Home Blog Page 3586

हिन्दू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से किया जाए मुक्त, धर्मांतरण पर बने केंद्रीय कानून: विहिप की राष्ट्रव्यापी माँग

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कहा है कि ईसाई मिशनरियों और आलिम, इमाम, मौलवियों द्वारा किए जा रहे अवैध धर्मांतरण के अभिशाप से देश को मुक्ति दिलाने के लिए कठोर केंद्रीय कानून की आवश्यकता है। साथ ही, विहिप ने भारत के मंदिरों और हिंदू संस्थाओं को भी सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की माँग की है। विहिप का कहना है कि भारत के मंदिर हिंदुओं के सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक शक्ति के केंद्र हैं। इन केंद्रों से विभिन्न तरह की सामाजिक गतिविधियाँ चलाई जाती हैं, जो आगे बढ़ने में समाज की मदद करती हैं।

हरियाणा के फरीदाबाद में आयोजित विहिप की केंद्रीय प्रन्यासी मंडल एवं प्रबंध समिति की दो दिवसीय बैठक 17 और 18 जुलाई को आयोजित की गई थी। बैठक में इन दोनों मुद्दों पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया गया। विहिप का कहना है कि इस समय देश के 11 राज्यों में अवैध धर्मांतरण के खिलाफ कानून हैं, लेकिन यह समस्या देशव्यापी है, इसलिए कानून भी पूरे देश में लागू होने वाला होना चाहिए, ताकि धर्मांतरण के षडयंत्र को कुचला जा सके।

विहिप का कहना है कि लोनी कांड के जाँच के दौरान हुए धर्मांतरण रैकेट के खुलासे से पूरा देश चिंतित है। लालच देने से लेकर लव जिहाद जैसे घिनौने रूप का इस्तेमाल कर षडयंत्र को सफल बनाने की कोशिश हो रही है। वहीं, ईसाई मिशनरियों के षडयंत्रों में भी तेजी आई है। विहिप ने कहा कि धर्मांतरण के जरिए अपनी जनसंख्या बढ़ाकर न सिर्फ साम्राज्यवादी लक्ष्यों को पाने की कोशिश की जा रही है, बल्कि आतंकी घटनाओं के माध्यम से देश की सुरक्षा को भी दाँव पर लगाया जा रहा है।

विहिप ने दावा किया कि संविधान सभा के सदस्य, रोहिणी चौधरी और लोकनाथ मिश्र ने मौलवियों-मिशनरियों की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय कानून की आवश्यकता पर बल दिया था। सरदार पटेल ने भी जरूरत के अनुसार इस पर कदम उठाने की बात कही थी। धर्मांतरण पर बनी नियोगी कमीशन और वेणुगोपाल कमीशन ने इसके लिए कानून बनाने का सुझाव दिया था। जबकि, वर्ष 1995 के सुप्रसिद्ध सरला मुदगिल मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने भी एक केंद्रीय कानून बनाने के लिए कहा था।

हिंदू मंदिरों को लेकर विहिप का कहना है कि समृद्ध हिंदू मंदिरों को सरकार अधिग्रहित कर लेती है और उसके पैसे को मनमाने ढंग से खर्च करती है। विहिप ने आरोप लगाया कि इन मंदिरों की धन-संपदा को गैर-हिंदुओं के कामों में लगाया जाता है, जबकि इसका प्रयोग हिंदुओं के हित और भलाई के कार्यों में लगाया जाना चाहिए। विहिप का कहना है कि अंग्रेजों द्वारा बनाए गए मंदिर अधिग्रहण कानून के तहत आज भी मंदिरों को हड़पकर सरकारी नियंत्रण में लाया जा रहा है, जबकि चिदंबरम नटराज मंदिर मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि सरकारों को इन्हें अपने नियंत्रण से मुक्त करना चाहिए।

राकेश टिकैत अड़े, ठुकराई ज्वॉइंट पुलिस कमिश्नर की अपील, कहा- 200-350 आंदोलनकारी संसद के बाहर हर रोज करेंगे प्रदर्शन

गणतंत्र दिवस की घटना के बाद किसानों के संसद घेराव की घोषणा ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, आज दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने सिंघु बॉर्डर के पास किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। इस दौरान संसद भवन के पास प्रदर्शन टालने को लेकर काफी देर तक चर्चा की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने किसानों को दिल्ली में प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की भी पेशकश की, लेकिन किसान नेताओं ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने रविवार (18 जुलाई 2021) को बताया कि एसकेएम की नौ सदस्यीय समन्वय समिति ने दिल्ली पुलिस के ज्वॉइंट कमिश्नर से मुलाकात की। इस दौरान दिल्ली पुलिस को आश्वासन दिया गया कि आंदोलनारी किसानों की संसद को घेरने या जबरन घुसने की कोई योजना नहीं है।

उन्होंने कहा कि इसी बीच एसकेएम की टुकड़ियों में संसदीय विरोध की तैयारियाँ जोरों पर हैं। विभिन्न राज्यों के 200-350 किसान संसद के प्रत्येक कार्य दिवस पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके लिए SKM ने एक कमेटी भी बनाई है। बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस के साथ मिलने पहुँचे प्रतिनिधिमंडल में योगेंद्र यादव, दर्शन पाल सिंह, शिव कुमार कक्का समेत कई बड़े किसान नेता शामिल रहे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, किसान नेता शिव कुमार कक्का ने बैठक के बाद कहा, “दिल्ली पुलिस को हमने बताया है कि सिंघु बॉर्डर से हर दिन 200 लोग संसद तक मार्च करेंगे। इन सभी के पास पहचान का बैज होगा। हम सरकार को आंदोलनकारियों की सूची भी सौंपेंगे। हालाँकि, इस दौरान पुलिस ने हमसे आंदोलनकारियों की संख्या कम करने को कहा है, जिसके लिए हमने मना कर दिया।”

वहीं, केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों को लेकर किसान नेता राकेश टिकैत और नरेश टिकैत मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। दोनों किसान नेताओं ने बीते दिनों केंद्र के खिलाफ कई विवादित बयान दिए हैं। शुक्रवार (16 जुलाई 2021) को राकेश टिकैत ने कहा है, ”किसान तो वापस नहीं आएगा, किसान वहीं रहेगा। सरकार को बातचीत करनी चाहिए। 5 सितंबर को बड़ी पंचायत बुलाई है। आगे का जो भी निर्णय होगा, उसमें लेंगे।”

उन्होंने कहा, “सरकार के पास भी दो महीने का टाइम है। अपना फैसला सरकार भी कर ले, किसान भी कर लेंगे। जंग होगी देश में, ऐसा लग रहा है, युद्ध होगा।” टिकैत ने ये भी कहा कि किसान संसद भवन का रास्ता जानते हैं। 22 जुलाई से 200 लोग वहाँ जाएँगे। जब तक संसद चलेगी, तब तक हर रोज 200 लोग जाएँगे। अब जब भी किसान जाएगा, तो लाल किला नहीं संसद भवन ही जाएगा। डीटीसी बस से टिकट लेकर जाएगा।

दूसरी ओर किसान नेता और भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा, ”सरकार किसानों की समस्याओं का समाधान करे अन्यथा नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहे।”

गौरतलब है कि बीते दिनों राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार से कहा था कि किसान आंदोलन को या तो बातचीत से खत्म किया जाए या गोलियों से। टिकैत ने कहा था कि किसान बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन बिना किसी शर्त के।

ISI का तालिबान और पाकिस्तानी सेना को निर्देश, अफगानिस्तान में भारतीय संपत्तियों को बनाएँ निशाना: 10 हजार लड़ाके शामिल

पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) ने तालिबानी लड़ाकों और उनकी सहायता के लिए गए पाकिस्तानी सेना के जवानों को यह निर्देश दिया है कि अफगानिस्तान में भारतीय सद्भावना के तौर पर बनाए गए प्रतीक चिन्हों को निशाना बनाया जाए। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार खुफिया सूत्रों से यह सूचना मिली है कि लगभग 10,000 पाकिस्तानी, इस्लामिक आतंकी संगठन की सहायता करने के लिए अफगानिस्तान में घुस चुके हैं।

खुफिया सूत्रों के मुताबिक इन लड़ाकों और कट्टरपंथियों को स्पष्ट तौर पर यह निर्देश दिया गया है कि भारतीय संपत्तियों और भारत सरकार के द्वारा सद्भावना नीति के तहत किए गए निर्माण कार्यों को निशाना बनाया जाए। पिछले कुछ सालों में अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के उद्देश्य से भारत ने 3 बिलियन डॉलर (लगभग 22,383 करोड़ रुपए) का निवेश किया है। इनमें अफगानी संसद और डेलारम एवं जरंज सलमा डैम के बीच 218 किमी की रोड भी शामिल है।

हाल ही में एक भारतीय फोटो पत्रकार को अफगानी सेना के साथ संघर्ष के दौरान तालिबानी लड़ाकों के द्वारा मार दिया गया। अफगानी सरकार ने यह संकेत भी दिए थे कि आगामी भविष्य में उसके द्वारा भारत से सैन्य सहायता ली जा सकती है।

भारत में अफगानिस्तान के राजदूत फरीद मामुंडजे ने कहा कि अगर उन्हें तालिबान के साथ शांति वार्ता करने का मंच नहीं मिलता तो संभव है कि आगामी भविष्य में अफगानिस्तान, भारत से सैन्य सहायता की आशा कर सकता है। हालाँकि अफगानी राजदूत ने यह स्पष्ट किया है कि फिलहाल युद्धरत अफगानिस्तान भारतीय सैन्य बलों की सहायता नहीं ले रहा है।

मामुंडजे ने यह भी कहा कि हम अफगानिस्तान में सेना भेजने के लिए भारत की सहायता नहीं ले रहे हैं। वर्तमान स्थितियों में युद्ध लड़ने के लिए फिलहाल भारत की सहायता की आवश्यकता नहीं है। साथ ही मामुंडजे ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान की वायुसेना जरूर पायलट प्रशिक्षण जैसी जरूरतों के लिए भारत की सहायता ले सकती है और भारत भी एक ऐसी स्वाभाविक जगह है जहाँ से वह शामिल होना चाहेगा।

जिस NASA इंटर्न ने देवी-देवताओं की तस्वीर पर झेली हिंदू घृणा, उन्होंने पोस्ट लिख दिया करारा जवाब – ‘हिंदू धर्म से बेहद प्यार’

हाल ही में अमेरिका की बहुप्रतिष्ठित अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) द्वारा शेयर किए गए ट्वीट के बाद हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों के साथ नजर आईं इंटर्न ‘प्रतिमा रॉय’ को हिंदूफोबिक हमलों का सामना करना पड़ा। हालाँकि, इसके बावजूद उन्हें दुनिया भर के लोगों से व्यापक समर्थन और प्यार मिला है।

इस पूरे मामले को लेकर प्रतिमा रॉय ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट लिखा है। यहाँ वह अपनी आस्था पर अडिग रहीं और लोगों से मिल रहे समर्थन के लिए उनका धन्यवाद किया। उन्होंने कहा:

“अमेरिका में जन्मी एक भारतीय, जो मूल रूप से बंगाली है, वह अपने हिंदू धर्म से बेहद प्यार करती है। मैं हमेशा अपनी पृष्ठभूमि और संस्कृति को संरक्षित करने का प्रयास करती हूँ। भारतीय संस्कृति के प्रति मेरा प्यार मेरी तस्वीर में स्पष्ट दिखाई दे रहा है, जिसे पहली बार मार्च में नासा ब्लॉग पर साझा किया गया था।”

उन्होंने कहा कि हाल ही में नासा द्वारा उन प्रतिभागियों की फोटो ट्विटर पर शेयर की गई, जिन्हें उनके साथ इंटर्नशिप करने का मौका मिला। उस एक ट्वीट के बाद से उनकी हिन्दू धर्म के प्रति आस्था को लेकर काफी विवाद हुआ।

फोटो : LinkedIn

प्रतिमा रॉय ने आगे कहा, “मैं हर किसी की पृष्ठभूमि का सम्मान करती हूँ फिर चाहे वह नस्ल, जातीयता, लिंग या धार्मिक आस्था हो। मैं दूसरों को भी उनकी संस्कृति, पर्व का जश्न मनाने के लिए स्वतंत्र रहने के लिए प्रोत्साहित करती हूँ।” उन्होंने कहा कि हालाँकि, पिछले कुछ दिनों में उन्हें दुनिया भर के उन लोगों से सकारात्मक समर्थन मिला है, जिन्होंने उनके साथ-साथ नासा के उनके सहयोगियों के साथ ऑनलाइन जुड़ाव किया है।

गौरतलब है कि नासा द्वारा शेयर की गई तस्वीर में प्रतिमा रॉय की टेबल पर हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ और दीवार पर भी देवी-देवताओं की कुछ तस्वीरें लगी दिखाई दी थीं। हिंदू धर्मपरायणता की इस तरह की स्पष्ट अभिव्यक्ति ने कुछ बुद्धिजीवियों को खासा नाराज कर दिया, क्योंकि ये बुद्धिजीवी प्रतिमा द्वारा अपनी भक्ति दिखाए जाने पर खुश नहीं थे। इन्होंने प्रतिमा के ‘वैज्ञानिक स्वभाव’ पर भी प्रश्न उठाया था। हालाँकि, प्रतिमा ने अपने उसी वैज्ञानिक स्वभाव के कारण NASA के साथ इंटर्नशिप करने का मौका अर्जित किया है।

‘मुसलमान पैदा करते हैं 8 बच्चे, क्योंकि वो डरते हैं कि 2 को मार दिया जाएगा, 2 मरेगा…’ – मुनव्वर राना

विवादित उर्दू शायर मुनव्वर राना इन दिनों एक के बाद एक विवादित बयान देकर फिर से विवादों में हैं। उत्तर प्रदेश में CM योगी की वापसी पर प्रदेश छोड़ने वाले बयान के बाद अब उन्होंने एक और बड़ा बयान दिया है। मुनव्वर राना ने रविवार (18 जुलाई 2021) को कहा, ”मुसलमान 8 बच्चे इसलिए पैदा करते हैं, क्योंकि उनको डर है कि उनके 2 बच्चों को आतंकवादी बना के मार दिया जाएगा और दो कोरोना वायरस से मर जाएँगे। वहीं 4 अम्मी-अब्बू की लाश को कब्र तक पहुँचाने के लिए तो जिंदा रहेंगे।”

उन्होंने आगे कहा, ”गरीब लड़कों को आतंकवादी बताया जा रहा है और मामूली से प्रेशर कुकर को बम। मुझे डर सता रहा है कि मैं भी पाकिस्तान मुशायरे के लिए जाता रहता हूँ और पिछले दिनों प्रेशर कुकर खरीद कर लाया हूँ। तो कहीं एटीएस मुझे भी आतंकी और तालिबानी समझकर ना उठा ले जाएँ।”

गौरतलब है कि भाजपा ने आज (18 जुलाई) मुनव्वर राना को यूपी में योगी की वापसी पर प्रदेश छोड़ने वाले बयान पर करारा जवाब दिया है। भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा, ”मुनव्वर राना को इस देश ने, प्रदेश ने बड़ा मान-सम्मान दिया। सिर-माथे पर बिठाया, लेकिन अब वो लगातार सियासी टिप्पणियाँ करने का काम कर रहे हैं और सियासत में भी मजहबी रंग बोलने का काम कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, ”उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के दोबारा चुने जाने पर मुनव्वर राना जिस तरह से प्रदेश छोड़ने की बात कर रहे हैं। अब उन्हें दूसरे राज्य में मकान खोज लेना चाहिए, क्योंकि 2022 में योगी की वापसी होने जा रही है।”

बता दें कि बीते दिनों उत्तर प्रदेश एटीएस ने अलकायदा के दो आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इसको लेकर उन्होंने नवभारत टाइम्स से बात करते हुए इन आतंकियों पर कार्रवाई को चुनावी बताते हुए कहा था कि यह कुछ और नहीं है बल्कि चुनाव की तैयारी में टूथब्रश का इस्तेमाल है।

कल जलाया था, आज चलाया बुलडोजर, ₹163 करोड़ का ड्रग नष्ट: CM हिमंत बिस्वा सरमा ऐसे तोड़ रहे ड्रग माफियाओं की कमर

असम में ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का अनुसरण करते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने आज एक बार फिर अनूठे तरीके से ड्रग के खिलाफ कड़ा संदेश दिया है। शनिवार (17 जुलाई 2021) को उन्होंने भारी मात्रा में जब्त की गई ड्रग्स को सार्वजनिक तौर पर जलाया था और अब रविवार (18 जुलाई 2021) को उन्होंने जब्त की गई ड्रग्स पर बुलडोजर चलाया है।

पिछले दो-तीन दिनों से सीएम सरमा असम में लगातार ड्रग्स के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में शामिल हुए हैं। उन्होंने दिफू और गोलाघाट में सार्वजनिक रूप से बड़ी मात्रा में जब्त किए गए ड्रग्स को जलाया था। इसके बाद आज फिर सीएम सरमा ड्रग्स निस्तारण कार्यक्रम में शामिल हुए। इसी क्रम में नागाँव में उन्होंने ड्रग्स का निस्तारण करते हुए करोड़ों रुपए की जब्त की गई ड्रग्स पर खुद ही बुलडोजर चलाया।

इसके अलावा होजई में भी उन्होंने ड्रग्स को जलाया और अपने ट्वीट में इसके लिए लिखा ‘असम में ड्रग्स का अंतिम संस्कार’। सीएम सरमा ने अपने ट्वीट में बताया कि होजई में 353.62 ग्राम हेरोइन, 736.73 किग्रा गाँजा और 45,843 नशे की गोलियाँ नष्ट की गईं। उन्होंने अपने ट्वीट में यह भी जानकारी दी कि पिछले 2 दिनों में लगभग 163 करोड़ रुपए का ड्रग्स नष्ट किया गया है और पूर्वोत्तर से ड्रग्स की समस्या को खत्म करने के लिए वो मणिपुर और मिजोरम के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

ज्ञात हो कि शनिवार को भी सीएम सरमा ड्रग्स निस्तारण कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा था कि वो एक नशा मुक्त असम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इससे निपटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं और इसके लिए असम पुलिस को कड़ी कार्रवाई करने की पूर्ण स्वतंत्रता दी गई है, ताकि प्रदेश के युवाओं को इस संकट से बचाया जा सके। शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने 802 ग्राम हेरोइन, 1205 किलो गाँजा/भाँग, 3 किलो अफीम और 2,06,906 नशीली गोलियाँ सार्वजनिक तौर पर नष्ट की।

गौरतलब है कि राज्य में ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ का जिक्र करते हुए कहा था कि ‘उड़ता पंजाब’ की तरह, असम भी ‘उड़ता असम’ बनने की राह पर था। लेकिन असम पुलिस जिस तरह से अपना काम कर रही है और अवैध नशीले पदार्थों के खिलाफ जंग जारी रखे हुए है, हमें लगता है कि हम राज्य के कई युवाओं, परिवारों को इससे बचाने में सफल रहे हैं।

₹10 लाख का लालच देकर पढ़वाया कलमा, हिंदुओं से मिलने पर जान से मारने की धमकी: अरविन्द ने ‘घर वापसी’ की जताई इच्छा

उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला पश्चिम यूपी के मुजफ्फरनगर जिले के छपार का है। यहाँ 10 लाख रुपए का लालच और जान से मारने की धमकी देकर धर्म परिवर्तन कराने के मामले में पुलिस ने दो नामजद समेत 6 लोगों के खिलाफ धर्मांतरण की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।

एसपी सिटी अर्पित विजयवर्गीय ने ऑपइंडिया से बताया कि उन्होंने पीड़ित पक्ष अरविंद की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस मामले की छानबीन करने में जुट गई है। उन्होंने बताया कि छपार थाना क्षेत्र के बढ़ीवाला गाँव के रहने वाले अरविंद ने अपनी शिकायत में बताया कि वह खुड्डा गाँव में देशी उपचार करता है। उसकी दुकान पर खोजानगला गाँव के खालिक उर्फ भूरा और नदीम का आना-जाना लगा रहता था। इस दौरान मौका पाते ही आरोपित उन्‍हें धर्म परिवर्तन के लिए उकसाते थे।

अरविंद का कहना है कि इस्‍लाम मजहब अपनाने के लिए ये दोनों लगातार मुझ पर दबाव बनाते रहते थे। इसके लिए उन्होंने मुझे 10 लाख रुपए का लालच भी दिया। इतने पर भी नहीं मानने पर खालिक ने उसे विश्वास दिलाया कि वह और लोगों का भी धर्मांतरण करा चुका है, इसलिए कुछ नहीं होगा।

खालिक ने अरविंद की एक महिला से मुलाकात करवाकर उसके दस्तावेज भी दिखाए और कहा कि इसका धर्मांतरण भी उसी ने कराया है। धर्मांतरण के बाद खालिक ने उससे कोर्ट मैरिज कर ली। ऐसा करने पर दिल्ली के एक मौलाना से उसे इनाम भी दिया है।

अर्पित विजयवर्गीय ने बताया कि पीड़ित ने उन्हें बताया कि 12 अप्रैल 2021 को खालिक, नदीम एक मौलाना और महिला के साथ तीन अज्ञात लोगों को लेकर उनकी दुकान पर आए थे। इसके बाद कलमा पढ़ाकर उसका धर्म परिवर्तन करा दिया गया। साथ ही आरोपितों ने उसे धमकी दी है कि वह हिंदूओं से मिला तो उसे जान से मार देंगे। अरविंद ने पुन: हिंदू धर्म अपनाने की इच्‍छा जताई है।

बता दें कि इस पूरे प्रकरण में छपार थाने में आरोपितों के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म प्रतिषेध अध्यादेश, 2020 धारा 3 व 5 (1) और भारतीय दंड संहिता 1860, 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। वहीं, पुलिस आरोपितों की तलाश में जुट गई है।

‘साथ’ नहीं रहना हम दोनों के लिए फायदेमंद: रिश्ता टूटने पर Pak अभिनेत्री सोमी अली ने सलमान को कभी बताया था धोखेबाज

सलमान खान और पाकिस्तानी मूल की अभिनेत्री सोमी अली का रिश्ता किसी से नहीं छुपा है। सलमान खान और सोमी अली ने एक-दूसरे को आठ साल तक डेट किया। सोमी अली ने एक मीडिया हाउस से बातचीत में खुलासा किया था कि सलमान खान ने उन्हें धोखा दिया था और यही उनके अलग होने का कारण है। 

बता दें कि सोमी अली 16 साल की कम उम्र में बॉलीवुड में अपना करियर बनाने और साथ ही अपने क्रश सलमान खान से शादी करने की ख्वाहिश लेकर मुंबई आई थीं। सलमान खान को बॉयफ्रेंड के रूप में पाकर उनकी ख्वाहिश आंशिक रूप से पूरी भी हुई, लेकिन साल 1999 में दोनों के बीच रिश्ता खत्म होने के साथ ही उनकी ख्वाहिश अधूरी रह गई।

22 साल बाद सोमी ने सलमान को लेकर कही बड़ी बात 

सोमी अली वैसे तो सलमान खान को लेकर अपने दिल का हाल कई बार बयाँ कर चुकी हैं। उन्होने कई दफा इंटरव्यू में ये बताया है कि वह सलमान खान से कितनी मोहब्बत करती थीं। सलमान खान का नाम अब तक जितनी भी अभिनेत्रियों से जुड़ा है, उनमें से कुछ अभी भी उनके संपर्क में हैं। ऐसे में एक बार फिर सोमी अली ने एक मीडिया चैनल से खास बातचीत की और सलमान खान से अपने रिश्ते को लेकर बड़ी बात कही है।  

पाँच साल से सलमान से नहीं हुई कोई बात

एक मीडिया चैनल से खास बातचीत में सोमी अली ने अपनी निजी जिंदगी के साथ-साथ सलमान खान से उनके रिश्ते को लेकर बातचीत की। सोमी ने कहा, “मैं पिछले पाँच साल से सलमान के साथ संपर्क में नहीं हूँ। मेरा मानना है कि अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना अच्छा होता है। मैं अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुकी हूँ और मुझे लगता है कि सलमान भी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए हैं। मुझे नहीं पता 1999 में मेरे जाने के बाद उनकी जिंदगी में कितनी गर्लफ्रेंड बनी। बस मैं उन्हें शुभकामनाएँ देती हूँ।”

फिल्म बुलंद में किया था सलमान के साथ काम

सोमी अली और सलमान खान के रिश्ते की शुरुआत फिल्म ‘बुलंद’ के सेट से हुई थी। सोमी अली ने बातचीत में बताया कि सलमान ने इस फिल्म के साथ अपना होम प्रोडक्शन शुरू किया था और उस दौरान वो अपनी फिल्म ‘बुलंद’ के लिए अभिनेत्री की तलाश कर रहे थे। सोमी ने बताया कि उस फिल्म कि शूटिंग के लिए वो सलमान के साथ काठमांडू गई थी, लेकिन वह फिल्म बंद हो गई। उन्होंने बताया कि उस वक्त उनकी उम्र कम थी और वो फिल्म जगत में नई थीं। उन्होंने कहा, “हालाँकि मैं यही कहूँगी कि मेरे और सलमान के रिश्ते के लिए यह एक जरिया था।”

उनसे दूर रहना है मेरी सेहत के लिए अच्छा

सोमी अली ने कहा कि सलमान के साथ संपर्क में न रहना उनकी सेहत के लिए अच्छा है। उन्होने कहा, “मुझे पता है सलमान खान खुद के एनजीओ के लिए काम करते हैं और मुझे इस बात का गर्व है। लेकिन मनोवैज्ञानिक रूप से उनके साथ संपर्क में न रहना मेरे लिए अच्छा है। मुझे उनकी परवाह है और मैं ये जानकर खुश हूँ कि वह जिंदगी में एक अच्छी जगह पर हैं और बहुत खुश हैं।”

सोमी अली ने अब तक नहीं की शादी

सलमान खान से सच्चा प्यार करने वाली अभिनेत्री सोमी अली की उम्र 45 वर्ष है, लेकिन अब तक वो सिंगल हैं। सोमी ने एक कुछ साल पहले एक बातचीत में कहा था, “मैं इंडिया में शादी करना चाहती थी और चाहती थी कि मेरे पाँच बच्चे हों। लेकिन अब मेरी उम्र 40 है इसलिए मैं बच्चे पैदा नहीं करना चाहती। अगर मुझे कोई मेरे विचारों से मिलता-जुलता व्यक्ति मिला तो मैं उसके साथ एक नया रिश्ता शुरू जरूर करना चाहूँगी।”  

सलमान के लिए आई थी भारत

दरअसल, सोमी जब 16 साल की थीं तब उन्होंने फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ में सलमान खान को पहली बार देखा था। इस फिल्म को देखने के बाद ही सोमी ने सलमान खान से शादी करने के सपने सजा लिए थे। सोमी ने अपना बैग पैक कर लिया था और अपनी अम्मी से कहा था कि वह भारत जाएँगी और सलमान से शादी करेंगी। सोमी की अम्मी उनकी इन बातों को सुनकर नाराज हो गई थीं, लेकिन बाद में सोमी ने उन्हें मना लिया था। सोमी भारत आईं और उन्होंने यहाँ आकर कई मॉडलिंग असाइनमेंट्स और कुछ फिल्में साइन की और इसके बाद वह सलमान से मिलीं।

जामिया में दफनाया जाएगा दानिश सिद्दीकी का शव: एक नहीं, कई गोलियों से हुई मौत, दूतावास ने जारी किया डेथ सर्टिफिकेट

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के फोटोजर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की मौत एक नहीं, बल्कि कई गोलियों के लगने से हुई थी। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में स्थित भारतीय दूतावास ने इसकी पुष्टि की है। दानिश सिद्दीकी के शव को नई दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में दफनाया जाएगा। ‘पुलित्जर प्राइज’ विजेता फोटोजर्नलिस्ट की तालिबान ने हत्या कर दी थी, जिसके बाद ‘गिरोह विशेष’ के पत्रकारों ने दक्षिणपंथियों को भला-बुरा कहा था।

काबुल स्थित भारतीय दूतावास ने रविवार (18 जुलाई, 2021) दानिश सिद्दीकी का मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी करते समय जानकारी दी कि उन्हें कई गोलियाँ लगी थीं। दानिश सिद्दीकी ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की थी। काबुल की एयर इंडिया फ्लाइट से रविवार की शाम को उनका शव भारत पहुँचेगा। जामिया ने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए दफ़नाने की अनुमति दी है।

बता दें कि जामिया के कब्रिस्तान में अब तक इसके कर्मचारियों, उनके पार्टनर या फिर नाबालिग बच्चों के शवों को ही दफनाया जाता रहा है। इस कब्रिस्तान में जगह इन लोगों के शवों के लिए ही रिजर्व रहता है, लेकिन यूनिवर्सिटी ने मृतक के परिवार के आग्रह के बाद अपवाद के रूप में ये घोषणा की। यूनिवर्सिटी के PRO अहमद अज़ीम ने कहा कि कुलपति ने परिवार के आग्रह को स्वीकार कर लिया है।

दानिश सिद्दीकी के अब्बा मोहम्मद अख्तर सिद्दीकी ‘जामिया फैकल्टी ऑफ एजुकेशन’ में बतौर प्रोफेसर कार्यरत थे। वो जामिया नगर में ही रहते हैं। दानिश सिद्दीकी ने जामिया से अर्थशास्त्र में स्नातक और मासकॉम से पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री ली थी। कुलपति नजमा अख्तर ने मृतक के घर जाकर परिवार को सांत्वना भी दी। मंगलवार को जामिया में एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित होगी और दानिश सिद्दीकी की तस्वीरों का एक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।

काबुल में भारतीय दूतावास ने जारी किया दानिश सिद्दीकी का मृत्यु प्रमाण-पत्र

उनकी मौत के बाद एक सोशल मीडिया यूजर ने बताया था कि दानिश का वो प्रसिद्ध ट्वीट, जिसमें उन्होंने हिंदू मृतकों के अंतिम संस्कार की तस्वीरों को साझा किया था, अब वो ‘उपलब्ध नहीं’ है। जब भी कोई दानिश सिद्दीकी के उस ट्वीट में दी गई रिप्लाई को पढ़ने के लिए उस पर क्लिक करता है तो ट्विटर कहता है कि यह ट्वीट उपलब्ध नहीं है। भारत में कोविड -19 की दूसरी लहर के चरम के दौरान सिद्दीकी विवाद के केंद्र में थे, जब मीडिया में अंतिम संस्कार की चिता की संवेदनहीन तस्वीरें छपी थीं।

केरल में बकरीद पर लॉकडाउन में ढील, IMA ने कहा – ‘वापस लो’: मामले को SC में ले जाने की चेतावनी

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने कोरोना के मौजूदा हालातों के मद्देनजर एक प्रेस रिलीज जारी किया है। इसमें भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीसरी लहर का सामना करने के लिए की गई तैयारी के लिए शुक्रिया अदा किया है। साथ ही ऐसे समय में टीकाकरण के अलावा किसी भी तरह के सामूहिक समारोह से बचने का अनुरोध किया गया है। संगठन ने प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तावित यात्राओं के रद्द किए जाने का उल्लेख किया। सुप्रीम कोर्ट ने भी संभावित तीसरी लहर पर संज्ञान लेते हुए दिशा-निर्देश दिया।

प्रेस रिलीज में आगे कहा गया, “केरल और महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों को छोड़कर, जहाँ अभी भी सबसे अधिक मामले हैं, सरकार एवं आधुनिक चिकित्सा की समर्पित और प्रतिबद्ध सेवाओं की बदौलत आज हम पूरे देश में दूसरी लहर के खत्म होने की कगार पर हैं। आईएमए को यह देखकर दुख होता है कि बढ़ते मामलों के बीच, केरल सरकार ने बकरीद के धार्मिक आयोजनों के बहाने राज्य में लॉकडाउन में ढील देने आदेश जारी किया है। मेडिकल इमरजेंसी के इस समय में यह बेहद अनुचित है।”

आईएमए ने कहा, “जब जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और उत्तरांचल जैसे कई उत्तरी राज्यों ने पारंपरिक और लोकप्रिय तीर्थयात्राओं को सार्वजनिक सुरक्षा की भावना से बंद कर दिया है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केरल राज्य ने इस तरह का निर्णय लिया है। आईएमए देश के व्यापक हित में और मानवता की भलाई के लिए जिम्मेदारी की भावना के साथ, केरल राज्य सरकार से इस आदेश को तुरंत वापस लेने, कोविड के उचित व्यवहार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस लागू करने और अपने वैधानिक कर्तव्य से विचलित न होने का आग्रह / माँग करता है। अन्यथा आईएमए परोपकार की भावना की वजह से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने को विवश होगा।”

बता दें कि केरल सरकार ने बकरीद की वजह से 18, 19 और 20 जुलाई को लॉकडाउन में छूट दी है। 21 जुलाई को बकरीद है। ऐसे में त्योहार से जुड़ी खरीदारी के मद्देनजर प्रतिबंधों में ढील दी गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से दी गई जानकारी में कहा गया है कि ए, बी और सी कैटेगरी की जरूरी सामान वाली दुकानों के साथ ही कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और फैंसी ज्वैलरी की भी दुकानों को रात 8 बजे तक खोले जाने की अनुमति दी गई है।