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चूना पत्थर बन गया संगमरमर और राजस्थान को हो गया ₹1000 करोड़ का नुकसान: गहलोत सरकार में खनन विभाग का कारनामा

राजस्थान में बढ़ते अपराध के कारण पहले से ही निशाने पर आई अशोक गहलोत की सरकार में अब खनन घोटाला सामने आया है। अंदेशा जताया गया है कि राज्य को इससे लगभग 1000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। दरअसल, लाइमस्टोन (चूना पत्थर) की माइंस को मार्बल की श्रेणी में डाल कर ‘RDSA माइनिंग’ को आवंटित कर दिया गया। बता दें कि लाइमस्टोन मेजर मिनरल की श्रेणी में आता है, जिसकी नीलामी केंद्र द्वारा तय नियमों के अनुसार होती है।

राजस्थान के खनन विभाग ने प्रतापगढ़ के पिपलखूँट तहसील के दाँता में 74.249 हेक्टेयर और केला-मेला में 10.4162 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैले लाइमस्टोन (सीमेंट बनाने में इसका उपयोग होता है) को मार्बल (संगमरमर) दिखा दिया। मार्बल माइनर मिनरल में आता है, इसीलिए इसकी नीलामी में राज्य की ही भूमिका होती है। इस तरह श्रेणी बदल कर दोनों ब्लॉक का आवंटन किया गया। खनन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल और खान निदेशक केबी पांड्या इस मामले में निशाने पर हैं।

1983-85 के बीच खनन विभाग ने एक सर्वे कराया था, जिसमें दोनों ब्लॉक में लाइमस्टोन होने की बात पता चली थी। 24 जुलाई, 2019 को एक समिति ने अपनी रिपोर्ट में खनिज के उपयोग के हिसाब से इसे लाइमस्टोन की श्रेणी में रखने की सलाह दी। इसके 9 महीने बाद ही 27 फरवरी, 2020 को एक दो सदस्यीय समिति ने इसे मार्बल बताया। फिर ये ब्लॉक मार्बल के लिए आवंटित कर दिए गए।

‘दैनिक भास्कर’ ने अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में इसका खुलासा करते हुए कहा है कि सूत्रों के अनुसार, मार्बल के नाम पर खान का आवंटन करके इसका उपयोग लाइमस्टोन में लिया जाएगा। निकलने वाले मिनरल का उपयोग सीमेंट के लिए किया जाएगा, ये शर्त नहीं जोड़ी गई है। आरोप है कि ऐसा कर के एक कंपनी को फायदा पहुँचाया गया है। अधिकारियों का अपने बचाव में कहना है कि मार्बल में माइंस का आवंटन करने से 70% तक रिकवरी होगी, जिससे अधिक राॅयल्टी प्राप्त होगी।

राजस्थान में ‘माइनिंग घोटाला’ को लेकर ‘दैनिक भास्कर’ के जयपुर संस्करण में प्रकाशित विस्तृत खबर (साभार)

लेकिन, जिस राजस्थान में मार्बल माइंस से 25-30% की ही रिकवरी होती थी है, वहाँ इस तरह एक आँकड़ा देना संदेहास्पद है। नियम कहता है कि जिस खनिज के लिए नीलामी की गई है, उसकी जगह अगर दूसरा खनिज निकलता है तो माइंस को उसी खनिज की श्रेणी में रखा जाएगा, जो निकला है। अधिकारी इसे पारदर्शी और नियमानुसार की गई प्रक्रिया बता रहे हैं। वो घोटाले से इनकार कर रहे हैं।

उधर ये भी खबर आई है कि सत्ताधारी कॉन्ग्रेस के विधायक परसराम मोरदिया के बेटे राकेश मोरदिया और उनकी कंपनी एमजीएम स्टोन एग्रीगेट प्राइवेट लिमिटेड से 273 करोड़ रुपए की वसूली करने के लिए अब खनन विभाग हाईकोर्ट में अपील नहीं करेगा। मतलब, सरकार को इतनी ही रकम का नुकसान उठाना पड़ेगा। विभाग का कहना है कि अटॉर्नी जनरल की सलाह के बाद ये फैसला लिया गया है।

मुस्लिम युवाओं का WhatsApp ग्रुप ‘मस्ती’: पोर्न Video ‘जय भोलेनाथ’ ऑडियो और टेक्स्ट के साथ

उत्तर प्रदेश के फर्रूखाबाद जिले में मुस्लिम युवकों के एक व्हाट्सएप ग्रुप में हिंदू देवताओं का नाम लेकर आपत्तिजनक वीडियो पोस्ट करने का मामला सामने आया है। ग्रुप में आरोपित युवक पोर्न क्लिप सर्कुलेट कर रहे हैं और उसके साथ ‘जय भोलेनाथ’ लिख रहे हैं।

स्वराज्य समाचार की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा के अनुसार, फर्रूखाबाद के कुछ मुस्लिम युवक इस व्हाट्सएप ग्रुप को चला रहे हैं। ‘मस्ती’ नाम से बनाए गए इस ग्रुप में वॉयसओवर और टेक्स्ट के साथ ‘जय भोलेनाथ, जय भोलेनाथ’ के साथ ‘पोर्न क्लिप’ पोस्ट की जा रही है।

हाल ही में यह अश्लील वीडियो हिंदू संगठनों तक पहुँचा, जिसके बाद उन्होंने इस मामले में व्हाट्सएप ग्रुप चलाने वाले एडमिन के खिलाफ फतेहगढ़ थाने में केस दर्ज कराया। पत्रकार शर्मा के ट्वीट के मुताबिक, पुलिस ने इस ग्रुप के सात लोगों के खिलाफ अश्लील वीडियो पोस्ट करने के मामले में धारा 153A-(दुश्मनी को बढ़ावा देने), IPC की धारा 120B और IT एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपित जुल्फिकार को नामजद किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जुल्फिकार ने ही कथित तौर पर इस ग्रुप में पोर्न क्लिप साझा की थी, जिसे बाद में दूसरे यूजर्स ने व्हाट्सएप पर सर्कुलेट किया। इस केस में जुल्फिकार के अलावा, तौसीफ, अदब, जावेद सन्नो, मोना, तस्लीम अंसारी और डब्बू खान के खिलाफ अश्लील क्लिप को अन्य माध्यमों पर सर्कुलेट करने का मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में फतेहपुर पुलिस ने ट्वीट कर बताया है कि सभी आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की कोशिशें की जा रही है।

इन सभी आरोपितों के खिलाफ खिलाफ हिंदू महासभा के राजेश मिश्रा, दीपक द्विवेदी जैसे कई सदस्यों ने केस दर्ज कराया था।

दलित नाबालिग को गोमांस खिला धर्मांतरण: शहजाद, उसके भाइयों और दोस्तों ने किया रेप, अम्मी-अब्बू ने भी दिया साथ

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में 15 साल की दलित किशोरी के साथ गैंगरेप, धर्मांतरण और गोमांस खिलाने का मामला सामने आया है। पीड़िता के 7 महीने की गर्भवती होने के बाद मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने मुख्य आरोपित शहजाद और उसके अम्मी-अब्बू को गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्टों के मुताबिक, मामला बागपत कोतवाली क्षेत्र का है। पीड़िता के परिजनों ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया है कि तीन साल पहले उन्होंने मुख्य आरोपित के साथ मिलकर टाइल्स का बिजनेस शुरू किया था। आरोपित पहले से ही शादीशुदा है और उसकी एक बेटी भी है। वाबजूद इसके उसने उनकी 15 वर्षीय नाबालिग बेटी को शादी का झाँसा देकर प्रेम जाल में फँसा लिया। कई बार शहजाद ने उसका रेप किया। शहजाद के दोस्तों जन्नत और समीर ने भी डरा-धमकाकर कई बार रेप किया।

इस दौरान पीड़िता गर्भवती हो गई, लेकिन शहजाद ने उससे शादी नहीं की। आरोपितों ने उसका गर्भपात कराने की कोशिश की। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। इस बीच शहजाद ने शादी करने के नाम पर पीड़िता को 6 जुलाई 2021 को अपने घर में बंधक बना लिया। 8 जुलाई को शहजाद के भाई फरमान औऱ बिलाल भी उसके साथ रेप किया। 10 जुलाई को पीड़िता डरी-सहमी हालत में अपने घर पहुँची। 17 जुलाई को तबीयत खराब होने पर परिजन जब उसे डॉक्टर के पास ले जाने लगे तो उसने आपबीती बताई।

रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता ने बताया कि शहजाद उसके खाने में नींद की गोलियाँ डलवाता था। शादी के बहाने धर्मांतरण करवाया और जबरदस्ती गोवंश का मीट खिलाया गया। इसमें उसकी अम्मी गुलफ्सा और अब्बा हारुण ने भी साथ दिया। शहजाद समेत बिलाल, फरमान, समीर, हारून, गुलफ्सा और हारून के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। शहजाद, गुलफ्सा और हारून को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया। सभी आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर हिंदू जागरण मंच ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

बागपत पुलिस ने ट्वीट कर बताया है कि पीड़िता के परिजनों की तहरीर के आधार पर आरोपितों के खिलाफ आईपीसी के तहत रेप की धारा 376 DA, 328, 342, 120 B, 506 इसके अलावा 5G/6 पोक्सो एक्ट, उत्तर प्रदेश धर्मान्तरण कानून-2020 के सेक्सन 3/5 (1) के तहत व एसी/एसटी एक्ट की 3(2)5, 3(1)क के अंतर्गत केस दर्ज किया गया है। इस मामले के मुख्य आऱोपित शहजाद का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। कोतवाली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों ने उसका सैंपल ले लिया है, जिसे जाँच के लिए भेजा जाएगा।

इस बार महादलित नहीं कर रहे ‘आषाढ़ पूजा’, कारण ईसाई धर्मांतरण: ‘चमत्कार’ के सहारे 15 साल से चल रहा खेल

बिहार के गया से धर्मांतरण के कई मामले सामने आए थे। इन घटनाओं को लेकर आशंका जताई जा रही है कि इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह हो सकता है, जो इस तरह के कार्यों में लगा हो। ‘दैनिक भास्कर’ ने अपनी पड़ताल के बाद जानकारी दी है कि सिर्फ पिछले 2 वर्षों में ही जिले के लगभग आधा दर्जन गाँवों में धर्मांतरण हुआ है। ध्यान देने वाली बात ये भी है कि जिन लोगों पर धर्मांतरण कराने के आरोप लगे हैं, उनमें अधिकतर पहले हिन्दू हुआ करते थे।

हाल ही में गया के नैली पंचायत के बेलवादीह गाँव में 50 हिन्दू परिवारों द्वारा ईसाई मजहब अपनाए जाने की खबर आई थी। ये सभी महादलित समुदाय के लोग थे। इसी तरह 6 वर्ष पहले मानपुर प्रखंड के खंजाहापुर गाँव में 500 लोग हिन्दू से बौद्ध बन गए थे। टेकारी के केवड़ा, मुफ्फसिल के दोहारी, अतरी के टेकरा, बोधगया के अतिया और गया सदर के रामसागर टैंक इलाके में धर्म-परिवर्तन की घटनाएँ सामने आई हैं।

डोभी से लेकर बाराचट्‌टी तक, कई गाँवों में धर्मांतरण की ख़बरें सामने आती रहती हैं। इसके पीछे अंधविश्वास को कारण बताया जा रहा है। जहाँ इनमें से कुछ ने वापस हिन्दू धर्म में ‘घर-वापसी’ की, तो कई अब भी दूसरे मजहब में ही हैं। धर्मांतरण कराने वालों में कई स्थानीय होते हैं तो कई बाहर से आए होते हैं। इन्हें इनके काम की पगार भी मिलती है। सालों से इसके पीछे लगे गिरोह इसकी तैयारी करते हैं।

ये लोग एक साजिश के तहत गाँव में पहले किसी एक परिवार का धर्म-परिवर्तन कराते हैं। फिर उनकी सुधरी हुई आर्थिक स्थिति का उदाहरण देकर बाकियों को भी अपने मजहब में आने के लिए लालच देते हैं। दुबहर पंचायत के बेलवादीह गाँव में भी धर्मांतरण होता रहा है। किसी भी राजनीतिक दल ने इन इलाकों का दौरा कर के हिन्दुओं की स्थिति नहीं समझी। अब भाजपा, संघ और विहिप घर-वापसी कराने की कोशिश में है।

वहीं ‘ईटीवी भारत’ ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में बताया है कि गया की दलित बस्तियों में ईसाई धर्मांतरण का खील डेढ़ दशक से चल रहा है। किसी की तबीयत खराब हुई, पादरी ने पानी पिला कर ‘ठीक कर दिया’, फिर चमत्कार की बातें कर के धर्म बदलवा लिया। धर्मांतरित लोग विहिप कार्यकर्ताओं के समझाने के बावजूद उनसे बात तक करने के लिए तैयार नहीं हुए। धान रोपनी से पहले होने वाली ‘आषाढ़ पूजा’ को भी माझी समुदाय ने त्याग दिया है।

एक महिला ने बताया कि उसके ऊपर शैतान आया हुआ था, पादरी ने बोधगया ले जाकर प्रार्थना की तो शैतान भाग गया। इसके बाद उसने ईसाई मजहब अपना लिया। वो कहती हैं कि हिन्दू धर्म के गुनी-ओझा लोगों से शैतान नहीं भागा। एक अन्य महिला ने बताया कि उसका बीमार बेटा कहीं ठीक नहीं हो रहा था, लेकिन चर्च में पानी छींटने के बाद वो चंगा हो गया। तब उसने भी ईसाई मजहब स्वीकार कर लिया।

विहिप का कहना है कि सेवा-भाव से और बिना किसी जोर-जबरदस्ती के धर्मांतरित लोगों को हिन्दू धर्म के बारे में समझाया जाएगा। संगठन ने कहा कि सबसे पुराने धर्म को लेकर दुष्प्रचार कर के ये सब किया जा रहा है। साथ ही सरकार और प्रशासन से भी मदद माँगी गई है, ताकि इसके पीछे किन लोगों का हाथ है वो सामने आए। दुबहल गाँव में माहौल तनावपूर्ण भी हो गया था, जिसे शांत करने के लिए पुलिस को गश्त करनी पड़ी।

‘घटिया रिसर्च, तथ्यों से परे’: संसद के मॉनसून सत्र से पहले मीडिया गिरोह का ‘Pegasus’ प्रलाप, सरकार ने बताया दुर्भावनापूर्ण

कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने दुनिया की विभिन्न सरकारों पर इजरायली कंपनी ‘Pegasus’ के जरिए विरोधियों की जासूसी करने का आरोप लगाया है। भारत में ‘The Wire’ जैसे वामपंथी पोर्टल ने इसे ‘इनवेस्टिगेटिव आर्टिकल’ के रूप में पेश करते हुए दावा किया कि यहाँ भी कुछ जजों, पत्रकारों और विपक्षी नेताओं के फोन्स की जासूसी हो रही थी। भारत सरकार ने इन आरोपों को नकार दिया है।

सोमवार (19 जुलाई, 2021) से संसद का मॉनसून सत्र भी शुरू हो रहा है। जहाँ एक तरफ किसान संगठनों ने 200 प्रदर्शनकारियों को संसद के बाहर भेज कर विरोध की योजना बनाई है, ‘Pegasus’ मामले में तो कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) सांसद बिनोय बिस्वास ने ‘सस्पेंशन ऑफ बिजनेस का नोटिस भी दे दिया है। मॉनसून सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले ‘जासूसी’ वाले आरोप लगाए गए।

भारत सरकार ने इन आरोपों के जवाब में देश को एक तगड़ा लोकतंत्र बताते हुए कहा है कि वो हर एक नागरिक के प्राइवेसी के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने याद दिलाया कि किस तरह इसी उद्देश्य के लिए उसने ‘परसनल डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2019’ और आईटी एक्ट, 2021 को पेश किया। सरकार का कहना है कि नागरिकों की प्राइवेसी की सुरक्षा एवं सोशल मीडिया यूजर्स के सशक्तिकरण के लिए ऐसा किया गया।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अतिरिक्त सचिव राजेंद्र कुमार ने भारत सरकार की तरफ से इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि मूलभूत अधिकार के रूप में अभिव्यक्ति की आज़ादी के प्रति प्रतिबद्धता भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े गुणों में से एक है और हमने हमेशा अपने नागरिकों को खुली परिचर्चा का माहौल देने की कोशिश की है। साथ ही सरकार ने मीडिया के एक धड़े द्वारा लगाए गए आरोपों को तथ्यों से परे बताया।

सरकार ने कहा, “जो कहानी बनाई जा रही है, वो न सिर्फ तथ्यों से दूर है बल्कि एक पूर्व-कल्पित निष्कर्षों पर भी आधारित है। ऐसा लगता है कि जैसे ये जाँचकर्ता, अभियोजक और जूरी – इन तीनों का किरदार अदा करना चाहते हैं। सरकार के पास जो सवाल भेजे गए हैं, उन्हें देख कर लगता है कि इसके लिए काफी घटिया रिसर्च किया गया है और साथ ही ये भी बताता है कि सम्बंधित मीडिया संस्थानों द्वारा मेहनत नहीं की गई है।”

केंद्र ने स्पष्ट किया है कि जो सवाल उससे पूछे जा रहे हैं, उसके जवाब सार्वजनिक रूप से लंबे समय से उपलब्ध हैं। सरकार का कहना है कि पेगासस को लेकर पहले ही जवाब दिया जा चुका है और इस कंपनी के साथ भारत सरकार के कथित संबंधों की बात करना एक दुर्भावनापूर्ण आरोप है। बता दें कि संसद में MeitY ने कहा था कि कोई भी सरकारी एजेंसी किसी भी प्रकार की जासूसी में अनधिकृत रूप से प्रतिभागी नहीं है।

अगर किसी केंद्रीय एजेंसी को किसी के कॉल-टेक्स्ट वगैरह को इंटरसेप्ट करना है तो इसके लिए एक प्रोटोकॉल है, जिसके तहत राज्य व केंद्र सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति लेनी होती है। राष्ट्रीय हित में ही ऐसा किया जाता है और वरिष्ठ अधिकारी इसकी निगरानी करते हैं। कुछ खास पत्रकारों की कथित जासूसी पर सरकार ने कहा कि इसमें कोई सच्चाई नहीं है। इससे पहले भी सरकार पर पेगासस के जरिए व्हाट्सएप्प पर लोगों की जासूसी के आरोप लगे थे, जिसे सरकार और सुप्रीम कोर्ट में व्हाट्सएप्प ने भी नकार दिया था।

केंद्र सरकार ने कहा, “ताज़ा न्यूज़ रिपोर्ट भी अटकलों और अतिशयोक्तियों पर आधारित है। इसे भारतीय लोकतंत्र और इसकी संस्थाओं को बदनाम करने के लिए लिखा गया है। भारत में इस तरह के इंटरसेप्शन सार्वजनिक या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ही किए जाते हैं, जब कोई आपात स्थिति आ जाए। राज्य और केंद्र की एजेंसियाँ कानून का इस्तेमाल करते हुए इसके लिए निवेदन करती हैं। इसके लिए केंद्रीय गृह सचिव की अनुमति लेनी होती है।”

बता दें कि इंग्लैंड में ‘द गार्डियन’ और भारत में ‘द वायर’ जैसी संस्थाओं ने जिस लेख को प्रकाशित किया है, उसमें ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ के साथ मिल कर किए गए रिसर्च का हवाला दिया गया है। इसमें भारत के 40 पत्रकारों के अलावा नरेंद्र मोदी की सरकार में 2 मंत्रियों के फोन की जासूसी के भी आरोप लगाए गए। मीडिया संस्थान ने इसे ‘टारगेट सर्विलांस’ बताते हुए दावा किया है कि कई फोन्स की फॉरेंसिक जाँच के बाद ही वो ये निष्कर्ष पर पहुँचे हैं।

जहाँ नारी स्वरूप में पूजे जाते हैं हनुमान जी: रतनपुर का गिरिजाबंध मंदिर, 10000 साल पुराना इतिहास

त्रेताकाल में जितने अनूठे हनुमान जी थे, उतने अनूठे कलियुग में बने उनके मंदिर हैं। कहीं लेटे हुए हनुमान जी तो कहीं उल्टे हनुमान जी। कुछ मंदिरों में उनकी छोटी प्रतिमाएँ स्थापित हैं तो कहीं लगभग 100 फुट ऊँची। बजरंग बली का एक ऐसा ही मंदिर स्थित है छत्तीसगढ़ में जहाँ उनकी पूजा नारी स्वरूप में होती है। आइए जानते हैं, क्या कहानी है इस मंदिर की जहाँ स्थित है हनुमान जी की लगभग 10,000 साल पुरानी प्रतिमा।

इतिहास

छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहर बिलासपुर से 25 किमी दूर स्थित है रतनपुर। यहाँ स्थित है प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त और कलियुग के देव कहे जाने वाले अंजनीसुत का गिरिजाबंध हनुमान मंदिर। यह इस संसार का इकलौता मंदिर है जहाँ हनुमान जी स्त्री स्वरूप में पूजे जाते हैं। गिरिजाबंध हनुमान मंदिर में स्थापित हनुमान जी की नारी स्वरूप प्रतिमा के बारे में यह मान्यता है कि यह लगभग 10,000 साल पुरानी स्वयंभू प्रतिमा है। स्वयंभू का अर्थ होता है, स्वयं प्रकट हुई। हालाँकि हनुमान जी की यह प्रतिमा नारी स्वरूप में क्यों है, इसका कोई प्रमाणिक विवरण उपलब्ध नहीं है।

बताया जाता है बहुत समय पहले परम हनुमान भक्त राजा पृथ्वी देवजू रतनपुर में राज करते थे। राजा हमेशा ही हनुमान भक्ति में लीन रहते। एक बार की बात है, राजा देवजू को कुष्ठ रोग हो गया। बहुत इलाज कराने के बाद भी जब राजा का कुष्ठ रोग ठीक नहीं हुआ तब उनके जीवन में निराशा का भाव आने लगा। इसी दौरान एक दिन राजा देवजू के सपने में हनुमान जी आए और उनसे एक मंदिर बनवाने के लिए कहा। अपने आराध्य की बातें सुनकर राजा देवजू ने एक मंदिर का निर्माण करवाया।

मंदिर का निर्माण पूरा हो जाने के बाद एक बार फिर हनुमान जी राजा देवजू के सपने में आए और महामाया कुंड से अपनी प्रतिमा को निकालकर मंदिर में स्थापित करने के लिए आदेशित किया। जब राजा ने कुंड से हनुमान जी की प्रतिमा निकाली, तो सभी लोग दंग रह गए। हनुमान जी की वह प्रतिमा नारी स्वरूप में थी। ऐसी प्रतिमा न तो पहले कभी देखी गई थी और न ही हनुमान जी की ऐसी किसी प्रतिमा के बारे में पहले कभी कुछ सुना गया था। हनुमान जी का आशीर्वाद मानकर उनकी नारी स्वरूप प्रतिमा को मंदिर में स्थापित कर दिया गया। इसके बाद राजा का कुष्ठ रोग भी दूर हो गया।

कंधे पर श्रीराम-लक्ष्मण

हनुमान जी की यह नारी स्वरूप प्रतिमा दक्षिणमुखी है। दक्षिणमुखी हनुमान भक्तों के लिए परम पवित्र और पूज्य माने जाते हैं और उस पर भी उनकी नारी स्वरूप प्रतिमा, अपने आप में अद्वितीय है। इस प्रतिमा के बाएँ कंधे पर प्रभु श्रीराम और दाएँ कंधे पर अनुज लक्ष्मण विराजमान हैं। हनुमान जी के पैरों के नीचे 2 राक्षस भी हैं।

हनुमान जी की कृपा से न केवल राजा का रोग दूर हुआ, बल्कि रतनपुर के लोगों का भी कल्याण हुआ। गिरिजाबंध मंदिर के हनुमान जी अपने भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए जाने जाते हैं। राजा देवजू की भक्ति और हनुमान जी के आशीर्वाद का ही परिणाम है कि आज रतनपुर विश्व भर में अपने इस मंदिर के कारण प्रसिद्ध है।

वैसे तो गर्मी के दिनों में रतनपुर में तापमान ऊँचा रहता है लेकिन फिर भी स्थानीय भक्तगणों का आना-जाना लगा रहता है। सितंबर से लेकर मार्च-अप्रैल तक यहाँ देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आते रहते हैं। मंगलवार और शनिवार को गिरजाबंध हनुमान मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है। इसके अलावा हनुमान प्रकटोत्सव और श्रीरामनवमी यहाँ के प्रमुख त्यौहार हैं।

कैसे पहुँचे?

रतनपुर का सबसे नजदीकी हवाईअड्डा बिलासपुर का ही है। यहाँ से प्रयागराज, जबलपुर और दिल्ली के लिए उड़ानें उपलब्ध हैं। गिरिजाबंध हनुमान मंदिर से बिलासपुर हवाई अड्डे की दूरी लगभग 40 किमी है। इसके अलावा ट्रेन से भी बिलासपुर, छत्तीसगढ़ और देश के कई बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। रतनपुर के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर से बिलासपुर जंक्शन की दूरी लगभग 32 किमी है। इसके अलावा सड़क मार्ग से रतनपुर, बिलासपुर से भली-भाँति जुड़ा हुआ है। बिलासपुर के शहरी क्षेत्र से मंदिर की दूरी मात्र 20 किमी ही है और यहाँ से मंदिर के लिए सभी प्रकार के परिवहन के साधन उपलब्ध हैं।

लिबरलों ने ‘RSS’ को बताया तालिबान से प्रेरित: भड़के मुस्लिम कट्टरपंथी, लगाया आतंकी जिहादी समूह को बदनाम करने का आरोप

तालिबान के हाथों भारतीय फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की मौत के बाद भारत के तथाकथित लिबरल ने इस्लामिक आतंकी संगठन और देश के राष्ट्रवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बीच समानताएँ बतानी शुरू कर दीं। इसके लिए तरह-तरह के और हास्यास्पद तर्क गढ़े जा रहे हैं।

यहाँ उल्लेख करना आवश्यक है कि अपने जीवनकाल में मानवीय भावनाओं के प्रति असंवेदनशील रहने के कारण दानिश सिद्दीकी को मृत्यु के पश्चात भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। सिद्दीकी ने कोविड-19 के कारण मृत्यु को प्राप्त हुए लोगों की जलती चिताओं की तस्वीरें खींचने के बाद उन्हें सार्वजनिक कर न सिर्फ मृत शरीर का मजाक बनाया था, बल्कि फोटो स्टॉक एजेंसी पर उन्हें बिक्री के लिए रखकर मानवीय संवेदनाओं की तिलांजलि भी दे दी थी। अब पत्रकार रोहित सरदाना की मौत पर खुशी मनाने वाले भारत के लिबरल, ‘दक्षिणपंथी संघियों’ पर दानिश सिद्दीकी की छवि खराब करने का आरोप लगा रहे हैं। उसी कड़ी में उन्होंने तालिबान की तुलना आरएसएस से करना शुरू कर दिया है।

हालाँकि, इसी तरह की तुच्छ तुलना उनके मुस्लिम समकक्षों के लिए अस्वीकार्य थी। लिबरल द्वारा संघ को ‘उम्माह’ और ‘तालिबान’ से जोड़ता देख इस्लामिस्ट भौचक्के रह गए। तालिबान को बदनाम करता देख इस्लामिस्ट ट्विटर पर अपना आक्रोश व्यक्त करने लगे, क्योंकि तालिबान की आलोचना उनकी नजर में ईशनिंदा है। जब लिबरल जॉयदास ने आरोप लगाया कि तालिबान ‘दक्षिणपंथी नीचों’ से प्रेरित है, इससे दुखी होकर एक इस्लामिस्ट (@OpusOfAli) ने पूछ ही लिया, ”आखिर एक मुसलमान को ही हमेशा खलनायक क्यों बनाया जाता है?”

Opus of Ali के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

अगस्त 2019 से जम्मू-कश्मीर के लिए खून के आँसू बहाने वाले हनान ने कहा कि तालिबान की आरएसएस से तुलना करना गलत है। उन्होंने कहा, “यह बहुत मजेदार है, क्योंकि आरएसएस तालिबान से भी पुराना है। इसलिए तालिबान ही आरएसएस से कुछ सबक लेता, न कि इसके विपरीत। सबसे गंभीर बात है कि इस तरह की समानताएँ यह दिखाने के लिए की जाती हैं कि किसी भी ‘बुराई’ का मानक हमेशा एक मुस्लिम होगा।”

हनान के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

जब कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता श्रीवत्स ने अफगान तालिबान की तुलना ‘भारतीय तालिबान’ से करके लिबरल का ध्यान खींचना चाहा तो इस्लामिक आतंकवाद से सहानुभूति रखने वाले सरफी ने ट्वीट किया, “विडंबना यह है कि अफगानों ने अफगान तालिबान को वोट नहीं दिया। वे दुष्ट हैं, सोवियत संघ के खिलाफ अमेरिका द्वारा बनाए गए एक उपकरण हैं। आरएसएस मुख्यधारा में है और इसे महिमामंडित किया जाता है।”

सरफी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इस्लामिस्ट सिदरा खफा हो गईं और श्रीवत्स के बयान को तुरंत ठीक किया। उन्होंने कहा, “हिंदुत्व बहुसंख्यकवाद और वर्चस्व। जो है, उसे कहें कृपया।”

सिद्रा के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

ट्विटर अकाउंट ‘मुस्लिम’ ने दलील दी, “झूठी तुलना क्यों? ये हिंदुत्व आतंकवादी हैं जो आनन्दित हो रहा हैं। जैसा है वैसा ही कहो।”

मुस्लिम द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

एक अन्य इस्लामिस्ट रहमान ने लिखा, “आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी, गाँधी की 1948 में हत्या कर दी गई थी। तालिबान 1994 में उभरा था, शायद यह दूसरा तरीका है। हिंदू लिबरल को मुसलमान, तालिबान, सऊदी को लाए बिना आलोचना करना सीखना चाहिए।”

रहमान द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

‘लिबरल’ जॉयदास के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए इस्लामिस्ट (@Ahmed_Brilliant) ने दावा किया, “लेशन 101: मुसलमानों के साथ झूठी समानता दिखाकर अपने आप को साफ-सुथरा कैसे करें।”

(@Ahmed_Brilliant) के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

तलहा हुसैन नाम के एक यूजर ने आरोप लगाया कि प्रत्येक संघी एक उदार पिता से पैदा हुआ है। उस धारणा को ध्यान में रखते हुए उसने जॉयदास को फटकार लगाई और लिखा, “तालिबान ने आरडब्ल्यू (राइट विंग) को प्रेरित नहीं किया, तुम लोगों ने उन्हें बनाया.. चुप रहो।”

तल्हा हुसैन के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

@PrinceOfDhamp नाम के इस्लामिस्ट ने जोर देकर कहा कि वीर सावरकर ही थे, जिन्होंने तालिबान को कट्टरपंथी बनने के लिए प्रेरित किया। व्यंग्य के एक हताश प्रयास में उन्होंने लिखा, “तालिबान (1994) ने विज्ञान में भारी निवेश किया, टाइम मशीन बनाई सावरकर के पास वापस गई और फिर उनके विचारों को प्रभावित किया। सावरकर ने RW संगठन (1924) का गठन किया, जिसने आज के RW बेवकूफों को प्रेरित किया। ओह! अंतत: कड़ी जुड़ गई।”

@PrinceOfDhamp द्वारा किये गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

जैसा कि उपरोक्त ट्वीट्स से स्पष्ट है, भारत के इस्लामिस्ट आतंकवादी संगठन तालिबान की छवि खराब करने के कारण लिबरल समुदाय से नाराज हैं। आरएसएस और तालिबान के बीच एक झूठी समानता दिखाकर और दानिश सिद्दीकी की मौत में तालिबान की भूमिका को नकार के इस्लामिस्टों ने ‘दक्षिणपंथी /संघ/आरएसएस को ‘बड़ी बुराई’ के रूप में चित्रित करने की कोशिश की है। विचित्र समानताओं और मानवीकरण की सूक्ष्म कला के तहत आतंकवादी संगठनों के नया ब्रांड मेकओवर में मदद करने में इस्लामिस्ट सक्षम हैं।

यह बताना दिलचस्प है कि कई वामपंथी “लिबरल-सेक्युलर” पत्रकारों ने अपने शोक संदेश में तालिबान का उल्लेख किए बिना दानिश सिद्दीकी को श्रद्धांजलि दी थी। राना अय्यूब ने दानिश सिद्दीकी और उनके काम के बारे में बताया कि उन्हें फोटोग्राफी का कितना शौक था। उन्होंने एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें वह मृतक पत्रकार के बगल में बैठी नजर आ रही हैं। हालाँकि, उनके शोक संदेश का लहजा और ताना-बाना हैरान करने वाला था।

उससे ऐसा लग रहा था कि फोटो जर्नलिस्ट की मौत प्राकृतिक है और उनकी मौत में इस्लामिक आतंकवादियों की कोई भूमिका नहीं है। इसी तरह की रणनीति न्यूजलॉन्ड्री की मनीषा पांडे, स्तुति मिश्रा, आरफा खानम शेरवानी, योगेंद्र यादव और रवीश कुमार द्वारा अपनाई गई थी। यह मान लेना कोई बड़ी बात नहीं है कि शायद इस्लामवादियों का डर ही उन्हें साफ-साफ बोलने से रोक रहा था।

चीन के पहले Monkey B वायरस से संक्रमित पशु चिकित्सक की मौत: जानें ‘वुहान कोरोना’ से भी कितना है घातक

चीन के वुहान कोरोना वायरस के बाद अब बीजिंग में एक पशु चिकित्सक में मंकी बी वायरस के रूप में पहला मानव संक्रमण का मामला सामने आया था। अब जब इस खतरनाक वायरस से उनकी मौत हो गई है। तो यह दावा किया जा रहा है कि मरीज के करीबी लोग फिलहाल इस वायरस से सुरक्षित हैं, क्योंकि उनमें ये वायरस नहीं पाया गया है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 53 साल के पशु चिकित्सक, जो गैर-मानव प्राइमेट्स पर शोध करने वाली संस्था के लिए काम करते थे। उनमें मार्च की शुरुआत में दो मृत बंदरों को विच्छेदित करने के एक महीने बाद उल्टी के शुरुआती लक्षण दिखे थे। जिसका चीन सीडीसी वीकली इंग्लिश प्लेटफॉर्म ऑफ चाइनीज सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने शनिवार (17 जुलाई 2021) को खुलासा किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस वायरस बेहद घातक बताया जा रहा है। इससे संक्रमित लोगों में मृत्यु दर का दावा 70 से 80 प्रतिशत तक है। वहीं, शोधकर्ताओं ने अप्रैल 2021 में पशु चिकित्सक के Cerebrospinal Fluid को इकट्ठा किया था और उसे मंकी वायरस (BV) से पॉजिटिव पाया। हालाँकि, उनके करीबियों के सैंपल निगेटिव पाए गए।

बता दें कि यह वायरस सबसे पहले 1932 में सामने आया था यह सीधे संपर्क और शारीरिक स्राव के आदान-प्रदान के माध्यम से फैलता है।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना के फूफा का हत्यारा ​​बरेली से गिरफ्तार: मोहब्बत, शाहरुख, राशिद, आमिर के साथ की थी रेकी

पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना के फूफा के हत्यारे को करीब एक साल बाद रविवार (18 जुलाई 2021) को गिरफ्तार कर लिया गया। उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और पंजाब पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में आरोपित छज्जू उर्फ छैमार को उसके गाँव से पकड़ा गया है। बताया जा रहा है कि आरोपित गिरफ्तारी से बचने के लिए बरेली जिले के बहेड़ी थाना क्षेत्र स्थित अपने गाँव पचपेड़ा में छुपकर रह रहा था।

छज्जू उर्फ छैमार ने पूछताछ में एसटीएफ को बताया कि वो और उसके दोस्त मोहब्बत, शाहरुख, राशिद, आमिर, तीन महिलाओं के साथ शाहपुर कौड़ी पंजाब में चादर व फूल बेचा करते थे। इन लोगों के पास एक टेंपो भी था, जिससे वे आस-पास के इलाकों में महिलाओं के साथ घूमकर रैकी भी करते थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित ने एसटीएफ को बताया कि महिलाएँ वारदात वाले दिन फूल बेचने के बहाने सुरेश रैना के फूफा अशोक कुमार के घर में घुस गईं और सारी जानकारी जुटा ली। इसके बाद उन्होंने अपने गिरोह के सदस्यों को इस बारे में बताया। छज्जू ने आगे बताया कि रात में उनका गिरोह वारदात को अंजाम देकर घर में रखे जेवर और नकदी लूटकर भाग निकला। उसने बताया कि वारदात के बाद वो वहाँ से भागकर हैदराबाद चला गया था। कुछ दिन हैदराबाद में रहने के बाद वह वापस लौटकर बरेली स्थित अपने गाँव आकर रहने लगा था।

गौरतलब है कि पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना के फूफा अशोक कुमार के पठानकोट के फरियाल गाँव में स्थित मकान में 19/20 अगस्त 2020 की रात को घर में कुछ लुटेरे घुस गए थे। उस समय अशोक कुमार परिवार के साथ छत पर सो रहे थे। तभी लुटेरों ने उन लोगों पर तेजधार वाले हथियारों और राड से हमला कर दिया।

सब लोग गहरी नींद में थे, इसलिए उस समय कोई भी बचाव नहीं कर पाया। लुटेरों के हमले में अशोक कुमार (58) की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि पत्नी आशा देवी (55) बेटे कौशल कुमार (32) और अपिन कुमार (24) व उनकी माँ सत्या देवी (80) गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में उनके बेटे कौशल कुमार ने भी अस्पताल में दम तोड़ दिया था।

क्या कैडबरी चॉकलेट में होता है बीफ? जिलेटिन पाए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ा दावा, कंपनी ने बताया भ्रामक: फैक्ट चेक

सोशल मीडिया पर एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि कैडबरी चॉकलेट में बीफ होता है। एक वेबसाइट से लिया गया स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जमकर शेयर​ किया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि यदि किसी उत्पाद में जिलेटिन नामक घटक होता है, तो इसका मतलब है कि यह गोमांस का प्रयोग करके बनाया गया है।

कई लोगों ने इस स्क्रीनशॉट को यह दावा करने के लिए साझा किया कि भारत में बेचे जाने वाले कैडबरी उत्पादों में बीफ होता है। लेकिन कंपनी का कहना है कि यह पूरी तरह से भ्रामक है, क्योंकि ये उत्पाद भारत से संबंधित नहीं है। कंपनी ने बताया कि भारत में बेचे जाने वाले उसके उत्पादों में बीफ या किसी भी प्रकार के अन्य मांस का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

कई लोगों ने इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण के लिए कंपनी के आधिकारिक हैंडल को टैग भी किया। वहीं, कंपनी ने उन्हें जवाब देते हुए बताया कि उनके द्वारा साझा किया गया स्क्रीनशॉट भारत में निर्मित मोंडेलेज उत्पादों (Mondelez products) से संबंधित नहीं है। मोंडेलेज इंटरनेशनल अमेरिकी कंपनी है, जो अब ब्रिटिश कंपनी कैडबरी की मालिक है। कंपनी ने जोर देते हुए आगे कहा, ”चॉकलेट के रैपर पर हरे रंग का सर्कल दर्शाता है कि भारत में निर्मित और बेचे जाने वाले सभी उत्पाद 100% शाकाहारी हैं।”

कंपनी ने इस तरह के भ्रामक व झूठे दावे करने वाले ट्विटर यूजर्स को करारा जवाब दिया है। कंपनी ने लोगों से अपने उत्पादों को आगे साझा करने से पहले उनसे संबंधित तथ्यों को सत्यापित करने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि आप भली-भाँति जानते हैं कि इस तरह के नकारात्मक और भ्रामक पोस्ट हमारे सम्मानित और बड़े ब्रांड के प्रति उपभोक्ताओं का विश्वास ​कम कर सकते हैं।

हालाँकि, स्क्रीनशॉट वास्तव में कैडबरी वेबसाइट का ही है, लेकिन कंपनी सही कह रही है कि यह भारत में बेचे जाने वाले उत्पादों से संबंधित नहीं है। स्क्रीनशॉट में साइट का URL है, Cadbury.com.au है, जिसका अर्थ है कि यह कंपनी की ऑस्ट्रेलिया इकाई की वेबसाइट है। ध्यान दें कि .au ऑस्ट्रेलिया के लिए कंट्री कोड टॉप-लेवल डोमेन है।

वायरल मैसेज में शेयर किया गया वेबपेज वेबसाइट के हलाल सेक्शन में उपलब्ध है, जिसका मतलब है कि यह ऑस्ट्रेलिया में बिकने वाले उत्पादों की बात कर रहा है। दरअसल, यह पहली बार नहीं है, जब कन्फेक्शनरी कंपनी (confectionary company) को अपने उत्पादों के बारे में इस तरह की भ्रामक अफवाहों के लिए जवाब देना पड़ा है। लोग समय-समय पर आरोप लगाते रहते हैं कि इसकी लोकप्रिय चॉकलेट में बीफ होता है। हालाँकि, इसके उत्पादों की पैकेजिंग में एक हरे रंग का बिंदु होता है, जिसका अर्थ है कि इसमें किसी भी मांसाहारी चीज का उपयोग नहीं किया गया है। वे इसे बनाने में केवल पौधों और दूध से बनी सामग्री का ही इस्तेमाल करते हैं।

उदाहरण के लिए, डेयरी मिल्क को और अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए चीनी के अलावा इसमें दूध के ठोस रूप जैसे कोको बटर, पायसीकारी (Emulsifiers) को भी मिलाया गया है। इसलिए यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि भारत में कैडबरी के उत्पादों में जिलेटिन शामिल नहीं किया गया है। वायरल खबर में ऑस्ट्रेलिया में कैडबरी की जानकारी का इस्तेमाल कर यह दावा किया गया कि यह भारत से संबंधित है।