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केरल: असुर ने स्थापित किया शिवलिंग, पांडव ने की पूजा; शोभायात्रा में शामिल होते हैं साढ़े 7 स्वर्ण हाथी

ऑपइंडिया की मंदिरों की श्रृंखला में आज हम आपको ले चलेंगे केरल जहाँ एट्टूमानूर में स्थित है सदियों पुराना भगवान शिव का मंदिर। केरल वैसे तो कई विशेष और भव्य मंदिरों की भूमि माना जाता है, लेकिन कोट्टयम जिले में स्थित एट्टूमानूर महादेव मंदिर अपने आप में अनूठा है। इस मंदिर का इतिहास रामायण और महाभारत से जुड़ा हुआ है। एट्टूमानूर महादेव मंदिर में भगवान शिव की एक ऐसी प्रतिमा है जिसकी स्थापना असुर खर ने की थी।

3 मंदिर

माना जाता है कि असुर खर ने भगवान शिव से आशीर्वाद स्वरूप तीन शिवलिंग प्राप्त किए। खर उन तीनों को लेकर केरल आया। उसने एक शिवलिंग अपने दाँतों में दबा रखा था, वहीं दो अन्य शिवलिंग अपने दोनों हाथों में। जो शिवलिंग खर के दाँतों में दबाया गया था वह स्थापित हुआ कदुथुरुति (Kaduthuruthi) में। दाएँ हाथ में जो शिवलिंग था वह वाईकोम में और बाएँ हाथ का शिवलिंग स्थापित हुआ एट्टूमानूर में। शिवलिंगों की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद इन तीन स्थानों पर मंदिरों का निर्माण हुआ। ये तीनों ही मंदिर हिंदुओं के लिए विशेष महत्व के हैं।

एट्टूमानूर महादेव मंदिर के विषय में यह भी मान्यता है कि यहाँ पांडव और महर्षि व्यास ने भी भगवान शिव की पूजा की थी। मंदिर के विषय में प्राप्त जानकारी के अनुसार एट्टूमानूर महादेव मंदिर के वर्तमान दृश्य स्वरूप का निर्माण आज से लगभग 5 शताब्दी पहले सन् 1542 में हुआ था। मंदिर का निर्माण केरल की वास्तुशैली के अनुसार हुआ है।

संरचना

केरल वास्तुशैली में बने एट्टूमानूर महादेव मंदिर की विशेषता है दीवार पर बनी मुराल पेंटिंग। इस मंदिर की दीवार पर द्रविड़ शैली में मुराल पेंटिंग उकेरी गई है। मंदिर का ऊपर नंदी की प्रतिमा है जो घंटियों और बरगद के पेड़ की धातु से बनी पत्तियों से घिरी हुई है। इसके अलावा मंदिर अपने शानदार गोपुरम और कॉपर की प्लेट से सजी हुई छत के लिए भी जाना जाता है।

फोटो : केरल पर्यटन

मंदिर में प्रवेश करते ही एक बड़ा सा तांबे का दीपक दिखाई देता है जो हमेशा प्रज्ज्वलित रहता है। इस दीपक पर श्रद्धालु तेल डालते रहते हैं जिससे इसमें हमेशा अग्नि बनी रहती है। मंदिर में दीपक जलाने की प्रथा बहुत पुरानी है और आज भी जारी है।

भगवान शिव के अतिरिक्त यहाँ भगवान गणेश की प्रतिमा भी स्थापित है। भगवान गणेश की यह प्रतिमा दक्षिणमुखी है जो कि बहुत दुर्लभ है। मंदिर में कई लकड़ी की मूर्तियाँ भी देखी जा सकती हैं।

अरट्टु त्योहार

हर साल फरवरी से मार्च के दौरान मंदिर में अरट्टु त्योहार मनाया जाता है। कई दिनों तक चलने वाले इस त्योहार का आठवाँ और दसवाँ दिन सबसे खास माना जाता है। इस दिन साढ़े सात हाथियों की शोभा यात्रा निकलती है। कटहल की लकड़ी से बने ये हाथी 13 किग्रा सोने की प्लेट से मढ़े हुए होते हैं। इस शोभा यात्रा में कुल 8 हाथियों की प्रतिमाएँ शामिल होती हैं। इनमें से 7 2 फुट की, जबकि आठवीं प्रतिमा 1 फुट की होती है। इसलिए इन हाथियों को साढ़े सात हाथी कहा जाता है। मंदिर के त्योहार के दौरान इन्हें ‘एझारापोन्नाना’ कहा जाता है।

हाथियों की ये स्वर्ण प्रतिमाएँ यहाँ कैसे आईं, इसके विषय में पर्याप्त जानकारी का अभाव है। कहा जाता है कि जब इस्लामिक आक्रांता टीपू सुल्तान की सेना त्रावणकोर को लूटने उसकी सीमा तक पहुँची थी, तब त्रावणकोर के राजा ने मंदिर में ये हाथी की प्रतिमाएँ दे दी थीं।

कैसे पहुँचे

एट्टूमानूर महादेव मंदिर केरल के कोट्टयम जिले के एक छोटे से कस्बे एट्टूमानूर में स्थित है। यहाँ से नजदीकी स्थित हवाईअड्डा कोच्चि एयरपोर्ट है जो लगभग 73 किमी की दूरी पर है। इसके अलावा एट्टूमानूर में रेलवे स्टेशन की सुविधा है। एट्टूमानूर रेलमार्ग से केरल समेत दक्षिण भारत के कई शहरों से जुड़ा हुआ है। सड़क मार्ग से एट्टूमानूर पहुँचना काफी आसान है। एट्टूमानूर में ही, बस स्टैन्ड है जहाँ केरल के कई दूसरे स्थानों से बसें संचालित होती हैं। केरल की मेन सेंट्रल रोड एट्टूमानूर को राज्य के कई बड़े शहरों से जोड़ती है।  

‘अल्लाहु अकबर’ का नारा और चाकू से हमला, 1 की मौत: जर्मनी के शरणार्थी कैम्प में अफगान ने दिया अंजाम

जर्मनी के एक शरणार्थी कैम्प में अफगानिस्तान के एक व्यक्ति ने एक अन्य व्यक्ति की हत्या कर दी। 25 वर्षीय व्यक्ति ने ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाते हुए चाकू से इस हत्या को अंजाम दिया। मृतक की उम्र 35 साल बताई गई है। हमलावर ने एक जर्मन व्यक्ति को घायल भी कर दिया। ये घटना नॉर्थ राइन वेस्टफेलिया स्टेनफुर्ट जिले में स्थित ग्रेवेन में हुई। ये घटना रविवार (जुलाई 4, 2021) की रात हुई।

इस हत्याकांड को अंजाम देने के बाद हमलावर वहाँ से भाग खड़ा हुआ। उस ढूँढने के लिए हैलीकॉप्टर लग लगाया गया। हालाँकि, उसे खोज कर गिरफ्तार करने में पुलिस को ज्यादा देर नहीं लगी। बिना किसी संघर्ष के पुलिस ने उसे धर-दबोचा। रविवार की रात उक्त शरणार्थी कैम्प के बाद पुलिसकर्मियों और अधिकारियों का जमावड़ा देखा जा सकता है। पैरामेडिकल की टीम बुला कर घायल का इलाज किया गया।

इस मामले में पब्लिक प्रोसिक्यूटर ने कहा कि इस अपराध के पीछे हत्यारे की कोई मंशा सामने नहीं आई है, लेकिन एक गवाह ने इसकी पुष्टि की कि वो हत्या से पहले ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्ला रहा था। हत्यारा 6 साल पहले ही जर्मनी में आया था और 2018 से इस शरणार्थी कैम्प की सुविधा का लाभ उठा रहा था। जहाँ इस घटना में अज़रबैजानी की मौत हो गई, घायल जर्मन व्यक्ति का इलाज पास के ही एक अस्पताल में चल रहा है।

जर्मनी ने 2015 में यूरोप में शरणार्थी समस्या के वक्त खुल कर इस्लामी मुल्कों से शरणार्थियों को अपने देश आने की छूट दे रखी थी, लेकिन अब यही उसके गले की फाँस बनता जा रहा है। हाल ही में इस तरह के कई मामले सामने आए हैं, जहाँ ये शरणार्थी अपराधी निकले हों। बवारिया के वुर्जबुर्ग में सोमालिया के एक व्यक्ति ने तीन लोगों की हत्या कर दी थी। उसने एक डिपार्टमेंट स्टोर में इस हत्याकांड को अंजाम दिया था।

मरने वालों में तीनों ही महिलाएँ थीं, जिसमें से एक की उम्र 82 वर्ष थी। वहीं एक महिला की 11 साल की बेटी भी थी। उसने दिन-दहाड़े इस घटना को अंजाम दिया था। उस अपराधी भी तीनों की हत्या के दौरान ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाया था। साथ ही उसने 5 अन्य लोगों को घायल भी कर दिया था। वो भी उत्तरी अफ्रीका से शरणार्थी के रूप में आने के बाद 2015 से ही जर्मनी में रह रहा था और यहाँ की सुविधाओं का लाभ उठा रहा था। पिछले कुछ महीनों में दुनिया भर में ‘अल्लाहु अकबर‘ चिल्लाते हुए कई हत्याओं की खबरें आई हैं।

चीन-पाकिस्‍तान की बढ़ी साझा मुश्किल: खैबर पख्‍तूनख्‍वा में CPEC को लेकर विद्रोही समूह ने किया हिंसक विरोध तेज

अमेरिकी सैनिकों की वापसी के मद्देनजर अफगानिस्तान पर नियंत्रण हासिल करने के लिए तालिबान द्वारा हमले तेज कर दिए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी बीच तालिबान के करीबी और पाकिस्तान के विद्रोही गुटों ने चीन और पाकिस्तान के खिलाफ अपने हमले बढ़ा दिए हैं। इसको लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दो जिगरी दोस्तों का तमगा हासिल कर चुके पाक और चीन मुश्किलों में घिर गए हैं।

हांगकांग के साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की खबर के अनुसार, विद्रोही समूहों ने पाकिस्तान और चीन के खिलाफ हमलों को तेज कर दिया है। बताया जा रहा है कि कई वर्षों से पाकिस्तान के खिलाफ विद्रोह कर रहे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) वहाँ के कबायली इलाकों के साथ-साथ खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के भी कई क्षेत्रों पर नियंत्रण हासिल करने के लिए सक्रिय हो गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तालिबान के करीबी नूर वली महसूद के नेतृत्व वाले टीटीपी ने पाक की सीमा से लगते संवेदनशील क्षेत्रों में अपने सुरक्षा बलों को फिर से तैनात कर दिया ​है। जून में जारी संयुक्त राष्ट्र की निगरानी रिपोर्ट के अनुसार, टीटीपी के पांच हजार आतंकवादी वर्तमान में अफगानिस्तान में हैं।

बताया जा रहा है कि टीटीपी के विपरीत, बलूच राजी आजोई सेंगर के संरक्षण में कार्य कर रहे 4 बलूच विद्रोही समूह चीन के ग्वादर बंदरगाह के संचालन और बलूच में 60 अरब अमेरिकी डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के तहत अन्य परियोजनाओं का हिंसक विरोध कर रहे हैं। मालूम हो कि सीपीईसी (CPEC) चीन के शिनजियांग प्रांत को ग्वादर बंदरगाह से जोड़ता है।

वहीं, खैबर पख्तूनख्वा एसेंबली के एक निर्दलीय सदस्य मीर कलाम वजीर का कहना है कि दक्षिण वजीरिस्तान में सक्रिय अलग-अलग समूह पिछले साल अक्टूबर में टीटीपी बैनर के तहत एकजुट हुए थे। वजीर ने आगे कहा, ”ऐसी खबरें हैं कि दक्षिण वजीरिस्तान में टीटीपी आतंकवादियों ने सरकारी ठेकेदारों से जबरन वसूली शुरू कर दी है।”

गौरतलब है कि तालिबान ने रविवार (4 जुलाई 2021) को अफगानिस्तान में सरकारी सुरक्षा बलों के साथ भीषण लड़ाई के बाद कंधार प्रांत में एक प्रमुख जिले पंजवाई पर कब्जा कर लिया है। बता दें कि तालिबान के विद्रोहियों ने पूरे देश में बड़े पैमाने पर कदम उठाए हैं और अफगानिस्तान के करीब 100 जिलों पर कब्जा किया है।

जिला परिषद चुनाव में मिली सफलता से भाजपा ने यूपी विधानसभा चुनाव का फूँका बिगुल, CM योगी ने पलटा पासा

उत्तर प्रदेश में जिला परिषद चुनावों में भाजपा को मिली विजय के पश्चात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई न्यूज़ चैनल को इंटरव्यू दिए। इन बातचीत के दौरान उनका आत्मविश्वास झलक रहा था। लगभग हर विषय पर हमेशा बेबाक बोलने वाले योगी आदित्यनाथ ने इस बार भी अपनी बातें उसी बेबाकी के साथ रखीं। उन्होंने विकास आधारित राजनीति, आगामी चुनावों में विपक्ष की संभावित रणनीति, हाल ही में सार्वजनिक हुआ संगठित धर्म परिवर्तन के खेल के साथ और विषयों पर अपने विचार रखे। उनकी ये बातचीत न सिर्फ सही समय पर हुई बल्कि उनके समर्थकों तथा भाजपा कार्यकर्ताओं के आत्मविश्वास के लिए आवश्यक भी थी। 

अगले वर्ष जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, उनमें उत्तर प्रदेश प्रमुख है। शायद यही कारण है कि हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश में केंद्रित और टूलकिट आधारित प्रोपेगेंडा के सहारे मुख्य रूप से दो बातें आगे रख कर एक बड़ा तूफान खड़ा करने का प्रयत्न किया गया। पहली बात; मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच तथाकथित असहमति और मतांतर की और दूसरी बात; प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कोरोना की दूसरी लहर में उनकी तथाकथित असफलता। 

राज्य नेतृत्व और दल के राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच तथाकथित मतान्तर की बात के साथ ही यह भ्रम पैदा करने का प्रयास किया गया कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व उत्तर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन पर विचार कर रहा है और आगामी विधानसभा चुनावों में किसी और नेता को आगे रखकर चुनाव लड़ना चाहता है। प्रोपेगेंडा के शोर में यह प्रश्न डूब गया कि इतने बड़े प्रदेश में चार वर्षों तक एक मजबूत नेता की अगुवाई में सफल सरकार चलाने के बाद किस दल का केंद्रीय नेतृत्व ऐसा करना चाहेगा? 

पर ऐसी अफवाह का कारण शायद यह है कि इसे फैलाने वाले कान्ग्रेसी और उनकी सहायक मीडिया अब तक राष्ट्रीय दलों की कार्य पद्धति भूल चुके हैं या फिर उनकी सोच कॉन्ग्रेस के इस पुराने दर्शन पर आधारित हैं जिसमें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने 1970 के बाद से किसी क्षेत्रीय नेता को फलने फूलने नहीं दिया। एक कारण और भी है कि पिछले लगभग तीन दशकों से क्षेत्रीय दलों की राजनीति और संगठन का आदी रहा उत्तर प्रदेश का राजनीतिक विमर्श राष्ट्रीय दलों की कार्य प्रणाली से दूर हो चुका है। ऐसे में जब कॉन्ग्रेस और उसके सहयोगी कहते हैं कि भाजपा उत्तर प्रदेश में किसी और नेता को आगे रखकर चुनाव लड़ना चाहती है तो इस बात पर आश्चर्य नहीं होता।
 
पिछले सात वर्षों में, खासकर मीडिया केंद्रित राजनीतिक विमर्श में लोगों ने भाजपा समर्थकों और कार्यकर्ताओं को आए दिन मीडिया हेडलाइंस और सूत्रों के हवाले से फैलाए गए फेक न्यूज़ पर बार-बार अधीर होते देखा है। मेरे विचार से यह बात टूलकिट प्रोपेगेंडा चलाने वालों को उत्साहित करती है और वे यह मान कर चलते हैं कि ऐसा करके समर्थकों और कार्यकर्ताओं के मन में भ्रम और रोष पैदा करना आसान है।

यह एक कारण है कि विपक्ष बार-बार भ्रम की स्थिति बनाकर किसी न किसी तरह का लाभ उठाने की कोशिश करता रहता है और इस बार भी रणनीति कुछ अलग नहीं रही। पर इस प्रोपेगेंडा का परिणाम भी वही हुआ जो अभी तक खड़े किए गए अन्य का हुआ था। मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ की असफलता को लेकर खड़ा किया गया प्रोपेगेंडा अधिक दिनों तक नहीं चला। कोरोना की दूसरी लहर से फैलने वाले संक्रमण को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई कोशिशें लोगों के सामने थीं। एक मुख्यमंत्री के तौर पर योगी काम करते दिखाई दिए और उनकी सरकार प्रभावशाली ढंग से कोरोना की दूसरी लहर पर नियंत्रण पाने में सफल रही। देशी और विदेशी मीडिया के प्रोपेगेंडा के बावजूद उनके प्रशासन ने धीरज के साथ काम किया।   

केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनके मतभेद की अफवाह की काट के लिए उन्होंने संवाद का सहारा लिया। उन्होंने जो किया वह राजनीति में नेताओं के लिए एक सीख बन सकती है। एक नेता के राजनीतिक यात्रा में जब दल, समर्थक और कार्यकर्ताओं के बीच किसी भी तरह का भ्रम पैदा हो तो उसे दूर करने के लिए संवाद से अच्छा और कुछ नहीं, इस बात को समझते हुए सीएम योगी ने दोतरफा संवाद का रास्ता अपनाया और काफी हद तक सफल भी दिखे। दिल्ली में राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ संवाद हो या फिर प्रदेशीय संगठन से, वे सफल दिखाई दे रहे हैं।

मीडिया के साथ बातचीत में हर प्रश्न का उत्तर देना एक नेता का कर्तव्य भी है और जिम्मेदारी भी और योगी इस कसौटी पर खरे उतर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से उन्होंने राजनीतिक सरगर्मियों के केंद्र में खुद को रखा है, उसे देखते हुए लगता है जैसे उत्तर प्रदेश में चुनाव का बिगुल फूँक दिया गया है। जिला परिषद चुनावों के बाद से विपक्ष की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया अभी तक रूटीन पॉलिटिकल एक्सरसाइज जैसी ही लगी है। समाजवादी पार्टी की ओर से भाजपा पर प्रशासन के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया जिसे सामान्य प्रतिक्रिया से आगे जाकर नहीं देखा जा सकता। हाँ, इस बीच समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मुलाकात की फोटो सार्वजनिक की है। इससे क्या संदेश मिलता है, उस पर बहस शायद जल्द ही शुरू हो।

योगी सरकार ने 12 घंटे में लगाए 25.5 करोड़ पौधे, पिछले 4 सालों में UP में वृक्षारोपण से बढ़ा 3% फॉरेस्ट कवर

उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन से लड़ने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की श्रृंखला में रविवार (जुलाई 4, 2021) को लगभग 25.5 मिलियन अर्थात 25.5 करोड़ पौधे लगाए गए।

रिपोर्ट्स के अनुसार पूरे दिन चलने वाला यह वृक्षारोपण कार्यक्रम 68,000 गाँवों और 83,000 वनीय क्षेत्रों में आयोजित किया गया। इस वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान सरकारी अधिकारियों, वालेंटियर्स, जन-प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। लखनऊ में सामाजिक संगठनों के द्वारा पीपल के पेड़ लगाए गए। उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार 25 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य 12 घंटे के अंदर हासिल कर लिया गया।

भारत ने अपने स्थल भाग का एक तिहाई हिस्सा फॉरेस्ट कवर के अंदर लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वृक्षारोपण कार्यक्रम 4 साल पहले ही शुरू कर दिया था। राज्य वन मंत्री दारा सिंह चौहान के मुताबिक यूपी में फॉरेस्ट कवर 3% से अधिक बढ़ा है, जबकि राष्ट्रीय औसत 2.89% है।

राज्य वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मनोज सिंह ने बताया, “हम उत्तर प्रदेश में फॉरेस्ट कवर को 15% से अधिक बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह लक्ष्य अगले 5 सालों के लिए तय किया गया है। आज के वृक्षारोपण अभियान के तहत 100 मिलियन से अधिक पौधे लगाए गए हैं।”

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक लाइव डैशबोर्ड भी शेयर किया है जहाँ वृक्षरोपित किए गए पौधों की संख्या को ट्रैक किया जा सकता है। डैशबोर्ड यहाँ से चेक किया जा सकता है।

हालाँकि इन पौधों का जिंदा रहना ही चिंता का एक विषय होता है। रिपोर्ट्स के अनुसार वृक्षारोपण के बाद 60% पौधे ही जीवित रह पाते हैं। बाकी पौधे या तो पानी की कमी से या बीमारी के कारण नष्ट हो जाते हैं। यूपी के वन मंत्री चौहान ने सूचना दी कि राज्य में पिछले 4 सालों के दौरान बेहतर देखरेख और जियो-टैगिन्ग के कारण इन पौधों के जीवित रहने की दर बढ़कर 80% हो गई है। भारत सरकार ने भी सभी राज्यों को यह निर्देशित किया है कि वे 2015 पेरिस समिट के दौरान तय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए वृक्षारोपण बढ़ाएँ। 2030 तक भारत में लगभग 95 मिलियन हैक्टेयर भूमि को जंगलों से कवर करने के लिए 6.2 बिलियन डॉलर (लगभग 46,050 करोड़ रुपए) खर्च करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

SC का CPI(M) नेताओं के खिलाफ 2015 विधानसभा हिंसा मामले को वापस लेने से इनकार, केरल सरकार को लगाई लताड़

सुप्रीम कोर्ट ने केरल विधानसभा में हंगामा करने वाले माकपा CPI(M) के विधायकों को राहत देने से इनकार कर दिया। ये मामला साल 2015 का है, जब राज्य में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की सरकार थी। राज्य सरकार ने केरल हाई कोर्ट के 12 मार्च के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और याचिका दाखिल कर विधायकों के खिलाफ केस वापस लेने की इजाजत माँगी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 जुलाई 2021) को कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों के सदन में अनियंत्रित व्यवहार को माफ नहीं किया जा सकता है और उन्हें सदन के अंदर सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करने के लिए मुकदमे का सामना करना होगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया और आगे की सुनवाई के लिए 15 जुलाई की तारीख तय की है। कोर्ट ने विधायकों द्वारा विधानसभा में माइक तोड़ने और हंगामा करने पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, “ये संगीन मामला है। विधायकों पर मुकदमा चलना चाहिए। आपने पब्लिक प्रॉपर्टी को बर्बाद किया है। आप जनता को क्या संदेश देना चाह रहे हैं।” 

सुप्रीम कोर्ट ने माकपा के नेतृत्व वाली केरल सरकार को याचिका दायर करने पर फटकार लगाई। आरोपितों में राज्य के पूर्व मंत्री केटी जलील और ईपी जयराजन शामिल हैं। केरल सरकार ने मामलों को वापस लेने के लिए राज्य के अभियोजन को अनुमति देने से इनकार करने के केरल हाईकोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने केरल सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार से कहा कि प्रथम दृष्टया पीठ का विचार है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के इस तरह के व्यवहार को माफ नहीं किया जा सकता और उन्हें मुकदमे का सामना करना चाहिए। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह संगीन मामला है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि विधायकों के खिलाफ मुकदमा चलना चाहिए। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “आपने पब्लिक प्रॉपर्टी को बर्बाद किया है। ये वे विधायक हैं जिन्होंने स्पीकर के मंच पर तोड़फोड़ की, उनकी कुर्सी को उखाड़ फेंका और माइक सिस्टम और कंप्यूटर को बाहर निकाल फेंका और अब राज्य सरकार चाहती है कि मामला वापस ले लिया जाए? राज्य उनका समर्थन कर रहा है? प्रथम दृष्टया हमारा विचार है कि उन्हें मुकदमे का सामना करना चाहिए। इस तरह के व्यवहार को माफ नहीं किया जा सकता है।” इससे पहले केरल हाईकोर्ट ने भी प्रदेश सरकार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुकदमा वापस लेने की इजाजत नहीं दी थी।

गौरतलब है कि केरल विधानसभा में बजट पेश करने के दौरान हंगामा हुआ था। हंगामे का ये मामला साल 2015 का है। हंगामे के दौरान कुछ विधायकों ने माइक तोड़ दिए थे और एक-दूसरे पर हमला करने की कोशिश भी की थी। इस घटना को लेकर विधायकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था जिस पर निचली अदालत में सुनवाई चल रही है। अब केरल सरकार विधायकों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेना चाहती है।

‘केजरीवाल सरकार ने लोगों को हर मामले में किया विफल, दिल्ली मॉडल शासन पहले ही खारिज’: कैप्टन अमरिंदर सिंह

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक बार फिर से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा है। सोमवार (5 जुलाई 2021) को उन्होंने दिल्ली सरकार को घेरते हुए कहा, “राष्ट्रीय राजधानी में स्थित गाँवों में किसानों को मुफ्त बिजली ना देकर और उद्योगों को बहुत ही ऊँचे दर पर बिजली उपलब्ध कराकर केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। पंजाब के लोगों ने दिल्ली मॉडल शासन को पहले ही खारिज कर दिया है।”

बता दें कि पंजाब सरकार बिजली संकट को लेकर इन दिनों विपक्ष के निशाने पर है। आम आदमी पार्टी भी जमकर विरोध कर रही है। इसी को लेकर पंजाब के मोहाली में शनिवार (3 जुलाई 2021) को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के घर के पास विरोध कर रहे आम आदमी पार्टी (AAP) के लोकसभा सांसद भगवंत मान और विधायक हरपाल सिंह चीमा समेत पार्टी के 23 सदस्यों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत नामजद FIR दर्ज की गई थी। 

AAP की पंजाब इकाई के प्रमुख भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता बिजली कटौती को लेकर कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। मुख्यमंत्री के फार्महाउस की ओर जाने वाली सड़क पर भारी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था और बहुस्तरीय बैरिकेड लगाए गए थे। AAP पार्टी के झंडे लिए कार्यकर्ता जैसे ही बैरिकेड के पहले स्तर से आगे बढ़े और दूसरे स्तर तक पहुँचे, पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार की।

अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली सरकार उपभोक्ताओं, विशेष कर धान की खेती करने वाले किसानों को फसल बोने के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं करा पाने पर विपक्ष के निशाने पर है। इससे पहले AAP नेताओं ने लोगों को सस्ती दरों पर 24 घंटे बिजली मुहैया कराने में ‘विफल’ रहने के लिए कॉन्ग्रेस सरकार की आलोचना की थी। मान ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे पंजाब के 2.75 करोड़ लोगों के ‘दुख’ को मुख्यमंत्री तक पहुँचाने के लिए एकत्र हुए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया था कि वे ‘अपने फार्महाउस में सो रहे हैं।’

दिल्ली बार काउंसिल ने धर्म परिवर्तन और निकाह के लिए चैंबर उपयोग करने पर वकील इकबाल मलिक का लाइसेंस किया निलंबित

बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने धर्म परिवर्तन और निकाह (इस्लामी विवाह) करने के लिए अपने चैंबर का उपयोग करने के लिए वकील इकबाल मलिक के लाइसेंस को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। दिल्ली बार काउंसिल के सचिव पीयूष गुप्ता ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि शिकायत मिलने पर यह कार्रवाई की गई।

बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने पाया कि इस तरह का आचरण ‘कानूनी पेशे की गरिमा को नुकसान पहुँचाता है’। काउंसिल द्वारा पारित एक प्रस्ताव में कहा गया है, “न ही कथित अवैध गतिविधियों की अनुमति नहीं है और न ही यह एक वकील की व्यावसायिक गतिविधियों का हिस्सा है। निकाह कराने और धर्मांतरण और निकाहनामा / विवाह प्रमाण पत्र जारी करने में आपका आचरण पूरी तरह से शर्मनाक है और यह कानूनी पेशे की गरिमा के विपरीत है।”

इसमें आगे कहा गया है, “शिकायत और दस्तावेजों के कथन के अनुसार, प्रथम दृष्टया एक वकील या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा चैंबर/कोर्ट परिसर में निकाह कराने जैसी गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती है और इस तरह गतिविधि पर बार काउंसिल द्वारा तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।”

प्रस्ताव में आगे कहा गया, “माननीय अध्यक्ष रमेश गुप्ता ने इस मुद्दे की गंभीरता पर विचार करते हुए और कानूनी बिरादरी की गरिमा और सम्मान को बनाए रखने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया नियम के रूल 43 और एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 6 (1) (डी) के तहत प्रदत्त विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस मुद्दे को विशेष अनुशासनात्मक समिति के पास भेजा और एक अंतरिम उपाय के रूप में, अनुशासन समिति द्वारा आपके प्रैक्टिस के लाइसेंस को निलंबित करना आवश्यक और उचित माना है।”

यह फैसला तब आया जब एक पिता ने शिकायत की कि उनकी बेटी को जबरन इस्लाम में परिवर्तित किया गया था और उसके बाद कड़कड़डूमा कोर्ट में वकील के चैंबर में निकाह कर दिया गया था। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, पिता का यह भी तर्क है कि दस्तावेजों में अदालत के चैंबर को मस्जिद के रूप में दिखाया गया था।

कचौड़ी लेने गए लड़के पर तहसीम ने फेंका खौलता तेल, चेहरा झुलसाने के बाद आरोपित बाप-बेटा फरार

उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक कचौड़ी की दुकान पर भयावह घटना घटी है। दुकान पर पहुँचे एक लड़के पर दुकानदार के बेटे ने खौलता तेल डाल दिया, जिससे लड़के का पूरा चेहरा झुलस गया। पीड़ित की गलती बस इतनी थी कि उसने दुकानदार के बेटे से दुकान पर बहस कर ली।

जानकारी के मुताबिक, घटना मेरठ के लिसाड़ी गेट के एक इलाके की है। वहाँ नौशाद नाम का नाबालिग लड़का कचौड़ी लेने तहसीम (कुछ रिपोर्ट्स में तहसीम आरोपित के पिता का नाम बताया गया है) की दुकान पर गया था, लेकिन वहाँ दोनों की किसी बात को लेकर बहस हो गई। धीरे-धीरे मामला गरमा गया और फिर हाथापाई शुरू हो गई। इस बीच तहसीम के पिता और नौकर भी मौके पर पहुँच गए और मारपीट बढ़ गई।

झगड़े के दौरान ही दुकानदार के बेटे ने नौशाद पर खौलता तेल फेंक दिया और देखते ही देखते नाबालिग का सिर, चेहरा और छाती झुलस गया। नौशाद की चीख सुनकर आसपास के लोग इकट्टा हो गए, लेकिन आरोपित मौका देखकर फरार हो गए। कुछ देर में लड़के के परिजनों को घटना का पता चला तो वो भी भागते हुए मौके पर पहुँचे और बेटे को लेकर अस्पताल गए। गनीमत है कि नाबालिग की की आँखें बच गई हैं।

बेटे की पट्टी होने के बाद परिजन लिसाड़ी गेट थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुँचे। मामले में पुलिस की पड़ताल में जारी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मेरठ सिटी एसपी विनीत भटनागर का कहना है कि मामला दो नाबालिगों के बीच झगड़े का है। उन्होंने बताया कि दोनों की बहस हो गई और हलवाई के बेटे ने करछे में गर्म तेल भरकर नौशाद नाम के नाबालिग लड़के पर फेंक दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। 

इस मामले को लेकर थाना प्रभारी प्रशांत कपिल ने बताया कि पीड़ित का उपचार कराया गया है। तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज हो रही है और जल्द ही फरार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 

Twitter नए IT नियमों का पालन करने में रहा विफल, उसे मिलने वाली छूट हो सकती है खत्म: दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार

केंद्र सरकार और ट्विटर के बीच तकरार जारी है। केंद्र सरकार ने सोमवार (5 जुलाई 2021) को दिल्ली हाईकोर्ट को अपने एफिडेविट में बताया कि ट्विटर भारत के नए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों 2021 का पालन करने में विफल रहा है, जो देश का कानून है और इसका अनिवार्य रूप से पालन करना आवश्यक है

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) के मुताबिक, केंद्र सरकार ने कोर्ट में कहा कि सभी प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों को आईटी नियम 2021 लागू करने के लिए 3 महीनों का समय दिया गया था, जिन्हें लागू करने की समय सीमा 25 मई थी, लेकिन इस अवधि के दौरान ट्विटर इन नियमों का अनुपालन करने में असफल रहा है।

उन्होंने अदालत में कहा कि माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर भारत में मुख्य अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति करने, निवासी शिकायत अधिकारी और नोडल अधिकारी की 1 जुलाई तक नियुक्ति करने में असफल रहा है।

कोर्ट में दाखिल किए गए अपने हलफनामे में सरकार ने कहा कि किसी भी गैर-अनुपालन को आईटी नियमों के प्रावधानों का उल्लंघन माना जाएगा, जिससे ट्विटर आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79 (1) के तहत मिलने वाली छूट को खो सकता है। यह हलफनामा वकील अमित आचार्य की एक याचिका के जवाब में दायर किया गया है। उन्होंने दावा किया था कि ट्विटर केंद्र के नए आईटी नियमों का पालन नहीं कर रहा।

आईटी नियम के तहत भारत में मुख्य अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति अनिवार्य

ट्विटर ने दिल्ली हाईकोर्ट को शनिवार (3 जुलाई 2021) बताया था कि नए आईटी नियमों के अनुसार एक अंतरिम मुख्य अनुपालन अधिकारी और एक अंतरिम स्थानीय शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति के अंतिम चरण में है। वकील अमित आचार्य की एक याचिका के जवाब में दाखिल हलफनामे में ट्विटर ने कहा था कि भारतीय यूजर्स द्वारा उठाए गए मुद्दों को एक शिकायत निवारण अधिकारी देख रहे हैं।

तथ्य यह है कि ट्विटर ने अपने कैलिफोर्निया स्थित ग्लोबल लीगल पॉलिसी डायरेक्टर को नियुक्त किया है। जेरेमी केसल को भारत का नया शिकायत अधिकारी नियुक्त किया गया है। हालाँकि, नए आईटी नियम में इस भूमिका के लिए भारत का निवासी होना अनिवार्य है।

गौरतलब है कि 25 फरवरी 2021 को केंद्र सरकार ने डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म्स और ओटीटी (ओवर-द-टॉप) प्लेटफॉर्म के लिए नए नियम जारी किए थे। नए नियमों का उद्देश्य लोगों को पारंपरिक मीडिया जैसे न्यूज चैनलों व समाचार पत्रों के समान ही ऑनलाइन कंटेंट मुहैया करवाना है। नए नियम फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर और ओटीटी प्लेटफॉर्म जैसे नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, डिजनी हॉटस्टार और कई अन्य जैसे सोशल मीडिया/डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर लागू होंगे।

25 मई 2021 को समय सीमा समाप्त होने के बाद भी ट्विटर ने अब तक नए नियमों को लागू नहीं किया है और न ही इसके तहत अपने प्लेटफॉर्म पर ट्वीट के बारे में शिकायतों के निवारण के लिए स्थानीय शिकायत अधिकारी की नियुक्ति किया है। नए आईटी नियमों, 2021 के तहत सोशल मीडिया नेटवर्कों को इस बात का पता लगाना होगा कि कोई मैसेज सबसे पहले किसने भेजा। इसके साथ ही किसी पोस्ट, मैसेज के बारे में शिकायतों का निवारण के लिए स्थानीय शिकायत अधिकारी नियुक्त करने को कहा है।