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‘तकनीक कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई का अभिन्न अंग’: PM मोदी ने विश्व समुदाय को CoWin के बारे में बताया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (जुलाई 5, 2021) को ‘कोविन ग्लोबल कॉन्क्लेव’ को संबोधित करते हुए महामारी में ‘प्रौद्योगिकी’ (Technology) के महत्व को बताया। संबोधन के दौरान सबसे पहले उन्होंने विश्व के सभी देशों में महामारी में जान गँवाने वाले लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट की।

उन्होंने कहा कि सौ वर्षों में ऐसी महामारी पहले कभी नहीं देखी गई। पीएम मोदी ने कहा कि अनुभव से पता चलता है कि कोई भी राष्ट्र, चाहे वह राष्ट्र कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अलगाव में इस तरह की चुनौती का समाधान नहीं कर सकता।

न्होंने कहा कि महामारी की शुरुआत से ही भारत इस लड़ाई में अपने सभी अनुभवों, विशेषज्ञता और संसाधनों को वैश्विक समुदाय के साथ साझा करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। अपनी तमाम मजबूरियों के बावजूद हमने दुनिया के साथ ज्यादा से ज्यादा साझा करने की कोशिश की है।

‘प्रौद्योगिकी’ कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई का अभिन्न अंग 

पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि प्रौद्योगिकी कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई का अभिन्न अंग है। सौभाग्य से, सॉफ्टवेयर एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें संसाधनों की कोई कमी नहीं है। इसलिए हमने तकनीकी रूप से संभव होते ही अपने कोविड ट्रेसिंग और ट्रैकिंग ऐप को ओपन सोर्स बना दिया।

PM ने आगे कहा कि कोई भी राष्ट्र कितना भी मजबूत क्यों ना हो लेकिन वह इस तरह की महामारी का सामना अकेले नहीं कर सकता है। भारतीय सभ्यता पूरे विश्व को एक परिवार मानती है। इस महामारी ने कई लोगों को इस दर्शन के मौलिक सत्य का एहसास कराया है। इसलिए COVID टीकाकरण के लिए हमारे प्रौद्योगिकी मंच, जिसे हम CoWIN कहते हैं- को ओपन सोर्स बनाने के लिए तैयार किया जा रहा है। 

‘हमने शुरू से ही वैक्सीनेशन अभियान को डिजिटल माध्यम से जोड़ा’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोरोना संक्रमण से उभरने के लिए वैक्सीनेशन एक उम्मीद है। हमने शुरू से ही वैक्सीनेशन अभियान को डिजिटल माध्यम से जोड़ा है। हम सभी को एकसाथ मिलकर आगे बढ़ना होगा। COVID19 के खिलाफ हमारी लड़ाई में टेक्नोलॉजी अहम है।

सौभाग्य से सॉफ्टवेयर एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें संसाधनों की कोई कमी नहीं है। इसलिए हमने तकनीकी रूप से संभव होते ही अपने कोविड ट्रेसिंग और ट्रैकिंग ऐप को ओपन सोर्स बना दिया है। महामारी से सफलतापूर्वक उभरने के लिए टीकाकरण मानवता के लिए सबसे अच्छी उम्मीद है। शुरुआत से ही हमने भारत में अपनी टीकाकरण रणनीति की योजना बनाते समय पूरी तरह से डिजिटल दृष्टिकोण अपनाने का फैसला किया।

संसद में चल रही थी बहस, MP ने महिला सांसद को जड़ डाले 2 थप्पड़! गिरफ़्तारी की माँग: वीडियो वायरल

ट्यूनीशिया की संसद में एक पुरुष सांसद ने बहस के दौरान एक महिला सांसद को पीट दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में दिख रहा है कि पार्लियामेंट में डिबेट के दौरान निर्दलीय सांसद समरा साहबी अचानक से अपनी सीट से उठे और महिला सांसद अबीर मोउसी को कई थप्पड़ मार दिये।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि डिबेट के दौरान दोनों सांसदों में किसी मुद्दे को लेकर तीखी बहस हो रही होती है। इसी दौरान समरा साहबी अपनी सीट से उठते हैं और अबीर पर थप्पड़ चलाने लगते हैं। घटना के दौरान कई सदस्य मामले को संभालने की कोशिश करते दिख रहे हैं।

बताया जाता है कि यह वीडियो 1 जुलाई का है। फ्री डिस्टोरियन पार्टी की नेता अबीर मोउसी संसद में ट्यूनीशिया और कतर फंड फॉर डेवलप के बीच हुए एक करार पर अपना विरोध दर्ज करा रही थीं। उसी दौरान पुरुष सांसद ने इस घटना को अंजाम दिया।

बहस के दौरान फेसबुक लाइव में अबीर मोउसी कहा कि ट्यूनीशिया के लोगों देखो ये हमारे देश को बेचने की कोशिश की जा रही है। इसी दौरान पुरुष सांसद ने उन पर हमला कर दिया। इस घटना के बाद मोउसी ने अपना दर्द बयाँ किया। उन्होंने वीडियो पर कैप्शन दिया, “ये है उनका असली चेहरा। हिंसा, नियमों को तोड़ना और महिलाओं का अपमान करना।” बता दें कि साल 2019 के चुनावों में अबीर मोउसी ने 17 सीटें जीती थीं।

जज और कार्यकर्ता कलथौम कानो ने आरोपित सांसद समरा की गिरफ्तारी की माँग की है। वो साल 2019 में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार भी रह चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अबीर मोउसी और फ्री डेस्टोरियन के सांसद इस्लामी आंदोलनों के मुखर आलोचक रहे हैं। खासतौपर ये एन्नाहदा आंदोलन और इंटरनेशनल यूनियन ऑफ मुस्लिम स्कॉलर्स (आईयूएमएस) के भी विरोधी रहे हैं।

मामले में डेमोक्रेटिक ब्लॉक की प्रतिनिधि सामिया अब्बू ने कहा, “संसदीय ताकत सांसद को कानून से ऊपर नहीं रखती है।”

अमेरिकी मीडिया को चीन ने की करोड़ों की फंडिंग, NYT और TIME को मिली बड़ी धनराशि: खबर की जगह छापा चीनी प्रोपेगंडा

दुनिया का सुपर पावर बनने का सपना संजोने वाला चीन अपने प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने के लिए वैश्विक मीडिया को लगातार पैसे खिला रहा है। चीन का प्रोपेगेंडा आउटलेट चाइना डेली ने मीडिया प्रभाव बढ़ाने के लिए पिछले छह महीनों में प्रमुख अमेरिकी समाचार पत्रों और पत्रिकाओं को लाखों डॉलर की फंडिंग की है। यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट में दायर दस्तावेजों के हवाले से एक स्वतंत्र विश्लेषक ने इस बात का खुलासा किया है।

जस्टिस डिपार्टमेंट के खुलासे के अनुसार, चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा नियंत्रित अंग्रेजी अखबार चाइना डेली ने टाइम मैगज़ीन, फॉरेन पॉलिसी मैगज़ीन, फाइनेंशियल टाइम्स, वाशिंगटन पोस्ट समेत कई प्रमुख अमेरिकी प्रकाशनों को लाखों अमेरिकी डॉलर की फंडिंग की है।

अमेरिकी समाचार पत्रों को दी गई राशि

रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाइम मैगज़ीन को 7,00,000 अमेरिकी डॉलर, फाइनेंशियल टाइम्स को 3,71,577 अमेरिकी डॉलर, फॉरेन पॉलिसी मैगजीन को 2,91,000 अमेरिकी डॉलर, लॉस एंजिलिस टाइम्स को 2,72,000 अमेरिकी डॉलर दिया गया है। इसके अलावा, कई दूसरे संस्थानों को दस लाख डॉलर से अधिक की फंडिंग की गई है।

जस्टिस डिपार्टमेंट के मुताबिक, चाइना डेली ने इन पब्लिकेशंस को विज्ञापन के लिए भी भुगतान किया है। इसके तहत, न्यूयॉर्क टाइम्स को 50,000 अमेरिकी डॉलर, फॉरेन पॉलिसी को 2,40,000 अमेरिकी डॉलर, डेस मोइनेस रजिस्टर को 34,600 अमेरिकी डॉलर और सीक्यू-रोल कॉल को 76,000 अमेरिकी डॉलर का भुगतान किया गया।

चाइना डेली ने अमेरिकी समाचार पत्रों में विज्ञापन पर कुल 1,10,02,628 अमेरिकी डॉलर (81.72 करोड़ रुपए) खर्च किया है। इसके अलावा, चीन सोशल मीडिया पर बैन होने के बावजूद चीन ने ट्विटर पर विज्ञापन के लिए 2,65,822 अमेरिकी डॉलर खर्च किए।

इसके अलावा, द लॉस एंजिल्स टाइम्स, द सिएटल टाइम्स, द अटलांटा-जर्नल कॉन्स्टिट्यूशन, द शिकागो ट्रिब्यून, द ह्यूस्टन क्रॉनिकल और द बोस्टन ग्लोब भी चाइना डेली के क्लाइंट के रूप में सूचीबद्ध हैं।

पिछले महीने 1 जून 2021 को चीन ने अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स को भुगतान का पहला विस्तृत लेखा-जोखा पेश किया था, जिसके बाद ये खुलासा हुआ था। कथित तौर पर यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट ने सालों पहले चाइना डेली को विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (एफएआरए) के तहत अपनी गतिविधियों का खुलासा करने के लिए कहा था। इसके बाद आउटलेट ने नवंबर 2016 और अप्रैल 2020 के बीच की अवधि के लिए किए गए खर्चों का खुलासा किया था।

द डेली कॉलर ने पिछले महीने एक रिपोर्ट में खुलासा किया था कि चाइना डेली ने नवंबर 2016 से द वाशिंगटन पोस्ट को $4.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर (34.17 करोड़ रुपया) और वॉल स्ट्रीट जर्नल को लगभग $6 मिलियन अमेरिकी डॉलर (44.57 करोड़ रुपए) से अधिक की फंडिंग की है। इन दोनों संस्थानों ने ‘चाइना वॉच’ नाम से कथित तौर पर चाइना डेली द्वारा उपलब्ध कराए गए पेड कटेंट चलाए। ये कंटेंट ऐसे रखे जाते थे जैसे न्यूज हों, लेकिन वास्तव में इसमें समसामयिक विषयों पर चीन के पक्ष में विचार रखे गए होते थे।

‘द हिंदू’ ने भी दिया था फुल पेज एड

1 जुलाई 2021 को ‘द हिंदू’ अखबार ने भी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की शताब्दी वर्षगाँठ के मौके पर ऐडवरटोरियल के नाम पर फुल पेज का ऐड छापा था। खास बात यह है कि ‘द हिंदू’ ने चीन के पेड कंटेंट को इस तरीके से प्रकाशित किया था कि यह रुटीन खबरों की तरह ही दिखे। ‘द हिंदू’ ने दो दिनों से भी कम समय में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और उसके सर्वोच्च नेता शी जिनपिंग की प्रशंसा वाले दो संपादकीय प्रकाशित किए गए।

पड़ोसी सरफराज (पोपट) ने नाबालिग से किया रेप का प्रयास, आए दिन घर पर आता था: शोर मचने पर पकड़ा गया

उत्तर प्रदेश के कानपुर के बेकनगंज से दुष्कर्म के प्रयास का एक मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक सही समय पर हल्ला मचने से आरोपित को पकड़कर उसे पुलिस में दे दिया गया। अब आगे नाबालिग लड़की की शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है। साथ ही लड़की को मेडिकल के लिए डफरीन अस्पताल में भेजा गया है।

मामले में यूपी के बेकनगंज थाना के इंस्पेक्टर नवाब अहमद ने बताया कि उनके पास नाबालिग लड़की के परिजनों ने शिकायत दी है। इसी के आधार पर रिपोर्ट लिखकर आगे की कार्रवाई हो रही है। आरोपित की पहचान सरफराज उर्फ पोपट के तौर पर हुई है। उसको गिरफ्तार कर लिया गया है और नाबालिग लड़की को मेडिकल के लिए भी भेजा जा चुका है।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, सरफराज ने नाबालिग को बहला फुसला कर उसके साथ दुष्कर्म करने की योजना बनाई थी। लेकिन लड़की के शोर मचाने के कारण वह पकड़ा गया। बताया जा रहा है लड़की के पिता एक दुकानदार हैं जो रिजवी रोड पर पान मसाले की दुकान लगाते हैं। वहीं सरफराज उनका पड़ोसी है जो आए दिन उनके घर पर पहुँचा रहता था।

अपने इसी आने-जाने का फायदा उठाकर रविवार के दिन सरफराज ने दुकानदार की नाबालिग बेटी को बहलाया और पड़ोस के मकान में गलत नियत से ले गया। कमरे में ले जाने के बाद सरफराज ने उसके साथ दुष्कर्म करने की कोशिश की। लेकिन, अपने साथ होते इस रवैया को देखकर नाबालिग लड़की ने तेजी से शोर मचाना शुरू कर दिया। नाबालिग बच्चे की आवाज सुनकर परिजन और मोहल्ले के लोग वहाँ पहुँच गए। उसके बाद लोगों ने पोपट को जमकर पीटा। इसी बीच मौके पर पहुँची पुलिस को सरफराज को सौंप दिया गया।

उल्लेखनीय है कि अभी कुछ दिन पहले यूपी के बहराइच से दुष्कर्म का एक मामला सामने आया था। वहाँ एक युवक ने बच्ची को उसके घर से देर रात सोते में उठाया और बाद में उसे स्कूल के शौचालय में खून से लथपथ अवस्था में छोड़कर भाग गया। जब ग्रामीणों ने बच्ची की खोजबीन शुरू की तो स्कूल के बाहर आरोपित को पकड़ा गया। पुलिस से बचने के लिए उसने भागने की कोशिश की लेकिन मुठभेड़ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

वहीं बच्ची को खून से लथपथ देख उसे फौरन नानपारा के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में भर्ती कराया गया। बाद में हालत गंभीर देख उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहाँ बच्ची ने दम तोड़ दिया। इस दौरान ग्रामीणों ने आरोपित को पुलिस हवाले किया लेकिन वहाँ उसने भागने की कोशिश की और पुलिस की मुठभेड़ में गोली लगने से घायल हो गया।

‘आधी रात को बजेगा हॉर्न, ट्रैक्टर और सिलिंडर लेकर हाइवे पर जुटें’: किसानों ने संसद भवन के सामने प्रदर्शन का किया ऐलान

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने रविवार (जुलाई 4, 2021) को कहा कि मानसून सत्र के दौरान संसद के सामने केंद्र के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ रोज करीब 200 किसानों का एक समूह प्रदर्शन करेगा। बता दें कि कृषि कानूनों के विरोध में 40 से ज्यादा किसान संगठन, संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में पिछले कई महीने से प्रदर्शन कर रहे हैं। 

SKM ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि सत्र शुरू होने के दो दिन पहले सदन के अंदर कानूनों का विरोध करने के लिए सभी विपक्षी सांसदों को एक चेतावनी पत्र दिया जाएगा। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा, “हम विपक्षी सांसदों से भी 17 जुलाई को सदन के अंदर हर दिन इस मुद्दे को उठाने के लिए कहेंगे, जबकि हम विरोध में बाहर बैठेंगे। हम उनसे कहेंगे कि संसद का बर्हिगमन कर केंद्र को लाभ न पहुँचाएँ। जब तक सरकार इस मुद्दे का समाधान नहीं करती तब तक सत्र को नहीं चलने दें।”

हर संगठन से शामिल होंगे पाँच लोग

संसद का मानसून सत्र 19 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। राजेवाल ने कहा, “जब तक वे हमारी माँगें नहीं सुनेंगे, हम संसद के बाहर लगातार विरोध प्रदर्शन करेंगे। प्रत्येक किसान संगठन के पाँच लोगों को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए ले जाया जाएगा।” संयुक्त किसान मोर्चा ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतों के खिलाफ आठ जुलाई को देशव्यापी विरोध का भी आह्वान किया। 

राष्ट्रीय राजमार्गों पर आने की अपील

मोर्चा ने लोगों से राज्य के और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक बाहर आने और अपने वाहन को वहाँ लगाने को कहा। उन्होंने कहा, “आपके पास जो भी वाहन है, ट्रैक्टर, ट्रॉली, कार, स्कूटर, बस उसे निकटतम राज्य या राष्ट्रीय राजमार्ग पर लाएँ और वहाँ पार्क करें। लेकिन ट्रैफिक जाम न लगाएँ।” उन्होंने विरोध में एलपीजी सिलेंडर लाने को भी कहा।

‘7-8 जुलाई की रात 12 बजे 8 मिनट तक बजाएँगे गाड़ियों के हॉर्न’

किसान नेता ने लोगों से रात 12 बजे आठ मिनट के लिए ‘अपने वाहनों का हॉर्न बजाने’ की भी अपील की। उन्होंने विरोध में एलपीजी सिलेंडर लाने को भी कहा। किसान नेता ने कहा, “मैं सभी महिलाओं से अपने गैस सिलेंडर को सड़कों पर लाने और विरोध का हिस्सा बनने का आह्वान करता हूँ।”

‘शर्तों के साथ सरकार से बात नहीं होगी’

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के हालिया बयान के बारे में एक सवाल के जवाब में राजेवाल ने कहा कि किसान ‘शर्तों के साथ बात नहीं करेंगे।’ कृषि मंत्री ने कहा था कि सरकार किसानों के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है। राजेवाल ने कहा, “नेता शर्तों के साथ कृषि कानूनों के बारे में बात करना चाहते हैं, हम उनसे बात करने के लिए तैयार हैं लेकिन तभी जब वे कानूनों को निरस्त करने के लिए सहमत हों।”

तोमर ने एक जुलाई को जोर देकर कहा था कि केंद्र के तीनों कृषि कानून किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाएँगे और यह स्पष्ट किया कि सरकार इन कानूनों को निरस्त करने की माँग को छोड़कर विरोध करने वाले किसानों के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है।

‘BJP के साथ शिवसेना का रिश्ता आमिर खान और किरण राव की तरह, भारत-Pak वाला नहीं’: संजय राउत

महाराष्ट्र में चल रही सियासी हलचल के बीच शिवसेना नेता संजय राउत ने एक बड़ा बयान दिया है। राउत ने भारतीय जनता पार्टी के साथ अपने रिश्तों की तुलना अभिनेता आमिर खान और उनकी पूर्व पत्नी किरण राव से की है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान के बाद उन्होंने अपनी टिप्पणी दी।

उन्होंने कहा, “हम भारत-पाकिस्तान नहीं हैं। आमिर खान और किरण राव को देखिए, यह उस तरह का रिश्ता है। हमारे (शिवसेना-बीजेपी के) राजनीतिक रास्ते अलग हैं लेकिन दोस्ती हमेशा बरकरार रहेगी।”

बता दें कि इससे पहले रविवार (4 जुलाई 2021) को ही देवेंद्र फडणवीस ने भाजपा और शिवसेना को लेकर अपना बयान दिया था। उन्होंने कहा था, “भाजपा और शिवसेना दुश्मन नहीं हैं, हालाँकि मतभेद हैं। स्थिति के अनुसार उचित निर्णय लिया जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा था, “हमारे दोस्त (शिवसेना) ने हमारे साथ 2019 का विधानसभा चुनाव लड़ा। लेकिन चुनाव के बाद उन्होंने (शिवसेना) उन्हीं लोगों (राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी और कॉन्ग्रेस) से हाथ मिला लिया जिनके खिलाफ हमने चुनाव लड़ा था।” वह बोले, “हमारा हाथ छोड़ कर हमारे साथी जिनके विरोध में चुनाव लड़ कर आए, उनका हाथ पकड़ कर चले गए। इसीलिए मतभेद पैदा हुआ। लेकिन वे हमारे शत्रु नहीं हैं। ”

गृह मंत्री अमित शाह के साथ उनकी हाल की बैठक और भाजपा-शिवसेना के फिर से एक साथ आने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर फडणवीस ने कहा था, “राजनीति में कोई ‘किंतु परंतु’ नहीं होता है। परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिए जाते हैं।”

रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री के इसी बयान के बाद संजय राउत का जवाब आया। उनका ये बयान आमिर और किरण के साझा बयान के आधार पर है जिसमें वह अलग होने का ऐलान कर रहे हैं। साथ ही अपने फैन्स से कह रहे हैं,

“आपको बहुत दुख हुआ होगा। शॉक लगा होगा। लेकिन हम आपको बताना चाहते हैं कि हम दोनों बहुत खुश हैं। हम एक ही परिवार हैं। हमारे रिश्ते में चेंज आया है लेकिन हम लोग एक दूसरे के साथ ही हैं। तो आप लोग ऐसा कभी मत सोचिएगा और पानी फाउंडेशन हमारे लिए आजाद की तरह है। जैसे हमारा बच्चा है आजाद वैसे ही पानी फाउंडेशन है।  हम लोग हमेशा फैमिली ही रहेंगे। आप लोग हमारे लिए दुआ कीजिए कि हम खुश हों। बस यही कहना था।”

‘माँ-बाप के तलाक का जश्न मना रही, अब नई सौतेली माँ कौन होगी?’: इरा खान ने शेयर किया केक खाते हुए वीडियो

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान और किरण राव के तलाक के फैसले के बाद उनकी बेटी इरा खान को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करना भारी पड़ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो को देखकर यूजर्स भड़क गए हैं। इसको लेकर वह इरा को जमकर ट्रोल कर रहे हैं। दरअसल, इरा खान इस वीडियो में चीजकेक खाती हुई नजर आ रही हैं।

इंस्टाग्राम पर sidjadeja1899 नाम के यूजर ने लिखा, “किरण राव तो झाँकी है अभी करीना कपूर बाकी है? देख लेना। आमिर खान की घरवाली को अब हिंदुस्तान में डर नहीं लगेगा, डराने वाले ने तलाक दे दिया।”

वीडियो देखने के बाद इंस्टाग्राम पर nis.5183 नाम के यूजर ने इरा की पोस्ट पर कमेंट किया, ”क्या लड़की है यार, इसको बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता मम्मी-पापा के अलग होने से।”

वहीं, एक अन्य यूजर coolpremba लिखा, ”अब इरा की नई माँ आने वाली हैं, मुबारक हो।” abaumbey ने लिखा, “तुम्हारे पापा का तलाक हो रहा है।” इस तरह उन्हें सोशल मीडिया पर फॉलो करने वाले अन्य लोगों ने भी ट्रोल किया। deepak_singh_parmar555 नाम के यूजर ने लिखा, ”तेरे पापा ने तेरी मम्मी को छोड़ दिया, उसकी खुशी मना रही हो।”

_x_darksun_x नाम के यूजर ने लिखा है, “आपके परिवार में क्या चल रहा है…? क्या शादी आप लोगों के लिए मजाक है.. कौन बनने वाली है आपकी अगली सौतेली माँ।” इसके अलावा और भी कई सोशल मीडिया यूजर्स ने आमिर खान और किरण राव के तलाक को लेकर इरा खान को ट्रोल किया है।

वहीं, mj.always24 नाम के यूजर ने क​हा कि इनको कोई फर्क नहीं पड़ता इनके माँ-बाप चाहे तलाक ले। इनको आदत होती है अलग-अलग माँ-बाप के साथ रहने की। शादी का और माँ-बाप के रिश्ते का मज़ाक बना रखा है इन जैसे लोगों ने।

गौरतलब है कि आमिर खान और किरण राव के तलाक लेने की घोषणा करने के बाद रविवार को दोनों के इंटरव्यू की एक क्लिप सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हुई थी। वीडियो में दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए नजर आ रहे थे। इस दौरान आमिर ने कहा था, ”आप लोगों को बहुत दुख हुआ होगा और शॉक भी लगा होगा, लेकिन हम आपको बताना चाहते हैं कि हम बहुत खुश हैं। हमारे रिश्ते में चेंज आया है, लेकिन हम दोनों एक दूसरे के साथ हैं। तो आप लोग ऐसा कभी मत सोचिएगा।”

‘थ्री इडियट्स’ फिल्म के अभिनेता ने किरण का हाथ पकड़ते हुए आगे कहा था, ”पानी फाउंडेशन हमारे लिए आजाद की तरह है। जैसे हमारा बच्चा आजाद है, वैसे ही पानी फाउंडेशन है। हम लोग हमेशा फैमिली ही रहेंगे। आप लोग हमारे लिए दुआ कीजिए कि हम खुश हों। हम लोगों को बस यही कहना था।”

बता दें कि आमिर खान और किरण राव ने शनिवार (3 जुलाई 2021) को एक संयुक्त बयान जारी कर तलाक लेने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था, “हम साथ में खुश रहे, हँसे। हमारा रिश्ता विश्वास, प्यार और सम्मान के मामले में लगातार बढ़ता ही रहा। अब हमने निर्णय लिया है कि अब हम जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करेंगे, लेकिन पति-पत्नी के रूप में नहीं।” बकौल आमिर खान और किरण राव, उनका ये नया जीवन उनके बेटे आजाद के अभिभावक के रूप में होगा, एक परिवार के रूप में होगा।

फादर स्टेन स्वामी का कोर्ट में बेल याचिका की सुनवाई से पहले निधन, भीमा कोरेगाँव मामले में थे आरोपित

एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले के आरोपित कथित आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता स्टेन स्वामी का सोमवार (जुलाई 5, 2021) को कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। 84 वर्षीय स्वामी पार्किंसंस रोग सहित कई बीमारियों से पीड़ित थे। वह पिछले साल कोविड से भी संक्रमित हुए थे। बॉम्बे हाईकोर्ट में उनकी बेल याचिका की सुनवाई के समय स्वामी के वकील मिहिर देसाई ने यह जानकारी दी।

इससे पहले खबर आई थी कि रविवार रात तक, 84 वर्षीय फादर स्टेन स्वामी जीवन रक्षक प्रणाली पर थे। 28 मई से उनका इलाज होली फैमिली हॉस्पिटल में चल रहा था।

फादर स्टेन स्वामी का पक्ष रख रहे सीनियर एडवोकेट मिहिर देसाई ने सुनवाई की शुरुआत में कहा, “इससे पहले कि मैं कुछ भी कहूँ, मेडिकल डायरेक्टर डॉ. डिसूजा कुछ कहना चाहेंगे।” इसके बाद डिसूजा ने कोर्ट को स्वामी के निधन की जानकारी दी। डिसूजा ने कहा, “शनिवार को सुबह 4.30 बजे उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया, हम उन्हें बचा नहीं सके।”

बता दें कि भीमा कोरेगाँव मामले में स्टेन स्वामी को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने 8 अक्टूबर को हिरासत में लिया था। फादर स्टेन स्वामी पर दो साल पहले महाराष्ट्र के भीमा कोरेगाँव में हुई हिंसा व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रचने में संलिप्तता का आरोप था। उनके विरुद्ध भीमा कोरेगाँव मामले में एनआईए ने उन पर आतंकवाद निरोधक क़ानून (यूएपीए) की धाराएँ भी लगाई गई थीं।

हालाँकि केरल के मूल निवासी और कथित मानवाधिकार कार्यकर्तास्टेन स्वामी (Father Stan Swamy) ने पूरे मामले में संलिप्तता से इनकार किया था। कोरेगाँव भीमा मामले की जाँच कर रही एनआईए की एक टीम ने नामकुम स्टेशन परिसर में फादर स्टेन स्वामी को गिरफ्तार किया था।

फादर स्टेन स्वामी ख़ुद को एक सामाजिक कार्यकर्ता बताते थे और आदिवासी क्षेत्रों में वह अक्सर सक्रिय रहता थे। पिछले कई दशकों से वह आदिवासियों के बीच सक्रिय थे। वह मानवाधिकार की बातें भी करते थे और इसे लेकर सरकारों को घेरते थे। वह नक्सलियों के प्रखर समर्थक थे और ख़ुद दावा करते थे कि लगभग 3000 निर्दोष लोगों को जेल में नक्सली बता कर बंद रखा गया है और उसके लिए उन्होंने अदालत में पीआईएल दाखिल कर रखी थी। भीमा कोरेगाँव मामले में पुलिस ने कई नक्सलियों व उनके समर्थकों को गिरफ़्तार किया था। इनमें कई ऐसे थे, जो ख़ुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं।

‘मैं कॉलेज में पिताजी वाली बेंच पर बैठता था, मुझ पर भी लोग हँसते हैं’: तेज प्रताप ने RJD के समारोह में भाई को भी लपेटा

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने सोमवार (जुलाई 5, 2021) को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के ‘रजत स्थापना दिवस समारोह’ में शिरकत की। राजद की स्थापना को 25 साल पूरे हुए हैं, ऐसे में हाल में जेल से छूटे लालू यादव ने भी कार्यकर्ताओं को सम्बोधित किया व बधाई दी। लेकिन, तेज प्रताप यादव सबके आकर्षण का केंद्र रहे, जिन्होंने अपने भाई तेजस्वी पर भी तंज कसने से गुरेज नहीं किया।

तेज प्रताप यादव ने कहा कि उन्हें पूजा-पाठ करने में देर हो गई थी, तभी तेजस्वी उनसे पहले मंच पर आकर बैठ गए। उन्होंने पटना के राजद दफ्तर में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “मैं जब भी मंच पर आता हूँ तो पिताजी की तरह मनोरंजन करने का काम करता हूँ। संगठन में बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो पार्टी को आगे जाने देना नहीं चाहते हैं। मैं नाम नहीं लेना चाहता हूँ, लेकिन सच्चाई लोग सुनना नहीं चाहते हैं।”

तेज प्रताप ने इसके बाद ये भी कहा कि वो इशारे में बहुत बात बोल गए हैं, समझने वाले समझ गए होंगे। असल में उनका इशारा राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह की तरफ था, जिन्हें तेजस्वी यादव के गुट का माना जाता है। 2020 बिहार विधानसभा चुनाव में टिकट बँटवारे के समय भी तेज प्रताप और जगदानंद के बीच खटास सामने आई थी। तेज प्रताप यादव ने कार्यक्रम में दावा किया कि वो अपने पिता लालू यादव का अनुसरण करते हैं।

उन्होंने बताया कि चूँकि RJD सुप्रीमो ने छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी, इसीलिए उन्होंने भी अपना दाखिला बिहार नेशनल (BN) कॉलेज में ही कराया। उन्होंने यहाँ तक दावा किया कि वो कॉलेज के क्लासरूम में ठीक उसी बेंच पर बैठते थे, जहाँ उनके पिता लालू यादव कभी बैठा करते थे। उन्होंने संगठन को समुद्र बताते हुए कहा कि इसमें उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, इसीलिए रूठों को मनाया जाना चाहिए।

राजद के 25वें स्थापना दिवस पर तेज प्रताप यादव का सम्बोधन

उन्होंने कहा कि जब वो कुछ बोलते हैं तो लोग ऐसे ही हँसते हैं, जैसे लालू यादव के बयानों पर विरोधी हँसते थे। उन्होंने कहा कि वो अपने पिता की तरह ही लोगों का मनोरंजन करते हैं। उन्होंने कहा कि महिला कार्यकर्ताएँ पार्टी से नाराज हैं, क्योंकि उन्हें कार्यालय में बैठने के लिए जगह नहीं दी जाती। उन्होंने कहा कि तेजस्वी देश-दुनिया में व्यस्त रहते हैं और उनके दिल्ली जाने पर कार्यालय में वही मोर्चा संभालते हैं।

हालाँकि, राजद के 25वें स्थापना दिवस पर लगे पोस्टर-बैनरों में तेज प्रताप यादव को जगह नहीं मिली। पोस्टरों में लालू यादव की वापसी हुई है। वहीं उनके और राबड़ी देवी के अलावा सिर्फ तेजस्वी यादव की तस्वीर है, जिसका साफ़ संदेश है कि राजद का असली चेहरा वही हैं। वहीं मंच वाले मुख्य बैनर में सिर्फ लालू-राबड़ी को रखा गया है। लालू यादव इस कार्यक्रम में दिल्ली से वर्चुअल रूप से जुड़े। उनके साथ राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती मौजूद थीं।

पंजाब में भारतीय सेना के जवान की लिंचिंग मामले में आरोपितों के खालिस्तानी लिंक आए सामने: जानें कैसे हुआ खुलासा

पंजाब के गुरदासपुर में भारतीय सेना के जवान दीपक सिंह की लिंचिंग के मामले में आरोपितों के खालिस्तान आंदोलन से संबंध सामने आ रहे हैं। ट्विटर यूजर AkkaPrasanna ने अपने एक ट्विटर थ्रेड में सिख सियासत की 2018 की एक रिपोर्ट के बारे में बताया है, जिसमें मुख्य आरोपित दलजीत सिंह उर्फ बॉबी की पुलिस कस्टडी से रिहाई की खबर का उल्लेख किया गया है। बॉबी की रिहाई की जानकारी सिख यूथ फेडरेशन भिंडरावाले (SYFB) के प्रमुख रंजीत सिंह ने साझा की थी।

दलजीत सिंह उर्फ बॉबी भारतीय सेना के जवान की लिंचिंग के मामले में मुख्य आरोपित है और फरार है। हालाँकि, खालिस्तान समर्थकों ने बॉबी के निर्दोष होने की बात कहनी शुरू कर दी है और सेना के जवान पर ‘ईशनिंदा’ का आरोप लगाया है।

दलजीत सिंह की रिहाई की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट (बाएं), सोर्स : सिख सियासत दलजीत सिंह की हाल की फोटो (दाएं) सोर्स : दीप सिद्धू फ़ेसबुक

यहाँ ध्यान देने योग्य बात है कि रंजीत सिंह (दमदमी टकसाल) ने एक किताब ‘शहीद-ए-खालिस्तान’ लिखी थी, जिसमें खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाले का गुणगान किया गया था। साथ ही इस किताब में दूसरे खालिस्तानी आतंकियों की जीवनी के साथ-साथ इससे जुड़ी कुछ ऐतिहासिक घटनाओं का विवरण दिया गया था। इस किताब को दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में खालिस्तान समर्थक दीप सिद्धू ने बाँटा था। किताब बाँटने के दौरान एक तस्वीर में किताब पकड़े हुए सिद्धू को रंजीत सिंह के साथ देखा गया था। 

(बाएं) दीप सिद्धू (ऑरेंज पगड़ी में) भिंडरावाले पर लिखी किताब को प्रमोट करता हुआ (सोर्स : हिन्दू पोस्ट) एवं (दाएं) भिंडरावाले पर रंजीत सिंह के द्वारा लिखी गई किताब का कवर

ऑपइंडिया दमदमी टकसाल के सदस्य और कथावाचक बरजिन्दर सिंह परवाना के बारे में पहले ही बता चुका है। उसने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें वह दीपक सिंह की लिंचिंग को यह कहते हुए जायज ठहरा रहा है कि दीपक ने गुरु ग्रंथ साहिब की ‘बेअदबी’ की है। जब हमने परवाना की सोशल मीडिया प्रोफाइल चेक की तो यह सामने आया कि वह खुलकर भिंडरावाले का समर्थन करता रहा है। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि उसके हाथ पर भिंडरावाले का एक बड़ा सा टैटू बना हुआ है।  

बरजिन्दर सिंह परवाना के लाइव वीडियो में दिखाई दिया भिंडरावाले का टैटू (सोर्स: फेसबुक वीडियो)

दमदमी टकसाल का इतिहास :

दमदमी टकसाल की स्थापना 18वीं शताब्दी में गुरु गोबिन्द सिंह जी ने की थी। इसका उद्देश्य था गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार करना। टकसाल के पहले प्रमुख बाबा दीप सिंह जी थे, जो गुरु गोबिन्द सिंह जी के सहयोगी थे। दमदमी शब्द दमदमा साहिब गुरुद्वारा से निकला है, जहाँ सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिन्द सिंह जी ने ग्रंथ साहिब को वर्तमान स्वरूप दिया। टकसाल का मतलब एक ऐसा संस्थान है जहाँ पक्के सिख तैयार किए जाते हैं।

गौरतलब है कि जरनैल सिंह भिंडरावाले भी दमदमी टकसाल का ही छात्र था। उसने टकसाल की जालंधर-अमृतसर हाइवे के आसपास चौक मेहता गाँव में स्थित शाखा में तालीम ली थी। उसने 11 साल की उम्र से ग्रंथों को पढ़ना शुरू किया था और 1977 में 30 साल की उम्र में दमदमी टकसाल की जिम्मेदारी ले ली थी। भिंडरावाले 1984 में अपनी मौत तक इसका प्रमुख नेता बना रहा। यह माना जाता है कि टकसाल का प्रमुख बनने के बाद से ही भिंडरावाले अलगाववाद और हिंसा का पर्याय बन गया था।