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केरल में 6 साल की मासूम बच्ची की रेप के बाद हत्या: रस्सी से लटकता मिला शव, आरोपित 22 वर्षीय माकपा कार्यकर्ता गिरफ्तार

केरल में सोमवार (6 जुलाई 2021) को एक बच्ची से बलात्कार करने और फिर उसकी हत्या करने के आरोप में डीवाईएफआई (DYFI) कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया गया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना इडुक्की जिले की है। केरल पुलिस ने सत्तारूढ़ माकपा की युवा शाखा डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) के एक स्थानीय कार्यकर्ता को 6 साल की बच्ची से रेप करने के बाद कथित तौर पर उसकी हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने बताया कि आरोपित 22 वर्षीय अर्जुन ने तीन साल तक बच्ची के साथ कई बार रेप की घटना को अंजाम दिया था। नाबालिग का शव उसके माता-पिता के घर में फंदे से लटका हुआ पाया गया।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “यह घटना 30 जून को हुई थी, शुरुआत में पुलिस ने दुर्घटनावश मौत का मामला दर्ज किया था। हमें बताया गया था कि खेलते समय गलती से एक शॉल बच्ची के गले में बँध गई थी। उस दौरान बच्ची के माता-पिता घर पर नहीं थे।” हालाँकि, पोस्टमॉर्टम में खुलासा हुआ है कि बच्ची के साथ लंबे समय से दुष्कर्म किया जा रहा था, जिससे पुलिस को इस मामले से जुड़ा एक अहम सुराग हाथ लगा।

पुलिस ने आगे कहा कि आरोपित ने कबूल किया कि उसने तीन साल तक बच्ची को मिठाई, टॉफी का लालच देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपित ने पुलिस को बताया कि 30 जून को जब बच्ची के माता-पिता घर पर नहीं थे, वह मौका पाकर वहाँ घुस गया। उसने बच्ची के साथ रेप किया, जिसके बाद जब वह बेहोश हो गई। इससे वह बेहद डर गया और अपना जुर्म छिपाने के लिए बच्ची की हत्या कर उसके शव को शॉल से बाँधकर कमरे में एक रस्सी से लटका दिया।

बता दें कि डीवाईएफआई के सदस्य अर्जुन तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता भी है। उसने महामारी के दौरान एक स्वयंसेवक के रूप में भी काम किया है।

महिला सहकर्मी का यौन शोषण करने के आरोप में माकपा नेता गिरफ्तार

हमने पिछले हफ्ते रिपोर्ट की थी कि केरल पुलिस ने दो सीपीएम नेताओं पीपी बाबूराज और टीपी लिजेश के खिलाफ एक महिला पार्टी कार्यकर्ता का यौन उत्पीड़न और ब्लैकमेल करने का मामला दर्ज किया है। पार्टी की महिला कार्यकर्ता की शिकायत के अनुसार, मुलियेरी ईस्ट ब्रांच के सीपीएम सचिव बाबूराज ने तीन महीने पहले उनके घर में घुसकर उन्हें धमकी दी और रेप किया था। कथित तौर पर, बाबूराज ने उसे ब्लैकमेल करके उसका यौन उत्पीड़न करना जारी रखा, उसके पति को घटना के बारे में बताने की धमकी भी दी।

शिकायतकर्ता के अनुसार, लिजीश, जो उसी ब्रांच से सीपीएम का सदस्य भी है, ने भी उसे धमकी दी और ब्लैकमेल किया कि वह शिकायत न करे या घटना का खुलासा न करे। दोनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (2), 354 (ए), 109 और 376 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

‘₹10 करोड़ दें तो भी नहीं करूँगा फिरोज नाडियाडवाला की फिल्म’: वेलकम के एक्टर को अब तक नहीं मिला है पेमेंट

स्क्रीन पर फिल्में देखते हुए हम कई बार साइड एक्टर्स को भुला देते हैं, लेकिन हकीकत में उनकी मौजूदगी ही कहानी को आगे बढ़ाने में सहायक होती है। ऐसे ही एक साइड एक्टर स्नेहल डाबी भी हैं। उनकी एक्टिंग हमने कई फिल्मों में देखी है। लेकिन इसके बदले उन्हें कीमत क्या मिलती है या मिलती भी है या नहीं, ये कोई नहीं जानता। हाल में स्नेहल डाबी ने बताया है कि उन्हें करीब 14 साल बाद भी वेलकम फिल्म में काम करने मेहनताना फिरोज नाडियाडवाला ने नहीं दिया है।

बॉलीवुड हंगामा से बात करते हुए स्नेहल ने अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा, “फिरोज नाडियाडवाला मुझे 10 करोड़ रुपए भी देंगे फिर भी उनकी फिल्म नहीं करूँगा। फिरोज भाई वादा करते हैं फिर घूम जाते हैं।” वेलकम में काम करने के बदले कोई रकम न मिलने की बात कहते हुए स्नेहल ने कहा, “मुझे आज तक पैसे नहीं मिले। फिरोज भाई कहते रहे कि देता हूँ पैसा। इसके बाद मेरा मोहभंग हो गया कि ये कैसी इंडस्ट्री है।”

स्नेहल ये भी बताते हैं कि उनके साथ ये पहली दफा नहीं हुआ। वह कहते हैं, “मैंने एक फिल्म में ऐक्टिंग की थी जिसका नाम शेर था और इसमें संजय दत्त और विवेक ओबेरॉय मुख्य भूमिका में थे। मैंने इस फिल्म को लिखा भी था। हमने फिल्म की शूटिंग 50 डिग्री के तापमान में की थी। 85 पर्सेंट फिल्म का काम पूरा भी हो गया था। अचानक प्रोडक्शन हाउस ने इस फिल्म को बंद कर दिया। पैसे ही नहीं आए उस फिल्म के। सोचिए मुझे कैसा लगा होगा। ऐसा ही वेलकम के साथ भी हुआ। हम लोग फिल्म की शूटिंग के लिए दुबई जाते रहते थे, मगर मुझे कभी इसके पैसे नहीं मिले।”

उल्लेखनीय है कि फिरोज नाडियाडवाला बॉलीवुड इंडस्ट्री के जाने-पहचाने प्रोड्यूसर हैं। उनकी फिल्म वेलकम में स्नेहल डाबी ने काखिल का रोल अदा किया था। इसके अलावा उन्होंने दीवाने हुए पागल (2005) में कुट्टी अन्ना का रोल अदा किया था। इसके अलावा स्नेहल हेराफेरी में अपने ‘रापचिक माल’ डायलॉग और लव के लिए कुछ भी करेगा (2001) में फनी रोल करके भी फेमस हो चुके हैं। वह फिल्म इंडस्ट्री में 1997 से सक्रिय हैं।

8 राज्यों को मिले नए गवर्नर, मोदी कैबिनेट के विस्तार की अटकलों के बीच बड़ा बदलाव

मोदी सरकार में कैबिनेट विस्तार से ठीक एक दिन पहले तमाम अटकलों के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश के 8 राज्यों में नए राज्यपाल की नियुक्ति की है। केंद्र में कैबिनेट मंत्री रहे थावरचंद गहलोत को कर्नाटक का राज्यपाल, वहीं हरि बाबू कंभमपति को मिजोरम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

इसके साथ ही मंगूभाई छगनभाई पटेल को मध्य प्रदेश, राजेंद्रन विश्वनाथ अर्लेकर को हिमाचल प्रदेश, श्रीधरन पिल्लई को गोवा, सत्यदेव नारायण आर्य को त्रिपुरा, रमेश बैस को झारखंड और बंडारू दत्तात्रेय को हरियाणा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

गौरतलब है कि 8 राज्यपालों की एक साथ ये सबसे बड़ी नियुक्ति है। इससे पहले अगस्त 2018 में 7 राज्यों में एक साथ राज्यपाल बदले गए थे। राज्यपालों की नियुक्ति का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के कैबिनेट विस्तार से पहले पार्टी और सरकार के स्तर पर बैठकों का दौर जारी है।

हाल ही में पीएम मोदी ने भाजपा नेता और पदाधिकारी बीएल संतोष, गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। कहा जा रहा है यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट में फेरबदल करते हैं तो मई, 2019 में प्रधानमंत्री के तौर पर दूसरी पारी शुरू करने के बाद मंत्रिपरिषद का यह पहला बड़ा विस्तार होगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुशील मोदी उन संभावित लोगों में शामिल माने जा रहे हैं जिन्हें मोदी मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि इस विस्तार में उत्तर प्रदेश को खास तवज्जो मिल सकती है क्योंकि अगले साल की शुरुआत में वहाँ विधानसभा चुनाव है और राजनीतिक रूप से यह प्रदेश देश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

मीडिया में सूत्रों के हवाला देते हुए यह भी दावा किया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व भी इस कैबिनेट विस्तार में बढ़ सकता है। माना जा रहा है कि भाजपा के सहयोगियों जदयू और अपना दल (एस) को भी प्रतिनिधित्व मिल सकता है। अभी तक आरपीआई नेता राम दास आठवले इकलौते ऐसे गैर भाजपाई नेता हैं जो नरेंद्र मोदी मंत्रिपरिषद में शामिल हैं।

लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान के निधन के बाद अब सबकी नजरें इस ओर हैं कि उनके भाई पशुपति कुमार पारस को मंत्री बनाया जाता है या नहीं। मौजूदा मंत्रिपरिषद में कुल 53 मंत्री हैं और नियमानुसार अधिकतम मंत्रियों की संख्या 81 हो सकती है।

‘मनचाहा समय नहीं ले सकते, भारत का कानून मानना ही पड़ेगा’: दिल्ली HC ने ट्विटर को फटकारा, दिया 8 जुलाई तक का समय

माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर ने अब तक नए आईटी नियमों के हिसाब से ग्रीवांस रेड्रेसल ऑफिसर की तैनाती नहीं की, जिस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने भी उसे फटकार लगाई। जस्टिस रेखा पल्ली ने ट्विटर से पूछा कि आपकी प्रक्रिया कितना समय लेती है? उन्होंने कहा कि अगर ट्विटर को लगता है कि हमारे देश में वो जितना समय चाहे उतना समय ले सकता है, तो हम इसकी अनुमति नहीं दे सकते। ट्विटर पहले ही कई कारणों से घिरा हुआ है।

ट्विटर को गुरुवार (8 जुलाई, 2021) तक का समय दिया गया है। उसे उस दिन तक बताना होगा कि वो कब ग्रीवांस रेड्रेसल अधिकारी के रूप में किसी भारतीय की नियुक्ति कर रहा है। नए आईटी नियमों के हिसाब से काम शुरू करने की समयसीमा ख़त्म हो चुकी है, लेकिन ट्विटर ने इसके कई हफ्ते बीतने के बावजूद इसे मानने में आनाकानी जारी रखी है। अब उसने कहा है कि उसे दो हफ्ते और चाहिए।

वो बार-बार ‘प्रक्रिया चालू होने’ की बात कर रहा है। 21 जून, 2021 को धर्मेंद्र चतुर ने ट्विटर के ग्रीवांस रेड्रेसल अधिकारी के पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद से अब तक कोई नियुक्ति नहीं की गई है। ट्विटर के वकील ने कहा कि कंपनी का मुख्यालय अमेरिका में है, इसीलिए फैसले में देरी हो रही है। दिल्ली हाईकोर्ट ने चेताया कि वो या तो बेहतर प्रतिक्रिया के साथ आए, वरना उसके ऊपर मुसीबत आ सकती है।

वहीं केंद्र सरकार ने स्पष्ट कहा कि 3 महीने बीतने के बावजूद ट्विटर नए आईटी नियमों का पालन नहीं कर रहा है। इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि ट्विटर को सुरक्षा देने का उसका कोई इरादा नहीं है, ये स्पष्ट किया जा चुका है। साथ ही कहा कि उसे भारतीय कानूनों का पालन करना ही पड़ेगा। ट्विटर फ़िलहाल भारत की शिकायतों का निपटारा एक अमेरिकी अधिकारी के जरिए करा रहा है, जो नियमों के विरुद्ध है।

इधर दिल्ली स्थित एक कार्यकर्ता समूह कलिंग राइट्स फोरम (KRF) ने कथित तौर पर ट्विटर इंडिया के एमडी मनीष माहेश्वरी और पब्लिक पॉलिसी मैनेजर शगुफ्ता कामरान के खिलाफ राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) में शिकायत दर्ज कराई है। KRF ने आरोप लगाया है कि इन्होंने भारत के खिलाफ बच्चों का इस्तेमाल कर आतंकवादी संगठनों को आतंकी साजिश रचने और आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ट्विटर का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है।

‘भारत के CoWIN पोर्टल में दुनिया के 76 देश दिखा चुके हैं दिलचस्पी, वैक्सीन सर्टिफिकेट को पासपोर्ट से भी कर सकेंगे अटैच’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (5 जुलाई 2021) को CoWIN ग्लोबल कॉन्क्लेव को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने CoWIN प्लेटफॉर्म को जल्द ही ओपन-सोर्स बनाने की घोषणा की ताकि सभी इच्छुक देश इसका इस्तेमाल कर सकें। पीएम ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में इस प्लेटफॉर्म को दुनिया के लिए डिजिटल ‘पब्लिक गुड’ की तरह बताया।

कोरोना वैक्सीन के लिए अधिकार प्राप्त समिति के अध्यक्ष डॉ. आरएस शर्मा ने द प्रिंट को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि अब तक 76 देशों ने केंद्र सरकार के कोविन पोर्टल के प्रति अपनी रुचि जताई है। प्लेटफॉर्म की उपलब्धता के बारे में बात करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि भारत सरकार इस सफल हो चुके पोर्ट को ओपन सोर्स के रूप में साझा करना चाहती है। लेकिन, इसमें शर्त यह होगी की इस सॉफ्टवेयर के व्यवसायिक इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जाएगी या इसे फिर से बेचने के लिए पैक नहीं किया जा सकेगा।

CoWin पोर्टल को लेकर हुए कॉनक्लेव में विभिन्न देशों के 196 अधिकारियों और 41 देशों के 116 डेलीगेट ने हिस्सा लिया। डॉ. शर्मा के मुताबिक इसी साल 16 जनवरी 2021 को लॉन्च किए गए CoWIN पोर्टल की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लॉन्चिंग के केवल चार महीनों में ही इसने करीब 20 करोड़ रजिस्ट्रेशन हासिल किए। 1 जुलाई 2021 तक इस पर 35.4 करोड़ लोग अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके थे।

पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिन देशों ने CoWIN डिजिटल प्लेटफॉर्म को लेकर रुचि दिखाई है, उनमें कनाडा, मैक्सिको, नाइजीरिया, पनामा और युगांडा शामिल हैं।

पासपोर्ट को वैक्सीन सर्टिफिकेट से लिंक करें

इंटरव्यू के दौरान डॉ. शर्मा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए पासपोर्ट को वैक्सीन प्रमाण-पत्रों से जोड़ने की सुविधा को CoWIN पोर्टल पर जल्द ही अपडेट करने की योजना है। इसके अलावा पोर्टल में एक एडिटिंग टैब भी जोड़ा जाएगा, जिससे वैक्सीन सर्टिफिकेट पर पर्सनल डिटेल्स को जोड़ा जा सकेगा।

उन्होंने कहा, “सरकार ने देखा है कि कई मामलों में लोग रजिस्ट्रेशन के दौरान कई तरह की गलतियाँ कर जाते हैं, जैसे अपना नाम, जन्मतिथि आदि। लेकिन अब हम लोगों को अपने वैक्सीन सर्टिफिकेट पर जानकारियों में सुधार करने की अनुमति देंगे।”

डॉ. शर्मा ने आगे कहा, “जिन लोगों ने दो अलग-अलग वैक्सीन के डोज के लिए अलग-अलग अकाउंट्स बनाए हैं, हमने उन नागरिकों के लिए एक ऐसा तंत्र विकसित किया है, जिससे वो अपने सर्टिफिकेट को संयोजित कर सकेंगे।” उन्होंने कहा, “हम अपने अनुभवों से सीखते हुए अपने सभी शेयर धारकों से लगातार फीडबैक ले रहे हैं। कोविन पोर्टल को सभी के लिए एक्सेसिबल बनाने के लिए और अधिक विकसित कर रहे हैं।”

पेटीएम, रिलायंस समेत कई से जुड़ा

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ डॉ. शर्मा ने कहा कि CoWin हर दिन नए रिकॉर्ड बना रहा है। व्यापक रीच के लिए इसे पेटीएम, रिलायंस ग्रुप, जुबिलेंट फूडवर्क्स, आईबीबो, 1 एमजी, मैक्स अस्पताल, एका केयर, अपोलो अस्पताल के साथ जोड़ने के लिए ऑनबोर्ड किया गया है।

डॉ शर्मा ने कहा, “हमें CoWIN के साथ एकीकृत करने के लिए निजी और सरकारी संस्थाओं से अब तक 204 से अधिक आवेदन मिल चुके हैं। इनमें से 148 को स्वीकार भी कर लिया गया है। इनकी एकीकरण की प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है।” उन्होंने बताया कि ये कंपनियाँ यूजर्स को वैक्सीन या वैक्सीनेशन के लिए उपलब्ध स्लॉट को सर्च करने के लिए अनुमति देने में सक्षम होंगी।

सबसे तेज टेक प्लेटफॉर्म

CoWIN ग्लोबल कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए डॉ. शर्मा ने सोमवार (5 जून 2021) को कहा कि उन्हें गर्व है कि पोर्टल दुनिया का सबसे तेज टेक प्लेटफॉर्म बन गया है। उन्होंने कहा, “मुझे यह बताते हुए गर्व होता है कि रिकॉर्ड चार महीनों में 20 करोड़ से अधिक रजिस्ट्रेशन के साथ CoWIN दुनिया का सबसे तेज टेक प्लेटफॉर्म बन गया है। HTTP पर प्रतिदिन एक अरब से अधिक रिक्वेस्ट प्रतिदिन मिल रही है। इससे इसकी विश्वसनीयता और अधिक बढ़ गई है।”

टीकाकरण अभियान की सफलता के बारे में बात करते हुए शर्मा ने कहा कि भारत 35 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज हासिल कर चुका है। इसमें कम से कम 28.4 करोड़ भारतीयों को कम से कम एक डोज मिल चुका है।

‘बिहारी’ कहने पर ग्वालियर में बवाल, सड़क पर दौड़ा-दौड़ा कर मारा; कट्टा और पत्थर से हमला

मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक वाकया सामने आया है, जहाँ एक सब्जी विक्रेता ने सब्जी खरीदने आए दो युवकों को ‘बिहारी भाई’ कह दिया। इसके बाद दोनों युवक उस समय तो बिना कुछ कहे चले गए, लेकिन जल्द ही लौटे। उन्होंने उस सब्जी विक्रेता को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। वो पूरी तैयारी के साथ लौटे थे और उन्होंने सब्जी विक्रेता के मुँह पर पत्थर मारे। जब उसके साथी बीच-बचाव करने आए तो उन पर लाठी-डंडों और कट्टे से हमला किया गया।

जब इस वारदात के समय भीड़ जुटने लगी तो हमलावर वहाँ से भाग खड़े हुए। ये घटना सोमवार (जुलाई 5, 2021) की है। मारपीट का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुलिस ने हमलावरों के खिलाफ मारपीट की धाराओं में FIR दर्ज कर ली है। लोगों के सामने ये घटना तब आई, जब सोमवार की शाम इसका वीडियो वायरल होना शुरू हुआ। इस वीडियो में सब्जी विक्रेता की पिटाई होते देखा जा सकता है।

उसके हाथ में लोहे का कड़ा फँसा कर उसके मुँह पर मारते हुए भी हमलावरों को देखा जा सकता है। पत्थर से उस पर हमला बोला गया और उसे बचाने आए लोगों को भी नहीं छोड़ा गया। दोनों युवक कट्टा भी रखे हुए थे। हालाँकि, उन्होंने कट्टे के बट से ही वार किया और इससे फायरिंग नहीं की। बचने के लिए जब सब्जी विक्रेता भागा तो हमलवारों ने खदेड़ कर उसे पकड़ा। ये घटना डीडी नगर इलाके की है।

‘बिहारी’ कहने पर ग्वालियर में मारपीट

महाराजपुरा थाने में इस सम्बन्ध में FIR दर्ज की है, लेकिन हमलावर अब तक पुलिस की पकड़ में नहीं आए हैं। पीड़ित व्यक्ति का नाम विकास लोधी है, जो सिंधिया स्टेच्यू के पास सब्जी का ठेला लगाता है। इसी दौरान विकास के पड़ोस में ही रहने वाले अखिलेश पाठक और आकाश चौहान प्याज खरीदने आए थे। भाव पूछने पर विकास ने कह दिया कि ‘ले लो बिहारी भाई, 40 रुपए किलो है’, जिससे वो भड़क गए और वापस लौटे।

उन्होंने उस समय कुछ नहीं कहा था, लेकिन लौट कर पूछा कि उन्हें उसने बिहारी क्यों कहा। इसके बाद हमला कर दिया गया। दोनों युवक बिहार के ही हैं। पुलिस इन दोनों को गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही है। घायल सब्जी विक्रेता ने पुलिस को अपना बयान भी दिया है। वायरल वीडियो का भी मध्य प्रदेश पुलिस ने संज्ञान लिया है। सिंधिया स्टेचू चौराहा पर हुई इस घटना की लोगों ने आलोचना की है।

बलात्कारी भागे तो गोली चलानी पड़ेगी, पशु तस्कर बचे नहीं: असम पुलिस से CM हिमंता बिस्वा सरमा की सीधी बात

असम में अपराधियों के हालिया एनकाउंटर को लेकर विपक्षी दलों के शोरगुल के बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस संबंध में स्टैंड स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि अपराधी भागने या हथियार छीनने की कोशिश करें तो उनका एनकाउंटर पुलिसिंग पैटर्न होना चाहिए। साथ ही उन्होंने राज्य में पशु तस्करी पर लगाम कसने और इसमें संलिप्त लोगों को नहीं बख्शने के निर्देश भी दिए हैं।

गुवाहाटी में पहली बार आयोजित राज्य के सभी थाना प्रभारी के कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा, “कुछ लोगों ने मुझसे कहा कि आजकल अपराधी पुलिस के चंगुल से भाग रहे हैं और एनकाउंटर की बहुत घटनाएँ हो रही हैं, क्या यह एक पैटर्न बन रहा है? मैंने उनसे कहा, हाँ यह पुलिसिंग पैटर्न होना चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “बलात्कारी भागे और पुलिस से हथियार छीनने की कोशिश करे तो पुलिस को गोली चलानी पड़ेगी। छाती पर नहीं और कानून पैरों पर गोली मारने की इजाजत देता है। हम असम पुलिस को देश के सर्वश्रेष्ठ पुलिसिंग संगठन में बदलना चाहते हैं।”

सरमा ने कहा कि वे चाहते हैं कि पुलिस पशुओं की तस्करी करने वालों पर अधिक सख्ती दिखाए। पशुओं की तस्करी करने वालों को हर कीमत पर पकड़े। उन्होंने कहा, “गाय हमारी भगवान है। हमें दूध देती है। गोबर देती है। ट्रैक्टर आने से पहले हमने मवेशियों की मदद से खेती की और यह कई हिस्सों में आज भी जारी है। जो पशु और नशीली दवाओं की में शामिल हैं उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए।” उन्होंने पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे जिलों के अधिकारियों से इस मामले में अधिक ध्यान देने को कहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हिमंता बिस्वा सरमा ने जब से असम के मुख्यमंत्री का कार्यभार सँभाला तब से बलात्कार, पशु तस्करी, नशीली दवाओं की तस्करी के 8 आरोपितों के शरीर पुलिस हिरासत के दौरान गोली के घाव मिले हैं। हालाँकि, इस मामले में पुलिस का कहना है कि इन लोगों ने भागने की कोशिश की थी। बता दें कि भाजपा नेता ने राज्य में ऑर्गनाइज्ड क्राइम के खिलाफ बड़े अभियान का एलान किया है।

सोमवार (5 जून 2021) को सीएम ने कहा, “आज अगर दो अपहरणकर्ता पकड़ लिए जाते हैं और वे हमला करते हैं तो पुलिस के पास गोली चलाने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं रहता है। क्यों ऐसा नहीं करने पर पुलिसकर्मी खुद ही मर जाएगा।”

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में अपराध का मुकाबला कानून से होता है, मुठभेड़ से नहीं। एनकाउंटर तभी होना चाहिए जब दूसरा कोई ऑप्शन न बचे। महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों पर सीएम ने अधिकारियों को जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने को कहा है। साथ ही प्रत्येक पुलिस थाने को सालाना 2.5 लाख रुपए और पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य की जाँच करवाने का एलान भी किया।

‘यहीं मेरी बेटी का हुआ जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह’: कोर्ट का चैंबर, पता- ‘मजार वाली मस्जिद’

‘द बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD)’ ने एक वकील का लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया। आरोप है कि उसने अपने आधिकारिक चैंबर का इस्तेमाल निकाह (इस्लामी शादी) और धर्मांतरण कराने के लिए किया है। BCD के सचिव ने सोमवार (जुलाई 5, 2021) को ये जानकारी दी है। साथ ही उक्त वकील को ‘कारण बताओ नोटिस’ भी जारी किया गया है। उक्त वकील का नाम इक़बाल मलिक है।

दिल्ली के प्रतापगंज के रहने वाले वकील इक़बाल मलिक को कड़कड़डूमा कोर्ट में चैंबर की सुविधा दी गई थी। नोटिस में लिखा है कि उन्होंने अपने इस कक्ष का इस्तेमाल अवैध और समाज विरोधी गतिविधियों के लिए किया है। पीड़िता के पिता ने इस सम्बन्ध में शिकायत भी दर्ज कराई है। साथ ही निकाहनामा पर उक्त वकील के कक्ष का पता ‘मज़ार वाली मस्जिद’ लिखा है। नोटिस में कहा गया है कि ये इस शिकायत को और गंभीर बनाता है।

उक्त वकील धर्मांतरण कराने वाला एक ट्रस्ट भी चलाता है, ऐसा BCD ने पाया है। इसका संचालन भी उसी चैंबर से किया जाता था। निकाह कराने वाले काजी का नाम मोहम्मद अकबर देहलवी है। पीड़िता के पिता का कहना है कि उनकी बेटी का धर्मांतरण करा के जबरन निकाह करा दिया गया। ‘अल-निकाह ट्रस्ट’ ने इस शादी का प्रमाण-पत्र जारी किया। BCD ने कहा है कि ऐसा कर के वकील ने कानूनी प्रोफेशन की गरिमा को ठेस पहुँचाया है।

‘बार काउंसिल ऑफ दिल्ली’ ने कहा कि कोर्ट परिसर का इस्तेमाल इस तरह की किसी भी गतिविधि के लिए करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। परिषद के अध्यक्ष रमेश गुप्ता ने इसे एक असामान्य घटना मानते हुए इसका संज्ञान लिया है। उन्होंने तीन वकीलों की एक अनुशासन समिति बनाई है, जो इस मामले की जाँच करेगी। इसमें BCD के उपाध्यक्ष हिमल अख्तर, पूर्व अध्यक्ष केसी मित्तल और पूर्व सचिव आजयिंदर सांगवान शामिल हैं।

जब तक अनुशासन समिति जाँच के बाद अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुँच जाती, तब तक उक्त वकील का लाइसेंस निलंबित रहेगा और वो कोर्ट में प्रैक्टिस नहीं कर पाएगा। इसके लिए BCD के अध्यक्ष ने परिषद के कानून से मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया है। साथ ही नोटिस मिलने के 7 दिनों के भीतर इक़बाल मलिक को अपनी प्रतिक्रिया जाँच समिति को देने को कहा गया है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

साथ ही कड़कड़डूमा कोर्ट के डिस्ट्रिक्ट जज (इंचार्ज) से निवेदन किया गया है कि वो इस वकील को मिला चैंबर वापस लें और उसे जाँच ख़त्म होने तक सील कर दें। BCD अध्यक्ष ने कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, और दिल्ली पुलिस से भी जाँच में सहयोग के लिए निवेदन किया है। चैंबर को सील कर के अवैध गतिविधियों पर तुरंत लगाम लगाई जाएगी। कमिटी को 3 महीन के भीतर जाँच पूरी करने को कहा गया है।

अस्पताल का बेड, जंजीरों में कैद मुजरिम: जिसे बता रहे स्टेन स्वामी, जानें उस तस्वीर का सच

उत्तर प्रदेश के एटा स्थित जिला अस्पताल में इलाज करा रहे एक मुजरिम की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। तस्वीर में दिख रहे शख्स के स्टेन स्वामी होने का दावा किया जा रहा है। भीमा कोरेगाँव मामले में आरोपित स्वामी की 5 जुलाई 2021 को मौत हो गई थी। इस तस्वीर के जरिए यह दावा किया जा रहा है कि स्टेन स्वामी के साथ हिरासत में अमानवीय व्यवहार किया गया था।

फेक न्यूज फैलाई जा रही है

इस इमेज को शेयर कर लोग सवाल कर रहे हैं कि स्टेन स्वामी का मानवाधिकार कहाँ है?

साभार: ट्विटर

सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर में देखा जा सकता है कि अस्पताल में बेड पर बैठे व्यक्ति के पैरों में लोहे की मोटी जंजीर बँधी है।

साभार: ट्विटर

स्टेन स्वामी की नहीं है तस्वीर

सोशल मीडिया पर लोग जिसे स्टेन स्वामी की तस्वीर समझ कमेंट कर रहे हैं, वो दरअसलसजायाफ्ता हत्यारा बाबूराम बलवान सिंह है। टाइम्स ऑफ इंडिया की 14 मई 2021 की रिपोर्ट में इसकी एक एडिटेड इमेज प्रकाशित की गई थी, जिसमें एक बूढ़े व्यक्ति को चेन में बँधा देख सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। इसके बाद सरकार ने जाँच के आदेश दिए और महानिदेशक (जेल) आनंद कुमार को सस्पेंड कर दिया गया।

साभार: टाइम्स ऑफ इंडिया

जेलर कुलदीप सिंह भदौरिया ने कहा, “बूढ़े व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ के कारण 4 जुलाई 2021 को पहले एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ से उसे अलीगढ़ के लिए रेफर कर दिया गया। हालाँकि, अलीगढ़ में बेड खाली नहीं होने कारण वापस एटा लाकर जिला अस्पताल के नॉन कोविड वार्ड में भर्ती कराया गया। हालाँकि, वृद्ध को बेड से क्यों बाँधा गया इस मामले की जाँच अभी की जा रही है।”

वहीं एटा जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ उमेश त्रिपाठी ने कहा, “कैदी के फेफड़ों में संक्रमण हुआ है, जिसका इलाज किया जा रहा है। पूरे मामले की जानकारी मुझे सोशल मीडिया के जरिए पता चला है। शुरुआती जाँच में सामने आया है कि कैदी को जेल कर्मियों ने बेड से बाँध दिया था।”

तस्वीरों में दिख रहा व्यक्ति बाबूराम बलराम सिंह है (साभार: ट्विटर)

एटा जिले के कुल्ला हबीबपुर गाँव के रहने वाले बाबूराम बलवान सिंह को इसी साल हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया है कि तस्वीरों में दिख रहा शख्स बाबूराम बलवान सिंह है, न कि स्टेन स्वामी।

साभार: ट्विटर

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मामले में जेल वार्डन पर एक्शन लेते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया है।

साभार: ट्विटर

दिल के दौरे से मौत

फादर स्टेन स्वामी पर भीमा कोरेगाँव में हुई हिंसा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रचने में संलिप्तता का आरोप था। भीमा कोरेगाँव मामले में एनआईए ने उन पर आतंकवाद निरोधक क़ानून (यूएपीए) की धाराएँ भी लगाई गई थीं। उनके वकील ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि 3 जून की सुबह 4:30 बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा और बाद में उनकी मौत हो गई। वकील ने कोर्ट से मामले की न्यायिक जाँच की माँग की।

इससे पहले खबर आई थी कि रविवार रात तक, 84 वर्षीय फादर स्टेन स्वामी जीवन रक्षक प्रणाली पर थे। 28 मई से उनका इलाज होली फैमिली हॉस्पिटल में चल रहा था। 84 वर्षीय स्वामी पार्किंसंस रोग सहित कई बीमारियों से पीड़ित थे। वह पिछले साल कोविड से भी संक्रमित हुए थे।

‘मुस्लिमों के प्रति घृणा से आया है लव जिहाद, मुझे इस शब्द से गुस्सा आता है’: राजदीप ने हिन्दुओं के साथ सिखों को भी कहा भला-बुरा

मीडिया संस्थान ‘इंडिया टुडे’ ने ‘लव जिहाद’ और जम्मू-कश्मीर में सिख लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्मांतरण और निकाह पर पर्दा डालने की कोशिश की है। हमेशा की तरह इस काम में इस गिरोह विशेष का नेतृत्व राजदीप सरदेसाई ही कर रहे हैं, जिन्होंने एक लेख के माध्यम से ज्ञान बाँचा है कि प्यार का अपराधीकरण नहीं किया जाना चाहिए। ये सलाह उन्हें ‘लव जिहादियों’ को देना चाहिए, लेकिन वो इसके खिलाफ आवाज़ उठाने वालों पर ही दोष मढ़ रहे हैं।

उन्होंने लिखा है कि ‘लव जिहाद’ शब्द से ही उन्हें क्रोध आता है। ये क्रोध ‘लव जिहाद’ करने वालों पर नहीं आता है, इतना तो साफ़ है। उनका कहना है कि मुस्लिमों के प्रति अत्यधिक घृणा से ये शब्द आया है। उनका कहना है कि इस्लामोफोबिया को सामान्य बताया जा रहा है। अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने किसी ‘श्रीराम सेना’ और मंगलोर में किसी पब पर हमले की घटना का जिक्र किया है।

साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी सीएम बनने से पहले ‘हिन्दू युवा वाहिनी’ नाम के ‘कानून हाथ में लेने वाले संगठन’ के नेतृत्व का आरोप लगाया। साथ ही आरोप मढ़ा कि ये संगठन इंटरफेथ शादियों को निशाना बनाता था। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने कानून लाकर इंटरफेथ मैरिज को ‘लव जिहाद’ बता दिया है, जबकि सच्चाई ये है कि धोखे से शादी करने वालों और धर्मांतरण कराने वालों के खिलाफ ये कानून आया है।

बकौल राजदीप सरदेसाई, शादीशुदा जोड़े को ये साबित करने की जिम्मेदारी डाल दी गई है कि उन्होंने बिना किसी दबाव के शादी की है। देश भर में ‘लव जिहाद’ की रोज आती घटनाओं के बावजूद राजदीप सरदेसाई और ‘इंडिया टुडे’ इस तरह की सोच का बचाव कर रहा है। उनका कहना है कि धर्म, लिबर्टी और जीवन के अधिकार को छीना जा रहा है। उन्हें समझना चाहिए कि ये कानून ‘धर्मांतरण’ के खिलाफ नहीं, बल्कि इसे धोखे से ये जबरन कराए जाने के खिलाफ है।

उन्होंने 2022 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की बात करते हुए कहा कि उससे पहले ऐसे कई मामले सामने आएँगे, क्योंकि इन पर राजनीति होनी है। उन्होंने कश्मीर के मामले पर बात करते हुए कहा कि वहाँ दो सिख लड़कियों ने मुस्लिमों से शादी कर ली तो सिखों ने भी ‘लव जिहाद’ वाला राग अलापना शुरू कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि उन लड़कियों के साथ कुछ हुआ ही नहीं है।

शायद राजदीप सरदेसाई पीड़िताओं के परिजनों से भी ज्यादा जानते हैं और जजों को पीड़िता के परिजनों को सुनने से पहले हर मामले में उनकी ही राय पहले जाननी चाहिए। वो कह रहे हैं कि शादीशुदा जोड़े पर सब कुछ साबित करने की जिम्मेदारी थोप दी गई है। लेकिन, संवेदनहीन होकर वो एक तरह से उन पीड़ित परिजनों की ही आलोचना करते हुए कह रहे हैं कि अगर कुछ गलत है तो पुलिस में जाओ, कोर्ट में जाओ और साबित करो।

यही तो हो रहा है न? एक व्यक्ति गिरफ्तार भी हुआ तो। फिर राजदीप सरदेसाई पूछते हैं कि गिरफ़्तारी क्यों हुई है? उनका कहना है कि पंजाब में चुनाव होने वाले हैं, इसीलिए ये सब हो रहा है। उन्होंने लड़कियों की राय जान कर फैक्ट-चेक करने को कहा। क्या किसी के चंगुल में फँसी पीड़िता उससे बाहर निकलने से पहले खुल कर अपनी राय दे पाएगी? फिर ऐसे मामलों का क्या, जहाँ पीड़िता नाबालिग है?

उनका कहना है कि ‘लव जिहाद’ के कारण कुछ लोगों ने कानून अपने हाथ में ले लिया है। उन्होंने इसे महिला विरोधी तक करार दिया और कहा कि महिलाओं को अपने मन का करने का अधिकार है। राजदीप सरदेसाई को शायद पता ही नहीं है कि ‘लव जिहाद’ के FIR इन्हीं महिलाओं की शिकायत पर दर्ज किए जाते हैं। उन्होंने इस कानून को असंवैधानिक भी बताया। इसके लिए उन्होंने 1967 में एक कश्मीरी पंडित महिला द्वारा एक मुस्लिम से शादी और धर्मांतरण करने की खबर का जिक्र किया।

अब राजदीप सरदेसाई के पास ऐसा कोई उदाहरण तो होगा नहीं, जिसमें मुस्लिम महिला हो और हिन्दू पुरुष, इसीलिए वो ‘लव जिहाद’ को फेक बताने के अलावा और क्या कर सकते हैं। इसी तरह एक अन्य लेख में ‘इंडिया टुडे’ की ही प्रीती चौधरी ने लिखा है कि कश्मीर में सिख लड़कियों वाली घटना के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन में कोई महिला नहीं थी, इसीलिए ये पितृसत्तात्त्मक है। साथ ही सिख समुदाय के पुरुषों को भला-बुरा कहा गया है।