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कॉन्ग्रेस का हाथ झटक प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत आज TMC में होंगे शामिल, ‘वैक्सीन कांड’ पर किया था ममता का बचाव: रिपोर्ट्स

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी आज (सोमवार 5 जुलाई 2021) टीएमसी में शामिल हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अभिजीत मुखर्जी आज शाम चार बजे टीएमसी के पार्टी कार्यालय में तृणमूल कॉन्ग्रेस में शामिल होंगे। इस दौरान टीएमसी एमपी सुदीप बंद्योपाध्याय और संसदीय मंत्री पार्थ चटर्जी उपस्थित रहेंगे।

हाल ही वो पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी से मिले थे, जिसके बाद से ही उनके कॉन्ग्रेस छोड़ने को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। इसके अलावा पिछले महीने 9 जून 2021 को उन्होंने जंगीपुर में टीएमसी के नेताओं के साथ बैठक भी की थी, जिसमें टीएमसी सांसद खलीलुर रहमान, जिलाध्यक्ष अबू ताहिर, विधायक इमानी विश्वास, दो मंत्री अखरुज्जमाँ और सबीना यास्मीन समेत कई लोग शामिल थे।

हालाँकि, जंगीपुर से कॉन्ग्रेस के सांसद रहे अभिजीत मुखर्जी इन खबरों से इनकार करते रहे हैं। उन्होंने कहा था कि ये लोग मेरे पिता जी के अच्छे मित्र हैं और उनके आवास पर चाय के लिए आए थे।

टीकाकरण विवाद पर दिया था ममता का साथ

रिपोर्ट के मुताबिक, टीएमसी के साथ कॉन्ग्रेस सांसद की नजदीकियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में कोलकाता में फर्जी वैक्सीनेशन को लेकर जब विवाद हुआ था थो अभिजीत मुखर्जी ने ममता बनर्जी का समर्थन किया था। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “अगर दीदी ममता बनर्जी को एक नकली आईएएस अधिकारी देबंजन देब द्वारा नकली टीकाकरण शिविर के लिए व्यक्तिगत रूप से दोषी ठहराया जाना है, तो निश्चित रूप से मोदी जी को नीरव मोदी, विजय माल्या, मेहुल चोकसी आदि द्वारा सभी घोटालों के लिए दोषी ठहराया जा सकता है। इसलिए किसी के व्यक्तिगत कार्यों के लिए पश्चिम बंगाल सरकार को दोष देने का कोई मतलब नहीं है।”

गौरतलब है कि बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पश्चिम बंगाल के कृष्णनगर उत्तर से बीजेपी के विधायक रहे मुकुल रॉय और उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय ने भी हाल ही में टीएमसी में घर वापसी की थी। नॉर्थ 24 परगना के नेता और टीएमसी से बीजेपी में शामिल हुए पूर्व विधायक सुनील सिंह के भी घरवापसी करने की खबरें हैं। बताया जा रहा है कि वो भी जल्द ही टीएमसी में शामिल हो सकते हैं। हालाँकि, लोकल स्तर पर उनका विरोध भी हो रहा है।

बरखा दत्त और आमिर खान में प्यार, इसी वजह से आमिर-किरण का हुआ तलाक: Fact Check

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के तलाक के बाद सोशल मीडिया पर हैरान करने वाला दावा किया जा रहा है। दावे के मुताबिक आमिर और किरण के तलाक के पीछे पत्रकार बरखा दत्त का हाथ है। वायरल संदेश के साथ एक वीडियो भी शेयर की जा रही है, जिसमें कहा गया कि दोनों के बीच की ‘दोस्ती’ कारगिल ट्रिप से ही गहरी हुई थी।

पूरे संदेश में लिखा है, “पनौती बरखा दत्त ही है आमिर खान के तलाक की वजह। ये कोई मजाक नहीं है। देखिए इस वीडियो को आमिर और बरखा एक दूसरे से छुप छुप कर मिलते रहे हैं कुछ सालों से और अब खबर आई है आमिर और किरण राव के तलाक की। वैसे सोचने वाली बात ये भी है कि आमिर को बस हिंदू औरतें ही क्यों मिलती हैं प्यार का नाटक करने के लिए। अब ये मत कहना की बरखा दत्त हिंदू कहाँ हैं।”

इस संदेश के साथ शेयर की गई वीडियो में देख सकते हैं कि होस्ट बता रही हैं कि आमिर खान जेसिका हाइन्स नाम की पत्रकार के साथ संबंधों की वजह से चर्चा में थे और अब वह NDTV की (पूर्व) पत्रकार बरखा दत्त से करीबियों के वजह से चर्चा में हैं। होस्ट बताती हैं कि दोनों के बीच की लव स्टोरी कारगिल पर शूट के लिए जाते समय शुरू हुई।

इसके अलावा होस्ट ने अपने दावों को सही बताने के लिए वीडियो में ये भी कहा कि आमिर को अपने काम के चलते बरखा दत्त के शहर दिल्ली जाना पड़ता है, जहाँ दोनों को अक्सर बहुत सारी पार्टियों में देखा गया। वह कहती हैं कि इन दोनों की लव स्टोरी ज्यादा दिन छिपी नहीं रह सकती क्योंकि बरखा दत्त एक पत्रकार हैं।

आमिर खान और बरखा दत्त के बीच संबंध? क्या है सच्चाई

सोशल मीडिया पर घूमते हुए ये वीडियो जब ऑपइंडिया के पास पहुँची तो हमने इसकी पड़ताल की। जाँच में पता चलता है कि बरखा दत्त और आमिर खान ने एनडीटीवी के जय जवान एपिसोड के लिए कारगिल की एक साथ यात्रा की थी। जिसके बाद कई गॉसिप वेबसाइट्स का ये कहना था कि लगान की शूटिंग के दौरान कोई पत्रकार अक्सर उनसे मिलने सेट पर आती थी।

कुछ साइट्स ने तब दावा किया था कि यही करीबियाँ उनकी पहली पत्नी रीना दत्ता से तलाक की वजह बनी। इसलिए, ये साफ है कि किरण राव के साथ आमिर के तलाक के पीछे बरखा दत्त का हाथ नहीं है। सोशल मीडिया पर पुराने दावे शेयर हो रहे हैं। साल 2004 की एक रिपोर्ट के अनुसार जब किसी मीडियाकर्मी ने बरखा दत्त से आमिर खान के साथ उनके कथित संबंध के बारे में पूछा, तो वह नाराज हो गईं और उन्होंने उनका परिचय माँगा था।

मालूम हो कि आमिर खान अपने रिलेशन्स को लेकर काफी विवादों में रहे हैं। उनकी लगान फिल्म साल 2001 में रिलीज हुई थी। इसके बाद दिसंबर 2002 में रीना दत्ता के साथ अपने तलाक की घोषणा की। फिर वह किरण राव से सेट पर मिले और साल 2004 में जेसिका नामक पत्रकार ने दावा किया कि उनका बेटा जान आमिर का बेटा है, जिसका जन्म 13 सितंबर 2004 को हुआ। हालाँकि जेसिका के दावों को आमिर खान ने खारिज कर दिया था। साल 2005 में आमिर ने किरण राव से शादी की और अब 15 साल बाद वह उनसे भी अलग हो रहे हैं। अब अफवाह है कि उनका अफेयर दंगल की को-स्टार फातिमा सना शेख से चल रहा है।

कुल मिलाकर सोशल मीडिया पर बात ये सामने आती है कि आमिर खान का बरखा दत्त के साथ अफेयर की अफवाह थी 2002-2004 में, मगर इस संबंध में न कभी कुछ स्वीकारा गया और न इन्हें खारिज किया गया। इस समय जो वीडियो शेयर हो रही है, वो है तो वास्तविक लेकिन पुरानी है और हालिया तलाक के साथ उसका कोई लेना-देना नहीं है।

40 ठिकानों पर CBI की रेड, 190 के खिलाफ FIR: अखिलेश सरकार की परियोजना में ₹1437 करोड़ का कोई हिसाब नहीं

उत्तर प्रदेश में ‘गोमती रिवर फ्रंट योजना’ घोटाला मामले में CBI ने एक साथ 40 ठिकानों पर छापेमारी की है। CBI ने इस मामले में सोमवार (जुलाई 4, 2021) को कुल 190 आरोपितों के खिलाफ FIR भी दर्ज की। ये परियोजना अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार की सबसे महत्वकांक्षी परियोजनाओं में से एक थी। आरोपितों में अधिकतर सुपरिंटेंड इंजीनियर और अधिशासी इंजीनियर हैं।

CBI ने लखनऊ, कोलकाता, अलवर, सीतापुर, रायबरेली, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, बुलंदशहर, इटावा, अलीगढ़, एटा, गोरखपुर, मुरादाबाद और आगरा में एक साथ 40 ठिकानों पर रेड मारी। राजधानी लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने योगी आदित्यनाथ सरकार के निर्देश पर सिंचाई विभाग की ओर से लखनऊ के गोमतीनगर थाने में मामला दर्ज किया था। CBI ने इसी को आधार बना कर कार्रवाई शुरू की है।

‘गोमती रिवर फ्रंट योजना’ के तहत बड़ी गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। आरोप है कि इस परियोजना का काम भी पूरा नहीं हुआ और 95% धनराशि यूँ ही खर्च कर दी गई। ये रुपया कहाँ गया, इस सम्बन्ध में CBI जाँच कर रही है। इस परियोजना में झूठा खर्च दिखा कर पूरी रकम का आपस में ही बंदरबाँट कर लिया गया, ऐसे आरोप हैं। मनमाने तरीके से सरकारी रकम को खर्च कर के इसका दुरुपयोग किया गया।

इस परियोजना के लिए कुल 1513 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे, जिसमें से 1437 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद भी अभी तक 60% काम भी पूरा नहीं हुआ है। जिस कंपनी को इस काम का ठेका दिया गया, उसे भी संदिग्ध माना जा रहा है। आरोप है कि वो कंपनी पहले से ही डिफॉल्टर थी। 2017 में योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के साथ ही इस भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ और न्यायिक जाँच बिठाई गई थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज न्यायमूर्ति आलोक सिंह की अध्यक्षता में गठित समिति सिफारिश की थी कि इस मामले में संदिग्ध अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और FIR दर्ज की जाए। इसके बाद जून 9, 2017 को सिंचाई विभाग के अधिशासी इंजिनियर डॉक्टर अंबुज द्विवेदी ने गोमतीनगर थाने में धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। अब CBI इस मामले की जाँच कर रही है।

इस परियोजना को 2015 में लॉन्च किया गया था। कई पर्यावरण विशेषज्ञों ने भी कहा था कि नदी के इकोसिस्टम के लिए ये परियोजना ठीक नहीं है। इसी साल मार्च में CBI को उत्तर प्रदेश सरकार ने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए हरी झंडी दिखाई थी। इस मामले में घूस के आदान-प्रदान के कई सबूत CBI को पहले ही मिल चुके हैं। ये घूस बैंक से रुपए निकाल कर कैश के रूप में दिए गए थे।

लोनी दाढ़ी मामले में फँसे कॉन्ग्रेसी नेता और TheWire: गाजियाबाद पुलिस ने भेजा नोटिस, कहा – ‘1 हफ्ते में हाजिर होकर जवाब दो’

गाजियाबाद के लोनी में अब्दुल नामक आलिम की दाढ़ी काटने के मामले को ‘जय श्रीराम’ का एंगल देने पर ट्विटर की मुश्किलें अब तक खत्म नहीं हुईं हैं। खबर है कि पुलिस ने इस मामले में ट्विटर के पूर्व अधिकारी समेत 5 लोगों को फिर नोटिस भेजा है। इससे पहले एक नोटिस 21 जून को भेजा गया था और अब दूसरा 2 जुलाई को भेजा गया है।

जानकारी के मुताबिक, जिन लोगों को नोटिस भेजा गया, उसमें कॉन्ग्रेस नेता शमा मोहम्मद और द वायर के मालिक सिद्धार्थ वर्धराजन का नाम भी शामिल है। इनके अलावा सलमान निजामी, मशकूर उस्मानी और ट्विटर इंक के पूर्व रेजीडेंट ग्रीवांस ऑफिसर फॉर इंडिया धर्मेंद्र चतुर का नाम भी है। इन सबको पुलिस ने इनके बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा है। गाजियाबाद की लोनी पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 41ए के तहत ये नोटिस जारी किया है। इसमें आरोपितो को एक हफ्ते के अंदर हाजिर होकर जवाब देने के लिए कहा गया है। 

इससे पहले अब्दुल समद की दाढ़ी काटने के मामले में फर्जी एंगल देने पर पुलिस ने 17 जून को ट्विटर इंडिया के एमडी मनीष माहेश्वरी को नोटिस भेजा था। इसमें उन्हें 7 दिन में उनका बयान दर्ज कराने को कहा गया था, लेकिन तब वह पुलिस के समक्ष पेश नहीं हुए थे। बाद में कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी गाजियाबाद पुलिस को माहेश्वरी के ख़िलाफ़ कठोर कार्रवाई करने पर रोक लगा दी और आदेश में कहा कि पुलिस डिजिटल तरीके से माहेश्वरी से पूछताछ कर सकती है।

बता दें कि अब्दुल समद के मामले में ट्विटर पर फर्जी कंटेंट को फैलाने का आरोप है। गाजियाबाद पुलिस ने इस संबंध में समाचार वेबसाइट द वायर, पत्रकार मोहम्मद जुबैर और राणा अय्यूब के अलावा कॉन्ग्रेस नेताओं सलमान निजामी, मस्कूर उस्मानी, शमा मोहम्मद और लेखक सबा नकवी के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

उन पर उस वीडियो को शेयर करने का आरोप लगाया गया कि जिसमें एक बुजुर्ग अब्दुल शमद सैफी ने दावा किया था कि कुछ युवकों ने उनकी कथित रूप से पिटाई की थी, जिन्होंने उनसे ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए भी कहा। हालाँकि पुलिस का दावा है कि सांप्रदायिक अशांति फैलाने के लिए वीडियो शेयर किया गया था। पुलिस ने बताया कि हमला इसलिए हुआ क्योंकि आरोपित बुलंदशहर निवासी सैफी द्वारा बेचे गए ‘ताबीज’ से नाखुश था। पुलिस ने इस मामले में सांप्रदायिक एंगल से इनकार किया था। 

देश भर में वायरल हुए उस वीडियो में सैफी ने कथित तौर पर कहा था कि उन पर कुछ युवकों ने हमला किया और ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए मजबूर किया। लेकिन जिला पुलिस के मुताबिक घटना के दो दिन बाद सात जून को दर्ज अपनी प्राथमिकी में उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा। 15 जून को दर्ज प्राथमिकी में कहा गया था कि गाजियाबाद पुलिस ने घटना के तथ्यों के साथ एक बयान जारी किया था लेकिन इसके बावजूद आरोपितों ने अपने ट्विटर हैंडल से वीडियो नहीं हटाया।

‘इन मुजरिमों पर सरकार का हाथ, लिंचिंग के लिए मुस्लिमों का नाम ही काफी’: RSS प्रमुख के बयान से भड़के ओवैसी

राजनीतिक दल AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान से भड़क गए हैं। उन्होंने कहा कि ये नफरत हिंदुत्व की देन है और इन ‘मुजरिमों’ को हिंदुत्ववादी सरकार की पुश्त पनाही हासिल है। उन्होंने कहा, “इन अपराधियों को गाय और भैंस में फ़र्क़ नहीं पता होगा लेकिन क़त्ल करने के लिए जुनैद, अखलाक़, पहलू, रकबर, अलीमुद्दीन के नाम ही काफी थे।” उन्होंने ट्विटर पर एक के बाद एक ट्वीट कर के RSS प्रमुख से नाराजगी जताई।

असदुद्दीन ओवैसी ने लिखा, “केंद्रीय मंत्री के हाथों अलीमुद्दीन के कातिलों की गुलपोशी हो जाती है, अखलाक़ के हत्यारे की लाश पर तिरंगा लगाया जाता है, आसिफ़ को मारने वालों के समर्थन में महापंचायत बुलाई जाती है, जहाँ भाजपा का प्रवक्ता पूछता है कि क्या हम मर्डर भी नहीं कर सकते? कायरता, हिंसा और क़त्ल करना गोडसे की हिंदुत्व वाली सोच का अटूट हिस्सा है। मुस्लिमों की लिंचिंग भी इसी सोच का नतीजा है।”

बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि ‘हिन्दू-मुस्लिम एकता’ उनके विचार से एक बड़ा ही भ्रामक शब्द है। उन्होंने कहा कि ये दो हैं ही नहीं तो एकता की बात क्यों। उन्होंने कहा कि इन दो शब्दों को जोड़ना है ही नहीं क्योंकि ये तो जुड़े हुए हैं। मोहन भागवत ने कहा कि जब ये मानने लगते हैं कि हम जुड़े हुए नहीं हैं, तब दोनों संकट में पड़ जाते हैं।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि हिन्दू-मुस्लिम समान पूर्वजों के वंशज हैं। बकौल मोहन भागवत, वैज्ञानिक भी सिद्ध कर चुके हैं कि पिछले 40,000 वर्षों से हम सभी भारतीयों का DNA समान ही है। उन्होंने आगे कहा था, “गौमाता पूज्य हैं, लेकिन लिंचिंग करने वाले हिंदुत्व के खिलाफ जा रहे हैं। वो आततायी हैं। कानून के जरिए उनका निपटारा होना चाहिए, क्योंकि ऐसे मामले बनाए भी जाते हैं। कहा नहीं जा सकता कि कौन से सही हैं और कौन से गलत।”

मोहन भागवत ने आगे कहा, “अथर्ववेद में भी लिखा है कि हरेक धर्मों को मानने वाले और हर एक भाषा बोलने वाले यहाँ एक साथ रहते है। मुद्दों पर आपके मत अलग-अलग हो सकते हैं, क्योंकि प्रजातंत्र में अभिव्यक्ति जाहिर करने की स्वतंत्रता है। हिन्दू-मुस्लिम एक ही समाज के हैं, ये पक्का समझ कर चलना चाहिए। भारत में इस्लाम आक्रांताओं के साथ आया। गुरु नानक देव के समय से ही हिन्दू-मुस्लिमों को जोड़ने का प्रयास चल रहा है।”

गाजियाबाद में सरसंघचालक मोहन भागवत का सम्बोधन

हालाँकि, उन्होंने सवाल दागा कि आज तक एकता क्यों नहीं आ पाई। उन्होंने कहा कि ये सत्ता या राजनीति नहीं, बल्कि समाज ही करेगा। उन्होंने कहा कि लोगों को समझदार बनना पड़ेगा। बकौल सरसंघचालक, लिंचिंग के मामलों में पक्षपात के बिना जाँच हो और दोषी को सज़ा हो। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज का आत्म-सामर्थ्य बढ़ाने का काम कर रहा है, लेकिन साथ ही कहा कि कुछ लोग डर के मारे एक नहीं होना चाहते।

असल में असदुद्दीन ओवैसी ने मोहन भागवत के शब्दों का सन्दर्भ समझे बिना ही बयान दे दिया, जबकि मोहन भागवत ने भारत के विभिन्न समुदायों के बीच एकता की बात की थी। उन्होंने उदाहरण दिया था कि कैसे प्राचीन काल में वायु, अग्नि और वरुण की पूजा करने वाले साथ रहते थे। त्वरित प्रतिक्रिया देने वालों से पूछा जाना चाहिए कि अपराधियों को सज़ा दिलाने की बात करना और भारत की एकता की वकालत करना कहाँ से ‘नफरत’ वाली भाषा हो गई?

सरसंघचालक को पता था कि कुछ लोग उनके बयान का विरोध करेंगे और अपने इसी सम्बोधन में उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले भी अच्छे इंसान हैं। उन्होंने उनका दर्द महसूस करते हुए कहा कि उन्हें ठोकर लगी होती है, इसीलिए वो कहते हैं कि ये सब (एकता) संभव नहीं है।

IAS (रिटायर्ड) की बेटी लव जिहाद की शिकार: आदित्य बन आरिफ ने फँसाया, धर्म परिवर्तन के लिए घर का पूजा स्थल भी तोड़ा

उत्तर प्रदेश के आगरा से लव जिहाद का एक हाई प्रोफाइल मामला सामने आया है। यहाँ आरिफ हाशमी नाम के एक व्यक्ति ने अपना नाम आदित्य बता कर रिटायर्ड IAS अधिकारी की बेटी से ‘शादी’ कर लेने का प्रपंच रचा, धोखे से ऐसी फोटो खिंचावाई मानो सही में सिंदूर भर रहा हो। इसके बाद पीड़िता पर धर्म परिवर्तन का दबाव भी बनाने लगा। पीड़िता की शिकायत पर यूपी पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

लव जिहाद की शिकार हुई रिटायर्ड आईएएस की बेटी की पहले शादी हो चुकी थी लेकिन 2005 में उसके पति की मौत हो गई थी। पीड़िता के पति होटल कारोबारी थे। ऐसे में अपने पति की मौत के बाद पीड़िता ही होटल का पूरा कारोबार देखती थी। पीड़िता के चाचा भी आईएएस थे।

पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए पीड़िता ने बताया कि लखनऊ की एक पार्टी में उसकी मुलाकात आरोपित आरिफ हाशमी से हुई। पीड़िता के अनुसार आरिफ ने अपना नाम आदित्य आर्य बताया और खुद को लकड़ी का एक बड़ा कारोबारी भी बताया। इसके बाद दोनों की मुलाकात होती रही।

पीड़िता ने लगाए यौन उत्पीड़न और मारपीट के आरोप

पीड़िता ने हाशमी के खिलाफ पुलिस में दर्ज की गई अपनी शिकायत में बताया है कि हाशमी ने एक बार पीड़िता को टीका लगाते हुए फोटो खिंचवा ली और बाद में इसी फोटो के दम पर वह पीड़िता को ब्लैकमेल करने लगा। पीड़िता के अनुसार इस फोटो में ऐसा प्रतीत होता है जैसे हाशमी उसकी माँग भर रहा है। इसके बाद हाशमी ने पीड़िता पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया, उसके परिवार को बदनाम करने का भय दिखाकर पीड़िता का यौन उत्पीड़न किया और अप्राकृतिक संबंध भी बनाए।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि हाशमी ने अपनी लाइसेंसी बंदूक दिखाकर पीड़िता से पैसे भी वसूले। जब पीड़िता को हाशमी की सच्चाई पता चली तो उसने विरोध करना प्रारंभ किया, जिसके बाद आरोपित हाशमी ने उसके साथ मारपीट की और उसके बाल भी काट दिए। इतना ही नहीं हाशमी ने घर का पूजा स्थल भी तोड़ दिया।

पीड़िता की शिकायत पर आगरा पुलिस ने आरोपित आरिफ हाशमी पर मारपीट, हत्या का प्रयास, अप्राकृतिक कृत्य, लूट एवं धोखाधड़ी, दुष्कर्म और धर्मांतरण प्रतिशोध अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है।

सामने आया आरोपित का राजनैतिक कनेक्शन

लव जिहाद का यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर आरोपित हाशमी की फोटो कई बड़े नेताओं के साथ वायरल हुई है। इन फोटो में आरिफ हाशमी, सपा नेता अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव और आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह के साथ देखा जा सकता है।

तजिंदर पाल सिंह बग्गा के ट्वीट का स्क्रीनशॉट
तस्वीरों में कई बड़े नेताओं के साथ आरोपित हाशमी

मीडिया रिपोर्ट्स में भी आरोपित के कई बड़े नेताओं के साथ संबंधों के बारे में बताया जा रहा है। भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा और नवीन जिंदल ने आरोपित हाशमी की कई नेताओं के साथ फोटो शेयर की है।

‘ऐतिहासिक क्षण’: मणिपुर पहुँची ट्रेन का लोगों ने राष्ट्रगान के साथ किया स्वागत, CM ने प्रधानमंत्री का जताया आभार

भारतीय रेलवे ने मणिपुर को बड़ी सौगात दी है। आज़ादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी पैसेंजर ट्रेन का मणिपुर के ब्रॉड गॉज लाइन पर वैंगाईचुनपाओ तक सफल ट्रायल रन हुआ है। असम के सिल्चर रेलवे स्टेशन से मणिपुर के वैंगाईचुनपाओ स्टेशन पहुँची। ये रेलवे स्टेशन मणिपुर के तमेंगलोंग जिले में स्थित है। शुक्रवार (जुलाई 2, 2021) को इस पैसेंजर ट्रेन का पहला ऐतिहासिक ट्रायल रन पूरा किया गया था। कुछ ही दिनों में इस रेल लाइन का उद्घाटन खुद केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल करेंगे।

‘राजधानी एक्सप्रेस’ नाम की पैसेंजर ट्रेन को बीच में जिरीबाम रेलवे स्टेशन पर भी रोका गया। वहाँ पर ट्रेन के साथ आए अधिकारियों का स्थानीय लोगों ने स्वागत किया। इसके बाद स्थानीय जनता और अधिकारियों ने मिल कर ट्रेन को सम्मान दिया। इस प्रक्रिया के बाद वहाँ राष्ट्रगान के साथ राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा भी फहराया गया। नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के पब्लिक रिलेशन्स (PR) अधिकारी नृपेन भट्टाचार्य ने कहा कि जल्द ही इस लाइन पर रेल सेवा शुरू होगी।

इससे मणिपुर के लोग भी रेलवे के जरिए बाकी देश से और अच्छे से जुड़ जाएँगे और उनके लिए आवागमन आसान हो जाएगा। मणिपुर का जिरीबाम रेलवे के नक़्शे पर है और रेलवे लाइन का काम यहाँ पहले से ही चल रहा था, लेकिन इम्फाल तक रेल सेवा शुरू होने में अभी समय लगेगा। साथ ही वैंगाईचुनपाओ से मणिपुर की राजधानी इम्फाल तक भी रेल लाइन के निर्माण का कार्य जारी है। इसके लिए इम्फाल में एक रेलवे टनल भी बनाया जा रहा है। जल्द ही इसका काम पूरा हो जाएगा।

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन वीरेन सिंह ने भी इसका स्वागत करते हुए इसे ‘ऐतिहासिक क्षण’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि मणिपुर की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभारी है, क्योंकि उनके नेतृत्व में ही ये बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। वैसे इससे पहले जिरीबाम रेलवे स्टेशन तक ट्रेन आती थी, जो अंतिम रेलवे स्टेशन होता था। जिस ट्रैक पर ट्रायल रन हुआ, वो 11 किलोमीटर का है। ये सिल्चर-वैंगाईचुनपाओ ब्रॉड गॉज लाइन पर पहला ट्रायल रन था, जो साफा रहा।

’16 लाख रुपए सैलरी+ग्रेच्युटी दो वरना सूखे का श्राप…’ – गुजरात का रिटायर्ड कर्मचारी खुद को बोल रहा कल्कि अवतार

गुजरात सरकार के पूर्व कर्मचारी रमेशचंद्र फेफर अपने बयानों के कारण एक बार फिर से चर्चा में हैं। वह खुद को भगवान विष्णु के दसवें अवतार ‘कल्कि’ मानते हैं। इस बार फेफर राज्य सरकार को 16 लाख रुपए वेतन और ग्रेच्युटी नहीं देने पर राज्य को सूखे का श्राप देने की धमकी देने के लिए चर्चा में हैं। यह सब वो तब कर रहे हैं जब वह ऑफिस नहीं जा रहे हैं।

News18 गुजराती की रिपोर्ट के मुताबिक, राजकोट के रहने वाले फेफर को ऑफिस नहीं जाने के कारण और उनके दावों के चलते विभाग ने उन्हें प्री मेच्योर रिटायरमेंट दे दिया था। ऐसे में वह ऑफिस तो जा नहीं रहे हैं, लेकिन विभाग से उन्होंने अपनी पूरी सैलरी माँगी है। जल विभाग के पूर्व कर्मचारी ने धमकी दी है कि अगर उन्हें सैलरी और ग्रैच्युटी नहीं दी जाती है तो वे राज्य को सूखे का श्राप दे देंगे।

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 1 जुलाई, 2021 को फेफर ने जल संसाधन विभाग के सचिव को पत्र लिखकर दावा किया था कि ‘सरकार में बैठे राक्षस’ उनका वेतन और ग्रेच्युटी रोक कर उन्हें परेशान कर रहे हैं। ‘उत्पीड़न’ के कारण वह अब गुजरात में सूखा लाएँगे, क्योंकि वह ‘भगवान विष्णु के दसवें अवतार’ हैं। रमेशचन्द्र फेफर ने कथित तौर पर यह भी दावा किया है कि पिछले दो वर्षों में भारत में उनकी दिव्य उपस्थिति के कारण ही अच्छी वर्षा हुई है।

वैश्विक सोच को बदलने की कर चुके हैं बात

जल विभाग के पूर्व कर्मचारी फेफर ने वर्ष 2018 में ऑफिस नहीं जाने के कारणों को लेकर कहा था कि वह कार्यालय इसलिए नहीं जा सकते हैं, क्योंकि वो ‘वैश्विक विवेक को बदलने’ के लिए ‘तपस्या’ कर रहे थे। इसके बाद जल विभाग ने फेफर को एक कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। इसके जवाब में उन्होंने कहा था, “भले ही आप विश्वास न करें, मैं वास्तव में भगवान विष्णु का दसवाँ अवतार हूँ और आने वाले दिनों में मैं इसे साबित करूँगा। मार्च 2010 में जब मैं ऑफिस में था, उसी दौरान मुझे एहसास हुआ कि मैं कल्कि अवतार हूँ। तब से मेरे पास दैवीय शक्तियाँ हैं।” फेफर ने 2018 में केवल 16 दिनों के लिए ऑफिस में काम किया था।

कैराना का इकबाल काना, जो 26 साल से पाकिस्तान में बैठा है: कपड़ा व्यापारियों के जरिए रची दरभंगा ब्लास्ट की साजिश

दरभंगा बम ब्लास्ट की जाँच आगे बढ़ने के साथ ही आतंकियों से पूछताछ में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। ये ब्लास्ट दरभंगा जंक्शन पर जून 17, 2021 को दोपहर 3:25 बजे हुआ था। ब्लास्ट भले ही दरभंगा में हुआ, लेकिन आतंकियों की गिरफ़्तारी तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद और उत्तर प्रदेश के शामली में स्थित कैराना से हुई है। अब तक इसमें सलीम, कफील नासिर, इमरान और इक़बाल काना जैसे आतंकियों के नाम सामने आए हैं।

ये सभी आतंकी शामली के ही निवासी हैं। सलीम, कफील, नासिर और इमरान को पाकिस्तान से फंडिंग मिल रही थी। ये चारों देश के कई इलाकों को दहलाने की साजिश कर रहे थे। लेकिन, इन सबका आका इक़बाल काना अभी भी पाकिस्तान में बैठा हुआ है। ये भी कैराना का ही रहने वाला है, लेकिन अब ये पाकिस्तान में रह कर लशकर-ए-तैय्यबा (LeT) के इशारे पर भारत में आतंकी हमलों की साजिश रचता है।

शुरुआत में वो सोने की तस्करी करता था, लेकिन फिर उसने नकली नोटों का काला धंधा जमाया और फिर हथियारों की तस्करी में पैठ बनाई। 1995 में पुलिस ने जब उस पर शिकंजा कसना शुरू किया तो वो पाकिस्तान भाग खड़ा हुआ। इकबाल काना ने ही सलीम को बम ब्लास्ट की जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन उसे एक ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जो रेलवे के जरिए कपड़ों का व्यापार करता हो। ऐसे ही उसने मलिक भाइयों को खोजा।

शामली के ही नासिर और इमरान मलिक हैदराबाद में रह कर कपड़ों का व्यापार करते थे। सलीम का अब्बा कफील भी इस पूरी साजिश में शामिल था। कफील फ़िलहाल पटना के बेऊर जेल में है। सलीम को इस काम के लिए पौने दो लाख रुपए दिए जा चुके थे। इक़बाल काना ने ही इंटरनेट के जरिए उसे लिक्विड बम बनाने का वीडियो भेजा था और उसे देख कर सलीम ने पूरी प्रक्रिया सीखी। अब NIA इस मामले में और भी गिरफ्तारियाँ कर सकती है।

जहाँ तक इकबाल काना की बात है, वो अभी भी उत्तर प्रदेश के मुस्लिमों का ब्रेनवॉश कर के उन्हें आतंकी गतिविधियों में शामिल करने की साजिश में लगा हुआ है। उसे उसके साथियों द्वारा ‘हाफिज इक़बाल’ या ‘मलिक भाई’ कह कर भी बुलाया जाता है। कैराना के सरावज्ञान के रहने वाले हाजी अकबर के तीन बेटों में वो दूसरे नंबर पर था। उसके अब्बा अकबर चौक बाजार में ठेले पर फल-सब्जी बेचते थे।

उसने सहारनपुर जिले के गाँव खेड़ा अफगान की एक महिला से निकाह भी किया था, लेकिन दो बेटियाँ होने के बावजूद ये रिश्ता ज्यादा दिनों तक नहीं चला। उसने अपनी बीवी को तलाक दे दिया, जिसके बाद उसके अब्बा ने उसे घर से ही निकाल दिया। 90 के दशक में उसकी तस्करी गिरोह के 75 पिस्टल बरामद हुए थे। उसकी अम्मी ने 2014 में सरावज्ञान वाला घर बेच दिया था। परिवार अब कहीं और रहता है। इक़बाल काना फ़िलहाल पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में रहता है।

वहीं नासिर मलिक ने अपने परिवार को बताया हुआ था कि वो भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी RAW की एक महिला अधिकारी के लिए काम करता है। इसी बहाने वो देर रात फोन कॉल्स पर व्यस्त रहता था और देश के दुश्मनों के दाँत खट्टे करने की बात करता था। 2012 में इसी बहाने वो पाकिस्तान से भी हो आया था। वो टाइमर IED बम ब्लास्ट में एक्सपर्ट है। उसकी गिरफ़्तारी के बाद भी परिवार कहता रहा कि वो ‘भारतीय जासूस’ है।

धमाके के लिए रखे नाइट्रिक और सल्फ्यूरिक एसिड में आतंकियों के सोचे समय पर रिएक्शन नहीं हुआ, जिससे एक बड़ी तबाही टल गई। पार्सल में रखे बम में ब्लास्ट तब हुआ, जब ट्रेन दरभंगा स्टेशन पहुँच चुकी थी। आतंकियों की साजिश थी कि 15-16 जून की मध्य रात्रि में विस्फोट किया जाए। इसके लिए जगह के रूप में सिकंदराबाद स्टेशन से 132 KM दूर काजीपेट जंक्शन को चुना गया था। ऐसा होता तो जानमाल की बड़ी क्षति हो सकती थी।

अरशद, दानिश, परवेज ने किया सरेंडर… UP पुलिस (एनकाउंटर) का खौफ, गिड़गिड़ा कर कहा- ‘साहब गिरफ्तार कर लो’

उत्तर प्रदेश की पुलिस का खौफ अपराधियों पर ऐसा छाया हुआ है कि वो खुद थाने में आकर आत्मसमर्पण कर रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं किसी एनकाउंटर में उनका नंबर न लग जाए। ताजा मामला शामली के कैराना का है, जहाँ गैंगस्टर एक्ट में वान्छित तीन आरोपितों ने कैरान पुलिस स्टेशन में आकर सरेंडर किया। उन्होंने पुलिस से गिरफ्तार करने की गुहार लगाते हुए कहा कि वो आगे किसी भी तरह का अपराध नहीं करेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, शामली के रामडा गाँव के रहने वाले अरशद, दानिश उर्फ काला और परवेज के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। खबर के अनुसार इसी साल फरवरी, 2021 में कैराना में विधायक नाहिद हुसैन और उनकी माँ पूर्व सांसद तबस्सुम हसन समेत 40 लोगों के खिलाफ शामली पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज किया था।

कैराना कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक प्रेमवीर सिंह राणा के मुताबिक, तीनों पर बलवा, हत्या की कोशिश समेत कई केस दर्ज हैं। गुरुवार (1 जुलाई 2021) को तीनों आरोपित गिड़गिड़ाते हुए थाने पहुँचे और आत्मसमर्पण कर दिया। इन्होंने दोबारा से भविष्य में क्राइम नहीं करने का वादा भी किया है।

फिलहाल, पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर चालान कर दिया है। पूछताछ में तीनों ने बताया है कि वो कई अपराधों में शामिल रहे हैं। अपराधियों ने कहा है कि वो आगे का जीवन शांति से जीना चाहते हैं।

इस मामले में कैराना के सीओ जितेंद्र कुमार के मुताबिक, जिले में वॉन्टेड अपराधियों के खिलाफ लगातार पुलिस अभियान चलाया जा रहा है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापे मारे जा रहे हैं। इसी दबाव के कारण तीनों आरोपितों ने खुद से आकर आत्मसमर्पण कर दिया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जिले की शांति व्यवस्था को बरकरार रखने के लिए करीब एक सप्ताह पहले ही शामली पुलिस ने टॉप-10 अपराधियों में शामिल नीरज समेत दो गैंगस्टर इश्तिकार और इंतजार को गिरफ्तार किया था।