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61 इंसेफेलाइटिस प्रभावित जिलों में 1 करोड़ से अधिक घरों में पहुँचा स्वच्छ पानी: मोदी सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत दिया अंजाम

केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत देश के 5 राज्यों में बढ़ते जापानी इंसेफेलाइटिस (बच्चों में दिमागी बुखार) के प्रकोप पर काबू पाने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं। मोदी सरकार ने इन राज्यों के 61 जिलों में शुद्ध जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी है। पिछले 22 महीनों के अंदर इन जिलों के तकरीबन एक करोड़ परिवारों को जलापूर्ति वाले नल कनेक्शन दिए गए हैं। जापानी इंसेफेलाइटिस-एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (Japanese Encephalitis-Acute Encephalitis Syndrome) से प्रभावित इन जिलों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को स्वच्छ जल मुहैया कराकर इस घातक बीमारी से बचाव के उपाय किए गए हैं।

ये 61 जिले उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल राज्य के हैं। साल 2019 में स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि 2024 में उनका दूसरा कार्यकाल पूरा होने तक उनकी सरकार ग्रामीण भारत के हर घर में नल का साफ पानी उपलब्ध कराएगी।

जल जीवन मिशन के तहत मोदी सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आँकड़ों के अनुसार, अब तक इन जिलों में एक करोड़ से अधिक परिवारों को स्वच्छ जल के लिए नल का कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है। खासतौर पर, जापानी इंसेफेलाइटिस बीमारी को जड़ से मिटाने की दिशा में बेहतर स्वच्छता और स्वच्छ पेयजल पर जोर दिया गया है।

ये 61 जिले विभिन्न प्रकार के इंसेफेलाइटिस के प्रकोप का सामना कर रहे हैं। इसके कारण बच्चों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। खासकर, बिहार और उत्तर प्रदेश राज्य में यह अपने चरम पर है। हिंदुस्तान टाइम्स ने जल शक्ति मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से कहा, ”इन जिलों के घरों में नल का पानी उपलब्ध कराने का आँकड़ा एक मील का पत्थर है। अधिकारी ने कहा, “यह 61 प्राथमिकता वाले जिलों में घरेलू नल के पानी के कनेक्शन में 32% की वृद्धि सुनिश्चित करता है, जो पिछले 22 महीनों के दौरान देश में नल के पानी के कनेक्शन देने में राष्ट्रीय औसत 23.43% की वृद्धि से लगभग 12% अधिक है।” सरकार ने 2024 तक हर घर में नल का पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है।

यूपी से इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए सीएम योगी प्रयासरत

जापानी इंसेफेलाइटिस-एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया, परजीवी, वायरस, स्पाइरोकेट्स और फंगस के कारण हो सकता है। इसे रोकने के लिए एक टीका उपलब्ध है, लेकिन यह अभी कुछ मतभेदों के चलते चलन में नहीं है। योगी आदित्यनाथ जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, तो उनके द्वारा शुरू की गई यह पहली परियोजनाओं में से एक रही है कि यूपी के हॉटस्पॉट्स में बच्चों को इस घातक बीमारी से मुक्त कराना है।

यही कारण है कि घातक जापानी इंसेफेलाइटिस के कारण बच्चों की मृत्यु दर में भारी गिरावट आई है। इन जिलों के घरों में साफ पानी उपलब्ध कराने से इस बीमारी पर काबू पाने में मदद मिलेगी। यूनिसेफ ने भी बीमारी पर शिकंजा कसने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की है।

दशकों पुरानी है इंसेफेलाइटिस की समस्या

उत्तर प्रदेश के बरेली में राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के पूर्व प्रभारी लोकेश नाथ ने एचटी को बताया, ”स्वच्छ जल न मिलने से इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम की समस्या बढ़ती है, क्योंकि गंदे पानी की वजह से ही यह बीमारी होती है। जब कुपोषित बच्चे इसका शिकार होते हैं, तो उन्हें या तो ठीक होने में अधिक समय लगता है या उनके बचने की संभावना कम होती है।”

ICAR-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान पुणे के केएन भीलेगांवकर ने इस सिंड्रोम को भारत में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बताया है। वह एक लेखक हैं, जो बरेली जिले में ऐसी घात​क बीमारियों पर स्टडी कर रहे हैं।

राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के आँकड़े बताते हैं कि 2007 और 2016 के बीच स्थानिक जिलों में इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के 70,000 से अधिक मामले सामने आए हैं। पिछले 30 वर्षों में 30,000 बच्चे इस जानलेवा बीमारी के कारण अपनी जान गँवा चुके हैं। योजना आयोग की 2010 की एक रिपोर्ट के अनुसार, टीकाकरण, वेक्टर नियंत्रण, स्वच्छता सुविधाएँ, सुरक्षित पेयजल और पर्याप्त पोषण इस बीमारी को रोकने के लिए 5 रामबाण उपाय हैं।

क्या है जापानी इंसेफेलाइटिस

बता दें कि जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) बीमारी गंदे पानी में पनपने वाले फ्लैवी वायरस के कारण होता है। मच्छरों के काटने से यह वायरस मनुष्यों और पशुओं के शरीर में पहुँचता है। इससे पीड़ित मरीज के दिमाग के आसपास की झिल्ली में सूजन आ जाती है। यह बीमारी जापान से फैलते हुए भारत पहुँची है। इस बीमारी से गंभीर रूप से पीड़ित होने पर मरीज की मौत भी हो जाती है।

UP में काँवड़ यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केरल में बकरीद पर दी गई राहत वाली सुनवाई टली

सुप्रीम कोर्ट में आज (जुलाई 19, 2021) अलग-अलग समुदाय के त्योहारों से जुड़े दो अलग तरह के मामलों पर सुनवाई हुई। एक मामला उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा को लेकर था जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने स्वंय संज्ञान लिया था, जबकि दूसरा मामला केरल सरकार द्वारा ईद के अवसर पर दी गई राहत के विरुद्ध था जिसपर हाल में याचिका दायर की गई थी।

इन दोनों मामलों पर आज कोर्ट ने सुनवाई की। इसके बाद जहाँ यूपी सरकार द्वारा कांवड़ यात्रा से जुड़ा जवाब पाकर कोर्ट ने केस को बंद कर दिया, वहीं दूसरी ओर केरल सरकार से जवाब माँगा गया कि उन्होंने राज्य में कोरोना केस होने के बावजूद बकरीद पर राहत क्यों दी है। 

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में कहा कि इस साल कांवड़ यात्रा नहीं होगी। यूपी सरकार के वकील वैद्यनाथन ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि सभी कांवड़ संघ यात्रा स्थगित करने के लिए तैयार हैं। इसलिए इस साल यात्रा नहीं होगी। कोर्ट ने राज्य सरकार से ऐसा जवाब पाकर मामले को बंद कर दिया।

सर्वोच्च न्यायालय ने केस क्लोज करते हुए पुलिस सहित उत्तर प्रदेश के सभी स्तर के अधिकारियों को COVID-19 मानदंडों के किसी भी उल्लंघन या किसी भी यात्रा को निकालने का प्रयास करने और नागरिकों के जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाली किसी भी कार्रवाई को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

वहीं, केरल में ईद के मद्देनजर दायर की गई याचिका पर अपनी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार से जवाब माँगा। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केरल सरकार से बकरीद के मद्देनजर कोरोना प्रतिबंधों में 3 दिन की छूट देने के खिलाफ दायर आवेदन पर जवाब दाखिल करने को कहा।

याचिका में माँग की गई है कि केरल में कोरोना के मामलों में इजाफा हो रहा है, इस पर सुप्रीम कोर्ट संज्ञान ले। इस संबंध में सीनियर वकील विकास सिंह के अलावा एक और वकील राधाकृष्णन ने माँग की है कि जब तक 80 फीसदी आबादी का वैक्सीनेशन न हो जाए, तब तक ऐसे सामाजिक/धार्मिक आयोजनों की इजाजत नहीं होनी चाहिए।

वहीं मुख्य याचिकाकर्ता वकील विकास सिंह का कहना है कि केरल में इस वक्त देश के सबसे ज्यादा कोरोना केस हैं। यूपी में सिर्फ 59 केस है तो केरल में 13 हजार केस है। इस पर कोर्ट संज्ञान लेकर उचित आदेश पास करें। याचिका पर सुनवाई करते हुए केरल सरकार को इस पर विस्तृत जवाब देने को कहा गया है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि आखिर क्यों बकरीद के चलते रियायत दी गई। ये जवाब केरल सरकार को आज ही देना होगा क्योंकि कल इस पर कोर्ट सुनवाई करेगा।

पंजाब कॉन्ग्रेस का एक ‘कैप्टन’-4 पहरेदार, असल में कौन सरदार: सिद्धू VS अमरिंदर में साफ न हो जाए ‘हाथ’

पंजाब कॉन्ग्रेस में चल रही कई महीने की राजनीतिक सरगर्मियों, असंतोष, गुटबाजी और मुलाकातों के बाद पार्टी हाईकमान ने नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। सिद्धू के साथ चार कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त किए गए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इस फैसले के पहले दल के राष्ट्रीय नेतृत्व ने पंजाब के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की राय भी ली। दल के राष्ट्रीय नेतृत्व का यह कदम पहले से चल रहे विवादों का अंत करेगा या उन्हें नया मोड़ देगा, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल के लिए दल में चल रहा अंदरूनी विवाद कुछ दिनों के लिए शांत रहेगा, ऐसा माना जा रहा है। वैसे राजनीतिक जानकारों के एक धड़े की मानें तो हाईकमान का यह कदम प्रदेश कॉन्ग्रेस में दो पावर सेंटर को जन्म देगा और यह बात अगले वर्ष होनेवाले विधानसभा चुनावों के लिए सही कदम नहीं है।

सिद्धू के प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद अलग-अलग लोगों से आई प्रतिक्रिया प्रदेश में पहले से चल रहे राजनीतिक रस्साकशी को एक नए दृष्टिकोण से देखने के लिए बाध्य करती हैं। ऐसा माना जा रहा है कि हाईकमान को दिए गए अपने मंतव्य में प्रदेश से आने वाले सांसद सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के पक्ष में नहीं थे। इसके साथ ही दस विधायकों का एक ग्रुप सार्वजनिक तौर पर न केवल कैप्टन अमरिंदर सिंह के पक्ष में खड़ा दिखाई दिया, बल्कि इस ग्रुप ने हाईकमान से यह अनुरोध भी किया कि वह ऐसे महत्वपूर्ण मौके पर मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का साथ दे। कैप्टन भी प्रदेश अध्यक्ष पद के विषय पर पहले से ही अपनी प्राथमिकताएँ जगजाहिर करते रहे हैं। उनका यह मानना रहा है कि पद के लिए सिद्धू का चुनाव समाज के अन्य वर्गों को गलत संदेश देगा। इन बातों को देखते हुए फिलहाल यही लग रहा है कि दल के भीतर विवाद शांत होने की जगह शायद नया मोड़ ले।

नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर के सिंह के बीच विवाद नया नहीं है। दोनों नेताओं के बीच की राजनीतिक रस्साकशी कई वर्षों से चली आ रही है। हाँ, नई बात है कॉन्ग्रेस हाईकमान का इस बार सिद्धू की ओर झुकाव। सिद्धू राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा के नज़दीक माने जाते रहे हैं। एक बात और है जिसे हाल के महीनों में सच माना जाने लगा है और वह है; राहुल गांधी में कैप्टन अमरिंदर सिंह के विश्वास का अभाव। ऐसे में सिद्धू के लिए इन बातों को आगे रखकर कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ सीधी राजनीतिक टक्कर लेना आसान हो जाता है। पर इसके साथ हाल के दिनों में शायद जो बात हाईकमान के लिए खतरे की घंटी साबित हुई वह थी सिद्धू की आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ बढ़ती नज़दीकियाँ जिन्हें उन्होंने अपने कई ट्वीट में जाहिर किया। ऐसा नहीं कि आम आदमी पार्टी के साथ सिद्धू की नज़दीकियाँ कोई नई बात है पर सिद्दू ने इस बार इन्हें दिखाने के लिए ऐसा समय चुना जिसकी वजह से ये बात कई और राजनीतिक घटनाओं और संयोगों के साथ सामने आई है।

फिलहाल हाईकमान के राजनीतिक फैसले से ऐसा सन्देश जाता है कि कॉन्ग्रेस पार्टी पंजाब में अब भविष्य की ओर देख रही है। साथ ही सिद्धू की प्रदेश अध्यक्ष पद पर नियुक्ति कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए भी काफी हद तक साफ़ सन्देश है कि हाईकमान सिद्धू में दल का भविष्य देख रहा है। प्रदेश के बाकी दलों में इस समय नेतृत्व की कमी साफ़ दिखाई दे रही है और कॉन्ग्रेस को लगता है कि शायद सिद्धू राजनीतिक दृष्टिकोण से इस समय सबसे विश्वसनीय नेता हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह भी किसी न किसी रूप में राजनीतिक तौर पर शिथिल पड़े हैं। व्यक्तिगत तौर पर भी उनकी छवि पहले जितनी ठोस नहीं दिखाई देती और इस समय इतनी कमज़ोर है कि सिद्धू खुले तौर पर उन्हें चुनौती देते हुए दिख रहे हैं। इस सब के ऊपर प्रदेश की राजनीति में जो खालीपन है उसमें कॉन्ग्रेस के लिए शायद सिद्धू दल के लिए भविष्य की राजनीति को नेतृत्व देने लायक लगते हैं और यही कारण है कि उनके प्रति दल इस समय आशावान दिखाई दे रहा है।

ये राजनीतिक फैसले और परिस्थितियाँ कैप्टन अमरिंदर सिंह को कहाँ ले जाती हैं? यह ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर शायद हमें जल्द ही मिले। सिद्धू को कैप्टन सशर्त प्रदेश अध्यक्ष मानने के लिए तैयार हो गए हैं पर यह स्थिति क्या हमेशा के लिए लागू हो पाएगी? राजनीतिक कद के लिहाज से कैप्टन अमरिंदर सिंह आज भी प्रदेश कॉन्ग्रेस के सबसे बड़े नेता हैं। ऐसे में वे सिद्धू या हाईकमान की हर बात वे आगे भी मंजूर करेंगे, इसकी संभावना कम ही दिखाई देती है। चुनाव में टिकट बँटवारे को लेकर किस तरह की रणनीति होगी? कौन सा ग्रुप मज़बूत रहेगा? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका जवाब आने वाले समय में शायद जल्द ही मिले। हाईकमान से मिली सह का सिद्दू के आत्मविश्वास पर कितना प्रभाव पड़ेगा और उनका राजनीतिक आचरण आगामी प्रदेश चुनाव में दल के लिए कितना सही रहेगा, ये ऐसे प्रश्न हैं जो राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भी हैं और जिनका सामना दल और उसके नेताओं को जल्द ही करना ही होगा। फिलहाल तो यही लग रहा है कि हाईकमान के इस राजनीतिक फैसले से अंदरूनी विवाद पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुए हैं और उनको बस एक नया मोड़ मिला है।

‘कोई सबूत नहीं, फैलाया जा रहा झूठ’: Pegasus विवाद पर फँसा The Wire, इजरायली कंपनी कर सकती है मुकदमा

इजरायली जासूसी सॉफ्टवेयर ‘Pegasus’ को बनाने वाली कंपनी NSO ग्रुप ने भारतीय वामपंथी मीडिया संस्थान ‘The Wire’ को मानहानि का मुकदमा दायर करने की धमकी दी है। ‘द वायर’ ने अपनी एक खबर में दावा किया था कि भारत सरकार तेल-अवीव में स्थित इस कंपनी के सॉफ्टवेयर के जरिए कई पत्रकारों, सुप्रीम कोर्ट के जजों व विपक्षी नेताओं की जासूसी करवा रही है। सरकार ने इन आरोपों को तथ्यों से परे बताया है।

इजरायली कंपनी ने अपने डिफेमेशन काउंसल क्लेयर लोके के जरिए ‘The Wire’ को एक पत्र भी भेजा है, जिसमें कहा गया है कि बिना किसी तथ्य व आधार के उसके द्वारा प्रकाशित की गई खबर पर उसके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। कंपनी ने जिक्र किया है कि उस खबर में उसके जासूसी सॉफ्टवेयर के जरिए भारत के कुछ लोगों की जासूसी की बात कही गई है, जो गलत है।

‘The Wire’ इस सम्बन्ध में और भी लेख प्रकाशित करने के दावे कर रहा है। NSO ग्रुप ने कहा है कि ये लेख एकदम झूठे हैं और कंपनी की छवि को नुकसान पहुँचाने वाले हैं। अपने बयान में कंपनी ने कहा है कि अगर वो लेख प्रकाशित किए जाते हैं तो ‘The Wire’ के लिए समस्या हो सकती है। कंपनी ने कहा कि इसके कंटेंट्स को लेकर उसकी कुछ ठोस चिंताएँ हैं। कंपनी ने इन्वेस्टीगेशन के नाम पर इन खबरों को आगे बढ़ाने वाले पत्रकारों के नेटवर्क ‘फॉरबिडेन स्टोरीज’ से भी नाराज़गी जताई।

कंपनी ने कहा कि ये लेख गलत धारणाओं पर आधारित हैं और बिना किसी सबूत के अपुष्ट बातें लिखी गई हैं। कंपनी ने कहा कि इन मीडिया संस्थानों के ‘सूत्रों’ की विश्वसनीयता और हितों पर भी इससे बड़े सवाल खड़े होते हैं। कंपनी के अनुसार, ऐसा लगता है कि ‘अनभिज्ञ सूत्रों’ ने उन्हें कुछ ऐसी जानकारियाँ उपलब्ध कराई हैं, जो वास्तविकता से दूर हैं और उनका कोई तथ्यात्मक आधार ही नहीं है।

इन लेखों को उपद्रवी की श्रेणी में डालते हुए कंपनी ने स्पष्ट किया कि वो अब मानहानि का मुकदमा दायर करने पर विचार कर रहा है। कंपनी ने कहा कि ‘द वायर’ ने जरा भी मेहनत नहीं की और इन सूचनाओं की पुष्टि के लिए कोई प्रयास नहीं किए। कंपनी ने कहा कि इस तरह के गंभीर व अपमानजनक आरोपों के पीछे मीडिया संस्थान के पास कई ऑन-रिकॉर्ड सूत्र होने चाहिए, गहन अध्ययन किया जाना चाहिए और सम्बंधित डेटा का पारदर्शी विश्लेषण होना चाहिए।

‘Pegasus’ की संचालक कंपनी NSO ग्रुप के अनुसार, ऐसे आरोप लगा तो दिए गए लेकिन इसके पीछे सबूत के रूप में कोई दस्तावेज या विश्वसनीय स्रोत नहीं है। साथ ही इन मीडिया संस्थानों पर डेटा के गलत विश्लेषण का भी आरोप लगाया गया है। अक्टूबर 2018 में पत्रकार जमाल खशोगी की इस्ताम्बुल स्थित सऊदी दूतावास में हत्या पर भी कंपनी ने कहा कि उनकी जासूसी के लिए उसके सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल नहीं हुआ था।

इजरायल की कंपनी ने कहा कि वो सिर्फ दुनिया की कानूनी संस्थाओं और ख़ुफ़िया एजेंसियों को अपनी सुविधाएँ उपलब्ध कराती है, वो भी इनके पीछे जो सरकारें हैं उनका विश्लेषण करने के बाद। NSO ग्रुप ने कहा कि वो अपराध रोकने, आतंकी घटनाओं को रोकने और ज़िंदगियाँ बचाने के लिए अपने सॉफ्टवेयर व सर्विसेज को उपलब्ध कराता है। साथ ही बताया कि NSO न तो सिस्टम को चलाता है और न ही इसके अंदर का डेटा देखता है।

इस मामले पर भारत सरकार ने कहा था, “जो कहानी बनाई जा रही है, वो न सिर्फ तथ्यों से दूर है बल्कि एक पूर्व-कल्पित निष्कर्षों पर भी आधारित है। ऐसा लगता है कि जैसे ये जाँचकर्ता, अभियोजक और जूरी – इन तीनों का किरदार अदा करना चाहते हैं। सरकार के पास जो सवाल भेजे गए हैं, उन्हें देख कर लगता है कि इसके लिए काफी घटिया रिसर्च किया गया है और साथ ही ये भी बताता है कि सम्बंधित मीडिया संस्थानों द्वारा मेहनत नहीं की गई है।”

राजस्थान की हिंदू विवाहिता को काम दिलाने का झाँसा देकर कश्मीर ले गया शाहिद, रेप के बाद कराया धर्मांतरण

राजस्थान की राजधानी जयपुर के प्रतापनगर की रहने वाली एक 25 वर्षीया हिंदू विवाहिता के साथ रेप करने और उसका जबरन धर्मान्तरण कराने का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित महिला का पति शराब पीकर अक्सर उसके साथ मारपीट करता था। ऐसे में उसके पड़ोस में रहने वाला शाहिद उसे अच्छा काम दिलाने के बहाने कश्मीर लेकर गया था और वहाँ घटना को अंजाम दिया।

शाहिद साल 2016 में काम दिलाने का लालच देकर महिला और उसके बेटे को कश्मीर लेकर गया था। वहाँ जाने के बाद महिला के बेटे को जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ रेप किया और उसका जबरन धर्मान्तरण करवा दिया। शाहिद ने महिला का नाम बदलकर सोनम और बेटे का नाम सरफराज कर दिया गया। घटना के 4 साल बाद आरोपितों के चंगुल से छूटकर महिला थाने पहुँची तो वहाँ पुलिस ने मामले को दर्ज करने से मना कर दिया। इसके बाद पीड़िता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर एक महिला और काजी समेत 5 आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

साभार: दैनिक भास्कर

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, डेढ़ साल पहले भी पीड़िता थाने आई थी, लेकिन शाहिद से राजीनामे के बाद वह वापस लौट गई थी। लेकिन, अब महिला ने महिला ने शाहिद, आमिर हुसैन, फिरदौस, बिस्मिल्लाह और काजी के खिलाफ प्रतापनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 341, 384, 376, 392, 406, 363, 365, 366 के तहत केस दर्ज किया गया है। वहीं, महिला का केस दर्ज नहीं करने के मामले में प्रतापनगर थाने के एसएचओ श्रीमोहन मीणा को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

महिला ने पुलिस को बताया है कि वो उदयपुरवाटी की रहने वाली है। वर्ष 2009 में उसकी शादी हुई थी और उसकी एक बेटा व एक बेटी है। उसका पति शादी के बाद शराब के नशे में मारपीट करता था। उसने अपने मायके वालों से यह बात बताई, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। इसके बाद पड़ोस में रहने वाले भरतपुर निवासी शाहिद उसे काम का झाँसा देकर उसे कश्मीर ले गया और उसका रेप किया।

पीड़िता ने बताया कि शाहिद उसे कश्मीर से लेकर नोएडा में अपने भाई आमिर के पास आ गया। वहाँ पर उन दोनों ने उसके जेवर छीन लिए। उसके बाद शाहिद और उसका भाई महिला को अपने पैतृक गाँव भरतपुर लेकर गए और वहाँ आरोपितों ने कोर्ट में झूठे बयान भी दिलवाए। महिला का कहना है कि लंबे समय तक रेप किए जाने के कारण वह गर्भवती हो गई और साल 2017 में उसने एक बेटी को भी जन्म दिया।

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‘…मोदी बेशर्म प्रधानमंत्री है’: कंपनी पॉलिसी उल्लंघन पर AajTak ने निकाला, PM को जिम्मेदार बता खुद को दिखा रहा ‘शहीद’

इंडिया टुडे ग्रुप के आजतक (AajTak) से जुड़े रहे श्याम मीरा सिंह ने सोमवार (जुलाई 19, 2021) को ट्विटर पर अपनी बर्खास्तगी के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार बताया, जबकि असलियत में उसे कंपनी की सोशल मीडिया पॉलिसी का उल्लंघन करने के लिए टर्मिनेट किया गया है।

कॉन्ट्रैक्ट के उल्लंघन पर बर्खास्त हुआ श्याम मीरा सिंह

श्याम ने टर्मिनेशन के बाद ट्विटर पर दो स्क्रीनशॉट शेयर किए। इस ट्वीट में उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्मान न देने की बात की है। साथ ही इन ट्वीट्स में पीएम मोदी को बेशर्म भी कहा है। उसने लिखा है, “बार-बार दोहराना चाहता हूँ। हाँ! मोदी बेशर्म प्रधानमंत्री है।”

श्याम मीरा सिंह का टर्मिनेशन लेटर (साभार: @shyammeerasingh)

ट्वीट में श्याम ने कंपनी द्वारा भेजे गए उस मेल को भी साझा किया है जिसमें उन्हें उनकी बर्खास्तगी के बारे में बताया गया। इसमें मीडिया हाउस ने कहा कि दो आधिकारिक चेतावनियों समेत कई बार वार्निंग दिए जाने के बाद भी श्याम सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट करते रहे, जो कि कंपनी की पॉलिसी के विरुद्ध है।

मालूम हो कि इंडिया टुडे समूह की सोशल मीडिया नीति मीडिया हाउस से जुड़े कर्मचारियों को उनकी व्यक्तिगत राय सोशल मीडिया पर डालने से मना करती है। साथ ही उन्हें उनके सोशल मीडिया का उपयोग केवल उन समाचारों के लिए इस्तेमाल करने की सलाह देती है जो मीडिया हाउस द्वारा प्रकाशित या प्रसारित किए गए हैं।

इंडिया टुडे की सोशल मीडिया पॉलिसी

साल 2020 के अक्टूबर माह में इंडिया टुडे ने इस संबंध में निर्देश जारी किए थे। एडवाइजरी में कहा गया था कि इंडिया टुडे ग्रुप के साथ अनुबंध रखने वाला व्यक्ति अपने व्यक्तिगत हैंडल का उपयोग केवल उस समूह से संबंधित सामग्री या प्रचार को पोस्ट करने के लिए कर सकता है, जिसका उपयोग प्रिंट, डिजिटल या ऑन एयर में किया गया है। इसमें आगे कहा गया कि ऐसे व्यक्ति (इंडिया टुडे के साथ कॉन्ट्रैक्ट वाले) किसी पोस्ट का रिप्लाई या उनको रीट्वीट भी नहीं कर सकते, भले ही उन्हें उसमें टैग किया गया हो। वे केवल समूह की सामग्री पर ही जवाब दे सकते हैं।

बता दें कि जब से ये दिशा-निर्देश लागू हुए हैं, तब से मीडिया हाउस के कई शीर्ष कर्मचारी जैसे राजदीप सरदेसाई, गौरव सावंत, राहुल कंवल, पाणिनी आनंद वगैरह भी अपने व्यक्तिगत विचारों को सोशल मीडिया पर शेयर करने से बच रहे हैं। ऐसे में जाहिर सी बात है कि श्याम मीरा सिंह कोई अपवाद नहीं हो सकते थे।

सोशल मीडिया यूजर्स ने उड़ाया मजाक

सोशल मीडिया पर श्याम का ट्वीट वायरल होने के बाद इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। लोगों ने उन पर तंज कसा है कि राजदीप सरदेसाई जैसे पत्रकारों को मोदी से घृणा करने पर बर्खास्त नहीं किया गया, लेकिन उनको ऐसे ट्वीट्स के लिए कर दिया गया। यूजर कहते हैं कि जरूर वह अपनी नौकरी में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे होंगे तभी उन्हें निकाला गया, अगर पीएम मोदी कारण होते तो कई कर्मचारियों पर कार्रवाई होती।

कई यूजर्स ने उन्हें बेवकूफ करार देते हुए सलाह दी कि वह अपने सीनियर्स से कुछ सीखें ताकि अपनी नफरत को ‘पत्रकारिता का सच’ कहकर छिपा सकें और सरकारी नीतियों को बड़े प्लेटफॉर्म पर बदनाम कर सकें।

कुछ ने उन्हें कहा कि वह कंपनी पॉलिसी के मुताबिक काम करना सीखें और समझें कि कॉर्पोरेट जगत में कैसे काम किया जाता है।

‘सुतल बा बलमुआ सावन में गाँजा मार के’: अश्लील गानों के गायक खेसारी लाल यादव ने अब भगवान शिव को ड्रग्स से जोड़ा

कई अश्लील गाने गा-गा कर भोजपुरी भाषा व बिहार को पहले से ही बदनाम कर रहे खेसारी लाल यादव ने अब हिन्दू धर्म व इसके देवी-देवताओं को का इस्तेमाल भी अपने धंधे के लिए करना शुरू कर दिया है। खेसारी लाल यादव के नए भोजपुरी गाने का टाइटल है, ‘सावन में गाँजा मार के’, जिसमें भगवा रंग और भगवान शिव को ड्रग्स से जोड़ा गया है और हिन्दुओं की भावनाओं का अपमान किया गया है।

इस गाने के बोल कुछ इस प्रकार हैं, “दिन भर में चार बेर पिया तारे झाड़ के.. सुतल बा बलमुआ सावन में गाँजा मार के।” इसका अर्थ हुआ, “दिन भर में 4 बार जम कर गाँजा पी रहा है, तुम्हारा पति सावन में गाँजा मार कर सोया हुआ है।” वैसे ये कोई नई बात नहीं है। कई हिंदी और भोजपुरी के साथ-साथ कुछ पंजाबी गानों में भी भगवान शिव को गाँजे और भाँग के साथ जोड़ने का एक अलग ही चलन रहा है।

भगवान शिव के साथ गाँजा के धुएँ को दिखा कर हिन्दुओं का अपमान किया गया है

ताज़ा गाने में खेसारी लाल यादव ने बार-बार देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम मंदिर की तस्वीर दिखाई है और साथ ही काँवर लिए श्रद्धालुओं को जाते हुए दिखाया गया है। पूजा-पाठ के लिए जा रही महिलाएँ उनके बोल पर नृत्य कर रही होती हैं। साथ ही वो खुद भगवा वस्त्र पहन कर गाँजा पी रहे होते हैं। उनके साथ कई अन्य लोग भी भगवा कपड़ों में आते हैं। साथ ही बार-बार उन्हें भगवान शिव की प्रतिमा के सामने भी नाचते हुए दिखाया गया है।

खेसारी के नए गाने में उनके बोल पर नृत्य करतीं आरती का थाल लेकर आई महिलाएँ

ये खेसारी लाल यादव के लिए भी विवादित तरीके से गाने बनाने का पहला मामला नहीं है। उन पर गानों के जरिए अश्लीलता फैलाने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। इसी साल जून में गायक और अभिनेता खेसारी लाल यादव के खिलाफ मुंबई में केस दर्ज हुआ है। उनके खिलाफ IPC की धारा-294 ( किसी महिला या युवती को अश्लील साहित्य या अश्लील तस्वीरें, क़िताबें या पर्चियाँ दिखाना) लगाई गई थी।

साथ ही उनके खिलाफ उसी FIR में IPC की धरा-295 (किसी भी सार्वजनिक स्थान या उसके आस पास कोई अश्लील गाना या शब्द बोलना) और धारा-354 (किसी स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) भी लगाई गई थी। सनातन सेवा फाउंडेशन के प्रमुख सुजीत सिंह ने अपनी शिकायत में उन पर रुपए कमाने के लिए अश्लीलता परोसने का आरोप लगाया था

खेसारी लाल यादव के गाने ‘चाची के बाची सपनवां में आती है’ का भी उदाहरण दिया गया था। चाची की बेटी बहन होती है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने इस तरह का गाना बना कर समाज को बिगाड़ने का काम किया था, उन पर ऐसे आरोप लगे थे। बिहार के सीवान में जन्मे खेसारी लाल यादव बिग बॉस-13 में भी नजर आए थे। फिल्मों और स्टेज शो से कमाई करने वाले खेसारी को फ़िलहाल भोजपुरी इंडस्ट्री का सबसे महँगा अभिनेता कहा जाता है।

उसी महीने में खेसारी लाल यादव ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी मुलाकात की थी। अखिलेश यादव ने कहा था कि खेसारी लाल के साथ उन्होंने ’22 में बाइसकिल की बात’ की, अर्थात 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा की वापसी पर चर्चा हुई। खेसारी ने भी अखिलेश को ‘भैया’ और खुद को उनका ‘अनुज’ बताते हुए कहा था कि इस मुलाकात से उनका दिल गदगद हो गया। अखिलेश यादव को उन्होंने भविष्य के लिए बधाई भी दी थी।

खेसारी लाल यादव ने स्पष्ट लिखा था कि अखिलेश यादव के संकल्प को पूरा करने में वो उनके साथ हैं। सबसे दिलचस्प ये है कि अश्लील गाने बनाने वाले अभिनेता खेसारी लाल यादव ने अश्लील गानों पर ये भी कहा था कि कि जो लोग ऐसे गाने बजाते हैं, उन्हें पकड़कर पीटना चाहिए। यानी, गाने बनाने वाले को नहीं, बजाने वाले को। उनका मानना है कि लोग ऐसे गाने सुनना बंद कर देंगे तो खुद बनने बंद हो जाएँगे।

दिल्ली से 52 साल का बुजुर्ग गायब, बागपत में मिला सिर कटा शव: रियासत और जावेद गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बागपत में एक 52 वर्षीय व्यक्ति का सिर विहीन शव मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने दो लोगों रियासत खान (35) और जावेद (30) को गिरफ्तार किया है। मृतक शहजाद ने कर्ज लिया था, जिसे चुका नहीं पाने के कारण उसकी हत्या कर दी गई। बीते मंगलवार (13 जुलाई 2021) को उसके परिजनों ने दिल्ली के सीमापुरी थाने में मिसिंग रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तीन दिन बाद बागपत में उसका सिर विहीन शव मिला। उसके सिर का अब तक पता नहीं चल सका है।

इस मामले में जिला पुलिस, स्पेशल टीम के अलावा AATS की टीमों को तैनात किया गया था। शहजाद का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड्स खँगाले गए। इससे पता चला कि आखिरी बार वह सोमवार (12 जुलाई 2021) को अपने घर की ओर जाता हुआ दिखाई दिया था। वह दिल्ली के ओल्ड सीमापुरी का रहने वाला था। जाँच टीम को कुछ नामों का पता चला था, जिसके बाद छापा मारकर रियासत खान और जावेद को गिरफ्तार कर लिया गया। खान शहजाद का पड़ोसी है और एक-दूसरे को सालों से जानते थे। दोनों पेशे से ड्राइवर हैं।

पूछताछ के दौरान खान ने बताया है कि पिछले साल जब शहजाद बेरोजगार था तो उसने उसे 25,000 रुपए का कर्ज दिया था। खान ने कहा कि जब उसने शहजाद से अपने पैसे माँगे तो उसने न केवल गालियाँ दीं, बल्कि परिवार को भी चोट पहुँचाने की धमकी दी। उसकी इन्हीं हरकतों से परेशान होकर खान ने उससे बदला लेने की ठानी। पुलिस के मुताबिक आरोपितों ने उसकी हत्या कर उसके शव को मुरादनगर में एक नहर के पास फेंक दिया था।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक शाहदरा के डीसीपी R सथियासुंदरम ने बताया, “जानकारी मिलने के बाद शव के बारे में पास के थानों को सूचित किया गया और हमने शहजाद के परिजनों को इसकी जानकारी दी। उन्होंने कपड़ों और जूते की शिनाख्त कर उसके शव की पहचान की।”

केस में नया एंगल

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक शहजाद की हत्या उसके बेटे आसिफ की लव मैरिज के चलते की गई। इसमें बताया गया है कि लड़की के परिजन निकाह से खुश नहीं थे। पहले भी शहजाद की हत्या करने की कोशिश की गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार सोमवार (12 जुलाई 2021) को खान ने शहजाद को काम का दिलाने का वादा कर आम खरीदने के लिए बागपत चलने के लिए कहा था। खान ने ही जावेद को भी फोन किया और दोनों को बागपत ले गया। रिपोर्ट के मुताबिक अनुसार, पुलिस ने कहा है कि खान ने अपने भतीजे नदीम को भी फोन किया था, जिसने उन लोगों के लिए शराब खरीदा था और शहजाद को भी उसे दिया गया था।

इसके बाद आरोपितों के ग्रुप बागपत में खेकरा स्थित एक खेत में गया, जहाँ सभी ने धारदार हथियार से शहजाद की गर्दन और उसके पेट पर हमला कर दिया। कथित तौर पर आरोपित वारदात के दौरान नशे में थे। उन्होंने शहजाद का सिर काटने के बाद उसे मुरादनगर की नहर में फेंक दिया।

संसद में बोले PM मोदी- दलितों और आदिवासियों के मंत्री बनने से कुछ लोग खुश नहीं, बाहर बताया ‘बाहुबली’ बनने का फॉर्मूला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (19 जुलाई, 2021) को संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले मीडिया को सम्बोधित किया और फिर संसद में परिचयात्मक सम्बोधन दिया। इस दौरान उन्होंने मीडिया को सम्बोधित करते हुए कहा कि चूँकि कोरोना वैक्सीन बाहु (बाँह) में दी जाती है, इसीलिए इसे लेने वाले बाहुबली हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अब तक 40 करोड़ से भी अधिक लोग बाहुबली हो चुके हैं।

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि कैसे कोरोना आपदा ने पूरे विश्व को अपने लपेटे में ले लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार इससे जुड़े मुद्दों पर भी संसद में सार्थक चर्चा चाहती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्राथमिकता के आधार पर इस महामारी से जुड़े मुद्दे पर चर्चा चाहती है। उन्होंने इस पर सांसदों से सकारात्मक सलाह लेने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि इससे कोरोना के खिलाफ लड़ाई में नए तौर-तरीके सामने आएँगे और जो भूल हैं, उनमें सुधार किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर इस लड़ाई में सभी साथ मिल कर आगे बढ़ेंगे तो जीत संभव है। वहीं संसद में उन्होंने कहा, “मैं सोच रहा था कि सदन में आज उत्साह का माहौल होगा, क्योंकि बड़ी मात्रा में हमारी महिला सांसद मंत्री बनी हैं, बहुत बड़ी मात्रा में हमारे दलित भाई मंत्री बने हैं, हमारे आदिवासी साथी बड़ी मात्रा में मंत्री बने हैं। इस बात की सबको खुशी होनी चाहिए थी।” इसके बाद उन्होंने विपक्ष पर तंज कसा।

मॉनसून सत्र के दौरान पीएम मोदी का सम्बोधन

पीएम मोदी ने कहा, “किसान परिवारों से आने वाले, ग्रामीण परिवेश से आने वाले सांसद बड़ी मात्रा में मंत्री बने हैं, उनका स्वागत करने का आनंद होना चाहिए था। लेकिन, शायद देश की महिला, आदिवासी, ओबीसी, किसानों के बेटे मंत्री बने, ये बात कुछ लोगों को रास नहीं आती, इसलिए वो उनका परिचय तक नहीं होने देते।” इससे पहले मीडिया के माध्यम से पीएम मोदी ने कहा था कि वो वो सभी सांसदों और सभी दलों से आग्रह करना चाहते हैं कि वे सदन के अंदर सबसे कठिन और तीखे सवाल पूछें, लेकिन सरकार को अनुशासित माहौल में जवाब भी देने दें।

दरअसल, संसद सत्र शुरू होते ही हुए विपक्ष के हंगामे पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये बातें कहीं। विपक्ष जासूसी कांड, महंगाई और अन्य मुद्दों को लेकर हंगामा मचा रहा था। इसी दौरान पीएम मोदी अपने नव-नियुक्त मंत्रियों का परिचय दे रहे थे। लेकिन, विपक्ष के हंगामे के कारण उन्हें बीच में ही रुकना पड़ा। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से कहा कि ये परंपरा ठीक नहीं है, मंत्रियों का परिचय होने देना चाहिए।

₹700 करोड़ का निवेश, 2 हजार+ लोगों को रोजगार: आदित्य बिड़ला ग्रुप खोलेगा गोरखपुर में पेंट बनाने की औद्योगिक इकाइयाँ

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और कामकाज के मोर्चे पर जो सकारात्मक बदलाव आए हैं उसके कारण राज्य निवेश और कारोबारियों को लगातार आकर्षित करने में सफल रहा है। इसी कड़ी में आदित्य बिड़ला समूह (Aditya Birla Group) ने गोरखपुर में 700 करोड़ रुपए के निवेश का फैसला किया है।

सोमवार (जुलाई 19, 2021) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक अखबार की खबर को ट्विटर पर शेयर करते हुए इसकी जानकारी दी। इसके मुताबिक आदित्य बिड़ला ग्रुप को गोरखपुर में पेंट बनाने की औद्योगिक इकाइयाँ लगाने के लिए प्रशासन से हरी झंडी मिल गई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि समूह ने राज्य में निवेश करने की इच्छा 8 माह पहले ही दिखाई थी। हालाँकि, उस समय यह साफ नहीं था कि निवेश कितने का किया जाएगा, लेकिन पेंट की औद्योगिक इकाई लगाने का निर्णय लिया जा चुका था। कंपनी को प्लांट लगाने के लिए गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) की ओर से भीटी रावत में करीब 70 एकड़ जमीन का प्रस्ताव दिया गया है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने फरवरी में प्रस्तावित जमीन का निरीक्षण किया था। इस प्लांट के लगने से 2 हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

प्रशासन ने फैसला लिया है कि कंपनी से भूमि का विकास शुल्क नहीं लिया जाएगा। कंपनी अपने स्तर पर उसको विकसित करेगी। कंपनी को पेंट की इकाई लगाने के लिए पानी और बिजली की ज्यादा जरूरत होगी, इसे भी गीडा में आसानी से पूरा किया जा सकेगा।

इस संबंध में जिलाधिकारी के विजयेंद्र पाण्डियन का कहना है,

“गीडा क्षेत्र में आदित्य बिड़ला समूह की ओर से करीब 700 करोड़ रुपए का बड़ा निवेश किया जाएगा। इसके लिए गीडा की ओर से जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी के प्रतिनिधियों से बात हुई है। उन्हें हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस निवेश से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से कई लोगों को रोजगार मिल सकेगा।”

बता दें कि उत्तर प्रदेश के विकास के लिए योगी सरकार लगातार प्रयासरत है। उनकी कोशिश है कि राज्य को बिजनेस के अनुकूल बनाकर अधिक से अधिक निवेश लाया जाए। इसके लिए अधिकारियों को निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं और सबका ध्यान सिर्फ प्रदेश के विकास पर है।

अभी हाल में उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर प्रोजेक्ट के तहत तय किए गए 6 नोड्स में से सबसे पहले अलीगढ़ जिले ने जमीन आवंटित करने की प्रक्रिया पूरी की थी। अलीगढ़ में डिफेंस कॉरिडोर प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) ने रक्षा क्षेत्र से जुड़ी 19 कंपनियों को लगभग 55.4 हेक्टेयर से अधिक जमीन आवंटित की थी। ये कंपनियाँ 1245 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश करेंगी।

उल्लेखनीय है कि सरकार की इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली योजनाओं ने अब उत्तर प्रदेश को बिजनेस के अनुकूल बना दिया है। ‘बिजनेस करने में सहजता’ के लिहाज से राज्य दूसरे नंबर पर है। इसके अलावा योगी सरकार पिछले 4 साल में 4 लाख युवाओं को रोजगार भी प्रदान कर चुकी है। साथ ही साथ प्रदेश गन्ना उत्पादन, शौचालय निर्माण (2.61 करोड़), कोरोना वायरस टेस्टिंग और वैक्सीनेशन, राजमार्गों के निर्माण, नए मेडिकल कॉलेज में नई उपलब्धियाँ हासिल कर रहा है।