राजस्थान के बीकानेर में पुलिस की बर्बरता का एक नया चेहरा सामने आया है। वहाँ जिले से करीब 35 किलोमीटर दूर गजनेर में एक गोचर भूमि की रक्षा करने के लिए धरने पर बैठी महिला सरपंच और उनके समर्थकों पर लाठीचार्ज की घटना दर्ज की गई है। पुलिस की कार्रवाई में कई ग्रामीण घायल हुए, जिसके गुस्से में उनकी (ग्रामीणों की) ओर से भी पथराव हुआ। दोनों तरफ से मामले को तूल पकड़ता देख इलाके में भारी पुलिस बल बुलाकर तैनाती की गई है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, गजनेर में एक ट्रांजिट भूमि (गोचर भूमि) है। जहाँ नपाई न होने के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि गोचर जमीन कितनी है और सरकारी जमीन कितनी है। ऐसे में वहाँ की सरपंच गीता कुम्हार गजनेर में आंदोलन पर हैं। वह 200 दिनों से अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठी हैं लेकिन प्रशासन उनकी सुनवाई करने को तैयार नहीं है।
सोमवार (5 जुलाई 2021) को मामले के संबंध में तहसीलदार और सरपंच की वार्ता भी हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकला। फिर, मंगलवार (6 जुलाई 2021) को जब प्रशासन से बात मनवाने के लिए विरोध के तौर पर बाजार बंद किया गया और प्रदर्शनकारी प्रदर्शनस्थल पर बैठे दिखे तो पुलिस ने अपनी कार्रवाई की।
पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों से हटने को कहा, मगर जब कोई हटा नहीं तो दोनों ओर से तनातनी हो गई। बात इतनी बढ़ी कि लाठीचार्ज करना पड़ गया। घटना में 3-4 ग्रामीण घायल हुए और कुछ को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प में पुलिस की गाड़ी के शीशे भी टूटे हैं। फिलहाल गाँव में तनाव का माहौल है।
ग्रामीण पुलिस की लाठीचार्च का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि वह लोग 200 दिन से शांतिपूर्ण ढंग से धरना दे रहे थे। लेकिन इस धरने का निष्कर्ष नहीं निकाल पाने वाले अधिकारियों के इशारे पर आज पुलिस ने लाठीचार्ज किया। उनके मुताबिक घटनास्थल पर आंदोलनकारी कम थे और पुलिस लठ चलाने वाले जवानों की तादाद ज्यादा थी। मौके पर महिला पुलिसकर्मी भी थीं। सबने प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाई।
एक फिल्म, जिसका नाम ‘तूफ़ान’ है। फिल्म में फरहान अख्तर मुख्य अभिनेता हैं, जो इसके निर्माताओं में भी शामिल हैं। 16 जुलाई, 2021 को रिलीज होने जा रही इस फिल्म में अभिनेता का नाम होता है ‘अज़ीज़ अली’ और उसके साथ जो अभिनेत्री होती है, उसका नाम होता है ‘पूजा शाह’। ‘सब लोकतंत्र’ नामक YouTube चैनल चलाने वाले रचित कौशिक ने जब इस फिल्म में ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा देने की तरफ ध्यान दिलाया तो उनका चैनल ही बैन कर दिया गया।
YouTube ने 7 दिनों के लिए बैन किया रचित कौशिक का चैनल ‘सब लोकतंत्र’
रचित कौशिक के यूट्यूब चैनल ‘सब लोकतंत्र‘ को 7 दिनों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस दौरान वो न तो इस चैनल पर कोई वीडियो डाल सकते हैं और न ही कोई पोस्ट कर सकते हैं। YouTube का कहना है कि उनके चैनल ने ‘हेट स्पीच’ को आगे बढ़ाया है। ‘सब लोकतंत्र’ एक व्यंग्यात्मक कंटेंट वाला चैनल है, जहाँ दिलचस्प तरीके से समसामयिक मुद्दों पर अपनी बात रखी जाती है। ‘तूफ़ान’ के ट्रेलर की समीक्षा भी इसी तरीके से की गई थी।
उन्होंने पाया कि फरहान अख्तर और राकेश ओमप्रकाश मेहरा की इस फिल्म के माध्यम से ‘लव जिहाद’ के गुप्त एजेंडे का महिमामंडन किया जा रहा है और इसे उन्होंने दर्शकों के सामने रखा। इस चैनल के 7.86 लाख सब्सक्राइबर्स हैं। इस वीडियो को यूट्यूब द्वारा हटाए जाने से पहले भी इस पर 3 लाख व्यूज आ चुके थे। इतना ही नहीं, उनके एक और वीडियो को हटाया गया था। इसमें उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी को लेकर बात की थी।
असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में होने वाले 2022 विधानसभा चुनावों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती दी थी। इस पर भी रचित कौशिक ने वीडियो बनाया था और मात्र 12 घंटे में ही उस पर 1.35 लाख व्यूज भी आ गए थे। लेकिन, यूट्यूब ने इसे अपनी नीतियों का उल्लंघन मानते हुए प्रतिबंधित कर दिया। रचित कौशिक अपने सामने अपनी ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ का हनन होते देख रहे हैं, लेकिन इन विदेशी कंपनियों के सामने इन सबका कोई मोल नहीं।
क्या है फरहान अख्तर की ‘तूफ़ान’ के ट्रेलर में
आगे बढ़ने से पहले समझ लेते हैं कि फरहान अख्तर की फिल्म ‘तूफ़ान’ में क्या है। फरहान कहानीकार से गीतकार और गीतकार से ट्विटर ट्रोल बने जावेद अख्तर के बेटे हैं। दोनों भाजपा और नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने के लिए जाने जाते हैं। फरहान अख्तर को CAA विरोधी प्रदर्शनों में भी देखा गया था, जबकि उन्हें इस कानून का एबीसी तक पता नहीं था। उनका कहना था कि इतने लोग प्रदर्शन कर रहे हैं तो वो भी कर रहे हैं।
इसके अलावा उन्होंने ट्विटर के माध्यम से एक झूठ फैलाया था कि CAA और NRC लागू होने के बाद आदिवासियों, दलितों और महिलाओं को देश से बाहर निकाल दिया जाएगा। ‘तूफ़ान’ फिल्म का ट्रेलर देखते ही पता चलता है कि उन्होंने इसमें एक मुक्केबाज का किरदार अदा किया है। इसमें उनका नाम ‘अज़ीज़ अली उर्फ़ अज्जू भाई’ होता है, जिसका लाइसेंस सस्पेंड हो गया रहता है लेकिन वो अभिनेत्री के हौसला बढ़ाने पर कई सालों बाद फिर से बॉक्सिंग की तरफ लौटा।
अहमदाबाद से सांसद रहे वरिष्ठ अभिनेता परेश रावल ने इस फिल्म में उनके कोच का रोल अदा किया है, जिनका नाम नाना प्रभु होता है। इसके एक दृश्य में कोच अज़ीज़ अली को कहता है, “अभी तू जिसे मानता है, उसे मत्था टेक के आ।” इसके बाद अज़ीज़ अली अभिनेत्री पूजा शाह को आदाब करता नज़र आता है। अभिनेत्री, जो कि हिन्दू हैं, वो भी उसे बदले में आदाब करती है। ये किरदार मृणाल ठाकुर ने निभाया है।
फिल्म ‘तूफ़ान’ का ट्रेलर
इसके अगले दृश्य में फरहान अख्तर को बॉक्सिंग रिंग में पड़े हुए दिखाया गया है और खबर में कोई महिला एंकर कह रही होती हैं, “तूफ़ान ने अपने प्रशंसकों का दिल तोड़ दिया। जिस मंदिर की आप पूजा करते हैं, आपने उसके साथ विश्वासघात किया।” गौर कीजिए, ‘मंदिर’। इस फिल्म को ‘अमेज़न प्राइम’ पर रिलीज किया जा रहा है। वही ‘अमेज़न प्राइम’, जहाँ हाल ही में हिन्दू विरोधी भावना को ‘तांडव’ वेब सीरीज के जरिए आगे बढ़ाया गया था।
‘सब लोकतंत्र’: रचित कौशिक ने ‘तूफ़ान’ के ट्रेलर की समीक्षा में क्या कहा था
ऑपइंडिया के पास ‘सब लोकतंत्र’ यूट्यूब चैनल का वो वीडियो है, जिसमें उन्होंने ‘तूफ़ान’ फिल्म के ट्रेलर की समीक्षा की थी। हालाँकि, ये वीडियो अब यूट्यूब पर उपलब्ध नहीं है। रचिक कौशिक अपने चैनल को ‘राष्ट्रीय आवाज़’ बताते हैं। इसमें उन्होंने मन्ना डे द्वारा गए एक गाने की पंक्तियाँ ‘तेरी गठरी में लगा चोर, मुसाफिर जाग जरा’ से शुरुआत करते हुए दर्शकों को सचेत किया था कि ‘उर्दू फिल्म इंडस्ट्री’ की नजर आपकी गठरी पर है।
इसके बाद उन्होंने ‘तूफ़ान’ के ट्रेलर की बात करते हुए कहा था कि ये फिल्म भी दर्शकों के दिलोंदिमाग पर आघात करने के लिए बनाई गई है। उन्होंने बताया था कि कैसे अज़ीज़ अली, जो कि मुंबई के डोंगरी का एक गुंडा है, उसे फिल्म में ‘स्ट्रीट फाइटर’ कहा जाता है, जो पढ़ा-लिखा नहीं है और गैर-कानूनी काम करता है। उन्होंने कहा था कि वो एक ‘शांतिदूत’ है, इसीलिए पूजा नाम की एक डॉक्टर उससे शादी कर लेती हैं।
फिर उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि उन्हें पता है कि ये एक ‘संयोग मात्र’ है और इसके पीछे कोई षड्यंत्र नहीं है, लेकिन साथ ही कहा कि बार-बार ऐसा संयोग ही क्या होता है, ये सवाल आपके मन में भी उठता होगा। रचित कौशिक ने सवाल दागा कि आखिर किसी फिल्म में लड़के का नाम रामप्रसाद और लड़की का नाम आयशा क्यों नहीं होता? उन्होंने उदाहरण दिया कि पिछले 70 वर्षों से फिल्मों में ऐसा ही ‘संयोग’ हो रहा है।
उन्होंने कहा, “इस फिल्म की छोटी-छोटी बारीकियाँ तनिष्क के उस विज्ञापन की तरह है। जब 3 मिनट के ट्रेलर में इतना कुछ है तो सोचिए, पूरी फिल्म में क्या होगा। फिल्म में अज़ीज़ अली और पूजा की एक तस्वीर टँगी होती है, जिसमें दोनों हिन्दू रीति-रिवाज से शादी करते दिख रहे होते हैं। बताया गया है कि अज़ीज़ अली खुले ख्यालों वाला है। इसी को अल-तकिया कहते हैं। असल में पूजा को शादी के लिए धर्म-परिवर्तन करना पड़ेगा और एक काले टेंट (बुर्का) को पहन कर अज़ीज़ की अन्य बीवियों के साथ रहना होगा।”
उन्होंने आगे वीडियो में कहा था, “इस फिल्म के निशाने पर आपकी 15-16 साल की लड़कियाँ होंगी, जो ये सोचेंगी कि अज़ीज़ कितना अच्छा है और प्यार के लिए कितना कुछ करता है। और, उनके आसपास घूम रहे अज़ीज़ इसी का फायदा उठाएँगे। लड़कियों में अज़ीज़ के प्रति प्रेम और अपने धर्म के प्रति घृणा फैलाने के लिए ये सब किया गया है। पूजा आदाब क्यों करती है? ऐसे ही अनजाना-अनजानी में आकाश (रणबीर कपूर) और कियारा (प्रियंका चोपड़ा) ‘तू न जाने आसपास है खुदा’ गाना गाते हैं।”
उन्होंने पाठशाला फिल्म का भी जिक्र किया था, जिसमें ‘ऐ खुदा’ नामक गाना है, लेकिन अभिनेता और अभिनेत्री दोनों हिन्दू होते हैं। साथ ही उन्होंने पूछा कि आखिर ‘तूफ़ान’ में ‘मंदिर के साथ विश्वासघात’ की बात क्यों की गई गई, जबकि वो लोग पूजा करने वाले स्थलों को हराम मानते हैं। उन्होंने कहा कि यूँ तो ‘अली मौला, खुदा’ याद आता है, लेकिन विश्वासघात में मंदिर क्यों याद आता है? साथ ही उन्होंने ‘हवस का पुजारी’ की जगह ‘हवस का इमाम बुखारी’ और ‘गुनाहों का देवता’ की जगह ‘ गुनाहों का ख्वाजा’ का प्रयोग करने की बात कही।
वीडियो में रचित कौशिक फरहान अख्तर को खुद एक ‘लव जिहाद का परिणाम’ बताते हुए कहते हैं कि उनके पिता जावेद अख्तर ने पारसी हनी ईरानी से शादी की थी, और जब ‘मन भर गया’ तो उन्हें छोड़ कर शबाना आजमी से शादी कर ली। उन्होंने कहा कि फरहान अख्तर ने भी अपने अब्बा-हुजूर के नक्शेकदम पर चलते हुए पहले अधुना भबानी से शादी की और दो बच्चे होने के बाद शिबानी दांडेकर के साथ उनका रिश्ता चल रहा है।
वीडियो के अंत में उन्होंने ‘ब्रह्मज्ञान’ सेक्शन में मथुरा के वृंदावन का एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें दिखाया गया था कि जिन बच्चों को लोग दान देते हैं, वो मुस्लिम हैं। साथ ही वहाँ चंदन और भगवान की तस्वीरें बेचने वालों में भी कई मुस्लिम हैं, ऐसा दिखाया गया है। कुछ लड़कियों से नाम पूछने पर वो झिझकती हैं और फिर पता चलता है कि वो मुस्लिम हैं। रचित कौशिक ने दिखाया कि दान देने से पहले जान लें कि सामने वाला कौन है।
YouTube बैन: ऑपइंडिया ने ‘सब लोकतंत्र’ के रचित कौशिक से की बात
YouTube द्वारा ‘सब लोकतंत्र’ चैनल पर ‘तूफ़ान’ फिल्म के ट्रेलर की समीक्षा पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद ऑपइंडिया ने रचित कौशिक से बात भी की। उन्होंने बताया कि 30 जून, 2021 को इस फिल्म का ट्रेलर आया था, जिसकी उन्होंने समीक्षा की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फिल्म में ऐसी बहुत सी चीजें हैं, जिनमें ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण और शादी से पहले आदाब वाला दृश्य दिखा कर ये बताया गया है कि हिन्दू लड़कियाँ भी आदाब करती हैं और ये बड़ा ही ‘कूल’ है।
उन्होंने कहा, “मंदिर की जगह मस्जिद का नाम क्यों नहीं लिया गया?” ‘ब्रह्मज्ञान’ सेक्शन वाले वीडियो पर उन्होंने कहा कि इसमें वो लोगों द्वारा शूट किए हुए वीडियो चलाते हैं। ये साफ़ नहीं है कि वीडियो के किस हिस्से पर YouTube को आपत्ति है। उन्होंने कहा कि उनका मकसद इस चीज को लेकर जागरूकता फैलाना था कि कुछ मुस्लिम लोग भी हिंदू बन कर चंदन वगैरह लगा कर दान ले लेते हैं।
ऐसा नहीं है कि सिर्फ यूट्यूब ने ही उनके साथ ऐसा किया है। उन्होंने ट्विटर वेरिफिकेशन के लिए ‘मनोरंजन’ और कंटेंट क्रिएटर की श्रेणी में रजिस्ट्रेशन किया था, लेकिन उन्हें ब्लू टिक नहीं दिया गया। ये सब तब हुआ, Koo और यूट्यूब प्रोफाइल्स वेरिफाइड हैं। उन्होंने बताया कि फेसबुक ने भी कई बार उनके कंटेंट्स को ‘डिमॉनीटाइज’ किया है, अर्थात उससे आप रुपए नहीं कमा सकते। उन्होंने बताया कि पहले भी यूट्यूब से उन्हें वॉर्निंग मिली थी, लेकिन वीडियो नहीं हटाया जाता था।
फेसबुक पर ऑपइंडिया के पेज को भी कई बार निशाना बनाया गया है। कभी ‘इंस्टेंट आर्टिकल’ फीचर हटा दिया जाता है तो कभी किसी कंटेंट को लेकर रीच घटा दी जाती है। इसी तरह ट्विटर कॉन्ग्रेस के टूलकिट को ट्वीट करने वालों पर ‘छेड़छाड़ किया हुआ कंटेंट’ शेयर करने वाला लेबल लगा देता है। नव आईटी नियमों के खिलाफ उसने और व्हाट्सएप्प ने दादागिरी दिखाई। असल में ये सारी सोशल मीडिया कंपनियाँ भारत विरोधी एजेंडे में लगी हुई हैं।
भारतीय सिनेमा के विकास में अभिनेत्री विद्या बालन के योगदान को देखते हुए सेना ने हाल ही में अपनी एक फायरिंग रेंज का उन पर नामकरण किया है। यह फायरिंग रेंज जम्मू-कश्मीर के बारामुला जिले के गुलमर्ग में स्थित है। साल 2021 की शुरुआत में शेरनी फिल्म की अभिनेत्री ने अपने पति सिद्धार्थ रॉय कपूर के साथ इंडियन आर्मी द्वारा आयोजित गुलमर्ग विंटर फेस्टिवल में भी शामिल हुई थीं।
इस खबर ने कई सोशल मीडिया यूजर्स को हैरान कर दिया है। सोशल मीडिया पर लोग इस फैसले से खुश नहीं हैं। उनका मानना है कि फायरिंग रेंज का नाम किसी और उपयुक्त व्यक्ति के नाम पर रखा जा सकता था।
Why not Capt Vikram Batra Firing Ranges. What Great Vidya Balan has done great for army ? The officer who has initiated her name must be taken to task. Next will be Katrina Kaif Karina Kapoor Khan & Amitabha Bachhan Fire Power Range , Akshay Kumar Drill Square
@rajnathsingh@PMOIndia reading that army has named firing range after Vidya Balan, is this true, when public has realised who the real heroes are and who are entertainers, this act of army really puzzles us
हालाँकि, इस खबर का खंडन भी किया गया है। मेजर माणिक एम जॉली ने फायरिंग रेंज का नाम अभिनेत्री विद्या बालन के नाम पर रखे जाने से इनकार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि जब उन्होंने गुलमर्ग की उस साइट का दौरा किया था तो एक अस्थायी स्वागत बोर्ड लगाया गया था। इस मामले को तूल देने के लिए कहानी को घुमा दिया गया कि यह अभिनेत्री के नाम पर रखा गया है। जबकि, ऐसा नहीं है।
Maybe you know more than me, or the officers posted there or the Army itself because you want to believe media as usual which never bothers to verify. There was a temporary board put up in her name to welcome her when she went there. She made it into / firing range named after me https://t.co/hxBBOSuP3q
— Maj Manik M Jolly,SM (@Manik_M_Jolly) July 6, 2021
खास बात यह है कि कहानी और भूल-भुलैया जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम कर चुकीं बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन ने इस मामले में अभी तक किसी भी प्रकार की कोई टिप्पणी नहीं की है।
इसके अलावा अगर विद्या बालन के बारे में बात की जाए तो उन्हें कुछ दिनों पहले ऑस्कर पुरस्कारों की गवर्निंग बॉडी एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था। बॉलीवुड अभिनेत्री की ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेज़ॅन प्राइम वीडियो पर चल रही फिल्म ‘शेरनी’ में उनके शानदार प्रदर्शन को काफी सराहा जा रहा है। इस फिल्म में विद्या बालन एक ईमानदार फॉरेस्ट ऑफिसर के रोल में हैं।
क्रिकेट कमेंट्री जगत में जाने माने नाम हर्षा भोगले को उनके एक ट्वीट के कारण सोशल मीडिया पर संघी बताया जा रहा है। उनकी ट्रोलिंग के पीछे कारण बस ये है कि उन्होंने कोरोना वायरस को चाइनीज वायरस कह दिया। इंगलैंड क्रिकेट टीम में खिलाड़ियों के संक्रमित होने पर उन्होंने अपनी टिप्पणी की।
हालाँकि, इस बात में कोई संदेह नहीं है कि वायरस का जन्म चीन में ही हुआ, लेकिन फिर भी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और चीन के समर्थक इससे चीन का नाम जुड़ते ही आपत्ति जताते हैं।
ऐसे में मंगलवार (6 जुलाई, 2021) को जब हर्षा भोगले ने अपना ट्वीट किया तो कुछ लोगों ने उन्हें संघी कहा जबकि सच ये है कि पहली बार ये शब्द अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्तेमाल किया था।
एक यूजर ने उन्हें ‘संघी भक्त’ कहा और उनकी टिप्पणी देखकर अपनी निराशा जताई।
It’s okay to refer COVID19 as Chinese virus but it’s offensive to say ‘Indian variant’.
कुछ लोगों ने बेहद नरमी से भोगले से अपील की कि वह कोरोना वायरस के लिए चीनी वायरस शब्द का प्रयोग न करें।
One doesn’t expect something like this from such a respected voice. Most of the world calls it Covid-19 / Corona, why bring in a country. Sorry, but @bhogleharsha you sound like Donald Trump. https://t.co/SQ8P4NlXt5
उनके ट्वीट के नीचे कमेंट देखकर पता चलता है कि कोरोना वायरस को चीनी वायरस कहने से कई लोग उनसे न केवल नाराज हैं बल्कि उनकी तुलना डोनाल्ड ट्रंप से कर रहे हैं। साथ ही जीनोफोबिक होने से बचने की सलाह दे रहे हैं।
इस बीच बहुत सारे लोग ऐसे भी है जो वायरस का सही नाम लिखने पर उनकी सराहना कर रहे हैं और ये भी कह रहे हैं कि लोगों की टिप्पणियों से तंग आकर वह अपना ट्वीट डिलीट न करें।
वहीं स्वयं कमेंटेटर हर्षा भोगले ने भी अपने ट्वीट पर होते विरोध को देखकर ट्रोल करने वालों को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मैंने दक्षिण अफ्रीकी वैरिएंट, ब्राजील वैरिएंट और भारतीय वैरिएंट के इस्तेमाल पर ध्यान दिया। मुझे लगा ये एक आम बात है कि हम किसी चीज का उल्लेख उसके मूल देश के नाम से कर सकते हैं।”
It doesn’t look like it is going anywhere. The Chinese virus has now infiltrated the England cricket team. The bubbles will get more stringent. I guess there is no other option
उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति पर बहुत डिबेट हुए है। अंतत: कई लोगों द्वारा यह माना गया कि वायरस वुहान लैब से निकला जहाँ उसे वैज्ञानिकों ने बनाया था। जाहिर सी बात है ऐसे घातक संक्रमण की उतपत्ति पर चीन अपना नाम क्यों लेगा। इसलिए उसने उन लोगों को नस्लवादी बता दिया जिन्होंने कोरोना वायरस से उसका लिंक किया।
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बयानबाजी तेज हो गई है। योगी आदित्यनाथ को सत्ता से बाहर करने वाले बयान को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुसलमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर गोरखपुर के बीजेपी सांसद और अभिनेता रवि किशन ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरोधी उनके तेज से ही नष्ट हो जाएँगे।
अभिनेता से सांसद बने रवि किशन ने कहा, “योगी आदित्यनाथ ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले हैं। वे ढाई घंटे आरती करने वाले संन्यासी हैं। छू के दिखाओ महाराज जी को, उनके तेज से नष्ट हो जाओगे।” उन्होंने कहा, “सुन लो ओवैसी साहब, 24 करोड़ की जनता, भारतीय जनता पार्टी का संगठन, हिंदू युवा वाहिनी का संगठन, आपका ये चैलेंज स्वीकारता है। आप महाराज जी को हराएँगे क्या, छूकर तो दिखाओ। पैदल हैदराबाद जाओगे।” ओवैसी ने पिछले दिनों कहा था कि 2022 में योगी आदित्यनाथ को यूपी में सीएम नहीं बनने देंगे।
इसके जवाब में ओवैसी को देश का बड़ा नेता बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि भाजपा 2022 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी। केंद्रीय नेतृत्व ने 300 प्लस का लक्ष्य दिया है, जिसके कार्यकर्ता अपनी मेहनत और लगन से हासिल करेंगे।”
मालूम हो कि हैदराबाद से सांसद ओवैसी की पार्टी ने ओमप्रकाश राजभर और बाबू सिंह कुशवाहा की भागीदारी संकल्प मोर्चा के तहत चुनाव लड़ने की घोषणा की है। एआईएमआईएम के यूपी अध्यक्ष शौकत अली ने कहा है कि पार्टी 100 मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी
हाल ही में AIMIM नेता असीम वकार ने कहा था कि सभी राज्यों में उपमुख्यमंत्री का पद पूरी तरह से मुस्लिमों के लिए आरक्षित होना चाहिए। उन्होंने सपा, बसपा और कॉन्ग्रेस से इस मुद्दे पर अपने विचार स्पष्ट करने को भी कहा था। एआईएमआईएम नेता ने कहा था कि पार्टियाँ मुसलमानों से वोट तो माँगती है, लेकिन जब उसके बदले डिप्टी सीएम पद की माँग की जाती है तो उन्हें समस्या होने लगती है।
वकार का यह बयान राजभर द्वारा पावर-शेयरिंग फॉर्मूले के बाद आया था। राजभर ने कहा था कि 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में संकल्प मोर्चा गठबंधन की जीत होने पर हर साल अलग-अलग समुदाय से मुख्यमंत्री (CM) होगा। इससे गठबंधन के सभी भागीदारों के लिए समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा था, “अगर हम 2022 में सरकार बनाते हैं, तो हम स्पष्ट हैं कि पाँच साल में पाँच मुख्यमंत्री होंगे। एक मुस्लिम, एक राजभर, एक चौहान, एक कुशवाहा और एक पटेल होगा। हमारे पास एक साल में चार डिप्टी सीएम और पाँच साल में 20 होंगे।”
चीन से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। वहाँ के लियाओनिंग प्रान्त में कम्युनिस्ट सरकार ने 54 कुत्तों को ‘कायर‘ करार दिया है। अब इन सभी को नीलाम किया जाएगा। ये सभी कुत्ते पूरी तरह से ट्रेंड हैं, लेकिन इनकी गलती ये थी कि ये पुलिस एकेडमी के ट्रेनिंग कार्यक्रम को पास नहीं कर पाए थे। पुलिस एकेडमी ने इन्हें डरपोक, छोटे, कमजोर और आदेश नहीं मानने वाला बताया है।
जिन कुत्तों को नीलामी के लिए रखा गया है उनमें, जर्मन शेपर्ड और बेल्जियम मालिनोइस नस्ल के कुत्ते शामिल हैं। हालाँकि, इस नीलामी में शर्तें हैं। इसके मुताबिक, ये कुत्ते उन्हीं लोगों को बेचे जाएँगे, जो सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे। चीनी सरकार ने इनके नीलामी की तारीख 7 जुलाई 2021 को निर्धारित की है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक कुत्ते की कीमत 200 युआन (करीब 2200 रुपए) रखी गई है।
नीलामी की शर्तें
जिन 54 कुत्तों को कायर बताकर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया है, उनके बारे में चीन की क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन पुलिस यूनिवर्सिटी की वेबसाइट में विस्तृत जानकारी दी गई है। नीलामी की घोषणा में कहा गया है कि खरीदारों को एक लिखित प्रतिज्ञा पर हस्ताक्षर करना होगा कि वे जानवरों की अच्छी देखभाल करेंगे। उन्हें कुत्तों को न बेचने या किसी को भी न देने का वादा भी करना होगा।
ज्यादातर कुत्ते दो से तीन साल पुराने जर्मन शेफर्ड हैं। इसके अलावा कई बेल्जियम मेलिनोइस, डच शेफर्ड, स्पैनियल और उसकी हाईब्रिड नस्ल के हैं। सीएनएन ने चीनी सोशल मीडिया साइट वीबो पर जियांगिंग पुलिस ब्यूरो में एक पुलिस अधिकारी के हवाले से कहा कि पुलिस कुत्तों को ‘खत्म’ नहीं किया गया था। लेकिन ये कभी पुलिस डॉग बनने के लायक नहीं रहे। क्योंकि इनकी भर्ती की ही नहीं गई थी।
कुत्तों की नीलामी की न्यूज को करीब दो हफ्ते पहले ही अपलोड किया गया था। इसे अब तक 80,000 बार डाउनलोड किया जा चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मन शेफर्ड अपने शांत स्वभाव, बुद्धि, डिफेंस, वफादारी, ताकत और एथलेटिक्स जैसी ट्रेनिंग देने के लिए किसी भी देश की पुलिस अकादमी द्वारा पसंद किए जाते हैं।
उत्तर प्रदेश के उन्नाव के आसीवान थाना क्षेत्र के एक गाँव में गोमांस तस्करी का मामला सामने आया है। खबर है कि पुलिस टीम पर वहाँ अचानक गोमांस तस्करों ने हमला किया जिसके बाद दोनों ओर से गोलियाँ चलनी शुरू हो गईं। घटना में एक तस्कर के पैर पर गोली लगी। वहीं पुलिस को छानबीन में आरोपित के पास से असलहा बरामद हुआ।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, थानाक्षेत्र के लखनऊ-बांगरमऊ मार्ग पर बने मुरव्वतपुर तिराहे के पास गोवंश की हत्या कर उनके मांस का कारोबार किया जा रहा था। जब पुलिस को इसकी सूचना हुई तो वह मंगलवार (जुलाई 6, 2021) तड़के करीब 3 बजे वहाँ पहुँचे। लेकिन तस्करों ने पुलिस को देखकर गोली चला दी।
बाद में जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने भी फायरिंग की। पुलिस से हुई इस मुठभेड़ में थानाक्षेत्र के गाँव मुशीराबाद का रहने वाला गोमांस तस्कर मजीद पुत्र बच्चा घायल हो गया। पुलिस ने उसे स्थानीय अस्पताल पहुँचाया फिर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
पुलिस के मुताबिक, उन्होंने आरोपित के घर से भरी मात्रा में गोमाँस बरामद किया है। उसे पकड़ने के दौरान चार व्यक्ति भागने में सफल रहे जिनकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।
उल्लेखनीय है कि गौवंश की हत्या का मामला पिछले दिनों यूपी के सोनभद्र से आया था। वहाँ पुलिस ने जिले के बरवाखड़ गाँव के नवनिर्वाचित प्रधान रकमुद्दीन को गिरफ्तार किया था। एक अधिकारी के अनुसार रकमुद्दीन के अलावा चार अन्य लोग भी गौहत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए थे।
स्थानीय नागरिकों ने बताया था कि, रकमुद्दीन कथित तौर पर चुनाव जीतने पर मतदाताओं को बीफ पार्टी देने का वादा किया था। 6 मई 2021 की देर रात बीफ पार्टी और गौहत्या की खबर जैसे ही ग्रामीणों को लगी तो उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी थी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया था कि गौहत्या के आरोप में ग्राम प्रधान को चार अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में ‘खेला होबे दिवस’ मनाने का निर्णय लिया है। बता दें कि हालिया विधानसभा चुनाव के दौरान तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) का नारा ‘खेला होबे’ ही था। TMC नेताओं ने इसे भाजपा के लिए धमकी के रूप में प्रयोग में लाया था। अब लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद ममता बनर्जी ने राज्य में विभिन्न क्लबों को 50,000 फुटबॉल बाँटने की घोषणा की है।
इस नारे को लेकर TMC के ही नेता देबांग्शु भट्टाचार्य ने जनवरी में मूल रूप से यह गीत लिखा था और उसके बाद से विभिन्न पार्टी कार्यक्रमों में इसका इस्तेमाल किया गया। ये एक धमकी भरा नारा बन गया। अंडरवर्ल्ड में भी पहले ‘गेम बजा डालने’ की बातें की जाती थीं, जिसका अर्थ होता था किसी की हत्या करना। TMC ने अब स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के नाम पर अपने इस धमकी भरे चुनावी नारे का प्रयोग शुरू किया है।
‘खेला होबे’ को और डरावना बनाने के लिए अणुब्रत मंडल ने एक रैली में ‘भयंकर खेला होबे’ का नारा दिया था। एक तरह से ये भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए सीधी धमकी थी। पश्चिम बंगाल के तत्कालीन खेल मंत्री मदन मित्र ने भी नॉर्थ 24 परगना जिले की कमरहटी से चुनाव लड़ते हुए ‘खेला होबे’ को अपना नारा बनाया था। वही मदन मित्रा, जिन्हें हाल ही में नारदा घोटाले में CBI ने गिरफ्तार किया था।
फ़िलहाल वो जमानत पर बाहर चल रहे हैं। TMC इस किस्म के नेताओं से भरी पड़ी है, क्योंकि उनके साथ तीन अन्य मंत्री/पूर्व मंत्री गिरफ्तार किए गए थे, जो इसी पार्टी के थे। ममता बनर्जी अक्सर अपनी रैलियों में ‘खेला होबे! अमी गोलकीपर। देखी के जेते (खेल होगा। मैं गोलकीपर हूँ। देखती हूँ कौन जीतता है।) कहती थीं।’ इसी गीत में भाजपा के नेताओं को लुटेरा कहा गया था। भाजपा नेताओं का सामना करने की बात की गई थी।
पश्चिम बंगाल में ‘खेला होबे दिवस’ का स्पोर्ट्स से कोई लेनादेना नहीं है। असल में ये चुनाव में TMC की जीत का जश्न मनाने से भी ज्यादा राज्य में मारे गए भाजपा कार्यकर्ताओं/समर्थकों के परिजनों के साथ एक क्रूर मजाक है। उनके साथ, जिनके अपनों की हत्या का आरोप TMC पर लगा। उनके साथ, जो घर-बार छोड़ कर पड़ोसी राज्यों में शरणार्थी बन कर रहने को मजबूर हैं। उनके साथ, जिनके घरों को जला दिया गया और तहस-नहस कर दिया गया।
इसीलिए, तृणमूल कॉन्ग्रेस के किस्म के ही राजनीतिक दलों को ये नारा पसंद भी आ रहा है। तभी तो समाजवादी पार्टी के एक नेता ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ‘खेला होबे’ को नारा बनाने को कहा। सपा के बारे में तो खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी एक वाकया सुना चुके हैं कि कैसे लाल टोपी वालों को देख कर एक बच्चे ने कहा था – ‘वो देखो, गुंडा।’ इस किस्म के दलों और संगठनों के लिए ये एक अच्छा स्लोगन है।
वाराणसी की दीवारों पर ‘2022 में खेला होई’ भी लिखवा दिया गया था। पश्चिम बंगाल में ‘खेला’ का स्तर अब इतना नीचे गिर चुका है कि वहाँ जाँच के लिए जाने वाले संवैधानिक संस्थानों के पदाधिकारियों तक को नहीं बख्शा जाता है। इसके लिए आम लोगों को भड़काया जाता है। महिलाओं को भी गुंडों की भीड़ में घुसा दिया जाता है। बस अंतर इतना है कि ये सब कुछ होने के बावजूद मीडिया चूँ तक नहीं करता।
खुद कलकत्ता हाईकोर्ट कह चुका है कि 2 मई के बाद हुई हिंसा में कई लोग मारे गए, गंभीर रूप से घायल हुए। कई पीड़ितों को यौन उत्पीड़न भी झेलना पड़ा, यहाँ तक कि नाबालिग लड़कियों को भी नहीं बख्शा गया। लोगों की संपत्ति को नष्ट किया गया और कई लोगों को अपना घर छोड़कर पड़ोसी राज्यों में शरण लेने के लिए मजबूर कर दिया गया। इसके बाद भी राज्य ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
लेकिन, इन सभी घटनाओं को ममता बनर्जी का महिमामंडन कर के छिपाया गया। उन्हें ‘महिषासुर मर्दिनी’ बता कर, उनकी जीत को ‘केंद्र की तानाशाही’ पर विजय बता कर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ‘फासिज्म’ का आरोप लगा ममता बनर्जी को सराहा गया और साथ ही भाजपा की हर हार ‘हिंदुत्व की हार और सेक्युलर शक्तियों की जीत’ तो होती ही होती है। क्या पश्चिम बंगाल में चार-चार पाकिस्तान की बात करने वाले भी इस ‘खेला होबे’ का हिस्सा हैं?
ऐसा नहीं है कि सिर्फ भाजपा ही इस क्रूर हिंसा का शिकार बनी है। वहाँ की इस्लामी पार्टी ISF (इंडियन सेक्युलर फ्रंट) और वामपंथी दलों तक के कार्यकर्ताओं तक को नहीं छोड़ा गया। वामपंथी नेताओं तक ने टीएमसी की हिंसा की बात की। भाजपा को खुन्नस में ये लोग झूठा बता सकते हैं, लेकिन क्या इनके ही गिरोह के वामपंथी नेता और इस्लामी दल भी झूठे हैं? हाँ, हिंसा का सबसे ज्यादा शिकार भाजपा कार्यकर्ता हुए क्योंकि भाजपा ने तृणमूल को कड़ी टक्कर दी।
People have appreciated ‘Khela Hobe’, so we will have ‘Khela Hobe Diwas’: West Bengal CM Mamata Banerjee in the Assembly (File Pic) pic.twitter.com/h1WClZj2dS
पश्चिम बंगाल में फुटबॉल एक लोकप्रिय खेल है। सामान्यतः 90 मिनट के लिए खेला जाने वाला ये खेल आक्रामक होता है, लेकिन फिर भी खिलाड़ी एक दूसरे का सम्मान करते हैं और जरा सी भी गलती होने पर पेनल्टी लगती है। खिलाड़ी खेल से बाहर तक हो सकता है। लेकिन, ममता बनर्जी वाले ‘खेला होबे’ में ये संदेश निहित है कि फुटबॉल मैच जीतने वाली टीम हारने वालों को मैदान में दौड़ा-दौड़ा कर मारे।
‘खेला होबे’ का नारा लगाने वाले इसी TMC ने चुनाव के दौरान दिखाया था कि ममता बनर्जी फुटबॉल की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिर को मार रही हैं। यही बंगाल के असली ‘खेला होबे’ का संदेश था। क्या फुटबॉल का कोई खिलाड़ी इस तरह की चीजों को बरदाश्त कर सकता है? यही ‘खेला होबे’ है, जहाँ बंगाल में चुनाव के दौरान अर्धसैनिक बलों तक को निशाना बनाया गया। वो सुरक्षा बल, जो देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान देने तक से नहीं हिचकिचाते।
आँकड़ों की मानें तो 2 मई के बाद राज्य में हुई हिंसा की करीब 15 हजार घटनाएँ हुई। इसमें 25 लोगों की मौत हो गई और करीब 7000 महिलाओं के साथ बदसलूकी की गई। सिक्किम हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे प्रमोद कोहली की अगुवाई वाली फैक्ट फाइंडिंग टीम की रिपोर्ट में ये पाया गया था। कुछ खतरनाक अपराधी, माफिया डॉन और आपराधिक गिरोह, जो पहले से ही पुलिस रिकॉर्ड में थे, ने राजनीतिक संरक्षण पाकर इन घातक हमलों को अंजाम दिया।
पश्चिम बंगाल के आसनसोल में कथित तौर पर पुलिस की हिरासत में एक शख्स की मौत हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमन अंसारी नाम के युवक को पुलिस ने सोमवार (5 जुलाई 2021) की रात चोरी के शक में उठाया था। हिरासत में उसकी मौत की खबर फैलते ही मंगलवार (6 जुलाई 2021) सुबह आसनसोल के बराकर में दंगे जैसे हालात पैदा हो गए। भीड़ हिंसक हो गई और थाने पर पथराव किया। पुलिस की गाड़ियाँ जला दी गई।
समाचार न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक, आसनसोल-दुर्गापुर के पुलिस आयुक्त अजय ठाकुर ने बताया कि आरोपित को गिरफ्तार करने वाले 2 पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इस मामले की जाँच चल रही है।
2 police officers who had arrested him (accused) have been suspended. An investigation is underway: Commissioner of Police, Asansol-Durgapur, Ajay Thakur pic.twitter.com/lina4ngGmZ
21 वर्षीय अंसारी की हिरासत में मौत के विरोध में स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए। भीड़ ने पुलिस वैन में आग लगाने के अलावा कथित तौर पर थाने पर बम भी फेंके हैं।
पुलिस वैन में आग लगा दी। (फोटो: bangla.asianetnews.com)
जैसा कि इन तस्वीरों में देखा जा सकता है कि युवाओं के साथ अन्य स्थानीय लोगों द्वारा भी पुलिस स्टेशन पर पत्थर और ईंटें फेंकी गईं।
एक स्थानीय युवक को थाने पर पथराव करते हुए देखा गया. फोटो : bangla.asianetnews.com
बताया जा रहा है कि पुलिस को स्थिति पर काबू पाने के लिए आँसू गैस के गोले दागने पड़े और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। रिपोर्ट्स की मानें तो इस इलाके में व्याप्त तनाव को दूर करने के लिए कर्फ्यू भी लगाया जा सकता है।
बराकर में पुलिस और भीड़ के बीच झड़प। फोटो: bangla.asianetnews.com
एक स्थानीय व्यक्ति ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की माँग की है। स्थानीय ने कहा, “एक युवा लड़के को पीट-पीटकर मार डाला गया। हम मुख्यमंत्री से मामले पर संज्ञान लेने का अनुरोध करते हैं। हम न्याय चाहते हैं।”
West Bengal | Ruckus after 21-year-old youth’s death in Asansol, police accused of beating him up in custody pic.twitter.com/7Z1F9ehn3h
मृतक के चाचा मोहम्मद मुख्तार अंसारी ने कहा कि अमन के बारे में पता चलने पर वे अस्पताल पहुँचे। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि मैं अस्पताल पहुँचा और मुझे पता चला कि हमारा बेटा पहले ही मर चुका है। क्या यही देश का कानून है?
केरल में वामपंथी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के विधायक और अभिनेता एम मुकेश द्वारा 10वीं कक्षा के बच्चे को धमकाने का ऑडियो वायरल हो गया है। इसके बाद मामले में संज्ञान लेते हुए भारतीय युवा कॉन्ग्रेस ने इसका विरोध किया है। यूथ कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक जेएस अखिल ने विधायक मुकेश के खिलाफ राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) में सोमवार ( 5 जून 2021) को शिकायत की है।
इसमें विधायक पर आरोप लगाया गया है कि लड़के से विधायक का बात करने का तरीका अपमानजनक था। शिकायत पत्र में जेएस अखिल ने कोल्लम से विधायक मुकेश पर बच्चे को धमकाने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए दावा किया कि अभिनेता के साथ विधायक जैसे ऊँचे पद पर बैठा व्यक्ति अपनी प्रमुख जिम्मेदारी को निभाने और बच्चे की समस्याओं का समाधान करने में पूरी तरह से विफल रहा है।
युवा कॉन्ग्रेस ने मामले में एक्शन से पहले ओट्टापलम के रहने वाले पीड़ित छात्र विष्णु से बात करने के बाद NCPCR से मामले की शिकायत की। रिपोर्ट के मुताबिक, 10 मिनट के वायरल ऑडियो में बच्चे ने लगातार इस बात पर जोर देने की कोशिश की, जिसके लिए उसने कॉल किया था। जबकि, इस दौरान सीपीआई विधायक मुकेश बच्चे को ओट्टापलम के विधायक से बात नहीं करने के लिए लगातार डाँटते रहे।
शिकायत में कहा गया है कि इसी रविवार ( 4 जून 2021) को विधायक ने बच्चे से फोन पर बात की। इस दौरान 6-6 बार फोन करने के लिए बच्चे पर चिल्लाने लगे। जब बच्चे ने कहा कि वो पलक्कड़ का रहने वाला है तो विधायक उसे भला-बुरा कहते हुए धमकी देते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, CPI विधायक ने छात्र से ये भी कहा कि उसे उसके दोस्त को उनका (विधायक) नंबर देने के लिए थप्पड़ मारना चाहिए। हालाँकि, जब छात्र ने कहा कि उसे पलक्कड़ के विधायक का नाम नहीं पता है तो MLA मुकेश ने कहा कि अगर वो उनके सामने होता तो उसे डंडे से पीटते।
इस मामले में युवा कॉन्ग्रेस के अखिल ने एक बयान में कहा कि जिस बच्चे के दोस्त ने उसे विधायक का नंबर दिया, उसे थप्पड़ मारने और चेहरा तोड़ने की धमकी देना अपराध है। मुकेश न केवल एक फिल्म स्टार हैं, बल्कि विधानसभा सदस्य भी हैं। उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 188 के अनुसार शपथ ली थी। विधायक का कृत्य उनकी शपथ और जिम्मेदारियों के साथ विश्वासघात है। फिलहाल शिकायत की एक प्रति केरल राज्य बाल संरक्षण आयोग को भेजी गई है।
विधायक ने कहा बदनाम करने की कोशिश
रिपोर्ट के मुताबिक, ऑडियो वायरल होने के बाद सीपीआई के विधायक ने अपनी सफाई भी दे दी है। उन्होंने दावा किया कि ये कॉल्स उन्हें राजनीतिक मंशा से परेशान करने के लिए किया गया था। विधायक ने दावा किया कि उनकी बातचीत की रिकॉर्डिंग से पहले बच्चे ने उन्हें 6 बार फोन किया था, जबकि मैंने उससे कहा था कि मैं जूम मीटिंग में हूँ और वापस उसे फोन कर रहा हूँ।