बेसिक इंस्टिंक्ट और शोगर्ल्स जैसी हॉलीवुड ब्लॉकबस्टर फिल्मों के 82 वर्षीय निर्देशक पॉल वर्होवेन की कामुक समलैंगिक महिला पादरियों (नन्स) पर आधारित ड्रामा बेनेडेटा (Benedetta) का प्रीमियर शुक्रवार (जुलाई 9, 2021) को ‘कान फिल्म समारोह’ (Cannes Film Festival) के 74 वें संस्करण में बड़ी धूमधाम से किया गया। यह फिल्म कॉन्वेंट की दो लेस्बियन नन्स के बीच के रिश्ते के ईर्द-गिर्द घूमती है। इसे कई दर्शकों द्वारा सिनेमा का मास्टरपीस बताया गया। हालाँकि, कुछ लोगों को यह रास नहीं आया।
रिपोर्टों के मुताबिक, फिल्म में एक सीन में वर्जिन मैरी के लकड़ी के पुतले को सेक्स टॉय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जिस पर कुछ लोगों ने निर्माता पर ईशनिंदा का आरोप लगाया। जिसके बाद निर्माता ने उनकी आलोचनाओं पर लताड़ लगाई। उन्होंने कहा, “मैं वास्तव में यह नहीं समझता कि जो कुछ हुआ उसे आप ईशनिंदा कैसे कह सकते हैं… आप मूल रूप से इस तथ्य के बाद इतिहास को नहीं बदल सकते हैं। आप इस बारे में बात कर सकते हैं कि वह गलत था या नहीं, लेकिन आप इतिहास नहीं बदल सकते। मुझे लगता है कि इस मामले में मेरे लिए ईशनिंदा शब्द बेवकूफी भरा है।”
यह फिल्म जूडिथ सी ब्राउन की लोकप्रिय गैर-फिक्शन पुस्तक ‘इममोडेस्ट एक्ट्स: द लाइफ ऑफ ए लेस्बियन नन इन रेनेसां इटली’ का रूपांतरण है। फिल्म में बेल्जियम के अभिनेता वर्जिनी एफिरा ने बेनेडेटा कार्लिनी का अभिनय किया है। बेनेडेटा 17वीं शताब्दी की एक फ्रांसीसी नन है, जो सीधे यीशु से संवाद करती हैं। उसे कॉन्वेंट द्वारा बचाई गई एक किसान की लड़की से प्यार हो जाता है, जिसका किरदार डैफने पटाकिया ने निभाई है।
फिल्म समलैंगिक नन्स जोड़े के लव अफेयर के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें काफी सारे सेक्स सीन हैं। इन्हीं सीन में एक सीन वह भी है, जिसमें वर्जिन मैरी की लकड़ी के स्टैच्यू को डिल्डो के रूप में दिखाया गया है। जब एक रिपोर्टर ने पूछा कि वर्होवेन वर्जिन मैरी के पुतले को कैसे सेक्स टॉय के रूप में इस्तेमाल करने वाले दृश्य को फिल्माने में कामयाब रहे, तो निर्माता ने टिप्पणी की: “वेल, आपने फिल्म देख ली।”
फिल्म में दिखाए गए नग्नता के बारे में पूछे जाने पर वर्होवेन ने कहा, “मत भूलिए कि लोग जब सेक्स करते हैं तो सामान्य तौर पर वे अपने कपड़े उतार देते हैं। इसलिए मैं मूल रूप से इस तथ्य से स्तब्ध हूँ कि हम जीवन की वास्तविकता को नहीं देखना चाहते हैं। यह शुद्धतावाद क्यों पेश किया जाता है – मेरी राय में यह गलत है।”
जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने आतंक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। टेरर फंडिंग मामले में एनआईए ने कश्मीर घाटी में कई स्थानों पर छापेमारी की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विभिन्न मामलों में कुछ आरोपितों को गिरफ्तार भी किया गया है।
बताया जा रहा है कि श्रीनगर, अनंतनाग और बारामूला में छापेमारी की गई है। सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर एनआईए ने श्रीनगर के नवाबाजार में स्थित दारुल उलूम पर भी छापा मारा। यह दारुल उलूम लखनऊ से संबद्ध है। एनआईए ने हवाल के रहने वाले नूर दीन भट (दारुल उलूम के अध्यक्ष) के बेटे अदनान अहमद नदवी को गिरफ्तार किया है।
BRK: @NIA_India along with Jammu and Kashmir Police & @crpfindia raid a Darul Uloom in Nawabazar area of Srinaga.
Multiple searches on.
One Adnaan Ahmad, a resident of Hawal arrested by NIA for further investigation.
Darul Uloom was raided in conn with Darul Uloom Lucknow.
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के सहयोग से पुष्रू अचबल, मागरे पोरा अचबल, सुनसूमा अचबल सहित कई स्थानों पर छापे मारे गए। एनआईए ने आगे की जाँच के लिए कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और लैपटॉप भी जब्त किए हैं।
द कश्मीर वाला न्यूज पोर्टल के अनुसार, सुनसूमा अचबल के रहने वाले मोहम्मद शबन मीर के बेटे जाविद अहमद मीर, मागरे मोहल्ला के रहने वाले निसार भट के बेटे उमर भट, निसार अहमद भट के बेटे ओवैस अहमद भट को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा गूरी मोहल्ला के रहने वाले गुल मोहम्मद भट के बेटे तनवीर अहमद भट और पुष्रू नौगाम अचबल से मोहम्मद अमीन मलिक के बेटे जीशान अमीन मलिक को गिरफ्तार किया गया है।
गौरतलब है कि शनिवार (10 जुलाई 2021) को जम्मू-कश्मीर सरकार ने आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाउद्दीन के दोनों बेटे सैयद अहमद शकील और शाहिद यूसुफ समेत कुल 11 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था। इन सभी को आतंकी गतिविधियों के तहत फंड मुहैया कराने का दोषी पाया गया था।
पश्चिमी यूरोप में स्थित देश जर्मनी की राजधानी बर्लिन में हाल ही में एक अजीबोगरीब विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएँ आई थीं। साइकिल और बाइक पर आईं आई इन महिलाओं ने अपने शरीर के ऊपरी हिस्से पर कोई कपड़ा नहीं पहन रखा था। उन्होंने इसे ‘टॉपलेस विरोध प्रदर्शन’ बताया। साथ ही इन सब ने अपने शरीर पर ‘My Body, My Choice (मेरा शरीर, मेरी इच्छा)’ भी लिखवा रखा था।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वो लैंगिक समानता को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए निकले हैं, ताकि जेंडर के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाए। दरअसल, ये सब एक अन्य घटना के कारण हो रहा है। एक फ्रेंच महिला को शहर के ही एक पार्क से निकाल बाहर किया गया, क्योंकि वो बिना टॉप पहने ही सूर्य की किरणों का आनंद ले रही थीं। प्रशासन की ये हरकत लोगों को रास नहीं आई।
इस विरोध प्रदर्शन का नाम ‘No nipple is free until all nipples are free’ रखा गया था। इसका अर्थ हुआ, “कोई भी निप्पल (स्तनाग्रम्) तब तक मुक्त नहीं हो सकता, जब तक सारे के सारे निप्पल मुक्त न हो जाएँ।” बर्लिन के मरिअनंप्लैज (Mariannenplatz) इलाके में शनिवार (10 जुलाई, 2021) को ये विरोध प्रदर्शन हुआ। फ्रांस की महिला को वाटर पार्क से निकाल बाहर किए जाने की घटना पिछले महीने की है।
Women #bikers hold topless protest in #Berlin after police told sunbathing topless mother to cover up when she was at water park with her children 'No nipple is free until all nipples are free' protest begin at Berlin's Mariannenplatz at midday Saturday July 10 pic.twitter.com/WcHlOTb2xU
— Hans Solo (@thandojo) July 11, 2021
प्रशासनिक अधिकारियों ने उक्त महिला को अपनी शर्ट पहन कर धूप सेंकने को कहा था, लेकिन उसने ऐसा करने से इनकार कर दिया। इसके बाद कई महिलाओं ने ‘फ्री द बूब्स’ और ‘स्टॉप सेक्सिज्म’ लिख कर साइकिल से शहर का चक्कर लगाया। खास बात ये है कि इस विरोध प्रदर्शन में शामिल पुरुषों ने ब्रा पहन रखी थी। पुरुषों में से कई ने बिकनी भी पहन रखी थी। बता दें कि जर्मनी में अर्ध-नग्नता प्रतिबंधित है।
हालाँकि, विभिन्न संपत्तियों के मालिकों को ये अधिकार है कि वो खुद कोई प्रतिबंध अगर लगाना चाहते हैं तो लगाएँ। फ्रांस की उक्त महिला ने कहा कि वो इस विरोध प्रदर्शन से खुश हैं, क्योंकि ये लैंगिक समानता के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने का एक जरिया बना। उन्होंने ‘इक्वल ब्रेस्ट्स’ नामक बैठक का भी आयोजन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें पार्क से हटाए जाने की घटना इस लक्ष्य में एक माध्यम बन कर सामने आई।
पंजाब के मलेरकोटला जिले के अहमदगढ़ के सरौद गाँव में 10 जुलाई को शिव मंदिर में तोड़फोड़ का एक मामला सामने आया। मंदिर में शिवलिंग और अन्य मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करने वाले उपद्रवियों के खिलाफ हिंदू समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है। 9 जुलाई और 10 जुलाई की रात को हुई इस घटना की रिपोर्ट पूर्व कप्तान परमजीत कुमार ने दी थी, जो मंदिर की देखरेख कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, जब कुमार अपने परिवार के साथ मंदिर का द्वार खोलने के लिए गए तो उन्होंने देखा कि शिवलिंग टूटा हुआ था और उसका एक हिस्सा बाहर पड़ा हुआ था। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मामले का जायजा लेने के लिए पुलिस अधीक्षक (SP) अमनदीप सिंह बराड़ और एसपी हरप्रीत सिंह हुंदल मौके पर पहुँचे। अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।
वहीं, हिंदू संगठनों ने मंदिर के पास भूख हड़ताल शुरू कर दी है। क्षेत्र में डीएसपी संदीप वडेरा, डीएसपी अमरगढ़ राजन शर्मा, एसएचओ हरमेश सिंह, एसएचओ विन्नरजीत सिंह और थाना प्रभारी हरमीत सिंह की निगरानी में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
ऑपइंडिया से बात करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मलेरकोटला के जिलाध्यक्ष अमन थापर ने कहा कि एक अज्ञात व्यक्ति ने मंदिर में भगवान नंदी की मूर्ति और शिवलिंग की तोड़फोड़ की। उन्होंने कहा, “प्रशासन ने मंदिर परिसर को बंद कर दिया है। हम माँग करते हैं कि पुलिस मामले में त्वरित कार्रवाई करे और दोषियों को गिरफ्तार करे।”
Fir copy by police obviously formality after protest by local Hindus and BJYM boys (ajay thapar ji ) more section are later added attached below pic.twitter.com/rqGYuUK7ac
— #Justicefordeepakthakur (@ManasUnknown) July 11, 2021
थापर ने आगे कहा कि पंजाब में इस तरह की घटनाएँ बढ़ रही हैं। हाल ही में राज्य में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की खबर आई थी। उन्होंने कहा, “यह राज्य में समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करने का एक प्रयास है।” कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नुकसान जानवरों के कारण हो सकता है, लेकिन थापर के अनुसार, अपराधियों ने नुकसान पहुँचाने के लिए शायद किसी तेज उपकरण का इस्तेमाल किया था।
बजरंग दल संगरूर के धर्म प्रचारक विजय ढोलेवाल ने कहा कि हिंदुओं ने हमेशा अन्य धर्मों का स्वागत किया है, लेकिन अब हिंदू पूजा स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह एक प्राचीन मंदिर है। हिन्दू समाज आक्रोशित है। पुलिस ने कहा कि जाँच के बाद बदमाशों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा, लेकिन यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि अपराधी गिरफ्तार होते हैं या नहीं।” उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की घटनाएँ क्षेत्र में धार्मिक सद्भाव के लिए अच्छी नहीं हैं और पुलिस को अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए।
भारतीय दंड संहिता की धारा 295 (ए) और धारा 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है। जागरण ने एसपी हुंदल के हवाले से कहा कि पुलिस मामले की गंभीरता से जाँच कर रही है और मामले की सच्चाई जल्द ही सामने आ जाएगी।
केंद्र सरकार ने हाल ही में सहकारिता मंत्रालय (Cooperation Ministry) का गठन किया और ताज़ा मंत्रिमंडल विस्तार में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इसकी जिम्मेदारी दी गई। इससे विपक्षी खेमे में बेचैनी का माहौल है। अब महाराष्ट्र की सत्ता में साझीदार ‘राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP)’ के संस्थापक-अध्यक्ष शरद पवार ने इस पर टिप्पणी की है। उन्होंने कह डाला कि केंद्र सरकार को इसमें हस्तक्षेप का कोई अधिकार ही नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि राज्य में सहकारिता विभाग में नियम-कानून महाराष्ट्र के कानून के हिसाब से चलते हैं और महाराष्ट्र विधानसभा द्वारा ड्राफ्ट किए गए कानून में हस्तक्षेप करने का केंद्र सरकार को कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र में नए सहकारिता मंत्रालय के गठन से समस्याएँ पैदा होने की आशंका नहीं है, क्योंकि ये तो राज्य का मुद्दा है। उन्होंने दावा किया कि बहुराज्यीय संस्थाओं, जिसमें दो से अधिक राज्य भागीदार हों – केवल उनमें ही केंद्र हस्तक्षेप कर सकता है।
मनमोहन सिंह की सरकार में देश के कृषि मंत्री रहे शरद पवार ने कहा कि महाराष्ट्र में सहकारिता आंदोलन पर केंद्र के इस नए मंत्रालय का कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने संविधान की बात करते हुए इसे राज्य का मुद्दा बताया। उन्होंने बताया कि ये नया निर्णय नहीं है, बल्कि जब वो कृषि मंत्री हुआ करते थे तब भी ऐसा प्रस्ताव था। उन्होंने मीडिया पर इसे गलत तरीके से दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मीडिया ऐसा दिखा रहा है, जैसे ये मंत्रालय महाराष्ट्र में सहकारिता को हाईजैक कर लेगा।
बता दें कि महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक घोटाले के कारण राज्य का सहकारिता आंदोलन पहले ही पटरी से उतर चुका है। इसी महीने की शुरुआत में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शरद पवार के भतीजे अजीत पवार की 65 करोड़ रुपए कीमत की शुगर मिल को अटैच कर लिया। यह कंपनी पवार की पत्नी सुनेत्रा अजीत पवार की है। अजीत पवार की यह कंपनी महाराष्ट्र के सातारा में है, जिसका नाम जरांदेश्वर सहकारी चीनी कारखाना (जरंदेश्वर एसएसके) है।
The reports of the Union Ministry of Cooperation creating problems in the state have no facts as the matter constitutionally belongs to the state govt. The right to a multi-state institution, i.e., an institution which is run in two states, goes to the Central govt: Sharad Pawar
सितंबर 2019 में राज्य के विधानसभा चुनावों से पहले ही प्रवर्तन निदेशालय ने महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक स्कैम (MSCB) में 25,000 करोड़ रुपए के घोटाले के मामले में अजीत पवार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज किया था। मामले की छानबीन करते हुए ईडी को पता चला कि एमएससीबी ने 2010 में जरांदेश्वर एसएसके को एक नीलामी में उचित मूल्य से कम कीमत पर बेचा था।
2019 में खबर आई थी कि एक गवाह के बयान के बाद ED ने शरद पवार का नाम भी इस घोटाले के आरोपितों में शामिल किया था। उक्त गवाह ने अपने बयान में बताया था कि कैसे शरद पवार ने इस घोटाले में बड़ी भूमिका निभाई थी। तब शरद पवार ने इसे महाराष्ट्र में चुनावों से जोड़ते हुए कहा था कि उनका इस मामले से कोई लेनादेना ही नहीं है। इस मामले में NCP के कुछ अन्य नेता हुए कई बैंक अधिकारी भी आरोपित हैं।
राजस्थान के नागौर जिले से एक ऐसे इंसान का मामला सामने आया है, जो साल में लगभग 300 दिन नींद में ही गुजार देता है। इस इंसान का खाना, नहाना और दिन के अन्य क्रियाकलाप नींद में ही होते हैं। दरअसल यह व्यक्ति एक गंभीर बीमारी ‘एक्सिस हायपरसोम्निया’ से ग्रसित है, जिसके कारण इंसान लगातार कई दिनों तक सोता रहता है। इसी बीमारी के कारण नागौर के भादवा गाँव में रहने वाले पुरखाराम जब एक बार सोते हैं तो फिर 25 दिनों तक सोते ही रहते हैं। बीच में अगर कभी जगाना हुआ तो वही संघर्ष करना पड़ता है, जो रावण को अपने भाई कुंभकर्ण को जगाने के लिए करना पड़ा था। पुरखाराम के गाँव के लोग भी उन्हें प्यार से कुंभकर्ण ही कहते हैं।
दैनिक भास्कर को जब इसके बारे में जानकारी मिली तो उनकी टीम पुरखाराम के घर पहुँची। टीम उनसे कुछ बातचीत कर सके इसके लिए उन्हें बड़ी मशक्कत करके जगाया गया। पुरखाराम को नींद से जगाने में ही 3 घंटे का समय लग गया। इसके बाद कहीं जाकर उनकी नींद टूटी लेकिन सिर्फ 2 मिनट के लिए ही। इसके बाद पुरखाराम फिर सो गए। भास्कर की टीम 3 घंटे तक उनके घर में टिकी रही लेकिन उन्हें जगाया न जा सका।
भास्कर को पुरखाराम के घर वालों ने बताया कि इसकी शुरुआत 23 साल पहले हुई थी, जब पुरखाराम 5 से 7 दिनों तक सोते रहते थे और उन्हें नींद से जगाना बहुत मुश्किल हो जाता था। इसके बाद उनकी नींद का समय बढ़ता गया और आज यह हालत है कि पुरखाराम महीने में 25 दिन तक सोते रहते हैं। पुरखाराम के परिजन नींद में ही उन्हें खाना खिलाते हैं, नहलाते हैं और यहाँ तक कि नींद में ही उन्हें टॉयलेट ले जाते हैं। हालाँकि, एक्सपर्ट का कहना है कि कहते हैं कि पूरी तरह से डायग्नोस करने के बाद इस बीमारी का ईलाज किया जा सकता है।
क्या है हायपरसोम्निया:
हायपरसोम्निया एक ऐसी बीमारी है जिससे ग्रसित व्यक्ति हमेशा ही नींद में रहता है। इस बीमारी से ग्रसित रहने वाला किसी भी समय सो सकता है, यहाँ तक कि अपनी दिनचर्या के काम करते हुए भी। ऐसे व्यक्ति में नींद के अलावा शारीरिक ऊर्जा और सोचने की शक्ति में कमी भी देखने को मिलती है। नेशनल स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक, लगभग 40% लोग किसी न किसी तरह से नींद की समस्या से ग्रसित होते हैं। इसे प्राइमरी हायपरसोम्निया के नाम से भी जाना जाता है।
हायपरसोम्निया के प्रमुख कारण:
फिलहाल चिकित्सा विज्ञान में इस बीमारी के पीछे जिम्मेदार जो प्रमुख कारण बताए जाते हैं वो इस प्रकार हैं:-
1. नींद से संबंधित डिसऑर्डर या नार्कोलेप्सी। नार्कोलेप्सी एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी है जिसमें व्यक्ति को नींद का दौरा आता है और इस कारण मरीज किसी भी समय सो सकता है। हालाँकि, नार्कोलेप्सी को तकनीकी रूप से हायपरसोम्निया से अलग माना जाता है।
2. रात में पर्याप्त नींद न ले पाना।
3. सामान्य से अधिक वजन का होना, जिसके कारण नींद में असंतुलन उत्पन्न होता है।
4. ड्रग या शराब का अत्यधिक मात्रा में सेवन।
5. सिर पर कोई पुरानी चोट।
6. किसी दवा का उल्टा असर।
7. जेनेटिक।
8. तनाव।
हालाँकि, हायपरसोम्निया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें मरीज अधिकांशतः दिन में भी सो जाता है। वहीं, पुरखाराम लगातार कई दिनों तक सोते रहते हैं। ऐसे में उनकी बीमारी हायपरसोम्निया के अगले स्टेज में पहुँच चुकी है, जो सेकंडरी हायपरसोम्निया या एक्सिस हायपरसोम्निया कहलाती है। इस बीमारी में ऐसा नहीं होता कि मरीज दिन या रात को सोए, बल्कि सेकंडरी या एक्सिस हायपरसोम्निया का मरीज कई-कई दिनों तक सोता ही रहता है, जैसा कि पुरखाराम के मामले में दिखाई दिया।
सेकंडरी या एक्सिस हायपरसोम्निया:
प्राइमरी हायपरसोम्निया से अलग सेकंडरी हायपरसोम्निया के पीछे कोई न कोई चिकित्सकीय कारक मौजूद होता है। इनमें स्लीप एपनिया (sleep apnea), पार्किन्सन बीमारी (parkinson disease), किडनी का फेल हो जाना (kidney failure) और क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम (chronic fatigue syndrome) शामिल हैं। सेकंडरी हायपरसोम्निया के कारण व्यक्ति में थकान और ऊर्जा की मात्रा में इतनी कमी हो जाती है कि वह लगातार सोता रहता है। दरअसल प्राइमरी हायपरसोम्निया से पीड़ित मरीज जब अधिक समय तक बिना इलाज के रहता है तो एक समय के बाद उसकी बीमारी सेकंडरी या एक्सिस हायपरसोम्निया में बदल जाती है।
हायपरसोम्निया का इलाज:
नार्कोलेप्सी से जुड़ी कई दवाएं हायपरसोम्निया के इलाज में कारगर हो सकती हैं, लेकिन हायपरसोम्निया के इलाज का प्रमुख माध्यम है दिनचर्या में परिवर्तन और पोषणयुक्त आहार। हायपरसोम्निया के अधिकांश मामलों में देखा गया है कि मरीज तनाव से ग्रसित होता है अथवा किसी न किसी रूप में नशे का आदी होता है। ऐसी स्थिति में अपनी दिनचर्या को बदलते हुए हायपरसोम्निया से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके अलावा, कई बार यह भी देखा गया है कि हायपरसोम्निया से पीड़ित मरीज में ऊर्जा की भारी कमी देखने को मिलती है। ऐसी स्थिति में सम्पूर्ण पोषण से युक्त आहार लेने पर हायपरसोम्निया के प्रभावों को कम किया जा सकता है। चिकित्सा विज्ञान में पूरी तरह से डायग्नोस करने के बाद इस बीमारी का इलाज संभव है।
हालाँकि, पुरखाराम के मामले में अभी तक यह नहीं ज्ञात है कि उन्हें यह बीमारी किस कारण से है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि पुरखाराम कभी ठीक नहीं हो सकते। अगर एक बार उनका डायग्नोसिस हो जाए तो उनका इलाज किया जा सकता है।
“तुझे कोठे की रंडी बनाएँगे, तेरे सामने तेरी बेटी की…, अल्लाह हू अकबर बोलते हुए घर में घुस गए, मुसलमान बनाकर छोड़ेंगे, काटकर नाले में फेंक देंगे…”
इस तरह के कई दावे एक बुजुर्ग महिला और उसकी बेटी के करते वीडियो आपने देखे होंगे। यह बुजुर्ग महिला निवासपाल चौधरी की पत्नी हैं। वीडियो में दिख रही युवती आरती चौधरी, उनकी बेटी है। चौधरी परिवार के साथ दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश से सटे गढ़ी गाँव में रहते हैं। इस मामले में जिन पर मुख्य रूप से आरोप हैं, वे शमशाद और उनके बेटे हैं।
मामले की तफ्तीश के क्रम में रविवार को (11 जुलाई 2021) को हम गढ़ी गाँव पहुँचे। इस गाँव की एक इमारत के पहले फ्लोर के एक फ्लैट में निवासपाल चौधरी का परिवार रहता है। नीचे शमशाद की कपड़ों की दुकान है। आरती ने ऑपइंडिया को बताया कि वह खुद लॉ ग्रेजुएट है। उसका एक छोटा भाई है जो मानसिक तौर पर स्वस्थ नहीं है। बुजुर्ग माँ-बाप हैं। पिता को दो बार हर्ट अटैक हो चुका है और वे ज्यादा बोलने में सक्षम नहीं हैं।
आरती का दावा- कपड़ा कारोबार की आड़ में धर्मांतरण
बकौल आरती उसने जुलाई 2020 में पहली बार अमर कॉलोनी थाने में शमशाद और उसके बेटों के खिलाफ छेड़छाड़, जान से मारने की धमकी और अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। आरती का दावा है कि शमशाद और उसके बेटे कपड़े के कारोबार की आड़ में ब्लू फिल्म बनाने और धर्मांतरण का काम करते थे। इसको लेकर आवाज उठाने पर उसके साथ इस घटना को अंजाम दिया गया। इसके बाद उसने पुलिस से शिकायत की पर मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरती ने इस संबंध में डीसीपी, दिल्ली महिला आयोग को भी लिखा था। इससे संबंधित सारे दस्तावेज ऑपइंडिया के पास उपलब्ध हैं।
आरती ने बताया कि जुलाई 2020 में शिकायत करने के बाद शमशाद और उसके बेटे उस पर शिकायत हटाने का दबाव बनाने लगे। उन्हें लगातार धमकाया जाने लगा। उन्होंने बताया कि 30 जून 2021 को 60-70 लोगों के साथ शमशाद और उसके बेटे उनके घर में घुस गए। यह भी दावा है कि ये लोग शाहीनबाग/ओखला से आए थे, जहाँ शमशाद का निवास है। इस संबंध में भी उसने पुलिस से शिकायत कर रखी है।
जब हम पहुँचे तो क्या हुआ
जब इस बिल्डिंग में मैंने प्रवेश किया तो एक व्यक्ति ने मुझे रोकने की कोशिश की। उसका दावा था कि वह इस गाँव का रहने वाला और कोई कैसे घुस सकता है। मैंने उसे परिचय दिया और बताया कि पीड़ित परिवार से उनका पक्ष जानने जा रहा हूँ। उसने मुझे रोकने की कोशिश की। दिलचस्प यह है कि यह व्यक्ति शमशाद की दुकान में ही बैठा था। हालाँकि उस वक्त शमशाद और उनके बेटे दुकान पर मौजूद नहीं थे। कुछ देर बातचीत के बाद वह व्यक्ति भी मेरे साथ आरती चौधरी के घर गया। आरती चौधरी जिस फ्लैट में रहती हैं वहाँ तब कुछ हिंदुवादी संगठन के लोग भी मौजूद थे। इनको देख वह व्यक्ति और भड़क गया और उन पर भी दबाव बनाने की कोशिश की। वह बार-बार आरती चौधरी पर गाँव को बदनाम करने और माहौल खराब करने का आरोप लगा रहा था।
जब उससे उसका परिचय जानने की कोशिश की तो उसने नाम नहीं बताया, बस ये कहता रहा कि वह इसी गाँव का है और बचपन से शमशाद और उनके बच्चों को जानता है। आरती चौधरी के आरोप झूठे हैं। उसका वीडियो बनाने की कोशिश की तो उसने रोक दिया और फिर वह उस फ्लैट से निकल गया। आरती चौधरी का दावा था कि यह आदमी अक्सर शमशाद की दुकान में बैठा रहता है। साथ ही यह भी कहा कि कुछ हिंदू जिनके व्यवसायिक हित शमशाद से जुड़े हैं वे भी उन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
हिंदुवादी संगठनों से जुड़े लोगों को अपना पक्ष बताते शमशाद
शमशाद बता रहे संपत्ति विवाद
आरती चौधरी के घर से निकलने के बाद हमने शमशाद और उनके बेटे नदीम, जिस पर सबसे ज्यादा आरोप हैं, की खोज की। थोड़ी देर बाद शमशाद खुद दुकान पर आए। उन्होंने ऑपइंडिया से बातचीत में दावा किया कि ये पूरी बिल्डिंग उनकी और उनके पाटर्नर की। उनके पास कागजात हैं। काफी समय से आरती चौधरी किराया नहीं दे रही है और पूरे विवाद की शुरुआत इसी से हुई। इसके बाद उनके और उनके बेटों के खिलाफ उसने झूठी शिकायत कर दी। शमशाद ने भी पुलिस से शिकायत कर रखी है, जिसकी कॉपी ऑपइंडिया के पास है। इसमें उन्होंने मारपीट, अश्लील हरकत करने और आपसी विवाद को हिंदू-मुस्लिम रंग देने का आरोप आरती चौधरी पर लगा रखा है।
शमशाद का कहना है कि 30 जून को विवाद होने के बाद उन्होंने सीसीटीवी कैमरे लगाए, जिसे आरती चौधरी के परिवार ने हटा दिया। इस संबंध में आरती चौधरी का कहना है कि उन लोगों पर नजर रखने के लिए कैमरे लगाए गए थे। फ्लैट को लेकर उनका दावा है कि ये उनका है। उन्होंने इसके बदले में पैसे दिए थे। जब पता चला कि यह गैर कानूनी है तो उन्होंने अपने पैसे वापस माँगे जो उन्हें नहीं दिया गया। वे दावा करती हैं कि संपत्ति के विवाद का इस पूरे प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं है। अपने गलत कार्यों को छिपाने के लिए शमशाद इसे प्रॉपर्टी विवाद से जोड़ रहे हैं।
पुलिस का क्या कहना है
आरती चौधरी का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद शमशाद और उनके बेटों पर कार्रवाई नहीं हो रही और उनका पूरा परिवार डर के साए में जी रहा है। शमशाद का दावा है कि पुलिस ने जाँच की और कोई मामला ही नहीं निकला है। वे यह भी कहते हैं कि सीसीटीवी कैमरे भी उन्होंने पुलिस के कहने पर ही लगवाए थे। इस संबंध में अमर कॉलोनी थाने के एडिशनल एसएचओ संदीप कुमार से जब ऑपइंडिया ने बात की तो उन्होंने कहा कि 30 जून की हुई घटना को लेकर पुलिस कार्रवाई कर रही है। लेकिन पुलिस ने फिलहाल इसका विवरण साझा करने से इनकार किया है।। यह पूछे जाने पर कि पहली शिकायत आरती चौधरी ने जुलाई 2020 में ही की थी और उस मामले की जाँच कहाँ तक पहुँची है, उन्होंने बताया कि उस संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है, क्योंकि उन्होंने हाल ही में ज्वाइन किया है।
हमने अपनी पड़ताल में पाया कि इस मामले से संबंधित सभी पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। लेकिन दो बातें स्पष्ट हैं। पहला, आरती चौधरी के आरोप बेहद गंभीर हैं। दूसरा, यह विवाद लंबे समय से चल रहा है। लिहाजा जरूरी है कि मामले की निष्पक्ष जाँच कर दोषियों पर कार्रवाई जल्द से जल्द हो।
गुजरात के पंचमहल जिले के कलोल शहर में शनिवार (10 जुलाई 2021) को पुलिस ने गोमांस की तस्करी और पुलिस व दूसरे समुदाय पर पथराव करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। इस मामले में पुलिस ने 41 हमलावरों और 50-60 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना को सोमवार (12 जुलाई) को होने वाली रथ यात्रा से कुछ दिन पहले अंजाम दिया गया है। शनिवार दोपहर को कलोल क्षेत्र में दो समुदायों के बीच झड़प हो गई। इस दौरान भारी पथराव हुआ, जिसमें कई लोग घायल हो गए। घायल होने वाले लोगों में दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि बीफ रखने के आरोपित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग को लेकर हिंदू संगठन थाने पहुँचे थे। तभी, थाने के ठीक बाहर दो गुट आपस में भिड़ गए। ऐसे में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस पहुँची तो उस पर भी पथराव किया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आँसू गैस के गोले दागे। इसके बाद से शहर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
देशगुजरात की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार (8 जुलाई 2021) को पुलिस को गोमांस से भरी एक कार मिली थी, जिसे इरफान पावड़ा और फारूक पावड़ा ले जा रहे थे। फारूक पावड़ा के घर पर गायों को मारा गया था। पुलिस को देखकर दोनों कार वहीं छोड़कर भाग गए। मामले की जाँच के लिए पुलिस गोमांस लदी कार को थाने ले आई। इसी दौरान इरफान और फारूक तलवार व पाइप लिए हुए कई लोगों के साथ थाने आया और पुलिस पर हमला कर दिया। इस हमले में वेजलपुर थाना के दारोगा को मामूली चोटें आईं और पुलिस की गाड़ी को भी नुकसान पहुँचा। दोनों आरोपी हमले के वक्त भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे। बाद में आरोपित गोमांस से भरी कार लेकर फरार हो गए।
रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार (9 जुलाई 2021) को गोमांस ले जाने की सूचना पुलिस को देने के संदेह में हिंदू समुदाय के एक व्यक्ति पर हमला किया गया था। इस मामले में पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में ले लिया था, जिसके बाद गुस्साई भीड़ थाने पहुँची और शनिवार को पुलिस पर हमला कर दिया। बता दें कि अभी तक 41 नामजद और करीब 50-60 अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।
राजस्थान में अपराध बढ़ने के कारण वहाँ की अशोक गहलोत सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर है। अब बारां से एक घटना सामने आई है, जहाँ दिनदहाड़े लोगों के सामने ही एक हत्याकांड को अंजाम दिया गया। उक्त घटना कृषि उपज मंडी गेट के बाहर शनिवार (10 जुलाई, 2021) को शाम करीब 5 बजे हुई। आरोपित ने दो राउंड फायरिंग की और फिर व्यक्ति की हत्या कर डाली। बीच सड़क पर ये घटना हुई।
आरोपित उस व्यक्ति को सड़क पर पटक कर सरिये से तब तक मारता रहा, जब तक कि उसकी मौत न हो गई। इस घटना के बाद सड़क पर काफी दूर तक खून ही खून पसर गया। इस घटना को अंजाम देने के बाद भी हत्यारा बेख़ौफ़ इधर-उधर घूम रहा था। इस दौरान वो फोन पर भी किसी से बात कर रहा था। CCTV कैमरे में ये हत्याकांड कैद हो गई। सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे शेयर करते हुए राजस्थान में बढ़ते आपराधिक घटनाओं पर नाराजगी जताई।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और जोधपुर से लोकसभा सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा कि ये सीरिया, इराक़ या अफगानिस्तान नहीं, भारत का राजस्थान है। उन्होंने लिखा कि यहाँ ISIS या तालिबान का राज नहीं, कॉन्ग्रेस की सरकार है। वहीं पूर्व केंद्रीय खेल मंत्री और जयपुर ग्रामीण से सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि कॉन्ग्रेस राज में राजस्थान में कानून-व्यवस्था की स्थिति इतनी बुरी हो गई है।
उन्होंने कहा, “क्या से क्या बना दिया राजस्थान को!” परिजनों का कहना है कि मृतक नाबालिग था, जिसका नाम आजाद था। इस हत्याकांड की सूचना पूरे शहर में जंगल में आग की तरह फ़ैल गई और लोगों के बीच डर का माहौल बन गया। आजाद पर दो दिन पहले भी हमला हुआ था, जिसकी शिकायत पुलिस थाने में दी गई थी। हमलावर की अब तक पहचान नहीं हो सकी है, न ही झगड़े के कारणों का पता चला है। पुलिस मौके पर जाँच में जुटी है और तलाशी अभियान भी चलाया गया है।
State of law & order in Rajasthan under congress rule.
— Col Rajyavardhan Rathore (@Ra_THORe) July 11, 2021
पुलिस ने बताया कि आजाद किसी ट्रक पर काम करता था। वहीं आरोपित के बारे में पता चला है कि वो मंडी गेट पर तिरपाल की दुकान लगाता है। घटना से पहले आजाद अपनी मजदूरी ख़त्म कर के दो-तीन साथियों के साथ घर लौट रहा था। तभी आरोपित ने उसकी हत्या कर दी। आरोपित की उसके साथ एक साल से रंजिश चल रही थी। पुलिस को मौके से दो खोखे भी मिले हैं। परिजनों ने आरोपित की गिरफ़्तारी की माँग की है।
ये सीरिया, इराक़ या अफगानिस्तान नहीं, भारत का राजस्थान है। यहां ISIS या तालिबान का राज नहीं, कांग्रेस की सरकार है।#Rajasthanpic.twitter.com/qyE6EHo8wB
— Gajendra Singh Shekhawat (@gssjodhpur) July 11, 2021
एसपी और एएसपी के कई बार समझाने के बाद परिजनों ने शव लिया। इस घटना के कारणों को लेकर लोगों में अलग-अलग किस्म की चर्चाएँ हैं। पुलिस का कहना है कि आजाद बालिग़ है, जबकि परिजनों का कहना है कि उसकी उम्र मात्र 16 साला है। आजाद के भाई इतिहास अली ने इस मामले की शिकायत दर्ज कराई है, जिसके आधार पर FIR दर्ज हुई है। पुलिस अधिकारी घटना और रंजिश के कारणों की तह तक जाने में लगे हैं।
उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में पत्नी के फरीदपुर ब्लॉक प्रमुख का चुनाव हारने के बाद पुलिस से हुई बहस में पूर्व विधायक एवं समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता विजयपाल सिंह ने अधिकारियों को धमकाते हुए पेशाब पिलाने की बात कही है। पूर्व विधायक ने पुलिसकर्मियों को धमकाते हुए कहा कि प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार आने पर वे अधिकारियों को पेशाब पिलाएँगे। विजयपाल सिंह की धमकी का वीडियो वायरल हो गया है।
वहीं, उत्तर प्रदेश भाजपा नेता शलभमणि त्रिपाठी ने विजयपाल सिंह का वीडियो शेयर करते हुए कुछ ऐसा ही लिखा है। उन्होंने ट्वीट में लिखा है, “समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक विजय सिंह हैं, कह रहे हैं कि अपनी सरकार में बात न मानने वाले पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों और सियासी विरोधियों को पेशाब पिलवाते थे, भाजपा सरकार में नहीं पिला पा रहे हैं तो बहुत गुस्से में हैं।”
समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक विजय सिंह हैं, कह रहे हैं कि अपनी सरकार में बात न मानने वाले पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों और सियासी विरोधियों को पेशाब पिलवाते थे, भाजपा सरकार में नहीं पिला पा रहे हैं तो बहुत गुस्से में हैं। pic.twitter.com/L7qvNO9KYT
— Shalabh Mani Tripathi (@shalabhmani) July 11, 2021
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने धमकी भरे इस वीडियो का संज्ञान लिया है और फरीदपुर थाने में तैनात दारोगा राजकुमार की तहरीर पर पूर्व विधायक विजयपाल सिंह और उनके 30 अज्ञात साथियों पर गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने वीडियो में दिखाई दे रहे सपा कार्यकर्ताओं की पहचान करना शुरू कर दिया है।
एसपी देहात राजकुमार अग्रवाल का कहना है कि पूर्व विधायक विजयपाल सिंह ने सत्ता में आने पर पुलिस को अंजाम भुगतने की धमकी दी है। इस प्रकरण में दरोगा की तहरीर पर थाना फरीदपुर में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है।
वर्ष 2012 में विजयपाल सिंह फरीदपुर विधानसभा से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक निर्वाचित हुए थे। अब वे समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं।
दरअसल, ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में पूर्व विधायक विजयपाल सिंह की पत्नी सुनीता सिंह को फरीदपुर के वर्तमान विधायक श्याम बिहारी लाल की भाभी और भाजपा उम्मीदवार सोनम ने 21 मतों से हरा दिया है। हार के बाद विजयपाल सिंह अपनी पत्नी को लेने के लिए ब्लॉक जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें और उनके समर्थकों की कार रोक लिया। इस पर विजयपाल सिंह नाराज हो गए और पुलिस से बहस करने लगे। उन्होंने सरकार आने पर देख लेने की धमकी दी।
गौरलतब है कि शनिवार को हुए ब्लॉक प्रमुख चुनावों में पूर्व विधायक की पत्नी और वर्तमान विधायक की भाभी सामने सामने थीं। इसलिए दोनों के बीच जारी तानातनी को देखते हुए पुलिस ने विधि-व्यवस्था को कायम रखने के लिए तमाम उपाय किये थे। पुलिस ने ब्लॉक ऑफिस की ओर जाने वाले तमाम रास्तों पर बैरिकेडिंग कर बंद कर दिया था। ब्लॉक ऑफिस की ओर सिर्फ मतदाता और उनके सहायक ही जा सकते थे।
चुनाव परिणाम घोषित होने और पत्नी के हार जाने के बाद पूर्व विधायक विजयपाल सिंह पार्टी कार्यकर्ताओं को लेकर पत्नी सुनीता सिंह को लेने के लिए मतदान केंद्र जा रहे थे। उसी दौरान पुलिसकर्मियों ने उनकी कार को रोक लिया, इसके बाद सपा के कार्यकर्ता मौके पर इकट्ठा होकर हंगामा करने लगे। सपा कार्यकर्ता अपने प्रत्याशी को कार से लाने की जिद शुरू करने लगे। हालाँकि, सुनीता सिंह पैदल चली आईं, उसे देखकर सपा कार्यकर्ता भड़क गए।