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कितना बर्बर था औरंगजेब, कैसे मंदिरों को ध्वस्त कर रही थी मुगलिया फौज: प्रतापगढ़ के अष्टभुजा मंदिर में आज भी मौजूद हैं निशान

देश में कुछ ऐसे मंदिर हैं जहाँ खंडित मूर्तियाँ मंदिरों में स्थापित हैं। ऐसा नहीं है कि इन खंडित मूर्तियों की पूजा किसी परंपरा की वजह से होती है, बल्कि यह उस इस्लामिक कट्टरपंथ की निशानी है जिसे भारत ने सदियों तक झेला है। हमने आपको मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित गैवीनाथ मंदिर के बारे में बताया था जहाँ मुगल आक्रांता औरंगजेब ने शिवलिंग पर तलवार से प्रहार किया था, लेकिन उसे तोड़ने में असफल रहा था। इसके बाद से गैवीनाथ मंदिर में खंडित शिवलिंग की पूजा ही की जा रही है। ऐसा ही 900 साल पुराना अष्टभुजा मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के गोंडे गाँव में है, जहाँ विराजमान हैं बिना सिर वाली मूर्तियाँ और यहाँ भी मूर्तियों को खंडित करने वाला कोई और नहीं बल्कि औरंगजेब ही था।

इतिहास

लखनऊ से लगभग 160 किमी दूर प्रतापगढ़ के गोंडे गाँव में स्थित है अष्टभुजा धाम, जहाँ स्थापित है अष्टभुजा देवी की प्रतिमा। इस क्षेत्र का इतिहास रामायण और महाभारत काल के समय का है इसलिए यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि इस मंदिर और यहाँ स्थापित मूर्तियों की स्थापना किसने की थी। वर्तमान मंदिर के विषय में भी पुरातत्वविदों में मतभेद देखने को मिलता है। कुछ इसे 11वीं शताब्दी का बना हुआ मानते हैं और यह संभावना प्रकट करते हैं कि मंदिर का निर्माण सोमवंशी राजाओं ने करवाया होगा। यही तथ्य पुरातत्व विभाग के गजेटियर में दर्ज है। मंदिर की कुछ नक्काशी और शिल्पकलाएँ मध्य प्रदेश के खजुराहो स्थित प्राचीन मंदिरों से मिलती-जुलती है।

इतिहासकारों का एक वर्ग यह भी मानता है कि इस मंदिर का अस्तित्व सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान भी था। ऐसा इसलिए क्योंकि मंदिर की दीवारों के कई हिस्सों पर की गई नक्काशियाँ, सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान की जाने वाली नक्काशियों और मूर्ति की बनावट से मिलती-जुलती है। इसके अलावा मंदिर के मुख्य द्वार पर किसी विशेष लिपि में कुछ लिखा गया है। इतिहासकार इसे ब्राह्मी लिपि बताते हैं तो कुछ इसे उससे भी पुराना मानते हैं। इस तरह आज भी मंदिर के इतिहास के विषय में कोई पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है।

मस्जिद जैसा द्वार

यह उस समय की बात है जब मुगल आक्रांता अपनी इस्लामिक कट्टरपंथी विचारधारा के अहंकार में हिंदुओं के धर्म स्थलों को नष्ट कर रहे थे। एशियानेट न्यूज से चर्चा के दौरान अष्टभुजा धाम मंदिर के मुख्य पुजारी राम सजीवन गिरी ने बताया था कि इस क्षेत्र के मंदिरों को भी तोड़ने के लिए औरंगजेब की मुगल सेना आई हुई थी। मंदिर को बचाने के लिए तत्कालीन पुजारी ने एक उपाय सोचा। उन्होंने मंदिर के मुख्य द्वार और मार्ग का निर्माण इस प्रकार करवाया कि यह एक मस्जिद की तरह दिखाई दे। लगभग पूरी मुगल फौज मंदिर के सामने से गुजर गई, लेकिन अंत में एक की नजर मंदिर में लगे घंटे पर पड़ गई। इसके बाद औरंगजेब की फौज ने मंदिर के भीतर प्रवेश किया और प्रतिमाओं के सिर, धड़ से अलग कर दिए। तब से ही मंदिर में बिना सिर वाली मूर्तियों की पूजा की जाती है। सभी मूर्तियों के सिर मंदिर में ही रखे गए हैं।

मंदिर में देवी अष्टभुजा की एक अष्टधातु से निर्मित प्रतिमा स्थापित की गई थी, लेकिन लगभग 17 साल पहले वह मूर्ति भी चोरी हो गई थी। हालाँकि ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से यहाँ देवी अष्टभुजा की एक पत्थर की प्रतिमा स्थापित करवाई।

कैसे पहुँचे?

यह मंदिर प्रतापगढ़ में स्थित है जो यूपी की राजधानी लखनऊ से लगभग 160 किमी दूर है। गोंडे गाँव का नजदीकी हवाईअड्डा प्रयागराज में स्थित है जो यहाँ से लगभग 80 किमी दूरी पर है। इसके अलावा इस स्थान की अयोध्या से दूरी लगभग 100 किमी है, जहाँ आगामी समय में एक शानदार एयरपोर्ट का निर्माण किया जाना है। प्रतापगढ़ रेलमार्ग से भी कई बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। यहाँ मुख्य जंक्शन के अलावा चिबिला और भूपिया मऊ जैसे रेलवे स्टेशन हैं। इसके अलावा प्रतापगढ़ सड़क मार्ग से पहुँचना बहुत आसान है। प्रतापगढ़, राष्ट्रीय राजमार्ग 96 (प्रयागराज-अयोध्या के बीच), राष्ट्रीय राजमार्ग 31 (लखनऊ-वाराणसी के बीच) पर स्थित है। इसके अलावा यह उत्तर प्रदेश सरकार के महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे पर भी स्थित है।

शिव मंदिर में तोड़फोड़ करने वाले आरोपित जतिंदर सिंह को पंजाब पुलिस ने किया गिरफ्तार, हिन्दू संगठनों का दबाव आया काम

पंजाब के मलेरकोटला जिले के अहमदगढ़ के सरौद गाँव में एक शिव मंदिर में तोड़फोड़ के मामले में जतिंदर सिंह नाम के शख्स को गिरफ्तार किया गया है। 9 और 10 जुलाई की रात को मंदिर में शिवलिंग और अन्य मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग को लेकर हिंदू समुदाय ने मंदिर के बाहर भूख हड़ताल की थी।

पुलिस ने प्रेस रिलीज में कहा, “10.07.21 को सरौद गाँव के सरपंच गुरबचन सिंह ने पीएस सदर अहमदगढ़ के पुलिस अधिकारियों को सूचित किया कि मलेरकोटला रोड पर गाँव सरौद के बाहरी इलाके में एक शिव मंदिर स्थित है, जिसे वर्ष 1972 में पंडित श्री राधा कृष्ण द्वारा बनाया गया था और उनका परिवार कई पीढ़ियों से इस मंदिर की देखभाल कर रहा है। आज सुबह करीब 6 बजे पुजारी टेक चंद मंदिर परिसर में पहुँचे तो उन्होंने देखा कि शिवलिंग और नंदी की मूर्तियाँ क्षतिग्रस्त हालत में हैं, जो किसी अज्ञात असामाजिक तत्वों की करतूत लगती है। इससे धार्मिक लोगों को भावनाओं को ठेस पहुँची है। इसलिए, इस संबंध में दिनांक 10-7-2021 को सदर अहमदगढ़ थाने में आईपीसी की धारा 295 ए, 34 के तहत एफआईआर संख्या 75 दर्ज की गई है।”

पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज

प्रेस नोट में आगे कहा गया है, “उपरोक्त मामले की जाँच के संबंध में श्रीमती कंवरदीप कौर, आईपीएस, एसएसपी मलेरकोटला, श्री हरमीत सिंह हुंदल, पीपीएस एसपी (डी) मलेरकोटला के अलावा श्री अमनदीप सिंह बरार, पीपीएस, एसपी मलेरकोटला, श्री संदीप कुमार वढेरा, पीपीएस, डीएसपी अहमदगढ़ के मार्गदर्शन में प्रभावी देखरेख में बड़ी सफलता मिली।”

प्रेस नोट में आगे लिखा है, “एसएचओ पीएस सदर अहमदगढ़ एसआई हरमेश सिंह की पुलिस को बड़ी सफलता तब मिली जब उन्होंने आरोपित जतिंदर सिंह उर्फ ज्योति पुत्र दमतर सिंह निवासी गाँव मौलादुध, पीएस मलौद के पास खानपुर साइड से गिरफ्तार करने में सफल रहे। आरोपित जतिंदर सिंह उर्फ ज्योति को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर माँगा जा रहा है। मामले में आगे की जाँच जारी है।”

आरोपित के खिलाफ कई मामले पहले से ही दर्ज हैं। ये मामले निम्नलिखित हैं।

1. एफआईआर संख्या 145 दिनांक 20.11.2008 धारा 457, 380 आईपीसी थाना मलेरकोटला

2. एफआईआर संख्या 53 दिनांक 14.06.2009 धारा 457, 380 आईपीसी थाना अमरगढ़

3. एफआईआर सं. 57 दिनांक 14.06.2009 यू/एस 392, 506, 34 आईपीसी पीएस अमरगढ़।

ऑपइंडिया ने एसएचओ पीएस सदर अहमदगढ़ एसआई हरमेश सिंह से इस बारे में बात की, जिन्होंने 10 जुलाई की इस घटना का खुलासा किया था। उन्होंने कहा कि हमने आरोपित जतिंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ पहले से ही कई एफआईआर दर्ज हैं। मामले की जाँच जारी है।

बता दें कि ऑपइंडिया से बात करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मलेरकोटला के जिलाध्यक्ष अमन थापर ने कहा था कि एक अज्ञात व्यक्ति ने मंदिर में भगवान नंदी की मूर्ति को तोड़ा और मंदिर में तोड़फोड़ की। उन्होंने कहा, “प्रशासन ने मंदिर परिसर को बंद कर दिया है। हम माँग करते हैं कि पुलिस मामले में त्वरित कार्रवाई करे और दोषियों को गिरफ्तार करे।” थापर ने कहा था कि यह हमला समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करने का एक प्रयास था। वहीं, बजरंग दल संगरूर के धर्म प्रचारक विजय ढोलेवाल ने कहा था कि हिंदू पूजा स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है।

‘किसानों के ट्रैक्टर जानते हैं संसद का रास्ता’: राकेश टिकैत ने दी धमकी, पटियाला में प्रदर्शनकारियों ने किया BJP नेता पर हमला

कृषि सुधार कानूनों के मुद्दे पर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत अब धमकी देने पर उतारू हो गए हैं। टिकैत ने सरकार को धमकाया है कि अगर इस बार कानून रद्द नहीं किया गया तो किसानों के ट्रैक्टर लाल किले के अलावा संसद का भी रास्ता जानते हैं। इसके अलावा पंजाब के पटियाला में किसानों ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर हमला कर दिया। भाजपा नेताओं ने पुलिस के इशारे पर किसानों के द्वारा मारपीट करने का आरोप लगाया है।

कुंडली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन पर पहुँचने के बाद टिकैत ने कहा कि किसान संगठन सरकार के साथ बातचीत को हमेशा तैयार रहते हैं लेकिन सरकार की शर्तों पर बातचीत नहीं होगी। टिकैत ने सरकार को सितंबर तक का समय देते हुए धमकी भरे अंदाज में कहा कि सरकार किसानों की बात मानकर कृषि कानूनों को रद्द करे और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाए अन्यथा इस बार संघर्ष और भी बड़ा होगा। इसके अलावा टिकैत ने यह भी कहा कि किसानों के ट्रैक्टर अगर लाल किले का रास्ता जानते हैं तो संसद का भी रास्ता उन्हें पता है।

ज्ञात हो कि इसी साल 26 जनवरी को किसानों का आंदोलन उग्र हो गया था और प्रदर्शनकारी तेज रफ्तार में ट्रैक्टर लेकर लाल किले तक पहुँच गए थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों की ओर से दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में तोड़फोड़ भी की गई थी। इतना ही नहीं प्रदर्शनकारियों ने लालकिले पर दूसरा झंडा भी फहरा दिया था। प्रदर्शनकारी किसानों ने लाल किले के फाटक पर रस्सियाँ बाँधकर इसे गिराने की कोशिश भी की थी। इसके अलावा सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के साथ कुछ किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा मारपीट और हाथापाई के वीडियो भी सामने आए थे।

वहीं दूसरी ओर पंजाब के पटियाला जिले राजपुरा से किसानों द्वारा कथित तौर पर भाजपा नेताओं के साथ मारपीट का मामला सामने आया। प्रदर्शनकारी किसानों के द्वारा भाजपा नेता भूपेश अग्रवाल और अन्य नेताओं के साथ मारपीट की गई है।

अग्रवाल ने डीएसपी तिवाना पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हीं के कहने पर 500 किसानों के द्वारा उनके साथ मारपीट की गई है। अग्रवाल ने बताया कि तिवाना ने उन्हें जानबूझकर दूसरी तरफ भेज दिया था जहाँ उनके साथ कोई पुलिस बल नहीं था। अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने कई बार एसएसपी को फोन करने की कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। हालाँकि डीएसपी जेएस तिवाना ने भाजपा नेता के आरोपों को नकारते हुए कहा कि उनके सामने ऐसी कोई घटना नहीं हुई और संभव है कि उन्हें बाद में घेर लिया गया हो।

इसके अलावा बीते 29 जून 2021 को भी तथाकथित किसान प्रदर्शनकारियों और भाजपा नेताओं के बीच उत्तर प्रदेश के गाजीपुर बॉर्डर पर भिड़ंत हो गई थी। इसके बाद भाजपा नेता अमित बाल्मीकि की शिकायत पर 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ कौशाम्बी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। बताया जा रहा है कि झड़प के दौरान पुलिस ने वीडियो भी बनाया था, जिसके आधार पर आरोपितों की शिनाख्त की जा रही थी। भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि बड़ी संख्या में मौजूद ‘किसानों’ ने पहले गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए और फिर कार्यकर्ताओं पर तलवार, भाले, लाठी-डंडों से हमला कर दिया था।

‘7 महीने से व्यापार ठप, रोजी-रोटी का संकट’: GT रोड खुलवाने 21 जुलाई को सिंघु बॉर्डर तक होगा सोनीपत के ग्रामीणों का मार्च

हरियाणा के सोनीपत में किसानों के आंदोलन के कारण महीनों से बंद जीटी रोड को खुलवाने के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने पैदल मार्च निकालने का निर्णय लिया है। रविवार (11 जुलाई 2021) को मनौली गाँव में राष्ट्रवादी परिवर्तन मंच की अध्यक्षता में करीब 3 दर्जन गाँवों के निवासियों ने बैठक की। बैठक में निर्णय लिया गया कि केएमपी के पास सिंघु बॉर्डर तक आगामी 21 जुलाई को पैदल मार्च निकलते हुए अपनी माँग रखी जाएगी।

रोजी-रोटी का संकट इसलिए शांतिपूर्वक मार्च:

बैठक में राष्ट्रवादी परिवर्तन मंच के अध्यक्ष हेमंत नांदल ने बताया कि कृषि सुधार कानूनों के विरोध में प्रदर्शनकारी 7 महीनों से जीटी रोड बंद करके बैठे हैं। इसके कारण अब स्थानीय लोगों की परेशानियाँ हद से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। उन्होंने बताया कि रोड बंद होने के कारण लोगों का व्यापार पूरी तरह से ठप हो गया है, जिसके कारण निर्णय लिया गया है कि रोड खुलवाने को लेकर प्रशासन से बात की जाएगी। नांदल ने बताया कि इस मुद्दे पर संयुक्त किसान मोर्चा से भी बातचीत की गई थी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला था। अब राष्ट्रवादी परिवर्तन मंच के नेतृत्व में सोनीपत की 35 पंचायतें, आरडब्ल्यूए, पेट्रोल पंप मालिक और इंडस्ट्रियल यूनियन एक तरफ से जीटी रोड खुलवाने के लिए आगे आएंगे। नांदल ने कहा कि अगर उन्हें रोका गया तो उनके द्वारा भी आंदोलन किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 21 जुलाई को इलाके के लगभग 1,500-2,000 ग्रामीण शांतिपूर्वक तरीके से पैदल मार्च करेंगे। यह मार्च केएमपी से शुरू होकर दिल्ली के सिंघु बॉर्डर तक जाएगा। यह एक सांकेतिक मार्च होगा, जिसका उद्देश्य प्रशासन को बताना है कि अब स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी पर संकट आ चुका है। इसके अलावा, अब इस इलाके के लोगों को रास्ता चाहिए और सरकार एवं प्रशासन को इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

ज्ञात हो कि केंद्र सरकार द्वारा संसद से संवैधानिक तरीके से पारित किए गए कृषि सुधार कानूनों को रद्द करने की माँग को लेकर लगभग 7 महीनों से तथाकथित किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। कई बार सरकार आश्वासन दे चुकी है कि न तो मंडियाँ समाप्त होंगी और न ही न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ कोई छेड़छाड़ किया जाएगा। इसके बाद भी कथित किसान नेता इस राजनैतिक आंदोलन को लेकर अपनी हठ पर अड़े हुए हैं। सरकार कह चुकी है कि कृषि कानूनों के जिन प्रावधानों पर किसान संगठनों को आपत्ति है, उन पर सरकार चर्चा और उसमें जरूरी सुधार करने को तैयार है, लेकिन प्रदर्शनकारी किसान कानूनों को रद्द करने की माँग पर अड़े हुए हैं।

पहले भी आ चुकी हैं नुकसान की खबरें:

किसान आंदोलन के कारण हो रहे नुकसान को लेकर कई रिपोर्ट्स आ चुकी हैं। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने जनवरी में जानकारी दी थी कि दिल्ली और इसके आसपास चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के चलते बीते एक महीने से ज़्यादा समय में दिल्ली तथा उससे सटे राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब एवं राजस्थान को लगभग 27,000 करोड़ रुपए के व्यापार का नुकसान हुआ है।

उसके बाद 6 महीने बीत चुके हैं। ऐसे में यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस कथित किसान आंदोलन से व्यापार का कितना नुकसान हो रहा होगा। इसके अलावा, केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी मार्च में बताया था कि किसान आंदोलन के कारण तीन राज्यों में 16 मार्च तक 814.4 करोड़ रुपए के टोल राजस्व का नुकसान भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को हुआ है। इनमें सर्वाधिक नुकसान पंजाब और हरियाणा में हुआ।

STF ने जमात-उल-मुजाहिदीन के तीन संदिग्ध आतंकवादियों को कोलकाता से किया गिरफ्तार, कई महीने से थे छिपे

कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने रव‍िवार (11 जुलाई 2021) को बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि एसटीएफ ने आतंकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के तीन संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से कई संदिग्ध सामग्री भी बरामद की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स को आज जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के कुछ आतंकियों के हरिदेवपुर में होने की जानकारी मिली। जेएमबी के ये तीनों संदिग्ध आतंकवादी पिछले कुछ महीनों से यहाँ किराए के एक मकान में रह रहे थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि खुफिया सूचना मिलने के बाद इन तीनों को रविवार दोपहर को दक्षिण कोलकाता के हरिदेवपुर इलाके से गिरफ्तार किया गया।

ऑपरेशन के बाद कोलकाता पुलिस एसटीएफ के जॉइंट सीपी वी सोलोमोन नेसाकुमार ने पुष्टि की, “हमने जिहादी साहित्य बरामद किया है और उनके फेसबुक अकाउंट की भी जाँच की जा रही है। इसके अलावा, हमें जेएमबी सदस्यों के नाम और उनकी संख्या वाली एक महत्वपूर्ण डायरी भी मिली है।” उन्होंने आगे कहा, “जाँच शुरू हो गई है। हम कल आरोपितों को अदालत में पेश करेंगे।”

गौरतलब है कि बांग्लादेश में जमात-उल-मुजाहिदीन एक सक्रिय इस्लामी आतंकवादी संगठन है। इसे यूके द्वारा एक आतंकवादी समूह के रूप में भी सूचीबद्ध किया गया है। फरवरी 2019 में STF ने जेएमबी के दो आतंकियों को गिरफ्तार किया था।

NASA ने शेयर की इंटर्न की फोटो: टेबल पर देवी-देवताओं की मूर्ति देख भड़के हिन्दूफोबिक लिबरल, उड़ेल दी सारी कुढ़न

अमेरिका की बहुप्रतिष्ठित अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एरोनॉटिक्स एण्ड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) ने उन प्रतिभागियों की फोटो शेयर की है, जिन्हें उनके साथ इंटर्नशिप करने का मौका मिला। हालाँकि, NASA द्वारा फोटो शेयर करने के बाद उसकी आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया, क्योंकि उन प्रतिभागियों में भारतीय-अमेरिकी इंटर्न प्रतिमा रॉय की तस्वीर भी थी। प्रतिमा रॉय की टेबल पर हिन्दू देवियों की मूर्तियाँ और दीवार पर हिन्दू देवी-देवताओं की फोटो दिखाई दे रही हैं।

प्रतिमा की इस धर्मपरायणता ने कुछ बुद्धिजीवियों को नाराज कर दिया, क्योंकि ये बुद्धिजीवी प्रतिमा द्वारा अपनी भक्ति दिखाए जाने पर खुश नहीं हैं। इन्होंने प्रतिमा के ‘वैज्ञानिक स्वभाव’ पर भी प्रश्न उठाया। हालाँकि, प्रतिमा ने अपने उसी वैज्ञानिक स्वभाव के कारण NASA के साथ इंटर्नशिप करने का मौका अर्जित किया है। कुछ लोगों ने NASA पर विज्ञान को बर्बाद करने का आरोप लगाया और कुछ ने कहा कि एक हिन्दू को देवी-देवताओं से खुद को घिरे हुए रहने की क्या जरूरत है? यह ठीक ऐसा ही प्रश्न है कि एक मछली को पानी से घिरे रहने की जरूरत क्यों है? NASA के द्वारा अपनी इंटर्न प्रतिमा रॉय की शेयर की गई इस फोटो पर कई ऐसे कमेन्ट देखने को मिले जो स्पष्ट तौर पर ‘हिन्दूफोबिया’ के अस्तित्व पर मुहर लगाते हैं। हालाँकि, यह भी निश्चित है कि यदि किसी ईसाई या किसी मुस्लिम व्यक्ति की तस्वीर (अपनी मजहबी पहचान को प्रदर्शित करते हुए) शेयर की गई होती तो इतना विवाद कभी नहीं होता।

अशोक स्वैन के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

हिन्दूफोबिया और विभिन्न संस्थानों पर उसके प्रभावों के बारे में लगातार चर्चा होती रहती है। कई बार इसके अस्तित्व को नकार दिया गया, लेकिन अमेरिकी कॉन्ग्रेस की सदस्य तुलसी गबार्ड तक ने अपने करियर के दौरान हिन्दूफोबिया से संबंधित अपने अनुभव साझा किए।

तथाकथित बुद्धिजीवी अशोक स्वैन को NASA इंटर्न प्रतिमा रॉय के हिन्दू विश्वास से कुछ ज्यादा ही समस्या दिखाई दी। हालाँकि, स्वैन हिंदुओं से घृणा करने वाले वो व्यक्ति हैं, जिन्होंने दावा किया था कि अमेरिका के कैपिटल हिल में हुए दंगों में ‘व्हाइट सुप्रिमेसिस्ट (अतिवादी)’ के साथ ‘हिन्दू सुप्रिमेसिस्ट’ भी शामिल थे। स्वैन ने जिस व्यक्ति को हिन्दू सुप्रिमेसिस्ट बताया था, वह एक ईसाई था और यह भी साबित नहीं हुआ कि वह ईसाई दंगों में शामिल था।

अब चूँकि यहाँ NASA की बात की जा रही है और इस अंतरिक्ष एजेंसी के साथ इंटर्नशिप करने के लिए वैज्ञानिक कौशल आवश्यक है, इसलिए ‘तार्किकता’ और ‘वैज्ञानिक स्वभाव’ पर चर्चा छिड़ गई। जबकि सनातन में ऐसा बिल्कुल नहीं है कि धर्म और विज्ञान में कोई विरोधाभाषी संबंध हो।

उदाहरण के लिए अब तक के महानतम गणितज्ञ श्रीनिवासन रामानुजम अपने सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्ति का श्रेय अपनी पूज्य देवी को दिया था। उन्होंने गर्व से कहा था, “किसी भी समीकरण का मेरे लिए कोई अर्थ नहीं है, यदि वह भगवान के विचारों को प्रस्तुत नहीं करता है।” उन्होंने अपनी उपलब्धियों का श्रेय नमक्कल की महालक्ष्मी को दिया था जो उनकी कुलदेवी थीं।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), जिसने हमारे देश को कई गौरव के क्षण दिए, के प्रमुख अक्सर किसी भी अंतरिक्ष मिशन को अंजाम तक पहुँचाने के पहले मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए जाते रहे हैं। कई भारतीय वैज्ञानिकों की तरह वर्तमान ISRO अध्यक्ष के. सिवन खुद एक धार्मिक हिन्दू हैं।

कोरियाई युद्ध का ‘वॉर हीरो’, Lt Col एजी रंगराज: दक्षिण कोरिया ने करीब 2 लाख सैनिकों का इलाज करने वाले को किया याद

कोरियाई युद्ध की 71वीं वर्षगाँठ पर दक्षिण कोरिया द्वारा भारत के पहले पैराट्रूपर लेफ्टिनेंट कर्नल एजी रंगराज को ‘कोरियन वॉर हीरो फॉर द मंथ’ के रूप याद किया गया। शनिवार (10 जुलाई 2021) को कोरियन वॉर मेमोरियल समेत कई अन्य स्थानों पर रंगराज की तस्वीरों को दिखाया गया। उनकी तस्वीरों को दिखाने का मकसद था कोरियाई युद्ध के दौरान उनके द्वारा योगदान के प्रति आभार प्रकट करना। रंगराज भारतीय सेना के 60वीं पैराशूट फील्ड एम्बुलेंस के तत्कालीन कमांडर थे और उन्होंने संघर्ष के दौरान अपनी टीम के साथ मिलकर लगभग कोरिया के लगभग 2,00,000 घायलों का इलाज किया था।

कोरियाई युद्ध 25 जून 1950 को प्रारंभ हुआ था। यह संघर्ष काफी उग्र था, जब भारतीय सेना की मेडिकल यूनिट मानवीय आधार पर दक्षिण कोरिया के सैनिकों की सहायता के लिए युद्ध क्षेत्र पहुँची थी। उस समय भारत की 60वीं पैरा फील्ड एम्बुलेंस का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल एजी रंगराज कर रहे थे। उनके साथ 4 कॉम्बैट सर्जन, 2 एनिस्थीसियोलॉजिस्ट और एक डेन्टिस्ट थे। इस तरह रंगराज की मेडिकल टीम में कुल 346 लोग थे, जिन्होंने कोरियाई युद्ध में घायलों का उपचार किया था।

शनिवार को दक्षिण कोरिया द्वारा एक ऑनलाइन एक्जिबिशन का अनावरण किया गया, जिसका शीर्षक था ‘कोरियन वॉर स्पेशल एक्जिबिशन: 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस’। इस एक्जिबिशन में भारतीय सेना की मेडिकल यूनिट से जुड़ी 32 फोटोग्राफ दिखाई गईं। इन फोटोग्राफ में रंगराज के नेतृत्व में उनकी मेडिकल टीम के सदस्य घाटियों में, जंगलों में, दुर्गम स्थानों में, अस्पतालों में और ऐसे ही संघर्ष के कई क्षेत्रों में दक्षिण कोरिया के सैनिकों का उपचार करते हुए देखे जा सकते हैं। आँकड़ों के मुताबिक, भारतीय सेना की उस मेडिकल टीम ने 3 साल तक चले कोरियाई संघर्ष के दौरान दक्षिण कोरिया के कुल 1,95,000 घायलों का उपचार किया था। इसके अलावा, टीम ने 2,300 सैनिकों की फील्ड सर्जरी भी की थी। इस संबंध में कोरियन कल्चर सेंटर इंडिया के द्वारा एक वीडियो भी जारी किया गया था।

दक्षिण कोरिया द्वारा भारतीय सेना के प्रयासों को याद करने पर कोरियन कल्चर सेंटर इंडिया के डायरेक्टर ह्वांग इल यॉन्ग ने कहा, “जब हम संकट में थे तब एक मित्र के रूप में भारत की सहायता और समर्थन को याद करना हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है। हम दोनों देशों के युवाओं को यह बताते हुए गर्व महसूस करते हैं। निश्चित तौर पर हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए इतिहास को सँजोया जाना चाहिए और पढ़ाया जाना चाहिए। हम यह आशा करते हैं कि कोरिया और भारत के प्रगाढ़ संबंधों के इस ऐतिहासिक पक्ष में अधिक से अधिक लोग रुचि लेंगे और इसका अध्ययन करेंगे।”

कोरियाई युद्ध:

25 जून 1950 को शुरू हुआ कोरियाई युद्ध 27 जुलाई 1953 तक चला था। इस युद्ध में एक ओर दक्षिण कोरिया था जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका का सहयोग प्राप्त था। दक्षिण कोरिया के खिलाफ इस युद्ध में था उत्तर कोरिया, जिसे चीन और तत्कालीन सोवियत संघ का समर्थन प्राप्त था। इस युद्ध की शुरुआत तब हुई थी जब उत्तर कोरिया ने सीमाई विवाद के चलते दक्षिण कोरिया पर आक्रमण कर दिया था।

इस युद्ध के परिणामस्वरूप ही कोरियाई विसैन्यीकृत क्षेत्र (Korean Demilitarized Zone) की स्थापना हुई थी। इसके अलावा, उत्तर कोरिया ने काईसॉन्ग नामक शहर पर अपना अधिकार जमा लिया था लेकिन उसे दक्षिण कोरिया को अपना 3,900 वर्ग किमी का क्षेत्र और सॉकचो शहर सौंपना पड़ा। इस संघर्ष का अंत कोरियन युद्धविराम समझौते के साथ हुआ, जो 27 जुलाई 1953 को साइन किया गया। इस समझौते के अस्तित्व में आने के लिए भी भारतीय प्रयासों को याद किया जाता है, क्योंकि तब भारत हाल ही में स्वतंत्र हुआ एक देश था लेकिन युद्ध विराम के लिए भारत ने पर्याप्त प्रयास किया था।

मानव बम बनकर 15 अगस्त से पहले देश को दहलाने की साजिश, अलकायदा आतंकी मशीरुद्दीन और मिनहाज गिरफ्तार: ADG प्रशांत

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एटीएस ने बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है। एटीएस ने रविवार (11 जुलाई) को अलकायदा से जुड़े दो आतंकियों को पकड़ा है। यूपी पुलिस ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अलकायदा समर्थित अंसार गजवातुल हिंद से जुड़े 2 आतंकवादियों को यूपी एटीएस ने गिरफ्तार किया है। इनके पास से आधुनिक असलहे और विस्फोटक सामग्री बरामद हुई है। इन आतंकियों के नाम मशीरुद्दीन उर्फ मुशीर और मिनहाज अहमद हैं।

पुलिस ने बताया कि आतंकवादी संगठन अलकायदा के एक सदस्य उमर हलमंडी को भारत में आतंकी गतिविधियों को संचालित करने के निर्देश दिए गए थे। उमर हलमंडी पाकिस्तान/अफगानिस्तान बॉर्डर से आतंकवादी गातिविधियों को संचालित करता था।

उन्होंने बताया कि उमर हलमंडी भारत में AQIS संगठन में सदस्यों की भर्ती और उन्हें रेडिक्लाइज करने का काम कर रहा है। इसके तहत हलमंडी ने कुछ जेहादी लोगों को लखनऊ में नियुक्त कर अलकायदा के माड्यूल को खड़ा किया है। यह माड्यूल अन्सार गजवातुल हिंद (AGH) जो अलकायदा का ही अंग है, उसके अंतर्गत आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए तैयार किया गया है।

मिनहाज, मशीरुद्दीन व शकील का नाम भी सामने आया

उत्तर प्रदेश पुलिस ने बताया कि माड्यूल के प्रमुख सदस्यों में मिनहाज, मशीरुद्दीन उर्फ मुशीर व शकील का नाम सामने आया है। ये सभी उमर हलमंडी के निर्देश पर अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर 15 अगस्त से पहले मानव बम बनकर यूपी के लखनऊ समेत देश के विभिन्न शहरों में महत्वपूर्ण स्थानों, स्मारकों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने के ​तैयारी कर रहे थे।

यूपी पुलिस द्वारा जारी की गई प्रेस रिलीज के मुताबिक, इस घटना को अंजाम देने में दुबग्गा के रहने वाले मिनहाज अहमद और मसीरुद्दीन निवासी सीतापुर रोड मोहिबुल्लापुर की अहम भूमिका रही है। इन दोनों के घर पर दबिश देने पर पुलिस को भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ मिले हैं। IED को BDDS की टीम की मदद से निष्क्रिय कराया जा रहा है। एटीएस द्वारा दोनों अभियुक्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इस आतंकवादी गिरो​ह में लखनऊ, कानुपर के इन​के अन्य साथी भी शामिल हैं।

अन्य टीमों के द्वारा इन आतंकवादियों के अन्य सहयोगियों की तलाश में विभिन्न स्थानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस के मुताबिक, प्रेशर कुकर बम (IED) एवं अवैध असलहों को उपलब्ध कराने वाले अन्य लोगों के बारे में पूछताछ कर ​अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।

बता दें कि अलकायदा के स्लीपर सेल्स को लगातार यूपी से पकड़ा जाता रहा है। इन्हें पकड़ने मे दिल्ली पुलिस समेत तमाम एजेंसियाँ शामिल रहती हैं। करीब तीन साल पहले इसी इलाके में सैफुल्लाह एनकाउंटर हुआ था। 8 मार्च 2017 को करीब 11 घंटे चले ऑपरेशन में संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह को मारा गया था। उसके पास से कुछ हथियार और दस्तावेज बरामद होने की बात कही थी। बाद में इस एनकाउंटर के मजिस्ट्रेट जाँच के आदेश दिए गए थे।

हिज्बुल चीफ के बेटों को बर्खास्त करने पर बौखलाईं महबूबा मुफ्ती: केंद्र पर मढ़ा ‘कश्मीरियों’ को दंडित करने का आरोप

पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती पर आतंकियों के साथ गठजोड़ करने के आरोप लगते रहे हैं। हालाँकि, उन्होंने आज एक बार फिर अपने बयान से यह साबित कर दिया कि वह आतंकवादियों की कितनी बड़ी पक्षधर हैं। दरअसल, महबूबा ने रविवार (11 जुलाई 2021) को आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटों समेत 11 कर्मचारियों के खिलाफ मोदी सरकार की कार्रवाई को गलत ठहराया है। ट्विटर पर महबूबा मुफ्ती ने केंद्र पर छद्म राष्ट्रवाद की आड़ में संविधान को रौंदने का आरोप लगाया है।

उन्होंने ट्वीट किया, ”11 सरकारी कर्मचारियों को मामूली बात पर बर्खास्त करना अपराध है। संविधान को कुचलकर केंद्र सरकार छद्म राष्ट्रवाद की आड़ में जम्मू-कश्मीर के लोगों को लगातार शक्तिहीन कर रही है। जम्मू-कश्मीर के सभी नीतिगत फैसले कश्मीरियों को दंडित करने के उद्देश्य से किए जाते हैं।”

महबूबा का यह ट्वीट सोशल मीडिया यूजर्स को पसंद नहीं आया। उन्होंने इस पर मुफ्ती की खिंचाई की है। एक यूजर ने लिखा, ”यह क्या बकवास है? बर्खास्त किए गए 11 लोगों में से 2 हिज्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख और अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी सैयद सलाहुद्दीन के बेटे हैं। दोनों को आतंकी गतिविधियों के तहत फंड मुहैया कराने का दोषी पाया गया था। मुख्यमंत्री के रूप में मुफ्ती एक मुसीबत व पाकिस्तानी हमदर्द थीं और अब खुलेआम आतंकवादियों के लिए रो रही हैं! शर्मनाक।”

वहीं, सैयद जुबैर नाम के एक यूजर ने लिखा, ”मैडम आप में थोड़ा-सा भी शर्म बाकी है? मुझे लगता है कि आप भूल गई हैं कि बुरहान वानी की घटना के बाद आपने लगभग 200 कर्मचारियों को कैसे बर्खास्त कर दिया था, जिनमें से अधिकांश शामिल भी नहीं थे। इसके अलावा, आपने अक्षमता के आधार पर समय से पहले सेवानिवृत्ति को आधार बनाकर कर्मचारियों के रोजगार को समाप्त कर दिया था।”

गौरतलब है कि शनिवार (10 जुलाई 2021) को जम्मू-कश्मीर सरकार ने अंतरराष्ट्रीय आतंकी सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटों समेत 11 कर्मचारियों को सरकारी नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। इन सभी पर देशविरोधी गतिविधियों और आतंकियों की मदद करने के आरोप हैं। पाकिस्तान के साये में पल रहे हिज्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन के बेटे सैयद अहमद शकील और शाहिद यूसुफ टेरर फंडिंग मामले में शामिल रहे हैं। एनआईए ने खुलासा किया है कि दोनों हिज्बुल के लिए पैसा इकट्ठा करते थे और हवाला के जरिए फंड भी ट्रांसफर करते थे।

गुरदासपुर लिंचिंग केस: सेना के जवान दीपक सिंह को मारने के लिए दोबारा गुरुद्वारा लाया गया, छठवाँ आरोपित भी गिरफ्तार

पंजाब के गुरदासपुर के पास एक गाँव के गुरुद्वारे में सेना के जवान दीपक सिंह ठाकुर की लिंचिंग के मामले में नई जानकारी सामने आई है। दरअसल दीपक पानी पीकर गुरुद्वारे से बाहर चले गए थे लेकिन आरोपित उन्हें दोबारा गुरुद्वारे लेकर आए जहाँ उनकी हत्या कर दी गई।

पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह ने ऑपइंडिया से बातचीत करते हुए मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गुरद्वारा साहिब के ग्रन्थी जसपिंदर सिंह ने गुरुद्वारा परिसर के अंदर दीपक को देखा। इसके बाद जसपिंदर ने दीपक को जाने के लिए कह दिया था और दीपक वहाँ से चले भी गए थे। हालाँकि जब गुरुद्वारे के दूसरे सदस्य आए, जिनमें आरोपित दलजीत सिंह भी शामिल है, तो उनसे जसपिंदर ने दीपक के बारे में बताया और कहा कि उन्होंने कथित तौर पर ईशनिंदा की है।

यह सुनकर वो सभी दीपक को ढूँढने के लिए बाहर गए। दीपक उन्हें एक दूसरे गुरुद्वारा के सामने खड़े मिले जहाँ से उन्हें मोटरसाइकिल पर बैठाकर दोबारा गुरुद्वारे लाया गया जहाँ कथित तौर पर उनकी हत्या कर दी गई। इस मामले में सामने आए सीसीटीवी फुटेज में यह दिखाई दे रहा है कि दीपक को मोटरसाइकिल पर बैठकर लाया जा रहा है। फुटेज में दीपक को दो आदमियों के बीच बैठे हुए देखा जा सकता है। सीसीटीवी फुटेज में गुरुद्वारा तेहेल सिंह के सामने खड़े दीपक को जसपिंदर सिंह और दलजीत सिंह कश्मीरी द्वारा थप्पड़ मारते हुए भी देखा गया। गुरजीत सिंह, हरजीत कौर और दरकीरत सिंह एक ही परिवार के हैं जो टिबरी चौक पर गुरुद्वारा चलाते हैं।

इस मामले में छठवें आरोपित को भी गिरफ्तार कर लिया गया है जो गुरु नानक नगर एवेन्यू कॉलोनी का रहने वाला है और अभी नाबालिग है। आरोपित की उम्र 16 वर्ष है जिसे होशियारपुर की किशोर अदालत में पेश किया गया जहाँ से उसे किशोर (juvenile) केंद्र भेज दिया गया। पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपितों में दलजीत सिंह कश्मीरी उर्फ बॉबी, गुरजीत सिंह, हरजीत सिंह, दरकीरत सिंह और जसपिंदर सिंह भी शामिल हैं। इस मामले में जाँच के लिए एक एसआईटी का भी गठन किया गया है।

ज्ञात हो कि 01-02 जुलाई 2021 की रात भारतीय सेना के जवान दीपक सिंह की हत्या कर दी गई थी। रिपोर्टों के अनुसार पठानकोट निवासी दीपक सिंह पानी पीने गुरुद्वारे में गए थे। लेकिन गुरुद्वारे के प्रबंधक और उसके साथियों ने उनकी बेरहमी से पिटाई कर दी थी। गंभीर अवस्था में दीपक को अस्पताल में भर्ती किया गया था जहाँ उनकी मौत हो गई थी। दीपक अरुणाचल प्रदेश में तैनात थे और 6 महीने बाद अपने घर लौट रहे थे। हालाँकि पुलिस इस मामले में लगातार ईशनिंदा की बात को नकार रही थी लेकिन कट्टरपंथियों द्वारा यह कहा गया कि दीपक सिंह के द्वारा कथित तौर पर ईशनिंदा की गई है और उनकी हत्या को भी जायज ठहराया गया। इस लिंचिंग में आरोपितों के खालिस्तानियों के साथ संबंध भी सामने आए थे।