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ओडिशा की हिंदू लड़की, चंडीगढ़ में निकाह के बाद से लापता: माँ-बाप ने सुप्रीम कोर्ट से लगाई गुहार, कहा- उसे बचा लीजिए

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (9 जुलाई 2021) को ‘लव जिहाद’ से जुड़े एक मामले में ओडिशा, जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस भेजा। यह नोटिस ओडिशा के रहने वाले एक हिंदू दंपति की याचिका पर भेजा गया है। याचिका में उन्होंने अपनी बेटी को ‘लव जिहाद’ से बचाने की माँग की है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता के वकील सुदर्शन मेनन ने जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ के समक्ष दलील पेश करते हुए लड़की के चंडीगढ़ में मुस्लिम युवक से निकाह करने और उसके बाद गायब होने की कहानी बताई। वकील ने कहा कि शादी के बाद बेटी कहाँ है, किस हाल में है, माता-पिता को इसकी कोई खबर ही नहीं है। उनकी बेटी निकाह के बाद से लापता हो गई है। दलील सुनने के बाद कोर्ट ने तीनों राज्यों को नोटिस भेजा। सुनवाई की अगली तारीख 23 जुलाई तय की गई है।

लड़की के माता-पिता कविता और केदारनाथ ने अपनी बेटी की जान को खतरा होने की आशंका में सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (habeas corpus writ) दायर की थी। उनकी बेटी ने लखनऊ जाने से पहले ओडिशा के बेरहामपुर में जम्मू-कश्मीर के युवक के साथ बी फार्मा की पढ़ाई की थी। फिर नौकरी की तलाश में चंडीगढ़ चली गई और निकाह कर ली। उसकी आखिरी सुराग जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा में मिला, उसके बाद से वह गायब है। लड़की ने जिस युवक से शादी की, वह बांदीपोरा का ही रहने वाला है।

लड़की के माता-पिता ने कहा कि बेटी किसी भी धर्म या जाति में विवाह करे, उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी अपनी पसंद के हिंदू, ईसाई या मुस्लिम लड़के से शादी करती है तो उन्हें उससे दिक्कत नहीं है। लेकिन उन्हें आशंका है कि शादी के लिए उनकी बेटी के साथ जबरदस्ती की गई है। उन्होंने बताया कि उन्हें उनकी बेटी से शादी करने वाले युवक के हिंदू लड़कियों का शिकार करने वालों के सिंडिकेट में शामिल होने की खबर मिली है।

माता-पिता ने कहा कि वे चंडीगढ़ गए और बेटी को अपने साथ लाने की कोशिश की, लेकिन उनके प्रयास विफल रहे। उन्होंने बताया कि मुस्लिम युवक के साथ उनकी बेटी ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से सुरक्षा की गुहार लगाई। बाद में याचिका वापस ले ली गई और वे दोनों गायब हो गए। माता-पिता ने कहा कि हमारा बेटी से संपर्क नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि अपराधियों का सिंडिकेट उसे अवैध गतिविधियों या राष्ट्रीय सुरक्षा को लिए खतरनाक कार्यों के लिए मजबूर कर सकता है।

एंटी CAA प्रदर्शन, Pak दौरा: विदेशी यूट्यूबर ने कई बार किया नियमों का उल्लंघन, वीजा रद्द होने पर खेल रहा विक्टिम कार्ड

भारत में रहने वाले न्यूजीलैंड के वीलॉगर कार्ल रॉक ने शुक्रवार (जुलाई 9, 2021) को आरोप लगाया कि भारत सरकार ने उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया है। कार्ल रॉक एक वीलॉगर है, जो ट्रेवल से जुड़े वीडियोज बनाता है और 2 साल पहले वो भारत में शिफ्ट हो गया था। उसने एक भारतीय महिला से शादी भी कर रखी है। यूट्यूबर ने दावा किया कि वो कुछ दिनों के लिए दुबई और पाकिस्तान रहने गया था, लेकिन पता चला कि उसका वीजा कैंसल कर दिया गया है।

उसका कहना है कि जब वो दुबई लौटा और वीजा रिन्यू करने की कोशिश की तो उसे पता चला कि ये तो कैंसल किया जा चुका है। पहले ये अंदेशा जताया जा रहा है कि भारत सरकार विरोधी प्रदर्शनों के समर्थन के लिए उस पर ये बंदिश लगाई गई है। CAA विरोधी आंदोलनों में वो सक्रिय रहा था। लेकिन, अब केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों ने कहा है कि वीजा नियमों के उल्लंघन के कारण भारत म घुसने से उसे रोका गया।

वो टूरिस्ट वीजा लेकर भारत में आया था, लेकिन यहाँ आकर बिजनेस कर रहा था। अब पता चला है कि भारत में रहने के दौरान उसने कम से कम 3 बार वीजा नियमों का उल्लंघन किया। सरकारी सूत्रों ने ऑपइंडिया को बताया कि उसे सबसे पहले 2016 में 2 वर्षों के लिए टूरिस्ट वीजा दिया गया था। लेकिन, उसने “Indian Survival Guided” नामक पुस्तक का प्रकाशन कर के इसका उल्लंघन किया, जिसकी अनुमति इस वीजा के अंतर्गत नहीं है।

इसके दो साल बाद 2018 में उसे 5 सालों के लिए फिर से टूरिस्ट वीजा दिया गया। इसके बाद उसने कुछ ऐसे ‘रिस्ट्रिक्टेड एरियाज’ का दौरा किया, जहाँ विदेशियों, खासकर टूरिस्ट वीजा धारकों को जाने की अनुमति नहीं है। उसने जी न्यूज के एक लेख ‘अतुल्य भारत’ में दिल्ली के कनॉट प्लेस में ठगों के पर्दाफाश का दावा किया था। टूरिस्ट वीजा पर पत्रकारिता से लेकर मीडिया एक्टिविटी पर रोक है।

2018 में सरकार ने उसे X-2 वीजा भी दिया था और 2024 तक देश में रहने की अनुमति प्रदान की गई थी। 3 बार पहले ही वीजा नियमों का उल्लंघन कर चुके कार्ल रॉक ने इस बार CAA (नागरिकता संशोधन कानून) विरोधी आंदोलनों में न सिर्फ भाग लिया, बल्कि अपने यूट्यूब चैनल से भी इसे दिखाया। दिसंबर 2019 में उसने अपनी पत्नी के साथ एक CAA विरोधी आंदोलन का वीडियो डाला।

जबकि वीजा नियम ये कहता है कि कोई विदेशी भारत में आकर राजनीतिक गतिविधियों में भाग नहीं ले सकता। उसकी इन सभी करतूतों के कारण केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संज्ञान लिया और उसका वीजा रद्द किया। साथ ही वो बार-बार आतंकी मुल्क पाकिस्तान का भी दौरा करता था। कई महीनों तक वो वहाँ रहा था। फिर उसने दावा किया कि वो 3 साल पहले ही पाकिस्तान छोड़ चुका है क्योंकि वहाँ की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI उसे जासूस समझ कर उस पर नजर रख रही थी।

उसने दावा किया था कि 2018 में उस पर इतनी नजर रखी जा रही थी कि उसे पाकिस्तान छोड़ दिया। मई 2018 के एक वीडियो में उसने कहा था कि चल कर सीमा पार करने के कारण ISI के लोग उसके पीछे पड़े हुए थे। उसने कहा कि जब वो अमृतसर का बाघा बॉर्डर पार कर के पाकिस्तान गया तो वहाँ के अधिकारियों ने उससे पूछा कि वो कहाँ जा रहा है। उसने जब बताया कि वो पेशावर, लाहौर और इस्लामाबाद जा रहा है तो वो लोग सशंकित हो गए, क्योंकि पेशावर आतंकियों का गढ़ है और अफगानिस्तान की सीमा से लगता है।

इसके बावजूद वो 2020 में पाकिस्तान जाकर तीन महीने रहा। उसने हाल के दिनों में पाकिस्तान के विभिन्न जगहों पर बनाए गए कई वीडियो पोस्ट किए। इसी साल जनवरी-फरवरी में उसने पाक अधिकृत कश्मीर से भी कई वीडियो डाले। हालाँकि, अगर सचमुच ISI उसके दौरे को लेकर सजग रहती तो शायद ही उसे पाकिस्तान में घूमने की आज़ादी मिलती। उसने PoK को ‘दूसरी तरफ का कश्मीर’ बताते हुए कुछ वीडियो डाले थे।

‘आप इस तरह महिलाओं को बदनाम नहीं कर सकते’: प्रोफेसर शहरयार अली को SC की फटकार, स्मृति ईरानी पर की थी अश्लील टिप्पणी

फिरोजाबाद के एसआरके कॉलेज में इतिहास के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शहरयार अली ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। शुक्रवार (जुलाई 9, 2021) को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल किसी को बदनाम करने के लिए नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने उक्त प्रोफेसर को गिरफ़्तारी से राहत नहीं प्रदान की।

उसने फेसबुक पर स्मृति ईरानी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से किसी व्यक्ति की आलोचना की जा सकती है या मजाक बनाया जा सकता है, लेकिन इस दौरान भाषा की मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। प्रोफेसर शहरयार अली ने जमानत याचिका दायर की थी, जिसे ख़ारिज करते हुए कोर्ट ने उसे गिरफ्तार से संरक्षण देने से मना कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “आप इस तरह से महिलाओं को बदनाम नहीं कर सकते। आप सोशल मीडिया का इस्तेमाल सिर्फ किसी की मानहानि करने के लिए नहीं कर सकते। आखिर किस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है? आलोचना या मजाक करने की भी एक भाषा होती है। ऐसा नहीं है कि आप कुछ भी कह दीजिए।” शहरयार अली ने सारी मर्यादा तोड़ते हुए ईरानी पर अश्लील टिप्पणी कर डाली थी।

भाजपा के एक नेता ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद आरोपित के खिलाफ IPC और IT एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मई में भी उक्त प्रोफेसर ने इलाहबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। तब भी उसे गिरफ़्तारी से राहत नहीं दी गई थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि वो एक कॉलेज में वरिष्ठ शिक्षक है, इसीलिए नरमी नहीं दिखाई जा सकती। हाईकोर्ट ने माना था कि इस पोस्ट से दो समुदायों के बीच तनाव भड़कने की आशंका थी।

हाईकोर्ट ने राहत नहीं दी तो प्रोफेसर शहरयार अली ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। प्रोफेसर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने दावा किया कि प्रोफेसर का फेसबुक अकाउंट हैक कर लिया गया था। साथ ही कहा कि पोस्ट की जानकारी मिलते ही माफीनामा पोस्ट किया गया। इस पर कोर्ट ने कहा कि लगता है बाद में ये कहानी गढ़ी गई। पीठ ने कहा कि माफ़ी माँगने के लिए उसी अकाउंट का इस्तेमाल किया गया, इससे स्पष्ट है कि आप अब भी वही अकाउंट चला रहे हैं।

नसबंदी-एक संतान पर बहुत कुछ, 2 से अधिक बच्चे तो न नौकरी-न लड़ सकेंगे चुनाव: UP का जनसंख्या नियंत्रण ड्राफ्ट रेडी

उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानूनी उपायों के रास्ते बनने लगे हैं। राज्य विधि आयोग ने यूपी जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण व कल्याण) विधेयक-2021 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इसमें दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरियों में आवेदन से लेकर स्थानीय निकायों में चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। सरकारी योजनाओं का भी लाभ न दिए जाने का जिक्र है। 

आयोग ने ड्राफ्ट अपनी वेबसाइट http://upslc।upsdc।gov।in/ पर अपलोड कर दी है। 19 जुलाई तक जनता से राय माँगी गई है। विधि आयोग ने यह ड्राफ्ट ऐसे समय में पेश किया है, जब 11 जुलाई को योगी सरकार नई जनसंख्या नीति जारी करने जा रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसमें खास तौर पर समुदाय केंद्रित जागरूकता कार्यक्रम अपनाने पर जोर दिया है। आयोग के मुताबिक इस ड्राफ्ट को तैयार करने के लिए कोई सरकारी आदेश नहीं है। खुद की प्रेरणा से यह ड्राफ्ट आयोग ने तैयार किया है। यूपी में सीमित संसाधन और अधिक आबादी के कारण ये कदम उठाने जरूरी हैं।

2 से अधिक बच्चे होने पर क्या?

नई नीति के अनुसार दो से अधिक बच्चे पैदा करने पर सरकारी नौकरियों में आवेदन और प्रमोशन का मौका नहीं मिलेगा। 77 सरकारी योजनाओं और अनुदान से भी वंचित रखने का प्रावधान है। अगर यह लागू हुआ तो एक साल के भीतर सभी सरकारी अधिकारियों कर्मचारियों स्थानीय निकाय में चुने जनप्रतिनिधियों को शपथ-पत्र देना होगा कि वह इसका उल्लंघन नहीं करेंगे। कानून लागू होते समय उनके दो ही बच्चे हैं और शपथ-पत्र देने के बाद अगर वह तीसरी संतान पैदा करते हैं तो प्रतिनिधि का निर्वाचन रद्द करने और चुनाव न लड़ने देने का प्रस्ताव होगा। सरकारी कर्मचारियों का प्रमोशन तथा बर्खास्त करने तक की सिफारिश है। 

नसबंदी पर इंक्रीमेंट, प्रमोशन  

अगर अभिभावक सरकारी नौकरी में हैं और नसबंदी करवाते हैं तो उन्हें अतिरिक्त इंक्रीमेंट, प्रमोशन, सरकारी आवासीय योजनाओं में छूट, पीएफ में एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन बढ़ाने जैसी कई सुविधाएँ देने की सिफारिश की गई है। 

दो बच्चों वाले दंपत्ति अगर सरकारी नौकरी में नहीं हैं तो उन्हें पानी, बिजली, हाउस टैक्स, होम लोन में छूट व अन्य सुविधाएँ देने का प्रस्ताव है। वहीं एक संतान पर खुद से नसबंदी कराने वाले अभिभावकों को संतान के 20 साल तक मुफ्त इलाज, शिक्षा, बीमा शिक्षण संस्था व सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की सिफारिश है। अगर दंपत्ति गरीबी रेखा के नीचे हैं और एक संतान के बाद ही स्वैच्छिक नसबंदी करवाते हैं तो उनके बेटे के लिए उसे 80 हजार और बेटी के लिए 1 लाख रुपए एकमुश्त दिए जाने की भी सिफारिश है।

ड्राफ्ट में सरकारी कर्मचारियों का प्रमोशन रोकने और बर्खास्त करने तक की सिफारिश है। हालाँकि, ऐक्ट लागू होते समय प्रेगेनेंसी है या दूसरी प्रेगनेंसी के समय जुड़वा बच्चे होते हैं तो ऐसे केस कानून के दायरे में नहीं आएँगे। अगर किसी का पहला, दूसरा या दोनों बच्चे विकलांग हैं तो उसे भी तीसरी संतान पर सुविधाओं से वंचित नहीं किया जाएगा। तीसरे बच्चे को गोद लेने पर भी रोक नहीं रहेगी।

बहुविवाह पर प्रावधान

आयोग ने ड्राफ्ट में धार्मिक या पर्सनल लॉ के तहत एक से अधिक शादियाँ करने वाले दंपतियों के लिए खास प्रावधान किए हैं। अगर कोई व्यक्ति एक से अधिक शादियाँ करता है और सभी पत्नियों से मिलाकर उसके दो से अधिक बच्चे हैं तो वह इस जनसंख्या नीति में नहीं आएगा और यदि उसकी अलग-अलग पत्नियों के दो से कम बच्चे हैं तो उनको इस नीति का लाभ मिलेगा।

किसी धर्म के खिलाफ नहीं

हाल ही में विधि आयोग के अध्यक्ष आदित्यनाथ मित्तल ने कहा था कि हमारे यहाँ जनसंख्या बढ़ रही है। इसी वजह से समस्याएँ पैदा हो रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग जनसंख्या नियंत्रण करने में अपना सहयोग दे रहे हैं, उन्हें ही सरकारी सुविधाएँ और सरकारी संसाधन मिलने चाहिए। उन्हें राज्य सरकार की सभी सुविधाओं का लाभ मिलते रहना चाहिए।

विधि आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि सरकार यूपी में किसी धर्म विशेष या मानवाधिकारों के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह बस यह देखना चाहते हैं कि सरकारी संसाधन और सुविधाएँ उन लोगों को उपलब्ध हों जो जनसंख्या नियंत्रण में मदद कर रहे हैं और योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमने जो ड्राफ्ट तैयार किया है, वह किसी जाति, धर्म या किसी समुदाय विशेष को टारगेट कर नहीं बना रहे हैं। हमारा कानून सीधा है, जो व्यक्ति जनसंख्या नीति को अपनाया उसको तमाम प्रकार की सुविधाएँ मिलेंगी।”

वेद-वेदाङ्ग और उपनिषदों का ज्ञान, सरस्वती सभ्यता का वर्णन: UGC के नए इतिहास सिलेबस में बाबर-खिलजी आक्रांता

‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC)’ ने ‘बैचलर ऑफ आर्ट्स (BA)’ के लिए इतिहास विषय का नया सिलेबस जारी किया है। इसमें ‘पेपर वन’ में ‘आईडिया ऑफ भारत’ विषय है। इसके तहत भारतीय दृष्टिकोण से भारत का इतिहास पढ़ाया जाएगा। इसमें भारतीय इतिहास से सम्बंधित ज्ञान-विज्ञान, कला, संस्कृति और मनोविज्ञान की पढ़ाई कराई जाएगी। जो भारत की अस्तित्व का आधार है, उन चीजों की पढ़ाई इसी विषय के अंतर्गत होगी।

साथ ही इसमें ‘सिंधु सरस्वती सभ्यता’ के बारे में भी पढ़ाया जाना है। इसमें उस समय में भारत के भौगोलिक विस्तार के बारे में पढ़ाया जाएगा। एक चैप्टर भारत की सांस्कृतिक विरासत को लेकर भी है। इसमें एशिया, अमेरिका, अफ्रीका, यूरोप और सोवियत रूस के इतिहास के बारे में भी पढ़ाया जाएगा। भारत में पर्यावरण के बारे में भी एक चैप्टर है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अलावा भारत में संचार के इतिहास में भी अध्ययन कराया जाएगा।

दिल्ली के इतिहास के लिए इसमें एक अलग से विषय है, जिसमें दिल्ली के प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास के बारे में पढ़ाया जाएगा। साथ ही फर्जी इतिहासकारों द्वारा गढ़ी गई आर्य-द्रविड़ थ्योरी को भी इसमें मिथ बताया गया है। समाज में संस्कृति और कला के हिसाब से क्या बदलाव आया, इस पर खास जोर रहेगा। सिलेबस में बताया गया है कि किस तरह ज्ञान के लिए भारत की आत्मा को समझना आवश्यक है।

इसमें जोर दिया गया है कि किस तरह आज जब पूरी दुनिया एक गाँव की तरह हो गई है, तब लोगों को स्थानीय, देश के और महादेश तक के इतिहास से ऊपर उठ कर जानना पड़ता है। बताया गया है कि किस तरह वर्तमान और भूत के बीच संपर्क के लिए इतिहास का ज्ञान ज़रूरी है। इसमें कहा गया है कि आज ज्ञान सिर्फ क्लासरूम तक ही सीमित नहीं है क्योंकि BA में एडमिशन लेने वजन को ‘खाली बर्तन’ की तरह ट्रीट नहीं किया जा सकता।

इसमें कहा गया है कि भारत के इतिहास के विषय में एक नए पुष्ट दृष्टिकोण के लिए ऐसा किया जा रहा है। इसे छात्रों को केंद्र में रख कर तैयार किया गया है। ये प्रोग्राम कुल 6 सेमेस्टर, अर्थात 3 सालों का होगा। एक बेहतर समाज के निर्माण के लिए कैसे इतिहास के ज्ञान का इस्तेमाल किया जाए, इस सम्बन्ध में छात्रों को प्रशिक्षित किया जाएगा। राष्ट्रीय प्रतीकों-भावनाओं, मानवीय मूल्यों और संवैधानिक सिद्धांतों के प्रति सम्मान की भावना भी छात्रों में जगाई जाएगी।

‘आईडिया ऑफ भारत’ के अंतर्गत भारतवर्ष को ठीक तरह से समझा जाएगा। ‘भारत’ शब्द का क्या महत्व व परिभाषा है और इसका क्या अर्थ है, इसे शुरुआत में ही समझाया जाएगा। समय और अंतरिक्ष को लेकर भारतवर्ष की संकल्पना के बारे में जिस विषय में समझाया गया है, उसमें सबसे महत्वपूर्ण है कि भारतीय ऐतिहासिक साहित्य के अंतर्गत वेद-वेदाङ्ग, उपनिषद, जैन-बौद्ध साहित्य और पुराणों के बारे में भी पूरा ज्ञान दिया जाएगा।

साथ ही ब्राह्मी, खरोष्ठी, पाली, प्राकृत और तिगलारी के साथ-साथ संस्कृत भाषा का इतिहास पढ़ाया जाएगा। भारत की शिक्षा व्यवस्था का क्या इतिहास रहा है, ये छात्रों को समझने के लिए मिलेगा। धर्म और दर्शन को लेकर भारत का क्या नजरिया है, इसकी पढ़ाई होगी। भारत में शासन व्यवस्था, जनपद और ग्राम स्वराज्य के बारे में भी पढ़ाई होगी। प्राचीन भारत में विज्ञान और आयुर्वेद-योग जैसी स्वास्थ्य व्यवस्था के बारे में भी पढ़ाई होगी।

प्राकृतिक तौर-तरीके से कैसे भारतीय उपचार विधि विकसित हुई, छात्रों को इसके ज्ञान दिया जाएगा। सिंधु घाटी, सरस्वती और वैदिक सभ्यताओं के बीच समानता को लेकर जो अध्ययन और चर्चाएँ हैं, उस पर भी पढ़ाई होगी। भारतीय प्राचीन साहित्य की डेटिंग में क्या समस्याएँ हैं, इस पर जोर दिया जाएगा। आर्यों के ‘आक्रमण’ को इसमें झूठ बताया गया है और समझाया गया है कि क्यों। वैदिक धर्म व मनोविज्ञान पर एक अलग से चैप्टर है।

तुर्क, खिलजी और तुगलक वंशों को आक्रांता कह कर सम्बोधित किया गया है और इसी नैरेटिव से उनके बारे में पढ़ाया जाएगा। असम, मेवाड़ व मारवाड़ का राजपूत, ओडिशा, कश्मीर और भव्य विजयनगर साम्राज्य पर मुख्य फोकस होगा। ‘बाबर के आक्रमण’ पर चैप्टर है। छत्रपति शिवजी के अंतर्गत मराठा अभ्युदय पर भी फोकस रहेगा। ‘भक्ति मूवमेंट’ के बारे में छात्रों को बताया जाएगा। कुल मिला कर इस सिलेबस में भारतीय इतिहास की एक सही समझ विकसित करने के इरादे की झलक दिखती है।

जब इसका ड्राफ्ट सामने आया था, तब ओवैसी ने भाजपा पर यह आरोप लगा दिया था कि भाजपा अपनी हिन्दुत्व की विचारधारा को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने का कार्य कर रही है। ओवैसी ने कहा था कि शिक्षा प्रोपेगंडा नहीं है। उन्होंने कहा था, “भाजपा हिन्दुत्व की विचारधारा को पाठ्यपुस्तकों में शामिल कर रही है। माईथोलॉजी को स्नातक कार्यक्रमों में नहीं पढ़ाना चाहिए। पाठ्यक्रम मुस्लिम इतिहास को मलीन कर रहा है।”

ससुराल में रवीना बानो को 3 दिन तक थर्ड डिग्री टॉर्चर, प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोटें: जेठ-देवर ने की छेड़खानी

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से दहेज के लिए एक विवाहिता को थर्ड डिग्री टॉर्चर देने का मामला सामने आया है। पीड़ित महिला का नाम रवीना बानो है। पुलिस को दी शिकायत में उसने अपने ससुराल के लोगों पर जान से मारने की कोशिश का आरोप लगाया है। उसके प्राइवेट पार्ट्स पर गंभीर चोटें आई है। साथ ही देवर और जेठ पर छेड़खानी का भी आरोप लगाया है।

मामला मैनपुरी जिले के भौगाँव थाना क्षेत्र के फाजलगंज मोहल्ला का है। पीड़िता के मुताबिक जब नसीम अली से उसका निकाह हुआ तो शुरुआत में सब ठीक था। कुछ दिन बाद ससुराल में दहेज के लिए उसकी प्रताड़ना शुरू हुई। उसके मायके वालों ने मॉंग पूरी करने में असमर्थता जताई तो निकाह टूटने की बात आ गई।

इसके बाद पारिवारिक पंचायत हुई और ससुराल वाले पीड़िता को घर ले आए। कुछ दिन सब ठीक रहने के बाद प्रताड़ना का फिर वही दौर शुरू हो गया। इससे आजिज आकर महिला ने पुलिस से शिकायत की तो कुछ दिनों के लिए प्रताड़ना बंद हो गई।

उसका आरोप है कि पहले भी कई बार मारपीट कर उसे घर से निकाला गया था। केस करने पर कुछ दिन सब ठीक रहा। पीड़िता के अनुसार अचानक से एक दिन ससुराल के लोगों मारने की नीयत से उसे टॉर्चर करना शुरू किया। उसने कहा, “ससुराल ले जाने के बाद मुझे बार-बार प्रताड़ित किया गया। लाठी-डंडों और लात-घूँसों से पीटा गया। थोड़ा-थोड़ा पानी पिलाकर, हाथ बाँधकर फाँसी के फंदे पर लटकाने की भी कोशिश की। देवर मोहम्मद कमाल ने छेड़छाड़ भी की।”

पीड़िता ने आगे कहा, “जब मैंने इस मामले की शिकायत की तो सास-ससुर, जेठ-जेठानी, देवर और ननद ने मिलकर मारपीट की। तीन दिन तक घर में कैद रखा। इसके बाद मैं किसी तरह से जान बचाकर भोगाँव थाने पहुँची और शिकायत दर्ज कराई। हालाँकि, शांति भंग के मामले में मेरे पति को जमानत दे दी गई है।” पीड़िता ने कहा है कि उसे और उसके बच्चे की जान को खतरा है। महिला थाना प्रभारी एकता सिंह ने केस दर्ज मामले की जाँच शुरू कर दी है।

5वीं से ऊपर के बच्चों को फ्री कंडोम: अमेरिका के शिकागो में स्कूलों के लिए नई नीति, नेटिजन्स नाराज

अमेरिका के शिकागो में स्कूलों के लिए नई पॉलिसी लागू की गई है। इस पॉलिसी के तहत स्कूलों को पाँचवीं और उससे ऊपर की क्लास के बच्चों के लिए मुफ्त में कंडोम की व्यवस्था करनी होगी। यानी स्कूल 10 साल की उम्र तक के बच्चों के लिए कंडोम की व्यवस्था करेंगे। इस नई पॉलिसी के बाद बच्चों के माता-पिता और नेटिजन्स की तरफ से आलोचनात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

जानकारी के मुताबिक नई नीति दिसंबर 2020 में वापस पारित की गई थी। लेकिन कोरोना महामारी के कारण स्कूल बंद होने पर इसे पूरी तरह से लागू नहीं किया जा सका। नीति में पाँचवीं और उससे ऊपर की कक्षा वाले स्कूलों को कंडोम उपलब्धता कार्यक्रम रखने को कहा गया है।

नई पॉलिसी में कहा गया, “शिकागो पब्लिक स्कूल (CPS) स्वीकृत स्कूल प्रतिनिधियों द्वारा माता-पिता को अधिसूचना और कंडोम तक पहुँच के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करता है। सीपीएस छात्रों के बीच एचआईवी संक्रमण और अनचाही गर्भावस्था सहित यौन संचारित रोगों के प्रसार को कम करने के लिए जारी प्रयास में शिकागो के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा बिना किसी कीमत के कंडोम प्रदान करेगा।”

इस नीति के तहत महिलाओं को भी मासिक धर्म स्वच्छता उत्पादों को मुफ्त में उपलब्ध कराया जाएगा। नीति में कहा गया, “सभी स्कूल मासिक धर्म संबंधी स्वच्छता उत्पाद, स्कूल भवन के कम से कम एक बाथरूम में छात्रों को बिना किसी कीमत के उपलब्ध कराएँगे।” बता दें कि शिकागो पब्लिक स्कूल सिस्टम में 600 से अधिक स्कूल हैं, जिनमें से अधिकांश में पाँचवीं या उससे ऊपर की कक्षा हैं।

शिकागो में स्कूलों की लेकर नई पॉलिसी के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तमाम तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इस पर आश्चर्य और ऐतराज जता रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग अपने गुस्से का इजहार करते हुए इसे बीमार मानसिकता बता रहे हैं।

7 पायलटों की टारगेट किलिंग, तालिबान ने अफगानिस्तान के 85% हिस्से पर कब्जे का किया दावा: 1000 जवान तजाकिस्तान भागे

जहाँ एक तरफ अमेरिका तेजी से अफगानिस्तान से अपनी सेना हटा रहा है, वहीं दूसरी तरफ तालिबान ने दावा किया है कि इस मुल्क के 85% भू-भाग पर अब उसका ही राज़ है। अफगानिस्तान में तालिबान ने हाल ही में पायलटों की हत्या की है, जिसके बाद वहाँ की वायुसेना के अधिकारी भी अपना घर-संपत्ति बेच कर किसी सुरक्षित जगह बसने में लगे हुए हैं। ऐसे ही एक अधिकारी और एक रियल एस्टेट एजेंट की गोली मार कर हत्या कर दी गई।

पिछले कुछ महीनों में अफगानिस्तान के 7 पायलटों की हत्या कर दी गई है। ये टारगेट किलिंग है, जिसका उद्देश्य है कि अमेरिका और नाटो द्वारा प्रशिक्षित किए गए अफगानिस्तान के पायलटों का सफाया कर दिया जाए। चूँकि तालिबान के पास कोई वायुसेना नहीं है, इसीलिए वो जमीन पर युद्ध के लिए अफगानिस्तान के सुरक्षा बलों को मजबूर कर रहा है, क्योंकि यही उसकी मजबूती है। इसीलिए, वायुसेना अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है।

समाचार एजेंसी रायटर्स को तालिबान के एक प्रवक्ता ने बताया कि उसने अफगानिस्तान के पायलटों को निशाना बनाने का एक अभियान शुरू किया है, क्योंकि ये लोग उनके ठिकानों पर बमबारी करते हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट का कहना है कि 2021 के पहले 3 महीनों में तालिबान के कारण 229 नागरिकों की मौत हुई है और अफगानिस्तान की वायुसेना 41 नागरिकों की मौत का कारण बनी है।

अफगानिस्तान की सरकार ने पायलटों की हत्याओं पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अमेरिका का कहना है कि वो इस तरह की घटनाओं से वाकिफ है। अफगानिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि पायलटों को प्रशिक्षित करने में वर्षों लगते हैं और वो न सिर्फ थलसेना की ज़रूरी मदद करते हैं, बल्कि आतंकी ठिकानों पर बमबारी से लेकर हमले की साजिश रच रहे तालिबानी आतंकियों को निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं।

ये पायलट जहाँ रह रहे होते हैं, वहीं आसपास से आतंकी आकर उन्हें निशाना बना देते हैं। काबुल के बाहर बगराम एयर बेस को अमेरिकी वायुसेना ने अपना मुख्य ठिकाना बनाया था, लेकिन अब वो इसे खाली कर चुके हैं। अफगानिस्तानी पायलट तालिबान की हिट लिस्ट में शीर्ष पर हैं। अमेरिका ने कहा है कि वो अफगानिस्तानी सेना की मदद करता रहेगा। लॉजिस्टिक्स से लेकर प्रशिक्षण और साजोसामान तक के लिए अफगान सुरक्षा बल अमेरिका पर ही निर्भर हैं।

अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग को आशंका है कि अगले 6 महीनों के भीतर अफगानिस्तान की सरकार गिर सकती है। हाल ही में एक हैलीकॉप्टर को शूट कर के तालिबान ने दो अफगान पायलटों को मार डाला। अफगानिस्तान की सरकार ने कहा कि एयरक्राफ्ट क्रैश हुआ है, जबकि उसने इसका कोई कारण नहीं बताया। अफगान सेना के पास महज 13 Mi-17 हैलीकॉप्टर थे और उन्हें उड़ाने के लिए 65 पायलट।

अफगानिस्तान के पास कुल 160 एयरक्राफ्ट हैं और उन्हें उड़ाने के लिए 339 एयर क्रू है, जो अमेरिकी कमर्शियल कंपनी ‘साउथवेस्ट एयरलाइन्स’ की क्षमता से भी कम है। इनमें से भी 140 ही ऐसे हैं जिन्हें उपयोग में लाया जा सकता है। बाकी मेंटेनेंस में लगे हुए हैं। अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग का मानना है कि यही स्थिति रही तो अफगानिस्तान की वायुसेना कुछ महीनों में प्रभावहीन हो जाएगी।

मेंटेनेंस के लिए कॉन्ट्रैक्टर्स भी अब अफगानिस्तान में कम हो जाएँगे, जिसके बाद उसे एयरक्राफ्ट्स को इसके लिए विदेश भेजना पड़ेगा। कहा जा रहा है कि अफगानिस्तान के 407 जिलों में से आधे के लगभग, यानी 203 जिलों पर तालिबान का कब्ज़ा है। हाल ही में उसने अपने कब्जे वाले जिलों की संख्या दोगुनी की है, जिसके बाद वो ये आँकड़े तक पहुँचा। अमेरिका का कहना है कि 100 जिलों पर तालिबान का कब्ज़ा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन का कहना है कि वो अफगानिस्तान की सेना पर भरोसा करते हैं, जो अमेरिका के वहाँ से निकलने के बाद मुल्क को संभालेगी। मुल्क छोड़ चुके एक वरिष्ठ पायलट ने बताया कि एक पायलट के प्रशिक्षण वगैरह पर बड़ी रकम खर्च होती है, लेकिन उनकी सुरक्षा पर कुछ खर्च नहीं किया जाता। अफगानिस्तान सुरक्षा बल के 1000 जवान भाग कर पड़ोसी तजाकिस्तान में चले गए थे, जिनमें से 300 लौट आए।

तालिबान के एक प्रतिनिधिमंडल ने रूस का दौरा भी किया। राजधानी मॉस्को में पहुँचे इस प्रतिनिधिमंडल ने रूस को आश्वासन दिया कि अफगानिस्तान में उसका प्रभाव बढ़ने से रूस या मध्य एशिया में उसके सहयोगी देशों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। तजाकिस्तान ने 20,000 सैनिकों को अपनी दक्षिणी सीमा पर लगाया है, ताकि अफगानिस्तान में तालिबानी खतरे को वहाँ घुसने से रोका जाए। तालिबान का कहना है कि वो लड़ाई नहीं, बल्कि ‘राजनीतिक समाधान’ चाहता है।

शिवलिंग, छिद्र और रहस्य: महादेव का गुफा मंदिर, परशुराम को फरसा और कर्ण को विद्या मिलने की स्थली

राजस्थान, वह भूमि है जो क्षत्रियों और क्षत्राणियों की शौर्य गाथाओं से सुसज्जित है। राज्य में कई ऐसे स्थान हैं जो अपने ऐतिहासिक महत्व के कारण भारत भर में प्रसिद्ध हैं। यहाँ के किले-कोठियाँ, महल और धर्म स्थल पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। इन ऐतिहासिक इमारतों के अलावा राजस्थान में कई ऐसे मंदिर भी हैं जिनका इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। राजसमंद और पाली जिले की सीमा पर स्थित है चमत्कारिक परशुराम महादेव मंदिर का इतिहास सैकड़ों नहीं, बल्कि युगों पुराना है। मान्यता है कि इसी स्थान पर परशुराम ने भगवान शिव की तपस्या की थी और दिव्य अस्त्रों को प्राप्त किया था।

इतिहास

परशुराम, भगवान विष्णु के छठवें अवतार हैं। लेकिन यह सर्वविदित है कि भगवान विष्णु और महादेव एक-दूसरे को ही अपना ईश्वर मानते हैं। इसके चलते परशुराम ने भी भगवान शिव की कठिन तपस्या की। ऐसा माना जाता है कि महान तपस्वी परशुराम ने इस स्थान पर भगवान शिव की आराधना की और उनके दर्शन प्राप्त किए। अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित इस मंदिर का निर्माण उन्होंने ही किया था। परशुराम की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें धनुष और अक्षय तरकश प्रदान किया। इसके अलावा जिस फरसे के लिए परशुराम जाने जाते हैं, वह फरसा भी उन्हें भगवान शिव से इसी स्थान पर प्राप्त हुआ था। इसके बाद उन्होंने अपने फरसे से ही चट्टानों को काटकर महादेव के इस गुफा मंदिर का निर्माण किया था।

मंदिर में स्थापित शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है। कहा जाता है कि पृथ्वी के 8 चिरंजीवियों में से एक परशुराम की तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव, शिवलिंग के रूप में यहाँ स्थापित हुए। स्थानीय तौर पर इस मंदिर को अमरनाथ कहा जाता है क्योंकि जिस प्रकार अमरनाथ में भगवान शिव का साक्षात निवास माना जाता है, ठीक उसी प्रकार इस स्थान पर भी महादेव की मौजूदगी को महसूस किया जाता है। पहाड़ी पर बने इस गुफा मंदिर तक पहुँचने के लिए 500 सीढ़ियों का सफर तय करना पड़ता है। समुद्र तल से मंदिर की ऊँचाई लगभग 3600 फुट है। गुफा मंदिर की दीवारों पर एक राक्षस की आकृति दिखाई देती है जिसके बारे में यह कहा जाता है कि उसका संहार भी परशुराम द्वारा किया गया था। इसके अलावा मंदिर में भगवान शिव, माता पार्वती और कार्तिकेय भगवान की मूर्तियाँ बनी हुई हैं।

रोचक तथ्य

ऐसा माना जाता है कि वही व्यक्ति उत्तराखंड स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट खोल सकता है जिसने परशुराम महादेव के दर्शन किए हों। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि यह वही स्थान है जहाँ परशुराम ने पांडवों में सबसे ज्येष्ठ कर्ण को शिक्षा प्रदान की थी। हालाँकि कर्ण ने स्वयं को ब्राह्मण बताकर परशुराम से शिक्षा प्राप्त करने का प्रयत्न किया था, लेकिन जब परशुराम को इस बात का पता चला तो उन्होंने कर्ण को मौका आने पर सारी विद्या भूल जाने का श्राप दे दिया था।

मंदिर में स्थापित शिवलिंग भी किसी रहस्य से कम नहीं है। दरअसल इस शिवलिंग में छिद्र हैं, इस कारण जब इसमें जल चढ़ाया जाता है तो यह सैकड़ों लीटर जल को अपने अंदर समाहित कर लेता है, लेकिन जब शिवलिंग को दूध अर्पित किया जाता है तो यह दूध शिवलिंग में समाता ही नहीं है। यह एक ऐसा रहस्य है जो आज भी अनसुलझा है।

परशुराम महादेव मंदिर में अक्षय तृतीया, महाशिवरात्रि, रामनवमी और नवरात्रि जैसे त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं। हर साल श्रावण महीने में यहाँ मेला लगता है। इस मेले में शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और भगवान शिव के दर्शन के साथ परशुराम को भी नमन करते हैं।

कैसे पहुँचे

परशुराम महादेव मंदिर का नजदीकी हवाई अड्डा महाराणा प्रताप एयरपोर्ट, उदयपुर है जो यहाँ से लगभग 140 किमी की दूरी पर है। रेलमार्ग के माध्यम से मंदिर तक पहुँचने के लिए फालना या रानी गाँव के रेलवे स्टेशन का सहारा लिया जा सकता है। यह रेलवे स्टेशन गुफा मंदिर से लगभग 40 किमी की दूरी पर है। परशुराम महादेव गुफा मंदिर कुंभलगढ़ किले से लगभग 9 किमी की दूरी पर स्थित है। परशुराम महादेव मंदिर का निर्माण कुछ इस प्रकार हुआ है कि गुफा राजसमंद जिले में आती है तो यहाँ स्थित जल कुंड पाली जिले में।

केजरीवाल मॉडल पर यूपी में योगी से भिड़ेंगे अखिलेश यादव, सपा के घोषणापत्र में होगा ये फ्री-वो फ्री: रिपोर्ट्स

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2022 में योगी सरकार से मुकाबले के लिए अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी केजरीवाल मॉडल की तरह फ्री-फ्री वाली चुनावी घोषणाएँ कर सकती है। माना जा रहा है कि उनकी घोषणाओं में फ्री बिजली और बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार का वादा प्रमुखता से शामिल हो सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सपा दिल्ली के केजरीवाल सरकार के फ्री मॉडल पर चुनावी लड़ाई लड़ेगी। इसके अलावा वह बिहार चुनावों में राजद की तरह यूपी के 10 लाख युवाओं को रोजगार देने का लुभावना वादा भी कर सकती हैं। 

उल्लेखनीय है कि हाल में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और आप नेता संजय सिंह की मुलाकात के कारण ऐसे कयास लगने शुरू हुए थे। कुछ लोगो ने कहा था कि अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल आगामी यूपी चुनाव के लिए एक साथ आ सकते हैं जबकि आप सांसद और यूपी के प्रभारी संजय सिंह ने इसे शिष्टाचारी मुलाकात करार दिया था।

ये बात ध्यान देने योग्य है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल यूपी में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ाने की कोशिशों में लगे हैं। इसके अलावा बीते 1 साल में प्रदेश में सक्रिय आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह लगातार अलग-अलग मुद्दों पर यूपी सरकार को घेर रहे हैं। कुछ दिन पहले अखिलेश यादव से संजय सिंह ने मुलाकात कर राजनीतिक अटकलों को तेज कर दिया था।

बता दें कि एक ओर जहाँ समाजवादी पार्टी के AAP की राह पर चलने की बातें हो रही हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनी कमर को कस लिया है। कहा जा रहा है आगामी चुनावों के लिए भाजपा के एक-एक कार्यकर्ता को विशेष तरह की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए भाजपा ने होमवर्क प्लॉन तैयार किया है जिसमें भाजपा अपने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को स्पेशल ट्रेनिंग देगी और उसके बाद विकास पुस्तिका के साथ उन्हें चुनावी मैदान में उतारेगी।

पिछले माह पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष लखनऊ के दौरे पर थे। उन्होने प्रदेश संगठन के साथ मिलकर चुनावी रणनीति तैयार की है। पार्टी जीतने के लिए बाकायदा होमवर्क में जुटी हैं जबकि सपा की रणनीति भी मैदान में दिखने लगी है। पार्टी ने भाजपा को हराने के लिए नया नारा दिया है- “नई हवा है नई सपा है बड़ों का हाथ, युवा का साथ। काम ही बोलेगा-2022 में बीजेपी की पोल खोलेगा।”