबे में फँसे होने की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने बताया कि अकेले कोल्हापुर जिले में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 40,882 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है। कोल्हापुर जिले में बारिश से संबंधित घटनाओं में पाँच लोगों- राधानगरी में दो, चांदगढ़ में दो और कागल तहसील में एक की मौत हो गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुर्घटना के लेकर दुख जताया है। साथ ही उन्होंने मृतकों के परिवारों के लिए 2-2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा की है। वहीं घायलों के लिए 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया गया है। महाराष्ट्र सरकार ने भूस्खलन में मरने वाले लोगों के परिजन को पाँच-पाँच लाख रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।

राज्य में लोगों को बारिश से कोई राहत मिलती नहीं नजर आ रही है क्योंकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जो पहले से बारिश से सराबोर हैं। IMD ने ‘अत्यधिक भारी’ बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त किया है और एहतियाती उपायों की सिफारिश की है। महाराष्ट्र में भारी बारिश के कहर के बीच भारतीय सेना ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थानीय प्रशासन की मदद के लिए अपनी टीमें तैयार की हैं।

UP में सपा-AIMIM का मुस्लिम डिप्टी CM, मायावती का ब्राह्मण प्रेम, राहुल को पसंद नहीं ‘अमेठी’ के आम: 2022 की तैयारी

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी में हार क्या मिली, अब उन्हें उत्तर प्रदेश के आम का स्वाद भी नहीं भा रहा है। आम के मौसम में उन्होंने इस फल को भी राजनीति में घसीट लिया है और पत्रकारों ने आम को लेकर उनसे कुछ ‘कठिन सवाल’ भी पूछे। राहुल गाँधी ने कहा कि उन्हें यूपी के आम का स्वाद पसंद नहीं। उन्होंने कहा कि उन्हें आंध्र प्रदेश के आम पसंद हैं।

राहुल गाँधी को पसंद नहीं यूपी के आम, सीएम योगी ने किया पलटवार

साथ ही उन्होंने लंगड़ा को भी ठीक आम बताते हुए कहा कि दशहरी उनके लिए ज्यादा ही मीठा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहुल गाँधी के इस बयान का जवाब देते हुए कहा, “आपका टेस्ट ही विभाजनकारी है। आपके विभाजनकारी संस्कारों से पूरा देश परिचित है। आप पर विघटनकारी कुसंस्कार का प्रभाव इस कदर हावी है कि फल के स्वाद को भी आपने क्षेत्रवाद की आग में झोंक दिया, लेकिन ध्यान रहे कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत का स्वाद एक है।”

वहीं गोरखपुर से भाजपा सांसद और भोजपुरी अभिनेता रवि किशन ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गाँधी को उत्तर प्रदेश के आम पसंद नहीं हैं और उत्तर प्रदेश को कॉन्ग्रेस पसंद नहीं है, हिसाब बराबर। बता दें कि हाथरस कांड के दौरान जम कर राजनीति खेलने वाले राहुल गाँधी ने कुछ महीनों पहले केरल की राजनीति को ‘ताज़गी भरा’ बताया था और कहा था कि उत्तर भारत में अलग तरह की राजनीति होती है। तब उन पर उत्तर-दक्षिण के बीच विभाजन पैदा करने के आरोप लगे थे।

ब्राह्मणों को खुश करने की जुगत में मायावती, पोस्टर पर राम मंदिर

ये तो हुई आम की बात। उधर मायावती की बसपा ने भी उत्तर प्रदेश में चुनाव की तैयारी शुरू करते हुए ब्राह्मण-दलित एकता की बातें करनी शुरू कर दी है। बसपा ने अयोध्या में एक सम्मलेन किया। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने इस दौरान जो पोस्टर शेयर किया, उसमें निर्माणाधीन राम मंदिर के साथ-साथ रामलला की भी तस्वीर थी। तो क्या बसपा अब हिन्दुवाद के रथ पर सवाल हो गई है?

बसपा जगह-जगह ‘ब्राह्मण संगोष्ठी’ का आयोजन करेगी। कभी तिलाल-तराजू-तलवार को जूते मारने की बात करने वाली पार्टी ने 2007 में ‘ब्राह्मण शंख बजाएगा, हाथी बढ़ता जाएगा’ का नारा देकर सत्ता पाई थी। अब फिर वही फॉर्मूला अपनाने की तैयारी है। 2017 में बसपा को मात्र 19 सीटें ही आई थीं। मथुरा, काशी और प्रयागराज जैसे धार्मिक शहरों में ‘ब्राह्मण संगोष्ठी’ का आयोजन कर 75 जिलों में ब्राह्मणों को बसपा से जोड़ने के लिए अभियान शुरू किया गया है।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी हाल ही में चित्रकूट में मंदिरों का दौरा कर हिंदुत्व वाली राजनीति शुरू कर दी है। उन्होंने पार्टी मुख्यालय में ‘परशुराम जयंती’ का आयोजन करवाया। साथ ही राम और कृष्ण, दोनों को अपना बताया। भाजपा सरकार में मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि ब्राह्मण अब दोबारा बसपा के पाले में नहीं जाएँगे, क्योंकि वो मायावती के दाँव को समझ चुके हैं। उन्होंने बसपा की इस चाल को अप्रासंगिक करार दिया।

मुस्लिम डिप्टी सीएम की माँग, होगा सपा-AIMIM का गठबंधन?

उधर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को गठबंधन का ऑफर दिया है। उसने कहा है कि अगर सपा किसी मुस्लिम को उप-मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान करती है तो फिर उसके साथ गठबंधन किया जा सकता है। उसने कहा कि भाजपा के खिलाफ सारे दल एकजुट हों और किसी वरिष्ठ मुस्लिम नेता को डिप्टी सीएम बनाया जाए तो सपा के साथ गठबंधन हो सकता है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने कहा कि ‘भागीदारी संकल्प मोर्चा’ सपा के साथ मिल कर चुनाव लड़ने को तैयार है, लेकिन इसी एक शर्त पर। अगस्त की शुरुआत में असदुद्दीन ओवैसी अपने दौरे में प्रयागराज, फतेहपुर, कौशाम्बी और आसपास के अन्य जिलों में कार्यकर्ताओं से मिलने वाले हैं। साथ ही मुस्लिम व दलित समाज के ‘बुद्धिजीवियों’ से भी उनकी मुलाकात होनी है। AIMIM ने सभी 75 जिलों में संगठन की घोषणा करते हुए 20% मुस्लिम वोट बिखरने से बचाने की अपील की है।

वाराणसी का दुर्गा कुंड मंदिर: आदिकाल के 3 मंदिरों में से एक, जहाँ माँ दुर्गा के विरोधियों के रक्त से हुआ कुंड का निर्माण

भगवान शिव के त्रिशूल पर बसी हुई वाराणसी, विश्व की सबसे पुरातन व्यवस्थित नगरी है और यह आज भी सनातन के प्रमुख केंद्रों के रूप में इस पृथ्वी पर विराजमान है। वैसे तो महादेव की नगरी वाराणसी अपने आप में ही सम्पूर्ण है लेकिन वर्तमान में यह अपने अनूठे गंगा घाट और मंदिरों के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। वाराणसी के इन्हीं प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है दुर्गा कुंड मंदिर। आदिकाल में वाराणसी में 3 प्रमुख मंदिर थे, काशी विश्वनाथ, अन्नपूर्णा मंदिर और दुर्गा कुंड। सनातन काल से ही महादेव की इस नगरी में माँ दुर्गा आदि शक्ति के रूप में इस प्राचीन दुर्गा कुंड मंदिर में विराजमान हैं।

मंदिर का इतिहास

वाराणसी के इस दुर्गा मंदिर का इतिहास युगों पुराना है। मंदिर का निर्माण काशी नरेश राजा सुबाहू के द्वारा कराया गया। मंदिर और इस स्थित कुंड के निर्माण के पीछे का कारण एक युद्ध था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सहस्त्राब्दियों पहले राजा सुबाहू ने अपनी पुत्री के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन किया लेकिन राजकुमारी ने स्वयंवर के पहले स्वप्न में अपना विवाह अयोध्या के राजकुमार सुदर्शन से होता हुआ देखा। राजकुमारी ने यह बात अपने पिता से बताई तो उन्होंने इसकी चर्चा स्वयंवर में आ चुके राजाओं से की। राजाओं ने इसे अपना अपमान समझा और सुदर्शन के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी।

प्रयागराज में भारद्वाज ऋषि के आश्रम में रहकर शिक्षा ग्रहण करने वाले राजकुमार सुदर्शन ने राजाओं की चुनौती स्वीकार कर माँ दुर्गा से विजय का आशीर्वाद माँगा। युद्ध भूमि में जब सुदर्शन युद्ध के लिए पहुँचा तो खुद आदि शक्ति ने वहाँ पहुँच कर विरोधियों का वध कर डाला। इस भीषणतम युद्ध के कारण रक्त से एक कुंड निर्मित हो गया। यही कुंड दुर्गा कुंड कहलाया। माँ दुर्गा ने खुद राजकुमारी का विवाह, सुदर्शन के साथ करने का आदेश दिया। इसके बाद राजा सुबाहू ने इस स्थान पर माँ दुर्गा के दिव्य मंदिर का निर्माण कराया। कहा जाता है कि शुंभ और निशुंभ का वध करने के बाद भी माँ दुर्गा ने इसी स्थान पर विश्राम किया था।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जहाँ भी माँ दुर्गा प्रकट होती हैं, वहाँ पर उनके प्रतीकों की उपासना की जाती है। यह स्थान भी उनमें से एक है। यहाँ माँ दुर्गा के मुखौटे और चरण पादुका की प्राण-प्रतिष्ठा की गई है। वाराणसी का यह दुर्गा कुंड मंदिर बीसा यंत्र पर आधारित है। बीसा यंत्र का मतलब है 20 कोण वाली एक तांत्रिक संरचना, जिस पर इस दुर्गा मंदिर की नींव रखी गई है। इस मंदिर को तंत्र साधन के लिए भी जाना जाता है। नवरात्रि में चौथे दिन माता कुष्मांडा की पूजा की जाती है और इस दिन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है।

मंदिर की संरचना

वाराणसी के इस दुर्गा कुंड मंदिर का निर्माण प्रसिद्ध नागर शैली में हुआ है। लाल पत्थर से बने इस मंदिर की बनावट इतनी सुंदर है कि यहाँ दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु मंदिर देखकर ही मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। वैसे तो इस मंदिर का इतिहास युगों पुराना है लेकिन वर्तमान दृश्य मंदिर की स्थापना सन् 1760 में बंगाल की रानी भवानी द्वारा की गई। उस समय मंदिर के निर्माण में 50000 रुपए से अधिक की लागत आई थी।

मंदिर का वर्णन काशी खंड में भी मिलता है। मंदिर में माँ दुर्गा के अलावा बाबा भैरोनाथ, महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं। मंदिर में माँ दुर्गा के अनन्य भक्त एवं मंदिर के पुजारी को भी समर्पित स्थान प्राप्त है। मान्यताओं के अनुसार प्राचीन समय में मंदिर के पुजारी को माँ दुर्गा का वरदान प्राप्त हुआ, तब से ही मंदिर में माँ दुर्गा के साथ उस पुजारी के दर्शन भी किए जाते हैं। मंदिर परिसर में ही एक हवन कुंड भी है, जहाँ प्रतिदिन माँ दुर्गा के लिए हवन किया जाता है।

कैसे पहुँचें?

वाराणसी पहुँचना बहुत ही आसान है। वाराणसी में ही एक हवाईअड्डा है। साथ ही वाराणसी से 120 किमी दूरी पर स्थित प्रयागराज में भी हवाईअड्डा है, जो चेन्नई, बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों से जुड़ा हुआ है।

वाराणसी देश के विभिन्न हिस्सों से रेल मार्ग से भी जुड़ा हुआ है। सैकड़ों की संख्या में ट्रेन वाराणसी पहुँचती हैं। सड़क मार्ग से भी वाराणसी पहुँचना आसान है। जीटी रोड पर स्थित वाराणसी देश के कई बड़े शहरों से सीधे सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत से आने वाले लोग प्रयागराज और मिर्जापुर होते हुए वाराणसी पहुँच सकते हैं।

हंगामा 2 देखिए, राज की वजह से नुकसान न हो: फैन्स से शिल्पा शेट्टी की गुजारिश, घर पहुँच मुंबई पुलिस ने दर्ज किया बयान

पोर्न फिल्म बनाने और बेचने के मामले में शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा की गिरफ्तारी के बाद शुक्रवार (जुलाई 23, 2021) को मुंबई पुलिस ने अभिनेत्री के घर पहुँच कर उनका बयान भी दर्ज किया है। मुंबई पुलिस को कोर्ट से राज कुंद्रा की हिरासत 27 जुलाई 2021 तक मिलने के बाद वह शिल्पा के घर छानबीन करने पहुँचे थे।

मुंबई पुलिस की ओर से शुक्रवार को कोर्ट में कहा गया कि राज कुंद्रा की व्‍हाट्सएप चैट्स से खुलासा होता है कि वह 121 पोर्न वीडियो 1.2 मिलियन डॉलर( ₹8,93,47,080) में बेचने की डील कर रहे थे, जिसे लेकर उन्हें संदेह है कि डील इंटरनेशनल स्‍तर पर होनी थी।

बता दें कि एक ओर जहाँ इस मामले में मुंबई पुलिस एक्ट्रेस का बयान लेकर उनके घर से निकल चुकी है। वहीं, इसी बीच शिल्पा शेट्टी ने अपनी आने वाली फिल्म हंगामा 2 को लेकर एक ट्वीट किया है। अपने ट्वीट में उन्होंने अपने फैन्स से अपील की है कि उनके पति की गिरफ्तारी का असर इस फिल्म पर न पड़ने दें।

वह लिखती हैं, “मैं योग की टीचिंग पर विश्वास करती हूँ और उसकी प्रैक्टिस करती हूँ। जिंदगी सिर्फ मौजूदा पल में है। हंगामा 2 में एक पूरी टीम की कड़ी मेहनत शामिल हैं, जिन्होंने एक अच्छी फिल्म बनाने के लिए बहुत मेहनत की है और फिल्म सफर नहीं करनी चाहिए।”

अपने चाहने वालों से हंगामा 2 देखने की रिक्वेस्ट करते हुए शिल्पा ने अपने अगले ट्वीट में लिखा, “आज मैं आप सभी से रिक्वेस्ट करती हूँ कि आप फिल्म से जुड़े हर एक व्यक्ति की खातिर अपने परिवार के साथ हंगामा 2 देखें, ताकि आपके चेहरे पर मुस्कान आए।”

उल्लेखनीय है कि पोर्न केस में 19 जुलाई को गिरफ्तार हुए राज कुंद्रा की पुलिस हिरासत 23 जुलाई तक थी। लेकिन आज कोर्ट ने पुलिस रिमांड को 27 जुलाई तक कर दिया। कुंद्रा के साथ रायन की भी पुलिस कस्टडी बढ़ाई गई है। मुंबई पुलिस को शक है कि राज ने पोर्नोग्राफी से कमाए गए पैसों का इस्तेमाल ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए किया था। वहीं राज कुंद्रा ने इस संबंध में बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी याचिका दी है। इसमें उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को अवैध कहा है।

‘CM अमरिंदर सिंह ने किसानों को संभाला, दिल्ली भेजा’: जाखड़ के बयान से उठे सवाल, सिद्धू से पहले थे पंजाब कॉन्ग्रेस के कैप्टन

पंजाब कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने शुक्रवार (23 जुलाई 2021) को एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने किसानों के विरोध को बखूबी सँभाला। यदि कोई और मुख्यमंत्री होता तो किसानों के गुस्से का खामियाजा केंद्र सरकार की जगह पंजाब सरकार को भुगतना पड़ता। वे नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर आयोजित समारोह में बोल रहे थे।

जाखड़ ने कहा, “किसान प्रदर्शनकारी बीजेपी के घर में घुस आए, लेकिन बीजेपी उन्हें बाहर नहीं कर पा रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पूरा पंजाब प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा है। अगर उस वक्त कोई और मुख्यमंत्री होता तो भाजपा के खिलाफ जो नारे लग रहे थे, वे हमारे खिलाफ लग रहे होते। उन्होंने (अमरिंदर सिंह ने) उन्हें बेहतरीन ढंग से संभाला और उन्हें वहाँ (दिल्ली बॉर्डर) भेज दिया।”

सुनील जाखड़ ने कहा कि अगर स्थिति को ठीक ढंग से नहीं संभाला गया होता तो पंजाब सरकार को कृषि कानून विरोधी प्रदर्शनकारियों का गुस्सा झेलना पड़ता। जाखड़ की इस इस टिप्पणी का लोग यही आशय निकाल रहे हैं कि कॉन्ग्रेस ने मान लिया है कि उसी ने किसानों को विरोध के लिए दिल्ली सीमा पर भेजा है। ध्यान देने वाली बात है कि किसानों का विरोधस्थल अपराध स्थल में तब्दील हो गया है। वहाँ से हमला करने से लेकर यौन उत्पीड़न और हत्या तक की खबरें आई हैं।

जाखड़ की जगह लाये गए सिद्धू का मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के साथ मतभेद जगजाहिर है। इन मतभेदों के बीच ही उन्हें पंजाब में पार्टी की कमान दी गई है। सिद्धू और सिंह के बीच तकरार के बीच पार्टी में अंदरूनी कलह की खबरें लगातार आ रही हैं। हालाँकि आज समारोह में दोनों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि अब वे साथ-साथ हैं। पर जानकारों का मानना है कि यह तूफान से पहले की खामोशी जैसा है और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पंजाब कॉन्ग्रेस में कलह और तेज होगी।

काशी विश्वनाथ मंदिर की हुई ज्ञानवापी मस्जिद की 1700 फीट जमीन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को भव्य बनाने के क्रम में मंदिर प्रशासन को बड़ी सफलता मिली है। खबर है कि काशी विश्वनाथ परिसर के रेड जोन में पड़ने वाले 1700 स्क्वायर फीट की जमीन को मुस्लिम पक्ष अंजुमन इंतेजामिया कमेटी ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम कर दिया है। इसके बदले उन्हें मंदिर प्रशासन की तरफ से 1000 स्क्वायर फीट जमीन मिली है। ये जमीन मंदिर से कुछ दूर बांसफाटक इलाके में है।

संबंधित दस्तावेज

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, काशी विश्‍वनाथ मंदिर प्रशासन और ज्ञानवापी मस्जिद पक्ष की ओर से पहले ही इस मामले पर सहमति बातचीत के दौरान बनी थी। इसके बाद 1700 स्क्वायर फीट मंदिर प्रशासन के नाम कर दी गई। माना जा रहा है कि यह जमीन के बदले जमीन देने का मामला होने से इसे कॉरिडोर के लिए जमीन खरीद का मामला नहीं माना जाएगा।

संबंधित दस्तावेज

आर्टिकल 31 के एक्‍सचेंज ऑफ प्रॉपर्टी के तहत जारी दस्‍तावेजों में ई स्‍टांप के जरिए इस संपत्ति का ट्रांस्फर किया गया है। इसमें काशी विश्‍वनाथ मंदिर प्रशासन और अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद की ओर से 9 लाख 29 हजार रुपए की स्‍टांप ड्यूटी चुकाकर संपत्ति का ट्रास्फर किए जाने की जानकारी सामने आई है।

बता दें कि 1991 से काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़ा मामला कोर्ट में चल रहा है। काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर से स्वयंभू लॉर्ड विश्वेश्वर महादेव के नाम से हिंदू पक्षकार हैं। वहीं ज्ञानवापी मस्जिद की ओर से अंजुमन इंतेजामिया कमेटी और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड पक्षकार हैं। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर निर्माण में सुरक्षा के लिहाज से यह जमीन का टुकड़ा बहुत ही महत्वपूर्ण था, जो मंदिर प्रशासन के नाम हो गया है।

अंजुमन इंतेजामिया कमेटी के सचिव सईद यासीन ने नवभारत टाइम्स से बातचीत में स्पष्ट किया कि वह सुरक्षा के लिहाज से जमीन मंदिर प्रशासन के नाम पर कर रहे हैं। लेकिन बाकी जो मस्जिद की जमीन है उसके लिए अदालत में अपने पक्ष रखते रहेंगे। यासीन बताते हैं कि 1993 से ही जमीन के इस हिस्से पर प्रशासन का मुख्य कंट्रोल रूम था। जहाँ एसपी रैंक के अधिकारी बैठते थे। प्रशासन की ओर से इसके बदले में कभी कोई भी रकम अदा नहीं की गई। उनके मुताबिक, कमेटी ने इस शर्त पर जमीन प्रशासन को लीज पर दी थी कि जब भी यहाँ से इस कार्यालय को हटाया जाएगा तो वह जमीन कमेटी को वापस की जाएगी। लेकिन अब इसे लिखित तौर पर मंदिर प्रशासन के नाम कर दिया गया है।

‘शबनम को मत दो फाँसी, देश की छवि खराब होगी’: सलीम के इश्क में परिवार के 7 लोगों को कुल्हाड़ी से काट डाला था

आजाद भारत में फाँसी की सजा पाने वाली शबनम के मामले में नया मोड़ आ गया है। उसकी सजा बदलने की माँग करते हुए यह दलील दी गई है कि इससे देश की छवि खराब होगी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट की वकील सहर नकवी ने यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र भेज शबनम की फाँसी की सजा को बदलने की माँग रखी है।

अमरोहा की रहने वाले शबनम ने 2008 में अपने ही परिवार के 7 लोगों का कत्ल कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी फाँसी की सजा बरकरार रखी थी और राष्ट्रपति भी उसकी दया याचिका ख़ारिज कर चुके हैं। ऐसे में नकवी ने पत्र लिख राज्यपाल से मानवीय आधार पर हस्तक्षेप की अपील की है।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार राज्यपाल के निर्देश पर उनके विशेष सचिव बद्री नाथ सिंह ने मामला प्रदेश के कारागार विभाग के प्रमुख सचिव को सौंप दिया है। उनसे नियमों के मुताबिक फैसला लेने को कहा है। दैनिक भास्कर को सहर नकवी ने बताया है कि राज्यपाल ने ऐसा कर राहत देने का काम किया है। उनके अनुसार कारागार विभाग फाँसी का फैसला पलटने पर विचार कर सकता है। सहर ने 23 फरवरी 2021 को राज्यपाल को पत्र भेजा था।

नकवी का कहना है कि आजाद भारत में आज तक किसी भी महिला को फाँसी नहीं हुई है। ऐसे में शबनम को सूली पर लटकाने से पूरी दुनिया में भारत और देश की महिलाओं की छवि खराब होगी। उन्होंने पत्र में जेल में पैदा हुए शबनम के 13 साल के बेटे के भविष्य की भी दुहाई दी है। उनका कहना है कि शबनम के जुर्म और सजा पर कोई सवाल नहीं है, वे केवल यह चाहती हैं कि इसे उम्रकैद में तब्दील कर दिया जाए।

गौरतलब है कि बावनखेड़ी गाँव के मास्टर शौकत अली की बेटी शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर 14-15 अप्रैल, 2008 की रात को अपने ही घर में 7 खून किए थे। उसने अपने माता-पिता, दो भाई, एक भाभी, मौसी की लड़की और मासूम भतीजे को मार डाला था।

एमए पास शबनम उस समय गाँव के स्कूल में शिक्षा मित्र थीं। मास्टर शौकत उसकी शादी किसी पढे़-लिखे लड़के से करना चाहते थे। लेकिन, शबनम का दिल अपने गाँव के 8वीं पास सलीम पर आ चुका था। दोनों का प्यार इतना परवान चढ़ा कि शबनम ने अपने घरवालों को नशे की दवाई देकर सलीम को हर रात घर पर बुलाना शुरू कर दिया। कुछ दिनों में दोनों ने परिवार को बाधा मानकर उन्हें खत्म करने की साजिश रची और फिर एक रात कुल्हाड़ी से काट कर 7 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी थी।